कास्टिंग काउच का शिकार हुईं थी TV की पार्वती, इस वजह से हैं चर्चा में

टीवी शो एक बाल शिवा और एक रिश्ता साझेदारी की एक्ट्रेस इन दिनों काफी ज्यादा चर्चा में बनी हुंई हैं. हाल ही में शिव्या पठानिया ने हाल ही में एक घटना का खुलासा किया है जिसके बाद से वह चर्चा का विषय बन गया है.

उन्होंने बताया कि ऑडिशन के दौरान डॉयरेक्टर ने उनसे सैक्सुअल फेवर की मांग की थी. उन्होंने बताया कि इस बात के लिए उन्होंने डॉयरेक्टर को जमकर खरी खोटी सुनाई थी. और वह तुरंत वहां से वापस आ गई थी. उन्होंने बताया कि यह घटना तब उनके साथ हुई थी जब उनके कॉरियर का ग्राफ नीचे जा रहा था.

शिवा पठानिया ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह सैंटाक्रूज में इंटरव्यू देने के लिए गई थी. जहां जाकर मुझे पता चला कि जगह बहुत ज्यादा छोटा है. तो वहां एक ही आदमी मिला जो मुझे बोला कि तु्म्हें बहुत बड़े स्टार के साथ पर विज्ञापन करना है. इसके लिए तुम्हें बहुत सारे पैसे मिलेंगे लेकिन तु्म्हें इसके लिए एक समझौता करना होगा.

जब एक्ट्रेस ने उसकी बात सुनी तब वह खरी खोटी सुनाई औऱ वहां से निकलकर आ गई. आगे उन्होंने बताया कि सबसे फनी बात यह थी कि उसके लैपटॉप पर हनुमान चलीसा चल रही थी. जिसे देखकर मुझे लगा कि लोग इतने गंदे भी हो सकते हैं.

अगर वर्कफ्रंट की बात करें तो इन दिनों वह अपने कैरियर पर फोक्स कर रही हैं.

धुंधली तस्वीरें – भाग 3 : क्या बेटे की खुशहाल जिंदगी देखने की उन की लालसा पूरी हुई

विकी को देखने लिंडा की मां और बहन आई थीं, पर घंटे भर से अधिक कोई नहीं रुका. ‘लिंडा अभी बहुत कमजोर है, उसे आराम की जरूरत है,’ कह कर वे चली गईं. वे हैरान थीं यह सब देख कर. सोचने लगीं कि क्या उन्हें भी वहां नहीं रुकना चाहिए. शायद उन की उपस्थिति से लिंडा को परेशानी होती हो पर किसी तरह 2 महीने का समय तो काटना ही था.

लिंडा को उन की जरूरत नहीं, विकी को भी उन की जरूरत नहीं क्योंकि गोद में लेने से उस की आदत बिगड़ जाएगी और विक्रम को तो कभी फुरसत ही नहीं मिलती, उन के पास घड़ीभर बैठने की. घरबाहर के सब काम उसे ही तो संभालने थे. काम करते हुए थक जाता बिलकुल. घर में होता भी तो टीवी चालू कर देता. कब बैठे उन के पास, और बातें भी करे तो क्या?

विकी 2 महीने का था, जब वे उसे छोड़ कर आई थीं. तब से कितना अंतर आ गया था. तसवीरें तो विक्रम हमेशा भेजा करता था, तकरीबन हर महीने. इस बार ढाई महीने के बाद पत्र आया था. तसवीरें भी ढेर सारी थीं, एकएक तसवीर को निहारती वे निहाल हुई जा रही थीं, रहरह कर आंखें छलछला उठतीं. उन की खुशी का अनुमान लगा कर ही सुमि ने मिठाई मांगी थी.

भरापूरा परिवार होते हुए भी वे बिलकुल अकेली थीं. बस चिट्ठियां ही थीं जो बीच में जोड़ने का काम करती थीं. पूरे ढाई महीने बाद विक्रम का पत्र और विकी की तसवीरें देख उन की खुशी रोके नहीं रुक रही थी. सब से पहले जा कर उमा और उस के पति को तसवीरें दिखाईं, ‘‘देखो तो, अपना विकी कितना सुंदर लगता है. बिलकुल विक्रम की तरह है न?’’ फिर पासपड़ोस में सब को दिखाईं,

दूसरे दिन कालेज जाने लगीं तो तसवीरों को अपने पर्स में डाल लिया. सब को दिखाती फिरीं, ‘‘अब तो मुझ से रहा नहीं जाता यहां. इच्छा हो रही है, उड़ कर पहुंच जाऊं अपने विकी के पास. उसे सीने से लगा लूं.’’

‘‘विक्रम तो हमेशा बुलाता है आप को. इस बार गरमी की छुट्टियों में चली जाइए,’’ शैलजा ने कहा तो वे और उत्साहित हो उठीं, ‘‘हां, जरूर जाऊंगी इस बार. छुट्टियां तो अभी बहुत पड़ी हैं. रिटायर होने से पहले क्यों न सब इस्तेमाल कर लूं.’’

‘‘यह भी आप ने ठीक ही सोचा. तो पहले ही चली जाइए, छुट्टियों का इंतजार क्यों करना भला?’’

‘‘वही तो. लिखूंगी विक्रम को, टिकट भेज दे. वीजा तो मेरा है ही, पिछली बार ही 5 साल का मिल गया था.’’

‘‘फिर तो जल्दी निकल जाइए. क्या धरा है यहां, रोज किसी न किसी बात को ले कर खिचखिच लगी ही रहती है. 5-6 महीने चैन से बीत जाएंगे.’’

विक्रम पहले तो उन्हें हर चिट्ठी में आने के लिए लिखता था. कारण जान कर भी वे अनजान बनने की कोशिश करती रही थीं. दरअसल, विक्रम और लिंडा दोनों ही काम पर चले जाते थे. कुछ दिनों तक विकी को शिशुसदन में डाला, फिर ‘बेबीसिटर’ के पास छोड़ने लगे. लिंडा के लिए तो यह कोई नई बात नहीं थी, पर विक्रम हमेशा महसूस करता कि बच्चे को जो आत्मीयता और प्यार मिलना चाहिए मातापिता की ओर से, उस में कमी हो रही है.

इसीलिए वह उन्हें बारबार आने को लिखता था. एक बार लिखा था, ‘अब नौकरी छोड़ ही दो मां, हम दोनों इतना कमाते हैं कि तुम्हारी सब जरूरतें पूरी कर सकते हैं. क्या कमी है तुम्हें? आ जाओ यहां और बाकी के दिन चैन से बिताओ, वहां तो रोज कुछ न कुछ लगा ही रहता है, आज बिजली नहीं तो कल पानी नहीं.’

उन्होंने लिख दिया था, ‘बेटे, हम अभावों में रहने के अभ्यस्त हो चुके हैं. हम ने वे दिन भी देखे हैं जब बिजली नहीं थी, पानी के नल नहीं थे, लेकिन केरोसिन तेल के लैंप और मिट्टी के दीए तो थे, कुएं का पानी तो था. वह सब अब भी है यहां. तुम मेरी चिंता बिलकुल मत करो, मैं मजे में हूं.’

