प्रेग्नेंसी का नौवां महीना, फिर भी लगाई दौड़

अमूमन गर्भवती महिलाएं आठवें महीने तक न तो सही से चल पाती हैं और ना ही कोई भारी काम कर पाती हैं क्योंकि आठवां और नौवां महीना बेहद ही नाजुक होता है. कभी भी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. उस वक्त ज्यादातर महिलाएं आराम चाहती हैं. वर्किंग वुमन हैं तो ऑफिस जाना बंद कर देती हैं. मैटर्निंटी लीव पर जाती हैं, लेकिन यहां हम जिसकी महिला की बात कर रहे हैं उसके बारे में जानकर हैरानी ही होगी. आखिर कैसे कोई नौंवे महीने में रेस लगा सकता है. डिलीवरी से मात्र एक महीने पहले रेस में भाग लेकर रिकॉर्ड कायम किया. ये खबर पुरानी जरूर है लेकिन हिम्मत के नजरिए से शायद हर महिला को इनके बारे में जानना चाहिए.

दरअसल हम बात कर रहे हैं 30 साल की माकेना माइलर की, जो कैलिफोर्निया के ऑरेंज काउंटी की रहने वाली हैं और काफी तेज धाविका हैं. माकेना माइलर नौ महीने की गर्भवती हैं और उन्होंने 5.17 मिनट में एक मील पूरा किया… हालांकि ये बच्चे और मां के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है, लेकिन डेली मेल में छबे खबर के मुताबिक माकेना ने इसकी पूरी ट्रेनिग ली. प्रशिक्षकों के संरक्षण में रह कर रोज प्रैक्टिस किया उसके बाद किया ये कमाल. माकेना ने गर्भावस्था को अपने प्रशिक्षण के आड़े नहीं आने दिया.
2020 में अपनी पहली गर्भावस्था के दौरान प्रशिक्षण की दिनचर्या को जारी रखा – जिसमें उसने पांच मिनट और 25 सेकंड में एक मील पूरा किया ‘सिर्फ यह देखने के लिए कि क्या यह संभव है.

रनर वर्ल्ड के अनुसार, एक पेशेवर एथलीट होने के बावजूद, माकेना ने कहा कि बहुत से लोगों ने उन्हे ऐसा करने से मना किया, लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने जज्बे को कायम रखा. उन्होंने कहा, ‘मैंने सोचा था कि गर्भावस्था के दौरान प्रशिक्षण लेना काफी सामान्य बात है, लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं जो सोचते हैं कि यह सामान्य नहीं है.
माकेना ने आगे कहा- मुझसे लोग पूछ रहे थे कि नौ महीने की गर्भवती होने के दौरान मैं ऐसा कैसे कर सकती हूं, जबकि अन्य महिलाएं मुश्किल से सोफे से उठ पाती हैं.
उन्होंने बताया कि इसका बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आप गर्भवती होने से पहले अपने शरीर को कैसे मजबूत बनाती हैं – मैं गर्भावस्था से पहले भी दौड़ रही थी जिससे मुझे मदद मिली और मैं ये कर पाई.

हालांकि ये तो बात थी माकेना की जो ट्रेंड थीं, उसके बाद ये रिस्क उठाया लेकिन सामान्य नागरिक ऐसा कुछ भी करने से बचे. क्योंकि ट्रेनिंग करके कुछ करना और बिना ट्रेनिग के कुछ करने में बहुत फर्क है.. इसलिए सभी महिलाओं से ऐसा कोई भी स्टंट ना करने की अपील है.

बेरुखी : पति को क्यों दिया ऐश्वर्या ने धोखा

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इंस्टाग्राम पर हुआ प्यार तो झारखंड पहुंची पोलैंड की महिला

अभी सीमा हैदर और सचिन मीणा की लव स्टोरी का एंगल खतम भी नहीं हुआ कि यहां एक नया ही मामला सामने आ गया. आजकल सोशल मीडिया का प्रेम जाल इतना बढ़ गया है कि लोग सात समंदर पार से न जाने कहां-कहां चले जा रहे हैं. हालांकि हम यहां बात करेंगे पोलैंड की बारबरा पोलाक की, जो प्रेमी शादाब मल्लिक से मिलने पोलैंड से झारखंड के हजारीबाग पहुंच गईं.

कैसे हुई मुलाकात

प्रेम एक ऐसा जादू है जो किसी पर चलने के बाद उसे अपनी और आकर्षित करता चला जाता है। जब प्रेम सात समुंदर पार का हो तो लोग भी जानना चाहते हैं कि यह प्रेमी जोड़ी आखिर है कौन. लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ जाती है. दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए हजारीबाग के शादाब से विदेश की पोलैंड निवासी बारबरा पोलाक की साल 2021 में बातचीत शुरू हुई और दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया. बातचीत यहां तक पहुंच गई कि लड़की उनसे मिलने के लिए उनके गांव झारखंड के हजारीबाग आ पहुंची. कुछ दिनों के बाद यह दोनों शादी के बंधन में बंध जाएंगे. बारबरा पोलाक की एक 6 साल की बेटी अनन्या भी है जिसको शादाब ने अपनाया है. बेटी अनन्या शादाब को डैड कह कर बुलाती है. इनके पहुंचने के बाद गांव के कुछ लोग काफी खुश नजर आए तो कुछ लोग ने एतराज जताया. इस बीच कई लोगों ने अपने घरों में बुलाकर विदेशी मेहमान का स्वागत भी किया.

बारबरा और शादाब ने क्या कहा ?

एक खबर के मुताबिक शादाब ने बारबरा पोलाक की तारीफ करते हुए कहा कि उसे भारत आकर काफी अच्छा लग रहा है. हम लोग बहुत जल्द शादी के बंधन में बंध जाएंगे. साथ ही कहा कि मैं काम की तलाश में हूं एक अच्छा काम करना चाहता हूं. बारबरा पोलक और बेटी अनन्या से बहुत प्रेम करता हूं. साथ ही विदेशी मेहमान बारबरा पोलाक ने कहा कि मुझे भारत और हजारीबाग बहुत अच्छा लगा. मैं जब हजारीबाग पहुंची तो मुझे देखने के लिए काफी लोग आए और मुझे सेलिब्रिटी जैसा फील हुआ. साथ ही कहा की पोलैंड में मेरा खुद का घर और कार है.वहां मेरे पास सब कुछ है नौकरी भी है, मैं तो यहां सिर्फ शादाब के लिए आई हूं. मैं शादाब के साथ काफी खुश हूं और हम लोग बहुत जल्द एक दूजे के होने वाले हैं.

