YRKKH: तीज पर रोमांटिक अंदाज में दिखेगा अक्षरा-अभिमन्यु , वीडियो वायरल

सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है में इन दिनों लगातार टीआरपी में बना हुआ है. इस सीरियल के पिछले एपिसोड में दिखाया गया है कि अभिमन्यु अक्षरा को आग से बचा लेता है इसके बाद से इन दोनों की दूरियां खत्म हो जाती है.

अभिमन्यु अक्षरा की वापसी की खुशी में बिरला हाउस जोरदार स्वागत करता है. लेकिन इसके साथ ही बिरला हाउस में तीज का त्योहार मनाया जाता है. जिसमें अक्षरा बेहद सुंदर तरीके से तैयार होगी और वह क्योंकि अक्षरा और अभिमन्यु की यह पहली तीज होगी.

तीज से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. फैंस इस तस्वीर को देखना भी पसंद कर रहे हैं. इन सभी तस्वीरों को देखने के बाद से फैंस का एक्साइटमेंट सातवें आसमान पर पहुं. चुका है.

फोटो में अक्षरा और अभिमन्यु का लुक देखने लायक है.तीज के इस खास मौके पर इन दोनों का रोमांटिक लुक देखने लायक है. इन दोनों की पहली होली होगी इस साल. दोनों एक दूसरे के साथ शानदार पोज देते नजर आ रहे हैं.

दोनों का पोज देखने लायक है. यह दोनों साथ में खूबसूरत नजर आ रहे हैं. दोनों का रोमांटिक अंदाज देखने लायक है. जिसे देखकर फैंस लगातार कमेंट कर रहे हैं.

वैसे देखा जाए तो बहुत लंबे समय बाद इस तरह की तस्वीर देखने को मिली है. इन दोनों की कैमेस्ट्री में पिछले कुछ समय से लड़ाई चल रही थी अब जाकर दोनों के रिश्ते में फिर से प्यार आ गया है. दोनों एक दूसरे के साथ समय बीता रहे हैं.

बीते दिनों इन दोनों के बीच में राजीव आ गया था, जिससे इऩ दोनों के बीच में दूरियां आ गई थी. लेकिन अब दोनों का प्यार देखकर एक बार फिर फैंस खुश नजर आ रहे हैं. अब देखते हैं कब तक दोनों साथ में नजर आ रहे हैं.

सोनाक्षी सिन्हा के नए लुक को देखकर डर गए फैंस! किया Troll

बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा सोनाक्षी सिन्हा आए दिन सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं. सोनाक्षी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी कुछ फोटो शेयर की हैं. जिसमें वह किसी भूतनी से कम नहीं लग रही हैं.

वैसे देखा जाए तो सोनाक्षी सिन्हा ने बॉलीवुड में देसी गर्ल बनकर एंट्री मारी थी और अब उनका यह अवतार लोगों को शॉक्ड कर दिया है.

कुछ फैंस उनका यह लुक देखकर कह रहे हैं कि आप विदेशी हसीना लग रही हैं. इस फोटो पर फैंस लगातार कमेंट कर रहे हैं. जिसे देखकर लोगों का मन नहीं भर रहा है. हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें सोनाक्षी सिन्हा का यह लुक खूब पसंद आ रहा है, जो  हमेशा से सोनाक्षी को ऐसे ही देखना चाहते थें.

 

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वहीं एक यूजर्स ने कमेंट किया है कि यह लुक बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है इस फोटो को डिलीट कर दीजिए. सोनाक्षी सिन्हा को ट्रोल करने वाले कई लोगों ने उन्हें इस तरह के कमेंट किए हैं. प्लीज बाहर मत निकलना वरना लोग तु्म्हें देखकर डर जाएंगे.

अगर सोनाक्षी सिन्हा के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह इन दिनों संजय लीला भंसाली की वेबसीरीज हीरापंडा की शूटिंग में व्यस्त हैं. इससे पहले वह बॉलीवुड के सुपर स्टार संग कई फिल्मों में नजर आ चुकी हैं. वैसे देखा जाए तो ज्यादातर सोनाक्षी के फैंस उन्हें देसी अवतार में देखना पसंद करते हैं.

