एक्टर मनोज बाजपेयी लेकर आ रहे हैं भोजपुरी रैप सौंग, इंस्टाग्राम पर शेयर किया टीजर

भारतीय सिने जगत के जाने माने एक्टर मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने अपने फैंस के दिलों में अपनी अलग ही छाप छोडी है. एक्टर मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) सिनेमा के परफेक्ट एक्टर्स में से एक हैं और उन्हें कोई भी रोल दिया जाए वे उस रोल को इतनी शिद्दत से निभाते हैं कि उस रोल में जान डाल देते हैं. एक्टर मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने हिंदी फिल्मों सहित कई अन्य भाषाओं की भी फिल्में की है जैसे कि तमिल, तेलुगु, आदी.

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एक्टर मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और एक्टिव रहने के साथ साथ वे अपने से जुड़ी हर लेटेस्ट अप्डेट फैंस को देते रहते हैं. ऐसे में मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने एक लेटेस्ट अप्डेट फैंस को दिया है जिससे कि उनके फैंस के दिल खुश हो गए हैं. मनोज बाजपेयी जल्द ही एक भोजपुरी रैप गाना (Bhojpuri Rap Song) लेकर आ रहे हैं जिसका नाम है ‘बम्बई में का बा’ (Bambai Mein Ka Ba).

इस भोजपुरी रैप गाने को खुद मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने अपनी आवाज दी है और इस वीडियो के डायरेक्टर हैं अनुभव सिन्हा. एक्टर मनोज बाजपेयी ने अपने इस भोजपुरी रैप गाने का टीजर अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है जिसके कैप्शन में उन्होनें लिखा है,- “BREAKING !!! Bringing you a BHOJPURI RAP on the plight of the migrants!! Recited and sung a little bit by yours truly. Song by Sagar concept and video by our friend @anubhavsinha आ गईल अपने के दुआरे!!! Teaser है गाना जल्द ही आएगा.”

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इसी के साथ ही मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने इस भोजपुरी रैप सौंग का पोस्टर भी शेयर किया है जिसमें मनोज बाजपेयी काफी अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं. इस पोस्टर के कैप्शन में उन्होनें लिखा है, “Coming soon to make you dance on its beat.”

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Bigg Boss 14 के मेकर्स ने रिलीज किया नया प्रोमो, फैंस की बढ़ी एक्साइटमेंट

पिछले कुछ दिनों से बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) के लिए फैंस के दिलों में काफी एक्साइटमेंट देखने को मिल रही है और तो और कुछ नाम ऐसे सामने आ रहे हैं जो इस बार बिग बॉस के घर में एंट्री ले सकते हैं. बात करें बिग बॉस के बीते सीजन यानी की सीजन 13 (Bigg Boss 13) की तो वह सीजन बिग बॉस के इतिहास का सबसे सफल सीजन रहा था तो ऐसे में फैंस के दिलों में बिग बॉस के अगले सीजन के लिए और भी ज्यादा उम्मीदें जाग गई थीं.

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फैंस की एक्साइटमेंट का पूरा पूरा ध्यान रखते हुए बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के मेकर्स हर वो मुमकिन कोशिश कर रहे हैं जिससे कि वे आने वाला सीजन इंट्रस्टिंग बना सकें. खबरों की माने तो बिग बॉस सीजन 14 अक्टूबर महीने की 4 तारीख से ऑन एयर हो रहा है तो जैसे जैसे दिन करीब आ रहे हैं वैसे वैसे फैंस की एक्टाइटमेंट भी बढ़ती जा रही है कि आखिर कौन कौन से कंटेस्टेंट्स इस बार शो नें दिखाई देंगे.

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हाल ही में कलर्स टीवी (Colors TV) के औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर बिग बॉस के मेकर्स ने सीजन 14 के धमाकेदार प्रोमो शेयर किया है. यह प्रोमो भी बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के पिछले प्रोमो की तरह ही है. शायद मेकर्स ने ये प्रोमो एक बार फिर इसलिए रिलीज किया है ताकी वे दर्शकों को याद दिला सकें कि बिग बॉस सीजन 14 बहुत ही जल्द उन्हें एंटरटेन करने आ रहा है.

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अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या बिग बॉस का सीजन 14 दर्शकों की उम्मीदों पर खड़ा उतर पाएगा और सीजन 13 के मुकाबले सफल रह पाएगा.

इश्क की फरियाद: भाग 1

लेखक- अलंकृत कश्यप

25 अप्रैल, 2019 को कोराना गांव के लोगों ने बाकनाला पुल के नीचे एक युवक का शव पड़ा देखा.

कोराना गांव लखनऊ के थाना मोहनलालगंज के अंतर्गत आता है, जो  लखनऊ मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर है. ग्रामीणों ने जब नजदीक जा कर देखा तो उन्होंने मृतक को पहचान लिया.

वह 45 वर्षीय आशाराम रावत का शव था, जो डलोना गांव का रहने वाला था. वह मोहनलालगंज में राजकुमार का टैंपो किराए पर चलाता था. उसी समय किसी ने इस की सूचना थाना मोनहलालगंज पुलिस को दे दी तो कुछ ही देर में थानाप्रभारी गऊदीन शुक्ल एसआई अनिल कुमार और हैडकांस्टेबल राजकुमार व लाखन सिंह को साथ ले कर घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.

पुलिस दल जब घटनास्थल पर पहुंचा तो उन्होंने शव देखते ही पहचान लिया क्योंकि वह टैंपो चालक आशाराम रावत का था. उस के हाथपैर लाल रंग के अंगौछे से बंधे थे और गला कटा हुआ था. उस के रोजाना मोहनलालगंज क्षेत्र में सवारी टैंपो चलाने के कारण पुलिस वाले भी उस से परिचित थे.

वहां से एक किलोमीटर दूरी पर स्थित अवस्थी फार्महाउस के पास एक टैंपो लावारिस हालत में मिला. टैंपो की तलाशी लेने पर जो कागज बरामद हुए, उस से पता चला कि वह टैंपो इंद्रजीत खेड़ा के रहने वाले राजकुमार का है. लोगों ने बताया कि यह वही टैंपो है, जिसे आशाराम चलाता था.

