लवली मामी: प्यार ने बनाया कातिल- भाग 2

सौजन्य-  सत्यकथा

एसपी श्वेता धनखड़ ने एएसपी राजेश मीणा, डिप्टी विजय कुमार सांखला और मूंडवा थानाप्रभारी बलदेवराम को दिशानिर्देश दे कर कहा कि जल्द से जल्द हत्याकांड का परदाफाश कर हत्यारों को गिरफ्तार किया जाए.

एसपी श्वेता धनखड़ दिशानिर्देश दे कर नागौर लौट गईं. पुलिस अधिकारियों का शक मृतक की पत्नी किरण पर था. इस का कारण था कि बरामदे के पास के कमरे में वह अपने चारों बच्चों के साथ सोई थी. सुरेश का मकान सुनसान इलाके में था, जहां शोरशराबा नहीं था. ऐसे में कोई आ कर हत्या कर दे और बरामदे से सटे कमरे में पता नहीं चले, यह असंभव था.

इस कारण एकबार किरण पुलिस की निगाहों में आई तो उस की कुंडली खंगाली जाने लगी. सुरेश का शव पोस्टमार्टम के बाद उस के परिजनों को सौंप दिया गया. परिजनों ने उस का अंतिम संस्कार कर दिया. एसपी के निर्देश पर सुरेश साद हत्याकांड का परदाफाश करने के लिए एएसपी राजेश मीणा, सीओ विजय कुमार सांखला के नेतृत्व में थानाप्रभारी बलदेवराम सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने जांच शुरू की.

मृतक की पत्नी किरण साद के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई गई. साथ ही पुलिस ने अपने मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया. काल डिटेल्स से पता चला कि जोधपुर जिले के बनाड़ थाने के गांव दईकड़ा निवासी शंभूदास साद से किरण की दिन में कईकई बार घंटों तक बातें होती थीं. शंभूदास मृतक का भांजा था.

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पुलिस अधिकारियों को मुखबिर से भी सूचना मिल चुकी थी कि शंभूदास और किरण के अवैध संबंध हैं. बस फिर क्या था, पुलिस ने मृतक सुरेश के 21 साल के भांजे शंभूदास को पूछताछ के लिए दबोच लिया.

पुलिस ने उस से पूछताछ की तो पहले तो वह टालमटोल करता रहा मगर पुलिस ने सख्ती की तो वह टूट गया और अपना जुर्म कबूल कर लिया कि मामी किरण से उस के अवैध संबंध हैं. मामा सुरेश को उन के संबंधों पर शक हो गया था. इस कारण वह मामीभांजे के संबंधों के बीच रोड़ा बनने लगा था. इस कारण उन दोनों ने योजनानुसार उस की हत्या कर दी.

जुर्म कबूल करते ही पुलिस ने किरण को भी हिरासत में ले लिया और पूछताछ की. किरण पहले तो मना करती रही मगर जब उसे बताया गया कि शंभूदास ने सब कुछ बता दिया है तो वह टूट गई और उस ने भी अपना जुर्म कबूल लिया कि नाणदे (भांजे) के साथ उस के अवैध संबंध थे.

तब पुलिस ने मृतक सुरेश साद के भाई की रिपोर्ट पर सुरेश की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया और हत्यारोपी शंभूदास और किरण को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस टीम ने शंभूदास और किरण को 8 जनवरी, 2020 को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया और कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में जो कहानी प्रकाश में आई वह इस प्रकार से है—

राजस्थान के नागौर जिले के अंतर्गत एक कस्बा मूंडवा आता है. मूंडवा के छोर पर तालाब है, जहां मंदिर बना है. इस मंदिर के पुजारी साद परिवार के लोग हैं. इस साद परिवार में सुरेश साद थे.

सुरेश साद की शादी करीब 12 साल पहले किरण से हुई थी. सुरेश मंदिर में पुजारी का काम करने के अलावा पशुधन भी रखता था. पशुधन के अलावा वह गांव में यजमानों के घर से अनाज व आटा भी लाता था. इस से उस के परिवार की गुजरबसर आराम से होती थी.

सुरेश साद सीधासादा व सरल स्वभाव का व्यक्ति था. वह अपनी पूजापाठ व गृहस्थी में मस्त था. समय के साथ सुरेश की पत्नी किरण 4 बच्चों की मां बन गई थी. 4 बच्चे पैदा करने के बाद भी 30 साल की किरण की आकांक्षाएं अब भी जवान थीं.

सुरेश की उम्र 35 साल के आसपास थी. वह दिन भर पूजापाठ के अलावा पशुओं में खटता था और थकामांदा रात को आ कर बिस्तर पर सो जाता और खर्राटे भरने लगता. जबकि किरण शारीरिक सुख के लिए तड़प कर रह जाती थी.

ऐसे में करीब ढाईतीन साल पहले जब शंभूदास अपनी ननिहाल मूंडवा आया तो वह मामी किरण की आंखों को भा गया. शंभूदास भी 18 साल का था. वह इंटरनेट पर अश्लील फिल्में देख कर औरत का सामीप्य पाने को आतुर था. ऐसे में जब उस की निगाह सांवलीसलोनी मामी किरण पर पड़ी तो वह उस का दीवाना हो गया. वह मामी पर लार टपकाने लगा.

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मामी भी कोई नादान नहीं थी कि नाणदा (भांजे) के व्यवहार को न समझती. शंभूदास मामी के शरीर को छूने की कोशिश करता. सुरेश एक रोज बाहर गया था. उस रोज रात में एक ही कमरे में सो रहे शंभूदास और किरण मामी के बीच शारीरिक संबंधों की नींव पड़ गई. उस रात शंभूदास और किरण ने जी भर कर हसरतें पूरी कीं.

किरण को कई साल बाद उस रात शारीरिक सुख की तृप्ति मिली थी. वह शंभूदास के पौरुष की कायल हो गई. वे दोनों अपना मामीभांजे का पवित्र रिश्ता शर्मसार कर बैठे थे.

एक बार वासना के गर्त में डूबे तो उस में वक्त के साथ डूबते ही चले गए. शंभूदास अकसर ननिहाल के चक्कर काटने लगा. ननिहाल आने का मकसद सिर्फ मामी किरण थी. दोनों मौका मिलते ही हसरतें पूरी कर लेते.

