पाकिस्तान की प्राइवेट पार्टियों में ये सब करती है लड़कियां, देखें लीक वीडियो

सोशल मीडिया पर आज कल एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियों में एक लड़की एक प्राइवेट पार्टी में डांस करती हुई देखी जा सकती है, बता दें कि यह वीडियो पाकिस्तान का है, जहां महिलाओं पर तरह तरह के प्रतिबंध है. पाकिस्तान में इस तरह की महफिल सजना कोई बड़ी बात नहीं, लगभग शादी पार्टियों में इस तरह की पार्टी होती है.

इस वीडियो में आप देख सकते है की लड़की अपनी अदाओं से लोगों का मनोरंजन कैसे कर रही है. जिस तरह से लड़की प्राइवेट पार्टी में डांस कर रही है और लोग इस का मजा उठा रहे हैं. इस वीडियो को देख कर लगता नहीं है कि पकिस्तान में ऐसा हो रहा है. जहां एक तरफ बिना पर्दों के महिलाओं के निकलने पर पाबंदी है, वहीं रात के अंधेरे में इस तरह की हरकत करवाई जाती है.

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इस रिएलिटी शो में उतरवा दिए जाते हैं कंटेस्टेंट्स के सारे कपड़े

दुनिया में बहुत से रिएलिटी शो हर साल आयोजित किए जाते हैं, जिनका सबसे बड़ा मकसद होता है लोगो का एंटरटेनमेंट करनाl आपने बहुत से ऐसे रिएलिटी शो देखे होंगे जिनमे बड़े बड़े कलाकार आते हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं और अंत में एक विनर बनता है.

डेटिंग के बहुत सारे शो आपने देखे और पसंद किए होंगे लेकिन ब्रिटेन के टीवी चैनल पर एक अनोखा रिएलिटी डेटिंग शो प्रसारित होता है. टीवी शो का नाम ‘नेक्ड अट्रेक्शन’ है और इसका प्रसारण चैनल 4 पर किया जाता है.

इस शो में भाग ले रहे प्रतिभागी के साथ वो होता है जो शायद ही किसी शो पर आपने देखा हो. इस शो में कंटेस्टेंटस को बिना कपड़ों के एक कांच के बॉक्स में खड़ा कर दिया जाता है और उसके बाद उनकी बॉडी का ब्योरा दिया जाता है और फिर डेटिंग के लिए एक पार्टनर चुना जाता है.

अपने अनोखे डे‍टिंग अंदाज के लिए चर्चा और विवादों में रहा ये शो एक बार फिर से दूसरा सीजन लेकर हाजिर हो चुका है. इसका पहला एपिसोड 29 जून को प्रसारित किया जा चुका है. इसके पहले एपिसोड को ही लोगों ने खूब पसंद किया गया. वजह थी इस शो में ट्रांसजेंडर और पेन सेक्सुअल कंटेस्टेंटस का शामिल होना. ऐसा पहली बार हुआ है.

इस अनोखे टीवी शो में पांच लोगों को कांच के बॉक्स में बिना कपड़ों के खड़ा कर दिया जाता है. इसके अलावा एक कंटेस्टेंट बाहर होता है. वह कांच में खड़े कंटेस्टेंटस की बॉडी को देखता है और उसका पूरा ब्यौरा लेता है.

इस शो में कंटेस्टेंटस की बॉडी नीचे से ऊपर तक दिखाई जाती है. यहां तक की उनके प्राइवेट्स पार्ट्स को दिखाते हुए फिर ऊपर जाते-जाते उनका चेहरा दिखाया जाता है.

इसके दोनों कंटेस्टेंटस को बात करने की इजाजत भी दी जाती है. बाहर रहने वाले कंटेस्टेंट को कांच के बक्से में खड़े कंटेस्टेंटस में से एक को डेट के लिए चुनना होता है.

डेट के लिए पार्टनर चुनने वाले कंटेस्टेंट को भी जाने से पहले अपने कपड़े उतारने होते हैं. हालांकि, डेट पर जाते समय दोनों कंटेस्टेंटस कपड़े पहनकर ही जाते हैं.

अन्ना रिचर्डसन शो को होस्ट कर रही हैं. रिचर्डसन टीवी प्रजेंटर, प्रोड्यूसर, लेखक और पत्रकार भी हैं. अन्ना ने अपने टीवी करियर की शुरुआत ‘द बिग ब्रेकफास्ट’ से की थी.

साल 2016 में जब नेक्ड अट्रेक्शन की पहली सीरिज प्रसारित हुई थी, तो काफी विवाद हुआ था. कई लोगों ने इसकी शिकायत की थी लेकिन उन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

जंगली पंचायतें और जालिम पंचों का कहर

महाराष्ट्र के परभनी जिले की एक जातीय पंचायत ने एक शख्स के सामने शर्त रखी कि अगर वह पंचायत के आठों पंचों को अपनी पत्नी के साथ हमबिस्तर होने की इजाजत दे दे, तो उस का 6 लाख रुपए का कर्ज माफ कर दिया जाएगा. पंचायत का फैसला मानने से इनकार करने पर उस जोड़े का हुक्कापानी बंद कर दिया गया. सूचना मिलने पर पुलिस, ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ और दूसरे गैरसरकारी संगठनों ने दखलअंदाजी कर के न केवल उस जोड़े का सामाजिक बहिष्कार खत्म कराया, बल्कि पंचायत को भी भंग कर दिया.