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यह हत्या का मामला था. यह भी लग रहा था कि आशाराम की हत्या किसी अन्य स्थान पर कर के उस का शव यहां फेंका गया था. क्योंकि वहां पर खून भी नहीं था.

पुलिस ने मृतक के घर सूचना भिजवाई तो उस की पत्नी रामदुलारी उर्फ निरूपमा रोतीबिलखती मौके पर आ गई. उस ने उस की पहचान अपने पति आशाराम रावत के रूप में की. वह रोजाना की तरह कल सुबह करीब 8 बजे टैंपो ले कर घर से निकले थे.

देर रात तक जब वह घर न लौटे तो बड़े बेटे 16 वर्षीय सौरभ ने उन्हें फोन लगाया तो आशाराम ने कुछ देर बाद लौटने को कहा था. काफी देर बाद भी जब वह घर नहीं आया तो निरूपमा ने भी पति को फोन कर के जानना चाहा कि वह कहां हैं. किंतु फोन बंद होने के कारण बात नहीं हो सकी. तब रात में ही मोहनलालगंज और निकटतम पीजीआई थाने जा कर निरूपमा ने पति के बारे में मालूमात की लेकिन कुछ पता न चलने पर वह निराश हो कर घर लौट आई थी.

लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. निरूपमा की तरफ से पुलिस ने गांव के दबंग मोहित साहू, उस के भाई अंजनी साहू, दोस्त अतुल रैदास निवासी जिला कटनी, मध्य प्रदेश और अब्दुल हसन निवासी सीतापुर के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 506 और 3(2)(5) एससी/एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली.

मामला एससी/एसटी उत्पीड़न का था, इसलिए इस की जांच एसपी द्वारा सीओ राजकुमार शुक्ला को सौंपी गई. रिपोर्ट नामजद थी इसलिए पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर दबिश डाली. लेकिन वे पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े. तब पुलिस ने मुखबिरों को सतर्क कर दिया.

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आरोपी लिए हिरासत में

पुलिस ने आरोपियों के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा कर उस का अध्ययन किया तो उस से उन सब के 24 अप्रैल की रात के एक साथ होने की पुष्टि मिली. इसी बीच 26 अप्रैल को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर मोहित साहू और उस के भाई अंजनी साहू को गिरफ्तार कर लिया.

दोनों भाइयों से आशाराम रावत की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने उस की हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया. पूछताछ के बाद हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

लखनऊ-रायबरेली राजमार्ग पर शहर की व्यस्ततम कालोनी के बाहर लखनऊ एवं उन्नाव की सीमा पर थाना पीजीआई है. इसी थाने के अंतर्गत गांव डलोना है. इसी गांव में आशाराम रावत का परिवार रहता है. आशाराम का विवाह करीब 9 साल पहले डलोना गांव के ही प्रीतमलाल की सब से बड़ी बेटी रामदुलारी उर्फ निरूपमा के साथ सामाजिक रीतिरिवाज के साथ हुआ था.

रामदुलारी का जीवन ससुराल में हंसीखुशी के साथ अपने पति के साथ बीत रहा था. धीरेधीरे वह 2 बेटों और एक बेटी की मां बन गई. इस समय बड़े बेटे सौरभ की उम्र लगभग 16 साल है. हालांकि आशाराम मूलरूप से लखनऊ के थाना गोसाईगंज के गांव कमालपुर का रहने वाला था, किंतु कामधंधे की तलाश में वह डलोना आ कर रहने लगा. यहां वह टैंपो चलाने लगा.

निरूपमा गोरे रंग की स्लिम शरीर वाली युवती थी. उस के चेहरे पर आकर्षण था. आशाराम टैंपो चालक होने के कारण व्यस्त रहता था. इसलिए घर के सारे काम वह ही करती थी, जिस की वजह से उसे घर से बाहर आनाजाना पड़ता था. तब गांव के कुछ लड़कों की नजरें निरूपमा को चुभती हुई महसूस होती थीं. लेकिन वह उन की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देती थी.

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निरूपमा के पीछे पड़ गया था मोहित

उन्हीं लड़कों में से एक मोहित साहू तो जैसे उस के पीछे पड़ गया था. मोहित की दूध डेयरी थी. दूध देने के बहाने वह निरूपमा के पास जाया करता था. इस से पहले निरूपमा ने उस की डेयरी पर करीब डेढ़ साल तक काम भी किया था. उसी दौरान वह निरूपमा के प्रति आकर्षित हो गया था. वह उसे मन ही मन प्यार करने लगा था. फिर एक दिन उस ने अपने मन की बात निरूपमा से कह भी दी.

निरूपमा ने उसे झिड़कते हुए कहा कि तुम ने मुझे समझ क्या रखा है. आइंदा मेरे रास्ते में आने की कोशिश मत करना वरना अंजाम बुरा होगा. निरूपमा की इस बेरुखी पर वह काफी आहत हुआ. लेकिन इस के बावजूद मोहित ने उस का पीछा करना नहीं छोड़ा. उसे देख कर निरूपमा आगबबूला हो उठती थी.

अकसर मोहित के द्वारा फब्तियां कसने पर निरूपमा ने कई बार उस की पिटाई कर दी थी किंतु इश्क में अंधे मोहित पर इस का कोई असर नहीं हुआ.

निरूपमा उस से तंग आ चुकी थी. एक दिन उस ने अपने पति आशाराम को मोहित की हरकतों से अवगत कराया तो आशाराम ने निरूपमा को ही चुप रहने की सलाह दी. उस ने कहा कि वह आतेजाते मोहित को समझा देगा कि गांवघर की बहूबेटियों की इज्जत पर इस तरह कीचड़ उछालना अच्छा नहीं है.

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एक दिन आशाराम ने मोहित से बात की और अपनी इज्जत की दुहाई देते हुए कहा कि आइंदा वह ऐसा न करे.

कुछ दिन तक तो मोहित शांत रहा किंतु वह अपनी आदतों से मजबूर था. उस का बस एक ही मकसद था कि किसी भी तरह निरूपमा को पाना. कामधंधा छोड़ कर वह दीवानगी में इधरउधर निरूपमा की तलाश में लगा रहता. अंतत: उस ने एक भयानक निर्णय ले लिया.

