Manohar Kahaniya : पावर बैंक ऐप के जरिए धोखाधड़ी- भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में लौकडाउन और कर्फ्यू के कारण तमाम तरह की गतिविधियां लगभग बंद पड़ी थीं. इस दौरान पुलिस अपराध नियंत्रण की जगह या तो लोगों की मदद करने में जुटी थी या लौकडाउन का पालन कराने और लोगों को कोरोना संक्रमण से जागरुक करने में.

लेकिन इस दरम्यान कुछ ऐसा हुआ कि 30 मई, 2021 को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पुलिस मुख्यालय में एक खास मकसद से एक आपात बैठक बुलानी पड़ी. इस बैठक में चुनिंदा पुलिस अधिकारी मौजूद थे. इस आपात बैठक में पुलिस कमिश्नर एस.एन. श्रीवास्तव के सामने क्राइम ब्रांच के विशेष आयुक्त प्रवीर रंजन के साथ साइबर क्राइम सेल के संयुक्त आयुक्त प्रेमनाथ तथा इसी सेल के डीसीपी अनेष राय मौजूद थे. पुलिस कमिश्नर के सामने एक मोटी फाइल  रखी थी.

‘‘प्रवीर क्या तुम्हारी यूनिट को खबर है कि इन दिनों औनलाइन फ्रौड का कौन सा नया ट्रेंड सब से तेजी से अपना काम कर रहा है?’’ कमिश्नर एस.एन. श्रीवास्तव ने क्राइम ब्रांच के विशेष आयुक्त प्रवीर रंजन से मुखातिब होते हुए पूछा.

‘‘औनलाइन फ्रौड के तो दरजनों तरीके हैं सर और साइबर क्रिमिनल इन सब के जरिए ही क्राइम कर रहे हैं. जब से कोरोना महामारी फैली है और लोग लौकडाउन के कारण घरों में बंद हैं, तब से तो आए दिन एक नया औनलाइन फ्रौड सामने आ रहा है. सौरी सर, लेकिन आप किस नए ट्रेंड की बातें कर रहे हैं?’’ प्रवीर रंजन पुलिस कमिश्नर की बात को स्पष्ट रूप से समझ नहीं सके तो उन्होंने संकोच करते हुए उन से साफतौर से बताने का आग्रह किया.

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‘‘मेरे सामने जो फाइल है इस में पिछले 2 महीने के दौरान औनलाइन मिली वो शिकायतें हैं, जिन में सैंकड़ों लोगों ने एक ही तरह से ठगी की शिकायत की है. सब के साथ एक ही तरह से ठगी की गई है. इन के अलावा न्यूजपेपर में अलग से आए दिन इसी तरह से ठगी की शिकायतों की खबरें छप रही हैं.

‘‘मुझे लगता है कि कोई गैंग है जो बड़े आर्गनाइज तरीके से इस तरह से ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा है. अभी ये तो नहीं पता कि कितने लोगों के साथ अब तक ऐसी वारदात हो चुकी है, लेकिन जिस तेजी से ये गैंग काम कर रहा है उसे देख कर लगता है कि ठगी के शिकार लोगों की गिनती लाखों में हो सकती है.’’

पुलिस आयुक्त ने दिए कुछ हिंट

पुलिस आयुक्त श्रीवास्तव ने गंभीर होते हुए सीधे मुद्दे की बात शुरू कर दी, जिस के लिए उन्होंने यह बैठक बुलाई थी.

‘‘मेरे पास जितनी भी शिकायतें आई हैं, वे सब एक ही तरह की हैं. जिस में लोगों को गूगल प्लेस्टोर से कुछ खास तरह के ऐप डाउनलोड करने के लिंक भेजे जा रहे हैं. लोगों को इन ऐप्स ने 25-35 दिनों में निवेश राशि को दोगुना करने के दावों के साथ निवेश पर आकर्षक रिटर्न की पेशकश की. ये ऐप्स प्रति घंटा और दैनिक आधार पर रिटर्न की पेशकश कर रहे हैं. शुरू में लोगों को छोटे निवेश पर रिटर्न दिया जा रहा है और बड़ी रकम का निवेश होते ही निवेशक के मोबाइल पर ऐप ब्लौक हो जाता है.’’

विशेष आयुक्त प्रवीर रंजन स्पष्ट बताते ही समझ गए कि पुलिस कमिश्नर ठगी के किस नए ट्रेंड की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘सर, आप पावर ऐप बैंक की बात कर रहे हैं. सर, पिछले हफ्ते ही मुझे सीधे कुछ ऐसी शिकायतें मिली थीं और हम ने अखबारों में भी पढ़ा था, जिस के बाद मैं ने अपनी साइबर यूनिट को ऐसे मामलों की छानबीन करने के काम पर लगा दिया है. हम आलरेडी इस पर काम कर रहे हैं.’’

‘‘गुड प्रवीर, मुझे तुम से ऐसी ही उम्मीद थी. मैं चाहता हूं कि एक बड़ी टीम बना कर इस पर सीरियसली तुरंत ऐक्शन शुरू करो. लोग किस तरह इस ठगी से बच सकते हैं, इस के लिए भी एक एडवाइजरी बनाओ जिस से हम लोगों को ऐसे जालसाजों के चंगुल में फंसने से बचा सकें और उन्हें जागरुक कर सकें.’’ कहते हुए पुलिस आयुक्त श्रीवास्तव ने अपने सामने रखी मोटी फाइल प्रवीर रंजन की तरफ बढ़ा दी.

इस के बाद इसी मुद्दे पर खास हिदायतें देने के बाद मीटिंग खत्म हो गई और पुलिस आयुक्त एस.एन. श्रीवास्तव मीटिंग से चले गए.

पुलिस कमिश्नर के जाने के बाद प्रवीर रंजन इस मामले को ले कर जौइंट सीपी प्रेमनाथ और डीसीपी अनेष राय के साथ काफी देर तक चर्चा करते रहे और कुछ देर की माथापच्ची के बाद बाकायदा एक रणनीति तैयार कर ली गई, ताकि जालसाजी का अनोखा जाल फैलाने वालों को पकड़ा जा सके.

तीनों अधिकारी कुछ देर बाद जब मीटिंग रूम से बाहर निकले तो उन के इरादे साफ थे कि इस मामले में जल्द ही बड़ा ऐक्शन शुरू होगा. क्योंकि किसी खास अपराध को ले कर अगर पुलिस आयुक्त खुद चिंता व्यक्त करें तो मातहतों के लिए ऐसा ऐक्शन लेना लाजिमी भी हो जाता है. वैसे भी जालसाजी का ये जो नया ट्रेंड सामने आया था, वो सीधे लाखोंकरोड़ों लोगों से जुड़ा था और इस के जरिए हर रोज लोगों के साथ धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आ रही थीं.

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साइबर क्राइम की टीम जुटी जांच में

इस बैठक के बाद विशेष आयुक्त प्रवीर रंजन ने साइबर अपराध प्रकोष्ठ के तेजतर्रार एसीपी आदित्य गौतम के नेतृत्व में इंसपेक्टर परवीन, इंसपेक्टर हंसराज, सबइंसपेक्टर अवधेश, सुनील, व हरजीत के साथ 3 दरजन पुलिसकर्मियों की एक बड़ी टीम तैयार की.

इस टीम के कई लोग पहले से ही जालसाजी के इस रैकेट को समझने के लिए इस पर काम कर रहे थे. साइबर क्राइम की टीम ने सब से पहले पावर बैंक ऐप और ईजीमनी ऐप की मोडस औपरेंडी का विश्लेषण किया कि वे कैसे काम करते हैं.

टीम के सदस्यों ने इन ऐप्स पर अपने खाते बनाए और इस के बाद उन्होंने इस में कुछ पैसे इनवेस्ट भी कर दिए ताकि पता लगाया जा सके कि पैसे किन खातों में और कहां ट्रांसफर होते हैं.

पुलिस ने लंबी कवायद के बाद आखिरकार पता लगा लिया कि ऐप्स में होने वाले इनवैस्टमेंट का पैसा किस पेमेंट गेटवे से हो कर किनकिन बैंक खातों में ट्रांसफर होता है और वे बैंक खाते किन लोगों के नाम पर खुले हैं. उन में जो मोबाइल नंबर दर्ज हैं, उन का संचालन कौन करता है. साइबर क्राइम की टीम ने ठगी के इस जाल की पूरी कड़ी तैयार कर ली, जिस के बाद शुरू हुआ ऐक्शन का काम.

