26 जनवरी स्पेशल- जवाबी खत : एक फौजी का अपनी मां को पैगाम

नमस्ते मांजी, चरण स्पर्श.

आप के ‘जवाबी खत’ ने मेरे भटके हुए मन को एकदम सही रास्ता दिखाया है. दिल्ली से तबादला होने पर मैं कश्मीर आया. यहां मुझे आतंकवादियों से निबटने के लिए तैयार किए जा रहे ‘विशेष दल’ के लिए चुना गया.

यहां की रोजमर्रा की जिंदगी में आतंकवाद की काली छाया छाई हुई है. वैसे, मेरी ड्यूटी भारतपाक बौर्डर से सटे एक कसबे में लगी है. यहां बौर्डर पर आएदिन छिटपुट गोलीबारी होती रहती है.

मेरे यहां आने के अगले ही दिन की यह घटना है… शाम को हमें खबर मिली कि कश्मीर में कुछ आतंकवादियों ने शहर के बीच गोलीबारी की है. हम लोग फौरन उस जगह पर पहुंचे. वहां मैं ने देखा कि सड़क के बीच खून से लथपथ कुछ लाशें पड़ी थीं. मशीनगन की गोलियों से छलनी लाशें देख कर मैं भी एक पल के लिए कांप गया.

वहीं एक लाश के पास एक जख्मी औरत बेबस सी बैठी थी. उस की आंखों से आंसू रुक ही नहीं रहे थे. वह लाश उस के पति की थी. पूछने पर उस ने बताया, ‘मेरे पति पर गोलियां दागने के बाद दहशतगर्द मेरी जवान लड़की को जबरदस्ती उठा कर मोटरसाइकिल पर ले गए.’

उस औरत की कहानी सुन कर मैं बहुत दुखी हो गया. मैं ने उसे धीरज बंधाया, लेकिन मन ही मन मैं बेहद डर गया था. सड़क पर मौत का नंगा खेल देख कर मैं इतना डर गया था कि जब अपने कैंप में पहुंचा, तो बिस्तर पर लेटेलेटे सोचने लगा कि जो हादसा मैं ने इन आंखों से देखा है, अगर उस में उस आदमी की जगह आतंकवादियों ने मुझे मार डाला होता, तो आप पर क्या गुजरती? आप की बहू भरी जवानी में विधवा हो जाती.

फिर मैं सोचने लगा कि फौज में भरती होने से बेहतर तो यह होता कि मैं किसी आश्रम में चला जाता. आश्रम की जिंदगी में भागमभाग नहीं होती, कोई किसी का दुश्मन नहीं होता, न ही वहां कोई गलाकाट होड़ ही होती है. आश्रम आमतौर पर कुदरत की गोद में होते हैं, उन के आसपास पहाड़ियां होती हैं. वहां पर ऐसी हरियाली छाई रहती है, मानो कुदरत ने मखमल से धरती का सिंगार किया हो.

आश्रम की हवाओं में आतंकवाद की बू नहीं होती. वहां शांति होती है, सिर्फ शांति. तन की शांति, मन की शांति. जो सुकून आश्रमों में होता है, वह कहीं दूसरी जगह देखनेसुनने को भी नहीं मिलता.

मांजी, दरअसल, आतंकवादियों की इस खूनी कार्यवाही से मैं बेहद डर गया था और उसी डर के बीच मैं ने आप को खत में लिख दिया कि फौज की जिंदगी से तो आश्रम की जिंदगी बहुत सुकून भरी होती है. तब मेरा दिल करने लगा था कि फौज की नौकरी छोड़ कर किसी आश्रम में चला जाऊं.

मांजी, आप का जवाबी खत पढ़ा, तो लगा कि मैं कितना गलत था. मेरे खयालात कितने घटिया और सड़ेगले थे. आप की बातों ने मेरी आंखें खोल दी हैं.

आप ने खत में एकदम सही लिखा था, ‘दुनिया में ऐसा कौन सा आश्रम है, जहां उम्रभर के लिए सुकून मिल सके? दरअसल, तुम्हें अपनी जिंदगी से कुछ ज्यादा ही प्यार हो गया है और तुम मौत से डरने लगे हो, इसीलिए तुम्हें आश्रम की जिंदगी में शांति नजर आ रही है.

‘दरअसल, पहले कुछ दिनों तक हर नई जगह पर अच्छा लगता है, लेकिन उस के बाद वहां से भी मन ऊबने लगता है. मैं भगोड़े या डरपोक फौजी की मां कहलाने के बजाय लड़ाई में मारे गए फौजी की मां कहलाने में अपनेआप को धन्य समझूंगी.

‘अगर तू आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी जान भी गंवा बैठा, तो शहीद कहलाएगा. तब मेरा सिर गर्व से ऊंचा उठ जाएगा. मैं शहीद की मां कहलाऊंगी.’

मांजी, आप का खत पढ़ कर मुझे एक नई रोशनी मिली है. कुछ देर के लिए मैं खुदगर्ज हो गया था, डर गया था, लेकिन अब मेरे दिल से डर कोसों मील दूर चला गया है.

आप का खत पढ़ कर ही तो मैं समझ पाया हूं कि आश्रम की जिस शांति की बात मैं ने मन ही मन सोची थी, वही शांति तो मुझे अपने देश में और खासकर कश्मीर में लानी है.

मांजी, यहां आएदिन आतंकवादियों से हमारी झड़पें हुआ करती हैं. हम लोग जान की बाजी लगा कर उन का मुकाबला करते हैं. नतीजतन, उन को उलटे पैर भागना पड़ता है.

