गरीब मजदूरों की पेंशन योजना

2019 में नरेंद्र मोदी ने बड़ी शानशौकत से प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन पेंशन योजना गरीब मजदूरों के लिए शुरू की थी कि गरीबों को भी पेंशन मिलेगी और उन का बुढ़ापा आराम से कटेगा. कहने को तो यह सरकारी योजना थी पर असल में सिर्फ ढोल सरकारी था, बाकी हर माह श्रमिकों को किस्तें भरने थीं.

इस का प्रीरियम के माह भरना होता है और जितना मजदूर देगा उतना सरकार भी जोड़ेगी. 60 साल की उम्र के बाद मरने तक 3000 रुपए मिलने का वादा किया है.

जैसा इस देश में ङ्क्षहदू धर्म के गुलावे पर होता है, प्रधानमंत्री के बुलावे पर 4 करोड़ लोगों ने इस पेंशन स्क्रीम में भाग भी ले लिया पर 6 महीने में एक चौथाई ने जो जमा किया था वह निकाल लिया और आगे भरना बंद कर दिया. सरकार की गरीब औरतों के लिए उज्जवला गैस योजना की तरह यह भी टायटाय फिस्स योजना है क्योंकि सरकार की नीयत ही साफ नहीं थी.

धर्म के घोड़े पर चढ़ कर आई और धर्म की गाड़ी में चल रही यह सरकार सोचती है कि जैसे मागेश्वर धाम या निर्मल बाबा के झूठे वादों पर लोगों का कल्याण हो जाएगा वैसे ही यह मंदिर, घाट, स्टेचू, कौरीडोर और इस तरह की डटपटांग वादों वाली योजनाओं से कल्याण करा देगी.

रामचरित मानस पढ़ लीजिए. उसे मानने पर भला सिर्फ ब्राह्मïणों का होता है. आम मजदूर, तेली, केवट, शूद्र, सवर्णों की औरतें सब तो मार ही खाती है. यही सरकार की नीतियों से होता है. फायदा सिर्फ सरकार में बैठे हर ब्राह्मïणनुमा अफसर और बाबूका होता है, आम आदमी तो टोकरे भर चढ़ावा चढ़ाने के बाद चुटकी भर प्रसाद पाता है.

यह पेंशन योजना भी ऐसी है और ऐसी सैंकड़ों योजनाएं भाजपा की केंद्र व राज्य सरकारों ने पिछले सालों में जगहजगह चालू की हैं जिन में लोगों ने उम्मीदों से पैसा लगाया पर मिला कुछ नहीं. शौचालय योजना की बात तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूल कर भी कभी दोहराते नहीं हैं पर गांधी परिवार को हर भाषण में कोसने से बाज नहीं आते. पिछले 70 सालों में देश में कुछ नहीं हुआ. जो हुआ इस तरह की पेंशन, उज्जवला, शौचालय योजनाओं से हुआ जिन में गरीबों के पहले लाइन में लग कर भाग लिया फिर उसी तरह भाग खड़े हुए जैसे संतोषी माता के दरबारों से निकल आए.

नतीजा यह है कि  देश में गरीबी बढ़ रही है. सरकार के पैसों पर चल रही इकोनोमिक एडवाइजरी काउंसिल ने ही कहा कि देश में गरीबी उस से कहीं ज्यादा है जितना की दावा किया जाता है. शमिका रौय और मुदित कपूर की एक रिपोर्ट को जो सरकार की पोल खोलती है सरकार ने 272 के बीचे छिपाने का फैसला लिया है.

देश में मंदिर बढ़ रहे हैं, अवारा गाएं बढ़ रही है पर आम मजदूर गरीब हो रहा है.

नपुंसकता: तन से नहीं मन से उपजा रोग

चिकित्सा की भाषा में नपुंसकता यानी इंपोटैंस उस स्थिति को कहते हैं जिस में व्यक्ति मानसिक या शारीरिक रूप से यौन क्रिया का आनंद नहीं ले पाता है. जरूरी नहीं कि यह बीमारी अधिक उम्र के पुरुष में ही हो, बल्कि कुछ नौजवान भी इस के शिकार हो जाते हैं. यह बीमारी प्रजननहीनता यानी इंफर्टिलिटी से अलग है जिस में व्यक्ति के वीर्य में या तो शुक्राणु नहीं होते या बहुत ही कम मात्रा में होते हैं जिस के कारण वह व्यक्ति यौन क्रिया तो सफलतापूर्वक कर लेता है लेकिन संतान उत्पन्न करने में असमर्थ होता है.

दरअसल, इस के पीछे शारीरिक व मानसिक दोनों कारण होते हैं. नए शोधों से पता चला है कि मधुमेह व हार्मोन के असंतुलन से नपुंसकता हो सकती है. शरीर में किसी प्रकार के संक्रमण के कारण व्यक्ति नपुंसकता का शिकार हो सकता है या फिर शरीर में चोट लगना, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान व मदिरापान जैसे अन्य शारीरिक कारण भी हो सकते हैं.

हमारे जीवन में हार्मोंस का बहुत महत्त्व है या कहें कि हमारी दिनचर्या इन हार्मोंस के कारण ही संभव है. यदि किसी पुरुष में टेस्टोस्टेरोन का स्तर सामान्य हो तो उस के नपुंसक होने की संभावना काफी कम हो जाती है. दरअसल, सैक्स की इच्छा के लिए हार्मोन का शरीर में उचित अनुपात में बने रहना जरूरी है. आधुनिक अध्ययनों से साबित हो गया है कि नपुंसकता के 80 प्रतिशत मरीजों के पीछे मानसिक कारण होते हैं जबकि 20 प्रतिशत मरीज शारीरिक कारणों से जुड़े होते हैं. सही तरीके से खानपान व रहनसहन न होने से भी व्यक्ति नपुंसकता का शिकार हो सकता है.

आज की भागतीदौड़ती जिंदगी, बढ़ते तनाव, प्रदूषण और कई बुरी आदतों के साथ असमय खानपान व रहनसहन ने स्वास्थ्य की कई परेशानियों व बीमारियों को जन्म दिया है. इन में नपुंसकता भी है. हालांकि, यह कोई नई बीमारी नहीं है लेकिन आज यह आंकड़ा चौंकाने वाला है कि भारत में हर 10वां व्यक्ति यौनक्रिया में अक्षम है. मधुमेह जैसी कुछ बीमारियां भी नपुंसकता पैदा कर सकती हैं. चूंकि मधुमेह से तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है इसलिए अगर व्यक्ति मधुमेह को नियंत्रित नहीं रखता तो उस में 5-10 साल बाद नपुंसकता आ सकती है. लिंग में रक्त बहाव में अंतर आने या लिंग में चोट आ जाने से भी नपुंसकता आ जाती है.

