प्यार की सूली पर लटकी अंजली : भाग 2

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

इधर अंजलि की सहकर्मी और सहेली खुशबू को भी पुलिस ने फोन कर के सिद्धार्थनगर बुला लिया था ताकि उस की मौत की गुत्थी जल्द से जल्द सुलझाई जा सके. थानाप्रभारी अंजनी राय ने अजय यादव, उन की बेटी मनोरमा से पूछताछ की.

अजय यादव ने कहा, ‘‘अंजलि बेहद खुशदिल और नेक किस्म की निडर लड़की थी. वह तो सपने में भी मौत को गले लगाने की बात नहीं सोच सकती थी. जरूर उस की हत्या की गई है. वह कई दिनों से परेशान सी थी. पूछने पर कुछ बताती भी नहीं थी.’’

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‘‘पापा सच कह रहे हैं,’’ बात काटती हुई मनोरमा बीच में बोली, ‘‘दीदी, वाकई कुछ दिनों से परेशान थीं.’’

‘‘किस बात को ले कर परेशान थीं?’’ थानाप्रभारी ने मनोरमा से सवाल किया.

‘‘मैं ने इस बारे में दीदी से बात की थी. वह कुछ बताने को तैयार ही नहीं थीं. बस इतना कह रही थीं कि घर आने पर सारी बातें बताऊंगी. इतना कहने के बाद वह रोने लगी थीं. घटना वाले दिन शाम 4 बजे दीदी से मेरी बात हुई थी. उस समय वह कुछ ज्यादा ही परेशान लग रही थीं और फोन पर रो भी रही थीं. उस के बाद तो…’’ कह कर मनोरमा रो पड़ी.

मुकदमा हुआ दर्ज

थानाप्रभारी ने उसे प्यार से चुप कराया. तब तक मृतका की सहेली खुशबू भी वहां आ गई. पुलिस ने उस से भी पूछताछ की. तीनों से पूछताछ करने के बाद थानाप्रभारी अंजनी राय ने अजय यादव की तरफ से अज्ञात के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया.

यह बात 22 मई, 2019 की है. मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस जांच में जुट गई. पुलिस ने अंजलि के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर अंजलि की अकसर लंबीलंबी बातें होती थीं.

जांच में वह नंबर अंजलि के साथ विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक राकेश कुमार यादव का निकला. दोनों के रिश्तों के बारे में जब पुलिस पड़ताल की गई तो चौंकाने वाले तथ्य खुल कर सामने आए. अंजलि यादव और राकेश कुमार यादव के बीच काफी समय से मधुर संबंध थे.

दोनों एकदूसरे से प्यार करते थे और जल्द ही शादी करने वाले थे. यह बात अंजलि के घर वाले, उस की सहेली खुशबू और विद्यालय के अन्य शिक्षक जानते थे. पुलिस ने जब यह बात मृतका के पिता अजय यादव को बताई तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें सारी बातें पता हैं.

उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि उन की बेटी की मौत में उसी शिक्षक का हाथ है, जिस से वह प्यार करती थी. उस से सख्ती से पूछताछ की जाए तो मामला सामने आ जाएगा. काल डिटेल्स और अन्य जांच के बाद यह मामला प्रेम में धोखा मिलने के रूप में सामने आया.

काल डिटेल्स और मृतका के पिता अजय कुमार यादव के बयान के आधार पर पुलिस ने शिक्षक राकेश कुमार यादव को 26 मई, 2019 को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया.

राकेश देवरिया के थाना कोतवाली सदर स्थित गांव चकरवाधुस पनसरही का मूल निवासी था और मोहाना में किराए का कमरा ले कर रहता था. ग्रीष्मकालीन अवकाश होने की वजह से वह अपने घर चला गया था.

पूछताछ में उस ने पुलिस के सामने यह बात तो कबूल कर ली कि वह और अंजलि एकदूसरे से प्यार करते थे लेकिन उस की मौत में मेरा कोई हाथ नहीं है. मुझे नहीं पता कि अंजलि ने किस वजह से मौत गले लगाई या उस की किस ने हत्या की. मैं निर्दोष हूं.

पुलिस ने राकेश की एक नहीं सुनी. चूंकि अजय यादव ने उस के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई थी, इसलिए पुलिस ने राकेश को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. चूंकि अध्यापक राकेश यादव खुद को निर्दोष बता रहा था, इसलिए यह मामला हत्या और आत्महत्या के बीच उलझ कर रह गया था.

पुलिस गुत्थी को सुलझाने में जुटी हुई थी. जब तक पुलिस गुत्थी को सुलझाने का प्रयास करती है, तब तक कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अंजलि की निजी जिंदगी की डायरी के पन्नों को पलटते हैं.

25 वर्षीय अंजलि यादव मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के थाना कठौद के हुसेपुरा सुरई की रहने वाली थी. उस के पिता अजय कुमार यादव किसान थे. उन के पास 8 बीघा जमीन थी.

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उन के परिवार में पत्नी सावित्री के अलावा 5 बेटियां मनीषा, बेबी, रूपाली, अंजलि और मनोरमा थीं. खेती के अलावा अजय की हुसेपुरा सुरई बाजार में दवाई की दुकान थी. इस तरह वह इतना कमा लेते थे, जिस से उन की गृहस्थी मजे से चल रही थी.

अंजलि अध्यापिका नहीं कुछ और बनना चाहती थी

बेहद समझदार और सुलझे अजय यादव ने कभी बेटा और बेटियों में फर्क महसूस नहीं किया था. वह भले ही गांव में रहते थे, लेकिन बच्चों को संस्कार देने में कभी पीछे नहीं हटे. बच्चों को सामाजिक मानमर्यादा का पाठ पढ़ाना तो जैसे उन की दैनिक क्रियाओं में शामिल था.

यही वजह थी कि उन की पांचों बेटियां बेहद संस्कारी और गुणी निकलीं. पांचों बेटियां पढ़ने में होशियार थीं, जिन में चौथे नंबर की बेटी अंजलि और बहनों से ज्यादा समझदार थी.

अंजलि का सपना बड़े हो कर कलेक्टर बनने का था यह सपना उस ने सिर्फ खुली आंखों से देखा ही नहीं था बल्कि वह उसे सच करने के लिए रातदिन कमरतोड़ मेहनत करती थी. उसी तैयारी के बीच उस की शिक्षा विभाग में नौकरी लग गई. उस ने यह नौकरी यह सोच कर जौइन कर ली कि यहां से मिलने वाली सैलरी से उस के और मातापिता के खर्च पूरे हो सकेंगे और वह समय मिलने पर प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी भी करती रहेगी.

