शैतान भाग 3 : अरलान ने रानिया के साथ कौन सा खेल खेला

किचन के पास उसे अरसलान मिल गया. उस ने उसे देखते ही कहा, ‘‘अरसलान, मैं ने फैसला कर लिया है कि मैं तुम्हारी जिंदगी से निकल जाऊंगी, पर तुम फिजा को मुझे दे दो.’’

‘‘यह क्या बकवास है?’’ वह उलझ कर बोला.

‘‘यह बकवास नहीं है, वकील से कह कर एक दस्तावेज तैयार कराओ, जिस में लिखा हो, अगले 10 सालों तक तुम मुझे फिजा का गार्जियन रख रहे हो. मैं जहां रहूंगी, फिजा वहीं रहेगी. तुम हर महीने खर्चे की रकम देते रहोगे? मैं एक फ्लैट अलग ले लूंगी.’’

‘‘मैं तुम्हें वहीं फ्लैट दे दूंगा, जहां हम मिलते थे.’’

‘‘पर तुम वहां नहीं आ सकोगे. हफ्ते में एक बार आप बच्ची को बाहर ले जा सकते हो.’

‘‘ठीक है, मैं वकील से बात करता हूं.’’ उस ने कहा.

ठीक 11 बजे रानिया ड्राइंगरूम में पहुंच गई, जहां सब लोग इकट्ठे थे. वह एक कोने के सोफे पर फिजा को गोद में ले कर बैठ गई. वहां सोनिया के डाक्टर व उस के दफ्तर के मैनेजर राशिदी भी थे. वकील ने वसीयत के बारे में कहना शुरू किया, ‘‘वसीयत के मुताबिक जिन को यहां होना चाहिए, वे यहां हैं, पर यहां ज्यादा लोग नहीं रह सकते. इसलिए मिस कंजा और खाला आप बाहर चली जाएं प्लीज. यह कानूनी मामला है.’’

कंजा ने घूर कर वकील को देखा, फिर अरसलान की तरफ इस उम्मीद से देखा कि शायद वह रोक लेगा. पर वह सिर झुकाए बैठा रहा. दोनों गुस्से से बाहर निकल गईं.

वकील ने कहना शुरू किया, ‘‘वसीयत डेढ़ माह पहले लिखी गई थी. डाक्टर साहब और मैनेजर राशिदी इस के गवाह हैं. इस पर सिविल जज के साइन करवा लिए गए हैं. सारा काम पक्का है.’’

अरसलान बेचैन हो कर बोला, ‘‘यह सारी बातें छोडि़ए, आप वसीयत पढ़ कर सुनाइए.’’

‘‘वसीयत के मुताबिक सोनिया मैडम की तमाम जायदाद की वारिस उन की बेटी फिजा है.’’ वकील ने कहा.

‘‘बकवास है, इतनी सी बच्ची यह बिजनैस और कारखाना कैसे चला सकती है?’’ अरसलान ने गुस्से से कहा.

‘‘इस की चिंता आप मत कीजिए अरसलान मियां. इस के लिए सोनिया मैडम ने 4 लोगों की एक कमेटी बना दी है. जिस में मैनेजर राशिदी, डाक्टर साहब, उन के पापा के दोस्त अजमल साहब और मैं शामिल हूं. हम सब के काम की निगरानी रानिया को सौंपी गई है.’’ वकील ने कहा.

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‘‘ऐसा कैसे हो सकता है?’’ अरसलान ने चिढ़ कर कहा.

‘‘यह इस तरह हो सकता है अरसलान साहब कि सोनिया को आप पर भरोसा नहीं था. वह जानती थी कि आप अपनी नई जिंदगी में मगन हो कर फिजा को भूल जाएंगे या आप उसे अपने रास्ते से हटा देंगे.’’

‘‘वसीयत में मेरे लिए क्या हुक्म है?’’ अरसलान ने धीरे से पूछा.

‘‘आप की किस्मत का फैसला रानिया मैडम के हाथों है, क्योंकि सोनिया मैडम सारे अधिकार उन्हें दे गई हैं.’’ वकील साहब ने कहा, ‘‘कमेटी के सारे काम भी रानिया मैडम से पूछ कर उन की ही सलाह से होंगे. सोनिया मैडम एक खत भी रानिया मैडम के लिए छोड़ गई हैं.’’

यह सुन कर रानिया मन ही मन शर्मिंदा हो गई. उस ने दिल ही दिल में सोनिया का शुक्रिया अदा किया.

वकील साहब ने कागजात देख कर कहा, ‘‘अरसलान, आप के लिए वसीयत में खास हिदायतें हैं. आप जनरल मैनेजर राशिदी और रानिया की इजाजत से ही औफिस जा सकते हैं और इन की मरजी से ही आप को काम मिलेगा. एक खास शर्त उन्होंने यह रखी है कि इस कोठी में आप तभी रह सकते हैं, जब आप रानियाजी से शादी कर लेंगे और बाहर कोई अफेयर नहीं चलाएंगे.’’