इस के अलावा वीर्य का पतला या गाढ़ा होना निरंतर वीर्य स्खलन पर आधारित होता है और यह देखा जा सकता है कि कितने दिनों के बाद वीर्य स्खलित हुआ है. शीघ्रपतन में वीर्य स्खलन अगर स्त्री के चरमानंद के पूर्व या संभोग से पूर्व ही हो जाता है, तो यह यौन शक्ति की कमी का लक्षण है. जो लोग सहवास के समय अत्यधिक उत्तेजित हो जाते हैं और स्खलन को नियमित नहीं कर पाते हैं, इस समस्या से ग्रसित हो जाते हैं. इस समस्या के मुख्य कारण संभोग के समय अत्यधिक घबराहट, जल्दबाजी में यौन संबंध स्थापित करना है, लेकिन इस का नपुंसकता से कोई ताल्लुक नहीं है.

विभिन्न जांचों द्वारा थायराइड हार्मोन, प्रोलैक्टिन हार्मोन तथा टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर का पता लगाया जाता है. सैक्सोलौजिस्ट सब से पहले यह पता लगाते हैं कि शरीर में किस हार्मोन की कमी है. उस के बाद उस हार्मोन को पूरा करने के लिए मरीज को हार्मोन दिए जाते हैं. मधुमेह के कुछ रोगियों या मानसिक रोगियों पर दवाएं प्रभावित नहीं होती हैं तो ऐसे मरीजों में सर्जरी की मदद से कभीकभी पेनाइल प्रोस्थेटिक डिवाइस के प्रत्यारोपण की सलाह दी जाती है. कुछ दवाएं भी इलाज के लिए सहायक होती हैं.

यह मरीज पर निर्भर करता है कि वह कितना जल्दी अपनेआप को मानसिक तौर पर तैयार कर लेता है. आजकल थोड़ी सी जागरूकता समाज में आई है, लेकिन लोग कई बार नीमहकीम के चक्कर में पड़ जाते हैं और अपनी जिंदगी से काफी हताश हो चुके होते हैं, इलाज करने पर वे ठीक हो जाते हैं. लेकिन रोग जितना पुराना हो जाता  है या मरीज स्वयं को जितना हताश कर लेता है, डाक्टर को रोग ठीक करने में उतनी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. जब भी किसी व्यक्ति को नपुंसकता की संभावना लगे, तुरंत किसी सैक्सोलौजिस्ट से उचित सलाह ले लेनी चाहिए.

संसार में धूम मचा देने वाली वियाग्रा को ले कर भी कई विरोधाभास हैं. वियाग्रा के सकारात्मक परिणाम कम नकारात्मक परिणाम ज्यादा आ रहे हैं क्योंकि जिस व्यक्ति की आयु 40 से कम है और नपुंसकता का शिकार है उसी व्यक्ति को वियाग्रा की गोली डाक्टर की सलाह पर लेनी चाहिए. लेकिन आज 60 वर्ष से ऊपर के वृद्ध भी इस दवा को ले रहे हैं, चूंकि 60 वर्ष के बाद अकसर कामवासना क्षीण हो जाती है. ऐसे में अपनी सेहत के साथ जबरदस्ती करने से निश्चित तौर पर इस के दुष्परिणाम ही होंगे.

वैसे भी आजकल बाजार में नपुंसकता को ठीक करने के लिए ढेर सारी दवाएं मिल रही हैं. अगर व्यक्ति की समझ ठीक है तो दवा की कोई जरूरत नहीं है. यदि किसी व्यक्ति को कोई शंका हो तो डाक्टर की सलाह के बाद ही उसे किसी दवा का इस्तेमाल करना चाहिए.

आधुनिक लाइफस्टाइल के कारण?भी युवा पीढ़ी में नपुंसकता की समस्या बढ़ती जा रही है. युवा पीढ़ी में नपुंसकता होने का मूल कारण है सही जानकारी का न होना. मातापिता तथा बच्चों में सही तालमेल की कमी.

आजकल इलैक्ट्रौनिक मीडिया तरहतरह की तसवीरें दिखा कर नवयुवकों को उत्तेजित करता है. जहां तक यौन शिक्षा का प्रश्न है, इसे पाठ्यक्रम में जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि किशोरावस्था में शारीरिक विकास के साथसाथ मानसिक विकास भी होता है. युवाओं में जानकारी प्राप्त करने की जो इच्छा है वह सही रूप से, सही जगह से, सही तरीके से मिले.

आने वाली पीढ़ी को नपुंसकता की भयानक त्रासदी से बचाने के लिए बच्चों को सही जानकारी की शुरुआत मांबाप के द्वारा ही की जानी चाहिए. अगर बच्चा कोई गलत हरकत करता है तो मांबाप को उसे समझाना चाहिए. उसे यौन शिक्षा के बारे में जानकारी देनी चाहिए.

साथ ही स्कूल के अध्यापकों को यौन शिक्षा के बारे में बच्चों को बताना चाहिए. मीडिया अपना जितना समय सैक्स संबंधी प्रचार करने में बरबाद कर रहा है उस की जगह यदि अच्छी सेहत या स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम दिखाए तो लोगों में जागरूकता आ सकती है क्योंकि जनजागृति इस रोग का अहम निदान है.

दिल की बात जुबां पर लाएं लड़कियां

स्कूल की दहलीज पार कर मंजू पहली बार जब कालेज पहुंची तो उस की नजर अपनी ही कक्षा के एक हैंडसम लड़के पर टिकी. पहली नजर में ही उसे उस से प्यार हो गया. वह रोजाना उस लड़के को ताकती रहती. उस का ध्यान व्याख्यान पर कम, उस लड़के पर अधिक रहता. हर समय वह उस के खयालों में खोई रहती. रात को भी उसी के सपने देखती. वही उस के सपनों का राजकुमार था.

मंजू के इस एकतरफा प्यार से सभी अनजान थे. मंजू ने अपने मन की बात कभी अपनी सहेलियों तक को न बताई. यहां तक कि घर में अपनी बड़ी बहन और भाभी को भी नहीं. ऐसे में भला उस का प्यार परवान कैसे चढ़ सकता है? प्यार तभी परवान चढ़ता है जब दोनों के दिल एकदूसरे के लिए धड़कते हों. लेकिन यहां तो वह लड़का भी नहीं जानता कि मंजू नाम की कोई लड़की उसे चाहती है.

एक वर्ष बीत गया. मंजू कभी अपने दिल की बात जबां पर नहीं लाई. एक दिन उस ने किसी अन्य लड़की को उस लड़के से हंस कर बात करते हुए देख लिया. वह भी उस से हंस कर बात कर रहा था. मंजू के मन में खटका हुआ. लेकिन उस में इतना साहस नहीं था कि वह अपने प्यार का इजहार कर पाती. नतीजतन, वह लड़का उस के हाथ से निकल गया.