2 जून, 2021 की सुबह एक ही समय में दिल्लीएनसीआर, पश्चिम बंगाल और बंगलुरु में एक साथ छापेमारी की गई और 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. इस में 2 चार्टर्ड एकाउंटेंट थे. इन की पहचान गुड़गांव निवासी अविक केडिया और दिल्ली के कटवारिया सराय निवासी रौनक बंसल के रूप में हुई.

पूछताछ में पता चला कि ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए जो मुखौटा कंपनियां बनाई गई थीं, वे इन्हीं दोनों ने तैयार की थीं.

मास्टरमाइंड हुआ गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में स्थित उलबेरिया में रहने वाला शेख रौबिन इस धोखाधड़ी के नेटवर्क का भारत में मास्टरमाइंड सरगना था. शेख रौबिन से पूछताछ और उस से बरामद हुए दस्तावेजों की छानबीन में पता चला कि वह कई बार चीन, सिंगापुर, दुबई और दूसरे देशों की यात्रा कर चुका था.

शेख रौबिन वीचैट और टेलीग्राम जैसे मोबाइल ऐप के जरिए कुछ चीनी लोगों के संपर्क में था. उन्होेंने शेख को अपने गूगल प्लेस्टोर पर अपलोड किए गए अपने मोबाइल ऐप पावर बैंक और सन लाइट फैक्ट्री के जरिए भारतीय लोगों से धोखाधड़ी करने के लिए एक ऐसा सिंडीकेट तैयार करने के लिए राजी किया था, जो अपना लाभ ले कर उन के लिए काम कर सकें.

धोखाधड़ी का पूरा प्लान जानने के बाद शेख रौबिन ने दिल्ली और गुड़गांव में सीए अविक केडिया और दिल्ली के रौनक बंसल से संपर्क किया. दोनों सीए ने अपने करीबी लोगों, रिश्तेदारों के नाम, पते और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करीब 25 शैल कंपनियां बनाईं और उन्हें शेख रौबिन को 3 लाख रुपए इन का इस्तेमाल करने के लिए बेच दिया.

शेख ने इन सभी कंपनियों के नाम से देश के अलगअलग शहरों में करीब 30 से अधिक बैंक खाते खुलवाए और इन में अपने लोगों के नाम से फरजी आधार कार्ड व दस्तावेज बना कर खरीदे गए सिम कार्ड व मोबाइल नंबर दर्ज करा दिए.

शेख रौबिन ने बंगुलरु में एक तिब्बत मूल की युवती पेमा वांगमो के साथ मिल कर एक ऐसी फरजी स्टार्टअप कंपनी का गठन कर दिया, जो मल्टीलेवल मार्केटिंग के लिए ईजी मनी ऐप को प्रमोट करने लगी. पेमा के साथ बंगलुरु में सुकन्या और नागाभूषण नाम के उस के साथी भी उस की मदद करते थे.

अगले भाग में पढ़ेंपुलिस ने बैंक खाते कराए सीज

Family Story in Hindi- खुशियों की दस्तक: भाग 3

कौस्तुभ और प्रिया का शरीर अब जर्जर होता रहा था. कहते हैं न कि आप के शरीर का स्वास्थ्य बहुत हद तक मन के सुकून और खुशी पर निर्भर करता है और जब यही हासिल न हो तो स्थिति खराब होती चली जाती है. यही हालत थी इन दोनों की. मन से एकाकी, दुखी और शरीर से लाचार. बस एकदूसरे की खातिर दोनों जी रहे थे. पूरी ईमानदारी से एकदूसरे का साथ दे रहे थे. एक दिन दोनों बाहर बालकनी में बैठे थे, तो एक महिला अपने बच्चे के साथ उन के घर की तरफ आती दिखी. कौस्तुभ सहसा ही बोल पड़ा, ‘‘उस बच्चे को देख रही हो प्रिया, हमारा पोता भी अब इतना बड़ा हो गया होगा न? अच्छा है, उसे हमारा चेहरा देखने को नहीं मिला वरना मोहित की तरह वह भी डर जाता,’’ कहतेकहते कौस्तुभ की पलकें भीग गईं. प्रिया क्या कहती वह भी सोच में डूब गई कि काश मोहित पास में होता.

तभी दरवाजे पर हुई दस्तक से दोनों की तंद्रा टूटी. दरवाजा खोला तो सामने वही महिला खड़ी थी, बच्चे की उंगली थामे. ‘‘क्या हुआ बेटी, रास्ता भूल गईं क्या?’’ हैरत से देखते हुए प्रिया ने पूछा.

‘‘नहीं मांजी, रास्ता नहीं भूली, बल्कि सही रास्ता ढूंढ़ लिया है,’’ वह महिला बोली. वह चेहरे से विदेशी लग रही थी मगर भाषा, वेशभूषा और अंदाज बिलकुल देशी था. प्रिया ने प्यार से बच्चे का माथा चूम लिया और बोली, ‘‘बड़ा प्यारा बच्चा है. हमारा पोता भी इतना ही बड़ा है. इसे देख कर हम उसे ही याद कर रहे थे. लेकिन वह तो इतनी दूर रहता है कि हम आज तक उस से मिल ही नहीं पाए.’’

‘‘इसे भी अपना ही पोता समझिए मांजी,’’ कहती हुई वह महिला अंदर आ गई.

‘‘बेटी, हमारे लिए तो इतना ही काफी है कि तू ने हमारे लिए कुछ सोचा. कितने दिन गुजर जाते हैं, कोई हमारे घर नहीं आता. बेटी, आज तू हमारे घर आई तो लग रहा है, जैसे हम भी जिंदा हैं.’’

‘‘आप सिर्फ जिंदा ही नहीं, आप की जिंदगी बहुत कीमती भी है,’’ कहते हुए वह महिला सोफे पर बैठ गई और वह बच्चा भी प्यार से कौस्तुभ के बगल में बैठ गया. सकुचाते हुए कौस्तुभ ने कहा, ‘‘अरे, आप का बच्चा तो मुझे देख कर बिलकुल भी नहीं घबरा रहा.’’

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‘‘घबराने की बात ही क्या है अंकल? बच्चे प्यार देखते हैं, चेहरा नहीं.’’ ‘‘यह तो तुम सही कह रही हो बेटी पर विश्वास नहीं होता. मेरा अपना बच्चा जब इस की उम्र का था तो बहुत घबराता था मुझे देख कर. इसीलिए मेरे पास आने से डरता था. दादादादी के पास ही उस का सारा बचपन गुजरा था.’’

‘‘मगर अंकल हर कोई ऐसा नहीं होता. और मैं तो बिलकुल नहीं चाहती कि हमारा सागर मोहित जैसा बने.’’ इस बात पर दोनों चौंक कर उस महिला को देखने लगे, तो वह मुसकरा कर बोली, ‘‘आप सही सोच रहे हैं. मैं दरअसल आप की बहू सारिका हूं और यह आप का पोता है, सागर. मैं आप को साथ ले जाने के लिए आई हूं.’’ उस के बोलने के लहजे में कुछ ऐसा अपनापन था कि प्रिया की आंखें भर आईं. बहू को गले लगाते हुए वह बोली, ‘‘मोहित ने तुझे अकेले क्यों भेज दिया? साथ क्यों नहीं आया?’’ ‘‘नहीं मांजी, मुझे मोहित ने नहीं भेजा मैं तो उन्हें बताए बगैर आई हूं. वे 2 महीने के लिए पैरिस गए हुए हैं. मैं ने सोचा क्यों न इसी बीच आप को घर ले जा कर उन को सरप्राइज दे दूं. ‘‘मोहित ने आज तक मुझे बताया ही नहीं था कि मेरे सासससुर अभी जिंदा हैं. पिछले महीने इंडिया से आए मोहित के दोस्त अनुज ने मुझे आप लोगों के बारे में सारी बातें बताईं. फिर जब मैं ने मोहित से इस संदर्भ में बात करनी चाही तो उस ने मेरी बात बिलकुल ही इग्नोर कर दी. तब मुझे यह समझ में आ गया कि वह आप से दूर रहना क्यों चाहता है और क्यों आप को घर लाना नहीं चाहता.’’

‘‘पर बेटा, हम तो खुद भी वहां जाना नहीं चाहते. हमें तो अब ऐसी ही जिंदगी जीने की आदत हो गई है,’’ कौस्तुभ बोला.

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‘‘मगर डैडी, आज हम जो खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं, सब आप की ही देन है और अब हमारा फर्ज बनता है कि हम भी आप की खुशी का खयाल रखें. जिस वजह से मोहित आप से दूर हुए हैं, मैं वादा करती हूं, वह वजह ही खत्म कर दूंगी.’’ ‘‘मेरे अंकल एक बहुत ही अच्छे कौस्मैटिक सर्जन हैं और वे इस तरह के हजारों केस सफलतापूर्वक डील कर चुके हैं. कितना भी जला हुआ चेहरा हो, उन का हाथ लगते ही उस चेहरे को नई पहचान मिल जाती है. वे मेरे अपने चाचा हैं. जाहिर है कि वे आप से फीस भी नहीं लेंगे और पूरी एहतियात के साथ  इलाज भी करेंगे. आप बस मेरे साथ सिंगापुर चलिए. मैं चाहती हूं कि हमारा बच्चा दादादादी के प्यार से वंचित न रहे. उसे वे खुशियां हासिल हों जिन का वह हकदार है. मैं नहीं चाहती कि वह मोहित जैसा स्वार्थी बने और हमारे बुढ़ापे में वैसा ही सुलूक करे जैसा मोहित कर रहा है’’ प्रिया और कौस्तुभ स्तंभित से सारिका की तरफ देख रहे थे. जिंदगी ने एक बार फिर करवट ली थी और खुशियों की धूप उन के आंगन में सुगबुगाहट लेने लगी थी. बेटे ने नहीं मगर बहू ने उन के दर्द को समझा था और उन्हें उन के हिस्से की खुशियां और हक दिलाने आ गई थी.

Family Story in Hindi: विश्वास- भाग 3: क्या अंजलि अपनी बिखरती हुई गृहस्थी को समेट पाई?

अंजलि को बेटी का सवाल सुन कर तेज झटका लगा. उस ने अपना सिर झुका लिया. शिखा आगे एक भी शब्द न बोल कर अपने कमरे में लौट गई. दोनों मांबेटी ने तबीयत खराब होने का बहाना बना कर रात का खाना नहीं खाया. शिखा के नानानानी को उन दोनों के उखडे़ मूड का कारण जरा भी समझ में नहीं आया.

उस रात अंजलि बहुत देर तक नहीं सो सकी. अपने पति के साथ चल रहे मनमुटाव से जुड़ी बहुत सी यादें उस के दिलोदिमाग में हलचल मचा रही थीं. शिखा द्वारा लगाए गए आरोप ने उसे बुरी तरह झकझोर दिया था.

राजेश ने कभी स्वीकार नहीं किया था कि अपने दोस्त की विधवा के साथ उस के अनैतिक संबंध थे. दूसरी तरफ आफिस में काम करने वाली 2 लड़कियों और राजेश के दोस्तों की पत्नियों ने इस संबंध को समाप्त करवा देने की चेतावनी कई बार उस के कानों में डाली थी.

राजेश ने उसे प्यार से डांट कर भी खूब समझाया

तब खूबसूरत सीमा को अपने पति के साथ खूब खुल कर हंसतेबोलते देख अंजलि जबरदस्त ईर्ष्या व असुरक्षा की भावना का शिकर रहने लगी.

राजेश ने उसे प्यार से व डांट कर भी खूब समझाया पर अंजलि ने साफ कह दिया, ‘मेरे मन की सुखशांति, मेरे प्यार व खुशियों की खातिर आप को सीमा से हर तरह का संबंध समाप्त कर लेना होगा.’

‘मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा जिस से अपनी नजरों में गिर जाऊं. मैं कुसूरवार हूं ही नहीं, तो सजा क्यों भोगूं? अपने दिवंगत दोस्त की पत्नी को मैं बेसहारा नहीं छोड़ सकता हूं. तुम्हारे बेबुनियाद शक के कारण मैं अपनी नजरों में खुद को गिराने वाला कोई कदम नहीं उठाऊंगा,’ राजेश के इस फैसले को अंजलि किसी भी तरह से नहीं बदलवा सकी.

पहले अपने पति और अब अपनी बेटी के साथ हुए टकरावों में अंजलि को बड़ी समानता नजर आई. उस ने सीमा को ले कर राजेश पर चरित्रहीन होने का आरोप लगाया था और शिखा ने कमल को ले कर खुद उस पर.

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वह अपने को सही मानती थी, जैसे अब शिखा अपने को सही मान रही थी. वहां राजेश अपराधी के कटघरे में खड़ा हो कर सफाई देता था और आज वह अपनी बेटी को सफाई देने के लिए मजबूर थी.

अपने दिल की बात वह अच्छी तरह जानती थी. उस के मन में कमल को ले कर रत्ती भर भी गलत तरह का आकर्षण नहीं था. इस मामले में शिखा पूरी तरह गलत थी.

तब सीमा व राजेश के मामले में क्या वह खुद गलत नहीं हो सकती थी? इस सवाल से जूझते हुए अंजलि ने सारी रात करवटें बदलते हुए गुजार दी.

अगली सुबह शिखा के जागते ही अंजलि ने अपना फैसला उसे सुना दिया, ‘‘अपना सामान बैग में रख लो. नाश्ता करने के बाद हम अपने घर लौट रहे हैं.’’

अंजलि ने उसे अपने सीने से लगा लिया

‘‘ओह, मम्मी. यू आर ग्रेट. मैं बहुत खुश हूं,’’ शिखा भावुक हो कर उस से लिपट गई.

अंजलि ने उस के माथे का चुंबन लिया, पर मुंह से कुछ नहीं बोली. तब शिखा ने धीमे स्वर में उस से कहा, ‘‘गुस्से में आ कर मैं ने जो भी पिछले दिनों आप से उलटासीधा कहा है, उस के लिए मैं बेहद शर्मिंदा हूं. आप का फैसला बता रहा है कि मैं गलत थी. प्लीज मम्मा, मुझे माफ कर दीजिए.’’

अंजलि ने उसे अपने सीने से लगा लिया. मांबेटी दोनों की आंखों में आंसू भर आए. पिछले कई दिनों से बनी मानसिक पीड़ा व तनाव से दोनों पल भर में मुक्त हो गई थीं.

उस के बुलावे पर वंदना उस से मिलने घर आ गई. कमल के आफिस चले जाने के कारण अंजलि के लौटने की खबर कमल तक नहीं पहुंची.

वंदना को अंजलि ने अकेले में अपने वापस लौटने का सही कारण बताया, ‘‘पिछले दिनों अपनी बेटी शिखा के कारण राजेश और सीमा को ले कर मुझे अपनी एक गलती…एक तरह की नासमझी का एहसास हुआ है. उसी भूल को सुधारने को मैं राजेश के पास बेशर्त वापस लौट रही हूं.

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‘‘सीमा के साथ उस के अनैतिक संबंध नहीं हैं, मुझे राजेश के इस कथन पर विश्वास करना चाहिए था, पर मैं और लोगों की सुनती रही और हमारे बीच प्रेम व विश्वास का संबंध कमजोर पड़ने लगा.

‘‘अगर राजेश निर्दोष हैं तो मेरा झगड़ालू रवैया उन्हें कितना गलत और दुखदायी लगता होगा. बिना कुछ अपनी आंखों से देखे, पत्नी का पति पर विश्वास न करना क्या एक तरह का विश्वासघात नहीं है?

‘‘मैं राजेश को…उन के पे्रम को खोना नहीं चाहती हूं. हो सकता है कि सीमा और उन के बीच गलत तरह के संबंध बन गए हों, पर इस कारण वह खुद भी मुझे छोड़ना नहीं चाहते. उन के दिल में सिर्फ मैं रहूं, क्या अपने इस लक्ष्य को मैं उन से लड़झगड़ कर कभी पा सकूंगी?

‘‘वापस लौट कर मुझे उन का विश्वास फिर से जीतना है. हमारे बीच प्रेम का मजबूत बंधन फिर से कायम हो कर हम दोनों के दिलों के घावों को भर देगा, इस का मुझे पूरा विश्वास है.’’

अंजलि की आंखों में दृढ़निश्चय के भावों को पढ़ कर वंदना ने उसे बडे़ प्यार से गले लगा लिया.

Satyakatha- जब इश्क बना जुनून: भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

शाहिदा इस के लिए तैयार ही थी. उस ने किसी तरह का कोई विरोध नहीं किया तो रईस और शाहिदा के बीच अमित दाखिल हो गया.

इस तरह अमित और शाहिदा के अनैतिक संबंध बन गए. फिर तो अकसर अमित रईस की गैरमौजूदगी में उस के घर जाने लगा. अमित न तो रईस का रिश्तेदार था और न ही दोस्त. वह उस के घर आता भी उस की गैरमौजूदगी में था. इसलिए बिटिया से जब उस के घर आने का पता चला तो उसे शक हुआ. उस ने शाहिदा से उस के बारे में पूछा तो वह साफ मुकर गई. इस से रईस का शक और बढ़ गया.

इस तरह की बातें कहां ज्यादा दिनों तक छिपी रहती हैं. इस की वजह यह थी कि जैसेजैसे दिन बीतते गए, दोनों की मिलने की चाह बढ़ती गई और वे लापरवाह होते गए.

जब रईस को पूरा विश्वास हो गया कि उस की बीवी का अमित से गलत संबंध है तो वह शाहिदा को उस से मिलने से रोकने लगा. शाहिदा पहले तो मना करती रही कि उस का अमित से इस तरह का कोई संबंध नहीं है. पर रईस को उस की बात पर जरा भी विश्वास नहीं था. क्योंकि उस के पास पक्का सबूत था कि उस की पत्नी अब उस के प्रति वफादार नहीं रही. वह शाहिदा पर दबाव डालने लगा कि वह अमित से मिलनाजुलना छोड़ दे, वरना ठीक नहीं होगा.

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जब रईस का दबाव बढ़ता गया तो शाहिदा बेचैन हो उठी. इस की वजह यह थी अब तक शाहिदा पूरी तरह से अमित की हो चुकी थी. अब उसे अपने पति रईस से जरा भी लगाव नहीं रह गया था. इसलिए उस ने अमित से साफसाफ कह दिया कि अब वह हमेशाहमेशा के लिए उस की होना चाहती है. इस के लिए जरूरत पड़ेगी तो वह रईस को ठिकाने भी लगा सकती है. क्योंकि रईस जीते जी उन दोनों को एक नहीं होने देगा.

अमित शाहिदा के प्यार में पागल था. उस ने भी हर तरह से शाहिदा का साथ देने के लिए हामी भर दी. इस तरह एक खौफनाक कत्ल की साजिश रची जाने लगी.

अमित और शाहिदा रईस को ठिकाने लगाने के बारे में सोच ही रहे थे कि 21 मई, 2021 की शाम ऐसा संयोग बना कि बिना किसी योजना के ही अचानक उन्होंने रईस को ठिकाने लगा दिया.

हुआ यह कि उस दिन रईस समय से काफी पहले घर आ गया. घर पहुंचा तो उसे शाहिदा और अमित आपत्तिजनक स्थिति में मिले. बच्चे बाहर खेल रहे थे. कोई भी गैरतमंद पति अपनी पत्नी को किसी गैर के आगोश में देख लेगा तो उस के शरीर में आग लग ही जाएगी.

शाहिदा को अमित के पहलू में देख कर रईस को भी गुस्सा आ गया. वह शाहिदा और अमित की पिटाई करने लगा.

अमित और शाहिदा ने तो पहले से ही रईस को ठिकाने लगाने की तैयारी कर रखी थी. जब उन दोनों की जान पर बन आई तो शाहिदा दौड़ कर किचन से चाकू उठा लाई, जिस से अमित ने गला काट कर रईस को मौत के घाट उतार दिया. इस के बाद लाश घर में ही छिपा दी.

पति की लाश घर में पड़ी थी. अगर लाश बरामद हो जाती तो दोनों पकड़े जाते. काफी सोचविचार कर रातोंरात अमित और शाहिदा ने रईस की लाश को उसी घर में गड्ढा खोद कर दफनाने का भयानक निर्णय ले लिया.

कमरे में गड्ढा खोद कर लाश को गाड़ना इसलिए मुश्किल था, क्योंकि कमरे में बच्चे सो रहे थे. लाश को ठिकाने लगाने के लिए शाहिदा ने अपने प्रेमी अमित के साथ किचन में एक गड्ढा खोद डाला.

किचन का वह गड्ढा इतना बड़ा नहीं था कि पूरी की पूरी लाश उस में आ जाती. इसलिए दोनों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए पहले लाश के 4 टुकड़े किए, उस के बाद वे टुकड़े बेतरतीब तरीके से एक के ऊपर एक रख कर दफना दिए.

जब यह सब हो रहा था, संयोग से शाहिदा और रईस की 6 साल की मासूम बेटी की आंखें खुल गईं. जब उस ने अपने पापा को 4 टुकड़ों में देखा तो सहम उठी. मारे डर के वह चीख उठी.

उस की चीख सुन कर शाहिदा और अमित घबरा गए. क्योंकि उस बच्ची ने अपनी आंखों से सब कुछ देख लिया था. बच्ची इतनी छोटी नहीं थी कि वह यह न जानती कि यह सब क्या हो रहा है? वह उन दोनों की पोल खोल सकती थी. इसलिए किसी न किसी तरह उस का मुंह बंद कराना था.

पिता की लाश को 4 टुकड़ों में देख कर वह वैसे ही सहमी हुई थी, वह तब और सहम गई जब उस की मां ने कहा कि अगर उस ने किसी को इस बारे में बताया तो वह उसे पानी के ड्रम में डुबो कर मार देगी और उस की लाश को भी उस के पापा की तरह काट कर गाड़ देगी.

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मां की यह धमकी सुन कर वह मासूम बुरी तरह डर गई और जा कर चुपचाप सो गई.

दोनों ने रईस की हत्या की साजिश काफी सोचविचार कर रची थी. तभी तो शाहिदा ने सीमेंट, टाइल्स और घर की मरम्मत का सामान पहले से ही मंगा कर रख लिया था.

रईस को इस सब का बिलकुल पता नहीं था. लेकिन जब उस ने इस सामान को देखा था, तब शाहिदा से पूछा जरूर था. शाहिदा ने कहा था कि वह किचन की मरम्मत कराना चाहती है. रईस को यह तो शक था नहीं कि शाहिदा उस की हत्या भी करवा सकती है, इसलिए उस ने शाहिदा की बात पर विश्वास कर लिया था.

अब रईस ठिकाने लग चुका था. उस की हत्या हो चुकी थी और उसी घर के किचन में दफन है, यह बात शाहिदा, उसकी बेटी और अमित के अलावा किसी और को पता नहीं थी.

लेकिन यह भी सच है कि हत्यारा कोई न कोई सबूत अवश्य छोड़ देता है. ऐसा ही रईस की हत्या के मामले में भी हुआ.

शाहिदा ने अमित के साथ मिल कर जो किया था, उस की मासूम बेटी ने सब देख लिया था, जिस की वजह से केस खुल गया. शातिर खिलाड़ी शाहिदा से पूछताछ के बाद पुलिस ने अमित को भी गिरफ्तार कर लिया.

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थाने में शाहिदा को देख कर अमित ने भी तुरंत अपना अपराध स्वीकार कर लिया. क्योंकि उसे पता था कि पुलिस को सारी सच्चाई पता चल चुकी है. इस के बाद सारी काररवाई पूरी कर थाना दहिसर पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

उलझे रिश्ते- भाग 3: क्या प्रेमी से बिछड़कर खुश रह पाई रश्मि

Writer- Ravi

रश्मि अपने पति के रूखे और ठंडे व्यवहार से तो परेशान थी ही उस की सास भी कम नहीं थीं. रश्मि ने फिल्मों में ललिता पंवार को सास के रूप में देखा था. उसे लगा वही फिल्मी चरित्र उस की लाइफ में आ गया है. हसीन ख्वाबों को लिए उड़ने वाली रश्मि धरातल पर आ गई. संभव के साथ जैसेतैसे ऐडजस्ट किया उस ने परंतु सास से उस की पटरी नहीं बैठ पाई. संभव को भी लगा अब सासबहू का एकसाथ रहना मुश्किल है. तब सब ने मिल कर तय किया कि संभव रश्मि को ले कर अलग घर में रहेगा. कुछ ही दूरी पर किराए का मकान तलाशा गया और रश्मि नए घर में आ गई. अब तक उस के 2 प्यारेप्यारे बच्चे भी हो चुके थे. शादी के 12 साल कब बीत गए पता ही नहीं चला. नए घर में आ कर रश्मि के सपने फिर से जाग उठे. उमंगें जवां हो गईं. उस ने कार चलाना सीख लिया. पेंटिंग का उसे शौक था. उस ने एक से बढ़ कर एक पोट्रेट तैयार किए. जो देखता वह देखता ही रह जाता. अपने बेटे साहिल को पढ़ाने के लिए रश्मि ने हिमेश को ट्यूटर रख लिया. वह साहिल को पढ़ाने के लिए अकसर दोपहर बाद आता था जब संभव घर होता था. 28-30 वर्षीय हिमेश बहुत आकर्षक और तहजीब वाला अध्यापक था. रश्मि को उस का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक लगता था. खुले विचारों की रश्मि हिमेश से हंसबोल लेती. हिमेश अविवाहित था. उस ने रश्मि के हंसीमजाक को अलग रूप में देखा. उसे लगा कि रश्मि उसे पसंद करती है. लेकिन रश्मि के मन में ऐसा दूरदूर तक न था. वह उसे एक शिक्षक के रूप में देखती और इज्जत देती. एक दिन रश्मि घर पर अकेली थी. साहिल अपने दोस्त के घर गया था. हिमेश आया तो रश्मि ने कहा कि कोई बात नहीं, आप बैठिए. हम बातें करते हैं. कुछ देर में साहिल आ जाएगा.

