Neha Kakkar ऑडिशन के दौरान इस वजह से लगी थीं रोने

नेहा कक्कड़ का ऑडिशन वीडियो सोशल मीडिया पर  सुर्खियों में छाई हुई  है. दरअसल यह वीडियो है उस टाईम की है, जब नेहा 11वीं क्लास में थीं. और आज नेहा कक्कड़ ‘इंडियन आइडल’ शो की जज हैं.

लेकिन नेहा के जीवन में एक ऐसा भी वक्त आया था जब वह इस शो में शामिल होने के लिए कॉम्पिटिशन की भीड़ की लाइन में खड़ी थीं.

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि नेहा एक आम कंटेस्टेंट की तरह अपना ऑडिशन देने पहुंची हैं. यहां नेहा ज्यादा कॉन्फिडेंट भी नहीं दिखाई दे रही हैं.

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इस वह वीडियो में नेहा कक्कड़ ये कहती हुई नजर आ रही हैं कि मैं चाहती हूं कि लोग मुझे देखे और कहे कि उस लड़की को देखो, वो जा रही है नेहा कक्कड़. वीडियो में आप ये भी देख सकते हैं कि नेहा को गलत गाना सिलेक्ट करने के कारण, उन्हें सोनू निगम, अनु मलिक से डांट पड़ मिल रही है.

 

इसमें अनु मलिक कहते हैं- तेरी आवाज सुनकर मुझे लगता है मैं अपने मुंह पर मारूं थप्पड़ यार, क्या हो गया तेरे को? जज उनसे सवाल करते हैं कि उन्होंने यह गाना क्यों चूज़ किया?

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यह सब सुनकर नेहा वहां से रोते हुए बाहर निकलती हैं. तो वहीं आज नेहा कक्कड़ ने अपनी आवाज से हर किसी को दीवाना बना लिया है. नेहा कक्कड़ मयूजिक इंडस्ट्री में कफी मशहूर हैं.

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बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह अपने लाइफ से जुड़े पलों को फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं. और फैंस को भी उनके पोस्ट का बेसब्री से इंतजार रहता है.

अब एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा पोस्ट किया है, जिससे ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनके पर्सनल लाइफ में कुछ परेशानी है.

हाल ही में सुष्मिता सेन ने एक पोस्ट में ऐसा कुछ लिखा था जिससे फैंस अंदाजा लगा रहे थे कि एक्ट्रेस और उनके ब्वॉयफ्रेंड रोहमन के बीच ब्रेकअप हो गया है.

तो वहीं एक बार फिर सुष्मिता ने एक और पोस्ट किया है, जिससे लोगों की कंफ्यूजन बढ़ गई है. जी हां, एक्ट्रेस  ने सोशल मीडिया पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है.

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इस तस्वीर में सुष्मिता के साथ दो लड़कियां दिखाई दे रही हैं. और इस पोस्ट को इंस्टाग्राम पर  को शेयर करते हुए सुष्मिता सेन ने कैप्शन में लिखा है ‘मां और बेटियां’ हमें एक दूसरे का सहारा मिला!

बता दें कि एक्ट्रेस का यह पोस्ट जमकर वायरल हो रहा है. इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने कमेंट किया है. और ये भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि सुष्मिता और रोहमन के बीच ब्रेकअप हो चुका है.

एक्ट्रेस के पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा है कि, ‘उम्मीद करते हैं कि आप दोनों अलग नहीं होंगे.’ तो वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है कि, ‘ मैं उम्मीद करता हूं कि आपके पार्टनर के साथ सब ठीक हो.’

 

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इससे पहले सुष्मिता सेन ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की. जिसमें उन्होंने लिखा ये लिखा था कि ‘ दिक्कत ये है कि औरतों को लगता है कि वो बदल जाएगा, वो नहीं बदलेगा. पुरुष जो गलती करते हैं, वह ये है कि उन्हें लगता है, वह कभी भी छोड़कर नहीं जाएगी,  लेकिन वो चली जाएगी.

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सुष्मिता ने इस पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा है,  कहानी का सार ये है कि वो कभी नहीं बदलेगा और वो चली जाएगी. इसी पोस्ट के साथ उन्होंने कुछ इमोजी भी शेयर की है. आपको बता दें कि सुष्मिता सेन और रोहमन शॉल काफी समय से एक दूसरे को डेट कर रहे हैं.

मजबूत इरादों वाली श्रेष्ठा सिंह

लेखक- पुष्कर

यूपी के बुलंदशहर में आयरन लेडी के नाम से मशहूर श्रेष्ठा सिंह का लक्ष्य एकदम स्पष्ट था और उसे पाने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत भी की थी. जिस की चमक उन के व्यक्तित्व में बखूबी झलकती थी. इसीलिए प्रशिक्षण के बाद जब उन की पहली पोस्टिग स्याना में बतौर सीओ हुई तो उन का कानून का पालन करने का लक्ष्य इरादों की मजबूती बन गया.