अरसलान गुस्से से तिलमिला कर बोला, ‘‘यह आप सब की मिलीभगत है. आप सब ने मेरे खिलाफ साजिश रची है. मैं इस के खिलाफ अदालत जाऊंगा.’’

‘‘अरसलान साहब, आप कोर्ट जाने की तो बात भी न करें, मेरे पास इस की रिपोर्ट मौजूद है कि सोनियाजी को दवा के कैप्सूल में जहर दिया गया था.’’ डाक्टर साहब बोले.

यह सुन कर अरसलान डर कर चुप हो गया. सोनिया ने एक खत रानिया के लिए भी लिखा था. उस खत को पढ़ने के लिए वह दूसरे कमरे में चली गई. खत खोल कर उस ने उसे पढ़ना शुरू किया—

‘मेरी दोस्त रानिया, शायद मेरी सौंपी गई जिम्मेदारी बहुत ज्यादा है, पर मुझे यकीन है कि मोहब्बत में तुम सब निभा लोगी. अरसलान सिर्फ दौलत से प्यार करता है, इसलिए मैं ने उसे अपनी वसीयत में कुछ नहीं दिया है. अब यह तुम्हारे हाथ में है कि तुम उस के झांसे में न आओ और मेरे बिजनैस से उसे दूर रखो. वह एक बेवफा अय्याश इंसान है.’

रानिया ने इतना ही पढ़ा था कि उसे दरवाजे पर आहट महसूस हुई. देखा तो अरसलान सामने खड़ा था. वह धीरे से बोला, ‘‘रानिया, मैं अपनी भूलों का प्रायश्चित करता हूं. अब मैं तुम से शादी करना चाहता हूं. सारी उम्र मैं तुम्हारा वफादार रहूंगा, यह वादा है.’’

‘‘अरसलान, मेरा दिल सोनिया जितना बड़ा नहीं है, फिर भी मैं एक फैसले पर पहुंच गई हूं. यह फैसला मैं सब के सामने सुनाना चाहती हूं.’’ कह कर रानिया ड्राइंगरूम की तरफ बढ़ी. वह पीछे चलतेचलते गिड़गिड़ाया, ‘‘रानिया, मुझे एक मौका दो.’’

‘‘मेरे पास अब तुम्हें देने को कुछ नहीं है.’’

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‘‘तुम किसी से शादी तो करोगी ही, फिर मैं क्या बुरा हूं. देखो मैं फिजा का बाप हूं. कम से कम इस बात को तो ध्यान में रखो.’’

‘‘मैं ने इंकार नहीं किया है अरसलान. अभी मेरा फैसला सुनाना बाकी है.’’ वह बोली.

ड्राइंगरूम में सब मौजूद थे. वकील साहब ने कहा, ‘‘मिस रानिया, हम सब आप का फैसला जानना चाहते हैं.’’

रानिया ने आत्मविश्वास से कहा, ‘‘मैं सपनों में रहने वाली एक आम सी लड़की थी. मैं ने भी अरसलान साहब जैसे खूबसूरत इंसान को अपने ख्वाबों में बसाया था. जब यह भी मुझ पर मेहरबान हुए तो मैं ने इन्हें देवता समझ कर इन की हर बात मानी, पर मुझे नहीं पता था कि यह देवता के रूप में एक शैतान हैं.’’

‘‘रानिया मेरी बात सुनो…’’ अरसलान ने बीच में टोका.

‘‘अरसलान साहब, मुझे अपनी बात पूरी करने दीजिए.’’ अरसलान को चुप कराते हुए रानिया बोली, ‘‘सब कुछ लुट जाने के बाद आज मेरी आंखें खुलीं तो अरसलान साहब चाहते हैं कि मैं वही गलती दोबारा करूं. लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगी. मेरी मंजिल फिजा की अच्छी देखभाल और बेहतरीन परवरिश है.’’

रानिया का फैसला सुन कर अरसलान का चेहरा लटक गया. उस ने आगे कहा, ‘‘अरसलान साहब, हर सूरत में आप आज शाम 5 बजे से पहले यह घर छोड़ देंगे. और जब तक आप घर नहीं छोड़ेंगे, ये तमाम लोग यहीं रहेंगे. फिजा की गार्जियन होने के नाते उस की हिफाजत के लिए यह मैं जरूरी समझती हूं.’’

अरसलान एकदम से उठ खड़ा हुआ और गुस्से से बोला, ‘‘यह मेरा घर है, मुझे यहां से कोई नहीं निकाल सकता और तेरी तो औकात ही क्या है?’’

रानिया ने वकील की तरफ देख कर कहा, ‘‘वकील साहब, इन्हें बताइए कि जब तक फिजा बालिग नहीं हो जाती, तब तक इस घर की मालिक मैं हूं और उस की भलाई और हिफाजत के लिए मेरा यह फैसला जरूरी है.’’

वकील ने सख्त लहजे में कहा, ‘‘अरसलान साहब, आप वसीयत लागू करवाने में जरा सी भी अड़चन डालेंगे तो हम पुलिस व कोर्ट की मदद लेंगे. फिर आप का क्या अंजाम होगा, आप समझ सकते हैं.’’

