सरकार किसानों के जीवन में व्यापक बदलाव लाने के लिए हर सम्भव कदम उठाने के लिए तत्पर : मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के जीवन में व्यापक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हर सम्भव कदम उठाने के लिए तत्पर है. उन्हांेने कहा कि राज्य सरकार ने गन्ना किसानों के हित में गन्ना मूल्य में वृद्धि का निर्णय लिया है. 325 रुपये प्रति कुन्तल के गन्ने का गन्ना मूल्य बढ़ाकर 350 रुपये प्रति कुन्तल, 315 रुपये प्रति कुन्तल के सामान्य गन्ने का गन्ना मूल्य 340 रुपये प्रति कुन्तल तथा अनुपयुक्त गन्ने के गन्ना मूल्य में 25 रुपये प्रति कुन्तल वृद्धि की जा रही है. गन्ना मूल्य में इस वृद्धि से प्रदेश के 45 लाख गन्ना किसानों की आय में 08 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोत्तरी होगी. उन्हांेने विश्वास व्यक्त किया कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं से प्रोत्साहित होकर किसान उत्पादन क्षमता बढ़ाकर प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाएंगे.

मुख्यमंत्री जी आज यहां आयोजित किसान सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे. किसान सम्मेलन में हल भेंट कर मुख्यमंत्री जी का स्वागत किया गया.

किसान सम्मेलन में किसानों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अन्नदाता किसान कठिन परिश्रम करके अन्न पैदा करता है. अन्न जीवन चक्र का आधार है. किसान द्वारा अपने परिश्रम और पुरुषार्थ से बिना भेदभाव के सभी के लिए अन्न उत्पन्न करना पुण्य का कार्य है. इससे पूर्व, कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के पश्चात उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया. प्रदर्शनी में कृषि उत्पादक संगठनों के उत्पाद, आधुनिक कृषि यंत्रों, पराली प्रबन्धन विधियों, जैविक कृषि उत्पादों आदि को प्रदर्शित किया गया था.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2014 मंे श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने पर देश का भाग्योदय हुआ. प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व की सरकार ने गांव, गरीब, नौजवान, महिलाओं तथा समाज के सभी तबकों के लिए कार्य किया. धरती माता की सेहत का ध्यान रखा जा सके, इस उद्देश्य से उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया. कृषकों के हित और कल्याण के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना जैसी योजनाएं संचालित की गयीं. वर्ष 2017 में वर्तमान राज्य सरकार के सत्ता में आने के बाद पहला निर्णय प्रदेश के 86 लाख लघु एवं सीमान्त किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का ऋण माफ करने का लिया गया.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अन्नदाता किसान के खुशहाल होने से राज्य प्रगति और समृद्धि के मार्ग पर अग्रसर होता है. इस उद्देश्य से वर्तमान राज्य सरकार ने बिचौलियों को समाप्त कर सीधे किसानों से उनके कृषि उत्पादों की खरीद के लिए   अप्रैल, 2017 में प्रोक्योरमेन्ट पॉलिसी लागू की. विगत साढ़े चार वर्षाें में प्रदेश में किसानों से रिकॉर्ड मात्रा में उनके कृषि उपज की खरीद की गयी है. एम0एस0पी0 पर गेहूं खरीद के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने 19,02,098 किसानों को 12,808 करोड़ रुपये का भुगतान किया. वर्तमान सरकार ने साढ़े चार साल के कार्यकाल में 43,75,574 किसानों को 36,405 करोड़ रुपये का भुगतान किया.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 में वर्तमान सरकार के सत्ता में आने पर पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल का वर्ष 2009-10 से लेकर वर्ष 2018-19 तक का किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान बकाया था. इससे गन्ने का रकबा सिकुड़ता जा रहा था. वर्तमान सरकार ने गन्ना किसानों के हित में बन्द चीनी मिलों का संचालन प्रारम्भ कराया. पिपराइच, मुण्डेरवा, रमाला में पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा बेची गयी चीनी मिलों के स्थान पर नये संयंत्र स्थापित कराए. साथ ही, बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान सुनिश्चित कराया. विगत साढ़े चार वर्षों में किसानों को 01 लाख 44 हजार करोड़ रुपये के गन्ना मूल्य का भुगतान कराया गया. 30 नवम्बर, 2021 तक गन्ना मूल्य के भुगतान एवं चीनी मिलों के संचालन के निर्देश दिए गए हैं. कोरोना कालखण्ड में जब देश और दुनिया में चीनी उद्योग प्रभावित हो रहा था, वर्तमान राज्य सरकार ने तकनीक का उपयोग करते हुए प्रदेश की सभी 119 चीनी मिलों का संचालन कराया. जब तक किसानों के खेत में गन्ना उपलब्ध था, चीनी मिलें चलायी गयीं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार ने किसानों के हित को ध्यान में रखकर नीतियां बनायीं. वर्ष 1918 में स्पैनिश फ्लू में बीमारी के साथ-साथ भूख से भी बड़ी संख्या में मौत हुई. कोरोना के समय में प्रधानमंत्री जी के देशवासियों का जीवन और जीविका बचाने के संकल्प का अनुसरण करते हुए राज्य सरकार ने कार्य किया. देश व प्रदेश में किसी भी व्यक्ति की भूख से मृत्यु नहीं हुई. कोरोना के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से देश के 80 करोड़ व प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को अप्रैल, 2020 से लेकर नवम्बर, 2020 तथा मई, 2021 से लेकर नवम्बर, 2021 तक निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है.

