Bigg Boss 17: काम्या पंजाबी ने किया पोस्ट, इस कंटेस्टेंट को बता डाला विनर

रिएलिटी शो बिग बौस 17 ने हर साल की तरह इस साल भी सबका मनोरंजन किया और अब ये शो अपने फिनाले वीक में चल रहा है. जिसका ग्रैंड फिनाले 28 जनवरी को होने वाला है. वही, सब अपने अपने विनर बता रहे है. ऐसा ही पोस्ट इन दिनों काम्या पंजाबी (Kamya Punjabi) ने किया है जिसमे वो मुनव्वर या अंकिता को विनर ना बता कर किसी ओर को शो का विनर घोषित कर रही है.

 

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जी हां, शो को अपने टॉप पांच कंटेस्टेंट मिल चुके है इसमें अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande), मुनव्वर फारुकी(Munawar Faruqui), अभिषेक कुमार (Abhishek kumar), मन्नारा चोपड़ा (Manara chopra) और अरुण माशेट्टी (Arun mashetty) ने जगह बनाई है. सोशल मीडिया पर फैंस से लेकर सेलेब्स तक अपने फेवरेट कंटेस्टेंट को सपोर्ट कर रहे हैं. ज्यादातर लोगों को मानना है कि अंकिता लोखंडे या मुनव्वर फारुकी में से कोई एक विनर होगा. कई लोग अभिषेक कुमार को भी विनर बता रहे हैं, लेकिन काम्या पंजाबी को कोई और ही इस शो का विनर लगता है. काम्या ने अपने लेटेस्ट पोस्ट में इस सीजन के विनर का नाम लिखकर लोगों को हैरान कर दिया है.

काम्या पंजाबी बिग बौस 17 को काफी करीब से फॉलो कर रही हैं. उन्होंने अंकिता लोखंडे और मुनव्वर फारुकी  के सपोर्ट में कई बार पोस्ट किया है, लेकिन काम्या पंजाबी के लेटेस्ट पोस्ट ने फैंस को हैरान कर दिया है. इस बार एक्ट्रेस ने किसी और कंटेस्टेंट को विनर बता डाला है, जो फैंस के लिए भी शॉकिंग है. काम्या ने X पर अरुण माशेट्टी को विनर बताया है, जिन्हें लोग टॉप पांच में भी देखना नहीं चाह रहे हैं. काम्या ने X पर लिखा, ‘ऐसा कैसे है कि कोई भी अरुण माशेट्टी को अपना कॉम्पटीशन नहीं मान रहा है? ना घर के अंदर और ना घर के बाहर… वैसे किसको राहुल रॉय याद है? सिर्फ बोल रही हूं.’ काम्या पंजाबी के इस पोस्ट पर एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी ने कमेंट किया है. एक्ट्रेस ने लिखा है, ‘आज मैं सच में यही सोच रही थी.’ वहीं कुछ फैंस मन्नारा को विनर बता रहे हैं.

साड़ी में लहराती हुई नजर आई भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा, फैंस ने की तारीफ

भोजपुरी की पौपुलर एक्ट्रेस मोनालिसा ने भोजपुरी सिनेमा में ही नहीं हिंदी टीवी में भी अपनी पहचान कायम रखी है. एक्ट्रेस हमेशा अपने पोस्ट को लेकर सुर्खियों में छाई रहती है. उनका अंदाज लोगों को काफी पसंद आता है. हाल ही में उनका एक वीडियो सामने आया है. जो कि इंटरनेट पर जोरो शोरो से वायरल हो रहा है. इस वीडियो को लोग काफी पसंद कर रहे है.

 

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एक्ट्रेस मोनालिसा का अंदाज बेहद कातिलाना है. उनको देखते ही लोगों की धड़कनें तेज हो जाती हैं. मोनालिसा की हर अदा पर लोग फिदा हो जाते हैं. इस बीच भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा का एक वीडियो सामने आया है, इस क्लिप को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. मोनालिसा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को अपडेट करते हुए एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो किलर डांस करती नजर आ रही हैं.

जी हां, मोनालिसा का ये अंदाज सभी को काफी पसंद आ रहा है. मोनालिसा ने साड़ी में अपने कातिलाना लटके-झटके दिखाए है. इस वीडियो को देखते ही कई लोग घायल हो गए हैं. एक्ट्रेस सात समुंदर पार गाने पर अपनी किलर अदाएं दिखा रही है. भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा के इस क्लिप पर तमाम लोग रिएक्ट कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, ‘आपके जैसा दूसरा डांसर कोई और नहीं.’ दूसरे ने लिखा, ‘आग लगा दिया मैडम’.

 

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बताते चलें भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा बोल्डनेस के मामले में कई एक्ट्रेसेस को टक्कर देती हैं. इस लिस्ट में बौलीवुड की सनी लियोनी का नाम भी शामिल है. मालूम हो कि एक्ट्रेस मोनालिसा का देसी लुक सबसे बेस्ट हैं साड़ी में मोनालिसा किसी अप्सरा से कम नहीं लगती हैं.

26 जनवरी स्पेशल: गरम स्पर्श- तबादले पर क्या था मनीष के दिल का हाल

कैप्टन मनीष को असम से नागालैंड में तबादले का और्डर मिला तो उन का दिल कुछ उदास होने लगा. पर और भी बहुत सारे साथियों के तबादले के और्डर आए थे, यह जान कर कुछ ढाढ़स बंधा. सोचा, कुछ तो दोस्त साथ होंगे, वक्त अच्छा बीतेगा.

नागा विद्रोहियों की सरगर्मियां काफी बढ़ी हुई थीं. यही देखते हुए पहाड़ी फौज की 4 बटालियनों को कोहिमा भेजना जरूरी समझा गया. कैप्टन मनीष कोहिमा रैजिमैंट हैडक्वार्टर पर हाजिर हुए तो उन की कंपनी को कोहिमा से 60 किलोमीटर की दूरी पर खूबसूरत पहाड़ियों के दामन में स्थित फौजी कैंप में पहुंचने का आदेश मिला. जैसे ही वे सब कैंप पहुंचे तो चारों ओर नजर फिराते हुए बहुत प्रसन्न हुए.

चारों तरफ ऊंचे पहाड़, उन पर साल और देवदार के पेड़. नीचे मैदानों में चारों ओर मीलों तक फैली हरियाली और सब्ज मखमली घास. तरहतरह के कुसुमित पुष्पों ने उन का मन मोह लिया. दूसरे दिन शाम को जीप में कैंप से 2 मील की दूरी पर निरीक्षण चौकी का मुआयना कर के लौटे तो रास्ते में एक छोटे रैस्टोरेंट के सामने कौफी पीने के लिए जीप रोक दी.

भीतर कोने में पड़ी टेबल पर कौफी का और्डर दे कर बैठे ही थे कि उन की नजर कुछ दूर बैठे एक जोड़े पर गई. दोनों ने मुसकराते, गरदन हिला कर कैप्टन का अभिवादन किया. कैप्टन ने देखा कि दोनों स्थानीय थे और चेहरेमोहरे से नागालैंड के ही लग रहे थे. लड़की स्कर्ट व ब्लाउज पहने हुए थी. उस का जिस्म खूबसूरत व सुडौल था, नाकनक्श तीखे थे. दोनों ने आपस में कुछ खुसुरफुसुर की और उठ कर कैप्टन के पास आए.

‘‘हैलो सर, मे वी गिव यू कंपनी?’’

‘‘ओह, श्योर,’’ कैप्टन ने चारों तरफ पड़ी कुरसियों की ओर इशारा करते हुए कहा. पहाड़ी वेशभूषा में बैरा कौफी ले कर आया तो कैप्टन ने उसे 2 कप और लाने के लिए कहा. बैरा कौफी रख कर चला गया. आंखों में हलकी मुसकराहट, पर बिना कुछ कहे नागा नौजवान ने कौफी का कप कैप्टन की ओर बढ़ाया.

‘‘थैंक यू,’’ कैप्टन ने कप ले कर उन्हें भी कौफी पीने के लिए इशारा किया.

‘‘डौली वांगजू,’’ नौजवान नागा ने पास बैठी लड़की के कंधे पर हाथ रखते हुए उस का नाम बताया, ‘‘मी फिलिप,’’ फिर अपना नाम दोहराया.

कैप्टन ने मुसकराते हुए अपनी पहचान दी, ‘‘माई सैल्फ मनीष.’’ कुछ देर तक बातचीत होती रही फिर कैप्टन मनीष वहां से चल दिए.

कैंप में लौट कर कैप्टन मनीष हाथमुंह धो कर रात को मेस (भोजन कक्ष) में डिनर करने गए. वहां बातोंबातों में उन्होंने मेजर खन्ना को नागा जोड़े के साथ हुई मुलाकात के बारे में बताया, ‘‘जोड़ी तो बहुत खूबसूरत थी, पर पता नहीं चला कि उन का आपसी रिश्ता क्या है?’’

‘‘पर आप को चिंता क्यों है कि वे आपस में क्या लगते हैं?’’

‘‘नहींनहीं, मुझे इस बात से क्या,’’ कैप्टन ने तत्पर जवाब दे कर बात को टाल दिया.