पर अब वे इंतजार कर रही थीं विक्रम के बुलावे का. उस की चिट्ठी आई पूरे 4 महीने बाद, वह भी बिलकुल मामूली सी. सिर्फ कुशलक्षेम पूछा था. कालेज में सहकर्मियों के सामने उन्होंने झूठमूठ का बहाना बनाया, ‘‘यहां सब लोग विकी को देखना चाहते थे न, इसलिए मैं ने विक्रम को ही लिखा है आने के लिए. छुट्टी मिलते ही आ जाएगा. मैं अगले साल जाऊंगी.’’

विक्रम के पत्र अब भी आते, लेकिन बहुत ही देर में, बिलकुल संक्षिप्त से. फिर वे अपनी ओर से लिख न सकीं, ‘मैं आना चाहती हूं विक्रम, विकी को और तुम लोगों को देखने की बड़ी इच्छा है.’

पत्रों की भाषा बताती थी कि विक्रम उन से दिनबदिन दूर होता जा रहा है. वह इस के लिए मन ही मन खुद को ही दोषी ठहराया करतीं कि वह तो बराबर बुलाता था पहले, मैं ही तो इनकार करती रही. जब विकी छोटा था, उसे दादीमां की गोद की जरूरत थी. अब तो बड़ा हो गया है, कुछ दिनों में स्कूल जाने लगेगा. शायद, इसी कारण विक्रम नाराज हो गया हो. नाराज होना भी चाहिए. इतना बुलाया लेकिन वे बारबार इनकार करती गईं. शायद अच्छा नहीं किया. अब यही लिखूं कि एक बार यहां आओ विक्रम, लिंडा और विकी के साथ, सब लोग तुम सब से मिलना चाहते हैं.

इस बीच विक्रम का संक्षिप्त पत्र आया, ‘मैं ने अब तक तुम्हें लिखा नहीं था मां, विकी से अब हमारा कोई संबंध नहीं. विकी जब कुल 15 महीने का था, तभी लिंडा से मेरा तलाक हो गया. विकी चूंकि बहुत छोटा था, इसलिए कोर्ट के फैसले के अनुसार वह लिंडा के पास रह गया. तब से मैं ने उसे देखा भी नहीं. वह तो मुझे पहचान भी नहीं पाएगा.’

पत्र पढ़ कर वे सन्न रह गईं. यह क्या लिखा है विक्रम ने. लिंडा को तलाक दे दिया. अब तक विक्रम के सारे कुसूर वे माफ करती रही थीं, अमेरिका में रहने का फैसला किया, तब भी कुछ नहीं कहा. लिंडा से शादी की, तब भी कुछ नहीं कहा, लेकिन तलाक वाली बात ने उन्हें अंदर से तोड़ ही दिया.

दूसरे ही दिन उसे पत्र लिखा, ‘‘मुझे तुम से ऐसी उम्मीद नहीं थी, विक्रम. जरूर मेरी शिक्षादीक्षा में ही कोई कमी रह गई, जो तुम ऐसे निकले. हमारे यहां रिश्ते जोड़े जाते हैं, उन्हें तोड़ने में हम विश्वास नहीं रखते. तुम्हारी इस गलती को मैं कभी क्षमा नहीं कर सकूंगी, कभी भी नहीं. तुम ने मेरी, अपनी और साथसाथ अपने देश की तौहीन की है. ऐसे संस्कार तुम्हें मिले कहां?’’

पत्र को लिफाफे में डाल कर पता लिखते हुए वे फूटफूट कर रो पड़ीं. लग रहा था कि अंदर कोई महीन सा धागा था, जो टूट गया है, छिन्नभिन्न हो गया है. सामने दीवार पर विक्रम, लिंडा और विकी की तसवीरें लगी थीं, मुसकराती लिंडा, हंसता विक्रम और नन्हा सा गोलमटोल विकी. आंसुओं के कारण सारी तसवीरें धुंधली लग रही थीं. उन्होंने आंसू पोंछे नहीं, बस रोती रहीं देर तक.

 

सफर कुछ थम सा गया

मनोहर कहानियां : ट्यूशन के बहाने प्यार की पाठशाला

अलवर जिले में निमराणा की एक खास पहचान है. उस के अंतरगत कस्बाई इलाका ततारपुर में 16
मार्च, 2022 को थानाप्रभारी विजय चंदेल बोरी में लाश की सूचना पा कर चौंक गए थे. वह सोचने लगे आखिर कौन है, जिस ने इलाके की शांति भंग करने की कोशिश की. सूचना देने वाला कोई अज्ञात राहगीर था, जिस ने फोन पर शास्त्री कालोनी में पुलिया के नीचे एक प्लास्टिक की बोरी में लाश होने की जानकारी दी थी. उस से बदबू आने की भी बात कही थी.

सूचना पाते ही थानाप्रभारी चंदेल तुरंत अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. तब तक वहां लोगों की भीड़ जुट गई थी. सभी नाकमुंह बंद किए हुए सड़क पर से ही पुलिया के नीचे प्लास्टिक की बोरी को देख रहे थे. उन की नजरें बोरी पर टिकी थीं. 2 पुलिसकर्मी बोरे के पास गए. उस में से आ रही बदबू से लाश के 2-3 दिन पुरानी होने का अंदाजा लगाया. सावधानी से बोरी के बंधे मुंह को खोला.
बोरी में लाश ठूंस कर कसी गई थी. ऊपर मुड़े हुए पैर थे, जिसे देख कर किसी महिला की लाश होने की पहचान हुई. लाश को बोरी से बाहर निकाला गया, जो एक सुंदर युवती की थी. चंदेल ने लाश का मुआयना किया.

अंदाज से उस की उम्र 30 के करीब आंकी गई. पहनावे, बालों व चेहरे के बनाव शृंगार से वह शहरी और किसी साधनसंपन्न घराने की लग रही थी. उसे बोरी में भर कर फेंकने का मतलब साफ था कि उस की किसी ने हत्या कर ठिकाने लगाने की कोशिश की थी. पुलिस ने लाश की पहचान आसपास खड़े लोगों के जरिए कराने की कोशिश की, किंतु अधिकतर ने बताया कि वह ततारपुर इलाके की नहीं है.

उस की शिनाख्त नहीं होने पर थानाप्रभारी ने अधिकारियों के निर्देश पर लाश का पंचनामा बनाया और लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. चंदेल ने थाने लौट कर एक अज्ञात युवती की लाश बरामदगी की प्राथमिकी दर्ज कर ली. जल्द ही लाश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई. रिपोर्ट में युवती की गला घोट कर मौत होने की बात कही गई थी. उस के बाद पुलिस के सामने 2 उलझनें थीं. पहली, लाश की जल्द से जल्द सही पहचान हो जाए. दूसरी, उस के हत्यारे को दबोच लिया जाए. इस के लिए ततारपुर थानाप्रभारी ने कुछ तरीके अपनाए. मुखबिरों को अलर्ट करने के साथसाथ शास्त्री कालोनी और घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे के बीते हफ्ते भर की फुटेज निकलवाई.