23 जून, 2017 को स्याना में चेकिंग के दौरान भाजपा, नेता प्रमोद लोधी को पुलिस ने बिना हेलमेट और बिना कागजात की बाइक चलाते हुए रोक लिया. जब चालान करने की बात आई तो नेता जी श्रेष्ठा सिंह से उलझ बैठे.

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प्रमोद लोधी जिला पंचायत सदस्या प्रवेश के पति थे और स्वयं भी नेता थे. लेकिन श्रेष्ठा सिंह ने उन की किसी भी धमकी की परवाह नहीं की. उन्होंने सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई जिस के बाद प्रमोद लोधी को गिरफ्तार कर लिया गया.

उन्हें कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया गया तो वहां बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक पहुंच कर नारेबाजी करने लगे. तब श्रेष्ठा सिंह ने हंगामा कर रहे नेताओं और समर्थकों से कहा कि वे लोग मुख्यमंत्री जी के पास जाएं और उन से लिखवा कर लाएं कि पुलिस को चेकिंग का कोई अधिकार नहीं है. वो गाडि़यों की चेकिंग न करें.

इस मामले के 8 दिन बाद ही श्रेष्ठा ठाकुर का तबादला स्याना से बहराइच (नेपाल बौर्डर से सटे) कर दिया गया था. जिस की जानकारी उन्होंने अपने एएस ठाकुर नाम के फेसबुक अकाउंट पर देते हुए लिखा,‘मैं खुश हूं. मैं इसे अपने अच्छे कामों के पुरस्कार के रूप से स्वीकार कर रही हूं.’

आगे की लाइन में उन्होंने अपना लक्ष्य भी स्पष्ट करते हुए लिखा, ‘जहां भी जाएगा, रोशनी लुटाएगा. किसी चराग का अपना मकां नहीं होता.’

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कानपुर में पलीबढ़ी श्रेष्ठा ने कानून की अहमियत शिक्षा प्राप्ति के दौरान ही समझ ली थी. जब उन के साथ 2 बार छेड़छाड़ की घटना हुई थी. पुलिस ने मदद के नाम पर औपचारिकता भर निभा दी थी.

तभी श्रेष्ठा ठाकुर ने अपना लक्ष्य तय कर लिया था, एक पुलिस अधिकारी बनने का और अधिकारी बनने के बाद उन्होंने जता दिया कि कानून की धाराएं आम से ले कर खास व्यक्ति तक के लिए एक जैसी हैं. जो उन में भेदभाव करता है, कानून का वह रक्षक अपनी वर्दी के साथ इंसाफ नहीं करता.

Crime- ब्लैक मेलिंग का फल!

स्वयं को होशियार, ताकतवर और सक्षम समझकर जब लालच के गंदे भंवर में फंस, कोई ब्लैकमेलिंग अर्थात भयदोहन का खेल खेलने लगता है तो अंजाम के रूप में “फल” जेल ही मिलती है.

यह एक बार पुनः छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में घटित एक सच्ची घटना से सिद्ध हो गया. केशकाल थाना क्षेत्र में एक युवती को पचास हजार रुपए ब्लैकमेल कर वसूलने वाले साथ ही दुष्कर्म के नाले में डुबकी लगाने वाले दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया.

पुलिस ने हमारे संवाददाता को बताया कांकेर जिले के केशकाल के बोरगांव वार्ड क्रमांक 6 में  रात 8 बजे एक युवती अपने दोस्त  के घर की चाबी मांग अपने प्रेमी के संग रुकी थी.

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जहां भनक मिलने के बाद तकरीबन रात एक बजे बाजू के रूम में रहने वाले दीपंकर विश्वास ने छुप कर  युवक-युवती का अंतरंग दृश्यों को कैमरे में कैद कर वीडियो बना लिया.

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जिसके बाद दीपंकर विश्वास ने फोन से अपने दोस्त वेंकट विजय को सूचना देकर उसे भी बुला. जिसके बाद दोनों ने दरवाजा खुलवाया और प्रेमी को अपने कमरे में ले जा उसे वीडियो दिखा कर 50 हजार रुपए मोबाइल से अपने खाते में ले लिए और प्रेमी को घर से भगाकर लड़की को वीडियो दिखाकर बारी-बारी से दुष्कर्म किया.

एसडीओपी अमित पटेल ने बताया कि इस बीच प्रेमी ने थाना केशकाल पहुंच घटना की जानकारी दी तो रात्रि पेट्रोलिंग में तैनात पुलिसकर्मियों ने आरोपियों को गिरफ्तार किया.पीड़िता सिमरन (बदला हुआ नाम) ने थाने में बताया कि पास के ही गांव में पुलिया बनाई जा रही है. जिसके ठेकेदार  के साथ वह रात्रि में अपने दोस्त के घर की चाबी लेकर वहां ठहरने गई थी. जहां वे दोनों बात कर रहे थे. इतने में दरवाजा खुलवा दोनों आरोपियों ने ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और प्रेमी को भगाकर मेरे साथ दुष्कर्म भी किया.