दूसरे दिन पूर्व निर्धारित प्रोग्राम के अनुसार बागियों के खिलाफ अभियान हेतु 3 दिन के लिए जाने का और्डर मिला. कैंप से गाडि़यों का काफिला उत्तरपूर्व की तरफ रवाना हुआ तो नौजवानों में उत्साह था. उन के चमकते चेहरों से यों जान पड़ रहा था कि वे मैदान मार कर ही लौटेंगे.

कैंप से रवाना होने पर मैदानी इलाके से गुजरता गाडि़यों का काफिला थोड़ी देर के लिए मिट्टी के गुबार में गुम हो गया. सिर्फ गाडि़यों के इंजन की गड़गड़ाहट और जूजू की आवाज सुनाई दे रही थी. कुछ देर के बाद मैदानी इलाका पार कर के काफिला जैसे ही बोम ला पहाड़ी के कच्चे रास्ते से ऊंचाई चढ़ने लगा वैसे ही धूल का गुबार पीछे रह गया.

दूर से टेढ़ीमेढ़ी पहाड़ी पगडंडियों पर गुजरता गाडि़यों का काफिला इतना छोटा सा लग रहा था मानो बच्चों ने अपने लारीनुमा खिलौनों में चाबी भर कर एकदूसरे के पीछे छोड़ दी हो.

कैंप में पीछे रह गए जवान हाथ हिला कर काफिले को देर तक विदा करते रहे. कुछ ही पल में काफिला आंखों से ओझल हो गया. 3 दिन के बाद काफिला लौटा. मुखबिर की सूचनानुसार फौजियों ने बोम ला पहाडि़यों के पीछे बागियों के अड्डों को चारों तरफ से घेर लिया पर घेराव के पहले ही बागी फरार हो गए थे. फौजियों ने सारा इलाका छान मारा फिर भी कोई सुराग न मिला.

कैप्टन मनीष दोस्तों के साथ मैस में गपशप करने के बावजूद बोरियत महसूस करने लगे थे. एक दिन फिर जीप में बैठ कर कैंप से बाहर जा कर उसी रैस्टोरेंट में कौफी पीने के लिए पहुंचे. भीतर पहुंचे तो उन की नजर डौली वांगजू पर पड़ी जो कोने में पड़ी टेबल पर अखबार पढ़ रही थी. इस बार वह अकेली थी. कैप्टन मनीष अभी दूसरे कोने में पड़ी कुरसी पर बैठ ही रहे थे कि डौली वहां से उठ कर उन के पास आई.

‘‘हैलो कैप्टन,’’ डौली ने मुसकराते हुए उन का अभिवादन किया.

‘‘हैलो मैडम, हाउ डू यू डू?’’ मनीष उस का नाम भूल गए थे.

डौली ने उन्हें याद दिलाते हुए कहा, ‘‘डौली, सर.’’

‘‘ओह डौली, प्लीज,’’ कैप्टन ने अपनी गलती स्वीकारते हुए कहा.

डौली फौरन दूसरी कुरसी पर बैठी और उन से 3-4 दिन नजर न आने का कारण पूछा. पर मनीष ने कैंप से आने का मौका न मिलने की वजह बता कर बात वहीं खत्म कर दी. दोनों ने मिल कर कौफी पी. मनीष ने डौली से उस के मांबाप के बारे में जानना चाहा. डौली ने उन्हें बताया कि वह मिशनरी स्कूल से 2 साल पहले मैट्रिक पास कर चुकी है. उस के मातापिता दोनों मिशनरी स्कूल में टीचर थे. स्कूल के बाद दोनों प्रचार का काम करते थे.

मनीष रहरह कर डौली की आंखों में निहारते रहे, उन में बेहिसाब कशिश थी. बौबकट बालों की सुनहरी लटें कभीकभी हवा के झोंके से उस के सुर्ख गालों को चूमने की कोशिश कर रही थीं, जिन्हें डौली बाएं हाथ की कनिष्ठिका के लंबे नाखून से निहायत खूबसूरत अंदाज में हटाती रही.

मनीष उस के चेहरे को बारबार गौर से देख रहे थे. सोच रहे थे कि डौली के नाकनक्श न बर्मी थे, न ही चीनी वंश के. पहाडि़यों की तरह उस की नाक चपटी और समतल भी नहीं थी. बल्कि उत्तरी भारत के मैदानी इलाके के आर्य वंश का सा रूपसौष्ठव था. बेपनाह हुस्न का ऐसा बुत देश के दूरदराज घनी पहाडि़यों व वादियों में भी मिल सकता है, सोच कर वे हैरान थे.

मनीष का जी उठने को नहीं हो रहा था. पर कैंप में वक्त पर पहुंचना था, इसलिए डौली की ओर मुसकरा कर उठने लगे. डौली ने एक अजीब मुसकराहट के साथ कंधे को एक मामूली झटका दे कर इजाजत देनी चाही, तो कैप्टन मनीष से रहा नहीं गया. वे डौली का हाथ थाम कर उस की आंखों में झांकते रहे, जैसे उस के बेपनाह हुस्न को नजरों से एक ही घूंट में पीना चाहते हों.

डौली की मस्तीभरी निगाहों में मनीष पलभर के लिए अपनी सुधबुध भुला बैठे. अचानक हाथ की उंगलियों पर डौली के सुर्ख लबों का स्पर्श महसूस करते हुए होश में आए. उन का चेहरा सुर्ख हो गया. खुद को संभालते हुए अगले दिन मिलने का वादा करते हुए वे मुसकरा कर जीप में सवार हो कर चले गए. पर रास्ते भर एक अनोखा एहसास उन के साथ रहा. एक अजीब मादकता उन पर हावी रही.

कैंप में लौट कर थोड़ी देर के लिए वे अपने तंबू में जा कर लेट गए. काफी देर तक किसी खूबसूरत खयाल ने उन का पीछा नहीं छोड़ा. काश, डौली के साथ ब्याह रचा कर उसे राजस्थान में अपने घर ले कर जा सकते. आकाश की इस अप्सरा को अपनी बांहों में भर कर प्यार करते, या कभी सामने बिठा कर सजदा करते. डौली को हासिल कर के, काश स्वप्निल आनंद का अनुभव कर पाते. पलभर की मुलाकात में मनीष को डौली की शांत नीली आंखों की गहराई में एक अजीब कशिश के साथसाथ नजदीकी और अपनापन भी नजर आया था.

दूसरे दिन फिर बागियों के खिलाफ अभियान का दूसरा चरण उत्तरपश्चिम की तरफ जोला पहाडि़यों की घाटियों में तय हुआ. शाम के वक्त अंधेरा होने के बाद मुखबिरों की गुप्त सूचना के अनुसार फौजी दल जोला पहाडि़यों की तरफ रवाना हुआ. जोला की बड़ी पहाड़ी के पीछे बागियों के दल के छिपे रहने की जानकारी थी. फौजी जवानों ने जोला दर्रे से काफी पहले गाडि़यों को रोका और हथियारों के साथ वे पैदल चल पड़े. चांदनी रात थी. दुश्मन की नजर न पड़े, इसलिए छोटीछोटी टोलियों में जोला दर्रे के नजदीकी द्वार पर पहुंचे और फौरन

2-2 सैनिकों के ग्रुप में तितरबितर हो कर पहाडि़यों के घने झुंड की ओट में छिप कर मोरचा संभाले बैठे रहे. कैप्टन मनीष ने अपने साथ तेजकरन को रख लिया. अमावस के बाद चौथे दिन वाला चांद बहुत देर न रुक सका. अंधेरा जैसेजैसे बढ़ने लगा वैसेवैसे सिपाहियों की बेसब्री बढ़ने लगी.

पता नहीं, शायद सारी रात यों ही टोह में बैठे गुजर जाए. यों ही इंतजार करते रात का अंतिम पहर आ गया. अचानक जोला दर्रे के छोर पर ऐसा लगा जैसे कुछ धुंधली परछाइयां बिना आवाज के आगे बढ़ रही हैं. टोह में बैठे फौजी दल के सिपाही हरकत में आ गए. सभी के हाथ राइफलों और मशीनगनों के ट्रिगरों पर पहुंच गए और कैप्टन मनीष के और्डर का इंतजार करने लगे.

धुंधली परछाइयां काले लिबास में धीरेधीरे उन झाडि़यों के घने झुरमुट की तरफ बढ़ रही थीं, जिन की ओट में कैप्टन मनीष और सूबेदार तेजकरन टोह में बैठे थे. दूसरे दल से एक फौजी की राइफल से अचानक गोली चल जाने से 2 साए एक तरफ दौड़े और 2 कैप्टन के दल की तरफ. कैप्टन की पिस्तौल की गोली से एक गिर पड़ा.

फौजी दस्ते के लिए कैप्टन का यह इशारा जैसे और्डर था. चारों तरफ से मशीनगनों से गोलियों की बौछार शुरू हो गई. जवाब में बागियों ने गोलियां चलाईं. पर कुछ देर के बाद जवाबी गोलियों की आवाज शांत हो गई. फौजी दल की गोलीबारी जारी रही. काफी देर तक जवाबी गोलियों के न आने से फौजी दल ने भी गोलीबारी बंद कर दी.