सितंबर, 2017 में अंजलि की सिद्धार्थनगर के गौहनिया में पहली तैनाती हुई थी. चंचल और चुलबुली अंजलि ने थोड़े ही समय में विद्यालय के सभी शिक्षकों को अपना बना लिया था. उस का बच्चों को पढ़ाने का तरीका भी अलग था. वह बच्चों को हंसाते गुदगुदाते हुए पढ़ाती थी. उस की इस कलात्मक और अनोखी शैली से बच्चे जल्द ही अपना पढ़ाई का काम पूरा कर लेते थे.

बच्चे तो बच्चे, शिक्षक राकेश कुमार यादव भी अंजलि के खुशमिजाज का मुरीद था. अंजलि कब आंखों के रास्ते उस के दिल में उतर आई, उसे पता ही नहीं चला. जब पता चला तो अंजलि उस की कमजोरी बन चुकी थी. कहने का मतलब यह है कि राकेश अंजलि की खूबसूरती पर फिदा था और उस से प्यार करने लगा था.

यह बात अंजलि को पता नहीं थी कि कोई उस का दीवाना बना हुआ है, जो उस पर जान छिड़कता है. वैसे भी अंजलि ऐसीवैसी युवती नहीं थी जो सामाजिक दायरों को लांघे. उसे तो बस अपने काम से मतलब था.

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शिक्षक राकेश कुमार यादव अंजलि से उम्र में काफी बड़ा था और शादीशुदा भी. लेकिन खुद को उस ने कुंवारा बताया था. धीरेधीरे अंजलि को राकेश के चाहत भरे इरादों का पता चल गया. तब उस ने राकेश से साफसाफ कह दिया कि उसे प्यार जैसी बातों में अभी कोई दिलचस्पी नहीं है. वह उसी लड़के से शादी करेगी, जिस से उस के मांबाप करना चाहेंगे.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

लड़की : उलझ गई थी वीणा की जिंदगी

प्यार की सूली पर लटकी अंजली : भाग 1

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

25 वर्षीय अंजलि यादव 22 मई, 2019 को अपने कमरे में कुरसी पर अकेली बैठी गहन चिंतन में डूबी हुई थी. वह सिद्धार्थनगर जिले के मोहाना थाना स्थित गौहनिया बाजार में विजय कुमार के मकान में पहली मंजिल पर रहती थी. अंजलि और उस की सहकर्मी मित्र खुशबू सिद्धार्थनगर के कंचनपुर प्राइमरी पाठशाला में एक साथ पढ़ाती थीं. चूंकि उन दिनों विद्यालय में ग्रीष्मकालीन छुट्टियां हो गई थीं. इसलिए छुट्टियां होते ही खुशबू अपने घर चली गई थी. अंजलि भी अपने घर जाने की तैयारी में थी.

अंजलि उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कठौद थाना क्षेत्र के हुसेपुरा सुरई की रहने वाली थी. वह सिद्धार्थनगर में रह कर नौकरी करती थी. 22 दिसंबर, 2017 को उस की पहली तैनाती सिद्धार्थनगर जिले के गौहनिया प्राइमरी पाठशाला में हुई थी. सरकारी अध्यापिका बन कर अंजलि संतुष्ट नहीं थी. क्योंकि उस ने अपने जीवन के लिए इस से भी बड़ा लक्ष्य तय किया था. वह लक्ष्य था आईएएस अधिकारी बनने का. अपनी धुन की पक्की अंजलि विद्यालय से कमरे पर आने के बाद एग्जाम की तैयारी करती थी.

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बहरहाल, 22 मई को अंजलि अपने कमरे में अकेली थी. उसे अकेली देख कंपनी देने के लिए मकान मालिक की दोनों बेटियां रिया और सीमा उस के कमरे में आ गईं. वैसे भी जब वह अकेली होती थी, रिया और सीमा अकसर उसे कंपनी देने उस के पास आ जाया करती थीं. उस दिन भी दोनों बहनें उसे कंपनी देने कमरे में आई थीं.

बातोंबातों में कब 2-3 घंटे बीत गए, उन्हें पता ही नहीं चला. शाम साढ़े 3 बजे के करीब रिया और सीमा अपने कमरे में लौट आईं तो अंजलि फिर अकेली रह गई थी. एक घंटे बाद यानी शाम साढ़े 4 बजे के करीब अंजलि के कमरे से धुएं का तेज गुबार आसमान की ओर उठा तो उसे देख कर पासपड़ोस के लोग हैरान रह गए. कुछ ही देर में मौके पर सैकड़ों लोग जमा हो गए. अचानक घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटते देख रिया और सीमा हैरान रह गईं. वे यह नहीं समझ पा रही थीं कि अचानक इतने लोग उन के घर के बाहर क्यों जमा हुए हैं. लेकिन जल्दी ही दोनों हकीकत समझ गईं. क्योंकि बाहर खड़े लोग आगआग चिल्ला रहे थे. पड़ोस के 8-10 लोग पहली मंजिल पर अंजलि यादव के कमरे तक पहुंचे. उन के साथ रिया और सीमा भी थीं. लोगों ने देखा कि उस के कमरे के बाहर दरवाजे पर ताला लगा हुआ था. उन्होंने किसी तरह ताला तोड़ कर दरवाजा खोला.

कमरा खुलते ही भीतर का हृदयविदारक दृश्य देख कर सभी स्तब्ध रह गए. अंजलि की लाश पंखे से लटक रही थी. वह बुरी तरह जल चुकी थी. यह देख कर रिया और सीमा गश खा कर फर्श पर गिर गईं. उन्हें यह देख कर गहरा सदमा पहुंचा कि अभी थोड़ी देर पहले तीनों ने एक साथ बैठ कर घंटों बातें की थीं और अब ऐसे कैसा हो गया.

खैर, मौके पर ही भीड़ में से किसी ने 100 नंबर पर फोन कर के घटना की सूचना पुलिस कंट्रोलरूम को दे दी. चूंकि यह इलाका मोहाना थानाक्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोलरूम द्वारा यह सूचना मोहाना थाने को दे दी गई.

पुलिस भी कुछ नहीं समझ पाई

यह खबर मिलते ही थानाप्रभारी अंजनी राय पुलिस टीम के साथ गौहनिया बाजार स्थित मौके पर जा पहुंचे. क्राइम सीन देख कर थानाप्रभारी और अन्य लोग भौचक रह गए. बुरी तरह जली अंजलि की लाश पंखे से झूल रही थी. उस के गले में लोहे की तार और पैर में जंजीर बंधी हुई थी. जंजीर तख्त के पटरे के ऊपर बने सुराख में बंधी थी. तख्त से सटे कमरे में गैस सिलेंडर रखा था और किचन में लाल रंग के 2 बैग रखे थे.

