‘बिग बौस 17’ की मनारा चोपड़ा ने इस फिल्म मे दिए थे काफी बोल्ड सीन, वायरल हैं फोटो

हीरोइन मनारा चोपड़ा ने कई फिल्मों में काम किया है और लोगों का ध्यान खींचा है. मनारा चोपड़ा इन दिनों टीवी के पौपुलर रियलिटी शो ‘बिग बौस’ के सीजन 17 में नजर आ रही हैं.

 

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मनारा चोपड़ा ने साल 2014 में आई ‘जिद’ में काम किया था और इस का डायरैक्शन विवेक अग्निहोत्री ने किया था. मनारा चोपड़ा ने फिल्म ‘जिद’ में काफी ज्यादा बोल्ड सीन दिए थे, जो आज भी चर्चा का विषय बने रहते हैं. मनारा चोपड़ा के साथ इस फिल्म में हीरो करणवीर शर्मा नजर आए थे.

मनारा चोपड़ा इस फिल्म में करणवीर शर्मा के साथ काफी कोजी होती नजर आई थीं. मनारा चोपड़ा का बोल्ड अंदाज फैंस को पसंद आया. मनारा चोपड़ा ने फिल्म ‘जिद’ में एकदो नहीं, बल्कि कई बोल्ड सीन दिए. मनारा चोपड़ा की इस फिल्म में बोल्डनैस की हदें पार हुई थीं.


मनारा चोपड़ा और करणवीर शर्मा ने फिल्म ‘जिद’ में काफी बोल्डनैस परोसी है. मनारा चोपड़ा और करणवीर शर्मा ने फिल्म के दौरान कई बार लिपलौक किया था. दोनों का बोल्ड अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना था. मनारा चोपड़ा और करणवीर शर्मा के एकएक बोल्ड सीन पर लोगों की नजरें बारबार टिकीं. दोनों के बोल्ड फोटो वायरल हुए थे. मनारा चोपड़ा और करणवीर शर्मा की फिल्म ‘जिद’ में दोनों के बोल्ड सीन की काफी आलोचना भी हुई थी. लोगों का कहना था कि इस फिल्म में सिर्फ बोल्डनैस परोसी गई है.

बता दें कि मनारा चोपड़ा प्रियंका चोपड़ा की बुआ की बेटी हैं और मनारा चोपड़ा इन दिनों ‘बिग बौस 17’ में नजर आ रही हैं. मनारा चोपड़ा की ‘बिग बौस’ के घर में कई बार इमोशनल होते नजर आई हैं.

मां की दी कुरबानी : जालिम निकला लख्ते जिगर

24 अगस्त, 2015. शाजापुर शहर में डोल ग्यारस की धूम मची थी. गलीमहल्लों में ढोलढमक्का व अखाड़ों के साथ डोल निकाले जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर मुसलिम समुदाय ईद की तैयारी में मसरूफ था.

25 अगस्त, 2015 की ईद थी. सो, हंसीखुशी से यह त्योहार मनाए जाने की तैयारी में जुटा यह समुदाय खरीदफरोख्त में मशगूल था.

कुरबानी के लिए बकरों को फूलमालाओं से सजा कर सड़कों पर घुमाया जा रहा था. बाजार में खुशनुमा माहौल था. कपड़े और मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी हुई थी.

शाजापुर के एक महल्ले पटेलवाड़ी के बाशिंदे इरशाद खां ने इस खुशनुमा माहौल में एक ऐसी दिल दहलाने वाली वारदात को अंजाम दे दिया कि सुनने वालों की रूह कांप गई.

इरशाद खां ने अपने पड़ोसी आजाद की बकरी को गुस्से में आ कर छुरे से मार डाला. शायद वह बकरी इरशाद के घर में घुस गई थी और उस ने कुछ नुकसान कर दिया होगा, तभी इरशाद खां ने यह कांड कर दिया.

अपनी बकरी के मारे जाने की खबर लगते ही आजाद आपे से बाहर हो गया और उन दोनों के बीच तकरार शुरू हो गई. नौबत तूतूमैंमैं के बाद हाथापाई पर आ गई.

इरशाद खां की 65 साला मां रईसा बी भी यह माजरा देख रही थीं. इरशाद खां द्वारा बकरी मार दिए जाने के बाद वे मन ही मन डर गई थीं. कोई अनहोनी घटना न घट जाए, इस के मद्देनजर वे अपने बेटे पर ही बरस पड़ीं. वे चिल्लाचिल्ला कर इरशाद खां को गालियां देने लगीं.

यह बात शाम की थी. हंगामा बढ़ता जा रहा था. इरशाद खां के सिर पर जुनून सवार होता जा रहा था. मां का चिल्लाना और गालियां बकना उसे नागवार लगा. पहले तो वह खामोश खड़ाखड़ा सुनता रहा, फिर अचानक उस का जुनून जब हद से ज्यादा बढ़ गया, तो वह दौड़ कर घर में गया और वही छुरा उठा लाया, जिस से उस ने बकरी को मार डाला था.

लोग कुछ समझ पाते, इस के पहले इरशाद खां ने आव देखा न ताव और अपनी मां की गरदन पर ऐसा वार किया कि उन की सांस की नली कट गई. खून की फुहार छूटने लगी और वे कटे पेड़ की तरह जमीन पर गिर पड़ीं. उन का शरीर छटपटाने लगा.