यूं तो विदेशी मुल्कों से आकर भारत में बसने की खबरें बहुत आती हैं, लेकिन किसी से शादी करके भारत में बसना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है, लेकिन बारबरा पोलक की कहानी इसलिए अलग है क्योंकि उनकी बेटी को भी शादाब ने अपनाया है. भारत ने हमेशा विदेशी मेहमानों का स्वागत और सम्मान किया है. वो बात अलग है कि दशकों पहले विदेशी लोगों ने ही भारत पर अपना कब्जा जमा लिया था और देश पर जुल्मों सितम की अति कर दी थी, लेकिन अभ परिस्थितियां बदल चुकी हैं. हमारा देश आजाद देश है और यहां सतर्कता के साथ हर कदम उठाया जाता है. विदेशों में भारत की तारीफ भी होती है. कई ऐसे विदेशी ब्लॉगर और यूट्यूबर हैं जो भारत के उपर ब्लॉग और वीडियो बनाते हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो की भरमार है. इससे एक बात तो साबित है कि विदेशी लोगों को भारत का खान-पान और संस्कृति पसंद आती है. शायद यही कारण है बारबरा पोलाक ही नहीं ऐसी कई विदेशी लड़कियां है जो शादी करके भारत में ही बस जाती हैं.

उर्फी जावेद के साथ फ्लाइट में हुई छेड़छाड़, सोशल मीडिया पर दी जानकारी

उर्फी जावेद हमेशा ही अपने स्टाइल सेंस को लेकर चर्चा में रहती है उनका स्टाइल हर किसी को हैरान कर देने वाला होता है जो देखता है देखता ही रह जाता है उर्फी हर मुद्दे पर अपनी बेबाकी से बात रखती है साथ ही लोगों को मुंह तोड़ जवाब भी देती है जिसे लेकर वो अक्सर सुर्खियों में बनी रहती है, लेकिन इस बार उर्फी का लाइमलाइट में आने की वजह कुछ ओर ही है. दरअसल, उनके साथ फ्लाइट में एक हादसा हुआ है जिसका वीडियो उन्होने शेयर किया है इस वीडियो पर लोग उन्हे काफी स्पोर्ट करते दिख रहे है.

 

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आपको बता दें, कि उर्फी जावेद के साथ फ्लाइट में छेड़छाड़ हुई. जिसका वीडियो उन्होने सोशल मीडिया पर शेयर किया है कुछ लड़को ने नशे की हालत में उनके साथ बदतमीजी की थी. जिसका पूरा हाल उर्फी ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया है. जिसे देख लोगों ने उर्फी को स्पोर्ट किया है उर्फी ने अपने पोस्ट में बताया है कि वह मुंबई से गोवा जा रही थी जब उनके साथ छेड़छाड़ हुई.

 

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उर्फी जावेद (Urfi Javed) ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर उन लड़कों से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “मुंबई से गोवा सफर करते हुए फ्लाइट में मुझे कल शोषण का शिकार होना पड़ा. वीडियो में मौजूद ये लड़के अजीबों-गरीब बातें कह रहे थे, छेड़खानी कर रहे थे और नाम ले रहे थे.जब मैंने उनसे इस बारे में बात की तो उनमें से एक ने कहा कि मेरे दोस्तों ने शराब पी हुई है. नशे में होना महिलाओं संग बदतमीजी करने का कोई रास्ता नहीं होता है. पब्लिक फिगर हूं, पब्लिक की प्रॉपर्टी नहीं. बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब उर्फी जावेद ने किसी मसले का बेबाकी से खुलासा किया हो. इससे पहले उन्होंने मणिपुर में महिलाओं संग हुई घटना का भी पुरजोर विरोध किया था. उर्फी जावेद ने सरेआम कुकी समुदाय की महिलाओं के लिए न्याय की मांग की थी. उनके इस कदम को लेकर लोगों ने जमकर सराहना भी की.

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फिल्म मे डेब्यू करेंगी उर्फी 

बताते चले की उर्फी जल्द ही बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही है. दरअसल, एकता कपूर ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘लव सेक्स और धोखा 2’ के लिए उर्फी जावेद को अप्रोच किया है. एक्ट्रेस ने कुछ दिनों पहले शूटिंग से जुड़ी फोटो भी शेयर की थी, जिसे देखकर कहा जा सकता है कि उर्फी जावेद ने अपनी डेब्यू फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है.

वश फिल्म रिव्यू: अंधविश्वास को बढ़ावा देती है ये फिल्म

  • रेटिंग: पांच में से ढाइे स्टार
  • निर्माताः गंगा ममगाई
  • लेखक व निर्देशकः जगमीत सिंह समुद्री
  • कलाकारःविवेक जेटली,गंगा ममगाई, रितुराज सिंह,कावेरी प्रियम,विषाल सुदर्शनवार व अन्य
  • अवधिः एक घंटा 48 मिनट
  • सेंसर प्रमाणपत्रः ‘ए’ वयस्क
  • प्रदर्शन तिथि: 21 जुलाई 2023

बिजनेस ओमन से फिल्म निर्माता व अभिनेत्री बनी गंगा ममगार्इ्र हॉरर फिल्म ‘वशःपॉज्ड बाय आब्सेस्ड’’ लेकर आयी हैं.21 जुलाई को सिनेमाघरों में पहुॅची इस फिल्म में भी भूत प्रेत व आत्मा की बात है.मगर पूरी कहानी का प्रस्तुतिकरण काफी अलग है.पर यह फिल्म भी 21वीं सदी में अंधविश्वास को बढ़ावा देती है.

कहानीः

फिल्म शुरू होती है रॉकी व रिया से.रॉकी अपनी प्रेमिका रिया को साथ लेकर उंचंी पहाड़ी की तरफ रवाना होता है.रास्ते में जंगल से गुजरते हुए उनकी कार बंद पड़ जाती है.दोनों गाड़ी से नीचे उतरते हैं,उसके बाद एक अदृष्य षक्ति उनकी हत्या कर देती है.पुलिस बल अपना काम षुरू करता है.टीवी पत्रकार पूजा(कावेरी प्रियम) अपने कैमरामैन के साथ इस कांड की रिपोर्टिंग करने पहुॅच जाती है.बाद में पता चलता है कि पूजा ने भूत प्रेत के अस्तित्व पर एक किताब लिखी है.

कहानी यहां से रक्षित(विवेक जेटली ) व आंचल(गंगा ममगाई ) की तरफ मुड़ जाती है.दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं.रक्षित लंदन से वापस आने के बाद आंचल से विवाह रचाता है.विवाह की रष्मों के दौरान कुछ अजीब घटनाएं घटित होती हैं.पर षादी हो जाती है.सुहागरात के वक्त कुछ अजीब सी घटनाएं घटित होती हैं.दूसरे दिन रक्षित अपने आफिस चला जाता है.जब आंचल बाथटब में अर्ध नग्न अवस्था में स्नान कर रही थीं,तभी उसे अहसास होता है कि कोई अदृष्य इंसान उसके साथ बलात्कार करने का प्रयास कर रहा है.वह किसी तरह ख्ुाद को बचाते हुए अपने पति रक्षित को फोन कर बुलाती है.रक्षित,आंचल को डाक्टर के पास ले जाता है.डाक्टर को सब कुछ सही लगता है.फिर भी वह कुछ दवाएं दे देता है.उसके बाद आंचल,पूजा को बुलाकर उसे सारी बात बताती है.