थानाप्रभारी ने इस की जानकारी एसपी डा. धर्मवर सिंह और एएसपी मायाराम वर्मा को दे दी. सूचना पा कर दोनों अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए. उन्होंने भी घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया. थोड़ी देर बाद एफएसएल की टीम भी वहां आ गई. टीम ने वहां से सबूत जुटाए.

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जांच करने के दौरान हैरान करने वाली यह बात सामने आई कि गैस सिलेंडर अंजलि के कमरे में कैसे पहुंचा? जबकि उसे किचन में होना चाहिए था. फिर उस के सामान से भरे 2 बैग किचन में क्यों रखे गए? जबकि बैग उस के कमरे में होने चाहिए थे.

परिस्थितियों से यह संकेत मिल रहे थे कि उस कमरे में अंजलि के अलावा कोई और भी था, जो उसे बेहद करीब से जानता रहा होगा और उस की पहुंच उस के कमरे तक रही होगी. पते की बात तो यह थी कि अंजलि के कमरे तक पहुंचने के लिए घर के मुख्यद्वार से हो कर जाना होता था. ऐसे में कोई था तो कातिल घटना को अंजाम दे कर आसानी से बाहर कैसे चला गया था. उसे किसी ने देखा तक नहीं, यह बात बेहद चौंकाने वाली थी.

एसपी डा. धर्मवीर सिंह और एएसपी मायाराम वर्मा ने मकान मालिक विजय कुमार से घटना से संबंधित पूछताछ की. विजय ने बताया कि इस बारे में उन्हें कुछ पता नहीं, लेकिन उन की दोनों बेटियां रिया और सीमा अंजलि के साथ लंबा समय बिताती थीं. उन से जरूर कोई जानकारी मिल सकती है.

विजय कुमार ने अपनी दोनों बेटियों को बुला लिया. उस समय वे एकटक फर्श पर नजरें गड़ाए उसे ही देखे जा रही थीं. लग रहा था जैसे दोनों किसी गहरे सदमे में हों, उन्हें होश ही न हो. अधिकारियों ने उन से अंजलि की जिंदगी से जुड़े कुछ सवाल पूछे, लेकिन वे दोनों न तो कुछ बोल पाईं और न ही बता पाईं. उस के बाद पुलिस ने पड़ोसियों से घटना के बारे में जानकारी करनी चाही, लेकिन वे कुछ नहीं बता सके.

लाश और मौके की स्थिति देख कर यही अनुमान लगाया जा रहा था कि अंजलि की हत्या कर के हत्यारे ने उस के शव को पंखे से लटका दिया होगा. यह हत्या है या आत्महत्या, इस सच का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद लग सकता था.

पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दी. उस के बाद पुलिस ने घटना की जानकारी उस के पिता अजय कुमार यादव को देते हुए उन्हें जल्दी पहुंचने के लिए कह दिया.

बेटी अंजलि की आकस्मिक मौत की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया. अंजलि की मां सावित्री देवी और छोटी बहन मनोरमा का रोरो कर बुरा हाल था. गांव वाले भी अंजलि की मौत की खबर सुन कर स्तब्ध थे. यकीन नहीं हो पा रहा था कि जो खबर उन्होंने सुनी, वह सच है. अंजलि थी ही ऐसी व्यवहारकुशल कि कोई भी उस की मौत को सच मानने के लिए तैयार ही नहीं था.

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बहरहाल, बेटी की मौत की खबर मिलते ही अजय यादव अपने शुभचिंतकों को साथ ले कर जालौन से सिद्धार्थनगर चल दिए. उन के साथ में उन की छोटी बेटी मनोरमा भी थी. सिद्धार्थनगर पहुंच कर अजय यादव सीधा मोहाना थाने पहुंचे. उस समय शाम के 6 बज रहे थे.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

पिता की अचानक मौत से घर की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 23 साल का हूं. पिता की अचानक मौत से घर की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई है. लेकिन फिलहाल मेरे पास किसी भी तरह की नौकरी नहीं है. इस वजह से मैं चिंता में बहुत ज्यादा घुलने लगा हूं. मुझे इस समस्या से छुटकारा दिलाने का उपाय बताएं?

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जवाब

कम उम्र में पिता की मौत किसी दुख के पहाड़ से कमतर नहीं होती, लेकिन चिंता करने से आप की समस्या हल नहीं होने वाली है. इसे एक चुनौती की शक्ल में लें कि हां, मैं पिता की छोड़ी जिम्मेदारियां निभाऊंगा और फिर जो?भी काम मिले, उसे करें. जब चार पैसे खुद की मेहनत के आएंगे तो आप की चिंता भी दूर होने लगेगी. पिता की छोड़ी जमापूंजी ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगी, इसलिए वक्त रहते पूरे आत्मविश्वास से जिंदगी की जंग लड़ें.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें-  सरस सलिल-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

प्यार की सूली पर लटकी अंजली

लड़की : भाग 3

मांबाप ने वीणा पर दबाव डाल कर उसे शादी के लिए मना लिया. नवविवाहिता वीणा की सुप्त भावनाएं जाग उठीं. उस के दिल में हिलोरें उठने लगीं. वह दिवास्वप्नों में खो गई. वह अपने हिस्से की खुशियां बटोरने के लिए लालायित हो गई.

लेकिन भास्कर से उस का जरा भी तालमेल नहीं बैठा. उन में शुरू से ही पटती नहीं थी. दोनों के स्वभाव में जमीनआसमान का अंतर था. भास्कर बहुत ही मितभाषी लेकिन हमेशा गुमसुम रहता. अपने में सीमित रहता.

वीणा ने बहुत कोशिश की कि उन में नजदीकियां बढ़ें पर यह इकतरफा प्रयास था. भास्कर का हृदय मानो एक दुर्भेध्य किला था. वह उस के मन की थाह न पा सकी थी. उसे समझ पाना मुश्किल था. पति और पत्नी में जो अंतरंगता व आत्मीयता होनी चाहिए, वह उन दोनों में नहीं थी. दोनों में दैहिक संबंध भी नाममात्र का था. दोनों एक ही घर में रहते पर अजनबियों की तरह. दोनों अपनीअपनी दुनिया में मस्त रहते, अपनीअपनी राह चलते.

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दिनों दिन वीणा और उस के बीच खाई बढ़ती गई. कभीकभी वीणा भविष्य के बारे में सोच कर चिंतित हो उठती. इस शुष्क स्वभाव वाले मनुष्य के साथ सारी जिंदगी कैसे कटेगी. इस ऊबभरे जीवन से वह कैसे नजात पाएगी, यह सोच निरंतर उस के मन को मथते रहती.

