उन्नाव कांड: आखिरकार इलाज के लिए दिल्ली पहुंची रेप पीड़िता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लखनऊ के केजीएमयू ट्रौमा सेंटर में उन्नाव रेप पीड़िता और उसके वकील को बेहरत इलाज के लिए दिल्ली के एम्स ट्रांमा सेंटर शिफ्त किया गया है. रेप पीड़िता को सोमवार देर रात जबकि उसके वकील को मंगलवार को एम्स के ट्रांमा सेंटर में भर्ती कराया गया. एम्स के डाक्टरों की एक टीम दोनों घायलों की पूरी मेडिकल जांच में जुटी है. उनके इलाज पर नजर रखेगी. फिलहाल दोनों घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है. डाक्टर की टीम उसपर 24 घंटे अपनी नजर रखेंगे.

28 जुलाई को उन्नाव रेप पीड़िता के वकील को ट्रौमा सेंटर में भर्ती कराया गया था. वेंटिलेटर यूनिट में वकील का इलाज चल रहा था. केजीएमयू प्रवक्ता ने बताया कि मरीज वेंटिलेटर पर था. इसलिए शिफ्ट करने में खास सावधानी बरती गई. उन्होंने बताया कि एयर एम्बुलेंस में सिर्फ एक मरीज को ले जाने का स्थान था. लिहाजा वकील को आज दिल्ली के अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है.

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सोमवार को रेप पीड़िता की मां की अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़िता को दिल्ली एम्स लाने को कहा था. इसके बाद वकील को भी दिल्ली एम्स लाने का आदेश दिया. रेप पीड़िता सोमवार देर रात 9 बजे एयर एम्बुलेंस से दिल्ली पहुचीं वहां से सिर्फ 18 मिनट में एक एम्बुलेंस उसे एम्स ट्रांमा सेंटर पहुंचाया गया. इसके बाद मंगलवार सुबह रेप पीड़िता के वकील को एयर एम्बुलेंस से दिल्ली एम्स में शिफ्ट किया गया. मंगलवार सुबह करीब 10.30 बजे ट्रॉमा से एम्बुलेंस लेकर लखनऊ एयरपोर्ट की ओर निकली. जहां से एयर एम्बुलेंस के जरिए उन्हें दिल्ली लाया गया.

बता दें कि उन्नाव रेप पीड़िता अपने वकील और दो आंटियों के साथ बीते 28 जुलाई को कार से रायबरेली में कही जा रही थी. उसी वक्त उनकी कार का एक ट्रक से एक्सीडेंट हो गया. इस हादसे में रेप पीड़िता और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि उनकी दोनों आंटियों की मौत हो गई. घायल रेप पीड़िता और उसके वकील को लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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बौलीवुड डेब्यू से पहले आमिर खान की बेटी ने ऐसे मचाई खलबली

बौलीवुड स्टार आमिर खान  काफी लाइम लाइट में आने के शौकीन नही रहे, इसी रास्ते पर चलती है उनकी बेटी इरा खान. इरा को अपनी पर्सनल लाइफ को सोशल मीडिया पर तक पहुंचाना ज्यादा पसंद नहीं हैं पर फिर भी सोशल मीडिया पर उनके काफी फौलोवर्स हैं. जब भी इरा की कोई भी नई फोटोज सामने आती है वो काफी  वायरल होती हैं. हाल ही में ऐसा ही देखने को मिला जब इरा ने अपनी एक फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की.   इरा ने हाल ही में एक फोटोशूट करवाया है और इस फोटोशूट की पहली फोटो को उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. जिसे पोस्ट करते ही फैंस के लाइक्स आना शुरु हो गए.

ग्लैमरस है इरा की फोटो

इरा इस फोटो में काफी ग्लैमरस नजर आ रही है और उनके चेहरे के हाव-भाव किसी टौप मौडल से कम नहीं लग रहे है. इस फोटो में इरा के साथ एक और लड़की नजर आ रही है और उनके साथ इरा की जबरदस्त बौन्डिंग देखने को मिल रही है. इस फोटोशूट के लिए इरा ने बालों में रंग-बिरंगे बीड्स का इस्तेमाल किया है. गाजरी रंग के ब्रालेट और नीले रंग के डेनिम शौर्ट में इरा काफी बोल्ड भी नजर आ रही है. उनके बेली पियर्सिंग ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे है कि बेली पियर्सिंग को उन्होंने स्टाइलिश अंदाज में फ्लौन्ट किया.

 

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Love Huji❤

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पहले भी आ चुकी है सुर्खियों में

कुछ दिन पहले इरा की एक फोटो सामने आई थी जिसमें वो एक लड़के के साथ नजर आ रही थी. इरा ने सोशल मीडिया पर ही स्वीकारा कि वह इस शख्स को डेट कर रही है. इरा की फोटोज में दिख रहा ये शख्स मिशाल कृपलानी है, जोकि पेशे से म्यूजिशियन है. खास बात ये है की अब इरा के बौलीवुड डेब्यू को लेकर चर्चा शुरु हो चुकी है. जिस तरह से इरा आए दिन सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज शेयर कर रही है, उससे लोग अनुमान लगाने लगे है कि जल्द ही वो बौलीवुड में एंट्री मार सकती है.

बिकिनी में मलाइका का हौट अवतार, पानी में यूं लगाई आग

अपने अफेयर के लिए काफी सुर्खियों में रहने वाली बौलीवुड की मुन्नी यानी मलाइका अरोड़ा एक फिर सोशल मीडिया पर काफी वाइरल हो रही हैं. हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर हौट अंदाज में फोचोज शेयर की हैं. इन फोटोज में मलाइका ने येलों कलर की बिकिनी पहनी हैं जिसमें वो काफी सेक्सी लग रही हैं. जैसे ही मलाइका ने ये फोटोज शेयर की फैंस ने जमकर कमेंट्स करना शुरु कर दिया. मलाइका हमेशा ही टोन्ड लैग्स और सेक्सी फिगर में फैंस को अट्रैक्ट करती हैं. उनके फिटनेस के सभी कायल हैं.

अर्जुन कपूर के कारण चर्चा में

मलाइका की पर्सनल लाइफ जैसे ही लोगों के सामने आए वो सभी के लिए चर्चा का विषय बन गई. अर्जुन कपूर और मलाइका के बीज का प्यार गहराता जा रहा है. आए दिन दोनों को काफी साथ देखा जा रहा. दोनो इंस्टाग्राम पर भी वो काफी फोटोज शेयर कर रहा हैं. बात अगर उनकी कैमिस्ट्री की करें तो फैंस दोनों को साथ में काफी पसंद कर रहे हैं. इंस्टाग्राम हो या फेसबुक दोनों की फोटोज को काफी शेयर किया जाता हैं.

 

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Happy bday my crazy,insanely funny n amazing @arjunkapoor … love n happiness always

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करन की पार्टी वीडियों से भी आई थी सुर्थियों में

हाल ही में एक वीडियों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था. वायरल हो रही इस वीडियों में कुछ बौलीवुड स्टार्स करन जौहर के घर पर पार्टी करते दिख रहे थे जिसमें मलाइका और अर्जुन भी थे. इस वीडियों में सभी स्टार्स नशे में थे जिसके चलते इंटरनेट काफी अलोचना की हुई.

आखिर क्यों कट्टरपंथियों के निशाने पर आईं नुसरत जहां

बंगाली ऐक्ट्रैस से सांसद बनीं नुसरत जहां नेता से अधिक बेपनाह खूबसूरती और अपने अलग अंदाज के लिए आजकल चर्चा में हैं.
टीएमसी सांसद नुसरत अब शादी के 2 महीनों बाद हनीमून पर हैं और उन का यह हनीमून अब चर्चा में है.
अभिनेत्री से नेता बनीं नुसरत जहां ने जब से राजनीति में कदम रखा है, तब से कठमुल्लों के निशाने पर रही हैं. राजनीति में पहले ही दिन अपने गेटअप और ड्रैस को ले कर कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गईं और ट्रोल हुई थीं.

स्वर्ग जगहों से नहीं

इसी साल 19 जून को कोलकाता के जानेमाने बिजनैसमैन निखिल जैन से नुसरत जहां ने शादी की है. शादी के के 2 महीने बाद वे पति संग हनीमून मनाने निकली हैं.
इस हनीमून को यादगार बनाने के लिए उन्होंने अपनी कई खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं और शीर्षक दिया,’बेहतर हो कि आप का सिर बादलों में हो और आप को पता हो कि आप कहां हो. स्वर्ग जगहों से नहीं बल्कि खूबसूरत पलों, आपसी जुङाव और वक्त की चमक में मौजूद होते हैं.’

तसवीरें देख कर लगता है कि वे मालदीव्स में हनीमून मना रही हैं पर असल में वे कहां हैं यह नहीं पता चल पा रहा है.
हालांकि सोशल मीडिया पर हर किसी को नुसरत का यह अंदाज खूब पसंद आ रहा है. वे वेस्टर्न आउटफिट्स में नजर आ रही हैं और बेहद खूबसूरत दिख रही हैं.