शंभूदास का ननिहाल था. मगर जब वह महीने में 3-4 बार आने लगा तो सुरेश को थोड़ा अजीब लगा. एक दिन उस ने कहा, ‘‘शंभू, कुछ कामधंधा करो. अब तुम बच्चे नहीं हो, जो गाहेबगाहे यहां चले आते हो. बहन और बहनोई सा को कुछ कमा कर दो. वे कितने दिन तक तुम सब का पेट भरेंगे.’’

अगले भाग में पढ़ें- सुरेश साद ने किरण और भांजे शंभूदास को रंगरलियां मनाते देख लिया

लवली मामी: प्यार ने बनाया कातिल- भाग 3

सौजन्य-  सत्यकथा

मामा सुरेश की बात शंभू को कांटे की तरह चुभ गई. मगर वह कुछ बोला नहीं. इस के बाद शंभूदास महीने में एक बार आने लगा. किरण उसे फोन कर के कहती कि मामा की बात का बुरा नहीं मानो, वह ऐसे ही हैं. तुम्हारे बगैर मैं जल बिन मछली की तरह तड़पती हूं. आ कर मेरी तड़प शांत तो किया करो. यह तनमन सब तुम्हारा है.

ऐसे में शंभूदास को आना ही पड़ता था. उस का मन तो मामी को छोड़ने का होता ही नहीं था. मगर बिछुड़ने की मजबूरी थी.

इस कारण मन मार कर दोनों को जुदाई सहनी पड़ती थी. सुरेश सीधासादा जरूर था मगर वह नासमझ नहीं था. वह अपने भांजे शंभू के आने पर पत्नी के चेहरे पर खुशी की लकीरें देखता था. शंभू के जाने पर किरण का चेहरा मुरझा जाता था. तब सुरेश को इन के संबंधों पर शक होने लगा.

अगली बार जब शंभूदास ननिहाल आया तो सुरेश साद ने वह सब अपनी आंखों से देख लिया जिस का उसे शक था. सुरेश ने किरण और भांजे शंभूदास को रंगरलियां मनाते देख लिया. पत्नी के इस रूप को देख कर सुरेश हतप्रभ रह गया.

शंभू के आने पर पत्नी के चेहरे की खुशी का यह राज है, जान कर वह परेशान हो गया. वह करे तो क्या? अगर बात खुली तो जगहंसाई होगी.

सोचविचार कर सुरेश ने किरण से एकांत में कहा, ‘‘अपने जैसा शंभू को भी बना दिया. वह तेरे बेटे जैसा है. उस के साथ रंगरलियां मनाने से पहले तू मर क्यों नहीं गई. अगर आज के बाद तू शंभू से मिली तो मैं तुझे जान से मार दूंगा.’’

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सुन कर किरण के पैरों तले से जमीन सरक गई. वह नजरें नीची किए जमीन कुरेदती रही. उस ने पति से अपने किए की माफी मांगी और कहा कि वह अब शंभू से कभी नहीं मिलेगी. उस का यहां आना बंद करा देगी.

किरण ने त्रियाचरित्र दिखाया तो भोलाभाला सुरेश समझा कि वह सुधर जाएगी. उस ने बीवी को माफ कर दिया. मगर यह सुरेश की गलतफहमी थी. किरण ने शंभू को बता दिया कि उस के मामा ने उन दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया है. वह सचेत रहे.

शंभू और किरण एकदूसरे के सामीप्य को तरस उठे. सुरेश उन्हें राह का कांटा लगा. उसे हटाए बिना वे मिल नहीं सकते थे. ऐसे में दोनों ने योजना बना ली. योजना यह थी कि शंभूदास छिप कर कुल्हाड़ी ले कर किरण के घर आ कर नीचे वाले कमरे में छिप जाएगा. रात में सुरेश बरामदे में ही सोता था. सुरेश को नींद आने पर किरण खाली गिलास जमीन पर गिराएगी. यह इशारा मिलते ही शंभूदास सो रहे मामा सुरेश साद को कुल्हाड़ी से मार देगा और रात के अंधेरे में वापस चला जाएगा. मामा के रास्ते से हटने के बाद उन दोनों का मिलन रोकने वाला कोई नहीं होगा.

साजिश के तहत शंभूदास 4 जनवरी, 2021 को शाम होते ही कुल्हाड़ी ले कर किरण के घर पहुंच गया. किरण ने उसे सारी योजना समझा कर नीचे कमरे में छिपा दिया. उस समय सुरेश पशुओं को चारा डालने गया हुआ था. चारा डाल कर सुरेश घर लौटा और फिर खाना खा कर फिर से पशु देखने गया. उस के बाद आ कर बरामदे में सो गया.

रात के 12 बजे किरण ने खाली गिलास नीचे पटका. शंभूदास के लिए यह एक इशारा था. इशारा मिलते ही सधे कदमों से शंभू कमरे से निकला और बरामदे में आ गया.

उस समय सुरेश गहरी नींद में था. पलक झपकने की देर में शंभूदास ने कुल्हाड़ी का वार सो रहे मामा सुरेश पर किया. उस ने एक के बाद एक 4 वार सुरेश पर किए. खून का फव्वारा फूट पड़ा. वह मौत की नींद सो गया. शंभूदास अपना काम कर के चला गया.

सुबह होने पर किरण ने योजना के अनुसार उठ कर बरामदे में जा कर रोनाधोना शुरू किया. तब घर के अन्य लोग वहां आए. फिर मूंडवा थाने में सूचना दी गई. पुलिस घटनास्थल पर पहुंची व मौका मुआयना किया.

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रिमांड अवधि के दौरान शंभूदास से हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी, खून सने कपड़े और मोबाइल भी बरामद कर लिया गया. एसपी श्वेता धनखड़ ने सुरेश साद हत्याकांड का खुलासा करते हुए प्रैसवार्ता की.

