सरस सलिल विशेष

आज आपको इस रिपोर्ट में हम एक ऐसे सनसनीखेज घटना बता रहे हैं जिसमें एक नारी ही नारी की दुश्मन बन गई एक मां ने अपनी नवजात बालिका की अपने ही हाथों से हत्या कर दी.

यह एक सर्वमान्य सिद्धांत माना गया है कि पूत कपूत हो सकता है मगर मां कभी कुमाता नहीं हो सकती.मां अपने बच्चों के साथ, उनके साथ अत्याचार, भेदभाव नहीं करती. मगर  आज  21 वीं शताब्दी के भारत में कुछ एक ऐसी घटनाएं घट जाती है जो इस धारणा को ध्वस्त कर देती हैं की एक नारी, एक मां अपनी औलाद को अपने ही हाथों से नहीं मारती. वह भी सिर्फ इसलिए कि वह एक लड़की है!

जी हां!! एक ऐसा ही दर्दनाक दुखद घटना क्रम आज हम आपको इस रिपोर्ट में बताने जा रहे हैं. किस किस तरह मां ने अपने पहले बच्चे को जो एक लड़की पैदा हुई थी को अपने ही हाथों से इस लिए मार डाला कि वह लड़का नहीं थी. समाज में लड़कों और लड़कियों के भेदभाव पर हमेशा प्रश्न चिन्ह खड़ा होता रहा है और अब तो यह भी कहा जा रहा है कि लड़कियां लड़कों से कहीं ज्यादा काबिल, संवेदनशील, कर्तव्य परायण और अपने मां पिता को आगे चलकर के संरक्षण देने में योग्य साबित हुई है.

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इस सब के बावजूद एक मां ने जब उसे लड़की पैदा हुई तो उसकी हत्या के लिए आज के सबसे बड़े हथियार "गूगल" का इस्तेमाल किया और उससे पूछा कि हत्या का तरीका क्या हो सकता है?

मासूम  की दुखदाई मौत

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