मेरे पति का औफिस की एक लड़की के साथ फिजिकल रिलेशन है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं शादीशुदा महिला हूं. विवाह को 15 वर्ष हो चुके हैं. मैं अपने पति को बहुत प्यार करती हूं और वे भी मुझे बहुत प्यार करते हैं. हमारा दांपत्य जीवन सुखपूर्वक बीत रहा था कि एक रोज मुझे पता चला कि उन का अपने औफिस की एक लड़की से अफेयर चल रहा है और दोनों के शारीरिक संबंध भी बन चुके हैं.

मैं ने जब इस बाबत उन से पूछा तो उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया और गलती के लिए माफी भी मांगी. मैं ने उन्हें माफ तो कर दिया, लेकिन उन की बेवफाई को चाह कर भी भुला नहीं पा रही. समझ में नहीं आता कि क्या करूं?

जवाब

यह सच है कि जिसे हम प्यार करते हैं, वह जब बेवफाई करता है तो बहुत दुख होता है. इसे आसानी से भुलाया नहीं जा सकता पर दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है. पति पत्नी का रिश्ता परस्पर विश्वास पर टिका होता है, इसलिए आप के पति ने यदि अपनी गलती स्वीकार ली है.

आप से माफी भी मांग ली है और आइंदा आप को शिकायत का मौका न देने का भरोसा दिलाया है, तो आप को उन पर यकीन कर लेना चाहिए. पर साथ ही आप को भविष्य के लिए थोड़ा सतर्क रहना चाहिए.

चिड़िया चुग गईं खेत: शादीशुदा मनोज के साथ थाईलैंड में क्या हुआ था

Story in Hindi

47 की उम्र में भी इतनी हॉट है Gadar 2 की एक्ट्रेस अमीषा पटेल, देखें फोटो

इन दिनों गदर 2 आने वाली फिल्म सुर्खियों में बनी हुई है फिल्म अगले महीने 11 अगस्त को सभी सिनेमाघरों में रिलीज की जाएंगी. ऐसे में गदर 2 की लीड एक्ट्रेस अमीषा पटेल चर्चाओं में चल रही है हाल ही में अमीषा पटेल श़ॉर्ट्स में स्पॉट हुई. जहां वो 47 की उम्र में हॉट पोज देती हुई नजर आ रही है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Ameesha Patel (@ameeshapatel9)

आपको बता दें, कि पूरे 22 साल बाद फिल्म गदर पार्ट 2 रिलीज किया जाएगा. जिसके लीड एक्टर सनी देओल और अमीषा पटेल ऑनस्क्रीन वापसी करेंगे. दोनों एक्टर  और एक्ट्रेस फिल्म का जमकर प्रोमोशन करते दिख रहे है वही, एक्ट्रेस अमीषा पटेल अंधेरी में डबिंग स्टूडियो के बाहर स्पॉट हुई जहां, उनकी मीडिया ने तस्वीरे कैप्चर की थी. एक्ट्रेस ने शॉर्ट्स पहने हुए है. जिसमे वो टोन्ड लेग्स फ्लॉन्ट करती हुई नजर आई है. अब ये फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Ameesha Patel (@ameeshapatel9)

इन तस्वीरों में अमीषा ने व्हाईट स्वीट टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए है, जिसमे वो बेहद ही हॉट लग रही है.इस आउटफिट के साथ उन्होने कैप भी लगाया हुआ है जिनमे वह बेहद ही खूबसूरत नजर आ रही है. इस आउटफिट में अमीषा पटेल ब्लैक कलर का चश्मा लगाए नजर आ रही हैं, इस के साथ उन्होंन एक रेड कलर का पर्स भी ले रखा है. अमीषा पटेल पर यह आउटफिट काफी फब रहा है.

अमीषा पटेल ने इस आउटफिट के साथ व्हाइट कलर के जूते पहने हुए हैं. फोटो में अमीषा अपने हाथों को पीछे बांधकर पैपराजी को पोज दे रही हैं. अमीषा पटेल की इन तस्वीरों पर लोग खूब रिएक्ट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. अमीषा की खूबसूरती की तारीफ करते हुए एक यूजर ने लिखा, “वाह आज भी कितनी खूबसूरत लगती हैं अमीषा.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “ओल्ड इज गोल्ड.

 

 

टमाटर के बढ़ते दामों पर शिल्पा शेट्टी ने शेयर किया Funny Video

इन दिनों टमाटर के बढ़त दामों को लेकर हर कोई चिंता में है कही टमाटर 70 रुपए किलो बिक रहे है तो कही 250 रुपए किलो. ऐसे में लोगों का टमाटर को लेकर परेशान होना जायज है. लेकिन य टमाटर केवल आम आदमी की चर्चा का विषय नहीं बन गया है बल्कि सिलिब्रिटी भी टमाटर के दामो को लेकर परेशान है राखी सावंत , सुनील शेट्टी और ऊर्फी जावेद टमाटर को लेकर रिएक्ट कर चुके है वही, अब शिल्पा शेट्टी ने टमाटर के दामो को लेकर एक वीडियो शेयर किया है. जो कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

आपको बता दें, कि टमाटर के बढ़ते दामों को लेकर राखी सावंत ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमे वो टमाटर का अपने ही घर पर पेड उगा रही थी, अब इसके बाद शिल्पा शेट्टी ने अपना वीडियो शेयर किया है जो कि फन्नी वीडियो है. ये वीडियो शिल्पा शेट्टी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है, जिसपर लोग खूब कमेंट कर रहे है. बता दें, इस वीडियो के साथ शिल्पा ने कैप्शन दिया है कि ‘टमाटर के दाम मेरी दिल की धड़क्कन बढ़ा रहे है’

शिल्पा शेट्टी के इस मजेजार वीडियो पर लोग खूब कमेंट कर रहे है एक फैन ने लिखा कि अंजलि ‘मैं तुम्हे छू लू ये हो नहीं सकता, तुम मुझे छू लो ये मैं होने नहीं दूंगा’ तो दूसरे यूजर ने लिखा है कि ‘मैडम आपके लिए तो सोने के टमाटर भी मंहगे नहीं है’ तो तीसरे यूजर ने लिखा है कि ‘मैडम आप तो टमाटर की पूरी फैक्टरी लगा सकती हो’.तो चौथे यूजर ने लिखा कि ये ‘टमाटर तो आपके लिए सस्ते है मंहगाई का असर तो गरीब और मीडिल क्लास वालो को ही पड़ता है आप जैसे लोगों को नहीं’.