एक दिन वह अपने मातापिता के पास जा पहुंची. ‘मांपिताजी, मुझे इस आदमी से छुटकारा चाहिए,’ उस ने दोटूक कहा. अहल्या और सुधाकर स्तंभित रह गए, ‘यह क्या कह रही है तू? अचानक यह कैसा फैसला ले लिया तू ने? आखिर भास्कर में क्या बुराई है. अच्छे चालचलन का है. अच्छा कमाताधमाता है. तुझ से अच्छी तरह पेश आता है. कोई दहेजवहेज का लफड़ा तो नहीं है न?’

‘नहीं. सौ बात की एक बात है, मेरी उन से नहीं पटती. हमारे विचार नहीं मिलते. मैं अब एक दिन भी उन के साथ नहीं बिताना चाहती. हमारा अलग हो जाना ही बेहतर है.’

‘पागल न बन, बेटी. जराजरा सी बातों के लिए क्या शादी के बंधन को तोड़ना उचित है? बेटी शादी में समझौता करना पड़ता है. तालमेल बिठाना पड़ता है. अपने अहं को त्यागना पड़ता है.’

‘वह सब मैं जानती हूं. मैं ने अपनी तरफ से पूरा प्रयत्न कर के देख लिया पर हमेशा नाकाम रही. बस, मैं ने फैसला कर लिया है. आप लोगों को बताना जरूरी समझा, सो बता दिया.’

‘जल्दबाजी में कोई निर्णय न ले, वीणा. मैं तो सोचती हूं कि एक बच्चा हो जाएगा तो तेरी मुश्किलें दूर हो जाएंगी,’ मां अहल्या ने कहा.

वीणा विद्रूपता से हंसी. ‘जहां परस्पर चाहत और आकर्षण न हो, जहां मन न मिले वहां एक बच्चा कैसे पतिपत्नी के बीच की कड़ी बन सकता है? वह कैसे उन दोनों को एकदूसरे के करीब ला सकता है?’

अहल्या और सुधाकर गहरी सोच में पड़ गए. ‘इस लड़की ने तो एक भारी समस्या खड़ी कर दी,’ अहल्या बोली, ‘जरा सोचो, इतनी कोशिश से तो लड़की को पार लगाया. अब यह पति को छोड़छाड़ कर वापस घर आ बैठी, तो हम इसे सारा जीवन कैसे संभाल पाएंगे? हमारी भी तो उम्र हो रही है. इस लड़की ने तो बैठेबिठाए एक मुसीबत खड़ी कर दी.’

‘उसे किसी तरह समझाबुझा कर ऐसा पागलपन करने से रोको. हमारे परिवार में कभी किसी का तलाक नहीं हुआ. यह हमारे लिए डूब मरने की बात होगी. शादीब्याह कोई हंसीखेल है क्या. और फिर इसे यह भी तो सोचना चाहिए कि इस उम्र में एक तलाकशुदा लड़की की दोबारा शादी कैसे हो पाएगी. लड़के क्या सड़कों पर पड़े मिलते हैं? और इस में कौन से सुरखाब के पर लगे हैं जो इसे कोई मांग कर ले जाएगा,’ सुधाकर बोले.

‘देखो, मैं कोशिश कर के देखती हूं. पर मुझे नहीं लगता कि वीणा मानेगी. वह बड़ी जिद्दी होती जा रही है,’ अहल्या ने कहा.

‘‘तभी तो भुगत रही है. हमारा बस चलता तो इस की शादी कभी की हो गई होती. हमारे बेटों ने हमारी पसंद की लड़कियों से शादी की और अपनेअपने घर में खुश हैं, पर इस लड़की के ढंग ही निराले हैं. पहले प्रेमविवाह का खुमार सिर पर सवार हुआ, फिर विदेश जा कर पढ़ने का शौक चर्राया. खैर छोड़ो, जो होना है सो हो कर रहेगा.’’ बूढ़े दंपती ने बेटी को समझाबुझा कर वापस उस के घर भेज दिया.

एक दिन अचानक हृदयगति रुक जाने से सुधाकर की मौत हो गई. दोनों बेटे विदेश से आए और औपचारिक दुख प्रकट कर वापस चले गए. वे मां को साथ ले जाना चाहते थे पर अहल्या इस के लिए तैयार नहीं हुई.

अहल्या किसी तरह अकेली अपने दिन काट रही थी कि सहसा बेटी के हादसे के बारे में सुन कर उस के हाथों के तोते उड़ गए. वह अपना सिर धुनने लगी. इस लड़की को यह क्या सूझी? अरे, शादी से खुश नहीं थी तो पति को तलाक दे देती और अकेले चैन से रहती. भला अपनी जान देने की क्या जरूरत थी? अब देखो, जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है. अपनी मां को इस बुढ़ापे में ऐसा गम दे दिया.

हर मांबाप अपनी संतान का भला चाहते हैं, अहल्या ने सोचा. हम ने भी वीणा का भला ही चाहा था. पर समय को कुछ और ही मंजूर था. आज उसे लग रहा था कि उस ने व उस के पति ने बेटी के प्रति न्याय नहीं किया. क्या हमारी सोच गलत थी? उस ने अपनेआप से सवाल किया. शायद हां, उस के मन ने कहा. हम जमाने के साथ नहीं चले. हम अपनी परिपाटी से चिपके रहे.

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पहली गलती हम से यह हुई कि बेटी के परिपक्व होने के पहले ही उस की शादी कर देनी चाही. अल्हड़ अवस्था में उस के कंधों पर गृहस्थी का बोझ डालना चाहा. हम जल्द से जल्द अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते थे. और दूसरी भूल हम से तब हुई जब वीणा ने अपनी पसंद का लड़का चुना और हम ने उस की मरजी को नकार कर उस की शादी में हजार रोडे़ अटकाए. अब जब वह अपनी शादी से खुश नहीं थी और पति से तलाक लेना चाह रही थी तो हम दोनों पतिपत्नी ने इस बात का जम कर विरोध किया.

बेटी की खुशी से ज्यादा उन्हें समाज की चिंता थी. लोग क्या कहेंगे, यही बात उन्हें दिनरात खाए जाती थी. उन्हें अपनी मानमर्यादा का खयाल ज्यादा था. वे समाज में अपनी साख बनाए रखना चाहते थे, पर बेटी पर क्या बीत रही है, इस बात की उन्हें फिक्र नहीं थी. बेटी के प्रति वे तनिक भी संवेदनशील न थे. उस के दर्द का उन्हें जरा भी एहसास न था. उन्होंने कभी अपनी बेटी के मन में पैठने की कोशिश नहीं की. कभी उस की अंतरंग भावनाओें को नहीं जानना चाहा. उस के जन्मदाता हो कर भी वे उस के प्रति निष्ठुर रहे, उदासीन रहे.