मुखबिरों से मालूम हुआ कि ततारपुर के कुछ लोगों ने घटनास्थल पर 14 मार्च की शाम करीब 7 बजे एक सफेद कार देखी थी. इस का सुराग लगते ही भिवाड़ी एसपी शांतनु कुमार सिंह के निर्देश पर थानाप्रभारी विजय चंदेल की अगुवाई में एक पुलिस टीम बनाई गई. टीम में एएसआई सुरेंद्र कुमार, कांस्टेबल अमर सिंह, महिला कांस्टेबल बलकेश, कांस्टेबल अनिल कुमार आदि शामिल किए गए.
पुलिस टीम ने सीसीटीवी कैमरे से निकाले गए फुटेज की जांच की. उन्हें सफेद कार दिखी, जिस का नंबर डीएल10 सीएन 9908 था. यह संदिग्ध कार 14 मार्च, 2022 को बहरोड़ से ततारपुर के घटनास्थल पर आ कर रुकी थी और कुछ देर बाद उसी रास्ते से वापस लौटती दिखाई दी थी.

दिल्ली के रजिस्ट्रैशन वाली यह कार पुलिस की निगाह में चढ़ गई. उस की डिटेल से कार मालिक का नाम और पता मालूम हो गया. कार का मालिक कपिल गुप्ता (39 वर्ष) आनंद विहार में कड़कड़डूमा में दयानंद विहार का रहने वाला था. पुलिस को उस तक पहुंचने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. दिल्ली पहुंच कर राजस्थान पुलिस ने कपिल को दबोच लिया. हालांकि पकड़े जाने पर कपिल अड़ गया. नाराजगी दिखाते हुए बोल पड़ा, ‘‘ऐसे क्यों पकड़ा है मुझे? मैं एक इज्जतदार बिजनैसमैन हूं, कोई ऐरागैरा नहीं जो…’’

‘‘तुम्हें अभी बताता हूं कि तू कौन है. और सुन, ज्यादा तावतेवर दिखाने की जरूरत नहीं है. यह फोटो देख और बता इस बोरी को पहचानता है? अच्छा छोड़, इसे देख कर बता, इस कार को तो पहचानता ही होगा?’’ जांच करने वाले पुलिस अधिकारी ने एक झापड़ मारते हुए कहा. ‘‘कार तो मेरी है, लेकिन बोरी को नहीं पहचानता हूं.’’ कपिल हकलाता हुआ बोला.

‘‘तू अभी सब कुछ पहचान लेगा. पहले ये बता तुम्हारी कार 14 मार्च को दिल्ली से निमराणा में ततारपुर क्यों गई थी?’’ पुलिस ने कड़कती आवाज में पूछा.‘‘मैं तो एक महीने से दिल्ली के दूसरे इलाके में भी नहीं गया और आप राजस्थान की बात कर रहे हैं.’’ कपिल ने सफाई दी. लेकिन तुरंत उस के गाल पर एक और झन्नाटेदार झापड़ लगा.

‘‘इस वीडियो में देखो, गाड़ी कौन चला रहा है? और तुम्हारी बगल में बैठी औरत कौन है?’’
‘‘जी…जी…यह तो मैं ही हूं, बगल में मेरी पत्नी है. लेकिन यह वीडियो दिल्ली की है,’’ कपिल बोला.
‘‘दिल्ली की है? लगता है तुम पुलिस का डंडा खाए बगैर सच नहीं बताओगे… वीडियो में समय और तारीख क्या दिख रहा है 14 मार्च 2022. समय है 18:52 यानी शाम के 6 बज कर 52 मिनट. अब यहीं पूरी बात बताएगा या दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में ले चलूं. मैं ने वहां की परमिशन ले रखी है.’’
‘‘बताता हूं, यहीं बताता हूं. सब सच बताऊंगा. मैं ने वह सब तंग आ कर किया. बहुत परेशान हो गया था साहब. मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था. मैं अपनी ही गलतियों के कारण ब्लैकमेल हो रहा था.’’ बोलतेबोलते कपिल भावुक हो गया.

उस की आवाज भर्रा गई. आंखों से आंसू निकल आए. यह देख कर पुलिस ने उसे अपना रूमाल निकाल कर दे दिया. एक गिलास पानी मंगवाया.कपिल गटागट आधा गिलास पानी एक सांस में ही पी गया. नम आंखें साफ कीं. फिर उस ने जो कुछ बताया, वह काफी चौंकाने वाली जानकारी थी.सब से पहले तो उस ने स्वीकार कर लिया कि वह 14 मार्च को अपनी गाड़ी से ततारपुर के इलाके में गया था. उस के साथ पत्नी सुनैना के अलावा 2 नौकर भी थे. वहां जाने का कारण थी प्रियंका बंसल खत्री.

वह उस के बच्चों को पिछले 9 सालों से ट्यूशन पढ़ा रही थी, लेकिन बीते 2 सालों से उसे ब्लैकमेल भी कर रही थी. पैसे ऐंठ रही थी. 6-7 महीने से तो 50 लाख रुपए मांग रही थी. नहीं देने पर मुझे बलात्कार के जुर्म में जेल भेजने की धमकी दे रही थी. पुलिस बड़े ध्यान से कपिल की बातें सुन रही थी. उस के बयान की रिकौर्डिंग भी की जा रही थी. पुलिस ने बीच में ही कपिल को टोका, ‘‘तुम ने प्रियंका के खिलाफ पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की?’’

‘‘उस की क्या शिकायत करता साहब, किस मुंह से करता. मैं ही उस के रूपजाल और जवानी में फंसा हुआ था. उस के साथ मेरा सालों से अवैध रिश्ता बना था.‘‘वह चाहती थी कि मैं अपनी पत्नी को छोड़ कर उस से शादी कर लूं. जब मैं ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है, तब उस ने पत्नी की हत्या करवाने की भी बात की. वह मुझे बारबार जेल भेजने की धमकी देती थी. सो एक दिन मैं ने ही उसे खत्म करवा दिया.’’
‘‘खत्म करवा दिया मतलब?’’
‘‘मैं ने अपनी पत्नी से कह कर नौकरों के द्वारा उस की हत्या करवा दी. उस के बाद लाश को ठिकाने लगाने के लिए ततारपुर गया था. वहीं हम ने बोरी में रखी प्रियंका की लाश को सुनसान इलाके में फेंक दिया. उसी रात 11 बजे वापस दिल्ली भी आ गए.’’ कपिल ने बात पूरी की.
‘‘प्रियंका की हत्या किस ने की? उसे कैसे मारा?’’ पुलिस ने पूछा.

‘‘वह भी बताऊंगा साहब, सब कुछ बताऊंगा. मैं ने उसे नहीं मारा और न ही उस की लाश तक को हाथ लगाया. पहले थोड़ा पानी पी लेता हूं.’’ कपिल शांति से बोला. ‘ठीक है, ठीक है. …और पानी मंगवाऊं क्या? कहो तो चाय या कौफी मंगवाता हूं.’’‘‘नहीं, नहीं. करीब 29 साल की छरहरी देह वाली प्रियंका को हमारे 2 नौकरों, राजकिशोर यादव और सचिन देवल ने झांसे में लेने के बाद गला दबा कर मार दिया था.’’