अंतरंग वीडियो और रेप

पहले तो आरोपी ने  युवती सिमरन का अंतरंग दृश्यों का वीडियो बना लिया फिर  50 हजार रूपये ले लिए, यह काम कथित रूप से  दो लोगों जिनमें एक डाक्टर व एक शिक्षक  है ने मिलकर किया. यही नहीं मौका देख कर सिमरन से बलात्कार भी किया. घटना के पश्चात बॉयफ्रेंड के द्वारा सिमरन को हिम्मत बंधाकर  शिकायत दर्ज करवाई गई परिणाम स्वरूप समाज में आदर्श के रूप में प्रस्तुत डाक्टर व शिक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल के सीखचों में डाल दिया है. महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में एक शिक्षक भी है, जबकि इसका मास्टरमाइंड एक कथित डाक्टर है.

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पुलिस के मुताबिक सिमरन अक्सर अपने बॉयफ्रेंड के साथ दीपांकर विश्वास के मकान के पास आया करती थी. दीपांकर की निगाह कई दिनों से शिकार पर थी. मौका मिलते ही उसने छुपकर दोनों का निजी क्षणों का दृश्य कैमरे में कैद कर लिया. इसके बाद उसे लगा कि क्यों ना इनसे रूपए ऐंठ लिए जाए. दीपंकर खुद को डाक्टर बताता था और एक क्लिनिक भी चलाता है. युवती का विडियो बनाने वाला झोलाछाप डाक्टर दीपंकर लगातार इस बात की धमकी दे रहा था कि वो इसे वायरल कर देगा, यही नहीं लड़के से मिलने उसके कमरे में आती हो, ये जानकारी परिवारवालों को भी दे देगा.बदनामी के डर से लड़की ने अपने दोस्त की मदद से उस कथित डाक्टर को 50 हजार रूपये दे भी दिये थे. लेकिन डाक्टर मान नहीं रहा था उसकी भूख बढ़ती चली जा रही थी.

एक दिन  जब युवती अपने कमरे में थी, तभी अचानक से कथित डाक्टर दीपंकर अपने शिक्षक साथ वेंकट  के साथ युवती के कमरे में पहुंच गया.दोनों आरोपियों ने लड़की को जान से मारने की धमकी दी और फिर दोनों आरोपियों ने युवती के साथ रेप किया. इस तरह दीपांकर और उसका साथी दोनों अपराध के दलदल में फंसते चले गए और आज जेल की हवा खा रहे हैं.

Valentine’s Special- अंतराल: पंकज ने क्यों किया शादी से इनकार

Valentine’s Special- अंतराल: भाग 3

कुछ दिन बाद उन के फोन करने पर पापा, मां और चारू को ले कर मुंबई आ गए थे क्योंकि सोफिया के मम्मीपापा भी भारत आ गए थे.

मुंबई पहुंचने पर निश्चित हुआ कि अगले दिन लंच सब लोग एक ही होटल में करेंगे और दोनों परिवार वहीं एकदूसरे से मिल कर विवाह की संक्षिप्त रूपरेखा तय कर लेंगे. दोनों परिवार जब मिले तो सामान्य शिष्टाचार के बाद पापा ने ही बात शुरू की थी, ‘आप को मालूम ही है कि आप की बेटी और मेरा बेटा एकदूसरे को पसंद करते हैं. हम लोगों ने उन की पसंद को अपनी सहमति दे दी है. इसलिए आप अपनी सुविधा से कोई तारीख निश्चित कर लें जिस से दोनों विवाह सूत्र में बंध सकें.

पापा के इस सुझाव के उत्तर में सोफिया के पापा ने कहा था, ‘पर इस के लिए मेरी एक शर्त है कि शादी के बाद आप के बेटे को हमारे साथ जरमनी में ही रहना होगा और इन की जो संतान होगी वह भी जरमन नागरिक ही कहलाएगी. आप अपने बेटे से पूछ लें, उसे मेरी शर्त स्वीकार होने पर ही इस शादी के लिए मेरी अनुमति हो सकेगी.’

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उन की शर्त सुन कर सभी चौंक गए थे. सोफिया को भी अपने पापा की यह शर्त अच्छी नहीं लगी थी. उधर वह सोच रहे थे कि नहीं, इस शर्त के लिए वह हरगिज सहमत नहीं हो सकते. वह क्या इतने खुदगर्ज हैं जो अपनी खुशी के लिए अपने मांबाप और बहन को छोड़ कर विदेश में रहने चले जाएं? पढ़ते समय वह सोचा करते थे कि जिस तरह मम्मीपापा ने उन के जीवन को संवारने में कभी अपनी सुखसुविधा की ओर ध्यान नहीं दिया, उसी तरह वह भी उन के जीवन के सांध्यकाल को सुखमय बनाने में कभी अपने सुखों को बीच में नहीं आने देंगे.

