सौजन्य- सत्यकथा
18सितंबर, 2021 को सुबहसुबह ही काशीपुर हरिद्वार नैशनल हाईवे पर एक औरत की लाश दिखते ही क्षेत्र में सनसनी फैल गई. लाश की बुरी हालत हो चुकी थी. रात में न जाने कितने वाहन उस के ऊपर से गुजर चुके थे. करीब 40 फीट तक सड़क पर महिला के घिसटने व टायरों के निशान मौजूद थे.
घटनास्थल को देखते ही लग रहा था कि महिला सड़क किनारे चल रही होगी. उसी वक्त किसी तेज गति से आ रहे वाहन ने महिला को टक्कर मार दी होगी. उस के बाद वह महिला वाहन की चपेट में आ कर काफी दूर तक घिसटती चली गई थी. बाद में काफी खून का रिसाव हो जाने के कारण महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी.
जैसेजैसे यह खबर क्षेत्र में फैलती गई, घटनास्थल पर लोगों का हुजूम उमड़ता गया. आनेजाने वाले वाहन चालक भी उस महिला के शव को देखने के लिए अपनी गाडि़यां रोकरोक कर चला रहे थे. लोगों में जानने की उत्सुकता थी कि पता नहीं यह औरत कौन है और उस के साथ क्या हुआ.
तभी वहां पर मौजूद लोगों में से किसी ने थाना अफजलगढ़ में फोन कर इस घटना की जानकारी दी. हाईवे पर एक महिला की लाश पड़ी होने की सूचना पाते ही अफजलगढ़ थानाप्रभारी एम.के. सिंह व सीओ सुनीता दहिया पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.
मौके पर जा कर पुलिस ने देखा कि महिला का चेहरा बुरी तरह से कुचला हुआ था. मामला पेचीदा होने के कारण पुलिस ने फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया था. पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए घटनास्थल से सारे साक्ष्य जुटाए.
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महिला के पहनावे को देख कर लग रहा था कि वह किसी अच्छे परिवार से रही होगी. उस ने नीले रंग की जींस और उस पर लाल टौप पहन रखा था. महिला के शव के दोनों ओर दूर तक खून से सने टायरों की रगड़ के निशान भी मिले थे.
पुलिस ने अपनी तहकीकात करते हुए उस महिला की शिनाख्त कराने की कोशिश की. किंतु वहां पर मौजूद लोगों ने उसे पहचानने से इंकार कर दिया था. मृत महिला के पास न तो किसी तरह की कोई आईडी ही पाई गई थी, न ही कोई मोबाइल फोन और न कोई पर्स ही पाया गया था. महिला के बाएं हाथ पर अंगरेजी में प्रवदीप नाम गुदा हुआ था.
जब किसी भी तरह से उस महिला की शिनाख्त नहीं हो पाई तो पुलिस ने आसपास के जिलों के थानों में इस की सूचना प्रेषित करा दी थी.
साथ ही सोशल मीडिया पर भी महिला का शव मिलने से संबधित पोस्ट वायरल की गई. लेकिन कहीं से भी उस महिला के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.
इस पर पुलिस ने अपनी काररवाई को आगे बढ़ाते हुए उस की लाश का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए सील कराने की काररवाई भी शुरू कर दी थी. तभी सोशल मीडिया पर महिला के कपड़े व हाथ पर प्रवदीप लिखे होने की जानकारी मिलते ही उस के मायके वाले मौके पर पहुंचे.
महिला के मायके वालों के पहुंचते ही उस की पहचान 30 वर्षीय मनप्रीत कौर पत्नी सुखवीर सिंह, निवासी भीकमपुर बन्नाखेड़ा, बाजपुर जिला ऊधमसिंह नगर, उत्तराखंड के रूप में हुई.
महिला के मायके वालों ने उस के बारे में बताया कि मृतका करीब 6 साल से अपने पति सुखवीर से अलग काशीपुर में रह रही थी. कल शाम वह अपने घर से निकली थी. लेकिन उस के बाद वह वापस नहीं लौटी.
मनप्रीत कौर की लाश मिलने की सूचना पाते ही उस का पति सुखवीर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गया था. पुलिस पूछताछ में सुखवीर सिंह ने बताया कि मनप्रीत काफी समय पहले से ही उस से अलग काशीपुर में रह रही थी.
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वहीं पर रहते हुए उस की दोस्ती मानियावाला गांव निवासी नफीस से हो गई थी. दोस्ती होने के बाद से ही वह उसी के साथ रह रही थी. सुखवीर ने पुलिस को बताया कि उस की हत्या भी जरूर नफीस ने ही की होगी.
इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने नफीस को गिरफ्तार करने के लिए उस के घर पर दबिश दी, लेकिन वह अपने घर से फरार मिला.
इस से पुलिस यह तो समझ ही चुकी थी कि मनप्रीत कौर के मर्डर में उस का ही हाथ रहा होगा. इसी कारण वह पुलिस के डर की वजह से घर से फरार हो गया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के लिए अपना जाल फैलाया.
पुलिस ने उस के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लगाते हुए उस की काल डिटेल्स भी निकलवा ली थी. जिस के कारण फरार नफीस की सच्चाई सामने आने लगी थी.
काल डिटेल्स से पता चला कि उस रात उस ने मनप्रीत से कई बार बात की थी. यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने फरार नफीस को गिरफ्तार करने के लिए जगहजगह अपने मुखबिर भी तैनात कर दिए थे.
एक मुखबिर की सूचना पर 19 सितंबर, 2021 की शाम को ही आरोपी नफीस को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पुलिस पूछताछ करने के दौरान नफीस ने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया.
उस ने बताया कि उस का मृतका के साथ कई साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था. वह स्वयं पहले ही शादीशुदा है. उस के बावजूद मृतका उस पर शादी के लिए दबाव बना रही थी. जिस से तंग आ कर उसे मजबूरन उस की हत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
हत्या के इस केस पर पड़ा परदा उठते ही पुलिस ने आरोपी नफीस की निशानदेही पर मर्डर में प्रयुक्त हुए लोहे की रौड और मृतका को कुचलने में प्रयोग किए गए ट्रक को भी अपने कब्जे में ले लिया था. साथ ही पुलिस ने आरोपी के पास से मृतका का मोबाइल फोन व उस का आधार कार्ड भी बरामद कर लिया.
मृतका देखनेभालने में बहुत ही सुंदर थी. आरोपी पिछले 4 साल से उस महिला के साथ ही रह रहा था. आरोपी मृतका मनप्रीत को अपनी बीवी से ज्यादा प्यार करता था. फिर ऐसा क्या हुआ कि उसे अपनी पे्रमिका को इतनी दर्दनाक मौत देने पर मजबूर होना पड़ा.
यह कहानी उन शादीशुदा औरतों के लिए एक सबक है, जो शादीशुदा होने के बावजूद भी पराए मर्दों के प्रेम में फंस जाती हैं. उस के साथ ही वह अपनी बसीबसाई जिंदगी को तबाह कर लेती हैं.
मृतका मनप्रीत कौर शादीशुदा और एक बच्ची की मां थी. गांव हरियावाला, उत्तराखंड निवासी केसर सिंह ने अब से लगभग 8 साल पहले अपनी बेटी मनप्रीत कौर की शादी उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर के गांव भीकमपुर निवासी सुखबीर सिंह के साथ की थी.
हालांकि हरनाम सिंह काफी समय से गांव भीकमपुर में रहते थे. लेकिन उन की अपनी जुतासे की बिलकुल भी जमीन नहीं थी.
परिवार बड़ा था. वह स्वयं एक ट्रक ड्राइवर थे, जिस के सहारे ही उन्होंने अपने 9 सदस्यों के परिवार को जैसेतैसे चला रखा था. ट्रक ड्राइवर रहते हुए ही उन्होंने अपनी 5 बेटियों और 2 बेटों की शादी भी कर दी थी.
अगले भाग में पढ़ें- पत्नी की बात सुनते ही सुखवीर परेशान हो उठा
पाचनतंत्र भोजन को इस तरह पचाता है कि शरीर इस से मिले पोषक पदार्थों और ऐनर्जी का इस्तेमाल कर सके. कुछ प्रकार के भोजन जैसे सब्जियां और योगहर्ट पचाने में आसान होते हैं. विशेष प्रकार का भोजन खाने या अचानक आहार में कुछ बदलाव लाने से पाचनतंत्र की समस्याएं हो सकती हैं.
अगर पाचनतंत्र ठीक से काम न कर सके तो अपच की समस्या हो सकती है. अपच आमतौर पर कई बीमारियों और जीवनशैली से जुड़े कारकों की वजह से होता है. पाचन संबंधी समस्याओं के लक्षण आमतौर पर कुछ इस तरह होते हैं:
पेट फूलना, गैस, कब्ज, डायरिया, उलटी, सीने में जलन.
आहार जो पाचनतंत्र के लिए फायदेमंद है
छिलके वाली सब्जियां: सब्जियों में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो पाचन के लिए महत्त्वपूर्ण है. फाइबर कब्ज दूर करने में मदद करता है. सब्जियों के छिलके में फाइबर बहुत अधिक होता है, इसलिए अच्छा होगा कि आप पूरी सब्जी खाएं. आलू, बींस और फलियों के छिलकों में फाइबर बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है.
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फल: फलों में फाइबर बहुत अधिक पाया जाता है. इन में विटामिन और मिनरल्स भी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं जैसे विटामिन सी और पोटैशियम. उदाहरण के लिए सेब, संतरा और केला पाचन के लिए बेहद कारगर हैं.
साबूत अनाज से युक्त आहार: साबूत अनाज भी घुलनशील और अघुलनशील फाइबर का अच्छा स्रोत है. घुलनशील फाइबर बड़ी आंत में जैल जैसा पदार्थ बना लेता है, जिस से पेट भरा महसूस करते हैं और शरीर में ग्लूकोस का अवशोषण धीरेधीरे होता रहता है. अघुलनशील फाइबर कब्ज से बचाने में मदद करता है. फाइबर पाचनतंत्र में अच्छे बैक्टीरिया को पोषण भी देता है.
खूब तरल का सेवन करें: त्वचा को स्वस्थ रखने, इम्यूनिटी और ऊर्जा बढ़ाने के लिए शरीर को पानी की जरूरत होती है. पानी पाचन के लिए भी जरूरी है. जिस तरह हमारे पाचनतंत्र में अच्छे बैक्टीरिया को होना जरूरी है उसी तरह तरल भी बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण है.
अदरक: अदरक पाचन की समस्याओं जैसे पेट फूलना में राहत देती है. सूखा अदरक पाउडर बेहतरीन मसाला है, जो भोजन को बेहतरीन स्वाद देता है. अदरक का इस्तेमाल चाय बनाने में भी किया जाता है. अच्छी गुणवत्ता का अदरक चुनें. चाय के लिए ताजा अदरक लें.
हलदी: हलदी आप की किचन में मौजूद ऐंटीइनफ्लैमेटरी और ऐंटीकैंसर मसाला है. इस में करक्युमिन पाया जाता है, जो पाचनतंत्र के भीतरी स्तर को सुरक्षित रखता है, अच्छे बैक्टीरिया को पनपने में मदद करता है और बोवल रोगों एवं कोलोरैक्टल कैंसर के उपचार में भी कारगर पाया गया है.
योगहर्ट: इस में प्रोबायोटिक्स होते हैं. ये लाइव बैक्टीरिया और यीस्ट हैं, जो पाचनतंत्र के लिए फायदेमंद होते हैं.
असंतृप्त वसा: इस तरह की वसा यानी फैट शरीर को विटामिनों के अवशोषण में मदद करते हैं. इन के साथ फाइबर पाचन को आसान बनाता है. पौधों से मिलने वाले तेल जैसे जैतून का तेल अनसैचुरेटेड फैट का अच्छा स्रोत है, लेकिन वसा का इस्तेमाल हमेशा ठीक मात्रा में करें. एक वयस्क को रोजाना अपने आहार में 2000 कैलोरी की जरूरत होती है, जिस में वसा की मात्रा 77 ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए.
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क्या न खाएं
कुछ खाद्य एवं पेयपदार्थों के कारण पेट फूलना, सीने में जलन और डायरिया जैसी समस्याएं होती हैं. उदाहरण के लिए:
तेलीय/वसा युक्त आहार: तले और मसालेदार भोजन के सेवन से बचें, क्योंकि यह आप के पाचनतंत्र के लिए कई समस्याओं का कारण बन सकता है. ऐसे आहार को पचने में ज्यादा समय लगता है. इस कारण कब्ज, पेट फूलना या डायरिया जैसी समस्याएं होती हैं. तले खाद्यपदार्थों के सेवन से ऐसिडिटी और पेट फूलना जैसी समस्याएं होती हैं.
मसालेदार भोजन: मसालेदार भोजन पेट में दर्द या मलत्याग करते समय असहजता का कारण बन सकता है.
प्रोसैस्ड फूड: अगर आप को पाचन संबंधी समस्याएं हैं. प्रोसैस्ड खाद्यपदार्थों का सेवन न करें, इस तरह के आहार में फाइबर कम मात्रा में होता है, जबकि कृतिम चीनी, कृत्रिम रंग, नमक एवं प्रीजरर्वेटिव बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो आप की पाचन संबंधी समस्याओं को और बदतर बना सकते हैं, साथ ही फाइबर न होने के कारण इस तरह के भोजन को पचाने के लिए शरीर के ज्यादा काम करना पड़ता है और यह कब्ज का कारण बन सकता है.
रिफाइंड चीनी, सफेद रिफाइंड चीनी इनफ्लैमेटरी कैमिकल बनाती है और पाचनतंत्र में डिसबायोसिस को बढ़ावा देती है. इस से पाचनतंत्र में बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है. इस तरह की चीनी हानिकर बैक्टीरिया को बढ़ावा देती है.
शराब: शराब के सेवन से डीहाइड्रेशन हो जाता है, जो कब्ज और पेट फूलने का कारण बन सकता है. यह पेट एवं पाचनतंत्र के लिए नुकसानदायक है और लिवर के मैटाबोलिज्म में बदलाव ला सकती है. शराब ऐसिडिक होती है, इसलिए स्टमक यानी आमाशय के भीतरी अस्तर को नुकसान पहुंचा सकती है.
कैफीन: कैफीन, चाय, कौफी, चौकलेट, सौफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, बेक्ड फूड, आईसक्रीम में पाया जाता है. यह पाचनतंत्र के मूवमैंट को तेज करता है, जिस से पेट जल्दी खाली हो जाता है. इस से पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
कार्बोनेटेड पेय: इन में मौजूद गैस पेट फूलना जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है. इस का असर आमाशय के भीतरी स्तर पर भी पड़ता है. साथ ही इस तरह के पेयपदार्थों में चीनी बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है, जो पाचन की समस्याओं को और बढ़ा सकती है. कार्बोनेटेड पेय, शरीर में इलैक्ट्रोलाइट के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं, जिस से शरीर डीहाइड्रेट हो सकता है.
पाचन को बेहतर बनाने के लिए अच्छी आदतें
चबाना: खाने को हमेशा अच्छी तरह चबा कर खाएं. आगे भोजन का पचना आसान हो जाता है, क्योंकि हारमोन इस पर बेहतर काम कर पाते हैं.
टेबल पर खाएं: खाते समय आप का ध्यान खाने पर हो, टेबल पर आराम से बैठ कर खाएं. खाते समय स्क्रीन के सामने न रहें.
रिलैक्स हो कर आराम से खाएं: अकसर हम काम की भागदौड़ में जल्दबाजी में खाते हैं, कभीकभी हम खाने का आनंद नहीं लेते. लेकिन जब हम रिलैक्स हो कर खाना खाते हैं, तो यह अच्छी तरह पचता है. अगर हम तनाव में होंगे, तो शरीर पचाने पर कम ध्यान देगा.
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सब के साथ मिल कर खाएं: इस से न केवल खाना पचाने में मदद मिलती है, बल्कि आपस में प्यार भी बढ़ता है और हम अपने वजन को भी नियंत्रित रख पाते हैं. परिवार में एकसाथ मिल कर खाना खाने से बच्चों और किशोरों को फायदा होता है. उन का आत्मविश्वास बढ़ता है, उग्र व्यवहार, खाने की समस्याओं, नशे की लत, अवसाद, आत्महत्या जैसे खयालों में कमी आती है.
-डा. सुधा कंसल, रैसपिरेटरी स्पैश्यलिस्ट, इंद्रप्रस्थ अपोलो हौस्पिटल, दिल्ली.
रजत का मन करता उस के दोस्तों की बीवियों की तरह छवि भी तरहतरह की ड्रैसेज पहने, जो शालीन पर फैशनेबल हों. कम से कम चूड़ीदार सूट, अनारकली सूट ये तो वह पहन ही सकती है. यही सोच कर वह एक दिन उसे किसी तरह पटा कर बाजार ले गया. लेकिन छवि कोई भी ड्रैस, यहां तक कि सूट खरीदने को भी तैयार नहीं हुई.
‘‘अरे ये सब… मांपापा क्या कहेंगे… मैं नहीं पहन सकती ये सब.’’
‘‘मेरे सभी दोस्तों की पत्नियां पहनती हैं छवि… यह अनारकली सूट ले लो… तुम पर खूब फबेगा… अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है… आजकल तो 60 साल की औरतें भी ये सब पहनती हैं.’’
‘‘जो पहनती हैं उन्हें पहनने दो. मैं नहीं पहन सकती. उन के सासससुर उन के साथ नहीं रहते होंगे… मांपापा क्या कहेंगे.’’
‘‘छवि मैं जानता हूं अपने मम्मीपापा को… वे पुराने विचारों के नहीं हैं… मैं ने हर तरह का माहौल देखा है… वे आर्मी अफसर की पत्नी हैं… वे तुम्हें ये सब पहने देख कर खुश ही होंगे.’’
मगर छवि ने रजत का प्रस्ताव सिरे से नकार दिया. जब छवि अनारकली सूट जैसी शालीन ड्रैस पहनने को तैयार नहीं हुई तो जींसटौप क्या पहनेगी. पापा सही कहते थे, घर का रहनसहन, स्कूलिंग, शिक्षादीक्षा इन सब का असर इंसान की पर्सनैलिटी और विचारों पर पड़ता है. पत्नी को तरहतरह से सजानेसवारने का रजत का शौक धीरेधीरे दम तोड़ गया.
रजत नौकरी में ऊंचे पदों पर पहुंचता गया. बच्चे बड़े होते गए. मातापिता वृद्ध होते गए और फिर एक दिन इस दुनिया से चले गए. छवि की जैसेजैसे उम्र बढ़नी शुरू हुई तो खुद से बेपरवाह उस का शरीर भी फैलना शुरू हो गया. चेहरे की रौनक जो उम्र की देन थी बिना देखभाल के बेजान होने लगी. लंबे लहराते बाल उम्र के साथ पतली पूंछ जैसे रह गए. वह उन्हें लपेट कर कस कर जूड़ा बना लेती, जो उस के मोटे चेहरे को और भी अनाकर्षक बना देता.
रजत कहता, ‘‘छवि मैं तुम में 20-22 साल की लड़की नहीं ढूंढ़ता, पर चाहता हूं कि तुम अपनी उम्र के अनुसार तो खुद को संवार कर रखा करो… 42 की उम्र ज्यादा नहीं होती है.’’
मगर छवि पर कोई असर नहीं पड़ता. धीरेधीरे रजत ने बोलना ही छोड़ दिया. वह खुद 46 की उम्र में अभी भी 36 से अधिक नहीं लगता था. अपने मोटापे, पहनावे और रहनसहन की वजह से छवि उम्र में उस से बड़ी लगने लगी थी. अब रजत का उसे साथ ले जाने का भी मन नहीं करता. ऐसा नहीं था कि वह दूसरी औरतों की तरफ आकर्षित होता था पर तुलना स्वाभाविक रूप से हो जाती थी.
‘‘आप अभी तक यहां बैठे हैं… लाइट भी नहीं जलाई,’’ छवि लाइट जलाते हुए बोली, ‘‘चलो खाना खा लो.’’
खाना खा कर रजत सो गया. आज पुरानी बातें याद कर के उस के मन की खिन्नता और बढ़ गई थी. छवि के प्रति जो अजीब सा नफरत का भाव उस के मन में भर गया था वह और भी बढ़ गया.
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दूसरे दिन रजत औफिस पहुंचा. उस के एक कुलीग का तबादला हुआ था. उस की जगह कोई महिला आज जौइन करने वाली थी. रजत अपने कैबिन में पहुंचा तो चपरासी ने आ कर उसे सलाम किया. फिर बोला, ‘‘साहब आप को बुला रहे हैं.’’
रजत बौस के कमरे की तरफ चल दिया. इजाजत मांग कर अंदर गया तो उस के बौस बोले, रजत ये रीतिका जोशी हैं. सहदेव की जगह इन्होंने जौइन किया है. इन्हें इन का काम समझा दो.’’
रजत ने पलट कर देखा तो खुशी से बोला, ‘‘अरे, रीतिका तुम?’’
‘‘रजत तुम यहां…’’ रीतिका सीट से उठ खड़ी हुई.
‘‘आप दोनों एकदूसरे को जानते हैं?’’
‘‘जी, हम दोनों ने साथ ही इंजीनियरिंग की थी.’’
‘‘फिर तो और भी अच्छा है… रीतिका रजत आप की मदद कर देंगे…’’
‘‘जी, सर,’’ कह कर दोनों बौस के कमरे से बाहर आ गए.
रीतिका को उस का काम समझा कर लंचब्रेक में मिलने की बात कह कर रजत अपने लैपटौप में उलझ गया. लंचब्रेक में रीतिका उस के कैबिन में आ गई, ‘‘लंचब्रेक हो गया… अभी भी लैपटौप पर नजरें गड़ाए बैठे हो.’’
‘‘ओह रीतिका,’’ वह गरदन उठा कर बोला. फिर घड़ी देखी, ‘‘पता ही नहीं चला… चलो कैंटीन चलते हैं.’’
‘‘क्यों, तुम्हारी पत्नी ने जो लंच दिया है उसे नहीं खिलाओगे?’’
‘‘वही खाना है तो उसे खा लो,’’ कह रजत टिफिन खोलने लगा. खाने की खुशबू चारों तरफ बिखर गई.
दोनों खातेखाते पुरानी बातों, पुरानी यादों में खो गए. रजत देख रहा था रीतिका में उम्र के साथसाथ और भी आत्मविश्वास आ गया था. साधारण सुंदर होते हुए भी उस ने अपने व्यक्तित्व को ऐसा निखारा था कि अपनी उम्र से 10 साल कम की दिखाई दे रही थी.
रजत छेड़ते हुए बोला, ‘‘क्या बात है, तुम्हारे पति तुम्हारा बहुत खयाल रखते हैं… उम्र को 7 तालों में बंद कर रखा है.’’
‘‘हां,’’ वह हंसते हुए बोली, ‘‘जब उम्र थी तब तुम ने देखा नहीं… अब ध्यान दे रहे हो.’’
‘‘ओह रीतिका तुम भी कहां की बात ले बैठी… ये सब संयोग की बातें हैं,’’ उस का कटाक्ष समझ कर रजत बोला.
‘‘अच्छा छोड़ो इन बातों को. मुझे घर कब बुला रहे हो? तुम्हारी पत्नी से मिलने का बहुत मन है. मैं भी तो देखूं वह कैसी है, जिस के लिए तुम ने कालेज में कई लड़कियों के दिल तोड़े थे.’’
रजत चुप हो गया. थोड़ी देर अपनेअपने कारणों से दोनों चुप रहे. फिर रीतिका ही चुप्पी तोड़ती हुई बोली, ‘‘लगता है घर नहीं बुलाना चाहते.’’
‘‘नहींनहीं ऐसी बात नहीं. जिस दिन भी फुरसत हो फोन कर देना. उस दिन का डिनर घर पर साथ करेंगे.’’
‘‘ठीक है.’’
फिर अगले काफी दिनों तक रीतिका बहुत बिजी रही. नयानया काम संभाला था. जब फुरसत मिली तो एक रविवार को फोन कर दिया, ‘‘आज शाम को आ रही हूं तुम्हारे घर, कहीं जा तो नहीं रहे हो न?’’
‘‘नहींनहीं, तुम आ जाओ… डिनर साथ करेंगे.’’
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शाम को रीतिका पहुंच गई. उस दिन तो वह और दिनों से भी ज्यादा स्मार्ट व सुंदर लग रही थी. रजत को उसे छवि से मिलाते हुए भी शर्म आ रही थी. फिर खुद को ही धिक्कारने लगा कि क्या सोच रहा है वह.
तभी छवि ड्राइंगरूम में आ गई.
‘‘छवि, यह है रीतिका… मेरे साथ इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ती थी.’’
छवि का परिचय कराते हुए रजत ने रीतिका के चेहरे के भाव साफ पढ़ लिए. वह जैसे कह रही हो कि यही है वह, जिस के लिए तुम ने मुझे ठुकरा दिया था, वह थोड़ी देर तक हैरानी से छवि को देखती रही.
‘‘बैठिए न खड़ी क्यों हैं,’’ छवि की आवाज सुन कर वह चौकन्नी हुई. छवि और रीतिका की पर्सनैलिटी में जमीनआसमान का फर्क था. दोनों की बातचीत में कुछ भी कौमन नहीं था, इसलिए ज्यादा बातें रजत व रीतिका के बीच ही होती रहीं पर साफ दिल छवि ने इसे अन्यथा नहीं लिया.
खाना खा कर रीतिका जाने लगी तो रजत कार की चाबी उठाते हुए बोला, ‘‘छवि, मैं रीतिका को घर छोड़ आता हूं.’’
अपनेअपने झंझावातों में उलझे रजत व रीतिका कार में चुप थे. तभी रजत अचानक बोल पड़ा, रीतिका छवि पहले बहुत खूबसूरत थी.
‘‘हूं.’’
‘‘पर उसे न सजनेसंवरने, न पहननेओढ़ने और न ही पढ़नेलिखने का शौक है… किसी भी बात का शौक नहीं रहा उसे कभी.’’
‘हूं,’ रीतिका ने जवाब दिया.
सौजन्य- सत्यकथा
मध्य प्रदेश की संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर शहर का उपनगरीय इलाका रांझी पूरे देश में व्हीकल फैक्ट्री के लिए जाना जाता है, जहां पर भारतीय सेना के उपयोग में आने वाले व्हीकल का निर्माण किया जाता है. रांझी के झंडा चौक के पास ही नंदकिशोर वंशकार का परिवार रहता है. नंदकिशोर की रांझी के बाजार में एक छोटी सी दुकान है, जिस में वह टूव्हीलर वाहनों के सीट कवर बनाने का काम करता है.
नंदकिशोर के परिवार में उस की पत्नी सुधा, 2 बेटे और 2 बेटियां खुशबू और आरजू थीं. 23 साल की बड़ी बेटी खुशबू मौडर्न खयालों की थी, जिसे सजनेसंवरने के साथ घूमनेफिरने का भी शौक था.
मई 2021 की 31 तारीख की बात थी. दोपहर के करीब डेढ़ बजे का समय था. खुशबू अपनी मां सुधा से बोली, ‘‘मम्मी लौकडाउन की वजह से कई दिनों से मैं घर से बाहर नहीं निकल पाई, इसलिए आज ब्यूटीपार्लर जा रही हूं.’’
सुधा बेटी की फितरत जानती थी इसी वजह से उस ने यह कहते हुए खुशबू को ब्यूटीपार्लर जाने की अनुमति दे द
ी कि जा तो रही है, लेकिन जल्दी घर आ जाना.
इस के बाद खुशबू इठलाती हुई ब्यूटीपार्लर जाने की बोल कर घर से निकल गई और सुधा खाना बनाने में व्यस्त हो गई.
रात के 8 बजे तक जब खुशबू घर नहीं लौटी तो सुधा परेशान हो गई. सुधा ने जब खुशबू के मोबाइल पर काल किया तो उस का फोन स्विच्ड औफ बता रहा था. उस ने अपनी छोटी बेटी आरजू को आसपास के घरों में खुशबू को खोजने के लिए भेज दिया.
इसी दौरान सुधा ने अपने पति नंदकिशोर को फोन कर कहा, ‘‘आप जल्दी घर आ जाइए, खुशबू दोपहर को ब्यूटीपार्लर गई थी, लेकिन अभी तक घर नहीं लौटी है.’’
यह सुन कर नंदकिशोर भी घबरा गया. वह पत्नी को तसल्ली देते हुए बोला, ‘‘चिंता मत करो, मैं जल्द ही घर पहुंच रहा हूं.’’
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इधर आरजू आसपास के घरों में चक्कर लगा कर वापस आ गई थी, लेकिन खुशबू कहीं नहीं थी. करीब 9 बजे जैसे ही नंदकिशोर अपनी दुकान से घर पहुंचा तो सुधा बहुत घबराई हुई हालत में थी. वह बारबार नंदकिशोर से कह रही थी, ‘‘आप जल्दी से खुशबू का पता कीजिए. आजकल समय बहुत खराब है.’’
नंदकिशोर भी रोज ही लड़कियों के अपहरण और उन के साथ होने वाली जोरजबरदस्ती की घटनाएं सुनता रहता था, इसलिए वह भी किसी अज्ञात आशंका के चलते भयभीत हो गया. उस के मन में बुरेबुरे खयाल आने लगे.
नंदकिशोर ने अपने पड़ोसी को साथ ले कर रांझी इलाके के 4-5 ब्यूटीपार्लरों में जा कर खुशबू के बारे में पूछताछ की, लेकिन पता चला कि खुशबू किसी पार्लर में नहीं पहुंची थी. सुधा सब रिश्तेदारों को फोन लगा कर बेटी के बारे में पूछ चुकी थी. खुशबू के छोटे भाईबहन भी अपने घर के आसपास अपनी बहन की तलाश कर चुके थे, लेकिन कहीं से भी उस की कोई खबर नहीं मिल रही थी.
तब तक रात के 12 से ज्यादा का वक्त हो चुका था. थकहार कर नंदकिशोर अपने घर आ गया. घर में तो जैसे मातम छाया हुआ था. चिंता और भय के माहौल में जैसेतैसे पूरे परिवार ने रात काटी और सुबह होते ही नंदकिशोर अपनी पत्नी सुधा के साथ रांझी पुलिस स्टेशन पहुंच गया.
थाने में टीआई आर.के. मालवीय को पूरी जानकारी बताते हुए नंदकिशोर ने बेटी की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई. सुधा रोरो कर टीआई मालवीय से बेटी को खोजने की गुहार लगा रही थी. टीआई आर.के. मालवीय ने खुशबू की फोटो, मोबाइल नंबर ले कर सूचना दर्ज करते हुए उन्हें भरोसा दिया, ‘‘आप चिंता न करें, पुलिस जल्द से जल्द आप की बेटी को खोज निकालेगी.’’
अगले भाग में पढ़ें- आकाश और खुशबू दसवीं कक्षा तक जबलपुर के स्कूल में साथसाथ ही पढ़े थे
Writer- पूनम पाठक
‘‘इस परवर को यहीं खत्म कर दो रंजन, मैं तुम से प्यार करने लगी हूं. सच में तुम मेरा पहला प्यार हो. परी के पापा आशीष को मैं ने कभी इतना प्यार नहीं किया,’’ रंजन के गले में अपनी बांहें डालते हुए नेहा बोली, ‘‘तुम्हें जब पहली बार देखा तो बस देखती रह गई. तुम्हारे चौड़े सीने और मजबूत बांहों में खो जाने को जी चाहा और जानेअनजाने में तुम से प्यार करने लगी.’’
‘‘मम्मी, मुझे अब नहीं देखना टीवी,’’ हाथ में रिमोट लिए बैडरूम के दरवाजे पर परी खड़ी थी.
‘‘ओके, बस चल ही रहे हैं, बस
2 मिनट मेरी प्यारी परी.’’
‘‘ओके,’’ परी के जाते ही नेहा फिर से रंजन के गले लग गई और बोली, ‘‘रंजन, मैं जानती हूं कि तुम भी मुझे प्यार करते हो और अगर यह सच है, तो तुम्हें आज रात फिर मेरे घर आना होगा. मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी.’’
इस के बाद परी को ले कर नेहा तेज कदमों से बाहर निकल गई.
रात को नेहा की कशिश में बंधे रंजन के बहकते कदम एक बार फिर उस
की चौखट पर जा पहुंचे. पर कहते हैं न कि काठ की हांड़ी बारबार नहीं चढ़ती. यही हाल उन के इस जिस्मानी प्यार का भी हुआ.
जब रंजन कई दिनों तक घर नहीं आया, तो आरती अपने एक रिश्तेदार के संग रंजन के पास फैक्टरी में जा पहुंची. आरती के आ जाने से रंजन की जिंदगी बदल गई. अब वह काम से सीधे घर आता और ज्यादातर समय अपनी पत्नी के संग ही गुजारता.
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इधर रंजन से अचानक हुई इस दूरी से नेहा बौखला उठी. उस ने रंजन को बुलाने के लिए कई बार फोन किए, पर रंजन ने आने में मजबूरी जताई.
नेहा रंजन को फोन कर उस पर जल्द से जल्द मिलने का दबाव बनाने लगी, पर जब रंजन ने कोई जवाब नहीं दिया तो एक दिन भरी दोपहरी में वह रंजन के घर जा पहुंची.
रंजन उस वक्त घर पर नहीं था, पर आरती ने बड़े ही अपनेपन से उस का स्वागत किया. अपनेआप को रंजन का दोस्त बताते हुए नेहा ने बड़ी बेबाकी से आरती को अपने और रंजन के बीच बने गहरे रिश्ते का संकेत देना चाहा, जिसे आरती ने कोई तूल नहीं दिया.
शाम को आरती से इस बात का पता चलते ही रंजन को नेहा पर बहुत गुस्सा आया. इस तरह की हरकत कर के आखिर वह साबित क्या करना चाहती है. रात का खाना खा कर बाहर टहलने के बहाने रंजन नेहा के घर जा पहुंचा.
रंजन को आया देख नेहा मन ही मन अपनी जीत पर मुसकरा उठी. परी सो चुकी थी. रंजन को इतने समय बाद अपने समीप पा कर नेहा की खुमारी बढ़ने लगी. पर रंजन ने अपनी तरफ बढ़ रहे नेहा के हाथों को झटक दिया. अपने प्यार की पहल की इस बेइज्जती पर नेहा तिलमिला गई.
‘‘यह क्या बदतमीजी है रंजन, तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम मेरे प्यार को ठुकराओ?’’
‘‘आखिर तुम चाहती क्या हो?’’
‘‘मैं तो बस तुम्हें चाहती हूं और इतना चाहती हूं कि तुम्हारे पास और किसी की मौजूदगी भी बरदाश्त नहीं कर सकती.’’
‘‘बात को समझने की कोशिश करो नेहा, मैं अब और ज्यादा अपनी पत्नी को धोखे में नहीं रख सकता.’’
‘‘अच्छा, अब बीवी पास है तो तुम्हें मेरी कोई जरूरत नहीं. अपनी बीवी के आते ही तुम ने दूध में गिरी मक्खी की तरह मुझे अपनी जिंदगी से निकाल फेंका. तुम आरती से तलाक ले लो,’’ नेहा गुस्से से उबलने लगी.
‘‘यह मुमकिन नहीं है नेहा,’’ रंजन ने उसे अपने से दूर करते हुए कहा.
‘‘तो क्या आज तक तुम मुझ से सिर्फ खिलवाड़ कर रहे थे? मैं तुम्हें छोड़ूंगी नहीं, सबक सिखा कर रहूंगी,’’ नेहा ने रंजन से कहा.
रंजन ने अपना हाथ छुड़ाया और दनदनाता हुआ बाहर निकल गया. चोट खाई घायल नागिन सी नेहा फुफकार उठी. उस ने रंजन को सबक सिखाने की ठान ली. 2-3 दिन वकीलों के पास भागदौड़ कर उस ने रंजन के खिलाफ रेप की धारा के तहत एफआईआर दर्ज करा दी.
रंजन अब पुलिस हिरासत में था. फैक्टरी में उस के संबंधों की पोलपट्टी खुलते देर न लगी. जितने मुंह उतनी बातें. नेहा के पड़ोसियों को तो पहले ही इस बात का शक था कि दोनों के बीच कोई चक्कर है.
सबकुछ बहुत ही अचानक घटा था. आरती तो रंजन पर अचानक आई इस मुसीबत से ठगी सी रह गई. फिर भी रोधो कर घर बैठने के बजाय उस ने हिम्मत कर के नेहा के घर जा कर इस मसले पर उस से बात करनी चाही, पर गुस्साई नेहा ने उस की कोई भी बात सुने बिना उसे सीधे कोर्ट में ही मिलने की धमकी दे दी.
आरती इतना तो समझती थी कि रंजन रेप जैसी गिरी हुई हरकत कभी नहीं कर सकते हैं. उस ने आसपड़ोस में सभी से इस बाबत जानकारी निकाली और कुछ पुख्ता आधारों पर वह तकरीबन एक महीने में ही रंजन की जमानत कराने में कामयाब रही.
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हिरासत से बाहर निकल कर आए रंजन ने आरती की आंखों में तैरते सवालों को देख कर उसे शुरू से आखिर तक की सारी सचाई बता दी और इस बात के लिए उस से बहुत बार माफी भी मांगी.
रंजन और नेहा के संबंधों की सचाई ने आरती को हैरत में ला दिया. वह अपने को बहुत ठगा हुआ महसूस कर रही थी. उस ने अपनेआप को कमरे में कैद कर लिया.
बहुत देर तक रंजन वैसे ही खामोश बैठा रहा. उसे बिलकुल समझ नहीं आ रहा था कि आरती को कैसे मनाए या माफी मांगे. भीतर कमरे में रंजन से नाराज आरती काफी देर तक रोती रही. उसे रंजन से इस तरह की बेवफाई की उम्मीद न थी. पर नेहा के गुस्से से उसे इतना तो समझ आ चुका था कि रंजन ने अपनी गलती को दिल से स्वीकार किया है और आगे इसे न दोहराने का वादा भी किया है, वरना नेहा उस के खिलाफ रिपोर्ट ही क्यों करती?
इस के बाद आरती ने हर कदम पर अपने पति का साथ देते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट में यह साबित कर दिया कि नेहा और रंजन के बीच में बना संबंध रेप न हो कर उन की आपसी सहमति से बना रिश्ता है, जो एक नहीं बल्कि कई बार बन चुका है. नेहा की मैडिकल रिपोर्ट से भी यह साफ हो गया.
आसपड़ोस के लोगों या जिन्होंने नेहा व रंजन को कई बार पार्क में व घर पर मिलते हुए देखा था, उन की गवाही से भी नेहा और रंजन के प्यार भरे रिश्तों का सच सामने आ गया.
रंजन के खिलाफ कोई भी ऐसा सुबूत नहीं मिला, जिस से उस के खिलाफ रेप का केस साबित हो सके. नतीजतन, कोर्ट से रंजन बाइज्जत बरी किया गया. इस मौके पर उस की खुशी तब और दोगुनी हो गई, जब आरती ने उसे अपने पेट से होने की जानकारी दी.
उधर नेहा को कोर्ट से हताशा ही हाथ लगी. गुस्से में उस ने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली थी. इस केस के बाद लोगों के बीच उन का संबंध चर्चा की बात बन चुका था. रंजन के साथ उस की पत्नी आरती खड़ी थी, पर इधर नेहा बिलकुल अकेली पड़ चुकी थी. वह जैसतैसे परी की खातिर अपनी जिंदगी को बस ढोए जा रही थी.
एक दिन रंजन आरती के संग बैठा था कि रात के 9 बजे मोबाइल पर आ रहे काल में नेहा का नंबर देख कर वह चौंक गया. उस ने धीरे से अपना मोबाइल स्विच औफ कर दिया. आरती को इस हालत में वह बिलकुल भी दुखी नहीं करना चाहता था.
टीवी सीरियल ‘इमली’ (Imlie) में लगातार हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है. जिससे दर्शकों को एंटरटेनमेंट का डबल डोज मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि अनु (Anu) और मालिनी (Malini) इमली के पीछे पड़ गये है, जमकर उसकी बेइज्जती कर रहे हैं. तो दूसरी तरफ आदित्य भी इमली को ही दोषी ठहरा रहा है. शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के लेटेस्ट एपिसोड के बारे में.
शो में दिखाया जा रहा है कि अनु इमली को भला-बुरा कहती है. ऐसे में इमली भी अनु को जवाब देने की कोशिश करती है. तो वहीं अनु इमली पर हाथ उठा देती है. दूसरी तरफ आर्यन आकर अनु को रोकता है. शो में दिखाया जाएगा कि आर्यन को ये बात पता चल जाएगी कि इमली और मालिनी सौतेली बहनें हैं.
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इमली से मेहंदी सेरेमनी में शानदार परफॉर्मेंस देगी. इस दौरान इमली आर्यन से टकरा जाएगी और दोनों एक साथ पॉरर्मेंस देंगे. आर्यन और इमली का रोमांस देखकर आदित्य का पारा चढ़ जाएगा. तो दूसरी तरफ निशांत और रुपाली जानबुझकर इमली और आदित्य को एक कमरे में बंद कर देते है.
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इसी बीच मालिनी दोनों को साथ देख लेगी और इमली को ताने मारना शुरू कर देगी. इमली भी मालिनी का सच सामने लाने की कोशिश करेगी.
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शो में आप ये भी देखेंगे कि इमली आदित्य को सबक सिखाने के लिए आर्यन के साथ कॉन्ट्रैक्ट मैरिज कर लेगी, आर्यन और इमली की शादी की खबर सुनकर आदित्य के होश उड़ जाएंगे. तो वहीं अपर्णा आर्यन और इमली को साथ देखकर खुश होगी.
टीवी सीरियल अनुपमा की कहानी एक दिलचस्प मोड़ ले रही है. शो में अब तक आपने देखा कि अनुज अनुपमा से अपने अतीत के बारे में बताता है और उसके गोद में सिर रखकर रोने लगता है. अनुपमा भी काफी इमोशनल हो जाती है तभी मालविका वहां पहुंचती है और अनुज से कहती है कि घर की बातें बाहर वालों से नहीं बताते. शो के आने वाले एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.
शो में आपने देखा कि अनुपमा अनुज और मालविका के लिए ब्रेकफास्ट बनाने जा रही है तभी मालविका कहती है कि वह अपने भाई के लिए ब्रेकफास्ट बनाएगी. इसी बीच अनुज मालविका के सामने अनुपमा के खाने की तारीफ करता है. अनुपमा की तारीफ सुनते ही मालविका अनुज पर भड़क जाती है.
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मालविका गुस्से में किसी अक्षय का नाम लेती है. और अपना आपा खो देती है. वह घर छोड़कर चली जाती है. मालविका के जाते ही अनुज अपना होश खो देता है. अनुज, मालविका को दुखी नहीं करना चाहता है. ऐसे में जब मालविका घर छोड़कर चली गई है तो वह अनुपमा को अकेला छोड़ देगा मालविका के पीछे भागेगा.
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अनुज कहेगा कि अगर मालविका वापस नहीं आई तो वो अपनी जान दे देगा. शो में आप ये भी देखेंगे कि मालविका वनराज के घर पहुंच जाएगी. और शाह हाउस में रहने की परमिशन मांगेगी. वनराज उसे रहने की इजाजत दे देगा. मालविका खुश हो जाएगी.
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मालविका और वनराज को साथ देखकर काव्या चिढ़ जाएगी. तो वहीं काव्या, मालविका को अपने भाई अनुज के घर वापस जाने के लिए कहेगी. शो में अब ये देखना होगा कि क्या काव्या मालविका को शाह हाउस से बाहर कर पायेगी?
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