‘‘प्रियंका के बारे में भी बताओ. वह कौन थी? कैसे तुम्हारी जिंदगी में आई, उस के परिवार वाले मातापिता, भाईबहन पति या कोई और प्रेमी आदि…’’ पुलिस ने कहा.‘प्रियंका पास के ही चांद मोहल्ला गांधी नगर में अपने परिवार के साथ रहती थी. मेरी जानपहचान तब से है, जब वह मात्र 20 साल की थी. उन दिनों मेरी उम्र भी 30 साल थी. मेरी शादी हो चुकी थी और 2 बच्चे स्कूल जाने लगे थे. उन की घर पर ट्यूशन के लिए मैं ने प्रियंका को लगा दिया था…’’

इस पूछताछ के बाद उसी वक्त पुलिस की एक टीम प्रियंका के घर पर भी गई. घर पर प्रियंका की मां मिलीं. उन से प्रियंका के बारे में पूछा. इस पर उस की मां ने बताया कि वह 14 मार्च को बैंक से पैसे लाने को कह कर निकली थी, उस के बाद से वापस नहीं लौटी है.पुलिस ने प्रियंका के मांबाप से 3 दिनों तक जवान बेटी के घर नहीं लौटने पर भी उस की किसी तरह की खोजखबर नहीं लेने का कारण पूछा. इस पर उन्होंने बेरुखी से जवाब दिया, ‘‘साहब, वह अपने मनमरजी की मालिक थी. बेफिक्र रहती थी. पहले भी 3-4 दिनों तक बगैर बताए चली जाती थी. लौटने पर बताती थी कि जिस बिजनैसमैन के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है, उस के काम के सिलसिले में टूर पर अचानक जाना पड़ता है. अपने जरूरी सामान का एक बैग वहीं पैक रखती थी.’’

‘‘अभी तुम्हारी बेटी किस हाल में है नहीं देखना चाहोगी?’’ पुलिस ने कहा.‘‘किस हाल में है का क्या मतलब साहब! क्या हुआ उसे?’’ प्रियंका की मां बोली.‘‘यह जानने के लिए तुम्हें मेरे साथ निमराणा चलना होगा. वहीं सब कुछ मालूम पड़ जाएगा.’’इस तरह राजस्थान पुलिस को लावारिस लाश के बारे में करीबकरीब तमाम आवश्यक जानकारियां मिल चुकी थीं. हत्यारे के बारे में भी मालूम हो गया था. वे हिरासत में भी ले लिए गए थे.

लाश की पहचान होते ही मामले की सिलसिलेवार रिपोर्ट तैयार करनी रह गई थी. अगले रोज सभी के साथ जांच टीम ततारपुर थाने में थी.सब से पहले लाश की पहचान करवाई गई, जिस की शिनाख्त उस के मांबाप ने प्रियंका के रूप कर ली. अपनी बेटी को अचानक मृत पा कर वे वहीं रोनेपीटने लगे. खुद को कोसने लगे और अपने भविष्य को ले कर मातम मनाने लगे. कारण वही घर का खर्च उठाए हुए थी.
अलवर के ततारपुर थाने में कपिल गुप्ता, सुनैना गुप्ता, राजकिशोर यादव और सचिन देवल को प्रियंका की हत्या का आरोपी बना कर मुकदमा दर्ज कर लिया गया. प्रियंका की लाश उस के मातापिता को सौंप दी गई, जिस का ततारपुर में ही अंतिम संस्कार करवा दिया गया.

प्रियंका हत्याकांड का विस्तार से खुलासा करने के लिए सभी आरोपियों से बारीबारी पूछताछ की गई. मुख्य आरोपी के रूप में कपिल गुप्ता के दोनों नौकरों का नाम सामने आया, जबकि कपिल और सुनैना का नाम हत्या की योजना बनाने और लाश को ठिकाने लगाने में आया.हालांकि इस पूरे हत्याकांड का इकलौता जिम्मेदार कपिल गुप्ता ही था, जिस की प्रेम कहानी और अवैध संबंध का अंजाम था. उस के बाद हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार स्थित दयानंद विहार, कड़कड़डूमा में रेडीमेड गारमेंट्स के व्यापारी कपिल गुप्ता परिवार समेत रहते थे. परिवार में पत्नी सुनैना और 2 बच्चों का खुशहाल परिवार था. उन का अच्छाखासा करोड़ों के टर्नओवर का बिजनैस था.बात साल 2014 की है. कपिल ने अपने बच्चों का अच्छे पब्लिक स्कूल में नाम लिखवा दिया था. उन के होमवर्क आदि के लिए प्रियंका को ट्यूशन पर रख लिया था. वह कुछ समय के लिए घर आ कर हर रोज बच्चों को पढ़ा दिया करती थी.
दरअसल, मध्यमवर्गीय परिवार की प्रियंका बंसल भी उन दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रैजुएशन कर टीचर की नौकरी की तलाश में थी. टीचर ट्रेनिंग का कोर्स भी करना चाहती थी.

वैसे प्रियंका बहुत ही सुंदर थी. मौडल की तरह फिगर था. सिनेमा और सीरियल जैसी हीरोइन जैसा चेहरा मासूमियत से दमकता रहता था. बगैर मेकअप के भी वह गजब की खूबसूरत दिखती थी. फिर भी बनठन कर रहती थी. उस की सुंदरता ऐसी थी कि जो कोई उसे एक नजर में देख लेता, बारबार निहारे बगैर नहीं रहता था.महत्त्वाकांक्षी भी कम नहीं थी प्रियंका. अपनी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करती थी. स्वभाव से जिद्दी. वह चाहती थी कि हमेशा सुंदर दिखती रहे. इस के लिए अपने खानपान से ले कर सेहतमंद बने रहने के लिए दूसरे तरीके भी अपनाती थी.

यहां तक कि हर्बल टैबलेट्स और स्किन ग्लो करने के लिए दवाइयां तक खाती थी. अपनी आमदनी की अच्छी रकम अपने शरीर की देखभाल और नए ड्रैस पर किया करती थी. मौजमस्ती की जिंदगी की लालसा थी.कपिल के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के दरम्यान उस की मुलाकात कपिल और सुनैना से होती रहती थी. अपने मिलनसार स्वभाव के कारण जल्द ही वह सभी की प्रिय बन गई. उस की पढ़ाई से बच्चे भी संतुष्ट रहते थे. उन का रिजल्ट अच्छा आने लगा था. इसे देखते हुए कपिल उस की तारीफ करने लगा था.

2 सालों में प्रियंका एक घर की सदस्य की तरह बन गई थी. बेरोकटोक घर में आनेजाने लगी थी. इसी बीच प्रियंका ने महसूस किया कि कपिल उस से अकेले में मिलने और बातें करने के बहाने ढूंढने लगा है. कई बार उस के ड्रैस की तारीफ भी कर चुका था. बाल बनाने के स्टाइल के बारे में पूछते हुए कहा था कि सुनैना को भी वह स्टाइल सिखा दे.संयोग से एक बार कपिल को उसे गाड़ी में ले जाने का मौका मिल गया था. दरअसल, मौका मिला नहीं था, बल्कि उस ने जनबूझ कर ऐसा किया था, ताकि उस से अकेले में बातें कर सके.

उस दिन कपिल ने अपने प्रेम का इजहार प्रियंका को एक गिफ्ट दे कर किया. गुदगुदी तो प्रियंका के दिल में भी काफी समय से हो रही थी. उस ने भी थैंक्स कहने के बजाय सीधे गले गई थी. कपिल के लिए यह अनोखा अनुभव था. वह हतप्रभ हो गया था. खुश था, बोल पड़ा, ‘‘बड़ी अच्छी परफ्यूम लगाई है, कौन सी है?’’‘‘आप भी तो हमेशा अच्छी परफ्यूम लगाते हो. भीनीभीनी हो कर भी प्यारी लगती है.’’ प्रियंका हंसती हुई बोली.

