मानसून स्पेशल: एकांत कमजोर पल- भाग 2

बड़ी बेगम जानती थीं इस का गुस्सा निकलना अच्छा है. उन्होंने बहस नहीं की.

बोलीं, ‘‘ठीक है तुम को लगता है तुम अकेली ही अच्छी परवरिश कर सकती हो तो ठीक है, पर मैं चाहती हूं कि तुम तलाक की अर्जी 6 महीने बाद दो. कुछ वक्त दो फिर जो तुम्हारा फैसला होगा मैं मानूंगी.’’

‘‘नो वे अम्मी मैं 6 दिन भी न दूं. जबजब मुझे याद आता है साहिल और बाई… घिन आती है उस के नाम से. कोई इतना गिर सकता है?’’

बड़ी बेगम ने दुनिया देखी थी. अपने पति को बहुतों के साथ देखा था. उन्होंने अपने अनुभव का निचोड़ बताया, ‘‘वह एक वक्ती हरकत थी. उस का कोई अफेयर नहीं था. जब एक औरत और एक मर्द अकेले हों तो दोनों के बीच तनहाई में एक कमजोर पल आ सकता है.’’

मैं भी तो औफिस में अकेली मर्दों के साथ घंटों काम करती हूं. मेरे साथ तो कभी ऐसा नहीं हुआ. आत्मसंयम और मर्यादा ही इंसान होने की पहचान हैं वरना जानवर और आदमी में क्या फर्क है?’’

‘‘मैं ने अब तक तुम से कुछ नहीं कहा पर बहुत सोच कर तुम से समय देने को कह रही हूं. आगे तुम्हारी जो मरजी.’’

‘‘ठीक है आप कहतीं हैं तो मान लेती हूं पर मेरे फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा.’’

सनोबर यह सोच कर मान गई कि उसे भी तो कुछ काम निबटाने हैं. प्रौपर्टी के पेपर अपने नाम करवाना और सेविंग्स में नौमिनी बदलना आदि. फिर अभी औफिस का भी प्रैशर है. रात को रोज की तरह साहिल ने फोन किया तो सनोबर ने उठा लिया.

साहिल खुशी और अचंभे के मिलेजुले स्वर में बोला, ‘‘सनोबर मुझे माफ कर दो, वापस आ जाओ.’’

सनोबर ने तटस्थ स्वर में कहा, ‘‘मुझे तुम से मिलना है.’’

साहिल बोला, ‘‘हां, हां… जब कहो.’’

सनोबर बोली, ‘‘कल औफिस के बाद घर पर.’’ और फोन रख दिया.

औफिस के बाद सनोबर घर पहुंची. साहिल उस की प्रतिक्षा कर रहा था. घर भी उस ने कुछ ठीक किया था. साहिल ने सनोबर का हाथ पकड़ना चाहा तो उस ने झिड़क दिया और दूर बैठ गई.

‘‘साहिल मैं कोई तमाशा नहीं करना चाहती. शांति से सब तय करना चाहती हूं. मेरातुम्हारा जौइंट अकाउंट बंद करना है. इंश्योरैंस पौलिसीज में नौमिनी हटाना है. इस फ्लैट में तुम्हारा जो पैसा लगा वह तुम ले लो. मैं इसे अपने नाम करवाना चाहती हूं. मुझे तुम से कोई पैसा नहीं चाहिए, मैं काजी के यहां खुला (औरत की ओर से निकाह तोड़ना) की अर्जी देने जा रही हूं.’’

थोड़ी देर के लिए साहिल चुप रहा फिर बोला, ‘‘सनोबर, मेरा जो कुछ है सब तुम्हारा और हमारी बेटी का है. तुम सब ले लो मुझे मेरी सनोबर दे दो. मुझे एक बार माफ कर दो. मेरी गलती की इतनी बड़ी सजा न दो. अगर तुम मेरी जिंदगी में नहीं तो मैं यह जिंदगी ही खत्म कर दूंगा,’’ सनोबर जानती थी साहिल भावुक है पर इतना ज्यादा है यह नहीं जानती थी. वह उठ कर चली गई.

अब बस औफिस जाने और मन लगा कर काम करने में और बेटी के साथ उस का समय बीतने लगा. बड़ी बेगम के कहने पर और बेटी की जिद पर वह राजी हुई कि साहिल सप्ताह में एक बार बेटी से मिल सकता है. उसे बाहर ले जा सकता है. वह नहीं चाहती थी कि उस की बेटी को उस के पिता की असलियत पता चले. इस आयु में यदि उसे पिता के घिनौने कारनामे का पता चलेगा तो वह जाने क्या प्रतिक्रिया करे. साहिल सप्ताह में 2 घंटे के लिए बेटी को घुमाने ले जाता, गिफ्ट दिलाता और सनोबर की पसंद का भी कुछ बेटी के साथ भेजता पर सनोबर आंख उठा कर भी न देखती.

तभी सनोबर की पदोन्नति हुई साथ ही मुख्यालय में तबादला भी. सनोबर को न चाह कर भी दिल्ली जाना पड़ा. बेटी को नानी के पास छोड़ना पड़ा. स्कूल का सैशन समाप्त होने में अभी 2 महीने थे. बड़ी बेगम ने आश्वासन दिया, ‘‘मैं संभाल लूंगी तुम जाओ मगर हर वीकैंड पर आ जाना.’’

मुख्यालय में उस के कुछ पूर्व साथी भी थे, सब ने स्वागत किया. एक प्रोजैक्ट में उस को समीर के साथ रखा गया. समीर भी सनोबर का पुराना साथी था और उस पर फिदा भी था.

समीर और सनोबर साथसाथ काम करते हुए काफी समय एकदूसरे के साथ बिताते. सनोबर ने साहिल और अपने बारे में समीर को नहीं बताया. जिस प्रोजैकट पर दोनों काम कर रहे थे उस में क्लाइंट की लोकेशन पर भी जाना होता था. दोनों साथसाथ जाते, होटल में रहते और काम पूरा कर के आते. घंटों अकेले एकसाथ काम करते. आज भी दोनों सुबह की फ्लाइट से गए थे. दिन भर काम कर के रात को होटल पहुंचे. समीर बोला, ‘‘फ्रैश हो लो फिर खाना खाने नीचे डाइनिंगरूम में चलते हैं.’’

सनोबर बोली, ‘‘तुम जाओ. मैं अपने रूम में ही कुछ मंगवा लूंगी.’’

समीर बोला, ‘‘ठीक है मेरा भी कुछ और्डर कर देना, साथ ही खा लेंगे.’’

सनोबर को समीर चाहता भी था, उस का आदर भी करता था. सनोबर के हैड औफिस आने के बाद समीर ने कभी अपने पुराने प्यार को प्रकट नहीं किया. वह अपनी पत्नी और बच्चों में खुश था.

समीर सनोबर के कमरे में आ गया. खाना आने की प्रतीक्षा में दोनों काम से जुड़ी बातें ही करते रहे. समीर की पत्नी का फोन भी आया. समीर की और उस की पत्नी की बातों से लग रहा था दोनों सुखी व संतुष्ट हैं.

समीर ने साहिल के बारे में पूछा तो सनोबर बात टाल गई. फिर खाना आया, दोनों खाना खातेखाते पुराने दिनों की बातें करने लगे.

समीर ने सनोबर से पूछा, ‘‘अच्छा एक बात बताओ यदि तुम साहिल से शादी न करतीं तो क्या मुझ से शादी करतीं?’’

सनोबर झिझकी फिर बोली, ‘‘शायद हां.’’

समीर ने मजाकिया अंदाज में कहा, ‘‘अरे पहले बताती तो मैं उस को गोली मार देता,’’ बात आईगई हो गई. दोनों ने खाना खाया फिर समीर अपने कमरे में चला गया.

सनोबर सोचने लगी समीर अच्छा दोस्त हैं. फिर जाने क्यों साहिल याद आ गया. वह काफी थकी थी. कुछ ही देर में सो गई. अगले दिन भी दोनों बहुत व्यस्त रहे.

‘‘आज भी खाना कमरे में मंगवाते हैं ठीक है?’’ समीर ने पूछा तो सनोबर बोली, ‘‘हां, ठीक है.’’

फिर समीर फ्रैश हो कर सनोबर के कमरे में आ गया. खाना और्डर कर के दोनों बातें करने लगे. सनोबर को खाते समय खाना सरक गया वह खांसने लगी. समीर ने उसे जल्दी से पानी निकाल कर दिया. पानी पी कर ठीक हुई. खाने के बाद समीर ने चाय बना कर सनोबर की दी तो दोनों का हाथ एकदूसरे से टकराया. दोनों चुपचाप धीरेधीरे चाय पीने लगे.

एक अजीब सा सन्नाटा छा गया. दोनों पासपास बैठे थे. एक अजीब सी चाह सनोबर ने अपने मन में महसूस की जैसे वह समीर के सीने से लग के रोना चाहती हो. फिर उस ने देखा समीर की निगाहें भी उस के ऊपर टिकी हैं. शायद वह भी सनोबर को अपनी बांहों में जकड़ना चाहता है. तभी उसे लगा कहीं यही वह एकांत कमजोर पल तो नहीं है जिस के बारे में अम्मी कह रही थी. वह संभल गई और उठ कर इधरउधर कुछ रखनेउठाने लगी. समीर से बोली, ‘‘अच्छा, कल मिलते हैं.’’

समीर भी उठते हुए बोला, ‘‘हां देर हो गई, गुड नाईट.’’

अगले दिन दोनों वापस आ गए. सनोबर अपनी अम्मी के पास चली गई. अम्मी उसे बताने लगीं कि उस की बेटी खाने में नखरा करती है. साहिल बेटी का बहुत ध्यान रखता है. अपने साथ ले जाता है, बराबर फोन करता है. अम्मी साहिल की प्रशंसा किए जा रही थीं.

सनोबर ने साहिल को फोन किया, ‘‘मैं तुम से मिलना चाहती हूं अभी.’’ वह साहिल से मिलने चल पड़ी. साहिल पलकें बिछाए उस की राह ताक रहा था. घर लगता था साहिल ने ही साफ किया था. बैडरूम पर नजर गई तो बदलाबदला लग रहा था. साहिल बहुत प्यार से बोला, ‘‘अब तो वापस आ जाओ, मुझे माफ कर दो.’’

सनोबर एकांत कमजोर पल क्या होता है यह जान चुकी थी. उस ने साहिल को माफ कर दिया. साहिल ने सनोबर का हाथ पकड़ा और दोनों एकदूसरे के बहुत पास आ गए.

 

एक और परिणीता

शहनाज गिल को बारिश देख आई सिद्धार्थ शुक्ला की याद, हुईं इमोशनल

बिग बॉस 13 में आने के बाद अपने दिलकश अंदाज से सभी के दिलों पर राज करने वाली शहनाज गिल इन दिनों फिर से चर्चा में आ गई हैं. दरअसल, शहनाज गिल को एक बार फिर से सिद्धार्थ शुक्ला की याद आ रही है.

हाल ही में शहनाज गिल ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें वह कह रही हैं कि अगर बारिश के मौसम में कुछ गाने का मन करें तो गा लेना चाहिए. कौन तु्म्हें जज कर रहा है इसके बारे में नहीं सोचना चाहिए. इसके बाद से शहनाज गिल अपने वीडियो में गा रही है एम एस धोनी का गाना कौन तुझे यूं प्यार करेगा, जैसे मैं करती हूं. शहनाज गिल ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा दिल की बात.

 

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एक्ट्रेस के इस वीडियो पर फैंस खूब रिएक्ट कर रहे हैं. कुछ लोग तो इस वीडियो को सिद्धार्थ शुक्ला से जोड़कर देख रहे हैं. उनका मानना है कि शहनाज गिल सिद्धार्थ शुक्ला की याद में यह गाना गा रही हैं. एक फैन ने कहा कि शहनाज मुझे पता है कि आप उन्हें नेचर के साथ साथ हर चीज में देखती हैं.

वहीं एक दूसरे फैन ने लिखा कि आप वहीं चीज करो जो आपके दिल, आत्मा और परेशानियों से छुटकारा दिला सके. जैसे ही शहनाज गिल का यह वीडियो वायरल हुआ उसके तुरंत बाद से #sidharthshukla ट्रेंड करने लगा. फैंस के चहेते एक्टर इस वीडियो को देखकर काफी ज्यादा इमोशनल हो रहे हैं.

सिद्धार्थ शुक्ला महज 40 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह करके चले गए. जिसके बाद से फैंस को काफी ज्यादा धक्का लगा था. शहनाज गिल बिल्कुल टूट सी गई थी. सिद्धार्थ के जाने के बाद से. हालांकि धीरे-धीरे उन्होंने अपने आप को संभाला है.

अब शहनाज को काम करते देखकर सभी फैंस को काफी ज्यादा अच्छा लग रहा है.

नोरा फतेही ने उगला प्रेग्नेंसी का सच! फैंस भी हुए हैरान

बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा आलिया भट्ट इस साल के आखिरी तक मम्मी बनने वाली हैं. इस बात की जानकारी खुद आलिया भट्ट ने अपने सोशल मीडिया के जरिए दिया था. आलिया भट्ट की प्रेग्नेंसी को लेकर अक्सर डांस दीवाने के सेट पर चर्चा होती रहती है.

यहां तक की करण कुंद्रा और बाकी सभी क्रू मेंबर भी नीतू कपूर को दादी बनने की बधाई देते रहते हैं. आलिया भट्ट की प्रेग्नेंसी सामने आने पर इस बात की चर्चा की गई थी. जिसमें नोरा फतेही ने खुलकर चर्चा की थी. इसके बाद से नोरा फतेही ने भी चौकाने वाले खुलासे किए थें.

नोरा फतेही ने मर्जी से बात करते हुए कहा कि वह प्रेग्नेंट नहीं है, जिसे देखकर मर्जी हंसते हुए कहते हैं कि अच्छा बताने के लिए शुक्रिया. जिसके बाद से नोरा फतेही का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

दरअसल, डांस दीवाने के सेट से वायरल हो रहे इस वीडियो में नोरा फतेही अपने पेट को देख रही हैं, जिसके बाद जब उनके सामने मर्जी आते हैं तो उन्हें देखकर कहती हैं कि वह प्रेग्नेंट नहीं है. तभी मर्जी उन्हें हंसते हुए कहते है कि पूरी दुनिया को यह बात बताने के लिए शुक्रिया.

नोरा फतेही और मर्जी इस शो में बतौर जज जर आ रहे हैं. जब नीतू कपूर से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह दादी बनने को लेकर काफी ज्यादा खुश हैं. उन्हें इंतजार है कि वह जल्द दादी बने उनके घर में एक छोटा बेबी आए.

वहीं आलिया भट्ट की इन दिनों खूब देखभाल कर रही हैं नीतू कपूर हाल ही आलिया भट्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जिसे लोगों ने खूब पसंद भी किया था. आलिया भट्ट नीतू कपूर की बॉ्न्डिंग काफी ज्यादा अच्छी है. ये सास बहू से कहीं ज्यादा दोस्त की तरह रहती हैं.

तंत्र मंत्र का खेला

मेरी गर्लफ्रेंड की एक ही शिकायत रहती है कि तुम्हें मुझसे प्यार नहीं, क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 21 साल है और मैं एक कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर की नौकरी कर रहा हूं. मैं ने 2 महीने पहले ही ग्रैजुएशन कंपलीट की है. कालेज की ही मेरी एक जूनियर है जिस के साथ मैं पिछले 8 महीनों से रिलेशनशिप में हूं. पहले 3 महीने तो हम ने बातें करते हुए और यहांवहां घूमतेफिरते निकाल दिए. अब मसला यह है कि मैं जब भी उसे अपने पास आने के लिए या किस से बढ़ कर भी कुछ करने के लिए कहता हूं तो वह आनाकानी करने लगती है.

हर वक्त उस की एक ही शिकायत रहती है कि तुम्हें मुझ से प्यार नहीं, होता तो यों फिजिकल होने के लिए नहीं कहते रहते. मुझे समझ नहीं आता कि उसे समझाऊं कैसे कि मुझे उस से प्यार है और यह प्यार ही तो है जो मुझे उस की तरफ आकर्षित करता है. पर उसे मेरी बात समझ नहीं आती. आखिर मैं उसे समझाऊं तो समझाऊं कैसे?

जवाब

आप की गर्लफ्रैंड अगर आप के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर रही है तो इस के पीछे जरूर कोई वजह है. अकसर लड़कियां यह सब कहती हैं कि आप केवल उन से शारीरिक संबंध बनाना चाहते हैं तो केवल यही एक कारण नहीं हो सकता. लड़कियां छोटीछोटी बातों पर इंसिक्योर हो जाती हैं और ओवर थिंकिंग करने लगती हैं. हो सकता है कि आप की गर्लफ्रैंड को यह लग रहा हो कि आप शारीरिक संबंध बना कर उस से दूर हो जाएंगे या आप की मंशा शारीरिक संबंध बनाना ही है. वजह चाहे कोई भी हो आप को जानना आवश्यक है, और उसे भरोसा दिलाना भी आप ही को है.

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6 महीने से मैं अपने पड़ोस की एक भाभी से प्यार करने लगा हूं लेकिन…

सवाल

मैं 25 साल का शादीशुदा मर्द हूं. मेरी पत्नी में कोई कमी नहीं है लेकिन पिछले 6 महीने से मैं अपने पड़ोस की एक भाभी से प्यार करने लगा हूं. हमारा जिस्मानी रिश्ता भी बन चुका है. भाभी चाहती हैं कि हम दोनों तलाक ले कर एकदूसरे से शादी कर लें. हमें क्या करना चाहिए?

जवाब

आप की बीवी ने भी अगर किसी पड़ोसी से प्यार किया होता, रिश्ते बनाए होते और आप को तलाक देने पर उतारू हो आती, तब आप पर क्या गुजरती. पड़ोसन भाभी से यह सब कर के आप एक गलती कर चुके हैं, अब दूसरी से बचें. अपनी गलती, हवस या नाजायज रिश्ते की सजा पत्नी को न दें. तलाक लेना आसान नहीं है. अगर पत्नी उस पर एतराज करे तो सालों तलाक नहीं मिलेगा.
बेहतर होगा कि भाभी को सख्ती से तलाक के लिए मना कर दें. जिस्मानी रिश्ता बनाने के खतरे भी जेहन में रखें और जो चल रहा है, उसे चलने देने में हर्ज भी नहीं है.

Monsoon Special: छोटे छोटे सुख दुख- भाग 2

वह और सुमित परेशान हो गए. नीचे जा कर उस ने मनीषा को अपनी परेशानी बताई व सुमित ने ऊपर वाले फ्लैट में जा कर संजना के पति से फिलहाल उस वाले बाथरूम को इस्तेमाल न करने की प्रार्थना की. पर मनीषा, जो पहले से ही नाराज चल रही थी, सुनते ही भड़क गई. ‘‘हमारे यहां तो कोई दिक्कत नहीं…तुम्हारे यहां है, तुम जानो.’’  ‘‘मैं यह नहीं कह रही मनीषा कि तुम्हारे कारण दिक्कत है… समस्या तो कहीं बीच  में है… प्लंबर को बुलाने जा रहे हैं सुमित… पर थोड़ी दिक्कत तुम्हें भी होगी… प्लंबर यहां भी आएगा… देखेगा कि आखिर दिक्कत कहां है…’’ ‘‘मुझे तो आज बाहर जाना है… घर पर नहीं हूं.’’ ‘‘उफ, तो ऐसा करो तुम मुझे चाबी दे जाना… मैं खुद यहां पर खड़ी हो कर काम करवा लूंगी.’’ ‘‘अरे ऐसे कैसे चाबी दे दूं… पता नहीं कौन प्लंबर है… हर ऐरेगैरे नत्थु खैरे को घर में घुसा दो,’’ मनीषा बड़बड़ाने लगी. ‘‘देखो मनीषा, प्लंबर को दिखाना तो पड़ेगा… यह परेशानी भुगती तो नहीं जा सकती… ठीक तो करवानी ही पड़ेगी,’’ कह कर राशि ऊपर आ गई. उस दिन मनीषा के पति रोनित ने बात संभाल ली. प्लंबर आया. मनीषा के फ्लैट से ही उसे पाइप की प्रौबलम ठीक करनी पड़ी.

लेकिन मनीषा का राशि से उखड़ा मूड और भी उखड़ गया. शिवानी के नीचे वाले फ्लैट में रहने वाली रजनी भी कुछ कम नहीं थी. शिवानी तो इन तीनों से कई बार उलझ भी पड़ती, फिर ठीक भी हो जाती. पर राशि के बस का नहीं था ये सब कि कभी झगड़ा कर पीठ पीछे बुराइयां करो और फिर साथ बैठ कर कौफी पी लो. छोटीछोटी बातों पर किसी से झगड़ा करना नहीं आता था. एक दिन कूड़े वाला राशि की कूड़े की थैली उठा कर ले गया और रजनी के दरवाजे के सामने रख कर भूल गया.

रजनी ने शोर मचा दिया, ‘‘न जाने किस बदतमीज ने रख दिया यहां कूड़ा… शर्म नहीं आती… अनपढ़गंवार कहीं के…’’ बाहर शोर सुन कर राशि भी बाहर निकल आई. राशि दरवाजे पर रखी अपनी कूड़े की थैली तुरंत पहचान गई. जल्दी से नीचे उतर कर उस ने थैली उठा ली, ‘‘सौरी रजनी… लगता है कूड़ेवाला भूल से छोड़ गया,’’ पर रजनी के चेहरे के भाव व पहले सुने गए शब्द उसे अंदर तक अपमानित कर गए थे. अपार्टमैंट में होने वाले होली, दीवाली, नए साल, क्रिसमस के प्रोग्राम राशि को भी अच्छे लगते, खुशी देते पर ये छोटीछोटी परेशानियां उसे अंदर तक आहत कर देतीं.

सुमित राशि को समझाता, ‘‘मैं तो सोसाइटी के फ्लैट में आना ही नहीं चाहता था पर अब आ गए हैं तो सब के स्वभाव को झेलने की आदत बना लो… शिवानी भी तो यहीं रह रही है… इतना सैंसिटिव होने की जरूरत नहीं है. सब की अपनी फितरत होती है… कोई हमारी तरह का नहीं हो सकता… जो जैसा है उसे वैसे ही स्वीकार कर लो… और क्या कर सकते हैं…’’ ‘‘पर फिर भी सुमित… आतेजाते ऐसे तनाव भरे चेहरे देख कर अच्छा नहीं लगता… थोड़े दिन ठीक रहती हैं ये तीनों, फिर लड़ पड़ती हैं किसी न किसी बात पर… अब फ्लैट्स इतने जुड़े होते हैं कि किसी से बिना मतलब रखे भी नहीं रहा जा सकता.’’

‘‘जैसे उस से रहा जाता है वैसे ही तुम भी रहो… तुम हर बात की परवाह क्यों करती हो. कुछ न कुछ प्रौबलम तो सब जगह होगी.’’ ऐसे ही छोटेछोटे सुखदुख के बीच जिंदगी बीत रही थी. राशि को भी धीरेधीरे 1 साल रहते होने को आ गया था. सुमित का प्रमोशन हुआ तो उस ने 16 परिवारों से सिर्फ 16 लेडीज को चाय पर बुला लिया. सब आईं सिवा मनीषा, रजनी व संजना के. बाकी सब ने कारण पूछा तो राशि को कारण ठीक से पता हो तो बताए. इतने छोटेछोटे भी कोई कारण होते हैं न्योता ठुकराने के. शिवानी को इन सब बातों से फर्क नहीं पड़ता था.

जब वे तीनों ठीक रहतीं तो वह भी अच्छे से बात कर लेती, जब नहीं रहतीं तो वह भी खुद मुंह पलट कर चली जाती. ‘‘लगता है, रजनी के घर आजकल मेहमान आए हैं. काफी चहलपहल रहती है,’’ एक दिन सुबह चाय पीती हुई राशि सुमित से कह रही थी कि तभी 3-4 बार जल्दीजल्दी घंटी बज उठी. ‘‘इतनी सुबह ऐसी घंटी कौन बजा रहा है,’’ हड़बड़ाहट में दोनों दरवाजे की तरफ बढ़े. रजनी की कामवाली खड़ी थी, ‘‘भाभीजी, जल्दी नीचे चलिए रजनी भाभी के ससुरजी गुजर गए.’’ ‘‘ससुरजी गुजर गए… उन के सासससुर आए हुए थे क्या?’’ ‘‘हां, जल्दी चलिए… रात में उन की तबीयत खराब हुई… भैया अस्पताल ले कर गए थे… सुबह गुजर गए. घर में सिर्फ भाभीजी और उन की सास हैं…भैया अभी अस्पताल में ही हैं.’’ सुमित और राशि हड़बड़ाहट में सीढि़यां उतर गए.

अंदर दोनों सासबहू विलाप कर रही थीं. राशि दोनों को सांत्वना देने लगी. थोड़ी देर में पार्थिव शरीर घर आ गया. फ्लैट रिश्तेदारों व जानपहचान वालों से भरने लगा. राशि ने रजनी के दोनों बच्चों की जिम्मेदारी सहर्ष अपने ऊपर ले ली. वह उन्हें अपने घर ले आई. जितनी मदद कर सकती थी उस ने सारे पूर्वाग्रह भूल कर उन की 13 दिन तक की.  13वीं हो गई. इस मुसीबत के वक्त राशि का सहयोग रजनी के दिल को छू  गया. अब वह संजना व मनीषा की परवाह करे बगैर राशि से ठीक से रिश्ता रखने लगी. संजना से राशि का आमनासामना तब भी कम होता था पर मनीषा से अकसर हो जाता था. इसलिए मनीषा का दुर्व्यवहार उसे बहुत अखरता था. संजना का बेटा मयंक और मनीषा की बेटी खुशी एक ही स्कूल में पढ़ते व एक ही रिकशे से स्कूल आतेजाते थे.

उस दिन सुमित की छुट्टी होने के कारण राशि और सुमित मार्केट से लौट रहे थे तो रास्ते में सड़क में भीड़ देख कर वे भी रुक गए. ‘‘क्या हुआ? उन्होंने एक राहगीर से पूछा.’’ ‘‘ऐक्सीडैंट हुआ है… एक रिकशे को कार ने टक्कर मार दी… 2 बच्चे बैठे थे रिकशे में…’’ ‘‘उफ, बच्चे तो ठीक हैं.’’ ‘‘चोटें आई हैं काफी.’’ सुमित उतर कर देखने चला गया. घायल मयंक व खुशी सड़क पर बैठे रो रहे थे. रिकशे वाले व कार चालक के बीच लड़ाई हो रही थी.

 

Monsoon Special: रहे चमकता अक्स

‘‘ओके… बाय चुनचुन नहीं टुनटुन…’’ रितेश के कहते ही सब जाते हुए खूब हंसे, पर अनन्या का मन छलनी हुआ जा रहा था. उदास मन से वह अपने कमरे में आ कर बैठ गई.

रात को सोने के लिए जब वह बैड पर लेटी तो रजत के करीब जा कर उस के सीने में अपना मुंह छिपाए कुछ देर यों ही चुपचाप लेटी रही.

‘‘क्या हुआ? तबीयत तो ठीक है? दोस्तों के साथ गप्पें मारते हुए ज्यादा ही थक गईं शायद?’’ रजत उस की पीठ पर हाथ रख कर बोला.

अनन्या अपना चेहरा रजत की ओर घुमाते हुए बोली, ‘‘एक बात पूछूं रजत… क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता कि मैं इतनी मोटी हो गई हूं. फेस भी बदलाबदला सा लग रहा है…तुम ने तो एक स्लिमट्रिम, गोरी लड़की से शादी की थी…

7-8 महीनों में ही वह क्या से क्या हो गई.’’ ‘‘हा… हा… हा…’’ पहले तो रजत ने एक जोरदार ठहाका लगाया. फिर मुसकरा कर अनन्या की ओर देखते हुए बोला, ‘‘ओह अनन्या, कैसा सवाल है यह? यह सच है कि तुम्हें एक बीमारी हो गई है और उस में वेट कंट्रोल में नहीं रहता…पर यह बताओ कि क्या हम हमेशा वैसे ही दिखते रहेंगे जैसे शादी के वक्त थे? क्या जब बुढ़ापे में मैं गंजा हो जाऊंगा या फिर मेरे दांत टूट जाएंगे तो तुम्हें खराब लगने लगूंगा?’’

‘‘तुम मुझे प्यार तो करते हो न?’’ अनन्या के चेहरे पर निराशा अभी भी झलक रही थी. रजत एक बार फिर खिलखिला पड़ा, ‘‘अनन्या तुम इतनी समझदार हो कि मैं कब तुम से पूरी तरह जुड़ गया मैं ही नहीं समझ पाया. तुम मेरी केयर तो करती ही हो, मुझ से अपने मन की हर बात शेयर करती हो, बिना वजह कभी भी झगड़ा नहीं करतीं… और इतना क्वालिफाइड होने के बाद भी घर का काम करना पड़े तो नाकभौं नहीं सिकोड़ती… तुम सच में अपने नाम की तरह ही सब से बिलकुल अलग, बहुत खास हो.’’

‘‘पर इस से पहले तो आप ने कभी ऐसा कुछ नहीं कहा?’’ रजत की प्रेममयी बातें सुन भावविभोर हो अनन्या बोली.

‘‘मैं हूं ही ऐसा… बोलना कम और सुनना बहुत कुछ चाहता हूं… अनन्या यकीन करो, मुझे बिलकुल तुम सा ही पार्टनर चाहिए था.’’

अनन्या मंत्रमुग्ध हुए जा रही थी.

‘‘एक बात और कहूंगा…अपने शरीर का ध्यान रखना हम सब के लिए जरूरी है… पर बाहरी सुंदरता कभी मन पर हावी नहीं होनी चाहिए… तुम जब भी मेरे इस मन में झांक कर अपनी सूरत देखोगी, तुम्हें अपनी वही सूरत दिखाई देगी जो कल थी. आज भी वही और आने वाले कल भी.’’

‘‘ओह रजत… कुछ नहीं चाहिए मुझे अब… कोई मुझे कुछ भी कहता रहे परवाह नहीं… बस तुम्हारे दिल के आईने में मेरा अक्स यों ही चमकता रहे.’’

अनन्या नम आंखों को मूंद कर रजत से लिपट गई. रजत के प्रेम की लौ में पिघल कर वह स्वयं को बहुत हलका महसूस कर रही थी.

मानसून स्पेशल: एकांत कमजोर पल- भाग 3

औफिस के काम से सनोबर 2 दिनों के लिए बाहर गई थी. आज उसे रात को आना था पर उस का काम सुबह ही हो गया तो वह दिन में ही फ्लाइट से आ गई. इस समय बेटी स्कूल में होगी, पति औफिस में और बाई तो 5 बजे आएगी. वह अपनी चाबी से दरवाजा खोल कर अंदर आई तो देखा लाईट जल रही है. बैडरूम

से कुछ आवाज आई तो वह दबे पैर बैडरूम तक गई तो देख कर अवाक रह गई. साहिल और बाई एक साथ…

वह वापस ड्राइंगरूम में आ गई. साहिल दौड़ता हुआ आया और बाई दबे पैर खिसक ली.

साहिल सनोबर को सफाई देने लगा, ‘‘मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था. मेरी तबीयत खराब थी तो वह सिर दबाने लगी और मैं बहक गया. उस ने भी मना नहीं किया.’’

वह और भी जाने क्याक्या कहता रहा. सनोबर बुत बनी बैठी रही. वह माफी मांगता रहा.

सनोबर धीरे से उठी और अपने और अपनी बच्ची के कुछ कपड़े बैग में डालने लगी. बच्ची आई तो उसे ले कर अपनी अम्मी के पास चली गई. साहिल उसे रोकता रहा, माफी मांगता रहा पर सनोबर को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था.

घर आ कर मां से सारी बात बताई और फफक कर रो पड़ी, ‘‘साहिल ने मुझे धोखा दिया. अब मैं उस के साथ नहीं रह सकती.’’

बड़ी बेगम का दिल रो पड़ा. वर्षों पहले जिस आग में उन का घर जला था आज उन की बेटी के घर पर उस की आंच आ गई.

निकाह में शर्तें रखने से भी क्या हुआ? सब मर्द एकजैसे होते हैं, जब जिसे मौका मिल जाए कोई नहीं चूकता.

बड़ी बेगम ने बेटी को संभाला, ‘‘बेटी मैं तुम्हारा दुख समझ सकती हूं. तुम सो जाओ.’’ और उस का सिर अपनी गोद में रख कर सहलाने लगीं.

दूसरे दिन जब सनोबर औफिस गई और बच्ची स्कूल तो साहिल आया. जानता था बड़ी बेगम अकेली होगी. नौकरानी ने बैठाया. बड़ी बेगम को सलाम कर के बैठ गया. धीरे से बोला, ‘‘खालाजान, मुझ से बड़ी गलती हो गई. मैं एक कमजोर पल में बहक गया था. मुझ से गलती हो गई. मैं कसम खाता हूं अब कभी ऐसा नहीं होगा. मुझे माफ कर दीजिए, सनोबर से माफ करवा दीजिए,’’ इतना सब वह एक सांस में ही कह गया था.

बड़ी बेगम चुप रहीं. उन को बहुत दुख था और गुस्सा भी. साहिल की बातों और आंखों में शर्मिंदगी और पछतावा था. वे धीरे से बोलीं, ‘‘मैं कुछ नहीं कर सकती, जैसा सनोबर चाहे.’’

‘‘खालाजान मेरा घर टूट जाएगा, मेरी बेटी मेरे बारे में क्या सोचेगी? मैं सनोबर के बिना जी नहीं सकता.’’

बड़ी बेगम कुछ न कह सकीं.

शाम को जब सनोबर औफिस से आई तो बड़ी बेगम ने बताया कि साहिल आया था और माफी मांग रहा था.

सनोबर ने गुस्सा किया, ‘‘आप ने उसे आने क्यों दिया? हमारा कोई रिश्ता नहीं उस से. मैं तलाक लूंगी.’’

बड़ी बेगम को याद आया जब वकील साहब दूसरी बीवी ले आए थे तो वे भी मायके जाना चाहती थीं पर उन का न तो कोई सहारा था न वे अपने पैरों पर खड़ी थीं. आज सनोबर अपने पैरों पर खडी है. अपने फैसले खुद ले सकती है. फिर सोचने कि लगीं तलाक से इस मासूम बच्ची का क्या होगा? मां या बाप किसी एक से कट जाएगी. अगर दोनों ने दूसरी शादी कर ली तो इस का क्या होगा? वे अंदर ही अंदर डर गईर्ं. अपने बेटे को सनोबर और साहिल के बारे में बताया तो वह दूसरे दिन ही आ गया. दोनों बहनभाई की एक ही राय थी कि तलाक ले लिया जाए. साहिल रोज फोन करता, मैसेज भेजता पर सनोबर जवाब न देती.

साहिल बड़ी बेगम से मिन्नतें करता, ‘‘खालाजान, आप सब ठीक कर सकती हैं. एक बार मुझे माफ कर दीजिए और सनोबर से भी माफ करवा दीजिए. मैं अपनी गलती के लिए बहुत शर्मिंदा हूं.’’

एक दिन सनोबर औफिस से अपने फ्लैट पर कुछ सामान लेने गई तो उस ने देखा घर बिखरा है. किचन में भी कुछ बाहर का खाना पड़ा है. वह समझ गई बाई नहीं आ रही है. घर में हर तरफ लिखा था, ‘आई एम सौरी, वापस आ जाओ सनोबर.’ सनोबर को लगा साहिल 40 साल का नहीं, कोई नवयुवक हो और उसे मना रहा हो.

धीरेधीरे कई कोशिशों के बाद साहिल ने बड़ी बेगम को विश्वास दिला दिया कि यह एक कमजोर पल की भूल थी. उस ने पहले कभी कोई बेवफाई नहीं की. बड़ी बेगम ने सोचा यह तो सच है कि साहिल से भूल हो गई, अपनी गलती पर उसे शर्मिंदगी भी है, माफी भी मांग रहा है. प्रश्न बच्ची का भी है. वह दोनों में से किसी एक से छिन जाएगी. तो क्या इसे एक अवसर देना चाहिए?

बड़ी बेगम ने साहिल को बताया कि सनोबर तलाक लेने की तैयारी कर रही है. यह सुनते ही साहिल दौड़ादौड़ा आया, ‘‘खालाजान, अगर सनोबर ने तलाक की अर्जी डाली तो मैं मर जाऊंगा, मुझे एक मौका दीजिए और बच्चों की तरह रोने लगा.’’

बड़ी बेगम को दया आने लगी बोलीं, ‘‘तुम रो मत मैं आज बात करूंगी.’’

सनोबर बोली, ‘‘औफकोर्स अम्मी.’’

बड़ी बेगम ने भूमिका बांधी, ‘‘जब तुम्हारे अब्बू दूसरी बीवी ले आए थे तो मैं भी उन्हें छोड़ना चाहती थी पर सामने तुम दोनों बच्चे थे.’’

‘‘आप की बात अलग थी मैं खुद को और अपनी बच्ची को संभाल सकती हूं. उस की गलती की सजा उसे मिलना ही चाहिए, सनोबर बोली.’’

‘‘उस की गलती की सजा उस के साथसाथ तुम्हारी बेटी को भी मिलेगी या तो उस का बाप छिनेगा या मां और अगर तुम दोनों ने दूसरी शादी कर ली तो इस का क्या होगा?’’

‘‘अम्मी एक शादी से दिल नहीं भरा जो दूसरी करूंगी? रह गया पिता तो ऐसे पिता के होने से ना होना भला,’’ सनोबर के मन की सारी कड़वाहट होंठों पर आ गई.

सत्यकथा: सेक्सगेम के मकड़जाल में फंस रहे मासूम

लखनऊ में वजीरगंज थाने की पुलिस ने 29 मई, 2022 को एक व्यक्ति के साथ 14 साल के एक लड़के
को भी गिरफ्तार किया. नाबालिग लड़के ने उस के कहने पर साढ़े 4 लाख रुपए की चोरी की थी. इस में हैरानी की बात पुलिस के सामने यह आई कि लड़के को चोरी के लिए प्रतिबंधित औनलाइन गेम की लत लगाई गई थी. फिर कई चरणों में खेले जाने वाले गेम के एडवांस स्टेज के लिए पैसे की जरूरत होने पर उस ने अपने घर से रुपए चुराए.

नाबालिग लड़के पर एक महीने के भीतर अपने घर के कीमती सामान बेचने और घर के लौकर से साढ़े 4 लाख रुपए की चोरी करने के लिए भी कहा गया था. इस पर जब लड़के के पिता को शक हुआ, तब उन्होंने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई.इस पूरे मामले की तहकीकात करने वाले वजीरगंज थाने के थानाप्रभारी राजेश मिश्रा के अनुसार लड़के के पिता ने दावा किया कि आरोपी ने पहले उन के बेटे को औनलाइन गेम खेलने का लालच दिया, और फिर अपने ही घर से रुपए चोरी करने के लिए उकसाया.
आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाने के तुरंत बाद अगले रोज ही अहमद उर्फ आफताब अहमद को उस के 17 वर्षीय सहयोगी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया. जबकि 2 और नाबालिग लड़के फरार हो गए, जो रेस्टोरेंट में काम करते थे. उन्हीं में एक उस का भतीजा भी था.

अहमद मोबाइल फोन की एक दुकान पर काम करता था. अहमद से हुई पूछताछ से एक अलग बात का भी खुलासा हुआ. उस ने बताया कि उस ने अपने भतीजे और उस के दोस्त को पैसे खर्च कर एक औनलाइन गेम खेलते हुए पाया. वे इस के काफी दीवाने बने हुए थे.उन में नशे की तरह इस की लत लग चुकी थी. फिर हम ने अहमद नाम की एक आईडी का इस्तेमाल कर मासूम नाबालिगों को खेल का आदी बना कर उन्हें ठगने की योजना बनाई. उन के जाल में फंसने वाले ग्राहकों में 14 साल का एक बच्चा भी शामिल था.

आरोपी अहमद का भतीजा पीडि़त लड़के से परिचित था, क्योंकि वे साथ क्रिकेट खेलते थे और उसे औनलाइन गेम दिखाते थे. अंतत: उसे भी इस की लत लग गई थी.धीरेधीरे अहमद ने उसे यह कहते हुए खेल खेलने की अनुमति देनी बंद कर दी कि अन्य स्टेज में आगे बढ़ने के लिए पैसे की जरूरत होगी. आरोपी ने यह भी कहा कि अगर वह अन्य चरणों के लिए क्वालीफाई कर लेता है, तब उसे न केवल पुरस्कार के रूप में गोल्ड मेडल मिलेगा, बल्कि नकद पुरस्कार भी मिलेगा.

बच्चों में औनलाइन गेम के जरिए पैसे कमाने के अलावा सैक्स गेम की लत लगने का भी खतरा कम नहीं है. इसे ले कर पूरी दुनिया के मातापिता चिंतित हैं. औनलाइन सैक्स गेम्स की भरमार है, जो ऐप्स के जरिए मोबाइल में बहुत आसानी से घुस आते हैं.इस तरह के एक गेम में हस्तमैथुन, चुंबन, संभोग, स्खलन जैसे शब्दों के अलावा भद्दी गालियां और उत्तेजना जगाने वाले म्यूजिक एवं दूसरे किस्म की आवाजें भी होती हैं, जो 2-3 मिनट से भी कम समय में उत्तेजित कर देता है. यह सब स्मार्टफोन पर आसानी से उपलब्ध है.

इस की तह में जाने के लिए मोबाइल पोर्न गेम पर नजर डालनी होगी, जिस के कारोबार के साल 2021 तक भारत में करीब 7800 करोड़ रुपए हो जाने की संभावना जताई गई थी. यानी कि औनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोग मालामाल हो रहे हैं, जबकि बच्चे इस के जाल में फंसते जा रहे हैं.इस गेम के एक छोटे से अंश से समझा जा सकता है. एक कपल खुले में सैक्स कर रहा है और उस के आसपास खड़े लोग ऐसा करते हुए देख रहे हैं. साथ ही साथ अश्लील कमेंट्स भी कर रहे हैं. गेमिंग की दुनिया की यह एक हकीकत बन चुकी है. यह गेम रोबलाक्स का है, जिस की चर्चा पिछले दिनों मीडिया में हुई थी. इस में इस्तेमाल किए गए गंदे शब्दों के चलते जौर्डन में यह बैन कर दिया गया है.

रोबलाक्स एक औनलाइन गेम प्लेटफौर्म है. यह यूजर्स को गेम्स प्रोग्राम करने और दूसरे के बनाए गेम्स को खेलने का मौका देता है. कोविड महामारी के बाद इस में काफी तेजी आई.इस के कुछ गेम्स भले ही एजूकेशन से जुड़े हैं, लेकिन कुछ गेम्स बेहद आपत्तिजनक हैं. पिछले दिनों इस के कुछ गेम्स को ले कर बेहद आपत्ति जताई गई थी. जैसे एक गेम का स्वरूप इस तरह है—

एक सैक्स समस्या के साथ बच्चों का खेल रोबलाक्स कांडो है. इस गेम में एक नग्न पुरुष केवल एक कुत्ते का कौलर पहने हुए है और एक महिला उसे गुलाम की तरह घुमा रही है. 2 स्ट्रिपर्स उन के बगल में नाच रहे हैं. उन के द्वारा खुलेआम सैक्स करने, एकदूसरे को देखने और कभीकभार टिप्पणी करने वाले इस जोड़े के आसपास कई लोग जमा हो गए हैं. उन्हीं में एक आदमी नाजी वरदी पहने हुए है. यह सब बच्चों के गेमिंग प्लेटफौर्म का दृश्य है, जो बच्चों में सैक्स के प्रति ललक जगाने के लिए काफी है.
यह दुनिया के सब से लोकप्रिय बच्चों के खेल में से एक है. एक अनुमानित आंकड़े के अनुसार 2020 में रोबलाक्स 9 से 16 वर्ष की आयु के सभी अमेरिकी बच्चों में से दोतिहाई बच्चे इस खेल का उपयोग करते हैं.
यह अपने उपयोगकर्ताओं को एक साथ गेम बनाने और खेलने की अनुमति देता है. गेम खेलने वाले इस के जरिए एक निर्धारित समय में डिजिटल दुनिया में कई लोगों के साथ जुड़ जाते हैं. वैसे इस पर कई देशों जैसे जौर्डन, यूएई और उत्तर कोरिया में प्रतिबंध लगा दिया गया है.

यूएई का कहना है कि यह बच्चों के हेल्थ पर बुरा असर डाल रहा है, जबकि जौर्डन ने इस में भद्दे शब्दों की भरमार का आरोप लगाया. हैरानी की बात यह है कि अभी तक भारत में इसे बैन नहीं किया गया है, जबकि यहां कुछ गेम जैसे पबजी समेत कुछ ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है.

औनलाइन गेमिंग का बच्चों के ऊपर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करते समय बैंगलुरु की एक संस्था निमहांस (नैशनल इंस्टीट्यूट औफ मेंटल हेल्थ ऐंड न्यूरो साइसेंज) ने पाया कि 14 साल से ले कर 16 साल तक के बच्चों में इस के प्रति लत अधिक होती है.इसे देखते हुए यह सलाह दी गई है कि मोबाइल के साथ लगे रहने और उन के गेमिंग आदतों पर कंट्रोल मातापिता को करनी होगी. बच्चे अपने स्मार्टफोन पर वीडियो गेम खेलना पसंद करते हैं और धीरेधीरे सैक्स गेम्स के संपर्क में आ सकते हैं.
कारण गूगल प्ले पर मस्ती वाले गेम के अनगिनत ऐप्स हैं. स्मार्टफोन की लोकप्रियता लगातार बढ़ती ही जा रही है. लाखों ऐप्स जो रोजमर्रे के कामकाज और दूसरी जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं.

लेकिन कई ऐप्स ऐसे हैं, जो सिर्फ मनोरंजन और मजे के लिए बनाए गए हैं. इन्हीं में एक है सैक्स गेम. कहने को तो इसे मानसिक थकान मिटाने वाला कहा जाता है, लेकिन इस में मौजमस्ती के मूड वाले मसाले डाले जाते हैं.मजे की बात तो यह भी है कि ये ऐप्स बिलकुल फ्री में गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड किए जा सकते हैं. इन में उत्तेजना के साथसाथ सैक्स को तरहतरह से परोसा जाता है. मोबाइल पोर्न गेम्स विभिन्न सैक्स श्रेणियों के होते हैं, जो खेलने वाले को एक आभासी दुनिया में ले जाता है. रसदार आनंद के लिए प्रेरित करता है और एक चाहत की उम्मीद जगाता है.

इसे आसानी से मोबाइल पर किसी भी उम्र के व्यक्ति द्वारा खेला जा सकता है. कोई भी इसे खेल सकता है. वे सिर्फ सैक्स की दुनिया में रहते हुए अद्भुत मायालोक में विचरण करते हैं. इस तरह के खेलों में अच्छी तरह से लिखित कहानी होती है, जो खिलाडि़यों को कहानी में डूबने में मदद करती है, इसलिए यह और भी वास्तविक लगता है. इस के संवाद और म्यूजिक, ड्रेस, माहौल और नशे की दूसरी चीजें लुभाती हैं.

अच्छी तरह से लिखे गए प्लौट वाले गेम में खिलाड़ी पूरी तरह सुधबुध खो कर डूब जाता है. खिलाड़ी सैक्स गेम को एक वास्तविक कहानी के रूप में सोचने और उस के पात्रों के बीच भावनात्मक संबंध बनाने जैसा अनुभव करता है.किसी भी रूप में नग्नता या अश्लीलता वाले सभी खेलों को सैक्स गेम कह सकते हैं. आमतौर पर काल्पनिक कहानियों पर आधारित खेलों में खिलाड़ी अलगअलग भूमिकाएं निभाते हैं. इस तरह से पोर्न गेम बच्चों की रुचि का सैक्स खेल बन जाता है. शुरू में जब बच्चों को इन खेलों के बारे में अपने दोस्तों से पता चलता है तब वे छिपछिप कर खेलने लगते हैं.

कोई भी बच्चा खेल के ऐसे पात्रों को देख कर खुद को उसी रूप में देखता है और फिर अपनी यौन इच्छाओं को पूरा करने के लिए खेल खेलने की चाहत रखता है.पोर्न गेम से उस की भावना को संतुष्टि मिलती है. इस का असर बिगड़ी हुई आदतों के रूप होता है तो खेलों में यौन हिंसा से भी दिमाग प्रभावित हो जाता है, जो लंबे समय तक बना रहता है.यह कहा जा सकता है कि बच्चों पर सैक्स गेम्स का बेहद ही क्रूर प्रभाव पड़ता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि सैक्स गेम के आदी बच्चों में डिसेंसिटाइजेशन और टौलरेंस की समस्या भी होती है.

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