किन्नर का आखिरी वार- भाग 1

कहानी सौजन्य- मनोहर कहानियां

राइटर- सुरेशचंद्र मिश्र

8 अक्तूबर 2020 की सुबह 8 बजे बबेरू कस्बे के कुछ लोगों ने एक ऐसा खौफनाक मंजर देखा, जिस से उन की रूह कांप उठी. एक आदमी सड़क पर बेखौफ पैदल आगे बढ़ता जा रहा था. उस के एक हाथ में फरसा तथा दूसरे हाथ में कटा हुआ सिर था. सिर किसी महिला का था, जिसे वह सिर के बालों से पकड़े था.

कटे सिर से खून भी टपक रहा था, जिस से आभास हो रहा था कि कुछ देर पहले ही उस ने सिर को धड़ से अलग किया होगा. देखने वाले अनुमान लगा रहे थे कि कटा सिर या तो उस आदमी की प्रेमिका का है, या फिर पत्नी का. क्योंकि ऐसा जघन्य काम आदमी तभी करता है, जब या तो प्रेमिका धोखा दे या फिर पत्नी बेवफाई करे.

दिल कंपा देने वाला मंजर बिखेरता हुआ, वह आदमी बाजार चौराहा पार कर के थाना बबेरू के गेट पर जा कर रुका. पहरे पर तैनात सिपाही की नजर जब उस पर पड़ी तो वह घबरा गया, फिर हिम्मत जुटा कर अपनी ड्यूटी निभाने के लिए पूछा, ‘‘कौन हो तुम. और तुम्हारे हाथ में ये कटा सिर किस का है?’’ ‘‘यह सब बातें हम बड़े दरोगा साहब को बताएंगे. उन्हें बुलाओ.’’ उस रौद्र रूपधारी आदमी ने जवाब दिया.‘‘ठीक है, तुम इस कुर्सी पर बैठो. मैं दरोगा साहब को बुला कर लाता हूं.’’उस आदमी ने कटा सिर जमीन पर रखा फिर कंधा से फरसा टिका कर इत्मीनान से कुर्सी पर बैठ गया. पहरे वाला सिपाही बदहवास हालत में थाना इंचार्ज जयश्याम शुक्ला के कक्ष में पहुंचा, ‘‘सर एक आदमी आया है. उस के हाथ में फरसा और महिला का कटा सिर है.’’‘‘क्या?’’ शुक्लाजी चौंके. फिर वह रामसिंह व कुछ अन्य सिपाहियों के साथ थाना परिसर आए, जहां वह आदमी कुरसी पर बैठा था. उसे देख वह भी कांप उठे. कहीं वह पागल तो नहीं, उस स्थिति में वह पुलिस पर भी हमला कर सकता था. उन्होंने उस आदमी से कहा, ‘‘देखो, पहले अपना फरसा और कटा सिर चंद कदम दूर रख दो. फिर मैं तुम्हारी बात सुनूंगा.’’

जय श्याम शुक्ला की बात मान कर उस आदमी ने फरसा और कटा सिर चंद कदम दूर रख दिया. जिसे एक सिपाही ने संभाल लिया. इस के बाद शुक्ला ने उस आदमी को हिरासत में ले कर पूछा, ‘‘अब बताओ, तुम कौन हो, कहां रहते हो और कटा सिर किस का है?’’

‘‘दरोगा बाबू, मेरा नाम किन्नर यादव है. मैं अतर्रा रोड, नेता नगर में रहता हूं. कटा सिर मेरी पत्नी विमला का है. मैं ने ही फरसे से उस का सिर काटा है. मैं हत्या का जुर्म कबूल करता हूं. आप मुझे गिरफ्तार कर लो.’’

‘‘तुम ने अपनी पत्नी विमला की हत्या क्यों की?’’ जय श्याम शुक्ला ने पूछा.

‘‘साहब, वह बदचलन औरत थी. पड़ोसी रवि उर्फ बंका के साथ रंगरेलियां मनाती थी. कई बार मना किया, बच्चों की कसम खिलाई, इज्जत की दुहाई दी, लेकिन वह नहीं मानी. आज मुझ से बर्दाश्त नहीं हुआ. मैं ने बंका पर फरसा से हमला किया तो वह उसे बचाने आ गई. इस पर मैं ने उस की गर्दन काट दी और ले कर थाने आ गया.’’

‘‘बंका कहां है?’’ शुक्लाजी ने पूछा.

‘‘बंका घर में तड़प रहा होगा. उस की किस्मत अच्छी थी, बच गया.’’

मंजर देख पुलिस भी हैरान थी

पूछताछ के बाद प्रभारी निरीक्षक जय श्याम शुक्ला ने कातिल किन्नर यादव को हवालात में बंद कराया, फिर इस दिल कंपा देने वाली घटना की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी. इस के बाद कटा सिर साथ में ले कर पुलिस बल के साथ नेता नगर स्थिति किन्नर यादव के मकान पर पहुंच गए.

उस समय वहां भारी भीड़ जुटी थी. मृतका विमला की सिरविहीन लाश सड़क पर पड़ी थी. उस की गर्दन बड़ी बेरहमी से काटी गई थी. पैर पर भी वार किया गया था, जिस से पैर पर जख्म लगा था. मृतका की उम्र 35 वर्ष के आसपास थी. रंग साफ और शरीर स्वस्थ था. उस के शव के पास बच्चे तथा महिलाएं बिलख रही थी.

पड़ोस में सूरजभान सविता का मकान था. उस का बेटा रवि उर्फ बंका घायल पड़ा तड़प रहा था. किन्नर यादव ने उस पर भी फरसे से हमला किया था, जिस से उस का एक कान तथा गर्दन कट गई थी. जय श्याम शुक्ला ने उसे इलाज के लिए स्वास्थ केंद्र भिजवा दिया.

जय श्याम शुक्ला अभी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शंकर मीणा, अपर पुलिस अधीक्षक महेंद्र प्रताप सिंह चौहान तथा डीएसपी आनंद कुमार पांडेय भी वहां आ गए. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पासपड़ोस के लोगों तथा मृतका के पिता रामशरण यादव से घटना के बारे में जानकारी हासिल की.

पड़ोस में रहने वाली ननकी ने बताया कि विमला जान बचाने के लिए उस के घर में घुस आई थी. लेकिन पीछा करते हुए उस का पति किन्नर यादव घर में आ गया था. वह विमला  के बाल पकड़ कर घसीटते हुए घर के बाहर सड़क पर ले गया. फिर उस ने फरसे से विमला की गर्दन धड़ से अलग कर दी. वह चाह कर भी उस की कोई मदद नहीं कर पाई थी.