इस के जवाब में कपिल सिर्फ मुसकरा कर रह गए. प्रियंका भी ‘बाय’ बोलती हुई जाने लगी.
कपिल उसे जाते हुए तब तक देखता रहा, जब तक वह सड़क पार नहीं कर गई. कपिल को उस का लचकती कमर मटकाते हुए चलने का अंदाज अच्छा लग रहा था. उस ने प्रियंका को जींस में पीछे से सैक्स अपील का अनुभव किया था.अगले ही रोज कपिल ने प्रियंका को एक जींस गिफ्ट करते हुए कहा, ‘‘यह मेरी फैक्ट्री का नया आइटम है.’’

प्रियंका अचकचाती हुई बोली, ‘‘कल ही तो आप ने महंगा सलवारसूट का गिफ्ट दिया था. तो आज फिर क्यों?’’‘‘यूं ही रख लो, मुझे तुम कल जींसटौप में बहुत ही हौट लगी थी, इसीलिए मैं ने सोचा…’’ कपिल की बात पूरी होने से पहले ही प्रियंका चहकती हुई बोल पड़ी, ‘‘हांहां, मेरी फ्रैंड्स भी कहती हैं कि मैं जींस में हौट और सैक्सी दिखती हूं.’’‘दिखती क्या हो, तुम तो हो ही ऐसी. किसी हीरोइन से कम दिखती हो क्या. तुम्हारा फिगर अच्छेअच्छों को भी नसीब नहीं होता है. तुम खुशनसीब हो.’’
प्रियंका अपनी तारीफ सुन कर शरमाने लगी, लेकिन कपिल के इस बदले रूप को उस ने पहली बार देखा था. थैंक्स बोली. कपिल ने भी जवाब में कहा कि उसे जब भी कुछ जरूरी हो बेझिझक उस से कह सकती है.

इस तरह दोनों के बीच दिलों की दूरियां कम होती चली गईं. दोनों कभी एकदूसरे की तारीफ करते तो कभी साथ समय गुजारने का मौका निकाल लेते.कुछ समय में ही प्रियंका ने महसूस किया कि कपिल की नजर उस पर अपनी पत्नी सुनैना से अधिक रहती है. इस का फायदा उठाते हुए वह जबतब पैसे की मदद भी लेने लगी थी. प्रियंका के लिए कपिल एक मालदार व्यक्ति था, जिस के दिल में उस ने जगह बना ली थी.दूसरी तरफ कपिल के लिए प्रियंका पैसे खर्च कर दिल बहलाने वाली खूबसूरत लड़की थी. वह उस की देह पर भी नजर गड़ाए हुए था.

एक दिन उसे मौका मिल गया. प्रियंका कपिल की आंखों में इस चाहत को अच्छी तरह से भांप चुकी थी. मन ही मन में उस की पत्नी बनने का सपना देखने लगी थी. आग दोनों तरफ से लग चुकी थी और फिर उन्होंने शारीरिक संबंध भी कायम कर लिए.यहीं से दोनों की जिंदगी में बदलाव आने की शुरुआत हो गई. प्रियंका कपिल से और अधिक खुल गई. कपिल उसे घुमाने के लिए दिल्ली से बाहर हिल स्टेशनों पर ले जाने लगा. दोनों खुल कर मौजमस्ती करने लगे. उन के अवैध संबंध की भनक कई सालों तक किसी को नहीं लगी.

इस बीच प्रियंका के मातापिता ने उस की शादी के कई रिश्ते देखे, लेकिन प्रियंका कोई न कोई बहाना बना कर टाल देती थी. उस की उम्र बढ़ती जा रही थी, लेकिन उस ने तो कपिल की बीवी बनने की ठान ली थी.2 साल पहले कोरोना काल का दौर आ गया. उन दिनों कपिल का बिजनैस बंद हो गया. कपिल और प्रियंका के प्रेम संबंध पर भी इस का असर हुआ. हिल स्टेशनों पर घूमने जाना तो दूर, राजधानी में ही उन के मिलनजुलने की समस्या आ गई.

बीते साल महामारी के बाद स्थिति सामान्य होने पर प्रियंका ने एक बार फिर कपिल के करीब आने की कोशिश की. प्रियंका ने कपिल से सीधे लहजे में बात की और शादी करने के लिए दबाव बनाया.
कपिल बोला कि पहली पत्नी के रहते हुए वह ऐसा कैसे कर सकता है. ऊपर से वह उस के बच्चों को राखी बांधती है, लोगबाग क्या कहेंगे? इसे ले कर एक बार घर में ही तीखी बहस हो गई. संयोग से बच्चे घर पर नहीं थे, लेकिन सुनैना दूसरे कमरे में थी.

हाल में उन के बीच बहस हो रही थी.भागीभागी हाल में आ कर सुनैना ने उन से पूछा कि क्या बात है प्रियंका इतनी नाराज क्यों है? सुनैना के आते ही प्रियंका आंखें दिखाती हुई बोली, ‘‘देख लेना, मैं ने जो कहा है उसे हलके में मत लेना. मैं कमजोर नहीं पड़ने वाली हूं.’’ उस के बाद प्रियंका तेजी से मेन गेट से बाहर चली गई.कपिल समझ गया था कि उस के छिपे अनैतिक कर्मों की पोल खुलने वाली है. प्रियंका के साथ उस के संबंध लोगों को मालूम होने वाला है. वह और शोर मचाए और घरपरिवार में लोगों को इस की जानकारी हो जाए, इस से पहले कुछ करना होगा. लेकिन क्या करे, समझ नहीं पा रहा था. अपना सिर पकड़ कर वहीं सोफे पर बैठ गया.

वहीं खड़ी सुनैना ने अपने पति को इस तरह से असहाय पहले कभी नहीं देखा था. उसे परेशान देख कर चिंता जताते हुए पूछा, ‘‘क्या बात हो गई? प्रियंका इतने गुस्से में क्यों थी?’’‘‘बात तो बड़ी है, मुझे ही उस का समाधान निकालना पड़ेगा,’’ कपिल बोला.‘‘सामाधान निकालना पड़ेगा? क्या समस्या है? मुझे बताओ, शायद मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूं,’’ सुनैना बोली.

‘‘तुम उस में कुछ नहीं कर पाओगी, वह मुझे ब्लैकमेल कर रही है.’’ कपिल निराशा से बोला.
‘‘ब्लैकमेल! किस बात के लिए?’’ सुनैना चौंक गई.
‘‘अरे हां भई, हां. पिछले कई महीने से 50 लाख रुपए की डिमांड कर रही है. अगर नहीं दिया तो मुझे तिहाड़ जेल भिजवा देगी.’’ कपिल के मुंह से अचानक यह बात निकल गई.
‘‘तिहाड़ जेल क्यों? तुम ने क्या किया है?’’ सुनैना बोली.

यह सुनते ही कपिल फफक पड़ा, उस की आंखों से आंसू निकल आए. सुनैना ने उसे पकड़ कर उठाया. दुपट्टे से आंसू पोछे. बोली, ‘‘पूरी बात साफसाफ बताओ, मैं देखती हूं कि उस पिद्दी सी प्रियंका की इतनी औकात जो तुम्हें कुछ कहे. आने दो उसे, मैं सबक सिखाती हूं.’’
सुनैना की बातों से कपिल को बल मिला. सामान्य हो कर उस ने पूरी बात विस्तार से बता दी. अपने संबंधों को ले कर उस से माफी मांगी. सुनैना बोली, ‘‘तुम सुबह के भूले की तरह लौट आए, यही मेरे लिए बहुत है. अब तुम देखते जाओ मैं तुम्हारे लिए क्या करती हूं.’’