काश, समय रहते वह अपने सपने के राजकुमार से दोस्ती बढ़ाती और फिर अपने प्यार का इजहार करती तो आज उसे इस तरह पछतावा न होता. लेकिन अब पछताने से क्या फायदा जब चिडि़या चुग गई खेत.

प्यार में हिचकिचाहट

संगीता के पिता सरकारी अधिकारी हैं. पिछले वर्ष उन का ट्रांसफर दूसरे शहर में हो गया. नए शहर में नए लोगों के बीच उस की जिंदगी में एक लड़का आया जो उसी मल्टी स्टोरी बिल्ंिडग में पड़ोस वाले फ्लैट में रहता था. कुछ ही दिनों में दोनों परिवारों के बीच अच्छा परिचय हो गया.

संगीता पड़ोस के जिस लड़के को चाहने लगी थी, वह उस से 2 वर्ष सीनियर था. संगीता बीए फर्स्ट ईयर में थी और वह बीए फाइनल में था. एक ही कालेज में होने के कारण उन के बीच अच्छी दोस्ती हो गई. लेकिन संगीता की नजर में वह दोस्त से ऊपर था. वह उस के दिल में बस चुका था. वह उसे अपना हमसफर बनाना चाहती थी.

संगीता से बस एक ही चूक हुई कि वह अपने दिल की बात उसे बता न पाई. इस बीच लड़के के पिता का ट्रांसफर अन्य जगह हो गया और वह अपने परिवार के साथ चला गया. काश, संगीता ने उस से अपने प्यार का इजहार किया होता तो आज स्थिति भिन्न होती.

संगीता का प्यार अधूरा रह गया. उस के सपने पूरे होने से पूर्व ही दफन हो गए.

मंजू और संगीता की भांति ऐसी अनेक लड़कियां हैं जो यौवन की दहलीज पर कदम रखते ही अपनी जिंदगी के तानेबाने बुनने लगती हैं. जिन को वे अपने सपनों का राजकुमार मानती हैं, उन्हें अपना दिल दे बैठती हैं, लेकिन दिल की बात जबां पर लाने में हिचकिचाती हैं.

वैसे, किसी लड़की का किसी लड़के से प्रेम करना गलत नहीं है. इस में भी जज्बात होते हैं. उस का मन हिलोरें भरता है, उस का दिल किसी के लिए धड़क सकता है. इस में असामान्य कुछ भी नहीं है. विडंबना यह है कि आज भी लड़कियां अपने प्यार का इजहार करने में शर्म का अनुभव करती हैं. ऐसे में उन के मन की मुराद अधूरी रह जाती है. जब आप किसी से प्यार करती हैं तो उसे व्यक्त करने में संकोच कैसा? जब कोई लड़का अपने प्यार का इजहार सहज रूप से या बेधड़क हो कर कर सकता है तो लड़की क्यों नहीं?

प्यार तो प्यार है चाहे किसी लड़के को लड़की से हो या लड़की को किसी लड़के से. इस के इजहार में विलंब नहीं करना चाहिए. जब आप किसी को चाहती हैं तो उस से कहती क्यों नहीं?

एक छोटी सी भूल की वजह से जिंदगीभर आप को अपने प्यार से दूर रहना पड़ता है. पहले प्यार को कभी भुलाया नहीं जा सकता. इसलिए यदि आप अपने प्यार को पाना चाहती हैं तो पहली फुरसत में अवसर मिलते ही उस से ‘आई लव यू’ कह दें. यदि सामने वाला इसे स्वीकार कर लेता है तो आप के मन की मुराद पूरी हो जाएगी और यदि किसी मजबूरीवश वह आप के प्यार को कुबूल न कर पाए तो इसे जिंदगी का एक कड़वा घूंट सम झ कर पी जाएं. उसे भूलने की कोशिश करें. आगे अपने जीवन की नई शुरुआत करें. हो सकता है जीवन में आप को इस से भी अच्छा हमसफर मिले. शादी तभी कामयाब होती है जब प्यार दोनों तरफ से हो.

विंक गर्ल Priya prakash फिर चर्चा में, वायरल हुई हॉट फोटोज

साल 2018 में मलयालम फिल्म से वायरल हुआ एक क्लिप ने एक्ट्रेस को रातों-रात सेंशन बना दिया था. ये क्लिप किसी ओर का नहीं बल्कि एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर का था. जिसमे वो आंख मारती हुई नजर आ रही थी. जिस वीडियो से वो से काफी फेमस हो गई थी. अब हाल ही में प्रिया की कुछ फोटो सामने आई है जिससे एक बार फिर सुर्खियो में है.

एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर की फिल्म ‘ओरु अदार लव’ की एक क्लिप ने इंटरनेट पर धूम मचा दिया. भारतीय युवाओं को पागल बनाते हुए, उन्होंने एक नया टैग ‘विंक गर्ल’ हासिल किया और नई ‘नेशनल क्रश’ बन गईं. बता दें, प्रिया सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है अपनी प्राईवेट लाइफ की अपडेट देना पसंद करती है अब इन दिनों प्रिया थाईलैंड में अपनी छुट्टियां बना रही है जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इन फोटो में प्रिया बेहद ही हॉट नजर आ रही है. जिसे देख सब उनके एक बार फिर दिवाने बन गए है.

आपको बता दें, कि शनिवार को Priya Prakash Varrier ने इंस्टाग्राम पर कुछ फोटोज शेयर कीं, जिसमें वह अपने सबसे अच्छे दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाती हुई देखी जा सकती हैं. तस्वीरों में प्रिया और उनकी दोस्तों को बीचवियर पहने देखा जा सकता है. एक्ट्रेस पीले रंग का फ्रिल टॉप और फ्लोरल बॉटम पहने नजर आ रही हैं. जहां चार तस्वीरों में प्रिया अकेले कैमरे के सामने पोज देती नजर आ रही हैं, वहीं बाकी फोटोज में वह अपने दोस्तों के साथ नजर आ रही हैं.

प्रिया ने अपनी पोस्ट को कैप्शन दिया, ‘फी फी में साफ नीले पानी को मना कौन कर सकता है? मेरे दो सबसे अच्छे दोस्त भी नहीं, जो अंदर जाने के ख्याल से कांप रहे थे।. हममें से कोई भी तैरना नहीं जानता, फिर भी स्नॉर्कलिंग और मछलियों के साथ मस्ती करते हुए सबसे अच्छा समय बिताया. आप दोनों के आने के लिए और इसे संभव बनाने के लिए थैंक्यू.’

BB OTT2: फलक नाज हुई घर से बेघर, जिया पड़ी अभिषेक के पीछे?

इन दिनों बिग बॉस में खूब ड्रामा देखने को मिल रहा है जहां एक तरफ दर्शकों को वीकेंड के वार का बेसब्री से इंतजार रहता है वही, इस वीकेंड सलमान खान ने काफी कंटेस्टेंट को फटकार लगाई है.कई घरवालों को नकाब की दुकान बताया है. वही, शो में जिया, अभिषेक के पास आती नजर आ रही है.