पौ फटते ही रोशनी का प्रभामंडल बढ़ने लगा. फौजी पहाडि़यों से निकल कर अपने शिकार को कब्जे में करने के लिए उतावले हो रहे थे. पर कैप्टन ने उन्हें रोका, कि कहीं दुश्मन ताक लगाए बैठा हो और अचानक हमला कर दे. इसलिए सिर्फ 2 फौजी जा कर लाशों का निरीक्षण करें. 2 नौजवानों ने आगे बढ़ कर झाडि़यों से लाशें ढूंढ़ निकालीं. कुल 2 लाशें मिलीं.

शिनाख्त करने की कोशिश की गई, पर बेकार. इतने में कैप्टन और साथी भी पहुंच गए. बागियों की लाशों की पहचान कर पाना मुश्किल काम था. शक्ल से एक मर्द लग रहा था तो दूसरी औरत. दोनों ने गहरे नीले रंग की शर्ट और जींस पहनी हुई थी. जैसे ही 2 जवानों ने उलटी पड़ी लाशों को सीधा कर के लिटाया तो कैप्टन अकस्मात चौंक उठे. ‘डौली और फिलिप को देख कर कैप्टन का चेहरा शांत और गंभीर हो गया. झुक कर उन्होंने डौली के सर्द चेहरे से बालों की लट अपनी गरम उंगलियों से हटा कर दूर कर दी. पर डौली का सर्द चेहरा मनीष की उंगलियों का गरम स्पर्श महसूस न कर सका.

निठारी हो या कॉलेज स्ट्रीट, जिस्मानी भूख की बलि चढ़ते मासूम

Society News in Hindi: देशभर में लड़कियों और छोटी बच्चियों के साथ घट रही सैक्स अपराध की तमाम घटनाओं से साबित हो चुका है कि हमारी बेटियां कहीं भी महफूज नहीं हैं. पड़ोस से ले कर घरपरिवार, रिश्तेदारों के बीच कब और कहां वे रेप की शिकार हो जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता.

अपनी दिमागी बीमारी और जिस्मानी भूख को अंजाम देने वाले सफेदपोश से ले कर सड़कछाप दरिंदे राजपथ से ले कर गलीमहल्लों तक में घूम रहे हैं.

दरअसल, ऐसी घटिया सोच वाले लोग डेढ़ साल से ले कर किशोर उम्र के बच्चों का इस्तेमाल अपने विकार को अंजाम देने के लिए करते हैं.

कुछ साल पहले निठारी कांड ने हमें चौंका दिया था. हालांकि मधुर भंडारकर की फिल्म ‘पेज-3’ के जरीए हम सफेदपोशों की सैक्स भूख को जान चुके हैं, लेकिन सैक्स से जुड़ी लोगों की घटिया सोच किस हद तक दरिंदगी का रूप ले सकती है, इस का पता हमें राजधानी नई दिल्ली समेत देश के अलगअलग हिस्सों में कुछ समय पहले घटी घटनाओं से चला है.

मध्य कोलकाता की कालेज स्ट्रीट में चौथी क्लास का एक बच्चा ट्यूशन पढ़ने के लिए ट्यूटर के घर जाने में हर रोज आनाकानी करता था. उस बच्चे ने कई बार बताने की कोशिश की कि वह ट्यूटर उसे अच्छा नहीं लगता, पर मां डांटडपट कर उसे ट्यूशन पढ़ने के लिए छोड़ आया करती थी.

एक दिन अचानक बच्चा जख्मी हालत में रोतेरोते घर पहुंचा, पर वह कुछ भी बताने से इनकार करता रहा. बाद में उस ने बताया कि शुरू से ही ट्यूटर उस की मासूमियत का फायदा उठा कर लाड़दुलार के बहाने इधरउधर हाथ लगाया करता था, पर आखिर में मामला जहां आ कर पहुंचा था, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था.

कुछ समय पहले पिंकी विरानी की एक किताब आई थी, ‘बिटर चौकलेट: चाइल्ड सैक्सुअल एब्यूज इन इंडिया’. इस में छपे सर्वे में बताया गया है कि

90 फीसदी मामलों में बच्चे घर पर अपने नौकरचाकर से ले कर ट्यूटर, बालिग, पारिवारिक सदस्यों से ले कर सगेसंबंधियों, यहां तक कि बाप की भी हैवानियत के शिकार होते हैं.

साल 2006 में निठारी कांड ने भी खास से ले कर आम लोगों के होश उड़ा दिए थे. मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली पर बच्चों को अगवा कर उन का बलात्कार करने के बाद हत्या ही नहीं, बल्कि बच्चों का मांस पका कर खाने जैसी दरिंदगी के मामले ने सब को हिला दिया था.

नोएडा के पौश इलाके से सटे निठारी गांव से एक के बाद एक गरीब तबके के बच्चे गायब होते रहे.

जांच में 19 बच्चों का मामला सामने आया, जिन में से 14 साल की रिंपी हालदार के मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को विशेष सीबीआई अदालत ने फांसी की सजा सुनाई.

निठारी से सबक नहीं लिया

निठारी कांड से हम ने सबक नहीं लिया. अब तो आएदिन हमारी बेटियां न केवल रेप की शिकार हो रही हैं, बल्कि दरिंदगी की शिकार हो कर उन की जान पर भी बन आती है.

इस साल मार्च में मंगोलपुरी, दिल्ली में 7 साल की और फिर अप्रैल में संगम विहार में 8 साल की, गांधीनगर में 5 साल की, नजफगढ़ में 3 साल की, गोविंदपुरा में 5 साल की और एक चार्टर्ड बस में 10 साल की मासूम के साथ ऐसी घटनाएं सामने आईं. इन में मजदूर, पड़ोसी, बस ड्राइवर से ले कर स्कूली टीचर तक के नाम सामने आए.

वहीं मध्य प्रदेश में सिवनी, इंदौर, भोपाल और मारूगढ़ व उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ में हाल में बच्चियों के साथ हुए रेप ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया.

मनोवैज्ञानिक नजरिया

कोलकाता में इंस्टीट्यूट औफ विहेवियरल साइंस की श्रीलेखा विश्वास का कहना है कि हाल में बच्चों के साथ भारत में हुई दरिंदगी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है, लेकिन नाबालिगों के साथ सैक्स हिंसा केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी हो रही है. चिंता की बात यह है कि अभी भी इस बारे में भारत में जागरूकता की कमी है.

दरअसल, इस तरह के मामले दिमागी बीमारी के होते हैं और विहेवियरल साइंस में इसे ‘पेडोफिलिया’ कहते हैं. इस सोच वाले लोग छोटी सी उम्र के नन्हेमुन्ने बच्चों की नंगी तसवीर में भी अपने लिए ‘सुख’ ढूंढ़ लेते हैं.

श्रीलेखा आगे कहती हैं कि ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि बच्चे पड़ोसियों और ट्यूटर जैसे परिचितों व पारिवारिक या दोस्तों द्वारा सैक्स की हिंसा के शिकार होते हैं.

इन का यह भी कहना है कि बच्चों को इस बात की खबर ही नहीं होती है कि सामने वाला शख्स किस नजर से इन्हें देख रहा है.

दरअसल, बच्चे सामने वाले के छूने को समझ ही नहीं पाते हैं. वे इसे लाड़दुलार समझ बैठते हैं. हर ऐसा आदमी जो सैक्स भावना से बच्चों को प्यारदुलार करता है, ‘पेडोफिलिक’ होता है.

ऐसी दिमागी बीमारी वाले लोग अकसर पहले बच्चों के प्राइवेट हिस्सों को छू कर उन्हें जोश में लाते हैं. कभीकभी बच्चे उन की इस हरकत का मजा लेने लगते हैं और तब इन का काम आसान हो जाता है. लेकिन अगर कभी पकड़े गए, तो सारा कुसूर बच्चों के सिर मढ़ देते हैं, इसलिए मांबाप को उन की किसी बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि बच्चा कभी कोई शिकायत करे, तो तसल्ली से उस की बातों को सुनना चाहिए.

लेकिन यह दुख की बात है कि हमारे देश और समाज में बच्चों की भावना को तूल नहीं दिया जाता है. कई बार देखा जाता है कि बच्चे को किसी खास शख्स का लाड़दुलार रास नहीं आता है. कुछ सगेसंबंधियों को वे बिलकुल पसंद नहीं करते. बाकायदा कुछ लोगों से वे चिढ़ते हैं. वे उन के पास नहीं जाना चाहते हैं. बच्चा न चाहे तो ज्यादा जोर नहीं देना चाहिए.

हमारे आसपास हर जगह ऐसी तमाम मुखौटाधारी रिश्तेदार व दोस्त भरे पड़े हैं. जाने कब, कहां और कैसे हमारे बच्चे किसी की जिस्मानी भूख के शिकार हो जाएं, कहा नहीं जा सकता, इसीलिए मांबाप को खुद तो सचेत रहना ही चाहिए, साथ ही बच्चों को भी जागरूक बनाना चाहिए.

बच्चा अगर ऐसी किसी बात की ओर इशारा करता है या शिकायत करे, तो उस की बातों को गंभीरता से लें. उन के भीतर हिम्मत पैदा करें. अगर कभी कोई हादसा हो गया, तो हिम्मत से काम लें. बच्चे से खुल कर बात करें. अगर बच्चा खुल कर न कह पाए या कहना न चाहे, तो उस की अनकही बातों को समझाने की कोशिश करें.