 

बारिश के मौसम में खुद को बनाएं ग्लोइंग, फेस पर हल्दी के साथ यूज करें ये चीजे

अक्सर बारिश के मौसम में आपकी स्कीन खराब होने के ज्यादा संभवाना रहती है जिसके लिए ज़रुरी है कि आप होममेड चीजों से अपनी स्कीन को हैल्दी रखें. इसलिए आज हम अपने लेख में कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताएंगे. जिन्हे आप हल्दी के साथ फेस पैक बनाकर अपने फेस पर इस्तेमाल कर सकते है और स्कीन को ग्लोइंग और शाइनिंग बना सकते है.

1. हल्दी और बेसन

आप अपनी त्वचा पर हल्दी और बेसन का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसे में आप एक कटोरी में बेसन और हल्दी को मिलाएं. अब बने मिश्रण में गुलाब जल डालें. उसके बाद प्रभावित स्थान पर लगाएं. अब से 20 मिनट बाद अपनी त्वचा को साधारण पानी से धो लें. ऐसा करने से त्वचा में कुदरती निखार आ सकता है. आप इस फेस पैक का इस्तेमाल नियमित रूप से भी कर सकते हैं.

2. हल्दी और दूध

आप एक कटोरी में हल्दी और दूध को मिलाएं. अब अपने चेहरे पर हल्के हल्के हाथों से मसाज करें. तकरीबन 10 मिनट बाद अपनी त्वचा को साधारण पानी से धो लें. ऐसा करने से न केवल पिगमेंटेशन की समस्या से राहत मिल सकती है बल्कि यह फेस पर दाग धब्बे झुर्रियां आदि से भी राह दिला सकता है. हल्दी और दूध को मुलायम और चमकदार बनाने में भी उपयोगी है.

3. हल्दी और एलोवेरा

एक कटोरी में एलोवेरा जेल निकालें और उसमें हल्दी को मिलाएं और गुलाब जल की कुछ बूंदें डालें और बने मिश्रण को 10 से 15 मिनट के लिए अपनी त्वचा पर लगाएं. उसके बाद अपनी त्वचा को ठंडे पानी से धो लें. ऐसा करने से न केवल त्वचा को हाइड्रेट किया जा सकता है बल्कि त्वचा मुलायम और चमकदार भी बन सकती है.

4. हल्दी और दही

आप एक कटोरी में हल्दी और दही को अच्छे से मिक्स करें. अब इस मिश्रण को 15 मिनट के लिए अपनी त्वचा पर लगाएं. उसके बाद अपनी त्वचा को साधारण पानी से धो लें. ऐसा करने से न केवल त्वचा के दाग धब्बे दूर होंगे बल्कि पिंपल्स, स्पॉट्स, पिगमेंटेशन जैसी समस्या से भी रह सकती है.

औनलाइन सेक्स फैंटेसी बना एक नया बिजनेस

जब जमाना औनलाइन हो रहा है तो सेक्स भी औनलाइन नज़र आ रहा है. एक सर्वे के मुताबिक दुनियाभर में ‘डौमीनेटरिक्स’ का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है. लोगों की फैंटसी पूरी करने के लिए हजारों महिलाएं पूरी दुनिया में हर वक्त ऑनलाइन रहती हैं.

डौमीनेटरिक्स से जुड़कर महिलाएं पूरी कर रही मर्दों की फैंटेसी

एक सर्वे से साफ हुआ है कि औनलाइन रहने वाली महिलाएं दिनभर में एक-एक लाख रुपए तक कमा रही है. डौमीनेटरिक्स के लिए एक मिनट का 500 रुपए तक चार्ज लिया जा रहा है. इसी सर्वे के मुताबिक अपनी सेक्सुअल फैंटेसी पूरी करने के लिए डौमीनेटरिक्स में मर्दों की पहली पसंद बौन्डेज सेक्स एंजौय करना है.

अंग्रेजी अखबार द सन के अनुसार ब्रिटेन में पिछले दिनों 55 साल के एक डॉक्टर ने अपनी डौमीनेटरिक्स पिक्चर औनलाइन पोस्ट कर दी. डौक्टर के पेट पर उसकी मेड का नाम लिखा था जिसके साथ उसने शारीरिक संबंध बनाए. हालांकि डौक्टर को बाद में हॉस्पिटल से सस्पेंड कर दिया गया.

ग्लासगो की रहने वाली 34 साल की एना वैसे तो काफी स्ट्रिक्ट है कि लेकिन औनलाइन डिमांड होने पर उन्हें लेटैक्स पहनने में भी कोई ऐतराज नहीं है. हालांकि औनलाइन न्यूड होने से वो परहेज करती हैं लेकिन औनलाइन सेक्स चैट वो अक्सर करती हैं.

उनका कहना है कि शायद मर्दों की फैंटेसी पूरा करने का ये सही तरीका है. इससे वो भी काफी हल्का महसूस करते हैं. वो हमसे अक्सर वो डिमांड करते हैं जिसे वो अपने पार्टनर के साथ पूरा नहीं कर सकते हैं. एना की फीस पर मिनट ढाई सौ रुपए है.

ब्रिजटन की मिया हरिंगटन का कहना है कि शायद मर्द हमसे कुछ ऐसा सीखना चाहते हैं जिसे वो अपने घर पर आजमा सकें. मिया कहती हैं महिलाओं और पुरुषों के अलावा तमाम कपल्स भी उनके क्लाइंट हैं और वो अपने सेक्सुअ फैंटेसी मुझे देखकर पूरी करना चाहते हैं.