आप को यह जान कर खुशी होगी कि अब कश्मीर में हालात बदल रहे हैं, अमनचैन लौटने लगा है. हम फौजी यहां के लोगों के दिलों में आतंकवादियों का खौफ कम करने में कामयाब हो रहे हैं.

यहां के लोग भी यह बात अच्छी तरह से समझ गए हैं कि आतंकवादियों से डरने से काम नहीं चलेगा, इसीलिए अब वे भी हमारा साथ दे रहे हैं.

मांजी, यहां के लोगों की मदद मिलने के चलते ही कुछ आतंकवादियों ने ‘आत्मसमर्पण’ करना भी शुरू कर दिया है.

अगर हमें इसी तरह इन लोगों का साथ मिलता रहा, तो यकीन करो कि हम कश्मीर की जमीन से आतंकवाद के काले निशान को मिटा कर रख देंगे.

बाकी अगले खत में…

आप का बेटा,

रणवीर सिंह.

खूबसूरत औरत को प्रैग्नैंट करो, लाखों कमाओ, पर जरा संभल कर जनाब

Crime News in Hindi: आज सोशल मीडिया (Social Media) हमारी जिंदगी पर इतना ज्यादा हावी हो गया है कि हम उस पर आंख मूंद कर भरोसा (Trust) करने लगे हैं, फिर भले हमें ही चूना क्यों न लग जाए. लेकिन अगर किसी खूबसूरत औरत को प्रैग्नैंट (Pregnant) कर के लाखों कमाने की बात आए, तो बांके नौजवानों की तो यह सुन कर ही बांछें खिल जाएंगी. पर अगर आप को भी यह ललचाता औफर आया है, तो सावधान हो जाएं. अगर यकीन नहीं होता तो चलो आप को बताते हैं एक ऐसा ही मामला जहां ठगों ने लोगों के सामने एक ऐसा जोरदार आइटम पेश किया है कि कहने ही क्या. हद तो यह है कि ऐसे शातिरों ने ठगी के इस नएनवेले कांड को एक और्गेनाइजेशन का नाम दिया हुआ था.

क्या है पूरा मामला

दरअसल, बिहार में एक ऐसा स्कैम चल रहा है कि किसी खूबसूरत औरत को प्रैग्नैंट करो और उस के बदले में लाखों रुपए कमाओ. मामला बेशक बिहार का लग रहा है, पर इस गिरोह का जाल पूरे देश में फैला है.

एक जानकारी के मुताबिक, बिहार में नवादा पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की है. पुलिस ने जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में छापेमारी की और 8 साइबर ठगों को गिरफ्तार कर लिया. उन के पास से 9 मोबाइल फोन और एक प्रिंटर मिला.

इस मामले पर पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी ‘आल इंडिया प्रैग्नैंट जौब (बेबी बर्थ सर्विस)’ के नाम पर पैसों का लालच देते थे और लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे.

शातिरों का यह ग्रुप लोगों को फंसाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहा था. ठगों ने मर्दों को इस लच्छेदार स्कीम के बारे में बता कर उन्हें फंसाया, इस के बाद उन से रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे वसूले.

इन ठगों ने मर्दों से कहा कि ‘बेबी बर्थ सर्विस’ में आप को बेऔलाद औरतों को प्रैग्नैंट करना होगा, जिस के लिए आप को बड़ी रकम मिलेगी. झांसे में आए मर्दों से शुरू में 799 रुपए लिए गए. इस के बाद उन से बतौर सिक्योरिटी मनी 5,000 से 20,00 रुपए मांगे जाते थे.

नवादा पुलिस की एसआईटी ने मुन्ना कुमार नाम के शख्स के यहां छापा मारा. पुलिस के मुताबिक, मुन्ना कुमार ही इस पूरे गिरोह का सरगना है. दरअसल, आज से तकरीबन 5 साल पहले नवादा के गांव गुरम्हा का रहने वाला मुन्ना कुमार नौकरी के लिए राजस्थान के मेवाड़ में गया था. वहां उस की मुलाकात जामताड़ा जैसे कुछ गिरोहबाजों से हुई, जहां उस ने बाकायदा साइबर ठगी की ट्रेनिंग ली थी.

गांव लौट कर मुन्ना कुमार ने अपना दफ्तर खोला. इसी बीच उस ने गांव के 20-30 लड़कों को चुपचाप से ट्रेनिंग दी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उस ने कंपनी शुरू की और सोशल मीडिया की मदद से ‘आल इंडिया प्रैग्नैंट जौब’ के इश्तिहार जारी किए, जिन में लिखा होता था कि कुछ ऐसी औरतें हैं, जो शादी के बरसों बाद भी मां नहीं बन पा रही हैं. वे मां बनना चाहती हैं.

हमारी संस्था ऐसी औरतों के लिए काम करती है. यह सारा काम कानूनी होता है. जो भी इच्छुक हैं, वे ऐसी औरतों को प्रैग्नैंट कर उन्हें मां बनने का सुख दे सकते हैं. इस के लिए उन्हें बाकायदा पैसे भी मिलेंगे. यह रकम 10 से 13 लाख की होगी. अगर औरत प्रैग्नैंट नहीं हो पाती, तो भी 5 लाख रुपए तो मिलेंगे ही.