कहानी सौजन्य – मनोहर कहानियां

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में

इश्क की फरियाद: भाग 2

पहला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- इश्क की फरियाद: भाग 1

लेखक- अलंकृत कश्यप

मोहित ने फांदी दीवार

गरमी की वजह से उस की आंखों से नींद कोसों दूर थी और बेचैनी से वह इधरउधर करवटें बदल रही थी. तभी अचानक घर में किसी के कूदने की आहट सुनाई दी. धीरेधीरे वह काला साया उस की ओर बढ़ने लगा तो निरूपमा ने पहचानने की कोशिश करते हुए पूछा, ‘‘कौन?’’

निरूपमा की आवाज सुन कर काला साया कुछ क्षणों के लिए ठिठक गया. उस की खामोशी देख कर निरूपमा का माथा ठनका. उस ने सोचा कि यह मोहित ही होगा. उस ने पास आ कर देखा तो वह मोहित ही निकला.

उस रात मोहित काफी देर तक निरूपमा से मिन्नतें करता रहा कि वह एक बार उस की बात मान ले. किंतु निरूपमा ने उसे बुरी तरह डपट दिया. शोरशराबे से उस का पति आशाराम भी जाग गया. आशाराम ने भी मोहित को डांट दिया. उस दिन मोहित को अत्यधिक विरोध सहना पड़ा, जिस से वह अपमानित हो कर तिलमिला कर रह गया.

मोहित अपनी बेइज्जती पर भलाबुरा कहता हुआ उलटे पैरों वापस लौट गया. लेकिन मोहित ने तय कर लिया था कि वह इस अपमान का बदला जरूर लेगा.

अगले दिन शाम के समय उस ने अपने भाई अंजनी, दोस्त अतुल रैदास और अब्दुल हसन को सारी बात बताई और कहा कि वह आशाराम को रास्ते से हटाना चाहता है. भाई और दोनों दोस्तों ने घटना को अंजाम देने के लिए उस का साथ देने की हामी भर दी.

इश्क के जुनून में अंधे मोहित ने निरूपमा का प्यार पाने के लिए अब कुचक्र रचना शुरू कर दिया. 24 अप्रैल, 2019 को शाम के वक्त आशाराम घर डलोना जाने वाली सवारियों का इंतजार कर रहा था. उसी समय मोहित अपने भाई अंजनी के साथ उस के टैंपो में आ कर बैठ गया. तभी मोहित ने ड्राइविंग सीट पर बैठे आशाराम से पीछे वाली सीट पर आ कर बैठने को कहा.

आशाराम मोहित साहू के पास बैठ कर बोला, ‘‘जरा सवारी ढूंढ लूं. तब तक तुम लोग बैठो, मैं अभी आता हूं.’’

‘‘नहीं यार, आज गाड़ी में कोई और नहीं चलेगा, हम तीनों ही चलेंगे. लो, पहले यह जाम पियो.’’ मोहित ने उस की तरफ शराब से भरा डिस्पोजेबल ग्लास बढ़ाते हुए कहा.

‘‘नहीं, मैं दिन में शराब नहीं पीता हूं, सवारियों को ऐतराज होता है.’’ आशाराम टैंपो की पिछली सीट से उतरते हुए बोला.

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‘‘नहीं, तुम्हें आज मेरे साथ बैठ कर तो पीनी ही पड़ेगी.’’ मोहित ने जोर देते हुए कहा.

साजिशन पिलाई शराब

कोई बखेड़ा खड़ा न हो जाए, यही सोच कर वह फिर से पिछली सीट पर आ कर बैठ गया. पिछले दिनों हुई कहासुनी को नजरअंदाज करते हुए मोहित के हाथ से गिलास ले कर एक ही सांस में वह शराब पी गया.

इस के बाद मोहित ने उसे 2 पेग और पिलाए. मोहित आशाराम को देख कर भौचक्का रह गया. फिर उस ने अंजनी को पैसे देते हुए कहा, ‘‘ले भाई, अंगरेजी की एक बोतल और ले आओ. अब हम लोग अतुल रैदास के कमरे पर चलेंगे, फिर वहीं बैठ कर पीएंगे.’’

अंजनी थोड़ी देर में दारू की बोतल ले आया. तब मोहित ने आशाराम से कहा, ‘‘अब तुम हम लोगों को अतुल रैदास के यहां छोड़ आओ, फिर अपने घर को चले जाना.’’

आशाराम उन से विवाद मोल नहीं लेना चाहता था. यही सोच कर वह उन दोनों के साथ गांव की ओर रवाना हो गया.

उस समय शाम के लगभग 7 बज चुके थे. जब वह घर नहीं पहुंचा तो उस के बडे़ बेटे सौरभ ने काल की. उस समय आशाराम ने उस से कहा था कि वह थोड़ी देर में घर आ जाएगा.

मोहित और उस के भाई अंजनी को अतुल रैदास के कमरे पर पहुंचाने के बाद जब आशाराम घर लौटने लगा तो मोहित ने आशाराम को रोक लिया और कहा कि अब यहां हम लोग जम कर पिएंगे. आशाराम मना नहीं कर सका. उन्होंने आशाराम को जम कर शराब पिलाई. जब वह नशे में धुत हो गया तब मोहित, अंजनी और अतुल ने आशाराम के गमछे से हाथपैर बांधने के बाद उस का गला घोंट कर हत्या कर दी. इस के बाद उन्होंने चाकू से उस का गला रेत दिया. अब्दुल हसन भी वहां आ चुका था. अब्दुल हसन उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर का रहने वाला था. वहां रह कर मजदूरी करता था.

इन लोगों ने मिल कर आशाराम के शव को उसी के टैंपो में लाद कर कोराना गांव के पास बाकनाला पुल के नीचे जा कर फेंक दिया. तब तक काफी रात हो चुकी थी, जिस से लाश ठिकाने लगाते समय उन्हें किसी ने नहीं देखा. उस का टैंपो उन्होंने अवस्थी फार्महाउस के पास खड़ा कर दिया था, जो बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया था.