कुछ वक्त पहले सोनाक्षी सिन्हा को लेकर खबर आ रही थी कि वह जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाली है. हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं है. अभी सोनाक्षी शादी नहीं करने वाली हैं. उन्होंने अपने कैरियर पर ध्यान दिया है. जिसके बाद से वह शादी के बारे में सोचेंगी.

सोनाक्षी का नाम कई लोगों के साथ जुड़ चुका है, लेकिन अभी तक कोई बात सच नहीं हुई है कि आखिर सोनाक्षी डेट किसे कर रही है.

बीजेपी ने लहराया महाराष्ट्र में अपना परचम

भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार को गिरा कर अपना ढाई साल पहले का बदला तो ले लिया पर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस और अमित शाह को समझ आ गया होगा कि काठ की हांडी में जो खीर पकाई जा रहही थी, अब छेद होने लगे है और हर बार मामला पूरी तरह कंट्रोल में नहीं रहता. शिवसेना को छोड़ कर गए एकनाथ ङ्क्षशदे ने मुख्यमंत्री पद छीन ही नहीं लिया भाजपा को जता दिया कि हर जगह उस की नहीं चलेगी और उसे भी अपना अहम पूरा करने की भारी कीमत देनी पड़ेगी.

कोई बड़ी बात नहीं होती कि सिर्फ 30-35 विधायकों वाली पार्टी अब 112 विधायकों वाली भाजपा को हर रोज धमकी देती रहे. एकनाथ ङ्क्षशदे उन जैसों में से हैं जो किसी भी दिन फिर पलटी मार सकते हैं. उनका शिव सेना के कैडर पर कब्जा है यह पक्का नहीं है.

ठाकरे परिवार जिस मेहनत से शिवसेना को बनाया है, एकनाथ ङ्क्षशदे उसे समेट कर ले जाएं, इस के उदाहरण कम ही है. तमिलनाडू में जयललिता के बाद अन्नाद्रविड़ मुनेत्रकषगम बिखर गई है. एमजे रामचंद्रन और जयललिता ने मिल कर इसे बनाया था. बहुजन समाज पार्टी कांशीराम और मायावती ने बनाई और कमजोर होने के बावजूद आज भी दलित वोटों पर खासी पकड़ मायावती की है चाहे वह आलास्य के कारण पार्टी को आगे नहीं चला पा रही हों.

कांग्रेस बेहद सिकुड़ गई है पर नेताओं और वेटरों को तो दूसरी पाॢटयां ले जा रही हैं  पर वर्कर आज भी गांधी परिवार के साथ हैं. शरद पंवार महाराष्ट्र तक में पूरी कांग्रेस को हड़प नहीं सकते हैं.

एकनाथ ङ्क्षशदे पूरी शिवसेना को ठाकरे परिवार के हाथों छीन लेंगे, इस में संदेह है. उलट शिवसेना में अब ङ्क्षशदे से बदला लेने की भावना तेज हो सकती है और अगले किसी भी चुनाव में जाएं शिवसेना का कैडर न हो, न ङ्क्षशदे जीत सकेंगे न भाजपा.

धोखा देना आसान है पर धोखे के बाद जीवन आसान नहीं होता. इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है जिन में जिस ने धोखा देकर सरकार गिराई वह बाद में फिर लौट के आया. इस शतरंजी चाल में सफेद राज्य जीते या काले राज्य, मरते प्यादे हैं. सभी प्यादों को मार दिया जाता हैं या निकम्मा बना दिया जाता है.

अब महाराष्ट्र में न शिवसेना का कैडर अपनेआप को मजबूत समझेगा न भारतीय जनता पार्टी का जो तालमेल पिछले चुनावों तक दोनों में था वह भाजपा की बेसब्री की वजह से टूट गया है. इस का नुकसान भाजपा पहले पंजाब, बंगाल और ओडिसा में देख चुकी है जहां उस ने सत्ता में आन की छटपटाहट में भयंकर तोड़ाफोड़ी अपने खिलाफ पार्टी में तो की है, अपनी सहयोगी पार्टी में भी की. ममता बैनजी, नवीन ङ्क्षजदल कभी भाजपा के साथ काम कर चुके हैं पर काम कराना, धोखा देना और फिर कब्जा कर लेना यह पौराणिक कथाओं से भाजपा शासक सीखसीख कर आते हैं. विष्णु का वामन अवतार इसी का उदाहरण है भगवान विष्णु ने एक छोटा रूप धारण का राजा बलि को धोखा दिया.

