तंत्रमंत्र ने भरमाया, मासूम बेटा गंवाया

35 साला उमेश परिहार के पास वह सबकुछ था जिस की दरकार किसी को भी होती है, मसलन अपना बड़ा सा घर, खूबसूरत स्मार्ट बीवी, 4 मासूम बच्चे, मांबाप और खुद की कार. यह सब उस ने अपनी मेहनत से हासिल किया था.

पेशे से ड्राइवर उमेश मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले धार के गांव घाटबिल्लोदा के चंदननगर महल्ले में रहता था. काम के सिलसिले में अकसर उस का आनाजाना इंदौर और उज्जैन लगा रहता था. लेकिन जब से धार्मिक शहर उज्जैन में महाकाल कौरिडोर बना है, तब से उस के फेरे उज्जैन ज्यादा लग रहे थे.

पिछले कुछ महीनों से उमेश उज्जैन में ही रहने लगा था. अपनी बोलेरो कार उस ने किराए पर उठा दी थी. उज्जैन का माहौल दूसरे धार्मिक शहरों की तरह पूरी तरह धार्मिक है, जहां सुबह से बमबम भोले के नारे लगना शुरू होते हैं, तो देर रात तक यही सिलसिला चलता रहता है.

इस शहर में धर्मगुरुओं, ज्योतिषियों, बाबाओं और तांत्रिकों के इफरात से आश्रम और अड्डे हैं, जिन में ख्वाहिशमंद लोगों की लाइन लगी रहती है.

किसी को घरेलू कलह और लाइलाज बीमारी से छुटकारा चाहिए रहता है तो किसी को नौकरी की दरकार रहती है. बेटी की शादी के लिए भी लोग इन डेरों के चक्कर काटते नजर आते हैं, तो किसी को पितृ दोष से मुक्ति के लिए यह शहर मुफीद लगता है.

धनदौलत चाहने वालों का तो कहना ही क्या. यहां के काल भैरव मंदिर में शराब का भोग लगता है, जहां शनि उतरवाने के लिए दुनियाभर के लोग आते हैं. उज्जैन के महाकाल मंदिर में शिव अभिषेक करने के लिए तो हस्तियों का तांता लगा रहता है.

ऐसे माहौल का अलगअलग किस्म के लोगों पर अलगअलग असर पड़ता है. उमेश पर असर पड़ा तंत्रमंत्र का और उस में भी मरघट यानी श्मशान सिद्धि का, जिस के लिए उज्जैन खासतौर से जाना जाता है.

क्षिप्रा नदी के किनारे अघोरियों की श्मशान साधना होती है, जिस के बारे में तरहतरह के मनगढ़ंत किस्सेकहानियां फैलाने वालों ने फैला रखे हैं, जिन में से एक यह भी है कि अगर मरघट में तंत्रमंत्र और क्रियाएं करते रहने वाले बाबा किसी को आशीर्वाद दे दें, तो उस के वारेन्यारे होने से कोई नहीं रोक सकता.

ये बाबा आमतौर पर नंगे रहते हैं और अपने शरीर पर श्मशान की राख या भभूत लपेटे रहते हैं, चौबीसों घंटे गांजे और भांग के नशे में चूर रहने के चलते इन की आंखें सुर्ख लाल रहती हैं. इन्हें देखने भर से आम लोग डरते हैं, क्योंकि ये बेहद डरावने लगते हैं.

मतलब, उज्जैन में मुरादें पूरी करने की छोटीमोटी दुकानों समेत बड़ेबड़े शोरूम और माल्स भी हैं. जिस की जैसी हैसियत होती है, उस के मुताबिक वह आशीर्वाद खरीद लेता है, जिस की कोई गारंटी नहीं होती.

इस खालिस ठगी के धंधे में कैसेकैसे लोग उल्लू बनते हैं, इस की एक बानगी उमेश परिहार भी है, जिस के सिर पर रातोंरात रईस बनने का भूत कुछ ऐसे सवार हुआ कि उस ने अपने ही हाथों अपने 2 साल के बेटे भीम की इतनी बेरहमी से हत्या कर दी कि देखने वाले तो दूर की बात है, सुनने वालों की भी रूह कांप उठे.

लालच में गड़े धन के

कोई विरला ही होगा, जिस ने गड़े धन के किस्सेकहानी नहीं सुने होंगे जिन का सार यह रहता है कि जमीन के नीचे इफरात से सोनाचांदी, हीरेजवाहरात गड़े रहते हैं, जिन्हें तंत्रमंत्र के जरीए निकाला जा सकता है.

लेकिन यह काम आसान नहीं है, क्योंकि जमीन में गड़े धन की हिफाजत खतरनाक जहरीले सांप करते हैं, इसलिए यह पैसा माहिर गुरुओं, जो तांत्रिक ही होते हैं, जिन की सरपरस्ती और देखरेख में ही निकाला जाना चाहिए, नहीं तो लेने के देने पड़ जाते हैं और 90 फीसदी मामलों में गड़ा धन या खजाना निकालने वाला बेमौत मारा जाता है.

उज्जैन आतेजाते उमेश ने भी ऐसी चमत्कारी कहानियां सुनी थीं. सो जल्द ही अमीर बनने के सपने ने उस की रात की नींद और दिन का चैन छीन लिया. यहां तक कि उस ने अपनी कार के बोनट पर भी खोपड़ी का निशान बनवा लिया था.

बोलेरो कार किराए पर उठाने के बाद उमेश ऐसे किसी सिद्ध बाबा की तलाश में जुट गया जो तंत्रमंत्र सिखा दे, जिस से वह गड़ा धन निकाल कर बिना मेहनत किए ऐशोआराम की जिंदगी जिए.

इस के पहले उमेश परिहार किन्नरों का ड्राइवर हुआ करता था, जिन्होंने उसे खूब पैसा दिया था. लेकिन तंत्रमंत्र के फेर में पड़ कर वह नशा करने लगा और काम में भी आलस बरतने लगा तो किन्नरों ने भी उस से किनारा कर लिया.

उमेश की यह तलाश बमबम बाबा की शक्ल में पूरी हुई. उज्जैन में बमबम बाबा का बड़ा नाम है, जो अघोरी हैं और श्मशान साधना के स्पैशलिस्ट माने जाते हैं.