रिमांड अवधि पूरी होने पर शंभूदास व किरण को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

Serial Story- कितने झूठ: भाग 1

वह सुधा को मोबाइल मिला कर पूछने ही वाला था कि मां के यहां चल रही हो या नहीं. लेकिन उस ने सोचा कि अगर उसे मां के यहां चलना होता तो वह खुद न फोन कर देती. हर इतवार की दोपहर का भोजन वे दोनों मां के यहां ही तो करते हैं. मां हर इतवार को तड़के ही उठ जाती हैं और उन के लिए स्पैशल खाना बनाने लगती हैं.

जब भी वह सुधा के साथ जाता है, खाने की मेज तरहतरह के पकवानों से सजी रहती है और मां उसे ठूंसठूंस कर खिलाती हैं. अगर वह इत्तफाक से जा नहीं पाता है तो उस दिन वे टिफिन कैरियर में सारा खाना भर कर उस के यहां चली आती हैं और उसे खिलाने के बाद ही खुद खाती हैं. आज भी मां उस के लिए खाना बनाने लग गई होंगी. उस ने मां को फोन किया, उधर से पापा बोल रहे थे, ‘‘हैलो, कौन, विकास?’’

‘‘हां, मैं आज…’’ इस से पहले कि वह अपनी बात पूरी करता, उधर से मां की आवाज सुनाई दी, ‘‘आज तुम आ रहे हो न?’’

‘‘हां, मां.’’

‘‘मैं तो घबरा गई थी कि कहीं तुम आने से इनकार न कर दो.’’

‘‘लेकिन मां, सुधा अभी मायके से नहीं लौटी.’’

‘‘नहीं लौटी तो तुम आ जाना. आ रहे हो न?’’

‘‘हां मां,’’ कह कर उस ने फोन रख दिया.

तब तक’’ गैस पर चाय उफन कर बाहर आई और गैस बुझ गई.हड़बड़ा कर उस ने गैस बंद कर दी और चाय छान कर एक कप में उड़ेलने लगा. कप लबालब भर गया. अरे, यह तो 2 जनों की चाय बना बैठा. अब उसे अकेले ही पीनी पड़ेगी. वह बैठ कर चाय पीने लगा.

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‘सब्जी ले लो, सब्जी’, गली में आवाज गूंजी.अखबार उठा कर वह सुर्खियां पढ़ने लगा. अचानक दरवाजे की घंटी बज उठी. वह उठा और उस ने दरवाजा खोल दिया. सामने सब्जी वाली खड़ी थी. उस ने पूछा, ‘‘बीबीजी नहीं हैं?’’

‘‘अभी नहीं आईं.’’

?‘‘कब आ रही हैं?’’

‘‘पता नहीं.’’

‘‘मुझ से तो कहा था कि दोचार दिनों में आ जाऊंगी, लेकिन आज पूरे 15 दिन हो गए.’’

‘‘हां.’’

‘‘साहब, आप खाना कहां खाते हो?’’

‘‘होटल में.’’

‘‘जरा हाथ बढ़ा देना,’’ सब्जी वाली बाई ने कहा.उस ने झल्ला उठाने में उस की मदद कर दी.

‘‘बगैर औरत के कितनी तकलीफ होती है यह तो सोचती ही नहीं आजकल की औरतें. शादी के बाद कैसा मायके का मोह? सच मानोगे, साहब, गौने के बाद मैं सिर्फ 2 बार गई हूं मायके और वह भी भैयाबापू के कूच कर जाने की खबर पा कर. और यहां, ऐसा महीना नहीं गुजरता जब बीबीजी मायके न जाती हों,’’ सब्जी वाली ने कहा.

उस ने कहना चाहा, ‘सच तो यह है कि अब हमारा निवाह नहीं होता और सुधा मुझे हमेशाहमेशा के लिए छोड़ कर चली गई है.’ लेकिन उसी पल उस ने सोचा कि इस सब्जी वाली से यह सब कहने की क्या जरूरत है. जब

सुधा उसे कुछ नहीं बता गई, तो वह क्यों बताए?

इसी बीच, तरन्नुम में आवाज लगाता हुआ सामने से फूल वाला आता दिखाई दिया. अब यह भी छूटते ही सुधा के बारे में पूछने लगेगा. उस का जी चाहा कि वह दरवाजा बंद कर अंदर चला जाए और किसी को जवाब ही न दे. सुधा इन सब लोगों से बोल तो ऐसे गई है जैसे वह लौटी आ रही है.

‘‘बीबीजी आ गईं, साहब?’’ फूल वाले ने फूल देते हुए कहा.

‘‘नहीं.’’

‘‘कब आ रही हैं?’’

उस ने झुंझला कर कहना चाहा, ‘पूछो जा कर उसी से,’ लेकिन वह बोला, ‘‘पता नहीं.’’

‘‘इस बार बहुत दिन लगा दिए.’’

वह सिर्फ दांत कटकटाता रह गया. उस ने मुड़ कर दरवाजा बंद करना चाहा कि महरी सामने खड़ी थी, ‘‘चौकाबरतन कर दूं, साहब?’’

‘‘हांहां.’’

महरी ने चौके से 2-4 बरतन समेटे और मिनटों में मांज कर रसोई साफ कर दी. फिर झाड़ू ले कर बरामदा साफ करने लगी. वह कूड़ा बटोरती हुई बोली, ‘‘बीबीजी ने इस बार कुछ ज्यादा दिन नहीं लगा दिए?’’

‘‘हां.’’

‘‘वापस तो आएंगी न?’’

‘‘हां,’’ कह कर फिर अचकचा कर उस ने पूछा, ‘‘सुना, तूने दूसरा आदमी कर लिया है.’’

‘‘लेकिन अब पछता रही हूं, बाबू. इस से पहला वाला आदमी अच्छा था. यह मर्दुआ तो रोज रात को पी कर आता है और लातोंघूसों से पीटने लगता है. उस के पीटने का भी कोई गम नहीं है, बाबू. लेकिन जब वह पूछने लगता है कि बोल तेरा पहला आदमी कैसा था, तुझे कैसे प्यार करता था. औरतें अपने पहले आदमी को भूल नहीं पातीं. जरूर तू अपने पहले आदमी को याद करती होगी. सचसच बता, याद करती है न? झूठ बोलती हूं तो सच उगलवाना चाहता है और सच बोलती हूं तो उसे गवारा नहीं होता. इस झूठ और सच के बीच में मैं जैसे अधर में लटकी हुई जी रही हूं. सोचती हूं कि न मैं ने पहले आदमी को छोड़ा होता और न दूसरा आदमी कर लिया होता. अपने ही गलत निर्णयों के एहसासों से बिंधी हुई हूं मैं,’’ कह कर सुबकने लगी.