ङ्क्षशदे का ठाकरे परिवार को दिया गया धोखा कुछ दिन काम करेगा और यह दूसरी पाॢटयों को सतर्क कर देगा. अब भाजपा के पास तोडफ़ोड़ करने के लिए लालच नहीं, ईडी की धमकी बची है. ईडी भी कितनी कामयाब होती है, यह देखना है क्योंकि अब तक सिवाए तंग करने के बाद यह कम को ही मुजरिम साबित नहीं कर पाई है.

ङ्क्षशदे का मुख्यमंत्री पद का निवाला देवेंद्र फडनवीस के मुंह से छीन ले जाने का मतलब है कि अब और फडनवीस भाजपा को नहीं मिलेेंगे पर ङ्क्षशदे जरूर मिलेंगे.

Monsoon Special: जरूरी हैं दूरियां, पास आने के लिए

क्या करें जब बहकने लगें उन की निगाहें

नई शादी, ढेरों उमंगें. राजेश और नीता ने हनीमून के लिए नैनीताल जाने का प्रोग्राम बनाया. नैनीताल पहुंचते ही नीता चहक उठी, ‘‘अब हम जी भर कर घूमेंगे और प्यार करेंगे.’’

नीता की बात का राजेश ने भी पूरा समर्थन किया, ‘‘हां, यहां तो अपने ही दिन हैं और अपनी ही रातें. खो जाएंगे एकदूजे में हम और तुम, तुम और हम.’’

जब तक वे दोनों होटल के कमरे में रहते, तब तक तो सब ठीक रहता. पर जब भी वे कहीं घूमने जाते, तो नीता हमेशा पाती कि उस से बातें करते समय राजेश का ध्यान आसपास घूमती अन्य स्त्रियों पर चला जाता है. नईनवेली होने के कारण वह राजेश से कुछ न कह पाई.

मर्दों की आदत

हनीमून से लौट कर जब नीता ने अपनी भाभी को यह बात बताई तो वे हंस दीं, ‘‘अरी बन्नो, इतनी सी बात को ले कर पूरे हनीमून में परेशान रहीं तुम. पराई औरतों को ताकना तो मर्दों की आदत होती है.’’

‘‘एकदम ठीक कहा भाभी आप ने,’’ सरिता ने समर्थन किया, ‘‘यदि पुरुषों के पास मेनका को भी बैठा दो, तो भी वे इधरउधर ताकनेझांकने से बाज नहीं आएंगे.’’

इस पर तेजतर्रार रश्मि ने एक मजेदार वाकेआ सुनाया, ‘‘मैं तो अपने पति पर हमेशा निगरानी रखती हूं, फिर भी वे मौका पा कर आंखें सेंक ही लेते हैं.

विपरीत सैक्स के प्रति आकर्षण

सभी पत्नियों ने इस बात को एकमत से स्वीकार किया कि उन के पति उन की उपस्थिति में भी अन्य महिलाओं को घूरने से नहीं चूकते.

सामने खूबसूरत बीवी बैठी है, पर पति महोदय हैं कि बीवी से बातें करतेकरते बीचबीच में आसपास बैठी लड़कियों पर भी दृष्टिपात कर ही डालते हैं. आखिर पुरुष ऐसा क्यों करते हैं?  इस विषय में जब कुछ पुरुषों से ही पूछा कि क्या यह सच है कि अधिकांश पुरुषों की नजरें चंचल होती हैं तो सब ने यह स्वीकार किया कुछ अलगअलग ढंग से.

‘‘पत्नियां तो जरा सी बात का बतंगड़ बना देती हैं. अब आप ही बताइए एक नजर किसी और महिला पर डालने में क्या कोई बुराई है? हमारे देखने से वह दूसरी महिला हमारी तो नहीं बन सकती है न?’’