डॉमीनेटरिक्स के बारे में क्या सोचते हैं साइकोलॉजिस्ट

ब्रिटेन की नौटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ मार्क ग्रिफिथ्स को लगता है कि इंटरनेट के बढ़ते चलन के कारण लोग सेक्स फैंटेसी पूरी करने के लिए ऑनलाइन डॉमीनेटरिक्स का सहारा ले रहा है. ये आसानी से उपलब्ध है. जो लोग फेस टू फेस डॉमीनेटरिक्स का सामना करने में हिचकते हैं वो औनलाइन जा रहे हैं. जहां वो खुलकर सामने आते हैं.

कंगाल करने वाला कौलसेंटर : ठगी का नया तरीका

जयपुर के रहने वाले चरण सिंह शेखावत उस दिन घरेलू काम में व्यस्त थे, तभी उन के मोबाइल फोन की घंटी बजी. उन्होंने मोबाइल की स्क्रीन पर नजर डाली. जिस नंबर से फोन आ रहा था, वह नंबर उन का जानापहचाना नहीं था. उन्हें वह नंबर राजस्थान से बाहर का लगा. उन का बात करने का मन नहीं था, फिर भी उन्होंने यह सोच कर अनमने मन से फोन रिसीव किया कि फोन किसी परिचित का न हो. फोन रिसीव कर के उन्होंने जैसे ही कान से लगाया, दूसरी ओर से युवती की खनकती सी आवाज आई, ‘‘सर, आप जयपुर से चरण सिंह शेखावतजी बोल रहे हैं न?’’

‘‘जी, मैं चरण सिंह ही बोल रहा हूं.’’ उन्होंने युवती के सवाल पर सहज भाव से जवाब दिया.

‘‘सर, मैं नोएडा से इंडो सफायर जर्नीज लिमिटेड कंपनी से बोल रही हूं,’’ दूसरी ओर से युवती ने कहा, ‘‘हमारी कंपनी शेयर मार्केट से जुड़ी हुई है. हमारी कंपनी की नजर में ऐसी कुछ कंपनियां हैं, जिन में निवेश करने पर आप का पैसा एक साल में ही लगभग दोगुना हो सकता है.’’

एक साल में पैसा दोगुना होने की बात में दिलचस्पी लेते हुए चरण सिंह ने युवती से कई सवाल पूछे. उन के हर सवाल का जवाब उस ने आत्मविश्वास से दे कर उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘सर, आप पूरी तरह से निश्चिंत रहिए, आप का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. फिर भी अगर आप को किसी तरह की कोई शंका है तो मैं आप की बात कंपनी के बौस से करा दूंगी.’’

‘‘ठीक है, आप मेरी बात अपनी कंपनी के किसी बड़े औफिसर से करा देना. उस के बाद मैं विचार करूंगा.’’ चरण सिंह ने कहा. इसी के साथ नोएडा से आया फोन कट गया.

यह बात कोई दोढाई साल पहले की है. नोएडा से आए उस फोन के एकदो दिन बाद ही चरण सिंह शेखावत के मोबाइल पर फिर फोन आया. इस बार नंबर दूसरा था. दूसरी ओर से अनजान युवती बड़ी ही शिष्टता से हिंदी और अंगरेजी में बोल रही थी. चरण सिंह के हैलो कहते ही उस युवती ने कहा, ‘‘सर, मैं नोएडा से इंडो सफायर जर्नीज लिमिटेड कंपनी से बोल रही हूं. मैं कंपनी की वाइस चेयरपरसन हूं. एकदो दिन पहले आप की हमारी कंपनी की एग्जीक्यूटिव से बात हुई थी.’’

‘‘जी, नोएडा से एक फोन आया था,’’ चरण सिंह ने कहा, ‘‘एक लड़की बता रही थी कि शेयर कंपनियों में निवेश करने पर एक साल में ही रकम दोगुनी हो जाएगी.’’

‘‘सर, हमारी एग्जीक्यूटिव ने आप को बिलकुल सही बताया है.’’ दूसरी ओर से उस वाइस चेयरपरसन युवती ने कहा.

‘‘ऐसा कैसे संभव है कि एक साल में ही हमारा पैसा दोगुना हो जाएगा?’’ चरण सिंह ने थोड़ा हैरानी से पूछा.

युवती ने चरण सिंह की शंका को दूर करते हुए कहा, ‘‘सर, आप को पता ही होगा कि शेयर मार्केट में लिस्टेड कई कंपनियां ऐसी हैं, जिन के शेयरों के भाव एक साल में ही दोगुने से भी ज्यादा हो जाते हैं. हमारी कंपनी ने शेयर मार्केट के कई विशेषज्ञ हायर किए हुए हैं. वही विशेषज्ञ हमें बताते हैं कि आजकल किन कंपनियों में निवेश करने का अच्छा मौका है. हम आप जैसे लोगों से पैसा जुटा कर वैसी ही कंपनियों में निवेश करते हैं. उस के बदले जो रिटर्न मिलता है, वह हम अपने कस्टमर को दिलाते हैं. हमारी कंपनी इस काम का केवल कमीशन लेती है. यह आप के लिए अच्छा मौका है. आप हमारी कंपनी के साथ जुड़ कर शेयर मार्केट में निवेश कर के अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं.’’

‘‘ठीक है, मैं इस विषय पर सोच कर एकदो दिन में आप को बताता हूं.’’ चरण सिंह ने कहा.

अधेड़ उम्र के चरण सिंह शेखावत को शेयर मार्केट के बारे में ज्यादा कुछ जानकारी नहीं थी, लेकिन इतना तो पता ही था कि शेयर मार्केट में ऐसी कई कंपनियां हैं, जिन के शेयरों के भाव बहुत तेजी से चढ़तेगिरते रहते हैं. उन्होंने इस बारे में अपने एकदो परिचितों से बात की तो उन्होंने भी यही कहा कि शेयर कंपनियों में निवेश करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन कोई भी निवेश करने से पहले उस कंपनी के बारे में अच्छी तरह से पता जरूर कर लेना.