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लड़की : भाग 2

वर के मातापिता ने एक अड़ंगा लगाया, ‘‘हमारे बेटे के लिए एक से बढ़ कर एक रिश्ते आ रहे हैं. लाखों का दहेज मिल रहा है. माना कि हमारा बेटा आप की बेटी से ब्याह करने पर तुला हुआ है पर इस का यह मतलब तो नहीं कि आप हमें सस्ते में टरका दें. नकद न सही, उस की हैसियत के अनुसार एक कार, फर्नीचर, फ्रिज, एसी वगैरह देना ही होगा.’’

सुधाकर सिर थाम कर बैठ गए. ‘मैं अपनेआप को बेच दूं तो भी इतना सबकुछ जुटा नहीं सकता,’ वे हताश स्वर में बोले.

‘मैं कहती थी न कि वरपक्ष वाले दहेज के लिए मुंह फाड़ेंगे. आखिर, बात दहेज के मुद्दे पर आ कर अटक गई न,’ अहल्या ने उलाहना दिया.

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‘आंटीजी, आप लोग फिक्र न करें,’ उन के भावी दामाद उदय ने उन्हें दिलासा दिया, ‘मैं सब संभाल लूंगा. मैं अपने मांबाप को समझा लूंगा. आखिर मैं उन का इकलौता पुत्र हूं वे मेरी बात टाल नहीं सकेंगे.’

पर उस के मातापिता भी अड़ कर बैठे थे. दोनों में तनातनी थी.

आखिर, उदय के मांबाप की ही चली. वे शादी के मंडप से उदय को जबरन उठा कर ले गए और सुधाकर व अहल्या कुछ न कर सके. देखते ही देखते शादी का माहौल मातम में बदल गया. घराती व बराती चुपचाप खिसक लिए. अहल्या और वीणा ने रोरो कर घर में कुहराम मचा दिया.

‘अब इस तरह मातम मनाने से क्या हासिल होगा?’ सुधाकर ने लताड़ा, ‘इतना निराश होने की जरूरत नहीं है. हमारी लायक बेटी के लिए बहुतेरे वर जुट जाएंगे.’

वीणा मन ही मन आहत हुई पर उस ने इस अप्रिय घटना को भूल कर पढ़ाई में अपना मन लगाया. वह पढ़ने में तेज थी. उस ने परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की. इधर, उस के मांबाप भी निठल्ले नहीं बैठे थे. वे जीजान से एक अच्छे वर की तलाश कर रहे थे. तभी वीणा ने एक दिन अपनी मां को बताया कि वह अपने एक सहपाठी से प्यार करती है और उसी से शादी करना चाहती है.

जब अहल्या ने यह बात पति को बताई तो उन्होंने नाकभौं सिकोड़ कर कहा, ‘बहुत खूब. यह लड़की कालेज पढ़ने जाती थी या कुछ और ही गुल खिला रही थी? कौन लड़का है, किस जाति का है, कैसा खानदान है कुछ पता तो चले?’

और जब उन्हें पता चला कि प्रवीण दलित है तो उन की भृकुटी तन गई, ‘यह लड़की जो भी काम करेगी वह अनोखा होगा. अपनी बिरादरी में योग्य लड़कों की कमी है क्या? भई, हम से तो जानबूझ कर मक्खी निगली नहीं जाएगी. समाज में क्या मुंह दिखाएंगे? हमें किसी तरह से इस लड़के से पीछा छुड़ाना होगा. तुम वीणा को समझाओ.’

‘मैं उसे समझा कर हार चुकी हूं पर वह जिद पकड़े हुए है. कुछ सुनने को तैयार नहीं है.’

‘पागल है वह, नादान है. हमें कोई तरकीब भिड़ानी होगी.’

सुधाकर ने एक तरीका खोज निकाला. वे वीणा को एक ज्योतिषी के पास ले गए.

‘हम ने इन के बारे में बहुतकुछ सुना है. तेरा विदेश जा कर पढ़ने का बहुत मन है न, चलो, इन से रायमशवरा करते हैं और पता लगाते हैं कि तुम्हारे भविष्य में क्या है.’

सुधाकर पहले ही ज्योतिषी से मिल चुके थे और उस की मुट्ठी गरम कर दी थी. ‘महाराज, कन्या एक गलत सोहबत में पड़ गई है और उस से शादी करने का हठ कर रही है. कुछ ऐसा कीजिए कि उस का मन उस लड़के की ओर से फिर जाए.

‘आप चिंता न करें यजमान,’ ज्योतिषाचार्य ने कहा.

ज्योतिषी ने वीणा की जन्मपत्री देख कर बताया कि उस का विदेश जाना अवश्यंभावी है. ‘तुम्हारी कुंडली अति उत्तम है. तुम पढ़लिख कर अच्छा नाम कमाओगी. रही तुम्हारी शादी की बात, सो, कुंडली के अनुसार तुम मांगलिक हो और यह तुम्हारे भावी पति के लिए घातक सिद्ध हो सकता है. तुम्हारी शादी एक मांगलिक लड़के से ही होनी चाहिए वरना जोड़ी फलेगीफूलेगी नहीं. एक  बात और, तुम्हारे ग्रह बताते हैं कि तुम्हारी एक शादी ऐनवक्त पर टूट गई थी?’

‘जी, हां.’

‘भविष्य में इस तरह की बाधा को टालने के लिए एक अनुष्ठान कराना होगा, ग्रहशांति करानी होगी, तभी कुछ बात बनेगी.’ ज्योतिषी ने अपनी गोलमोल बातों से वीणा के मन में ऐसी दुविधा पैदा कर दी कि वह भारी असमंजस में पड़ गई. वह अपनी शादी के बारे में कोई निर्णय न ले सकी.

शीघ्र ही उसे अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी से वजीफे के साथ वहां दाखिला मिल गया. उसे अमेरिका के लिए रवाना कर के उस के मातापिता ने सुकून की सांस ली.

‘अब सब ठीक हो जाएगा,’ सुधाकर ने कहा, ‘लड़की का पढ़ाई में मन लगेगा और उस की प्रवीण से भी दूरी बन जाएगी. बाद की बाद में देखी जाएगी.’

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इत्तफाक से वीणा के दोनों भाई भी अपनेअपने परिवार समेत अमेरिका जा बसे थे और वहीं के हो कर रह गए थे. उन का अपने मातापिता के साथ नाममात्र का संपर्क रह गया था. शुरूशुरू में वे हर हफ्ते फोन कर के मांबाप की खोजखबर लेते रहते थे, लेकिन धीरेधीरे उन का फोन आना कम होता गया. वे दोनों अपने कामकाज और घरसंसार में इतने व्यस्त हो गए कि महीनों बीत जाते, उन का फोन न आता. मांबाप ने उन से जो आस लगाई थी वह धूलधूसरित होती जा रही थी.