एक समय के बाद बच्चों को यह समझना जरूरी है कि छिपा कर किया हुआ या मन को अच्छा नहीं लगने वाला कोई भी काम ठीक नहीं होता. ऐसे काम से दूर रहना चाहिए. अगर कोई और करे, तो चुप रह जाना चाहिए.

बच्चों को समझाना होगा कि अगर कोई प्यारदुलार के बहाने बदन के किसी हिस्से को हाथ लगाए, तो फौरन मांबाप को बताएं.

बच्चों का जिस्मानी शोषण केवल मर्द करते हैं, गलत है. आरतें भी बच्चों का यौन शोषण करती हैं.

अनजान लोग ही ऐसा काम करते हैं, ऐसा भी नहीं है. ज्यादातर मामलों में पारिवारिक सदस्य, जानने वाले लोग भी बच्चों का जिस्मानी शोषण करते हैं.

क्या नशे का सामान बेचने से अच्छी कमाई होती है?

सवाल

मैं 19 साल का एक? कुंआरा लड़का हूं. मैं निचली जाति का हूं. हमारा 6 लोगों का परिवार है और हम दिल्ली की एक कच्ची बस्ती में रहते हैं. यहां पर आसपास नशे का सामान इफरात से बिकता है. मेरे परिवार की ज्यादा कमाई नहीं है, तो बहुत बार मन करता है कि मैं भी नशे का सामान बेचना शुरू कर दूं. पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही है. कमाई का कोई दूसरा रास्ता भी नहीं सूझ रहा है. इस बात से मुझे तनाव रहने लगा है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

आप ऐसी जुर्रत न ही करें तो बेहतर है. यह जुर्म है, जो परिवार, समाज और देश के लिए कितना नुकसानदेह है. देश में करोड़ों लोग भूखे सोते हैं और करोड़ों ही तंगहाली में जी रहे हैं, लेकिन इस का यह मतलब नहीं है कि वे सभी पैसों के लिए यह शौर्टकट अपना लें. आप का तनाव कम कमाई नहीं, बल्कि गलत तरीके से ज्यादा कमाई न कर पाने की हिम्मत न कर पाना है. कच्ची बस्तियों की बदहाल जिंदगी की एक बड़ी वजह नशा भी है. आप मेहनत करें, क्योंकि पैसा ईमानदारी से आए तो सुकून भी देता है. इस तरह के खयाल जेहन से निकाल दीजिए और कमाई बढ़ाने की कोशिश कीजिए.

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सवाल

मेरी उम्र 28 साल है. मैं एक गरीब घर की औरत हूं. मेरा एक बच्चा है. मैं पिछले 2 साल से अपने पति से अलग रहती हूं. हमारी शादी को 5 साल हो चुके हैं. पड़ोस में एक आदमी मुझ से शादी करना चाहता है और मेरे बच्चे को भी अपनाने को तैयार है. पर मेरा अभी तलाक नहीं हुआ है.  उस आदमी का मानना है कि मैं जल्दी से तलाक ले लूं, पर यह इतना आसान नहीं है. मुझे उस आदमी को किसी कीमत पर नहीं खोना है. क्या मुझे जल्दी से जल्दी तलाक मिल सकता है? 

जवाब

तलाक जल्दी मिले इस बाबत पिछले दिनों कई अदालती फैसले आए हैं. आप किसी माहिर वकील से मिलें. एकाध साल में तलाक मिल जाएगा. अगर पति भी तैयार हो तो रजामंदी वाली हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा 13 बी के तहत 6 महीने में तलाक हो सकता है.

सच्ची सलाह के लिए कैसी भी परेशानी टैक्स्ट या वौइस मैसेज से भेजें.  मोबाइल नंबर :                     08826099608

रूपाली का घिनौना रूप, कौन बना उस का शिकार

Crime News in Hindi: 13 जून, 2017 को पुलिस कंट्रोलरूप (Control Room) द्वारा उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर (Jaunpur) की कोतवाली मड़िया हूं पुलिस को गांव सुभाषपुर में एक युवक की लाश पड़ी होने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी इंसपेक्टर नरेंद्र कुमार सिंह पुलिस बल के साथ सुभाषपुर गांव (Subhashpur Village) स्थित उस जगह पहुंच गए, जहां लाश पड़ी होने की सूचना मिली थी. घटनास्थल केडीएस स्कूल के पीछे था. अब तक वहां गांव वालों की काफी भीड़ जमा हो चुकी थी. लेकिन पुलिस को देखते ही लोग एक किनारे हो गए थे. नरेंद्र कुमार सिंह ने लाश का निरीक्षण शुरू किया. मृतक की हत्या किसी धारदार हथियार से बड़ी बेरहमी से की गई थी. उस की उम्र यही कोई 27-28 साल थी. देखने से ही वह गांव का रहने वाला लग रहा था.

पुलिस कंट्रोलरूम से इस घटना की सूचना पुलिस अधिकारियों को भी मिल गई थी. उसी सूचना के आधार पर एसपी भौलेंद्र कुमार पांडेय भी घटनास्थल पर आ गए थे. उन्होंने भी घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया. काफी प्रयास के बाद भी लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी थी. मृतक के कपड़ों की तलाशी में भी कोई ऐसी चीज नहीं मिली थी, जिस से उस की शिनाख्त हो सकती.

पुलिस लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की तैयारी कर रही थी, तभी कोतवाली प्रभारी नरेंद्र कुमार सिंह एक बार फिर घटनास्थल का निरीक्षण बारीकी से करने लगे. इस का नतीजा यह निकला कि लाश से कुछ दूरी पर उन्हें एक टूटा हुआ सिम मिला. इस से जांच में मदद मिल सकती थी, इसलिए उन्होंने उसे सुरक्षित रख लिया.

एसपी भौलेंद्र कुमार पांडेय मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने का आदेश दे कर चले गए थे. इस के बाद नरेंद्र कुमार सिंह भी लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर थाने आ गए. थाने में उन्होंने अपराध संख्या 461/2017 पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने के लिए एसपी भौलेंद्र कुमार पांडेय ने थाना पुलिस की मदद के लिए क्राइम ब्रांच के अलावा सर्विलांस टीम को भी लगा दिया था. जांच को आगे बढ़ाते हुए नरेंद्र कुमार सिंह ने घटनास्थल से मिले सिमकार्ड पर लिखे नंबर के आधार पर संबंधित कंपनी से पता किया तो जानकारी मिली कि वह सिम महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली के थाना देशाई के गांव तुलसी के रहने वाले पंकज का था. वह सिम महाराष्ट्र से खरीदा गया था.

इस का मतलब यह हुआ कि मृतक का आसपास के रहने वाले किसी से कोई संबंध था या फिर वह यहां घूमने आया था. उस का किस से क्या संबंध था, यह पता करने के लिए पुलिस ने नंबर पता कर के उस की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस नंबर से अंतिम नंबर पर जिस से बात हुई थी, उस का नाम सत्यम था.

13 जून को सत्यम की पंकज से कई बार बात हुई थी. यही नहीं, उस के नंबर की लोकेशन भी 13 जून को घटनास्थल की पाई गई थी. अब शक की कोई गुंजाइश नहीं रही. नरेंद्र कुमार सिंह ने सत्यम के नंबर को सर्विलांस पर लगवा कर उस की लोकेशन पता कराई, क्योंकि फोन करने पर उसे शक हो जाता और फरार हो सकता था.

सर्विलांस के आधार पर ही उन्होंने 24 जुलाई, 2017 की सुबह इटाए बाजार के आगे नहर की पुलिया के पास से सत्यम और उस के साथ एक युवक तथा एक युवती को गिरफ्तार कर लिया. तीनों एक मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे. बाद में पूछताछ में पता चला कि तीनों कहीं दूर भाग जाना चाहते थे, जिस से पुलिस उन्हें पकड़ न सके.

तीनों को थाने ला कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम सत्यम उर्फ छोटू गौड़, सचिन गौड़ उर्फ चिंटू और रूपाली बताए. इन में सत्यम और सचिन वाराणसी के थाना फूलपुर के गांव करियांव के रहने वाले थे. युवती का नाम रूपाली था. वह मृतक पंकज उर्फ प्रेम उर्फ बबलू की पत्नी थी. वह महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली के थाना देशाई के गांव तुलसी की रहने वाली थी.

पुलिस ने तीनों से पूछताछ शुरू की तो थोड़ी हीलाहवाली के बाद उन्होंने पंकज की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पुलिस ने उन की मोटरसाइकिल संख्या यूपी65बी क्यू 7062 जब्त कर ली थी. इस के बाद इन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, दस्ताने भी बरामद कर लिए गए थे. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में तीनों ने पंकज की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली के थाना देशाई के गांव तुलसी का रहने वाला 28 साल का पंकज उर्फ प्रेम उर्फ बबलू उत्तर प्रदेश के जिला वाराणसी के थाना फूलपुर के गांव करियांव में आ कर रह रहा था. वह यहां शादीविवाहों या किसी अन्य कार्यक्रमों में डांस करता था. इसी से होने वाली आमदनी से उस का और उस के परिवार वालों का भरणपोषण हो रहा था. वह डांस कर के इतना कमा लेता था कि उस का और उस के परिवार का गुजारा आराम से हो रहा था.