रामदत्त की बेटी अंतिमा ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि वह घर के बाहर साफसफाई कर रही थी तभी किन्नर चाचा फरसा ले कर आए और बंका पर हमला कर दिया. उस का कान तथा गर्दन कट गई. विमला चाची बंका को बचाने आई तो चाचा ने बंका को छोड़ कर विमला चाची पर हमला कर दिया. वह जान बचा कर ननकी काकी के घर घुस गई. लेकिन उन की जान नहीं बच सकी.

थाने लौट कर पुलिस अधिकारियों ने हवालात में बंद किन्नर यादव को बाहर निकलवा कर बंद कमरे में पूछताछ की. पूछताछ में उस ने सहजता से पत्नी की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. अपर पुलिस अधीक्षक महेंद्र सिंह चौहान ने स्वास्थ केंद्र पहुंच कर घायल रवि उर्फ बंका से जानकारी हासिल की. बंका ने विमला से अवैध रिश्तों की बात स्वीकार की.

इधर पुलिस अधिकारियों के आदेश पर प्रभारी निरीक्षक जयश्याम शुक्ला ने मृतका विमला के सिर और धड़ को एक साथ पोस्टमार्टम के लिए बांदा के जिला अस्पताल भेज दिया. पोस्टमार्टम करा कर पुलिस ने उसी दिन मुक्तिधाम में उस का दाह संस्कार करा दिया.

चूंकि कातिल किन्नर यादव ने स्वयं थाने जा कर आत्मसमर्पण किया था और आलाकत्ल फरसा भी पुलिस को सौंप दिया था. इसलिए प्रभारी निरीक्षक जय श्याम शुक्ला ने मृतका के पिता रामशरण यादव को वादी बना कर धारा 302/324 आईपीसी के तहत किन्नर यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में अवैध रिश्तों की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई.

किन्नर यादव बांदा जनपद के कस्बा बबेरू नेता नगर में रहता था. 12 साल पहले उस का विवाह मरका क्षेत्र के सिरिया ताला गांव निवासी रामशरण सिंह यादव की बेटी विमला के साथ हुआ था. विमला सरल स्वभाव की महिला थी. किन्नर यादव उसे बहुत प्यार करता था. कालांतर में विमला 2 बेटों संदीप व कुलदीप की मां बनी.

परिवार के लिए हाड़तोड़ मेहनत

किन्नर यादव पटाखा, आतिशबाजी बनाने का बेहतरीन कारीगर था. वह बबेरू के एक लाइसेंस होल्डर के यहां काम करता था. उसे पगार तो मिलती ही थी, साथ में वह अवैध रूप से भी पटाखे बना लेता था. इस से भी उसे ठीकठाक कमाई हो जाती थी. उस के परिवार के भरणपोषण के लिए इतना काफी था. यह काम करने वाले और भी थे.

लेकिन अवैध काम तो अवैध ही होता है. बबेरू पुलिस को भनक पड़ी तो उस ने धरपकड़ शुरू की, लेकिन किन्नर यादव किसी तरह बच गया. इस के बाद पत्नी विमला के समझाने पर उस ने अवैध काम को बंद कर दिया और कस्बे की एक आढ़त पर पल्लेदारी का काम करने लगा.

रवि उर्फ बंका किन्नर यादव के पड़ोस में रहता था. उस के पिता सूरजभान सविता गांव मरका में रहते थे. अविवाहित बंका अपनी मां गोमती के साथ रहता था. वह बिजली विभाग में संविदा कर्मचारी था. वेतन के अलावा उस की ऊपरी कमाई भी थी, सो वह ठाटबाट से रहता था.

बंका और किन्नर यादव हमउम्र थे. दोनो के बीच दोस्ती थी. लेकिन एकदूसरे के घर ज्यादा आना जाना नहीं था. एक बार बंका किसी काम से किन्नर यादव के घर आया. उस ने किन्नर की पत्नी विमला को देखा, तो उस की नियत खराब हो गई.

अगले भाग में पढ़िए विमला को पाने के लिए किस हद तक गया बंका…

नपुंसकता- एक गंभीर समस्या

राइटर- श्री प्रकाश

सारी दुनिया में मर्दों में नामर्दी, जिसे इंगलिश में इरैक्टाइल डिस्फंक्शन भी कहते हैं, एक गंभीर समस्या बन गई है. अमेरिका जैसे अमीर व तरक्कीशुदा देश में भी इस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नवंबर का महीना ‘नैशनल इंपोटैंसी मंथ’ यानी राष्ट्रीय नपुंसकता मास के रूप में मनाया जा रहा है. यह मुहिम नामर्दी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए चलाई जाती है.

मर्दों में नामर्दी एक चिंता की बात है. डायबिटीज और दिल की बीमारी भी नामर्दी की वजहें हो सकती हैं. पूरी दुनिया में टाइप 1 व टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों की तादाद करोड़ों में है और यह तादाद हर रोज बढ़ रही है.

डायबिटीज से ब्लड प्रैशर, किडनी और दिल पर गहरा असर पड़ता है, पर साथ में इस के चलते भी इरैक्टाइल डिस्फंक्शन या ईडी या नामर्दी होती है.

नामर्दी या इरैक्टाइल डिस्फंक्शन क्या है

मर्द के अंग का संभोग के पहले इस क्रिया के सही कड़ापन न होना या संभोग तक उस हालत में न बने रहने को ही नामर्दी कहते हैं. बांझपन, जल्दी पस्त होना और सैक्स की इच्छा में कमी को नामर्दी नहीं कहते हैं.

नामर्दी का असर

एक रिसर्च में देखा गया है कि इरैक्टाइल डिस्फंक्शन के असर से 50 फीसदी मर्दों की क्वालिटी औफ लाइफ पर बुरा असर पड़ा है. इतना ही नहीं, इस का गलत असर पार्टनर की क्वालिटी औफ लाइफ पर भी पड़ता है. इस का असर जिस्मानी, दिमागी, भावनात्मक और आपसी रिश्ते पर पड़ता है. खासकर मर्द द्वारा अपने पार्टनर को न खुश करने के चलते उसे आत्मविश्वास में कमी होने या हीनभावना पैदा होने का डर है.

ईडी या इरैक्टाइल डिस्फंक्शन

अंग की नसों का ठीक से काम न करना, अंग में खून का दौरा सही न होना, दिमाग से सैक्स के लिए बढ़ावा और सिगनल न मिलने से भी नामर्दी की की समस्या होगी.

