मैं भी हूं सैल्फी क्रेजी : मोहिनी घोष

मोहिनी घोष जब एक साल की थीं, तब उन के फोटो को ‘फैरैक्स बेबी’ के प्रचार के लिए चुना गया था. उन्होंने बंगला फिल्मों में लंबे समय तक काम किया है. 17 साल की उम्र में वे ‘मिस कोलकाता’ बनी थीं. बाद में वे बंगला फिल्मों के साथसाथ हिंदी व भोजपुरी फिल्में भी करने लगी थीं. बाल विवाह पर बनी हिंदी फिल्म ‘एक नई सुबह’ में उन की ऐक्टिंग को बहुत सराहा गया था. पेश हैं, मोहिनी घोष के साथ हुई बातचीत के खास अंश:

आप की भोजपुरी फिल्मों में शुरुआत कैसे हुई थी?

 मुझे साल 2012 में भोजपुरी फिल्म में काम करने का मौका मिला था. तब से अब तक मैं 15-20 भोजपुरी फिल्में कर चुकी हूं. मुझे हमेशा साफसुथरी फिल्में करने में मजा आया है. फिल्म ‘औरत खिलौना नहीं’ में मेरे काम को काफी पसंद किया गया था. अब मैं हर तरह की फिल्में करती हूं.

मुझे भोजपुरी बोली सुनने में बहुत अच्छी लगती है. ऐसे में जब मुझे भोजपुरी फिल्म का औफर मिला, तो मैं ने उस में काम करना स्वीकार कर लिया. ‘दिल हो गईल तोहार’, ‘औरत खिलौना नहीं’, ‘दुलारा’ और ‘हुकूमत’ जैसी फिल्मों से मुझे यहां नई पहचान मिली है. यह बात और है कि मैं शूटिंग खत्म करते ही वापस अपने शहर कोलकाता चली जाती हूं.

भोजपुरी फिल्मों पर फूहड़पन के बहुत आरोप लगते हैं. आप की राय क्या है?

 अब इन में सुधार हो रहा है. यहां भी अच्छी फिल्में बनने लगी हैं. समाज में हर तरह की फिल्म के लिए दर्शक हैं. यह तो फिल्म बनाने वाले को तय करना होता है कि वह किन दर्शकों के लिए फिल्म बना रहा है.

भोजपुरी फिल्मों का दर्शक वर्ग काफी बड़ा है. ज्यादातर लोग मेहनतकश हैं, जो केवल मनोरंजन के लिए फिल्में देखते हैं. यहां के लोग शारदा सिन्हा को भी सुनते हैं और गुड्डू रंगीला को भी.

केवल भोजपुरी फिल्मों की बात नहीं है, बल्कि हिंदी फिल्मों में भी फूहड़पन कम नहीं होता है. काफीकुछ तो लोगों की सोच पर भी निर्भर करता है. केवल सैक्स और खुलेपन से फिल्में नहीं चलती हैं.

क्या बंगला बोलने वाले कलाकारों को भोजपुरी बोलने में परेशानी आती है?

 मैं तो भोजपुरी अच्छी तरह बोल लेती हूं. मैं अपनी फिल्मों की डबिंग भी खुद करती हूं. हां, कई मुश्किल शब्दों के मतलब मुझे पूछने पड़ते हैं, पर मुझे भोजपुरी बोलना अच्छा लगता है.

भोजपुरी फिल्मों में क्या नया बदलाव आया है?

 भोजपुरी फिल्मों की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है. यहां के दर्शक पहले से ज्यादा समझदार हो चुके हैं. वे अच्छी फिल्में ही देखते और समझते हैं. मैं इन में हर तरह के रोल कर रही हूं. मेरी फिल्मों के किरदार हर रंग वाले होते हैं, जिस की वजह से मुझे दर्शकों का बहुत प्यार मिला है .

मुझे इन फिल्मों में काम कर के ही उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों से जुड़ने और उन की भावनाओं को समझने का मौका मिला है.

आप के परिवार में से कोई भी फिल्मों से नहीं जुड़ा है. क्या कभी आप का विरोध नहीं हुआ?

 बंगाली परिवारों में औरतों व लड़कियों को काम करने की आजादी होती है. मैं बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में आ गई थी. इस से न तो मुझे और न ही मेरे परिवार को कुछ अलग लगा. हम लोग इस सब को ले कर पूरी तरह से सहज थे.

मेरा परिवार नौकरीपेशा है. केवल मैं ही फिल्मों में हूं. अभी मैं फिल्म डायरैक्शन की पढ़ाई कर रही हूं.

आप को ऐक्टिंग के अलावा और क्या क्या पसंद है?

 मुझे ऐक्टिंग के साथसाथ खाना बनाना, खिलाना, दोस्तों से बात करना और गरीब लोगों के बीच समय गुजारना पसंद है. मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है. मुझे खुद के फोटो खींचने का शौक है. मोबाइल फोन में सैल्फी कैमरा आने से मेरा यह शौक और भी ज्यादा बढ़ गया है.

जेल से बड़ा जुर्म

52 साल के सत्यपाल शर्मा को गांव में हर कोई जानता था. वे उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के गांव सिंघावली अहीर के रहने वाले थे और नजदीक के ही एक गांव खिंदौड़ा में बने आदर्श प्राइमरी स्कूल में हैडमास्टर  थे. गांव में उन की खेतीबारी भी थी. उन के परिवार में पत्नी उर्मिला के अलावा एक बेटा सोनू व एक बेटी सीमा थी.

23 अप्रैल, 2016 की सुबह सत्यपाल शर्मा रोजाना की तरह मोटरसाइकिल से स्कूल गए थे. सुबह के तकरीबन पौने 10 बजे थे. लंच ब्रेक का समय था.

सत्यपाल शर्मा स्कूल के बरामदे में कुरसी डाल कर बैठे हुए थे, तभी एक मोटरसाइकिल पर सवार 3 नौजवान स्कूल परिसर में आ कर रुके. उन में से एक नौजवान मोटरसाइकिल के पास ही खड़ा रहा, जबकि 2 नौजवान पैदल

चल कर सत्यपाल शर्मा के नजदीक पहुंच गए.

उन्होंने नमस्कार किया, तो सत्यपाल शर्मा ने पूछा, ‘‘कहिए?’’

उन में से एक नौजवान ने पूछा, ‘‘क्या आप ही मास्टर सत्यपाल हैं?’’