आपको बता दें, कि सलमान खान ने वीकेंड के वार में मनीषा रानी को जमकर फटकार लगाई.उन्हे डबल फेस बताया.वही जिया शंकर को भी खूब लताड़ा.साथ ही जद हदीद को भी सलमान खान ने खरी-खोटी सुनाई.सलमान खान ने पहली शुरुआत ग्रुप्स से की. यहां सलमान खान ने कहा कि अभिषेक मल्हान, मनीषा, एल्विश और आशिका का एक ग्रुप बन चुका है. मगर दूसरा जो पांच लोगों का ग्रुप है वो तो आपस में ही एक दूसरे में पत्ता काट रहा है.

सलमान खान ने वीकेंड के वार पर पहले जद हदीद को समझाया. जद को सलमान ने कहा कि वह हमेशा लोगों की पीठ के पीछे बात करते हैं. जद हदीद को सलमान खान ने टास्क वाली बात पर भी टोका. उन्होंने कहा कि जब मिट्टी वाला कैप्टेंसी टास्क हो रहा था तो अभिषेक मल्हान उनका बिगाड़ रहे थे और ऐसे में वह बार बार कह रहे थे कि उनका हो गया। उन्हें नहीं खेलना है. वही, दूसरी तरफ सलमान खान ने ग्रुप वाली बात के बीच फलक और अविनाश के रिश्ते पर भी रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि ये फीलिंग सच्ची दिख रही है. मगर फलक बीच बीच में कंफ्यूज करने वाली बात कहती है.

कौन हुआ घर से बेघर

जद हदीद, अविनाश सचदेव और फलक नाज में से कौन घर से जाने के लिए डिजर्व करता है? घरवालों ने फलक नाज का नाम चुना, जो घर में सबसे कम एक्टिव हैं. ऐसे में अविनाश की आंखें भी नम हो गई. इसी के साथ फलक नाज घर से बेघर हो गईं.

बदतर जिंदगी जीने को मजबूर ‘बाल मजदूर’

इन बच्चों की उम्र 14 साल से कम  है, लेकिन रोजाना इन्हें अकसर 14 घंटे से ज्यादा हाड़तोड़ मशक्कत करनी पड़ती है. कहने को तो ये बाल मजदूर हैं, लेकिन अपनी उम्र और कूवत से बढ़चढ़ कर बालिगों से कहीं ज्यादा मेहनत करते हैं. सुबहसवेरे जब आमतौर पर लोग सो कर उठते हैं, तब तक ये बच्चे रूखीसूखी रोटी का पुलिंदा बगल में दबाए अपनी काम की जगह पर मौजूद हो चुके होते हैं, फिर 15-16 घंटे की मेहनत के बाद थकान से चूर रात को घर लौट कर बिस्तर पर लेटते हैं, तो दूसरे दिन ही नींद खुलती है. यही जिंदगी है इन नन्हे कामगारों की. इतनी मेहनत के बावजूद ये मजदूर महीने के आखिर में पाते हैं महज कुछ सौ रुपए, पर इस से ज्यादा इन्हें मालिकों से मिलता है जोरजुल्म. अपनी बुनियादी जरूरतों से दूर ये बच्चे नाजुक उम्र में ही भयानक बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीड़ी उद्योग के बाल मजदूर नाक की बीमारी, उनींदापन, निकोटिन के जहर से पैदा होने वाली बीमारी, सिरदर्द, अंधेपन वगैरह के शिकार हो जाते हैं, वहीं कालीन उद्योग के बच्चे लगातार धूल और रेशों में रह कर फेफड़ों की बीमारी से घिर जाते हैं.

पटाका और माचिस उद्योग के बाल मजदूर सांस की परेशानी, दम घुटना, थकावट, मांसपेशियां बेकार हो जाने जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं. इसी तरह ताला उद्योग में तेजाब से जलना, दमा, सांस का रुक जाना, टीबी, भयंकर सिरदर्द होना आम बात है. खदानों में काम करने वाले बच्चों की आंखों, फेफड़ों व चमड़ी की बीमारियों का तोहफा मिलता है, तो कांच उद्योग में काम कर रहे बाल मजदूर आग उगलती भट्ठियों के नजदीक हर समय कईकई घंटे तीनों ओर से गरम कांच से घिरे रह कर कैंसर, टीबी और मानसिक विकलांगता जैसी बीमारियां पाल लेते हैं. इसी तरह मध्य प्रदेश के मंदसौर इलाके के स्लेट उद्योग में काम करने वाले बच्चे वहां स्लेट, पैंसिल बनाने के लिए खान से स्लेटी रंग की लगातार उड़ती धूल में रह कर फेफड़ों और सांस की तरहतरह की गंभीर बीमारियों से घिर जाते हैं. गुब्बारा उद्योग में काम करने वाले बच्चों की हालत तो और भी ज्यादा खतरनाक है. वे नन्ही उम्र में ही दिल की बीमारी, निमोनिया और सांस की बीमारी की जकड़ में आ जाते हैं.

इतना ही नहीं, ढाबों में काम कर रहे या घरेलू बाल मजदूर नशीली चीजों के सेवन के आदी तो हो ही जाते हैं, शारीरिक और यौन शोषण, ज्यादा काम और दूसरी तरह से भी वे खूब सताए जाते हैं. गैरसरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खेतखलिहानों, अलगअलग लघु व कुटीर उद्योगों, पत्थर खदानों, ढाबों और घरेलू कामों में तकरीबन 10 करोड़ बच्चे मजदूर बने हुए हैं. यह आलम तो तब है, जब कई लैवलों पर कई सालों से बाल मजदूर उन्मूलन के लिए कायदेकानूनों की झड़ी लगा दी गई है. आज भी नए कानून बनाने व बाल मजदूरी लगाने की कोशिश जारी है. फिर आखिर क्या वजह है कि बाल मजदूरी में कमी आने के बजाय लगातार इजाफा ही हो रहा है?

मिसाल के तौर पर, ‘बाल दिवस’ यानी बच्चों के प्रिय चाचा नेहरू के जन्मदिन के मौके पर जगहजगह सैमिनार, भाषणबाजी और न जाने क्याक्या होता है, पर इन सब से अनजान चाचा नेहरू के 10 करोड़ लाड़ले उस समय रोटी की जुगाड़ में न जाने क्याक्या, सह रह होते हैं. कुछ लोग बच्चों को मजदूर बनाने में उन से काम कराने वालों का भी बहुत बड़ा हाथ मानते हैं. ऐसे लोगों का लालच यही होता है कि बाल मजदूरी सस्ती पड़ती है. छोटेछोटे कुटीर उद्योग जहां जगह की कमी होती है, इसीलिए बच्चों को काम पर रखा जाता है, क्योंकि वे जगह कम घेरते हैं, जिस से ज्यादा से ज्यादा बच्चे वहां ज्यादा से ज्यादा काम कर सकते हैं. ये बच्चे पूरी तरह से असंगठित होते हैं, जिस से अपने शोषण के खिलाफ मालिक के सामने आवाज नहीं उठा सकते. दूसरी ओर, मालिकों को इन्हें रखने की मजबूरी यह होती है कि कुछ काम ऐसे होते हैं, जिन्हें केवल बच्चे ही पूरी सफाई से कर सकते हैं.