नाड़ी संबंधित रोग

हाई ब्लड प्रैशर और ज्यादा कोलैस्ट्रौल के चलते खून की धमनियां सख्त हो जाती हैं और दिल, दिमाग और अंग में खून का दौरा बाधित हो जाता है. इस के चलते नसें और धमनियों को खून पहुंचता है और अंग तक समुचित खून नहीं पहुंचने से यह बीमारी हो सकती है.

किडनी रोग

इस में रासायनिक बदलाव होने के चलते हार्मोनों पर असर पड़ता है. इस के अलावा खून के दौरे, नसों और जिस्मानी ताकत पर बुरा असर होता है.

न्यूरोलौजिकल या नसों के रोग

स्ट्रोक, अल्जाइमर, पार्किंसन और मल्टीपल स्कलेरोसिस और स्पाइन (रीढ़) में  चोट लगने से यह होता है.

प्रोस्टेट कैंसर

इस के चलते भी नामर्दी हो सकती है. हालांकि सिर्फ कैंसर से यह नहीं होता है. कैंसर के इलाज के साइड इफैक्ट के चलते यह होता है. इस के अलावा बढ़ती उम्र के असर से भी यह बीमारी होती है.

मनोवैज्ञानिक वजह

तनाव, अंग में चोट लगने, कुछ दवाएं, प्रोस्टेट, ब्लेडर, कोलोन यानी मलाशय के कैंसर की सर्जरी के अंग के चलते नामर्दी का डर होता है. तंबाकू, शराब और नशीली दवा के इस्तेमाल से खून की नलिकाओं को नुकसान होता है और अंग तक खून का दौरा बाधित होने से यह बीमारी होती है.

डाक्टरों के मुताबिक, इरैक्टाइल डिस्फंक्शन यानी नामर्दी की समस्या पूरी दुनिया में है. भारत में भी यह फैली हुई है, पर इस के बारे में मर्द खुल कर बात करने में शरमाते हैं या ठीक नहीं समझते हैं.

टाइम्स औफ इंडिया के एक पुराने सर्वे के मुताबिक, भारत में 25 फीसदी इस बीमारी के शिकार 20 से 30 साल की उम्र के मर्द हैं यानी नौजवान.

एक दूसरे सर्वे के मुताबिक, 30 फीसदी नपुंसक मर्द 40 साल से कम उम्र के हैं, जबकि 53 फीसदी को इस के बारे में जानकारी ही नहीं है. इस का आसान इलाज भी मुहैया है, पर वे शर्म से आगे नहीं आते हैं. ज्यादातर डाक्टरों का मानना है कि इस बारे में उन की पत्नियां अहम योगदान दे सकती हैं.

नामर्दी

इस बीमारी का पता लगाने के लिए माहिर डाक्टर, जिसे यूरोलौजिस्ट कहते हैं, की सलाह ले सकते हैं. इस के कुछ उपचार इस तरह हैं :

जीने के तरीकों पर कंट्रोल

धूम्रपान, शराब और दूसरी नशीली दवाओं का त्याग, वजन पर कंट्रोल, पौष्टिक आहार और नियमित कसरत करना.

मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग

नामर्दी चिंता, डिप्रैशन और रिश्ते में कड़वाहट के चलते होती है, तब मनोवैज्ञानिक से सलाह ले कर उस की सलाह के मुताबिक चलने से फायदा होता है.

दवाएं

इरैक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए कुछ दवाएं मुहैया हैं, जिन का सेवन डाक्टर की सलाह के बाद कर सकते हैं. ये दवाएं गोली या इंजैक्शन के रूप में हो सकती हैं.

टैस्टोस्टैरोन हार्मोन उपचार

जिन मर्दों में टैस्टोस्टैरोन नामक हार्मोन की कमी है, उन्हें इस इलाज की जरूरत होती है. इसे एंड्रोजन रिप्लेसमैंट थैरेपी भी कहते हैं.

कुछ मामलों में डाक्टर पैनिस पंप के इस्तेमाल करने की सलाह दे सकते हैं.

सर्जरी

अगर और किसी और तरीके से पैनिस में खून का दौरा सही तरीके से नहीं हो रहा है, तो डाक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं. खून की कुछ नलिकाओं को रिपेयर कर खून का दौरा बढ़ाया जाता है.

ऐक्सटर्नल पैनाइल प्रोस्थैसिस या कृत्रिम अंग

डाक्टर सही समझें तो इस में पैनाइल स्लीव्स, सपोर्ट वगैरह लगा कर इस बीमारी को ठीक करने की सलाह दे सकते हैं.

यह एक आसान और सस्ता उपाय है और इसे डिवाइस बिना डाक्टर की परची के मिलते हैं. इस डिवाइस पर अभी और रिसर्च हो रही है.

इरैक्टाइल डिस्फंक्शन डाक्टरों और वैज्ञानिकों के लिए चिंता की बात है, इसलिए इस के इलाज के लिए वे लगातार कोशिश कर रहे हैं. निकट भविष्य में वे कुछ दूसरे उपचार मुहैया कर रहे हैं, जैसे प्लेटलेट रिच प्लाज्मा थैरेपी, वैस्कुलर स्टेट, पैनाइल ट्रांसप्लांट वगैरह.

सोशल मीडिया से भड़कती “सेक्स की चिंगारी”

संपूर्ण देश दुनिया सहित छत्तीसगढ़ में सोशल मीडिया के माध्यम से सेक्स संबंध बनाए जाने और बाद में धोखा देने की घटनाएं हो रही है. आए दिन ऐसी घटनाएं हमारे आसपास घटित हो रही है कि फेसबुक, व्हाट्सएप आदि सोशल मीडिया प्लेटफौर्म के माध्यम से युवक-युवतियों में बातचीत शुरु होती है, संबंध बनते हैं, मुलाकातें होती हैं, और धीरे धीरे स्थिति सेक्स संबंध स्थापित करने तक पहुंच जाती है. और फिर शुरू होता है लड़की का यह आग्रह की मुझे अपना लो, विवाह कर लो. मगर युवक अब आनाकानी करने लगते हैं. और लड़की को अहसास होता है कि मैं छलावे में आ गई, धोखा खा गयी और मेरा जीवन बर्बाद हो गया.