‘‘जी हां, मैं ही हूं. आप लोग कहां से आए हैं?’’

‘‘हम तो नजदीक के गांव से ही आए हैं मास्टरजी.’’

सत्यपाल शर्मा ने उन्हें बैठने का इशारा किया, तो वे पास रखी कुरसियों पर बैठ गए. इस बीच तीसरा नौजवान भी टहलता हुआ वहां आ गया.

सत्यपाल शर्मा उन नौजवानों को पहचानते नहीं थे. वे कुछ जानसमझ पाते कि उस से पहले ही कुरसी पर बैठे दोनों नौजवान बिजली की सी फुरती से खड़े हुए और उन्होंने अपने हाथों में तमंचे निकाल लिए.

सत्यपाल शर्मा सकते में आ गए. पलक झपकते ही एक नौजवान ने उन्हें निशाना बना कर गोली दाग दी. गोली उन के पेट में लगी और खून का फव्वारा छूट गया.

सत्यपाल शर्मा समझ गए थे कि वे नौजवान उन के खून के प्यासे हैं. वे जान बचाने के लिए चिल्लाते हुए परिसर में तेजी से भागे, लेकिन तकरीबन 50 मीटर ही भाग पाए थे कि बदमाशों ने उन पर 2 और फायर झोंक दिए. इस से वे लहूलुहान हो कर जमीन पर गिर पड़े.

गोलियां चलने से स्कूल के टीचरों व बच्चों में चीखपुकार और भगदड़ मच गई. स्कूल चूंकि गांव के बीच में था, इसलिए आसपास के गांव वाले भी इकट्ठा होना शुरू हो गए.

यह देख कर गोली मारने वाले बदमाशों के पैर उखड़ गए. घिरने का खतरा देख कर मोटरसाइकिल वाला बदमाश अकेला ही भाग गया, जबकि एक बदमाश दीवार कूद कर खेतों की तरफ और तीसरा बदमाश गांव के रास्ते की तरफ भाग निकला.

जो बदमाश गांव की तरफ भागा था, गांव वालों ने उस का पीछा कर कुछ ही दूर जा कर उसे पकड़ लिया था. गांव वालों ने पीटपीट कर उसे लहूलुहान कर दिया. उधर बदमाशों की गोली से घायल सत्यपाल शर्मा की मौके पर ही मौत हो गई.

इस सनसनीखेज वारदात की सूचना पा कर थाना सिंघावली अहीर के थाना प्रभारी सुभाष यादव अपने दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए.

हत्या की इस वारदात से गांव वालों में भारी गुस्सा था. लिहाजा, एसपी रवि शंकर छवि, कलक्टर हृदय शंकर तिवारी, एएसपी अजीजुलहक, सीओ कर्मवीर सिंह व दूसरे थानों का पुलिस बल भी वहां आ पहुंचा. पुलिस को मौके से एक तमंचा व खाली कारतूस बरामद हुए.

उधर सत्यपाल शर्मा की मौत की खबर से उन के परिवार में कुहराम मच गया था. उन की पत्नी उर्मिला व बेटा सोनू भी वहां आ पहुंचे थे. थाना पुलिस को गांव वालों के आरोपों के साथ विरोध का सामना करना पड़ रहा था.

इस विरोध की भी वजह थी. लोगों का आरोप था कि कुछ दिनों पहले कुछ बदमाशों ने सत्यपाल शर्मा पर उन के घर पर हमला किया था. उन्होंने इस की शिकायत थाने में की थी और जान का खतरा बता कर सिक्योरिटी की मांग की थी, लेकिन थाना प्रभारी सुभाष यादव ने इस मामले में घोर लापरवाही दिखाते हुए नजरअंदाज कर दिया था.

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि सत्यपाल शर्मा की जमीन को ले कर अपने ही परिवार के लोगों से रंजिश चली आ रही थी. इस रंजिश का शिकार हुए अपने बेटे सतीश के लिए सत्यपाल शर्मा इंसाफ की जंग लड़ रहे थे, इसीलिए उन की भी हत्या कर दी गई थी.

गांव वालों का गुस्सा पकड़े गए बदमाश पर उतर रहा था. वह अधमरी हालत में पहुंच गया था. पुलिस ने उस से पूछताछ की, तो उस ने अपना नाम सोनू बताया, जबकि अपने साथियों के नाम गौरव व रोहित बताए.

सोनू गांव निरपुड़ा का रहने वाला था, जबकि गौरव उस का चचेरा भाई था और रोहित शेरपुर लुहारा गांव का रहने वाला था.

पुलिस सोनू को अस्पताल में दाखिल कराती, उस से पहले ही उस की मौत हो गई. पुलिस ने सत्यपाल शर्मा व बदमाश सोनू की लाशों का पंचनामा कर के पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

इस मामले में पुलिस ने सत्यपाल शर्मा के बेटे सोनू की तरफ से मारे गए व भागे बदमाशों के साथ ही विरोधी पक्ष के राजकरण, उस के भाई रामकिशन व आनंद, राजकरण के 2 बेटों पंकज पाराशर, दीपक, आनंद के बेटों मोहित, रोहित, बेटी पूजा, आनंद की पत्नी बबली, राजकरण की पत्नी कौशल्या, राजकरण के बेटे ईशान व रामकिशन के बेटे महेश के खिलाफ धारा 302 व 120बी के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया गया.

मामला बेहद गंभीर था. एसपी रवि शंकर छवि ने थाना प्रभारी सुभाष यादव को तत्काल प्रभाव से सस्पैंड कर दिया और थाने का प्रभार चंद्रकांत पांडेय को सौंप दिया. उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश देने के साथ ही हत्या की साजिश का खुलासा करने के निर्देश भी दिए.

पुलिस ने सत्यपाल शर्मा की पत्नी उर्मिला व बेटे सोनू के साथसाथ गांव वालों से भी पूछताछ की. मामला सीधेतौर पर रंजिश का था.

दरअसल, सत्यपाल शर्मा की राजकरण व आनंद से जमीन की डोलबंदी को ले कर तकरीबन 10 साल से रंजिश चली आ रही थी. इसी रंजिश में 4 जुलाई, 2014 को सत्यपाल शर्मा के  जवान बेटे सतीश की सुबह तकरीबन 8 बजे उस वक्त गोली मार कर हत्या कर दी गई थी, जब वह खेत में काम करने के लिए गया था. सत्यपाल शर्मा ने इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था.