मसलन, कालीन उद्योग में कालीन बनाते समय जगहजगह गांठ लगाने की जरूरत पड़ती है. सफाई से गांठ लगाने के लिए उंगलियों का पतला होना जरूरी है, इसीलिए इस उद्योग में बच्चों को अहमियत दी जाती है. इसी तरह माचिस उद्योग में बाल मजदूर लगे होने से माचिसों की बनाने की लागत कम आती है. कम लागत के चलते विदेशी माचिसों से होड़ लेने में दिक्कत नहीं आ रही है. फिर भी बाल मजदूरी कराने वाले मालिकों और बाल मजदूरी के पक्ष में चाहे जो भी दलीलें पेश की जाएं, सचाई तो यही है कि बाल मजदूरी से कई और तरह की सामाजिक दिक्कतें बढ़ी हैं. यह सच है कि गरीबी के चलते बच्चे मजदूरी के लिए मजबूर हैं, पर इस से पैदा होने वाली समस्याएं कहीं ज्यादा गंभीर हैं. चूंकि कुछ इलाको में केवल बच्चों को ही काम पर रखा जाता है, इसलिए उन के मांबाप अकसर बेरोजगार ही होेते हैं.

दूसरी ओर, 15 साल से बड़ा होते ही इन बच्चों को काम से हटा दिया जाता है, इसलिए मांबाप यह मान कर चलते हैं कि ज्यादा बच्चे होने से आमदनी बराबर बनी रहेगी, क्योंकि बड़े बच्चे के काम से हटते ही छोटा संभाल लेगा, फिर उस के बाद उस से छोटा और फिर उस से छोटा. इस सिलसिले को जारी रखने के लिए बच्चों की तादाद ज्यादा रखना मजबूरी बन जाती है. यह सोच आबादी की समस्या को गंभीर बना रही है. पर इन सब में सब से ज्यादा चिंताजनक पहलू तो सेहत ही है, क्योंकि पैसे की कमी में ये बाल मजदूर न तो ठीक से इलाज करा पाते हैं और न ही ठीक से खानेपीने का बैलैंस बनाए रख पाते हैं, इसलिए ये बच्चे जवानी आतेआते गंभीर बीमारियों के शिकार हो कर कदमकदम पर कतराकतरा मौत का इंतजार करते हैं. यकीनन, आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं, लेकिन जहां के एकतिहाई बच्चे बचपन की बुनियादी सुविधाओं से अलग हो कर मेहनतमजदूरी में रातदिन एक कर रहे हैं व कम उम्र में ही भयानक बीमारियों से घिर जाते हैं, भविष्य में उन की जगह कहां होगी? क्या बीमार बच्चों के नाजुक कंधों पर तैयार की जा रही भविष्य के विकास की बुनियाद मजबूत हो पाएगी? कब इन्हें इन का हक मिल पाएगा? इन सवालों के जवाब भारत के नीति बनाने वालों के पास भी नहीं है.

मेरी बीवी का अंग बेहद कसा है, संबंध बनाते समय मेरे अंग की चमड़ी चारों तरफ से फट जाती है, क्या करूं?

सवाल
मैं 35 साल का हूं. 9 साल व 7 साल के 2 बच्चों का पिता हूं. बीवी 30 साल की है. बीवी का अंग बेहद कसा है. संबंध बनाते समय मेरे अंग की चमड़ी चारों तरफ से फट जाती है. क्या करूं?

जवाब
शादी के 10-11 सालों बाद आप को यह दिक्कत हो रही है यानी आप के अंग में कोई खराबी आ गई होगी. आप माहिर डाक्टर को अपनी तकलीफ बता कर इलाज कराएं.

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सैक्स में और्गेज्म की है बड़ी भूमिका, आप भी जानिए

सैक्स की सफलता और्गेज्म पर टिकी होती है. अत: पतिपत्नी दोनों को ही और्गेज्म तक पहुंच सैक्स का आनंद लेना चाहिए. यदि सहवास के दौरान पतिपत्नी दोनों लगन के साथ सैक्स क्रिया का लुत्फ लेते हैं, तो और्गेज्म तक पहुंचना दोनों के लिए आसान हो जाता है. यदि और्गेज्म तक नहीं पहुंचते हैं तो दोनों में तनाव रहता है, झगड़े होने लगते हैं.

दिलीप जब पत्नी रूपा के साथ संबंध बनाते हैं तो फोरप्ले पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, जबकि उन की पत्नी फोरप्ले के साथ तन्मयता से सैक्स करना चाहती हैं. दिलीप के ऐसा न करने से रूपा और्गेज्म तक नहीं पहुंच पाती. अकसर दोनों में इस बात को ले कर झगड़ा होता है.

क्या है और्गेज्म

और्गेज्म सैक्स संबंध की मजबूत कड़ी है. मैडिकल साइंस के अनुसार सहवास के समय शरीर में होने वाले विभिन्न बदलावों और चरमसुख को ही और्गेज्म कहा जाता है. नईनई शादी होने पर सैक्स करने पर महिलाएं और्गेज्म का लुत्फ नहीं उठा पातीं. पर कुछ समय बाद लगातार सैक्स संबंध बनाने पर और्गेज्म पर पहुंच पाती हैं. सर्वे के अनुसार महिलाओं में फर्स्ट और्गेज्म के लिए सही उम्र 18 साल ही है.

गहरीगहरी सांसें लें: और्गेज्म के लिए पतिपत्नी के मन में दृढ़शक्ति और जिज्ञासा होनी जरूरी है. इस का आनंद पूरा शरीर उठाता है. इस की शुरुआत सांसों से होती है. सैक्स संबंध के समय सांसों पर ध्यान दें.

और्गेज्म के समीप पहुंचने पर गहरी सांसें लें और छोड़े. औक्सीजन शरीर में रक्त प्रवाह को तेज करती है. जितनी औक्सीजन लेते हैं सैक्स सुख उतना ही मजेदार बन जाता है.

सैक्स खिलौना: सैक्स टौयज की मदद से बिलकुल अलग तरह का आनंद अनुभव होता है. यह और्गेज्म तक पहुंचने का सब से आसान उपाय है. सैक्ससुख को अनुभव करने के लिए सैक्स टौयज की जरूरत नहीं होती है, लेकिन यह सहवास में उत्तेजना बढ़ाने में सहायक होता है.