मुख्यमंत्री जी ने प्रदेशवासियों को निःशुल्क खाद्यान्न एवं वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य ने अब तक 10 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन की खुराक उपलब्ध कराने में सफलता प्राप्त की है. इससे प्रदेश में कोरोना का संक्रमण समाप्त प्राय हो गया है. उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के सम्बन्ध में सावधानी व सतर्कता बरतने के साथ ही जीवन और जीविका को बचाने के लिए प्रभावी प्रयास जारी रहेंगे. राज्य सरकार ने पराली जलाने के सम्बन्ध में किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस ले लिए हैं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में देश व प्रदेशवासियों का जीवन एवं जीविका बचाने के साथ ही किसानों के हित में लगातार कदम उठाए गए. किसान को 24 जिन्स के लिए लागत का डेढ़ गुना दाम दिलाने की घोषणा प्रधानमंत्री जी ने की. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गयी कृषि उपज की खरीद की धनराशि का भुगतान किसान के खाते में किया गया. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से बिना भेदभाव के सभी किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है. प्रदेश में 02 करोड़ 54 लाख किसान इससे लाभान्वित हो रहे हैं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसानों को सिंचाई के बेहतर साधन सुलभ कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं. किसानों को सोलर पम्प तथा खेत-तालाब योजना के तहत लाभान्वित किया गया है. वर्षों से लम्बित बाणसागर परियोजना को पूर्ण कराकर प्रारम्भ कराया गया. अर्जुन सागर परियोजना बनकर लगभग तैयार हो चुकी है. अगले महीने इसे प्रधानमंत्री जी से राष्ट्र को समर्पित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं. सरयू नहर परियोजना लगभग पूरी हो गयी है. इसके अलावा पहाड़ी बांध, जमरार बांध, रसिन बांध सहित विभिन्न परियोजनाओं को पूर्ण कराया गया है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि तराई एवं विन्ध्य क्षेत्र में अक्सर किसानों और जंगली जानवरों के मध्य संघर्ष हो जाता है. राज्य सरकार ने इसे आपदा घोषित करते हुए वन्य जीवों के हमले में मृत व्यक्ति के आश्रितों को 04 लाख रुपये अथवा कृषक बीमा योजना के तहत 05 लाख रुपये की धनराशि देने की व्यवस्था भी की. किसानों के बिजली बिल के सम्बन्ध में ब्याज माफ करते हुए एकमुश्त समाधान योजना के माध्यम से शीघ्र ही एक ठोस योजना लागू की जाएगी. प्रधानमंत्री जी ने सब्सिडी की दर बढ़ाकर डी0ए0पी0 और यूरिया की कीमतों में वृद्धि नहीं होने दी. किसानों को समय पर उर्वरक तथा विद्युत की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित की गयी.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति को सुदृढ़ किया है. वर्तमान में खेत में किसान की मोटर सुरक्षित है, उसे कोई ले नहीं जा सकता. विगत साढ़े चार वर्षों में प्रदेश में कोई दंगा नहीं हुआ है. अवैध स्लॉटर हाउस बंद करा दिए गए हैं. राज्य सरकार द्वारा निराश्रित गोआश्रय स्थलों का संचालन कराया जा रहा है. यह व्यवस्था भी की गयी है कि कोई भी इच्छुक किसान निराश्रित गोवंश में से 04 गोवंश का पालन-पोषण करने के लिए अपने पास रख सकता है. इसके लिए उसे 900 रुपये प्रति गोवंश प्रति माह प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गयी है. कुपोषित महिला अथवा कुपोषित बच्चों के लिए दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु उनकी इच्छा पर एक निराश्रित गोवंश दिए जाने की व्यवस्था की गयी है. इस गोवंश के रख-रखाव के लिए उन्हें 900 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जाने की भी व्यवस्था है.

सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार ने लगातार देश और समाज की उन्नति व समृद्धि तथा सभी वर्गों के उत्थान के लिए कार्य किया है. वर्तमान राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में किसानों के ऋण माफ करने का निर्णय लिया. बड़ी मात्रा में किसानों से उनकी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय की गयी. प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को दिए जा रहे प्रभावी प्रोत्साहन से वर्तमान में राज्य गेहूं, गन्ना, आलू, सब्जी, फलों आदि के उत्पादन में देश में नम्बर एक है. किसानों को खाद, बीज, पानी की समय पर उपलब्धता से प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में सबसे ऊपर है.

गन्ना विकास मंत्री श्री सुरेश राणा ने अपने सम्बोधन में कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने चीनी मिलों को बेचा और बंद किया.

मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने बंद चीनी मिलों का संचालन कराया. गन्ना किसानों के हित में कोरोना काल में भी जरूरी सतर्कता बरतते हुए सभी 119 चीनी मिलों का संचालन कराया गया. 18 से अधिक चीनी मिलों की पेराई क्षमता में वृद्धि की गयी. मुख्यमंत्री जी ने पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराया. विगत साढ़े चार वर्षों में 01 लाख 44 हजार करोड़ रुपये के गन्ना मूल्य का भुगतान कराया गया है. खाण्डसारी उद्योगों को लाइसेंस देने से पेराई क्षमता में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई है.

किसान सम्मेलन को पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं सांसद श्री राधा मोहन सिंह, सांसद श्री राजकुमार चाहर, विधान परिषद सदस्य श्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी सम्बोधित किया.

इस अवसर पर महिला कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती स्वाती सिंह, उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री श्रीराम चौहान, कृषि राज्य मंत्री श्री लाखन सिंह राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कृषक समुदाय उपस्थित था.

सम्मेलन में अतिथियों का स्वागत श्री कामेश्वर सिंह ने किया. कार्यक्रम का संचालन श्री घनश्याम पटेल द्वारा किया गया. मंचासीन अतिथियों का स्वागत श्री सुधीर सिंह, श्री रामबाबू द्विवेदी एवं श्री सतेन्दर तुगाना ने किया.