आज हम इस रिपोर्ट में इस प्रकार की कुछ घटनाओं को संकेतिक रूप से यहां प्रस्तुत करते हुए यह बताने का अथक प्रयास कर रहे हैं कि युवक हो या युवतियां फेसबुक की दोस्ती, संबंधों को लेकर एक सीमा के आगे चले जाएंगे तो यह आग से खेलना होगा. सोशल मीडिया की दोस्ती, सेक्स संबंध एक ऐसी चिंगारी है जो जीवन तबाह कर देती है.

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिला जशपुर जिले के बगीचा इलाके का रहने वाले एक युवक अमन तिवारी पीएससी की तैयारी करने के लिए बिलासपुर शहर आया था. यहां उसने फेसबुक के जरिए एक युवती को अपने जाल में फंसा लिया. इसके बाद करीब दो साल तक युवती से दुष्कर्म करता रहा.
युवती ने जब जब शादी के लिए कहा तो युवक ने इंकार कर दिया.

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युवती के मुताबिक युवक ने उससे कहा था -” वह उससे प्यार करता है और शादी भी उसी से करेगा.” इसी का भ्रम जाल बुनकर आरोपी युवक उससे शारीरिक संबंध बनाता रहा. इस दौरान युवती ने जब युवक से शादी करने की बात कही, तो युवक ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया.

युवक से मिले इस धोखे से आहत युवती ने आरोपी के खिलाफ बिलासपुर के कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी युवक अमन तिवारी को मौके पर दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया.

दोस्ती और प्रेम जाल

एक आदिवासी किशोरी की फेसबुक पर एक साल पहले पाली गांव निवासी रमन शर्मा (28) से दोस्ती हुई . बातचीत करते हुए युवक ने उसे प्रेमजाल में फंसा लिया. युवक उसे राजधानी रायपुर घूमने के बहाने घर से भगाकर अपने साथ ले गया. फिर अपने दोस्त पवन की मदद से किराए के मकान में रंजन ने किशोरी को रखा. वहां वह शादी करने का झांसा देते हुए किशोरी से दुष्कर्म करता रहा. बाद में उसे वापस शहर लाकर छोड़ दिया.किशोरी के परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ अपहरण समेत दुष्कर्म, पाक्सो एक्ट व एट्रोसिटी एक्ट का अपराध दर्ज कर लिया.आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम संभावित स्थानों पर गई लेकिन वह हर बार भाग निकलता. आखिर साइबर सेल की मदद से पुलिस द्वारा उसके मोबाइल का लोकेशन खंगाला गया. जिसके बाद उसके बिलासपुर में होने की जानकारी मिली. पुलिस की एक टीम दिल्ली भेजी गई। टीम ने वहां जानकारी जुटाते हुए आरोपी रमन शर्मा को पकड़ लिया.

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और झांसा देकर बंधक बना लिया

एक प्राइवेट हास्पिटल में नर्सिंग का काम करने वाली युवती की सोशल मीडिया पर जिस युवक से पहचान हुई थी उसी युवक ने धोखे में उसे गांव ले जाकर बंधक बना लिया. इसके बाद युवक व उसके दोस्तों ने कई दिनों तक युवती के साथ रेप किया. युवती करीब हफ्तेभर बाद किसी तरह भागकर रविवार को जशपुर के लुडेर गांव से अंबिकापुर पहुंची तो मामला सामने आया. युवती के साथ आरोपियों ने मारपीट भी की है. पुलिस ने मामले में जशपुर जिले के ग्राम लुडेर निवासी कुलदीप लकड़ा नामक युवक व उसके तीन अन्य साथियों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी.
युवती मूलत: बलरामपुर जिले के राजपुर इलाके की रहने वाली है. वह अंबिकापुर के मिशन चौक इलाके में किराए के मकान में रहकर एक प्राइवेट हास्पिटल में काम कर रही थी. इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी कुलदीप लकड़ा, अजय और राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया. सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. वहीं फरार आरोपी की पुलिस तलाश कर रही है.

पुलिस ने बताया कि युवती और आरोपी का परिचय फेसबुक पर हुई थी.पहले दोनों ने चैटिंग से बातचीत होती थी. इसके बाद मोबाइल पर बातचीत करने लगे और एक दूसरे के लिए जीने मरने की कसमें खाने लगे. युवक के झांसे में आकर युवती उसके ऊपर विश्वास करने लगी. युवक ने अंबिकापुर में आकर मुलाकात करने की बात की तो वह तैयार हो गई.

आरोपी युवक बाइक से अंबिकापुर आया था.यहां गांव गुदरी में युवती को मिलने के लिए बुलाया. इसके बाद घूमने की बात कहकर युवती को बाइक से प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट ले गया. यहां से फिर परिजनों से मिलाने की बात कहकर उसे अपने घर ग्राम लुडेर ले गया. युवक के गांव में दो घर हैं. एक में घर में कोई नहीं रहता है. इसी घर में युवती को बंधक बनाकर रखा.

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कोरियोग्राफर प्रभु देवा करने जा रहे हैं दूसरी शादी, इस लड़की के साथ चल रहा है रिलेशनशिप

इंडियन सिनेमा के जाने माने एक्टर, डांसर, फिल्म डायरेक्टर और कोरियोग्राफर प्रभु देवा (Prabhu Deva) ने अपनी मेहनत और टेलेंट के चलते लोगों के दिलों में जगह बनाई है. आज डांस के मामले में प्रभु देवा (Prabhu Deva) का नाम सबसे ऊपर आता है और तो और उन्होनें कई ऐसी फिल्मों में काम किया है जिसे देख फैंस उन्हें और भी ज्यादा पसंद करने लगे.

 

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इन दिनों प्रभु देवा सलमान खान (Salman Khan) की अपकमिंग फिल्म ‘राधे: योर मोस्ट वॉन्टेड भाई’ (Radhe : Your Most Wanted Bhai) को डायरेक्ट कर रहे हैं जिसका फैंस को बेसब्री से इंतजार है. इसी के साथ ही प्रभु देवा (Prabhu Deva) अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में आ गए हैं. खबरों की माने तो प्रभु देवा एक बार फिर शादी करने को तैय्यार हैं.

 

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जी हां, मीडिया रिपोर्टस की मानें तो इन दिनों प्रभु देवा (Prabhu Deva) अपनी भांजी को डेट कर रहे हैं और बहुत ही जल्द वे उनसे शादी भी कर सकते हैं. हालांकि इस बात पर प्रभु देवा ने कोई बयान नहीं दिया है. आपको बता दें प्रभु देवा ने रामलता (Ramlatha) नाम की लड़की से शादी की थी जिससे कि उनके 3 बच्चे थे.