उन्होंने दूर खड़ी उदास सोफिया से कहा, ‘तुम्हारे पापा की शर्त के अनुसार मुझे अपने परिवार और देश को छोड़ कर जाना कतई स्वीकार नहीं है, इसलिए अब आज से हमारे रास्ते अलग हो रहे हैं, पर मेरी शुभकामनाएं हमेशा तुम्हारे साथ हैं.’

दरवाजे की घंटी बजी तो अपने अतीत में खोए पंकज अचानक वर्तमान में लौट आए. देखा, पोस्टमैन था. पत्नी की कुछ पुस्तकें डाक से आई थीं. पुस्तकें प्राप्त कर, अधूरे पत्र को जल्द पूरा किया और पोस्ट करने चल दिए.

कुछ दिनों बाद, देर रात्रि में टेलीफोन की घंटी बजी. उठाया तो दूसरी ओर से सोफिया की आवाज थी. कह रही थी कि पत्र मिलने पर बहुत खुशी हुई. अगले मंडे को बेटी के साथ वह मुंबई पहुंच रही है. उसी पुराने होटल में कमरा बुक करा लिया है, पर व्यस्तता के कारण केवल एक सप्ताह का समय ही निकाल पाई है. उम्मीद है आप का परिवार भी घूमने में हमारे साथ रहेगा.

टेलीफोन पर हुई पूरी बात, सुबह पत्नी और बेटे को बतलाई. वे दोनों भी घूमने के लिए सहमत हो गए. सोफिया के साथ घूमते हुए पत्नी को भी अच्छा लगा. अभिषेक और जूली ने भी बहुत मौजमस्ती की. अंतिम दिन मुंबई घूमने का प्रोग्राम था. पर सब लोगों ने जब कोई रुचि नहीं दिखाई तो अभिषेक व जूली ने मिल कर ही प्रोग्राम बना लिया.

रात्रि में दोनों देर से लौटे. सोते समय सोफिया ने अपनी बेटी से पूछा, ‘‘आज अभिषेक के साथ तुम दिन भर, अकेले ही घूमती रहीं. तुम्हारे बीच बहुत सी बातें हुई होंगी? क्या सोचती हो तुम उस के बारे में? कैसा लड़का है वह?’’

‘‘मम्मी, अभि सचमुच बहुत अच्छा और होशियार है. एम.बी.ए. के पिछले सत्र में उस ने टाप किया है. आगे बढ़ने की उस में बहुत लगन है.’’

‘‘इतनी प्रशंसा? कहीं तुम्हें प्यार तो नहीं हो गया?’’

‘‘हां, मम्मी, आप का अनुमान सही है.’’

‘‘और वह?’’

‘‘वह भी.’’

‘‘तो क्या अभि के पापा से तुम दोनों के विवाह के बारे में बात करूं?’’

‘‘हां, मम्मी, अभि भी ऐसा ही करने को कह रहा था.’’

‘‘पर जूली, तुम्हारे पापा को तो ऐसा लड़का पसंद है, जो उन के साथ रह कर बिजनेस में उन की मदद कर सके. क्या अभि इस के लिए तैयार होगा.’’

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‘‘क्यों नहीं, यह तो आगे बढ़ने की उस की इच्छा के अनुकूल ही है. फिर वह क्यों मना करने लगा?’’

‘‘भारत छोड़ देने पर, क्या उस के मम्मीपापा अकेले नहीं रह जाएंगे?’’

‘‘तो क्या हुआ? भारत में इतने वृद्धाश्रम किस लिए हैं?’’

‘‘क्या इस बारे में तुम ने अभि के विचारों को जानने का भी प्रयत्न किया?’’

‘‘हां, वह इस के लिए खुशी से तैयार है. कह भी रहा था कि यहां भारत में रह कर तो उस की तमन्ना कभी पूरी नहीं हो सकती. लेकिन मम्मी, अभि की इस बात पर आप इतना संदेह क्यों कर रही हैं?’’

‘‘कुछ नहीं, यों ही.’’

‘‘नहीं मम्मी, इतना सब पूछने का कुछ तो कारण होगा? बतलाइए.’’

‘‘इसलिए कि बिलकुल ठीक ऐसी ही परिस्थितियों में अभि के पापा ने भारत छोड़ने से मना कर दिया था.’’

‘‘पर तब आप ने उन्हें समझाया नहीं?’’

‘‘नहीं, शायद इसलिए कि मुझे भी उन का मना करना गलत नहीं लगा था.’’

‘‘ओह मम्मी, आप और अभि के पापा दोनों की बातें और सोच, मेरी समझ के तो बाहर की हैं. मैं तो सो रही हूं. सुबह जल्दी उठना है. अभि कह रहा था, वह सुबह मिलने आएगा. उसे आप से भी कुछ बातें करनी हैं.’’