करियांव में ही सत्यम उर्फ छोटू गौड़ भी रहता था. पंकज से उस की दोस्ती हो गई तो वह उस के घर भी आनेजाने लगा, घर आनेजाने से उन की दोस्ती तो गहरी हुई ही, पंकज की पत्नी रूपाली से भी उस की अच्छी पटने लगी. वह उसे भाभी कहता था. चूंकि सत्यम की शादी नहीं हुई थी, इसलिए जल्दी ही रूपाली पर उस का दिल आ गया. इस के बाद वह पंकज की अनुपस्थिति में भी उस के घर जाने लगा, क्योंकि उस के सामने वह दिल की बात नहीं कह सकता था.

आखिर एक दिन पंकज की अनुपस्थिति में सत्यम ने रूपाली से दिल की बात कह ही नहीं दी, बल्कि दिल की मुराद भी पूरी कर ली. एक बार मर्यादा भंग हुई तो सिलसिला चल निकला. दोनों को जब भी मौका मिलता, इच्छा पूरी कर लेते. पंकज इस सब से अंजान था. जिस पत्नी को ले कर वह अपने घरपरिवार से इतनी दूर आ गया था, उसी पत्नी ने उस से बेवफाई करने में जरा भी संकोच नहीं किया था.

पंकज की गैरमौजूदगी में सत्यम का आनाजाना कुछ ज्यादा बढ़ गया तो लोगों की नजरों में यह बात खटकने लगी. लोगों ने इस बात पर ध्यान दिया तो उन्हें मामला गड़बढ़ लगा. लोग इस बात को ले कर चर्चा करने लगे तो यह बात पंकज के कानों तक पहुंची. पहले तो उस ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब लोगों ने टोकाटाकी शुरू की तो उस ने सच्चाई का पता करना चाहा. इस के लिए उस ने एक योजना बनाई.

एक दिन वह रूपाली से कार्यक्रम में जाने की बात कह कर घर से निकला जरूर, लेकिन थोड़ी देर बाद अचानक वापस आ गया. अचानक पंकज को देख कर रूपाली घबरा गई. इस की वजह यह थी कि उस समय सत्यम उस के घर में ही मौजूद था. पंकज को देख कर सत्यम तो पिछवाड़े से भाग निकला, लेकिन रूपाली पकड़ी गई. उस की हालत ने सच्चाई उजागर कर दी. पंकज ने उसे खरीखोटी तो सुनाई ही, इतने से मन नहीं माना तो पिटाई भी कर दी.

रूपाली ने उस समय वादा किया कि अब वह फिर कभी ऐसी गलती नहीं करेगी. पंकज ने भी उस की बात पर विश्वास कर लिया. माफ करना उस की मजबूरी भी थी. आखिर उसे भी तो अपना घर बचाना था. उसे लगा कि गलती सभी से हो जाती है, रूपाली से भी हो गई. अब संभल जाएगी.

लेकिन रूपाली संभली नहीं, कुछ दिनों तक तो वह सत्यम से बिलकुल नहीं मिली. लेकिन धीरेधीरे दोनों लोगों की नजरें बचा कर फिर चोरीचुपके मिलने लगे. रूपाली पंकज से ऊब चुकी थी. वह पूरी तरह से सत्यम की हो कर रहना चाहती थी, इसलिए वह जब भी सत्यम से मिलती, एक ही बात कहती, ‘‘सत्यम, अब मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकती. इस तरह छिपछिप कर मिलना मुझे अच्छा नहीं लगता. मैं पूरी तरह तुम्हारी हो कर रहना चाहती हूं. चलो, हम कहीं भाग चलते हैं.’’

‘‘मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता रूपाली, लेकिन थोड़ा शांति से काम लो. देखो, मैं कोई उपाय करता हूं.’’ जवाब में सत्यम कहता.

सत्यम उपाय सोचने लगा. उस ने जो उपाय सोचा, उस के बारे में एक दिन रूपाली से कहा, ‘‘रूपाली, क्यों न हम पंकज को हमेशाहमेशा के लिए रास्ते से हटा दें. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.’’

रूपाली पहले तो थोड़ा हिचकिचाई, लेकिन उस के बाद धीरे से बोली, ‘‘कहीं हम पकड़े न जाएं?’’

‘‘इस की चिंता तुम बिलकुल मत करो. उसे तो मैं ऐसा निपटा दूंगा कि किसी को कानोकान खबर नहीं होगी.’’ सत्यम ने कहा.

इस के बाद सत्यम ऐसा मौका ढूंढने लगा, जब वह अपना काम कर सके. 12 जून, 2017 को पंकज को कार्यक्रम में डांस करने के लिए थाना मडि़याहूं के गांव सुभाषपुर जाना था. वह अपनी पार्टी के साथ निकल भी गया.

पंकज के घर से निकलते ही रूपाली ने सत्यम को बता दिया. चूंकि वाराणसी और जौनपुर की सीमा सटी हुई है और मडि़याहूं तथा फूलपुर के बीच की दूरी तकरीबन 40 किलोमीटर है, इसलिए सत्यम रूपाली के सूचना देते ही अपने साथी सचिन के साथ सुभाषपुर गांव के लिए निकल पड़ा.

आधी रात के बाद लोगों की नजरें बचा कर सत्यम ने बहाने से पंकज को गांव के बाहर केडीएस स्कूल के पीछे बुलाया और सचिन की मदद से चाकू से उस की हत्या कर दी. इस के बाद पंकज के मोबाइल से उस का सिम निकाल कर तोड़ कर झाडि़यों में फेंक दिया और मोबाइल ले कर चला गया.

पंकज के अचानक गायब होने से उस के साथियों ने सोचा, शायद किसी बात से नाराज हो कर वह घर चला गया होगा और अपना मोबाइल भी बंद कर लिया होगा. पति के इस तरह गायब होने से रूपाली रोनेधोने का नाटक करती रही. काफी दिन बीत जाने के बाद भी जब पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंची तो उचित मौका देख कर उस ने सत्यम के साथ भाग जाने की योजना बना डाली.

संयोग से पुलिस ने उन्हें उसी दिन पकड़ लिया, जिस दिन सत्यम और रूपाली भाग रहे थे. मामले का त्या कर रूपाली और सत्यम को मिला क्या? पंकज तो जान से गया, लेकिन अब उन दोनों की जिंदगी भी अबखुलासा होने के बाद पुलिस ने अज्ञात की जगह सत्यम, सचिन और रूपाली को नामजद कर तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया. सोचने वाली बात तो यह है कि पंकज की ह जेल में ही कटेगी?

युवाओं के लिए है बेहद जरूरी सैक्स एजुकेशन

Sex News in Hindi: दिया की उम्र महज 20 साल है. वह अविवाहित (Unmarried) है, लेकिन कैसे गर्भवती (Pregnant) हो गई, दिया के मातापिता की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उन से कहां कमी रह गई? क्या दिया की परवरिश में कहीं कोई कमी रह गई थी? क्या वे अपनी जवान हो रही बेटी की हरकतों पर समय की कमी के चलते ध्यान नहीं दे पाए? दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक अच्छे कालेज में पढ़ने वाली दिया के मातापिता को जब उस के गर्भवती होने की बात पता चली तो वे सन्न रह गए. उन्होंने तुरंत सामान पैक किया और दिया को ले कर दिल्ली से बाहर दूसरे शहर चले गए, ताकि बात आसपड़ोस या फिर रिश्तेदारों में न फैले. शहर के बाहर उस के पिता ने किसी अच्छे डाक्टर से उस का गर्भपात (Abortion) कराया और कुछ समय तक वहीं होटल में रहे. बाद में उसे दिल्ली वापस ले आए.

यह उदाहरण सिर्फ दिया का ही नहीं है, बदलते समय के साथसाथ यंगस्टर्स की सोच में काफी बदलाव आया है, पश्चिमी सभ्यता उन के सिर चढ़ कर बोल रही है. उम्र का यह दौर ऐसा होता है कि अगर मातापिता बच्चों को कुछ समझाएं तो उन्हें समझ नहीं आता. उन्हें पूरी दुनिया गलत नजर आती है.

एक अनुमान के मुताबिक, भारत की मैट्रो सिटीज से ले कर गांवों तक 25 से 30 फीसदी युवतियां किसी न किसी कारण गर्भपात कराती हैं. ये आंकड़े 25 साल से कम उम्र की युवतियों के हैं. अधकचरी जानकारी में टीनऐज में गर्भपात के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. सरकारी संस्था नैशनल सैंपल सर्वे औफिस के आंकड़ों पर गौर करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में 20 साल से कम उम्र की युवतियों में गर्भपात का प्रतिशत मात्र 0.7 है, जबकि शहरों में यह 14त्न है.

युवती की बढ़ जाती हैं मुश्किलें

 अविवाहिता जब संबंध बनाती है तब क्या सही और क्या गलत है, इस का खयाल तक उस के दिमाग में नहीं आता. तब मन गहरे समंदर में प्यार के गोते लगाता है. इस के दुष्परिणाम तब सामने आते हैं जब कम उम्र में युवती गर्भवती हो जाती है. इस उम्र में न तो प्रेमी शादी के लिए तैयार होता है और न ही प्रेमिका. लिहाजा, दोनों के सामने बस एक ही रास्ता होता है और वह है गर्भपात.