 

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साल 2008 में उनके सबसे बड़े बेटे का कैंसर के चलते निधन हो गया था. उस समय रामलता (Ramlatha) ने एक्ट्रेस नयनतारा (Nayantara) और प्रभु देवा (Prabhu Deva) के लिव-इन-रिलेशन में होने का दावा किया था और तो और ये धमकी भी दी थी कि अगर प्रभु देवा ने नयनतारा से शादी की तो वे भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगी जिसके बाद से प्रभु देवा और एक्ट्रेस नयनतारा अलग हो गए थे.

 

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ये सब देख ऐसा कहा जा सकता है कि प्रभु देवा (Prabhu Deva) की लव लाइफ कुछ खास अच्छी नहीं रही तो अब देखने वाली बात ये होगी कि अब प्रभु देवा की इस शादी वाली बात में कितनी सच्चाई है.

भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह के नए गाने ने मचाया हंगामा, कहा ‘डोंट टच माय हैंड’

भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) आए दिन किसी ना किसी वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं. एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) कभी अपनी फिल्मों, कभी अपने फोटोशूट्स तो कभी अपने गानों को लेकर फैंस के बीच चर्चाओं में आ जाती हैं. ऐसे में एक बार फिर भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) अपने नए गाने के चलते सोशल मीडिया पर छा गई हैं.

 

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जैसा कि हम सब जानते हैं कि वे इन दिनों एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) अपनी फिल्मों से ज्यादा यू-ट्यूब पर रिलीज किए गए गानों से फैंस का मनोरंजन करती हैं. हाल ही में अक्षरा सिंह (Akshara Singh) ने ‘ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन – भोजपुरी’ (Global Music Junction – Bhojpuri) के ऑफिशियल यू-ट्यूब चैनल पर अपना नया गाना रिलीज किया है जिसका नाम है ‘डोंट टच माय हैंड’ (Don’t Touch My Hand).

 

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इस गाने को खुद एक्ट्रेस अक्षरा सिंह (Akshara Singh) ने गाया है और तो और फैंस उनके इस गाने को खूब प्यार दे रहे हैं. अक्षरा सिंह (Akshara Singh) का यह गाना 28 अक्टूबर 2020 को रिलीज हुआ था और अब तक इस गाने पर 13 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं और तो और इस गाने पर फैंस के अब तक 1 लाख 67 हजार से भी ज्यादा लाइक्स आ चुके हैं.

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देखें वीडियो – 

ओयो होटल का रंगीन अखाड़ा : भाग 3

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

इस पर पुलिस की तीनों टीमों ने 27 सितंबर की रात को सेक्टर 41 के आई ब्लौक में प्लौट नंबर 64 पर बने ओयो होटल को चारों तरफ से घेर कर छापा मारा. एकएक कमरे की तलाशी ली गई तो पुलिस कमरा नंबर 203 में बंधक बना कर रखे गए अजय प्रताप तक पहुंच गई.

उन के कमरे में 3 लोग मिले, जिन में से एक राकेश कुमार उर्फ रिंकू फौजी निवासी गांव चेहडका, जिला भिवाड़ी, राजस्थान था. दूसरा युवक दीपक पुत्र राजेश कुमार भी इसी गांव का रहने वाला था, जबकि इसी कमरे में एक महिला सुनीता गुर्जर उर्फ बबली मिली जो आगाहपुर गांव में सेक्टर 41 की ही रहने वाली थी.

पुलिस ने अचानक उस कमरे में धड़ाधड़ प्रवेश किया और अजय प्रताप को अपने कब्जे में ले लिया. साथ ही कमरे में मौजूद तीनों लोगों को हिरासत में लिया तो सुनीता गुर्जर उर्फ बबली भड़क उठी. उस ने पुलिस को हड़काना शुरू कर दिया, ‘‘औफिसर, इस बदतमीजी की वजह जान सकती हूं?’’

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‘‘मैडम, बदतमीजी की वजह आप को पता होगी, फिर भी हम थाने चल कर इस की असली वजह बताएंगे.’’ रणविजय सिंह ने जवाब दिया.

जब पुलिस ने उन्हें बताया कि उन्हें अजय प्रताप का अपहरण कर फिरौती मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है तो सुनीता गुर्जर फिर भड़क उठी. उस ने अधिकारियों को धमकाते हुए बताया कि वह बीजेपी की नेता और सोशल वर्कर है. उन की इस गलती की सजा अभी दिलवाएगी.

इस के बाद उस ने कुछ लोगों को फोन किया और फोन करने के बाद धमकी दी कि अभी देखो, थोड़ी देर में तुम को तुम्हारे बाप लोग फोन करेंगे तो देखना तुम कैसे छोड़ोगे.

एडिशनल डीसीपी रणविजय सिंह ने अपनी पुलिस की नौकरी में ऐसे बहुत से छुटभैए नेता देखे थे जो किसी अपराध में पकडे़ जाने पर पुलिस को ऐसी गीदड़भभकियां देते हैं. उन्हें इस बात का भी इल्म था कि कई बार पुलिस ऐसी धमकियों के प्रभाव में आ कर ऐसे लोगों को छोड़ देती है. लेकिन यह मामला जिस तरह का था, उसे देखने के बाद रणविजय सिंह किसी धमकी में नहीं आए और सभी को हिरासत में ले कर पुलिस थाना सेक्टर 49 लौट आए.

पुलिस टीम अपहृत अजय प्रताप सिंह की होंडा सिटी कार के साथ होटल के रजिस्टर तथा होटल के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी साथ ले आए.

कैसे फंसे अजय

जब पुलिस ने थाने आ कर थोड़ी सी सख्ती बरती और आरोपियों को सुषमा वर्मा से की गई बातचीत की काल रिकार्डिंग तथा उन के फोन की काल डिटेल्स दिखा कर पुख्ता सबूत सामने रखे तो आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और खुलासा किया कि उन्होंने अपने 2 फरार साथियों के साथ मिल कर अजय प्रताप को हनीट्रैप में फंसाया था और उन से मोटी फिरौती वसूलने की योजना थी.

अजय प्रताप ने बताया कि उन्होंने गूगल पर मसाज कराने वाले किसी पार्लर का नंबर सर्च किया था, जिस के बाद उन्हें जस्ट डायल पर नोएडा में मसाज कराने वाला एक नंबर हासिल हुआ. उन्होंने उस नंबर पर फोन किया था.