बेटी की सोच और उस की बातों के अंदाज को देख, सोफिया को लग रहा था कि पीढ़ी के ‘अंतराल’ ने तो हवा का रुख ही बदल दिया है.

Valentine’s Special- अंतराल: भाग 2

दोपहर में चारू तो अपनी सहेली के साथ बाजार चली गई, मां को फुरसत में देख, वह उन के पास जा कर बैठ गए और बोले, ‘मां, आप से कुछ बात करनी है.’

‘ऐसी कौन सी बात है जिसे मां से कहने में तू इतना परेशान दिख रहा है?’

‘मां…दरअसल, बात यह है कि मुझे मुंबई में एक लड़की पसंद आ गई है.’

मां कुछ चौंकीं तो पर खुश होते हुए बोलीं, ‘अरे, तो अब तक क्यों नहीं बताया? कैसी लगती है वह? बहुत सुंदर होगी. फोटो लाया है? क्या नाम है? उस के मांबाप भी क्या मुंबई में ही रहते हैं? क्या करते हैं वे?’

मां की उत्सुकता और उन के सवालों को सुन कर वह तब मौन हो गए थे. उन्हें इस तरह खामोश देख कर मां बोली थीं, ‘अरे, चुप क्यों हो गया? बतला तो, कौन है, कैसी है?’

‘मां, वह एक जरमन लड़की है, जो रिसर्च के सिलसिले में मुंबई आई हुई है और मेरे होस्टल के पास ही होटल में रहती है. हमारी मुलाकात अचानक ही एक यात्रा के दौरान हो गई थी. मां, कहने को तो सोफिया जरमन है पर देखने में उस का नाकनक्श सब भारतीयों जैसा ही है.’

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अपने बेटे की बात सुन कर मां एकदम सकते में आ गई थीं. कहने लगीं, ‘बेटा, तुम्हारी यह पसंद मेरी समझ में नहीं आई. तुम्हें अपने परिवार में सब संस्कार भारतीय ही मिले पर यह कैसी बात कि शादी एक विदेशी लड़की से करना चाहते हो? क्या मुंबई जा कर लोग अपनी परंपराओं और संस्कृति को भूल कर महानगर के मायाजाल में इतनी जल्दी खो जाते हैं कि जिस लड़की से शादी करनी है उस के घरपरिवार के बारे में जानने की जरूरत भी महसूस नहीं करते? क्या अपने देश में सुंदर लड़कियों की कोई कमी है, जो एक विदेशी लड़की को हमारे घर की बहू बनाना चाहते हो?’

फिर यह कहते हुए मां उठ कर वहां से चली गईं कि एक विदेशी बहू को वह स्वीकार नहीं कर पाएंगी.

शाम को चाय पर फिर एकसाथ बैठे तो मां ने समझाते हुए बात शुरू की, ‘देखो बेटा, शादीविवाह के फैसले भावावेश में लेना ठीक नहीं होता. तुम जरा ठंडे दिमाग से सोचो कि जिस परिवेश में तुम पढ़लिख कर बड़े हुए और तुम्हारे जो आचारविचार हैं, क्या कोई यूरोपीय संस्कृति में पलीबढ़ी लड़की उन के साथ सामंजस्य बिठा पाएगी? माना कि तुम्हें मुंबई में रहना है और वहां यह सब चलता है पर हमें तो यहां समाज के बीच ही रहना है. जब हमारे बारे में लोग तरहतरह की बातें करेंगे तब हमारा तो लोगों के बीच उठनाबैठना ही मुश्किल हो जाएगा. फिर चारू की शादी भी परेशानी का सबब बन जाएगी.’

‘मां, आप चारू की शादी की चिंता न करें,’ वह बोले थे, ‘वह मेरी जिम्मेदारी है और मैं ही उसे पूरी करूंगा. लोगों का क्या? वे तो सभी के बारे में कुछ न कुछ कहते ही रहते हैं. रही बात सोफिया के विदेशी होने की तो वह एक समझदार और सुलझेविचारों वाली लड़की है. वह जल्दी ही अपने को हमारे परिवार के अनुरूप ढाल लेगी. मां, आप एक बार उसे देख तो लें, वह आप को भी अच्छी लगेगी.’

बेटे की बातों से मां भड़कते हुए बोलीं, ‘तेरे ऊपर तो उस विदेशी लड़की का ऐसा रंग चढ़ा हुआ है कि तुझ से कुछ और कहना ही अब बेकार है. तुझे जो अच्छा लगे सो कर, मैं बीच में नहीं बोलूंगी.’

पापा के आफिस से लौटने पर जब उन के कानों तक सब बातें पहुंचीं, तो पहले वह भी विचलित हुए थे फिर कुछ सोच कर बोले, ‘बेटे, मुझे तुम्हारी समझदारी पर पूरा विश्वास है कि तुम अपना तथा परिवार का सब तरह से भला सोच कर ही कोई निर्णय करोगे. यदि तुम्हें लगता है कि सोफिया के साथ विवाह कर के ही तुम सुखी रह सकते हो, तो हम आपत्ति नहीं करेंगे. हां, इतना जरूर है कि विवाह से पहले एक बार हम सोफिया और उस के मातापिता से मिलना अवश्य चाहेंगे.’