जब यह बात घर वालों को पता चलती है तो पूरे घर में बवंडर आ जाता है जो लाजिमी है, लेकिन इस गलती का युवती को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. उसे न केवल गर्भपात जैसे जटिल दौर से गुजरना पड़ता है बल्कि कई तरह की मानसिक परेशानियों से भी दोचार होना पड़ता है. प्रेमी के बदलते रवैए और घर वालों के तानों से पीडि़ता डिप्रैशन में चली जाती है जबकि कई मामलों में युवती ऐसे हालात में मौत को भी गले लगा लेती है.

कौन है जिम्मेदार

देश में अब टीनऐजर्स के लिए गर्भपात कोई नई बात नहीं है. युवा पहले शादी फिर सैक्स जैसी बातों को अब दकियानूसी मानते हैं और इस की वजह है उन्हें आसानी से सबकुछ उपलब्ध हो जाना, ऐसे में वे क्यों शादी का इंतजार करें और जिम्मेदारियों के बोझ तले दब जाएं.

इस के पीछे मुख्य कारण एकल परिवार भी है, जहां मातापिता दोनों कामकाजी हैं. ऐसे में वे बच्चों पर ज्यादा निगरानी नहीं रख पाते. बच्चे अकेले टीवी पर क्या देख रहे हैं या फोन पर क्या डाउनलोड कर रहे हैं, ये सब देखने की उन्हें फुरसत ही नहीं है. आजकल टीवी और इंटरनैट के माध्यम से सब चीजें उपलब्ध हैं, जिस के दुष्परिणाम आगे चल कर हमारे सामने गर्भपात के रूप में आते हैं.

प्रेमी का व्यवहार भी है इस की वजह

 प्यार की शुरुआत में तो सबकुछ अच्छा लगता है और कई बार युवती इस उम्मीद में रिश्ता भी बना लेती है कि उस की प्रेमी से शादी हो जाएगी, लेकिन जब वह गर्भ ठहरने की बात प्रेमी को बताती है तो अधिकतर मामलों में वह प्रेमिका से पीछा छुड़वाने की भरपूर कोशिश करता है. वह न तो बच्चे को अपना नाम देना चाहता है और प्रेमिका से शादी करने से भी मना कर देता है, जिस के चलते युवती के पास सिवा गर्भपात के कोई उपाय नहीं बचता और फिर उसे कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है. इस से न केवल उस का स्वास्थ्य प्रभावित होता है बल्कि मानसिक रूप से भी उसे गहरा सदमा लगता है.

गर्भपात के बाद युवती खुद को अलगथलग महसूस करती है. बारबार उसे लगता है कि उस के साथ धोखा हुआ है. धीरेधीरे उस के व्यवहार पर भी इस का गहरा असर दिखाई देता है.

गलती दोनों की

 यदि शादी से पहले कोई युवती गर्भवती हो गईर् है तो इस में सिर्फ उस की ही गलती नहीं है, जितनी दोषी वह युवती है उतना ही दोष उस युवक का भी है. दोनों इस में बराबर के हकदार हैं. हमारा समाज शादी से पूर्व युवती के गर्भवती होने पर उसे कई तरह के ताने जैसे बदचलन, कुलटा, कलमुंही कह कर उस का तिरस्कार करता है, लेकिन उस युवक का क्या, जो गर्भ में पल रहे बच्चे का बाप है? क्या उस का कोई कुसूर नहीं? लिहाजा, किसी एक पर गलती का दोष न डाला जाए तो अच्छा है.

कैसे निबटें ऐसे हालात से

 अगर आप कामकाजी या हाउसवाइफ हैं तो जरूरी है कि अपने बढ़ते बच्चों का ध्यान रखें. वे क्या कर रहे हैं, कब कहां जा रहे हैं, किस से बात कर रहे हैं? इन सब बातों को नजरअंदाज न करें बल्कि बच्चे का खयाल रखें, उस के साथ दोस्त की तरह व्यवहार करें. ध्यान रखिए डराधमका कर वह आप को कभी कुछ नहीं बताएगा. यदि आप का बच्चे के साथ व्यवहार दोस्ताना रहेगा तो वह आप के साथ सारी बातें शेयर करेगा. उस का फोन और लैपटौप भी समयसमय पर चैक करते रहिए.

हम यह नहीं कह रहे हैं कि आप जासूसी कीजिए, लेकिन यदि आप कभीकभार ये सब चीजें चैक करेंगे तो आप को पता चल जाएगा कि आप का बच्चा किस दिशा में जा रहा है.

सैक्स शिक्षा बच्चों के लिए आज काफी अहम हो गई है. स्कूलकालेजों में यदि सैक्स शिक्षा दी जाए तो बच्चों को इस के सही और गलत प्रभाव का पता चल जाएगा जिस से टीनऐज में गर्भपात के हालात से निबटा जा सकता है.

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Story in Hindi

13 साल की वेश्या : शहजाद की रंगरलियां

आज रविवार है यानी छुट्टी का दिन, इसलिए घर वालों की ओर से शहजाद को सुबह ही एक काम की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, ईख के खेत में पानी लगाना. उस की 10 बीघा जमीन गांव फौलादपुरा से पूर्व की तरफ 2 किलोमीटर की दूरी पर है, जिसे वह अपना ‘चक’ कहता है.

आबादी और मकानों की लगातार बढ़ती तादाद से शहजाद का गांव फौलादपुरा पश्चिम की ओर देवबंद शहर से मिलने ही वाला है. अगले कुछ सालों में शायद फौलादपुरा देवबंद शहर का एक महल्ला कहलाने लगे.

फौलादपुरा से तकरीबन एक किलोमीटर की दूरी पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय है. इस कालेज से शहजाद ने बीए किया है. एक साल एमए हिंदी की भी पढ़ाई की थी, लेकिन फेल हो जाने के चलते बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी.

प्रोफैशनल कोर्स की बहुत ज्यादा डिमांड देख कर शहजाद ने देवबंद के प्राइवेट आईटीआई संस्थान ‘मदनी टैक्निकल इंस्टीट्यूट’ में दाखिला ले लिया.

इंस्टीट्यूट से छुट्टी होने के बाद शहजाद इलैक्ट्रौनिक की एक दुकान पर काम करता है. इस से उस की जेब और पढ़ाई का खर्च निकल आता है.

शहजाद अपनी पढ़ाई और काम में बहुत ज्यादा बिजी रहता है, इसलिए उसे घर और खेती का काम कभीकभार ही करना पड़ता है. लेकिन आज छुट्टी के दिन सुबह ही उस की ड्यूटी पक्की हो गई है कि उसे खेत में पानी लगाना है. पानी रजवाहे से लिया जाएगा, जिस का ओसरा सुबह 11 बजे शुरू हो कर दोपहर के डेढ़ बजे तक रहेगा.

शहजाद ठीक 11 बजे साइकिल से खेत पर पहुंच गया. रजवाहे से पानी चालू कर वह देवबंद घूमने चल दिया, क्योंकि उस का खाने का तंबाकू खत्म हो गया था, जिसे वह और उस के देस्त ‘रोक्कड़’ कहते हैं. वह उस के बिना नहीं रह सकता.

‘जब तक देवबंद से ‘रोक्कड़’ ले कर आऊंगा, खेत भरा मिलेगा,’ यही शहजाद का अंदाजा था.

देवबंद में कई जगहों पर घूमने के बाद एक भी दुकान खुली हुई नहीं दिखाई दी. रविवार के दिन सभी दुकानें बंद रहती हैं. कुछ हफ्ते से एसडीएम के आदेश पर इस नियम का सख्ती से पालन किया जा रहा है. दुकान खोलने पर चालान कटने का डर रहता है. शाम के समय ही कुछ जरूरी सामान की दुकानें खुल सकेंगी.

‘रोक्कड़’ के बिना शहजाद का काम नहीं चलेगा, क्योंकि इस के न खाने पर सारा जबड़ा हिलता हुआ सा महसूस होने लगता है. कभीकभी ऐसा भी लगता है, जैसे सभी दांत तुरंत मुंह से बाहर गिर जाएंगे. अजीब सी कुलबुलाहट होने लगती है, इसलिए दुकान से न मिलने पर किसी न किसी दोस्त से ‘रोक्कड़’ लेना ही पड़ेगा.

एक दोस्त से ‘रोक्कड़’ ले कर शहजाद वापस खेत पर लौटा. अभी केवल एक घंटा ही बीता था. आते ही उस ने चैक किया कि खेत भरा है या नहीं? खेत अभी आधा ही भरा था. वह खेत की मेंड़ पर खड़ा हो कर सोचने लगा कि जब तक खेत पूरी तरह भर नहीं जाता, तब तक क्या किया जाए?

शहजाद सोच ही रहा था कि अचानक उस ने देखा कि एक बेमेल जोड़ा उस की तरफ ही आ रहा है. देवबंद जाने वाली पक्की सड़क से हट कर, कच्चे रास्ते से पैदल ही वह जोड़ा चला आ रहा था. इस रास्ते के दोनों ओर गन्ने के खेत थे. कुछ छिले हुए और कुछ बिना छिले हुए.