पूजा इसे भूत प्रेत का मसला बताती है.पर रक्षित भूत प्रेत आदि में यकीन नही करता.लेकिन आंचल व रक्षित के घर में अजीब घटनाएं लगतार बढ़ती जाती है.एक दिन रक्षित का दोस्त अनुराग बताता है कि उसने षादी के वक्त की तस्वीरों में कुछ अजीब सा देखा है और वह इसे बताने के लिए रक्षित के घर की तरफ रवाना होता है.पर उसी पेड़ के पास पहुॅचते ही वह भी अदृष्य षक्ति के हाथों मारा जाता है. तब आंचल, पूजा की मदद लेती है.फिर बेहराम( विषाल सुदर्षनवार) के भूत बन जाने की एक नई कहानी भी आती है.कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं.अंततः आंचल को बुरी षक्ति से छुटकारा मिल जाता है.

लेखन व निर्देशनः

पूरी फिल्म देखने के बाद यह स्पष्ट नजर आता है कि फिल्मकार ने वैज्ञानिक तथ्य दिए बगैर महज अंधविश्वास को बढ़ाने वाले दृश्य ही रचे हैं.फिल्म की शुरूआत के बीस मिनट को बेवजह फिल्म में ठॅंूसा गया है.जिनके न होने से फिल्म की कहानी पर कोई असर नही पड़ने वाला था.लेकिन इन्ही बीस मिनट के दृष्य के अंदर फिल्मकार ने जबरदस्त सेक्स व अश्लीलता परोसने का काम किया है.कहानी के स्तर पर रक्षित व आंचल की कहानी षुरू होने के बाद फिल्म बांधकर रखती है.आम तौर पर जिस तरह से हॉरर या भूत प्रेत वाली फिल्मों में भूत नजर आता है,उस तरह से इस फिल्म में नही है.इतना ही नही फिल्मकार ने भूत प्रेत भगाने वाले तांत्रिक को भी आम प्रचिलित अंदाज से अलग पेष किया है.आंचल के प्रति भूत के आब्सेस्ड होने की वजह और पुनर्जन्म की बात कहकर नई रोचकता पैदा करने की कोशिश भी है.लोकेशन बढ़िया है.

अभिनयः

भूत प्रेत में यकीन न रखने वाले से भूत प्रेत में यकीन करने पर मजबूर होने वाले रक्षित के किरदार में विवेक जेटली के अभिनय को देखकर यह कहना मुष्किल है कि यह उनकी पहली फिल्म है.उन्होने रोमांटिक व एक्षन दृष्यों में कमाल किया है.मगर कई इमोषनल दृष्यों में वह मात खा गए हैं.आंचल के किरदार में गंगा ममगाई का अभिनय प्रभावषाली है.उनका सिनेमाई परदे पर यह पहला प्रयास है,ऐसा नही लगता.पर अभी उन्हे अपने अभिनय को निखारने के लिए मेहनत करते रहना चाहिए.तांत्रिक षास्त्री के किरदार में रितुराज सिंह का अभिनय जानदार है.बेहराम के किरदार में विषाल सुदर्षनवार और टीवी रिपोर्टर पूजा के किरदार में कावेरी प्रियम अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही है.

बियर्ड रखने के पीछे छिपा है साइंटिफीक कारण,क्या आप जानते है?

ऐसे कई लड़के है जिन्हे बियर्ड रखना अच्छा लगता है उन्हे बियर्ड लुक सटाइलिश लगता है लेकिन आप ऐसा क्यो करते है ये जानते है. क्यो आपको बियर्ड ही ऱखना अच्छा लगता है तो हम बताते है कि इसके पीछे की साइंस क्या है जी हां, एक शोध में इस बात का जिक्र किया गया है कि लड़के बियर्ड क्यो रखते है.

एक अध्ययन से पता चलता है कि दाढ़ी वाले पुरुषों की अपराध करने की अधिक संभावना रहती है. इसके विपरीत, एक अन्य अध्ययन से पता चलता है कि बियर्ड रखने से व्यक्ति की विश्वसनीयता बढ़ती है. हालांकि, बियर्ड और मर्दानगी के बीच भी एक मनोवैज्ञानिक संबंध है, जो असल में पुरुषों की आक्रामकता से जुड़ा हुआ है.

1. आत्मविश्वास बढ़ाता है

इस सर्वे के अनुसार बियर्ड रखने से आपके आत्मविश्वास में सुधार हो सकता है. इसके अलावा दाढ़ी ताकत, मर्दानगी और अन्य सकारात्मक विशेषताओं का एक प्राचीन प्रतीक भी है, जो आईने में देखने पर आपके आत्म-सम्मान को बढ़ा सकती है.

इसके अलावा जब आपके पास एक शानदार बियर्ड होती है, तो आप तुरंत किसी भी भीड़ से अलग हो जाते हैं. एक शानदार बियर्ड वाला व्यक्ति पार्टी में न सिर्फ अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराता है, बल्कि वहां मौजूद महिलाओं को भी अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल होता है.

2. सेल्फ केयर का सकेंत

बियर्ड बढ़ाना बेहद मुश्किल है. अपनी बियर्ड को बेहतरीन दिखाने के लिए स्वस्थ भोजन करना चाहिए और खूब पानी पीना चाहिए.अच्छी दिखने वाली दाढ़ी के लिए भी नियमित रखरखाव की आवश्यकता होती है.

अपनी दाढ़ी की देखभाल करना और एक स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना, अच्छी तरह से तैयार बियर्ड में योगदान देते हैं. असल में यह दर्शाता है कि आप अपने स्वास्थ्य की परवाह करते हैं और अपना ख्याल रखते हैं.

3. अधिक आकर्षण

एक रिसर्च के अनुसार महिलाएं, दाढ़ी रखने वाले पुरुषों के प्रति अधिक आकर्षित होती हैं. डार्विन ने भी ये सुझाव दिया था कि दाढ़ी बढ़ाना पुरुषों के लिए महिलाओं को आकर्षित करने के लिए एक सजावटी विशेषता के तौर पर काम आती थी.

यह उसी तरह है जैसे जानवर अपने साथी को आकर्षित करने के लिए पंख के कुछ रंग विकसित करते हैं या कुछ ध्वनियां विकसित करते हैं, ऐतिहासिक रूप से यह भी कहा जाता है कि पुराने समय में दाढ़ी रखने वाले पुरुषों की पिता बनने की संभावना अधिक थी, क्योंकि महिलाएं दाढ़ी वाले साथियों के प्रति अधिक आकर्षित होती थीं.

नरेंद्र मोदी का जादू

नरेंद्र मोदी का जादू जो सिर पर चढ़ कर इतने साल बोला अब लगता है कि धीमा पडऩे लगा है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी खुद अपने से नाराज होकर गई पाॢटयों को दोबारा बुला रही है. 18 जुलाई को हुई एक मीङ्क्षटग में कई पुराने साथी आए जो पहले कतार में लगे थे पर बाद में उन्होंने भाजपा से नाता  तोड़ लिया.