26 सितंबर को शाम 4 बजे अजय ने जब मसाज सेवा देने वाले उस पार्लर के नंबर पर बात की तो दूसरी तरफ से बात करने वाले ने बताया कि उन के पास एक से एक खूबसूरत लड़कियां है जो सिर्फ मसाज ही नहीं करती बल्कि जिस्म की भूख भी मिटाती हैं.

फोन करने वाले ने इतना प्रलोभन दिया कि अजय प्रताप का मन मचलने लगा. उन्होंने उसी वक्त मसाज कराने का इरादा कर लिया, जब फोन करने वाले ने उन्हें वाट्सऐप पर उन लड़कियों की फोटो भेजीं, जिन में से किसी से भी वे मसाज करा सकते थे.

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बस उन्हीं लडकियों की खूबसूरत और मादक तसवीरें देख कर अजय प्रताप घर का सामान लाने के बहाने कार ले घर से निकल पडे़. लेकिन घर से निकल कर जब उन्होंने मसाज वाले नंबर पर फोन कर के पूछा कि कहां आना है तो उन्हें लौजिक्स सिटी सेंटर बुलाया गया. वहां उन्हें दीपक नाम का शख्स मिला जो उन्हें सेक्टर 41 के आई ब्लाक में ओयो होटल पर ले आया.

शाम को 6 बजे जब वे होटल पहुंचे तो वहां उन की गाड़ी पार्किंग में खड़ी करवा कर इसी होटल के रूम नंबर 203 में ले जाया गया, जहां पहले से ही राकेश फौजी उर्फ रिंकू और बरौला नोएडा के 48बी में रहने वाला अनिल शर्मा और सेक्टर 27 के मकान नंबर 618 में रहने वाला आदित्य मौजूद थे.

वहां पहुंचने के कुछ देर तक तो अजय प्रताप उन चारों से बात करते रहे. जब काफी वक्त गुजर गया और मसाज करने वाली लड़कियां नहीं आईं तो उन्होंने उन लड़कियों को बुलाने को कहा, जिन के फोटो उन्हें भेजे गए थे. उस के बाद अचानक उन चारों का गिरगिट की तरह रंग बदल गया.

उन लोगों ने अजय प्रताप को कुरसी से बांध दिया और धमकी देने लगे कि परिवार के होते हुए वह लड़कियों से मसाज के नाम पर अय्याशी करता है तो अजय प्रताप के होश उड़ गए. क्योंकि उन्हें सपने में गुमान नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है.

होटल के कमरे में मौजूद चारों लोगों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया कि वे थाने में फोन कर के पुलिस को बुलाएंगे और उसे पुलिस के हवाले कर देंगे.

उन्होंने अजय प्रताप की काल रिकौर्डिंग सुनवाई तो वे और ज्यादा डर गए. अपने ओहदे की संवेदनशीलता और पारिवारिक बदनामी के कारण वह उन के आगे हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाने लगे.

उसी वक्त उन में से किसी एक के फोन करने पर एक महिला ने आई, जिसे देख कर वे सभी मैम… मैम कह कर बात करने लगे. उस महिला के बारे में चारों ने बताया कि वह नोएडा क्राइम ब्रांच की इंसपेक्टर हैं और उसे पकड़ने के लिए आई हैं.

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सुनीता ने खुद को इंसपेक्टर बता कर अजय प्रताप को धमकाना शुरू कर दिया और उन्हें आतंकित करने लगी कि जब वह गिरफ्तार हो कर अय्याशी के जुर्म में जेल जाएगा तो उस की ऐसी बदनामी होगी कि न उस का परिवार रहेगा, न ही नौकरी.

जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

ओयो होटल का रंगीन अखाड़ा : भाग 2

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

रात को करीब 10 बजे अजय का अपहरण करने वालों से सुषमा की ये आखिरी बात थी.

इसी के बाद से सुषमा की जान गले में अटकी थी और वह पूरी रात बेचैनी से घर के भीतर टहलती रही. उसे बारबार लग रहा था कि कहीं कोई वाकई उस की एकएक गतिविधि पर नजर तो नहीं रख रहा.

सोचते-सोचते रात आंखोंआंखों में बीत गई. आखिरकार सुषमा ने सुबह अपने पति के बौस को फोन कर के सारी बात बताई. उन्होंने कहा कि वह घर में रहें, कुछ ही देर में पुलिस पहुंच जाएगी.

ठीक वैसा ही हुआ, जैसा अजय के बौस ने कहा था. सुषमा का घर जिस इलाके में है, वह सैंट्रल नोएडा पुलिस के अंडर में आता है. कुछ ही देर में उस के घर की डोरबैल बजी, उस ने दरवाजा खोला तो सादे लिबास में नोएडा पुलिस के एडीशनल कमिश्नर लव कुमार, सैंट्रल नोएडा पुलिस डीसीपी राजेश कुमार सिंह, एडीशनल कमिश्नर रणविजय सिंह, एसीपी विमल कुमार सिंह और सेक्टर 49 थाने के एसओ सुधीर कुमार सिंह सामने खड़े थे.

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दरअसल, सुषमा ने जब अपने पति के बौस को अजय के किडनैप होने की जानकारी और इस की एवज में फिरौती मांगने की बात बताई तो डीआरडीओ की तरफ से नोएडा के कमिश्नर आलोक सिंह को फोन कर के इस मामले में गोपनीय ढंग से काम कर के जल्द से जल्द अजय प्रताप सिंह को अपहर्त्ताओं के कब्जे से मुक्त कराने को कहा गया.

डीआरडीओ का एक्शन

डीआरडीओ देश के सुरक्षा उपकरणों व प्रतिष्ठानों से जुड़ा ऐसा संगठन है जो रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है. अजय प्रताप सिंह इसी संस्था से जुड़े वैज्ञानिक थे. उन के पास संस्था से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां भी रहती थीं.

इसलिए जैसे ही पुलिस कमिश्नर को यह जानकारी मिली, उन्होंने एडिशनल कमिश्नर लव कुमार को सारी जानकारी दे कर बेहद गोपनीय ढंग से अजय प्रताप को अपहर्त्ताओं के कब्जे से मुक्त कराने का औपरेशन शुरू करने का आदेश दिया.

इस के बाद लव कुमार ने तड़के ही तमाम अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई और सभी अफसरों को सादे कपड़ों में अजय प्रताप के घर पहुंचने को कहा.

अधिकारियों ने अपना परिचय देने के बाद जब सुषमा से अजय प्रताप सिंह के अपहरण से जुड़ी सारी जानकारियां मांगी तो उन्होंने वह पूरा घटनाक्रम बयान कर दिया, जो अब तक हुआ था.