कल्पनाओं का सहारा लें: सैक्सी सपने देख कर भी चरमसुख की प्राप्ति होती है. यह सहवास क्रिया को मजेदार और उत्तेजक बनाने में सहायक होता है. यदि पार्टनर के साथ उत्तेजना महसूस नहीं हो रही हो तो ऐसी स्थिति में कल्पना और्गेज्म तक पहुंचाती है.

कामोत्तेजक अंगों से खेलें: सहवास के दौरान अपने शरीर को ऐक्टिव रखें. ज्यादातर महिलाएं शरीर को कड़ा कर लेती हैं, जो गलत है. और्गेज्म के लिए शरीर का भरपूर इस्तेमाल करें.

अलगअलग आसन अपनाएं: सहवास करते वक्त केवल साधारण और आसान तरीके से सैक्स न करें पार्टनर के साथ अलगअलग सैक्स आसन अपना कर सहवास करें. ऐसा करने से और्गेज्म तक पहुंचना आसान हो जाता है.

सैक्स क्रिया में शरीर को लिप्त करें: रिलैक्स रहने की कोशिश करें. संबंध बनाते समय शरीर के 1-1 पार्ट को लिप्त करने की कोशिश करें. कामोत्तेजना के कारण मांसपेशियां सिकुड़ रही हैं तो रिलैक्स रहने की कोशिश करें. फ्रैश मूड से सहवास कर और्गेज्म तक पहुंचें.

फोरप्ले को स्थान दें: सैक्स से पहले चुंबन, स्पर्श, सहलाना, आलिंगन क्रिया करें, क्योंकि इस से कामवासना जाग्रत होती है.

डा. चंद्रकिशोर के मुताबिक पुरुषों की सैक्स इच्छा केवल शरीर तक ही सीमित होती है, जबकि महिलाएं सहवास को भावना से जोड़ती हैं. अत: फोरप्ले से और्गेज्म तक पहुंच कर इंटरकोर्स का सही आनंद लें.

हैल्थ चैकअप कराएं: यदि ये सब कर के भी सहवास में संतुष्टि नहीं मिल रही है, और्गेज्म तक नहीं पहुंच पा रही हैं, तो तुरंत डाक्टर से चैकअप करवाएं. कई बार ज्यादा दवा का सेवन भी और्गेज्म तक नहीं पहुंचने देता है. और्गेज्म तक न पहुंचने से आपसी रिश्ते खोखले होने लगते हैं. आपस में झगड़े होने लगते हैं, मानसिक तनाव होता है, यहां तक कि मैरिड लाइफ खतरे में पड़ जाती है. इसलिए पतिपत्नी दोनों ऐसे संबंध बनाएं कि दोनों ही चरमोत्कर्ष तक पहुंचें.

सैक्स दांपत्य जीवन का अहम हिस्सा है. इसे नजरअंदाज न करें. पतिपत्नी के संबंध को जिस तरह आपसी व्यवहार व सहयोग मधुरता देता है, ठीक उसी तरह सुखी सैक्स भी संबंध को और प्रगाढ़ बनाता है.

Cosmetic Treatment से 40 की उम्र के बाद भी दिखें जवान

बोटोक्स: बोटोक्स का इंजैक्शन मसल्स यानी  मांसपेशियों में लगाया जाता है. इस से उम्र कम लगने लगती है, क्योंकि यह त्वचा पर उभरी लकीरों व झुर्रियों को मिटाने का काम करता है. इस का असर स्थायी नहीं रहता. समयसमय पर इंजैक्शन लगवाते रहना पड़ता है. 28 से ले कर 65 साल तक के लोग इस का इस्तेमाल कर सकते हैं.

फिलर्स: यह भी एक तरह का इंजैक्शन ही है, जिस का प्रयोग त्वचा में कसाव लाने व झुर्रियां मिटाने के लिए किया जाता है. ये इंजैक्शन त्वचा की केवल ऊपरी सतह को छूते हैं. ये बोटोक्स की तरह त्वचा के अंदर तक नहीं जाते.

लाइपोसक्शन: यह ट्रीटमैंट चरबी की परेशानी से मुक्ति दिलाता है. मोटापे से परेशान लोग इस तकनीक का सहारा लेते है. इस के तहत एक छोटी सी सर्जरी के जरीए पेट या शरीर के दूसरे हिस्से के फैट को गलाया जाता है.

लेजर थेरैपी: यह ट्रीटमैंट त्वचा के दागधब्बों व गड्ढों को मिटाने में कारगर है. चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने के लिए भी इस थेरैपी का प्रयोग किया जाता है.

तेजी से बढ़ता प्रसार

डा. सुनील चौधरी कहते हैं कि खूबसूरती की ये मैडिकल तकनीकें पहले भी थीं, लेकिन तब इन का इस्तेमाल मौडल, ऐक्टर या अन्य हाई प्रोफाइल लोग ही करते थे या फिर केवल महिलाएं. मगर आज इन तकनीकों द्वारा सुंदर बनने की दौड़ में सब से ज्यादा 40 पार के पुरुष शामिल हैं.

सही सैंटर का चुनाव

सौंदर्य के प्रति बढ़ती पुरुष वर्ग की चाहत अच्छी है, मगर कहीं से भी ट्रीटमैंट लेने की जल्दबाजी बुरी है. खूबसूरती की ललक में ऐसी गलतियां न करें जो सेहत पर भारी पड़ जाएं. कई लोग विज्ञापन पढ़ कर ऐसे ब्यूटी सैंटर में चले जाते हैं, जहां कोई कौस्मैटिक सर्जन या डर्मैटोलौजिस्ट ही नहीं होता. ब्यूटी ऐक्सपर्ट खुद ये सेवाएं देते हैं, जो खतरनाक साबित होती हैं.

केवल कौस्मैटिक सर्जन या डर्मैटोलौजिस्ट को ही अधिकार है कि ये ट्रीटमैंट्स दे. इन ट्रीटमैंट्स में कई तरह की बारीकियों का ध्यान रखना पड़ता है.

साइड इफैक्ट: ये ब्यूटी ट्रीटमैंट्स पूरी तरह नुकसानरहित नहीं हैं. इन के साइड इफैक्ट होते हैं. जो लोग ढलती उम्र में कभीकभार अर्थात 2-3 बार ही ये उपचार लेते हैं वे खतरे से बचे रहते हैं, पर जो लोग कम उम्र अर्थात 18 से 20 साल से इस का सहारा लेने लगते हैं उन्हें कई तरह के साइड इफैक्ट्स हो सकते हैं. कई बार जिस हिस्से पर ट्रीटमैंट दिया जाता है उस के आसपास की त्वचा संक्रमित हो जाती है. त्वचा पर लाली आ जाती है, वह रूखीसूखी हो जाती है, उस पर छोटेछोटे दाने उभर आते हैं.