पत्नी की बदौलत कपिल में भी हिम्मत आ गई. उस के मन पर से एक बड़ा बोझ उतर चुका था. सुनैना की बातों से महसूस हुआ कि आगे भी सब कुछ सामान्य होने वाला है. उस रोज वह अपने काम में लग गए. उस के ठीक एक सप्ताह बाद सुनैना ने 14 मार्च को सुबहसुबह प्रियंका को फोन कर बुलाया. उसे बताया कि उस के लिए कपिल ने कुछ पैसे रखे हैं, आ कर ले जाए.

प्रियंका यह सुन कर भागीभागी आई. आ कर सुनैना के गले लग गई. बीते दिनों कपिल से गुस्से में बात करने के लिए माफी मांगी. सुनैना ने कहा, ‘‘कोई बात नहीं है. कपिल बोल रहे थे कि तुम्हें मकान खरीदने के लिए कुछ पैसों की जरूरत है. उस का उन्होंने इंतजाम कर दिया है. कुछ कैश इस पैकेट में है और कुछ बैंक से निकालने होंगे. तुम हमारे दोनों स्टाफ राजकिशोर और सचिन के साथ चली जाओ. वहीं कपिल मिल जाएंगे.’’
इस की जानकारी प्रियंका ने फोन से अपनी मां को दे दी और कपिल के दोनों स्टाफ के साथ गाड़ी में बैठ कर चली गई. जैसा कि सुनैना ने बताया था कपिल बैंक में ही मिल गया. प्रियंका पैसा निकाल कर कपिल के साथ गाड़ी में आगे बैठ गई.

कपिल उस के साथ इधरउधर की बातें करने लगा. उस की शादी तय होने की बातें करते हुए गाड़ी सुनसान लंबे हाईवे पर ले आया.
‘‘अरे यह क्या मुझे तो पहले ही मुड़ना था, अब कट यहां से ढाई किलोमीटर दूर आएगा.’’ प्रियंका हंसती हुई बोली, ‘‘कोई बात नहीं, कभीकभी ऐसी मिस्टेक हो जाती है. वैसे भी तुम बातें करने में लगे हुए थे. तुम्हारा ध्यान मुझ पर अधिक था.’’

तभी पीछे बैठे राजकिशोर और सचिन ने प्रियंका के गले में रस्सी डाल कर खींच ली. प्रियंका इस अचानक हुए हमले के लिए तैयार नहीं थी. कुछ समय में ही उस की गला घुटने से मौत हो गई.
कपिल ने गाड़ी किनारे रोक दी. राजकिशोर और सचिन तुरंत आगे आए और प्रियंका को बोरी में बंद कर दिया. बोरी को पीछे डिक्की में डाल कर वीडियो काल कर दिया, ‘‘मैडम, आप प्लाईओवर खत्म होने के बाद मौल के सामने मिल जाइए, काम हो गया है. यह देखिए हम लोग अभी इस जगह से चलने वाले हैं.’’

कपिल फिर अपनी ड्राइविंग सीट पर आ गया. थोड़ी देर में ही सुनैना मौल के सामने खड़ी मिल गई. वह कपिल के साथ वाली सीट पर बैठ गई. पीछे मुड़ कर दोनों स्टाफ को थैंक्स बोला और अपने पर्स से एकएक पैकेट निकाल कर दोनों को दे दिया. उस में पैसे थे. बाकी का काम पूरा होने पर और पैसे देने का आश्वासन दिया.

अब कपिल की गाड़ी राजस्थान के अलवर जाने वाले रास्ते पर थी. वे शाम के 7 बजे के करबी ततारपुर इलाके में पहुंच गए थे. वहीं मौका पा कर उन के स्टाफ ने बोरी में रखी प्रियंका की लाश को एक पुलिया के नीचे गिरा दी और रात के 11 बजे तक सभी वापस दिल्ली आ गए.

पूरी कहानी सुनने के बाद ततारपुर थानाप्रभारी ने चारों अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अगले रोज मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर दिया. वहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

अक्षरा के इस बात से नाराज होगा अभिमन्यु, महिमा उठाएदी फायदा

स्टार प्लस का दमदार सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है में इन दिनों ट्विस्ट आने वाला है. यह सीरियल कई हफ्ते से टॉप पर बना हुआ है. बीते दिनों दिखाया गया कि कायरव को अक्षरा और अभिन्यु के बारे में कुछ पता चला है.

जिससे वह गुस्सा हो जाता है और अभिमन्यु से लड़ाई करके उसका कौलर पकड़ लेता है. वह अपनी बहन को ले जाने लगता है. इसी बीच अक्षरा चिल्लाते हुए कहती है कि वह अपने फैसले खुद ले सकती है. लेकिन इस सीरियल में आने वाले ट्विस्ट अभी खत्म नहीं होते हैं.

 

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इसके बाद अक्षरा अपने फैसले को लेकर मीमी के पास जाती है और उसे कुछ समझ नहीं आता है. तभी मीमी उससे कहती है कि तुम्हारी कहने के लिए लव मैरिज है लेकिन यह बिल्कुल अरेंज मैरेज की तरह ही हैं.क्योंकि आप दोनों एक -दूसरे से मिले प्यार हुआ फिर शादी हो गई.

इस बात को सोचकर अक्षरा घबरा जाती है. बिरला हॉस्पिटल में दूबारा म्यूजियम डिपार्टमेंट खोलने के लि कहा जाता है. जिसका ऑफर लेकर महिमा जाती है. जिसे देखकर अक्षरा परेशान हो जाती है. इस बात की जानकारी जैसे ही अभिममन्यु को लगती है उसका खून खौल जाता है. अक्षरा और महिमा को लेकर सीधे आनंद के पास जाता है और वह खरी खटी सुना देता है.

वह कहता है कि आपके पास अक्षु के टेलेंट की कद्र नहीं है जहां चाहा वहां भेज दिया. जिसपर अक्षरा जवाब देकर कहती है कि मुझे ऑफर पसंद आया.

 

भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह के साथ अमिर खान ने किया इस गाने पर डांस

अभिनेता आिर खा काफी समय से अपनी फिल्म लाल सिंह चड्डा की  प्रमोशन में व्यस्त हैं. हाल ही में फिल्म का नया गाना ऐसी रात  आएगी को मेकर्स ने रिलीज किया है. जिसे खूब पसंद किया जा रहा है. ऐसे में इस गाने पर भोजपूरी इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह के साथ डांस करती हुई नजर आई.

आमिर खान और अक्षरा सिंह के वीडियो को खूब पसंद किया जा रहा है.वीडियो में आमिर खान और अक्षरा सिंह को मेकअप रूम में देखा जा सकता है. वीडियो में अक्षरा सिंह को ब्लैक कलर के ऑड ड्रेस में नजर आ रही हैं जिसे खूब पसंद किया जा रहा है तो वहीं आमिर खान कैजुअल लुक में नजर आ रहे हैं.