जागरूकता: रेप करना महंगा पड़ता है

‘बड़ेबड़े पहुंच रखने वाले लोग भी अपना बचाव नहीं कर पा रहे हैं. अगर ऐसे आरोप सही न भी हों, फिर भी आरोपी को बहुत तरह के दर्द सहने ही पड़ जाते हैं. लंबे समय तक जेल में रहना पड़ता है. जमानत मुश्किल से मिलती है और जमानत के लिए बड़ी कोर्ट में जाना पड़ता है, जहां वकील की फीस देने में ही आरोपी बरबाद हो जाता है.

‘रेप के मामलों में अगर कोर्ट कोई गलत लगने वाला फैसला सुना दे तो भी जनता उस की खिंचाई करने लगती है. यही नहीं, निचली अदालतों के फैसले पलटने में बड़ी कोर्ट देर नहीं लगाती. वह अब जज के खिलाफ टिप्पणी करने में भी कोई संकोच नहीं करती है. ऐसे कई मामले प्रकाश में आए हैं. नागपुर का मामला सभी ने देखा.’

यह कहना है उत्तर प्रदेश की अपर महाधिवक्ता रह चुकी इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीनियर क्रिमिनल एडवोकेट सुनीति सचान का.

नागपुर में पास्को ऐक्ट के तहत मामले की सुनवाई करते हुए वहां की नागपुर हाईकोर्ट की जज ने कहा था कि ‘जब तक स्किन से स्किन का सीधा टच न हो, तब तक यौन उत्पीड़न नहीं माना जाएगा.’’

इस फैसले के आधार पर 39 साल के आरोपी सतीश को 12 साल की लड़की के यौन उत्पीड़न मामले में पास्को के कड़े कानून से बाहर कर दिया गया.

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इस फैसले की हर जगह खिंचाई होने लगी. सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को अपने संज्ञान में लिया. इस फैसले पर पहले स्टे दे दिया गया. सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर हुई और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला बदला. ऐसे में अब कोर्ट बहुत सचेत हो कर काम करने लगी है.

निर्भया कांड के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराध को ले कर कानून में कड़े नियम बनाए गए हैं, जिन में न केवल रेप की परिभाषा बदली गई है, बल्कि सजा को भी दोगुना कर दिया गया है. रेप करने वाला आरोपी अगर नाबालिग है, तब भी उस के लिए किसी भी तरह से बचाव का रास्ता बंद कर दिया गया है. पुलिस से ले कर कोर्ट तक ऐसे मामलों को तेजी से निबटाने लगी है.

उत्तर प्रदेश में महिला अपराधों के बाद सजा पाने वाले अपराधियों की सजा सब से ज्यादा है. प्रदेश में तकरीबन 55 फीसदी ऐसे अपराधी हैं, जिन्हें अब तक सजा मिल चुकी है.

उत्तराखंड और राजस्थान में भी  यही हाल है. यहां 50 फीसदी और  45.5 फीसदी महिला अपराधों में सजा मिल चुकी है. रेप और महिलाओं के खिलाफ होने वाले दूसरे मामलों में पुलिस से ले कर कोर्ट तक अब मामले जल्दी निबटाने लगी हैं. ऐसे अपराधों में अब जमानत बहुत मुश्किल से मिल रही है. महिलाओं को कानूनी मदद देने के लिए एक विशेष हैल्पलाइन भी बनाई  गई है.

रेप की शिकार महिलाओं को कानूनी मदद भी मिलने लगी है. उन्नाव का कुलदीप सेंगर का मामला हो या हाथरस कांड या स्वामी चिन्मयानंद का मामला हो. आसाराम तक को रेप के आरोप में जेल जाना पड़ा है.

बड़े मामलों के अलावा तमाम छोटे मामले हैं, जहां रेप करना महंगा पड़ा है. कानूनी लड़ाई में जमीनजायदाद बिकने लगी है. मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी को जेल जाना ही पड़ता है. वहां सालोंसाल अपनी सुनवाई के इंतजार में कट जा रहे हैं. ऐसे में साफ है कि रेप करना महंगा पड़ने लगा है.

बलात्कार के मामलों को ‘सम्मान’ से जोड़ा

फैमिली कोर्ट की सीनियर एडवोकेट मोनिका सिंह कहती हैं, ‘‘निर्भया केस के बाद कानून में कड़ा बदलाव किया गया है. इसे काफी सख्त बनाया गया, है, जिस की वजह से रेप करना महंगा पड़ना लगा है.’’

बलात्कार के मामलों में सजा की अवधि को दोगुना तक बढ़ा कर 20 साल किया गया है. पहले बलात्कार के मामले दर्ज नहीं होते थे, पर अब ज्यादातर मामले दर्ज होने लगे हैं. बलात्कार के मामलों को ‘सम्मान’ से जोड़ कर देखा जाता है. इस के चलते रजामंदी से अंतर्धार्मिक या अंतर्जातीय संबंधों को ‘बलात्कार’ का रूप दे दिया जाता है.

इस के चलते बचाव के लिए हत्या जैसे अपराध बढ़ने लगे हैं. लंबे समय तक मुकदमों की सुनवाई चलती है. किसी मामले में तब तक आरोप मुक्त नहीं किया जाता है, जब तक आरोप तय नहीं किए गए हों. वहीं कुछ मामलों में आरोपियों को तब बरी किया जाता है, जब मुकदमे की सुनवाई पूरी हो जाती है. साल 2020 में बलात्कार के 1,60,642 मामले लंबित थे.