सुबह होने पर लोगों ने आशाराम की लाश देखी तो सूचना पुलिस को दी गई.

उन की निशानदेही पर पुलिस ने अतुल रैदास के कमरे से वह चाकू भी बरामद कर लिया, जिस से आशाराम का गला काटा गया था. मोहित साहू और अंजनी साहू से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

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इस के बाद पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई. इस के 3 दिन बाद ही अब्दुल हसन व अतुल रैदास को 30 अप्रैल, 2019 को गिरफ्तार कर लिया गया. इन्होंने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इन दोनों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने इन्हें भी जेल भेज दिया. कथा लिखने तक सभी हत्यारोपी जेल में बंद थे.

कहानी सौजन्य – मनोहर कहानियां

आई एम नाॅट ब्लाइंड : प्रेरणा दायक कथा

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माता: मदारी आर्ट्स

लेखक व निर्देशक: गोविंद मिश्रा

कलाकार: आनंद गुप्ता, शिखा इतकान, अमित घोष, विनय अम्बष्ठ,कृष्णा नंद तिवारी, गोपा सान्याल, उपासना वैष्णव व अन्य.

अवधिः एक घंटा 41 मिनट

ओटीटी प्लेटफार्मः एम एक्स प्लेअर

शारीरिक अपंगता के शिकार लोगों के साथ समाज दया का भाव रखता है. वह उनकी क्षमता को देखने का प्रयास ही नही करता. पर अब फिल्मकार गोविंद मिश्रा एक फिल्म ‘‘आई एम नाॅट ब्लाइंड’’ लेकर आए हैं, जो कि‘‘हमारी दिव्यांगता को नही हमारी क्षमता को देखिए’’का संदेश देने वाली प्रेरणा दायक फिल्म है.आंखों से दिव्यांग एक इंसान के सफल आई ए एस अफसर बनने की कहानी वाली यह फिल्म छह सितंबर से ओटीटी प्लेटफार्म‘‘एम एक्स प्लेअर’’पर देखी जा सकती है.

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यह फिल्म अमरीका के फिल्म फेस्टिवल ‘ग्रेट सिनेमा नाउ‘ में दूसरे नंबर पर थी. विश्व के कई फिल्म फेस्टिवल में इसे सराहा जा चुका है. अमरीका के एक फेस्टिवल निदेशक निक मिल्स ने इस फिल्म को अमेरिका में प्रदर्शन करने की बात की थी, पर इस फिल्म के निर्माता पहले इसे भारत में प्रदर्शन करना चाहते थे,जो कि अब ओटीटी प्लेटफार्म ‘एम एक्स प्लेअर’पर आयी है.

किसी इंसान का अंधापन उसकी क्षमता को नष्ट नहीं करता.बल्कि आंख से न देख पाने के बावजूद वह इंसान काफी प्रगति करता है. यह कटु सत्य है. हमारे देश में राजेश कुमार सिंह,अजय अरोड़ा,रवि प्रकाश गुप्ता और प्रांजली पाटिल सहित तकरीबन डेढ़ दर्जन दिव्यांग आई ए एस अफसर हैं,जो कि आॅंखांे से देख नहीं सकते, मगर आई ए एस अफसर के रूप में बेहतरीन काम कर रहे हैं.

कहानीः

यह एक सत्य कथा पर आधारित फिल्म है.इसकी कहानी शुरू होती है छत्तीसगढ़ के एक गाॅंव से,जहां एक विधवा अपने दो बेटों विमल कुमार(आनंद गुप्ता )  और पंकज के साथ रहती है.उसने अपने बेटों को अपनी तरफ से अच्छी शिक्षा दिलाने की कोशिश की. विमल कुमार जन्म से ही अंधे हैं, जिसकी वजह सेे 12वीं कक्षा के बाद उनकी शिक्षा बंद हो गयी, जबकि वह पढ़ लिखकर आई ए एस अफसर बनने का सपना देख रहे हैं. उधर पंकज अय्याश है और उसे अपना बड़ा भाई विमल फूटी आंख नहीं सुहाता.

एक दिन जब पंकज के बीमार मौसा को देखने दूसरे गांव के अस्पताल पंकज की मां जाती है,जबकि उस वक्त विमल कुमार एक मंदिर में भजन में शामिल होने गया होता है,तो पंकज उसे मंदिर से वापस लेने जाने की बजाय घर में ताला डालकर पूरी रात अपने दोस्त के साथ अय्याशी करने चला जाता है.विमल कुमार परेशान होकर सड़क किनारे रात गुजारते हैं. सुबह वहां से गुजर रही ‘शीतल फाउंडेशन’ की शीतल (शिखा इतकान) की नजर पडती है, तो वह पूरी कहानी जानकर विमल को लेकर अपने फांउडेशन में जाती है.

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जहां वह उसकी पढ़ाई आगे शुरू करवाती है. इस बीच शीतल को विमल कुमार से प्यार हो जाता है.मगर शीतल के पिता को यह बात पसंद नहीं आती. वह एक डाॅन को दो लाख रूपए देकर विमल कुमार को रास्ते से हटाने के लिए कहते हैं.डाॅन के कहने पर विमल कुमार आई ए एस का इंटरव्यू नहीं देना चाहता, मगर एक दूसरा इंसान उसे समझाता है और वह इंटरव्यू देता है.

जब शीतल को सच पता चलता है,तो वह अपने पिता से सवाल करती है- ‘‘अगर आपकी मर्जी के युवक से मैं शादी कर लूं, और शादी के बाद उसकी आंखें चली जाएं,तो क्या आप उसे छोड़ने के लिए कहेंगे?’ तब शीतल के पिता उसकी शादी विमल कुमार से करा देते हैं.विमल कुमार आई ए एस अफसर के रूप में अपने काम को अंजाम देना शुरू करते हैं,जनता उनके काम से खुश होती है.