फतवा जारी हो चुका है

शादी के बाद मांगटीका, साङी और मांग में सिंदूर लगाने की वजह से नुसरत पर फतवा भी जारी हो चुका है. कट्टरपंथी लोगों ने नुसरत की आलोचना करते हुए उन्हें धर्म विरोधी बताया है. हालांकि नुसरत जहां ने ऐसे लोगों को अपने अंदाज में जवाब भी दिया है.

वेस्टर्न आउटफिट्स और शानदार गेटअप में नुसरत जहां ने यह संदेश दिया है कि नेता बनने के लिए झूठा आवरण ओढने की कोई जरूरत नहीं है. अपने खुद के अंदाज में रहते हुए भी लोगों का दिल जीता जा सकता है.
नुसरत मानती हैं कि किसी नेता अथवा सांसद की पहचान उस के लिबास से नहीं जनता का काम कर के होती है और जिसे वह बखूबी कर रही हैं. ऐसे चंद लोग जो जातिमजहब के नाम से समाज को बांटने की कोशिश करते हैं उस की कोई फिक्र करने की जरूरत नहीं करनी चाहिए.
सच कहा, बात में तो दम है.

Edited by- Neelesh singh sisodia

मैंने 3 महीने पहले सेक्स किया था. कहीं मैं प्रेगनेंट तो नहीं हो जाउंगी?

सवाल
मैं 20 साल की लड़की हूं. मैंने अपने प्रेमी के साथ 3 महीने पहले सहवास किया था. उस के ठीक 2 दिन बाद मुझे माहवारी हुई थी और उस के बाद भी 2 महीने तक माहवारी हुई, लेकिन चौथे महीने माहवारी नहीं हुई. कहीं मैं पेट से तो नहीं हो गई हूं?

जवाब

हमबिस्तरी के बाद आप को 3 बार माहवारी आ चुकी है. इस का मतलब है कि आप पेट से नहीं हैं. इस बार माहवारी में देरी होने की वजह कुछ और हो सकती है. परेशान न हों, कुछ दिनों में आप को माहवारी हो जाएगी. इस उम्र में ऐसा होता रहता है. ज्यादा दिक्कत हो तो किसी माहिर डाक्टर से सलाह लें.

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क्यूट अंदाज में दिखीं हिना खान, फोटोज हुई Viral

हमेशा सुर्खियों में  रहने वाली टीवी एक्ट्रेस हिना खान हमेशा फैंस के लिए कुछ नया लेकर आती हैं फिर वो चाहे उनकी लाइफ की नई अपडेट हो या फिर उनके नये काम वो हमेशा सोशल मीडिया पर अप टू डेट रहती है जिसके चलते फैंस उनसे काफी कनेक्ट फील करते है. इसी के साथ ही हिना ने कुछ घंटे पहले ही अपनी क्यूट फोटोज इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की जिसे कुछ ही घंटों में फैंस ने कमेट्स भर दिया. हिना इन फोटोज काफी क्यूट लग रही हैं.

फैशन दीवा है हिना खान

हिना को ऐसे ही फैशन दीवा नहीं कहा गया है. आप सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों को गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि हर समय उन्हें स्टाइलिश अंदाज में रहना पसंद है. इन फोटोज को देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि हिना एक डौल है. हिना का औफ बन वाला अंदाज फैंस को काफी पसंद आ रहा है. हिना इन फोटोज में काफी बब्ली लग रही हैं.

 

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Imperfectly Perfect what say 😉

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Life is so much better when you are laughing… 😬😬

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Be careful with that look you give, it steals heart beats🥰 She blushingly said☺️ #NoMkup #MorningPhotography

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कैनरा फ्रेंडली है हिना

हिना को अच्छे से पता है कि कैमरे के साथ किस तरह से खेलना है. हिना ने आसमान की ओर देखते हुए भी कई फोटोज क्लिक करवाई. इन पोटोज में हिना की  हेयरस्टाइल काफी अच्छी लग रही हैं.  आपको बता दे की हिना को फोटो क्लिक करवाना काफी पसंद है और उनकी खुशी को देखकर साफ लग रहा है कि इस फोटोशूट को करवाते हुए उन्हें कितना मजा आया.

‘कसौटी जिंदगी की-2′ की “प्रेरणा” की हौट मोनोकिनी फोटोज Viral

टीवी के सबसे पसंदिदा सीरियल ‘कसौटी जिंदगी-2’ में “प्रेरणा” का रोल कर रही एक्ट्रेस एरिका फर्नांडीस ने करोंड़ों दिलों में अपनी जगह बना ली है. उनकी एक्टिंग के चलते वो सभी की पहली पसंद बन गई हैं. ‘कसौटी जिंदगी की-2’ के पहले “वो कुछ रंग प्यार के ऐसे भी” भी नजर आ चुकी है. एरिका सोशल मीडिया में भी खासा पौपुलर है, अकेले इंस्टाग्राम पर उनके 2.1 मिलियन फौलोवर्स हैं. हाल ही में जब एरिका ने अपनी मोनोकिनी फोटोज शेयर की तो फैंस के कमेंट की बहार आ गई.

काले मोनोकिनी में आई नजर

एरिका की इन फोटोज में वो काले रंग की मोनोकिनी जिसमें वो काफी हौट लग रही हैं. एरिका ने स्वीमिंग पूल में जमकर मस्ती की. काले रंग की मोनोकिनी में एरिका ने इस कहर ढाया कि हर कोई उनका दीवाना बन गया है. एरिका ने इस दौरान स्वीमिंग पूल के अंदर खुद के साथ खूब समय बिताया और ढेर सारी फोटोज भी क्लिक करवाई. एरिका ने अपनी इन फोटोज को शेयर करते हुए काफी थौटफुल कैप्शन डाला है. एरिका ने कैप्शन में लिखा है कि ‘जिंदगी के पास रिमोट नहीं है…इसे खुद से ही बदलना पड़ता है.’

 

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फैंस ने किया खासा पसंद

एरिका की फोटोज को फैंस काफी पसंद कर रहे है. कुछ ही घंटे फैंस ने कमेंट्स की बाहार लगा दी हैं. इन फोटोज पर हजारों लाइक्स भी आ चुके है.

 

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✨ #ejf #ericafernandes #instagram #fashion #instafashion #neetalulla #mussoorie #jwmarriott

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Wattababy #waterbaby #pooltime #ejf #summervibes #westin

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ब्रेकअप होने के बाद…

कुछ दिन पहले ही खबर आई थी की एरिका और पार्थ समथान का ब्रेकअप हो गया है जिसके चलते है वो काफी चर्चा में रही थी पर कुछ दिन पहले दोनों ने नच बलिए 9 में हिस्सा लिया. इस शो में दोनों की कैमिस्ट्री फैंस को काफी पसंद आ रही हैं.

मुझे नहीं जाना

लेखक रंजना शर्मा

शाम 7 बजे जब फोन की घंटी बजी तब ड्राइंगरूम में अलका, उस की मां गायत्री और पिता ज्ञानप्रकाश उपस्थित थे. फोन पर वार्तालाप अलका ने किया.

अलका की ‘हैलो’ के जवाब में दूसरी तरफ से भारी एवं कठोर स्वर में किसी पुरुष ने कहा, ‘‘मुझे अलका से बात करनी है.’’

‘‘मैं अलका ही बोल रही हूं. आप कौन?’’

‘‘मैं कौन हूं इस झंझट में न पड़ कर तुम उसे ध्यान से सुनो जो मैं तुम से कहना चाहता हूं.’’

‘‘क्या कहना चाहते हैं आप?’’

‘‘यही कि अपने पतिदेव को तुम फौरन नेक राह पर चलने की सलाह दो, नहीं तो खून कर दूंगा मैं उस का.’’

‘‘ये क्या बकवास कर रहे हो.’’

‘‘मैं बकवास न कर के तुम्हें चेतावनी दे रहा हूं. अलका मैडम,’’ बोलने वाले की आवाज क्रूर हो उठी, ‘‘अगर तुम्हारे पति राजीव ने फौरन मेरे दिल की रानी कविता पर डोरे डालने बंद नहीं किए तो जल्दी ही उस की लाश को चीलकौवे खा रहे होंगे.’’

‘‘ये कविता कौन है मैं नहीं जानती… और न ही मेरे पति का किसी से इश्क का चक्कर चल रहा है. आप को जरूर कोई गलतफहमी…’’

‘‘शंकर उस्ताद को कोई गलतफहमी कभी नहीं होती. मैं ने पूरी छानबीन कर के ही तुम्हें फोन किया है. अगर तुम अपने आप को विधवा की पोशाक में नहीं देखना चाहती हो तो उस मजनू की औलाद राजीव से कहो कि वह मेरी जान कविता के साए से भी दूर रहे.’’

अलका कुछ और बोल पाती इस से पहले ही फोन कट गया.

अपने मातापिता के पूछने पर अलका ने घबराई आवाज में वार्तालाप का ब्योरा उन्हें सुनाया.