उस ने अपनी दृष्टि खिड़की की तरफ फेर ली. आसमान में कालेकाले बादल छा गए थे व सुबह बेहद उदास, भीगी और उमसभरी हो उठी थी.

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‘‘मैं तो अपना ही दुखड़ा ले बैठी. तुम अपनी सुनाओ, बाबू? इन 15 दिनों में तुम बीबीजी से मिले तो होगे?’’

‘‘नहीं,’’ उस ने खोखले स्वर में कहा.

‘‘एक ही शहर में रहते  हुए?’’ चकित भाव से महरी ने पूछा, ‘‘बीबीजी ने फोन भी नहीं किया?’’

उस ने नकारात्मक सिर हिला दिया.

‘‘बीबीजी से आप का कोई झगड़ा हुआ था, साहब?’’

‘‘नहीं तो,’’ वह व्यग्रभाव से उठ कर टहलने लगा.

‘‘वही तो…मैं भी घरघर घूमती हूं. ऐसा घर नहीं देखा जहां मियांबीवी न झगड़ते हों. लेकिन आप दोनों को तो मैं ने कभी उलझते हुए नहीं देखा.’’ फिर कमरे को देखते हुए बोली, ‘‘साहब, आज ये परदे बदल दूं?’’

Shahid Kapoor संग मीरा राजपूत की इस रोमांटिक तस्वीर ने जीता फैंस का दिल

बॉलीवुड के क्यूट कपल शाहिद कपूर और मीरा राजपूत सोशल मीडिया पर इन दिनों काफी एक्टिव रहती हैं. आए दिन वो दोनों अपनी फोटोज फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं.

अब शाहिद कपूर ने अपनी पत्नी मीरी राजपूत संग बेहद ही रोमांटिक तस्वीर शेयर की है. जी हां, शाहिद ने इंस्टाग्राम पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए अपनी फिलिग्स जाहिर की है. उन्होंने तस्वीर को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है कि प्यार को महसूस कर रहा हूं.

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इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि मीरा राजपूत शाहिद के गाल पर किस कर रही हैं. उनकी आंखें बंद और शाहिद कपूर मुस्कराते हुए सेल्फी ले रहे हैं.

शाहिद कपूर ने 25 फरवरी को अपना 40वां बर्थडे सेलिब्रेट किया. इस खास मौके पर शाहिद की फैमिली, फ्रेंड्स और फैंस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट केस जरिए लगातार शुभकामनाएं और बधाइयां दी.

 

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मीरा राजपूत ने भी एक तस्वीर शेयर की है. इस तस्वीर में मीरा शाहिद के गाल पर किस करते हुए सेल्फी कैमरे की तरफ देख रही हैं. इस तस्वीर को शेयर करते हुए मीरा ने लिखा है कि 40वें जन्मदिन की मुबारकवाद मेरे जिंदगी के प्यार.

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Anurag Kashyap की बेटी ने किया खुलासा, ‘अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने किया था सेक्शुअली हैरेस’

बॉलीवुड के मशहूर फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) की बेटी आलिया कश्यप (Aaliyah Kashyap)  इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अब आलिया ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के बारे में खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि जब वह छोटी थी तो एक अधेड़ उम्र व्यक्ति ने उनके साथ सेक्शुअली हैरेस किया था.

आलिया कश्यप ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट किया. इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि यूजर्स उनकी बोल्ड तस्वीरों पर भद्दे-भद्दे कमेंट करते हैं, जिससे वह इन दिनों बहुत डरी हुई हैं.

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आलिया कश्यप ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में यह भी बताया है कि भारत में महिलाओं को बचपन से ही इस तरह की अश्लीलता का सामना करना पड़ता है, जो सिलसिला कभी भी नहीं रुकता है. आलिया कश्यप ने इस पोस्ट में अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के बारे में भी खुलासा किया है.

उन्होंने ये भी बताया कि  मैंने पहले कभी भी इतना डरा हुआ फील नहीं किया है, जब मुझे अपने इंस्टाग्राम पोस्ट डिलीट करने के बारे में सोचना पड़ा. मैंने इस हैरसमेंट को इग्नोर करने की बहुत कोशिश की है लेकिन सच यह है कि हमें इसके बारे में बात करनी चाहिए. इस तरह की चीजें रेप कल्चर को बढ़ाती हैं, जो सभी भारतीय महिलाओं को किसी न किसी तरह से इफेक्ट करती हैं.

 

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इस पोस्ट में उन्होंने ये भी लिखा कि ‘हमारा ऐसा देश है, जहां महिलाओं के साथ कुछ गलत होने के बाद कैंडल मार्च निकालते हैं लेकिन जब वो जिंदा रहती हैं तो उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं करते हैं.

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कोरोनिल: बाबा रामदेव के सफेद झूठ

क्या रामदेव योग गुरु के रूप में पहले देश और दुनिया भर में नामचीन हो चुके रामदेव झूठ बोलते हैं?
क्या एक संत… ऋषि का चोला पहने हुए बाबा रामदेव ने “झूठ” के सहारे हजारों करोड़ रुपए का आर्थिक साम्राज्य पतंजलि खड़ा किया है… क्या रामदेव ने दुनिया भर में भय और संत्रास के प्रतीक बन चुके कोरोना कोविड-19 के भय का लाभ उठाने का प्रयास और कोरोनिल दवा को बना और बेचकर नहीं किया है?

सभी प्रश्नों का एक ही जवाब है बीते दिनों जब बाबा रामदेव ने भारत सरकार के दो महत्वपूर्ण मंत्री नितिन गडकरी व डाक्टर हर्षवर्धन के साथ मंच से यह घोषणा की उन्होंने कोरोना की बनाई गई दवाई कोरोनिल डब्ल्यूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट ( सी ओ पी पी)का प्रमाण पत्र मिल गया है और अब कोरोनिल दुनिया के 158 देशों में पतंजलि द्वारा निर्यात की जा सकेगी.