लेखन व निर्देशनः

एक बेहतरीन प्रेरणा दायक सत्यकथा पर लेखक व निर्देशक गोविंद मिश्रा ने यथार्थ परक फिल्म बनाने का बीड़ा तो उठा लिया,मगर वह पटकथा पर मेहनत नही कर पाए.परिणामतः फिल्म धीमी गति से आगे बढ़ती है.इसके अलावा फिल्मकार ने एक आंखों से अंधे दिव्यांग के जीवन में आने वाली छोटी छोटी कठिनाइयों, उसने आई एस एस की पढ़ाई के दौरान किस तरह की मुसीबतें झेली, आदि पर ज्यादा रोशनी डालने की बजाय प्रेम कहानी को महत्व दिया,मगर वह रोमांस को भी ठीक से चित्रित नही कर पाए. शायद वह फिल्म को यथार्थ परक बनाने के चक्कर में सिनेमा की जरुरत के बीच तालमेल नही बैठा पाए.

फिल्म के कुछ संवाद अवष्य बेहतर बन पाए हैं..मसलन-‘‘‘हमारी दिव्यांगता को नही हमारी क्षमता को देखिए.’’ अथवा ‘‘मेहनत करके हार जाना अच्छी बात है,लेकिन विना मेहनत के हार नही माननी चाहिए.’’

फिल्म को बेहतरीन लोकेशन पर फिल्माया गया है.

कुछ कमियों के बावजूद यह फिल्म न सिर्फ प्रेरणा दायक है,बल्कि हर दिव्यांग के हौसले को भी बढ़ाती है.

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अभिनयः

आंखों से दिव्यांग विमल कुमार के किरदार में आनंद गुप्ता ने शानदार अभिनय किया है.आनंद गुप्ता ने निम्न मध्यमवर्गीय परिवार के आर्थिक संकट और अंध व्यक्तियों के लिए स्कूलों द्वारा अपनाए जाने वाले उपेक्षापूर्ण रवैए के चलते अपनी शिक्षा को जारी न रख पाने की बेबसी को अपने चेहरे के आव भाव से बेहतर तरीके से उकेरने में सफल रहे हैं.शीतल के किरदार में शिखा इतकान भी प्रभावित करती हैं. अन्य कलाकारों ने ठीक ठाक अभिनय किया है.

नक्कल-असल नक्सलवाद! का मकड़जाल

यह किसी से छुपी हुई बात नहीं की छत्तीसगढ़ नक्सलवाद का गढ़ माना जाता है. यहां का “बस्तर अंचल” नक्सलवाद का केंद्र बिंदु है, जहां से कई प्रदेशों में नक्सलवाद की गतिविधियां चलती रहती है. वहीं दूसरी तरफ नक्सलवाद की आड़ में नकली नक्सलवादी भी पैदा हो गए हैं जो लोगों को ब्लैकमेल करते हैं फिरौती मांगते हैं और ऐश की जिंदगी जीते हैं . छत्तीसगढ़ की आवाम तथा दो प्रकार के नक्सलवाद से पीड़ित है एक है असल जो बंदूक की नोक पर लोगों को मार रहा है और समानांतर सरकार चला रहा है. दूसरा नकली नक्सलवाद जो भय पैदा करके पैसे ऐंठ रहा है. छत्तीसगढ़ की

पखांजुर पुलिस को मछली व्यापारियों से फर्जी नक्सली बनकर फिरौती की रकम मांगने मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने 24 घंटे में ही 2 महिला, 2 नाबालिग सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया. ये सभी आरोपी पिव्ही गांव में मछली पालन करने वाले दो व्यापारी से फर्जी नक्सली बनकर पत्र में 5-5 लाख रुपए और 1-1 बोरी चावल मांगा गया था. साथ ही दोनों व्यापारियों को फोन कर धमकी भी दी थी.थाना प्रभारी  के मुताबिक इस घटना के मास्टर माइंड महिला वैजू ध्रुव और अपने प्रेमी जोगेन बिस्वास ने प्लानिंग किया और बाकी सहयोगी सदस्यों को एकत्रित कर वारतदात को अंजाम दिया है. पहले तो पत्र के माध्यम से दोनों व्यापारी  से फिरौती मांगी गई, फिर दोनों ही व्यापारी को फोन पर धमकी भी दी गयी. पुलिस ने शिकायत के बाद जांच शुरु की और मोबाइल नंबर ट्रेस कर सभी आरोपियों को लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार किया है. इनके खिलाफ धारा 384,507,120 के तहत कार्रवाई की गई है.

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घटना के मास्टर माइंड वैजू ध्रुव नक्सली हिंसा में सन् 2010 में भुसकी मोड़ पर पुलिस पार्टी पर किये गए फायरिंग में भी शामिल थी. उस घटना में पुलिस आरक्षक बिष्णु लारिया शहीद हो गए थे. उस घटना में नक्सली वैजू ध्रुव नामक नाबालिग महिला नक्सली को बड़गांव थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था.

भूपेश बघेल के समक्ष बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी है जिसने झीरम घाटी नक्सल वादी हत्याकांड में अपने बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं को खोया है तत्कालीन समय के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल बस्तर टाइगर कहे जाने वाले महेंद्र कर्मा एक समय के देश के बहुत चर्चित नेता विद्याचरण शुक्ल जैसे अनेक लोग झीरम कांड में खेत रहे ऐसे में कांग्रेस पार्टी आज जब सत्ता में है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष यह बड़ी चुनौती है कि किस तरह छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराएं और इस तरफ भूपेश बघेल सरकार निरंतर प्रयासरत दिखाई भी देती है हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को पत्र लिखकर पुणे मांग की है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को समूल नष्ट करने के लिए केंद्र गंभीरता के साथ राज्य सरकार का साथ दें छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अपनी गहरी जड़ें जमा चुका है उसे नष्ट करना आसान नहीं होगा मगर फिर भी अगर ईमानदारी से प्रयास किया जाए तो क्या नहीं हो सकता क्योंकि कांग्रेस ने नक्सलवाद का दंश रहा है अतः राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि भूपेश बघेल सरकार बड़ी गंभीरता से नक्सलवाद को खत्म करने में  लगी हुई है . इस हेतु छत्तीसगढ़ पुलिस जनता प्रयास करती हुई भी दिखाई दे रही है छत्तीसगढ़ में अब ऐसा कोई दिन नहीं होता जब कोई नक्सलवादी पुलिस के द्वारा मार न गिराया जाता हो या फिर आत्मसमर्पण न कर रहा हो.