चरण सिंह शेखावत कुछ समय पहले ही सरकारी नौकरी से रिटायर हुए थे. वह राजस्थान सरकार की सैकेंड ग्रेड की नौकरी में थे. रिटायर होने पर उन्हें ग्रैच्युटी एवं पीएफ वगैरह की एक बड़ी रकम मिली थी. वह रकम उन के बैंक खाते में जमा थी, जिसे वह कहीं निवेश करना चाहते थे. वह चाहते थे कि किसी ऐसी कंपनी में उन का पैसा निवेश किया जाए, जिस से उन्हें अच्छा रिटर्न मिलता रहे, ताकि बुढ़ापे में उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो और जिंदगी आराम से गुजर सके.

कुछ दिनों बाद नोएडा की उस कंपनी से एक बार फिर चरण सिंह के मोबाइल पर फोन आया. इस बार तीसरे नंबर से फोन किया गया था. फोन करने वाली युवती ने अपना परिचय दे कर पूछा, ‘‘सर, आप ने शेयर बाजार की कंपनियों में निवेश के बारे में क्या विचार किया?’’

‘‘निवेश तो हम कर देंगे, लेकिन इस बात पर कैसे भरोसा किया जाए कि मुझे एक साल में करीब दोगुना रिटर्न मिल जाएगा?’’ चरण सिंह ने चिंता जाहिर करते हुए पूछा.

‘‘सर, आप निश्चिंत रहिए. हमारी कंपनी बाकायदा आप को लिखित पेपर्स देगी, जिस में साफ लिखा होगा कि हम आप के पैसों का शेयर मार्केट में लिस्टेड कंपनियों में निवेश करेंगे और अच्छा रिटर्न दिलवाएंगे.’’ युवती ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा.

‘‘चलो ठीक है, आप की बात मान लेता हूं. लेकिन हमें करना क्या होगा?’’ चरण सिंह ने पूछा.

‘‘सर, आप को पहले हमारी कंपनी में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.’’ युवती ने कहा.

‘‘ठीक है, आप हमारा रजिस्ट्रेशन कर दीजिए.’’ चरण सिंह ने कहा.

‘‘सर, कंपनी में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आप को 12 हजार रुपए जमा कराने होंगे.’’ युवती ने कहा, ‘‘आप चाहें तो यह पैसा हमारी कंपनी के बैंक खाते में औनलाइन जमा करा सकते हैं. आप हमारा बैंक एकाउंट नंबर नोट कर लीजिए.’’

चरण सिंह ने बैंक एकाउंट नंबर नोट करते हुए कहा, ‘‘ठीक है, मैं एकदो दिन में आप की कंपनी के खाते में रजिस्ट्रेशन फीस के 12 हजार रुपए जमा करा दूंगा.’’

चरण सिंह ने युवती द्वारा बताए बैंक एकाउंट में 12 हजार रुपए औनलाइन जमा करा दिए. पैसे जमा कराने के कुछ समय बाद ही उन के मोबाइल पर मैसेज आ गया कि उन का कंपनी में रजिस्टे्रशन हो गया है. उन्हें कंपनी की ओर से एक रजिस्ट्रेशन नंबर भी दिया गया.

कंपनी में रजिस्ट्रेशन होने के बाद चरण सिंह को कंपनी से फोन कर के शेयर मार्केट की अलगअलग लिस्टेड कंपनियों के नाम बता कर उन्हें निवेश की सलाह देते हुए रकम की मांग की जाती रही. इस में खास बात यह रही कि चरण सिंह के पास जब भी नोएडा की उस कंपनी से फोन आता था, नए नंबर से ही आता था. चरण सिंह ने इस बात पर कभी ध्यान नहीं दिया. उन्होंने भरोसा करते हुए अलगअलग समय पर 42 लाख रुपए से ज्यादा की रकम नोएडा की उस कंपनी के बैंक खातों में जमा करा दी.

इस बीच कूरियर से चरण सिंह के पास कागजात भी आते रहे. उन कागजातों में बताया गया था कि कंपनी ने उन की रकम का निवेश शेयर मार्केट की कंपनियों में कर दिया है. बारबार मोटी रकम जमा कराने के बाद जब समय पर रिटर्न नहीं मिला तो चरण सिंह परेशान हुए.

उन्होंने न जाने कितनी बार उन नंबरों पर फोन किया, जिन से उन के पास फोन आते थे. उन नंबरों पर बात करने से चरण सिंह को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. हर बार उन्हें यह कह कर टरका दिया जाता था कि आप को जल्दी ही अच्छा रिटर्न मिल जाएगा. आप का पैसा जल्दी ही आप के बैंक खाते में आ जाएगा.

लंबे इंतजार के बाद भी जब चरण सिंह को कोई रिटर्न नहीं मिला तो उन्हें शक हुआ. उन्होंने अपने रिश्तेदारों और परिचितों से इस बारे में सलाह ली, तब परिचितों ने ठगी की आशंका जताते हुए पुलिस से मदद लेने की सलाह दी.

इसी साल 24 अप्रैल को चरण सिंह अपने कुछ परिचितों के साथ जयपुर दक्षिण के थाना अशोक नगर पहुंचे और थानाप्रभारी को सारी बात बताई. उन की बात सुन कर थानाप्रभारी को तुरंत अहसास हो गया कि चरण सिंह के साथ ठगी हुई है. उन्होंने उसी दिन उन की रिपोर्ट भादंवि की धारा 420 एवं 120बी के तहत दर्ज कर ली.

शेयर मार्केट में निवेश के बाद अच्छे रिटर्न का औफर दे कर लोगों से ठगी करने के इस तरह के एकदो अन्य मामले कुछ दिनों पहले ही जयपुर पुलिस की जानकारी में आए थे. चरण सिंह के साथ 42 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी हुई थी. जयपुर के पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने अपने मातहत अधिकारियों को इस तरह सूचना प्रौद्योगिकी की नई तकनीकों के जरिए आर्थिक अपराध करने वालों का पता लगाने का आदेश दिया.