अरसलान बैठ गया. रानिया ने कागजात देखते हुए कहा, ‘‘अरसलान साहब, आप अपने साथ अपनी जरूरत की चीजें ले जा सकते हैं. अगर आप इसी शहर में रहना चाहते हैं तो मैनेजर राशिदी आप को हर महीने 10 हजार रुपए देंगे और अगर आप दुबई वाले औफिस में काम करना चाहते हैं तो हर माह आप को तनख्वाह 4 हजार दरहम मिलेगी. रहने का इंतजाम औफिस की तरफ से होगा. यह आप की मरजी है, जहां आप जाना चाहें.’’

अरसलान के चेहरे पर मुर्दनी छा गई. उस ने मरी सी आवाज में कहा, ‘‘मैं दुबई के औफिस जाना चाहूंगा.’’

‘‘राशिदी साहब, आप अरसलान साहब को दुबई भिजवाने का इंतजाम करा दीजिए. इन्हें खर्च वगैरह दे दीजिएगा. मैं काम से बाहर जा रही हूं. 5 बजे तक आ जाऊंगी. तब तक घर साफ हो जाना चाहिए.’’ रानिया ने मजबूत लहजे में कह कर फिजा को गोद में लिया और बाहर निकल गई. राशिदी उसे बाहर तक छोड़ने आए. चलतेचलते उन्होंने कहा, ‘‘मैडम, यह अच्छा हुआ कि वह दुबई जा रहा है. वहां का जीएम बहुत तेज है. वह उसे सही तरीके से हैंडल करेगा और हमारी भी परेशानी खत्म हो गई.’’

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‘‘हां राशिदी साहब, सोनियाजी ने जो कुछ किया, बहुत सोचसमझ कर किया. अगर वह यहीं रहता तो दिमाग पर एक बोझ सा रहता.’’

रानिया ने गाड़ी में बैठते हुए ड्राइवर से कहा, ‘‘कब्रिस्तान चलो.’’

राशिदी ने सोचा कि सोनिया के पास जा कर उस के एहसानों का शुक्रिया अदा करेंगी. कब्रिस्तान में सोनिया की कब्र के पास बैठ कर रानिया ने कहा था कि अब वह ख्वाबों की दुनिया से निकल कर हकीकत की जमीन पर खड़ी है. वह फिजा की पूरे दिल से देखभाल व परवरिश करेगी. उसे मां का प्यार देगी. कभी पीछे मुड़ कर मोहब्बत की तरफ नहीं देखेगी. कभी कोई शिकायत का मौका नहीं देगी. यही उस का मरहूमा सोनिया से वादा था.

जब लड़की का दिल किसी पर आ जाए

Writer- धीरज कुमार

दिव्या बीए की छात्रा थी. वह रोज पढ़ने कालेज जाती थी. कालेज जाने के दौरान उसे शुभम नाम के एक लड़के से प्यार हो गया था.

शुभम भी उसी कालेज का छात्र था. दोनों रास्ते में बातें करते थे. शुभम ज्यादातर पढ़ाईलिखाई से जुड़ी बातें ही करता था. वह हलकाफुलका हंसीमजाक भी कर लेता था.

दिव्या सम?ा नहीं पा रही थी कि शुभम उस से प्यार करता भी है या नहीं. आखिरकार दिव्या ने एक दिन शुभम से अपने दिल की बात कह दी. तभी उसे मालूम हुआ कि शुभम भी उस से प्यार करता है, पर वह अपने दिल की बात कहने से डरता था.

शुभम ने इस की वजह बताई थी, ‘‘मेरी तरफ से पहल करने पर अगर बात नहीं बनती तो मु?ो बहुत बुरा लगता. मेरे दिल को ठेस पहुंचती, इसीलिए मैं चाहते हुए भी अपनी तरफ से कोशिश नहीं कर पा रहा था.’’

यह बात सच है कि कुछ लड़के अपने दिल की बात कहने में ?ि?ाक महसूस करते हैं या शरमाते हैं. सभी लड़के एक तरह के नहीं होते हैं. शुभम चाहता था कि दिव्या से अपनी बात कह दे, लेकिन वह कह नहीं पा रहा था.

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जब दिव्या ने अपने प्यार का इजहार किया, तो शुभम काफी खुश हो गया. अब वे दोनों एकदूसरे से खुल कर प्यार की बातें करने लगे थे.

दिव्या और शुभम शादी करना चाहते थे, लेकिन उन के मातापिता को दूसरी जाति का होने के चलते यह शादी मंजूर नहीं थी. इस के उलट वे दोनों एकदूसरे के बिना नहीं रहना चाहते थे.

दिव्या तो शुभम के बिना जीने की कल्पना ही नहीं कर पा रही थी. वह अपने मातापिता से कई बार अपनी बात रख चुकी थी. उधर शुभम के मातापिता भी इस शादी को करने के लिए तैयार नहीं थे.