पंच परमेश्वर होते हैं, यह बात ‘कथा सम्राट’ मुंशी प्रेमचंद के जमाने में जरूर सच रही होगी, लेकिन अब तो पंच सच्चे इनसान भी नहीं रहे हैं. देश की विभिन्न पंचायतों के कुछ फैसलों पर अगर नजर डाली जाए, तो यह बात आईने की तरफ साफ हो जाती है.

दरअसल, समस्या यह है कि मौजूदा समय में ज्यादातर लोग पंचायत नामक संस्था को सही माने में समझ नहीं पा रहे हैं. पंचायत चाहे जाति के आधार पर बनी हो या धर्म या वर्ग के आधार पर, उस का मूल काम इंसाफ करना होता है. अफसोस इस बात का है कि पंचायतें ये सब भूलती जा रही हैं.

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में नगला टोटा गांव की पंचायत ने एक दलित नौजवान को फांसी की सजा सुना दी और उसे अंजाम भी दे दिया. उस नौजवान पर अपने गांव की एक शादीशुदा औरत से नाजायज संबंध रखने का आरोप था. उस औरत के पति ने पंचायत बुला कर नौजवान की शिकायत की, जिस पर पंचायत ने बिना कुछ पूछेसुने, पहले उसे पीटने और फिर फांसी पर लटकाने का फरमान जारी कर दिया.

उत्तर प्रदेश के ही कौशांबी इलाके में अमिरसा गांव की पंचायत ने एक 15 साला लड़की को तथाकथित प्रेम प्रसंग का आरोपी मानते हुए उसे और उस के परिवार को गांव छोड़ने का हुक्म जारी कर दिया. वह लड़की पड़ोस के एक हमउम्र लड़के के साथ गांव छोड़ कर कहीं चली गई थी. उस लड़के के घर वाले दोनों को खोज कर ले आए और उन्होंने पंचायत बुला कर आरोप लगाया कि वह लड़की ही उन के लड़के को बहलाफुसला कर ले गई थी.

पंचों ने बिना कोई जांचपड़ताल किए फरमान सुना दिया कि वह लड़की और उस का परिवार गांव छोड़ दे.राजस्थान के राजसमंद जिले के थुरावड़ गांव में एक औरत के बाल काटने के बाद उसे बिना कपड़ों के गधे पर बैठा कर पूरे गांव में घुमाया गया. उस औरत पर रिश्ते के भतीजे की हत्या में शामिल होने का शक था, इसलिए उसे ऐसी सजा दी गई.

देश की पंचायतों को हरियाणा की विभिन्न पंचायतों के उन हालिया फैसलों से सबक लेना चाहिए, जिन के तहत उन्होंने शादीब्याह में दहेज न लेने, डीजे व शराब पर रोक, कम से कम भोज और कम तादाद में बराती या मेहमान बुलाने जैसे कदम उठाए हैं.

पंचायतों को उत्तराखंड के देहरादून की चकराताबणगांव खत महापंचायत से भी सबक लेना चाहिए, जिस ने वहां घूमने आए एक जोड़े को लूटने, औरत के साथ बलात्कार करने के बाद उन दोनों की हत्या करने वाले 4 लोकल टैक्सी ड्राइवरों को फांसी की सजा देने की मांग उठाई.

ऐसे फैसले पंचायतों की इज्जत को बढ़ाते हैं और जनता का उन पर भरोसा मजबूत करते हैं. लेकिन बहुत बार देखा जाता है कि पंचायत के पंच मुंहदेखी बातें करते हैं. यही वजह है कि वे इंसाफ की कुरसी पर बैठ कर अकसर नाइंसाफी कर बैठते हैं.

इस का उदाहरण ग्रेटर नोएडा के चौपाइया पट्टी गांव की पंचायत है, जिस ने 8 साल की बच्ची के साथ गलत काम करने वाले 15 साला लड़के को सिर्फ 11 जूते मारने की सजा दे कर मामला खत्म कराने की कोशिश की. बच्ची के घर वाले जब शिकायत ले कर जेवर कोतवाली पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें बदनामी का डर दिखा कर वापस लौटा दिया.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की एक पंचायत ने एक नई शादीशुदा औरत की शादी महज इसलिए तुड़वा दी कि वह खाना बनाते समय आटा ज्यादा गूंध देती थी, जिस से अन्न बरबाद होता था.

पंचायत ने उस औरत को समझाने के बजाय बिना उस का पक्ष जाने उसे पति से अलग रहने का हुक्म जारी कर दिया. मजेदार बात यह है कि उस औरत का पति एमए का छात्र था और उस ने खुद अपनी पत्नी को अन्न की बरबादी के प्रति सचेत न कर के पंचायत का सहारा लिया.

इलाहाबाद के कप्सा गांव में एक विधवा के साथ गलत काम करने की कोशिश करने वाले शख्स को पंचायत ने गांव में भोज का दंड दे कर बरी कर दिया. यह शख्स गांव के एक हजार लोगों को भोजन करा कर अपने गंभीर अपराध से छुटकारा पा गया. पीडि़ता चाहती थी कि उसे गांव के लैवल पर ही इंसाफ मिल जाए और पुलिस या मुकदमे के चक्कर में न फंसना पड़े, लेकिन उस के हाथ सिर्फ बदनामी लगी.

