मनोहर कहानियां: चांदनी को लगा शक का तीर

शाहनवाज

26दिसंबर, 2021 की सुबह के करीब 6 बज रहे थे, जब कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र में राजीव नगर की एक कालोनी के एक घर में दूसरी मंजिल पर रहने वाले हैदर के घर से बच्चों के रोने की आवाजें तेज हो गईं. हालांकि हैदर के घर से बच्चों की रोने की आवाजें बहुत पहले से ही आ रही थीं, लेकिन ठंड के दिनों में इतनी सुबहसुबह वह बिस्तर से उठना नहीं चाहता था. वैसे भी हैदर के घर के झगड़ेझमेलों में मकान का कोई भी दूसरा पड़ोसी पड़ने को तैयार नहीं था.

उन के घर पर लगभग रोजाना झगड़ा होना, मारपीट और बच्चों के चीखनेचिल्लाने व रोनेपीटने की आवाजें आम बात सी हो गई थी. कुछ ही देर में बच्चों के रोने की आवाजें इतनी तेज हो गईं कि अब लोगों की आंखों की नींद टूटने लगी थी. मकान की पहली मंजिल पर रहने वाला मकान मालिक तो उन के आपसी झगड़ों से इतना परेशान हो गया था कि उस ने तय कर लिया कि वो हैदर को घर खाली करने को कह देगा.

मकान मालिक गुस्से और तैश में अपने बिस्तर से निकला, अपने कमरे से निकलते हुए उस ने अपने पैरों में चप्पल डाली और तेजी से भागता हुआ सीढि़यां चढ़ कर दूसरी मंजिल पर हैदर के कमरे का दरवाजा खटखटाते हुए बोला, ‘‘हैदर जल्दी बाहर निकल. तुम लोगों का हर दिन का ये ड्रामा अब मैं नहीं सह सकता. जल्दी निकल. तेरा इलाज तो मैं आज करता हूं.’’

कुछ ही देर में दरवाजा खुला. दरवाजा हैदर ने नहीं बल्कि रोते हुए हैदर की 5 साल की बेटी सायमा ने खोला था. उसे रोता देख मकान मालिक ने उसे अपनी गोद में उठा लिया और बोला, ‘‘अरे रो क्यों रही है? पापा कहां हैं तेरे? सुबह से तुम ने रोरो कर सब की नींद हराम कर डाली है.’’

सायमा को गोद में उठाते हुए मकान मालिक ने कमरे के दरवाजे का दूसरा पल्ला खोला और अंदर का नजारा देख उस की आंखें खुली की खुली रह गईं.

उस ने देखा कि कमरे में बिखरे सामान के बीचोबीच जमीन पर हैदर की बीवी चांदनी पड़ी है. चांदनी के ठीक बगल में उन का 2 साल का बेटा हसन अपनी मां के गालों पर हाथ लगा कर उसे उठाने की लगातार कोशिश कर रहा है. लेकिन चांदनी कोई जवाब ही नहीं दे रही है.

यह देख कर मकान मालिक के ठंडे पड़े कान एकदम से गरम हो गए. उस के हाथपांव सुन्न पड़ गए. उस के गले से आवाज नहीं निकल रही थी और उस के शरीर की मानों सारी ऊर्जा खत्म सी हो गई.

बड़ी हिम्मत जुटा कर मकान मालिक अपनी गोद में सायमा को उठा कर कमरे में दाखिल हुआ और बिखरे सामान को अपने पैरों से हटा कर कदमों को आगे बढ़ाया. जैसेजैसे वह चांदनी की ओर आगे बढ़ता जा रहा था, वैसेवैसे उस के पैरों की हड्डियां मानों लचीली होती जा रही थीं.

उस ने चांदनी को देखने के बाद मन ही मन यह अंदाजा लगा लिया था कि उसे क्या हुआ होगा, लेकिन वह इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था.

दम तोड़ चुकी थी चांदनी

जब वह जमीन पर पड़ी चांदनी के एकदम नजदीक पहुंचा तो वह झुका और सायमा को अपनी गोद से उतारा. बिना कुछ कहे दोनों हाथों का इस्तेमाल कर उस ने चांदनी की कलाई उठाई और अपने दूसरे हाथ से उस की नब्ज टटोलने लगा. नब्ज मिलने पर उस ने उसे दबाया और उस की धड़कन महसूस करने की कोशिश की.

इस बीच कमरे में दोनों बच्चों की सुगबुगाहट और रोने का शोर पूरा था, लेकिन उसे मानो कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था. करीब 2 मिनट तक चांदनी के हाथों की नब्ज टटोलने के बाद उसे महसूस हुआ कि चांदनी की धड़कने थम चुकी हैं. लेकिन उस ने हार नहीं मानी. उस ने अपने कानों को चांदनी की नाक के पास ले जार कर चैक किया. चांदनी की सांस चल रही है या नहीं.

मकान मालिक यह मंजर देख कर इतना डर गया कि उस ने फिर से एक बार चांदनी की नब्ज दबाई. लेकिन उसे असफलता ही हाथ लगी. जब उस के मन ने यह मान लिया कि चांदनी मर चुकी है तो डरेसहमे मकान मालिक ने कमरे में मौजूद 2 साल के हसन को अपनी गोद में उठाया और सायमा का हाथ पकड़ कर उन्हें कमरे से बाहर ले कर निकला और मकान में जोर से शोर मचाया. देखते ही देखते हैदर के कमरे के सामने मकान में रहने वाले सभी किराएदारों का झुंड लग गया. मकान में खड़े रहने की इतनी जगह नहीं थी तो लोगों की मकान के बाहर गली में भीड़ जुटने लगे.

इस बीच मकान मालिक ने फोन कर स्थानीय पुलिस को इस घटना की सूचना दे दी और सभी पुलिस के आने का इंतजार करने लगे. हर कोई जिस को यह बात पता लगती जाती कि फलां घर में फलां महिला की मौत हो गई है. वह मकान के आगे खड़ा हो जाता और मामले में होने वाली हलचल को देखने में व्यस्त हो जाता.

हैदर के मकान के आगे जुटी भीड़ की खुसफुसाहट से इलाके में धीमा शोर सा फैल गया. थाना वहां से बहुत दूर नहीं था. कुछ देर के बाद ही स्थानीय पुलिस सूचना मिलते ही वहां पहुंच गई तो मकान के आगे जुटी भीड़ ने पुलिसवालों के लिए रास्ता बनाया.

नौबस्ता थानाप्रभारी अमित कुमार भड़ाना के नेतृत्व में पुलिसकर्मी मकान में उस कमरे में गए, जहां पर हत्या को अंजाम दिया गया था. कमरे में चांदनी की लाश जमीन पर पड़ी थी और घर का हर सामान अपनी जगह पर नहीं था. कमरे का माहौल इतना अस्तव्यस्त था कि घटनास्थल को सही से समझने में पुलिसकर्मियों को काफी समय लग गया.

घटनास्थल से जुटाए सबूत

पुलिस की टीम ने देखा कि कमरे में ऊपर टंगे हुए पंखे की पंखुडियां नीचे की ओर मुड़ी हुई थीं. लाश के पास ही चांदनी का दुपट्टा भी मौजूद था. यह देख कोई भी यह अंदाजा लगा सकता था कि हत्या को अंजाम पीडि़ता को फांसी पर लटका कर दिया गया था. देरी न करते हुए मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने चांदनी की लाश को पास के सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस के साथ ही घटनास्थल से पुलिस टीम ने फोरैंसिक टीम की मदद ले कर सभी जरूरी सबूतों को इकट्ठा कर लिया.

यह सब करने के बाद अब बारी थी पूछताछ की. थानाप्रभारी ने अपनी टीम की सहायता ले कर मामले को समझने के लिए मकान मालिक समेत सभी किराएदारों से हैदर और चांदनी के बारे में पूछताछ की. इस के साथ ही पुलिस ने चांदनी के रिश्तेदार, जिस में उस का भाई अब्दुल माजिद जो कानपुर के बाबुपुरवा में रहता था, को इस घटना की सूचना दी और जल्द से जल्द राजीव नगर अपनी बहन के घर पर आने को कहा.

पूछताछ के दौरान मकान मालिक और मकान में रहने वाले सभी किराएदारों ने पुलिस को बताया कि हैदर और चांदनी के बीच लगभग हर दिन झगड़े होते रहते थे. हैदर पेशे से पेंटर था और कोविड की वजह से उस के काम पर काफी असर पड़ा था.

इन दिनों उस का काम थोड़ाबहुत बढ़ा था, जिस के बाद ही वह मकान मालिक को किराए के पैसे दे पाया था. जब पुलिस ने उन के बीच झगड़ों की वजह पूछी तो पता चला कि हैदर हर रात को दारू पी कर घर आता था और वह घर के खर्चों के लिए चांदनी को पैसे भी नहीं देता था. इसलिए चांदनी घर के खर्चों के लिए घर पर ही पतंग बनाने का काम किया करती थी और उसी से ही बच्चों की जरूरतें पूरा किया करती थी.

हर किसी से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने चांदनी और हैदर के बच्चों का रुख किया. हालांकि बच्चे उस समय भी लगातार रो ही रहे थे. पुलिस की टीम ने उन्हें खिलौने और खाने के लिए चौकलेट खरीद कर दिए तो बच्चे कुछ पल के लिए शांत हुए.

सायमा ने पुलिस को बताई कहानी

इसी दौरान थानाप्रभारी ने चांदनी की बेटी सायमा से इस घटना के बारे में पूछा. सायमा फफकते हुए धीमी आवाज में बोली, ‘‘पापा ने मम्मी के गले में दुपट्टा डाला और खींच कर पकड़ा. मम्मी जवाब नहीं दे रही थीं.’’

यह सुन कर थानाप्रभारी चौकन्ने हो गए और सायमा से इस बारे में थोड़ा और खुल कर बताने के लिए कहा. सायमा थानाप्रभारी को कुछ भी बताने से काफी डर रही थी. थानाप्रभारी उस छोटी बच्ची के डर को साफ महसूस कर रहे थे. इसलिए उन्होंने सायमा के डर को दूर करने के लिए उसे अपने विश्वास में ले कर थोड़ी दूर आए.

वह सायमा से बोले, ‘‘बेटा डरने की जरूरत नहीं है. हम हैं न यहां पर. जो कुछ हुआ उसे बिना डरे बताओ. तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा.’’

रोती हुई सायमा को थानाप्रभारी की बात सुन कर थोड़ा अच्छा महसूस हुआ तो उस ने जवाब दिया, ‘‘पापा ने बोला कि अगर किसी को इस बारे में बताया तो वे हमें भी मम्मी की तरह मार डालेंगे.’’

यह सुन कर थानाप्रभारी के कान खड़े हो गए. उन्होंने सायमा को फिर से भरोसा दिलाया कि उसे कुछ नहीं होगा, अगर वो सब कुछ सचसच बता देगी तो वह उस की अम्मी के कातिल को सजा दिला पाएंगे.

सायमा को थानाप्रभारी की बातों पर भरोसा हो गया तो उस ने कहा, ‘‘पापा की मम्मी से कल रात को भी लड़ाई हुई थी. पापा दारू पी कर आए थे और मम्मी को पैसे देने के लिए बोल रहे थे. कल रात को भी पापा ने मम्मी को मारा था. उस के हाथ पर चोट आई थी कल रात को. आज सुबह भी उन के बीच झगड़ा हुआ था. पापा काम के लिए सुबह निकलने वाले थे और मम्मी से पैसे मांग रहे थे. मम्मी ने पैसे नहीं दिए तो पापा ने गुस्से में मम्मी के गले में उन का दुपट्टा डाला और कस दिया. उस के बाद मम्मी कुछ नहीं बोलीं.

‘‘जब पापा ने मम्मी के गले में उन का दुपट्टा डाला था तो मैं और मेरा छोटा भाई पापा के सामने हाथ जोड़ कर रो रहे थे कि मम्मी को छोड़ दीजिए पापा. लेकिन पापा ने तब तक मम्मी को नहीं छोड़ा, जब तक मम्मी ने बोलना बंद नहीं किया था.

ऐसा करने के बाद पापा ने मेरा गला पकड़ लिया और जोर से दबा दिया था और मुझ से बोले कि अगर मैं ने किसी को भी इस के बारे में बताया तो वह मुझे भी मम्मी की तरह चुप करा देंगे. अंकल मुझे डर लग रहा है अब. क्या पापा सही में मुझे मम्मी की तरह चुप करवा देंगे?’’

यह सब सुन कर थानाप्रभारी की आंखें खुली रह गईं. 5 साल की बच्ची ने पूरा किस्सा पुलिस को बता दिया था. लेकिन थानाप्रभारी के मन में अभी भी एक अहम सवाल बना हुआ था कि हैदर ने चांदनी की हत्या क्या सिर्फ पैसों की वजह से की होगी?

हैदर को चांदनी पर हो गया था शक

इस सवाल का जवाब उन्हें चांदनी के भाई अब्दुल माजिद से मिला जो सायमा से पूछताछ के दौरान ही अपने कुछ और करीबी रिश्तेदारों के साथ राजीव नगर पहुंचा था. अब्दुल माजिद ने थानाप्रभारी को बताया कि हैदर और चांदनी की शादी 8 साल पहले कानपुर में ही हुई थी. उस समय हैदर पेंटिंग का काम किया करता था और ठीकठाक कमाता था.

लेकिन जब से कोविड की शुरुआत हुई और सब के कामधंधे ठप पड़ गए तो वह भी घर पर बैठ गया. लेकिन लौकडाउन के उन दिनों में भी वह घर से निकलता था और अड़ोसपड़ोस के लफाडि़यों के संग दो पैसे कमाने के मकसद से जुआ खेलने लगा था. लेकिन जुए में वह पैसे कमाने की जगह पैसे गंवाने लगा और धीरेधीरे उस ने अपनी पूरी जमापूंजी जुए में गंवा दी. इन सब के लिए चांदनी उसे बहुत टोका करती थी और जुआ खेलने को ले कर उस से झगड़े करती थी. लेकिन वह नहीं माना.

हार मान कर चांदनी ने घर खर्च चलाने के लिए पतंग बनानी शुरू कर दीं. चांदनी दिन भर घर के काम, बच्चों की देखरेख और पतंग बनाने में व्यस्त रहने लगी और उन के आपस के झगड़े भी कम होने लगे. झगड़े कम होने की वजह से हैदर को सुकून तो मिला, लेकिन उस के मन में चांदनी को ले कर शक पैदा होने लगा कि कहीं उस की बीवी गलत काम कर के पैसे तो नहीं जोड़ रही है.

जैसेजैसे दिन बीतते जाते, हैदर के मन का शक भी बढ़ता ही जाता. कुछ समय बाद जब देश में कोविड से हालात सामान्य हुए और हैदर का पेंटिंग का काम फिर से चालू हुआ तो हैदर भी पूरा दिन घर से बाहर काम में लगाने लगा. हैदर ने शराब पीने की लत भी तभी से ही लगाई थी.

धीरेधीरे उन के बीच फिर से पहले की तरह ही झगड़े होने शुरू हो चुके थे, लेकिन अब झगड़ा पैसों को ले कर नहीं बल्कि चांदनी के चरित्र को ले कर हुआ करता था.

दरअसल, हैदर को चांदनी पर इस बात का शक था कि चांदनी जिस दुकानदार के लिए पतंग बनाने का काम करती है, शायद उसी के साथ ही उस के अवैध संबंध हैं. इस बात पर उन के बीच आए दिन झगड़ा होने लगा. इसी दौरान हैदर ने अपने शक्की दिमाग में चांदनी के लिए न जाने क्याक्या खयाल पैदा कर लिए और झगड़े मारपीट में बदल गए. चांदनी बच्चों की चिंता कर हैदर की मारपीट को सहन कर लिया करती और अपना काम जारी रखती.

लेकिन 25 दिसंबर, 2021 की रात को उन के बीच फिर से झगड़ा हुआ और अगली सुबह हैदर ने चांदनी को जान से मार दिया.

इस पूरी घटना के बाद पुलिस ने फरार आरोपी हैदर के खिलाफ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और उस की तलाश जारी है. कथा लिखने तक पुलिस आरोपी हैदर को गिरफ्तार नहीं कर सकी थी.

शख्सियत: आयशा मलिक- पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जस्टिस

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट को पहली बार कोई महिला जस्टिस मिली है. पाकिस्तान के ज्यूडिशियल कमीशन ने 6 जनवरी, 2022 को 55 साल की जस्टिस आयशा अहेद मलिक के नाम को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के तौर पर मंजूरी दी है.

चीफ जस्टिस गुलजार अहमद की अध्यक्षता वाले पाकिस्तानी न्यायिक आयोग ने आयशा मलिक की बहाली को बहुमत (5 के मुकाबले 4 वोट) के आधार पर मंजूरी दी है. अब उन के नाम पर संसदीय समिति विचार करेगी, जो माना जाता है कि बमुश्किल ही जेसीपी (ज्यूडिशियल कमीशन औफ पाकिस्तान) के खिलाफ जाती है.

हालांकि पिछले साल 9 सितंबर, 2021 को भी जेसीपी ने आयशा मलिक के नाम पर विचार किया था, पर उस दौरान वोट बराबर होने के चलते उन का नाम रिजैक्ट हो गया था, पर इस बार पकिस्तान की न्यायपालिका में आयशा मलिक की बहाली इतिहास बनाने जा रही है.

क्यों जरूरी हैं आयशा मलिक

पाकिस्तान जैसे रूढि़वादी देश के लिए यह किसी बड़ी बात से कम नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट में किसी महिला जस्टिस की बहाली को मंजूरी मिली है. पाकिस्तान वैसे भी दक्षिण एशिया का एकलौता ऐसा देश है, जिस ने कभी किसी महिला को सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस बहाल नहीं किया है.

पाकिस्तान की मानवाधिकार कमीशन रिपोर्ट 2016 के मुताबिक, पाकिस्तान के हाईकोर्ट के जस्टिसों में केवल 5.3 फीसदी ही महिलाएं हैं, जो महिला नुमाइंदगी के तौर पर तादाद में बेहद कम हैं.

हालांकि वहां का संविधान भारत के संविधान के तर्ज पर यह हक तो देता है कि ‘सभी नागरिक कानून के आगे समान हैं और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा’, पर पाकिस्तान में इसलामिक कट्टरपन के चलते महिलाओं की नुमाइंदगी हमेशा से दरकिनार की जाती रही है. ऐसे में यह कदम पाकिस्तान में मर्दऔरत की बराबरी के नजरिए से जरूरी है.

इस से माना जा रहा है कि पाकिस्तान जैसे देश में सब से बड़ी अदालत में महिला जस्टिस के होने से वहां की महिलाओं को बल मिलेगा और उन से जुड़े बड़े मसलों पर प्रगतिशील बदलाव होंगे. ऐसे में पाकिस्तानी महिलाएं आयशा मलिक से खासा उम्मीदें बांध सकती हैं.

कौन हैं आयशा मलिक

आयशा मलिक का जन्म 3 जून, 1966 को हुआ था. उन की शादी हुमायूं एहसान से हुई है, जिन से उन के 3 बच्चे हैं.

जस्टिस आयशा मलिक ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पैरिस और न्यूयौर्क के स्कूलों से हासिल की है. इस के बाद उन्होंने लाहौर में पाकिस्तान कालेज औफ ला से कानून की पढ़ाई की और लंदन के हौर्वर्ड ला स्कूल व मैसाचुसैट्स से मास्टर डिगरी हासिल की.

आयशा मलिक इस से पहले पाकिस्तान के चीफ इलैक्शन कमिश्नर रह चुके और मशहूर जस्टिस (रिटायर्ड) फखरुद्दीन इब्राहिम की सहयोगी थीं और साल 1997 से साल 2001 के बीच यानी 4 साल तक उन के साथ असिस्टैंट के तौर पर काम कर चुकी थीं.

आयशा मलिक साल 2012 में लाहौर हाईकोर्ट में जस्टिस के तौर पर बहाल हुई थीं. इस से पहले वे एक कौर्पोरेट और कमर्शियल ला फर्म में पार्टनर थीं.

हालांकि आयशा मलिक को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के तौर पर चुने जाने को ले कर पाकिस्तान में वकील संघों ने सीनियर वाले मुद्दे को ले कर अपना विरोध दर्ज किया है, पर अगर आयशा मलिक की सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर बहाली नहीं भी होती, तो भी इस बात की पूरी उम्मीद थी कि वे साल 2026 में लाहौर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस होतीं, जो खुद में पाकिस्तान के लिए एक ऐतिहासिक बात होती.

आयशा का शानदार कैरियर

जस्टिस आयशा मलिक ने साल 1997 में अपना कानूनी कैरियर शुरू किया था और साल 2001 तक कराची में कानूनी फर्म में फखरुद्दीन इब्राहिम के साथ काम किया था. वे साल 2012 में लाहौर हाईकोर्ट में जस्टिस बन गई थीं.

बाद में वे साल 2019 में लाहौर में महिला जस्टिसों की हिफाजत के लिए बनाई गई समिति की अध्यक्ष बनी थीं. उसी साल जिला अदालतों में वकीलों ने महिला जस्टिसों के प्रति हिंसक बरताव के खिलाफ एक पैनल बनाया था. इतना ही नहीं, वे द इंटरनैशनल एसोसिएशन औफ विमन जज का हिस्सा भी रही हैं, जो एक गैरसरकारी संगठन है. वहां उन्होंने महिलाओं को समानता और इंसाफ दिलाते हुए उन्हें मजबूत बनाने की पहल की थी.

आयशा मलिक अपने अनुशासन के लिए भी जानी जाती हैं. उन्होंने कई प्रमुख संवैधानिक मुद्दों पर अहम फैसले लिए हैं, जिन में चुनावों में संपत्ति की घोषणा, गन्ना उत्पादकों को भुगतान और पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता को लागू करना शामिल है.

कुछ खास फैसले

आयशा मलिक ने पिछले साल जनवरी महीने में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. उन्होंने घोषणा की थी कि यौन हमले की सर्वाइवर पर टू फिंगर और हाइमन टैस्ट गैरकानूनी है और इसे पाकिस्तान के संविधान के खिलाफ माना जाएगा.

टू फिंगर और हाइमन टैस्ट पर अपने फैसले में उन्होंने कहा था, ‘‘यह एक अपमानजनक प्रथा है, जो सर्वाइवर पर ही संदेह डालती है और आरोपी व यौन हिंसा की घटना पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जाता है.’’

साल 2016 में उन्होंने पहली बार पंजाब महिला न्यायाधीश सम्मेलन 2016 की शुरुआत की थी और तब से वे इस तरह के 3 सम्मेलनों की अगुआई कर चुकी हैं.

पाकिस्तान में साल 2022 में आयशा मलिक का सुप्रीम कोर्ट में बतौर पहली महिला जस्टिस चुना जाना स्वागत की बात तो है, पर चिंता वाली बात यह भी है कि वहां महिलाओं को अपनी पहली  मौजूदगी दर्ज कराने में आखिर इतने साल कैसे लग गए?

मेरी सगाई हो चुकी है लेकिन में ऐसे युवक से प्यार करती हूं जो सेटल्ड नहीं है, मुझे क्या करना चाहिए ?

सवाल
मैं 20 वर्षीय युवती एक युवक से प्यार करती हूं, लेकिन पिछले महीने मेरे घर वालों ने मेरी सगाई एक अन्य युवक से कर दी जो अच्छाखासा सैटल है. मैं ने मां से कहा भी पर वे नहीं मानीं, कारण था मेरे बौयफ्रैंड का सैटल न होना. बौयफ्रैंड से मेरे शारीरिक संबंध भी हैं. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं?

जवाब
जब आप किसी से प्यार करती हैं तो उस से शादी के लिए भी पहले से घर में बता कर रखना चाहिए था, साथ ही आप के बौयफ्रैंड को भी चाहिए था कि वह जल्दी से अपने पैरों पर खड़ा हो ताकि आप का हाथ मांग सके, तिस पर आप इतनी आगे बढ़ गईं कि शारीरिक संबंध भी बना लिए.

‘खैर, जब प्यार किया तो डरना क्या.’ आप के सामने लक्ष्य है उसे भेदिए. सब से पहले अपने बौयफ्रैंड से सैट होने को कहिए, हो सके तो उस की मदद कीजिए. आप भी अपनी कोशिश कर  कोई जौब इत्यादि कीजिए, इस से आप घर में बता सकती हैं कि हम दोनों मिल कर अपनी गृहस्थी चला लेंगे. मातापिता लड़की के सुरक्षित भविष्य को ले कर आश्वस्त होंगे तो अवश्य मान जाएंगे आप के रिश्ते को.

युवावस्था उम्र की वह दहलीज है जिस में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होना लाजिमी है. यह आकर्षण कब प्यार में बदल जाता है, पता ही नहीं चलता. कालेजगोइंग युवकयुवतियों में तो प्रेम सिर चढ़ कर बोल रहा है. वैसे प्रेम करने में कोई बुराई नहीं है. अगर प्रेम में सीरियसनैस हो, लेकिन ऐसा होता नहीं है. आज की पीढ़ी ने तो प्रेम को मात्र ऐंजौय का जरिया बना रखा है. वे शारीरिक आकर्षण को ही प्रेम सम झ बैठे हैं.

प्रेम का नशा महानगरों के युवकयुवतियों पर ही नहीं चढ़ा है बल्कि छोटे शहरों यहां तक कि गांवदेहातों तक के युवा प्रेम का लुत्फ उठाते हुए देखे जा सकते हैं. महानगरों में तो पार्कों, मैट्रो, मौल्स और खंडहरों में युवा एकदूसरे से आलिंगनबद्ध होते नजर आ जाते हैं. उन्हें देख कर ऐसा लगता है जैसे ये स्थल खासतौर पर प्रेमी युगलों के लिए ही बनाए गए हों.

सच तो यह है कि सैक्स की पूर्ति के लिए ही युवक प्रेम का ढोंग रचते हैं. वे अपनी गर्लफ्रैंड को प्रेम का  झांसा दे कर उस से सैक्स संबंध बनाते हैं और जब उन का उस से जी भर जाता है तो उसे छोड़ कर नई गर्लफ्रैंड बना लेते हैं. फिर उस को कौन्फिडैंस में ले कर उस के साथ भी सैक्स संबंध बनाते हैं. अगर गर्लफ्रैंड उसे इस के लिए मना करती है तो वह अभिनय करते हुए कहते हैं, ‘‘ट्रस्ट मी यार, मैं ताउम्र तेरा साथ निभाऊंगा.’’ भोलीभाली युवतियां ऐसे फरेबी बौयफ्रैंड के जाल में फंस कर अपना सर्वस्व लुटा देती हैं और फिर समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहतीं.

पिछले काफी समय से बौयफ्रैंड व उस के दोस्तों द्वारा गैंगरेप की घटनाएं आम हो गई हैं. ऐसे युवा प्रेम का नाटक कर के अपनी गर्लफ्रैंड को किसी एकांत स्थान पर ले जाते हैं और अपने दोस्तों को भी बुला लेते हैं. फिर गर्लफ्रैंड को इन वहशियों की हवस का शिकार होना पड़ता है.

बहुत कम युवतियां ही अपने साथ हुए इस दुराचार को अपने पेरैंट्स को बताने की हिम्मत जुटा पाती हैं वरना अधिकतर तो घुटघुट कर ही जीती हैं या बदनामी के भय से आत्महत्या जैसे कृत्य को अंजाम दे बैठती हैं.

दिल्ली की रहने वाली श्वेता शुरू से ही ब्यूटी व फैशन कौंशस युवती थी. ग्रैजुएशन के बाद उस ने मौडलिंग को अपना कैरियर बना लिया. मौडलिंग के दौरान ही उस की मुलाकात सुहेल से हो गई. दोनों के बीच प्रेम के बीज कब अंकुरित हुए, पता ही नहीं चला. धीरेधीरे उन का प्रेम परवान चढ़ने लगा. दोनों मौडलिंग ट्रिप पर साथ जाते और घंटों साथसाथ बिताते. श्वेता उस के प्रेम में पूरी तरह पागल थी. उसे वह दिलोजान से चाहने लगी थी. एक अच्छे जीवनसाथी की जो तसवीर उस ने अपने दिल में संजो रखी थी, वे सभी गुण सुहेल में थे.

दोनों पढ़ेलिखे थे, इसलिए जातिबंधन की समस्या भी उन के बीच नहीं थी. सुहेल ने भी श्वेता से शादी करने का वादा कर रखा था, लेकिन एक दिन सुहेल ने अचानक श्वेता के सामने सैक्स करने की अपनी इच्छा उजागर कर दी.

श्वेता ने पहले तो नानुकर की पर सुहेल ने वादा किया कि वह उसे धोखा नहीं देगा इसलिए वह मान गई. दोनों के बीच सैक्स संबंध कायम हो गए. अब अकसर सुहेल उस से सैक्स की फरमाइश करता. यह सिलसिला काफी समय तक चलता रहा.

इस बीच जब श्वेता प्रैग्नैंट हो गई तो उस ने सुहेल से शादी करने को कहा ताकि वह बदनामी से अपने को बचा सके. सुहेल को श्वेता की यह बात नागवार गुजरी. उस ने शादी करने से इनकार कर दिया. यह सुन कर श्वेता के पैरों तले जमीन खिसक गई. आखिर उसे अपने मातापिता को सबकुछ साफसाफ बताना पड़ा. श्वेता के पेरैंट्स ने सुहेल के मातापिता से बात की. खैर उन्होंने किसी तरह सुहेल को शादी के लिए रजामंद कर लिया पर हर मातापिता ऐसे नहीं होते जो शादी से पहले ही प्रैग्नैंट हो गई युवती को अपना लें.

श्वेता तो महज एक उदाहरण है, अकसर हजारों युवतियां युवकों के प्रेमजाल में फंस कर शारीरिक शोषण का शिकार हो जाती हैं, जिन में से अनेक खुदकुशी जैसे कृत्य को अंजाम दे बैठती हैं. कहीं आप भी ऐसे प्रेमी के चक्कर में न फंस जाएं इसलिए यहां कुछ ऐसे टिप्स दिए जा रहे हैं जिन को अपना कर आप प्रेमी का चयन कर सकती हैं :

प्रेमी के चयन में जल्दबाजी न करें

अकसर युवतियां किसी भी युवक की मीठीमीठी बातों में आ कर बिना सोचेसम झे उसे दिल दे बैठती हैं और साथ मरनेजीने की कसमें खाती हैं. ऐसा करना किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है. प्यार करने से पहले सोचिए कि प्यार एक बार होता है बारबार नहीं. न ही प्रेमी जींस की तरह होता है कि कुछ दिन पहनी और जब मन भर गया तो फिर नई खरीद ली. प्रेम एक पवित्र रिश्ता होता है, जिस की बुनियाद एकदूसरे के प्रति विश्वास और समर्पण पर टिकी होती है.

इसलिए प्रेम करते समय कतई जल्दबाजी न करें. प्रेमी को अच्छी तरह जांच परख लें फिर प्यार की पींगें बढ़ाएं. ‘लव एट फर्स्ट साइट’ के फार्मूले पर चलना भविष्य में परेशानी का सबब बन सकता है पर ऐसा होता बहुत कम है. ज्यादातर युवतियां हर उस युवक की ओर आकर्षित होती हैं, जो डैशिंग हो, स्मार्ट हो. यह जरूरी नहीं है कि हर डैशिंग पर्सनैलिटी वाला युवक सिंसीयर प्रेमी साबित हो बल्कि देखने में आया है कि ऐसे युवक ज्यादा फरेबी होते हैं. इसलिए सोचसम झ कर ही प्रेमी का चयन करें.

युवक के बारे में पहले पता कर लें

प्रेम करने से पहले युवती को चाहिए कि पहले पता कर ले कि जो युवक उसे पसंद आ रहा है, उस का बैकग्राउंड क्या है, क्या उस में एक अच्छे प्रेमी होने के सभी गुण मौजूद हैं?

अकसर युवक किसी युवती को पटाने के चक्कर में बड़ीबड़ी बातें करते हैं लेकिन असलियत में ऐसा कुछ भी नहीं होता. युवतियां ऐसे युवकों की बातों में फंस कर उन्हें दिल दे बैठती हैं.

युवकों का तो काम ही है प्रेम का नाटक करो और फिर सैक्स संबंध बनाओ. युवतियां चूंकि ऐसे युवकों के जाल में फंस चुकी होती हैं, इसलिए वे लाचार हो जाती हैं अपना सर्वस्व लुटाने के लिए. ऐसे युवक अपना उल्लू सीधा करते ही भाग खड़े होते हैं. इसलिए युवतियों को प्रेमी का चयन करते समय उस के बारे में अवश्य पता कर लेना चाहिए कि वह कितने पानी में है.

प्रेमी के साथ सुनसान जगह पर न जाएं

आज के युवकयुवतियां बिंदास किस्म के होते हैं. वे कहीं पर भी चल पड़ते हैं. वीरान जगहों पर प्रेमी के साथ जाने पर सीमाओं का अतिक्रमण होगा ही होगा. इसे कोई रोक नहीं सकता, क्योंकि अब लैलामजनूं, शीरींफरहाद जैसे समर्पित प्रेमी तो रहे नहीं. आज के प्रेमियों का सैक्स पर कंट्रोल नहीं होता. वे सैक्स को ही प्रेम सम झते हैं. युवकों में तो सैक्स के प्रति क्रेज होता ही है, युवतियां भी इस में पीछे नहीं रहतीं. वे खुद अपने प्रेमी के साथ सैक्स संबंध बनाने की इच्छुक रहती हैं. दूसरा, आजकल ऐसी भड़काऊ ड्रैसेस आ गई हैं जिन्हें जब प्रेमिका पहन कर प्रेमी के साथ एकांत स्थान पर जाती है तो सब्र का बांध टूटने लगता है और सैक्स संबंध स्थापित हो जाते हैं.

यदि युवतियों को अपने को सैक्स संबंधों से बचाना है तो कभी भी किसी सुनसान जगह पर प्रेमी के साथ न जाएं और न ही भड़काऊ ड्रैस पहनें.

प्रेमी को अपने माता पिता से मिलवाएं

चोरीछिपे प्रेम करना ठीक नहीं है. अगर आप दिल से किसी को प्रेम करती हैं तो उसे अपने पेरैंट्स से जरूर मिलवाएं. इस से यह फायदा होगा कि आप के मातापिता आप को बता पाएंगे कि आप का चुनाव सही है या गलत, क्योंकि उन्हें काफी अनुभव होता है. दूसरा फायदा यह होगा कि आप के पेरैंट्स का आप के प्रति विश्वास बढ़ जाएगा कि उन की बेटी ने सबकुछ सचसच बता दिया. हर स्तर पर वे आप के मददगार साबित होंगे. इसी तरह आप भी अपने प्रेमी से कहें कि वह आप को अपने पेरैंट्स से मिलवाए. अगर वह आप को उन से मिलवाने में टालमटोल करता है तो सम झ लें कि उस का प्रेम महज एक धोखा है और वह एक नंबर का चीट है. ऐसी स्थिति में जितनी जल्दी हो सके उस से किनारा कर लेना ही ठीक होगा.

प्रेमी के साथ नशा न करें

आजकल प्रेमीप्रेमिकाओं में नशाखोरी का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. डिस्कोथिक व बार में युवतियों को भी शराब पीते देखा जा सकता है. वर्किंग गर्ल्स खासतौर से एमएनसी में काम करने वाले युवा खूब शराब पीते हैं. आजकल ‘टकीला’  नामक एक लेडीज ड्रिंक भी बाजार में आ गया है जो युवतियों का फेवरिट ड्रिंक है, इस से एकदम से नशा चढ़ता है. प्रेमी शराब की शौकीन ऐसी युवतियों का जम कर शारीरिक शोषण करते हैं. जब शराब का नशा उतरता है तब युवतियों को एहसास होता है कि वे गलती कर बैठी हैं. इसलिए कभी भी प्रेमी के साथ शराब पीने की भूल न करें.

लेटनाइट पार्टियों से दूर रहें

आजकल ज्यादातर पार्टियां लेटनाइट तक चलती हैं इसलिए प्रेमी जितना भी जोर डाले आप उसे साफसाफ कह दें कि आप लेटनाइट पार्टी में नहीं जा सकतीं. इन पार्टियों में मौजमस्ती और फन के चक्कर में प्रेमी अपनी प्रेमिका का जम कर दैहिक शोषण करते हैं. उस समय वे भूल जाते हैं कि वे तो प्रेमीप्रेमिका हैं. अत: लेटनाइट पार्टी में जाने से बचें.

पुरस्कार – भाग 2 : जिम्मेदारियों का बोझ

लौट कर स्नान आदि कर के कुरसी पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे. बहू चाय का कप तिपाई पर रख गई थी. अचानक उन्होंने बाईं ओर छाती को अपनी मुट्ठी में भींच लिया. उन के चेहरे पर गहरी पीड़ा की लकीरें फैलती गईं और शरीर पसीने से तर हो गया.

उन के कराहने का स्वर सुन कर सभी दौड़े आए थे पर मृत्यु ने डाक्टर को बुलाने तक की मोहलत न दी. देखते ही देखते वह एकदम शांत हो गए थे. यों लगता था जैसे बैठेबैठे सो गए हों पर यह नींद फिर कभी न खुलने वाली नींद थी.

शवयात्रा की तैयारी हो चुकी थी. बाहर रह रहे दोनों बेटों का परिवार, बेटियां व दामाद सभी पहुंच गए थे. बेटियों और छोटी बहू ने रोरो कर बुरा हाल कर लिया था. पत्नी की तो जैसे दुनिया ही वीरान हो गई थी.

शवयात्रा के रवाना होतेहोते लोगों की काफी भीड़ जुट गई थी. बेटे यह देख कर हैरान थे कि इस अंतिम यात्रा में शामिल बहुत से चेहरे ऐसे थे जिन्हें उन्होंने पहले कभी न देखा था. पिता के कोई लंबेचौड़े संपर्क नहीं थे. तब न जाने यह अपरिचित लोग क्यों और कैसे इस शोक में न केवल शामिल होने आए थे बल्कि वे गहरे गम में डूबे हुए दिखाई दे रहे थे.

क्रियाकर्म के बाद दोनों बड़े बेटेबहुएं और बेटियां विदा हो गए. अंतिम रस्मों का सारा व्यय छोटे बेटे ने ही उठाया था, क्योंकि बड़ों का कहना था कि पिता की कमाई तो वही खाता रहा है.

मेहमानों से फुरसत पा कर छोटे बहूबेटे का जीवन धीरेधीरे सामान्य होने लगा. बेटे के आफिस चले जाने के बाद घर में बहू व सास प्राय: उन की बातें ले बैठतीं और रोने लगतीं, फिर एकदूसरे को स्वयं ही सांत्वना देतीं.

कुछ ही दिन बीते थे. रविवार को सभी घर पर थे. किसी ने दरवाजा खटखटाया. बेटे ने द्वार खोला तो एक अधेड़ उम्र के सज्जन को सामने पाया. बेटे ने पहचाना कि पिताजी की शवयात्रा में वह अनजाना व्यक्ति आंसू बहाते हुए चल रहा था.

‘‘आइए, अंकल, अंदर आइए, बैठिए न,’’ बेटे ने विनम्रता से कहा.

‘‘तुम मुझे नहीं जानते बेटा, तुम मुझ जैसे अनेक लोगों को नहीं जानते, जिन के आंसुओं को तुम्हारे पिताजी ने हंसी में बदला, उन की गरीबी दूर की.’’

‘‘मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा, अंकल…आप…’’ बेटा बोला.

‘‘मैं तुम्हें समझाता हूं बेटे. 10 साल पहले की बात है. तुम्हारे पिता दफ्तर जाते हुए कभीकभी मेरे खोखे पर एक कप चाय पीने के लिए रुक जाते थे. मैं एक टूटे खोखे में पुरानी सी केतली में चाय बनाता और वैसे ही कपों में ग्राहक को देता था. मैं खुद भी उतना ही फटेहाल था जितना मेरा खोखा. मेरे ग्राहक गरीब मजदूर होते थे क्योंकि मेरी चाय बाजार में सब से सस्ती थी.

‘‘तुम्हारे पिता जब भी चाय पीते तो कहते, ‘क्या गजब की चाय बनाते हो दोस्त, ऐसी चाय बड़ेबड़े होटलों में भी नहीं मिल सकती, अगर तुम जरा ढंग की दुकान बना लो, साफसुथरे बरतन और कप रखो, ग्राहकों के बैठने का प्रबंध हो तो अच्छेअच्छे लोग लाइन लगा कर तुम्हारे पास चाय पीने आएं.’

‘‘मैं कहता, ‘क्या कंरू बाबूजी, घरपरिवार का रोटीपानी मुश्किल से चलता है. दुकान बनाने की तो सोच ही नहीं सकता.’

‘‘और एक दिन तुम्हारे पिताजी बड़ी प्रसन्न मुद्रा में आए और बोले, ‘लो दोस्त, तुम्हारे लिए एक दुकान मैं ने अगले चौक पर ठीक कर ली है. 3 माह का किराया पेशगी दे दिया है. उस में कुछ फर्नीचर भी लगवा दिया है और क्राकरी, बरतन भी रखवा दिए हैं. रविवार को सुबह 8 बजे मुहूर्त है.’

‘‘मैं उन की बातें सुन कर हक्काबक्का रह गया. उन की कोई बात मेरी समझ में नहीं आई थी तो उन्होंने सीधेसादे शब्दों में मुझे सबकुछ समझा दिया. शायद यह बात आप लोग भी नहीं जानते कि वह अपनी नौकरी के साथसाथ ओवरटाइम कर के कुछ अतिरिक्त धन कमाते थे.

‘‘उन्होंने मुझे बताया कि ओवरटाइम की रकम वह बैंक में जमा कराते रहते थे. मेरी दुर्दशा को देख कर उन्होंने योजना बनाई थी और वह कई दिनों तक मेरे खोखे के आसपास किसी उपयुक्त दुकान की तलाश करते रहे और आखिर उन की तलाश सफल हो गई. वह दुकान को पूरी तरह तैयार करवा कर मुझे बताने आए थे कि अगले रविवार मुझे अपना काम वहां शुरू करना है.

‘‘अगले रविवार को मेरी उस दुकान का मुहूर्त हुआ तो बरबस मेरी आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली. मैं उन के चरणों में झुक गया. मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था कि किन शब्दों में मैं उन का धन्यवाद करूं. उन्होंने तो मेरे जीवन की काया ही पलट दी थी.

‘‘एक दिन मुझे एक बैंक पासबुक पकड़ाते हुए उन्होंने कहा था, ‘मैं ने यह सब तुम्हारे उपकार के लिए नहीं किया. इस में मेरा भी स्वार्थ है. नई दुकान पर तुम्हें जितना भी लाभ होगा, उस का 5 प्रतिशत तुम स्वयं ही मेरे इस खाते में जमा कर दिया करना.

‘‘उन के आशीर्वाद ने ऐसा करिश्मा कर दिखाया कि मेरी दुकान दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करती गई और आज वह दुकान एक शानदार रेस्तरां का रूप ले चुकी है. मैं और मेरा बेटा तो अब उस का प्रबंध ही देखते हैं. आज तक नियमित रूप से मैं लाभ का 5 प्रतिशत इस पासबुक में जमा करा रहा हूं.

‘‘इसी तरह एक बूढ़ा सिर पर फल की टोकरी उठाए गलीगली भटक कर अपनी रोजीरोटी चलाता था. बढ़ती उम्र के साथ उस का शरीर इतना कमजोर हो गया था कि टोकरी का वजन सिर पर उठाना उस के लिए कठिन होने लगा था. एक दिन इसी तरह केलों की टोकरी उठाए जब वह बूढ़ा चिलाचिलाती धूप में घूम रहा था तो संयोग से तुम्हारे पापा पास से गुजरे थे. सहसा बूढ़े को चक्कर आ गया और वह टोकरी समेत गिर गया.

‘‘तुम्हारे पापा उसे सहारा दे कर फौरन एक डाक्टर के पास ले गए और उस का उपचार कराया. उस के बाद उस बूढ़े ने उन्हें बताया कि वह 600 रुपए मासिक पर एक अमीर आदमी के लिए फल की फेरी लगाता है, जिस ने इस तरह के और भी 10-15 लाचार लोगों को इस काम के लिए रखा हुआ है जो गलीगली घूम कर उस का फल बेचते हैं.

‘‘तुम्हारे पिताजी उस बूढ़े की हालत देख कर द्रवित हो उठे और मुझ से बोले, ‘मैं इस बुजुर्ग के लिए कुछ करना चाहता हूं, जरा मेरी पासबुक देना.’

‘‘कुछ ही दिन बाद उन्होंने एक ऐसी रेहड़ी तैयार करवाई जो चलने में बहुत हलकी थी. रेहड़ी उस बूढ़े के हवाले करते हुए उन्होंने कहा था, ‘इस रेहड़ी पर बढि़या और ताजा फल सजा कर निकला करना. आप की रोजीरोटी इस से आसानी से निकल आएगी. काम शुरू करने के लिए यह 10 हजार रुपए रख लो और हां, मैं आप के ऊपर कोई एहसान नहीं कर रहा हूं. अपने काम में आप को जो लाभ हो उस का 5 प्रतिशत श्यामलाल को दे दिया करना, ताकि यह मेरे खाते में जमा करा दे.’

सालों बाद एक साथ ठुमके लगाती दिखीं ‘दिया और बाती हम’ की ‘संध्या बींदणी’ और ‘भाभो’ मां, देखें वीडियो

स्टार प्लस के लोकप्रिय सीरियल ‘दीया और बाती हम’ को ख़त्म हुए बेशक सालों बीत गए हैं ,लेकिन इसके किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं .संध्या बींदणी से लेकर भाभो तक, सीरियल का हर एक किरदार लोगों का पसंदीदा था. संध्या बींदणी यानी दीपिका सिंह ने अपने दमदार अभिनय से इस सीरियल को स्टार प्लस का नंबर वन सीरियल बना दिया था. दीपिका सिंह ने इसी सीरियल से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा. इसके बाद से ही वह घर-घर में जानी जाने लगीं. इस सीरियल में संध्या और भाभो के किरदार को लोगों ने काफी सराहा.

खास बात यह है कि ‘दीया और बाती हम’ की संध्या बींदणी यानी दीपिका सिंह और भाभो यानी नीलू वाघेला एक बार फिर अपने अंदाज से सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. दरअसल, उनका एक डांस वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों ऑनस्क्रीन सास बहू साथ में ठुमके लगाते हुए नजर आ रही हैं.

वीडियो शेयर करते हुए दीपिका सिंह ने लिखा, “इतने सालों तक जो चीज मैंने सबसे ज्यादा याद की थी वो है नीलू वाघेला के साथ डांस करना. हमें साथ लाने के लिए समीर त्रिपाठी, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया.”
दीपिका सिंह के इस वीडियो को अभी तक 52 हजार से भी ज्यादा बार लाइक किया जा चुका है.सास बहु की ऑनस्क्रीन जोड़ी को दोबारा देखकर फैंस उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे.

पढ़िए कमेंट

एक यूजर ने वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा, “खूबसूरत….”
वहीं एक यूजर ने दोनों की जोड़ी पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “बींदणी और सास….”

बता दें कि टीवी की संध्या बींदणी यानी दीपिका सिंह सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं. वह अक्सर अपनी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं.

अपना घर: भाग 2

एक रात विजय ने शराब के नशे में मदहोश हो कर सुरेखा का मोबाइल नंबर मिला कर कहा, ‘‘तुम ने मुझे जो धोखा दिया है, उस की सजा जल्दी ही मिलेगी. मुझे तुम से और तुम्हारे परिवार से नफरत है. मैं तुम्हें तलाक दे दूंगा. मुझे नहीं चाहिए एक चरित्रहीन और धोखेबाज पत्नी. अब तुम सारी उम्र विकास के गम में रोती रहना.’’

उधर से कोई जवाब नहीं मिला.

‘‘सुन रही हो या बहरी हो गई हो?’’ विजय ने नशे में बहकते हुए कहा.

‘यह क्या आप ने शराब पी रखी है?’ वहां से आवाज आई.

‘‘हां, पी रखी है. मैं रोज पीता हूं. मेरी मरजी है. तू कौन होती है मुझ से पूछने वाली? धोखेबाज कहीं की.’’

उधर से फोन बंद हो गया.

विजय ने फोन एक तरफ फेंक दिया और देर तक बड़बड़ाता रहा.

औफिस और पासपड़ोस के कुछ साथियों ने विजय को समझाया कि शराब के नशे में डूब कर अपनी जिंदगी बरबाद मत करो. इस परेशानी का हल शराब नहीं है, पर विजय पर कोई असर नहीं पड़ा. वह शराब के नशे में डूबता चला गया.

एक शाम विजय घर पर ही शराब पीने की तैयारी कर रहा था कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई. विजय ने बुरा सा मुंह बना कर कहा, ‘‘इस समय कौन आ गया मेरा मूड खराब करने को?’’

विजय ने उठ कर दरवाजा खोला तो चौंक उठा. सामने उस का पुराना दोस्त अनिल अपनी पत्नी सीमा के साथ था.

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‘‘आओ अनिल, अरे यार, आज इधर का रास्ता कैसे भूल गए? सीधे दिल्ली से आ रहे हो क्या?’’ विजय ने पूछा.

‘‘हां, आज ही आने का प्रोग्राम बना था. तुम्हें 2-3 बार फोन भी मिलाया, पर बात नहीं हो सकी.’’

‘‘आओ, अंदर आओ,’’ विजय ने मुसकराते हुए कहा.

विजय ने मेज पर रखी शराब की बोतल, गिलास व खाने का सामान वगैरह उठा कर एक तरफ रख दिया.

अनिल और सीमा सोफे पर बैठ गए. अनिल और विजय अच्छे दोस्त थे, पर वह अनिल की शादी में नहीं जा पाया था. आज पहली बार दोनों उस के पास आए थे.

विजय ने सीमा की ओर देखा तो चौंक गया. 3 साल पहले वह सीमा से मिला था अगरा में, जब अनिल और विजय लालकिला में घूम रहे थे. एक बूढ़ा आदमी उन के पास आ कर बोला था, ‘‘बाबूजी, आगरा घूमने आए हो?’’

‘‘हां,’’ अनिल ने कहा था.

‘‘कुछ शौक रखते हो?’’ बूढ़े ने कहा.

वे दोनों चुपचाप एकदूसरे की तरफ देख रहे थे.

‘‘बाबूजी, आप मेरे साथ चलो. बहुत खूबसूरत है. उम्र भी ज्यादा नहीं है. बस, कभीकभी आप जैसे बाहर के लोगों को खुश कर देती है,’’ बूढ़े ने कहा था.

वे दोनों उस बूढ़े के साथ एक पुराने से मकान पर पहुंच गए. वहां तीखे नैननक्श वाली सांवली सी एक खूबसूरत लड़की बैठी थी. अनिल उस लड़की के साथ कमरे में गया था, पर वह नहीं.

वह लड़की सीमा थी, अब अनिल की पत्नी. क्या अनिल ने देह बेचने वाली उस लड़की से शादी कर ली? पर क्यों? ऐसी क्या मजबूरी हो गई थी जो अनिल को ऐसी लड़की से शादी करनी पड़ी?

‘‘भाभीजी दिखाई नहीं दे रही हैं?’’ अनिल ने विजय से पूछा.

‘‘वह मायके गई है,’’ विजय के चेहरे पर नफरत और गुस्से की रेखाएं फैलने लगीं.

‘‘तभी तो जाम की महफिल सजाए बैठे हो, यार. तुम तो शराब से दूर भागते थे, फिर ऐसी क्या बात हो गई कि…?’’

‘‘ऐसी कोई खास बात नहीं. बस, वैसे ही पीने का मन कर रहा था. सोचा कि 2 पैग ले लूं…’’ विजय उठता हुआ बोला, ‘‘मैं तुम्हारे लिए खाने का इंतजाम करता हूं.’’

‘‘अरे भाई, खाने की तुम चिंता न करो. खाना सीमा बना लेगी और खाने से पहले चाय भी बना लेगी. रसोई के काम में बहुत कुशल है यह,’’ अनिल ने कहा.

विजय चुप रहा, पर उस के दिमाग में यह सवाल घूम रहा था कि आखिर अनिल ने सीमा से शादी क्यों की?

सीमा उठ कर रसोईघर में चली गई. विजय ने अनिल को सबकुछ सच बता दिया कि उस ने सुरेखा को घर से क्यों निकाला है.

अनिल ने कहा, ‘‘पहचानते हो अपनी भाभी सीमा को?’’

‘‘हां, पहचान तो रहा हूं, पर क्या यह वही है… जब आगरा में हम दोनों घूमने गए थे?’’

‘‘हां विजय, यह वही सीमा है. उस दिन आगरा के उस मकान में वह बूढ़ा ले गया था. मैं ने सीमा में पता नहीं कौन सा खिंचाव व भोलापन पाया कि मेरा मन उस से बातें करने को बेचैन हो उठा था. मैं ने कमरे में पलंग पर बैठते हुए पूछा था, ‘‘तुम्हारा नाम?’’

‘‘यह सुन कर वह बोली थी, ‘क्या करोगे जान कर? आप जिस काम से आए हो, वह करो और जाओ.’

‘‘तब मैं ने कहा था, ‘नहीं, मुझे उस काम में इतनी दिलचस्पी नहीं है. मैं तुम्हारे बारे में जानना चाहता हूं.’

‘‘वह बोली थी, ‘मेरे बारे में जानना चाहते हो? मुझ से शादी करोगे क्या?’

‘‘उस ने मेरी ओर देख कर कहा तो मैं एकदम सकपका गया था. मैं ने उस से पूछा था, ‘पहले तुम अपने बारे में बताओ न.’

‘‘उस ने बताया था, ‘मेरा नाम सीमा है. वह मेरा चाचा है जो आप को यहां ले कर आया है. आगरा में एक कसबा फतेहाबाद है, हम वहीं के रहने वाले हैं. मेरे मातापिता की एक बस हादसे में मौत हो गई थी. उस के बाद मैं चाचाचाची के घर रहने लगी. मैं 12वीं में पढ़ रही थी तो एक दिन चाचा ने आगरा ला कर मुझे इस काम में धकेल दिया.

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‘‘चाचा के पास थोड़ी सी जमीन है जिस में सालभर के गुजारे लायक ही अनाज होता है. कभीकभार चाचा मुझे यहां ले कर आ जाता है.’

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‘‘मैं ने उस से पूछा, ‘जब चाचा ने इस काम में तुम्हें धकेला तो तुम ने विरोध नहीं किया?’

‘‘वह बोली थी, ‘किया था विरोध. बहुत किया था. एक दिन तो मैं ने यमुना में डूब जाना चाहा था. तब किसी ने मुझे बचा लिया था. मैं क्या करती? अकेली कहां जाती? कटी पतंग को लूटने को हजारों हाथ होते हैं. बस, मजबूर हो गई थी चाचा के सामने.’

‘‘फिर मैं ने उस से पूछा था, ‘इस दलदल में धकेलने के बजाय चाचा ने तुम्हारी शादी क्यों नहीं की?’

‘‘वह बोली, ‘मुझे नहीं मालूम…’

‘‘यह सुन कर मैं कुछ सोचने लगा था. तब उस ने पूछा था, ‘क्या सोचने लगे? आप मेरी चिंता मत करो और…’

‘‘कुछ सोच कर मैं ने कहा था, ‘सीमा, मैं तुम्हें इस दलदल से निकाल लूंगा.’

‘‘तो वह बोली थी, ‘रहने दो आप बाबूजी, क्यों मजाक करते हो?’

‘‘लेकिन मैं ने ठान लिया था. मैं ने उस से कहा था, ‘यह मजाक नहीं है. मैं तुम्हें यह सब नहीं करने दूंगा. मैं तुम से शादी करूंगा.’

‘‘सीमा के चेहरे पर अविश्वास भरी मुसकान थी. एक दिन मैं ने सीमा के चाचा से बात की. एक मंदिर में हम दोनों की शादी हो गई.

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तेजस्वी प्रकाश को Onscreen kiss करने पर करण कुंद्रा ने लगाई रोक, एक्ट्रेस ने किया खुलासा

टीवी की मशहूर एक्ट्रेस तेजस्वी प्रकाश बिग बॉस के घर से बाहर आने के बाद काफी सुर्ख़ियों में हैं. करण कुंद्रा से रिलेशनशिप को लेकर भी तेजा आजकल हर जगह छाई हुई हैं. दोनों को हर जगह एक साथ देखा जा सकता है.

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बता दें कि दोनों बिग बॉस शो में एक दूसरे के काफी नज़दीक आए थे .तेजस्वी प्रकाश इन दिनों अपने अपकमिंग शो ‘नागिन 6’ की शूटिंग में व्यस्त हैं ,हाल ही में इस शो का पोस्टर रिलीज़ हुआ जिसे देखकर उनके फैंस काफी एक्साइटेड हैं. तेजा के नागिन लुक की भी काफी चर्चा हो रही है.

अगर बात करें रिलेशनशिप की तो करण कुंद्रा और तेजा को क्यूट कपल की तरह एक साथ देखा जा सकता है. आजकल करण तेजा के साथ हर जगह मौजूद दिखाई दे रहे हैं. इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में दोनों का एक वीडियो काफी वायरल हुआ ,वीडियो में करण तेजा के पीछे पीछे पार्लर तक पहुँच गए थे.

हाल ही में एक्ट्रेस ने एक चैनल को इंटरव्यू के दौरान अपने और करण के रिश्ते को लेकर काफी खुलासे किए. तेजस्वी ने इंटरव्यू में करन को रिलेशनशिप में सबसे ज्यादा पॉजेसिव और इनसिक्योर (असुरक्षित) इंसान बताया.

दरअसल जब तेजा से करण के ऑनस्क्रीन किसिंग सीन को लेकर सवाल किया गया तो तेजा ने जवाब दिया था कि मैं “मैं पॉजेसिव नहीं हूं, बल्कि करण मुझसे ज्यादा पॉजेसिव और इनसिक्योर हैं.

मैं उनसे हमेशा कहती हूं कि आप बहुत स्मार्ट हैं, क्योंकि आप अपने इस रूप को लोगों के सामने नहीं जाहिर होने देते हैं और मुझे इनसिक्योर का टैग मिलता है. रही बात किसिंग सीन की तो मैं उनके रोल की डिमांड को समझुंगी और उन्हें सपोर्ट करुँगी .

तेजस्वी प्रकाश ने करण कुंद्रा के बारे में बात करते हुए आगे कहा, “मुझे मालूम है कि उन्होंने ऑनस्क्रीन किसिंग सीन किये हुए हैं, लेकिन उन्होंने मुझे साफ तौर पर कहा है कि मुझे ऑनस्क्रीन किस नहीं करना चाहिए. ऐसे में वह इनसिक्योर हुए, मैं नहीं.”

तेजस्वी से शादी को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब तेजा ने कुछ यूँ दिया “करण ने अभी तक मुझसे इस बारे में कुछ नहीं कहा है तो आप लोग मुझसे इस बात पर कुछ भी बोलने की उम्मीद मत रखिए.”

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