Satyakatha: कल्पना की अधूरी उड़ान

 सौजन्य- सत्यकथा

 ऐसा क्या हुआ कि कल्पना की शादी की उड़ान अधूरी ही बन कर रह गई…

उत्तर प्रदेश के जिला मैनपुरी के थाना एलाऊ क्षेत्र में एक गांव है नगला लालमन. उसी गांव के 2 भाई यशपाल और शेषपाल सुबह 10 बजे किसी काम से जा रहे थे. गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित जल्लापुर निवासी दिनेश यादव के खेत के पास से गुजर रहे थे. तभी उन की नजर खेत में झाड़ी की ओर गई तो वहां का दृश्य देख कर दोनों भाइयों के पैर थम गए.

झाड़ी के पीछे 21-22 साल की युवती की लाश पड़ी थी. पास जा कर देखा तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. वह लाश गांव के ही फेरू सिंह की 22 वर्षीय बेटी कल्पना की थी. उस के चारों ओर खून फैला हुआ था. किसी ने गोली मार कर उस की हत्या कर दी थी.

उसी समय दोनों भाइयों ने कल्पना के भाई अवधपाल सिंह को इस बात की जानकारी फोन से दे दी. यह बात अवधपाल ने अपने घर बताने के साथ ही पड़ोसियों को भी बताई.  खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया. घरवालों के साथ ही लालमन गांव के लोग खेत की ओर दौड़े.

गांव की युवती को दिनदहाड़े खेतों पर गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया गया था. इस से गांव में सनसनी फैल गई. कुछ ही देर में वहां भीड़ जुट गई.

यह 17 मार्च, 2021 की सुबह की बात है. भाई अवधपाल व ग्रामीणों ने पास जा कर देखा तो कल्पना की कनपटी पर गोली मारी गई थी. इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी थी.

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सूचना मिलते ही थाना एलाऊ के थानाप्रभारी सुरेशचंद्र शर्मा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. युवती की हत्या की खबर आसपास के गांवों में भी फैल चुकी थी, जिस से वहां देखने वालों की भीड़ जमा हो गई.

लाश देख कर लोग आक्रोशित थे और हंगामा कर रहे थे. थानाप्रभारी ने बिना देर किए अपने उच्चधिकारियों को भी घटना से अवगत करा दिया.

सूचना मिलने पर एसपी अविनाश पांडेय, एएसपी मधुबन सिंह, सीओ (सिटी) अभय नारायण राव के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. एसपी के आदेश पर फोरैंसिक टीम, डौग स्क्वायड की टीम भी वहां पहुंच गई.

उच्चाधिकारियों ने युवती के शव का निरीक्षण किया. शव की दशा इस बात की ओर इशारा कर रही थी कि गोली मारने से पहले उस के साथ मारपीट भी की गई थी.

क्योंकि उस के दाएं हाथ पर चोट के निशान थे, जिन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वह टूटा हुआ है. गोली बाएं कान के नीचे सटा कर मारी गई थी. इस से लग रहा था कि हत्यारे जानपहचान वाले ही होंगे. चेहरे के चारों ओर खून फैला हुआ था.

पुलिस ने मृतका के घरवालों से बात की. उन्होंने बताया कि कल्पना आज तड़के साढ़े 5 बजे अपने घर से दिशामैदान के लिए निकली थी. लेकिन जब वह 2 घंटे तक वापस नहीं आई तो घर वाले उस की तलाश में जुट गए.

जब उस की तलाश की जा रही थी, तभी उन्हें उस की हत्या की खबर मिली. घर वालों ने बताया कि कल्पना अपने पास मोबाइल रखती थी, लेकिन वह अपना मोबाइल घर पर ही छोड़ गई थी.

पुलिस अधिकारियों ने जब उन से पूछा कि उन की किसी से दुश्मनी या रंजिश तो नहीं है तो कल्पना के भाई अवधपाल सिंह ने बताया कि गांव में उन की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है. फिर सवाल यह था कि हत्या किस ने और क्यों की है?

फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से जरूरी सबूत जुटाए. मृतका के कपड़ों से कुछ भी नहीं मिला. हां, उस का दुपट्टा वहीं खेत की मेड़ पर तह बना कर हुआ रखा मिला.

पुलिस का खोजी कुत्ता भी घटनास्थल से कुछ दूरी तक खेतों में गया. इस पर पुलिस ने खेतों की तलाशी की. लेकिन ऐसा कोई सुराग नहीं मिल सका, जिस से हत्यारे का सुराग मिलता. पानी का डिब्बा गायब था.

कई घंटे तक जांच करने के बाद जब पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को उठाना चाहा तो ग्रामीणों ने विरोध किया. उन्होंने कहा कि गुत्थी सुलझने के बाद ही कल्पना का शव उठने दिया जाएगा.

एसपी अविनाश पांडेय ने आक्रोशित ग्रामीणों को समझाया कि मृतका के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाल कर हत्यारों का पता लगाया जाएगा. उन्होंने आक्रोशित लोगों को आश्वासन दिया कि पुलिस शीघ्र ही हत्यारों को गिरफ्तार कर लेगी. उन के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हो गए. तब पुलिस ने काररवाई कर शव को मोर्चरी भेज दिया.

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मृतका के भाई अवधपाल ने इस संबंध में गांव के ही 2 सगे भाइयों दिनेश और विक्रम के खिलाफ कल्पना की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई. आरोपित दिनेश शिक्षक है और कुरावली क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत है. वहीं उस का भाई विक्रम गांव में रोजगार सेवक है.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुट गई. पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी के लिए उन के घर पर दबिश दी, लेकिन वे घर पर नहीं मिले.