पश्चिम बंगाल के वीरभूम इलाके की लाभपुर पंचायत के 13 लोगों ने दूसरे समुदाय के लड़के से प्यार करने वाली आदिवासी लड़की के साथ गैंगरेप किया. पंचायत ने पहले लड़की के घर वालों पर 50 हजार रुपए का जुर्माना ठोंका और जब घर वालों ने जुर्माना भर पाने में हाथ खड़े कर दिए, तो पंचायत के फरमान पर लड़की के साथ गैंगरेप किया गया.

मध्य प्रदेश के इंदौर के खजराना इलाके में एक प्रेमी जोड़े को पंचायत ने अनोखी सजा सुनाई. पंचों ने कहा कि लड़के का अंग काट दिया जाए और उस के परिवार को समाज से निकाल दिया जाए. लड़के के परिवार पर 11 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया और लड़की को जिंदगीभर शादी न करने की सजा दी गई.

इसी तरह तमिलनाडु के धर्मपुरी इलाके में एक प्रेमी जोड़े ने मंदिर में शादी कर ली. गैरदलित परिवार की उस लड़की के पक्ष ने पहले तो पंचायत के जरीए दबाव बनाया कि वह वापस आ जाए, लेकिन जब लड़की ने अपने पिता के घर वापस आने से इनकार कर दिया, तो गैरदलित समुदाय के तकरीबन ढाई हजार लोगों ने एकराय हो कर 148 दलितों के घर आग के हवाले कर दिए.

ये बड़े चिंताजनक हालात हैं. आज जबकि हमारे देश की न्यायपालिका इतनी सजग है, सतर्क है और बेखौफ फैसले देने के लिए लोगों में इज्जत की नजर से देखी जा रही है, तब भी एक तीखा सच शाप की तरह हमारे माथे पर चस्पां है कि गरीब तबके से इंसाफ कोसों दूर है. ऐसे में पंचायतों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे पीडि़त व पीड़ा की सही पहचान करने के बाद ही किसी फैसले तक पहुंचें. अगर वे ऐसा नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें खुद को पंचायत कहलाने का कोई हक नहीं है.

  • महेंद्र अवधेश 

एक्ट्रेस नहीं, दुनिया की सबसे हौट फुटबौल रेफरी हैं ये

साल 2015 में फ्रांस के रियालिटी टीवी शो ‘सीक्रेट स्टोरी’ से फैशन की दुनिया में चर्चा में आई फुटबॉल रेफरी क्लाउडिया रोमानी को आज कौन नहीं जानता. फुटबॉल के रोमांच के बीच फैन्स को एक चीज और बहुत पयंद आती है और वो है वर्ल्ड की सबसे ग्लैमरस फुटबॉल रेफरी क्लाउडिया रोमानी.

सुपर मॉडल और दुनिया की 100 सबसे खूबसूरत महिलाओं में से एक क्लाउडिया रोमानी के पति केविन ग्लैजेस एक बिजनेसमैन हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर रेफरी क्लाउडिया रोमानी में ऐसी क्या बात है? तो आइये आपको क्लाउडिया के बारे में कुछ खास बताते हैं.

असल में क्लाउडिया, इटली की एक मैगजीन ‘Clarence’ के ‘मिस इंटरनेट’ इवेंट का खिताब जीत चुकी हैं और इसलिए क्लाउडिया के फैन्स उन्हें मिस इंटरनेट भी कहा करते हैं. मॉडलिंग से फुटबॉल की दुनिया में कदम रखनेवाली यह ब्यूटी क्वीन 2014 में फीफा का टेस्ट पास करके एक क्वालिफाइड रेफरी बनी थी. जिसके बाद क्लाउडिया रोमानी की फैन फोलोइंग बढती ही गई. इसके आलावा क्लाउडिया रोमानी को FHM ने साल 2006 में दुनिया की सबसे खूबसूरत वुमन्स की लिस्ट में शामिल किया था.

आपको बता दें कि क्लाउडिया की प्रोफेशनल लाइफ की तरह पर्सनल लाइफ भी ग्लैमरस है. और ऐसा इसलिए है क्योंकि वे पहले तो इटली के दिग्गज स्ट्राइकर फ्लिप्पो इंजेगी के साथ रिलेशनशिप में रही, पर ब्रेकअप के बाद अब वे केविन ग्लैजेस के साथ हैं. असल में ग्लैजेस इटली के टॉप बिजनेसमैन में से एक हैं.

देखिये क्लाउडिया रोमानी की ये हॉट और ग्लैमरस तस्वीरें, जिसे देखकर आप भी इस महिला फुटबॉल रेफरी के फैन्स में शामिल हो जाएंगे.

कुमार विश्वास की टिप्पणी को कुछ इस तरह समझिए

भाबी जी घर पर हैं, टीवी धारावाहिक कथित रूप से अश्लील और फूहड़ माना जाने के बाद भी दर्शकों की पसंद है क्योंकि इस की कामेडी में समाज का सच बौद्धिक रूप से परोसा जाता है. इस धारावाहिक के दो पात्र टीका और मलखान निट्ठले और आवारा हैं जो गुप्ता टी स्टाल पर बैठे बैठे आती जाती लड़कियां छेड़ा करते हैं. ये दोनों कविता नहीं कर पाते, इसलिए फिल्मी गाने गाया करते हैं. दोनों लड़कियों को देवी या माते नहीं कहते, बल्कि उन्हें आइटम, पटाखा या माल जैसे चलताऊ संबोधनों से नवाजते अपनी कुंठा व्यक्त करते रहते हैं, जिस पर दर्शक खूब हंसते हैं.