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समाजसेवी सुमन सिंह रावत कहती हैं, ‘‘बलात्कार का अपराध पूरे समाज को हिला चुका है. बलात्कार की शिकार लड़कियां और महिलाएं ही नहीं, बल्कि दुधमुंही बच्चियां तक हो रही हैं. बलात्कार के बाद उन की हत्याएं तक करा दी जा रही हैं.

‘‘ऐसी बहुत सी घटनाएं सामने आ चुकी हैं. कड़े कानून के बाद भी जिस तरह का असर दिखना चाहिए था, वह अभी उतना नहीं दिख रहा है. हालांकि पहले से ज्यादा सुधार हुआ है.’’

साल 2020 में एक स्टडी में पाया गया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट हकीकत में तेज हैं, लेकिन वे बहुत ज्यादा मामले नहीं संभाल पाते हैं.

फास्ट ट्रैक कोर्ट अभी भी औसतन 8.5 महीने केस निबटाने में लेते हैं, जो 4 गुना से ज्यादा हैं. ऐसे में फास्ट ट्रैक का फायदा नहीं मिल रहा है. रेप मामलों की सुनवाई बहुत ही कम समय में होनी चाहिए.

रेप में बदल गई ‘सहमति’ की परिभाषा

सीनियर एडवोकेट शिवा पांडेय कहती हैं, ‘‘रेप के अपराध में आईपीसी की धारा 375 और 376 के तहत सजा तय की जाती है. धारा 375 में कहा गया है कि रेप ऐसा अपराध है, जिस में संभोग के साथ स्त्री की सहमति पर प्रश्न होता है. संभोग की परिभाषा भी इस धारा के तहत बताई गई है. किसी समय लिंग का योनि में प्रवेश संभोग माना जाता था, पर आज इस में बदलाव किया गया है.’’

कोई आदमी किसी महिला की योनि, उस के मुंह, मूत्र मार्ग या गुदा में अपना लिंग किसी भी स्तर पर प्रवेश करता है या उस से ऐसा अपने किसी अन्य व्यक्ति के साथ कराता है या किसी महिला की योनि, मूत्र मार्ग या गुदा में ऐसी कोई वस्तु या शरीर का कोई भाग जो लिंग न हो किसी भी सीमा तक प्रवेश करता है या उस से ऐसा अपने किसी अन्य व्यक्ति के साथ कराता है, वह रेप माना जाता है.

बदले गए कानून में सैक्स की परिभाषा भी बदल गई है. इस में महिलाओं को काफी अधिकार दिए गए हैं. योनि पर मुंह तक लगाने या फिर उंगली तक डालने को रेप माना जाएगा और इस प्रकार का सैक्स करना ही अपराध नहीं है, बल्कि ऐसा सैक्स करवाना भी अपराध है.

अगर लड़की की उम्र 18 साल से कम है, तब पास्को ऐक्ट के तहत मुकदमा चलता है, जो और भी गंभीर माना जाता है.

अगर किसी महिला की मरजी से सैक्स हुआ हो तो भी कानून यह देखता है कि यह मरजी कैसे हासिल की गई थी. यह सहमति डराधमका कर, नशा दे कर, पति होने का विश्वास दिला कर या फिर विकृत मन स्त्री से या फिर सहमति दे पाने में असमर्थ स्त्री से ली गई है, तो ऐसी सहमति से हुए संभोग को रेप ही माना जाता है.

नाबालिग लड़की के संबंध में, जो 18 साल से कम है, उस के साथ भी सैक्स को रेप ही माना गया है, भले ही सैक्स के लिए उस की स्पष्ट सहमति रही हो. सहमति के होने के बाद भी अभियुक्त रेप के दोषी माने जाएंगे.

उत्तर प्रदेश में रेप के मामलों से जुड़ी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि रेप के 57 फीसदी मामले ऐसे होते हैं, जिन में किसी पीडि़ता को शादी का झांसा दे कर बलात्कार किया गया हो.

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रेप के 37 फीसदी मामलों में बलात्कार करने वाला पीडि़ता का कोई रिश्तेदार या जानने वाला ही होता है.  6 फीसदी रेप आरोपी ऐसे होते हैं, जिन से कि पीडि़ता अनजान हो.

सख्ती के बाद भी नहीं घट रहे रेप

नैशनल क्राइम रिकौर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट कहती है कि भारत में साल 2020 में औसतन हर रोज 91 महिलाओं ने बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई थी.

साल 2018 में महिलाओं ने तकरीबन 33,356 बलात्कार के मामलों की रिपोर्ट दर्ज की थी. साल 2017 में बलात्कार के 32,559 मामले दर्ज किए गए थे, तो साल 2016 में यह संख्या 38,947 थी.

जेल भेजने के बाद दोषियों को सजा देने की दर सिर्फ 27 फीसदी है. साल 2017 में दोषियों को सजा देने की दर  32 फीसदी थी, वहीं साल 2020 में यह दर 45 फीसदी तक पहुंच चुकी थी.

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में पिछले साल के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है.

साल 2018 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर दिन औसतन तकरीबन 80 लोगों की हत्या के मामले दर्ज हुए. इस के साथ ही 289 अपहरण और 91 मामले दुष्कर्म के आए. साल 2002-2017 के बीच भारत में कुल 4,15,786 मामले बलात्कार के दर्ज हुए.

बीते 17 सालों में हर घंटे औसतन  3 महिलाओं के साथ रेप के मामले दर्ज हुए. महिलाओं के खिलाफ हिंसा को कई बार कम गंभीरता से लिया जाता है और पुलिस ऐसे मामलों की जांच में संवेदनशीलता की कमी दिखाती है.