सावधानी: किसी कौस्मैटिक सर्जन की सलाह से ही ऐसा कोई ब्यूटी ट्रीटमैंट लें. सस्ते के चक्कर में न पड़ें और जानीपहचानी जगह से ही ट्रीटमैंट लें. डाक्टर को अपनी मैडिकल हिस्ट्री जरूर बताएं, कार्डियोवैस्क्यूलर और न्यूरोमस्क्यूलर सरीखी बीमारियों की गिरफ्त में हों तो किसी भी ट्रीटमैंट से परहेज करें. इन के इस्तेमाल के बाद भी कई तरह की सजगता की दरकार होती है. ऐक्सपर्ट डाइट में जो बदलाव सुझाएं, उन का पालन करें.

सेक्सुअली आइसोलेट रहने का वक्त

सेक्स में खुलापन जरूरी है. जितना इसे मन के अंदर दबाएंगे उतना ही यह उभर कर सामने आएगा, लेकिन सेक्स भी अब संभल कर करना होगा. सेक्स करने से पहले अपने को तैयार करना जरूरी होता है. लेकिन सेक्स के बाद भी आप को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. उन में सब से अहम है सेक्सुअल आइसोलेशन.

अकसर हमारे देश में अपने प्राइवेट पार्ट के बारे में लोग नहीं सोचते. आइसोलेशन का महत्त्व नहीं समझते. उन का ध्यान उस तरफ नहीं जाता, क्योंकि ये बातें बचपन में भी नहीं सिखाई जातीं. लेकिन अब वक्त बदल रहा है. ऐसे में आप को सेक्सुअली आइसोलट होना बहुत जरूरी है. पूरा विश्व इस समय कोरोना महामारी की चपेट में है. सोशल डिस्टैंसिंग पर जोर दिया जा रहा है. ऐसे में सेक्स करते समय कैसे सुरक्षित रहें इस पर ध्यान देने की जरूरत है. अगर मैं सेक्स करता हूं तो क्या मुझे कोरोना हो जाएगा?

आप के जेहन में यह बात कई बार आई होगी, लेकिन आप शर्मिंदगी के डर से यह पूछ नहीं पा रहे हैं तो आइए हम आप को बताते हैं कि कैसे बचें कोरोना से सेक्स करते समय. रिलेशनशिप पर असर अगर आप रिलेशनशिप में हैं और किसी शख्स के साथ रह रहे हैं तो थोड़ी दूरी बना कर रहिए. अगर आप में से किसी को भी कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं तो अपने को आइसोलेट कर लेना चाहिए. इस में पार्टनर को बुरा नहीं मानना चाहिए. इस से दोनों सुरक्षित रहेंगे.

ध्यान रहे सेक्स का मजा तभी ले पाएंगे जब आप बचे रहेंगे. किस पर पाबंदी लगाएं अब आप को किस करने से पहले सोचना पड़ेगा. पहले तो किस को प्यार की निशानी माना जाता था. लेकिन अब यह एक भयानक बीमारी का रास्ता भी हो सकता है. इस का मतलब यह नहीं कि आप किस करें ही न. किस करें लेकिन वो सांकेतिक होना चाहिए. हां अगर आप में खांसीजुकाम के लक्षण दिखाई देते हैं और आप जानते हैं कि आप ने हाल में ही किसी को किस किया है तो आप को उन्हें यह बात बता देनी चाहिए.

अगर आप ने किसी ऐसे को किस किया है जिस में अब लक्षण दिख रहे हैं तो आप को खुद को सैल्फ आइसोलेशन में डाल लेना चाहिए. अगर आप किसी के जननांग छूते हैं तो यह मुमकिन है कि आप ने उसे किस भी किया हो. आप को मालूम है कि यह वायरस सलाइवा से फैलता है. अत: किस करना जोखिम भरा है. ऐसे में जिस पार्टनर के साथ आप रह नहीं रहे हैं उन के साथ कौंटैक्ट मत रखिए. अच्छी सेक्स लाइफ जीएं इस महामारी ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि एक अच्छी सेक्स लाइफ क्या है.

इस बीमारी के कारण जो लोग आइसोलेशन में हैं वे इस मौके और दूरी का फायदा उठा रहे हैं. वे क्रिएटिव हो गए हैं. अगर आप और आप के पार्टनर को एक ही घर में आइसोलेशन में रहना पड़ रहा है तो इस दौरान आप अपने पार्टनर के बारे में काफी कुछ जान सकते हैं. एकदूसरे की पसंदनापसंद को समझ सकते हैं. दूर रहिए लेकिन दिल को जोड़े रखिए. इंटर कोर्स में सावधानी बरतें कोरोना किसी को पहचानता नहीं. वह तो बस एक रास्ता खोजता है.

इंटरकोर्स की वजह से किसी भी तरह के इंफैक्शन का खतरा न रहे इस के लिए आप को सतर्क रहना पड़ेगा. यानी साफसफाई से जुड़ी कुछ बातों को अपनी आदत में शुमार कर लेना चाहिए. सेक्स लाइफ में सेक्सुअल हाइजीन उतनी ही जरूरी है जितना कि हमारे जीवन में साफसफाई. एक सेहतमंद दांपत्य जीवन के लिए यौन संबंधों से पहले और बाद में सफाई रखना जरूरी है.

अकसर लोग सेक्सुअल हाइजीन के बारे में कम ही ध्यान देते हैं जिस से यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफैक्शन का खतरा दोनों ही पार्टनर को बना रहता है. इसलिए साफसफाई का ध्यान रखना चाहिए. सेक्स के बाद आप दोनों को कितनी ही नींद क्यों न आ रही हो लेकिन अगर आप हाइजीन से समझौता करेंगे तो आप को इंफैक्शन होने की आशंका बढ़ जाएगी. यहां यह भी ध्यान देना होगा कि आप को या आप के पार्टनर को सर्दीजुकाम तो नहीं हुआ है.

ऐसे में आप को आइसोलेट करना ही होगा क्योंकि थोड़े से मजे के लिए जीवन को खतरे में नहीं डाल सकते. सेक्सुअल वाशिंग सेक्स से पहले और सेक्स के बाद अच्छी तरह से हैंड वाश करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि बैक्टीरिया और कीटाणु आमतौर पर हमारे हाथों से ही फैलते हैं. सेक्स के दौरान अकसर हम अपना या पार्टनर का जैनिटल एरिया पेनिट्रेट करने के लिए हाथों का इस्तेमाल करते हैं.