समय बीतता रहा. वीणा ने पढ़ाई पूरी कर अमेरिका में ही नौकरी कर ली थी. पूरे 8 वर्षों बाद वह भारत लौट कर आई. उस में भारी परिवर्तन हो गया था. उस का बदन भर गया था. आंखों पर चश्मा लग गया था. बालों में दोचार रुपहले तार झांकने लगे थे. उसे देख कर सुधाकर व अहल्या धक से रह गए. पर कुछ बोल न सके.

‘अब तुम्हारा क्या करने का इरादा है, बेटी?’ उन्होंने पूछा.

‘मेरा नौकरी कर के जी भर गया है. मैं अब शादी करना चाहती हूं. यदि मेरे लायक कोई लड़का है तो आप लोग बात चलाइए,’ उस ने कहा.

अहल्या और सुधाकर फिर से वर खोजने के काम में लग गए. पर अब स्थिति बदल चुकी थी. वीणा अब उतनी आकर्षक नहीं थी. समय ने उस पर अपनी अमिट छाप छोड़ दी थी. उस ने समय से पहले ही प्रौढ़ता का जामा ओढ़ लिया था. वह अब नटखट, चुलबुली नहीं, धीरगंभीर हो गई थी.

उस के मातापिता जहां भी बात चलाते, उन्हें मायूसी ही हासिल होती थी. तभी एक दिन एक मित्र ने उन्हें भास्कर के बारे में बताया, ‘है तो वह विधुर. उस की पहली पत्नी की अचानक असमय मृत्यु हो गई. भास्कर नाम है उस का. वह इंजीनियर है. अच्छा कमाता है. खातेपीते घर का है.’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

लड़की : भाग 1

मुंबई स्थित जसलोक अस्पताल के आईसीयू में वीणा बिस्तर पर निस्पंद पड़ी थी. उसे इस हालत में देख कर उस की मां अहल्या का कलेजा मुंह को आ रहा था. उस के कंठ में रुलाई उमड़ रही थी. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे एक दिन ऐसे दुखदायी दृश्य का सामना करना पड़ेगा.

वह वीणा के पास बैठ कर उस के सिर पर हाथ फेरने लगी. ‘मेरी बेटी,’ वह बुदबुदाई, ‘तू एक बार आंखें खोल दे, तू होश में आ जा तो मैं तुझे बता सकूं कि मैं तुझे कितना चाहती हूं, तू मेरे दिल के कितने करीब है. तू मुझे छोड़ कर न जा मेरी लाड़ो. तेरे बिना मेरा संसार सूना हो जाएगा.’

बेटी को खो देने की आशंका से वह परेशान थी. वह व्यग्रता से डाक्टर और नर्सों का आनाजाना ताक रही थी, उन से वीणा की हालत के बारे में जानना चाह रही थी, पर हर कोई उसे किसी तरह का संतोषजनक उत्तर देने में असमर्थ था.

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जैसे ही उसे वीणा के बारे में सूचना मिली वह पागलों की तरह बदहवास अस्पताल दौड़ी थी. वीणा को बेसुध देख कर वह चीख पड़ी थी. ‘यह सब कैसे हुआ, क्यों हुआ?’ उस के होंठों पर हजारों सवाल आए थे.

‘‘मैं आप को सारी बात बाद में विस्तार से बताऊंगा,’’ उस के दामाद भास्कर ने कहा था, ‘‘आप को तो पता ही है कि वीणा ड्रग्स की आदी थी. लगता है कि इस बार उस ने ओवरडोज ले ली और बेहोश हो गई. कामवाली बाई की नजर उस पर पड़ी तो उस ने दफ्तर में फोन किया. मैं दौड़ा आया, उसे अस्पताल लाया और आप को खबर कर दी.’’

‘‘हायहाय, वीणा ठीक तो हो जाएगी न?’’ अहल्या ने चिंतित हो कर सवाल किया.

‘‘डाक्टर्स पूरी कोशिश कर रहे हैं,’’  भास्कर ने उम्मीद जताई.

भास्कर से कोई आश्वासन न पा कर अहल्या ने चुप्पी साध ली. और वह कर भी क्या सकती थी? उस ने अपने को इतना लाचार कभी महसूस नहीं किया था. वह जानती थी कि वीणा ड्रग्स लेती थी. ड्रग्स की यह आदत उसे अमेरिका में ही पड़ चुकी थी. मानसिक तनाव के चलते वह कभीकभी गोलियां फांक लेती थी. उस ने ओवरडोज गलती से ली या आत्महत्या करने का प्रयत्न किया था?

उस का मन एकबारगी अतीत में जा पहुंचा. उसे वह दिन याद आया जब वीणा पैदा हुई थी. लड़की के जन्म से घर में किसी प्रकार की हलचल नहीं हुई थी. कोई उत्साहित नहीं हुआ था.

अहल्या व उस का पति सुधाकर ऐसे परिवेश में पलेबढ़े थे जहां लड़कों को प्रश्रय दिया जाता था. लड़कियों की कोई अहमियत नहीं थी. लड़कों के जन्म पर थालियां बजाई जातीं, लड्डू बांटे जाते, खुशियां मनाई जाती थीं. बेटी हुई तो सब के मुंह लटक जाते.

बेटी सिर का बोझ थी. वह घाटे का सौदा थी. एक बड़ी जिम्मेदारी थी. उसे पालपोस कर, बड़ा कर दूसरे को सौंप देना होता था. उस के लिए वर खोज कर, दानदहेज दे कर उस की शादी करने की प्रक्रिया में उस के मांबाप हलकान हो जाते और अकसर आकंठ कर्ज में डूब जाते थे.

अहल्या और सुधाकर भी अपनी संकीर्ण मानसिकता व पिछड़ी विचारधारा को ले कर जी रहे थे. वे समाज के घिसेपिटे नियमों का हूबहू पालन कर रहे थे. वे हद दर्जे के पुरातनपंथी थे, लकीर के फकीर.

देश में बदलाव की बयार आई थी, औरतें अपने हकों के लिए संघर्ष कर रही थीं, स्त्री सशक्तीकरण की मांग कर रही थीं. पर अहल्या और उस के पति को इस से कोई फर्क नहीं पड़ा था.

अहल्या को याद आया कि बच्ची को देख कर उस की सास ने कहा था, ‘बच्ची जरा दुबलीपतली और मरियल सी है. रंग भी थोड़ा सांवला है, पर कोई बात नहीं.

2-2 बेटों के जन्म के बाद इस परिवार में एक बेटी की कमी थी, सो वह भी पूरी हो गई.’