‘‘अजी, क्या बताएं सुंदर चेहरे पर तो निगाहें अपनेआप ही चली जाती हैं. कुदरत ने हर खूबसूरत चीज बनाई ही देखने के लिए है.’’

संदेह न पालें

‘‘बीवी तो यही चाहती है कि उस का पति चौबीसों घंटे बस उसी को ताकता रहे. पति की नजरें किसी और औरत पर पड़ी नहीं कि बीवी न जाने क्याक्या ऊलजलूल सोचने लगती है. हम पतियों की तो मुसीबत ही मुसीबत है. मैं तो किसी बुढि़या को भी देखूं तो पत्नी घूरने लगती है. संदेह तो पत्नियों के मन में होता है, हमारे मन में ऐसीवैसी कोई बात नहीं होती है.’’

देखा आप ने, कितनी सहजता से पुरुषों ने अपनी बात कह दी. पर पत्नी यदि अपने पति को अन्य महिला की ओर देखते या उस की प्रशंसा करते सुनती है तो उस के मन में न जाने कैसेकैसे विचार पनपने लगते हैं. उस के मन में असुरक्षा की भावना भी उत्पन्न होने लगती है. वह सोचती है कि उस में अब पहले जैसा आकर्षण नहीं रहा. उस के पति उसे पहले जैसा प्यार नहीं करते, तभी तो उस के सामने रहते हुए भी अन्य स्त्रियों पर उन की निगाहें टिक जाती हैं.

प्यार दें प्यार लें

जब 2 प्राणी विवाह के बंधन में बंधते हैं, तो दोनों यही चाहते हैं कि एकदूसरे के प्रति पूरी तरह समर्पित रहें. दोनों अपना पूरा प्यार, पूरा ध्यान तथा समय एकदूसरे को ही दें. पर कभीकभी पति पत्नी से बेहद प्यार करते हुए भी किसी अन्य सुंदर स्त्री को देख कर उस की प्रशंसा किए बिना नहीं रह पाता. इस का मतलब यह तो नहीं कि वह अपनी पत्नी से प्यार नहीं करता.

किसी की तारीफ करना कोई बुरी बात तो नहीं. इसलिए आप के पति यदि आप के सामने किसी अन्य महिला की प्रशंसा करें तो आप मुंह फुला कर अपनी तुच्छ मानसिकता का परिचय न दें, बल्कि उसे सहज रूप से लें और हो सके तो आप भी उस महिला की तारीफ में चंद शब्द कह दें.

यदि आप सोचती हैं कि आप अपने पति के प्रति बहुत अधिक भावुक हैं या उन के किसी अन्य महिला की ओर देखने से अपना अधिकार छिनता हुआ महसूस करती हैं तो पहले अपने मन की इस असुरक्षा की भावना का भी परीक्षण करें. क्या आप को अपनी सुंदरता, बुद्धिमत्ता या योग्यता में कहीं कुछ कमी नजर आती है? आप अपने व्यक्तित्व को, अपने गुणों को निखारने की कोशिश करें. आप पति को पूरा प्यार देंगी, तो वे आप से दूर नहीं जाएंगे.

पति की इस आदत को गंभीरता से ले कर राई का पहाड़ न बनाएं. आप के पति लाख इधरउधर देखें, पर अधिकार तो उन पर सिर्फ आप का ही है.

हमें तुम से प्यार कितना : भाग 2

दूसरे दिन शाम को मधु आलोक के घर पहुंची. आलोक की मां ने उस का स्वागत मुसकराते हुए किया और कहा, ‘आओ मधु, तुम्हारे बारे में मुझे आलोक बता चुका है.’ मधु ड्राइंगरूम में सोफे पर आलोक की मां के साथ बैठ गई.

अंशु भी आवाज सुन कर वहां आ गया.

‘आंटी को पहली बार देखा है. कौन हैं, क्या आप दिल्ली में ही रहती हैं?’ अंशू ने पूछा.

‘हां, मैं दिल्ली में ही रहती हूं, मेरा नाम मधु है. अगर तुम्हें अच्छा लगेगा तो मैं तुम से मिलने आया करूंगी,’ अंशू की ओर निहारते हुए बड़े प्यार से मधु ने उस से कहा, ‘तुम अपने बारे में बताओ, कौन से गेम खेलते हो, किस क्लास में पढ़ते हो?’