इसी तरह पुलिस नक्सलवाद के खाल को पहन कर लोगों को ठगने वालों को भी जेल भेजने में लगी हुई है. जो एक सकारात्मक कदम कहा जा सकता है.

आपरेशन तेज, तेज और तेज

छत्तीसगढ़ में इन दिनों “नक्सलवाद” को खत्म करने के लिए पुलिस भी प्रयासरत दिखाई दे रही है. जी पुलिस के मुखिया डीएम अवस्थी की अध्यक्षता में  निरंतर बैठकर हो रही है यहां पुलिस मुख्यालय में नक्सल विरोधी अभियान तेज करने के लिए स्टेट लेवल कोऑर्डिनेशन कमेटी  बनाई गई है. बैठक में सुरक्षाबलों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और नक्सल विरोधी अभियान अधिक प्रभावी तरीके से चलाने पर चर्चा होती है  कमेटी की बैठक मे सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, आईबी के अधिकारी, बस्तर संभाग के आईजी और पुलिस अधीक्षक मौजूद रहते हैं.

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यही नही स्टेट कोऑर्डिनेशन कमेटी लेवल की बैठक  मे तय हुआ है कि बारिश के बाद आगामी तीन माह में नक्सलियों के विरूद्ध और अधिक तेजी से ऑपरेशन चलाया जाए.  नक्सल विरूद्ध अभियान की आगामी कार्य योजना  बनाई जा रही है. नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन तेज करने के लिए पुल-पुलियों का निर्माण तेजी से किया जाये.सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे कोर एरिया वाले स्थानों पर प्लानिंग करके नक्सलियों के विरूद्ध कार्रवाई को अमलीजामा पहनाया जा रहा है नक्सलियों के साथ उनके समर्थकों पर भी कड़ी कार्यवाही  छत्तीसगढ़ में अब दिखने लगी है. सरकार  ने सुरक्षाबलों के अधिकारियों को नक्सलियों की सप्लाई चेन तोड़ने के निर्देश दिये है. नक्सलियों तक पहुंचने वाले राशन, दवाई और हथियारों की सप्लाई चेन तोड़कर प्रभावी कार्यवाही  के नजारे अब दिखने लगे है.

Bigg Boss फैंस के लिए आई बुरी खबर, सीजन 14 के समय में हो सकती है कटौती

टेलिवीजन इंडस्ट्री का सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस (Bigg Boss) का हर सीजन इतना सुपरहिट रहता है कि फैंस को हर सीजन के अंत से ही अगले सीजन का इंतजार होने लगता है. बात करें अगर बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) की तो इस सीजन में हर एक कंटेस्टेंट ने अपनी अलग ही भूमिका निभाई थी और इस सीजन को बिग बॉस के इतिहास का सबसे सफल सीजन बनाया था. ऐसे में दर्शकों की उम्मीदें आने वाले सीजन के लिए और भी ज्यादा बढ़ गई हैं.

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बात करें बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) की तो मेकर्स अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि वे आने वाले सीजन को और भी ज्यादा इंट्रस्टिंग बना सकें. आपको बता दें कि कोरोना वायरस (Corona Virus) जैसी महामारी के चलते कंटेस्टेंट्स को पहले एक हफ्ते क्वारंटीन (Quarantine) में रखने के बाद यह शो 4 अक्टूबर से ऑन एयर किया जाने वाला है जिसमें कोरोना वायरस गाइडलाइंस का पूरा ध्यान रखा जाएगा.

जैसा कि हम सब जानते हैं कि बिग बॉस का एपिसोड एक घंटे तक चलता है और उस एक घंटे के लिए बिग बॉस के फैंस पूरा दिन इंतजार करते हैं. कई फैंस के बिग बॉस के एपिसोड्स रिपीट भी देखते रहते हैं तो बिग बॉस के फैंस के लिए एक बुरी खबर है. जी हां खबरों की माने तो अब से बिग बॉस का एपिसोड एक घंटे के बदले आधा घंटा ही दिखाया जाएगा.

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सूत्रों की माने तो यह बदलाब बॉलीवुड में हो रहे हंगामे की वजह से किया गया है. जैसा कि हम सब जानते हैं कि बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की आत्महत्या के बाद से काफी लोग भड़के हुए हैं तो ऐसे में बिग बॉस को बॉयकौट करने की भी बात हो रही थी तो ऐसा कहा जा सकता है कि इन सब को नजर रखते हुए बिग बॉस ने अपने समय में कटोती कर ली है.

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स्विमिंग पूल के अंदर हॉट अंदाज में नजर आईं सारा अली खाल, फैंस के धड़के दिल

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के साथ फिल्म ‘केदारनाथ’ (Kedarnath) से अपने फिल्मी करियर की शुरूआत करने वाली एक्ट्रेस सारा अली खान (Sara Ali Khan) इन दिनों काफी चर्चाओं में रहती हैं. कभी वे अपने रिलेशनशिप्स की वजह से तो कभी अपनी फोटोज की वजह से वे आए दिए सुर्खियां बटोरती दिखाई देती हैं. आपको बता दें कि सारा अली खान (Sara Ali Khan) बॉलीवुड इंडस्ट्री के नवाब सैफ अली खान (Saif Ali Khan) और उनकी पहली पत्नी अमृता सिंह (Amrita Singh) की बेटी हैं.

 

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Happy ☀️Day 🌻#sundaze #sundayfunday

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जैसा कि हम सब जानते हैं कि कोरोना वायरस (Corona Virus) जैसी महामारी के चलते सभी फिल्मों की शूटिंग रुकी हुई है और जो फिल्में बन कर तैय्यार हैं वे सभी सिनेमाघरों के खुलने का इंतजार कर रही हैं. ऐसे में सभी एक्टर/एक्ट्रेसेस अपने अपने घरों में बैठ कर चिल कर रहे हैं और अपनी लेटेस्ट फोटोज और वीडियोज के जरिए अपने अपने फैंस को एंटरटेन कर रहे हैं.