पुलिस कमिश्नर के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (प्रथम) प्रफुल्ल कुमार एवं पुलिस उपायुक्त (अपराध) डा. विकास पाठक ने कार्ययोजना बना कर पुलिस की एक टीम गठित की. इस टीम में सहायक पुलिस आयुक्त (अन्वेषण) पुष्पेंद्र सिंह, इंसपेक्टर राजकुमार, मुकेश चौधरी, एसआई मनोज कुमार, कृष्ण कुमार, हरि सिंह के अलावा सिपाही राजेश, अभिमन्यु कुमार सिंह, महेंद्र कुमार, बसंत सिंह, बिश सिंह, श्रीमती नीरज एवं श्रीमती मुकेश को शामिल किया गया.

इस टीम में क्राइम ब्रांच की तकनीकी शाखा एवं संगठित अपराध शाखा के अधिकारियों को भी शामिल किया गया. इस टीम ने कई दिनों की जांच के बाद पता लगा लिया कि अभियुक्त संगठित तरीके से कालसैंटर की आड़ में अपराधों को अंजाम दे रहे हैं. ये अभियुक्त सफेदपोश बन कर अलगअलग कंपनियों की आड़ में नोएडा में कालसैंटर चला कर धोखाधड़ी कर लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी कर रहे हैं.

व्यापक जांच के बाद जयपुर पुलिस की टीम ने 15 जून, 2017 को नोएडा पुलिस की मदद से नोएडा के सेक्टर-2 स्थित प्लौट नंबर ए-74 में बनी बिल्डिंग से संचालित इंडो सफायर जर्नीज लिमिटेड कंपनी के कालसैंटर पर छापा मारा. वहां 2 दरजन से ज्यादा लड़कियां काम कर रही थीं.

पुलिस ने जांच के बाद इस कंपनी के 5 निदेशकों को गिरफ्तार कर लिया, जिन में मोहम्मद इकराम निवासी शाहीन बाग, ओखला, नई दिल्ली, मोहम्मद आमिर निवासी बाटला हाउस, जामियानगर, नई दिल्ली, शाहिद खान एवं मोहम्मद यामीन निवासी ग्राम शीलपुर, पोस्ट कुबाकी, जिला मुरादाबाद तथा मेहराज आलम निवासी इंदिरापुरम, गाजियाबाद शामिल थे.

जयपुर कमिश्नरेट ने इस कालसैंटर पर छापे के दौरान सिम सहित 37 मोबाइल फोन एवं 24 सिम अलग से, 5 लैपटौप, 1 लाख रुपए नकद, 23 इंटरकौम फोन व वौकीटौकी, कई मोहरों सहित ढेर सारे दस्तावेज बरामद किए थे.

नोएडा से पांचों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर पुलिस जयपुर ले आई. पुलिस ने इन से कड़ी पूछताछ के आधार पर सुनील कुमार देवतवाल को गिरफ्तार किया. सुनील कुमार मूलत: राजस्थान के करौली जिले के टोडाभीम कस्बे का रहने वाला था. आजकल वह जयपुर में जगतपुरा में रह रहा था. इन सभी अभियुक्तों से पूछताछ में जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

सुनील कुमार देवतवाल कुछ सालों पहले आईसीआईसीआई बैंक में दिल्ली के स्टेट हैड मार्केटिंग के पद पर काम करता था. इस से पहले उस ने आदित्य बिड़ला, अमेरिकन एक्सप्रैस, यस बैंक आदि में भी काम किया था. आईसीआईसीआई बैंक में जब वह स्टेट हैड मार्केटिंग था, तब मोहम्मद इकराम उस के पास सहायक के रूप में काम करता था.

बाद में सुनील कुमार ने आईसीआईसीआई बैंक की नौकरी छोड़ दी और दिल्ली में स्टार ट्रैवल्स नाम से कंपनी खोली. यह कंपनी ज्यादा नहीं चली. इस में उसे घाटा होने लगा तो उस ने यह कंपनी बंद कर दी. इस के बाद उस ने जयपुर की पौश कालोनी सी स्कीम के सुभाषमार्ग पर 506 अलौकिक हाइट्स में एक्सरोस टूर्स एवं एक्सपीयर मैक्स ट्रैवल्स नामक कंपनी खोली.

दूसरी ओर मोहम्मद इकराम ने भी सुनील कुमार के नौकरी छोड़ने के बाद आईसीआईसीआई बैंक की नौकरी छोड़ दी थी. फिर भी दोनों एकदूसरे के संपर्क में बने रहे. चूंकि सुनील कुमार देवतवाल कई नामी बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों में काम कर चुका था, इसलिए उस के पास इन कंपनियों का करोड़ों कस्टमर्स का डाटाबेस था. इन के अलावा भी उस ने कई कंपनियों का डाटा जुटा रखा था. इस तरह करीब 20 कंपनियों का डाटाबेस उस ने अवैध तरीके से हासिल किया हुआ था.

मोहम्मद इकराम को पता था कि सुनील कुमार के पास करोड़ों लोगों का डाटाबेस है. इस में उन लोगों के नामपते व फोन नंबरों के अलावा उन की वित्तीय स्थिति का आकलन था. इकराम शातिर दिमाग था. उस ने आसान तरीके से लोगों को ठग कर पैसा कमाने की योजना बना डाली. इस के लिए उस ने कुछ साथियों की मदद से सुनील से वह डाटाबेस खरीद लिया. करोड़ों लोगों का डाटाबेस हाथ में आने के बाद उस ने अपने भरोसे के साथियों के साथ मिल कर औनलाइन ठगी का धंधा शुरू कर दिया.

पहले उन्होंने छोटे स्तर पर ठगी का धंधा शुरू किया. इस के लिए उन्होंने इंडो सफायर जर्नीज लिमिटेड, सेमटेक्स ट्रैवल, सेमटेक्स फाइनेंसर्स, इंडो सफायर कंसडिंग प्रा.लि. आदि कंपनियां बनाईं. शेयर मार्केट की कंपनियों में निवेश के नाम पर लोगों को ठगने का उन का धंधा चल निकला तो इन्होंने नोएडा के सेक्टर-2 में एक कालसैंटर बना लिया. इस कालसैंटर के आलीशान दफ्तर से 3 दरजन से ज्यादा लड़केलड़कियों को नौकरी पर रखा गया.