पुलिस ने सुषमा से वे दोनों नंबर हासिल कर लिए, जिन पर पहले पति अजय प्रताप से बात हुई थी और दूसरी बार अपहर्त्ता ने फोन कर के रकम की मांग की थी. सुषमा वर्मा से पुलिस ने एक लिखित शिकायत भी ले ली. सादे लिबास में पुलिस के कुछ लोगों और महिला पुलिस की कुछ तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को सुषमा के पास छोड़ कर पुलिस टीम वापस लौट गई.

सुषमा की शिकायत पर उसी दिन थाना 49 पर भादंसं की धारा 364ए के तहत फिरौती के लिए अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया.

डीसीपी राजेश कुमार सिंह ने एडिशनल डीसीपी रणविजय सिंह की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन कर दिया. एसीपी विमल कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित इस टीम में थाना सेक्टर 49 के थानाप्रभारी सुधीर कुमार सिंह के अलावा एसआई विकास कुमार, महिला एसआई प्रीति मलिक, हैड कांस्टेबल प्रभात कुमार, जय विजय, कांस्टेबल सुबोध कुमार, सुदीप कुमार,अंकित पंवार और महिला कांस्टेबल रेनू यादव को शामिल किया गया.

इस के अलावा दूसरी स्टार टू टीम के एसआई शावेज खान तथा जोन फर्स्ट की सर्विलांस टीम के एसआई नवशीष कुमार को शामिल किया गया.

सभी टीमों को बता दिया गया था कि मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए बिना विलंब किए और बिना किसी को भनक लगे सावधानी से औपरेशन को अंजाम देना है.

गठित की गई टीमों में काम का बंटवारा कर दिया गया कि किसे इस औपरेशन में क्या भूमिका निभानी है.

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एडिशनल डीसीपी रणविजय सिंह ने गठित की गई टीमों के साथ कोऔर्डिनेशन का जिम्मा खुद संभाला लिया. सर्विलांस टीम ने सुषमा वर्मा से मिले दोनों मोबाइल नंबरों के साथ अजय प्रताप सिंह के नंबर की काल डिटेल्स निकाली और तीनों नंबरों को सर्विलांस पर लगा कर निगरानी शुरू कर दी.

स्टार टू की टीम ने फिरौती के लिए अपहरण करने वाले बदमाशों की धरपकड़ और उन के ठिकानों पर छापेमारी का काम शुरू कर दिया. जबकि इस मामले के जांच अधिकारी थानाप्रभारी सुधीर कुमार सिंह ने अपने थाने की टीम के साथ सर्विलांस टीम से मिल रही जानकारी के आधार पर धरपकड़ शुरू कर दी.

सर्विलांस टीम को पता चला कि शाम को 5 बजे के बाद जब अजय प्रताप सिंह का फोन बंद हुआ था, तो उस से पहले उन्होंने आखिरी बार 3 नंबरों पर बात की थी. उन सभी नंबरों की लोकेशन सेक्टर 41 में आगाहपुर के पास बने ओयो होटल की पाई गई. इतना ही नहीं, फोन बंद होते समय अजय प्रताप के फोन की लोकेशन भी पुलिस को इसी होटल की मिली.

पुलिस को मिली राह

जानकारी बेहद महत्त्वपूर्ण थी, लेकिन इस पर ठोस काररवाई करने से पहले अधिकारी यह पुष्टि कर लेना चाहते थे कि उक्त होटल से अपहरण करने वालों का कोई वास्ता है या नहीं. क्योंकि अगर सर्विलांस के आधार पर वहां छापा मारा जाता और अजय प्रताप नहीं मिलते तो उन की जान को खतरा हो सकता था.

लिहाजा अधिकारियों ने एसओ सुधीर कुमार की टीम के एक तेजतर्रार हैड कांस्टेबल जय विजय सिंह को फरजी ग्राहक बना कर ओयो होटल भेजा. जय विजय सिंह ने सेक्टर 41 के ओयो होटल में पहुंच कर वहां एक कमरा बुक कराया और खुद को काम के सिलसिले में पूर्वी उत्तर प्रदेश से आया हुआ बताया.

कमरा बुक करने के बाद जब जय विजय ने होटल में चल रही गतिविधियों की निगरानी शुरू की तो दूसरी मंजिल पर बने 2 कमरों के आसपास कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखीं.

जय विजय ने होटल की पार्किंग की छानबीन की तो वहां अजय प्रताप सिंह की वह होंडा सिटी कार भी खड़ी दिखाई दी, जिस का नंबर सुषमा वर्मा से मिला था.

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जय विजय को जब यकीन हो गया कि हो न हो अजय प्रताप को ओयो होटल के अंदर ही छिपाकर रखा गया है तो उस ने अधिकारियों को सूचना दे दी.

जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

ओयो होटल का रंगीन अखाड़ा : भाग 1

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

सुषमा की पूरी रात आंखोंआंखों में कट गई, पलभर को भी नहीं सोई वह. कभी घर के भीतर चहलकदमी करने लगतीं तो कभी सोचने लगतीं कि मुश्किल की इस घड़ी में क्या करें, किस की मदद लें. उन की आंखों के सामने बारबार पति का चेहरा घूमने लगता. क्योंकि जो मुसीबत उन के सामने आ खड़ी हुई थी, उस में जरा सी लापरवाही उस की मांग का सिंदूर लील सकती थी, मन में यह खयाल आते ही डर के कारण सुषमा का पूरा शरीर सिहर उठता था.

आखिरकार बहुत सोचने के बाद सुषमा ने कठोर फैसला लिया और अपने पति के बौस को फोन कर के पूरी बात बताई.

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37 वर्षीय अजय प्रताप सिंह अपनी पत्नी सुषमा के साथ नोएडा के सेक्टर-77 की सुपरटेक केपटाउन सोसाइटी में रहते थे. वह डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) दिल्ली में बतौर रिसर्च साइंटिस्ट तैनात थे.

मूलत: उन्नाव के रहने वाले अजय प्रताप 26 सितंबर, 2020 की शाम करीब साढ़े 5 बजे अपनी पत्नी से यह कह कर घर से निकले थे कि घर की जरूरतों का कुछ सामान लेने के लिए मार्किट जा रहे हैं और कुछ देर में वापस लौट आऐंगे.

अजय घर से अपनी होंडा सिटी कार यूपी 14 बीएस 5232 ले कर निकले थे. डेढ़दो घंटे बीत जाने पर सुषमा को चिंता होने लगी कि आखिर अजय ऐसी कौन सी शौपिंग करने के लिए गए हैं कि 2 घंटे से ज्यादा का वक्त बीतने पर भी नहीं लौटे.