 

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वीडियो को शेयर करते हुए अक्षरा सिंह ने लिखा है कि इस दिन का इंतजार ऐसे खत्म होगा सोचा न था. ऐसे में समय बीताने के लिए धन्यवाद आमिर सर. मेरा यह सपना सच होगा सोचा न था.

देखते ही देखते इस वीडियो पर जमकर लाइक और कमेंट्स आ रहे हैं. फैंस इस वीडियो पर खूब प्यार दिखा रहे हैं. इसके बाद से अक्षरा सिंह ने आमिर खान के साथ एक वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्होंने लिखा है कि ऐसे टेलैंटेड दिमाग से मिलकर दिल खुश हो गया.

 

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सबसे पसंदीदा दिमाग के साथ मिलकर अच्छा लगा. आमिर खान कि फिल्म लाल सिंह चड्डा करीना कपूर खान नजर आने वाली हैं. जो 11 अगस्त में रिलीज होगी.

सोनू ने खोली नीतीश सरकार की पोल

छठी जमात में पढ़ने वाले महज 11 साल के एक लड़के सोनू कुमार ने बिहार राज्य में पढ़ाईलिखाई के इंतजाम और शराबबंदी की असलियत की पोल खोल दी है. हुआ यों कि कुछ समय पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पुश्तैनी गांव कल्याण बिगहा में अपनी पत्नी मंजू देवी की पुण्यतिथि पर आए थे. वे वहां ‘जनसंवाद’ में लोगों की समस्याएं सुन रहे थे. इसी बीच सोनू ने हाथ जोड़ कर रोते हुए नीतीश कुमार से फरियाद की,

‘मेरे पिता शराब पीते हैं. दही बेच कर लाए सारे पैसे शराब में बरबाद कर देते हैं. ‘‘मैं जो पढ़ा कर के पैसे लाता हूं, उन की भी पिता शराब पी जाते हैं. सरकारी स्कूल में टीचर कुछ भी नहीं पढ़ाते हैं. उन्हें अंगरेजी नहीं आती है, इसलिए मुझे अच्छे स्कूल में पढ़ना है.’’ बेहाल सरकारी स्कूल सरकारी स्कूलों में बच्चे मिडडे मील, स्कौलरशिप और वरदी के पैसे के लिए जा रहे हैं. मई महीने तक भी बच्चों को सरकारी स्कूलों में किताबें नहीं मिली थीं. पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा बहाल किए गए टीचर पढ़ा नहीं पाते हैं. ऐसे भी टीचर बहाल हैं, जो मुश्किल से अपनी हाजिरी बनाते हैं.

पंचायत प्रतिनिधियों ने दूसरों से घूस ले कर या फिर अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को बतौर टीचर बहाल कर दिया है. दबंग पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा बहाल किए गए इन टीचरों की मनमानी पर सरकारी महकमे के पदाधिकारी भी लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं. शराबबंदी पर निशाना सोनू ने बेबाकी से बोल कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बोलती बंद कर दी है. सचाई यही है कि बिहार में गैरकानूनी शराब दोगुनेतिगुने दाम पर मिल रही है. देशी जहरीली शराब से हजारों लोगों की जानें जा चुकी हैं. आएदिन जहरीली शराब के पीने से मौतें होने का सिलसिला जारी है.

मदद का हाथ बढ़ाया सोनू को पढ़ाने के लिए राज्यसभा सांसद और बिहार के उपमुख्यमंत्री रह चुके सुशील कुमार मोदी, सांसद रह चुके पप्पू यादव, फिल्म दुनिया के सितारे सोनू सूद समेत दर्जनों लोगों ने अपना हाथ आगे बढ़ाया है, पर वहां की पढ़ाईलिखाई में सुधार कैसे हो, ताकि बिहार के सोनू जैसे लाखों बच्चों को बेहतर तालीम मिल सके, इस के लिए जोरदार आवाज नहीं उठाई जा रही है. राष्ट्रीय जनता दल के नेता सत्येंद्र यादव का कहना है कि सोनू जैसे बिहार में हजारों मेधावी बच्चे हैं,

जो ट्यूशन पढ़ा कर, सब्जी बेच कर, फुटपाथ पर तरहतरह का सामान बेच कर अपने परिवार को पैसे की मदद करते हुए पढ़ाई कर रहे हैं. इन बच्चों को अगर बेहतर तालीम दी जाए, तो उन की तरक्की के साथसाथ इस राज्य की भी तरक्की होगी. लेकिन अफसोस की बात है कि सरकारी स्कूलों में बेहतर और क्वालिटी की पढ़ाईलिखाई के लिए पहल नहीं की जा रही है.

कलंक- भाग 2 : बलात्कारी होने का कलंक अपने माथे पर लेकर कैसे जीएंगे वे तीनों ?

उन में से एक की ऊंची आवाज ने इन तीनों को बुरी तरह चौंका दिया, ‘‘हे… कौन हो तुम लोग? इस लड़की को यहां फेंक कर क्यों भाग रहे हो?’’

‘‘रुको जर…सोनू, तू कार का नंबर नोट कर, मुझे सारा मामला गड़बड़ लग रहा है,’’ एक दूसरे आदमी की आवाज उन तक पहुंची तो वे फटाफट कार में वापस घुसे और आलोक ने झटके से कार सड़क पर दौड़ा दी.

‘‘संजय, तुझे तो मैं जिंदा नहीं छोड़ूंगी,’’ उस लड़की की क्रोध से भरी यह चेतावनी उन तीनों के मन में डर और चिंता की तेज लहर उठा गई.

‘‘उसे मेरा नाम कैसे पता लगा?’’ संजय ने डर से कांपती आवाज में सवाल पूछा.

‘‘शायद हम दोनों में से किसी के मुंह से अनजाने में निकल गया होगा,’’ नरेश ने चिंतित लहजे में जवाब दिया.

‘‘आज मारे गए हमसब. मैं ने उन आदमियों में से एक को अपनी हथेली पर कार का नंबर लिखते हुए देखा है. उस लड़की को ‘संजय’ नाम पता है. पुलिस को हमें ढूंढ़ने में दिक्कत नहीं आएगी,’’ आलोक की इस बात को सुन कर उन दोनों का चेहरा पीला पड़ चुका था.

नरेश ने अचानक सहनशक्ति खो कर संजय से चिढ़े लहजे में पूछा, ‘‘बेवकूफ इनसान, क्या जरूरत थी तुझे उस लड़की को उठा कर कार में डालने की?’’

‘‘यार, उस ने हमारी मांबहन…तो मैं ने अपना आपा खो दिया,’’ संजय ने दबे स्वर में जवाब दिया.

‘‘तो उसे उलटी हजार गालियां दे लेता…दोचार थप्पड़ मार लेता. तू उसे उठा कर कार में न डालता, तो हमारी इस गंभीर मुसीबत की जड़ तो न उगती.’’

‘‘अरे, अब आपस में लड़ने के बजाय यह सोचो कि अपनी जान बचाने को हमें क्या करना चाहिए,’’ आलोक की इस सलाह को सुन कर उन दोनों ने अपनेअपने दिमाग को इस गंभीर मुसीबत का समाधान ढूंढ़ने में लगा दिया.

पुलिस उन तक पहुंचे, इस से पहले ही उन्हें अपने बचाव के लिए कदम उठाने होंगे, इस महत्त्वपूर्ण पहलू को समझ कर उन तीनों ने आपस में कार में बैठ कर सलाहमशविरा किया.