ये लड़केलड़कियां लोगों को फोन कर के अपनी लच्छेदार बातों से शेयर मार्केट में निवेश के लिए फांसते थे. ये सभी अवैध तरीके से जुटाए बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के डाटा के जरिए ऐसे लोगों को तलाशते थे.

ऐसे लोगों की जानकारी हासिल कर के  ये उसे अपने कालसैंटर के जरिए फोन करते और लगातार संपर्क में रह कर उसे निवेश करने के लिए प्रेरित करते. कालसैंटर से जो फोन किए जाते थे, वे फरजी आईडी से हासिल सिम से किए जाते थे, ताकि पुलिस इन तक पहुंच न सके. जयपुर के रहने वाले चरण सिंह शेखावत को इस कालसैंटर के जरिए 24 अलगअलग मोबाइल नंबरों से फोन किए गए थे.

कोई भी आदमी जब इन की बातों में फंस जाता था तो सब से पहले वे उस से कंपनी में रजिस्ट्रेशन के नाम पर 12 हजार रुपए अपने बैंक खाते में औनलाइन जमा कराते थे. इस के बाद फाइल चार्ज और फिर धीरेधीरे निवेश के नाम पर रकम ऐंठते रहते थे. अपने शिकार से ये पूरी रकम औनलाइन ही ट्रांसफर कराते थे. ठगी की राशि जमा कराने के लिए इन लोगों ने सैंट्रल बैंक औफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, सिंडिकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीबीजे, इंडसइंड बैंक, आईडीबीआई बैंक, एक्सिस बैंक और स्टेट बैंक औफ इंडिया में खाते खुलवा रखे थे. ये सभी खाते अभियुक्तों ने खुद और परिवार वालों के नाम खुलवा रखे थे.

पुलिस जांच में पता चला है कि इन लोगों ने 23 बैंक खातों में पिछले 6 महीने में लगभग 6 करोड़ रुपए की रकम जमा करवाई थी. शिकार से बैंक खाते में रकम जमा कराने के बाद ये चैक से रकम निकाल लेते थे. सभी खातों से ज्यादातर रकम निकाल ली गई थी. पुलिस ने अभियुक्तों के बैंक खातों में जमा 12 लाख 50 हजार रुपए की रकम सीज कराई है.

पूछताछ में पता चला है कि पकड़े गए लोगों ने पिछले करीब एक साल में राजस्थान सहित देश के 23 राज्यों में 256 फरजी मोबाइल नंबरों से 4 हजार 879 से अधिक फोन किए थे. इन में 414 फोन राजस्थान में किए गए थे. राजस्थान का एक भी ऐसा जिला नहीं बचा, जहां इन लोगों ने फोन कर के ठगी न की हो.

इन के पास से डेबिटक्रैडिट कार्ड होल्डर्स, डाक्टर्स, इंश्योरेंस, एटीएम, इनवेस्टर्स, एनआरआई, बजाज अलायंज, सिटी बैंक, होंडा और हुंडई गाड़ी खरीदने वालों के डाटा भी मिले हैं.

गिरफ्तार किए गए सुनील कुमार से इलैक्ट्रौनिक डिवाइस में सैकड़ों फाइलें मिली हैं, जिन में एकएक फाइल में 6 लाख से 20 लाख लोगों तक का डाटा है. एक फाइल में एयरटेल पोस्टपेड मोबाइल धारक 20 लाख उपभोक्ताओं का डाटा मिला है. इन फाइलों में ऐसी भी जानकारी है कि किस आदमी ने किस बैंक या इंश्योरेंस कंपनी से कौन सी पौलिसी करवाई है. वह उस का कितना प्रीमियम देता है. उस आदमी का नामपता, मोबाइल नंबर के साथ अन्य जानकारियां भी हैं.

पूछताछ में सुनील कुमार ने बताया कि वह भी नोएडा जैसा कालसैंटर जयपुर में खोलना चाहता था, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया. सुनील कुमार ने जयपुर में ट्रैवल एजेंसी के नाम से ठगी की थी. वह जयपुर के अशोकनगर एवं थाना ज्योतिनगर में सन 2016 में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में जेल जा चुका है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. पीडि़त का नाम बदला हुआ है.

मेरी बेटियां शादी के लिए मना करती है वो मुझे अकेला नहीं छोड़ना चाहती है, मैं क्या कंरु?

सवाल

मैं 2 बेटियों का 55 साल का पिता हूं. मेरी पत्नी की 5 साल पहले मौत हो गई थी. दोनों बेटियों की उम्र शादी की हो गई है, पर मैं अकेला उन के लिए लायक लड़के नहीं ढूंढ़ पा रहा हूं. इधर मेरी दोनों बेटियां शादी करने से इनकार कर रही हैं. वे मुझे अकेला नहीं छोड़ना चाहती हैं. मुझे यह बात दिनरात खाए जा रही है. इस का समाधान बताएं?

जवाब

-बेटियों को आप की फिक्र है, इसलिए शादी से मना कर रही हैं. लायक लड़कों की खोज जारी रखें और उन्हें समझाएं कि शादी जरूरी है और इस से आप को कोई परेशानी नहीं होगी. एकाध दामाद ऐसा ढूंढ़ने की कोशिश करें, जो घरजंवाई बनने के लिए राजी हो जाए या फिर आप के ही शहर का रहने वाला हो. इस से लड़कियों को चिंता नहीं रहेगी.