मृतका के घर वालों से पुलिस ने पूछताछ की. लेकिन परिवार के लोग कल्पना की हत्या का कारण नहीं बता सके. जबकि भाई अवधपाल ने गांव के ही 2 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी. अवधपाल ने बताया कि दोनों आरोपित घटना के समय से फरार हैं, इसलिए उन पर शक है.

घर वालों की ओर से बताए गए घटनाक्रम पर पुलिस पूरे तौर पर विश्वास नहीं कर रही थी. युवती की हत्या के मामले में पुलिस की नजर में परिवार के लोग भी शक के दायरे में थे. पुलिस किसी भी तथ्य को नजरंदाज नहीं कर रही थी.

जांच शुरू हुई तो नामजद आरोपियों के खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं मिला. इस के चलते अन्य पहलुओं पर पुलिस ने जांच शुरू की. घटना का राजफाश करने के लिए सीओ (सिटी) अभय नारायण राय के नेतृत्व में स्वाट और सर्विलांस सहित 4 टीमों को लगाया गया.

शाम तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई. इस में गोली से मौत होने के साथ ही मृतका की बांह पर चोट के निशान थे लेकिन बांह की हड्डी नहीं टूटी थी. इस बात से यह स्पष्ट हो गया कि युवती का हत्यारे के साथ संघर्ष हुआ था. इसी के चलते उस की बांह में चोट लगी थी.

पुलिस ने ग्रामीणों से भी इस संबंध में पूछताछ की. पुलिस की जानकारी में आया कि मृतका के गांव के ही एक युवक से प्रेम संबंध थे. पुलिस ने इस बीच कल्पना का मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया. काल डिटेल्स की जांच की गई. मोबाइल में एक नंबर ऐसा था, जिस पर सब से ज्यादा बातें होती थीं.

पुलिस ने जब इस संबंध में जानकारी की तो पता चला कि यह नंबर गांव के ही अजब सिंह का है. अजब सिंह की तलाश हुई तो वह गायब था. इस से पुलिस के शक की सुई उस की तरफ घूम गई.

जांच के दौरान पता चला कि अजब सिंह अपनी ससुराल फर्रुखाबाद में है. सर्विलांस के जरिए पुलिस को उस के बारे में अहम सुराग मिलने शुरू हो गए.

दूसरे दिन गुरुवार की रात इंसपेक्टर एलाऊ सुरेशचंद्र शर्मा पूछताछ के लिए उसे ससुराल से थाने ले आए.  पुलिस ने जब उस से पूछताछ शुरू की उस ने युवती के घर वालों पर ही हत्या करने का आरोप लगाते हुए बताया कि जब उस के बुलावे पर कल्पना खेत पर आ गई तो हम लोग झाड़ी की आड़ में बातचीत करने लगे. इसी बीच कल्पना के घर वाले आ गए.

हम लोगों को बातचीत करते देख उन लोगों ने कल्पना के साथ मारपीट शुरू कर दी. जब मैं ने उन्हें रोका तो मेरे साथ भी मारपीट की. कल्पना को गोली मारने के बाद उस के परिवार वाले उसे भी गाड़ी में डाल कर ले गए थे.

एक स्थान पर उसे मुंह बंद करने की हिदायत दे कर वे लोग गाड़ी से उतार कर चले गए थे. राहगीरों ने उसे अस्पताल में भरती कराया. इस के बाद वह अपनी ससुराल चला गया.

इतनी बड़ी घटना के बाद भी पुलिस को घटना की सूचना क्यों नहीं दी? पुलिस के सवालों में वह उलझ गया. पुलिस की सख्ती करने पर फिर उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

अजब सिंह ने बताया कि उसी ने नाराज हो कर अपनी प्रेमिका कल्पना की गोली मार कर हत्या की थी. उस की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त बाइक और तमंचा तथा अजब सिंह का मोबाइल भी बरामद कर लिया.

19 मार्च को प्रैस कौन्फ्रैंस में एसपी अविनाश पांडेय ने इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया. शादीशुदा और 2 बच्चों के पिता आरोपी अजब सिंह और मृतका के बीच प्रेम संबंध थे.

कल्पना की शादी तय होने की जानकारी मिलने के बाद अजब सिंह बौखला गया था. उस ने कल्पना के सामने हमेशा साथ रहने की फरमाइश रख दी. जब इस बात पर वह राजी नहीं हुई तो उस ने उस की गोली मार कर हत्या कर दी.

इस घटना को औनर किलिंग का मामला बनाने के लिए उस ने ड्रामा रचा, लेकिन पुलिस ने सर्विलांस के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया. इस संबंध में जो खौफनाक कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

कल्पना का पिता फेरू सिंह दिल्ली में काम करता है. अवधपाल की गांव में खुद की जमीन कम होने के कारण वह उगाही पर गांव के लोगों की जमीन ले कर खेती करता था. गांव के ही अजब सिंह की छोटी उम्र में ही शादी हो गई थी. वह 2 बच्चों का पिता है.  खेतीकिसानी के कारण उस के कल्पना के घर वालों के साथ अच्छे संबंध थे. उस का कल्पना के घर भी आनाजाना था.

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एक दिन अजब सिंह की नजर उस पर पड़ी. कल्पना सुंदर थी. वह उस की सुंदरता देख ठगा सा रह गया. उस ने उसी क्षण उस से दोस्ती करने का निर्णय ले लिया.

अजब सिंह टकटकी लगाए उसे निहारता रहा. कल्पना को भी इस बात का अहसास हो गया कि अजब सिंह उसे देख रहा है. अजब सिंह कसी हुई कदकाठी का युवक था. जवानी की दलहीज पर पहुंची कल्पना का दिल भी उस पर रीझ गया. उसे देख कल्पना का दिल तेजी से धड़कने लगा था.

अब जब भी अजब सिंह कल्पना के घर आता, वह पीने के लिए पानी मांगता. जब कल्पना उसे पानी का गिलास देती वह उस का धीरे से हाथ दबा देता. कल्पना उस के मन की बात जान कर मुसकरा देती. धीरेधीरे दोनों की दोस्ती हुई फिर प्यार हो गया.

दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर दे दिए थे, जिस से फोन पर भी उन की बातें होने लगीं. इस के बाद उन का प्यार और गहराता गया. उन के प्रेम संबंधों की किसी को भनक तक नहीं लगी.

अजब सिंह के शादीशुदा होने से कल्पना के परिजनों को उस पर शक नहीं हुआ. इसी आड़ में वह लगातार कल्पना से मिलताजुलता रहा और उस पर काफी पैसा खर्च करने लगा.

कल्पना अब जवान हो गई थी. घर वालों को उस की शादी की चिंता होने लगी. घर वालों ने भागदौड़ कर कल्पना की शादी तय कर दी थी. इस की जानकारी अजब सिंह को हो गई थी.

17 मार्च की सुबह साढ़े 5 बजे अजब सिंह ने मैसेज कर कल्पना को मिलने खेत पर बुलाया. वह भी अपने खेतों की सिंचाई के बहाने बाइक से वहां पहुंच गया था.

कुछ ही देर में कल्पना भी आ गई. अजब सिंह ने उस से कहा, ‘‘कल्पना, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं. लेकिन अब मैं देख रहा हूं कि जब भी फोन करता हूं तुम्हारा फोन बिजी मिलता है. तुम शायद अपने मंगेतर से ज्यादा बातें करती हो. कल्पना, तुम अपने मंगेतर से बात करना बंद कर दो.’’

अजब सिंह और कल्पना के बीच पिछले 4 साल से दोस्ती थी. दोनों के बीच गहरे प्रेम संबंध थे. अजब सिंह अपनी 2 बीघा जमीन भी प्यार की भेंट चढ़ा चुका था. वह कल्पना पर बहुत पैसा खर्च करता था. उस ने 4 सालों में कई मोबाइल फोन भी ला कर उसे दिए थे.

सब कुछ ठीक चल रहा था. कल्पना के घर वालों ने कल्पना की शादी तय कर दी थी. यह बात प्रेमी अजब सिंह को नागवार गुजरी. उस ने कल्पना से कहा, ‘‘कल्पना, मैं तुम्हें पहले की तरह प्यार करता रहूंगा. तुम्हारी शादी जरूर हो रही है लेकिन तुम शादी के बाद भी मुझ से संबंध खत्म मत करना.’’

‘‘देखो, मेरे और तुम्हारे बीच अब तक जो कुछ था, वह अब सब खत्म हो गया है. अब तुम मुझे फोन और मुझ से मिलने की कोशिश भी मत करना. क्योंकि मेरी शादी होने वाली है. और हां, मैं अपने मंगेतर से बात करनी बंद नहीं करूंगी.’’ कल्पना ने जवाब दिया.

अपनी प्रेमिका की इस बेरुखी से अजब सिंह बौखला गया. उसे डर था कि शादी के बाद उस की मोहब्बत उस से छिन जाएगी. इसी बात को ले कर दोनों के बीच बहस होने लगी. गुस्से में उस ने कल्पना की बांह मोड़ दी, जिस से वह दर्द से कराह उठी और खेत में गिर गई.

इसी बीच अजब सिंह ने तमंचा निकाल कर उस की कनपटी पर रख कर गोली चला दी. कुछ देर तड़पने के बाद कल्पना ने दम तोड़ दिया. इस के बाद अजब सिंह बाइक से वहां से चला गया.

आरोपी अजब सिंह गजब का ड्रामेबाज निकला. उस ने कल्पना के घर वालों को औनर किलिंग में फंसाने के लिए पूरा घटनाक्रम तैयार किया था. उस ने हत्या करने के बाद कुछ दूरी पर अपना मोबाइल तो कुछ दूर जा कर तमंचा फेंक दिया. इस के बाद सीने पर अपने नाखूनों से खरोंच करने के

बाद सिर पत्थर पर मार कर खुद को घायल किया.

फिर उस ने कानपुर नगर के बिल्हौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रास्ते में जा रहे राहगीरों की मदद से अपने ऊपर गांव के कुछ युवकों द्वारा मारुति वैन में डाल कर पीटने और यहां फेंकने की बात कह कर स्वास्थ्य केंद्र में भरती हो गया. वहां से खुद को कन्नौज के एक अस्पताल में रेफर कराया, जहां से अपनी ससुराल फर्रुखाबाद आ गया.