पुलिस ने इस मामले में आनंद व उस के बेटे मोहित को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था. आनंद के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल किया गया तमंचा व कारतूस भी बरामद हुए थे, जबकि बाकी आरोपियों को पुलिस ने जांच के दौरान क्लीनचिट दे दी थी. इस मामले में पुलिस मिलीभगत के आरोपों का सामना कर रही थी.

बेटे सतीश की मौत से दुखी हो कर सत्यपाल शर्मा ने सोच लिया था कि वे उस के कातिलों को सजा दिला कर रहेंगे, इसलिए वे आएदिन कचहरी जा कर मुकदमे को मजबूत करने के लिए पैरवी करते थे. उन की पैरवी का ही नतीजा था कि जेल में बंद आरोपियों को जमानत नहीं मिल पा रही थी.

सत्यपाल शर्मा की इसी पैरवी से चिढ़ कर 26 मार्च की रात उन पर उस समय हमला किया गया था, जब वे घर पर थे. बदमाश गोली चला कर भाग गए थे. सत्यपाल शर्मा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था. जब उन्होंने जान का खतरा बता कर पुलिस से सिक्योरिटी मांगी थी, तब थाना पुलिस ने न जाने किन वजहों से अपने फर्ज से मुंह मोड़ लिया था.

पुलिस दोनों पक्षों की रंजिश से वाकिफ थी. बाद में इस मामले में सत्यपाल शर्मा की तहरीर पर राजकरण व रोहित के खिलाफ धारा 452 व 523 के तहत मुकदमा तो लिख लिया गया था, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई थी. इस के बाद सत्यपाल शर्मा की हत्या हो गई थी.

पुलिस सत्यपाल शर्मा के हत्यारों की तलाश में जुट गई. अगले दिन पुलिस ने इस मामले में नामजद रोहित व उस की बहन पूजा को गिरफ्तार कर लिया. दोनों से पूछताछ की गई, तो एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि इस हत्या की योजना लाखों रुपए की सुपारी के बदले मेरठ जेल में बनाई गई थी. पुलिस ने जरूरी सुराग हासिल कर के उन दोनों को जेल भेज दिया और दूसरे आरोपियों की तलाश में लग गई.

26 अप्रैल, 2016 को पुलिस ने एक शूटर गौरव व एक औरत किरन को गिरफ्तार कर लिया. दोनों से पूछताछ हुई, तो पुलिस भी चौंक गई, क्योंकि आरोपी परिवार की औरतों से ले कर गिरफ्तार की गई औरत ने भी हत्या की इस साजिश में अहम भूमिका निभाई थी. पूछताछ में सत्यपाल शर्मा की हत्या का हैरान करने वाले सच सामने आया.

दरअसल, सत्यपाल शर्मा अपने बेटे सतीश की हत्या की जिस तरह से पैरवी कर रहे थे, उस से आनंद व उस के बेटे मोहित को चाह कर भी जमानत नहीं मिल पा रही थी. उन्होंने अपनी जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील कर दी थी.

31 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में उन की जमानत पर सुनवाई होनी थी. सत्यपाल शर्मा इस का कानूनी तरीके से विरोध कर रहे थे. आरोपियों को लगने लगा था कि सत्यपाल शर्मा के रहते उन्हें कभी जमानत नहीं मिल पाएगी और उन्हें सजा हो कर रहेगी.

सत्यपाल शर्मा के पैरवी बंद कर देने से उन की राह आसान हो सकती थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सकता था. आनंद की पत्नी बबली अपने पति व बेटे से अकसर जेल में मुलाकात के लिए जाती थी. उस ने आनंद व मोहित को उकसाया कि वे किसी भी तरह सत्यपाल का कोई इलाज करें. जितने रुपए कोर्टकचहरी में खर्च हो रहे हैं, उतने में तो उसे मरवाया जा सकता था.

आनंद और मोहित को बबली की बात ठीक लगी. जेल की बदहाल जिंदगी से वे पहले ही परेशान थे. बबली अपनी जेठानी कौशल्या से इस संबंध में अकसर बात करती थी.

आनंद ने जेल में रहते बदमाश अमरपाल उर्फ कालू व अनिल से बात की. अमरपाल बागपत के ही छपरौली थाना क्षेत्र के शेरपुर लुहारा गांव का रहने वाला था, जबकि अनिल सूप गांव का बाशिंदा था. वे दोनों भी हत्या के मामले में मेरठ जेल में बंद थे. दोनों के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे.

आनंद व उस का परिवार सत्यपाल शर्मा को रास्ते से हटाना चाहता था. दोनों बदमाशों ने इस काम के लिए हामी भर ली. साढ़े 6 लाख रुपए में उन का सौदा तय हो गया.

अमरपाल ने इस मामले में अपने ही गांव के रोहित को जेल में बुलवा कर उस से बात की. उस से रुपयों के बदले में सत्यपाल शर्मा की हत्या करना तय हो गया. रोहित ने इस काम के लिए अपने दोस्तों सोनू राणा उर्फ शिशुपाल उर्फ अमरीकन व उस के चचेरे भाई गौरव को भी तैयार कर लिया.

अमरपाल जेल में जरूर था, लेकिन उस के गैरकानूनी कामों को उस की पत्नी किरन उर्फ बाबू पूरा करती थी.

इस मामले में भी अमरपाल ने सुपारी के लेनदेन से ले कर हथियार मुहैया कराने  तक की जिम्मेदारी किरन को ही सौंप दी और उस की मुलाकात आनंद की पत्नी बबली से करा दी. सुपारी की रकम हत्या के बाद दी जानी थी.

11 अप्रैल को किरन, रोहित, गौरव व सोनू जेल में जा कर अमरपाल व अनिल से मिले. आनंद व उस की पत्नी बबली की भी उन से मुलाकात हुई और हत्या का प्लान तैयार कर लिया गया. इस के बाद रोहित अपने साथियों के साथ किरन के संपर्क में रहने लगा.

हत्या के लिए किरन ही उन्हें हथियार देने वाली थी. हत्या किस तरह करनी है, इस की पूरी कमान अब बबली व किरन ने संभाल ली थी.