अब मंचीय कवि और आप नेता कुमार विश्वास ने तो टीका और मलखान के मुकाबले लड़कियों या महिलाओं को कुछ बख्शते सामान ही कहा है, जिस पर बेवजह का हंगामा कुछ नारीवादी पुरुष खड़ा कर रहे हैं. जिस समाज और धर्म में औरत की हैसियत पांव की जूती और शूद्रों सरीखी बताई गई हो, उसमें उन्हें सामान कहकर कुमार विश्वास ने जो उदारता और सज्जनता दिखाई है, उसके लिए वे आलोचना, निंदा या धिक्कार के नहीं बल्कि साधुवाद के पात्र हैं. हर कोई नहीं समझ सकता कि मंच से कविताओं के जरिये लोगों को हंसा पाना कितना मुश्किल काम है, इसके लिए औरतों को जलील करना ही पड़ता है तभी दर्शक हंसता है.

कपिल शर्मा के कामेडी शो जिसमे कुमार विश्वास ने महिलाओं को सामान कहा में उनके साथ भारी भरकम शायर राहत इंदोरी भी थे, जिनके सामने विश्वास जैसे कवि का बराबरी से स्टुडियो साझा करना ही किसी उपलब्धि या पुरस्कार से कमतर बात नहीं होती. जब आप किसी बड़े आदमी के साथ होते हैं, तो हीनता किसी न किसी रूप में प्रगट हो ही जाती है, ऐसा आप नेता के साथ हो गया, तो कोई अनहोनी नहीं हो गई न ही कोई पहाड़ टूट पड़ा. कुमार विश्वास को यह कहने का पूरा हक है कि औरत का यूं मजाक बनाना या उसे इस तरह बेइज्जत करना कोई दुर्भावना नहीं, बल्कि कविता की मांग होती है, इसके पहले भी वे दक्षिण भारतीय नर्सों के रंग पर कथित भद्दी टिप्पणी कर यह मांग पूरी कर चुके हैं.

कुमार विश्वास को यह भी हक है कि वे हो रहे विरोध को भगवा खेमे द्वारा प्रायोजित बताएं और नेताओं द्वारा हर कभी महिलाओं पर की गई अभद्र टिप्पणियों का हवाला दें, खासतौर से कांग्रेसी दिग्गज दिग्विजय सिंह के उस उद्गार को वे उद्घृत कर सकते हैं, जिसमे उन्होंने नीमच की सांसद मीनाक्षी नटराजन को मंच से ही माल कहा था वह भी सौ टंच का. दूसरों के गिनाने से खुद के गुनाहों का रंग हल्का पड़ता है.

लेकिन अब कुमार विश्वास खेद व्यक्त करने का आसान रास्ता चुनेंगे, क्योंकि उनके खिलाफ दिल्ली के डाबरी थाने में एक जागरुक नागरिक ने एफआईआर दर्ज करा दी है. शिकायतकर्ता  ने अपनी शिकायत में कहा है कि कुमार विश्वास द्वारा महिलाओं को सामान कहने के बाद उसकी बिटिया ने अपनी मां से सवाल किया था कि क्या वह भी शादी के बाद सामान हो जाएगी. बेटी के इस सवाल पर शिकायतकर्ता थाने जाने की हद तक व्यथित हो उठा. इसे उक्त व्यथित व्यक्ति की साजिश भी कुमार विश्वास कह सकते हैं जिसकी मंशा उन्हें परेशान कर कुछ माल झटकने की हो सकती है. अव्वल तो पहली गलती उसने ही परिवार के साथ कपिल शर्मा का कामेडी शो देखने की, की थी. कविता और कवि कभी फूहड़ नहीं होते फूहड़ तो वह फेशनेबुल जागरुकता है जो टीका, मलखान पर तो खामोश रहती है, पर कोई मंचीय कवि महिलाओं को सामान कहे तो तिलमिला उठती है.

कर्ज से कंगाल होते मेहनतकश युवा

मध्य प्रदेश में इंदौर के द्वारकापुरी इलाके में रहने वाले 32 साला पवन ने 6 फरवरी, 2016 को फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली. उस की 26 साला बीवी ज्योति ने भी ऐसा ही किया. पर उन दोनों ने दिल दहला देने वाला एक गुनाह यह भी किया कि खुदकुशी करने से पहले अपनी ढाई साल की मासूम बेटी नम्रता की भी गला घोंट कर हत्या कर डाली. पवन और ज्योति ने अभी अपनी घरगृहस्थी की शुरुआत ही की थी और मासूम नम्रता तो मम्मीपापा के अलावा कुछ जानतीसमझती ही नहीं थी.

किराए के मकान में रहने वाले पेशे से ड्राइवर पवन की खुदकुशी में कोई पेंच या सस्पैंस नहीं है, क्योंकि मरने से पहले उस ने एक चिट्ठी में लिखा था कि उस पर तकरीबन 65 हजार रुपए का कर्ज था और सूदखोर वसूली के लिए उसे आएदिन तंग करते थे.

इस मामले में साफ दिख रहा है कि पवन ने ब्याज पर पैसे तो आसानी से ले लिए थे, पर लौटाने में पसीने आ रहे थे. वजह, आमदनी कम और खर्चे ज्यादा थे.

पवन और ज्योति ने जब देखा कि वे तगड़े सूद पर लिए पैसों को नहीं लौटा पाएंगे, तो घबरा कर उन्होंने यह खतरनाक कदम उठा लिया. पहले ज्योति ने फांसी लगाई. उस के मरने पर पवन ने उस की लाश को पलंग पर लिटाया, फिर खुद दूसरे कमरे में जा कर फंदे पर झूल गया. लेकिन इस से पहले उस ने अपनी बेटी नम्रता का भी गला घोंटा होगा.