गायत्री रोने ही लगीं. ज्ञानप्रकाश ने गुस्से से भर कर कहा, ‘‘तो राजीव इस कविता के चक्कर में उलझा हुआ है. मैं भी तो कहूं कि साल भर अभी शादी को हुआ नहीं और 2 महीने से पत्नी को मायके में छोड़ रखा है. जरूर उस ने इस कविता से गलत संबंध बना लिए हैं.’’

‘‘उस अकेले को दोष मत दो, जी,’’ गायत्री ने सुबकते हुए कहा, ‘‘दामादजी ने तो दसियों बार इस मूर्ख के सामने वापस लौट आने की विनती की होगी, लेकिन इस की जिद के आगे उन की एक न चली.’’

‘‘अलका को कुसूरवार मत कहो. हमारी बेटी ने राजीव से प्रेमविवाह किया है. उसे सुखी रखना उस का कर्तव्य है. अगर अलका अलग घर में जाने की जिद पर अड़ी हुई है तो वह मेरी समझ से कुछ गलत नहीं कर रही,’’ कह कर ज्ञानप्रकाश अलका की तरफ देखने लगे.

‘‘पापा, आप ठीक कह रहे हैं. मैं ने नौकरानी बनने के लिए शादी नहीं की थी राजीव से,’’ अलका ने अपने मन की बात फिर दोहराई.

‘‘अलका, तुम राजीव को फोन कर के इसी वक्त यहां आने के लिए कहो. ऐसी डांट पिलाऊंगा मैं उसे कि इश्क का भूत फौरन उस के सिर से उतर कर गायब हो जाएगा,’’ ज्ञानप्रकाश की आंखों में चिंता व क्रोध के मिलेजुले भाव नजर आ रहे थे.

अलका राजीव को फोन करने के लिए उठ खड़ी हुई.

करीब घंटे भर बाद राजीव अपनी ससुराल पहुंचा. उस के पिता ओंकारनाथ और मां कमलेश भी उस के साथ आए थे. उन तीनों के चेहरों पर चिंता और तनाव के भाव साफ झलक रहे थे.

कुछ औपचारिक वार्तालाप के बाद ओंकारनाथ ने परेशान लहजे में ज्ञानप्रकाश से कहा, ‘‘बहू से फोन पर मेरी भी बात हुई थी. मुझे लगा कि वह किसी बात को ले कर बहुत परेशान है. इसलिए राजीव के साथ उस की मां और मैं ने भी आना उचित समझा.’’

‘‘ये अच्छा ही हुआ कि आप दोनों साथ आए हैं राजीव के. सारी बात आप दोनों को भी मालूम होनी चाहिए. शाम को 7 बजे हमारे यहां एक फोन आया था. फोन करने वाले ने हमें राजीव के बारे में बड़ी गलत व गंदी तरह की सूचना दी है,’’ ज्ञानप्रकाश ने नाराज अंदाज में राजीव को घूरना शुरू कर दिया था.

‘‘फोन किसी शंकर नाम के आदमी का था?’’ कमलेश के इस सवाल को सुन कर अलका और उस के मातापिता बुरी तरह से चौंक उठे.

‘‘आप को कैसे मालूम पड़ा उस का नाम, बहनजी?’’ गायत्री अचंभित हो उठीं.

‘‘क्योंकि उस ने शाम 6 बजे के आसपास हमारे यहां भी फोन किया था. राजीव और उस के पिता घर पर नहीं थे, इसलिए मेरी ही उस से बातें हो पाईं.’’

‘‘क्या कहा उस ने आप से?’’

‘‘उस ने आप से क्या कहा?’’ कमलेश ने उलट कर पूछा.

गायत्री के बजाय ज्ञानप्रकाश ने गंभीर हो कर उन के प्रश्न का जवाब दिया, ‘‘बहनजी, शंकर ऐसी बात कह रहा था जिस पर विश्वास करने को हमारा दिल तैयार नहीं है, लेकिन वह बहुत क्रोध में था और राजीव को गंभीर नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दे रहा था. इसलिए राजीव से हमें पूछताछ करनी ही पड़ेगी.’’

‘‘क्या वह किसी कविता नाम की लड़की से मेरे अवैध प्रेम संबंध होने की बात आप को बता रहा था?’’ राजीव गहरी उलझन और परेशानी का शिकार नजर आ रहा था.

अलका ने उस के चेहरे पर

पैनी नजरें गड़ा कर कहा, ‘‘हां,

कविता की ही बात कर रहा था वह. कौन है ये कविता?’’

‘‘मैं तो सिर्फ एक कविता को ही जानता हूं, जो मेरे विभाग में मेरे साथ काम करती है. तुम्हें याद है शादी के बाद हम एक रात नीलम होटल में डिनर करने गए थे. तब एक लंबी सी लड़की अपने बौयफैं्रड के साथ वहां आई थी. मैं ने तुम्हें उस से मिलाया था, अलका.’’

अलका ने अपनी सास की तरफ मुड़ कर कहा, ‘‘मम्मी, मैं ने आप से उस लड़की का जिक्र घर आ कर किया था. वह राजीव से बहुत खुली हुई थी. उसे ‘यार, यार’ कह कर बुला रही थी. वह अपने बौयफ्रैंड के साथ न होती तो राजीव से उस के गलत तरह के संबंध होने का शक मुझे उसी रात हो जाता. मेरा दिल कहता है कि राजीव जरूर उस के रूपजाल में फंस गया है और उस के पुराने प्रेमी शंकर ने क्रोधित हो कर उसे जान से मारने की धमकी दी है,’’ बोलते- बोलते अलका की आंखें डबडबा आईं, चेहरा लाल हो चला.

‘‘बेकार की बात मुंह से मत निकालो, अलका,’’ राजीव को गुस्सा आ गया, ‘‘घंटे भर से अपने मातापिता को यह बात समझाते हुए मेरा मुंह थक गया है कि कविता से मेरा कोई चक्कर नहीं चल रहा है. अब तुम भी मुझ पर शक कर रही हो. क्या तुम मुझे चरित्रहीन इनसान समझती हो?’’

‘‘अगर दाल में कुछ काला नहीं है तो ये शंकर क्यों जान से मार देने की धमकी तुम्हें दे रहा है?’’ अलका ने चुभते स्वर में पूछा.

‘‘उस का दिमाग खराब होगा. वह पागल होगा. अब मैं कैसे जानूंगा कि वह क्यों ऐसी गलतफहमी का शिकार हो गया है?’’ राजीव चिढ़ उठा.

‘‘अगर वह सही कह रहा हो तो तुम कौन सा अपने व कविता के प्रेम की बात सीधेसीधे आसानी से कुबूल कर लोगे?’’ अलका ने जवाब दिया.

‘‘तब मेरे पीछे जासूस लगवा कर मेरी इनक्वायरी करा लो, मैडम,’’ राजीव गुस्से से फट पड़ा, ‘‘मैं दोषी नहीं हूं, लेकिन मैं एक सवाल तुम से पूछना चाहता हूं. तुम 2 महीने से मुझ से दूर यहां मायके में जमी बैठी हो. ऐसी स्थिति में अगर मैं किसी दूसरी लड़की के चक्कर में पड़ भी जाता हूं तो तुम्हें परेशानी क्यों होनी चाहिए? जब तुम्हें मेरी फिक्र ही नहीं है तो मैं कुछ भी करूं, तुम्हें क्या लेनादेना उस से?’’

‘‘मेरा दिल कह रहा है कि तुम ने मुझ पर लौटने का दबाव बनाने के लिए ही शंकर वाला नाटक किया है. लेकिन तुम मेरी एक बात ध्यान से सुन लो. जब तक तुम मेरे मनोभावों को समझ कर उचित कदम नहीं उठाओगे तब तक मैं तुम्हारे पास नहीं लौटूंगी,’’ अलका झटके से उठ कर अपने कमरे में चली गई.

चायनाश्ता ले कर मेहमान अपने घर लौटने लगे. चलतेचलते ओंकारनाथ ने स्नेह भरा हाथ अलका के सिर पर रख कर कहा, ‘‘बहू, मैं ने कुछ प्रापर्टी डीलरों से कह दिया है तुम दोनों के लिए किराए का मकान ढूंढ़ने के लिए. तुम दोनों का साथसाथ सुखी रहना सब से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है. किराए का मकान मिलने तक अगर तुम घर लौट आओगी तो हम सब को बहुत खुशी होगी.’’

जवाब में अलका तो खामोश रही लेकिन गायत्री ने कहा, ‘‘ये आगामी इतवार को पहुंच जाएगी आप के यहां.’’

मेहमानों के चले जाने के बाद अलका ने कहा, ‘‘मां, एक तो मुझे इस कविता के चक्कर की तह तक पहुंचना है. दूसरे, अगर मैं राजीव के साथ रहूंगी तो उस पर मकान जल्दी ढूंढ़ने के लिए दबाव बनाए रख सकूंगी. इन बातों को ध्यान में रख कर ही मैं ससुराल लौट रही हूं.’’