किरन अपने मायके मुजफ्फरनगर जिले के टयावा गांव में रह रही थी. अमरपाल के कई साथी, जो जेल से बाहर थे, किरन उन के संपर्क में थी. उन से बात कर के उस ने 3 तमंचों और कारतूसों का इंतजाम कर लिया था.

14 अप्रैल को रोहित, गौरव व सोनू बबली से उस के घर जा कर मिले. बबली ने उन्हें खर्च के लिए 10 हजार रुपए दिए. तीनों ने बबली व कौशल्या से सत्यपाल शर्मा के बारे में जानकारियां जुटा लीं.

इस के बाद किरन ने उन्हें 3 तमंचे व 17 कारतूस सत्यपाल शर्मा की हत्या के लिए दे कर ताकीद कर दिया कि वह किसी भी सूरत में बचना नहीं चाहिए.

इस के बाद कई दिनों तक उन्होंने रेकी कर के सत्यपाल शर्मा की पहचान के साथसाथ स्कूल आनेजाने का समय भी पता कर लिया.

23 अप्रैल को उन्होंने योजना को आखिरी रूप देने का फैसला किया. 22 अप्रैल की शाम को वे मोटरसाइकिल से बबली के घर पहुंच गए. किसी को शक न हो, इसलिए उन के सोने का इंतजाम एक ट्यूबवैल पर कर दिया गया. बबली और उस के बेटेबेटी ने उन के खानेपीने व सोने का भी इंतजाम किया था.

23 अप्रैल की अलसुबह वे वहां से निकल गए. उन्होंने सत्यपाल शर्मा को रास्ते में ही स्कूल जाते वक्त मारने की योजना बनाई. वे खिंदौड़ा वाले रास्ते की एक पुलिया पर खड़े हो गए. सत्यपाल शर्मा अपनी मोटरसाइकिल पर तेजी से आए और निकल गए, इसलिए उन का प्लान चौपट हो गया.

इस के बाद वे तीनों बदमाश इधरउधर टहलते रहे. बाद में उन्होंने स्कूल जा कर ही सत्यपाल शर्मा की हत्या करने का मन बनाया.

सत्यपाल शर्मा को मारने में गलती न हो, इसलिए सोनू व रोहित ने पहले उन से नाम पूछा और इस के बाद उन तीनों ने गोली मार कर उन की हत्या कर दी. शोरशराबा होने पर वे घबरा गए और मजबूरन उन्हें अलगअलग रास्ते से भागना पड़ा. सोनू भीड़ के गुस्से का शिकार हो गया.

पुलिस ने गौरव की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हुआ तमंचा व मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली. इस के साथ ही पुलिस ने मुकदमे में किरन, उस के हिस्ट्रीशीटर पति अमरपाल व दूसरे बदमाश अनिल का नाम भी बढ़ा दिया.

एसपी रवि शंकर छवि ने किरन व गौरव को मीडिया के सामने पेश कर के हत्याकांड का खुलासा किया. उन दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

प्रेम बड़ा न रिश्ता, सब से बड़ा रुपया

भारतीय टैनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस जब अभिनेता संजय दत्त की पूर्व पत्नी रिया पिल्लै के साथ लिव इन पार्टनर के रूप में रह रहा होगा, तो उसे लगा होगा कि वह कोई ट्रौफी अपने से ज्यादा चमत्कारी पैसे वाले से छीन लाया है. उसे क्या पता था कि वह एक जंजाल में फंस रहा है. अब लगभग 8 साल से लिव इन पार्टनर रह रहे उन का मुकदमा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है जहां अदालत ने भी हाथ झाड़ से लिए हैं. दरअसल, 2014 में रिया ने पेस के खिलाफ डोमैस्टिक वायलैंस ऐक्ट के तहत केस किया था.

रिया पिल्लै अब अलग होने के लिए क्व20 करोड़ और एक मकान मांग रही है. मजेदार बात यह है कि एक मकान वह संजय दत्त से भी तलाक के समय हथिया चुकी है. सुप्रीम कोर्ट के जजों ने चैंबर में बुला कर दोनों को समझानेबुझाने की कोशिश भी की पर बेकार, क्योंकि भूखी शेरनी को मालूम है कि उसे मनचाहा शिकार उस की शर्तों पर मिल जाएगा.

अदालतों में चल रहे हाई प्रोफाइल तलाक के मामलों में ज्यादातर में पत्नियां ही हावी होती हैं और उन का रुख होता है कि चाहे कुछ भी हो जाए उस पति को तो सबक सिखाना होगा जिस ने उस जैसी सुंदर, स्मार्ट औरत को छोड़ने की बात भी सोची. आखिर यों ही तो उस के बीसियों दीवाने नहीं हैं और दीवानों में अच्छीखासी हैसियत वाले भी हैं जो घर, पत्नी, धंधा छोड़ कर उस पर मंडराते रहते हैं और उसे साथ ले चलने में उन की गरदन शुतुरमुर्ग जैसी ऊंची हो जाती है. करिश्मा कपूर के साथ भी ऐसा ही हुआ था. सुनंदा पुष्कर भी उसी श्रेणी में आती है.

सुंदर स्मार्ट होने का मतलब यह नहीं होता कि उसे जहां चाहो भुना लो. यह एक जिम्मेदारी भी है अपने प्रति ही सही. ज्यादा अकड़ अकसर महंगी पड़ती है. जवानी अब ठीक है 4 दिन की नहीं होती या फिर साल भर तक चल जाती है पर उस के बाद जो तनाव व अकेलापन होता है वह शराब की बोतलों से दूर होता है. कितनी ही ट्रौफी पत्नियां अकसर अकेलेपन और निराशा की शिकार होती हैं. हां, जिन के बच्चे मां के प्रति अनुग्रहित होते हैं, वे जरूर आखिर तक अपने तेवर बनाए रख पाती हैं पर भारी कीमत देनी होती है.

पतिपत्नी संबंध में ऊंचनीच नहीं तो बराबरी तो है ही. सुंदरता के बल पर औरतें अपने को विशिष्ठ समझेंगी तो पछताएंगी. रिया पिल्लै की मांग चाहे कितनी तार्किक हो पर अगर सुप्रीम कोर्ट के जज भी उसे समझा न पाएं तो मान लें कि वह कुछ अति दंभी ही है. बेचारा लिएंडर पेस.

मुसलिम नीति को लेकर दोराहे पर भाजपा

उत्तर प्रदेश में भाजपा मुसलिम नीति को लेकर दोराहे पर है. एक तरफ भाजपा यह साबित करना चाहती है कि तीन तलाक को लेकर मुसलिम समुदाय में उसकी पैठ बढ़ी है, दूसरी तरफ वह यह भी दिखाना चाहती है कि मुसलिम बिरादरी से उसकी दूरी कायम है. उत्तर प्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईद के मौके पर मुख्यमंत्री आवास पर ईद से जुड़ा कोई कार्यक्रम नहीं किया. इससे यह संदेश गया कि भाजपा ऐसे आयोजनों के खिलाफ है. दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने राजभवन में ईद से जुड़ा आयोजन किया.

ईद के दिन मुख्यमंत्री लखनऊ की ईदगाह जाकर ईद की शुभकामना देते लोगों से गले मिलते हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईदगाह भले नहीं गये पर उप मुख्यमंत्री डाक्टर दिनेश शर्मा और राज्यपाल राम नाइक दोनों ही ईदगाह गये लोगों से मिले. मुसलिम नीति को लेकर भाजपा का उहापोह विधानसभा चुनावों के समय से चल रहा है. विधानसभा चुनावों में भाजपा ने एक भी मुसलिम को चुनाव लड़ने का टिकट नहीं दिया. जब सरकार बनाने का नम्बर आया तो भाजपा ने मोहसिन रजा को मंत्री बना दिया.

राजनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा मुसलिम नीति को लेकर दोराहे पर खड़ी है, वह मुसलिम से दूरी बनाकर अपने परंपरागत वोट बैंक हिन्दुओं को खुश रखना चाहती है. दूसरी तरफ समाज को यह संदेश देना चाहती है कि वह सबका साथ सबका विकास की नीति पर चल रही है. ऐसे में एक तरफ योगी आदित्यनाथ के जरीये ईदगाह न जाकर एक संदेश देती है तो दूसरी ओर राज्यपाल राम नाइक और उप मुख्यमंत्री और डाक्टर दिनेश शर्मा ईदगाह जाकर लखनऊ की गंगा जमुनी सभ्यता की बात करते हैं.

भाजपा सीधे तौर पर अपने हिन्दु वोट बैंक और मुसलिम वर्ग के बीच संतुलन साधने का काम कर रही है. ऐसे में वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जरीये हिन्दूवर्ग को खुश करने की कोशिश में है और डाक्टर दिनेश शर्मा के जरीये वह मुसलिम बिरादरी को खुश करना चाहती है. यह बातें धीरे धीरे सबकी समझ में आने लगी हैं. ऐसे में अब भाजपा की दोहरी नीति खुल कर सामने आ रही है. जिसका प्रभाव प्रदेश की विकास और कानून व्यवस्था पर पड़ रहा है.

जिस समय प्रदेश सरकार अपने 100 दिन पूरे होने का जश्न मना रही थी उस समय ही रायबरेली में चुनावी संघर्ष में 5 लोगों को जला कर मार दिया गया. राजधानी लखनऊ में लडकी से सरेराह बलात्कार की कोशिश असफल रहने के बाद उसकी हत्या कर दी गई. छोटी बच्ची के साथ हत्या की घटना ने पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया. बरेली में हिन्दू युवावहिनी के कार्यकर्ता थाने में घुस कर बवाल करने लगे. पुलिस पर हमला किया. जिस दिन सरकार के 100 दिन पूरे हुये उस दिन की यह घटनाये हैं. प्रदेश में बहुत सारे दावों के बाद भी कानून व्यवस्था के हालात नहीं सुधरे हैं. भाजपा अपना कोई प्रभाव छोड़ नहीं पा रही है. केवल धर्म के नाम पर वोटबैंक के सहारे जीत हासिल करना संभव नहीं है.

बिकिनी अवतार में संजय दत्‍त की पत्‍नी मान्‍यता

इस महीने के शुरु होते ही, मान्यता दत्त ने अपने वेकेशन टूर की शुरुआत रोम और इटली से की. हाल ही में संजय दत्‍त भी पत्‍नी के साथ इस वेकेशन में पहुंच गए हैं.

संजय दत्‍त की पत्‍नी मान्‍यता दत्‍त इन दिनों लंबी छुट्टियों पर विदेश निकली हुई हैं. पहले तो मान्‍यता, शूटिंग में बिजी पति संजय दत्‍त को छोड़कर अकेले ही यूरोप की यात्रा कर रही थीं और अब शूटिंग निपटाकर खुद संजय दत्‍त भी पत्‍नी और बच्‍चों के पास पहुंच गए हैं. लेकिन इस बीच मान्‍यता दत्‍त ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपने वेकेशन की काफी फोटो शेयर की हैं और इन फोटो में मान्‍यताकाफी हॉट नजर आ रही हैं.

मान्‍यता अपने वेकेशन में पति और बच्‍चों के साथ स्‍वीमिंग पूल के मजे लेते नजर आ रही हैं.

हाल ही में ईद पर मान्‍यता और संजय दत्‍त बच्‍चों के बिना रोमांटिक डिनर करते नजर आए. मान्‍यता ने यहीं से लोगों को ईद दुआएं भी दी. मान्‍यता अपने इस हॉलीडे में काफी मस्‍ती भरे अंदाज में नजर आ रही हैं. इस वेकेशन के दौरान मान्यता के जुड़वां बच्चे बेटी इकरा और बेटा शहरान मौजूद हैं. ‘भूमि’ और ‘साहेब बीवी और गैंगस्‍टर 3’ जैसी फिल्मों में व्यस्त संजय दत्त, अपने बिजी शेड्यूल से वक्त निकालकर फैमिली के साथ एन्जॉय करने पहुंच गए हैं. इस वेकेशन के अपडेट्स मान्यता इंस्टाग्राम के जरिए फैन्स को दे रही हैं. देखें मान्‍यता का यह बिकिनी अवतार.

A post shared by Maanayata Dutt (@maanayata) on

A post shared by Maanayata Dutt (@maanayata) on

A post shared by Maanayata Dutt (@maanayata) on

A post shared by Maanayata Dutt (@maanayata) on

A post shared by Maanayata Dutt (@maanayata) on

बता दें कि मान्‍यता दत्‍त संजय दत्‍त की तीसरी पत्‍नी हैं. पहली पत्नी ऋचा शर्मा के निधन और दूसरी पत्नी रिया पिल्लाई से तलाक लेने के बाद, संजय दत्त ने मान्‍यता से साल 2008 में शादी की थी. दोनों की उम्र में करीब 20 साल का अंतर है. संजय दत्त जहां 57 साल के हो चुके हैं तो वहीं मान्यता की उम्र महज 37 साल है.

मान्‍यता सिर्फ अपने बच्‍चों के साथ ही नहीं, बल्कि संजय दत्‍त की पहली पत्‍नी की बेटी त्रिशाला दत्‍त के साथ भी क्‍वालिटी टाइम बिताते हुए देखी गई हैं.

A post shared by Maanayata Dutt (@maanayata) on

A post shared by Maanayata Dutt (@maanayata) on

साल 2003 में प्रकाश झा की फिल्म ‘गंगाजल’ में मान्यता ने एक आइटम सॉन्ग ‘अल्हड़ जवानी’ में काम किया था. इसी के बाद मान्यता को बॉलीवुड में पहचान मिली. मान्यता जब बॉलीवुड में आईं तो उन्होंने अपना नाम सारा खान रख लिया था. हालांकि, ‘गंगाजल’ में काम करने के बाद प्रकाश झा ने ही उन्हें नया स्क्रीन नाम मान्यता दिया.

जब 5 मिनट तक लगातार हीरो ने किया इस हीरोईन को किस

बॉलीवुड की सदाबहार अभिनेत्री रेखा और अभिनेता अमिताभ बच्चन के अफेयर के किस्से और उनकी विनोद मेहरा से शादी की खबरों से तो आप वाकिफ होंगे ही, लेकिन उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ और भी राज हैं जो शायद ही कभी बाहर आए हों.

अभिनेत्री रेखा के जीवन पर लिखी गई किताब, यासीर उस्मान की ‘रेखा: एन अनटोल्ड स्टोरी’, में न सिर्फ रेखा के फिल्मी करियर, बल्कि उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी भी कई बातों का विस्तार से वर्णन किया गया है.

रेखा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में कर दी थी. फिल्म ‘अनजाना सफर’ की शूटिंग के दौरान रेखा की उम्र महज 15 साल की थी. फिल्म की शूटिंग के दौरान एक दर्दनाक किस्सा भी इस किताब का हिस्सा है, जिसने रेखा को रोने पर मजबूर कर दिया था.

इस किताब में एक फिल्म की शूटिंग का जिक्र किया गया है. फिल्म ‘अनजाना सफर’ के डायरेक्टर राजा नवाठे और फिल्म के हीरो बिस्वजीत ने रेखा को तंग करने के लिए फिल्म का सीन शूट करने का प्लान बनाया, जिसके बारे में रेखा को नहीं बताया गया.

15 साल की रेखा रोमांटिक गाने के शूट के लिए सेट पर पहुंची और जैसे ही डायरेक्टर ने एक्शन बोला बिस्वजीत ने रेखा को बाहों में भरा और उन्हें किस करने लगे.

रेखा को इसकी जानकारी पहले से बिल्कुल नहीं थी. बिस्वजीत 5 मिनट तक रेखा को किस करते रहे. यूनिट के लोग चीयर कर रहे थे, लेकिन रेखा की आंखों से आंसू बहने लगे. बाद में बिस्वजीत ने रेखा को बताया कि यह डायरेक्टर का आइडिया था. इस किताब में रेखा से जुड़े कई और किस्से भी पढ़ने को मिलेंगे.

धान की उन्नत खेती से उगा सकते हैं सोना

तमाम कुदरती आपदाओं की वजह से पिछले 1 दशक से मध्य प्रदेश की खास खरीफ की फसल सोयाबीन ने प्रदेश के किसानों की हालत खराब कर दी, नतीजतन किसानों ने धान की खेती शुरू कर दी और रिकार्ड उत्पादन कर के खेती को लाभ का धंधा बना दिया. पहले छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता था, पर अब मध्य प्रदेश में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाने लगी है. किसान बड़े रकबे में धान की खेती कर के अपने खेतों में सोना उगा सकते हैं.

खेत की तैयारी : गरमी के मौसम में सही समय पर खेत की गहरी जुताई हल या प्लाउ चला कर करें, जिस से मिट्टी उलटपलट जाए. मेंड़ों की सफाई जरूर करें. गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद 10 से 12 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अंतिम जुताई या बारिश से पहले खेत में फैला कर मिलाएं.

धान की खेती की विधियां

सीधे बीज बोने की विधि : खेत में सीधे बीज बो कर निम्न तरह से धान की खेती की जाती है:

* छिटकवां बोआई.

* नाड़ी हल या दुफन या सीड ड्रिल से कतारों में बोआई.

* बियासी विधि (छिटकवां विधि) से सवा गुना ज्यादा बीज बो कर बोआई के

1 महीने बाद फसल की पानी भरे खेत में हलकी जुताई.

* लेही विधि (धान के बीजों को अंकुरित कर के मचौआ किए गए खेतों में सीधे छिटकवां विधि से बोआई).

रोपा विधि : इस विधि के तहत धान के पौधे सीमित क्षेत्र में तैयार किए जाते हैं. फिर 25 से 30 दिनों के पौधों की खेत में रोपाई की जाती है.

बीजों की मात्रा : अनुविभागीय अधिकारी कृषि केएस रघुवंशी बताते हैं

कि धान की बोआई के लिए बीजों की मात्रा बोआई की विधि के मुताबिक अलगअलग रखनी चाहिए.

बीजों का उपचार : बीजों को थायरम या डायथेन एम 45 दवा की 2.5 से 3 ग्राम मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित कर के बोआई करें. बैक्टेरियल बीमारियों से बचाव के लिए बीजों को 0.02 फीसदी स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के घोल में डुबा कर उपचारित करना फायदेमंद होता है.

बोआई का सही समय : बारिश का मौसम शुरू होते ही धान की बोआई का काम शुरू करें. मध्य जून से जुलाई के पहले हफ्ते तक बोआई का सब से अच्छा समय होता है. रोपाई के बीजों की बोआई रोपणी में जून के पहले हफ्ते में ही सिंचाई की सुविधा वाली जगहों पर कर दें, क्योंकि जून के तीसरे हफ्ते से मध्य जुलाई तक की रोपाई से अच्छी पैदावार मिलती है.

खाद व उर्वरक

गोबर की खाद या कंपोस्ट : धान की फसल में 5 से 10 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी सड़ी गोबर खाद या कंपोस्ट का इस्तेमाल करने से महंगे उर्वरकों के खर्च में बचत की जा सकती है.

हरी खाद : रोपाई वाले धान में हरी खाद के इस्तेमाल में सरलता होती है. इसे मिट्टी में आसानी से मिलाया जा सकता है. हरी खाद के लिए सनई के करीब 25 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर के हिसाब से रोपाई से 1 महीने पहले बोने चाहिए. करीब 1 महीने की खड़ी सनई की फसल को खेत में मचौआ करते समय मिला देना चाहिए. यह 3-4 दिनों में सड़ जाती है. ऐसा करने से करीब 50-60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उर्वरकों की बचत होगी.

जैव उर्वरकों का इस्तेमाल : कतारों में बोआई वाले धान में 500 ग्राम एजेटोवेक्टर और 500 ग्राम पीएसबी जीवाणु उर्वरक का प्रति हेक्टेयर के हिसाब से इस्तेमाल करने से 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन और स्फुर उर्वरक बचाए जा सकते हैं.

इन दोनों जीवाणु उर्वरकों को 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर सूखी सड़ी हुई गोबर की खाद में मिला कर बोआई करते समय कूड़ों में डालने से इन का पूरा लाभ मिलता है. सीधी बोआई वाले धान में उगने के 20 दिनों और रोपाई के 20 दिनों की अवस्था में 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हरीनीली काई का बुरकाव करने से करीब 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन उर्वरक की बचत की जा सकती है. ध्यान रहे कि काई का बुरकाव करते समय खेत में सही नमी या हलकी नमी की सतह रहनी चाहिए.

उर्वरकों का इस्तेमाल : धान की फसल में उर्वरकों का इस्तेमाल बोई जाने वाली प्रजाति के मुताबिक करना चाहिए.

उर्वरक देने का समय : नाइट्रोजन की आधी मात्रा और स्फुर व पोटाश की पूरी मात्रा आधार खाद के रूप में रोपाई से पहले खेत तैयार करते समय या कीचड़ मचाते समय बुरक कर मिट्टी में मिलाएं. बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा अंकुर फूटने की अवस्था में (रोपाई के 20 दिनों बाद) और आधी मात्रा गंभोट की अवस्था में देनी चाहिए. जस्ते की कमी वाले क्षेत्रों में खेत की तैयारी करते समय जिंक सल्फेट 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 3 साल में 1 बार इस्तेमाल करें. गंधक की कमी वाले क्षेत्रों में गंधक वाले उर्वरकों (जैसे सिंगल सुपर फास्फेट) का इस्तेमाल करें.

सिंचाई : धान की फसल में सिंचाई का बहुत महत्त्व है. रोपाई से अंकुर निकलने की अवस्था तक खेत में पानी की सतह 2-5 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. कंसे (अंकुर) निकलने के बाद से गंभोट की अवस्था तक 10-15 सेंटीमीटर पानी की सतह रखें. धान की फसल में जरूरत से ज्यादा पानी भरना अच्छी पैदावार में बाधक होता है.

लेही के लिए बीज अंकुरित करना : लेही विधि से बोआई करने के लिए खेत की तैयारी के तुरंत बाद अंकुरित बीज मौजूद होने चाहिए. लिहाजा लेही बोआई के तय समय के 3-4 दिनों पहले से ही बीज अंकुरित करने का काम शुरू कर दें.

इस के लिए बीजों की तय मात्रा को रात के समय पानी में 8-10 घंटे के लिए भिगोएं. फिर इन भीगे हुए बीजों का पानी निकाल दें. फिर इन बीजों को पक्की सूखी सतह पर रख कर बोरों से ढक दें. ढकने के 24-30 घंटे के अंदर बीज अंकुरित हो जाते हैं. इस के बाद बोरों को हटा कर बीजों को छाया में फैला कर सुखाएं. इन अंकुरित बीजों का इस्तेमाल 6-7 दिनों तक किया जा सकता है.

रोपणी में पौधे तैयार करना : जितने रकबे में धान की रोपाई करनी हो उस के 1/20 भाग में रोपणी बनानी चाहिए. रोपणी में इस प्रकार से बोआई करनी चाहिए कि करीब 3-4 हफ्ते के पौधे रोपाई के लिए समय पर तैयार हो जाएं. रोपणी के लिए 2-3 बार जुताई कर के अच्छी तरह खेत तैयार करें.

इस के बाद खेत में 1.5-2.0 मीटर चौड़ी पट्टियां बना लें, जिन की लंबाई खेत मुताबिक कम या ज्यादा हो सकती है. हर पट्टी के बीच 30 सेंटीमीटर की नाली रखें. इन नालियों की मिट्टी नाली बनाते समय पट्टियों पर डालने से वे ऊंची हो जाती हैं.

ये नालियां जरूरत के मुताबिक सिंचाई व जल निकास के लिए मददगार होती हैं. रोपणी में 8 से 10 सेंटीमीटर के अंतर से कतारों में बोआई करने से रखरखाव और रोपाई के लिए पौधे उखाड़ने में आसानी होती है.

कम पानी में भी हो सकता है धान का उत्पादन : सूखा प्रतिरोधी धान की खेती करना अब मुमकिन हो गया है. गेहूं की तरह अब चावल उगाने के लिए भी नई तकनीक की खोज हो गई है. अब धान के खेत को हमेशा पानी से भरा हुआ रखे बिना भी इस की खेती की जा सकती है. नई तकनीक से धान की फसल के लिए पानी की जरूरत में 40 से 50 फीसदी तक कमी करने में मदद मिलेगी.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और फिलीपींस अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) ने संयुक्त रूप से यह तकनीक विकसित की है. इस परियोजना में कटक स्थित केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) की भी भागीदारी है. कटक स्थित संस्थान ने ही धान की वैसी किस्मों की पहचान की है, जिन्हें दूसरी फसलों की तरह कुछ दौर की सिंचाई के जरीए उगाया जा सकता है.

संस्थान ने खेती की ऐसी विधियों की भी खोज की है, जिन के जरीए धान की ऐसी किस्मों से करीबकरीब उतनी उपज हो सकती है, जितनी सामान्य तौर पर ज्यादा पैदावार वाली धान की किस्मों से होती है.

तकनीकी तौर पर यह एरोबिक राइस कल्टीवेशन कहलाता है. इस तकनीक में धान के खेत में स्थिर पानी की जरूरत नहीं होती और न ही धान के छोटे पौधे तैयार करने की जरूरत होती है, जैसा कि आमतौर पर होता है.

इस तकनीक में कुशलता से तैयार किए गए खेतों में सीधे बीज बो दिए जाते हैं और इस तरह मजदूरी की लागत की भी बचत हो जाती है.

इस लड़की ने खुद बनाया अपने रेप का वीडियो

कहते हैं आबरू किसी नारी का अ​स्तित्व होता है. लेकिन आज का समाज ऐसा हो गया है जहां सबसे ज्यादा इज्जत म​हिलाओं की ही लूटी जा रही है. आज महिलाएं हर रोज, हर पल रेप का शिकार हो रही हैं. हम आपको एक ऐसी ही कहानी बताने जा रहे हैं जिसमें इस महिला ने अपने रेप का वीडियो खुद ही बना डाला. जाहिर सी बात है इस खबर को सुनकर आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन इसमें सच्चाई है.

आप को जानकारी के लिए बता दें कि ऑस्ट्रेलिया की एक 31 साल की वीडियो आर्टिस्ट सोफिया इन दिनों एक नए प्रोजक्ट डिसमेंटल मेल पावर पर काम कर रही हैं. इस महिला को काम करने का इतना जुनूनू सवार हुआ ​कि उसने अपने ही रेप का वीडियो बना दिया.

इस वीडियो में आप सोफिया को साफ देख सकते हैं, क्योंकि इस महिला अपना चेहरा सामने की ओर करके रखा लेकिन रेपिस्ट का चेहरा नहीं दिखाई दे रहा है. इस वीडियो में रेप करने वाले शख्स का केवल हाथ ही दिखाई दे रहा है. ये वीडियो कुल तीन मिनट का है.

रेप का ये वीडियो सोफिया ने अपने न्यूर्याक स्थित फ्लैट पर बनाया है. हालांकि रेप करने वाला सख्श सोफिया से बिल्कुल ही अनजान है. इस तीन मिनट के वीडियो में रेप की जो घटना दिखाई गई वो पूर्णतया सच्ची है. इस रेप वीडियो के बारे में सोफिया का कहना है कि ये मेरे प्रोजेक्ट का ही एक हिस्सा है. इस वीडियो को अगले सप्ताह मेलबोर्न गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा.

आपको बतादें कि सोफिया महिला प्रधान मुद्दों कई काम कर चुकी है. और इन्होंने अब तक जो भी वीडियो बनाएं वो इसी विषय पर आधारित होते हैं. सोफिया ने अपने वीडियो के बारे में बताते हुए कहा इस वीडियो से गंदी मानसिकता वाले लोगों को सबक मिलेगा.

रात होते ही यहां लड़कियां उतार देती हैं कपड़े और करती हैं ये काम…

अगर देखा जाये तो लड़कियों के कपड़ों पर हमारे देश में चर्चा चलती ही रहती है और कुछ महान आत्माओं का तो ये भी कहना है कि लड़कियों का रेप होने का कारण भी उनके पहनावा ही होता है. हमेशा लड़कियों को उनके पहनावे को लेकर टोका जाता है कि कपड़े ठीक से पहने, लेकिन भारत में एक ऐसी जगह भी हैं जहां खुद घर वाले अपने घर की अविवाहित लड़कियों को कपड़े उतरवाने पर मजबूर कर रहे हैं. जी हां, आपको हैरानी जरूर होगी लेकिन ये सच है. और इतना ही नहीं लड़कियों के कपड़े उतरवाकर उनको घर से बाहर भेजा जाता है, आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला.

बिहार राज्य में एक ऐसी जगह जहां पर अविवाहित लड़कियों को कपड़े उतारकर घर से बाहर निकलना पड़ता हैं. इस जगह पर हर घर से अविवाहित लड़कियाँयां रोज सूरज डूबने के बाद अपने-अपने घरों से कपड़े उतारकर निकलने लग जाती हैं. और घर से बाहर बिना कपड़ो के रहती हैं

खबरों के मुताबिक इस गांव की ये लड़कियां रोज शाम होने के बाद अपने कपड़े उतारकर अपने-अपने खेतों में जाती हैं. और वहां पर बिना कपड़ों के घूमती हैं. जहां घर परिवार अपने बहन-बेटी की इज्जत-आबरु का रखवाला होता है, उधर ये बात आपको हैरान कर देगी कि लड़कियों को खुद उनके घरवाले ही ऐसा करने को मजबूर करते हैं.

बिहार के कईं क्षेत्रों में कम बारिश के कारण लोगों की फसलें खराब होती जा रही हैं. और कम बारिश होने पर लोग यही धारणाए अपनाते हैं. और अपनी बेटियों को ऐसा करने के लिये कहते हैं. वहां के लोगो का मानना है कि ऐसे अपने घर की लड़कियों को बिना कपड़ो के अपने-अपने खेतों में भेजने से बारिश के देवता को शर्मिंदा किया जाता है. ताकि मानसून बारिश के लिये देवता को मजबूर किया जा सके.

वहां पर कईं सालों से ढंग से बारिश नहीं हुई और इस कारण उनकी फसल खराब होती जा रही है, वहां के लोगों का दृढ़ निश्चय है कि जब तक ढंग से बारिश नहीं होगी, तब तक ये प्रथा जारी रखेंगे.

युवक ने किया महिला के साथ सहवास का वीडियो औनलाइन पोस्ट

एक आदमी ने बेहद शर्मनाक हरकत करते हुए एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए वीडियो प्राइवेट ऑनलाइन ग्रुप में पोस्ट कर दिया. बेशर्मी की हद पार करते हुए उसने महिला को हजारों लोगों के बीच बदनाम कर डाला.

ऑस्ट्रेलिया के इस आदमी ने अभद्र भाषा में इस वीडियो के बारे में लिखा है. ‘I Went Through a Tubby Phase And Landed This 130 kg Beast’, इस कैप्शन के साथ उसने इसे एक ग्रुप में शेयर किया है, जिसके 14,000 सदस्य हैं.

फेसबुक ने भले ही कोई कदम न उठाया हो, लेकिन ऐसा करना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि गैर-कानूनी भी है.

 

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें