कोविड-19 से बचाव के लिए बॉडी की इम्युनिटी कैसे बढ़ाएं?

सवाल

मेरा बेटा 12 साल का है. रोज खाने में नूडल्स, पिज्जा, पास्ता, फ्रैंच फ्राइज, बर्गर आदि जंक फूड खाने की फरमाइश करता है. जबकि मैं चाहती हूं कि उसे ऐसी डाइट दूं जिस से उसे विटामिन मिले, कोविड-19 से बचाव के लिए बौडी की इम्युनिटी बढ़े. वैसे भी सर्दी आ गई है और उसे बहुत जल्दी ठंड लग जाती है. मुझे उस की चिंता लगी रहती है, क्या करूं?

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जवाब

यह समस्या आजकल ज्यादातर मांओं के साथ है. बच्चों को जंक फूड टैस्टी लगता है और वे वही खाने की जिद करते हैं. दाल, सब्जी, रोटी मन से नहीं खाते. खाना आधाअधूरा छोड़ देते हैं. ऐसे में मांएं सोचती हैं कि बच्चा कुछ तो खा रहा है और उन की पसंद का जंक फूड दे देती हैं.

कोई बात नहीं, बच्चे हैं तो उन्हें उन्हीं की तरह हैंडिल कीजिए. पिज्जा घर पर बनाएं और ढेर सारी बारीक कटी सब्जियां डाल कर ऊपर से चीज डाल कर बनाएं. आटा नूडल्स बनाएं और उस में भी ढेर सारी आजकल आ रही सीजनल सब्जियां डाल कर बनाएं. बर्गर के लिए आटा बना लें और उस के अंदर वैजिटेबल बेक्ड टिक्की लगाएं, साथ में खीरा, टमाटर, सलाद पत्ता रखें. बच्चे को खिलाने के लिए खाने में यह ट्विस्ट आप को करना पड़ेगा.

बीचबीच में बच्चे को खाने की ऐसी चीजें देती रहें जिस से शरीर को पर्याप्त विटामिंस मिलें. चूंकि बच्चों की बौडी सैंसिटिव होती है इसलिए उन्हें ऐसी चीजें खिलाएं जिन की तासीर हलकी गरम हो ताकि उन्हें ठंड न लगे. जैसे दूध में बादाम पीस कर मिला दें और पीने को दें. सूखे मेवे, जैसे काजू, किशमिश, अखरोट, पिस्ता खिलाएं. सूखे मेवों में मौजूद विटामिन ए,  ई, प्रोटीन, आयरन आदि पोषक तत्त्व शरीर को स्ट्रौंग बनाने में मदद करेंगे, शरीर में गरमाहट आएगी और इम्युनिटी बढ़ेगी जिस से वायरल बुखार एवं खांसीजुकाम की आशंका कम होगी.

अंडा भी अच्छा औप्शन है. उबाल कर दें या औमलेट बना कर दें. अंडे में कैल्शियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन होता है.

आजकल सर्दी के मौसम में सब्जियां खूब आ रही हैं. उन का सूप बना कर पिलाएं. टेस्ट के लिए ऊपर से ब्रैड पीस डाल दें. बच्चा शौक से पिएगा. गाजर का हलवा बनाएं, उस में चीनी के बजाय गुड़,  मूंगफली या इस की पट्टी खाने को दें.

चीजें आकर्षक ढंग से खाने को दी जाएं तो वे खाएंगे जरूर. बस, आप को उन्हें यह सब खिलाने व बनाने में थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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वैवाहिक उम्र 21: राष्ट्र को कमजोर बनाने वाला “कानून”

नरेंद्र दामोदरदास मोदी कि केंद्र सरकार कि जल्दी बाजी को एक बार देश ने पुनः देखा है. मोदी सरकार देश को आगे बढ़ाने मजबूत करने की बातें बार बार करती है मगर इस कानून से समाज में जो अनैतिकता और लैंगिक अपराध बढ़ेंगे उसका देश के दूरगामी भविष्य प्रभाव पड़ेगा और देश बहुत कमजोर हो जाएगा.

दरअसल, देश में लड़कियों के लिए विवाह की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष किया गया है. इस प्रस्ताव को केबिनेट ने आनन-फानन में मंजूरी भी दे दी. कानून संसद में भी देखते ही देखते पास हो गया. जो यह दिखाता है कि नरेंद्र मोदी सरकार की कामकाज की शैली कैसी है. अब इसके लिए सरकार मौजूदा कानूनों बाल विवाह निषेध कानून, स्पेशल मीरिज एक्ट और हिन्दू विवाह अधिनियम में संशोधन करेंगी. देश में  पहले के कानून के अनुसार अभी पुरुषों की शादी की उम्र और महिलाओं की 18 साल है. नए प्रस्ताव के तहत महिलाओं की शादी की उम्र 21 वर्ष हो जायेगी.

हमारे संवाददाता ने इस संबंध में अनेक लोगों से बातचीत की और जानना चाहा कि आखिर यह कानून कितना सही और गलत है . अनेक लोगों के मुताबिक यह अत्यंत संवेदनशील मसला है, कानून से ज्यादा छेड़छाड़ उचित नहीं, इस नये कानून से लैंगिक अपराधों में इजाफा होगा. दरअसल, जिस तरह केंद्र सरकार जल्दीबाजी में एक बार पुनः शादी की उम्र को लेकर के विपक्ष और बौद्धिक वर्ग को विश्वास में लिए बगैर कानून बना दिया उससे सकारात्मक संदेश नहीं गया. बल्कि यह तथ्य उजागर हो गया है कि नरेंद्र मोदी सरकार को सबको साथ लेकर चलने में विश्वास नहीं है अन्यथा इस अत्यंत महत्वपूर्ण समाज के संवेदनशील विषय पर कानून का कोड़ा बरसाने की जगह  समझदारी से काम लिया जा सकता था. माना जा रहा है कि लड़कियों के 21 वर्ष विवाह कानून के बाद बहुतेरी ऐसी स्थितियां पैदा होंगी जो समाज के लिए चिंता का सबब बन जाएंगी.