पापा की बातों से उन के मन को तब बहुत राहत मिली थी पर वह यह समझ नहीं पाए थे कि उन की बातों से आहत हुई मां को वह कैसे समझाएं?

उन के मुंबई लौटने पर जब सोफिया ने उन से घर वालों की राय के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने कहा था, ‘मैं ने तुम्हारे बारे में मम्मीपापा को बताया तो उन्होंने यही कहा यदि तुम खुश हो तो उन की भी सहमति है और तुम्हारे मम्मीपापा के भारत आने पर उन से मिलने वे मुंबई आएंगे.’

सोफिया से यह सब कहते हुए उन्हें अचानक ऐसा लगा था कि सोफिया के साथ विवाह का निर्णय कर कहीं उन्होंने कोई गलत कदम तो नहीं उठा लिया? लेकिन सोफिया के सौंदर्य और प्यार से अभिभूत हो जल्दी ही उन्होंने अपने इस विचार को झटक दिया था.

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उन के मुंबई लौटने के बाद घर में एक अजीब सी खामोशी छा गई थी. मां और चारू दोनों ही अब घर से बाहर कम ही निकलतीं. उन्हें लगता कि यदि किसी ने बेटे की शादी का जिक्र छेड़ दिया तो वे उसे  क्या उत्तर देंगी?

पापा यह कह कर मां को समझाते, ‘मैं तुम्हारी मनोस्थिति को समझ रहा हूं, पर जरा सोचो कि मेरे अधिक जोर देने पर यदि वह सोफिया की जगह किसी और लड़की से विवाह के लिए सहमत हो भी जाता है और बाद में अपने वैवाहिक जीवन से असंतुष्ट रहता है तो न वह ही सुखी रह पाएगा और न हम सभी. इसलिए विवाह का फैसला उस के स्वयं के विवेक पर ही छोड़ देना हम सब के हित में है.’

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25 साल बाद जरमनी से भेजा सोफिया का पत्र मिला तो पंकज आश्चर्य से भर गए. पत्र उन के गांव के डाकखाने से रीडाइरेक्ट हो कर आया था. जरमन भाषा में लिखे पत्र को उन्होंने कई बार पढ़ा. लिखा था, ‘भारतीय इतिहास पर मेरे शोध पत्रों को पढ़ कर, मेरी बेटी जूली इतना प्रभावित हुई है कि भारत आ कर वह उन सब स्थानों को देखना चाहती है जिन का शोध पत्रों में वर्णन आया है, और चाहती है कि मैं भी उस के साथ भारत चलूं.’

‘तुम कहां हो? कैसे हो? यह वर्षों बीत जाने के बाद कुछ पता नहीं. भारत से लौट कर आई तो फिर कभी हम दोनों के बीच पत्र व्यवहार भी नहीं हुआ, इसलिए तुम्हारे गांव के पते पर यह सोच कर पत्र लिख रही हूं कि शायद तुम्हारे पास तक पहुंच जाए. पत्र मिल जाए तो सूचित करना, जिस से भारत भ्रमण का ऐसा कार्यक्रम बनाया जा सके जिस में तुम्हारा परिवार भी साथ हो. अपने मम्मीपापा, पत्नी और बच्चों के बारे में, जो अब मेरी बेटी जूली जैसे ही बडे़ हो गए होंगे, लिखना और हो सके तो सब का फोटो भी भेजना ताकि हम जब वहां पहुंचें तो दूर से ही उन्हें पहचान सकें.’

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पत्नी और बेटा अभिषेक दोनों ही उस समय कालिज गए हुए थे. पत्नी हिंदी की प्रोफेसर है और बेटा एम.बी.ए. फाइनल का स्टूडेंट है. शनिवार होने के कारण पंकज आज बैंक से जल्दी घर आ गए थे. इसलिए मन में आया कि क्यों न सोफिया को आज ही पत्र लिख दिया जाए.

पंकज ने सोफिया को जब पत्र लिखना शुरू किया तो उस के साथ की पुरानी यादें किसी चलचित्र की तरह उन के मस्तिष्क में उभरने लगीं.

तब वह मुंबई के एक बैंक में प्रोबेशनरी अधिकारी के पद पर कार्यरत थे. अभी उन की शादी नहीं हुई थी इसलिए वह एक होस्टल में रह रहे थे.