शरमाते हुए अंशू ने कहा, ‘मैं क्लास थर्ड में पढ़ता हूं. नाम तो आप जानते ही हो. घर में दादादादी हैं, पापा हैं.’ उस की आंखें आंसुओं से भर आई थीं. उस ने आगे कहा, ‘आंटी, मैं मम्मी की फोटो आप को दिखाऊंगा. मेरी मां का नाम सुहानी था जो….’ आगे वह नहीं बोल पाया.

अंशू को मधु ने गले लगा लिया, ‘बेटा, ऐसा मत कहो, मां जहां भी हैं वे तुम्हारे हर काम को ऊपर से देखती हैं. वे हमेशा तुम्हारे आसपास ही कहीं होती हैं. मैं तुम्हें बहुत प्यार करूंगी. तुम्हारी अच्छी दोस्त बन कर रोज तुम्हारे पास आया करूंगी, ढेर सारी चौकलेट, गिफ्ट और गेम्स ला कर तुम्हें दूंगी. बस, तुम रोना नहीं. मुझे तुम्हारी स्वीट स्माइल चाहिए. बोलो, दोगे न?’ एक बार फिर मधु ने अंशू को गले से लगा लिया. आलोक की मम्मी ने चाय बना ली थी. चाय पीने के बाद मधु वापस अपने घर चली गई.

आलोक की मां ने उसे मधु के बारे में बताते हुए कहा, ‘मुझे मधु बहुत अच्छी लगी. अंशू से बातचीत करते समय मुझे उस की आंखों में मां की ममता साफ दिखाई दी.’ इस के जवाब में आलोक ने मां को सुझाव दिया, ‘अभी कुछ दिन हमें इंतजार करना चाहिए. मधु को अंशू से मेलजोल बढ़ाने का मौका देना चाहिए ताकि यह पता चले कि वह मधु को स्वीकार कर लेगा.’

इस के बाद मधु ने स्कूटी पर अंशू के पास जानाआना शुरू कर दिया. वह अच्छाखासा समय उस के साथ बिताती थी. कभी कैरम खेलती थी तो कभी उस के साथ अंत्याक्षरी खेलती थी. उस की पसंद की खाने की चीजें पैक करवा कर उस के लिए ले जाती तो कभी उसे मूवी दिखाने ले जाती थी. एक महीने में अंशू मधु के साथ इतना घुलमिल गया कि उस ने आलोक से कहा, ‘पापा, आप आंटी को घर ले आओ, वे हमारे घर में रहेंगी, तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा.’

मधु और आलोक का विवाह हो गया. विवाह की धूमधाम में अंशू ने हर लमहे को एंजौय किया, जो निराशा और मायूसी पहले उस के चेहरे पर दिखती थी, वह अब मधुर मुसकान में बदल गई थी. वह इतना खुश था कि उस ने सुहानी की तुलना मधु से करनी बंद कर दी. सुहानी की फोटो भी शैल्फ से हटा कर अपनी किताबों वाली अलमारी में कहीं छिपा कर रख दी. आलोक ने महसूस किया जिद्दी अंशू अब खुद को नए माहौल में ढाल रहा था.

मधु ने आलोक का संबोधन तुम से आप में बदल दिया. उस ने आलोक से कहा, ‘‘तुम्हें अंशू के सामने तुम कह कर बुलाना ठीक नहीं लगेगा, इसलिए मैं आज से तुम्हें आप के संबोधन से बुलाऊंगी.’’ अपनी बात जारी रखते हुए उस ने आगे कहा, ‘‘हम अपने प्यार और रोमांस की बातें फिलहाल भविष्य के लिए टाल देंगे. पहले अंशू के बचपन को संवारने में जीजान से लग जाएंगे. वह अपनी क्लास में फर्स्ट पोजिशन में आता है, इंटैलीजैंट है. जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि अब वह मानसिक तौर पर मुझे मां के रूप में पूरी तरह स्वीकार कर चुका है, तब हम हनीमून के लिए किसी अच्छे स्थान पर जाएंगे.’’