Crime Story: पत्नी ने घूंघट नहीं निकाला तो बेटी को मार डाला

बात साल 2019 की है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में हुए एक कार्यक्रम में लोगों से सवाल पूछा था कि समाज को किसी महिला को घूंघट में कैद करने का क्या अधिकार है? जब तक घूंघट नहीं हटेगा, महिलाएं कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगी.

नारी अधिकारों के लिए काम कर रहे एक संगठन के उस कार्यक्रम में अशोक गहलोत ने आगे कहा था कि कुछ ग्रामीण इलाकों में महिलाएं अब भी घूंघट करती हैं. महिलाओं को हिम्मत और हौसले के साथ आगे बढ़ना पड़ेगा. सरकार आप के साथ खड़ी मिलेगी.

पर राजस्थान के अलवर जिले के गादोज गांव में दकियानूसी सोच वाले एक आदमी को शायद मुख्यमंत्री की ऐसी बातें पसंद नहीं थीं, तभी तो उस ने पत्नी के घूंघट नहीं निकालने की बात पर ?ागड़ा किया और अपनी 3 साल की मासूम बेटी को पीटने लगा.

मां उसे बचाने लगी तो उस दरिंदे ने मासूम बेटी को जमीन पर पटक कर उस की हत्या कर डाली.

इतना ही नहीं, आरोपी और उस के परिवार वालों ने तड़के सुबह बिना किसी को खबर हुए बच्ची का अंतिम संस्कार भी कर डाला.

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यह घटना मंगलवार, 17 अगस्त, 2021 की रात की थी. अगले दिन मायके वालों के आने पर बच्ची की मां मोनिका यादव बहरोड़ थाने पहुंची और अपने पति प्रदीप यादव के खिलाफ मामला दर्ज कराया.

मोनिका ने रिपोर्ट में बताया कि उस का पति प्रदीप यादव घर के भीतर हमेशा घूंघट निकालने की कहता है और वह घूंघट भी करती है. मगर कभी जरा घूंघट कम हो तो ?ागड़ा और मारपीट करने लगता है.

मंगलवार की रात को भी घूंघट निकालने को ले कर प्रदीप ने मोनिका से ?ागड़ा शुरू कर दिया और बाद में अपनी 3 साल की बेटी प्रियांशी को थप्पड़

मार दिया.

मोनिका ने विरोध किया, तो उस की गोद से बच्ची को खींच कर कमरे में ले गया. वहां पीटने के बाद उसे उछाल कर कमरे के आंगन में फेंक दिया.

बच्ची ने फर्श पर गिरते ही दम तोड़ दिया. इस के बाद पति और ससुराल वालों ने बुधवार तड़के सुबह उस का अंतिम संस्कार कर दिया. आरोपी वारदात के बाद फरार हो गया.

पीडि़ता मोनिका ने पुलिस को आगे बताया कि साल 2013 में उस की शादी प्रदीप यादव के साथ हुई थी. वह एक फैक्टरी में काम करता है और 12वीं जमात तक पढ़ा है. शादी में मोनिका के परिवार ने जरूरी सामान के साथ ही एक मोटरसाइकिल भी दी थी, लेकिन प्रदीप दहेज की मांग को ले कर अकसर ही उस से ?ागड़ा करता था.

मोनिका और प्रदीप यादव की  2 बेटियां थीं. जब साल 2018 में छोटी बेटी प्रियांशी का जन्म हुआ था, तब मोनिका के मायके वालों ने घर में कलह खत्म करने के लिए प्रदीप को कार दी थी. इस के बावजूद वह नहीं सुधरा, तो रेवाड़ी में 2 बार मामले दर्ज कराए गए. हालांकि बाद में इन में सम?ाता हो गया था.

राजस्थान में यह कोई एकलौता मामला नहीं है, जब किसी महिला, चाहे वह छोटी बच्ची हो या बड़ी औरत, के साथ किसी तरह का जुल्म न हुआ हो.

साल 2020 के पहले 8 महीनों में प्रदेश में महिलाओं से मारपीट, शोषण, बलात्कार और महिला संबंधी दूसरे अपराधों के 22,000 से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए थे. 339 दहेज हत्याएं भी हुई थीं, जो पिछले सालों की तुलना में कहीं ज्यादा थीं.

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दहेज के लिए परेशान करने पर खुदकुशी करने या खुदकुशी की कोशिश करने के 125 मुकदमे दर्ज हो चुके थे.

महिलाओं पर अत्याचार करने और उत्पीड़न के 8,500 मुकदमे दर्ज हुए थे. साल 2019 की तुलना में ये कम थे, लेकिन साल 2018 की तुलना में कहीं ज्यादा थे. बलात्कार के 3,500 और छेड़छाड़ और जबरदस्ती करने के 5,800 मुकदमे दर्ज हुए थे. अपहरण और दूसरी तरह के अपराधों की संख्या 3,800 से भी ज्यादा थी.

नैशनल क्राइम ब्यूरो रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी के नेता राज्यवर्धन सिंह राठौर ने राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आज महिलाओं के ऊपर अत्याचार के मामलों में राजस्थान देश में पहले नंबर पर पहुंच गया है.

अब दोबारा घूंघट पर बात करें, तो राजस्थान सरकार ने इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए ‘अबै घूंघट नी’ नाम की एक मुहिम चलाई थी, पर करणी सेना ने इस का विरोध कर दिया.

करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामड़ी ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा, ‘घूंघट एक प्रथा है. हम महिलाओं से जबरदस्ती नहीं करवाते हैं. वे सिर्फ आंखों की शर्म के लिए घूंघट लगाती हैं. जेठ, ससुर जहां होते हैं, वहां पर महिलाएं घूंघट करती हैं. इस घूंघट और हमारी संस्कृति को देखने के लिए विदेशी पर्यटक दूरदूर से आते हैं.’