 

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Gulab in Gulabi on Gulabo 👄🌷🐙🦩

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ऐसे में एक्ट्रेस सारा अली खान (Sara Ali Khan) ने भी अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी कुछ फोटोज शेयर की है जिसमें वे स्विमिंग पूल में एंजौय करती नजर आ रही हैं. इन फोटोज नें सारा अली खान (Sara Ali Khan) ने पिंक कलर की बिकिनी पहनी हुई है और पूल के अंदर ट्यूब में बैठ कर किताब पढ़ रही हैं. इस फोटो के कैप्शन में सारा ने लिखा है कि, “Gulab in Gulabi on Gulabo”.

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Back to Blue 🌊💙🧿 📸: @orry1

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इससे पहले भी सारा अली खान (Sara Ali Khan) की एक फोटो ने खूब सर्खियां बटोरी थीं जिसमें उन्होनें ब्लू कलर की लिपस्टिक लगाई थी. सारा अली खान (Sara Ali Khan) की यह फोटो बहुत ही ज्यादा वायरल हुई थी. इस फोटो के कैप्शन में सारा अली खान ने लिखा था कि, “Back to Blue”. आपको बता दें कि आने वाले दिनों में सारा अली खान एक्टर वरुण धवन (Varun Dhawan) के साथ फिल्म ‘कुली नंबर वन’ (Coolie No. 1) में दिखाई देने वाली हैं इसके अलावा वे फिल्म ‘अतरंगी रे’ (Atrangi Re) में अक्षय कुमार (Akshay Kumar) के साथ नजर आएंगी.

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डस्ट : भाग 3- अपना मन हम कैसे साफ करेंगे

आज पेड़ काटे जा रहे हैं. पौधे नष्ट किए जा रहे हैं. जंगल उजाड़े जा रहे हैं. सड़कों का डामरीकरण, चौड़ीकरण हो रहा है. देश का विकास अंधाधुंध तरीके से हो रहा है. विकास के लिए नएनए कलकारखाने और कारखानों से इन की गंदगी नदियों में बड़ीबड़ी पाइपलाइनों के जरिए जा रही है. नीचे पानी प्रदूषित हो रहा है व ऊपर आसमान और बीच में फंसा बेवकूफ मनुष्य, बस, बातें कर रहा है प्रदूषण के बारे में, जहरीली वायु के बारे में. जंगल नष्ट किए जा रहे हैं उद्योगों के लिए. शहर के हर कोने में बोर मशीनें चल रही हैं जमीन से पानी निकालने के लिए.

वातावरण में डस्ट बढ़ती जा रही है. गरमी बढ़ती ही जा रही है. सब अपनीअपनी सुखसुविधाओं में डूबे हैं. प्रकृति असंतुलित हो रही है.

यही हाल मानवीय मूल्यों और रिश्तों का भी है. रिश्ते प्रदूषित हो रहे हैं. रमा के पिता ने कहा, ‘‘बेटी, बहुत रिश्ते आएंगे. तुम आर्थिकरूप से निर्भर हो. अच्छा वेतन है तुम्हारा. सुरक्षित भविष्य है. कितनी बेरोजगारी फैली है. एक नहीं कईर् आदमी मिलेंगे शादी के लिए.

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‘‘सुरक्षित भविष्य की चाह में कोई प्राइवेट जौब वाला, अस्थायी नौकरी वाला शादी के लिए तैयार हो जाएगा. प्रैक्टिकल बनो. मुझे तुम्हारे और कृष्णकांत के बारे में सब पता था लेकिन मैं ने तुम्हें कभी टोका नहीं. मैं जानता था अपनी जरूरतों के लिए तुम उस से जुड़ी हो. जो हुआ सो हुआ. लेकिन शादी अपनी जातिसमाज में ही करना उचित रहेगा.’’

कितना प्रदूषण है पिता की बातों में. रमा ने आश्चर्य से पिता की तरफ देखा. उसे पिता के चेहरे पर डस्ट जमी हुई दिखाई दी. फिर उस ने सोचा, ‘यह डस्ट तो सब के चेहरों पर है. बाजार में कितनी क्रीम, टोनर, साबुन, फेसवाश आ गए हैं डस्ट से बचने के लिए. इन फालतू की बातों में उलझ कर जीवन क्यों बरबाद करना. आगे बढ़ना ही जीवन है. उस ने डस्ट से भरा चेहरा साफ किया और नए जीवन की शुरुआत के लिए कोशिश शुरू कर दी.

कृष्णकांत के पिता रमाकांत क्लर्क थे. नौकरी के अंतिम बचे 2 वर्षों में अधिक से अधिक कमा लेना चाहते थे. लेकिन एक दिन रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़े गए. अधिकारी ने कहा, ‘‘मिलबांट कर खाना चाहिए. चोरी करने के लिए किस ने मना किया है? सरकारी नौकरी होती ही, कमाने के लिए है?

5 लाख रुपए का इंतजाम करो? इस मामले से तुम्हें निकालने की कोशिश करता हूं.’’

रमाकांत ने बेटे को सारी बात बता कर कहा, ‘‘बेटा, 2 लाख रुपए की मदद करो. 3 लाख रुपए का इंतजाम है मेरे पास.’’

कृष्णकांत ने कहा, ‘‘पिताजी, आप ने रिश्वत ली.’’

रमाकांत ने गुस्से में कहा, ‘‘मदद मांगी है, उपदेश नहीं. वेतन से मात्र घर चलता है, वह भी 20 दिनों तक. बेटी की शादी, मकान, ऐशोआराम की जिंदगी बिना रिश्वत लिए नहीं चलती. रिश्वत मैं ने कोई पहली बार नहीं ली. हमेशा से लेता आया हूं. सब लेते हैं. बस, पकड़ा पहली बार गया हूं. मदद करो कहीं से भी.’’

‘‘मैं कहां से करूं?’’ कृष्णकांत ने असहाय भाव से कहा.

‘‘रमा से मांग लो,’’ पिता की यह बात सुन कर कृष्णकांत सन्नाटे में आ गया. मतलब पिता को, घर में सब को मालूम था.

‘‘रमा को मैं ने छोड़ दिया है,’’ कृष्णकांत ने कहा.