चूंकि कर्ज सहूलियत से मिल रहा है, इसलिए ले लिया जाए, फिर ज्यादा कमा कर चुका देंगे जैसी खयाली बातें सोच कर जो लोग कर्ज लेते हैं, वे असल तो दूर की बात है उस का सूद भी नहीं चुका पाते, क्योंकि उन्हें अंदाजा नहीं रहता है कि जिस आमदनी में वे घर नहीं चला पा रहे, अगर उस में से ही ब्याज भी देना पड़े, तो वे खर्च कैसे चलाएंगे?

इतना जरूरी नहीं कर्ज

 देश में पवन जैसे लोगों की भरमार है, जो अपने रहनसहन का लैवल पैसे वालों जैसा दिखाने के लिए कर्ज ले लेते हैं. भोपाल के शिवाजी नगर इलाके में एक मिल्क पार्लर चलाने वाले नौजवान सुरेंद्र सिंह (बदला नाम) ने कारोबार बढ़ाने के लिए एक सूदखोर से यह सोचते हुए 50 हजार रुपए लिए थे कि इस पैसे से वह दुकान में माल भरेगा और जो मुनाफा होगा, उस में से कर्ज चुकाता जाएगा. इस के बाद एक लोडिंग आटोरिकशा ले लेगा, जिस से ढुलाई का पैसा बचेगा और किराए पर चलाने से आमदनी भी बढ़ेगी.

तयशुदा शर्तों के मुताबिक सुरेंद्र सिंह को मूल रकम के अलावा ढाई हजार रुपए ब्याज के हर महीने चुकाने थे. उस का अंदाजा यह था कि अगर 50 हजार रुपए के माल पर वह 10 फीसदी भी मुनाफा कमाएगा, तो 5 हजार रुपए महीने की आमदनी होगी. ढाई हजार फिर भी बच रहे थे, जिन्हें इकट्ठा कर के वह साल 2 साल में असल भी चुका देगा.

कारोबार के मामले में कम जानकारी रखने वाले सुरेंद्र सिंह को पहले ही महीने तब झटका लगा, जब महीने में 20 हजार रुपए का सामान भी नहीं बिका यानी ब्याज के 5 सौ रुपए उसे दूध की कमाई से मिला कर भरने पड़े.

यह सिलसिला थमा नहीं तो सुरेंद्र परेशान हो गया, क्योंकि महीने की पहली तारीख को लेनदार मिल्क पार्लर पर आ खड़ा होता था और ब्याज का पैसा ले जाता था.

बढ़ता घाटा देख कर सुरेंद्र सिंह को तनाव होने लगा और इसी परेशानी में वह बीमार पड़ गया. दुकान नौकर के भरोसे छोड़ी, तो बीमारी से ठीक होने के बाद पता चला कि 8-10 हजार का माल तो गायब है ही, दूध के पैसों की भी पूरी वसूली नहीं हुई है.

नौकर से पूछा गया, तो वह लड़झगड़ कर काम छोड़ कर चला गया. इधर सूदखोर को कोई रहम नहीं आया. इलाज में हुआ 15 हजार रुपए का खर्च और ब्याज की 2 महीने की 5 हजार रुपए की रकम ने उसे फुटपाथ पर ला खड़ा कर दिया.

सुरेंद्र सिंह ने यहांवहां हाथपैर मारे, पर जब किसी ने मदद नहीं की, तो सूदखोर से बचने के लिए उस ने अपना मिल्क पार्लर घाटे पर बेच दिया और अब नए काम या कारोबार की तलाश में है, पर कर्ज लेने से उस ने तोबा कर ली.

महंगे पड़ते हैं ऐब

 ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो कमाते तो जरूरत के मुताबिक ही हैं, लेकिन किसी लत या ऐब की गिरफ्त में आ कर कर्ज ले बैठते हैं.

जुआ, सट्टा, शराब या कोई दूसरा नशा और धंधेवालियों के पास जाने वालों को कर्ज ज्यादा और जल्दीजल्दी लेना पड़ता है. ऐसे लोग शुरू में तो खर्च पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन फिर धीरेधीरे जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने लगते हैं, जिस का खात्मा किसी हादसे की शक्ल में ही जा कर होता है.

पेशे से मेकैनिक सलीम काइनैटिक गाडि़यों का अच्छा जानकार था. भोपाल के एमपी नगर जोन-1 में उस की दुकान थी, जो खूब चलती थी.

सलीम की कमाई तकरीबन 2 हजार रुपए रोजाना थी और कोई ऐब भी उस में नहीं था. जिंदगी मजे से चल रही थी, पर 2 साल पहले सलीम को जुए की ऐसी लत लगी, तो उसे कर्ज में डुबा कर बरबाद कर गई. अकसर जीतने वाला सलीम एक बाजी में बराबरी के पत्तों पर शो कर के तीन पत्ती के खेल में एक दांव में सवा लाख रुपए गंवा बैठा.

चूंकि उधार लिया पैसा दूसरे दिन ही चुकाना था, इसलिए सलीम ने मशीनें बेच दीं. अगर वह पैसे न चुकाता, तो जालिम फाइनैंसर उस का धंधा करना मुहाल कर देते. जल्द ही दुकान बंद हो गई और घर चलाने के लिए जिन लोगों से उधार लिया था, वे भी तकाजा करने लगे, तो सलीम इंदौर भाग गया.