रश्मि चाय बना लाई और दोनों सोफे पर बैठ गए. रश्मि ने बताया कि वह राधाकृष्ण की एक बहुत बड़ी पोट्रेट तैयार करने जा रही है. उस में राधाकृष्ण के प्यार को दिखाया गया है. यह बताते हुए रश्मि अपने अतीत में डूब गई. उस की आंखों के सामने सुधीर का चेहरा घूम गया. हिमेश कुछ और समझ बैठा. उस ने एक हिमाकत कर डाली. अचानक रश्मि का हाथ थामा और ‘आई लव यू’ कह डाला. रश्मि को लगा जैसे कोई बम फट गया है. गुस्से से उस का चेहरा लाल हो गया. वह अचानक उठी और क्रोध में बोली, ‘‘आप उठिए और तुरंत यहां से चले जाइए. और दोबारा इस घर में पांव मत रखिएगा वरना बहुत बुरा होगा.’’ हिमेश को तो जैसे सांप सूंघ गया. रश्मि का क्रोध देख उस के हाथ कांपने लगे.

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‘‘आ…आ… आप मुझे गलत समझ रही हैं मैडम,’’ उस ने कांपते स्वर में कहा.

‘‘गलत मैं नहीं समझ रही आप ने मुझे समझा है. एक शिक्षक के नाते मैं आप की इज्जत करती रही और आप ने मुझे क्या समझ लिया?’’ फिर एक पल भी नहीं रुका हिमेश. उस के बाद उस ने कभी रश्मि के घर की तरफ देखा भी नहीं. जब कभी साहिल ने पूछा रश्मि से तो उस से उस ने कहा कि सर बाहर रहने लगे हैं. रश्मि की जिंदगी फिर से दौड़ने लगी. एक दिन एक पांच सितारा होटल में लगी डायमंड ज्वैलरी की प्रदर्शनी में एक संभ्रात परिवार की 30-35 वर्षीय महिला ऊर्जा से रश्मि की मुलाकात हुई. बातों ही बातों में दोनों इतनी घुलमिल गईं कि दोस्त बन गईं. वह सच में ऊर्जा ही थी. गजब की फुरती थी उस में. ऊर्जा ने बताया कि वह अपने घर पर योगा करती है. योगा सिखाने और अभ्यास कराने योगा सर आते हैं. रश्मि को लगा वह भी ऊर्जा की तरह गठीले और आकर्षक फिगर वाली हो जाए तो मजा आ जाए. तब हर कोई उसे देखता ही रह जाएगा.

ऊर्जा ने स्वाति से कहा कि मैं योगा सर को तुम्हारा मोबाइल नंबर दे दूंगी. वे तुम से संपर्क कर लेंगे. रश्मि ने अपने पति संभव को मना लिया कि वह घर पर योगा सर से योगा सीखेगी. एक दिन रश्मि के मोबाइल घंटी बजी. उस ने देखा तो कोई नया नंबर था. रश्मि ने फोन उठाया तो उधर से आवाज आई,  ‘‘हैलो मैडम, मैं योगा सर बोल रहा हूं. ऊर्जा मैडम ने आप का नंबर दिया था. आप योगा सीखना चाहती हैं?’’‘‘जी हां मैं ने कहा था, ऊर्जा से,’’ रश्मि ने कहा.

‘‘तो कहिए कब से आना है?’’

‘‘किस टाइम आ सकते हैं आप?’’

‘‘कल सुबह 6 बजे आ जाता हूं. आप अपना ऐडै्रस नोट करा दें.’’

रश्मि ने अपना ऐड्रैस नोट कराया. सुबह 5.30 बजे का अलार्म बजा तो रश्मि जाग गई. योगा सर 6 बजे आ जाएंगे यही सोच कर वह आधे घंटे में फ्रैश हो कर तैयार रहना चाहती थी. बच्चे और पति संभव सो रहे थे. उन्हें 8 बजे उठने की आदत थी. रश्मि उठते ही बाथरूम में घुस गई. फ्रैश हो कर योगा की ड्रैस पहनी तब तक 6 बजने जा रहे थे कि अचानक डोरबैल बजी. योगा सर ही हैं यह सोच कर उस ने दौड़ कर दरवाजा खोला. दरवाजा खोला तो सामने खड़े शख्स को देख कर वह स्तब्ध रह गई. उस के सामने सुधीर खड़ा था. वही सुधीर जो उस की यादों में बसा रहता था.

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‘‘तुम योगा सर?’’ रश्मि ने पूछा.

‘‘हां.’’

फिर सुधीर ने, ‘‘अंदर आने को नहीं कहोगी?’’ कहा तो रश्मि हड़बड़ा गई.

‘‘हांहां आओ, आओ न प्लीज,’’ उस ने कहा. सुधीर अंदर आया तो रश्मि ने सोफे की तरफ इशारा करते हुए उसे बैठने को कहा. दोनों एकदूसरे के सामने बैठे थे. रश्मि को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोले, क्या नहीं. सुधीर कहे या योगा सर. रश्मि सहज नहीं हो पा रही थी. उस के मन में सुधीर को ले कर अनेक सवाल चल रहे थे. कुछ देर में वह सामान्य हो गई, तो सुधीर से पूछ लिया, ‘‘इतने साल कहां रहे?’’

सुधीर चुप रहा तो रश्मि फिर बोली, ‘‘प्लीज सुधीर, मुझे ऐसी सजा मत दो. आखिर हम ने प्यार किया था. मुझे इतना तो हक है जानने का. मुझे बताओ, यहां तक कैसे पहुंचे और अंकलआंटी कहां हैं? तुम कैसे हो?’’ रश्मि के आग्रह पर सुधीर को झुकना पड़ा. उस ने बताया कि तुम से अलग हो कर कुछ टाइम मेरा मानसिक संतुलन बिगड़ा रहा. फिर थोड़ा सुधरा तो शादी की, लेकिन पत्नी ज्यादा दिन साथ नहीं दे पाई. घरबार छोड़ कर चली गई और किसी और केसाथ घर बसा लिया. फिर काफी दिनों के इलाज के बाद ठीक हुआ तो योगा सीखतेसीखते योगा सर बन गया. तब किसी योगाचार्य के माध्यम से दिल्ली आ गया. मम्मीपापा आज भी वहीं हैं उसी शहर में. सुधीर की बातें सुन अंदर तक हिल गई रश्मि. यह जिंदगी का कैसा खेल है. जो उस से बेइंतहां प्यार करता था, वह आज किस हाल में है सोचती रह गई रश्मि. अजब धर्मसंकट था उस के सामने. एक तरफ प्यार दूसरी तरफ घरसंसार. क्या करे? सुधीर को घर आने की अनुमति दे या नहीं? अगर बारबार सुधीर घर आया तो क्या असर पड़ेगा गृहस्थी पर? माना कि किसी को पता नहीं चलेगा कि योगा सर के रूप में सुधीर है, लेकिन कहीं वह खुद कमजोर पड़ गई तो? उस के 2 छोटेछोटे बच्चे भी हैं. गृहस्थी जैसी भी है बिखर जाएगी. उस ने तय कर लिया कि वह सुधीर को योगा सर के रूप में स्वीकार नहीं करेगी. कहीं दूर चले जाने को कह देगी इसी वक्त.

‘‘देखो सुधीर मैं तुम से योगा नहीं सीखना चाहती,’’ रश्मि ने अचानक सामान्य बातचीत का क्रम तोड़ते हुए कहा.