सोफिया से उन की मुलाकात एलीफेंटा जाते हुए जहाज पर हुई थी. वह भारत में पुरातत्त्व महत्त्व के स्थानों पर भ्रमण के लिए आई थी और उन के होस्टल के पास ही होटल गेलार्ड में ठहरी थी. सोफिया को हिंदी का ज्ञान बिलकुल नहीं था और अंगरेजी भी टूटीफूटी ही आती थी. उन के साथ रहने से उस दिन उस की भाषा की समस्या हल हो गई तो वह जब भी ऐतिहासिक स्थानों को घूमने के लिए जाती, उन से भी चलने का आग्रह करती.

सोफिया को भारत के ऐतिहासिक स्थानों के बारे में अच्छी जानकारी थी. उन से संबंधित काफी साहित्य भी वह अपने साथ लिए रहती थी, इसलिए उस के साथ रहने पर चर्चाओं में उन को आनंद तो आता ही था साथ ही जरमन भाषा सीखने में भी उन्हें उस से काफी मदद मिलती.

साथसाथ रहने से उन दोनों के बीच मित्रता कुछ ज्यादा बढ़ने लगी. एक दिन सोफिया ने अचानक उन के सामने विवाह का प्रस्ताव रख उन्हें चौंका दिया, और जब वह कुछ उत्तर नहीं दे पाए तो मुसकराते हुए कहने लगी, ‘जल्दी नहीं है, सोच कर बतलाना, अभी तो मुझे मुंबई में कई दिनों तक रहना है.’

यह सच है कि सोफिया के साथ रहते हुए वह उस के सौंदर्य और प्रतिभा के प्रति अपने मन में तीव्र आकर्षण का अनुभव करते थे पर विवाह की बात उन के दिमाग में कहीं दूर तक भी नहीं थी, ऐसा शायद इसलिए भी कि सोफिया और अपने परिवार के स्तर के अंतर को वह अच्छी तरह समझते थे. कहां सोफिया एक अमीर मांबाप की बेटी, जो भारत घूमने पर ही लाखों रुपए खर्च कर रही थी और कहां सामान्य परिवार के वह जो एक बैंक में अदने से अधिकारी थे. प्रेम के मामले में सदैव दिल की ही जीत होती है, इसलिए सबकुछ जानते और समझते हुए भी वह अपने को सोफिया से प्यार का इजहार करने से नहीं रोक पाए थे.

उन दिनों मां ने अपने एक पत्र में लिखा था कि आजकल तुम्हारे विवाह के लिए बहुत से लड़की वालों के पत्र आ रहे हैं, यदि छुट्टी ले कर तुम 2-4 दिन के लिए घर आ जाओ तो फैसला करने में आसानी रहेगी. तब उन्होंने सोचा था कि जब घर पहुंच कर मां को बतलाएंगे कि मुंबई में ही उन्होंने एक लड़की सोफिया को पसंद कर लिया है तो मां पर जो गुजरेगी और घर में जो भूचाल उठेगा, क्या वह उसे शांत कर पाएंगे पर कुछ न बतलाने पर समस्या क्या और भी जटिल नहीं हो जाएगी…

तब छोटी बहन चारू ने फोन किया था, ‘भैया, सच कह रही हूं, कुछ लड़कियों की फोटो तो बहुत सुंदर हैं. मां तो उन्हें देख कर फूली नहीं समातीं. मां ने कुछ से तो यह भी कह दिया कि मुझे दानदहेज की दरकार नहीं है, बस, घरपरिवार अच्छा हो और लड़की उन के बेटे को पसंद आ जाए…’

बहन की इन चुहल भरी बातों को सुन कर जब उन्होंने कहा कि चल, अब रहने दे, फोन के बिल की भी तो कुछ चिंता कर, तो चहकते हुए कहने लगी थी, ‘उस के लिए तो मम्मीपापा और आप हैं न.’

मां को अपने आने की सूचना दी तो कहने लगीं, ‘जिन लोगों के प्रस्ताव यहां सब को अच्छे लग रहे हैं उन्हें तुम्हारे सामने ही बुला लेंगे, जिस से वे लोग भी तुम से मिल कर अपना मन बना लें और फिर हमें आगे बढ़ने में सुविधा रहे.’

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‘नहीं मां, अभी किसी को बुलाने की जरूरत नहीं है. अब घर तो आ ही रहा हूं इसलिए जो भी करना होगा वहीं आ कर निश्चित करेंगे…’

‘जैसी तेरी मरजी, पर आ रहा है तो कुछ निर्णय कर के ही जाना. लड़की वालों का स्वागत करतेकरते मैं परेशान हो गई हूं.’

घर पहुंचा तो चारू चहकती हुई लिफाफों का पुलिंदा उठा लाई थी, ‘देखो भैया, ये इतने प्रपोजल तो मैं ने ही रिजेक्ट कर दिए हैं…शेष को देख कर निर्णय कर लो…किनकिन से आगे बात करनी है.’

उन्होंने उन में कोई रुचि नहीं दिखाई, तो रूठने के अंदाज में चारू बोली, ‘क्या भैया, आप मेरा जरा भी ध्यान नहीं रखते. मैं ने कितनी मेहनत से इन्हें छांट कर अलग किया है, और आप हैं कि इस ओर देख ही नहीं रहे. ज्यादा भाव खाने की कोशिश न करो, जल्दी देखो, मुझे और भी काम करने हैं.’