उधर भोपाल में उस की बीवी ससुराल वालों के ताने सुनती. वह जैसेतैसे दोनों बच्चों की परवरिश कर रही थी. साथ ही, उसे इस बात का डर भी था कि कहीं सलीम उसे छोड़ कर इंदौर में ही किसी और लड़की से शादी न कर ले.

भोपाल के ही बिट्ठन मार्केट इलाके में सब्जी बेचने वाली 48 साला संतोषी रैकवार की कमाई भी तकरीबन 8 सौ रुपए रोजाना की थी, जो इज्जतदार तरीके से गुजारा करने के लिए काफी थी, लेकिन संतोषी ने भागवत कथा कराने की ठानी, तो 50 हजार रुपए की कर्जदार हो गई और अब दुकान बेच कर फुटपाथ पर सब्जी बेच रही है.

कहां तो उस ने सोचा था कि भगवान खुश हो कर उसे और बड़ी और पक्की दुकान दिला देगा, पर भगवान ने बजाय खुश होने के उसे उसी फुटपाथ पर ला खड़ा कर दिया, जहां से उस ने शौहर की मौत के बाद अपने नए सफर की शुरुआत की थी.

खर्च कम करें

 गरीब तबके का रोजाना कमानेखाने वाला हर दूसरा शख्स छोटेबड़े कर्ज में क्यों डूबा है? इस की वजह साफ है कि दिखावे की जिंदगी जीने के लिए ये लोग पैसा ब्याज पर लेते हैं, पर वापस नहीं लौटा पाते.

कोई महंगा फर्नीचर लेने के लिए कर्ज ले लेता है, तो कोई सोचता है कि 60 हजार रुपए की मोटरसाइकिल खरीद ली जाए, इस से बस का पैसा बचेगा, पर ब्याज का गुणाभाग कोई नहीं लगा पाता. नतीजा घाटा, तनाव, घरेलू कलह, सूदखोरों का कहर.

वक्त रहते पैसों का इंतजाम न हो, तो छोटी बच्ची की हत्या कर बीवी के साथ फांसी पर झूलने का फैसला लेना पड़ता है, इसलिए बेहतर जिंदगी जीने का आसान तरीका है कि कर्ज लें ही न.

जुआ, शराब और कर्मकांड तो कर्ज में डुबाते ही हैं, पर बेवजह के कामों के लिए लिया गया कर्ज भी भारी पड़ता है. कारोबार बढ़ाने के लिए कर्ज लेना हर्ज की बात नहीं है, लेकिन यह देख लेना चाहिए कि वाकई चुकाने लायक कमाई होगी या बात मुंगेरीलाल की तरह हसीन सपने देखने जैसी होगी.

अभिव्यक्ति को कुचलने की सरकार की तैयारी

सरकार अब विचारों की स्वतंत्रता का गला घोंटने की पूरी तैयारी कर रही है और देश के एकलव्यों का अंगूठा काटने का इतिहास एक बार फिर दोहराया जाएगा, यह दिख रहा है. एक न्यूज चैनल पर इंटैलीजैंस ब्यूरो ने कार्यवाही तो कर ही ली, सरकार की सैकड़ों धर्मभक्त संस्थाएं अपनीअपनी जगह स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति को कुचलने की तैयारी में हैं.

केरल चलचित्र अकादमी के एक फैस्टिवल में केंद्र सरकार ने कश्मीर, दलित छात्र रोहित वेमूला और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पर बनी डौक्यूमैंट्रियों को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है.

सरकार की सोच है कि जो 2 हजार साल पुराने सिद्धांतों, संस्कारों, नियमों, कानूनों, रीतिरिवाजों को नहीं मानेगा उसे इसलामी देशों की तरह देश में रहने का हक नहीं होगा. देश में केवल कुछ को सोचनेविचारने का हक होगा जो निश्चित रूप से भगवाई होंगे.

युवाओं के लिए यह संदेश गलत है. एकलव्य खुद इस गुरु पूजा का शिकार था, क्योंकि उस ने द्रोणाचार्य की मूर्ति बना कर धनुर्विद्या का अभ्यास किया. आदिवासी एकलव्य खुदबखुद द्रोणाचार्य का मुकाबला कर सकता था पर पौराणिक काल्पनिक काल में भी वह मानसिक गुलाम था और आज की सरकार युवाओं को फिर मानसिक गुलामी की ओर धकेल रही है. अगर प्रियंका चोपड़ा ने नरेंद्र मोदी के सामने बैठ अपने घुटने दिखा दिए या दीपिका पादुकोण ने अपनी सुंदर काया का प्रदर्शन कर दिया तो भगवा हल्ला शुरू ही नहीं हो जाता, अदालतों का नाजायज उपयोग कर पुलिसिया कार्यवाही शुरू कर देते हैं.

आज भारत का युवा फिर 18वीं नहीं, 8वीं सदी में लौटने को मजबूर है और जैसे 8वीं सदी में भारत के दरवाजे विदेशियों के लिए खुले पड़े थे, आज भी ऐसा ही होगा. चीन तो अपने युवाओं की मेहनत के बल पर विश्व नेता बनने की जीतोड़ कोशिश कर रहा है और हमें योग, आयुर्वेद, गाय से फुरसत नहीं. ठीक है हमारे कुछ लोग मेहनत कर के रौकेट भी छोड़ रहे हैं और कुछ उद्योगपति दुनिया भर में नाम कमा रहे हैं, पर यह तो ईरान, उत्तरी कोरिया और पाकिस्तान भी कर लेता है.

किसी देश की उन्नति तब होती है जब पूरा देश आगे बढ़े, कुछ लोग पहाडि़यों पर भव्य मकान बना कर यह नहीं कह सकते कि देश का विकास हो गया है, जबकि देश का अधिकांश हिस्सा रोजमर्रा की पानी की किल्लत या रोजगार की कमी से जूझ रहा हो. रोहित वेमूला या जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कन्हैया कुमार विकास के दूत नहीं हैं, पर दिमाग के दरवाजों को खटखटाने वाले जरूर हैं और देश का सभ्य, शिक्षित व अब सत्ताधारी समाज उसी खटखटाहट से बेहद परेशान है. यह परेशानी अगर बंदूकों से दूर की जाएगी तो भारत का लोकतंत्र भी मखौल बन कर रह जाएगा.

17 साल की शादी तोड़कर भाभी के साथ रह रहे हैं ये एक्टर

कुछ वक्त पहले ही पति विवियन डिसेना से अलग हुई टीवी एक्ट्रेस वाहबिज दोराबजी, इन दिनों अपने ऑनस्क्रीन देवर यानि की पंकित ठक्कर को डेट कर रही हैं. खबरों के मुताबिक टीवी शो ‘बहू हमारी रजनीकांत’ 2016, में देवर-भाभी का निभाने वाले पंकित और वाहबिज पिछले कुछ महीनों से एक-दूसरे के साथ है.

साल 2013 में विवियन दसेना के साथ शादी करने वालीं वाहबिज पिछले कुछ महीनों से पति से अलग रह रही हैं. दूसरी तरफ पंकित और उनकी वाइफ प्राची के 17 साल पुराने रिश्ते में साल, लगभग 2 साल पहले, साल 2015 में ही दरार आ गई थी. दोनों तभी से ही एक-दूसरे से अलग रह रहे थे, लेकिन अब दोनों ने तलाक लेने का फैसला ले लिया है.

17 साल पुरानी शादी खत्म करेंगे पंकित

इस बात की पुष्टि खुद पंकित ने ही, एक इंटरव्यू में की. उन्होंने कहा कि ‘हां ये बात सच है कि हम दोनों एक-दूसरे से दो साल से अलग रह रहे थे. हम दोनों साथ क्यों नहीं हैं, मैं इसके डिटेल्स में नहीं जाना चाहता. बस मैं ये कह सकता हूं कि हम दोनों ने मिलकर अलग रहने का फैसला लिया है. लेकिन इस वक्त हमारा बेटा ही हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और हम उसे किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते’.

लेकिन इन खबरों के बीच वाहबिज ने अपने अफेयर से जुड़ी सारी खबरों को गलत बताते हुए कहा है कि वो और पकिंत सिर्फ बिजनेस पार्टनर और अच्छे दोस्त हैं. इसके अलावा हमारे बीच ऐसा कुछ नही है. लेकिन इनके सोशल मीडिया अकाउंट्स कुछ और ही कहते हैं जिसमें ये दोनों अक्सर एक-दूसरे के साथ फोटोज शेयर करते नजर आते हैं.

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इस अभिनेत्री ने कहा था ‘मुझे बच्चा पैदा करना है लेकिन शादी नहीं करनी’

एक लड़की. दिल्ली में पैदा हुई. हिमाचल के लॉरेंस बोर्डिंग स्कूल में पढ़ी. फिर दिल्ली वापस आई. डीयू के दौलत राम कॉलेज से संस्कृत में मास्टर्स किया. लेकिन उनकी मन तो हमेशा से लगता था सिर्फ फिल्मों में और हीरो-हीरोइनों को देख कर एक्टिंग करने में. पहुंच गई उस दुनिया में. फिल्मों और टीवी सीरियलों में खूब काम किया. सीरियल लिखे और डायरेक्ट भी किए. लेकिन उसको याद रखा जाता है, उसके सबसे साहसी कदम के लिए. जी हां, हम बात कर रहे हैं नीना गुप्ता की. वे उस समय काफी चर्चा में आईँ थीं जब विवियन रिचर्ड्स से उनके अफेयर की बात सामने आई थी और इसके बाद बिना शादी किए एक बच्ची को जन्म देने के लिए भी.

आपको अभिनेत्री डिम्पी गांगुली तो याद ही होंगी. आज साल 2017 चल रहा है और इस समय़ में भी लोग डिम्पी गांगुली से सवाल पूछते हैं कि क्या तुमने शादी से पहले सेक्स किया था? तो सोचिए साल 1988 में, जब कोई लड़की अपने घर पर कहती कि मैं एक बच्चे को पैदा करना चाहती हूं, लेकिन उसके पापा से शादी करने का मेरा कोई ईरादा नहीं है. बच्चे को मैं अकेले ही पालूंगी. सोचिए क्या बवाल हुआ होगा घर में. लेकिन नीना वाकई बहुत हिम्मती थीं. अपने मम्मी-पापा को मनाया और समझाया. फाइनली उनके पापा मम्मी मान गए. दोनों ने नीना को हर तरह से सपोर्ट किया.

कैसी रही होगी नीना की अब तक की जर्नी. क्या एक्सपीरियंस होंगे उनके? और फिलहाल वो कहां हैं? क्या वाकई है विवियन रिचर्ड्स, प्रीतीश नंदी और मसाबा का बर्थ सर्टिफिकेट?

नीना और वेस्ट इंडीज क्रिकेट टीम के स्टार बैट्समैन विवियन रिचर्ड्स का अफेयर बहुत कम समय का था. नीना ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके और विवियन के बीच कोई इमोशनल अटैचमेंट कभी नहीं था. जिस वक्त विवियन और नीना का अफेयर था, विवियन अपनी वाइफ से अलग रह रहे थे, तब तक उनका तलाक नहीं हुआ था. पहली पत्नी से विवियन के दो बच्चे थे.

जब नीना प्रेग्नेंट हुईं, मीडिया से उन्होंने दूरी बना ली. साल 1989 में नीना ने मसाबा को जन्म दिया. उसको पालने की जिम्मेदारी भी खुद ली. फिल्में, कैरियर, डायरेक्शन, लेखन सब चलता रहा. बहुत समय तक उन्होंने बच्चे के पापा का नाम मीडिया में नहीं आने दिया. विवियन रिचर्ड्स बहुत बड़े खिलाड़ी थे. शायद नीना नहीं चाहती थीं कि विव के कैरियर पर कोई असर पड़े.

पर कुछ समय बाद मीडिया को ये बात मालूम हो गई कि मसाबा नीना गुप्ता और विवियन रिचर्ड्स की बेटी हैं. नीना और मसाबा एकदम से स्टार बन गईं. विवियन ने भी मान लिया कि मसाबा उनकी बेटी है.

एक इंटरव्यू में नीना ने कहा था. बच्चे को अकेले पालना बहुत मुश्किल होता है. उन्होंने कभी मसाबा को ये नहीं लगने दिया. कि अगर उसके पापा साथ नहीं रहते तो ये कोई अजीब बात है. इसलिए मसाबा के लिए भी ये एक रेगुलर सी बात थी. पापा कभी-कभी आते थे. गिफ्ट्स लाते थे. और घुमाने ले जाते थे. मसाबा मुंबई के फेमस नारसी मोंजी स्कूल में पढ़ी. वहां पर ज्यादातर स्टार्स के बच्चे ही आते हैं. उनमे से बहुतों के पापा-मम्मी अगल रहते थे. या उनका डिवोर्स हो चुका था. इसलिए दोस्तों के बीच भी कभी मसाबा को कुछ अजीब नहीं लगा.

नीना को कहना है कि उनकी जिन्दगी का सबसे रोमांटिक पल कौन था, जब मसाबा का जन्म हुआ था. उसी दिन मुझे प्यार का असली मतलब समझ आया था. हम आपको बता देना चाहते हैं कि मसाबा गुप्ता एक बहुत ही फेमस फैशन डिजीइनर हैं. मुंबई, दिल्ली और कोलकाता में उनके ब्रांड के आउटलेट हैं.

नीना ने साल 2008 में अमेरिका के एक बिजनेसमैन विवेक मेहरा से शादी कर ली. अब वो भी अमेरिका में ही रहती हैं और समय समय पर इंडिया आती-जाती रहती हैं.

जब सबके सामने सना खान ने दिखा दिया सब कुछ, देखें वीडियो

बॉलीवुड के स्टार्स पर मीडिया की पैनी नज़र होती है. लोग अपने पसंदीदा अभिनेता-अभिनेत्रियों के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं. इसका फायदा बॉलीवुड सेलेब्रिटीज को ये मिलता है, कि वह लगातार लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं, कि उनकी छोटी से छोटी गलती मीडिया की खबर बन जाती है. अक्सर मीडिया में अभिनेत्रियों के वार्डरोब मालफंक्सन के शिकार होने की खबरें सामने आती रहती हैं.

इसका शिकार एक्ट्रेस नहीं होती बल्कि इंडस्ट्री से जुड़ी अन्य महिलाओं पर भी मीडिया के कैमरों की पैनी नजर रहती है. हाल ही में एकता कपूर के उप्स मूवमेंट का शिकार होने की खबरें सामने आयी थीं.

बॉलीवुड की अभिनेत्री सना खान भी उप्स मूवमेंट का शिकार हो चुकी हैं. सना खान बॉलीवुड और साउथ फिल्मों में नज़र आ चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने कई विज्ञापनों में भी काम किया है. वह एक एक्ट्रेस, मॉडल और डांसर हैं. सना खान सलमान खान की फिल्म ‘जय हो’ में भी नजर आयीं थीं. पिछले साल दिसंबर में आयी फिल्म ‘वजह तुम हो’ में सना खान ने गुरमीत चौधरी के साथ कई बोल्ड सीन दिए थे.

जब सना खान उप्स मूवमेंट का शिकार हुईं तब उन्होंने गुलाबी रंग की एक साड़ी पहन रखी थी जिसमें वह काफी खूबसूरत नज़र आ रही थीं. उन्होंने इस मौके पर पोज देते हुए कई फोटोज भी खिचवायीं.

इस दौरान सना के साथ कुछ ऐसा हो गया जो शायद नहीं होना चाहिए था. इस वीडियो को देखकर आप खुद ही समझ जायेंगे कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं.

ये पहली बार नहीं है जब सना खान उप्स मूवमेंट का शिकार हुईं हैं. उनके साथ पहले भी ऐसा हो चुका है. सिर्फ ऑफ स्क्रीन ही नहीं बल्कि ऑन स्क्रीन भी सना ऐसी घटनाओं का शिकार हो चुकी हैं. इस पर कई लोग यह भी कहते हैं कि मीडिया अभिनत्रियों के पहनावे में हुई गलतियों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करता है.

देखें वीडियो

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