क्यों फंसते हैं नौजवान

आज देश में बेरोजगारी का आलम यह है कि नौजवान किसी भी खबर पर बिना सोचेसमझे यकीन कर लेते हैं और अगर उन्हें किसी खूबसूरत औरत से मजे ले कर उसे मां बनाने का औफर मिले तो वे लार टपकाने लगते हैं. उन्हें लगता है कि यह तो पैसे कमाने का गरमागरम तरीका है. फिर सरकार भी तो किसी को रोजगार नहीं दे पा रही है, यहीं पर ही अपनी भड़ास निकाल लेते हैं.

ठग बेरोजगार लोगों की इसी दुखती नस पर हाथ रखते हैं और रोजगार देना तो दूर, उन्हें ही अपना शिकार बना लेते हैं. इस तरह उन्हें न तो देह सुख मिलता है और न ही वे पैसा कमा पाते हैं. लुट भले ही जाते हैं.

जानें कौन-से क्रिकेटर करते हैं अंधविश्वास पर यकीन, सचिन और कोहली भी हैं इसमें शामिल

21से 24 दिसंबर, 2023 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और आस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीम के बीच टैस्ट मैच हुआ था, जिसे भारत ने बहुत बड़े अंतर से जीत कर कमाल कर दिया था. महिला टैस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहली बार भारत ने आस्ट्रेलिया को हराया था. इस से पहले दोनों देशों के बीच 10 टैस्ट मैच खेले गए थे, जिन में से आस्ट्रेलिया को 4 मुकाबलों में जीत मिली थी, जबकि 6 मैच बेनतीजा रहे थे.

पर असली खबर तो यह है कि इस जीत को भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और हैड कोच ने धार्मिक जामा पहना दिया. कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 26 दिसंबर, 2023 को मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर में जा कर पूजाअर्चना की थी. उन के साथ टीम के हैड कोच अमोल मजूमदार भी मौजूद थे.

इतना ही नहीं, कभी भारतीय क्रिकेट टीम में सलामी बल्लेबाज रहे और अब भारतीय जनता पार्टी के सांसद गौतम गंभीर भी इसी साल के फरवरी महीने में उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करने गए थे. उन्होंने वहां सुबह की भस्म आरती में भी हिस्सा लिया था.

हालिया भारतीय क्रिकेट टीम की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले विराट कोहली कुछ समय पहले बिलकुल भी बल्लेबाजी नहीं कर पा रहे थे. उन की कप्तानी भी चली गई थी और सोशल मीडिया पर उन की खराब बल्लेबाजी की खूब खिंचाई भी हो रही थी. इस के बाद वे खबरों में इस बात को ले कर चर्चित हुए कि ‘इस मंदिर में जाते ही खुले भाग्य’.

बता दें कि इसी साल की शुरुआत में विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे. इस दौरान उन दोनों ने तकरीबन डेढ़ घंटे तक मंदिर के नंदी हाल में बैठ कर भस्म आरती की थी और उस के बाद दोनों ने मंदिर के गर्भगृह में जा कर पंचामृत पूजन अभिषेक किया था.

यही नहीं, पिछले साल वे दोनों उत्तराखंड के नीम करौली बाबा के आश्रम में पहुंचे थे और जनवरी महीने में उन्हें वृंदावन में नीम करोली बाबा के समाधि स्थल पर भी देखा गया था. उन्हें वृंदावन के स्वामी प्रेमानंदजी महाराज के आश्रम में भी देखा गया था.

इस के बाद लोगों ने विराट कोहली की अच्छी बल्लेबाजी को बाबा और मंदिर जाने का कारनामा बता दिया. एक फैन ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘कोहली किस बाबा से मिला था, एड्रैस बताओ. एकदो ख्वाहिश पूरी करवानी हैं.’

इसी तरह सचिन तेंदुलकर का पूरा परिवार सत्य सांईं बाबा का परम भक्त कहा जाता है. जब बाबा का निधन हुआ था, तब वे हैदराबाद में थे. यह खबर मिलते ही उन्होंने खुद को होटल के कमरे में बंद कर लिया था. कहते हैं कि क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने सचिन की मुलाकात सत्य सांईं बाबा से कराई थी.

सोशल मीडिया पर मंदिरों का प्रचार

जब कोई नामचीन क्रिकेटर या कोई दूसरा सैलेब्रिटी किसी मंदिर में जा कर माथा टेकता है और उस की खबर मीडिया में आती है, तो सोशल मीडिया उसे हाथोंहाथ लेता है. विराट कोहली जैसे नामचीन लोगों के किसी मंदिर, बाबा आदि के बारे में सोशल मीडिया पर किए गए कमैंट, फोटो और वीडियो आम लोगों के दिमाग पर गहरा असर करते हैं. वे मन में बिठा लेते हैं कि अगर बड़े लोगों के बिगड़े काम ऐसे बन रहे हैं, तो हमें भी वहीं जाना चाहिए.

अभी हाल ही में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, नीम करौली बाबा, वृंदावन के स्वामी प्रेमानंद के आश्रम और मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा ट्रैंड कर रहे हैं और इस अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं कि जब कोई राह न सूझे, तो किसी के दरबार में जा कर माथा टेक दो.

जो लोग क्रिकेटरों को अपने ‘भगवान’ का दर्जा देते हैं, वे तो आंख मूंद कर उन की हर चीज को फौलो करते हैं. तभी तो आज हर छोटेबड़े मंदिर, आश्रम में लोगों की भीड़ देखी जा सकती है. नतीजतन, लोग किसी से कर्ज ले कर भी ऐसी जगह जाते हैं, ताकि उन की मुसीबतें दूर हो जाएं, पर कर्ज लेने के बाद तो उन की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ जाती हैं, यह उन्हें समझ में नहीं आता है.

घोर अंधविश्वासी क्रिकेटर

वैसे तो किसी न किसी तरह का अंधविश्वास हर देश के क्रिकेटर में देखा जा सकता है, पर कुछ क्रिकेटर अपनी पोंगापंथी हरकतों से चर्चा में बने रहते हैं. ‘क्रिकेट के भगवान’ के नाम से मशहूर महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर बल्लेबाजी करने के लिए मैदान में उतरने से पहले हमेशा बायां पैड पहनते थे, जबकि राहुल द्रविड़ जब बल्लेबाजी करने के लिए तैयार होते थे, तो हमेशा पहले दायां पैड पहनते थे.

एक जमाने के दिग्गज क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ फील्डिंग करते समय अपनी पैंट की जेब में लाल रूमाल रखते थे. भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे मोहम्मद अजहरुद्दीन के गले में काला तावीज बंधा रहता था. फील्डिंग के दौरान कई बार उन्हें वह तावीज चूमते हुए भी देखा जा सकता था.

एक बार ‘द कपिल शर्मा शो’ में आए वीरेंद्र सहवाग और मोहम्मद कैफ ने खुलासा किया था कि उन के कप्तान सौरव गांगुली बहुत ज्यादा अंधविश्वासी थे. मोहम्मद कैफ ने बताया कि एक बार तो सौरव गांगुली मैच में अपने गले में पहनी माला को पकड़े बैठे रहे थे और प्रार्थना करते रहे थे.

इसी तरह वीरेंद्र सहवाग ने कहा था कि दादा (सौरव गांगुली) के गले में जो चेन है, उस में दुनिया के जितने भगवान हैं उन की फोटो मिलेंगी आप को. दुनिया के जितने पत्थर होते हैं नीलम, मोंगा सब उन के पास हैं.

कहने का मतलब है कि जितने क्रिकेटर, उन के उतने ही अंधविश्वास. हैरत तो तब होती है, जब ये लोग अपने हुनर के आगे अपने अंधविश्वास को तरजीह देते हैं और आम लोगों के मन में भर देते हैं कि अगर आप का भाग्य खराब है तो खेल खराब होना तय है, जबकि खेल में हारजीत होना कोई नई बात नहीं है. कोई जीतता है, तो कोई हारता है.

अगर किस्मत और गंडेतावीज, बाबाआश्रम, मठमंदिर और पूजाअर्चना आदि इतने ही ताकतवर होते, तो पिछले वनडे वर्ल्ड कप में लगातार 10 मैच जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम देशभर में हो रहे हवनपूजन के बावजूद फाइनल मुकाबले में नहीं हारती. लिहाजा, अपने हुनर और मेहनत पर यकीन करें और इन फुजूल के चक्करों में मत पड़ें.

ऐसे करें सैक्स, नहीं रहेगा बच्चा होने का डर

‘‘नहीं, आज नहीं,’’ अजय ने जैसे ही भारती को अपने करीब खींचने की कोशिश की, भारती ने झट से उसे पीछे धकेल दिया.

‘‘यह क्या है? कुछ समय से देख रहा हूं कि जब भी मैं तुम्हारे पास आना चाहता हूं, तुम कोई न कोई बहाना बना कर दूर भागती हो. क्या अब मुझ में दिलचस्पी खत्म हो गई है?’’ अजय ने क्रोधित स्वर में पूछा.

‘‘मुझे डर लगता है,’’ भारती ने उत्तर दिया.

‘‘2 बच्चे हो गए, अब किस बात का डर लगता है?’’ अजय हैरान था.

‘‘इसीलिए तो डर लगता है कि कहीं फिर से प्रैग्नैंट न हो जाऊं. तुम से कहा था कि मैं औपरेशन करा लेती हूं, पर तुम माने नहीं. तुम गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करते, इसलिए मैं किसी किस्म का रिस्क नहीं लेना चाहती हूं.’’

भारती की बात सुन कर अजय दुविधा में पड़ गया कि पत्नी कह तो ठीक रही है, लेकिन वह भी क्या करे? उसे कंडोम का इस्तेमाल करना पसंद नहीं था. उसे लगता था कि इस से सहवास का मजा बिगड़ जाता है, जबकि भारती को लगता था कि अगर वे कोई कॉन्ट्रासेप्टिव इस्तेमाल कर लेंगे तो यौन संबंधों का वह पूरापूरा आनंद उठा सकेगी.

अब सुजाता की ही बात लें. उस का बेटा 8 महीने का ही था कि उसे दोबारा गर्भ ठहर गया. उसे अपने पति व स्वयं पर बहुत क्रोध आया. वह किसी भी हालत में उस बच्चे को जन्म देने की स्थिति में नहीं थी, न मानसिक न शारीरिक रूप से और न ही आर्थिक दृष्टि से. पहले बच्चे के जन्म से पैदा हुई कमजोरी अभी तक बनी हुई थी, उस पर उसे गर्भपात का दर्द झेलना पड़ा. वह शारीरिक व मानसिक तौर पर इतनी टूट गई कि उस ने पति से एक दूरी बना ली, जिस की वजह से उन के रिश्ते में दरार आने लगी. जब पति कंडोम का इस्तेमाल करने को राजी हुए तभी उन के बीच की दूरी खत्म हुई.

प्रैग्नैंसी का डर नहीं रहता

अगर पति या पत्नी दोनों में से एक भी किसी गर्भनिरोधक का प्रयोग करता है, तो महिला के मन में प्रैग्नैंट हो जाने का डर नहीं होता, जिस से वह यौन क्रिया का आनंद उठा पाती है. अगर पत्नी इस क्रिया में खुशी से पति का सहयोग देती है, तो दोनों को ही संतुष्टि मिलती है. अगर इस दौरान पत्नी तनाव में रहे और बेमन से पति की बात माने तो पति का असंतुष्ट रह जाना स्वाभाविक है. गर्भ ठहर जाने के डर से पत्नी का ध्यान उसी ओर लगा रहता है. यही नहीं, उस के बाद भी जब तक उसे मासिकधर्म नहीं हो जाता, वह तनाव में ही जीती है. पति से जितनी दूरी हो सके वह बनाए रखने की कोशिश करती है. वह जानती है कि गर्भवती होने पर बारबार गर्भपात करवाने का झंझट कितना तकलीफदेह होता है. बारबार गर्भपात कराने से उस की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है.

तनावमुक्त संबंध

इंडियाना यूनिवर्सिटी के किसी इंस्टिट्यूट के नए आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश औरतों का मानना है कि गर्भनिरोधक तरीके चाहे वे हारमोनल कॉन्ट्रासेप्टिव हों या कंडोम, यौन संतुष्टि व उस के आनंद में कई गुना बढ़ोतरी कर देते हैं. तनावमुक्त यौन संबंध आपसी रिश्तों में तो उष्मा बनाए ही रखते हैं, साथ ही आनंद की चरम सीमा तक भी पहुंचा देते हैं.

दिल्ली के फोर्टिस एस्कौर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट की सीनियर क्लीनिकल साइकोलौजिस्ट डा. भावना बर्मी के अनुसार, अवरोध या किसी तरह का तनाव या फिर दबाव एक तरह का मनोवैज्ञानिक भय होता है, जिस के चलते हमारा मन ही नहीं, शरीर भी असहज हो जाता है. खासकर यौन संबंधों को ले कर मन व शरीर दोनों को ही ऐसे में कुछ अच्छा नहीं लगता है और तब वे अपने को हर तरह के आनंद से दूर कर लेते हैं. अगर शरीर चाहता भी है तो मन का अवरोध उसे रोक लेता है. तनाव के न होने पर जिस स्थिति को हम ‘कंडीशंड रिफलैक्स औफ द बौडी’ कहते हैं, वह यौन संबंधों को आनंददायक बना देता है. जाहिर सी बात है कि अगर गर्भवती होने या गर्भपात करवाने का तनाव न हो तो महिला उन्मुक्त हो कर यौन संबंधों का आनंद उठा सकती है.

रहती है बेफिक्री

गर्भनिरोधकों का प्रयोग करने से युगल को इस बात का डर नहीं रहता कि उन्हें अनचाही प्रैग्नैंसी का सामना करना पड़ेगा. चूंकि ये कॉन्ट्रासेप्टिव एक सुरक्षाकवच की तरह काम करते हैं, इसलिए सैक्स के दौरान एक बेफिक्री औरत में रहती है, जो उस के हावभाव व पति को दिए जा रहे सहयोग में नजर आती है.

दिल्ली के फोर्टिस एस्कौर्ट्स हौस्पिटल की गाइनेकोलौजिस्ट डा. निशा कपूर कहती हैं, ‘‘इन के इस्तेमाल से औरत के दिमाग में एक सिक्योरिटी से रहती है कि अवांछित प्रैग्नैंसी या गर्भपात से उस का बचाव हो रहा है. इस कारण सेक्सुअल आनंद में बढ़ोतरी होती है और सहवास करने से पहले उसे सोचना नहीं पड़ता या इस से बचने के बहाने नहीं सोचने पड़ते. वैवाहिक जीवन को सुखी व सैक्स जीवन को आनंदमय बनाने के लिए इन का इस्तेमाल किया जा सकता है.’’

कॉन्ट्रासेप्टिव चाहे पति इस्तेमाल करे या पत्नी, यह निर्णय तो उन दोनों का होता है, पर यह सही है कि कॉन्ट्रासेप्टिव सैक्स के आनंद की चाबी होते हैं. सहवास करते समय दोनों के मन में अगर किसी तरह की टैंशन हो तो सिवा मनमुटाव के कोई परिणाम सामने नहीं आता है. लेकिन बेफिक्री और सहर्ष बनाए गए यौन संबंध वैवाहिक जीवन में तो दरार डालने से बचाते ही हैं, साथ ही सैक्स के आनंद को भी दोगुना कर देते हैं.

कागजी घोड़ों पर दौड़ती सरकारी योजनाएं

देश के किसानों का क्या हाल है यह इस बात से ही पता चलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी राजनीति भुनाने के लिए जो प्रधानमंत्री किसान योजना शुरू की थी उस में 10 करोड़ किसानों ने हिस्सा ले लिया: कितने पैसे के लिए? महज 6,000 सालाना के लिए. इस योजना में सरकार ने बैंक खाते में पैसे भेजने होते हैं और इस का मतलब 2,000 रुपल्ली के लिए हर 3 माह में भूखा नेता किसान बैंक मैनेजरों की मिन्नतें करे और पैसे निकालने के लिए हाथ जोड़े.

किसानों के लिए 6,000 रुपए सालाना भी बहुत होते हैं यह वे कहां जानें जो 8,000 करोड़ के विमान में सफर करते हैं और जिन के 1 मील चलने पर लाखों खर्च हो जाते हैं. जो बंदोबस्त राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री फकीरी के हाल में करते हैं यह किसी से छिपा नहीं है.

प्रधानमंत्री किसान योजना के 10 करोड़ शुरू किसानों में से अब 8 करोड़ रह गए हैं क्योंकि सरकार भुगतान का वादा करती है, करती नहीं. कागजी घोड़े दौड़ाए जाते हैं. आधारकार्ड बनवाओ. यह गांव में तो नहीं बनेगा न. बस का पैसा खर्चा कर के कसबे में जाना होगा जहां इंटरनैट कभी चलेगा कभी नहीं. आधारकार्ड बनाने वाला मुफ्त में तो बनाएगा नहीं. दिनभर खाने के लिए पैसे चाहिए होंगे. फिर बैंक में खाता खोलना होगा. यह भी अनपढ़ों के लिए कहां आसान है. जब पैसा आने वाला हो चाहे महज 6,000 रुपल्ली हों, बीच में घात मारने वाले बहुत बैठे होंगे.

खाता चालू रहेगा तो ही तो पैसे आएंगे. बैंक मैनेजर भी अपनी मरजी से कह सकता है कि डौरमैंट यानी सोए हुए खाते को फ्रीज यानी गाड़ा जा सकता है. रिजर्व बैंक औफ इंडिया तुगलकी फरमान जारी करता रहता है जो इस किसान के खाते पर भी लागू होते हैं जिस के पास बैंक में आते ही सालभर में 6,000 रुपल्ली हैं. बैंक का स्टाफ इस में से हिस्सा न मांगे तो वह इस देश का भक्त नागरिक नहीं है. रिश्वत लेना और एक हिस्सा मंदिर में देना हर सरकारी नागरिक का पहला फर्ज है जिसे पूरी तरह निभाया जाता है.

दानेदाने को मुहताज छोटे किसानों का हाल क्या है यह किसी भी गांव की चौपाल, गांव के पास बसअड्डे या कचहरी में दिख जाता है. जिन के घरों में कोई शहर में नौकरी कर ले या कोई सरकारी नौकरी पा जाए उस की बात दूसरी पर किसानी जिस पर देश की 50 फीसदी जनता निर्भर है, फक्कड़ है. तभी तो वोटों की खातिर यह योजना शुरू की गई.

असल में इस तरह की सरकारी स्कीमों का एक छोटा हिस्सा ही आम आदमी तक पहुंच पाता है. बड़ा हिस्सा तो बिचौलिए हड़प कर जाते हैं क्योंकि 100 रुपए भी किसी को देने हों तो सरकार उस पर 10-20 कागज मांगती है और 10 जने सही करते हैं. हर कागज पर खर्च होता है, हर सही करने वाला अपनी फीस मांगता है.

सरकार ये स्कीमें शुरू करती है कि ढोल पीटा जा सके और उस की ऊपरी कमाई से पार्टी वर्कर, विधायक, सांसद को भी खुश रखा जाए और सरकारी मशीनरी को भी जो चुनावों में पोलिंग बूथ में बैठी होती है. इस तरह की सरकारी योजनाओं से जनता को छाछ मिलती है, कइयों को मोटा मक्खन.

मेरा 5 साल का बेटा है, दोबारा मां बनने के लिए मैं क्या इलाज करा सकती हूं?

सवाल

मेरी उम्र 34 वर्ष है. मेरा एक 5 साल का बेटा भी है. मुझे पीरियड्स के बाद हलका गाढ़ा सफेद पानी जैसा डिस्चार्ज होता था. बारबार पेशाब के लिए जाना पड़ता था. डाक्टर को दिखाने पर पता चला कि चावल के दाने बराबर पथरी की शिकायत है, जिस का इलाज चल रहा है. इस के ठीक होने के बाद मैं दोबारा मां बनना चाहती हूं. लेकिन जब मेरा बेटा डेढ़ साल का था तब मैं ने गर्भपात करा लिया था. तभी से गर्भधारण नहीं हुआ. मैं जल्द दूसरा बच्चा चाहती हूं. दोबारा मां बनने के लिए मैं किस तरह का इलाज करा सकती हूं? मेरा पहला बच्चा औपरेशन से हुआ था.

जवाब


आप अभी गर्भधारण कर सकती हैं. लेकिन बेहतर होगा कि पहले पथरी निकल जाए ताकि सुरक्षित गर्भधारण हो सके. हो सकता है कि आप की फैलोपियन ट्यूब ब्लौक हो गई हो. जिस की वजह से आप गर्भपात के बाद गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं. इसलिए आप को एक एक्सरे, जिसे एचएसजी कहते हैं, कराना चाहिए. इस से पता चल जाएगा कि आप को लैप्रोस्कोपी की जरूरत है या आईवीएफ की.

अपने पति के सीमन की भी जांच करवाएं. यदि रिपोर्ट सामान्य है व आप की फैलोपियन ट्यूब पेटैंट है तो इंट्रायूट्रीन इंसेमिनेशन करवा सकती हैं. इस को करवाने में ज्यादा खर्च नहीं आता. 3 से 6 साइकिल में यह पूरा हो जाता है. यदि आईयूआई टैस्ट फेल हो जाए तब आप आईवीएफ की तरफ जा सकती हैं और एक खास बात कि आप अपना इलाज किसी अच्छे फर्टिलिटी सैंटर में ही करवाएं.

झूठ का परदाफाश : क्या टीचर था असली कुसूरवार

अखबार में बड़ेबड़े अक्षरों में छपा था, ‘एक टीचर ने नंगा कर के एक लड़का और लड़की की पिटाई की. टीचर और प्रिंसिपल को हटाने की मांग.’

इस खबर से जिला शिक्षा के अफसर हरकत में आ गए और जीप भर कर स्कूल में जा पहुंचे.

सरकारी अफसर के पहुंचते ही गांव भी उमड़ आया. नए टीचर और पुराने हैडमास्टर को अब नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा.

अफसर ने वहां पहुंचते ही दोपहर का खाना चखा. इस में स्कूल को बेदाग पाया गया. इस के बाद असली सवाल आया कि वह कौन टीचर है, जिस ने बच्चों को नंगा कर के मारा? ऊपर से उंगली तक लगाने की मनाही है और उस ने नंगा कर के पीटा.

गांव के सरपंच के साथ पीडि़त बच्चों के मांबाप ने एक दुबलेपतले टीचर की ओर इशारा किया.

वह टीचर हाथ जोड़ कर बोला, ‘‘नंगा करने की बात झूठ है. मैं ने जो देखा, उस के लिए फटकारा.’’

गांव वाले चिल्लाचिल्ला कर बोलने लगे, ‘इन्हें सस्पैंड करो. हमें नहीं चाहिए ऐसे टीचर, जो बच्चों को कुत्तेबिल्ली समझ कर मारते हैं. दोपहर का खाना कच्चापक्का देते हैं. हैडमास्टर बरसों से यहीं जमे हैं. इन्हें भी बदलो.’

शिक्षा अफसर बोले, ‘‘आप लोग चुप रहें. जो कुछ कहना है, लिखित में दे दें. हम लोग इसी मामले की जांच करने के लिए आए हैं.’’

इस के बाद वे हैडमास्टर से बोले, ‘‘आप तो पुराने हैं. तजरबेकार हैं. आप ने इस मामले में क्या किया?’’

हैडमास्टर बोले, ‘‘ये जितने लोग चिल्ला रहे हैं, मैं ने सब को पढ़ाया है. जहां तक इन टीचर महाशय की बात है, तो मैं थोड़े दिनों में इन्हें जान गया हूं. ये बहुत ही मेहनती हैं.

‘‘आप को सच का पता लगाना ही है, तो लड़के और लड़की को बुलाएं. उन के मातापिता को बुलाएं. वहां दफ्तर में बैठ कर मैं पूछताछ करता हूं. अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

‘‘सारे गांव के सामने तमाशा करने की जरूरत नहीं है. आप अपना फैसला फिर सारे गांव के सामने सुना देना.’’

शिक्षा अफसर इस बात पर सहमत हो गए. चौकीदार ने घंटेभर के लिए सब को वहां से हटा दिया.

हैडमास्टर ने लड़की से पूछा, ‘‘क्यों बेटी, किसी ने तुम्हारे कपड़े उतारे थे?’’

लड़की बोली, ‘‘नहीं, ड्रैस ढीली है. बांह से निकल जाती है.’’

हैडमास्टर ने लड़के से पूछा, ‘‘बेटा, सचसच बताना कि तुम वहां दूसरे कमरे में मरजी से गए थे या टीचर ले गए थे?’’

लड़का बोला, ‘‘मरजी से.’’

हैडमास्टर ने पूछा, ‘‘वहां लड़की और तुम थे. तुम दोनों ने क्या किया?’’

लड़का बोला, ‘‘मैं उसे लिटा कर उस के ऊपर लेट गया.’’

हैडमास्टर ने पूछा, ‘‘क्या वहां तुम्हारे टीचर भी थे?’’

लड़का बोला, ‘‘नहीं, बाद में देख कर उन्होंने जोर से डांटा. हम रोने लगे.’’

हैडमास्टर ने पूछा, ‘‘कोई बात नहीं बेटा. एक बात और बताओ. टीचर ने ऐसा करने को कहा था या तुम ने अपने मन से किया?’’

लड़का बोला, ‘‘मन से किया.’’

हैडमास्टर ने पूछा, ‘‘ऐसा कहां देखा, जो नकल करने लगे?’’

बच्चे ने झोंपते हुए कहा, ‘‘रात में पापा को मां के ऊपर ऐसा करते देखा था. हम ने भी वही खेल खेला.’’

हैडमास्टर ने शिक्षा अफसर और मांबाप की ओर देख कर कहा, ‘‘बच्चे की पहली पाठशाला परिवार है. जो देखेगा वही करेगा. परिवार में 2 बच्चे नहीं संभलते, हम 2 सौ बच्चों को संभालते हैं. उन्हें खिलातेसिखाते हैं. ऐसे लांछन लगाना क्या ठीक है?’’

यह सुन कर मांबाप उन के पैरों में गिर गए. वे बच्चे भी लिपट कर टीचर को जैसे बदली कराने से रोक रहे थे. शिक्षा अफसर ने गांव वालों से जाने को कहा.

हैडमास्टर ने सब से हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘भाइयो, आप को कष्ट दिया. आप घर जाएं. गांव के दूसरे भाइयों को समझाएं. अब अफसर जो करेंगे, वह स्वीकार होगा.’’

कुछ लोग जातेजाते बोले, ‘साहब, इन्हें माफी दे दें. ये टीचर यहां से कहीं नहीं जाएं. इन्हें सजा नहीं इनाम मिलना चाहिए. आप भले ही हमें सजा दे दें.’’

तब तक बाबू कागज पर मामला तैयार कर चुके थे. पढ़ कर सुनाया. लोगों से दस्तखत कराए. टीचरों से भी और खुद शिक्षा अफसर ने भी दस्तखत किए.

शिक्षा अफसर बोले, ‘‘आपस में मिल कर गलतफहमियां दूर हो जाती हैं. बच्चों के साथ टीचर और गांव का भविष्य भी दांव पर लगता है. अब मामला ठंडा हो गया है.’’

अगले दिन अखबार में खबर छपी, ‘मामले की जांच की, तो वह झूठा निकला. अफवाह फैलाने वालों को पुलिस ढूंढ़ेगी और उन से सख्ती से निबटेगी.’

सैफ अली खान ने फैंस को दी अपनी सेहत की जानकारी, ‘देवरा’ की शूटिंग के दौरान हुए थे घायल

बौलीवुड में किसी भी अभिनेता और अभिनेत्री की तबीयत खराब होने पर जितना दुख इंडस्ट्री को होता है उतना ही झटका उनके फैंस को भी लगता है और उन्ही की दुओं के चलते वे एक बार फिर हंसते खिलखिलाते हुए नजर भी आते है. ऐसा ही इन दिनों जाने माने एक्टर सैफ अली खान अस्पताल पहुंच गए है. जहां उनकी बीते दिनों तबीयत ठीक न होने की खबरें वायरल हो रही थी, वही अब सैफ ने खुद अपनी हेल्थ से जुड़ा अपडेट दिया है.

 

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आपको बता दें कि सोमवार को अभिनेता की कंधे की सर्जरी हुई है. सैफ लंबे समय से इस परेशानी का सामना कर रहे थे. रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म की शूटिंग के दौरान ही उनका दर्द बढ़ा, जिसके बाद उन्होंने सर्जरी कराई. सैफ ने खुद अपनी हेल्थ से जुड़ा अपडेट फैंस के साथ साझा किया है.

हालांकि अब सैफ अली खान की सर्जरी हो गई है और अब वो पहले से बेहतर हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सैफ ने हेल्थ पर अपडेट साझा करते हुए कहा, “यह चोट और उसके बाद हुई सर्जरी हमारे काम में आई टूट-फूट का एक हिस्सा है. सभी शुभचिंतकों को उनके प्यार और चिंता के लिए धन्यवाद देता हूं.” फैंस बीते कुछ दिनों ने सैफ की हेल्थ को लेकर सोशल मीडिया पर भी पोस्ट शेयर कर रहे हैं.सैफ अली खान ने अपनी चोट को लेकर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिनेता को यह चोट कथित तौर पर विशाल भारद्वाज निर्देशित रंगून फिल्म की शूटिंग के दौरान लगी थी. लंबे समय तक टालने के बाद उन्होंने सर्जरी कराने का फैसला लिया. अब वो पहले से बेहतर हैं.

 

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बताते चले कि सैफ अली खान जल्द ही फैंस के लिए 2 बड़े सरप्राइज लेकर आने वाले हैं. वो तेलुगू फिल्म ‘देवरा’ और हिंदी फिल्म ‘गो गोवा गोन’ में दिखाई देंग. दोनों ही फिल्म काफी खास है और उम्मीद है कि सैफ अली खान बड़े पर्दे पर एक शानदार कमबैक करेंगे.

इस एक्ट्रेस के साथ खेसारी लाल यादव का गाना हुआ वायरल, फैंस ने की जमकर तारीफ

खेसारी लाल यादव भोजपुरी इंडस्ट्री का जानामाना नाम है जिनके चर्चे बिहार ही नहीं, यूपी में भी खूब होते है. उनके लाखों फैंस उनपर मरते है. उनके करियर के अनगिनत गाने है. जो कि बेहद ही हिट हुए है. उनके गानों पर मिलियन व्यूज आने में जरा भी देर नहीं लगती है ऐसा ही एक गाना इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. जिसमे वो रानी के साथ नजर आ रहे है. ये गाना उनकी म्यूजिक वीडियो ‘एगो बात बताई’ का है. जो कि हाल में रिलीज हुआ है.

 

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आपको बता दें कि इस गाने को खूब पसंद किया जा रहा है. इस भोजपुरी गाने को सिंगर शिल्पी राज ने गाया है. वही, इसके लिरिक्स आजाद सिंह ने लिखे है और म्यूजिक विशाल सिंह ने दिया है. इस गाने के डायरेक्टर पवन पाल है. वीडियो को 9 जनवरी को यूट्यूब पर रिलीज किया गया था. जो कि 29वें नंबर पर यूट्यूब पर ट्रेंड करने लगा. गाने को अबतक 1 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके है.

इस म्यूजिक वीडियो में पहले एक्ट्रेस रानी की एंट्री होती है. जिसमें उन्होंने ब्लैक टॉप पहना है जिसके वंर्ट में हार्ट शेप बना हुआ है. इसके साथ उन्होंने जींस कैरी की हुई है. वही, हेयर स्टाइल की बात करे तो उन्होंने हाई पोनी बनाई हुई है. इस वीडियो में जब वो आती है तो उन्हे कुछ लड़के छड़ते है. इस बीच खेसारी भी वहा आ जाते है. और सबसे पीछा छुड़ा कर वह दूर चली जाती है. वीडियो में खेसारी उन्हे मनाने की कोशिश करता है.

बताते चले कि इस वीडियो पर लोग खूब प्यार बरसा रहे है जमकर कमेंट कर रहे है. एक यूजर ने कमेंट करके कहा कि ट्रेंडिग स्चार खेसारी लाल को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता है. एक ने कहा कि बहुत सुंदर गाना है भईया जी.

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