इतना ही नहीं, सुखदेव सिंह गोगामड़ी ने आगे कहा, ‘अशोक गहलोत को परदा हटाना है, तो पहले मुसलिम महिलाओं का बुरका हटाओ. घूंघट लगा कर आज तक एक भी वारदात नहीं  हुई है, जबकि बुरका पहन कर तो आतंकवादी गतिविधियां हुई हैं.’

घूंघट मामले पर राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाडा का कहना है कि यह निजी सोच का मसला है. घूंघट को ले कर समाज में किसी तरह की अनिवार्यता नहीं है. सरकार अगर इसे ले कर अभियान चलाती है तो चलाए, लेकिन अभी ऐसे अभियानों से ज्यादा जरूरत दूसरे कई विषयों की है, जिन पर सरकार को ध्यान देना चाहिए, जिन में से बड़ी बात शिक्षा और रोजगार की है.

जब प्रदेश के रसूखदार लोगों की घूंघट पर ऐसी राय है, तो गांवदेहात के उन लोगों का क्या कहा जाए, जो औरत को पैर की जूती सम?ाते हैं.

प्रदीप यादव ऐसे ही लोगों की भीड़ का हिस्सा हैं, जो पत्नी को अपने इशारों पर चलाने को ही मर्दानगी सम?ाते हैं. उस की पत्नी ने गलती से परदा नहीं किया तो उस ने घर में बवाल मचा दिया. यहां तक कि अपनी बेटी को ही मार डाला.

उस की कहीं यह सोच तो नहीं थी कि बेटी ही तो है, मामला गरम है तो इसे ही बलि का बकरा बना दो. पहले पढ़ाईलिखाई और बाद में शादी का खर्च कम हो जाएगा. 2 में से एक बेटी कम हो जाएगी. राजस्थान में बेटी पैदा होना भी मर्दानगी पर धब्बा माना जाता है. क्यों?

Manohar Kahaniya: खोखले निकले मोहब्बत के वादे- भाग 4

सौजन्य- मनोहर कहानियां

गीता के परिजनों ने पुलिस को बताया था कि उस का पति मनोरंजन तिवारी उस के साथ लड़ाईझगड़ा करता था, इसलिए उन की बेटी डेढ़ साल से उस से अलग रह रही थी और खुद कमा कर अपना पेट पालती थी.

परिवार वालों ने यह भी बताया था कि मनोरंजन ने गीता को कई बार धमकी दी थी. गीता की हत्या के बाद जिस तरह मनोरंजन अपना घर व दुकान छोड़ कर भाग गया था, उस से साफ था कि गीता की हत्या में उसी का हाथ है.

लिहाजा पुलिस ने उस के फोन को सर्विलांस पर लगा दिया. लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ हो चुका था.

काफी मशक्कत के बाद पुलिस को मनोरंजन तिवारी के ओडिशा स्थित घर का पता मिल गया. पुलिस की एक टीम वहां पहुंची तो पता चला कि वह अपने घर भी नहीं पहुंचा था. तब निराश हो कर पुलिस टीम ओडिशा से वापस लौट आई.

इस के बाद पुलिस ने काफी दिनों तक तिवारी को इधरउधर तलाश किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिला. आखिर पुलिस ने उस के खिलाफ अदालत से कुर्की वारंट हासिल कर उस के ओडिशा स्थित घर की कुर्की कर ली.

बाद में पुलिस ने अदालत में प्रार्थना पत्र दे कर उसे भगौड़ा घोषित कर दिया. पुलिस ने पहले उस की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपए का ईनाम घोषित किया. बाद में 2 साल बाद ईनाम की धनराशि 50 हजार रुपए कर दी.

पुलिस दल ने 2-3 बार मनोरंजन की तलाश में ओडिशा में छापे मारे, लेकिन वह कभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा. वक्त तेजी से गुजरता रहा.

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इंदिरापुरम थाने में एक के बाद एक कई थानाप्रभारी बदल गए. हर अधिकारी आने के बाद गीता हत्याकांड के फरार आरोपी

मनोरंजन की फाइल देखता, एक नई पुलिस टीम का गठन होता और फिर उस की फाइल धूल फांकने लगती. इसी तरह 9 साल बीत गए.

जुलाई 2021 में इंदिरापुरम सर्किल में सीओ अभय कुमार मिश्रा और इंदिरापुरम थानाप्रभारी के रूप में इंसपेक्टर संजय पांडे की नियुक्ति हुई. दोनों ही अधिकारियों को पुराने मामलों को सुलझाने में महारथ हासिल थी.

उन्होंने जब गीता हत्याकांड की फाइल देखी तो उन्होंने इस बार फाइल को अलमारी में रखने की जगह इस मामले को चुनौती के रूप में ले कर फरार मनोरंजन तिवारी को गिरफ्तार करने की रणनीति बनाई.

दरअसल, सीओ अभय कुमार मिश्रा के एक परिचित अधिकारी जगतसिंहपुर जिले में तैनात हैं, जहां का मनोरंजन तिवारी मूल निवासी है.

अभय मिश्रा को अपराधियों के मनोविज्ञान से इतना तो समझ में आ रहा था कि इतना लंबा वक्त बीत जाने के बाद हो न हो, मनोरंजन तिवारी को अपने परिवार के साथ जरूर कुछ संपर्क होगा.

भले ही वह उन के साथ नहीं रहता हो, मगर उन से संपर्क जरूर करता होगा. अगर थोड़ा सा प्रयास किया जाए तो वह पकड़ में जरूर आ सकता है. लिहाजा अभय कुमार मिश्रा ने ओडिशा के जगतसिंहपुर में तैनात अपने परिचित अधिकारी को गीता हत्याकांड की सारी जानकारी दे कर मनोरंजन को गिरफ्तार कराने में मदद मांगी.