सवाल सिर्फ इतना है कि क्या देश की संविधानिक सरकार के दो मंत्रियों की मौजूदगी में उनकी जानकारी के बगैर, सहमति के बिना रामदेव ने कोरोनिल दवाई के संदर्भ में झूठ बोला है तो ऐसे में रामदेव पर भारत सरकार क्या कठोर एक्शन लेने जा रही है.

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कोरोना जैसा कि सर्वज्ञात है दुनिया भर में एक तबाही का प्रतीक महामारी मान ली गई है. और उसके संबंध में किसी भी प्रकार की दवा बिना प्रमाणन, अनुज्ञा के वितरित वार्षिक बिक्री नहीं की जा सकती. तब रामदेव ऐसी क्या हस्ती हैं जो अपनी हांक कर देश और दुनिया को सीधे-सीधे खतरे में डाल कर लोगों को काल कवलित करने का काम कर रहे हैं. कथित रूप से उनके द्वारा घोषणा की जा रही है कि उनके द्वारा निर्मित कोरोनिल कोरोनावायरस के लिए एक प्रभावी दवा है. मगर आई एम ए और डब्ल्यूएचओ ने जब सवाल उठा दिया है तो रामदेव पर सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और मंत्रियों से भी देश और कानून को पूछना चाहिए कि उन्होंने ऐसा किस प्रभाव में किया है जिसके कारण लोगों के स्वास्थ्य और पैसों की क्षति की संभावना है

कोरोना बना कमाई का जरिया

एक तरफ  कोविड-19 से देश दुनिया हलकान परेशान है दूसरी तरफ बाबा रामदेव सत्ता के संरक्षण में कोरोनिल बना कर जमकर रुपए कमा रहे हैं ऐसा काम कोई और करता तो क्या हुआ जेल की चीजों के पीछे नहीं होता?

रामदेव योग गुरु के रूप में एक सम्मानित नाम बन चुके हैं.एक समय था जब सत्ता हो या विपक्ष सारी नामधारी हस्तियां रामदेव के “योग की पाठशाला” में हाजिरी लगाती थी. रामदेव कभी हरिद्वार में साइकिल चलाते थे. मगर योग ने उन्हें सम्मान और पैसा सब कुछ दिया था मगर ऐसा क्या हो गया कि उन्हें और पैसों की चाहत में एक उद्योगपति के रूप में सामने आना पड़ा और आज कोरोना की दवा बनाकर रातों-रात स्वयंभू लोगों के रक्षक बनकर कोरोनिल दवाई का इजाद करके स्वयं घोषणा करनी पड़ रही है कि यह कोरोनावायरस से बचाव में परम सहायक है और विश्व स्वास्थ संगठन डब्ल्यूएचओ ने इसे स्वीकृति प्रमाणन दिया है.

कहते हैं समझदार आदमी झूठ ऐसा बोलता है कि पकड़ा ना जाए.और बेशर्म आदमी झूठ बोलकर पकड़े जाने पर हो… हो.. कर हंसता है और कहता है वह तो मजाक कर रहा था. रामदेव बाबा क्या दूसरी श्रेणी में रखे जा सकते हैं. मंत्रियों के समक्ष देश की मीडिया को संबोधित करके सफेद झूठ का वितंडा खड़ा करने का प्रयास पर से पर्दा उठ गया है. ऐसे में यह योगी का बाना पहनने वाले रामदेव को देश और मानवता से माफी मांगनी चाहिए और तत्काल कोरोनिल को बेचना बंद करना चाहिए.
भारत सरकार को भी चाहिए कि ऐसे झूठ समाज में और ना फैले दूसरे लोग भी रामदेव के रास्ते पर चल पड़े इसलिए कानून का डंडा चलाएं.

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मानवता के प्रति गंभीर अपराध

कहते हैं सारे अपराधों में स्वास्थ्य के साथ किए जाने वाला अपराध सबसे गंभीर घातक और अक्षम्य होता है. जब सारी दुनिया की सरकारें मिलकर कोरोना वैक्सीन ढूंढ रही थी और माना जा रहा था कि कोरोना वायरस की वैक्सीन को एक 2 साल का लंबा वक्त लगेगा.

ऐसे में बाबा रामदेव ने आनन-फानन में कोरोनिल को भारत में लांच कर दिया. कथित रूप से भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग से भी कोई अनुमति नहीं ली गई. बात जब बढ़ी तब ना-नुकुर के बाद सरकार की अनुमति मिल गई और राम बाबा की बल्ले-बल्ले हो गई. पतंजलि के सारे स्टोर्स में दवा धड़ल्ले से बिकने लगी. हमारे देश में भेड़ चाल ऐसे ही नहीं चल पड़ती रामदेव की कोरोनिल की दवा भी धड़ल्ले से विकी और स्वयं बाबा के प्रवक्ता के अनुसार 500 करोड़ रुपए की कोरोनिल उन्होंने बेची है. और अब उनकी निगाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा कर उनका कृपा पात्र बन के दुनियाभर में दवाई बेचने की थी. दो मंत्रियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अश्वमेघ का घोड़ा छोड़ने ही वाले थे कि डब्लू एच ओ और आइएमए ने उनके घोड़े की रास पकड़ ली है.

इधर महाराष्ट्र की उद्धव सरकार उनके स्वास्थ्य मंत्री देशमुख ने बाबा रामदेव की कोरोनिल को महाराष्ट्र में बिकने से प्रतिबंधित कर दिया है.और सार्वजनिक रूप से कहा है कि केंद्र के दो मंत्रियों को बाबा रामदेव के साथ मंच साझा नहीं करना चाहिए था. आईएमए ने भी उंगली उठाई इसके बाद यह स्पष्ट है कि बाबा रामदेव ने कोरोना संबंधी दवाई के बारे में देश की आवाम के समक्ष झूठ बोला है.