इसी वजह से उन दोनों ने मातापिता की रजामंदी के खिलाफ जा कर शादी कर ली और अलग रहने लगे. आज दोनों काफी खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं.

शुभम का कहना है, ‘‘अगर सभी मातापिता इसी तरह से सोचेंगे तो समाज में दहेज प्रथा और जाति प्रथा जैसी बुराइयां कैसे खत्म होंगी? मेरे मातापिता की चाहत थी कि दहेज के रूप में अच्छीखासी रकम लड़की वालों से ली जाए. यही वजह थी कि वे दूसरी जाति की लड़की से शादी कराने को तैयार नहीं थे. प्रेम विवाह में दहेज तो मिलता नहीं है न.’’

आज भी किसी गरीब लड़की के पिता को दहेज प्रथा के चलते काफी परेशानी ?ोलनी पड़ती है. बहुत से लोग पैसे की कमी में अपनी बेटी की शादी सही जगह नहीं कर पाते हैं. वहीं पैसे वाले मातापिता अच्छे घर के लड़कों के पल्ले बदसूरत और बिगड़ैल लड़कियों को बांध देते हैं और उन की जिंदगी नरक बना देते हैं.

कई लड़कों का कहना है कि आज भी दहेज के लेनदेन के चलते बेमेल शादियां हो रही हैं. अगर पूरी तरह से प्रेम विवाह की मान्यता समाज में मिल जाए, तो बेमेल शादियां कम हो जाएंगी.

जब लड़केलड़कियां अपनी इच्छा के मुताबिक अपना घरवर चुनने लगेंगी, तो समाज में अच्छा बदलाव आएगा. इस से दहेज प्रथा जैसी बुराइयों का खात्मा होगा और जाति प्रथा की दीवारें टूटनी शुरू हो जाएंगी. समय के साथ ही लोगों को भी बदलने की जरूरत है.

कई बार लड़कालड़की एकदूसरे से प्यार तो कर लेते हैं, पर मातापिता की रजामंदी न मिलने के चलते शादी नहीं कर पाते हैं. इस तरह उन के सपने अधूरे रह जाते हैं. कई बार लड़के या लड़कियां उस प्यार को नहीं भुला पाते हैं, इसीलिए ऐसा देखा गया है कि मातापिता के चलते जब शादी नहीं हो पाती है, तो शादी के बाद भी लड़की अपने प्रेमी के साथ भाग जाती है या संबंध बनाए रखती है.

कभीकभी लड़के भी अपनी पत्नी के रहते हुए भी प्रेमिका से संबंध जारी रखते हैं. ऐसे हालात में लड़का या लड़की दोनों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

कुछ मातापिता को अपने बेटेबेटियों का दूसरी जाति या संप्रदाय में प्यार करना काफी नागवार गुजरता है. दरअसल, उन के अंदर का दिखावटी अभिमान प्रेम विवाह के रास्ते में रोड़ा बन जाता है. यही वजह है कि कभीकभी प्रेमीप्रेमिकाओं को औनर किलिंग का सामना भी करना पड़ता है.

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नेहा प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी. उसे एक लड़के से प्यार हो गया था. हालांकि वे दोनों अलगअलग धर्म के थे, फिर उन्होंने यह तय किया कि शादी एकदूसरे से ही करेंगे.

दोनों ने अपने मातापिता को इस बात की जानकारी दी. आखिरकार कई दिनों की कोशिश के बाद उन के मातापिता अपने बच्चों की खुशी की खातिर इस शादी के लिए मान गए. आज वे दोनों खुशहाल पारिवारिक जिंदगी जी रहे हैं.

लिहाजा जरूरी है कि किसी लड़की का दिल किसी लड़के पर आ जाए, तो सोचसम?ा कर कदम बढ़ाया जाए और उसे शादी तक ले जाने की कोशिश की जाए, तभी समाज में बदलाव होगा.

Manohar Kahaniya: आस्था की चोट- भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

Writer- शाहनवाज 

बिजनैसमैन अरुण और डा. आस्था की गृहस्थी की गाड़ी हंसीखुशी से चल रही थी. लेकिन उन दोनों के बीच आए ‘वो’ ने गृहस्थी में नफरत का बीज अंकुरित कर दिया. इसी बीच डा. आस्था ने पति अरुण को ऐसी ठेस पहुंचाई कि अरुण ने एक खतरनाक फैसला ले लिया. फिर जो हुआ…

13अक्तूबर, 2021 की देर शाम को करीब साढ़े 8 बज रहे थे. उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सिविल

लाइंस के रहने वाले तरुण अग्रवाल, अपने छोटे भाई अरुण अग्रवाल, जोकि अलीगढ़ शहर की रमेश विहार कालोनी में अपने परिवार के साथ रहता था, के घर पर पहुंचा था. तरुण का घर अरुण के घर से मात्र 20 मिनट की दूरी पर था, जो वह अकसर अपनी बाइक से तय किया करता था.

दरअसल, एक दिन पहले ही अरुण अपने दोनों बच्चों को तरुण के घर पर छोड़ने आया था और आज तरुण अपने भतीजेभतीजी के कपड़े लेने अरुण के घर पर आया था.