वैसे आप भी दूसरी शादी कर सकते हैं, क्योंकि अकेलापन आप को भी खलेगा. कोई अच्छी सी जीवनसाथी मिले तो बिना किसी की परवाह किए शादी कर लें

तेजतर्रार तिजोरी – रघुवीर ने अपनी बेटी का नाम तिजोरी क्यों रखा

Story in Hindi

वश फिल्म : ‘‘प्रतिभा को दबाया नहीं जा सकता..’’ – विवेक जेटली

सोनीपत,हरियाणा निवासी और बैंकर पिता के बेटे विवेक जेटली हाई स्कूल की पढ़ाई के बाद ही थिएटर से जुड़ गए थे.पर फिर उन्होने मास कम्यूनीकेषन में मास्टर की डिग्री हासिल की.कुछ माह एक टीवी न्यूज चैनल में एंकरिंग भी की. पर अभिनय जगत में कुछ कारनामा करने के मकसद से उन्होेने टीवी न्यूज चैनल को अलविदा कह माॅडलिग से जुड़ गए.इंटरनेषनल माॅडल बनने के बाद कई म्यूजिक वीडियो किए.अब 21 जुलाई को प्रदर्षित फिल्म ‘‘वष’’ में वह हीरो बनकर आए हैं.

प्रस्तुत है विवेक जेटली से हुई बातचीत के अंष..मास कम्यूनीकेषन में मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद अभिनय की तरफ मुड़ने की कोई खास वजह?

– मैं सोनीपत,हरियाणा का रहने वाला हॅॅंू.पर मेरे पिता जी पंजाब नेषनल बैंक में थे.हर तीन वर्ष बाद उनका तबादला होता रहता था तो हम सोनीपत से करनाल, चंडीगढ़ व दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई षहरों में रहे.घर वालों की मर्जी के लिए मैने मास कम्यूनीकेषन में मास्टर की डिग्री हासिल की.जबकि जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रहा था,तब अचानक मेरी मुलाकात अभिनेता अनुज षर्मा से हुई थी.जिनसे प्रेरित होकर मैं थिएटर से भी जुड़ गया था.

तो मेरी पढ़ाई और थिएटर साथ साथ चल रहा था.अब अनुज षर्मा मेरे बड़े भाई की तरह हैं.अनुज षर्मा ने ही मेरे अभिनय की षुरूआत करवायी.उन्होने ही सिखाया कि अभिनय क्या है.अनुज जी खुद ही बहुत बड़े कलाकार हैं.उन्होने कई जटिल किरदार निभाए हैं.मैने उनके साथ तकरीबन पचास से अधिक स्ट्ीट प्ले किए.मास कम्यूनीकेषन की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैने जीन्यूज में तीन माह का इंटर्न षिप की.पर वहां मन नही लगा.तब मैं अभिनय की तरफ मुड़ गया.

मुझे अहसास हुआ कि ईष्वर ने मेरे अंदर अभिनय की चीजें दी हैं,पर मुझे उन्हंे पाॅलिष करने की जरुरत है.इस बीच मैंने टीवी चैनल पर एंकर के रूप में काम करना षुरू किया.‘होमषापिंग’ चैनल पर एंकरिंग की.फिर वायस ओवर करने लगा.उसके बाद पिं्रंट माॅडलिंग की.कुछ एड फिल्में की.उसके बाद मुझे लगा कि अब मुंबई जाकर फिल्मी दुनिया’ के समुद्र में गोतेलगाना चाहिए.इसलिए मंुबई आ गया.पर मैने तय कर रखा था कि मुझे टीवी नही करना है.मैने माॅडलिंग में काफी नाम कमाया.

मुंबई पहुॅचने के बाद संघर्ष करना पड़ा या आसानी से काम मिलने लगा?

-अनुज भइया पहले से बाॅलीवुड में सक्रिय हैं,तो मुझे उनके माध्यम से यह बात संभल में आयी कि इस इंडस्ट्ी की कार्यषैली क्या है? यहां काम कैसे होता है? एक कलाकार को काम कहां से मिलेगा? जबकि तमाम लोगों को तो राह पता ही नही होती है.अब तो हाईटेक जमाना है.मैने अनुज भइया से समझकर प्रोडक्षन हाउस के चक्कर लगाए.मैने आॅडीषन दिए.इस तरह अनुज भइया से काफी मदद मिली.मुझे पता था कि इस इंडस्ट्ी में मेरे बाप दादा नही है,तो मुझे सब कुछ अपनी प्रतिभा के बल पर ही पाना है.इसलिए मैने अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए काफी मेंहनत की.

जब आप सुनने की क्षमता रखते हैं तो आप सीखने की भी क्षमता रखते हैं.जो इंसान सीखना चाहता है,उस तो पगडंडी मिलना तय है.उसका बेहतर कलाकार वह बनना तय है.तो मेरा प्रयास खुद को बेहतरीन कलाकार बनाने का ही रहता है. मैने सीखा कि यहां पर पैषन/धैर्य बहुत जरुरी है.मैने संमय रखा और अब ‘वष’ में हीरो बनकर आया हॅूं.

फिल्म ‘‘वष’’ से जुड़ना कैसे हुआ?

-यह फिल्म मेरी तकदीर में लिखी हुई थी.मैं अंतरराष्ट्ीय स्तर का माॅडल हूं.मैने कुछ म्यूजिक वीडियो में भी अभिनय किया है.मैं मालदीव में एक गाने की षूटिंग करके मंुबई वापस आया था और आस्ट्ेलिया जाने की तैयारी कर रहा था.तभी फिल्म के गीतकार अजय गर्ग के कहने पर आॅडीषन देने चला गया.क्योकि मुझे फिल्म में हीरो दिखना था.जब मैं आॅडीषन देने गया तो निर्देषक जगमीत समुद्री ,अजय गर्ग, कैमरामैन मनोज षाॅ से मिला.टभ्म पसंद आयी.मैने महसूस किया कि यह लोग तो ए ग्रेड की बेहतरीन फिल्म बनाने वाले हैं.तो मैं आॅडीषन देकर वापस आ गया.पर सभी को मेरा आॅडीषन इतना पसंद आया कि उन्हेोने मुझे पेरलल लीड की बजाय मेन लीड में लेने की बात सोचकर दूसरे दिन पुनः आॅडीषन के लिए बुलाया.मंैने आॅडीषन दिया और मेरा चयन मेनलीड के तौर पर हो गया.

आपके अनुसार फिल्म ‘‘वष’’ क्या है?