‘‘पर क्यों रश्मि?’’

‘‘हमारे लिए यही ठीक रहेगा सुधीर, प्लीज समझो.’’

‘‘अब तुम शादीशुदा हो. अब वह बचपन वाली बात नहीं है रश्मि. क्या हम अच्छे दोस्त बन कर भी नहीं रह सकते?’’ सुधीर ने लगभग गिड़गिड़ाने के अंदाज में कहा.

‘‘नहीं सुधीर, मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगी, जिस से मेरी गृहस्थी, मेरे बच्चों पर असर पड़े,’’ रश्मि ने कहा. सुधीर ने लाख समझाया पर रश्मि अपने फैसले पर अडिग रही. सुधीर बेचैन हो गया. सालों बाद उस का प्यार उस के सामने था, लेकिन वह उस की बात स्वीकार नहीं कर रहा था. आखिर रश्मि ने सुधीर को विदा कर दिया. साथ ही कहा कि दोबारा संपर्क की कोशिश न करे. सुधीर रश्मि से अलग होते वक्त बहुत तनावग्रस्त था. पर उस दिन के बाद सुधीर ने रश्मि से संपर्क नहीं किया. रश्मि ने तनावमुक्त होने के लिए कई नई फ्रैंड्स बनाईं और उन के साथ बहुत सी गतिविधियों में व्यस्त हो गई. इस से उस का सामाजिक दायरा बहुत बढ़ गया. उस दिन वह बहुत से बाहर के फिर घर के काम निबटा कर बैडरूम में पहुंची तो न्यूज चैनल पर उस ने वह खबर देखी कि सुधीर ने दिल्ली मैट्रो के आगे कूद कर सुसाइड कर लिया था. वह देर तक रोती रही. न्यूज उद्घोषक बता रही थी कि उस की जेब में एक सुसाइड नोट मिला है, जिस में अपनी मौत के लिए उस ने किसी को जिम्मेदार नहीं माना परंतु अपनी एक गुमनाम प्रेमिका के नाम पत्र लिखा है. रश्मि का सिर घूम रहा था. उस की रुलाई फूट पड़ी. तभी संभव ने अचानक कमरे में प्रवेश किया और बोला, ‘‘क्या हुआ रश्मि, क्यों रो रही हो? कोई डरावना सपना देखा क्या?’’ प्यार भरे बोल सुन रश्मि की रुलाई और फूट पड़ी. वह काफी देर तक संभव के कंधे से लग कर रोती रही. उस का प्यार खत्म हो गया था. सिर्फ यादें ही शेष रह गई थीं.

कायरता का प्रायश्चित्त: भाग 2

रूपाली के इस आग्रह को मिताली टाल न सकी और उस के साथ चल दी.

रूपाली को उस की दोस्त के घर छोड़ कर मिहिर ने एक रेस्तरां के सामने गाड़ी रोक दी और मिताली से बोला, ‘चलो, कौफी पी कर घर चलेंगे.’

‘मिहिर, देर हो जाएगी और अभी मुझे अपनी फ्रैंड के घर भी जाना है.’

‘मिताली, ज्यादा देर नहीं लगेगी. प्लीज, चलो न.’

मिहिर के इस आग्रह को मिताली मान गई.

दोनों कोने की एक खाली टेबल पर आ कर बैठ गए.

मिहिर यह सोच कर अपने दिल की बात नहीं कह पा रहा था कि यह उन दोनों की दूसरी मुलाकात है और मिताली कहीं उसे सड़क छाप आशिक न समझ ले.

‘मिहिर, आप ने वह ब्रैसलेट रूपाली को नहीं दिया?’ मिताली सहज ही बोली.

‘मिताली,’ मिहिर बोला, ‘मैं ने वह ब्रैसलेट और ताजमहल उस लड़की के लिए खरीदा है जिसे मैं बहुत प्यार करता हूं और शादी भी करना चाहता हूं. पर…’

‘पर क्या, मिहिर?’

‘पर मिताली, वह मुझे प्यार करती है या नहीं? यह मैं नहीं जानता.’

‘तो क्या अभी तक आप ने अपने दिल की बात उस लड़की से नहीं कही?’ मिताली ने कौफी का आखिरी घूंट भरते हुए पूछा.

‘नहीं, डरता हूं, कहीं वह नाराज न हो जाए. वैसे तुम बताओ मिताली, क्या वह लड़की मेरा प्रेम स्वीकार कर लेगी?’

‘मैं क्या बताऊं मिहिर, पता नहीं उस लड़की के दिल में आप के प्रति क्या है? अच्छा, अब हमें चलना चाहिए,’ मिताली उठ खड़ी हुई.

मिहिर ने मिताली को उस के घर छोड़ दिया और जब तक वह अंदर नहीं चली गई तब तक उसे देखता रहा.

दूसरे दिन मिताली से मिलने मिहिर उस के घर गया तो पता चला कि वह अपनी सहेलियों के साथ सुबह ही एक हफ्ते के लिए शिमला घूमने गई है. मिहिर निराश लौट आया.

मिताली के वापस आने से पहले ही मिहिर की छुट्टियां समाप्त हो गईं और वह वापस होस्टल चला आया. अब मिहिर जब भी खाली होता, उस के कानों में मिताली की खनकती हंसी गूंजती रहती. वह यह सोच कर अपने मन को समझा लेता कि इस बार घर लौटेगा तो अपने दिल की बात मिताली से जरूर कह देगा.

इंतजार की घड़ी कितनी ही लंबी हो खत्म होती ही है. आखिर मिहिर की परीक्षाएं समाप्त हो गईं और उसी दिन वह घर के लिए चल पड़ा.

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मिहिर जब घर पहुंचा तो शाम का धुंधलका छाने लगा था. उसे देख रूपाली खुश होती हुई बोली, ‘भैया, आप बड़े ही ठीक मौके पर आए हैं. मुझे मिताली के घर तक जाना है, आप गाड़ी से छोड़ देंगे क्या?’

मिताली का नाम सुनते ही मिहिर के शरीर में बिजली सी दौड़ गई. वह बोला, ‘हां, मैं थका नहीं हूं. बस, एक कप कौफी पी कर चलता हूं.’

रूपाली को कौफी लाने के लिए बोल कर मिहिर तैयार होने चला गया. तैयार होते समय वह मन ही मन सोच रहा था कि आज वह मिताली से अपने प्यार का इजहार कर ही देगा. चलते वक्त उस ने वह ताजमहल और ब्रैसलेट भी ले लिया जो वह संभाल कर घर में रख गया था.

रास्ते भर रूपाली मिहिर से उस के दोस्तों और होस्टल के बारे में बातें करती रही. मिहिर भी उस के हर सवाल का जवाब दे रहा था.

मिताली का घर बिजली की रंगबिरंगी झालरों से जगमगाता देख कर मिहिर ने छोटी बहन से पूछा, ‘रूपाली, क्या आज मिताली के घर कोई फंक्शन है?’

‘हां, भैया, मैं तो आप को बताना ही भूल गई कि आज मिताली की सगाई है,’ कह कर रूपाली गाड़ी से उतर कर आगे बढ़ गई और जातेजाते कह गई कि गाड़ी पार्क कर आप भी आ जाना.

मिहिर को लगा जैसे उस की आंखों के आगे अंधेरा छा रहा है. वह वहां ठहर न सका और उसी क्षण वापस लौट आया. उस के तमाम सपने शीशे की तरह टूट गए थे जो लगभग एक साल से मिताली को ले कर देखता आया था.

मिहिर ने अंत में वह शहर छोड़ने का फैसला कर लिया. उस के डैडी ने समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन मिहिर को वह शहर हर पल शूल की तरह चुभता था. अत: उस ने कानपुर छोड़ कर इस शहर में आ कर अपनी प्रैक्टिस जमाई.

‘‘साहब, खाना तैयार है, लगा दूं?’’ हरिया ने आ कर उस से पूछा तो मिहिर की तंद्रा भंग हुई और वह जैसे सपने से जाग गया.

‘‘नहीं, मुझे भूख नहीं है. तुम खा लो. हां, मेरे लिए बस, एक कप कौफी भर बना देना,’’ इतना कह कर डा. मिहिर उठे और कंप्यूटर खोल कर कुछ काम करने लगे.

अगले दिन रिपोर्ट ले कर मिताली व नवीन उस के क्लीनिक पर आए. रिपोर्ट देख कर उस ने बता दिया कि कोई गंभीर बीमारी नहीं है और दवाइयों का परचा लिख कर उन्हें दे दिया. जाते समय मिताली व नवीन मिहिर को अपने घर आने का निमंत्रण दे गए.