आने वाले समय में देश के अन्य राज्य भी बाबा रामदेव की कोरोना वायरस दवाई पर प्रतिबंध लगाएंगे. और हो सकता है मामले मुकदमे में उलझ कर रामदेव का पतंजलि का यह किला ढहने भी लगे.

Crime Story: केशरबाई की खूनी प्रेम कहानी- भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

बोरडाबरा का आदमी खालीपीली धमकी नहीं देता. वह सचमुच ऐसा कर सकता है, यह सोच कर सोहन और गोविंद दोनों के प्राण गले में अटक गए. केशरबाई के संग अय्याशी के चक्कर में जान पर बन आई तो सोहन और गोविंद दोनों उस से बचने का रास्ता सोचने लगे.

पहली अक्तूबर, 2020 को गंधवानी थाना इलाके के अवल्दामान गांव निवासी एक आदमी ने थाने आ कर गांव में प्राथमिक स्कूल के पास किसी महिला की अधजली लाश पड़ी होने की खबर दी. अवल्दामान गांव अपराध के लिए कुख्यात बोरडाबरा गांव के नजदीक है, इसलिए गंधवानी टीआई को लगा कि यह बोरडाबरा के बदमाशों का ही काम होगा.

लगभग 30 वर्षीय महिला के शरीर पर धारदार हथियार के घाव भी थे, इसलिए मामला सीधेसीधे हत्या का प्रतीक होने पर टीआई गंधवानी ने इस बात की जानकारी एसपी आदित्य प्रताप सिंह को देने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए इंदौर भेज दिया.

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मामला गंभीर था क्योंकि आमतौर पर लोग पहचान छिपाने के लिए शव को जलाते हैं, ताकि उस की पहचान न हो सके. लेकिन इस मामले में अजीब बात यह थी कि हत्यारों ने युवती का धड़ तो जला दिया था लेकिन चेहरा पूरी तरह से सुरक्षित था. ऐसा प्रतीक होता था मानो हत्यारे खुद यह चाहते हों कि शव की शिनाख्त आसानी से हो जाए.

ऐसा हुआ भी. मृतका के चेहरे और हाथ पर बने एक निशान ने उस की पहचान केशरबाई भील के रूप में हो गई जो पति को छोड़ कर अपने प्रेमी गोविंद के साथ रह रही थी. मामला रहस्यमयी था, इसलिए एसपी (धार) ने एडीशनल एसपी देवेंद्र पाटीदार के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी. जिस में पता चला कि मृतका को घटना से 1-2 दिन पहले सोहन के साथ मोटरसाइकिल पर घूमते देखा गया था.

सोहन अपने घर से गायब था, इसलिए उस पर शक गहराने के बाद पुलिस ने उस की घेराबंदी कर लाश मिलने के 3 दिन बाद उसे गिरफ्तार कर लिया. जिस में पहले तो वह खुद को निर्दोष बताता रहा, लेकिन बाद में गोविंद के साथ मिल कर केशरबाई की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली.

सोहन को पुलिस उठा कर ले गई है, इस बात की जानकारी लगते ही गोविंद भी गांव से गायब हो गया था. इसलिए जब काफी प्रयास के बाद उसे पकड़ने में सफलता नहीं मिली, तब टीम में साइबर सेल को शामिल किया गया. कहना नहीं होगा कि जिम्मेदारी मिलते ही प्रभारी संतोष पांडेय की टीम सक्रिय हो गई और हत्या के 2 महीने बाद आखिर टीम ने फरार आरोपी गोविंद को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली और उसे सलाखों के पीछे पहुंचा ही दिया.

आरोपियों ने बताया कि उन्होंने केशरबाई की हत्या खेरवा के जगंल में ले जा कर की थी. जहां से उन्होंने लाश को अवल्दामान गांव में ला कर इस तरह जलाया था कि उस की पहचान हो जाए.

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अवल्दामान गांव बोरडाबरा के नजदीक है. बोरडाबरा में रहने वाले दिनेश ने केशरबाई को जान से मारने की धमकी दी है यह बात कई लोगों को मालूम थी. इसलिए आरोपियों का सोचना था कि अवल्दामान में लाश मिलने से पुलिस दिनेश भिलाला को हत्यारा मान कर उसे जेल भेज देगी, जिस से सोहन और गोविंद आराम से रह सकेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और असली गुनहगार पकड़े गए.

Crime Story: केशरबाई की खूनी प्रेम कहानी- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

26नवंबर, 2020 की दोपहर का समय था. धार क्राइम ब्रांच एवं साइबर सेल प्रभारी संतोष पांडेय कुछ पुराने मामलों के आरोपियों तक पहुंचने के लिए धूल चढ़ी फाइलों से जूझ रहे थे, तभी उन के मोबाइल पर एक खास मुखबिर के नंबर से घंटी बज उठी.

इस मुखबिर को उन्होंने बेहद खास जिम्मेदारी सौंप रखी थी. इसलिए उस मुखबिर की फोन काल को उन्होंने तुरंत रिसीव किया. मुखबिर ने उन्हें एक खास सूचना दी थी. सूचना पाते ही संतोष पांडेय के चेहरे पर मुसकान तैर गई, उस के बाद उन्होंने मुखबिर से मिली खबर के बारे में पूरी जानकारी एसपी (धार) आदित्य प्रताप सिंह और अन्य अधिकारियों को दी. फिर उन से मिले निर्देश के बाद कुछ ही देर में अपनी टीम ले कर मागौद चौराहे पर जा कर डट गए.

दरअसल, धार पुलिस को लंबे समय से गंधवानी थाना इलाके में हुई एक हत्या के आरोपी गोविंद की तलाश थी. एसपी ने गोविंद की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित कर रखा था.

गोविंद को पकड़ने की जिम्मेदारी जिस टीम को सौंपी गई थी, उस में धार साइबर सेल के प्रमुख संतोष पांडेय और उन का स्टाफ भी शामिल था. इसलिए उस रोज जब मुखबिर ने गोविंद के मोटरसाइकिल से मागौद आने की जानकारी पांडेयजी को दी तो उन्होंने इस ईनामी आरोपी को पकड़ने के  लिए मागौद चौराहे पर अपना जाल  बिछा दिया.