शुक्रवार की दोपहर में एक अजीब सा हादसा घटा. अलका अपने कमरे में आराम कर रही थी कि खिड़की का कांच टूट कर फर्श पर गिर पड़ा. वह भाग कर ड्राइंगरूम में पहुंची. तभी उस के पिता ने घबराई हालत में बाहर से बैठक में प्रवेश किया और अलका को देख कर कांपती आवाज में उस से बोले, ‘‘शंकर दादा के 2 गुंडों ने पत्थर मार कर शीशा तोड़ा है. पत्थर पर कागज लिपटा है…उसे ढूंढ़. उस में हमारे लिए संदेश लिख कर भेजा है शंकर दादा ने.’’

पत्थर पर लिपटे कागज में टाइप किए गए अक्षरों में लिखा था :

‘अलका मैडम,

अपने पति राजीव की करतूतों का फल भुगतने को तैयार हो जाओ. आज शीशा तोड़ा गया है, कल उस का सिर फूटेगा. कविता सिर्फ मेरी है. उस पर गंदी नजर डालने वाले के पूरे खानदान को तबाह कर दूंगा मैं, शंकर दादा.’

पत्र पढ़ने के बाद गायत्री, ज्ञानप्रकाश व अलका के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं.

पूरी घटना की खबर दोपहर में ही ओंकारनाथ के परिवार तक भी पहुंच गई. खबर सुन कर सभी मानसिक तनाव व चिंता का शिकार हो गए. सब से ज्यादा मुसीबत का सामना राजीव को करना पड़ा. हर आदमी उसे कविता से अवैध प्रेम संबंध रखने का दोषी मान रहा था. वह सब से बारबार कहता कि कविता से उस का कोई गलत संबंध नहीं है, पर कोई उस की बात पर विश्वास करने को राजी न था.

रविवार की सुबह अलका अपने पिता के साथ ससुराल पहुंच गई.

रात को शयनकक्ष में पहुंच कर उन दोनों के बीच बड़ी गरमागरमी हुई. राजीव अपने को दोषी नहीं मान रहा था और अलका का कहना था कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है जो शंकर उस्ताद यों गुस्से से फटा जा रहा है.

आखिरकार राजीव ने अलका को मना ही लिया. तभी उस ने अपनेआप को राजीव की बांहों के घेरे में कैद होने

दिया था.

पूरा एक सप्ताह शांति से गुजरा और फिर शंकर दादा की एक और हरकत ने उन की शांति भंग कर डाली. किसी ने रात में उस की मोटरसाइकिल की सीट को फाड़ डाला था. हैंडिल पर लगे शीशे फोड़ दिए थे. ऊपर से उस पर कूड़ा बिखेरा गया था.

उस के हैंडिल पर एक चिट लगी हुई थी जिस पर छपा था, ‘अब भी अपनी जलील हरकतों से बाज आ जा, नहीं तो इसी तरह तेरा पेट फाड़ डालूंगा.’

राजीव चिट उखाड़ कर उसे गायब कर पाता उस से पहले ही ओंकारनाथ वहां पहुंच गए. उन के शोर मचाने पर पूरा घर फिर वहां इकट्ठा हो गया. जो भी राजीव की तरफ देखता, उस की ही नजरों में शिकायत व गुस्से के भाव होते.

शंकर दादा का खौफ सभी के दिल पर छा गया. दिनरात इसी विषय पर बातें होतीं. राजीव को उस के घर व ससुराल का हर छोटाबड़ा सदस्य चौकन्ना रहने की सलाह देता.

शंकर दादा का अगला कदम न जाने क्या होगा, इस विषय पर सोचविचार करते हुए सभी के दिलों की धड़कनें बढ़ जातीं.

लगभग 10 दिन बिना किसी हादसे के गुजर गए. लेकिन ये खामोशी तूफान के आने से पहले की खामोशी सिद्ध हुई.

एक रात राजीव और अलका 10 बजे के आसपास घर लौटे. एक मारुति वैन उन के घर के गेट के पास खड़ी थी, इस पर उन दोनों ने ध्यान नहीं दिया.

राजीव की मोटरसाइकिल के रुकते ही उस वैन में से 3 युवक निकल कर बड़ी तेज गति से उन के पास आए और दोनों को लगभग घेर कर खड़े हो गए.

‘‘क…कौन हैं आप लोग? क्या चाहते हैं?’’ राजीव की आवाज डर के मारे कांप उठी.

‘‘अपना परिचय ही देने आए हैं हम तुझे, मच्छर,’’ बड़ीबड़ी मूंछों वाले ने दांत पीसते हुए कहा, ‘‘और साथ ही साथ सबक भी सिखा कर जाएंगे.’’

फिर बड़ी तेजी व अप्रत्याशित ढंग से एक अन्य युवक ने अलका के पीछे जा कर एक हाथ से उस का मुंह यों दबोच लिया कि एक शब्द भी उस के मुंह से निकलना संभव न था. बड़ीबड़ी मूंछों वाले ने राजीव का कालर पकड़ कर एक झटके में कमीज को सामने से फाड़ डाला. दूसरे युवक ने उस के बाल अपनी मुट्ठी में कस कर पकड़ लिए.

‘‘हमारे शंकर दादा की चेतावनी को नजरअंदाज करने की जुर्रत कैसे हुई तेरी, खटमल,’’ मूंछों वाले ने आननफानन में 5-7 थप्पड़ राजीव के चेहरे पर जड़ दिए, ‘‘बेवकूफ इनसान, ऐसा लगता है कि न तुझे अपनी जान प्यारी है, न अपने घर वालों की. कविता भाभी पर डोरे डालने की सजा के तौर पर क्या हम तेरी पत्नी का अपहरण कर के ले जाएं?’’

‘‘मैं सौगंध खा कर कहता हूं कि कविता से मेरा कोई प्रेम का चक्कर नहीं चल रहा है. आप मेरी बात का विश्वास कीजिए, प्लीज,’’ राजीव उस के सामने गिड़गिड़ा उठा.

2 थप्पड़ और मार कर मूंछों वाले ने क्रूर लहजे में कहा, ‘‘बच्चे, आज हम आखिरी चेतावनी तुझे दे रहे हैं. कविता भाभी से अपने सारे संबंध खत्म कर ले. अगर तू ने ऐसा नहीं किया तो तेरी इस खूबसूरत बीवी को उठा ले जाएंगे हम शंकर दादा के पास. बाद में जो इस के साथ होगा, उस की जिम्मेदारी सिर्फ तेरी होगी, मजनू की औलाद.’’ फिर उस ने अपने साथियों को आदेश दिया, ‘‘चलो.’’

एक मिनट के अंदरअंदर वैन राजीव व अलका की नजरों से ओझल हो गई. वैन का नंबर नोट करने का सवाल ही नहीं उठा क्योंकि नंबर प्लेट पर मिट्टी की परत चिपकी हुई थी.

पूरे घटनाक्रम की जानकारी पा कर ज्ञानप्रकाश व ओंकारनाथ के परिवारों में चिंता और तनाव का माहौल बन गया. 3 दिन बाद अलका के मातापिता ने सब को रविवार के दिन अपने घर लंच पर आमंत्रित किया.

कुछ मीठा ले आने के लिए ज्ञानप्रकाश और ओंकारनाथ बाजार की तरफ चल दिए. रास्ते में ज्ञानप्रकाश ने तनाव भरे लहजे में अपने समधी से पूछा, ‘‘अलका कैसी चल रही है?’’

ओंकारनाथ ने मुसकरा कर जवाब दिया, ‘‘बिलकुल ठीक है वह. कल मैं ने राजीव से कहा कि जा कर वह मकान देख आओ जिस का पता प्रापर्टी डीलर ने बताया है. अलका ने मेरी बात सुन कर फौरन कहा कि वह किसी किराए के मकान में जाने की इच्छुक नहीं है. उस का ऐसा ‘मुझे नहीं जाना’ वाला कथन सुन कर मुझे अपनी मुसकान को छिपाना बहुत मुश्किल हो गया था दोस्त. हमारी योजना सफल रही है.’’

‘‘यानी कि अलका की अकेले रहने की जिद समाप्त हुई?’’ ज्ञानप्रकाश एकाएक प्रसन्न नजर आने लगे थे.

‘‘बिलकुल खत्म हुई. सुनो, हमारा कितना नुकसान हुआ है कुल मिला कर?’’ ओंकारनाथ ने जानना चाहा.

‘‘छोड़ो यार,’’ ज्ञानप्रकाश ने कहा, ‘‘मेरी बेटी अलका का जो खून सूख रहा होगा आजकल उस की कीमत क्या रुपयों में आंकी जा सकती है समधी साहब.’’

‘‘ज्ञानप्रकाश, हमतुम अच्छे दोस्त न होते तो अलका की अलग रहने की जिद से पैदा हुई समस्या का समाधान इतनी आसानी से नहीं हो पाता. अब बहू सब के बीच रह कर घरगृहस्थी चलाने के तरीके बेहतर ढंग से सीख जाएगी और चार पैसे भी जुड़ जाएंगे उन के पास,’’ ओंकारनाथ ने अपने समधी के कंधे पर हाथ रख कर अपना मत व्यक्त किया.