भाजपा की धर्म फौज रातदिन नरेंद्र मोदी को देवताओं को अवतार बनाने में लगी रही है और अगर फ्रांस के म्यूजियम में खाना भी वह खा आएं तो सुॢखयां बनवाता है जबकि इस म्यूजियम को कोई भी खाना खिलाने के लिए किराए पर ले सकता है. भारतीय जनता पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ रही साबित करने में कि नरेंद्र मोदी में देश को एक चमत्कारी नेता मिला है.

नरेंद्र मोदी चमत्कारी है, इस में शक नहीं है, उन्होंने 2016 चमत्कार से 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट गायब कर दिए और पूरे देश को बैंकों के आगे लाइनों में लगवा दिया. रातोंरात चमत्कार से मजदूरों के अधड़ में रखे गाड़ी कमाई के रुपए कोरे कागज में बदल गए.

जब कोरोना आया तो रातोंरात उन्होंने चमत्कार से लौकडाउन थोप दिया चाहे इस की जरूरत थी या नहीं और लाखों मजदूर जो चलना भूल चुके थे सैंकड़ों मील पैदल तपती धूप में चलने लगे. उन्होंने चमत्कार से थालीताली बजवा कर बता दिया कि इस से कोरोना पर 17 दिनों में जीत हासिल हो जाएगी का फायदा कर डाला और यह चमत्कार ही है कि पूरा देश हल्ला मचाने लगा. शायद चीन अमेरिका तक गूंज पहुंची होगी.

उन के राज में चमत्कार हुए कि खालिस कांग्रेसी नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस मरने के 50 साल बाद भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बन गए और एक की मूॢत गुजरात में लगा दी गई दूसरे की इंडिया गेट पर. दोनों ने जीवन भर ङ्क्षहदू महासभा और आरएसएस को गलत माना पर नमस्कार के कारण वह इतिहास अब भुला दिया गया.

चमस्कार के कारण देश भर खुले में शौच खत्म हो गया और घरघर में शौचालय बन गया. जिस में किया गया शौच वहीं पड़ापड़ा घर में बदबू फैलाता है और बिना पानी के न जाने कहां गायब हो जाता है. चमत्कारों में सीवर अपनेआप डालना शायद मोदी भूल गए. उज्जवला गैस का चमत्कार हुआ कि करोड़ों कारों गैस के सिलेंडर पहुंच गए और अब उन पर गोबर के उपले रख कर खाना बनाया जाता है.

ऐसे चमत्कारी नेता को 2024 में तो जीतना ही है भारतीय जनता पार्टी अब रातदिन इस मेहनत में लगी है जो इन चमत्कारों को नहीं मानते उन्हें किसी तरह ङ्क्षहदू धर्म से निकाल दिया जाए और वे अगर कोई धर्म अपनाएं तो जेल में बंद कर दिया जाएं. भाजपा को छोड़ कर गए नेताओं को ट्र्वाला टाइप का ईडी, सीबीआई थाप का डर दिखा कर कहा जा रहा है कि सीधेसीधे चमत्कारी पार्टी में आ जाओ. जहां आने पर सब ऐसे ही शुरू हो जाते हैं जैसे गांव में नहाने से इस में भाजपा को सफलता मिलेगी इस की पूरी गारंटी है.

विपक्षी एकता डरी सत्ता

साल 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए देश की सभी बड़ी विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल (यूनाइटेड), आम आदमी पार्टी यानी जो भारतीय जनता पार्टी से इतर विचारधारा रखती हैं, एक हो कर अलगअलग जगह बैठक कर रही हैं. इस से देश को एक संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि विपक्ष एकसाथ है.

यह भी सच है कि विपक्ष की एकता का आगाज बहुत पहले हो गया था, मगर इस के साथ ही मानो भारतीय जनता पार्टी की कुंभकर्णी नींद टूट गई और आननफानन में वह उन राजनीतिक दलों को एक करने में जुट गई है, जिन्हें सत्ता के घमंड में आ कर उस ने कभी तवज्जुह नहीं दी थी.

सब से बड़ा उदाहरण है रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी का, जबकि उन के बेटे चिराग पासवान आंख बंद कर के नरेंद्र मोदी की भक्ति करते देखे गए हैं. यही नहीं, नीतीश कुमार के साथ भी भाजपा ने दोयम दर्जे का बरताव किया था. इस तरह गठबंधन का धर्म नहीं निभा कर भारतीय जनता पार्टी में एक तरह से अपने सहयोगियों के साथ धोखा किया था, जिसे सत्ता के लालच में आज छोटीछोटी पार्टियां भूल गई हैं. इस की क्या गारंटी है कि साल 2024 में नरेंद्र  मोदी की सत्ता आने के बाद इन के साथ समान बरताव किया जाएगा?

कहा जाता है कि एक बार धोखा खाने के बाद समझदार आदमी सजग हो जाता है, मगर भारतीय जनता पार्टी के भुलावे में आ कर 38 उस के साथ आ कर खड़े हो गए हैं. मगर यह सच है कि यह सिर्फ एक छलावा और दिखावा मात्र है. एक तरफ विपक्ष अभी 26 दलों का गठबंधन बना पाया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी खुद को हमेशा की तरह बड़ा दिखाने के फेर में छोटेछोटे दलों को भी आज नमस्ते कर रही है.

भाजपा का देश को यह सिर्फ आंकड़ा दिखाने का खेल है. वह यह बताना चाहती है कि उस के पास देश के सब से ज्यादा राजनीतिक दलों का समर्थन है और विपक्ष जो आज एकता की बात कर रहा है वह उन के सामने नहीं ठहर सकता है, जबकि असलियत यह है कि यह सब भाजपा डर के मारे कर रही है ताकि आने वाले समय में उस के हाथों से देश की केंद्रीय सत्ता निकल न जाए.

कांग्रेस के नेतृत्व में

10 साल की राजग सरकार के भ्रष्टाचार और घोटालों का एक खाका खींचने के मद्देनजर विपक्षी गठबंधन के लिए एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम बनाया जा रहा है और आपसी तालमेल के साथ रैलियां, सम्मेलन, आंदोलन करने जैसे मुद्दों को ले कर मसौदा तैयार करने के लिए एक उपसमिति बनाने का भी प्रस्ताव है.

विपक्षी दल साल 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ एकजुट हो कर लड़ने के लिए अपनी रणनीति तैयार करेंगे. कांग्रेस के मुताबिक अगले लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता भारत के राजनीतिक दृश्य के लिए बदलाव वाली साबित होगी और जो लोग अकेले विपक्षी पार्टियों को हरा देने का दंभ भरते थे, वे इन दिनों ‘राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भूत’ में नई जान फूंकने कोशिश में लगे हुए हैं.

कुल जमा कहा जा सकता है कि विपक्ष की एकता से भारतीय जनता पार्टी के माथे पर पसीना उभर आया है और उसे यह समझते देर नहीं लगी है कि अगर वह सोती रहेगी तो राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष भारी पड़ सकता है.

बड़ी लाइन खींचने की कोशिश

भारतीय जनता पार्टी ने जब देखा कि केंद्र की सत्ता उस के हाथों से निकल सकती है तो वह आननफानन में उन राजनीतिक दलों को अपने साथ मिलाने मिल गई है, जो कभी उस के रूखे बरताव और सत्ता के घमंड को देख कर छोड़ कर चले गए थे.