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मुखबिर की सूचना गलत नहीं थी. कुछ ही घंटों के बाद पांडेय ने एक बिना नंबर की मोटरसाइकिल पर सवार युवक को तेजी से मागौद की तरफ आते देखा तो उन्होंने उसे घेरने के लिए अपनी टीम को इशारा किया, लेकिन संयोग से मोटरसाइकिल सवार की नजर पुलिस पर पड़ गई. इसलिए खतरा भांप कर उस ने तेजी से मोटरसाइकिल राजगढ़ की तरफ मोड़ दी.

संतोष पांडेय इस स्थिति के लिए पहले से ही तैयार थे सो गोविंद के वापस मुड़ कर भागते ही वे अपनी टीम के साथ उस के पीछे लग गए. दूसरी तरफ इस स्थिति की जानकारी एसपी आदित्य प्रताप सिंह को दी गई तो उन के निर्देश पर एसडीपीओ (सरदारपुर) ऐश्वर्य शास्त्री और राजगढ़ टीआई मगन सिंह वास्केल ने रोड पर आगे की तरफ से घेराबंदी कर दी थी.

इसलिए दोनों तरफ से पुलिस से घिर जाने पर गोविंद ने मोटरसाइकिल खेतों की तरफ मोड़ कर भागने की कोशिश की, मगर साइबर सेल प्रभारी संतोष पांडेय और उन की टीम उसे दबोचने में कामयाब हो ही गई. पुलिस ने उस की तलाशी ली गई तो उस के पास से एक कट्टा, जिंदा कारतूस और चोरी की मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली.

चूंकि केशरबाई भील नाम की जिस महिला की हत्या के आरोप में गोविंद को गिरफ्तार किया गया था, उस में शामिल गोविंद के साथी उदियापुर के सोहन वास्केल को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी. इसलिए पूछताछ के दौरान गोविंद ने बिना किसी हीलहुज्जत के अपनी प्रेमिका और रखैल केशरबाई की हत्या करने की बात स्वीकार करते हुए पूरी कहानी सुना दी, जो इस प्रकार निकली—

कुक्षी थाना इलाके के एक गांव की रहने वाली केशरबाई भील को सिगरेट, शराब और सैक्स की लत किशोर उम्र में ही लग गई थी. संयोग से उस का रूप भी कुछ ऐसा दिया था कि उसे नजर भर कर देखने वाले घायल हो ही जाते थे. इसलिए शौक पूरा करने के लिए उसे अपने रूप का उपयोग करने में भी कोई गुरेज नहीं थी.

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केशरबाई की हरकतों से चिंतित उस के मातापिता ने छोटी उम्र में ही उस की शादी कर दी, लेकिन एक पुरुष से केशरबाई का मन भरने वाला नहीं था.

इसलिए शादी के बाद भी उस ने अपने शौक पर लगाम लगाने की कोई जरूरत नहीं समझी. जिस के चलते पति से होने वाले विवादों से तंग आ कर उस ने पति का घर छोड़ कर बच्चों के साथ अलग दुनिया बसा ली.

केशरबाई जानती थी की उस की सुंदरता उसे कभी भूखा नहीं मरने देगी. ऐसा हुआ भी, केशरबाई पति को छोड़ कर भी अपने सभी शौक पूरे करते हुए आराम से जिंदगी बसर करने लगी. पति से अलग रहते हुए केशरबाई को इस बात का अनुभव हो चुका था कि मर्द की पहली जरूरत एक जवान औरत ही होती है. इसलिए उस ने ऐसे लोगों की तलाश कर उन्हें बड़ी रकम के बदले शादी के नाम पर दुलहन उपलब्ध करवाने का काम शुरू कर दिया, जिन की किसी कारण से शादी नहीं हो पा रही थी.

उस ने आसपास के गांव में रहने वाली गरीब परिवार की जरूरतमंद युवतियों के अलावा विधवा और तलाकशुदा महिलाओं से दोस्ती कर ली थी, जो केशरबाई के कहने पर कुछ पैसों के बदले में चंद दिनों के लिए किसी भी युवक की नकली दुलहन बनने को तैयार हो जाती थीं.

केशरबाई जरूरतमंद लोगों से बड़ी रकम ले कर उस में से कुछ पैसे संबंधित युवती को दे कर उस की शादी युवक से करवा देती, जिस के बाद युवती कुछ रातों तक युवक को दुलहन का सुख देने के बाद किसी बहाने से मायके वापस आ कर गायब हो जाती थी. इस पर लोग यदि केशरबाई से शिकायत करते या अपना पैसा वापस मांगते तो वह उन्हें बलात्कार के आरोप में फंसाने की धमकी दे कर चुप करा देती.

कहना नहीं होगा कि इन्हीं सब के चलते केशरबाई ने इस काम में खूब नाम और दाम कमाया.

अगले भाग में पढ़ें- केशरबाई  नकली दुल्हन क्यों बनना चाहती थी

Crime Story: केशरबाई की खूनी प्रेम कहानी- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

गांव उदियापुर निवासी सोहन वास्केल की केशरबाई से अच्छी पटती थी. उस का केशरबाई के यहां अकसर आनाजाना था जिस से वह केशरबाई के सभी कामों से परिचित भी था. सोहन की दोस्ती गांव सनावदा के रहने वाले गोविंद बागरी से थी.

गोविंद आपराधिक और अय्याश प्रवृत्ति का था. उस ने भी इलाके में रहने वाली केशरबाई के चर्चे सुन रखे थे, इसलिए जब उसे पता चला कि सोहन की केशरबाई के संग अच्छी दोस्ती है तो उस ने सोहन से अपनी दोस्ती भी केशरबाई से करवा देने के लिए कहा. सोहन को भला क्या ऐतराज हो सकता था, इसलिए उस ने एक रोज गोविंद की मुलाकात केशरबाई से करवा दी.

गोविंद केशरबाई की खूबसूरती देखते ही उस का दीवाना हो गया. इस पर जब उसे पता चला कि केशरबाई शराब पीने की भी शौकीन है तो वह 2 दिन बाद ही शराब की दरजन भर बोतलें ले कर केशरबाई के पास पहुंच गया.