अपनी जान बचाने के लिए वे तीनों सब से पहले आलोक के चाचा रामनाथ के पास पहुंचे. वे 2 फैक्टरियों के मालिक थे और राजनीतिबाजों से उन की काफी जानपहचान थी.

रामनाथ ने अकेले में उन तीनों से पूरी घटना की जानकारी ली. आलोक को ही अधिकतर उन के सवालों के जवाब देने पड़े. शर्मिंदा तो वे तीनों ही नजर आ रहे थे, पर सब बताते हुए आलोक ने खुद को मारे शर्म और बेइज्जती के एहसास से जमीन में गड़ता हुआ महसूस किया.

‘‘अंकल, हम मानते हैं कि हम से गलती हुई है पर ऐसा गलत काम हम जिंदगी में फिर कभी नहीं करेंगे. बस, इस बार हमारी जान बचा लीजिए.’’

‘‘दिल तो ऐसा कर रहा है कि तुम सब को जूते मारते हुए मैं खुद पुलिस स्टेशन ले जाऊं, लेकिन मजबूर हूं. अपने बड़े भैया को मैं ने वचन दिया था कि उन के परिवार का पूरा खयाल रखूंगा. तुम तीनों के लिए किसी से कुछ सहायता मांगते हुए मुझे बहुत शर्म आएगी,’’ संजय को आग्नेय दृष्टि से घूरने के बाद रामनाथ ने मोबाइल पर अपने एक वकील दोस्त राकेश मिश्रा का नंबर मिलाया.

राकेश मिश्रा को बुखार ने जकड़ा हुआ था. सारी बात उन को संक्षेप में बता कर रामनाथ ने उन से अगले कदम के बारे में सलाह मांगी.

‘‘जिस इलाके से उस लड़की को तुम्हारे भतीजे और उस के दोनों दोस्तों ने उठाया था, वहां के एसएचओ से जानपहचान निकालनी होगी. रामनाथ, मैं तुम्हें 10-15 मिनट बाद फोन करता हूं,’’ बारबार खांसी होने के कारण वकील साहब को बोलने में कठिनाई हो रही थी.

‘‘इन तीनों को अब क्या करना चाहिए?’’

‘‘इन्हें घर मत भेजो. ये एक बार पुलिस के हाथ में आ गए तो मामला टेढ़ा हो जाएगा.’’

‘‘इन्हें मैं अपने फार्म हाउस में भेज देता हूं.’’

‘‘उस कार में इन्हें मत भेजना जिसे इन्होंने रेप के लिए इस्तेमाल किया था बल्कि कार को कहीं छिपा दो.’’

‘‘थैंक्यू, माई फैं्रड.’’

‘‘मुझे थैंक्यू मत बोलो, रामनाथ. उस थाना अध्यक्ष को अपने पक्ष में करना बहुत जरूरी है. तुम्हें रुपयों का इंतजाम रखना होगा.’’

‘‘कितने रुपयों का?’’

‘‘मामला लाखों में ही निबटेगा मेरे दोस्त.’’

‘‘जो जरूरी है वह खर्चा तो अब करेंगे ही. इन तीनों की जलील हरकत का दंड तो भुगतना ही पड़ेगा. तुम मुझे जल्दी से दोबारा फोन करो,’’ रामनाथ ने फोन काटा और परेशान अंदाज में अपनी कनपटियां मसलने लगे थे.

 

कलंक- भाग 1: बलात्कारी होने का कलंक अपने माथे पर लेकर कैसे जीएंगे वे तीनों ?

उस रात 9 बजे ही ठंड बहुत बढ़ गई थी. संजय, नरेश और आलोक ने गरमाहट पाने के लिए सड़क के किनारे कार रोक कर शराब पी. नशे के चलते सामने आती अकेली लड़की को देख कर उन के भीतर का शैतान जागा तो वे उस लड़की को छेड़ने से खुद को रोक नहीं पाए.

‘‘जानेमन, इतनी रात को अकेली क्यों घूम रही हो? किसी प्यार करने वाले की तलाश है तो हमें आजमा लो,’’ आसपास किसी को न देख कर नरेश ने उस लड़की को ऊंची आवाज में छेड़ा.

‘‘शटअप एंड गो टू हैल, यू बास्टर्ड,’’ उस लड़की ने बिना देर किए अपनी नाराजगी जाहिर की.

‘‘तुम साथ चलो तो ‘हैल’ में भी मौजमस्ती रहेगी, स्वीटहार्ट.’’

‘‘तेरे साथ जाने को पुलिस को बुलाऊं?’’ लड़की ने अपना मोबाइल फोन उन्हें दिखा कर सवाल पूछा.

‘‘पुलिस को बीच में क्यों ला रही हो मेरी जान?’’

‘‘पुलिस नहीं चाहिए तो अपनी मां या बहनों…’’

वह लड़की चीख पाती उस से पहले ही संजय ने उस का मुंह दबोच लिया और झटके से उस लड़की को गोद में उठा कर कार की तरफ बढ़ते हुए अपने दोस्तों को गुस्से से निर्देश दिए, ‘‘इस ‘बिच’ को अब सबक सिखा कर ही छोड़ेंगे. कार स्टार्ट करो. मैं इस की बोटीबोटी कर दूंगा अगर इस ने अपने मुंह से ‘चूं’ भी की.’’

आलोक कूद कर ड्राइवर की सीट पर बैठा और नरेश ने लड़की को काबू में रखने के लिए संजय की मदद की. कार झटके से चल पड़ी.

उस चौड़ी सड़क पर कार सरपट भाग रही थी. संजय ने उस लड़की का मुंह दबा रखा था और नरेश उसे हाथपैर नहीं हिलाने दे रहा था.

‘‘अगर अब जरा भी हिली या चिल्लाई तो तेरा गला दबा दूंगा.’’

संजय की आंखों में उभरी हिंसा को पढ़ कर वह लड़की इतना ज्यादा डरी कि उस का पूरा शरीर बेजान हो गया.

‘‘अब कोई किसी का नाम नहीं लेगा और इस की आंखें भी बंद कर दो,’’ आलोक ने उन दोनों को हिदायत दी और कार को तेज गति से शहर की बाहरी सीमा की तरफ दौड़ाता रहा.

एक उजाड़ पड़े ढाबे के पीछे ले जा कर आलोक ने कार रोकी. उन की धमकियों से डरी लड़की के साथ मारपीट कर के उन तीनों ने बारीबारी से उस लड़की के साथ बलात्कार किया.

लड़की किसी भी तरह का विरोध करने की स्थिति में नहीं थी. बस, हादसे के दौरान उस की बड़ीबड़ी आंखों से आंसू बहते रहे थे.

लौटते हुए संजय ने लड़की को धमकाते हुए कहा, ‘‘अगर पुलिस में रिपोर्ट करने गई, तो हम तुझे फिर ढूंढ़ लेंगे, स्वीटहार्ट. अगर हमारी फिर मुलाकात हुई तो तेजाब की शीशी होगी हमारे हाथ में तेरा यह सुंदर चेहरा बिगाड़ने के लिए.’’

तीनों ने जहां उस लड़की को सड़क पर उतारा. वहीं पास की दीवार के पास 4 दोस्त लघुशंका करने को रुके थे. अंधेरा होने के कारण उन तीनों को वे चारों दिखाई नहीं दिए थे.

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