ऐसे में अगर आप के हाथ गंदे होंगे तो प्राइवेट पार्ट में बैक्टीरिया ट्रांसफर होने का खतरा बना रहेगा. लिहाजा सेक्स से पहले और इंटरकोर्स के बाद हाथों को अच्छी तरह से रगड़ कर करीब 20 सैकेंड तक साफ करें. यौन संबंध बनाने से पहले और बाद में अपने जननांगो को अच्छी तरह साफ जरूर करें. संक्रमित प्राइवेट पार्ट सेक्स के बाद अपने प्राइवेट पार्ट की सफाई करना भी बेहद जरूरी है. किसी भी तरह के बैक्टीरिया को फैलने से रोकने के लिए बेहद जरूरी है कि इंटरकोर्स के बाद पानी से प्राइवेट पार्ट की सफाई की जाए. आप चाहें तो पानी के साथ माइल्ड साबुन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन अगर आप की स्किन सैंसिटिव है तो आप को इरिटेशन की समस्या हो सकती है. प्राइवेट पार्ट की सफाई के लिए फैंसी लोशन या परफ्यूम का इस्तेमाल करने की बजाए कुनकुने पानी से इसे धोएं.

पार्टनर संग इंटरकोर्स के बाद जब आप बाथरूम में क्लीनिंग के लिए जाएं तो टौयलेट करना न भूलें. इस का मकसद यह है कि आप का ब्लैडर खाली होना चाहिए क्योंकि अगर सेक्स के दौरान किसी तरह का बैक्टीरिया आप के यूरेथा तक पहुंच गया होगा तो टौयलेट के दौरान वह शरीर से बाहर निकल जाएगा. सेक्स के बाद एक गिलास पानी पी कर मन को शांत कर सकते हैं. कौंडम ही बचाव है कोरोना वायरस के कारण दुनिया के कई देशों में लौकडाउन है. कौंडम बनाने वाली कंपनियां भी इस से अछूती नहीं हैं. ऐसे में कौंडम की सप्लाई कम हो रही है दुनियाभर में इस की भारी कमी हो गई है, जिस से बाजार में लोगों को यह नहीं मिल पा रहा है.

अगर आप भी इस स्थिति से गुजर रहे हैं तो कामेच्छा पर काबू रखें. लाइफ पार्टनर से खुल कर इस विषय पर बात करें. दोनों मिल कर रास्ता ढूंढ़ें. अगर आप सेक्सुअल अर्ज को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं तो वह कई तरह से इस पर नियंत्रण पाने में आप की मदद कर सकती हैं. अपने विचारों पर काबू करने की कोशिश करें. हर बार यौन संबंधों के बारे में सोचेंगे तो आप की कामेच्छा को काबू करना नामुमकिन हो जाएगा. बेहतर यही है कि जब भी ऐसा कोई खयाल आए तो दिमाग को तुरंत किसी और थौट की ओर डायवर्ट करने की कोशिश करें. सेक्सुअल ऊर्जा को किसी क्रिएटिव कार्य में लगा दें.

रोमांस और प्यार का मतलब सिर्फ यौन संबंध ही नहीं होता है. मोटे पुरुष और महिला दूर ही रहें कुछ दिनों पहले हुई एक स्टडी से पता चलता है कि पुरुष जिन का वजन अधिक होता है वे ज्यादा सेक्स करते हैं. ऐंगलिया रस्किन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं ने ब्रिटेन के करीब 5 हजार सेक्सुअली ऐक्टिव पुरुषों का विश्लेषण किया है और फिर इस नतीजे पर पहुंचे कि मोटे पुरुष, दुबले-पतले पुरुषों की तुलना में ज्यादा सेक्स करते हैं. सिर्फ पुरुषों में ही नहीं बल्कि महिलाओं में भी यही बात देखने को मिली.

अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि ओवरवेट महिलाओं ने भी कम वजन वाली महिलाओं की तुलना में 16 प्रतिशत ज्यादा सेक्स किया. कोरोना के प्रकोप से बचे रहें इसलिए मोटे लोग सेक्स विचारों से बचें.

Wax कराने से पहले पुरुष जान लें ये बातें

वैक्सिंग कराने में पुरुषों को थोड़ा अजीब लगता है लेकिन आजकल पुरुषों में भी वैक्सिंग कराने का चलन शुरु हो गया है. वैक्सिंग के दौरान होने वाले दर्द को पुरुष सही नहीं मानते है. पीठ, छाती और पैरों में वैक्सिंग से ज्यादा शेविंग पसंद करते है. लेकिन आजकल वैक्सिंग फैशन का हिस्सा बन चुकी है चाहे वो कोई सेलिब्रिटी हो या फिर आम आदमी वैक्सिंग कराना पसंद करते है.

पुरुषों और महिलाओं के लिए वैक्सिंग में बहुत अंतर नहीं होता है. हालांकि, कुछ चीजें हैं जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए. अगर आप भी वैक्स करवाने के बारे में सोच रहे हैं, तो हम आपके लिए कुछ वैक्सिंग टिप्स बताने जा रहे हैं.

वैक्सिंग के समय आपको दर्द कम हो और प्रोसेस आसान हो, तो किसी प्रोफेशनल से वैक्स कराना सुनिश्चित करें. आज हम आपको कुछ महत्वपूर्ण टिप्स बताने जा रहे हैं, जो हर आदमी को वैक्स कराने से पहले पता होनी चाहिए.

1. अपनी स्किन को एक्सफोलिएट करें

आप जिस पार्ट में वैक्स कराना चाहते हैं, उस पार्ट को एक्सफोलिएट करने के लिए आप बाजार से खरीदे गए या नैचुरल स्क्रब का उपयोग कर सकते हैं. वैक्सिंग सेशन से कम से कम दो दिन पहले यह काम सुनिश्चित कर लें. यह आपकी त्वचा को कुछ घंटों के लिए थोड़ा संवेदनशील बना सकता है. लूफै़ण का उपयोग करने से भी स्किन को वैक्सिंग के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है.

2. आइस पैक से दर्द कम करें

आइस या कोल्ड पैक वैक्सिंग के दौरान दर्द को कम कर सकते हैं. वैक्सिंग के दौरान बर्फ, स्ट्रिपिंग से पहले आपकी स्किन को ठंडा और सूथिंग करने में मदद करती है. यह आपकी त्वचा पर लाल चकतों, खुजली और जलन को रोकने में भी मदद करेगा. एलोवेरा जेल भी इस काम को पूरा कर सकता है.

3. बेहतर क्वालिटी के वैक्स का इस्तेमाल करें

वैक्स को अपनी आवश्यकताओं के साथ मिलाएं और बेहतर क्वालिटी वाले वैक्स का चुनाव करें. खासकर अगर आप पहली बार वैक्स करवाने जा रहे हैं, तो ये पाइंट आपके लिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है. 

4. तुरंत एक्सरसाइज न करें

ज्यादातर विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वैक्सिंग करवाने के तुरंत बाद आपको एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए. आपके वैक्सिंग सेशन के बाद कम से कम 24 घंटे तक एक्सरसाइज करने से बचने की सलाह दी जाती है.

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