अपने ऊपर हमले की झूठी अफवाह फैलाई. पुलिस को उस की यह कहानी समझ नहीं आई थी. कल्पना के घर वालों को फंसाने में वह कामयाब होता,

इस से पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने अजब सिंह को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. इस प्रकार 2 निर्दोष भाई जेल जाने से बच गए. कल्पना ने एक बालबच्चेदार व्यक्ति से मोहब्बत कर जो भूल की थी, उस का खामियाजा उसे अपनी जान दे कर चुकाना पड़ा.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

पीएम ने दिया महिला सशक्तिकरण पैकेज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रयागराज में महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की. महिलाओं को सहायता प्रदान करने के क्रम में प्रधानमंत्री ने ₹1,000 करोड़ की धनराशि स्वयं सहायता समूहों के खातों में अंतरित किया, जिससे स्वयं सहायता समूहों की लगभग 16 लाख महिला सदस्यों को फायदा होगा. यह अंतरण दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत किया गया, जिसके अनुसार प्रति समूह ₹1.10 लाख के हिसाब से 80 हजार समूहों को समुदाय निवेश निधि (सीआईएफ) तथा ₹15 हजार प्रति स्वयं सहायता समूह के हिसाब से 60 हजार समूहों को परिचालन निधि प्राप्त हो रही है.

प्रधानमंत्री द्वारा 20 हजार बीसी सखियों (बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेन्ट सखी) के खातों में पहले महीने का ₹4,000 मानदेय हस्तांतरित किया गया.

बीसी-सखियां जब घर-घर जाकर जमीनी स्तर पर वित्तीय सेवायें उपलब्ध कराती हैं, तो उन्हें छह महीने के लिये ₹4,000 मानदेय दिया जाता है, ताकि वे स्थायी रूप से काम कर सकें और उसके बाद लेन-देन से मिलने वाले कमीशन से उन्हें आय होने लगे.

प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगल योजना के तहत एक लाख से अधिक लाभार्थियों को ₹20 करोड़ से अधिक की धनराशि भी हस्तांतरित किया. इस योजना से कन्याओं को उनके जीवन के विभिन्न चरणों में शर्तों के साथ नकद हस्तांतरण मिलता है. प्रति लाभार्थी हस्तांतरित की जाने वाली कुल रकम 15 हजार रुपये है. विभिन्न चरणों में: जन्म (₹2,000), एक वर्ष होने पर सारे टीके लग जाना (1,000), कक्षा-प्रथम में दाखिला लेना (₹2,000), कक्षा-छह में दाखिला लेना (₹2,000), कक्षा-नौ में दाखिला लेना (₹3,000) कक्षा-दस या बारह उत्तीर्ण होने के बाद किसी डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रम में दाखिला लेना (₹5,000) शामिल हैं.

प्रधानमंत्री ने 202 पूरक पोषण निर्माण इकाइयों की आधारशिला भी रखी. इन इकाइयों का वित्तपोषण स्वसहायता समूह कर रहे हैं तथा इनके निर्माण में प्रति इकाई के हिसाब से लगभग एक करोड़ रुपये का खर्च बैठेगा. यह इकाइयां राज्य के 600 प्रखंडों में एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत पूरक पोषण की आपूर्ति करेंगी.

24 दिसंबर को आएगी मजदूर पिता के सपने और हकीकत को दिखाने वाली भोजपुरी फिल्म ‘बाबुल’

भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता अवधेश मिश्रा अब बतौर लेखक, सह निर्माता,अभिनेता व निर्देशक फिल्म ‘‘बाबुल’’  बनायी है, जो कि 24 दिसंबर को सिनेमाघरों में पहुंचेगी. इस फिल्म का निर्माता ‘‘वर्ल्ड वाइड फिल्मस’ के बैनर तले रत्नाकर कुमार कर रहे हैं.

फिल्म ‘‘बाबुल’’ में मजदूर और लाचार पिता के सपनों और हकीकत के बीच की कहानी बयां करती है- इसमें अवधेश मिश्रा का किरदार ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूर का है, जिसकी दो बेटियां हैं और वह उसके लिए  बड़े-बड़े सपने संजोता है- लेकिन हकीकत कुछ और ही है- जहां उन्हें सामाजिक उलझनों और जमींदारी की स्याह सच उनके सपनों को झकझोर देता है-आखिर यह सब क्यों है?

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पटना, बिहार में थिएटर पर अभिनय करते हुए  अवधेश मिश्रा ने 2005 में मैथिली भाषा की फिल्म ‘‘ काखन हरब दुख हमार’  से फिल्मों में कदम रखा था-उसके बाद तमिल व हिंदी फिल्मों में भी अभिनय किया. मगर अवधेश मिश्रा को पहचान मिली भोजपुरी फिल्मों में निगेटिव किरदार निभाने से भोजपुरी भाषा में अवधेश मिश्रा अब तक ‘देवरा बड़ा सतावेला’, ‘देवरा भईल दीवाना’, ‘दुलारा’, सुनो ससुर जी’, आवारा बलम’,‘डम, ‘बार्डर’, नाÛदेव’, ‘राजतिलक’ , ‘विवाह’, ‘पत्थर के सनम’  और ‘संघर्ष ’ सहित सौ से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं.

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फिल्म के ट्रेलर से यह बात सामने आती है कि यह फिल्म मानवीय संवेदनाओं को उभारने वाली है और यह दर्शकों के लिए संदेश छोड़ने वाली फिल्म भी होगी. फिल्म ‘‘बाबुल’’ के निर्माता रत्नाकर कुमार, निर्देशक अवधेश मिश्रा, संगीतकार साबिर सुल्तान खान, हितेश सोनिक और साजन मिश्रा, गीतकार आशुतोष तिवारी, बोद्धव्य , ए एम तुराज, कैमरामैन जग्गी पाजी,  नृत्य निर्देशक कानू मुखर्जी हैं. फिल्म ‘‘बाबुल’’  में अवधेश मिश्रा, नीलम गिरी, शशि रंजन,  अनिता रावत,  देव सिंह,  संतोष पहलवान, रोहित सिंह मटरू ,  हीरा यादव,  अम्बिका वाणी,  बबलू खान, कमलकांत मिश्रा, कमलेश मिश्रा और प्रीति सिंह मुख्य भूमिका में हैं.

अनुपमा के कारण अनुज-मालविका में हुई कहा-सुनी, आएगा ये ट्विस्ट

रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly), सुधांशु पांडे (Sudhanshu Pandey) स्टारर सीरियल अनुपमा’ (Anupama) में लगातार ट्विस्ट एंड टर्न देखने को मिल रहा है. शो में अनुज की बहन मालविका के आने से अनुपमा के साथ-साथ शाह परिवार की जिंदगी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में दिखाया जा रहा है कि किंजल वनराज को समझाती है कि उसे काव्या को एक और चांस देना चाहिए. तो दूसरी तरफ काव्या अपनी उम्र और फिटनेस को लेकर टेंशन में आ जाती है. उसे लगता है कि उसकी उम्र और लुक्स के कारण वनराज उससे दूर होता जा रहा है.

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शो में आप देखेंगे कि बा काव्या से बात करेंगी और उसे प्यार का मतलब भी समझाएंगी. तो वहीं पाखी तभी वनराज के नए लुक की तारीफ करेगी.

इसके बाद वनराज काव्या से कहेगा कि अब कैफे उसका हुआ वह अब पूरे बिजनेस की मालिक है. लेकिन काव्या कहेगी कि उसने MBA कॉफी सर्व करने के लिए नहीं किया. लेकिन पारितोष कहेगा कि वह कैफे की जिम्मेदारी लेगा.

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तो दूसरी तरफ मालविका, अनुज के लिए पेन केक बनाएगी. इन्हें चखते ही अनुज को अनुपमा के हाथ के बनाए चॉकलेट पेन केक याद आए जाएंगे. यह बात सुनते ही मालविका का पारा चढ़ जाएगा. वह पूरे घर का सामान फेंकेगी और घर छोड़कर भाग जाएगी.

 

अनुज-अनुपमा लगातार मालविका को ढूढने की कोशिश करेंगे. अनुपमा, अनुज के लिए हौसला देगी कि उसकी बहन कहीं नहीं जाएगी. इसी बीच मालविका शाह हाउस पहुंच जाएगी. और बा से पूछेगी कि क्या वह शाह हाउस में रह सकती है. उसके घर में रुकने की बात सुनकर सब हैरान हो जाएंगे तो दूसरे तरफ काव्या को बड़ा झटका लगेगा.

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“वायरस अटैक” जैसे एप से सावधान!

ऐसा ही एक वायरस अटैक ऐप कुछ दिनों से स्मार्ट मोबाइल पर बार-बार आकर के आपके सामने प्रस्तुत हो जाता, लोगों को ऐसा महसूस होता कि हमारे बेशकीमती मोबाइल में कोई वायरस अटैक होने वाला है जिसे गूगल ने पकड़ कर हमें यह वायरस अटैक ऐप भेजा है ताकि हम अपने मोबाइल को सेफ कर ले.

ऐसा बारंबार होता है हमारे संवाददाता ने कुछ लोगों से बातचीत करने के पश्चात यह रिपोर्ट तैयार की है जो यह बताती है कि स्मार्ट मोबाइल में कुछ ऐसे ऐप अचानक ही ट्रेंड करने लगते हैं जो सीधे-सीधे आप को भारी क्षति पहुंचा सकते हैं.

सवाल लाख टके का यह भी है कि गूगल जैसी शक्तिशाली आखिर ऐसे ऐप को पहचानऔर उन्हें खत्म करने में इतना समय क्यों लगा देती हैं, जब तक वह लाखों लोगों को नुकसान पहुंचा चुके होते हैं.

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ऐसा ही एक ऐप लाल कलर में हो सकता है आपके मोबाइल पर भी पिछले कुछ दिनों से बार-बार आता होगा आप जब भी मोबाइल पर आए नहीं की वायरल अटैक का भय दिखा करके आपको यह संकेत देता रहा होगा कि आप तुरंत ही इस ऐप को अपलोड करके अपने मोबाइल को बचा लें.

एक शख्स एचडी महंत के मुताबिक जब बार-बार मेरे स्मार्टफोन पर एक ऐप आने लगा तो मुझे यह महसूस हुआ कि हो सकता है मेरे मोबाइल में कहीं वायरस  प्रवेश कर चुका है और मुझे यह संकेत आ रहा है सो मैंने उस ऐप को जैसे टच किया तो खुलने लगा लेकिन मैंने जैसे ही उसे बंद करने का प्रयास किया तो वह ना तो बंद हो रहा था और नहीं डिलीट.

अंततः मैंने अपने फोन को ही बंद किया तब जाकर के उस ऐप से मेरी रक्षा सुरक्षा हो पाई.

दरअसल, अगरचे आप एंड्रॉइड स्मार्टफोन यूजर हैं तो आपको हर हमेशा सावधान रहने की दरकार है.हाल में “गूगल प्ले स्टोर” पर एक ऐसा ऐप मिला है, जो खतरनाक मैलवेयर से ग्रसित था. खास बात यह है कि इस ऐप को Google Play Store पर 5 लाख से ज्यादा डाउनलोड्स मिल चुके थे रिपोर्ट के मुताबिक, ऐप में जोकर मैलवेयर  पाया गया है. आखिरकार गूगल ने चेतावनी जारी की कि सभी यूजर्स यह ऐप तुरंत डिलीट कर दें नहीं तो आपका बड़ा नुकसान हो सकता है. तब तक जाने कितनी देर हो चुकी थी और कितने ही लोग इस खतरनाक एक के शिकार हो चुके होंगे.

यह जानना भी आवश्यक है!

इसी तरह  लाखों की  संख्या में यूजर्स के लिए खतरा पैदा करने वाले एक ऐप का नाम कलर मैसेज  है.

दरअसल, यह ऐप SMS टेक्सिंग को इमोजी के जरिए ज्यादा मजेदार बनाने का दावा करता था. गूगल प्ले स्टोर पर यह ऐप पहली नजर में  बिल्कुल सेफ लगता है. लेकिन मोबाइल सिक्योरिटी सॉल्यूशंस फर्म Pradeo की टीम ने जांच में पाया कि “कलर मैसेज”  में जोकर मैलवेयर से संक्रमित है और  स्मार्टफोन यूजर्स के लिए खतरनाक है.

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सिक्यॉरिटी फर्म ने इस जोकर मैलवेयर को फ्लीसवियर (Fleecewear) की कैटेगरी में डाल दिया है. इस ऐप का मुख्य शातिर काम यूजर्स की परमिशन के बिना ही उन्हें प्रीमियम सर्विस के लिए सब्सक्राइब करना है.  यह मैलवेयर डिटेक्शन लगभग एक साल पुराना है लाखों लोगों के लिए घातक साबित हुआ है अब 16 दिसंबर के बाद इसे गूगल प्ले स्टोर में प्रतिबंधित कर दिया गया है.

मगर सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आपको यह समझना होगा अपनी छठी इंद्री हमेशा जागृत रखनी होगी की कौन सा ऐप आपके लिए काम का है और कौन सा आपके लिए घातक.

चुगली की आदत बच्चों में न पनपने दें

Writer- किरण सिंह

यहां की बात वहां करना, किसी के पीठपीछे उस की बुराई करना, किसी को भलाबुरा कहना आदि चुगली करना है. बच्चों में अकसर चुगली की आदत एक बार पड़ जाती है तो फिर यह उम्रभर रहती है.

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, चुगली करना अपने दिल की भड़ास निकालने का एक माध्यम है  या यों कहें कि हीनभावना से ग्रस्त व्यक्ति चुगली कर के खुद को तुष्ट करने का प्रयास करता है. इसीलिए वह खुद में कमियां ढूंढ़ने के बजाय दूसरों की मीनमेख निकालने में अपनी ऊर्जा खपाता रहता है.

चुगलखोर व्यक्तियों की दोस्ती टिकाऊ नहीं होती

वैसे हम चुगलखोरों को लाख बुराभला कह लें लेकिन सच यह है कि निंदा रस में आनंद बहुत आता है. शायद यही वजह है कि अपेक्षाकृत चुगलखोरों के संबंध अधिक बनते हैं या यों कहें कि चुगलखोरों की दोस्ती जल्दी हो जाती है. लेकिन यह भी सही है कि उन की दोस्ती टिकाऊ नहीं होती क्योंकि वास्तविकता का पता लगने पर लोग चुगलखोरों से किनारा करने लगते हैं.

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बच्चों में चुगलखोरी

अकसर देखा गया है कि बच्चे जब  गलती करते हुए अभिभावकों द्वारा पकड़े जाते हैं और पैरेंट्स पूछते हैं कि कहां से सीखा, तो वे अपने को तत्काल बचाने के लिए अपने दोस्तों या फिर भाईबहनों का नाम ले लेते हैं जिस से पैरेंट्स का ध्यान उन पर से हट कर दूसरों पर चला जाता है. यहीं से चुगलखोरी की आदत लगने लगती है.

एक बार सोनू की मम्मी ने सोनू को पैसे चोरी करते हुए पकड़ लिया और फिर डांटडपट कर पूछने लगीं कि यह सब कहां से सीखा. सोनू ने तब अपना बचाव करने के लिए पड़ोस के दोस्त का नाम ले लिया. यह बात सोनू की मम्मी ने उस के दोस्त की मम्मी से कह दी. परिणामस्वरूप, सोनू के दोस्त ने सोनू को चुगलखोर कह कर उस से दोस्ती तोड़ ली और सोनू दुखी रहने लगा.

यहां पर सोनू की मम्मी को सोनू को यह सब किस ने सिखाया है, यह न पूछ कर चोरी के साइड इफैक्ट्स बता कर आगे से ऐसा न करने की सीख देनी चाहिए थी. साथ ही, यह भी बताना चाहिए था कि चुगली करना और चोरी करना दोनों ही गलत हैं.

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ऐसे बढ़ती है चुगली करने की प्रवृत्ति

कभीकभी  पैरेंट्स अनजाने में ही अपने बच्चों को आहत कर उन में चुगली करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं. दीपक के पापा हमेशा ही अपने बेटे दीपक की तुलना अपने दोस्त के बेटे कुणाल से करते हुए कुणाल की प्रशंसा कर दिया करते थे जिस से दीपक का कोमल सा बालमन आहत हो जाता था और वह कुणाल की तरह बनने की कोशिश करता था. जब उस की तरह बनने में नाकामयाब हो गया तो वह अपने पापा से कुणाल की  झूठीसच्ची चुगली करने लगा.

सो, मातापिता को बच्चों में छोटी उम्र से ही चुगली की आदत पनपने नहीं देनी है और उन्हें यह बताना है कि चुगली करना गलत है. बचपन से ही बच्चों में चुगली की आदत नहीं पनपेगी, तो बड़े हो कर भी वे खुद पर ध्यान देंगे बजाय किसी के प्रति कुंठित मन से चुगली करने के.

GHKKPM: विराट को छोड़कर चली जाएगी सई? सामने आया ये Video

स्टार प्‍लस का सीरियल ‘गुम है किसी के प्‍यार में’  की कहानी दिलचस्प मोड़ ले चुकी है. शो में अब तक आपने देखा कि विराट श्रुति की हर तरह से मदद कर रहा है तो  दूसरी तरफ श्रुति की वजह से सई विराट को गलत समझ रही है. शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है.

शो में अब तक आपने देखा कि श्रुति ने विराट को फोन किया था ऐसे में सई उसको खरी-खोटी सुनाती है. और विराट का फोन फेंक देती है. वो सबके सामने पूछती है कि आपका और श्रुति का क्‍या चक्‍कर है जो आप उसके पास भागे चले जाते हो. विराट के पास सई के सवालों का कोई जवाब नहीं है.

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तो दूसरी तरफ डॉक्‍टर्स श्रुति की डिलीवरी की तैयारी करने में लग जाएंगे. श्रुति की हालत काफी खराब होगी. डॉक्‍टर विराट से कहेंगे कि ऐसी हालत में तुरंत ऑपरेशन करना होगा. डॉक्‍टर ये भी कह देंगे कि वो मां और बच्‍चे में से किसी एक को बचा सकेंगे.

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शो के लेटेस्ट एपिसोड में ये भी दिखाया जा रहा है कि सई कॉलेज के इवेंट में भी जाने से इनकार कर देती है. वह निनाद और अश्विनी को अपने दिल की बात बताती है.

 

सई कहती है कि अगर विराट और श्रुति के बीच किसी तरह का कोई भी रिश्ता निकला तो वह चौहान हाउस छोड़कर चली जाएगी. यह बात सुनकर निनाद और अश्विनी परेशान हो जाते हैं.

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अनुज-अनुपमा हुए रोमांटिक, देखें Video

टीवी सीरियल अनुपमा टीआरपी लिस्ट में लगातार टॉप पर है. शो में अनुज की बहन मालविका की एंट्री हो चुकी है. इस नई एंट्री से कहानी एक नया मोड़ ले रही है. काव्या चाहती है कि वनराज मालविका से दूर रहे तो दूसरी तरफ मालविका नहीं चाहती है कि अनुज अनुपमा से ज्यादा क्लोज रहे. इसी बीच अनुज-अनुपमा की रोमांटिक वीडियो सामने आया है.

रुपाली गांगुली (अनुपमा) ने एक नया वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि अनुपमा और अनुज ऑफ स्क्रीन रोमांस कर रहे हैं.

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अनुज-अनुपमा एक साथ सैर करते नजर आ रहे हैं. अनुज अनुपमा के लिए अगर तुम साथ हो गाने को गुनगुना रहा है तो वहीं अनुज की बातें सुनकर अनुपमा शर्मा जाती है. फैंस अनुज-अनुपमा की इस रोमांटिक वीडियो को काफी पसंद कर रहे हैं.

 

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शो के लेटेस्ट एपिसोड में दिखाया जा रहा है कि मालविका की वजह से अनुज अनुपमा को समय नहीं दे पाता है. इसी बीच अनुपमा अकेला महसूस करती है. मालविका अनुज को लेकर घर चली जाती है तो दूसरी तरफ अनुपमा अपने घर जाती है. अनुपमा के घर न आने से अनुज परेशान हो जाता है.

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अनुज बिना देर किए अनुपमा के घर पहुंच जाता है. यहां पर अनुज अनुपमा से माफी मांगता है.अनुज का हाल देखकर अनुपमा भी रोने लगती है. इसी बीच माल्विका अनुपमा के घर पहुंच जाती है. अनुज को अनुपमा के साथ देखकर गुस्सा हो जाती है.  मालविका कहती है कि अनुज को किसी बाहरवाले से  घर की बातें नहीं करनी चाहिए.

 

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शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि अनुज से अनुपमा नाराज हो जाती है. दूसरी तरफ बा इस बात से हैरान होगी कि अनुज और जीके को अभी तक इस बात का ही नहीं पता था कि मालविका कहां है.

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पिता बनने की भी हैं जिम्मेदारियां

Writer-  किरण आहूजा

मां ही नहीं पिता बनने की भी होती हैं कई जिम्मेदारियां. अगर आप पिता बनने वाले हैं, तो इन चुनौतियों के लिए अभी से तैयार रहें.

शिशु की देखभाल और उस की परवरिश की जिम्मेदारी मां की ही मानी जाती है और यह सच भी है कि मां मां होती है और शिशु के प्रति उस की जिम्मेदारी अहम होती है मगर पिता बनने की भी कई जिम्मेदारियां होती हैं जिन के बारे में अकसर लोगों को पता नहीं होता या इन की तरफ ध्यान नहीं देना चाहते हैं.

जब भी आप परिवार आगे बढ़ाने के बारे में सोचते हैं और बच्चे की प्लानिंग करते हैं, तो याद रखें कि पिता के नाते आप की भी कई जिम्मेदारियां हैं.

हालांकि आज पिता को ले कर कई धारणाएं गलत हो रही हैं. इस के विपरीत आज पिता भी मां की तरह बच्चे का खयाल रखने में पीछे नहीं हैं. आज के पिता मां की तरह ही बच्चे के प्रति हर काम में बराबरी के भागीदार हैं. लेकिन इस सब के लिए उन्हें अपनी कई आदतों को बदलना पड़ता है और नई आदतों को अपनी जिंदगी में शामिल करना होता है. इस के लिए जरूरी हैं कुछ बातें :

खुद को बदलना : अपने बच्चे को अच्छी परवरिश देने के लिए खुद को बदलें. यानी कि जिस तरह आप का बच्चा सोचता है, आप को उस के सामने उसी तरह बात करनी होगी. बच्चों को अच्छे संस्कार या उन से किसी तरह की उम्मीद आप तब ही कर सकते हैं जब बच्चा आप की बातों में रुचि ले रहा हो.

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पितृत्व के बारे में जानें : पितृत्व के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की कोशिश करें. जो पितृत्व सुख से गुजर चुके हैं उन से जानकारी लें. अपने बच्चे को शुरू से प्यार करें. उस की देखरेख वाले काम खुद करें, जैसे मां बच्चे को स्तनपान कराए तो फीड के बाद उसे आप संभाल सकते हैं. बच्चा बोतल का दूध पी रहा है तो उसे दूध पिलाने का काम आप कर सकते हैं. उसे नहलाना, डायपर बदलना पिता के लिए थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन करते रहने से आदत हो जाती है, साथ ही बच्चा पिता को पहचानने लगता है.

बच्चे के साथ अधिक समय बिताएं: नौकरी के कारण पिता के पास बच्चे के साथ समय गुजारने का ज्यादा वक्त नहीं होता. लेकिन फिर भी बिजी टाइम में कुछ समय तो बच्चे के लिए निकालना ही पड़ेगा. ऐसा करने से आप अपने बच्चे की जरूरतों को सम झेंगे. आप उसे जो सिखाएंगे, वह आजीवन याद रखेगा.

बच्चे के साथ बौंडिंग बनाने के लिए उस के साथ संबंध गहन बनाना जरूरी है. बच्चे से बात करें, पुचकारें. भले ही बच्चा आप की भाषा न सम झे पर आवाज सम झने लगेगा. आप के करीब आने लगेगा. कभी भी कहीं से आएं, उसे आवाज दें, उस के पास रुकें और प्यार करें. उसे खूब बोलबोल कर पुचकारें और हंसेंबोलें. इस तरह धीरेधीरे पिता और बच्चे में स्किन टू स्किन कौंटैक्ट बन जाएगा.

अच्छी परवरिश के लिए आर्थिक योजनाएं : आजकल की महंगाई और प्रतिस्पर्धा में अच्छी शिक्षा, अच्छा जीवनस्तर और अच्छे स्वास्थ्य के लिए पैसे की जरूरत होती है. ऐसे में पिता बनने से पहले बच्चे के भविष्य की आर्थिक योजनाएं जरूर बना लें.

शिशु के साथ खेलें: बच्चे के साथ रोजाना आधा घंटा खेलें. यदि चाहते हैं कि बच्चा आप की गोद में आ कर न रोए और आनंद ले तो उसे अपनी आदत डलवानी होगी, उस के जैसी हरकतें करनी होंगी और तरहतरह से मुंह बना कर उसे खुश करना होगा. मांबाप के साथ बच्चे का रिश्ता वैसा ही बनता है जैसे वे बनाते हैं. बड़े होने के बाद भी वे उसी मांबाप के करीब होते हैं, जिन्होंने उन्हें बचपन से समझा हो या प्यार किया हो.

रोल मौडल बनें : किसी बच्चे के लिए उस का रोल मौडल पिता होता है. इसलिए बच्चे की अच्छी परवरिश के साथ ही अपने अंदर की बुरी आदतों को छोड़ कर आप को अच्छी आदतें डालनी चाहिए ताकि आप का बच्चा आप से कुछ अच्छा सीख सके.

एक शोध में पाया गया है कि पिता बनने के बाद पुरुषों के लिए अपनी बुरी आदतें छोड़ना ज्यादा आसान होता है. अध्ययन बताते हैं कि पिता बनने के बाद धूम्रपान, शराब और अन्य बुरी लतें छूटने की संभावना पहले के मुकाबले बढ़ जाती हैं. दरअसल, बुरी आदतों का अपराधबोध तब गहरा हो जाता है जब व्यक्ति पर किसी और की जिम्मेदारी आ जाती है. ऐसे में शिशु के जन्म के साथ ही बहुत से लोग गलत आदतें छोड़ देते हैं.

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आप के द्वारा की गई गलतियों को बच्चे न दोहराएं, इस बात का खास ध्यान रखें. आप जो भी करते हैं, बच्चे उसे सीखते हैं और उस का अनुसरण भी करते हैं.

केयरिंग डैड बनें

बच्चे के पैदा होते ही पिता तुरंत कोई रिश्ता नहीं बना पाते. बच्चे के साथ मां जैसा अटैचमैंट पैदा करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है. मां तो बच्चे के काम आराम से अच्छी तरह कर पाती है, पर एक पिता के लिए ये काम थोड़े मुश्किल होते हैं. ऐसे में जरूरी है कि वे अपने शिशु को पहले दिन से ही ज्यादा से ज्यादा समय दें.

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जैसे:

उस की देखरेख वाले काम खुद करें.

शिशु की हरकतों को सम झें.

अपने बच्चे से स्किन टू स्किन कौंटैक्ट बनाएं.

शिशु से बात करें, पुचकारें, हंसें, बोलें.

शिशु के साथ खेलें.

शिशु को पहले दिन से ही ज्यादा से ज्यादा समय दें.

इन सब बातों को अपना कर आप अपने शिशु से मां की तरह करीब आ सकते हैं.

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