सुषमा ने अजय का फोन लगाया तो फोन स्विच्ड औफ मिला. इस के बाद उन की चिंता बढ़ गई. सुषमा बारबार पति का नंबर मिलाती रहीं, मगर फोन स्विच्ड औफ बताता रहा.

इसी तरह करीब ढाई घंटे बीत गए. सुषमा सोच ही रही थी कि ऐसे में क्या करें. अचानक सुषमा के फोन पर एक अंजान नंबर से काल आई तो उस ने यह सोच कर फोन उठा लिया कि हो सकता है अजय का फोन खराब हो गया हो या उस की बैटरी चली गई हो. संभव है वह किसी का फोन ले कर काल कर रहे हों.

फोन उठाते ही उम्मीद के मुताबिक दूसरी तरफ से अजय की आवाज सुनाई दी, जैसे ही अजय ने ‘हैलो मैं अजय बोल रहा हूं’ कहा तो उस के बाद पूरी बात बिना सुने ही सुषमा ने गुस्से में एक ही सांस में कई सवाल कर डाले, ‘‘अजय, तुम कहां हो… तुम्हारा फोन क्यों बंद है… ऐसी कौन सी शौपिंग करने चले गए कि ढाई घंटे होने को हैं और अब फोन कर रहे हो?’’

‘‘अरे मेरी बात तो सुनो, मैं बड़ी मुसीबत में फंस गया हूं.’’ दूसरी तरफ से अजय ने सुषमा के सवालों का जवाब देने के बजाए बीच में उस की बात काट कर कहा तो सुषमा के होश उड़ गए. उस ने अटकती सांसों से पूछा, ‘‘मुसीबत…कैसी मुसीबत?’’

‘‘सुषमा मुझे कुछ लोगों ने पकड़ लिया है और एक कमरे में बंद कर रखा है. वे मुझ से बहुत बड़ी रकम की मांग कर रहे हैं.’’

‘‘कौन लोग हैं वे और उन्होंने तुम्हें क्यों पकड़ा…किस बात के पैसे मांग रहे हैं?’’

घबराहट के कारण सुषमा ने पूरी बात सुने बिना ही सवालजवाब शुरू कर दिए तो अजय ने फिर उस की बात काटी, ‘‘मुझे नहीं पता ये लोग कौन हैं, किसलिए पैसे मांग रहे हैं लेकिन इतना जानता हूं कि ये लोग बहुत खतरनाक हैं और अगर हम ने इन की बात नहीं मानी तो ये लोग मुझे मार देंगे… हो सकता है ये तुम से बात करें. इन की बात सुन लेना बेबी और अगर हो सके तो पूरा कर देना वरना शायद हम दोबारा ना मिल सकें.’’

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दूसरी तरफ से फोन कट गया. इस फोन के बाद तो सुषमा को पूरा ब्रह्मांड घूमता नजर आने लगा. उसे सुझाई नहीं दे रहा था कि वह करे तो क्या करे. सुषमा ने उसी नंबर पर कई बार फोन किया, जिस से अजय ने फोन किया था, लेकिन फोन स्विच्ड औफ मिला.

सुषमा समझ गई कि किसी मुसीबत में फंसने की वजह से ही अजय घर नहीं पहुंचे. अजय की रूआंसी और परेशानी भरी आवाज सुन कर उसे समझ आ गया था कि वह जिन लोगों के चंगुल में हैं, वे सचमुच खतरनाक लोग रहे होंगे.

लेकिन मुश्किल यह थी कि अभी तक उसे पूरा मामला समझ नहीं आया था कि उन्होंने अजय को किसलिए बंधक बनाया हुआ है. पैसे क्यों मांग रहे हैं और उन्होंने कितनी रकम मांगी है.

पति के लिए परेशान पत्नी

सुषमा यह सब सोच ही रही थी कि कुछ देर बाद उस के फोन पर फिर से एक अंजान नंबर से काल आई. इस बार नंबर वह नहीं था, जिस से अजय ने बात की थी.

सुषमा ने यह सोच कर फोन उठा लिया कि हो सकता है अजय को बंधक बनाने वाले लोग ही दूसरे नंबर से बात कर रहे हों. सुषमा की शंका सच निकली. फोन पर एक पुरुष ने कड़कती हुई आवाज में कहा कि अजय उन के कब्जे में है और अपने पति से बात करने के बाद वह ये तो समझ ही गई होंगी कि वह जिंदा और सहीसलामत हैं.

दूसरी तरफ से फोन करने वाले ने धमकी दी कि अगर अगले 24 घंटे में उस ने 10 लाख रुपए का इंतजाम कर के रकम नहीं दी तो शायद उसे उस का पति जिंदा नहीं मिलेगा.

फोन करने वाले ने जल्द से जल्द 10 लाख रुपए का इंतजाम करने के लिए कहा, साथ ही धमकी भी दी कि अगर इस बारे में पुलिस को सूचना दी या कोई और चालाकी की तो उस तक अजय की लाश ही पहुंचेगी.

फोन करने वाले ने जब यह कहा कि उन के आदमी हर जगह नजर रख रहे हैं कोई भी चालाकी की तो तुरंत यह खबर उस तक पहुंच जाएगी. यह सुन कर सुषमा का कलेजा मुंह को आ गया. फोन सुनते ही उस ने सुनसान घर में इधरउधर देखा कि कोई आदमी उन के घर में तो नहीं छिपा है.

‘‘देखो भैया, मैं आप की सारी मांग पूरी कर दूंगी लेकिन यह तो बता दो, आप पैसे किस बात के मांग रहे हो… आखिर मेरे हसबैंड ने कौन सी गलती की है? क्या आप का उन से कोई उधार का लेनदेन है?’’

सुषमा ने फोन करने वाले की बात को बीच में काटते हुए हिम्मत जुटा कर सहमते हुए सवाल किया तो दूसरी तरफ से कहा गया, ‘‘मैडम ये नोएडा में रहने का टैक्स है और तुम्हारे पति की ठरक का जुरमाना भी…

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‘‘अब ज्यादा सवाल न कर के पैसे का इंतजाम करो… टाइम कम है हमारे पास… रकम कैसे और कहां लेनी है इस के लिए तुम्हें कल फोन करेंगे लेकिन याद रखना हमारे लोग तुम पर नजर रख रहे हैं.’’ कहते हुए दूसरी तरफ से फोन काट दिया गया.

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