‘‘बेवकूफ, दुधारू गाय को कोई छोड़ता है, भला. मन भर गया था तो किसी दूसरे के पास चला जाता या दूसरी ढूंढ़ता, तो कमाई वाली ढूंढ़ता. नहीं कर सकता तो मेरे कहने से शादी कर. 5 लाख रुपए दहेज दे रहे हैं लड़की वाले. जल्दी आ जा. चट मंगनी पट ब्याह करा देते हैं.’’

‘‘मैं एक जगह बात कर के देखता हूं.’’

‘‘जो करना है जल्दी करना.’’

‘‘जी.’’

कृष्णकांत ने फोन काट दिया. क्या पिता है? सब मालूम था और ऐसे बने रहे कि जैसे कुछ मालूम न हो. रिश्तों में लालच की कितनी डस्ट जमी हुई है. चारों तरफ प्रदूषण फैला हुआ है. पैसा ही सबकुछ हो गया. इंसानी रिश्ते, भावनाएं सब में डस्ट जम गईर् है. पैसों और जरूरतों के आगे सब कचरे का ढेर हो गया है. कचरे के ढेर में आग लगाओ और जहरीला धुआं वातावरण में फैलने लगता है. कृष्णकांत ने खुद क्या किया? वही जो रमा ने किया. लेकिन कृष्णकांत को पिता की यह बात ठीक लगी कि दुधारू गाय है. क्यों छोड़ दी? लेकिन पिता को क्या बताए? दुधारू गाय का भी दूध ज्यादा निकालो तो वह भी सींग मारने लगती है. पैर झटकने लगती है.

कृष्णकांत ने पूनम से बात की. पूनम ने अपने पिता सेठ महेशचंद्र से मिलवाया. शादी की बात की. साथ में 2 लाख रुपए मदद की भी बात रख दी.

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सेठ महेशचंद्र गुस्से में आ गए. उन्होंने कहा, ‘‘मैं दहेज के खिलाफ हूं. फिर तुम्हारी नौकरी कौन सी स्थायी है? न जाने कब छूट जाए?’’

फिर उन्होंने अपनी बेटी को समझाते हुए कहा, ‘‘अपनी बराबरी वालों से रिश्ता करना चाहिए. दोस्ती तक ठीक है. शादी के पहले 2 लाख रुपए मांग रहा है. बाद में 50 लाख रुपए मांग सकता है. शादी के लिए तुम्हें यही लड़का मिला था. मैं अपनी अमीर बिरादरी में क्या मुंह दिखाऊंगा लोगों को.

‘‘लोग क्या कहेंगे कि सेठ महेशचंद्र ने अपनी बेटी की शादी एक अस्थायी नौकरी वाले लड़के से कर दी. मैं तो तुम्हें होशियार समझता था, बेटी, लेकिन तुम भी प्रेम के नाम पर बेवकूफ बन गई. शादी अपने बराबर वाले से भविष्य की सुरक्षा व सुखों को ध्यान में रख कर की जाती है.’’

फिर उन्होंने कृष्णकांत से कहा, ‘‘एक फोन पर तुम्हारी नौकरी चली जाएगी. मेरी बेटी से दूर रहना.’’

सेठ ने अब बेटी से कहा, ‘‘अमेरिका जाने की तैयारी करो आगे की पढ़ाई के लिए. प्रेम जैसे वाहियात शब्द से दूर रहो.’’

बाद में पूनम ने कहा, ‘‘कृष्णकांत, मैं अपने पिता की बात नहीं ठुकरा सकती.’’

कृष्णकांत उदास हो कर घर आ गया. उस ने कहा, ‘‘पिताजी, मैं आप के कहे अनुसार शादी करने को तैयार हूं. पिता ने 5 लाख रुपए सगाई में ले कर रिश्ता पक्का कर दिया. वे रिश्वत लेते पकड़े गए, रिश्वत दे कर छूट गए.

कितने प्रकार के प्रदूषण हैं इस देश में. हैं तो पूरी धरती पर, लेकिन देश में ज्यादा है. वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, रिश्तों में प्रदूषण. नित नए कड़वे होते रिश्ते. विकास और सुरक्षित भविष्य के लिए सब अनदेखा कर रहे हैं. घर में गाड़ी, टीवी के लिए सब एकदूसरे को चूस रहे हैं. सेठ महेशचंद्र चोरी का माल खरीदतेबेचते करोड़पति बन गए. लेकिन कैसे बने, इस बात की उन्हें रत्तीभर परवा नहीं थी. बने और सेठ कहलाए, इस गर्व से भरे हुए थे वे. पूनम ने प्रेम तो किया था लेकिन सुरक्षित भविष्य के डर से वह कृष्णकांत से दूर हो गई.

रमा, कृष्णकांत, पूनम, रमाकांत, रमा के पिता, सेठ महेशचंद्र जैसे लोग भ्रष्ट व्यवस्था के हिस्से बने हुए हैं. उन के सारे शरीर पर भ्रष्टाचार की डस्ट जमी हुई है. चेहरा तो वे साफ कर लेते हैं, मन कैसे साफ करेंगे? यह शायद वे कभी सोचते भी नहीं होंगे. वाटर फिल्टर से पानी शुद्ध तो कर लेते हैं लेकिन उन नदियों का, जमीन के नीचे बोरि ंग मशीन लगा कर निकाले गए पानी का क्या? उन की शुद्धता के बारे में लोग क्यों नहीं सोचते.

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अब तो हवा शुद्ध करने के लिए एयर प्योरीफायर भी आ गया है. लेकिन जमीन, आसमान से ज्यादा दिमाग पर फैली हुई उस डस्ट का क्या, उस प्रदूषण का क्या? उसे साफ करने के लिए क्यों कुछ नहीं किया जाता? जब आदमी अंदर से बेईमान हो तो सारे प्रदूषण, सारे अधर्म, सारे पाप दूसरों के सिर पर मढ़ कर मुक्त हो जाता है. लेकिन इस दोषारोपण से क्या आप बच पाएंगे? आप की आने वाली नस्लों का क्या होगा? जिस दिन प्रकृति व रिश्ते हिसाब करेंगे, सिवा बरबादी के कुछ नहीं होगा.

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