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देश के लिए बेहद नुकसान प्रद

जैसा कि हमेशा होता है हर पहलू के दो पक्ष होते हैं इस कानून को समाज के हित में बताने वाले भी लोग हैं. कानून का समर्थन करने वाले लोगों का कहना क 21 वर्ष की उम्र तक लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा पूरी हो पाती है.  और लड़कियां पूरी तरह परिपक्व हो जाती है जबकि इस के संबंध मे रीना मिश्रा ने  कहा कि विवाह की उम्र इक्कीस वर्ष तो ठीक है किंतु 18 वर्ष भी अनुचित नहीं है. इसके लिए कानून में संशोधन करने की आवश्यकता नहीं है जो 18 वर्ष में विवाह करना चाहता है उसे 18 वर्ष में विवाह करने दिया जाना चाहिए क्योंकि 18 वर्ष में भी महिला परिपक्व हो जाती है.

सामाजिक कार्यकर्ता सुनील जैन के मुताबिक लड़कियों की शादी की उम्र 21 वर्ष करने हेतु कानूनों में संशोधन करने से पहले सरकार को जनमत संग्रह करना चाहिए था, अभिभावकों की मर्जी जाननी चाहिए थी ना कि तानाशाही रवैया अपनाकर लोगों में कोई भी कानून थोप देना चाहिए. नरेंद्र दामोदरदास मोदी सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि कोई भी सरकार देश की जनता के लिए होती है उसके भले के लिए होती है डंडा बताने के लिए नहीं समाज के कायदों को नष्ट करने के लिए नहीं होती सिर्फ आबादी रोकने के लिए रातों-रात या कानून लाया गया है जो पूरी तरह अनुचित है.

वरिष्ठ अधिवक्ता बीके शुक्ला के मुताबिक भारतीय समाज में 18 वर्ष की उम्र में लड़कियां परिपक्व हो जाती है. ऐसी स्थिति में उनकी शादी की उम्र तीन वर्ष और नहीं बढ़ाना चाहिए था इससे अपराध में वृद्धि होगी.

डॉक्टर  जी आर पंजवानी के मुताबिक 18 वर्ष की उम्र को बढ़ाना अनुचित है. पहले तो इससे पहले भी विवाह हो जाते थे. इसके बाद बहुत सोच समझ कर के मानक तौर पर विवाह को 18 वर्ष किया गया था.  इतनी उम्र तक युवतियां पूरी तरह परिपक्व हो जाती है फिर विवाह की उम्र बढ़ाने का क्या औचित्य है.

अधिवक्ता डॉ उत्पल अग्रवाल के मुताबिक  लड़कियों की उम्र 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने की आवश्यकता ही नहीं थी हमारे देश के वातावरण के अनुरूप 18 वर्ष की उम्र तक लड़की समझदार और विवाह योग्य हो जाती है.  इसके अलावा जिन संशोधनों का उल्लेख किया जा रहा है, वह भी उचित नहीं है.

व्यवसायी संजय जैन कहते हैं विवाह के लिए 18 वर्ष की उम्र को और नहीं बढ़ाना चाहिए था, आखिर उम्र में वृद्धि की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है? इससे तो यौन शोषण के मामलों में इजाफा होगा उसका दोष कौन अपने सर पर लेगा. केंद्र सरकार ने जल्दी बाजी की है वह आज समाज में चिंता का सबब बन गई है.

वहीं अठारह साल की हेमा के मुताबिक लड़कियों के विवाह की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने से लड़कियों को नौकरी करने तथा अपनी स्थिति मजबूत करने का काफी समय मिलेगा. वैसे भी आजकल देशभर में परिस्थितियां बदली है और आमतौर पर देश में लड़कियां 21 वर्ष के आसपास ही विवाह कर रही है.

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इस महत्वपूर्ण मसले पर डॉ प्रमोद देवांगन कहते हैं

केन्द्र सरकार को जन हित के कार्यों की ओर ध्यान देना चाहिए, व्यर्थ के व्यर्थ के संशोधनों के फेर में नहीं उलझना चाहिए था. व्यस्कता के लिए 18 वर्ष काफी है और इस उम्र तक लड़कियां पूरी तरह परिपक्व  हो जाती है. केन्द्र सरकार को मजदूरों, भूमिहीन किसानों और मध्यम वर्गीय परिवारों को आर्थिक दशा सुधारने के संदर्भ में ध्यान देना चाहिए न कि ऐसे सामाजिक मसलों पर जिसका फैसला परिवार के मुखिया करते है.

शिक्षाविद घनश्याम तिवाड़ी के मुताबिक 18 वर्ष की उम्र में पूर्ण परिपक्वता नहीं आती जिसकी वजह से कई घरों में नव निवाहितों के बीच तकरार होती है और मामला न्यायालय तक पहुंच जाता है. विवाह की उम्र 21 वर्ष होने से लड़कियों को  समय मिलेगा और वह अपने पैरों पर खड़ी हो जायेंगी. इसलिए संशोधन जरूरी है था.

केबल संचालक मनोज पाहुजा के मुताबिक केन्द्र सरकार ने जल्दी बाजी में  फैसल किया है मगर मेरा मानना है कि इतने वक्त तक लड़की आत्मनिर्भर बन जायेगी और विवाह के बाद कम उम्र की लड़कियों को शारीरिक एवं मानसिक परेशानियां झेलनी पड़ती है, ऐसी स्थिति का सामना उन्हें नहीं करना पड़ेगा केंद्र सरकार का यह फैसला उचित ही है.

विवाह की उम्र में तब्दीली करने से जहां लाभ कम है वही समाज को हानि ज्यादा.

यह भी विचारणीय है कि विवाह के लिएलड़के और लड़की की उम्र 21 साल हो गई है दोनों एक समान. यह भी भारतीय समाज में परिवार के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न होने वाला है और पूरी तरह गलत है.

समाज में जो लैंगिक अपराध बढ़ेंगे आपका समाज ही जब साफ स्वच्छ नहीं होगा तो देश में कई तरह की बाधाएं उपस्थित होंगी और राष्ट्र कमजोर होगा ऐसा इस कानून के परिप्रेक्ष्य में कहा जा सकता है.

ओमिक्रान और हमारी  निठल्ली सरकार!

पहली सुर्खी-

-अमेरिका, ब्रिटेन, चीन कई देशों में ओमिक्रान वायरस फैलता चला जा रहा है.

दूसरी सुर्खी-

भारत में भी कहीं-कहीं ओमिक्रान वायरस फैल रहा है अलर्ट जारी.

तीसरी सुर्खी – भारत में भी स्वास्थ्य विभाग ओमिक्रान

वायरस पर पैनी निगाह रखे हुए हैं रात का कर्फ्यू का राज्यों को सुझाव.

कोरोना की दो लहरें  हमारे देश और सारी दुनिया ने देखी हैं. जिसका डर था अपना स्वरूप बदल कर के कोरोना ने  के रूप में दुनिया को हलाकान शुरू कर दिया है. सारी दुनिया के चेहरे पर चिंता की  लकीरें स्पष्ट देखी जा सकती है. ऐसे में भारत में सब कुछ वैसा ही चल रहा है जैसा कि सामान्य दिनों में. हाल ही में विवाह उत्सव संपन्न हुए हैं उनमें ना तो किसी प्रोटोकॉल का पालन किया  गया और नहीं कहीं समझदारी दिखाई दी. यही नहीं केंद्र और राज्य सरकारें भी पूरी तरीके से आंख मूंदे हुए दिखाई दी. लोगों में जो एक जागरूकता मास्क को लेकर की होनी चाहिए वह भी कहीं दिखाई नहीं दी. यहां तक कि हमारे राजनेता सरकार में बैठे हुए नुमाइंदे प्रशासन में बैठे हुए अधिकारियों से जो सूझबूझ और जागरूकता की अपेक्षा थी वह भी कहीं नजर नहीं आई. ऐसे में यह सवाल आज फिर उठ खड़ा हुआ है कि कोरोना की भयंकर विभीषिका देखने के बाद भी अगर हमारे राजनेता सत्ता में बैठे हुए लोग अगर उदासीन हैं तो फिर दोषी कौन है.

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आज हम इस रिपोर्ट में यह महत्वपूर्ण मसला आपके समक्ष रख रहे हैं केंद्र हो या राज्य सरकारें कोरोना के मामले में क्या आप उन्हें समझदारी का परिचय देते हुए देखते हैं. क्या आपको एहसास है की सरकारी आखिर क्यों कुंभकरण निद्रा में सोए हुए हैं. और अगर कोरोना का यह दूसरा रूप ओमिक्रान

क्या गुल खिलाने जा रहा है और अगर अब इससे जन हानि होती है तो क्या  सरकार राज्य सरकारें और हमारे नेता जो निठल्ले बैठे हुए हैं दोषी नहीं माने जाएंगे.

देखते हुए भी आंखें बंद

आपको याद होगा कि जब कोरोना की पहली लहर आई थी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने सब कुछ अपने हाथों में ले लिया और एक छत्र निर्णय लिया करते थे. सबसे पहले उन्होंने ही टेलीविजन पर आकर के अचानक ही लॉकडाउन का धमाका कर दिया था और सारे देश में हंगामा  बरपा हो गया था. दूसरी दफा जब आए तो खूब तालियां बजवाई दिए जलवाए. मगर उसके बाद जो हाहाकार मचा वह इतिहास में दर्ज हो चुका है.

हमारे देश में यही सबसे बड़ी खामी है कि हम लोग सब कुछ ईश्वर को छोड़ देते हैं, भाग्य पर छोड़ देते हैं और शुतुरमुर्ग की तरह अपना सर छुपा लेते हैं. हकीकत को नजरअंदाज करने के कारण भारत ने हमेशा बहुत ही तकलीफ है और कष्ट झेले हैं. आज लोकतांत्रिक सरकार होने के बावजूद आज के आधुनिक युग में भी विज्ञान और जागरूकता को दरकिनार करते हुए हम शुतुरमुर्ग ही बने हुए हैं . कोरोना का बहु रुप ओमिक्रान धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैलता  चला जा रहा है. भारत की तैयारियों की बात करें तो देखते हैं कि सिर्फ बयानबाजी हो रही है. हम नजर रखे हुए हैं, हम राज्यों को सलाह दे रहे हैं, हम नाइट कर्फ्यू की बात कर रहे हैं. हम जमीनी हकीकत से बहुत दूर है हमें अपनी हॉस्पिटलों को जिस तरीके से तैयार करना चाहिए नहीं कर रहे हैं. देश की राजधानी दिल्ली से लेकर के किसी तहसील और गांव स्तर पर देखें तो कहीं भी कोई तैयारी हमें दिखाई नहीं देती. सिर्फ लोग इंतजार कर रहे हैं कि  ओमिक्रान चला आए और तब हम जागेंगे तब लोगों का इलाज करने का असफल प्रयास करेंगे और बाद में कहेंगे कि हमने बहुत कुछ किया.

दरअसल, सरकार में बैठे हुए हमारे निठल्ले नेता सिर्फ उद्घाटन और भूमि पूजन करने में पारंगत हैं. आज स्वास्थ्य सेवाओं को जिस तरीके से चुस्त-दुरुस्त करने का समय है उससे मुंह मोड़ा जा रहा है रात का कर्फ्यू लगा करके हमारे नेता हमारी सरकार क्या दिखाना चाहती है?

क्या ओमिक्रान वायरस रात को निकलता है? सरकार की सारी कवायद हंसी का पात्र है लोग अपने इन दिग्गदर्शक नेताओं पर हंसते हैं. कहते हैं धन्य हैं हमारे भाग्य विधाता!

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स्वास्थ्य इमरजेंसी अलर्ट क्यों नहीं

सीधी सी बात है- जब दुनिया भर में इस नए वायरस के आतंक से लोग परेशान हैं, लोग मर रहे हैं चर्चा का विषय बना हुआ है तो हमारे देश की सरकारी आंखें आंखें बंद करके क्यों सोई हुई है. क्यों नहीं देश में स्वास्थ्य हेल्थ इमरजेंसी अलर्ट कर दिया जाता. जिस तरीके से युद्ध के समय में देशभर में एक अलर्ट जारी कर दिया जाता है पूरी व्यवस्था देश की सुरक्षा में लग जाती है ऐसे में सब देखते समझते हुए भी स्वास्थ्य अलर्ट जारी नहीं करना अपने आप में एक गंभीर सवाल खड़ा करता है.  चाहिए कि देश का हर एक हॉस्पिटल इसके लिए तैयार किया जाए वहां बेड हो, गैस हो, वहां इस वायरस से मुकाबला करने के लिए सब कुछ सामान मेडिकल का उपलब्ध रहे. ताकि किसी की भी मृत्यु ना हो उसे इलाज मिल जाए. हमारे यहां नेता और सरकार प्रशासनिक अमला जानबूझकर के मानो अनदेखी कर रहा है और जब गांव गांव में घर घर में यह वायरस अपना आतंक दिखाना शुरू करेगा तब हक्का-बक्का यह शासन सिर्फ मीडिया में विज्ञापन जारी करना और बयान देने का काम करेगा.

10 साल- भाग 1: क्यों नानी से सभी परेशान थे

Writer- लीला रूपायन

जब से होश संभाला था, वृद्धों को झकझक करते ही देखा था. क्या घर क्या बाहर, सब जगह यही सुनने को मिलता था, ‘ये वृद्ध तो सचमुच धरती का बोझ हैं, न जाने इन्हें मौत जल्दी क्यों नहीं आती.’ ‘हम ने इन्हें पालपोस कर इतना बड़ा किया, अपनी जान की परवा तक नहीं की. आज ये कमाने लायक हुए हैं तो हमें बोझ समझने लगे हैं,’ यह वृद्धों की शिकायत होती. मेरी समझ में कुछ न आता कि दोष किस का है, वृद्धों का या जवानों का. लेकिन डर बड़ा लगता. मैं वृद्धा हो जाऊंगी तो क्या होगा? हमारे रिश्ते में एक दादी थीं. वृद्धा तो नहीं थीं, लेकिन वृद्धा बनने का ढोंग रचती थीं, इसलिए कि पूरा परिवार उन की ओर ध्यान दे. उन्हें खानेपीने का बहुत शौक था. कभी जलेबी मांगतीं, कभी कचौरी, कभी पकौड़े तो कभी हलवा. अगर बहू या बेटा खाने को दे देते तो खा कर बीमार पड़ जातीं. डाक्टर को बुलाने की नौबत आ जाती और यदि घर वाले न देते तो सौसौ गालियां देतीं.

घर वाले बेचारे बड़े परेशान रहते. करें तो मुसीबत, न करें तो मुसीबत. अगर बच्चों को कुछ खाते देख लेतीं तो उन्हें इशारों से अपने पास बुलातीं. बच्चे न आते तो जो भी पास पड़ा होता, उठा कर उन की तरफ फेंक देतीं. बच्चे खीखी कर के हंस देते और दादी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाता, जहां से वे चाची के मरे हुए सभी रिश्तेदारों को एकएक कर के पृथ्वी पर घसीट लातीं और गालियां देदे कर उन का तर्पण करतीं. मुझे बड़ा बुरा लगता. हाय रे, दादी का बुढ़ापा. मैं सोचती, ‘दादी ने सारी उम्र तो खाया है, अब क्यों खानेपीने के लिए सब से झगड़ती हैं? क्यों छोटेछोटे बच्चों के मन में अपने प्रति कांटे बो रही हैं? वे क्यों नहीं अपने बच्चों का कहना मानतीं? क्या बुढ़ापा सचमुच इतना बुरा होता है?’ मैं कांप उठती, ‘अगर वृद्धावस्था ऐसा ही होती है तो मैं कभी वृद्धा नहीं होऊंगी.’

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मेरी नानी को नई सनक सवार हुई थी. उन्हें अच्छेअच्छे कपड़े पहनने का शौक चर्राया था. जब वे देखतीं कि बहू लकदक करती घूम रही है, तो सोचतीं कि वे भी क्यों न सफेद और उजले कपड़े पहनें. वे सारा दिन चारपाई पर बैठी रहतीं. आतेजाते को कोई न कोई काम कहती ही रहतीं. जब भी मेरी मामी बाहर जाने को होतीं तो नानी को न जाने क्यों कलेजे में दर्द होने लगता. नतीजा यह होता कि मामी को रुकना पड़ जाता. मामी अगर भूल से कभी यह कह देतीं, ‘आप उठ कर थोड़ा घूमाफिरा भी करो, भाजी ही काट दिया करो या बच्चों को दूधनाश्ता दे दिया करो. इस तरह थोड़ाबहुत चलने और काम करने से आप के हाथपांव अकड़ने नहीं पाएंगे,’ तो घर में कयामत आ जाती.

‘हांहां, मेरी हड्डियों को भी मत छोड़ना. काम हो सकता तो तेरी मुहताज क्यों होती? मुझे क्या शौक है कि तुम से चार बातें सुनूं? तेरी मां थोड़े हूं, जो तुझे मुझ से लगाव होता.’ मामी बेचारी चुप रह जातीं. नौकरानी जब गरम पानी में कपड़े भिगोने लगती तो कराहती हुई नानी के शरीर में न जाने कहां से ताकत आ जाती. वे भाग कर वहां जा पहुंचतीं और सब से पहले अपने कपड़े धुलवातीं. यदि कोई बच्चा उन्हें प्यार करने जाता तो उसे दूर से ही दुत्कार देतीं, ‘चल हट, मुझे नहीं अच्छा लगता यह लाड़. सिर पर ही चढ़ा जा रहा है. जा, अपनी मां से लाड़ कर.’ मामी को यह सुन कर बुरा लगता. मामी और नानी दोनों में चखचख हो जाती. नानी का बेटा समझाने आता तो वे तपाक से कहतीं, ‘बड़ा आया है समझाने वाला. अभी तो मेरा आदमी जिंदा है, अगर कहीं तेरे सहारे होती तो तू बीवी का कहना मान कर मुझे दो कौड़ी का भी न रहने देता.’

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Satyakatha: 100 लाशों के साथ सेक्स करने वाला इलेक्ट्रीशियन

सौजन्य- सत्यकथा

इंग्लैड के ईस्ट ससेक्स राज्य में ब्रिटिश पुलिस को 34 सालों से 2 युवतियों के हत्यारे की तलाश थी. इस के लिए पुलिस ने जबरदस्त जाल बिछा रखा था. फिर भी हत्यारे पकड़ से बाहर थे. इस कारण पुलिस ने जासूसों की टीम भी लगाई.

मामला 25 वर्षीया वेंडी नेल और 20 साल की कैरोलिन पियर्स की हत्याओं का था. उन के साथ दुष्कर्म भी हुआ था. दोनों टुगब्रिज वेल्स में रहती थीं और अलगअलग वारदातों में 1987 में दोनों की हत्या कर दी गई थी. उस हत्याकांड को ‘बेडसिट मर्डर्स’ के रूप में जाना गया था.

नेल गिल्डफोर्ड रोड स्थित अपने अपार्टमेंट में 23 जून, 1987 को मृत पाई गई थी. पुलिस को इस की सूचना उस के मंगेतर ने दी थी. उस के शरीर पर कई जख्म थे. जबकि पियर्स की लाश उसी साल 5 महीने बाद 24 नवंबर को उन के घर से 40 मील दूर बांध के पानी में तैरती हुई बरामद हुई थी.

उन की मौत के सिलसिले में हुई जांच में हत्या और दुष्कर्म के जो सुराग मिले थे, उस के अनुसार मृतकों के शरीर, अंगवस्त्र, तौलिए, बैडशीट आदि से मिले एक जैसे डीएनए को सबूत का आधार बनाया गया था.

उस डीएनए वाले व्यक्ति का पता लगाने के लिए 15 दिसंबर, 1987 को अदालती आदेश के बाद ब्रिटिश पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू कर दी थी.

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फोरैंसिक वैज्ञानिकों द्वारा 1999 में डीएनए जांच के आधुनिक तरीके अपनाए गए थे और इस के लिए एक नैशनल लेवल पर डेटाबेस तैयार किया गया था.

दोनों लड़कियों के सैकड़ों करीबियों से पूछताछ के साथसाथ उन के डीएनए की भी जांच की गई थी. रिश्तेदारों, दोस्तों और फिर उन के करीबियों से जांच के सिलसिले में डेविड फुलर के घर वालों के डीएनए की भी जांच हुई, जिसे हत्या के आरोप में पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका था.

इस तरह पुलिस को अंतत: 2019 में सफलता मिल गई, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से उस की गिरफ्तारी 3 दिसंबर, 2020 को हो पाई.

67 वर्षीय डेविड फुलर को ईस्ट ससेक्स के हीथफील्ड स्थित उस के घर से गिरफ्तार कर लिया गया. उस का डीएनएन मृतकों से प्राप्त नमूने से मेल खाता था. इसी के साथ जब उस के घर की गहन तलाशी ली गई, तब यौन अपराध का जो राज खुला, वह जितना चौंकाने वाला था, उतना ही घिनौना भी था.

फुलर के अनगिनत कुकर्मों का खुलासा उस के घर और घर के कार्यालय की तलाशी के बाद हुआ. पुलिस को कंप्यूटर हार्ड ड्राइव, सीडी, डीवीडी और फ्लौपी डिस्क में 14 मिलियन से अधिक अश्लील तसवीरें भरी मिलीं. उन में बच्चों की लाश के साथ अश्लील वीडियो भी थे. सभी अलगअलग फोल्डर में रखे गए थे और उन पर नाम का लेबल भी लगाया गया था. साथ ही एक डायरी में यौन अपराधों का काला चिट्ठा दर्ज था.

उसी आधार पर पुलिस ने पाया कि फुलर अपनी वासना की आग बुझाने के लिए 2 मुर्दाघरों में महिलाओं की लाशों के साथ दुष्कर्म किया करता था. यह कुकर्म वह करीब 100 लाशों के साथ कर चुका था, जिन में 9 साल की बच्ची से ले कर 100 साल की वृद्धा तक की लाशें शामिल थीं. यह सब उस ने तब किया था, जब वह हीथफील्ड अस्पताल में इलैक्ट्रीशियन की नौकरी करता था.

ये सारी बातें फुलर ने मेडस्टोन क्राउन अदालत में दोनों लड़कियों की हत्या को ले कर हुई सुनवाई के दौरान स्वीकार की. उस ने यह भी बताया कि दोनों की बेरहमी से हत्या करने के बाद उस की लाश के साथ दुष्कर्म किया था. तभी नेल के तौलिए, अंडरगारमेंट, और लार में फुलर का डीएनए पाया गया था.

फुलर के जुर्म से इंग्लैंड की अदालत भी दंग थी. कोर्ट ने माना कि ब्रिटेन या कहें कि दुनिया के इतिहास में इतना खौफनाक और दर्दनाक वाकया शायद कभी नहीं गुजरा, लिहाजा कोर्ट ने इस मामले को बेहद संजीदगी से लेते हुए उसे अपराधी ठहरा दिया.

न्यायाधीश चीमा ग्रव ने फुलर को उन की हत्याओं के अलावा 51 अलगअलग मामलों के अपराधों का भी दोषी करार दिया, जिस में 44 मामले लाशों से छेड़छाड़ के थे. साथ ही मुर्दाघरों में 78 लाशों की भी पहचान कर ली गई. उसे 2 लड़कियों नेल और पियर्स की हत्या के लिए भी दोषी ठहराया गया.

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कैरोलीन पियर्स का फुलर ने 24 नवंबर, 1987 को उस के घर के बाहर ग्रोसवेन पार्क से अपहरण कर लिया था. वहीं उस की हत्या कर लाश के साथ दुष्कर्म किया था.

पड़ोसियों ने उस के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुनी थी. एक हफ्ते बाद उस की लाश उन के घर से 40 मील दूर मिली थी, जिस की सूचना पुलिस को एक खेतिहर मजदूर ने दी थी.

पुलिस ने अदालत में बताया कि फुलर दोनों लड़कियों को पहले से जानता था. वह उसी फोटो डेवलपमेंट चेन का ग्राहक था, जहां नेल काम करती थी. इस के अलावा फुलर की पियर्स से जानपहचान बस्टर ब्राउन रेस्टोरेंट में हुई थी, जहां वह मैनेजर थी.

इन वारदातों के 24 साल बाद फुलर की सितंबर 2011 में गिरफ्तारी हुई थी. तब वह सबूत नहीं मिलने के कारण छूट गया था.

उस ने अदालत में बताया कि वह 1989 से 12 साल तक हीथफील्ड अस्पताल के 2 मुर्दाघरों में बिजली संबंधी समस्याओं की देखभाल के लिए अकसर आताजाता था.

वह वहां के रखरखाव का सुपरवाइजर था. मुर्दाघर के फ्रीजर के देखभाल की जिम्मेदारी उसी पर थी. इस के लिए उसे वहां प्रवेश के लिए निजी एक्सेस स्वाइप कार्ड मिला हुआ था. मुर्दाघर में कुल 5 कर्मचारी काम करते थे, जिन की ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक की होती थी. फुलर की ड्यूटी दिन के 11 बजे से शाम के 7 बजे तक की थी. इस कारण दूसरे कर्मचारियों के चले जाने के बाद भी वह मुर्दाघर में रुका रहता था. अपनी शिफ्ट के अखिरी 3 घंटों में ही उस ने यह घिनौने काम किए थे.

वैसे अस्पताल के कुली किसी भी समय नए शवों के साथ मुर्दाघर में आ सकते थे. यह फुलर के लिए पोस्टमार्टम कक्ष में प्रवेश करने का अच्छा मौका होता था. फुलर पोस्टमार्टम कक्ष में चला जाता था. ऐसा करते हुए किसी का ध्यान उस पर नहीं जाता था.

मुर्दाघर के अन्य हिस्सों की तुलना में शवों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए पोस्टमार्टम कक्ष में कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए थे. हालांकि  मुर्दाघर की ओर जाने वाले गलियारों सहित अन्य क्षेत्रों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे थे.

इस नतीजे तक पहुंचने में इंग्लैंड पुलिस को 2.5 मिलियन यूरो यानी 21.42 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे. फुलर के अपराध मुर्दाघर की लाशों के साथ यौनाचार तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि इसे यादगार बनाए रखने के लिए  उस ने एक डायरी भी बना रखी थी.

वह लाशों के साथ यौन संबंध बनाने के बाद बाकायदा उस घटना को अपने अनुभवों के साथ डायरी में नोट करता था. यही नहीं, उस ने सैक्स की फ्यूचर प्लानिंग तक कर रखी थी.

भोजपुरी सिंगर Shilpi Raj का नया गाना हुआ रिलीज, नीलम गिरी ने दिया शानदार एक्सप्रेशन

भोजपुरी सिंगर (Bhojpuri Singer) शिल्पी राज (Shilpi Raj) बहुत कम समय में ही इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना ली है. वो अपनी गायिकी से दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब हो रही हैं. शिल्पी राज के एक से बढ़कर एक गाने रिलीज हो रहे हैं.

शिल्पी राज का एक नाया गाना ‘राजा जी खून कई दS’ (Raja Ji Khoon Kaida)  रिलीज हुआ है. इस गाने में एक्ट्रेस नीलम गिरी अपनी अदाओं से फैंस का मन मोह रही हैं. गाने में उनके डांस और एक्सप्रेशन्स शानदार दिखाई दे रहा है.

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‘राजा जी खून कई दS’ (Raja Ji Khoon Kaida) के वीडियो को वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के यूट्यूब चैनल पर जारी किया गया है. गाने में ट्रेंडिंग गर्ल नीलम गिरी (Neelam giri) नजर आ रही हैं.

 

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एक्ट्रेस कमाल की डांस मूव्स दिखा रही हैं. इसमें उनका डांस और एक्सप्रेशन्स का तो जवाब ही नहीं है. बता दें कि नीलम गिरी और शिल्पी राज की सोशल मीडिया पर जबरदस्त फैन फॉलोइंग है.

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इस वीडियो सॉन्ग को 3 लाख से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है. अगर व्यूज के आंकड़े इसी तरह से बढ़ते रहे तो ये कहना गलत नहीं होगा कि ये जल्द ही एक मिलियन व्यूज से ज्यादा का आंकड़ा पार कर जाएगा.

 

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Top 10 Tv Shows 2021: इस साल टीवी पर अनुपमा का रहा दबदबा, सई-इमली ने जीता दर्शकों का दिल

टीवी जगत के लिए यह साल काफी दिलचस्प रहा. इस साल कई टीवी शोज लॉन्च हुए तो कई शोज ऑफ एयर हुए. कई शोज फैंस का दिल जीतने में कामयाब हुए को कई शोज फ्लॉप साबित हुए. तो आइए बताते हैं, इस साल के टॉप-10 टीवी शोज के बारे में, जो सुर्खियों में छायी रही.

साल 2021 के टॉप-10 टीवी शोज

  1. अनुपमा (Anupamaa)

 

रुपाली गांगुली और सुधांशु पांडे स्टारर सीरियल अनुपमा लगातार टीआरपी चार्ट में टॉप पर रहा है. इस शो की कहानी एक्सट्रा मैरिटल अफेयर पर आधारित है. यह शो काफी कम समय में दर्शकों के दिल में जगह बनाने में कामयाब हो रही है. इस शो का हर कैरेक्टर घर-घर में मशहूर है. शो की कहानी में इन दिनों दिखाया जा रहा है कि अनुज की बहन मालविका की एंट्री हुई है. जिससे कहानी में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल रहा है.

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 2. गुम है किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin)

 

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निल भट्ट, ऐश्वर्या शर्मा और आयशा सिंह स्टारर सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’  की कहानी को दर्शक काफी पसंद करते है. बॉलीवुड अदाकारा रेखा ने इस शो का प्रमोशन किया था. शो में दिखाया जा रहा है कि सई और विराट के बीच गलतफहमियां बढ़ चुकी है. शो के आने एपिसोड में ये देखना दिलचस्प होगा कि दोनों का रिश्ते में सुधार होगा या दोनों अलग हो जाएंगे.

3. इमली (Imlie)

 

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टीवी सीरियल इमली स्टार जलशा के बंगाली टीवी सीरियल ‘इश्ति कुटुम’ पर आधारित है. शो में सुंबुल तौकीर खान इमली की भूमिका में हैं तो वहीं गशमीर महाजनी आदित्य कुमार त्रिपाठी के किरदार निभा रहे हैं.  शो में मयूरी देशमुख का निगेटिव रोल है, जो मालिनी चतुर्वेदी का किरदार निभा रही है. साल 2021 में यह शो भी चर्चे में रही.

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4. ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya kehlata hai)

 

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टीवी का मशहूर शो ये रिश्ता क्या कहलाता है’  सुर्खियों में छायी रही. इस साल में शो में कई नए चेहरे देखने को मिला. इस सीरियल को डायरेक्टर राजन शाही ने प्रोड्यूस किया है. शो के लीड एक्टर्स शिवांगी जोशी और मोहसिन खान ने अलविदा कह दिया है. शो में लीप आ चुका है. शो में हर्षद चोपड़ा, करिश्मा सावंत और प्रणाली राठौड़ के साथ नई कहानी शुरू हो चुकी है.

5. तारक मेहता का उल्टा चश्मा (Tarak Mehta Ka Ooltah Chashma)

 

टीवी का कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’  प्रसारित होने वाले सबसे लंबे शोज में से एक है. कॉमेडी के नंबर वन शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा को 13 साल पूरे हो गए हैं.  शो में कई कलाकार आए औऱ गए. लेकिन  फैंस का यह पसंदिदा शो है.

6. उड़ारियां (Udaariyaan) 

 

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कलर्स टीवी (Colors tv) का पॉपुलर सीरियल उड़ारियां (Udaariyaan) साल 2021 में टीआरपी चार्ट में जगह बनाने में कामयाब रहा.  शो की कहानी चर्चे में रही. इस शो की कहानी फतेह, जैस्मिन और तेजो की इर्द-गिर्द घुमती है. फतेह जैस्मिन से प्यार करता था और दोनों की शादी हो रही थी लेकिन जैस्मिन ने फतेह को शादी के मंडप में अकेला छोड़ दिया था.

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 7. नागिन-5 (Naagin 5)

 

टीवी शो नागिन साल 2021 का पॉपुलर शो रहा है. इस सीरियल का पांचवां सीजन सुर्खियों में छायी रही. शो में सुरभि चंदना और शरद मल्होत्रा की जोड़ी को खूब पसंद किया गया. बता दे कि इस शो को काफी कम समय में ऑफ एयर हो गया.

8. द कपिल शर्मा शो (The Kapil Sharma Show)

 

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टीवी पर कपिल शर्मा चर्चे में रहता है. आपको बता दें कि यह शो फरवरी 2021 में ऑफ एयर हो गया था. दरअसल कपिल शर्मा ने फैमिली के साथ वक्त बिताने और सपोर्ट करने के लिए शूटिंग ब्रेक लिया था. अगस्त 2021 से द कपिल शर्मा शो ऑन एयर हुआ.

9. बालिका वधु 2 (Balika Vadhu 2)

 

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‘बालिका वधू’ का दूसरा सीजन साल 2021 में खूब सुर्खियां बटोरी. अब शो में शिवांगी जोशी आनंदी का किरदार निभा रही हैं .हाल ही में शो में  लीप दिखाया गया. लीप आने के बाद शिवांगी जोशी ने श्रेया पटेल को रिप्लेस किया.

10. साथ निभाना साथिया 2 (Sath Nibhaana Saathiya 2)

 

टीवी की गोपी बहू और कोकिला बेन की जोड़ी को कोई नहीं भूल सकता. जी हां, इस साल भी ये सास-बहू की जोड़ी काफी चर्चे में रहे. साल 2010 में आए सीरियल साथ निभाना साथिया टीवी जगत में काफी हिट हुआ. 10 साल बाद एक बार फिर से सीधी सादी बहू और सास वाले कॉन्सैप्ट को दिखाया गया.

यूपी में युवाओं को मिली डिजी शक्ति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर प्रदेश के एक करोड़ युवाओं को फ्री स्मार्टफोन और टैबलेट योजना की शुरूआत की.

युवाओं से खचाखच भरे स्टेडियम में हर जिले से आए 60 हजार युवाओं को फ्री स्मार्टफोन और टैबलेट की सौगात दी गई. इस दौरान सीएम योगी ने अब हर कमिश्नरी पर फ्री स्मार्टफोन और टैबलेट देने की घोषणा की.

सीएम योगी ने पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ईकाना स्टेडियम में आयोजित समारोह में डिजी शक्ति पोर्टल और डिजी शक्ति अध्ययन ऐप का भी शुभारंभ किया. ओलंपियन मीरा बाई चानू और उनके कोच विजय शर्मा को भी सम्मानित किया.

सीएम योगी ने दर्जनों युवाओं का उदाहरण देकर युवाओं को प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि दुनिया के अंदर जब भी भारत के युवाओं को अवसर मिला है, तो उन्होंने अपनी प्रतिभा का छाप वैश्विक मंच पर पूरी मजबूती के साथ रखा है. सीएम योगी ने एक कविता से अपनी संबोधन को समाप्त किया.

‘नए युग का सृजन युवकों तुम्हारे हाथ में है,

समूचा जग युवा पीढ़ी तुम्हारे साथ में है’.

प्रबल फौलाद सच मानो तुम्हारे गात में है

नए युग का सृजन युवकों तुम्हारे हाथ में है

सफलता तो तुम्हारी बात में है, जज्बात में है

नए युग का सृजन युवकों तुम्हारे हाथ में है

12 बजे सोकर उठने वाले युवा नहीं, इनसे उम्मीद मत करना : सीएम योगी

सीएम योगी ने विपक्षी दलों के नेताओं का बिना नाम लिए उन पर बड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि 12 बजे सोकर उठने वाले युवा नहीं हैं. प्रदेश की जनता को कोरोना महामारी में गुमराह करके वैक्सीन का विरोध करने वाले युवा नहीं हैं. यह सब टायर्ड हैं और रिटायर्ड हैं. इनसे उम्मीद मत करना, क्योंकि इन्होंने तो प्रदेश की जनता और प्रदेश के युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा किया था.

2017 के पहले बेरोजगारी दर करीब 18 फीसदी थी, आज साढ़े चार फीसदी है : सीएम

सीएम योगी ने कहा कि हमारा युवा 2017 के पहले कहीं जाता था, तो कुछ जिले ऐसे थे कि उनके नाम पर होटल में कमरे नहीं मिलते थे और बाकी युवा कहीं जाता था, तो यह मान लिया जाता था कि नकल करके आया होगा या सिफारिशी होगा, इसलिए उसे प्रतियोगी परीक्षाओं से बाहर कर दिया जाता था. 2017 के पहले बेरोजगारी दर करीब 18 फीसदी थी और आज साढ़े चार फीसदी है. यह दिखाता है हमारे प्रयास सही दिशा की ओर आगे बढ़ रहे हैं. हमें नए भारत के नए उत्तर प्रदेश की ओर आगे कैसे बढ़ना है, यह प्रधानमंत्री की ईमानदार सोच को दमदारी के साथ प्रदेश के अंदर लागू करने का कार्य किया गया है.

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अभ्युदय कोचिंग अब हर जिले स्तर पर: योगी

सीएम योगी ने कहा कि मुझे याद है जब लॉकडाउन शुरू हुआ था, सबसे पहली चुनौती हमारे सामने आई थी, जो बच्चे कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, उन बच्चों को कैसे उनके घर में सुरक्षित लाया जाए. राजस्थान सरकार सहयोग के लिए तैयार नहीं थी. मुझे उत्तर प्रदेश से बसें कोटा भेजनी पड़ी थीं. सभी 15 हजार बच्चों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने का कार्य किया गया था. तब हमने तय किया था कि अब हमारे प्रदेश के बच्चों को परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए प्रदेश के बाहर न जाना पड़े. इसके लिए हर कमिश्नर हेडक्वार्टर पर व्यवस्था होनी चाहिए. आज हमने अभ्युदय कोचिंग की व्यवस्था हर कमिश्नरी में की है, उसे अब हर जिले स्तर पर ले जा रहे हैं. ऐसे 10 हजार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को भी फ्री में स्मार्टफोन और टैबलेट से जोड़ा जा रहा है.

युवाओं के जीवन से खिलवाड़ करने वालों की जगह जेल होगी: सीएम

सीएम योगी ने कहा कि सरकार की नीयत साफ होती है, तो काम भी दमदार दिखता है. सोच ईमानदार, तो काम दमदार. यह काम दमदार का ही परिणाम है. 2017 के पहले नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद होता था. कुछ जगहों पर तो ऐसा होता था कि कोई नौकरी निकली और एक खानदान के लोग चाचा, भतीजा और मामा भी वसूली में निकल पड़ते थे. महाभारत का कोई रिश्ता नहीं था, जो वसूली में न निकलता हो, लेकिन 2017 के बाद हमने कहा कि युवाओं के जीवन से जो भी खिलवाड़ करेगा, उसकी जगह जेल होगी. प्रदेश में पूरी पारदर्शिता के साथ भर्ती की प्रक्रिया होगी और भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया.

पिछली सरकारों ने 10 वर्षों में दो लाख और साढ़े चार वर्षों में साढ़े चार लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी: सीएम

सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारों में 10 वर्षों में दो लाख भर्ती नहीं हो पाई थी. हमने अभी पांच वर्ष भी नहीं हुए हैं. साढ़े चार लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है. प्रदेश में कानून व्यवस्था की बेहतरीन स्थिति दी, तो परिणाम सामने आ गए. एक तरफ जो माफिया पहले गरीबों की संपत्ति को हड़पते थे और व्यापारियों की संपत्ति पर कब्जा करते थे. सत्ता उन्हें संरक्षित करती थी, उन माफिया के अवैध कमाई पर प्रदेश सरकार का जब बुलडोजर चलता हुआ दिखाई दिया, तो माफिया और अपराधियों के संरक्षणदाताओं के भी होश उड़ते हुए दिखाई दिए.

दो करोड़ से ज्यादा युवाओं को स्वत: रोजगार से जोड़ा: सीएम

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में निवेश बढ़ा है. एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) की नीति हमने लागू की और परिणाम था एक करोड़ 59 लाख नौजवानों को उन्हीं के गांव और उन्हीं के जिले में रोजगार भी उपलब्ध होता हुआ दिखाई दिया. यही नहीं, स्वत: रोजगार के साथ विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से जोड़कर 60 लाख युवाओं को स्वत: रोजगार से जोड़ा है. लोग भौचक हैं.

एक सप्ताह में हर कमिश्नरी में बंटेंगे स्मार्टफोन और टैबलेट

सीएम योगी ने कहा कि यह केवल स्मार्टफोन और टैबलेट नहीं है. इसके साथ आपको फ्री में डिजिटल एक्सेस की सुविधा भी उपलब्ध कराने जा रहे हैं. फ्री में कंटेंट उपलब्ध होंगे. नई शिक्षा नीति के साथ जुड़कर हम भारत को दुनिया में एक महाशक्ति की ओर अग्रसर करने में कामयाब होंगे. अब हर कमिश्नरी में इस तरह के कार्यक्रम हो जाएं. डिजिटल क्रांति को गांव-गांव तक पहुंचाने, आनलाइन एजूकेशन से लेकर आनलाइन एक्जामिनेशन और प्रतियोगी परीक्षाओं को भी युवाओं को इसके साथ जोड़ेंगे.

यूपी को नई पहचान दिलाएगा ‘काशी फिल्म महोत्सव’

भगवान शिव की नगरी में 27 से 29 दिसम्बर तक होने वाले इस 03 दिवसीय आयोजन में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत और नृत्य के दर्शन तो होंगे ही साथ में यहां रहकर देश में विख्यात हुए दार्शनिक कवि, लेखक, संगीतज्ञों और बनारस घराने की यादें भी ताजा होंगी.

मंदिरों के शहर में हंसी से गुदगुदाने के लिए महशूर हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव भी मौजूद रहेंगे तो शाम को यादगार बनाने के लिए ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रस्तुतियां भी दर्शकों के लिए यादगार बन जाएंगी.

भगवान शिव की नगरी में फिल्म बंधु, उत्तर प्रदेश सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से पहली बार काशी फिल्म महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. दीपों के शहर के रूप में विख्यात काशी नगरी में 27 दिसम्बर को शाम 04 बजे महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि पर्यटन, संस्कृति, धर्मार्थ कार्य, प्रोटोकॉल राज्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी और विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा करेंगे.

इस दौरान वाराणसी के इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में मनोज जोशी की प्रस्तुति आकर्षण का केन्द्र बनेगी. शाम छह बजे से डॉ. सम्पूर्णानन्द स्पोट्स स्टेडियम, सिगरा में हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव और गायक कैलाश खेर के लाइव शो शाम को खुशनुमा बना देंगे.

ज्ञान नगरी के रूप में भी मशहूर वाराणसी में 28 दिसम्बर को होने वाले काशी फिल्म महोत्सव के मुख्य अतिथि भारत सरकार के केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर रहेंगे. इस दौरान 10:30 बजे से 12 बजे तक “वाराणसी- एक सांस्कृतिक, पौराणिक और एतिहासिक विरासत से एक आधुनिक शहर की यात्रा” विषय पर पैनल चर्चा का आयोजन होगा.

दूसरी पैनल की चर्चा का विषय ‘संगीत और गीत-बनारस की विरासत’ पर होगी जिसका समय दोपहर 12:30 बजे से दोपहर 02 बजे तक रहेगा. शाम 04 बजे समापन समारोह के साथ ही सब्सीडी का वितरण होगा. गुरुवार की शाम मशहूर फिल्म अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद हेमा मालिनी के नाम रहेगी. इस दौरान उनकी ओर से पेश की जाने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुति सबका दिल मोह लेगी.

यह कार्यक्रम वाराणसी के इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में ही होंगे. 29 दिसम्बर को “फिल्म निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में उत्तर प्रदेश और क्षेत्रीय सिनेमा की संभावनाएं” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित होगी. और इस दिन की शाम गायक रवि त्रिपाठी, अभिनेता रवि किशन की पेशकश के रूप में पहली बार काशी में हो रहे फिल्म महोत्सव को यादगार बना देगी.

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