संबधित अधिकारी ने स्थानीय स्तर पर अपनी पुलिस को मनोरंजन तिवारी के गांव अछिंदा में घर के आसपास सादे लिबास में तैनात कर दिया.

वहां तैनात पुलिस टीम को पता चला कि पास के गांव में एक मंदिर का पुरोहित, जिस का नाम मनोज है, वह अकसर मनोरंजन तिवारी के घर आताजाता रहता है. लेकिन चेहरे मोहरे व हुलिए से वह एकदम मनोरंजन तिवारी जैसा है. जगतसिंहपुर पुलिस ने जब यह बात इंदिरापुरम सीओ अभय कुमार मिश्रा को बताई तो वे समझ गए कि हो न हो मनोरंजन तिवारी अपने गांव के आसापास ही कहीं वेशभूषा बदलकर रह रहा है.

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पुलिस ने 9 साल बाद ढूंढ निकाला मनोरंजन को अभय मिश्रा ने इंदिरापुरम थानाप्रभारी संजय पांडे को तत्काल एक टीम गठित कर ओडिशा रवाना करने का आदेश दिया. आदेश मिलते ही इंसपेक्टर संजय पांडे ने अभयखंड चौकीप्रभारी एसआई भुवनचंद शर्मा, नरेश सिंह और कांस्टेबल अमित कुमार की टीम गठित की.

टीम को आवश्यक दिशानिर्देश दे कर ओडिशा रवाना कर दिया गया, जहां पुलिस टीम ने जगतसिंहपुर में स्थानीय बालिंदा थाने की पुलिस से संपर्क साधा. सीओ अभय मिश्रा के परिचित अधिकारी के निर्देश पर स्थानीय पुलिस पहले ही मनोज पुरोहित के बारे में तमाम जानकारी जुटा चुकी थी.

25 जुलाई, 2021 को इंदिरापुरम थाने से गई पुलिस टीम ने बालिंदा थाने की पुलिस टीम की मदद से मनोरंजन तिवारी को दबोच लिया. वह मनोज तिवारी के नाम से मंदिर का पुरोहित बन कर रह रहा था और वेषभूषा बदलने के लिए उस ने दाढ़ी तक बढ़ा ली थी.

लेकिन जब उस ने अपने मातापिता के घर आनाजाना शुरू कर दिया तो लोगों को उस पर शक हो गया. हालांकि जब पुलिस टीम ने उसे पकड़ा तो उस ने पुलिस को बरगलाने का प्रयास किया. लेकिन थोड़ी सी सख्ती के बाद ही उस ने कबूल कर लिया कि वही मनोरंजन तिवारी उर्फ मनोज तिवारी है. आवश्यक लिखापढ़ी व कानूनी काररवाई के बाद पुलिस टीम अगले दिन गीता हत्याकांड के 9 साल से फरार चल रहे आरोपी मनोरंजन को गिरफ्तार कर गाजियाबाद ले आई.

इंसपेक्टर संजय पांडे और सीओ अभय कुमार मिश्रा के अलावा एसपी (सिटी हिंडन पार) के सामने मनोरंजन तिवारी ने कबूल किया कि उसी ने सोचसमझ कर गीता की हत्या की थी.

तिवारी ने बताया कि 2011 में उस के साथ विवाद के बाद जब गीता अलग हो कर किराए का कमरा ले कर रहने लगी और कहीं नौकरी करने लगी तो उस के संबंध सचिन यादव नाम के एक ठेकेदार से हो गए थे. जब उसे इस बात की खबर लगी तो वह मन मसोस कर रह गया.

भले ही गीता से उस का झगड़ा हो गया था और वह अलग रहता था लेकिन इस के बावजूद भी वह उस से मोहब्बत करता था. यह बात उसे मंजूर नहीं थी कि बिना तलाक लिए गीता किसी गैरमर्द के बिस्तर की शोभा बने.

मनोरंजन अकसर गीता पर नजर रखने लगा. उस ने गीता को एकदो बार समझाया भी कि अगर वह किसी गैर के साथ संबध रखेगी तो वह उस की जान ले लेगा. लेकिन गीता ने उस की बात को हंसी में उड़ा दिया. उस ने उलटा मनोरंजन को धमकी दी कि अगर वह उस के रास्ते में आएगा तो सचिन उसी का काम तमाम कर देगा.

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मनोरंजन समझ गया कि गीता पर गैरमर्द से आशिकी का भूत सवार हो चुका है. वह जानता था कि यादव बिरादरी के जिस शख्स से इन दिनों गीता की आशिकी चल रही है, वह न सिर्फ स्थानीय है बल्कि ऐसे लोगों के लिए खून कराना कोई बड़ी बात नहीं.

मनोरंजन की सचिन यादव से तो कोई दुश्मनी नहीं थी. इसलिए मनोरंजन ने तय कर लिया कि इस से पहले कि गीता अपने आशिक से कह कर उस पर वार कराए, वह उसी का काम तमाम कर देगा. मनोरंजन ने साजिश रची. गीता की हत्या के बाद गाजियाबाद से फौरन भागने की उस ने पूरी प्लानिंग बना ली.

29 सितंबर, 2012 की शाम को गीता जब अपने काम से घर लौट रही थी. मनोरंजन ने उसे रोक लिया और गोली मार दी. गोली गीता को ऐसी जगह लगी थी कि उस की मौके पर ही मौत हो गई. इत्मीनान होने के बाद मनोरंजन मौके से फरार हो गया.