मिहिर के इलाज से नवीन ठीक हो रहा था. पति को ठीक होता देख कर मिताली भी अब पहले की तरह खिलीखिली रहने लगी थी. उसे खुश देख कर मिहिर को एक अजीब सी संतुष्टि का एहसास होता.

मिताली व नवीन कई बार मिहिर से घर आने को कह चुके थे. एक दिन वह उधर से निकल रहा था तो सोचा, चलो आज मिताली से ही मिल लें और बिना किसी पूर्व सूचना के मिताली के घर पहुंच गया. नवीन और मिताली अभी आफिस से नहीं लौटे थे. घर पर आया थी. अत: मिहिर ड्राइंगरूम में बैठ कर उन की प्रतीक्षा करने लगा.

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बैठेबैठे मिहिर बोर होने लगा तो टेबल पर रखी पत्रपत्रिकाएं ही उलटने- पलटने लगा. तभी उस की नजर एक डायरी पर पड़ी और वह उस डायरी  को उठा कर देखने लगा.

डायरी के पहले पन्ने पर ‘मिताली’ लिखा देख कर मिहिर के मन में उत्सुकता जागी और वह अंदर के पन्नों को खोल कर पढ़ने लगा. एक पृष्ठ पर लिखा था :

‘मैं ने मिहिर के बारे में सुना था. आज रानी के जन्मदिन की पार्टी में उस से मुलाकात भी हो गई. मैं ने अपने जीवनसाथी की जो कल्पना की थी उस पर मिहिर बिलकुल खरा उतरता है.’

कुछ पन्नों को छोड़ कर फिर लिखा था :

‘आज मैं मिहिर से दूसरी बार मिली. बातों में पता चला कि वह किसी और लड़की से प्यार करता है जिस के लिए उस ने आज ही प्यारा सा ताजमहल व ब्रैसलेट खरीदा है. कितनी नसीब वाली होगी वह लड़की जिसे मिहिर प्यार करता है…’

मिहिर आश्चर्यचकित रह गया. तो क्या मिताली भी उसे चाहती थी? खैर, इस में अब संदेह ही कहां था? उस की कायरता का नतीजा मिताली को और उसे भी भुगतना पड़ रहा है.

डायरी जहां से उठाई थी वहीं रख कर मिहिर आंखें बंद किए सोचता रहा कि यदि उस दिन रेस्तरां में हिम्मत कर मिताली से प्यार का इजहार कर दिया होता तो आज उसे अकेलेपन का विषाद तो नहीं झेलना पड़ता.

‘‘अरे, मिहिर आप. अचानक बिना पूर्व सूचना दिए?’’ मिताली कमरे में घुसती हुई बोली.

‘‘मिताली, मैं ने सोचा अचानक, बिना पहले से बताए तुम्हारे घर आ कर तुम्हें चौंका दूं. क्यों, कैसा लगा मेरा यह आइडिया?’’

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‘‘बहुत अच्छा डा. साहब,’’ नवीन ने कहा, ‘‘आप हमारे घर आए. यह हमारे लिए गर्व की बात है.’’

मिताली ने आया को चायनाश्ता लाने का निर्देश दिया और खुद नवीन के बगल में आ कर बैठ गई.

इंसानों के बाद शेरों में भी बढ़ा कोरोना का खतरा

कोरोना वायरस ने 2 साल से दुनिया भर में इंसानों की जान को खतरे में डाल रखा है. अब जानवरों में सब से ताकतवर माने जाने वाले शेरों को भी कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है. शेर, बाघ ही नहीं दूसरे पशुओं पर भी कोरोना का खतरा मंडराने लगा है.

माना जा रहा है कि संक्रमित इंसानों के जरिए कोरोना वायरस ने शेरों के शरीर में प्रवेश किया. हालांकि अमेरिका के न्यूयार्क स्थित ब्रानोक्स जू में पिछले साल अप्रैल में ही 8 बाघ और शेर कोरोना पौजिटिव मिले थे, लेकिन भारत में पहली बार शेर संक्रमित मिले हैं.

पिछले साल हांगकांग में भी कुत्ते और बिल्लियों में कोरोना संक्रमण का पता चला था. भारत में घरेलू जानवरों में अभी तक कोरोना संक्रमण के कोई मामले सामने नहीं आए हैं.

मई के पहले सप्ताह में हैदराबाद के नेहरू जूलोजिकल पार्क में 8  एशियाई शेर कोरोना संक्रमित पाए गए. इन में 4 शेर और 4 शेरनियां थीं. इस जू में काम करने वाले कर्मचारियों को अप्रैल के चौथे सप्ताह में शेरों में कोरोना के लक्षण दिखाई दिए थे.

इन शेरों की खुराक कम हो गई थी. इस के अलावा उन की नाक भी बहने लगी थी. उन में सर्दी जुकाम जैसे लक्षण नजर आ रहे थे. कर्मचारियों ने जू के अधिकारियों को यह बात बताई. उस समय तक देश में कोरोना की दूसरी लहर का भयावह रूप सामने आ चुका था.

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जू के अधिकारियों ने इन शेरों की कोरोना जांच कराने का फैसला किया. जांच के लिए शेरों को ट्रंकुलाइज यानी बेहोश कर उन के तालू के निचले हिस्से से लार के नमूने लिए   गए. इन नमूनों को जांच के लिए हैदराबाद के सेंटर फौर सेल्युलर एंड मौलिक्यूलर बायोलौजी (सीसीएमबी) भेजा गया.

सीसीएमबी से शेरों की कोरोना जांच रिपोर्ट मई के पहले सप्ताह में हैदराबाद जू के अधिकारियों को मिली. इस में 8 शेरों की आरटीपीसीआर (कोरोना) जांच रिपोर्ट पौजिटिव आई.

एशिया में सब से बड़े जू में शुमार नेहरू जूलोजिकल पार्क हैदराबाद शहर की घनी आबादी वाले इलाके में बना हुआ है और 380 एकड़ में फैला है. सरकार ने कुछ दिन पहले ही कोरोना वायरस हवा के जरिए फैलने की बात कही थी. इस से यह माना गया कि शेरों में कोरोना वायरस ने या तो हवा के जरिए या देखरेख करने वाले किसी संक्रमित कर्मचारी के जरिए प्रवेश किया. नेहरू जूलोजिकल पार्क में कुल 12 एशियाई शेर हैं.

हैदराबाद का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने देश भर में सभी जूलोजिकल पार्क, नैशनल पार्क और टाइगर रिजर्व बंद करने के आदेश दिए. साथ ही वन्यजीव अभयारण्यों को भी अगले आदेशों तक दर्शकों के लिए बंद करने की सलाह दी.

इस के बाद मई के पहले सप्ताह में ही उत्तर प्रदेश के इटावा में स्थित लायन सफारी के एक शेर में भी कोरोना वायरस मिला. इस की पुष्टि बरेली में इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में की गई जांच में हुई. इटावा की लायन सफारी से 14 शेरों के सैंपल जांच के लिए बरेली के आईवीआरआई भेजे गए थे. जांच में एक शेर में कोरोना वायरस पाया गया और एक संदिग्ध माना गया. बाकी 12 शेरों की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई.

इस लायन सफारी में 18 शेर और शेरनी हैं. इन में कुछ दिन पहले कोरोना के लक्षण नजर आए थे. इस से पहले हैदराबाद जू के शेरों में कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी थी. ऐसी हालत में इटावा लायन सफारी प्रशासन ने भी शेरों की कोरोना जांच कराने का निर्णय लिया था. एक शेर की जांच रिपोर्ट पौजिटिव आने के बाद इस सफारी में शेरों की देखभाल में सतर्कता बढ़ा दी गई. इस के साथ ही सभी शेरों को अलगअलग आइसोलेशन में कर दिया गया, ताकि संक्रमण का फैलाव न हो.

मई के दूसरे सप्ताह में ही जयपुर में चिडि़याघर का बब्बर शेर ‘त्रिपुर’ भी कोरोना संक्रमित पाया गया. इस चिडि़याघर में एक सफेद बाघ चीनू और दूसरी शेरनी तारा को कोरोना संदिग्ध माना गया. ये सभी शेर जयपुर में नाहरगढ़ बायोलौजिकल पार्क में बनी लायन सफारी में रह रहे थे. इन शेरों की कोरोना सैंपल की जांच बरेली के आईवीआरआई में कराई गई थी. जयपुर से लायन सफारी के 13 सैंपल जांच के लिए बरेली भेजे गए थे.