जब भी अहल्या को उस की सास अपनी बेटी को ममता के वशीभूत हो कर गोद में लेते या उसे प्यार करते देखतीं तो उसे टोके बिना न रहतीं, ‘अरी, लड़कियां पराया धन होती हैं, दूसरे के घर की शोभा. इन से ज्यादा मोह मत बढ़ा. तेरी असली पूंजी तो तेरे बेटे हैं. वही तेरी नैया पार लगाएंगे. तेरे वंश की बेल वही आगे बढ़ाएंगे. तेरे बुढ़ापे का सहारा वही तो बनेंगे.’

सासूमां जबतब हिदायत देती रहतीं, ‘अरी बहू, बेटी को ज्यादा सिर पे मत चढ़ाओ. इस की आदतें न बिगाड़ो. एक दिन इसे पराए घर जाना है. पता नहीं कैसी ससुराल मिलेगी. कैसे लोगों से पाला पड़ेगा. कैसे निभेगी. बेटियों को विनम्र रहना चाहिए. दब कर रहना चाहिए. सहनशील बनना चाहिए. इन्हें अपनी हद में रहना चाहिए.’

देखते ही देखते वीणा बड़ी हो गई. एक दिन अहल्या के पति सुधाकर ने आ कर कहा, ‘वीणा के लिए एक बड़ा अच्छा रिश्ता आया है.’

‘अरे,’ अहल्या अचकचाई, ‘अभी तो वह केवल 18 साल की है.’

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‘तो क्या हुआ. शादी की उम्र तो हो गई है उस की, जितनी जल्दी अपने सिर से बोझ उतरे उतना ही अच्छा है. लड़के ने खुद आगे बढ़ कर उस का हाथ मांगा है. लड़का भी ऐसावैसा नहीं है. प्रशासनिक अधिकारी है. ऊंची तनख्वाह पाता है. ठाठ से रहता है. हमारी बेटी राज करेगी.’

‘लेकिन उस की पढ़ाई…’

‘ओहो, पढ़ाई का क्या है, उस के पति की मरजी हुई तो बाद में भी प्राइवेट पढ़ सकती है. जरा सोचो, हमारी हैसियत एक आईएएस दामाद पाने की थी क्या? घराना भी अमीर है. यों समझो कि प्रकृति ने छप्पर फाड़ कर धन बरसा दिया हम पर. ‘लेकिन अगर उस के मातापिता ने दहेज के लिए मुंह फाड़ा तो…’

‘तो कह देंगे कि हम आप के द्वारे लड़का मांगने नहीं गए थे. वही हमारी बेटी पर लार टपकाए हुए हैं…’

जब वीणा को पता चला कि उस के ब्याह की बात चल रही है तो वह बहुत रोईधोई. ‘मेरी शादी की इतनी जल्दी क्या है, मां. अभी तो मैं और पढ़ना चाहती हूं. कालेज लाइफ एंजौय करना चाहती हूं. कुछ दिन बेफिक्री से रहना चाहती हूं. फिर थोड़े दिन नौकरी भी करना चाहती हूं.’

पर उस की किसी ने नहीं सुनी. उस का कालेज छुड़ा दिया गया. शादी की जोरशोर से तैयारियां होने लगीं.

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मैट्रिमोनियल साइड : ठगी का अनोखा संजाल

विवाह आंमत्रण की फर्जी साइड बनाकर सोशल मीडिया के माध्यम से देश भर की युवतियों और उनके परिवार वालों को लाखों रुपए ठगने का काम बड़े ही शातिराना अंदाज के साथ चालाकी के साथ जारी था. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, जांजगीर, सरगुजा आदि अनेक शहरों में अनेक युवतियां इस ठगी के संजाल में फंस कर ठगी की शिकार हो गई. आज जब सोशल मीडिया अपने सबाब पर है इसका जहां सकारात्मक पक्ष है वही नकारात्मक पक्ष भी है अगर आप जानकार नहीं हैं अगर आप सचेत नहीं हैं तो आपको खड़े-खड़े यहां ठग लिया जाता है.

ऐसे ही एक नाइजीरियन युवक ने बड़ी ही चालाकी और धुर्तता का परिचय देते हुए एक “मेट्रोमोनियल साइट”  बनाई और युवतियों को विदेशों में संपन्न युवकों के फोटो सपने दिखाकर शादी ब्याह का झूठ फैला कर उन्हें ठगना  और भारी राशि लेना शुरू कर दिया.

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छत्तीसगढ़ में ऐसी अनेक घटना  घटित हुई . मामला जब पुलिस के पास पहुंचा तब जांच पड़ताल तेजी से शुरू हुई.

पुलिस बताती है- फर्जी नाम से प्रोफ़ाइल बनाकर और देश के कई हिस्सों में युवतियों को शादी का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाले  एक विदेशी युवक को छत्तीसगढ़ की कोरिया पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त कर ली है.

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अंतर प्रांतीय ठगी के मामले का खुलासा करते हुए कोरिया पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन सिंह ने हमारे संवाददाता को बताया कि प्रार्थी उपेन्द्र साहू पिता सुदामा प्रसाद साहू निवासी तलवापारा बैकुण्ठपुर की लिखित शिकायत पर थाना बैकुण्ठपुर में अपराध क्र. 84/2020 धारा 419,420 ता0हि0 का मुकदमा कायम किया। प्रार्थी ने अपनी शिकायत में बताया कि घटना दिनांक  जनवरी 2020 को इसकी छोटी बहन के साथ उक्त आरोपी रोहन मिश्रा के नाम से फर्जी वेबसाईट के माध्यम से शादी करने का

झांसा देकर एवं भारत में सेटल होने के नाम पर पीड़िता से 24,07,500  अर्थात चौबीस लाख सात हजार पांच सौ का ठगी की है. प्रकरण दर्ज कर अज्ञात आरोपी को पकड़ने हेतु पुलिस महानिरीक्षक रतन लाल डांगी सरगुजा रेंज के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक कोरिया चन्द्रमोहन सिह के निर्देशन में अति. पुलिस अधीक्षक डॉ.पंकज शुक्ला व उप पुलिस अधीक्षक  धीरेन्द्र पटेल के नेतृृत्व में सायबर टीम कोरिया द्वारा मामले की पतासाजी की जाने लगी.