इस बाबा के बारे में भी कई चमत्कारिक किस्से उज्जैन के लोग सुनाते हैं कि वे पहुंचे हुए सिद्ध पुरुष हैं. एक बार जिस पर खुश हो जाएं, उस की हर मुराद पूरी हो जाए और जिस से गुस्सा हो जाएं, तो खड़ेखड़े ही उसे भस्म कर दें.

उमेश ने इस बाबा के बारे में सुना तो उसे लगा कि यही बाबा उसे गड़ा धन दिला सकते हैं. लिहाजा, वह बमबम बाबा के चक्कर काटने लगा.

कई दिनों की मिन्नत और मनुहार के बाद बाबा उसे अपना चेला बनाने को तैयार हुआ, लेकिन इस शर्त के साथ कि पहले किसी की बलि चढ़ाओ, तभी अपना चेला बनाऊंगा.

लालच में अंधा हो चुका उमेश पूरी तरह बाबा की गिरफ्त में आ चुका था, इसलिए यह बेवकूफी करने को भी तैयार हो गया.

लेकिन आजकल के जमाने में किसी की बलि लेना यानी उस की हत्या कर देना आसान काम नहीं रह गया है, सो वह परेशानी और चिंता में पड़ गया कि किस की बलि दे.

तंत्रमंत्र किस तरह अच्छेखासे आदमी की अक्ल हर लेता है, यह अब उमेश को देख सहज समझा जा सकता था, जिस के जेहन में बलि के लिए अपने ही जिगर के टुकड़े मासूम भीम के चेहरा कौंध गया.

बेरहमी से कुचल डाला

एक तरफ बेटा था तो वहीं दूसरी तरफ करोड़ों की काल्पनिक दौलत, जिस के बूते वह ऐशोआराम के खयालीपुलाव पका रहा था. अंधविश्वास के दलदल में गहरे तक धंस चुके उमेश को भीम सौफ्ट टारगेट लगा था, क्योंकि वह विरोध नहीं कर सकता था और आसानी से उसे मारा जा सकता था.

लिहाजा, बीती 5 सितंबर को उज्जैन से उमेश सीधा अपने घर घाटबिल्लोदा जा पहुंचा. घर पहुंचते ही उस ने ऊटपटांग हरकतें शुरू कर दीं. पहले तो उस ने पूजा का सारा सामान जमाया और फिर एक कटोरे में आग जला ली.

घर पर मौजूद उमेश की पत्नी, मां और पिता हैरान थे कि वह यह क्या कर रहा है. पूरे घर को आग का धुआं देता वह मंत्र भी बुदबुदाता जा रहा था और अपने साथ लाई भभूत भी वह घर में बिखेरता जा रहा था.

ये हरकतें देख कर पिता और पत्नी ने उसे टोका तो उस ने उन दोनों को पीट डाला. इस के बाद अचानक ही उस ने भीम को उठाया और उसे भी पीटने लगा तो पत्नी और घबरा गई, क्योंकि अब उमेश के सिर पर पागलपन सवार हो चुका था.

किसी अनहोनी से डरी पत्नी ने भीम को उमेश से छुड़ाना चाहा तो वह और बिफर उठा और खुद को बेटे समेत दूसरे कमरे में ले जा कर शटर बंद कर लिया. घर के लोग चिल्लाते रह गए, लेकिन पगलाया उमेश भीम को मारता रहा तो पत्नी ने पास के थाने की तरफ दौड़ लगा दी.

पुलिस तुरंत आ गई, लेकिन लाख कहने और धमकाने के बाद भी उमेश ने शटर नहीं खोला. देखते ही देखते वह बेटे को जमीन पर ऐसे पटकने लगा, जैसे धोबी कपड़े धोता है.

उस मासूम के रोनेचिल्लाने और चीखने का इस वहशी पर कोई असर नहीं हुआ. वह लगातार उसे पटकता रहा, जिस से उस की मौत हो गई. नजारा इतना डरावना था कि पुलिस वाले भी कांप उठे, क्योंकि भीम के शरीर की चटनी बन चुकी थी और सारा कमरा खून से लाल हो चुका था.

कोई और चारा न देख कर पुलिस ने शटर काटने के लिए गैस कटर का इंतजाम किया, लेकिन तब तक वह हैवान अपने मकसद में कामयाब हो चुका था. पुलिस को धमकाते हुए उस ने घर को गैस सिलैंडर से धमाका करने की धमकी भी दी थी.

शटर काट कर पुलिस वाले अंदर कमरे में गए, तब भी उमेश बमुश्किल काबू में आया. उस ने आग लगाने की कोशिश की और एक सिपाही को काट भी खाया. खुद को भी उस ने नुकसान पहुंचाया.

गिरफ्तारी के बाद उमेश को पीथमपुर के अस्पताल में भरती किया गया, क्योंकि उस की दिमागी हालत ठीक नहीं थी. पुलिस वाले जंजीर से बांध कर उसे ले गए. उस समय वहां मौजूद सारे लोग उमेश और उस के तंत्रमंत्र को कोस रहे थे, लेकिन सबक किसी ने लिया कि इस फरेब में नहीं पड़ेंगे, कहा नहीं जा सकता.

मेहनत से मिलता है धन देश में रोज कहीं न कहीं कोई न कोई ऐसे ही किसी अंधविश्वास मसलन तंत्रमंत्र, झाड़फूंक, ज्योतिष और टोनेटोटकों के फरेब में पड़ कर बरबाद हो रहा होता है और खुद का और दूसरों का नुकसान कर रहा होता है.

लेकिन सबकुछ जाननेसमझने के बाद भी लोग संभलते नहीं तो इस के जिम्मेदार वे खुद तो हैं ही, लेकिन इफरात से हर कहीं धूनी रमाए बैठे चिलम फूंकते बमबम बाबा जैसे तांत्रिक भी कम गुनाहगार नहीं ठहराए जा सकते, जो लोगों को बहलातेफुसलाते हैं.

उमेश को तो सजा होना तय है, लेकिन जब तक ऐसे बाबाओं पर कड़ी कार्यवाही नहीं होगी, तब तक कोई न कोई भीम तंत्रमंत्र की बलि चढ़ता रहेगा.

रही बात रातोंरात अंबानी और अडानी बन जाने के ख्वाब और ख्वाहिश की तो वह अगर तंत्रमंत्र से पूरी होना मुमकिन होती तो देश में सभी लोग अमीर होते. कम से कम वे बाबा तो होते ही, जो करोड़पति बनने का रास्ता चंद रुपयों में दिखाया करते हैं. लेकिन खुद भिखारियों सी जिंदगी जीते हैं.

महिलाओं का आरक्षण है जरुरी

महिलाओं को आरक्षण देने का कानून तो अब 2023 में बना है पर लागू होने में उसे 5 साल लगते हैं, 10 साल लगते हैं, पर शैड्यूल कास्टों और शैड्यूल ट्राइबों को 1950 से रिजर्वेशन मिला हुआ है लेकिन साजिश इस तरह की है कि आज सनातन धर्म की बदौलत लगभग 4.3 फीसदी ब्राह्मण मंदिरों में 100 फीसदी, मीडिया में 90 फीसदी, राजसभाओं में 50 फीसदी, मंत्री स्तर के सचिव 54 फीसदी, सुप्रीम कोर्ट में 96 फीसदी, हाईकोर्ट में 80 फीसदी, राजदूत 81 फीसदी हैं.

व्यापार में 70-80 फीसदी वैश्य होंगे और सेना के अफसरों के आंकड़े मिलते नहीं हैं, पर पक्का है कि 70-80 फीसदी से कम नहीं होंगे. यह तब है जब नौकरियों और पढ़ाई में एससी को 15, एसटी को 7.5, ओबीसी को 27 फीसदी रिजर्वेशन है.

मतलब यह है कि संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी का रिजर्वेशन जब भी औरतों को मिलेगा वे फिर भी घरों में, समाज में, व्यापारों में, राजनीति में केवल डैकोरेशन पीस बनी रहेंगी. धर्म और राजा की मिलीभगत से सदियों से औरतों को जो दबा कर रखा है, वह आज भी उन के खून में है.

किसी भी कंस्ट्रक्शन साइट पर देख लें. आधी औरतें होंगी पर वे ही सुबह पानी भर कर लाती हैं, सुबह व दोपहर का खाना लाती हैं, बराबर की सी दिहाड़ी मिलने के बाद भी रात को खाना बनाती हैं, बच्चों को पालती हैं, कपड़े धोती हैं, पूजापाठ का जिम्मा उन के सिर पर होता है.

आदमी घर से बाहर बैठ कर दारू पीता है, बीड़ीसिगरेट पीता है, जब चाहे कमाऊ बीवी को पीटता है. अफसर बनीं आधी औरतों ने इन औरतों की सुध नहीं ली तो सांसद व विधायक बन कर वे क्या कर लेंगी? यह छलावा नहीं तो क्या है?

आज औरत अपने मनपसंद लड़के से शादी नहीं कर सकती, अकेले बच्चे पैदा नहीं कर पाती, लड़ाकू, हिंसक, निकम्मे मर्द को छोड़ नहीं पाती. विधवाओं और तलाकशुदाओं को अकेले जीना पड़ता है जबकि विधुर व तलाकशुदा मर्द चार दिन में दूसरी शादी कर सकते हैं.

कुछ कानून बने हैं जो औरतों को हक देते हैं पर ये हक वे तब ले पाती हैं जब पिता या भाई साथ खड़े हों. तभी 1956 व 2005 के कानूनों के बावजूद औरतों को हक नहीं मिले और वे दहेज की मारी हैं.

कमाऊ औरतों का सारा पैसा मर्द ले लेते हैं चाहे वे ऊंची जातियों की हों, ओबीसी हों या एससी. सांसद व विधायक औरतें जो आज हैं क्या कर रही हैं? उन की औरतों के लिए क्या पहचान है?

आज पति के, पिता के घर से निकाली गई लड़की को कहीं रहने की जगह नहीं मिलेगी. किराए पर मकान नहीं मिलेगा, होटल वाला घुसने नहीं देगा. अफसर, जज या नेता औरतें दूसरी औरतों के लिए कोई आश्रयघर तक नहीं बनवा रहीं. सिर्फ आंसू बहा देती हैं टीवी पर.

सांसदी पा कर वे क्या कर लेंगी? विधायकी पा कर क्या कर लेंगी जब एसपी, एसआई, कांस्टेबल, प्रिंसिपल बन कर कुछ नहीं कर पा रही हैं? वे सब मर्दों की ओर देखती हैं. बनठन कर रहती हैं ताकि मर्द मालिक नाराज न हो जाए.

यह उस तरह का काम है जो पंडित 11,000 रुपए ले कर हवनपूजा कर के जजमान को कहता है कि लो अब तुम्हारे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे, बीमारियां भाग जाएंगी, दरिद्रता खत्म हो जाएगी.

जब वोट देने जाएं तो खयाल रखें कि 2014 के 15 लाख रुपए जैसे वादों और 2016 के नोटबंदी जैसे वादों की तरह का यह वादा है. इस भुलावे में न रहो कि नरेंद्र मोदी ने औरतों के लिए स्वर्ग उतार दिया है. यह सपना है, कोरा भरम, शाहरुख की फिल्म ‘जवान’ की तरह का जिस में 6,000 कैदी महिलाएं देश को बदलने चलती हैं. बेपर की उड़ान है.

अब मुसलमानों का एक नया हितैषी पैदा हुआ है–नरेंद्र मोदी. 30-40 सालों से मुसलमानों के खिलाफ माहौल बना कर सत्ता हासिल करने में सफलता पाने के बाद बिहार की जाति जनगणना से चिढ़ कर नरेंद्र मोदी ने कहना शुरू किया है कि जाति जनगणना से जिस की गिनती ज्यादा उस को ज्यादा जगह का फार्मूला मुसलमानों पर भी लागू होगा और उन्हें अपनी जरूरत की जगह नहीं मिलेगी.

नरेंद्र मोदी की सरकार, पार्टी और उन के संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 30-40 सालों से मुसलमानों को नाहक परेशान कर के रखा है क्योंकि वे हिंदू वोट एक टैंट में लाना चाहते थे. अब बिहार की जाति जनगणना ने साफसाफ बता दिया है कि न तो भीमराव अंबेडकर का दलित आरक्षण गलत था और न ही बीपी मंडल के मंडल आयोग की सिफारिशों पर ओबीसी आरक्षण.

यह गिनती साफ करती है कि 4.3 फीसदी ब्राह्मणों ने ज्यादातर मोटे पदों पर कब्जा कर रखा है जिन में पैसा सरकार देती है या सरकार के साए तले पलती कोई कंपनी. मैरिट जिसे कहते हैं वह असल में यही 4.3 फीसदी तय करते थे जो और उस में खुद पास हो गए तो खुद को प्रतिभाशाली कह दिया.

सदियों से भारत के बामनों में एक गुन रहा है, वे लंबीलंबी किताबें याद रख सकते हैं और उन में से जो भी मरजी का हिस्सा जब चाहें इस्तेमाल कर सकते हैं. वेद, पुराण, स्मृतियां, काव्य 1500 ईसवी तक तो संस्कृत में भी नहीं लिखे गए थे. वे पीढ़ी दर पीढ़ी याद किए जाते रहे हैं और उन्हें याद रखने वाले सारे देश में घूमघूम कर चेले ढूंढ़ते रहते और उन्हें याद करा देते.

कहींकहीं इन्हें कुछ बदला गया पर सदियों तक बिना लिखे ये भारीभरकम ग्रंथ दिमागों में रहे. इस कला का आज की परीक्षा में बहुत फायदा होता है. अमेरिका में एक कंपीटिशन होता है, स्पैलिंग का. इस में मुश्किल शब्दों की सही स्पैलिंग याद रखनी पड़ती है और लगातार 12-15 साल के भारतीय बच्चे ही जीतते रहे हैं, क्योंकि उन्हें तरहतरह के ग्रंथ आज अमेरिका में पहुंचने पर याद कराए जा रहे हैं. अब लिखित व छपे हुए हैं पर फिर भी जो मैरिट इन्हें याद कराने में है वह कंप्यूटर रीडिंग में बहुत काम आता है और इसीलिए भारत के गए युवा हाईटैक कंपनियों में बहुत सफल हो रहे हैं.

भारत में जाति जनगणना से फायदा होगा कि यह याद रखने की खासीयत सिरों की गिनती के नीचे दब जाएगी. जिन की गिनती ज्यादा है वे दबाव बनाएंगे कि सवाल ऐसे पूछे जाएं जिन में याददाश्त कम सही बात परखने की खासीयत हो. इस में किसानों, मजदूरों के बच्चे कम नहीं निकलेंगे जो जुगाड़ों से तरहतरह की चीजें तैयार कर के अपनी कीमत हर रोज दिखाते हैं. किसानी में भी याद रखना जरूरी है पर भारी ग्रंथ नहीं, बीजों, जमीन, पानी, पौधों व पशुओं की बीमारियों के बारे में. इस में किसान मजदूर के बच्चे कहीं पीछे नहीं रहेंगे.

अगर देश पर पढ़ेलिखे, हाथ से काम कर सकने वाले छा गए तो यह देश दुनिया के पहले नंबर के देशों में जा बैठेगा. आज भारत का औसत आदमी गरीबों में से है. उस के ऊपर 135 अमीर देश हैं. जाति जनगणना ने खिड़की खोली है. अब इस खुली हवा का फायदा उठाया जाता है या उस में से कूद कर खुदकुशियां की जाती हैं, यह देखना होगा.

 

हमास और इजराइल जंग

अभी यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग खत्म नहीं हुई थी, एक और हमले की खबर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा रखा है. हमास ने इजराइल में हमला कर 1,000 से ज्यादा लोगों की जानें ले लीं. हमास ने इजराइल पर एक के बाद एक कई रौकेट दाग कर तबाही मचा दी.

इस वक्त पूरे देश में हमास और इजराइल के बीच जारी इस जंग की चर्चा है. वैसे तो हमास और इजराइल के बीच की लड़ाई नई नहीं है, लेकिन

7 अक्तूबर, 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले ने पूरे इजराइल को हिला कर रख दिया है. चारों तरफ सिर्फ तबाही का ही मंजर नजर आया. हमास ने कई नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को बंधक भी बनाया.

हमास के हमले के बाद इजराइल ने जवाबी कार्यवाही शुरू की. इजराइल ने गाजा पट्टी पर बम बरसाना शुरू कर दिया. इस में भी 800 लोगों की मौत हो चुकी है और बहुत ज्यादा घायल हुए.

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमला करने वालों को इस की कीमत चुकानी होगी. हमास ने गाजा पट्टी और इजराइल के एक बौर्डर को विस्फोटक से उड़ा दिया. गाजा पट्टी से लोग बौर्डर के जरीए इजराइल में दाखिल हुए. हम और भी कड़ी कार्यवाही करेंगे.

हमास है क्या

दरअसल, हमास एक फिलिस्तीनी आतंकी समूह है, जिस की स्थापना साल 1987 में पहले फिलिस्तीनी विद्रोह के दौरान शेख अहमद यासीन ने की थी. इस आतंकी समूह का मकसद फिलिस्तीन में इसलामिक राज्य स्थापित करना है.

12 साल की उम्र से व्हीलचेयर पर रहने वाले अहमद यासीन ने साल 1987 में इजराइल के खिलाफ पहले बगावत का ऐलान किया था. इस फिलिस्तीनी आतंकी समूह को ईरान का भी समर्थन है.

खबरों के मुताबिक, इजराइल पर हमास की अल कासिम ब्रिगेड ने हमला किया है. यह हमला इतना तेज और सटीक था कि इजराइल की पूरी डिफैंस लाइन बिखर गई. अल कासिम ब्रिगेड हमास की सब से खूंख्वार मिलिट्री यूनिट है. इस यूनिट में शामिल आतंकवादियों की तुलना आईएसआईएस से की जाती है.

अल कासिम ब्रिगेड को साल 1991 में बनाया गया था. उस वक्त इस का संबंध ओस्लो समझौते की वार्त्ता को रोकना था. 1994 से 2000 तक अल कासिम ब्रिगेड ने इजराइलियों के खिलाफ कई हमलों को अंजाम देने की जिम्मेदारी ली थी.

कई देशों की नजर

आप को बता दें कि हमास को सिर्फ इजराइल ही नहीं, बल्कि कई देश आतंकी संगठन मानते हैं. इन में अमेरिका, यूरोपीय संघ, कनाडा, मिस्र और जापान भी आतंकवादी संगठन मानता है.

लेकिन वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं, जो हमास को आतंकी संगठन नहीं मानते. इन देशों में ईरान, चीन, मिस्र, नार्वे, ब्राजील, तुर्की, कतर, रूस और सीरिया शामिल हैं. हमास गाजा पट्टी इलाके में काफी ताकतवर है. फिलिस्तीनी कब्जे वाले इलाकों में भी हमास के समर्थक भारी तादाद में मौजूद हैं.

इस की शुरुआत कब

खबरों के मुताबिक, बात साल 2006 की है, जब फिलिस्तीनी संसदीय चुनावों में हमास की जबरदस्त जीत हुई थी और उस ने गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया था. हमास के कब्जे को तत्कालीन राष्ट्रपति अब्बास ने तख्तापलट करार दिया था.

यह वही समय था, जब से हमास और इजराइल के बीच खूनी संघर्ष का दौर शुरू हो गया, जिस के बाद अकसर गाजा से इजराइल में हमास के रौकेट हमले होते रहे हैं, वहीं इजराइल भी हवाई हमले और बमबारी करता रहा है.लेकिन 7 अक्तूबर, 2023 को हुए हमले ने पूरे इजराइल को दहला कर रख दिया. एक के बाद एक 5,000 रौकेट दागे गए. जो अब तक का सब से बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है.

भारत पर हमले का असर

अभी तक भारत और इजराइल के संबंध बेहद अच्छे रहे हैं. अरब देशों से भी भारत के अच्छे रिश्ते रहे हैं, लेकिन अरब और इजराइल देशों में तनाव के चलते अगले कुछ महीनों में तेल के दामों में वृद्धि से भारत पर उलटा असर पड़ सकता है, क्योंकि सारे अरब देश हमास के सपोर्ट में हैं और भारत का ज्यादातर तेल का आयात अरब देशों से ही होता है.

 

हस्तमैथुन नहीं है गंदी बात, काबू में रहते हैं जज्बात

महेश अपने बिस्तर पर बैठे शाम की चाय का लुत्फ ले रहे थे कि तभी उन की पत्नी सुधा किसी गुस्सैल नागिन सी फनफनाती हुई वहां आई और उन के कान में जहर उगलते हुए बोली, ‘‘अपने लाड़ले की करतूत देखी. यह लड़का तो हमें कहीं का नहीं छोड़ेगा. जवानी की मूंछें क्या फूटीं घर में ही नरक मचाने लगा है.’’

‘‘अब क्या कर दिया साहिल ने? क्यों सारा घर सिर पर उठा रही हो?’’ यह पूछते हुए महेश की चाय का स्वाद एकदम से फीका हो गया.

‘‘अभी मैं उस के कमरे के बाहर से निकली तो देखती हूं कि उस के एक हाथ में मोबाइल फोन था और दूसरा हाथ पजामे के अंदर. पहले तो मैं समझ ही नहीं पाई कि पता नहीं क्या हिला रहा था, फिर मेरे कान एकदम से खड़े हुए कि इस की तो जवानी जोश मार रही है. यह लड़का तो एक दिन हमारी नाक ही कटवा कर मानेगा,’’ सुधा ने सारा किस्सा ही खोल डाला.

यह सुन कर पहले तो महेश का माथा ठनका, पर साथ ही उस ने अपनी पत्नी की मन ही मन तारीफ भी की कि उस ने किसी आम मां की तरह अपने बेटे की इस हरकत पर उसे सुनाई नहीं, बल्कि अपने पति को बताना ठीक समझ, पर सुधा का यह बौखलाया रूप महेश के लिए चिंताजनक था, क्योंकि वह जानता है कि उस के बेटे ने कोई अनोखा काम नहीं किया है, पर चूंकि हमारा समाज इसे घिनौना काम सम?ाता है, इसलिए सुधा सबकुछ जान बूझ कर आगबबूला हुए जा रही है.

‘‘तुम चिंता मत करो. मैं उसे समझ दूंगा,’’ महेश ने सुधा से कहा और एक और चाय बनाने की मनुहार करने लगा.

सुधा बड़बड़ाते हुए रसोईघर में चली गई. महेश ने कुछ सोचा और फिर साहिल के कमरे में चला गया.

अपने पिता को अचानक वहां आया देख कर साहिल ने अपना फोन बंद कर दिया और अपने कपड़े ठीक करने लगा.

‘‘क्या हो रहा है?’’ महेश ने साहिल से पूछा.

‘‘कुछ खास नहीं…’’ साहिल ने जवाब दिया.

‘‘बेटा, मैं तेरा बाप हूं और तेरी मां ने मुझ जो बताया है, वैसा होना कोई अचरज की बात नहीं है. तुम्हारी उम्र में इस सब की शुरुआत होती है…’’

पापा के इतना कहने का इशारा साहिल समझ चुका था, पर उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे उस के हस्तमैथुन करने की बात को इस सहज अंदाज में उस के सामने रखेंगे.

साहिल झिझकते हुए बोला, ‘‘सौरी पापा, पर मैं भावनाओं में बह गया था. मुझे इस बात का ध्यान रखना चाहिए था कि घर में सब हैं या मैं इस समय बाथरूम में नहीं हूं.’’

एक समझदार पिता और बेटे का यह संवाद सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है, पर अगर हस्तमैथुन को समाज के नाम पर धब्बा न समझ जाए तो समस्या उतनी ही छोटी है, जितनी महेश और साहिल के बीच की बातचीत थी.

पर भारत जैसे देश में, जहां धर्म और सामाजिक रूढि़यां लोगों के दिमाग पर हद से ज्यादा हावी रहती हैं, हस्तमैथुन पर बात करना तो दूर इशारों में भी इस के बारे में कहना बड़ा दिलेरी वाला काम समझ जाता है.

सब से दुखद पहलू तो यह है कि हस्तमैथुन को विकृति मान लिया जाता है. हमउम्र किशोर भी इसे ले कर एकदूसरे की खिल्ली उड़ाते हैं या फिर सुनीसुनाई अधकचरी जानकारी एकदूसरे पर उड़ेल देते हैं.

15 साल के विनोद का ही किस्सा ले लें. एक दिन उस के अंग में जोश आया तो वह खिलौना समझ कर खेल गया. चूंकि घर पर अकेला था तो बाद में उसे ग्लानि हुई. वह भी सिर्फ इसलिए कि उस का हाथ और कपड़े खराब हो गए थे.

विनोद को लगा कि उस से यह कोई अपराध हुआ है और उस ने दोबारा इसे न दोहराने की कसम खाई. पर अपने अंग के तनाव को कब तक रोक पाता. फिर वही हुआ, पर इस बार उसे ज्यादा मजा आया और उस ने एक अच्छी किताब से इस बारे में पढ़ा.

विनोद को जो समझ आया, उस का सार यह था कि यह खुद से किया गया ऐसा सैक्स है, जिस में पार्टनर की जरूरत नहीं होती है. यह कुदरती है और किसी तरह की कोई जिस्मानी बीमारी नहीं है, पर हां, बहुत से लड़के इसे बीमारी मान कर दिमाग में टैंशन जरूर भर लेते हैं और फिर झलाछाप डाक्टरों के चंगुल में फंस जाते हैं. वे शातिर डाक्टर हस्तमैथुन को जानलेवा मर्ज बता कर पीडि़त को नीलीपीली गोलियां थमा देते हैं.

पर जब इस बारे में प्लास्टिक, कौस्मैटिक और एंड्रोलौजिस्ट डाक्टर अनूप धीर से बात की गई, तो उन्होंने बताया, ‘‘हस्तमैथुन करना बहुत ही सामान्य बात है. यह अपने शरीर के बारे में जानने, मजे का अहसास करने और सैक्सुअल तनाव को कम करने का कुदरती और महफूज तरीका है.

‘‘हालांकि इसे ले कर कई तरह के झठ फैले हुए हैं, पर हस्तमैथुन से किसी तरह का शारीरिक नुकसान नहीं होता है, लेकिन ज्यादा हस्तमैथुन करना आप के रिश्ते और रोजाना की जिंदगी को नुकसान पहुंचा सकता है.

‘‘कुछ लोग सांस्कृतिक, आध्यात्मिक या धार्मिक मान्यताओं की वजह से हस्तमैथुन को लेकर शर्म महसूस कर सकते हैं. हस्तमैथुन न तो गलत है और न ही अनैतिक, फिर भी आप को कुछ ऐसे संदेश सुनने को मिल सकते हैं कि ऐसा आत्मसुख ‘गंदी’ और ‘शर्मनाक’ बात है.

‘‘अगर आप हस्तमैथुन को ले कर शर्म महसूस कर रहे हैं, तो किसी ऐसे इनसान से बात करें, जिस पर आप इन बातों को ले कर विश्वास कर सकते हैं और इस भावना से बाहर निकलने के तरीकों के बारे में बात कर सकते हैं. सैक्सुअल मामलों के माहिर आप के लिए मददगार साबित हो सकते हैं.’’

डाक्टर अनूप धीर ने यह भी बताया कि किस तरह हस्तमैथुन से हमारी सेहत पर पड़ने वाले पौजिटिव असर के बारे में जान और समझ कर किस तरह सेहत से जुड़ी समस्याओं में मदद मिलती है :

* हस्तमैथुन से शरीर में खून का दौरा बढ़ता है और ऐंडौर्फिन रिलीज होता है, जो मजा बढ़ाने वाला ब्रेन कैमिकल है.

* इस से दिमागी तनाव और परेशानी कम होती है. इस से आप को आराम मिलता है और आप का आत्मविश्वास बढ़ता है. इस से आप को अपनी इच्छाओं के बारे में पता चलता है और आप पार्टनर के बिना भी सैक्सुअली संतुष्ट हो सकते हैं. इस से आप को अपने साथ प्रयोग करने का मौका मिलता है, आप अपने शरीर को सम?ा पाते हैं.

* दक्षिण एशिया (पाकिस्तान, भारत, बंगलादेश, नेपाल और श्रीलंका समेत) की संस्कृतियों में धत् सिंड्रोम जिसे संस्कृत में ‘धातु दोष’ कहते हैं, पाया जाता है. इस में मरीज यह बताते हैं कि वे समय से पहले पस्त होने या नामर्दी जैसी समस्याओं का सामना करते हैं और मानते हैं कि पेशाब के रास्ते उन का वीर्य निकल जाता है.

* कुछ सभ्यताओं में माना जाता है कि धत् को सुरक्षित रखने से आप को अच्छी सेहत और लंबी जिंदगी मिलती है. इसी वजह से धत् गंवाने को गलत माना जाता है.

* माना जाता है कि यह सोच सैक्स को ले कर पीढि़यों से चली आ रही गलत सोच की वजह से उभरी है. रिसर्च करने वालों का मानना है कि धत् सिंड्रोम से पीडि़त नौजवान होते हैं और सैक्स को ले कर रूढि़वादी मान्यताओं को मानने वाले गांवदेहात के इलाकों में बसते हैं. उन के मुताबिक, धत् सिंड्रोम से पीडि़त मर्द कम पढ़ेलिखे होते हैं और उन का सामाजिक और माली लैवल काफी नीचे होता है.

* इस के इलाज में आमतौर पर दवाएं (डिप्रैशन और तनाव से बचाने वाली दवाएं), सैक्स शिक्षा और संस्कृतियों के हिसाब से काउंसलिंग व ज्ञान संबंधी व्यवहार से संबंधित थैरेपी शामिल हैं.

डाक्टर अनूप धीर ने हस्तमैथुन के बारे में तकनीकी और डाक्टरी जानकारी दी. इस के अलावा हम फिल्म ‘छिछोरे’ के एक किरदार ‘सैक्स’ से भी सीख ले सकते हैं, जो इंजीनियरिंग कर रहा है, खूब खातापीता है, तंदुरुस्त है, पर अपने ‘बंटी’ से खेलना उस का शौक है.

इस किरदार से एक सीख और भी मिलती है कि भले ही ‘सैक्स’ को लड़की नहीं मिलती है, जबकि उस के दिमाग में हमेशा लड़की ही छाई रहती है, पर वह लड़कियों के साथ कभी बदतमीजी नहीं करता है. उन्हें ले कर रेप करने के बारे में नहीं सोचता है. उसे अपने हस्तमैथुन को ले कर कोई ग्लानि नहीं, बल्कि वह उसे ऐंजौय करता है.

लिहाजा, हस्तमैथुन को भयंकर बीमारी मानने की भूल कतई न करें और इस का इलाज नीमहकीम डाक्टरों के पास तो बिलकुल भी नहीं है. कोई बड़ी समस्या होती है तो माहिर डाक्टर से ही मिलें.

मेरा बौयफ्रेंड मेरे साथ सेक्स करना चाहता है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं एक साल से एक लड़के से प्यार करती हूं. वह भी मुझे बेहद चाहता है. हमेशा मेरी इच्छाओं का सम्मान करता है. ऐसा कोई काम नहीं करता जो मुझे नागवार गुजरता हो. मगर अब कुछ दिनों से वह शारीरिक संबंध बनाने को कह रहा है पर साथ ही यह भी कहता है कि यदि तुम्हारी मरजी हो तो. मैं ने उस से कहा कि ऐसा करने से यदि मुझे गर्भ ठहर गया तो क्या होगा? इस पर उस का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं होगा. कृपया राय दें कि मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

दोस्ती में एकदूसरे की इच्छाओं को तवज्जो देना जरूरी होता है. तभी दोस्ती कायम रहती है. इस के अलावा आप का बौयफ्रैंड अभी आप का विश्वास जीतने के लिए भी ऐसा कर रहा है. जहां तक शारीरिक संबंधों को ले कर आप की आशंका है तो वह पूरी तरह सही है. यदि आप संबंध बनाती हैं तो गर्भ ठहर सकता है, इसलिए शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने से हर हाल में बचना चाहिए.

बीमारियों से बचाता है सैनेटरी पैड

माहवारी के दिनों में इस्तेमाल किए जाने वाले सैनेटरी पैड का इस्तेमाल दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. इस के बाद भी गांवदेहात में इस का इस्तेमाल कम ही हो रहा है जिस से वहां की लड़कियों और औरतों को सेहत से जुड़ी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस संबंध में डाक्टर सुनीता चंद्रा से बात की गई. पेश हैं, उसी बातचीत के खास अंश:

गांवदेहात में लड़कियों और औरतों में सैनेटरी पैड का कितना इस्तेमाल बढ़ा है?

पिछले कुछ साल से गांवों में सेहत के लिए काम करने वाले लोगों ने सैनेटरी पैड के इस्तेमाल को ले कर जागरूकता फैलाने का काम शुरू किया है. इस से लड़कियों और नई शादीशुदा औरतों में सैनेटरी पैड का इस्तेमाल करने की आदत बढ़ी है. इस के बावजूद वहां 70 से 85 फीसदी औरतें और लड़कियां इस का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं.

आज भी गांवदेहात में रहने वाली ज्यादातर लड़कियां और औरतें माहवारी के दिनों में सैनेटरी पैड की जगह पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं.

वे सैनेटरी पैड की जगह पुराने कपड़े क्यों इस्तेमाल करती हैं?

पुराना कपड़ा घर में ही मिल जाता है और सस्ता पड़ता है. कई बार तो जब खून का बहाव ज्यादा होता है तो वे कपड़े के अंदर और कई कपड़े भर लेती हैं. कई बार जब नए कपड़े नहीं मिलते हैं तो वे पहले इस्तेमाल किए गए कपड़ों को धो कर दोबारा इस्तेमाल कर लेती हैं. कई बार तो वे कपड़े के अंदर चूल्हे की राख या बालू भर कर अंग पर बांध लेती हैं. इस की वजह से वे कई तरह की बीमारियों की शिकार हो जाती हैं.

माहवारी में सैनेटरी पैड का इस्तेमाल न करने से किस तरह की बीमारियां हो सकती हैं?

गंदे कपड़ों का इस्तेमाल करने से उस जगह पर खुजली होती है, दाने और लाल चकत्ते पड़ने लगते हैं. धीरेधीरे गंदगी से इंफैक्शन अंदर तक पहुंच जाता है. इस से सफेद पानी आना, ल्यूकोरिया और दूसरी तरह की तमाम बीमारियां लग सकती हैं. ये बीमारियां औरत के मां बनने की कूवत पर बुरा असर डालती हैं. कई बार तो उन को बांझपन का दंश झेलना पड़ता है. यह इंफैक्शन कैंसर की वजह भी बन जाता है.

society

माहवारी के दिनों में औरतों को सामाजिक रूप से किस तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता है?

माहवारी के दौरान औरतों को अछूत सा समझा जाता है. इस वजह से माहवारी के संबंध में बात करने को भी गलत माना जाता है. जब किसी औरत को माहवारी आती है तो उस के साथ भेदभाव सा होता है.

कई घरों में उस को सोने के लिए अंधेरे कमरे में बिस्तर लगा दिया जाता है. उस को किसी दूसरे घर वाले के साथ उठनेबैठने नहीं दिया जाता है. साफसफाई रखने के बजाय उसे नहाने नहीं दिया जाता है. सामान्य खाने की जगह रूखासूखा खाना दिया जाता है. रसोई में जाने से मना किया जाता है.

माहवारी में इस्तेमाल किए गए कपड़े या सैनेटरी पैड को किस तरह से नष्ट किया जाता है?

आमतौर पर इन को बाहर खुले में फेंक दिया जाता है जिस से ये गंदगी फैलाने की वजह बनते हैं. जो औरतें खुले में शौच के लिए जाती हैं वहीं फेंक देती हैं. कुछ समझदार औरतें इन को मिट्टी के बड़े बरतन में रख देती हैं. बरतन ऊपर से बंद कर दिया जाता है. हवा आनेजाने के लिए बरतन में छेद कर दिया जाता है. कुछ दिन बाद जब कपड़े सूख जाते हैं तो खेत या खुली जगह में ले जा कर जला दिया जाता है. शहरों में इन को ठीक तरह से कूड़ेदान में फेंक देना चाहते है.

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छरहरे बदन में मलाइका अरोड़ा को भी मात देती हैं ‘आइटम गर्ल’ नम्रता मल्ला

भोजपुरी कलाकार और गजब की डांसर नम्रता मल्ला  बहुत ही कम समय में ही भोजपुरी इंडस्ट्री में नाम कमाने वाली एक्ट्रेस है. जिनकी फिटनेस का हर कोई दीवाना है, नम्रता मल्ला अपनी बोल्डनेस की वजह से चर्चाओं में रहती है. उनके आगे बॉलीवुड की मलाइका अरोड़ा भी फेल है, उनके फिगर पर लाखों फैंस फिदा है. इसी बीच नम्रता मल्ला ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसमें वे अपना बोल्ड फिगर कैसे बनाएं वो दिखा रही है.

 

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आपको बता दें कि एक्ट्रेस नम्रता मल्ला ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वे जिम में वर्कआउट करती हुई नजर आ रही है. इस क्लिप में नम्रता मल्ला अपने बोल्ड फिगर को फ्लॉन्ट करती हुई नजर आ रही है. इस क्लिप को शेयर कर नम्रता ने बताया है कि वो जिम में कितनी ज्यादा मेहनत करती है. नम्रता मल्ला का ये अंदाज सभी को पसंद आ रहा है, इस क्लिप को देखने के बाद फैंस उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे है.

 

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बताते चलें कि भोजपुरी एक्ट्रेस नम्रता मल्ला आए दिन अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं. नम्रता मल्ला के हर पोस्ट पर लोग दिल खोलकर प्यार बरसाते हैं. भोजपुरी अदाकारा नम्रता मल्ला ने कई म्यूजिक वीडियोज में काम किया हैं. नम्रता ने पवन सिंह के साथ ‘लाल घाघरा’ गाने में काम किया हैं. नम्रता मल्ला की फैन फॉलोइंग काफी अच्छी है. नम्रता को इंस्टाग्राम पर 2.4 मिलियन से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं. यह कहना गलत नहीं होगा कि नम्रता मल्ला की हर अदा पर फैंस फिदा हैं.

उर्फी बनीं बनाना गर्ल’, बदन पर चिपकाए केले के छिलके, लोगों ने लिए मजे

टीवी एक्ट्रेस और मॉडल उर्फी जावेद हमेशा ही अपने अतरंगी फैशन के लिए सुर्खियों में रहती है उनका अजीबो-गरीब ड्रेस पहनना लोगों को काफी पसंद आता है जिसकी वजह से उनकी फोटोज और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है ऐसा ही इस बार उर्फी अपना नया लुक लेकर सोशल मीडिया पर छाई हुई है. जिसमें वो केले के छिलकों की बनीं ड्रेस पहनी हुई नजर आ रही है.

 

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आपको बता दें कि बिग बॉस ओटीटी सीजन 1 की फेम उर्फी जावेद सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है. बुधवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर उर्फी ने अपना एक नया वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उर्फी एक बार फिर कुछ नया कैरी करती हुई दिखाई दे रही है. उर्फी ने टॉपलेस होकर केले के छिलके से अपनी बौडी को कवर किया है. साथ में नीचे जींस कैरी की हुई है. इसके साथ ही वह केला खाती हुई भी नजर आ रही है. उर्फी का ये वीडियो धड़ल्ले से वायरल हो रहा है कुछ लोग इस वीडियो को देख उनकी तारीफ कर रहे है तो कुछ उनको जमकर ट्रोल करते नजर आ रहे है.

 

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उर्फी जावेद के वीडियो पर लोग कमेंट कर रहे है, एक यूजर ने लिखा है, ‘और कुछ नहीं मिला क्या उर्फी मैडम.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘केले की ड्रेस बनाना कोई इनसे सीखे.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘धरती का सबसे अजीब प्राणी.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘मुझे नहीं लगता कि कोई इनसे शादी भी करेगा. ‘ इस तरह से लोगों ने उर्फी जावेद को केले की ड्रेस बनाने पर लोगों ने ट्रोल किया है. उर्फी जावेद ने करियर की बात करें तो उन्होंने साल 2016 में टीवी इंडस्ट्री में शो ‘बड़े भैया की दुल्‍हनिया’ से एक्टिंग की शुरुआत की थी. उर्फी जावेद ने रियलिटी शोज में काम किया है.

40 की उम्र और फैशन, पसंदीदा कपडे़ बेधड़क खरीदें

कहते हैं कि फिल्मी सितारे खासकर मर्द 40 के पार सब से ज्यादा हैंडसम होते हैं. आज अमिताभ बच्चन 78 साल के हैं. अगर इस में से 38 साल घटा दें तो साल 1982 में वे 40 साल के थे. यह वह दौर था जब उन की ‘दोस्ताना’, ‘शान’, ‘कालिया’, ‘शक्ति’, ‘सिलसिला’ जैसी कई दूसरी फिल्मों ने धूम मचाई थी. उस समय अमिताभ बच्चन बहुत ज्यादा हैंडसम दिखते थे. उन पर हर तरह के कपड़े फबते थे.

पर आम जिंदगी में इस उम्र के मर्द खुद को अधेड़ हुआ मान लेते हैं. अपने फैशन से ज्यादा वे बच्चों के कपड़ों की खरीदारी पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जबकि यह उन के मन की सोच होती है. अगर वे अपने फैशन और कपड़ों पर ध्यान दें तो किसी तरह से अमिताभ बच्चन से कम नहीं लगेंगे, बशर्ते वे कुछ बातों का ध्यान रखें, जैसे :

अपने शरीर के हिसाब से कपड़े चुनें. अगर आप रोजाना कसरत करते हैं और शरीर से चुस्तदुरुस्त हैं तो कोई भी ड्रैस आप पर जंचेगी. पर अगर आप कसरत नहीं कर पाते हैं तो अपने शरीर की बनावट को ध्यान में रख कर ही कपड़े खरीदें. कपड़े ऐसे हों जो आप के रंगरूप के मुताबिक जंचें.

बाजार से सिलेसिलाए कपड़े हर किसी को फिट नहीं आते हैं. उन में कद और कमर के हिसाब से कटाईछंटाई करानी पड़ती है. इस से बेहतर रहेगा कि इस उम्र वाले मर्द दर्जी से अपने सही नाप के कपड़े सिलवाएं. अब चूंकि सिलाई थोड़ी महंगी पड़ती है, लोग कपड़े सिलवाने से बचते हैं, पर यह पक्का है कि सही माप के कपड़े आप के अंदाज को चार चांद लगा देते हैं.

भड़कीले कपड़े पहनने से बचें. उम्र बढ़ना एक क्रिया है जिसे स्वीकार कर लेना ही समझदारी है. लेकिन सादा ड्रैस का मतलब यह भी नहीं है कि कुरतापाजामा पहन लिया. आप जींस, पैंट जैसी चीजें भी पहन सकते हैं, पर जल्दी बदलने वाले फैशन के कपड़े न खरीदें.

ड्रैस को खास बनाते हैं आप के जूते या सैंडल. जींस के साथ किसी भी तरह के जूते या सैंडल चल सकते हैं, पर अगर आप पैंट पहन रहे हैं तो जूते भी उसी के मुताबिक चुनें. साथ ही अपनी बैल्ट को अपने जूतों से मैच कराना न भूलें. अगर आप ब्लैक बैल्ट पहन रहे हैं, तो साथ में काले रंग के जूते ही पहनने चाहिए. भूरे रंग के जूते के साथ भूरे रंग की बैल्ट ही पहनें. ज्यादा सर्द मौसम न हो तो मैचिंग के सैंडल भी पहने जा सकते हैं.

बढ़ती उम्र का यह मतलब नहीं है कि आप अपने कपड़ों की खरीदारी करना ही बंद कर दें. अब शहर और कसबों में फैशन का एक सा होना आप की खरीदारी को आसान कर देता है. दुकान में जाएं और अपनी मनपसंद ड्रैस को पैक कराएं.

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