मंगलवार, 18 जुलाई, 2023 को भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में अपने साथी राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक आयोजित की, जिस से जनता में संदेश जाए कि हम किसी से कम नहीं हैं.

दरअसल, यह बैठक सत्तारूढ़ गठबंधन के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखी गई. इस बैठक में भाजपा के कई मौजूदा और नए सहयोगी दल मौजूद रहे. सत्तारूढ़ पार्टी ने हाल के दिनों में नए दलों को साथ लेने और गठबंधन छोड़ कर जा चुके पुराने सहयोगियों को वापस लाने के लिए कड़ी मेहनत की है.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के मुताबिक, हम ने अपने सहयोगियों को न पहले जाने के लिए कहा था और न अब आने के लिए मना कर रहे हैं. उन्होंने कहा जो हमारी विचारधारा और देशहित में साथ आना चाहता है, आ सकता है.

हालांकि जनता दल (यूनाइटेड), उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना और अकाली दल जैसे अपने कई पारंपरिक सहयोगियों को खोने के बाद भाजपा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट, उत्तर प्रदेश में ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, जीतनराम मांझी के नेतृत्व वाले हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सैक्युलर) और उपेंद्र कुशवाला के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक जनता दल के साथ गठबंधन करने में कामयाब रही है.

मगर यह देखना खास है कि ये सारे दल देश की राजनीति में कोई ज्यादा अहमियत नहीं रखते हैं और भाजपा का सिर्फ कोरम पूरा करने का काम कर रहे हैं.

100 करोड़ की फिरौती का फंडा

22 जुलाई, 2017 की शाम को फिरोजाबाद के राजातालाब आर्किड ग्रीन के रहने वाले संजीव गुप्ता की पत्नी सारिका गुप्ता 2-3 लोगों के साथ टुंडला कोतवाली पहुंची तो कोतवाली प्रभारी अरुण कुमार सिंह हैरान ही नहीं हुए, बल्कि उन्हें किसी अनहोनी की आशंका भी हुई. क्योंकि वह सारिका गुप्ता को अच्छी तरह जानतेपहचानते थे. उस के पति संजीव गुप्ता शहर के जानेमाने व्यवसायी थे.

सारिका गुप्ता सीधे अरुण कुमार सिंह के पास पहुंची थी. उन्होंने उसे सामने पड़ी कुरसी पर बैठने के लिए कह कर आने की वजह पूछी तो उस ने जो बताया, सुन कर वह दंग ही नहीं रह गए, बल्कि परेशान भी हो उठे. उस ने बताया था कि साढ़े 5 बजे के करीब उस के पति संजीव गुप्ता अपने होटल सागर रत्ना से अपनी मीटिंग खत्म कर के सीधे घर आने वाले थे.

लेकिन अब तक वह न घर पहुंचे हैं और न ही उन का फोन मिल रहा है. जब भी उन्हें फोन किया जाता है, फोन बंद बताता है. इतना सब बता कर उस ने आशंका भी व्यक्त की कि कहीं उन का अपहरण तो नहीं हो गया है.

बहरहाल, अरुण कुमार सिंह ने सारिका से तहरीर ले कर उसे आश्वासन दिया कि पुलिस जल्दी ही उस के पति को ढूंढ निकालेगी. जबकि वह जानते थे कि यह काम इतना आसान नहीं है.

संजीव गुप्ता शहर का जानामाना नाम था. फिरोजाबाद शहर के राजातालाब इलाके की आर्किड ग्रीन में उस की शानदार कोठी थी, जहां कई महंगी कारें खड़ी रहती थीं. शहर के होटल सागर रत्ना में ही नहीं, कई स्कूलों में भी उस की हिस्सेदारी थी. इस के अलावा वह ब्याज पर पैसा उठाने के साथसाथ करोड़ों की कमेटी और सोसायटी चलाता था, जिस में शहर के ही नहीं, आसपास के शहरों के भी बड़ेबड़े लोग शेयर डालते थे.

ऐसे आदमी का गायब होना पुलिस के लिए परेशानी ही थी. पैसे वाला आदमी था, उस का अपहरण भी हो सकता था, इसलिए अरुण कुमार सिंह ने तुरंत इस बात की सूचना पुलिस अधिकारियों को दे दी. अपहरण की आशंका को ध्यान में रख कर तुरंत शहर की नाकाबंदी कराते हुए शहर भर की पुलिस को सतर्क कर दिया गया.

crime

रात भर पुलिस अपने हिसाब से संजीव गुप्ता की तलाश करती रही, लेकिन कुछ पता नहीं कर पाई. अगले दिन यानी 23 जुलाई को सारिका गुप्ता एक बार फिर कोतवाली पहुंची और शक के आधार पर नीता पांडेय, उस के पति प्रदीप पांडेय और अमित गुप्ता तथा कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ अपराध क्रमांक 641/2017 पर भादंवि की धारा 364ए, 506, 120बी के तहत नामजद मुकदमा दर्ज करा दिया.

उन्होंने पुलिस को अपने मोबाइल में 2 मैसेज भी दिखाए, जो उन के पति के ही फोन से आए थे. उन संदेशों में उन से संजीव गुप्ता की रिहाई के लिए सौ करोड़ की फिरौती मांगी गई थी. फिरौती न देने पर संजीव गुप्ता को मौत के घाट उतारने की धमकी दी गई थी.

यह मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने संजीव गुप्ता के दोनों मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगवा दिए, साथ ही सुरक्षा की गरज से संजीव की कोठी पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया. एसएसपी अजय कुमार पांडेय ने पुलिस की कई टीमें बना कर संजीव की तलाश में लगा दिया. इस के साथ एसटीएफ की भी एक टीम बना कर इस मामले में लगा दी गई थी.

पुलिस ने संजीव के मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर अलीगढ़, दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़, जम्मूकश्मीर तक उस की खोज की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. उस के मोबाइल का स्विच औफ रहता था, बस थोड़ी देर के लिए औन होता था. उसी के हिसाब से जो लोकेशन मिलती थी, पुलिस वहां पहुंच जाती थी.

24 जुलाई को सारिका के मोबाइल पर एक बार फिर संदेश आया कि कोठी पर पुलिस क्यों तैनात है, पुलिस को वहां से हटवाओ. सारिका ने यह संदेश पुलिस अधिकारियों को दिखाया तो कुछ पुलिस वालों को वहां से हटा दिया गया, लेकिन पूरी तरह से पुलिस नहीं हटाई गई.

संजीव गुप्ता को गायब हुए 3 दिन हो चुके थे. यह घटना शहर में चर्चा का विषय बनी हुई थी. ज्यादातर लोगों का कहना था कि संजीव का अपहरण नहीं हुआ, बल्कि वह खुद ही कहीं छिपा बैठा है. दूसरी ओर संजीव की पत्नी और भांजे विप्लव गुप्ता ने संजीव के अपहरण का आरोप नीता पांडेय पर लगाया ही नहीं था, बल्कि शक के आधार पर मुकदमा भी दर्ज करा दिया था.