मर्द की नजर भांपने में केशरबाई कभी गलती नहीं करती थी. वह समझ गई कि गोविंद उस से क्या चाहता है, इसलिए उस ने उस रात गोविंद को शराब के साथ अपने रूप के नशे में भी गले तक डुबो दिया.

वास्तव में केशरबाई ने यह सब एक योजना के तहत किया था. केशरबाई को इस बात की जानकारी लग गई थी कि गोविंद न केवल पैसे वाला आदमी है बल्कि दबंग भी है. उस के खिलाफ कई थानों में अनेक मामले भी दर्ज हैं.

इसलिए केशरबाई गोविंद से दोस्ती कर उस का उपयोग अपनी नकली दुलहन के कारोबार में करना चाहती थी. ताकि गोविंद ऐसे लोगों से उसे बचा सके जो शादी के नाम पर ठगे जाने के बाद उस से विवाद करने के लिए उस के दरवाजे पर आ जाते थे.

केशरबाई के रूप का दीवाना हो कर गोविंद उस के इस काम में मदद करने लगा तो इस का एक कारण यह भी था कि इस काम में केशरबाई के हाथ बड़ी रकम आती थी और गोविंद का सोचना था कि वह केशरबाई की मदद कर के उस की नजदीकी तो हासिल करता ही रहेगा. साथ ही साथ इस रकम में से भी वह अपनी हिस्सेदारी तय कर लेगा.

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इसलिए उस ने केशरबाई के सामने दीवाना होने का नाटक किया और अपनी पत्नी एवं बच्चों को छोड़ कर केशरबाई के संग जा कर सेंधवा में रहने लगा.

लेकिन केशरबाई के पैसों पर ऐश करने का गोविंद का सपना चकनाचूर हो गया. केशरबाई फरजी शादी में ठगे पैसों में गोविंद को हाथ भी लगाने नहीं देती थी, उलटे घर का खर्च भी गोविंद से मांगती थी. गोविंद फंस गया था. केशरबाई के रूप का नशा उस के दिमाग से उतर गया. वह समझ गया कि केशरबाई बड़ी शातिर है.

इतना नहीं, केशरबाई परिवार का खर्च तो गोविंद से मांगती थी, ऊपर से अपनी अय्याशी के लिए दूसरे युवकों को खुलेआम घर बुलाती थी. गोविंद इस पर ऐतराज करता तो वह साफ बोल देती कि मैं तुम्हारी बीवी नहीं हूं, जो अकेले तुम्हारे बिस्तर पर सोऊं. मेरा अपना बिस्तर है और मैं जिसे चाहूं उसे अपने साथ सुला सकती हूं.

गोविंद ने उसे अपनी ताकत से दबाना चाहा तो केशरबाई ने जल्द ही उसे इस बात का अहसास भी करवा दिया कि केशरबाई को वह अपनी ताकत से नहीं दबा सकता. कहना नहीं होगा कि सब मिला कर गोविंद केशरबाई नाम की इस खूबसूरत बला के कांटों में उलझ कर रह गया था.

इसी बीच एक और घटना घटी. हुआ यह कि गंधवानी थाना सीमा के बोरडाबरा गांव में सोहन के एक परिचित दिनेश भिलाला को शादी के लिए एक लड़की की जरूरत थी. चूंकि बोरडाबरा गांव अपनी आपराधिक गतिविधियों के लिए पूरे इलाके में कुख्यात है, इसलिए कोई भी भला आदमी अपनी बेटी को बोरडाबरा में रहने वाले युवक से ब्याहना पसंद नहीं करता.

दिनेश भिलाला भी यहां रहने वाले खूंखार आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों में से एक था, इसलिए उम्र गुजर जाने के बाद भी उसे शादी के लिए लड़की नहीं मिल रही थी. उस ने अपनी यह समस्या सोहन के सामने रखी तो सोहन ने केशरबाई के माध्यम से उस की शादी करवा देने का भरोसा दिलाया.

सोहन जानता था कि केशरबाई शादी के नाम पर ठगी का खेल करती है. उस की लड़कियां शादी के कुछ दिन बाद पति के घर से मालपैसा समेट कर फरार हो जाती हैं. लेकिन उसे भरोसा था कि चूंकि केशरबाई उस की परिचित है, इसलिए वह उस के कहने पर ईमानदारी से दिनेश के लिए किसी अच्छी लड़की का इंतजाम करवा देगी.

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केशरबाई ने ऐसा किया भी. सोहन के कहने पर उस ने 80 हजार रुपए के बदले में दिनेश भिलाला की शादी एक बेहद खूबसूरत युवती से करवा दी.

लेकिन सोहन का यह सोचना कि केशरबाई उसे धोखा नहीं देगी, गलत साबित हुआ. शादी के बाद वह युवती 15 दिन तक तो दिनेश भिलाला के साथ उस की पत्नी बन कर रही, उस के बाद केशरबाई  के इशारे पर वह दिनेश के बिस्तर से उतर कर वापस आने के बाद कहीं गायब हो गई.

पत्नी के भाग जाने की बात दिनेश को पता चली तो उस ने सीधे जा कर सोहन का गला पकड़ लिया. उस का कहना था कि या तो पत्नी को उस के पास भेजो या फिर शादी के नाम पर उस से लिया गया पैसा 80 हजार मय खर्च के वापस करो.

सोहन ने इस बारे में केशरबाई से बात की तो उस ने साफ  मना कर दिया. उस का कहना था कि मेरी जिम्मेदारी शादी करवाने की थी, लड़की को दिनेश के गले बांध कर रखने की नहीं. लड़की कहां गई, इस का उसे पता नहीं और न ही वह दिनेश को उस का पैसा वापस करेगी.

लेकिन दिनेश इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था. उस ने सोहन के साथसाथ केशरबाई और उस के आशिक गोविंद को भी धमकी दी कि अगर 10 दिन में उस की पत्नी वापस नहीं आई तो 11वें दिन उस का पैसा वापस कर देना. और अगर यह भी नहीं कर सकते तो फिर तीनों मरने के लिए तैयार रहना.

अगले भाग में पढ़ें- केशरबाई की हत्या किसने की

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