जब वह उन के पीछे ही पड़ गई तो वह यह कहते उठ गए थे कि चलो, पहले स्नान कर भोजन कर लें…मां भी फ्री हो जाएंगी…फिर सब आराम से बैठ कर देखेंगे. मां ने भी उन का समर्थन करते हुए चारू को डपट दिया, ‘भाई ठीक ही तो कह रहा है, छोड़ो अभी इन सब को, आया नहीं कि चिट्ठियों को ले कर बैठ गई.’

Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: गोयनका हाउस में सीरत की होगी एंट्री, क्या होगा घरवालों का रिएक्शन

स्टार प्लस का फेमस सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में इन दिनों हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. जिससे दर्शकों को भरपूर एंटरटेनमेंट हो रहा है. शो में सीरत की एंट्री से कहानी में एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है.

शो के करेंट ट्रैक की बात करे तो कार्तिक की जिंदगी में सीरत की एंट्री के बाद पूरा माहौल ही बदल चुका है. जी हां, कैरव के साथ साथ कार्तिक भी सीरत को पहली बार देखकर शॉक्ड हो जाता है.

तो वहीं सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के लेटेस्ट एपिसोड में ये दिखाया गया कि सीरत को नायरा (Shivangi Joshi) के बारे में सब कुछ पता चल गया है.

 

तो वहीं दूसरी तरफ कार्तिक कैरव को समझाएगा कि जिसे वो अपनी मां समझ बैठा है, वो कोई और ही है. कैरव भी अपने पापा की बात समझेगा और कार्तिक से वादा करेगा कि उसकी वजह से अब किसी को भी दिक्कत नहीं होगी.

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और जैसे ही सीरत को पता चलेगा कि नायरा बिल्कुल उसके जैसी ही दिखती थी तब उसे समझ आएगा कि कार्तिक और कैरव को गलतफहमी क्यों हुई? ऐसे में सीरत को अहसास हो गया कि उसने जाने-अनजाने में दोनों के साथ काफी गलत बिहेव किया है.

उन दोनों से माफी मांगने के लिए सीरत गोयनका हाउस जाने का फैसला करती है. वो बिना कुछ सोचे समझे कार्तिक और कैरव से मिलने गोयनका हाउस पहुंच गई.अब ये देखना दिलचस्प होगा कि गोयनका हाउस में सीरत को देखकर घरवाले कैसा रिएक्शन देंगे.

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Bigg Boss 14: वैलेंटाइन डे पर Rahul Vaidya की गर्लफ्रेंड दिशा परमार की होगी एंट्री

बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) में मेकर्स राहुल वैद्य को वेलेंटाइन डे पर सरप्राइज देने वाले हैं. जी हां, सही समझा आपने वैलेंटाइन डे के खास मौके पर घर में राहुल वैद्य (Rahul Vaidya)  की गर्लफ्रेंड दिशा परमार की एंट्री होने वाली है. ऐसे में शो का अपकमिंग एपिसोड काफी इंटरेस्टिंग होने वाला है.

शो में  दिशा परमार (Disha Parmar) की एंट्री से घर का सारा माहौल ही बदल जाएगा. शो के बीते एपिसोड में आपने देखा था कि कनेक्शन वीक के दौरान घर में दिशा परमार को ना देखकर राहुल वैद्य काफी परेशान हो गए थे.

 

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हालांकि राहुल ने इस बात का सिंगर तोशी सबरी से भी की थी. दरअसल खबर ये आ रही थी कि मेकर्स दिशा परमार को इस शो में लाने के लिए काफी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन एक्ट्रेस बार-बार शो में आने से मना कर रही हैं.

फैंस भी घर में राहुल वैद्य और दिशा परमार को एक साथ देखना चाहते हैं. और ऐसे में खबर ये आ रही है कि  राहुल वैद्य की गर्लफ्रेंड दिशा परमार इस शो में जल्द ही एंट्री लेने वाली हैं.

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सबसे खास बात की, दिशा परमार 14 फरवरी को इस शो का हिस्सा बनेंगी. यानि वैलेंटाइन डे पर मेकर्स राहुल वैद्य को उनके प्यार से मिलवाएंगे. ये भी कहा जा रहा है कि कोविड-19 गाइडलाइन्स के अनुसार दिशा परमार और राहुल वैद्य के बीच शीशे की एक दीवार भी हो सकती है.

बीते एपिसोड में राहुल वैद्य ने दिशा परमार के 27वें जन्मदिन पर नेशनल टेलीविजन पर ही उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया था. फैमिली वीक में राहुल वैद्य की मां घर आईं थी और उन्होंने दोनों की शादी के लिए काफी खुश होते हुए दिखाई दी थीं.

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