नीता का पति प्रदीप पांडेय समाज कल्याण विभाग में वरिष्ठ लिपिक था. भाजपा का जिला संगठन ब्राह्मण समाज ही नहीं, सरकारी कर्मचारी भी प्रदीप पांडेय और नीता पांडेय के साथ थे. इसलिए पुलिस नीता पांडेय, उस के पति प्रदीप पांडेय और अनिल गुप्ता के खिलाफ कोई काररवाई नहीं कर पा रही थी.

पुलिस द्वारा की गई जांच के अनुसार, नीता पांडेय का आरओ और बोतलबंद पानी का व्यवसाय था. उन्होंने सन 2015 में संजीव गुप्ता से 15 लाख रुपए ब्याज पर लिए थे, जिस का ब्याज पहले ही काट कर संजीव ने उसे 10 लाख 80 हजार रुपए दिए थे. इस के बाद जबरदस्ती उस से 25 लाख रुपए की कमेटी डलवाई थी. बाद में ब्याज जोड़ कर वह उस से 60 लाख रुपए मांगने लगा था.

नीता ने इतना रुपया देने से मना किया तो संजीव जबरदस्ती वसूल करने की कोशिश करने लगा. मजबूर हो कर नीता ने 1 जुलाई, 2017 को भादंवि की धारा 406, 452, 504, 506 एवं 6 के तहत संजीव, दीपक और विप्लव गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था. जबकि दोनों के बीच झगड़ा अप्रैल से ही चल रहा था.

यह मामला सुर्खियों में तब आया, जब नीता पांडेय ने जिलाधिकारी से संजीव गुप्ता द्वारा धमकी देने की शिकायत के साथ ब्याज पर पैसे उठाने की शिकायत कर दी थी. जिलाधिकारी ने एसपी (सिटी) और एसडीएम को इस मामले को सुलझाने का आदेश दिया था. लेकिन बुलाने पर भी संजीव समझौते के लिए नहीं आया.

धीरेधीरे नीता पांडेय और संजीव गुप्ता का विवाद इतना बढ़ गया कि यह प्रदेश के डीजीपी और मुख्यमंत्री तक पहुंच गया. ऐसे में कुछ और लोग नीता के साथ आ गए थे, जिन्हें कमेटी का अपना पैसा डूबता नजर आ रहा था. संजीव गुप्ता शहर का बड़ा आदमी ही नहीं, रसूख वाला भी था. उस के सामने हर किसी के आने की हिम्मत नहीं थी.

सपा सरकार के समय उस का अलग ही रुतबा था. लेकिन सत्ता बदलते ही उस का रुतबा जाता रहा. उस की कमेटी और सोसायटी का व्यवसाय शहर ही नहीं, अन्य शहरों तक फैला था, जिस की वजह से लगभग रोज ही होटल में पार्टियां होती रहती थीं, जिस में बड़ेबड़े लोग शामिल होते थे.

इसी संजीव गुप्ता की वापसी के लिए 100 करोड़ की फिरौती मांगी जा रही थी. यह हैरान करने वाली बात थी. पुलिस को भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था. 22 जुलाई की शाम को संजीव गायब हुआ था और 23 जुलाई की रात एक बज कर 40 मिनट पर 100 करोड़ की फिरौती का संदेश उस की पत्नी के फोन पर वाट्सऐप द्वारा आ गया था. यह भी संदेह पैदा करने वाली बात थी.

100 करोड़ की फिरौती की वजह से ही यह मामला राजधानी लखनऊ तक पहुंच गया था. विधान परिषद में भी मामला उठाया गया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त आदेश था कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाए, इसीलिए इस मामले को सुलझाने में पुलिस जीजान से जुटी थी.

इसी का नतीजा था कि पुलिस को अपने सूत्रों से पता चला कि संजीव गुप्ता की कार अलीगढ़ के गभाना में खड़ी है. उस का मोबाइल फोन औन तो होता था, पर बहुत थोड़ी देर के लिए. फिर भी उस की जो लोकेशन मिलती थी, पुलिस उसी ओर भागती थी. अब तक की भागदौड़ से पुलिस को लगने लगा था कि यह अपहरण का मामला नहीं है. यह योजना बना कर किया गया अपहरण का नाटक है.

पुलिस ने नीता पांडेय से पूछताछ की तो उस ने कहा कि अगर सारिका गुप्ता को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ की जाए तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी. लेकिन पुलिस ऐसा करने से कतरा रही थी, क्योंकि ऐसा करने पर उस पर अंगुली उठ सकती थी. जबकि पुलिस पर इस मामले को सुलझाने का काफी दबाव था. अधिकारी भी मामले को सुलझाने में लगी टीमों पर दबाव बनाए हुए थे.

पुलिस ने संजीव के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि उस पर कमेटी और सोसायटी मैंबरों का करोड़ों का कर्ज था. पैसे वाले लोगों ने अपना चोरी का पैसा उस की कमेटी में लगा रखा था. उन्हें जब लगा कि उन का पैसा डूबने वाला है तो परेशान हो कर वे अपना पैसा उस से वापस मांगने लगे थे, जबकि उस के पास लौटाने के लिए पैसा नहीं था. उस ने कमेटी और सोसायटी का पैसा अपनी अय्याशी और शानोशौकत में उड़ा दिया था.

पुलिस जांच में एक आदमी ने बताया कि उस ने संजीव को 23 जुलाई को फिरोजाबाद में देखा था. इस से पुलिस को लगा कि संजीव का अपहरण नहीं हुआ है. वह अपहरण का नाटक कर रहा है. वह देश छोड़ कर भाग न जाए, पुलिस ने उस का पासपोर्ट जब्त कर लिया था.

पुलिस ने शहर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो सारी पोल खुल गई. संजीव अपनी कार में अकेला ही नजर आ रहा था. गभाना में जहां उस की कार मिली थी, वहां एक पंक्चर बनाने वाले ने भी बताया था कि इस कार से एक ही आदमी उतरा था और कार लौक कर के वह चला गया था.

आखिर 28 जुलाई को एसटीएफ की टीम ने नाटकीय ढंग से संजीव गुप्ता को पानीपत के होटल स्वर्ण महल से बरामद कर लिया और फिरोजाबाद ला कर 29 जुलाई की सुबह एसएसपी अजय कुमार पांडेय के सामने पेश कर दिया. इस तरह संजीव गुप्ता की सकुशल बरामदगी से पुलिस ने राहत की सांस ली.

पुलिस की मेहनत तो सफल हो गई थी, पर उस की अपहरण की कहानी पर किसी को विश्वास नहीं था. संजीव गुप्ता ने कहा कि एसटीएफ और एसएसपी साहब ने उसे बचा लिया. अपनी बात कहते हुए वह कभी रोने लगता था तो कभी हंसने लगता था. उस के बताए अनुसार, जब वह मीटिंग खत्म कर के होटल सागर रत्ना से निकला और बाहर खड़ी कार में बैठा तो पीछे छिप कर बैठे एक युवक ने उस की पीठ पर पिस्टल सटा कर चुपचाप गाड़ी चलाते रहने को कहा.