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नाइजीरियन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने जब जांच शुरू की तो प्रकरण में देखा गया कि कथित आरोपी  द्वारा व्हाट्सएप का उपयोग किया गया है. सायबर टीम द्वारा प्रकरण के सभी बिन्दुओं का बारीकी से विशलेषण कर आरोपी

की पहचान करने में सफलता मिल गई. आरोपी का नाम एजिडे पिटर चिनाका पिता एजिडे ओबिना उम्र 30 वर्ष निवासी

17 सेटेलाईट न्यू टॉउन लागोस नाईजीरिया हाल मुकाम टावर नं0 केएम 21 फ्लैट नं0 204 जेपी कोसमोस सेक्टर 134 नोएड़ा (उ0प्र0) था. यह  रोहन मिश्रा, अरूण राय इत्यादि नाम से धोखाधड़ी किया करता था.उपरोक्त अपराध की विवेचना के दौरान विशेष टीम को दिल्ली, नोएडा (उ0प्र0) रवाना किया गया था। टीम द्वारा आरोपी के ठिकाने पर दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर आरोपी से पुछताछ किया गया. आरोपी द्वारा अन्य राज्यो तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश, झारखण्ड़, उडिसा, हिमाचल प्रदेश इन सभी राज्यों में भी अपने आप को डॅाक्टर, इंजीनियर, बिजनसमेन बताये हुये अपने झासे लेकर लाखो रूपये की ठगी की गई है. ठगी की रकम को कुछ अपने पास रख बाकी शेष रकम को नाईजीरिया ट्रांसफर कर देता था.

इसके पास से दो नग पासपोर्ट मिला जिसमें एक फर्जी पासपोर्ट, दो नग नाईजीरियन डेबिट कार्ड , एक नग एसबीआई डेबिट कार्ड ,चार नग मोबाईल हैण्डसेट, 14 नग सीम कार्ड, एक वाईफाई डिवाइस, एक नग लैपटॉप जप्त किया गया. आरोपी के पासपोर्ट एवं विजा का अवलोकन किया गया जिसकी मियाद समाप्त हो चूकी है. ऐसे में यह तत्व उभर कर सामने आया है कि नाइजीरिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश अमेरिका और ब्रिटेन से सोशल मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य राज्यों में ठगी बदस्तूर की जा रही है. यहां यह भी महत्वपूर्ण तथ्य है कि सोशल मीडिया के द्वारा ठगी किए जाने के फल स्वरुप अधिकांश मामलों में आरोपी पुलिस के शिकंजे से बचते जाते हैं. ऐसे में यह प्रथम आवश्यकता होनी चाहिए की हम ठगों के झूठे फरेब में न फंसे.

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सनी लियोनी से लेकर राधिका आप्टे तक इन एक्ट्रेसेस ने परफोर्म किए ऑनस्क्रीन बोल्ड सीन्स, देखें Photos

जैसा कि हम सब जानते हैं कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में हर तरह की फिल्में बनती हैं और फिल्में बनने के बाद हमारे बॉलीवुड का सेंसर बोर्ड (Censor Board) उन्हें अलग अलग कैटेगरी के हिसाब से रिलीज करने का आर्डर देते है. सेंसर बोर्ड (Censor Board) अलग अलग कैटेगरीज में फिल्मों को बांट देते हैं ताकी जो फिल्मी सीन्स जिस उम्र के लोगों के लिए सही है सिर्फ वही उन्हें देख पाएं.

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ऐसे में हम सब ये बात भी जानते हैं कि एक्टर्स और एक्ट्रेसेस को ना सिर्फ डायरेक्टर के अनुसार बल्कि स्क्रिप्ट के मुताबिक स्ट्रीन पर एक्टिंग करनी पड़ती है, ऐसे में हमारी इंडस्ट्री की कई एक्ट्रेसेस हैं जिन्होनें स्क्रिप्ट के अनुसार ऑन स्क्रीन कई न्यूड सीन्स परफोर्म किए हैं. तो चलिए आपको बताते हैं उन एक्ट्रेसेस के नाम-

राधिका आप्टे

 

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#throwback

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बॉलीवुड इडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस राधिका आप्टे (Radhika Apte) ने साल 2016 में आई फिल्म ‘पार्च्ड’ (Parched) में काफी बोल्ड सीन परफोर्म किया था. यह फिल्म 23 सितम्बर 2016 को रिलीज की गई थी.

नंदना सेन

बॉलीवुड एक्ट्रेस नंदना सेन (Nandana Sen) को फिल्म ‘रंग रसिया’ (Rang Rasiya) में अपने बोल्ड अंदाज के लिए काफी पौपुलैरिटी मिली थीं. इस फिल्म के डायरेक्टर थे केतन मेहता और यह फिल्म 7 नवंबर 2014 को रिलीज की गई थी.

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शर्लिन चोपड़ा

 

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Are you ready for tonight’s pulsating video release on Redsher? 👅 #redsher #nowisthetime

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एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा (Sherlyn Chopra) बेदद खूबसूरत हैं और वे अपनी खूबसूरती के साथ साथ अपने बोल्ड अवतार के लिए भी जानी जाती हैं. एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा (Sherlyn Chopra) ना सिर्फ फिल्मों में बल्कि सोशल मीडिया पर भी अपने बोल्ड अंदाज के चलते चर्चा में आ जाती हैं.

सिमी ग्रेवाल

 

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Awards Night at the UK Asian Film Festival

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एक्ट्रेस सिमी ग्रेवाल (Simi Grewal) ने फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ (Mera Naam Joker) में एक न्यूड सीन परफोर्म किया था जिसे देख सभी के होश उड़ गए थे. यह फिल्म राज कपूर ने डायरेक्ट की थी और यह फिल्म काफी पौपुलर रही थी.

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जीनत अमान

 

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Lux golden rose awards @luxgoldenroseawards

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एक्ट्रेस जीनत अमान (Zeenat Aman) ने फिल्म ‘सत्यम शिवम सुन्दरम’ (Satyam Shivam Sundaram) में अपने टॉपलेस अंदाज से सबका दिल जीत लिया था. इस सीन को देख जीनत अमान के फैंस के दिलों में हलचल मच गई थी.

सनी लियोनी

 

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Brought home this beast yesterday! Every time I drive this car I am so happy! @maserati @maseratiusa

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बॉलीवुड इंडस्ट्री की सबसे हॉट और बोल्ड एक्ट्रेसेस में से एक सनी लियोनी (Sunny Leone) ने फिल्म रागिनी एमएमएस 2 (Ragini MMS 2) के साथ साथ कई और फिल्मों में अपने बोल्ड अंदाज से लोगों की नींदें उड़ाई हैं.

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कल्कि कोचलिन

एक्ट्रेस कल्कि कोचलिन (Kalki Koechlin) इन दिनों अपने फैंस के बीच काफी पौपुलर है और फैंस भी उन्हें काफी प्यार देते हैं. ऐसे में आपको बता दें कि एक्ट्रेस कल्कि कोचलिन ने फिल्म ‘मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ’ (Margarita with a Straw) में एक न्यूड सीन दिया था, जिसके चलते वे काफी चर्चा में रही थीं.

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