गीता की हत्या करने के फौरन बाद उस ने अपने परिवार वालों को इस बात की सूचना दे दी थी और उन्हें सतर्क कर दिया था कि पुलिस अगर उन तक पहुंचे तो वे उसके बारे में अंजान बने रहें.

कई महीनों तक इधरउधर रहने के बाद पुलिस की गतिविधियां जब शांत हो गईं तो वह एक रात अपने परिवार वालों से जा कर मिला. उस ने उन्हें बता दिया कि अब वह पड़ोस के ही गांव के मंदिर में नाम व वेशभूषा बदल कर पुरोहित के रूप में रहेगा और उन से अकसर मिलता रहेगा.

कहते हैं कि अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून व पुलिस के हाथ एक दिन उस की गरदन तक पहुंच ही जाते हैं चाहे वह सात समंदर पार जा कर छिप जाए.

मनोरंजन तिवारी को इस बात का भ्रम था कि ओडिशा गाजियाबाद से इतनी दूर है कि 9 साल बीत जाने पर पुलिस बारबार उस की तलाश में न तो उस के गांव आएगी और न ही इतनी बारीकी से तहकीकात करेगी.

लेकिन यह उस की भूल साबित हुई. क्योंकि पुलिस चाहे किसी भी प्रदेश की हो, लेकिन कानून के गुनहगार को पकड़ने के लिए प्रदेश की दूरियां मिनटों में खत्म हो जाती हैं.

—कथा पुलिस की जांच, अभियुक्त से पूछताछ व परिजनों से मिली जानकारी पर आधारित

मालिनी अपने प्लान में होगी कामयाब, क्या टूट जाएगा Imlie और आदित्य का रिश्ता?

टीवी ‘सीरियल इमली (Imlie) में लगातार महाट्विस्ट देखने को मिल रहा है. शो में  दिखाया जा रहा है कि मालिनी (Malini) की चाल कामयाब हो रही है.  जिसके कारण इमली टूट चुकी है.  सीरियल (Serial) के अपकमिंग एपिसोड में महाट्विस्ट देखने को मिलने वाला है.  आइए बताते हैं कहानी के नए एपिसोड के बारे में.

मालिनी चलेगी नई चाल

शो में दिखाया जा रहा है कि मालिनी के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए इमली बहुत कोशिश कर रही है. और ऐसे में उसके हाथ एक बड़ा सबूत भी लगता है. जिसे वह कोर्ट में पेश करने वाली है. लेकिन आखिरी वक्‍त पर मालिनी की नई चाल की वजह से इमली मालिनी की झूठ नहीं साबित कर पाएगी.

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इमली की मदद करेगा कुणाल

दरअसल इमली मालिनी की साजिश का पर्दाफाश करने के लिए कुणाल की मदद लेगी. और इमली एक वीडियो के जरिए मालिनी की चाल का खुलासा करने वाली है और इस वीडियो में पता चलेगा कि मालिनी आदित्य को फंसा रही है.

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वीडियो डिलीट करेगा आदित्य

तो दूसरी तरफ मालिनी की बातों में आकर आदित्‍य ही वीडियो को डिलीट कर देगा. ऐसे में इमली सबसे बड़े सबूत से हाथ धो बैठेगी.

 

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कोर्ट में मिलेगी इमली को हार

वीडियो डिलीट होने की वजह से इमली कोर्ट में सबूत पेश नहीं कर पाएगी. वह हार जाएगी. तो वहीं मालिनी दोबारा अपने प्‍लान में कामयाब होती नजर आएगी. ऐसे में देखना दिलचस्‍प होगा कि मालिनी से मिली हार के बाद क्‍या इमली और आदित्य का रिश्ता टूट जाएगा?

Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: धूमधाम से होगी सीरत की गोदभराई, आएगा ये ट्विस्ट

स्टार प्लस का सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) की कहानी एक दिलचस्प मोड़ ले रही है. शो में दिखाया जा रहा है कि सीरत (Sirat) मां बनने वाली है और ऐसे में उसे मीठा खाने को मन कर रहा है. तो वहीं सुवर्णा ने उसकी पसंदीदा मिठाई बनाई है. ये बात जानकर सीरत काफी खुश होती है. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं कहानी के नए एपिसोड के बारे में.

शो के अपकमिंग एपिसोड में सीरत की गोदभराई का रस्म दिखाया जाएगा. जो काफी धूमधाम से होगा. बता दें कि शो का नया प्रोमो रीलीज किया गया है. प्रोमो के अनुसार, कायरव के साथ सीरत घर पर अकेली होगी और कार्तिक ऑफिस के काम के कारण बाहर होगा.

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इस दौरान सीरत की तबीयत खराब हो जाएगी. अब आगे क्या होगा, इसके लिए आपको ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ का एपिसोड देखना होगा.

 

खबर ये भी आ रही है कि शो में जल्द ही लीप आने वाला है. इसके कारण शो की कहानी में बड़ा बदलाव आएगा. बताया जा रहा है कि कार्तिक-नायरा की जगह शो में अक्षरा और सीरत-कार्तिक की बेटी की कहानी दिखाई जाएगी.

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शो में आपने देखा कि सुवर्णा मनीष को समझाने की कोशिश करती है कि उसने जो कुछ भी किया वह केवल सीरत के लिए था  क्योंकि वह मिठाई खाना चाहती थी. सीरत कार्तिक से शीला को बस स्टैंड पर छोड़ने के लिए कहती है. वहीं शीला घर से जाने की बात से इनकार करती है और कार्तिक भी उसे रुकने के लिए कहता है.

तो उधर सुहासिनी सीरत को सोने की चूड़ियां देती है और उन्हें संभाल कर रखने को कहती है. तो वहीं  शीला चूड़ियों को देखती है और चुरा लेती है.

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