रास्ते में 2-3 लोग और बैठ गए. उन्होंने उस का फोन ले कर उस की पत्नी को 100 करोड़ की फिरौती का संदेश भेजा. लेकिन वह अपनी इस बात पर टिका नहीं रह सका. बारबार बयान बदलता रहा. पुलिस को पहले से ही उस पर शक था, बयान बदलने से शक और बढ़ गया. इस के बावजूद पुलिस तय नहीं कर पा रही थी कि उस के साथ क्या किया जाए? अब तक उस की मदद के लिए तमाम लोग आ गए थे.

पुलिस के पास अभी संजीव के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं थे, इसलिए सबूतों के अभाव में पुलिस ने उस के खिलाफ कोई काररवाई न करते हुए उसे उस के घर वालों के हवाले कर दिया. पुलिस की यह हरकत लोगों को नागवार गुजरी, क्योंकि सभी जानते थे कि संजीव का अपहरण नहीं हुआ था. उस ने खुद ही अपने अपहरण का नाटक किया था.

सब से ज्यादा विरोध तो नीता पांडेय ने किया. उस ने संजीव से जान का खतरा बताते हुए उसे जेल भेजने की गुहार लगाई. संजीव को पुलिस ने घर भेज दिया तो वही नहीं, उस के घर वाले भी खुश थे कि उन का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाया. लेकिन पुलिस की स्थिति संदिग्ध होने लगी थी, इसलिए पुलिस अभी चुप नहीं बैठी थी.

अगले दिन आईजी मथुरा अशोक जैन फिरोजाबाद आए तो स्थिति बदलने लगी. पुलिस को होटल सागर रत्ना के गार्ड ने बताया था कि उस दिन संजीव गुप्ता ने उस होटल में कोई मीटिंग नहीं की थी. एक आदमी ने बताया था कि संजीव उस दिन अकेला ही कार में था. होटल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में भी संजीव अकेला ही कार में दिखाई दिया था.

एसटीएफ टीम ने उस कार को भी ढूंढ निकाला, जिस में संजीव जम्मू में अकेला घूमता रहा था. 22 जुलाई यानी संजीव के लापता होने वाले दिन उस की लोकेशन एटा, अलीगढ़ की मिली थी. 24 जुलाई को वह जम्मू में था. एसटीएफ टीम जब वहां होटल में पहुंची तो वह वहां से निकल चुका था. इस तरह के सारे सबूत जुटा कर पुलिस ने उस के खिलाफ काररवाई करने का मन बना लिया.

अब तक संजीव गुप्ता और सारिका गुप्ता की स्थिति काफी बदल चुकी थी. जो लोग उन की मदद के लिए खड़े रहते थे, अब उन्होंने दूरियां बना ली थीं. लोगों ने उन के नंबर ब्लौक कर दिए थे. लोग इस अपहरण के ड्रामे से हैरान थे, इसलिए लोग अब किसी तरह के पचड़े में नहीं पड़ना चाहते थे.

31 जुलाई की शाम को इंसपेक्टर अरुण कुमार सिंह संजीव गुप्ता की कोठी पर पहुंचे और संजीव गुप्ता तथा सारिका गुप्ता से अलगअलग पूछताछ की. संजीव और उस के घर वालों ने तो समझा था कि सब ठीक हो गया है, पुलिस को उन्होंने गुमराह कर दिया है, पर ऐसा नहीं था.

1 अगस्त, 2017 को पुलिस ने संजीव गुप्ता, सारिका गुप्ता, उस के भांजे विप्लव गुप्ता तथा सारिका के भाई सागर गुप्ता को हिरासत में ले कर थाने ले आई. अधिकारियों के सामने जब इन से अलगअलग पूछताछ शुरू हुई तो पुलिस की सख्ती के आगे सभी टूट गए और उन की जुबान खुल गई. संजीव को जब सीसीटीवी कैमरों की फुटेज दिखाई गई तो वह फूटफूट कर रोने लगा.

संजीव ने पुलिस को सारी कहानी सचसच बता दी. उस ने बताया कि लेनदारों तथा नीता पांडेय से छुटकारा पाने के लिए उस ने अपनी पत्नी सारिका, भांजे विप्लव और साले सागर के साथ मिल कर अपने अपहरण की योजना बनाई थी. नीता पांडेय और उस के पति को फंसा कर वह विदेश भाग जाना चाहता था.

पूछताछ के बाद पुलिस ने संजीव के बयानों के आधार पर सारिका, विप्लव और सागर के खिलाफ भादंवि की धारा 419, 420, 467, 468, 469, 471, 500, 507, 120बी, 34, 182, 186 और 187 के तहत मुकदमा दर्ज कर चारों को जेल भेज दिया. इस पूछताछ में संजीव गुप्ता ने जो बताया, उस के अनुसार, कहानी कुछ इस प्रकार थी.

संजीव गुप्ता बड़ेबड़े सपने देखने वाला नौजवान था. फर्श पर रह कर वह अर्श छूना चाहता था. कभी शहर की एक तंग गली में उस का चूडि़यों का छोटा सा गोदाम था. लेकिन वह रंगबिरंगी चूडि़यों के बीच जिंदगी के गोलगोल रंगीन सपने बुन रहा था. वह सपने ही नहीं देख रहा था, बल्कि धीरेधीरे उन सपनों को हकीकत का जामा भी पहनाने लगा था. पर इस के लिए उसे पैसों की जरूरत थी.

उस ने फिरोजाबाद ही नहीं, आगरा, मथुरा के बड़ेबड़े व्यापारियों से संपर्क बनाए और कमेटी और किटी का काम शुरू किया. लोग उस की कमेटी और किटी में बड़ीबड़ी रकम लगाने लगे. इसी पैसे को वह ब्याज पर उठाने लगा. बाजार में उस का लाखों रुपए ब्याज पर उठ गया. मजे की बात यह थी कि वह ब्याज के रुपए काट कर लोगों को रुपए उधार देता था.

समय पर किस्त न आने से संजीव अलग से ब्याज लेता था. धीरेधीरे वह बड़ा आदमी बनने लगा. पैसा आया तो वह अन्य धंधों में पैसे लगाने लगा. कमेटी में जो लोग पैसा डालते थे, वह दो नंबर का था. संजीव का सारा काम भी 2 नंबर का होता था, इसलिए हर कोई एकदूसरे की चोरी छिपाए रहा. पैसा आया तो संजीव गुप्ता के खर्चे बढ़ने लगे.

लोगों के पैसों से संजीव ने प्रौपर्टी तो बनाई ही, बड़ीबड़ी कारें भी खरीदीं. लेकिन बाद में लोग अपने पैसे मांगने लगे. अब उसे घाटा भी होने लगा था, जिस से लोगों को अपना पैसा डूबता नजर आया. फिर तो वह उस पर पैसा लौटाने के लिए दबाव डालने लगे. लोगों के दबाव से परेशान संजीव गुप्ता नीता पांडेय से 60 लाख रुपए मांगने लगा तो परेशान हो कर नीता ने उस पर मुकदमा कर दिया.