लड़की आगे चल रही थी और लड़का उस से कोई 5-7 कदम पीछे. पहले तो शहजाद ने अंदाजा लगाया कि दोनों में कोई चक्कर नहीं. लेकिन ईख की ओट आते ही लड़के ने लड़की के साथ गंदी हरकतें शुरू कर दीं. तब वह समझ गया कि दोनों में कोई चक्कर है.

लड़के ने लड़की के कूल्हे पर चूंटा. लड़की उस लड़के की ओर देख कर मुसकरा दी. कुछ इशारा करते हुए लड़की आगे बढ़ गई. लड़का कुतिया के पीछे कुत्ते के समान उछलकूद सी करते हुए चलने लगा.

लड़का एकदम हट्टाकट्टा था. मैली सी पैंटटीशर्ट पहने हुए, यही कोई 24-25 साल का. इस के उलट लड़की एकदम नादान, कुछ दुबलीपतली सी. न कूल्हों में ज्यादा भारीपन, छाती में हलका सा उभार. सांवला सा रंग, ज्यादा खूबसूरत भी नहीं. बस, कामचलाऊ. छोटा कद, उम्र यही कोई 13-14 साल. उस जोड़ी को देख कर नहीं लगता था कि लड़की लड़के के लिए किसी भी तरह से ठीक है.

उन दोनों को अपनी ओर आता देख शहजाद ईख की ओट में छिप गया. उसे यकीन था कि उन दोनों ने उसे नहीं देखा.

लड़कालड़की शहजाद के खेत के बगल वाले ईख के खेत में घुस गए. शहजाद तुरंत भांप गया कि मामला दूसरा है. शहजाद बहुत ही सावधानी से एकदम चुपचाप उन के पैरों के निशान देखता हुआ उसी जगह पर जा पहुंचा, जहां लड़कालड़की गए थे. उस ने दूर से जोकुछ देखा, उसे अपनी आंखों पर यकीन न हुआ. लड़की उस लड़के से चुंबक के समान चिपकी हुई थी.

शहजाद ने बहुत सी ब्लू फिल्में देखी थीं. रेप के किस्से सुने थे. लेकिन इस तरह का सैक्स देखने का मौका उसे पहली बार मिला था. उस के मन में एक हलचल सी मच गई. शरीर में कुछ हरारत सी होने लगी. लेकिन वह दिमागी रूप से बहुतकुछ चाहते हुए भी जिस्मानी रूप से कुछ न कर सका. पासा उलटा पड़ सकता था.

अगर शहजाद उन दोनों को धमकाता तो उस की भी धुनाई हो सकती थी. लड़का उस से काफी तगड़ा था. साथ ही, उस पर कोई गंदा इलजाम भी लग सकता था, इसलिए वह चुपचाप दबे पैर कुछ सोचते हुए वापस खेत की मेंड़ पर लौटा.

शहजाद ने तुरंत उसी दोस्त को फोन मिलाया, जिस से वह ‘रोक्कड़’ ले कर आया था, ‘‘हैलो, जल्दी आ. जुगाड़ फंसा हुआ है. अगर काम करना है, तो 5 मिनट में रजवाहे वाले खेत पर आ जा. किसी और को भी साथ लेते आना.’’

शहजाद के फोन करने के ठीक 8-10 मिनट बाद ही 2 लड़के बाइक से उस के पास पहुंच गए. उन के उतावलेपन को देख कर ऐसा लगा, जैसे अड्डे पर खड़े शहजाद के फोन का ही इंतजार कर रहे थे. फिर तीनों प्लान बना कर उसी जगह पर धमक पड़े, जहां वह जोड़ा था. शहजाद को वह जगह पता ही थी. लड़कालड़की दोनों अलगअलग लेटे हुए थे, लेकिन एकदूसरे के हाथ पकड़ रखे थे.

शहजाद और उस के दोस्तों ने पुलिस के समान दबिश दी. ‘धबड़धबड़’ की आवाज सुनते ही लड़का गिरतापड़ता भाग गया. लड़की भाग न सकी और फंस गई.

शहजाद ने उस लड़की की ओर आंखें निकाल कर डांटते हुए पूछा, ‘‘क्या कर रही थी? कौन था तेरे साथ?’’

लड़की ने घबराते हुए और तकरीबन भागने की हालत में खड़े हो कर कहा, ‘‘कोई नहीं था. मैं किसी को नहीं जानती. मैं तो अकेली ही शौच करने के लिए आई थी.’’

‘‘तो फिर यह पैंट किस की है? तू तो सलवार पहने हुए है या फिर पैंट भी साथ ले कर आई थी,’’ उन में से एक लड़के ने जमीन पर पड़ी पैंट की ओर इशारा करते हुए पूछा. वह लड़का अपनी पैंट वहीं छोड़ गया था.

‘‘मैं कुछ नहीं जानती. मुझे जाने दो. तुम मुझे मार डालोगे,’’ लड़की डरीसहमी सी बोली. वह उन सब की घूरती आंखें देखते ही उन की नीयत पहचान गई थी. वे तीनों उसे घेरे खड़े ताक रहे थे.

उन में से एक ने अपना रोब जमाते हुए कहा, ‘‘अच्छा, अपनी सलवार खोल कर दिखा, तू ने क्या किया है? अभी सब शीशे के समान साफ हो जाएगा. अभी पता चल जाएगा तेरी करतूतों का.’’

‘‘नहीं, मैं ने ऐसा कुछ नहीं किया, जैसा तुम समझ रहे हो.’’

लड़की कुछ और बोलना चाह ही रही थी कि दूसरे लड़के ने तुरंत उस की कनपटी पर एक थप्पड़ जड़ दिया और बोला, ‘‘दिखा जल्दी, वरना अभी तेरे नाड़े से तेरा गला घोंट दूंगा.’’

लड़की ने डर कर तुरंत अपना नाड़ा खोल दिया और सलवार नीचे खिसका दी.

तभी उन में से एक लड़के ने उस लड़की को गोद में उठाया और उसी ईख में कुछ दूर ले गया.

थोड़ी देर बाद वह लड़का उठ कर आया, तो दूसरे लड़के ने उस लड़की को तुरंत दबा लिया.

थोड़ी देर बाद उस दोस्त ने शहजाद से कहा, ‘‘जा, तू भी अपना जुगाड़ कर ले,’’ लेकिन उस ने यह कहते हुए मना कर दिया, ‘‘नहीं यार, ज्यादा नहीं, बेचारी मर जाएगी.’’

शहजाद दुखी था. उस ने लड़की से पूछा, ‘‘वह लड़का तुझे कितने में तय कर के लाया था?’’ लड़की ने झिझकते हुए बता दिया, ‘‘50 रुपए में.’’

शहजाद ने अपनी जेब से 100 रुपए का नोट निकाला और उस के हाथ में थमा दिया. लड़की के चेहरे से दुख के बादल छंट गए और उस के शरीर में एक खुशी की लहर दौड़ गई. वह इस तरह चल दी जैसे कुछ हुआ ही नहीं. उस की चाल में भी टेढ़ापन नहीं दिखा.

10 दिन बाद देवबंद के पवित्र धार्मिक स्थल देवीकुंड पर ‘मां त्रिपुर बाला सुंदरी’ का मेला शुरू हो गया. यह मेला महीनेभर चलता था. आसपास के गांवों के लोगों के साथ ही दूरदराज की जगहों से भी लोग इस मेले को देखने आते थे. ज्यादा दूर के लोग अपने रिश्तेदारों के यहां ठहरते थे और अकसर रात के समय मेला देखने जाते थे.

जब मेला अपने जोरों पर था, शहजाद की भी मेला देखने की इच्छा हुई. घर पर 2 मेहमान दोस्त भी आए हुए थे, जिन्होंने मेले जाने को कहा था. रात के समय भीड़भाड़ ज्यादा होती थी. रात की भीड़ में लड़कियों के साथ अकसर छेड़छाड़ भी हो जाती थी.

शहजाद मेहमानों के साथ मेले की रंगबिरंगी दुनिया का मजा उठाने में बिजी था. कहीं स्टेज पर जोकर हंसाहंसा कर ग्राहकों को अपना शो देखने के लिए बुला रहे थे, तो कहीं लड़की तख्तों के बनाए स्टेज पर डांस कर के ‘मौत का कुआं’ देखने के लिए लोगों को बुला रही थी, जिस के पास ही बैठा एक छोकरा बड़बड़ा रहा था, ‘‘असली मौत का खेल देखो, नकली में पैसा मत फूंको, चले आओ.’’

किसी जगह पर हिजड़े लड़की के कपड़े पहन कर बिलकुल लड़की जैसे दिखते हुए ग्राहकों को अपनी ओर खींचने में लगे हुए थे. तमाशाई चिल्लाचिल्ला कर अपने शो की ओर बुला रहे थे.

उस भीड़ की दुनिया में शहजाद की नजर अचानक उसी 13-14 साल की लड़की पर पड़ी. उसे ईख के खेत वाली सारी घटना परदे पर चलने वाली फिल्म के समान दिखाई दी. शहजाद ने उस लड़की को मेहमान दोस्तों को दिखाते हुए सारा किस्सा बता दिया.