जयपुर के नाहरगढ़ बायोलौजिकल पार्क में राजस्थान की पहली लायन सफारी 2018 में शुरू हुई थी. इस पार्क में करीब 36 हैक्टेयर में लायन सफारी बनी हुई है. यहां पहले 4 एशियाई शेर थे. इन में से कैलाश और तेजस नामक शेरों की मौत हो गई थी. अब लायन सफारी में शेरनी तारा और शेर त्रिपुर ही हैं.

सबसे पहले गुजरात के जूनागढ़ से तेजिका नामक शेरनी को जयपुर चिडि़याघर लाया गया था. बाद में उसे लायन सफारी में शिफ्ट कर दिया था. तेजिका ने 3 शावकों को जन्म दिया था. इन के नाम त्रिपुर, तारा और तेजस रखे गए. तेजिका की 3 साल पहले मौत हो गई थी. बाद में पिछले साल उस के बेटे तेजस की भी मौत हो गई. अब भाईबहन त्रिपुर और तारा बचे हैं. इन में तारा को कोरोना संदिग्ध माना गया है.

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संदिग्ध मानी गई शेरनी तारा, सफेद बाघ चीनू और एक पैंथर कृष्णा के सैंपल दोबारा जांच के लिए बरेली भेजे गए. शेर त्रिपुर को दूसरे वन्यजीवों से अलग कर क्वारंटाइन कर दिया गया. पार्क के सभी जानवरों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं दी जा रही हैं.  शेर, बाघ और दूसरे वन्यजीवों के व्यवहार पर सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है. वन्यजीवों की देखभाल करने वाले केयरटेकरों को भी पीपीई किट मुहैया कराई गई है. इन केयरटेकरों को अब बाघ और शेरों के बाड़े तक जाने के लिए पानी में से निकलना पड़ता है ताकि इन के पैरों के जरिए किसी तरह का इंफेक्शन जानवरों तक न पहुंचे.

मध्य प्रदेश में इंदौर के जू में मांसाहारी वन्यजीवों के साथ विदेशी पक्षियों को भी दवाएं दी जा रही हैं. इन की आंखों को इंफेक्शन से बचाने के लिए दवा डाली जा रही है. पक्षियों के पिंजरों को सैनेटाइज किया गया है.

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इंदौर जू में दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और आस्ट्रेलिया के पक्षी बड़ी संख्या में हैं. इगुआना नाम की दुनिया की सब से बड़ी छिपकली को सुबहशाम हरी सब्जियां दी जा रही हैं. इगुआना छिपकली 3 मीटर तक लंबी और 50 किलोग्राम तक वजनी होती है. यह उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में पाई जाती है.

‘मोल्क्की’ फेम अमर उपाध्याय अस्पताल में हुए भर्ती, जानें वजह

कलर्स टीवी का फेमस सीरियल ‘मोलक्की’ (Molkki)  स्टार अमर उपाध्याय अपने किरदार को लेकर सुर्खियों में छाये रहते हैं. इस शो में वे वीरेंद्र प्रताप सिंह का किरदार निभा रहे हैं. बताया जा रहा है कि हाल ही में अमर उपाध्याय को अस्पताल में भर्ती करवाया गया. आइए बताते हैं, एक्टर को अस्पताल में क्यों भर्ती करवाया गया?

रिपोर्ट के अनुसार अमर उपाध्याय ने बताया है कि चलते-चलते मेरा पैर ट्विस्ट हो गया था और मुझे लिगामेंट टिअर हो गया था. उनके घुटने में पहले से ही प्रॉब्लम थी. उन्होने कहा कि मैं लॉकडाउन की वजह से इस पर ध्यान नहीं दे पाया. फिर ‘मोलक्की’ की शूटिंग भी शुरू हो गई थी. इसके कारण सर्जरी में देरी हो गई. आखिरकार मैंने अब सर्जरी करवाई है और मैं अभी भी अस्पताल में ही हूं.

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अमर उपाध्याय ने ये भी बताया कि सर्जरी हो चुकी है और वह रिकवर कर रहे हैं. उन्होंने आगे बताया कि उनकी सर्जरी सही तरह से हो गई और वह एकदम ठीक हैं. शो की शूटिंग पर कोआ असर नहीं पड़ेगा. इन दिनों कहानी में ये दिखाया जा रहा है कि वीरेंद्र प्रताप सिंह के पैर में चोट लगी है.

 

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वर्कफ्रंट की बात करें तो अमर उपाध्याय ने अपने इंडस्ट्री में करियर की शुरुआत 1993 में टीवी शो ‘देख भाई देख’ से की थी. वे शो ‘क्यूंकि सास भी कभी बहू थी’ से मशहूर हुए. इसके अलावा अमर उपाध्याय साथ निभाना साथिया में भी नजर आ चुके हैं. उन्होंने कई टीवी शो में काम किया है.

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‘अनुपमा’ से होगी वनराज की छुट्टी? जानिए इस खबर की सच्चाई

स्टार प्लस का मशहूर सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) टीआरपी लिस्ट में अपना कब्जा बनाए हुए है. मकर्स इस शो में नए-नए ट्विस्ट लाते है, जिससे दर्शकों का दिलचस्पी बढ़ता जा रहा है. कुछ दिनों से खबर आ रही है कि इस शो में नए शख्स की एंट्री होने वाली है. तो आइए बताते है, क्या है पूरा मामला.

खबर यह आ रही थी कि मेकर्स ‘अनुपमा’ के वनराज यानी सुधांशु पांडे (Sudhanshu Pandey) को जल्द ही रिप्लेस करने वाले हैं, जी हां, इस खबर को सुनने के बाद फैंस हैरान हो गए थे. तो ऐसे में अनुपमा फेम समर यानी पारस कलनावत ने इस खबर पर चुप्पी तोड़ी है.

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समर यानी पारस कलनावत ने इस खबर की सच्चाई बताया है. रिपोर्ट के अनुसार पारस कलनावत ने कहा है कि मेकर्स फिलहाल वनराज के किरदार में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं करने वाले हैं. जी हां, सही सुना आपने. सुधांशु पांडे को रिप्लेस करने की खबर को भी पारस कलनावत ने गलत बताया है.

 

खबरों के अनुसार पारस कलनावत ने कहा, मुझे नहीं लगता कि इस खबर में किसी तरह की कोई सच्चाई है. मेकर्स सुधांशु पांडे को रिप्लेस करने की योजना नहीं बना रहे हैं. उन्होंने आगे ये भी कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इस तरह की अफवाहें कौन फैला रहा है.

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पारस ने बताया कि सुधांशु पांडे सीरियल ‘अनुपमा’ को छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं. प्रोडक्शन हाउस ने ऐसा कोई भी फैसला नहीं लिया है. वे इस समय शो के लिए लगातार शूटिंग कर रहे हैं.पारस कलनावत ने ये भी बताया कि फिलहाल ‘अनुपमा’ से कोई रिप्लेस नहीं हो रहा है.

मैं सोशल वर्कर बनना चाहती हूं लेकिन मेरे घरवाले शादी कराना चाहते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 22 साल की एक कुंआरी लड़की हूं. मेरे घर वाले मेरी शादी करना चाहते हैं, पर मैं अपनी एक संस्था बना कर गरीब और अपाहिज लोगों की मदद करना चाहती हूं. इस की शुरुआत कैसे की जाए, इस बारे में सही सलाह दें?

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जवाब

आप का जज्बा अच्छा है, लेकिन अभी आप खुद मदद की मुहताज हैं. इस के लिए पहले आप को अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा. गरीबों और अपाहिजों की मदद के लिए बहुत पैसों की जरूरत पड़ेगी, जो आसमान से नहीं टपकेंगे. इस का इंतजाम तो आप को ही करना पड़ेगा.

बेहतर होगा कि आप अपनी कोई संस्था बना कर काम शुरू करें और बाद में एनजीओ बनाएं. इस के लिए आप किसी भी एनजीओ वाले से मिल कर जानकारी ले सकती हैं कि शुरुआत कैसे की जाए और क्याक्या दिक्कतें पेश आती हैं.

शादी कर लेना भी हर्ज की बात नहीं, लेकिन पति पर पहले ही अपनी इच्छा जाहिर कर दें. मुमकिन है कि वह भी आप का साथ देने के लिए तैयार हो जाए.

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