‘‘आप का लाखलाख धन्यवाद कि उस के सिर से अलग होने का भूत उतर गया,’’ ज्ञानप्रकाश ने राहत की गहरी सांस ली.

‘‘मुझे धन्यवाद देने के साथसाथ अपने दोस्त के बेटे को भी धन्यवाद दो,  जिस ने शंकर उस्ताद की भूमिका में ऐसी जान डाल दी कि उस की आवाज व हावभाव को याद कर के अलका के अब भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं.’’

‘‘नाटकों में भाग लेने का उस का अनुभव हमारे खूब काम आया.’’

‘‘उस को हिदायत दे देना कि जो उस ने किया है हमारे कहने पर, उस की चर्चा किसी से न करे.’’

‘‘मेरे बेटे व बहू को अगर कभी पता लग गया कि उन की रातों की नींद उड़ाने वाला नाटक हमारे इशारे पर खेला गया था तो मेरा तो बुढ़ापा बिगड़ जाएगा. मैं कभी एक शब्द नहीं मुंह से निकालूंगा,’’ ओंकारनाथ ने संकल्प किया.

‘‘हम ने जो किया है, सब के भले को ध्यान में रख कर किया है, समधीजी. कांटे से कांटा निकल गया है. अब शंकर दादा गायब हो जाएंगे तो धीरेधीरे राजीव व अलका सामान्य होते चले जाएंगे. नतीजा अगर अच्छा निकले तो कुछ गलत कार्यशैली को उचित मानना समझदारी है,’’ ज्ञानप्रकाश की बात का सिर हिला कर ओंकारनाथ ने अनुमोदन किया और दोनों अपने को एकदूसरे के बेहद करीब महसूस करते हुए बाजार पहुंच गए.  द्य

मारिया

लेखक- पंकज धवन

दिल्ली का इंदिरागांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा. जहाज से बाहर निकल कर इस धरती पर पांव रखते ही सारे बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई. लगा यहां कुछ तो ऐसा है जो अपना है और बरबस अपनी तरफ खींच रहा है. यहां की माटी की सौंधीसौंधी खुशबू के लिए तो पूरे 2 साल तक तरसता रहा है.

ट्राली पर सामान लादे एअरपोर्ट से बाहर निकला. दर्शक दीर्घा में मेरी नजर चारों तरफ घूमने लगी. लंबी कतारों में खड़ी भीड़ में मैं अपनों को तलाश रहा था. मेरे पांव ट्राली के साथसाथ धीरेधीरे आगे बढ़ रहे थे कि पास से ही चाचू की आवाज आई.

मेरी नजर आवाज की ओर घूम गई.

‘‘अरे, नेहा तू?’’ मैं ने हैरानी से उस की ओर देखा.

‘‘हां, चाचू, इधर से आ जाइए. सभी लोग आए हुए हैं,’’ नेहा बोली.

‘‘सब लोग?’’ मेरी उत्सुकता बढ़ने लगी. अपनों से मिलने के लिए मन एकदम बेचैन हो उठा. सामने दीदी, मांबाबूजी को देखा तो मन एकदम भावुक हो गया. मेरी आंखें छलछला आईं. मां ने कस कर मुझे अपने सीने में भींच लिया. भाभी के हाथ में आरती की थाली थी.

‘‘मारिया कहां है,’’ भाभी ने इधरउधर झांकते हुए पूछा.

‘‘भाभी, अचानक उस की तबीयत खराब हो गई इसलिए वह नहीं आ सकी. वैसे आखिरी समय तक वह एकदम आने को तैयार थी.’’

मेरा इतना कहना था कि भाभी का चेहरा उतर गया जिसे मैं ने बड़े करीब से महसूस किया.

‘‘हम लोग तो यह सोच कर यहां आए थे कि बहू को सबकुछ अटपटा न लगे. पर चलो…’’ कहतेकहते मां चुप हो गईं.

‘‘चलो, मारिया न सही तुम ही तिलक करा लो,’’ भाभी ने कहा तो मैं झेंप गया.

‘‘नहीं भाभी, मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता. सब लोग क्या सोचेंगे.’’

‘‘यही सोचेंगे न कि कितने प्यार से भाभी देवर का स्वागत कर रही है. आखिर हमारा भरापूरा परिवार है. भारतीय परंपराएं हैं…’’ बाबूजी बोले.

सच, ऐसे घर को तो मैं तरस गया था. सभी घर आ गए.

‘‘मारिया नहीं आई कोई बात नहीं, तू तो आ गया न,’’ मां ने कहा.

‘‘राहुल क्यों नहीं आता? आखिर अपना खून है, फिर बहन की शादी है. तब तक तो मारिया भी आ जाएगी क्यों बाबू…’’ भाभी ने चुहल की.

‘‘हां भाभी,’’ मैं ने यों ही टालने के लिए कह दिया. बातों का सिलसिला मारिया से आगे बढ़ ही नहीं रहा था फिर उठ कर अनमने मन से सोफे पर लेट गया और सोने का प्रयास करने लगा. तब तक भाभी चाय बना कर ले आईं.

मुझे ऐसे लेटा देख कर बोलीं, ‘‘भैया, आप बहुत थक गए होंगे. भीतर कमरे में चल कर लेट जाइए. बातें तो सुबह भी हो जाएंगी.’’

मेरी आंखों में नींद कहां. परिवारजनों का इतना स्नेह उस विदेशी लड़की के लिए जिस को मैं ने चुना था. मांबाबूजी कितने दिन मुझ से नाराज रहे थे. महीनों तक फोन भी नहीं किया था. आखिर मां ने ही चुप्पी तोड़ी और बेमन से ही सही सबकुछ स्वीकार कर लिया था. स्नेह को बटोरने के लिए वह नहीं थी जिस के लिए यह सबकुछ हुआ था. मुझे रहरह कर बीते दिन याद आने लगे.

मेरी कंपनी ने मुझे अनुभव और योग्यता के आधार पर यूनान भेजने का निर्णय लिया था. मैं भरसक प्रयास करता रहा कि मुझे वहां न जाना पड़े क्योंकि एक तो मुझे विदेशी भाषा नहीं आती थी दूसरे वहां भारतीय मूल के लोगों की संख्या नहीं के बराबर थी. अत: शाकाहारी भोजन मिलने की कोई संभावना न थी. मेरे स्थान पर कोई  और व्यक्ति न मिल पाने के कारण वहां जाना मेरी मजबूरी बन गई थी.

मुझे एथेंस आए 15 दिन हो चुके थे. खाने के नाम पर उबले हुए चावल, ग्रीक सलाद, फ्राई किए टमाटर और गोल सख्त डबलरोटी थी जिन को 15 दिनों से लगातार खा कर मैं पूरी तरह से ऊब चुका था.

भारतीय रेस्तरां मेरे आफिस से 20 किलोमीटर दूर एअरपोर्ट के पास था जहां हर रोज खाने के लिए जाना आसान नहीं था. मेरे आफिस वाले भी इस मामले में मेरी कोई ज्यादा मदद नहीं कर पाए क्योंकि मैं उन्हें ठीक से यह समझा नहीं पाया कि मैं शाकाहारी क्यों हूं.

एथेंस यूरोप का प्रसिद्घ टूरिस्ट स्थान होने के कारण लोग यहां अकसर छुट्टियां मनाने आते हैं. यही वजह है कि यहां के हर चौराहे पर, सड़क के किनारे रेस्तरां तथा फास्टफूड का काफी प्रचलन है. घंटों बैठ कर ठंडी ग्रीक कौफी पीना तथा भीड़ को आतेजाते देखना भी यहां का एक फैशन और लोगों का शौक है.

उस दिन मैं यहां के मशहूर फास्टफूड चेन ‘एवरेस्ट’ के बाहर बिछी कुरसियों पर बैठा वेटर के आने का इंतजार कर ही रहा था कि लालसफेद ड्रेस में लिपटी एक महिला वेटर ने आ कर मुझे मीनू कार्ड पकड़ाना चाहा.

मैं ने उसे देखते ही कहा, ‘मुझे यह कार्र्ड नहीं, बस, एक वेज पिज्जा और कोक चाहिए.’

‘आप कुछ नया खाना नहीं खाना चाहेंगे. कल भी आप ने खाने के लिए यही मंगाया था. यहां का चिकन सूप, क्लब सैंडविच…’

उस महिला वेटर की बात को काटते हुए मैं ने कहा, ‘माफ कीजिए, मैं सिर्फ शाकाहारी हूं.’

‘तो शाकाहारी में वेजचीज सैंडविच, नूडल्स, मैश पोटेटो, फ्रेंच फाइज क्यों नहीं खाने की कोशिश करते?’ वह मुसकरा कर बोलती रही और मैं उस का मुंह देखता रहा कि कब वह चुप हो और मैं ‘नो थैंक्स’ कह कर उस को धन्यवाद दूं्.