तरुण ने अपनी बाइक अरुण के घर के आगे रोकी और बाहर से देखा तो घर पर अंधेरा और काफी शांति छाई हुई थी. घर के बाहर बरामदे में बस एक लाइट ही जल रही थी, जिस से बाहर गली तक थोड़ीबहुत रौशनी फैल रही थी.

बाइक से उतर कर तरुण बरामदे से होते हुए मकान के मेनगेट पर पहुंचा तो देखा कि दरवाजे पर ताला लटका हुआ है. दरवाजे पर ताला लटका देख तरुण को थोड़ी हैरानी हुई कि अभी तक तो डा. आस्था (अरुण की पत्नी) घर वापस आ जाया करती है.

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उस ने डा. आस्था को फोन लगाया लेकिन आस्था का नंबर स्विच्ड औफ होने की वजह से कोई जवाब नहीं मिला. आस्था के बाद उस ने अरुण के नंबर पर भी फोन लगाया, लेकिन अफसोस अरुण का नंबर भी स्विच्ड औफ ही मिला. उस ने मकान के बाहर बरामदे पर नीचे बैठ कर 15-20 मिनट तक इंतजार किया, लेकिन घर खोलने के लिए कोई नहीं आया. काफी देर तक इंतजार करने के बाद हार मान कर तरुण ने अपनी जेब में हाथ डाला, अरुण के घर की चाबी निकाली और मेन गेट खोलने के लिए आगे बढ़ा.

दरअसल तरुण को अरुण ने ही पिछले दिन अपने घर की चाबी दी थी, लेकिन वह खुद दरवाजा नहीं खोलना चाहता था. वह नहीं चाहता था कि गलीमोहल्ले में अपने भाई के घर का दरवाजा खोलते हुए कोई उसे देखे और अपने मन में क्याक्या सोच ले. इसलिए दरवाजा खोलने से पहले काफी देर तक उस ने इंतजार किया. लेकिन जब कोई उम्मीद उसे नहीं दिखी तब जा कर उस ने अपने पास मौजूद चाबी से दरवाजा खोलना बेहतर समझा.

दरवाजा खोल कर तरुण ने सब से पहले कमरे की सभी लाइट्स औन कीं. कमरे का सारा सामान व्यवस्थित तरीके से अपनी जगह पर मौजूद था. उस ने सब से पहले बच्चों के कमरे में जा कर अलमारी से उन के 2-2 जोड़ी कपड़े निकाले और अपने हाथों में मौजूद कपड़े के थैले में उन्हें डाल दिया.

काफी देर तक बाहर इंतजार करने की वजह से तरुण का गला सूख गया था और उसे प्यास लगने लगी थी. क्योंकि तरुण अब घर के अंदर ही था तो वह घर में किचन की ओर बढ़ा.

किचन में पहुंच कर फ्रिज से पानी की बोतल निकाली और पानी पीते हुए उस की नजर छत की ओर गई. छत पर उस ने ऐसा कुछ देखा, जिस से उस की चीख निकल गई.

वह इतनी तेज चीखा कि उस का शोर घर के बाहर गली तक पहुंच गया था. चीख सुन कर गली के लोग चौंकते हुए वहां आ गए और अरुण के घर के आगे जमावड़ा लगा लिया.

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दरअसल, छत की तरफ तरुण ने एक लाश को लटका हुआ पाया जोकि किसी और की नहीं, बल्कि उस के छोटे भाई की पत्नी डा. आस्था की थी. तरुण बेशक से पानी पी चुका था लेकिन आस्था की लटकी हुई लाश देख कर उस का मन इतना बेचैन हो उठा और उस की दिलों की धड़कन इतनी तेज हो गई कि उसे फिर से प्यास महसूस होने लगी.

बहन ने जताया हत्या का शक

वह डरासहमा घर के बाहर आया तो देखा कि कुछ लोगों की भीड़ का जमावड़ा घर के आगे लग चुका था. गली में खड़े लोगों ने बाहर से तरुण को आवाज लगाते हुए पूछा कि आखिर हुआ क्या है. तरुण ने उन के सवालों को नजरअंदाज करते हुए अपनी जेब से फोन निकाला और पुलिस को फोन लगाया.

पुलिस को सूचित करने के बाद उस ने आस्था की छोटी बहन आकांक्षा, जोकि आगरा की रहने वाली थी, को फोन कर सूचना दी फिर घर के बाहर आ कर उस ने गली वालों को इस घटना के बारे में बताया.

अलीगढ़ का क्वार्सी थाना रमेश विहार कालोनी से बहुत दूर नहीं था. कुछ देर में ही पुलिस की टीम अरुण के घर आ पहुंची थी. मामले की जानकारी मिलते ही सीओ (तृतीय) श्वेताभ पांडेय भी तुरंत ही घटनास्थल पर पहुंच गए.