इस खौफनाक मंजर को देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए. रईसा बी का शरीर कुछ देर छटपटाने के बाद शांत हो गया. मामले की नजाकत देखते हुए इरशाद खां वहां से भाग खड़ा हुआ.

रईसा बी के बड़े बेटे रईस को जब इस दिल दहलाने वाली वारदात का पता चला, तो वह भागाभागा घर आया. तब तक उस की मां मर चुकी थीं.

बेटे रईस ने इस वारदात की रिपोर्ट कोतवाली शाजापुर पहुंच कर दर्ज कराई. पुलिस ने वारदात की जगह पर पहुंच कर कार्यवाही शुरू की. हत्या के मकसद से इस्तेमाल में लाए गए छुरे की जब्ती कर के पंचनामा बनाया गया. मौके पर मौजूद गवाहों के बयान लिए गए. इस के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए डा. भीमराव अंबेडकर जिला अस्पताल भेजा गया.

इरशाद खां वहां से फरार तो हो गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद पुलिस ने उसे दबोच कर अपनी गिरफ्त में ले लिया. शाजापुर जिला कोर्ट में यह मामला 2 साल तक चला.

जज राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने मामले की हर पहलू से जांच करते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमत होते हुए इरशाद खां को मां की गरदन काट कर हत्या करने के जुर्म में कुसूरवार पाया.

8 सितंबर, 2017 को जज ने फैसला देते हुए उसे ताउम्र कैद की सजा सुनाई. यह सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सुनाई गई.

साथ ही, कुसूरवार पर 2 हजार रुपए का जुर्माना किया गया. जुर्माना अदा न करने पर 2 साल की अलग से कैद की सजा सुनाई गई.

ईद के मौके पर एक बेटे ने बकरे की जगह अपनी मां की कुरबानी दे कर रोंगटे खड़े कर देने वाले कांड को अंजाम दिया.

वही मां, जिस ने उसे 9 महीने पेट में रखा. पालपोस कर उस की  हर मांग पूरी करते हुए बड़ा किया. लेकिन शाजापुर में एक बेटे की इस दरिंदगी ने मां की मम?ता को तारतार कर दिया.

गुस्से में उठाया गया यह कदम उस परिवार पर भारी पड़ गया. मां जान से हाथ धो बैठी, जबकि उस के कत्ल के इलजाम में बेटा जेल चला गया.

 

राहुल गांधी ने अडानी समूह के बहाने नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा

दुनिया का सब से बड़ा राजनीतिक दल होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने राजनीति में ईमान को ताक पर रख दिया है. चाहे आर्थिक हो, राजनीतिक हो, सामाजिक हो या फिर वैश्विक क्षेत्र हो, हर जगह वह सब काम किया है, जो देशहित में नहीं है और कतई नहीं करना चाहिए.

इस का वर्तमान में कमज्यादा असर होता दिखाई दे रहा है. आगे दूरगामी रूप में यह देश के लिए घातक साबित होगा. दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की दशा और दिशा पर आज रिसर्च करने की जरूरत है, ताकि आने वाले समय में भाजपा की नीतियों के चलते देश को जो चौतरफा नुकसान हो रहा है, उस का आकलन किया जा सके.

भारतीय जनता पार्टी में देश के प्रति समर्पण, निष्ठा और ईमानदारी की कमी है. एक राजनीतिक दल होने के नाते सत्ता में होने के चलते देश की आम जनता को किस तरह आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए, यह भावना भी उस में नहीं दिखाई देती.

इस की जगह पर ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’, ‘मंदिर बनाएंगे’ जैसे मसलों को ले कर जनता को बरगलाने का काम किया गया. इसी के तहत भाजपा के बड़े नेता नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा मुकेश अंबानी और गौतम अडानी दोनों को जो संरक्षण दिया गया, इस के चलतेवे दोनों मालामाल हो गए.

जिस तरह भाजपा दुनिया की सब से बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का ढोल बजा रही है, उसी तरह गौतम अडानी को भी दुनिया का सब से बड़ा अमीर आदमी बनने के लिए केंद्र सरकार खुल कर समर्थन कर रही है.

यह बात आज देश का बच्चाबच्चा जानता है. यही वजह है कि जब गौतम अडानी समूह की पोल खुली तो वह लुढ़क कर नीचे आ गया. नरेंद्र मोदी सरकार ने जिस तरह गौतम अडानी को समर्थन दिया है, वह सीमाओं का अतिक्रमण करता है और देश के लिए चिंता का सबब होना चाहिए.

देश में कांग्रेस और दूसरी राजनीतिक पार्टियों ने भी सरकार चलाई है, मगर कभी भी किसी उद्योगपति का आंख बंद कर के समर्थन नहीं किया गया. यही वजह है कि कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके राहुल गांधी ने अडानी समूह पर कोयले के आयात में ज्यादा कीमत दिखा कर 12,000 करोड़ रुपए की अनियमितता का आरोप लगाया है और कहा है कि अगर साल 2024 में उन की पार्टी को केंद्र सरकार बनाने का मौका मिला, तो इस कारोबारी समूह से जुड़े मामले की जांच कराई जाएगी.