मेरे चेहरे को देख कर शायद उस ने मेरे दिल की बात जान ली थी. इसलिए और भीतर आर्डर दे कर मेरे पास आ कर खड़ी हो गई.

‘आप कहां से आए हैं?’

‘इंडिया से,’ मैं ने छोटा सा उत्तर दिया.

‘पर्यटक हैं? ग्रीस घूमने अकेले

ही आए हैं.’

‘नहीं, मैं यहां वास निकोलस में काम करता हूं और कुछ दिन पहले ही यहां आया हूं…और आप?’

‘मैं पढ़ती हूं. यहां पार्र्ट टाइम वेटर  का काम करती हूं, शाम को 4 से 10 तक.’

तब तक भीतर के बोर्ड पर मेरे आर्डर का नंबर उभरा और वह बातों का सिलसिला बीच में ही छोड़ कर चली गई. मैं ने महसूस किया कि यूरोप के बाकी देशों से यूनान के लोग ज्यादा सुंदर, हंसमुख और मिलनसार होते हैं. खाने के साथ यहां भी भारत की तरह पीने को पानी मिल जाता है जिस की कोई कीमत नहीं ली जाती.

उस ने बड़ी तरतीब से मेरी मेज पर कांटे, छुरियों और पेपर नेपकिन के साथ पिज्जा सजा दिया, जिसे देखते ही मेरा मन फिर से कसैला सा हो गया. न जाने क्यों मैं यहां की चीज की गंध को बरदाश्त नहीं कर पा रहा था.

‘क्या हुआ, ठीक नहीं है क्या?’ मेरे चेहरे के भावों को पढ़ते हुए वह बोली.

‘नहीं यह बात नहीं है. 5 दिन से लगातार जंक फूड खातेखाते मैं बोर हो गया हूं. यहां आसपास कोई भारतीय रेस्तरां नहीं है क्या?’

‘नहीं, पर एक और शाकाहारी भोजनालय है, हरे रामा हरे कृष्णा वालों का, एकदम शुद्घ शाकाहारी. अंडा और चाय भी नहीं मिलती वहां.’

‘वह कहां है?’ मैं ने बड़ी उत्कंठा से पूछा.

‘मुझे उस का पता तो नहीं पर जगह मालूम है. आज मेरी ड्यूटी के बाद तक रुको तो मैं तुम को ले चलूंगी या फिर कल 4 बजे से पहले आना.’

‘मैं कल आऊंगा. क्या नाम है तुम्हारा?’ मैं ने पूछा.

‘मारिया.’

‘और मेरा राहुल.’

इस तरह हमारे मिलने का सिलसिला शुरू हुआ. अब हर शनिवार को हम साथ घूमते और खाते. वह सालोनीकी की रहने वाली थी जो एथेंस से 500 किलोमीटर दूर था. उस के पिता का वहां सिलेसिलाए वस्त्रों का स्टोर था. वह वहां पर अपनी एक सहेली के साथ किराए पर कमरा ले कर रहती थी जिस का खर्च दोनों ही मिलजुल कर वहन करती थीं.

एक दिन बातोंबातों में मारिया ने बताया कि उस के पिता भी मूलत: भारतीय हैं जो बरसों पहले यहां आ कर बस गए थे. परिवार में मातापिता के अलावा एक भाई क्रिस्टोस भी है जो उन के पास ही रहता है. अपने पिता से उस ने भारत के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था. उस की मां उस के पिता की भरपूर प्रशंसा करती हैं और कहा करती हैं कि भारतीय व्यक्ति से विवाह कर के मैं ने कोई भूल नहीं की. परिवार के प्रति संजीदा, व्यवहारकुशल, बेहद केयरिंग पति कम से कम यूनानी लोगों में तो कम ही होते हैं.

इस बार एकसाथ 4 छुट्टियां मिलीं तो मारिया बेहद खुश हुई और कहने लगी, ‘चलो, तुम को सैंतारीनी द्वीप ले चलती हूं. यहां के सब से खूबसूरत द्वीपों में से एक

है. वहां का सनसेट और

सन राईज देखने दुनिया भर से लोग आते हैं.’

मेरे तो मन में लाखों घंटियां एकसाथ बजने लगीं कि अब कई दिन एकसाथ रहने और घूमनेफिरने को मिलेगा. चूंकि साथ रहतेरहते वह अब मेरे बारे में बहुत कुछ जान चुकी थी इसलिए रेस्तरां में खुद ही आर्र्डर कर के सामान बनवाती और मुझे उस व्यंजन के बारे में विस्तार से समझाती. मेरी तो जैसे दुनिया ही बदल गई थी. हर चीज इतनी आसान हो गई थी कि मुझे अब एथेंस में रहना अच्छा लगने लगा था.

मारिया के साथ गुजारी गई उन छुट्टियों को मैं कभी नहीं भूल सकता. मैं ने यह भी महसूस किया कि उस को भी मेरा साथ अच्छा लगने लगा था. होटल में हम ने अलगअलग कमरे लिए थे पर उस शाम मारिया मेरे कमरे में आ कर मुझ से बुरी तरह लिपट गई और चुंबनों की बौछार कर दी. मैं भी उसे चाहने लगा था इसलिए सारा संकोच त्याग कर उसे कस कर पकड़ लिया और वह सबकुछ हो गया जो नहीं होना चाहिए था. हम एकदूसरे के और करीब आ गए.

दिन बीतते गए. एक दिन मारिया ने बताया कि उस की रूमपार्टनर वापस अपने शहर जा रही है. मारिया अकेली उस फ्लैट का किराया नहीं दे सकती थी और मुझे भी एक रूम की तलाश थी सो मैं होटल से सामान ले कर उस के साथ रहने लगा.

एक दिन मारिया ने कहा कि वह मुझ से शादी करना चाहती है. नैतिक तौर पर यह मेरी जिम्मेदारी थी क्योंकि मैं भी उसे अब उतना ही चाहने लगा था जितना कि वह. पर तुरंत मैं कोई फैसला नहीं कर सका.

मैं ने कहा, ‘मारिया, मैं तुम्हें चाहता हूं फिर भी एक बार अपने घर वालों से इजाजत ले लूं तो…’

‘इजाजत,’ वह थोड़ा माथे पर त्योरियां चढ़ाते हुए बोली, ‘तुम सब काम उन की इजाजत ले कर करते हो. मेरे साथ घूमने और रहने के लिए भी इजाजत ली थी क्या? खाना खाने, रहने, सोने के लिए भी उन की इजाजत लेते हो क्या?’

‘ऐसी बात नहीं है मारिया, मैं भारतीय हूं. इजाजत न भी सही पर उन को बताना और आशीर्वाद लेना मेरा कर्तव्य है.’ मैं ने उसे समझाने की कोशिश की, ‘यह हमारी परंपराएं हैं.’

‘ये परंपराएं तुम्ही निभाओ,’ मारिया बोली, ‘मेरी बात का सीधा उत्तर दो क्योंकि मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनना चाहती हूं.’

एकदम सीधासीधा वाक्य उस ने मेरे ऊपर थोप दिया. मुझे उस से इस तरह के उत्तर की अपेक्षा नहीं थी.

‘मैं ने मम्मीपापा को यह सब बताया तो वे नाराज हो गए और मैं कितने ही दिन तक उन के रूठनेमनाने में लगा रहा. फिर जब मैं ने बताया कि लड़की के पिता भारतीय मूल के हैं तो उन्होंने बड़े अनमने मन से इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया.

कुछ ही दिनों बाद पता चला कि मेरी छोटी बहन की शादी तय हो गई है. मेरा मन भारत जाने के लिए एकदम विचलित हो गया. इसी बहाने मुझे छुट्टी भी मिल गई और भारत जाने को टिकट भी.

मैं ने यह सब मारिया को बताया तो वह भी साथ चलने की तैयारी करने लगी लेकिन जाने से ठीक एक दिन पहले मारिया को न जाने क्या सूझा कि उस ने मेरे साथ जाने से मना कर दिया. मैं ने नाराज हो कर मारिया को कहा कि ऐसे कैसे तुम मना कर रही हो.

‘राहुल मैं अब भारत नहीं जाना चाहती, बस…’

‘परंतु मारिया, मैं ने वहां सब को बता दिया है कि तुम मेरे साथ आ रही हो. सब लोग तुम से मिलने की राह देख रहे हैं. सच तुम भी वहां चल कर बहुत खुश होगी.’

‘मुझे नहीं जाना तो जबरदस्ती क्यों कर रहे हो,’ वह उत्तेजित हो कर बोली.

मैं मायूस हो कर रह गया. मैं यह बात अच्छी तरह जानता था कि मारिया अब मेरे साथ नहीं जाएगी क्योंकि जिस बात को वह एक बार मन में बैठा ले उस पर फिर से विचार करना उस ने सीखा नहीं था.

सुबह काम करने वालों के शोर के साथ ही मेरी निद्रा टूटी. बहन की शादी की घर पर चहलपहल तो थी ही.

बहन को विदा करने के साथसाथ मैं भी पूरा थक चुका था. जब से यहां आया ठीक से मांबाबूजी के पास बैठ भी नहीं सका. मां का पुराना कमर दर्द फिर से उभर कर सामने आ गया और मां बिस्तर पर पड़ गईं.

जैसेजैसे मेरे जाने के दिन करीब आते गए मांबाबूजी की उदासी बढ़ती गई. मेरा भी मन भारी हो आया और मैं ने छुट्टी बढ़वा ली. सभी लोग मेरे इस कुछ दिन और रहने से बहुत खुश हो गए परंतु मारिया नाराज हो गई.

‘‘राहुल तुम वापस आ जाओ. मेरा मन अकेले नहीं लग रहा है.’’

‘‘मारिया, अभी तो सब से मैं ठीक से मिला भी नहीं हूं. शादी की भागदौड़ में इतना व्यस्त रहा कि…फिर अचानक मां की तबीयत खराब हो गई. मैं ने छुट्टी 15 दिन के लिए बढ़वा ली है फिर न जाने कब यहां आना हो सके…’’ यह कह कर मैं ने फोन काट दिया.

कुछ दिनों बाद मारिया का फिर फोन आया. वह थोड़ा गुस्से में थी.

‘‘अब क्या हुआ?’’ मैं ने थोड़ा खीज कर पूछा.

‘‘पापा ने रविवार को मेरे और तुम्हारे लिए एक पार्टी रखी है और उस में तुम को आना ही पड़ेगा,’’ वह निर्णायक से स्वर में बोली.

‘‘मारिया, तुम समझती क्यों नहीं हो,’’ मैं ने थोड़ा गुस्से से कहा, ‘‘यह सब हठ छोड़ दो. मैं जल्दी ही वहां पहुंच जाऊंगा.’’

‘‘नहीं राहुल, जब पापा को पता चलेगा कि तुम नहीं आ रहे हो तो उन्हें कितना बुरा लगेगा. मैं ने ही जिद की थी कि आप पार्टी रख लो, राहुल तब तक आ जाएगा. उन के मन में तुम्हारे प्रति कितनी इज्जत है…’’

‘‘यही बात जब मैं ने तुम से कही थी कि मेरे घर वाले…’’

‘‘वह बात और थी डार्ल्ंिग…’’ मारिया बात को टालने की कोशिश करती रही.’’

‘‘नहीं, वह भी यही बात थी. सिर्फ सोच का फर्क है. हमारी परंपराएं इसीलिए तुम से अलग हैं. संयुक्त परिवारों की परंपराएं और एकदूसरे की भावनाओं का आदर करना ही हमारी सब से बड़ी धरोहर है.’’

‘‘देखो राहुल, तुम जानते हो कि यह सब मुझे बरदाश्त नहीं है. एक बार फिर सोच लो कि रविवार तक यहां आ रहे हो या नहीं.’’

‘‘मैं नहीं आ रहा हूं,’’ मैं ने स्पष्ट कहा.

‘‘फिर इस ढंग से तो यह रिश्ता नहीं निभ सकता. मुझे अब तुम्हारी जरूरत नहीं है,’’ मारिया तेज स्वर में बोली.

‘‘मैं भी यही सोच रहा हूं मारिया कि जो लड़की परिवार में घुलमिल नहीं सकती, मुझे भी उस की जरूरत नहीं है. मैं उन में से नहीं हूं कि विदेशी नागरिकता लेने के लिए अपनी आजादी खो दूं. अच्छा है मेरी तुम से शादी नहीं हुई.’’

मुझे आज लग रहा है कि उस से अलग हो कर मैं ने कोई गलती नहीं की है. मांबाबूजी की आंखों में मैं ने अजीब सी चमक देखी है. अपनी कंपनी से मैं ने अपने देश में ही ट्रांसफर करा

लिया है.

मरीचिका

लेखक- मधुप चौधरी

अंतिम भाग

पूर्व कथा

इस बीच विवेक की पुरानी फाइल में सीमा को एक लड़की की तस्वीर और कुछ चिट्ठियां हाथ लगती हैं जिन में ‘मेरे प्यारे पतिदेव’ के संबोधन के साथ उस लड़की ने विवेक को प्रेम संबंधी बातें लिखी थीं. मौका देखते ही इस बात को ले कर सीमा विवेक से झगड़ती है. और गुस्से में हाथ की नस भी काट लेती है. फिलहाल इलाज करवा कर ससुराल वाले घबरा कर उसे मायके भेज देते हैं.

मायके आ कर सीमा ननिहाल जा कर राहुल से मिलती है. लेकिन राहुल उसे यही एहसास दिलाता है कि अब वह एक

विवाहिता है.

सीमा ससुराल वापस आ जाती है लेकिन उसे अब भी विवेक पर भरोसा नहीं होता.  विवेक सीमा को समझाता है कि प्रतिमा से वह प्यार जरूर करता था लेकिन उस के साथ विवाह नहीं हुआ था क्योंकि पता चल गया था कि वह पहले से शादीशुदा है. अब आगे…

गतांक से आगे

विवेक ने फिर ठहर कर कहा, ‘‘मैं जानता था इस बारे में तुम्हें किसी भी सूत्र से जानकारी मिलेगी तो तुम्हें आघात पहुंचेगा और मुझे गलत समझने लगोगी. अच्छा हुआ, आज तुम ने मुझे बताने का मौका दे दिया. वह मेरा अतीत था सीमा, जिस से अब मेरा कोई वास्ता नहीं. मेरा वर्तमान तुम हो. मां, पापा, घर के सभी लोग तुम से प्यार करते हैं, यही चाहते हैं कि तुम भी इस घर को अपना घर समझो. यह तुम्हारा घर है.’’

मन के भीतर महीनों से छिपे गुबार को निकाल कर विवेक को बड़ा हलका महसूस हुआ. उसे लगा, सीमा के सामने अपना दिल खोल कर उस ने बहुत अच्छा किया. सीमा निर्णय और अनिर्णय के दोराहे पर खड़ी थी. इसी उधेड़बुन और अनिर्णय की स्थिति में ढाई साल का वक्त गुजर गया. इस बीच एक पुत्र को जन्म दे कर सीमा ने मातृत्व का सुख भी प्राप्त कर लिया.

विवेक के घरवालों ने सोचा, ‘मां बनने के बाद सीमा अब सहज हो जाएगी और बारबार मायके पहुंचा देने की जिद छोड़ कर इस घर को अपना समझने लगेगी.’

पर मां बनने के बावजूद सीमा अपनी सोच और स्थितियों में ठीक तालमेल नहीं बैठा पा रही थी. तभी एक घटना घट गई. उस वक्त विवेक की मां घर पर नहीं थी, किसी पड़ोसिन के घर गई थी. समर नारायण और विवेक दोनों अपने काम पर निकले हुए थे. समीर भी घर पर नहीं था. छोटी बहन रजनी की शादी हो चुकी थी और वह अपने ससुराल में रहने लगी थी. सीमा का बच्चा भी 6 महीने का हो चुका था. अब वह स्थिर नहीं रहता था. पलटनियां मारने लगा था. सीमा उसे पलंग पर सुला कर किसी काम से बाहर निकली तभी पलटनियां मारते हुए वह पलंग से नीचे गिर पड़ा. उस का सिर फट गया. चीख सुन कर पड़ोस से सास और बाहर से सीमा दौड़ी. बच्चा खून से लथपथ बेहोश हो गया था. देख कर सासबहू दोनों के होश उड़ गए. उसे अस्पताल ले जाना पड़ा. टांके पड़े. बच्चा बाद में होश में आ गया. घर लौटने पर विवेक को जब सारी बात का पता चला तो वह होश खो बैठा.

पहली बार सीमा पर वह

क्रुद्ध शेर की

तरह दहाड़ा, ‘‘तुम्हें बारबार कहा है, कहीं जाओ तो उस के तीनों तरफ तकिया लगा दो. आज उसे कुछ हो जाता तो…’’

‘‘आप को क्या, मेरा बच्चा है, मैं समझती,’’ सीमा ने पलट कर जवाब दिया. ‘‘तुम्हारा बच्चा, तुम क्या अपने बाप के यहां से ले कर आई हो इसे?’’

‘‘आप बारबार मेरे बाप का नाम मत लिया कीजिए…’’

बच्चे की हालत पर विवेक का दिमाग गरम था. सीमा के जबान लड़ाने से उस का पारा और भी चढ़ गया. क्रोध में अनजाने ही हाथ उठ गया और उस ने  सीमा के गाल पर कस कर तमाचा जड़ दिया.

सीमा हतप्रभ रह गई. विवेक ऐसी हिम्मत कर सकता है, यह उम्मीद नहीं थी उसे. वह कु्रद्ध नागिन सी फुंकारती विवेक से उलझ गई. उस ने विवेक की शर्ट फाड़ डाली. बनियान नोच डाली. शरीर पर कई जगह खरोंचें डालीं. विवेक अपना बचाव करता रहा. उसे पश्चात्ताप हो रहा था कि उस ने नाहक सीमा पर हाथ उठाया. बच्चे की दशा देख क्रोध में आपा खो बैठा. सीमा के शांत होने पर उस ने माफी मांग लेने की सोची. मां और छोटे भाई समीर ने बीचबचाव कर विवेक को वहां से हट जाने के लिए कहा.

दूसरे दिन विवेक और समर नारायण अपनेअपने काम पर चले गए. समीर भी दोस्तों के साथ निकल गया.

सीमा को अटैची में कपड़े रखते देख विवेक की मां ने सशंकित स्वर में पूछा, ‘‘क्या कर रही हो बहू?’’

सीमा ने जलती आंखों से सास को देखा. कोई जवाब नहीं दिया. अपना काम करती रही.

इस के बाद बच्चे को गोद में ले कर अटैची उठा कर चलने लगी तो सास ने टोका, ‘‘कहां जा रही हो, बहू?’’

‘‘कहीं भी जाऊं, आप को क्या?’’

‘‘बहुएं इस तरह घर से नहीं जाया करतीं, बेटी,’’ विवेक की मां ने दीनता से कहा, ‘‘कल विवेक ने गुस्से में तुम पर हाथ उठा दिया, पर इस का दुख उसे भी है. बच्चे की हालत देख वह आपे से बाहर हो गया था.’’

‘‘आप का बेटा मर्द है न, औरत को गुलाम और पांव की जूती समझने वाला. आप अपने जमाने में यह सब सहती और बरदाश्त करती होंगी, मैं नहीं सहने वाली.’’

विवेक की मां असहाय हो गिड़गिड़ाती रही. कोई आसपास था भी नहीं जिसे वह सीमा को रोकने के लिए कहती. सीमा उसे धकिया कर, गोद में बच्चा और हाथ में अटैची लिए निकली और बाहर जाते हुए एक रिक्शे पर बैठ कर चली गई. विवेक की मां धम्म से जमीन पर बैठ गई.

राहुल सुबह की दौड़ लगा कर अभी लौटा ही था. अपने घर के बंद दरवाजे के सामने गोद में बच्चा और हाथ में अटैची लिए सीमा को खड़े देखा तो अवाक् रह गया.

‘‘क्या बात है, सीमा, इतनी सुबहसुबह, ससुराल से आ रही हो?’’ उस ने पूछा.

‘‘हां, मैं वह घर हमेशा के लिए छोड़ कर तुम्हारे पास रहने के लिए आ गई हूं, राहुल.’’

राहुल संभल कर बोला, ‘‘तुम अभी अपनी नानी के घर जाओ, समय निकाल कर बातें करते हैं. चलो, मैं तुम्हें छोड़ आऊं,’’ सीमा को राहुल का जवाब कुछ अच्छा नहीं लगा. उसे ऐसे उत्तर की आशा नहीं थी.

अटैची उठाते हुए वह बोली, ‘‘नहीं, मैं चली जाऊंगी.’’

दोपहर बाद लगभग 3 बजे सीमा राहुल से मिली, मंदिर के पास वाले बगीचे में. उस की नजर राहुल के चेहरे पर टिकी हुई थी कि वह कुछ बोलेगा, जिस से उस की आगे की दिशा तय होगी. पर राहुल किसी सोच में डूबा हुआ था. नजरें झुकी हुई थीं. चेहरे पर उत्साह के बजाय गहरी चिंता की रेखाएं थीं.

सीमा ने ही टोका, ‘‘तुम ने कुछ बताया नहीं, राहुल, क्या तय किया?’’

‘‘कैसे बताऊं सीमा, जिंदगी के गंभीर निर्णय क्या इतनी आसानी से लिए जा सकते हैं, जिस तरह तुम लेती हो,’’ राहुल के स्वर में झुंझलाहट थी, ‘‘कुंआरेपन की बात अलग थी. अब तुम शादीशुदा हो, किसी की पत्नी हो, किसी परिवार की बहू हो, और अब एक बच्चे की मां भी हो. अगर मैं तुम्हें अपनाऊं तो दुनिया क्या कहेगी? मेरे मातापिता कभी इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करेंगे. समाज हम पर थूकेगा.’’

राहुल की बातें सुन कर सीमा सन्न रह गई. उस ने अविश्वास से राहुल के चेहरे की ओर देखा.

‘‘भावना और यथार्थ में फर्क होता है. किसी की भागी हुई पत्नी के साथ शादी कर लूं्. मेरी आत्मा इस की गवाही नहीं देती. आखिर मेरे मांबाप हैं, समाज है. हमारा समाज अभी इतना उन्नत नहीं हुआ कि हम अमेरिका की नकल करने लगें. तुम्हें सुनने में बुरा लगेगा, सीमा, पर मैं मन की बात कह ही दूं.’’ राहुल ने बगैर रुके कहना जारी रखा, ‘‘जब अग्नि के 7 फेरे ले कर 7 वचन निभाने की कसमें खाने के बावजूद तुम ने अपने मातापिता, समाज, पति और उस के परिवार के विश्वास के साथ घात किया तो तुम पर कैसे यकीन किया जा सकता है कि तुम मेरे साथ भी वैसा ही विश्वासघात नहीं करोगी?’’

‘‘राहुल,’’ सीमा तिलमिला उठी, ‘‘क्यों झूठ बोल रहे हो. मैं तुम्हारे प्यार की खातिर…’’

सीमा की बात राहुल ने बीच में ही काट दी, ‘‘झूठ मैं नहीं तुम बोल रही हो, सीमा. मेरे प्यार की खातिर नहीं, अपनी जिद, अहंकार और बदमिजाजी के कारण तुम वह घर छोड़ कर आई हो. मेरे प्यार का तुम्हें इतना ही खयाल होता तो लग्न मंडप में विवेक के गले में वरमाला नहीं डालतीं, मुझ से शादी की आवाज उठातीं. तुम समझती हो मैं तुम्हारी शादी में नहीं गया था. मैं गया था और तुम्हें विवेक को वरण करते देख लौट आया था.’’

सीमा टूट गई. पहली बार उस ने स्वयं को इतना असहाय महसूस किया. प्रयत्न कर के भी वह अपने आंसुओं को रोक नहीं सकी.

‘‘मैं चलता हूं,’’ कह कर राहुल उठ खड़ा हुआ और सीमा को सुबकता छोड़ चला गया.

थोड़ी देर में सीमा की आंखों के आंसू सूख गए. आंचल से चेहरे को पोंछती हुई वह उठी, फिर थकेहारे मन और निष्प्राण से शरीर से पांव जिधर उठे, चल पड़ी.

सीमा अपने नाना के घर के सामने पहुंची तो शाम होने को थी. दिन भर की तीखी धूप वाले सूर्य का ताप ठंडा पड़ चुका था. क्षितिज पर गोधूलि की लालिमा फैलने से वातावरण सुहावना लगने लगा था.

नानी ने उसे देखते ही कहा, ‘‘कहां चली गई थी तू. हमें कितनी चिंता हुई. बच्चा कब से भूख से रो रहा है.’’

अचानक सीमा की प्राणशक्ति जैसे लौट आई. वह घर के भीतर दौड़ी. देख कर अवाक् रह गई. विवेक आया हुआ था. बच्चा उसी की गोद में था. शायद भूख के मारे रोतेरोते थक कर सो गया था. विवेक को देख कर सीमा के पैर ठिठक गए.

‘‘मैं तुम्हें लेने आया हूं, सीमा. मां और पापा ने तुम्हें साथ ही लेते आने को कहा है,’’ सीमा को देखते ही विवेक ने कहा.

सीमा से कुछ कहते नहीं बन पड़ा, वह चुप रही.

विवेक ने कहा, ‘‘मेरी गलती थी, जो मैं ने तुम पर हाथ उठाया.’’

‘‘घर से पैर बाहर निकाल कर मैं ने भी गलती की,’’ सीमा बुदबुदाई.

‘‘जो हो गया उसे भूल जाओ, सीमा,’’ विवेक बोला, ‘‘गलती आदमी से ही होती है और गलतियों पर पश्चात्ताप कर के आदमी ऊपर उठता है, महान बनता है.’’

‘‘मुझे मालूम है, अभी तुम कहां से आ रही हो,’’ सीमा की आंखों में बेचैनी को भांप कर विवेक ने फिर कहा, ‘‘घबराओ मत, राहुल के बारे में हमें शादी के पहले से पता है. मां और पापा को भी. पर राहुल तुम्हारा अतीत है, जैसे प्रतिमा मेरा. अतीत की यादें तो ठीक हैं पर उन की चाहत की मरीचिका में जिया नहीं जा सकता.’’

तभी बच्चे ने सूसू कर दिया. वह गीलेपन के कारण रोने लगा. सीमा दौड़ कर विवेक के पास पहुंची. बच्चे को उस के हाथ से ले कर उस की गीली पैंट उतारी. फिर गोद में ले कर उसे दूध पिलाने लगी.      द्य

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