क्वार्सी पुलिस स्टेशन के थानाप्रभारी विजय सिंह, सीओ श्वेताभ पांडेय और उन की टीम घटनास्थल पर पहुंच कर बेहद सावधानी से उस कमरे की ओर आगे बढ़ी, जहां पर डा. आस्था की लाश लटकी हुई थी.

उस कमरे में घुसते ही सीओ श्वेताभ पांडेय को सड़ने की हलकी बदबू महसूस हुई. उन्होंने अपनी जेब से रुमाल निकाल कर अपनी नाक पर रखा. जैसेजैसे वे लाश के नजदीक पहुंचते जा रहे थे, वैसेवैसे बदबू और भी तीखी होती जा रही थी.

डा. आस्था की लाश के करीब पहुंच कर उसी अवस्था में श्वेताभ पांडेय ने डेडबौडी का मुआयना किया. हालांकि प्रथमदृष्टया सभी को यह मामला खुदकुशी का ही लग रहा था लेकिन श्वेताभ पांडेय की नजर एक ऐसी चीज पर गई, जिस से उन के दिमाग से आस्था की खुदखुशी का खयाल चला गया था. उन्होंने देखा कि आस्था की नाक से खून निकल कर सूख चुका था.

श्वेताभ पांडेय ने इस से पहले भी कई खुदखुशी के मामलों का निपटारा किया था, लेकिन कभी किसी भी मामले में इस तरह की चीज देखने को नहीं मिली थी. यह देख कर उन के मन में यह मामला खुदकुशी का कम, हत्या का ज्यादा महसूस होने लगा था.

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श्वेताभ पांडेय और थानाप्रभारी विजय सिंह के मन का शक पत्थर की तरह और मजबूत तब हो गया जब उन्होंने तरुण से मृतका के पति और बच्चों के बारे में पूछताछ की.

तरुण ने उन्हें बताया कि एक दिन पहले ही अरुण अपने बच्चों को उन के घर पर छोड़ कर कहीं चला गया था और बीते कल से ही उस का फोन भी नहीं लग रहा है.

यह सुन कर पुलिस की टीम एकदम से हरकत में आ गई. अभी पुलिस की टीम घटनाथल पर सबूतों के लिए खोजबीन कर ही रही थी कि आगरा से आस्था की छोटी बहन आकांक्षा भी अरुण के घर पर पहुंच गई. आकांक्षा को जब उस की बड़ी बहन के मरने की जानकारी मिली तो पहली ही नजर में उस ने इस घटना को हत्या करार दिया.

जब श्वेताभ पांडेय और विजय सिंह ने इस पूरे मामले को ले कर आकांक्षा से पूछताछ की तो उस ने चौंकाने वाले तथ्य पुलिस के सामने रखे.

आकांक्षा ने पुलिस को बताया कि उस की बहन डा. आस्था और उस के बिजनैसमैन पति अरुण के बीच पिछले काफी लंबे समय से नोकझोंक बनी हुई थी. उस ने बताया कि अरुण आस्था पर बेवजह शक किया करता था कि वह किसी और के साथ प्रेम संबंध में बंधी हुई है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था.

अरुण का अपनी पत्नी पर इस तरह से शक करना आस्था को नागवार गुजरता था, जिस के चलते उन दोनों के बीच पिछले कुछ सालों से खूब लड़ाइयां होती थीं. कभीकभार अरुण आस्था पर हाथ भी उठाया करता था.

यह सब कहते हुए आकांक्षा ने अरुण अग्रवाल (आस्था का पति), तरुण अग्रवाल (अरुण का बड़ा भाई), अनुज अग्रवाल (अरुण का छोटा भाई) और अर्पित अग्रवाल (अरुण का दोस्त) पर आस्था की हत्या का इलजाम लगाते हुए इन सभी के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई.

आकांक्षा ने बताया कि आस्था पर शक करने का काम सिर्फ अरुण ही नहीं कर रहा था, बल्कि ये सब लोग आस्था पर हमेशा नजर बनाए रहते थे और झूठी बातें बना कर आस्था को फंसाने का काम किया करते थे.

थानाप्रभारी ने आकांक्षा से पूछताछ करने के बाद आस्था का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई.

क्योंकि यह मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए डा. आस्था के शव का पोस्टमार्टम जल्द ही हो गया. 14 अक्तूबर की शाम को 4 डाक्टरों, जिस में डा. विशाका माधवी, डा. नीरज, डा. अनिल और डा. हारुन शामिल थे, के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच फोरैंसिक टीम की मौजूदगी में आस्था के शव का पोस्टमार्टम किया.

पोस्टमार्टम में पता चला कि डा. आस्था को गला दबा कर मारा गया था. उन के साथ इस से पहले मारपीट हुई थी, जिस से उन के पैरों पर नीले निशान व चेहरे, गरदन आदि पर भी मारपीट की खरोंच के निशान मौजूद थे. पोस्टमार्टम में उन की मौत का कारण गला दबा कर (स्ट्रांगुलेशन) हत्या करना आया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस को यह गुत्थी सुलझती हुई नजर आ रही थी. इस का अर्थ यह था कि घटना को आत्महत्या दर्शाने के लिए आस्था की लाश को फंदे पर लटकाया गया था.

यह सब साफ होने के बाद पुलिस ने अरुण के बड़े भाई तरुण से पूछताछ की. तरुण पुलिस की पूछताछ के आगे ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया.

उस ने पुलिस के सामने साफ शब्दों में इस बात को स्वीकार कर लिया कि अरुण ने उस के घर अपने बच्चों को सौंपते समय उसे आस्था की हत्या की सूचना दे दी थी.

तरुण ने बताई हकीकत

इस के साथ ही उस ने अपने घर की चाबियां भी उसे सौंपी थी ताकि वह अगले दिन शाम को उस के घर जाए और इस मामले को आत्महत्या साबित करे. परंतु अरुण ने तरुण को यह नहीं बताया था कि वह अपने बच्चों को उस के पास छोड़ कर आखिर जा कहां रहा है.

यह सब कुबूल करने के बाद पुलिस ने तरुण को 14 अक्तूबर को गिरफ्तार कर के अगले दिन 15 अक्तूबर को उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

लेकिन अब पुलिस को मामले के मुख्य आरोपी अरुण को पकड़ना था. तरुण तो इस हत्या में सिर्फ अरुण का सहयोगी था. उसे पकड़ना पुलिस के लिए काफी नहीं था.

पुलिस ने अपनी इनवैस्टीगेशन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह भी पता लगा लिया था कि इस हत्याकांड में अकेला अरुण ही शामिल नहीं हो सकता. बल्कि इस में और भी लोगों के शामिल होने की संभावनाएं थीं.

अगले भाग में पढ़ें- आखिर अरुण ने अपनी डाक्टर पत्नी को क्यों मारा

अभिनेता व निर्देशक समीर सोनी बने लेखक

‘कैलिफोर्निया वि-रु39यवविद्यालय (लॉस एंजिल्स) से स्नातक तथा मेरिल लिंच में एक वित्तीय विश्लेषक के रूप में दो वर्ष की नौकरी करने के बाद अभिनय की ओर रुख करने वाले समीर सोनी ने फिल्म,टीवी व थिएटर पर अभिनय करते हुए कई पुरस्कार अपनी -हजयोली में डाले. फिर समीर सोनी ने मई 2018 में फिल्म बर्थडे सॉन्ग’ का लेखन व निर्देषन कर बतौर लेखक व निर्दे-रु39याक के रूप में अपनी शुरुआत की.

अब एक कदम आगे ब-सजय़ाते हुए समीर सोनी ने अपने दिल की बातों को बतौर लेखक किताब ‘‘माय एक्सपीरियंस विथ द सायलेंस’’ लेकर आए हैं. यह किताब 27 नवंबर से हर बुक स्टाॅल पर उपलब्ध है. वास्तव में समीर ने खामो-रु39याी में एकांतपन का आभास किया और अपने जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण दिनों के दौरान खुद को आराम देने के लिए अपनी डायरी की ओर रुख किया.

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अंतमुर्खी स्वभाव के समीर ने अपनी इस पुस्तक के माध्यम से बहिर्मुखी दुनिया से इस बात को सा-हजया किया है कि उनके अंतर्मुखी दिमाग में क्या चलता रहा है और उसके बीच उन्होने कैसे अपना रास्ता अपनाया.

इस पुस्तक के माध्यम से समीर सोनी ने अपने पाठकों को यह याद दिलाने का प्रयास किया है कि जब तक कोई खुद की खोज नहीं कर लेता, तब तक वह किसी और का जीवन जी रहा है, जिसे समाज द्वारा निर्धारित किया गया है.इस किताब में यह भी बताया गया है कि कैसे स्वयं को खोजने के लिए आ-रु39याा और निरा-रु39याा के बीच निरंतर संघ-ुनवजर्या करना पड़ता है.

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अपनी किताब की चर्चा करते हुए खुद समीर सोनी कहते हैं-ंउचय‘‘यह डायरी पूरी तरह से अंतर्मुखी लोगों‘ के संबंध में है, जो यह बताती है कि मैं दुनिया को कैसे देखता हूं, कैसे मैंने -रु39याोबिज के माध्यम से अपना रास्ता बनाया है.एक ऐसा व्यक्ति जो कभी बाहर जाने वाला नहीं है.मैंने अपनी इस किताब में अपना दिल खोलकर एक साथ रखा है.ऐसे समय में जब लोग मान्यता चाहते हैं,मैंने अपनी सुरक्षित जगह,अपनी डायरी की ओर रुख करना सही सम-हजया और इस तरह मैं खुद को -सजयूं-सजय पाया.”

समीर आगे कहते हैं-ंउचय‘‘मैं एक ऐसा -रु39याख्स हूं, जो सामाजिक रूप से बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं है, जो ज्यादातर मामलों में नुकसान का कारण होता है. लेकिन अभिनेता के तौर पर यह मेरे लिए फायदा था.क्योंकि इसने मु-हजये अपने

किरदार से बेहतर तरीके से जुड़ने के लायक बनाया.जब मु-हजये अपना पहला पुरस्कार मिला और मेरे नाम की घो-ुनवजयाणा हुई, तो सन्नाटा फैला हुआ था, मेरे लिए कोई ताली नहीं बजा रहा था और मेरी डायरी ने मु-हजये ऐसे दिनों से गुजरने में मदद की.मैंने इतनी कमियों के बावजूद खुद को वहां से बाहर निकाला है, लेकिन अंत में, मैं अपने अच्छे दिनों के लिए भी आभारी हूँ, और मेरी डायरी ने असल में इस सब में मेरी मदद की है.’

Badshah ने रीक्रिएट किया ‘पानी-पानी’ का भोजपुरी वर्जन, देखें Video

बॉलीवुड सिंगर-रैपर बादशाह (Badshah) अक्सर अपने गानों को लेकर सुर्खियों में छाये रहते हैं. अब वो भोजपुरी गाने को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. जी हां सही सुना आपने, बादशाह ‘पानी-पानी’ का भोजपुरी  वर्जन को लेकर छाये हुए हैं.

बादशाह के इस गाने में भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और अक्षरा सिंह भी नजर आ रही हैं. दोनों की केमिस्ट्री शानदार दिखाई दे रही है.

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हाल ही में इस गाने का टीजर यूट्यूब पर जारी किया गया है. तो वहीं अक्षरा सिंह और खेसारी लाल यादव भी सोशल मीडिया पर एकाउंट्स पर गाने का टीजर शेयर किया है.

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खेसारी लाल यादव गाने का टीजर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, आप सभी का इंतजार यही होता है खत्म, पानी-पानी अब भोजपुरी में! तो वहीं अक्षरा सिंह ने भी शेयर करते हुए कैप्शन लिखा है कि , ‘आप लोगों ने पानी-पानी के भोजपुरी वर्जन को खूब प्यार दिया है. टीजर रिलीज हो गया है.

 

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आपको बता दें कि अक्षरा ने कुछ दिन पहले ही बादशाह के साथ फोटो अपनी फोटो शेयर की थी. अंदाजा लगाया जा रहा था कि अक्षरा जल्द ही बादशाह के किसी नए गाने में दिखाई देंगी. लेकिन पानी-पानी सॉन्ग के भोजपुरी वर्जन में अक्षरा दर्शकों के बीच धमाल मचाएंगी.

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इस गाने के टीजर को फैंस अच्छा रिस्पांस दे रहे हैं. खेसारी इस गाने में स्टाइलिश अंदाज में नजर आ रहे हैं तो  वहीं अक्षरा भी बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही हैं.

अनुपमा के लिए जान की बाजी लगाएगा अनुज, हादसे के बाद होंगे दोनों करीब

रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) और सुधांशु पांडे (Sudhanshu Pandey) स्टारर सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupama) में इन दिनों फुल ऑन ड्रामा चल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि वनराज काव्या को तलाक देना चाहता है तो वहीं काव्या वनराज को धमकी देती है कि वह उस पर डोमेस्टिक वॉयलेंस का आरोप लगाएगी. अनुपमा भी काव्या को समझाती है कि लेकिन वह कुछ भी मानने को तैयार नहीं है. शो के अपकमिंग एपिसोड में महाट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि तोषू एक बार फिर अपनी राखी दवे से मिलने की बात करता है जिससे किंजल भड़क जाती है. दोनों के बीच कहा-सुनी होती है. तो वहीं वनराज तोषू को विश्वास दिलाता है कि वह कुछ बड़ा काम करने जा रहा है इसलिए अब उसे राखी से जॉब की भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

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तो दूसरी तरफ अनुज कार से अनुपमा को लेने जाता है तभी रास्ते में  धुंए के चलते एक बाइक वाले को बचाने के चक्कर में अनुज के साथ एक बड़ा एक्सीडेंट होता है. लेकिन वह इस एक्सीडेंट से बच जाता है. और इसी पल में वह अनुपमा को प्रपोज करने का फैसला करता है क्योंकि वह जिंदगी के आखिरी पल में भी अनुपमा को ही याद करता है.

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शो में दिखाया जाएगा कि अनुज जैसे ही अनुपमा से मिलेगा. वह अपने दिल का हाल बयां करेगा. वह अनुपमा से I Love You कहेगा.

 

तो वहीं कुछ गुंडे अनुज-अनुपमा को घेर लेंगे. ये गुंड़े अनुपमा से बदतमीजी करेंगे और जेवर छीनने की भी कोशिश करेंगे. अनुज को ये बात बर्दाश्त नहीं होगी और वह जान की परवाह किए बिना उन लोगों से भिड़ जाएगा.

इसी दौरान अनुज के सिर पर एक चोट लगेगी और वह बेहोश हो जाएगा. अनुपमा उसे लेकर हॉस्पिटल जाएगी लेकिन डॉक्टर अनुज के कोमा में जाने की बात कहेंगे. शो में अब ये देखना होगा कि अनुपमा अनुज की जान बचाने के लिए क्या करेगी.

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