-यॅूं तो आप भी जानते है कि ‘वष’ का षब्दिक अर्थ किसी को अपने वष में कर लेना होता है.इस फिल्म में भी ऐसा ही कुछ है.मैं निजी जीवन में स्प्रिच्युअल इंसान हॅूं.ईष्वर में यकीन करता हॅूं.जब ख्ुादा है,जब रब है,तो स्वाभाविक तौर पर बुरी ताकतंे भी हैं.वष में आज की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से,अपने कल्चर,अपने ट्ेडीषन से दूर जा चुकी है.जबकि फिल्म ‘वष’ सभी को उनकी अपनी जड़ांे व कल्चर से जोड़ती है.जो कहती है कि ऐसा भी होता है.अन्यथा जब तक हम अनुभव नहीं करते,तब तक यकीन नहीं करते.हम अक्सर सुनते हैं कि रात में बाबा आया और डरा दिया.मैं यकीन से नही कहता कि ऐसा कुछ होता हे या नहीं.लेकिन हमारी जड़ें कहती हंै कि अगर भगवान है,तो षैतान भी है.तो फिल्म ‘वष’में भगवान व षैतान दोनों की बात की गयी है.पर इस फिल्म में किसकी जीत होती है,यह तो फिल्म देखने पर ही पता चलेगा.

आपको नही लगता कि ‘वष’ जैसी फिल्में अंधविष्वास को बढ़ावा देती हैं?

-देखिए,विष्वास व अंधविष्वास के बीच एक बहुत बारीक रेखा है.लेकिन यह कहना गलत होगा कि हमारी फिल्म ‘वष’ में अंधविष्वास को बढ़ावा दिया गया है.इस फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है,उस पर निर्देषक ने बाकायदा रिसर्च किया है.इस फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है,उसे निर्देषक ने स्वयं देखा है और पढ़ा है.फिल्म देखकर आप यह नही कहेंगे कि यह तो कुछ भी दिखा रहे हैं.इस फिल्म में उसे ही दिखाया गया है, जिसे आप हर धर्म की किताब में पढ़ सकते हैं.

अपने किरदार को किस तरह से परिभाषित करेंगें?

-फिल्म ‘वष’ में मेेरे किरदार का नाम रक्षित है.बहुत साधारण व षरीफ लड़का है.लंदन में पढ़ा बढ़ा है और विवाह करने के लिए हिमाचल प्रदेष,भारत आया है.वह अपने प्यार को पाने और परिवार के लिए कुछ भी कर सकता है.मगर षादी से पहले ही उसके साथ कुछ ऐसी चीजें होती हैं,जो कि उसको सोचने पर मजबूर करती हैं.

कहानी में एक पात्र के तौर पर कई सौ वर्ष पेड़ है.उसके बारे में क्या बताना पसंद करेंगें?

-इस बारे में मैं ज्यादा कुछ नही बता सकता.मगर हमारी फिल्म हिमाचल के जिन घने जंगलों में फिल्मायी गयी है,वहां आप षाम को पांच छह बजे के बाद जा नही सकते.वहां पर जंगली जानवर हैं.अजगर हैं.वहीं पर हमने पूरे 12 दिन क्लायमेक्स फिल्माया.आप जिस पेड़ की बात कर रहे हैं,वह हमारी कहानी का अहम हिस्सा है.हमने जंगल में 12 दिन की षूटिंग के दौरान किसी भी पषु को नुकसान नही पहुंचा.

क्या ओटीटी पर जिस तरह की सामग्री आ रही है,उससे समाज को नुकसान है?

-देखिए,ऐसा नही कह सकते.ओटीटी पर काफी अच्छा कंटेंट आ रहा है.मैं मानता हॅूं कि कुछ कंटेंट नही बनना चाहिए.छोटे छोटे बच्चों को भी वह एक्सपोजर मिल रहा है,जो नही मिलना चाहिए.तो यहां पर पैरेंटिंग बहुत मायने रखता है. हर माता पिता को इस बात पर निगाह रखनी चाहिए कि उसके बच्चे क्या देख रहे हैं.हर बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार कंटेंट देखने की अनुमति दी जानी चाहिए.मैं मानता हॅंू कि यदि आपके अंदर प्रतिभा है,तो आप अच्छा कंटेंट बनाकर फेषबुक या इंस्टाग्राम पर डालकर फिल्मकार की नजरों में आ सकते हैं.पर ऐसा करते समय यह भी देखना चाहिए कि आप कौन सा कंटेंट बना रहे हो.क्योंकि सोषल मीडिया पर छोटे बच्चे भी देखते हैं.वैसे हर कंटेंट के अपने फायदे व अपने नुकसान है.हर इंसान बड़ा बनना चाहता है.इस प्रोसेस में कुछ चीजें भी आती हैं,जिनसे नुकसान भी होता है.इसी वजह से कुछ लोग आत्महत्या कर लेते हैं.तो कहीं न कहीं क्रिएटर और माता पिता को भी अंकुष रखना चाहिए.

सोषल मीडिया के चलते प्रतिभा को नुकसान हो रहा है.इंस्टाग्राम के फालोवअर्स की संख्या बल पर कलाकार को फिल्मों में काम मिल रहा है?

-षायद ऐसा हो रहा हो.लेकिन हीरा अपनी चमक तो विखेर ही देगा.जिनके फालोवअर्स ज्यादा हैं,उन्हे षायद जल्दी अवसर मिल जाए.पर निर्देषक व दर्षक तो उनकी प्रतिभा ,उनकी काबीलियत का आकलन करेंगे ही.पर देर सबेर जब भी प्रतिभा को अवसर मिलेगा,वह अपना जलवा दिखाकर ही रहेगा.

आपके षौक क्या हैं?

-किताबें पढ़ने का षौक है.मैं स्प्रिच्युअल किताबें ज्यादा पढ़ता हॅूं.मुझे लिखने का षौक है.मैं षायरी भी लिखता हॅूं.मैं तो कहता हॅूं कि मैने इष्क में पीएचडी किया है.मैने इष्क पर बहुत लिखा है.जिंदगी पर काफी लिखा है.यात्राएं करने का षौक है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें