अजय अभी भी अपनी बात पर अडिग थे, ‘‘नहीं शोभा, नहीं... जब बेटी के पास हमारे लिए एक दिन का भी समय नहीं है तब यहां रुकना व्यर्थ है. मैं क्यों अपनी कीमती छुट्टियां यहां रह कर बरबाद करूं...और फिर रह तो लिए महीना भर.’’

‘‘पर...’’ शोभा अभी भी असमंजस में ही थीं.

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