दुनिया की निगाहों में अडानी

राहुल गांधी ने ब्रिटिश अखबार ‘फाइनैंशियल टाइम्स’ की एक खबर का हवाला देते हुए कहा, “वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस संदर्भ में मदद करना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री अडानी समूह के मामले की जांच कराएं और अपनी विश्वसनीयता बचाएं.”

अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले के अध्यक्ष होने के नाते राहुल गांधी ने खुल कर अपना और पार्टी का पक्ष देश के सामने रख दिया है और नरेंद्र मोदी पर तल्ख टिप्पणी की है. नरेंद्र मोदी और देश उस चौराहे पर खड़ा है, जहां से गौतम अडानी पर सरकार को जांच कर के दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए.

मगर आजकल भारत सरकार जिस तरीके से काम कर रही है, वह निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता, क्योंकि जहां सरकार और उन के चेहरों के पक्ष की बात होती है, वहां फैसले बदल जाते हैं. यह बात देश के लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं कही जा सकती और दुनिया के जीनियस इसे ले कर चिंतित हैं.

राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार की मुलाकातों को ले कर सफाई दी और कहा, “शरद पवार देश के प्रधानमंत्री नहीं हैं और अडानी का बचाव भी नहीं कर रहे हैं, इसलिए वे राकांपा नेता से सवाल नहीं करते.”

दरअसल, राहुल गांधी ने ‘फाइनैंशियल टाइम्स’ की जिस खबर का हवाला दिया है, उस में कहा गया है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री काल में साल 2019 और साल 2021 के बीच अडानी की 31 लाख टन मात्रा वाली 30 कोयला शिपमैंट की स्टडी की गई, जिस में कोयला व्यापार जैसे कम मुनाफे वाले कारोबार में भी 52 फीसदी लाभ समूह को मिला है.

कुलमिला कर सच यह है कि कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके राहुल गांधी ने अडानी समूह पर कोयले के आयात में ज्यादा कीमत दिखा कर 12,000 करोड़ रुपए की अनियमितता का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा, “यह चोरी का मामला है और यह चोरी जनता की जेब से की गई है. यह राशि करीब 12,000 करोड़ रुपए हो सकती है. पहले हम ने 20,000 करोड़ रुपए की बात की थी और सवाल पूछा था कि यह पैसा किस का है और कहां से आया? अब पता चला है कि 20,000 करोड़ रुपए का आंकड़ा गलत था, उस में 12,000 करोड़ रुपए और जुड़ गए हैं.अब कुल आंकड़ा 32,000 करोड़ रुपए का हो गया है.”

पीरियड्स में भी सैक्स कर सकती हैं आप, बस रखें इन बातों का ध्यान

अमूमन कहा जाता है कि महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान सैक्स नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस से बहुत नुकसान हो सकता है, लेकिन यह एक मिथक है. दरअसल, महिलाओं में मासिक धर्म का होना एक प्राकृतिक शारीरिक प्रकिया है और ज्यादातर महिलाओं को यह पता नहीं होता है कि मासिक धर्म में क्या करें और क्या न करें. खासकर बात जब मासिक धर्म के दौरान सैक्स की हो. आमतौर पर हमारी यह धारणा होती है कि मासिक धर्म के दौरान सैक्स करना सही नहीं है, लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है, आइए जानते हैं…

मासिक धर्म में हैं सैक्स के ये फायदे
अगर आप मासिक धर्म के दौरान सहवास करना चाहती हैं तो कर सकती हैं. अगर दोनों पार्टनर की रजामंदी हो सैक्स तो वैज्ञानिक रूप से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है.

कुछ लोग तो मासिक धर्म के दौरान ही सहवास करना ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि उस दौरान महिला जननांग में गीलापन पहले से ही बना रहता है जिस से सैक्स करने में आसानी होती है.

मासिक धर्म में सैक्स करने से गर्भ ठहरने की आशंका न के बराबर रह जाती है. एक खास बात यह भी है कि मासिक धर्म में सैक्स के दौरान अगर किसी महिला को चरमसुख मिलता है तो उसे मासिक धर्म के दौरान होने वाले कमर और पेड़ू के दर्द से काफी आराम मिलता है.

मासिक धर्म में सैक्स से स्त्री और पुरुष दोनों को कोई नुकसान नहीं होता. लेकिन जो महिलाएं मलशुद्धि के लिए पानी की बजाय टिशू पेपर का इस्तेमाल करती हैं, उन के साथ मासिक धर्म में सैक्स करने से इंफैक्शन हो सकता है, क्योंकि मासिक के दौरान होने वाला रक्तस्राव गुदा द्वार के करीब होने की वजह से वहां बैक्टीरिया के बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है. इस से बचने के लिए ऐसी महिलाओं के साथ सैक्स करते समय कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए.

अगर आप के पार्टनर को मासिक धर्म के दौरान पेट या योनि में दर्द नहीं हो रहा हो और यदि आप के पार्टनर को कोई आपत्ति न हो तो मासिक धर्म के दौरान कंडोम के बिना भी सैक्स किया जा सकता है. इस से किसी तरह की बीमारी नहीं होती. लेकिन मासिक धर्म के दौरान यदि महिला को किसी तरह के इंफैक्शन की आशंका है, तो ऐसे में सेक्स कदापि नहीं करना चाहिए.

मासिक धर्म के समय सैक्स करने के लिए यौनांगों की साफसफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए. सैक्स के बाद शिश्न तथा योनि को ठीक तरह से पानी से धोना चाहिए. माइल्ड डिसइंफैक्टेड मैडिसिन मिला कर भी सप्ताह में 2 बार यौनांगों की सफाई करनी चाहिए.

लड़कियों की कमी के चलते शादियां अटकीं

देश बदल रहा है. शहरों में ही नहीं बल्कि गांवों में भी अब शादी के लिए लड़कियों की कमी होने लगी है. इस से लड़कों की शादियां अटक रही हैं. ज्यादातर परिवारों में लड़कियों की तादाद कम होने लगी है. एक लड़की या एक लड़के से ही परिवार पूरा होने लगा है. गांवों में रहने वाले परिवार अब शहरों में पहुंच गए हैं. ऐसे में आम परिवार की लड़कियां स्कूल जाने लगी हैं.

गांव के किसी स्कूल को देखेंगे तो साफ हो जाएगा कि वहां पढ़ने वालों में लड़कियों की तादाद ज्यादा होती जा रही है. ऐसे में अब मांबाप अपनी लड़कियों की शादियां करने के लिए लड़के को ही नहीं बल्कि उस के परिवार की माली हालत को भी देखते परखते हैं. ऐसे में कम काबिल लड़कों की शादियां नहीं हो रही हैं. उत्तर भारत के कुछ राज्यों खासतौर पर हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लड़कों के सामने ऐसे हालात बनने लगे हैं.

ऐसे में ये लड़के दूर के प्रदेशों से खरीद कर लड़कियां लाते हैं और उन से शादी कर लेते हैं. गैर प्रदेशों से लाई गई लड़कियों में यह सुविधा रहती है कि वे इन के पास गुलामों की तरह रहती हैं.

दरअसल, उत्तर भारत के ये प्रदेश मर्दवादी सोच से प्रभावित होते हैं. वे औरतों को बराबरी का दर्जा नहीं देना चाहते. इस वजह से उन के लिए खरीद कर लाई गई लड़कियां शादी के लिए सब से उपयोगी होती हैं.

खरीद कर लाई लड़कियों से शादी करने वालों में ऐसे लोग भी होते हैं जो कम उम्र में शादी करने के बाद अकेले हो गए. उन में से कुछ का पत्नी से विवाद हो गया या पत्नी छोड़ कर चली गई या फिर पत्नी की मौत हो गई. ऐसे में दूसरी शादी के लिए खरीद कर लाई गई लड़कियां उन्हें सही लगती हैं.

इस तरह के लड़कों में हर जाति और धर्म के लोग हैं. सब से ज्यादा खराब हालत पिछड़ी जातियों की है. पिछड़ी जातियों की रोजीरोटी पहले खेती पर ही टिकी होती थी. आज भी ये परिवार खेती पर ही टिके हैं. पर अब खेती में मुनाफा कम होने लगा है. ये परिवार खेती को छोड़ कर शहरों में बस रहे हैं. ऐसे में ये काफी गरीब होते जा रहे हैं. अब इन परिवारों के लड़कों को लड़की खरीद कर शादी करना आसान लगने लगा है.

हरियाणा और पंजाब में कई सालों से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. ज्यादातर ऐसे मामले तभी सामने आते हैं जब किसी तरह का कोई झगड़ा हो या फिर मामला पुलिस तक पहुंच जाए.

आमतौर पर खरीदी गई लड़की से शादी करने वाले लोग समाज के सामने इस बात को नहीं मानते हैं कि लड़की खरीदी गई है. ये लोग चोरीछिपे शादी करते हैं. लड़की को अपने घरोें में छिपा कर रखते हैं.

ये लोग शादी के लिए ऐसी लड़की पसंद करते हैं जो इन के जैसी दिखती हो. यही वजह है कि दक्षिण भारत के प्रदेशों की लड़कियों को यहां नहीं लाया जाता. पश्चिम बंगाल और असम की जगह बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ की लड़कियां ज्यादा पसंद की जाती हैं. वहां की लड़कियां हिंदी बोल और समझ लेती हैं. उन का रंग भी साफ होता है. ऐसे में कुछ ही दिनों में वे यहां का रहनसहन सीख कर परिवार के बीच हिलमिल जाती हैं. समाज को यह बताना आसान होता है कि वह किसी दूर के रिश्तेदार की लड़की है.

यही वजह है कि लड़की खरीद कर शादी करने के मामले में बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ की लड़कियां ज्यादा डिमांड में होती हैं. दूसरा पहलू यह भी है कि शादी के नाम पर खरीदी गई लड़कियों में बहुत सी कई बार आगे बेच दी जाती हैं, जो जिस्मफरोशी के बाजार में पहुंच जाती हैं.

जानकार मानते हैं कि पहले बेची गई लड़कियां केवल जिस्मफरोशी के बाजार में ही जाती थीं, पर अब वे शादी कर के दुलहन भी बनने लगी हैं. लड़की के परिवार के लिए यह माने नहीं रखता कि वह कहां जा रही है. वे तो गरीबी से छुटकारा पाने के लिए अपनी लड़की को बेचने की कोशिश करते हैं. ऐसे ज्यादातर मामले सामने नहीं आते.

निशाने पर गरीब प्रदेश

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कुनकुनी थाने में एक आदिवासी लड़की ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे नौकरी दिलाने के नाम पर ओडिशा ले जाया गया. वहां उस से जबरन शादी कर के बाद में जिस्मफरोशी के धंधे में उतार दिया गया.

पता चला कि यह ऐसी अकेली घटना नहीं है, बल्कि तमाम लड़कियों को नौकरी के नाम पर बाहर ले जाया जाता है और वहां उन को शादी का झांसा दे कर फंसाया जाता है.

छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि ओडिशा, आंध्र प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार राज्यों से लड़कियों को किसी न किसी तरह का लालच दे कर दूसरे राज्यों में ले जाया जाता है, जहां पर वे नौकरी करने जाती हैं.

इस के बाद इन लड़कियों को शादी से ले कर जिस्मफरोशी तक के जाल में फंसा दिया जाता है. कई बार ऐसी लड़कियां घरेलू नौकरानी बन कर जोरजुल्म का शिकार होती हैं.

उत्तर भारत के कुछ राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में लड़कियों की कमी है. कई नौजवानों की तो लड़कियों की कमी की वजह से शादियां अटकी होती हैं. ऐसे में वे लोग गरीब और आदिवासी प्रदेशों से लड़कियों की खरीदारी करते हैं.

गरीब और आदिवासी प्रदेशों में कई ऐसी प्लेसमैंट एजेंसियां हैं जो नौकरी दिलाने के नाम पर लड़कियों को दूसरे प्रदेशों में भेजती हैं. ये प्लेसमैंट एजेंसियां अब नौकरी के बजाय शादी के लिए लड़कियों को बाहर भेजने लगी हैं.

ये लोग लड़कियों के घर वालों को समझाते हैं कि लड़की नौकरी के लिए जा रही है. इस के बदले में उन को कभीकभी एकमुश्त और कभीकभी हर महीने पैसे पाने का लालच दिया जाता है.

बड़े शहरों में जाने वाली लड़कियां घरेलू नौकरी करती हैं या फिर जिस्मफरोशी के बाजार में पहुंच जाती हैं. अब छोटेबड़े शहरों के साथसाथ गांव और कसबों में यहां की लड़कियां जाने लगी हैं. ये लोग शादी के नाम पर लड़कियों को ले जाते हैं. असल में इन जगहों पर अब लड़कियों की कमी होने लगी है.

बेरोजगार, नशेड़ी और बिगड़ैल किस्म के लड़कों को अपने समाज की अच्छी लड़कियां शादी के लिए नहीं मिल रही हैं. ऐसे में गरीब लड़कियों को खरीद कर शादी करना उन की मजबूरी हो गई है.

गरीबी है वजह

शादी के लिए खरीद कर आने वाली लड़कियां गरीब परिवारों से होती हैं. वे शादी के बाद हर तरह का जोरजुल्म सहने को तैयार होती हैं. कम उम्र की लड़कियां बड़ी उम्र के मर्दों के साथ शादी करने को तैयार हो जाती हैं. इन मर्दों को अपने समाज की लड़कियां नहीं मिलतीं.

गरीब प्रदेशों की रहने वाली लड़कियों के मातापिता कुछ हजार रुपयों के लालच में अपनी लड़की बाहर भेज देते हैं. उन को इस बात का सुकून होता है कि उन की लड़की भूखी नहीं मरेगी और उन को भी कुछ पैसे मिल जाएंगे. इस काम में लड़की के परिवार को तैयार करने का काम वहां उन के ही समाज के लोग और नातेरिश्तेदार करते हैं.

असम से आई एक लड़की लखनऊ के एक परिवार में रहती है. वह सही से हिंदी भी नहीं बोल पाती है. पहले यह लड़की एक घरेलू नौकर बन कर आई थी, बाद में वहीं एक आदमी उस से शादी करने को तैयार हो गया.

वह लड़की बताती है, ‘‘मेरे घर में रहने के लिए एक छप्पर भी सही तरह का नहीं था. साल में कुछ महीने ही हम भरपेट खाना खाते थे. मेरी 5 बहनें हैं. मेरी बड़ी बहन कोलकाता गई थी. वहां से जो पैसे मिले उस से एक छप्पर वाला मकान बना था.

‘‘जब मैं बड़ी हुई तो मेरे एक रिश्तेदार ने मुझे यहां भेज दिया. मैं सालभर में कुछ पैसे अपने घर भेजती थी. 3 साल में मैं ने यहां का रहनसहन सीख लिया. अब कुछकुछ हिंदी बोल लेती हूं.

‘‘जब मैं यहां आई थी तब मेरी उम्र 14 साल थी. मेरे मालिक बहुत अच्छे थे. मेरे पति उन के घर आतेजाते थे. उन्होंने इच्छा जाहिर की थी कि वे मुझ से शादी करना चाहते हैं. इन 4 सालों में मैं अपने घर कभी नहीं गई. मेरे घर वाले शुरू में कभीकभी मेरे बारे में पूछते भी थे, पर अब कोई नहीं आता. जो पैसे मैं उन्हें भेजती थी, यह भी नहीं पता कि वे उन तक पहुंचते भी थे या नहीं. हो सकता है कि अब मेरी छोटी बहन को भी कहीं भेज दिया हो.

‘‘मैं ने शादी की बात मान ली. मैं शादी कर के बहुत खुश हूं. मेरे लिए शादी के साथ घरपरिवार का मिलना ही बड़ी बात है. मेरे लिए पति की उम्र का कुछ साल बड़ा होना माने नहीं रखता. यहां लोग बोलते हैं कि खरीद कर लाई लड़की से शादी हुई है.

‘‘यह सुन कर अजीब लगता है. पर यह उस दुख से काफी बेहतर है जो गरीबी में अपने परिवार में सहन करने पड़े थे. घरेलू नौकर से अब मैं शादीशुदा हो गई. मुझे एक पहचान मिल गई. मैं बाकी बातें भी भूल जाऊंगी और धीरेधीरे बाकी लोग भी शायद भूल जाएंगे.

‘‘गरीब लड़कियों के लिए देह धंधे के दलदल में जाने से बेहतर है कि वे किसी जरूरमंद से शादी कर के उस का घर बसा दें.’’

कई बार बिकती हैं

छत्तीसगढ़ में अपनी संस्था के साथ आदिवासी इलाकों में काम कर रहे समाजसेवी दीनानाथ कहते हैं, ‘‘लड़की के घर वालों को केवल पैसों से मतलब होता है. जहां ज्यादा पैसा मिलता है, वे वहां लड़की भेजने को तैयार हो जाते हैं. हम लोग भी इन बातों को समझते हैं.

‘‘हम लड़कियों के मांबाप को समझाते हैं कि नौकरी के नाम पर भेजने से अच्छा है कि शादी के लिए लड़की को भेज दो. शादी कम से कम 18 साल की उम्र में होती है. मांबाप इस उम्र तक लड़की को घर में रख ही नहीं पाते.

‘‘यहां की लड़कियां ज्यादा से ज्यादा 13 से 15 साल की उम्र में ही बाहर चली जाती हैं. कुछ मांबाप तो 10 साल की उम्र में ही लड़की को बाहर भेजने को तैयार हो जाते हैं.

‘‘ऐसे में कई परिवार अपने लड़के से आधी उम्र की लड़की को ले जाते हैं, फिर कुछ सालों के बाद उन की शादी करा देते हैं. शादी की उम्र होने तक कई बार तो ये लड़कियां कईकई बार बिक चुकी होती हैं.

‘‘सैक्स के नाम पर इन्हें तरहतरह के समझौते करने पड़ते हैं. एक रात में कईकई ग्राहकों को खुश करना पड़ता है. कुछ ही सालों में ये बूढ़ी हो जाती हैं. उन्हें जिंदगी में कभी घरपरिवार का सुख नहीं मिलता, जबकि खरीदी गई दुलहन को शादी के बाद हर सुख मिलता है. ऐसे में शादी के लिए बिकना ज्यादा पसंद किया जा रहा है.’’

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्राइवेट प्लेसमैंट एजेंसी ऐक्ट 2013 तैयार किया है. अगस्त, 2014 में इसे लागू भी किया गया. इस के बाद भी अभी तक प्लेसमैंट एजेंसियां अपनी तरह से ही काम कर रही हैं. वे अब मानव तस्करी के अड्डे बन गई हैं.

लड़कियों की खरीदफरोख्त के मामले में पश्चिम बंगाल पहले, ओडिशा दूसरे और छत्तीसगढ़ तीसरे नंबर पर आता है.

एक निजी संस्था द्वारा किए गए सर्वे से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ का जशपुर इलाका लड़कियों की खरीदफरोख्त का बहुत बड़ा अड्डा बन गया है. जिले से हर साल तकरीबन 7 हजार लड़कियों को बड़े शहरों में खरीदाबेचा जाता है.

267 गांवों के सर्वे में यह भी सामने आया है कि 70 फीसदी लड़कियां नाबालिग थीं. बाकी भी 18 साल के आसपास थीं. लड़कियों के बेचने में उन के जानपहचान वाले होते हैं. लड़कियों के मांबाप को भी यह पता होता है कि अब लड़की को वापस नहीं आना है.ऐसे में वे एकमुश्त पैसे लेने का काम करते हैं.

शादियों से बदले हालात

समाजसेवी दीनानाथ कहते हैं, ‘‘पहले जहां लड़कियां केवल बिकने के बाद जिस्मफरोशी के बाजार में जाती थीं, वहीं अब वे शादी के लिए भी खरीदी जाने लगी हैं. ऐसे में गरीब लड़कियां इज्जत भरी जिंदगी गुजरबसर करने लगी हैं.’’

मेरे बचपन का दोस्त खुलकर बात नहीं करता, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं दिल्ली में एक एमएनसी में काम करती हूं. कुछ दिनों पहले मेरे स्कूल में पढ़ने वाले लड़के ने मेरी कंपनी जौइन की है. मैं जानती हूं वह स्वभाव से शर्मीला है. लेकिन अब उस में काफी बदलाव आ गया है. वह काफी आत्मविश्वास के साथ बोलता है. फिर भी मुझे लगता है वह मुझ से खुल कर बात नहीं करता. हम एकदूसरे के काफी नजदीक आ गए हैं और मुझे यकीन है कि वह मुझ से प्यार करने लगा है, लेकिन बोलने में हिचक रहा है. मैं उस के बोलने का इंतजार कर रही हूं. क्या मुझे पहल करनी चाहिए?

जवाब

आप जानती हैं कि आप का बौयफ्रैंड स्वभाव से शर्मीला है तो आई लव यू बोलने की पहल आप कर के उस की झिझक को खत्म कर सकती हैं. रही बात कि वह आप से खुल कर बात नहीं करता, तो हो सकता है आप उस पर हावी रहती हों.

रिलेशनशिप में बातचीत करना बेहद खास होता है. एकदूसरे से सवाल पूछें, इस से बौंडिंग बेहतर होती है और आप को अपने पार्टनर के साथसाथ खुद के बारे में काफी कुछ पता चलता है व अपनी कमियों के बारे में पता चलता है.

ब्रौयफ्रैंड को पूरी तरह अपने भरोसे में लें. इस से वह अपनी बातें शेयर करने में झिझक महसूस नहीं करेगा. कुछ सवाल, जैसे ‘क्या उसे खुद को बदलने की जरूरत है? या क्या मैं ने कभी तुम्हारी फीलिंग हर्ट की है?’ पूछ कर अपने बारे में उस की राय जानें. इस से एक तो पार्टनर का दिल हलका हो जाता है और आप को भी इस बात का एहसास होता है कि कब आप अपने इमोशंस में बह कर लिमिट क्रौस कर देती हैं.

जब आप अपने पार्टनर से यह बात करें तो अपनेआप पर कंट्रोल रखें. हो सकता है कि जब आप का पार्टनर अपने दिल की बातें कहे तो उन में कुछ ऐसी बातें भी हों जो आप को अच्छी न लगें. लेकिन उस दौरान सब्र से उस की बातें सुनें और उस की हालात को समझने की कोशिश करें.

यों संवारे अपने बालों को, अपनाएं ये खास टिप्स

गांवदेहात में पहले नौजवानों का अमूमन एक तरह का ही हेयर स्टाइल होता था, फौजी की तरह बिलकुल छोटे बाल रखना. इस से उन्हें रोजमर्रा के काम करते हुए दिक्कत नहीं होती थी और चूंकि उन की बौडी भी सौलिड होती थी, तो वे बाल उन पर जंचते भी थे.

पर, अब माहौल बदल गया है. गांवदेहात के बच्चे पढ़लिख कर शहरों में नौकरी करने लगे हैं और जब से मोबाइल फोन का दौर आया है, तब से उन्हें भी बालों के नए से नए फैशन की जानकारी होने लगी है और वे बालों को ले कर सजग भी रहने लगे हैं.

शादीब्याह के मौके पर तो वे बाकायदा सैलून में जा कर नए स्टाइल की कटिंग कराते हैं और जम कर पैसे भी खर्च करते हैं. इस के अलावा भी वे नहाते समय अच्छी क्वालिटी का साबुन या शैंपू इस्तेमाल करते हैं.

बालों को चमकीला, घना और महफूज बनाए रखने के लिए उन पर ध्यान देना पड़ता है. इस के लिए नियमित रूप से शैंपू के साथ कंडीशनर भी लगाएं. इस के अलावा बालों में नियमित रूप से तेल लगाने से भी वे मजबूत बनते हैं. तेल से सिर की मालिश करने से बाल की जड़ें मजबूत होती हैं.

छोटे बालों की देखभाल करना आसान होता है, पर किसी लड़के ने लंबे बाल रखे हैं, तो उन की देखभाल पर खास ध्यान देना होता है. अगर उन की रोजाना साफसफाई न की जाए, तो वे रूखे हो जाते हैं, गंदगी बढ़ जाती है.

इस से बालों की खूबसूरती बढ़ने के बजाय कम हो जाती है और लोग आप को देख कर नाकभौं सिकोड़ने लगते हैं, इसलिए बढ़े बाल हमेशा साफ रहें और उन्हें करीने से रखा जाए.

लंबे बालों को रखते समय अपनी कदकाठी और चेहरे की शेप का भी ध्यान रखें. फैशन के चलते उन्हें चलताऊ रंग से न रंगें, इस से आप समय से पहले उन से हाथ धो बैठेंगे. उन पर अच्छी क्वालिटी का रंग लगाएं, फिर भले ही थोड़ा महंगा क्यों न हो. सस्ता और घटिया क्वालिटी का रंग बालों के साथसाथ सिर की चमड़ी को भी नुकसान पहुंचा सकता है.

इस के अलावा सौफ्ट कंघा ही बालों में इस्तेमाल करें. बालों को तौलिए से ज्यादा जोर से न रगड़ें. बालों को धूलमिट्टी से बचाएं. फैशन के चक्कर में बालों के साथ ज्यादा जोरआजमाइश न करें.

छोटे शहर की लड़की: जब पूजा ने दी दस्तक

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झीने कपड़ों में दिखा मलाइका अरोड़ा का मदमाता हुस्न, वीडियो देख फैंस हुए दीवाने

हिंदी फिल्मों की सैक्सी आइटम गर्ल मलाइका अरोड़ा भले ही 49 साल की हो गई हैं, उन की खूबसूरती अब भी वैसे ही बरकरार है जैसे कि आज से 30 साल पहले हुआ करती थी. आज भी उन का फैशन स्टाइल और मनमोहक लुक अच्छेअच्छों की बोलती बंद कर देती है. कुछ ऐसा ही नजारा एक बार फिर से सोशल मीडिया पर देखने को मिला है. इन दिनों मलाइका की नई फोटोज और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. जी हां, मलाइका एक इवेंट में बेहद बोल्ड आउटफिट में नजर आईं. हालांकि इवेंट से उनका बेबाक अंदाज लोगों को पसंद नहीं आया है. वह अब अपने लुक और अपीरियंस को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रही हैं.

 

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वायरल हो रहे वीडियो में आप देख सकते हैं कि मलाइका मलाइका अरोड़ा इवेंट के लिए ट्रांसपेरेंट एक्वा ब्लू शिमरी ड्रेस चुनी हैं. खुले बाल, और मैचिंग ईयररिंग और हील्स से उन्होंने अपना गेटअप कंप्लीट किया है. इवेंट वह बेहद प्यारी और ग्लैमरस लग रही थीं हालांकि कुछ यूजर्स को उनका ट्रांसपेरेंट शिमरी ड्रेस कुछ खास पसंद नहीं आया. ऐसे में यूजर्स उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे हैं.

 

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मलाइका अरोड़ा के इस वीडियो पर लोग जमकर कमेंट बरसा रहे है जहां नेटिजंस प्रतिक्रिया देते हुए मलाइका को ट्रोल कर रहे हैं. उनके पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा, ‘बौलीवुड से कभी साड़ी या सूट या किसी खूबसूरत ड्रेस की उम्मीद नहीं की जा सकती, ये सोचते हैं जब तक बॉडी पूरी ना देखें, तब तक ये लोग अच्छे नहीं लगेंगे… कुछ सीखो साउथ इंडियन एक्ट्रेस से’. दूसरे यूजर ने ‘उर्फी तो ऐसे ही बदनाम है ये उसे टक्टर दे रही हैं’. एक तीसरे यूजर ने लिखा, ‘ऐसी ब्रेस्ट कैंसर अवेयनेस के लिए ऐसी कपड़ों की जरूरत है क्या?’ इसके अलावा एक और यूजर ने लिखा, ‘मम्मी जी 18 साल की लड़कियों को टक्कर दे रही हैं.’

भोजपुरी हीरोइन नेहा मलिक ने ढाया कहर, जिस ने देखा हुआ घायल

भोजपुरी एक्ट्रेस नेहा मलिक सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव है. वे वहां पर फोटोज और वीडियोज शेयर करती रहती है. उनकी फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है नेहा के हुस्न के आगे अच्छी अच्छी एक्ट्रेस फीकी लगने लगती है. ऐसे ही कुछ तस्वीरें नेहा की इन दिनों वायरल हो रही है. जिसमें वह ब्लैक मोनोकिनी पहनी हुई दिख रही है.

मोनोकिनी की रियल फौर्म में सिर्फ शरीर के निचले हिस्से को ढका जाता है, जबकि ब्रैस्ट ओपन रहते हैं. हालांकि ज्यादातर लड़कियां या औरतें इस तरह समुद्र तट पर आना पसंद नहीं करती हैं, इसलिए मोनोकिनी को ब्रा के साथ अटैच करते हुए अलगअलग स्टाइलिश लुक में पहना जाता है.

 

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भोजपुरी एक्ट्रेस नेहा मलिक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को अपडेट करते हुए कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें एक्ट्रेस का अंदाज देखने लायक हैं. सामने आई तस्वीरों में भोजपुरी अदाकारा नेहा मलिक मोनोकिनी में नजर आ रही हैं.

एक्ट्रेस का ये लुक देख फैंस की सांसें अटक गई हैं. लेटेस्ट फोटोज में भोजपुरी एक्ट्रेस नेहा मलिक कैमरे के सामने एक से बढ़कर एक पोज देती नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस का हर एक पोज इंटरनेट पर धड़ल्ले से वायरल हो रहा है.

 

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इन फोटोज में एक्ट्रेस नेहा मलिक की अदाएं हद से ज्यादा कातिलाना है. एक्ट्रेस का ये अवतार देख फैंस के दिलों पर छुरियां चल गई हैं. भोजपुरी एक्ट्रेस नेहा मलिक की इन फोटोज को देखने के बाद लोग उनकी तुलना टीवी की उर्फी जावेद से कर रहे हैं. कई लोगों का ये मानना है कि नेहा, उर्फी से ज्यादा हसीन हैं.

 

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बता दें कि नेहा मलिक ने कई म्यूजिक वीडियोज में काम किया हैं. उन्होंने खेसारी लाल यादव के साथ भी काम किया हैं. नेहा मलिक अपने परफेक्ट फिगर की मालकिन हैं एक्ट्रेस अपने फिगर को मेंटेन करने के लिए जिम में कड़ी मेहनत करती हैं.

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