संजीव अब परेशान रहने लगा था. इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए उस ने एक योजना बनाई, जिस में उस ने पत्नी सारिका, भांजे विप्लव और साले सागर गुप्ता को शामिल किया. अगर संजीव की योजना सफल हो गई होती तो नीता पांडेय और उस के पति प्रदीप पांडेय जेल में होते और वह विदेश में मौज कर रहा होता.

योजना के अनुसार, संजीव ने सारिका की बहन के बेटे विप्लव गुप्ता तथा साले सागर को फिरोजाबाद बुला लिया. सागर सीए भी था और वकील भी. संजीव ने सागर को अपने ऊपर सूदखोरी के चल रहे मुकदमे की पैरवी के लिए बुलाया था, लेकिन आने पर अपने अपहरण की पटकथा लिखवा डाली.

सारिका किटी पार्टियों की शान मानी जाती थी. कमेटी और किटी में रुपए डालने के लिए सदस्यों को पटाने का काम वही करती थी. कमेटी चलाने की जिम्मेदारी भी उसी की थी. पति के अपहरण के इस ड्रामे में मुख्य भूमिका उसी की थी.

संजीव ने अपने अपहरण का तानाबाना काफी मजबूती से बुना था, पर पुलिस की मुस्तैदी और दूरदर्शिता के कारण उस का ड्रामा सफल नहीं हुआ. पत्रकारों के सामने संजीव, सारिका, विप्लव और सागर को पेश कर के एसएसपी अजय कुमार पांडेय ने बताया कि संजीव अपनी कार को ऐसे रास्तों से अलीगढ़ गया, जिन पर कोई टोलनाका नहीं था.

इसी वजह से वह सीसीटीवी कैमरों की नजर में नहीं आ सका. अलीगढ़ के गभाना टोल प्लाजा के पहले ही उस ने अपनी कार हाईवे के किनारे खड़ी कर के लौक कर दी और बस से दिल्ली के आईएसबीटी बसअड्डे पहुंचा. वहां से चंडीगढ़, मोहाली होते हुए 24 जुलाई को वह जम्मू पहुंच गया.

वहां से वह मनाली गया और 25 से 27 जुलाई तक वहीं रहा. वह रोहतांग भी गया, जहां से मनाली आ गया. मनाली से देहरादून होते हुए 28 जुलाई को वह पानीपत आया, जहां स्वर्ण होटल पहुंचा और योजना के अनुसार अपने अपहरण की कहानी होटल के कर्मचारियों को सुनाई.

दूसरी ओर सारिका ने कई बार सूटकेस ले कर कोठी से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के पहरे की वजह से वह जा नहीं सकी. यह भी उस का एक ड्रामा था. अगर वह निकल जाती तो लोगों से कहा जाता कि सौ करोड़ की फिरौती दे कर वह पति को छुड़ा कर लाई है.

संजीव एक तीर से कई निशाने साधना चाहता था. अपहरण की आड़ में नीता पांडेय और उस के पति को जेल भिजवा कर उन से छुटकारा पाना चाहता था. सौ करोड़ की फिरौती दे कर आने के नाम पर वह कमेटी के कर्ज से छुटकारा पाना चाहता था. क्योंकि लोगों को उस से सहानुभूति हो जाती.

पर सच्चाई सामने आ जाने से संजीव की योजना पर पानी फिर गया. इस की वजह थी ज्यादा लालच. उस ने सौ करोड़ की जो फिरौती की बात की थी, उस पर किसी ने विश्वास नहीं किया.  जिन धाराओं में संजीव और सारिका को जेल भेजा गया है, उन का जेल से बाहर आना मुश्किल है. शानदार कोठी में रहने वाले पता नहीं कब तक जेल की कोठरी में रहेंगे.

संजीव के वकील ने उन की जमानत के लिए अदालत में अरजी लगा कर जमानत की काफी कोशिश की, लेकिन सरकारी वकील की दलीलें सुन कर न्यायाधीश श्री पी.के. सिंह ने जमानत की अरजी खारिज कर दी. एसटीएफ ने जिस तरह इस मामले का खुलासा किया, किसी को उम्मीद नहीं थी. उन की इस काररवाई से खुश हो कर एसएसपी अजय कुमार पांडेय ने उन्हें प्रशस्तिपत्र के साथ 15 हजार रुपए का नकद इनाम दिया है.

इंसपेक्टर अरुण कुमार सिंह का तबादला हो गया है. उन की जगह पर नए कोतवाली प्रभारी भानुप्रताप सिंह आए हैं. वह संजीव गुप्ता और उस के साथियों को रिमांड पर ले कर एक बार फिर पूछताछ करना चाहते हैं.

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क्या है सेक्स ऐडिक्शन ?  

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सेक्स थेरेपिस्ट के साथ रेग्युलर मीटिंग्स के बिना यह बताना बहुत मुश्किल है कि किसे यह डिसऔर्डर है लेकिन कुछ लक्षण है जिनसे आप अंदाजा लगा सकती हैं और फिर डौक्टर से कंसल्ट कर सकती हैं. जैसे, बहुत सारे लोगों के साथ अफेयर होना, मल्टिपल वन नाइट स्टैंड, मल्टिपल सेक्शुअल पार्टनर्स, हद से ज्यादा पॉर्न देखना, अनसेफ सेक्स करना, साइबर सेक्स, प्रौस्टिट्यूट्स के पास जाना, शर्मिंदगी महसूस होना, सेक्शुअल नीड्स पर से नियंत्रण खो देना, ज्यादातर समय सेक्स के बारे में ही सोचना या सेक्स करना, सेक्स न कर पाने की स्थिति में तनाव में चले जाना.

ऐसे पायें छुटकारा

सेक्स ऐडिक्शन  के शिकार लोगों को फौरन साइकौलजिस्ट या साइकायट्रिस्ट के पास जाना चाहिए. साइकौलजिस्ट काउंसिलिंग और बिहेवियर मौडिफिकेशन के आधार पर इस ऐडिक्शन का इलाज करते हैं और मरीज के विचारों में परिवर्तन लाने की कोशिश करते हैं. ऐसे लोगों को दूसरे कामों में व्यस्त रहने की सलाह दी जाती है. उन्हें समझाया जाता है कि वे संगीत, लौन्ग वौक आदि का सहारा लें और अपने परिवारवालों के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं. साइकायट्रिस्ट दवाओं के माध्यम से इलाज करता है.

सेक्स ऐडिक्शन  एनोनिमस (एसएए) सेक्स ऐडिक्शन के शिकार लोगों का संगठन हैं. यहां कोई फीस नहीं ली जाती और न ही दवा दी जाती है. मीटिंग में इसके सदस्य जीवन के कड़वे अनुभवों, इससे जीवन में होने वाले नुकसान और काबू पाने की कहानी शेयर करते हैं. मीटिंग में आने वाले नए सदस्यों को इससे छुटकारा दिलाने के लिए मदद भी करते हैं. इससे पीड़ितों का आत्मबल बढ़ता है और उनमें इस बुरी आदत को छोड़ने की शक्ति विकसित होती है.

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