उस समय वह लड़की आर्य समाज पंडाल के बगल में बैठी हुई एक अधेड़ के साथ कुछ बतिया रही थी. पंडाल के उस तरफ थोड़ा अंधेरा था, इसलिए लोगों का ध्यान उधर कम ही जा रहा था.

एक ठेली से चाऊमीन खा कर वह लड़की उस अधेड़ के साथ प्रसाद ले कर मंदिर की ओर बढ़ी. लेकिन उन दोनों का प्रसाद चढ़ाना तो महज एक बहाना था. वे मंदिर के रास्ते से होते हुए पीछे आम के बाग में पहुंचे. पीछेपीछे शहजाद और उस के मेहमान दोस्त भी थे.

रात के इस पहर इस जगह पर लोगों की आवाजाही बंद हो चुकी थी. इस सूनेपन का फायदा उठा कर उन दोनों ने संबंध बना लिया. लड़की ने बिना चीखेचिल्लाए उस अधेड़ का पूरा साथ दिया.

अचानक शहजाद ने अपने मेहमानों के साथ उन दोनों को घेर लिया. उस अधेड़ की कनपटी पर 2-3 थप्पड़ मार कर उसे चलता कर दिया और लड़की को अपने दोनों मेहमानों के सामने परोस दिया.

काम पूरा हो जाने के बाद शहजाद ने उसे 200 रुपए थमा दिए. लड़की मुसकराती हुई चली गई. शहजाद मेहमानों समेत घर लौट आया.

2 दिन बाद शहजाद फिर मेला देखने पहुंचा. आज वह ‘राष्ट्रीय कवि सम्मेलन’ देखने आया था. उस ने सोचा कि जब तक कवि सम्मेलन ठीक से शुरू नहीं हो जाता, तब तक मेला घूम लिया जाए.

शहजाद घूमतेटहलते मेले के सब से बड़े झाले पर आ पहुंचा. वह खड़ा हो कर झले का टिकट लेने का विचार बना ही रहा था कि वही लड़की 2 होमगार्ड वालों के साथ बात करती हुई दिखाई दी. शहजाद फिर उस लड़की के पीछे हो लिया.

दोनों होमगार्ड उस लड़की को एक शिविर में ले गए. उस समय वहां केवल एक कार्यकर्ता था. एक होमगार्ड ने कुछ समय पहले वहां पहुंच कर उसे कहीं भेज दिया. पीछे से दूसरा होमगार्ड लड़की को ले कर शिविर में घुस गया. उन में से एक बाहर के शिविर में बैठ गया और दूसरा उस शिविर के पीछे छोटे से तंबू में घुस गया. 10-15 मिनट बाद वह बाहर आया, तो दूसरा पहुंच गया. तकरीबन इतने ही समय बाद वह भी बाहर आ गया.

उन दोनों के तंबू से निकल आने के बाद भी वह लड़की बाहर नहीं आई. शहजाद पूरे एक घंटे तक इंतजार करता रहा, लेकिन नतीजा जीरो था. शहजाद मेले में लौट आया, पर उस के दिमाग में वही लड़की घूमती रही.

मेले वाली दूसरी घटना के बाद शहजाद फिर अपने उसी खेत पर पहुंचा, जहां उस ने लड़की को पहली बार देखा था. वह मुख्य रूप से आया तो था कच्ची बस्ती में, जो उस के खेत से तकरीबन 200 मीटर की दूरी पर थी. वह खेत का निरीक्षण करता हुआ उस ओर निकल गया था.

कच्ची बस्ती से शहजाद को देशी मुरगा खरीदना था. शाम को कुछ खास लोग घर पर आने वाले थे. उस ने अपने एक जानकार से बात की, जो शहजाद के खेतों की देखभाल करता था, ईख छिलवाता था, गन्ने की बुग्गी भरवाता था और वक्त पड़ने पर उस की बेगार भी करता था.

बातों ही बातों में उस आदमी से पता चला कि इस बस्ती की एक लड़की 3 दिन से गायब है. पूरा देवबंद, गांवदेहात छान डाले, लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि चोरों का माल कौन हजम कर गया?

शहजाद के सामने तुरंत उस मेले वाली लड़की का चित्र सा बन गया. उस ने लड़की के रूपरंग, उम्र, कपड़े, कदकाठी के बारे में पूछा, तो उस का शक यकीन में बदल गया. इस बारे में उस ने आगे बात करना ठीक नहीं समझ, क्योंकि इस मामले में वह भी फंस सकता था.

उस बस्ती के बहुत से लड़के राहजनी, चोरीचकारी करने वाले और गुंडे थे. गुंडों से बच कर निकलना ही सही था. रस्सी का सांप बना कर उस के गले में भी डाला जा सकता था.

समय कब रुका है और उसे कौन रोक सका है. 5 महीने बीतने के बाद शहजाद को अपने एक दोस्त के साथ किसी काम के सिलसिले में दिल्ली जाना पड़ा. एक रात दिल्ली में ही रुकने की योजना थी. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास दोनों ने एक होटल में कमरा बुक किया और रात को जीबी रोड की तरफ निकल गए.

वे दोनों किसी अच्छे माल की तलाश में घूम रहे थे कि अचानक शहजाद की नजर उसी 13-14 साल वाली लड़की पर पड़ी. इस समय उस का शरीर कुछ भराभरा सा दिखाई दे रहा था. छातियां उठी हुई थीं. शायद उस ने सांस रोक कर थोड़ा फुला भी रखी थीं. बदन के साथ ही कुछ चरबी गालों पर भी चढ़ गई थी.

होंठों पर सुर्खी, नैननक्श तीखे, अच्छे कपड़े, 2 मंजिलों के एक कोठे की खिड़की से मुंह बाहर निकाले हुए वह लड़की राहगीरों को इशारा कर रही थी कि आओ और मुझे अपनी हवस का शिकार बनाओ.

शहजाद को उस लड़की को देख कर यकीन न हुआ कि वह 13-14 की उम्र में वेश्या बन जाएगी. वह अपने दोस्त को नीचे ही छोड़ कर उसी कोठे पर पहुंचा और 1,000 रुपए में सौदा तय कर लिया. उस ने अपना काम निबटा कर लड़की से पूछा, ‘‘मुझे जानती हो?’’

‘‘जानती तो नहीं, शायद पहचानती जरूर हूं.

यहां बहुत से कस्टमर आते हैं. सब को याद रखना मुश्किल है.’’

‘‘तुम मेरे साथ अपने घर चलना चाहोगी?’’ शहजाद ने हमदर्दी दिखाते हुए उस से पूछा.

‘‘नहीं, मैं यहां पहले से ज्यादा खुश हूं. कम से कम यहां मुझे भरपेट खाना तो मिल जाता है. सौतेली मां ने तो मुझे वह भी नहीं दिया और ऊपर से धंधा भी कराया.’’

फिर उस लड़की ने लंबी आह भरते हुए कहा, ‘‘यहां से निकल पाना अब इतना आसान नहीं. पता नहीं यहां कितने दिन सड़ना पड़ेगा…’’

इन देशों में बैन हुई फिल्म ‘फाइटर’, दीपिका- ऋतिक संग मेकर्स को लगा झटका

इन दिनों बौलीवुड में फिल्मों को बज बना हुआ है एक से बढ़कर एक फिल्म पर्दे पर रिलीज हो रही है. फिल्में एक दूसरे को टक्कर देती हुई नजर आ रही है. ऐसे में बौलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘फाइटर’ का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे है. फिल्म को लेकर नए नए अपडेट सामने आ रहे है. ऐसे में फिल्म को लेकर बुरी खबर सामने आ रही है. कि रिलीज से पहले कई देशों में फिल्म को बैन कर दिया गया है. ऐसे में सभी को बड़ा झटका लगा है.


आपको बता दें कि फैंस के बीच फिल्म फाइटर को लेकर अच्छा खासा क्रेज देखने को मिल रहा है. फिल्म की रिलीज से पहले एक बाद एक नए अपडेट्स सामने आ रहे हैं. अभी हाल हाल ही में फिल्म ‘फाइटर’ के प्रमोशन की फोटोज सामने आई थीं, इन फोटोज में ऋतिक रोशन के साथ-साथ दीपिका पादुकोण भी मंच शेयर करती नजर आईं. लेकिन फिल्म को लेकर ये खबर भी सामने आ रही है. कि भारतीय वायु सेना के पायलट की लाइफ पर बनी इस अपकमिंग फिल्म को कई देशों ने बैन कर दिया है मेकर्स को इस बात से बड़ा झटका लगा है जिससे फिल्म की कमाई पर भी बुरा असर पडेगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण फिल्म ‘फाइटर’ को रिलीज से एक दिन पहले यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात को छोड़कर खाड़ी सभी देशों में बैन कर दिया गया है. इस खबर के सामने आने के बाद गल्फ कंट्री में फिल्म का इंतजार कर रहे फैंस के हाथ निराशा लगी है. हालांकि फिल्म ‘फाइटर’ को इन देशों में क्यों बैन किया गया है, इसको लेकर अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है.


बता दें कि फिल्म ‘फाइटर’ रिलीज से पहले एडवांस बुकिंग हो रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण फिल्म ‘फाइटर’ ने एडवांस बुकिंग से 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है.

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