यह सुन कर आलोक को अपनी हमसफर मधु पर गर्व महसूस हो रहा था. खुश हो कर उस ने उस का हाथ अपने हाथ में ले कर चूम लिया. वे दोनों शादी के बाद दिल्ली के एक रैस्तरां में कैंडिललाइट में डिनर ले रहे थे. घर लौटते समय उन्होंने कनाट प्लेस से अंशू की पसंद की पेस्ट्री पैक करवा ली थी.

वे दोनों आश्चर्यचकित थे जब वापसी पर अंशू ने मधु से कहा, ‘‘मम्मा, आप ने देर कर दी, मैं कब से आप का इंतजार कर रहा था.’’

मधु ने पेस्ट्री का पैकेट उसे पकड़ाते हुए कहा, ‘‘अंशु, यह लो तुम्हारी पसंद की पेस्ट्री. तुम्हें यह बहुत अच्छी लगेगी.’’ अंशू की खुशी उस के चेहरे पर फैल गई.

अंशू चौथी कक्षा बहुत अच्छे अंकों के साथ पास कर चुका था. मधु की मां की ममता अपने शिखर पर थी. उस ने अपने बगीचे में अंशू की पसंद के फूलों के पौधे माली से कह कर लगवा दिए थे. जैसेजैसे ये पौधे फलफूल रहे थे, मधु को लगता था वह भी माली की तरह अपने क्यूट से बेटे की देखरेख कर रही है. आत्मसंतुष्टि क्या होती है, उस ने पहली बार महसूस किया.

शाम के समय जब आलोक घर आता था तो अंशू उस का फूलों के गुलदस्ते से स्वागत करता था. मधु का ध्यान अंशू की पढ़ाई के साथ उस की हर गतिविधि पर था. उस ने उसे तैयार किया कि वह स्कूल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले. अंशू के स्टडीरूम में शैल्फ पर कई ट्रौफियां उस ने सजा कर रख ली थीं. सब खुशियों के होते हुए पिछले 2-3 साल अंशू ने अपना बर्थडे यह कह कर मनाने नहीं दिया कि ऐसे मौके पर उसे सुहानी मां की याद आ जाती है.

दूसरे के बच्चे को पालना कितना मुश्किल होता है, यह महसूस करते हुए उस ने तय किया कि कभी वह अंशू को सुहानी मां के साथ बिताए लमहों के बारे में हतोत्साहित नहीं करेगी. अंशू का विकास वह सामान्य परिस्थिति में करना चाहती थी. जैसेजैसे उस का शोध कार्य प्रगति पर था उसे अभिप्रेरणा मिलती रही कि सब्र के साथ हर बाधा को पार कर वह अंशू के समुचित विकास के काम में विजेता के रूप में उभरे. उसे उम्मीद थी कि जितना वह इस मिशन में कामयाब होगी, उतना ही उसे आलोक और सासससुर का प्यार मिलेगा. दोनों के रिश्ते की बुनियाद दोस्ती थी. प्यार और रोमांस के लिए भविष्य में समय उपलब्ध था.

आलोक मधु की अब तक भूमिका से इतना खुश था कि उस की इच्छा हुई किसी रैस्तरां में शाम को कुछ समय उस के साथ बिताए. कनाट प्लेस की एक ज्वैलरी शौप से उस की पसंद के कुछ जेवर खरीद कर उसे गिफ्ट करते हुए उस ने कहा, ‘‘मधु, वैसे तो तुम्हारे पास काफी गहने हैं लेकिन मैरिज एनिवर्सरी न मना पाने के कारण हम कोई खास खुशी तो मना नहीं पाते हैं, यह गिफ्ट तुम यही समझ कर रख लो कि आज हम ने अपने विवाह की वर्षगांठ मना ली है. मम्मीपापा को इस के विषय में बता सकती हो. हम धूमधाम से तभी एनिवर्सरी मनाएंगे जब अंशू अपना जन्मदिन खुशी के साथ दोस्तों को बुला कर मनाना शुरू कर देगा.’’

रैस्तरां में उन दोनों की बातचीत बड़ी प्यारभरी हुई. डिनर के बाद जब वे रैस्तरां से बाहर निकले तो आलोक ने मधु का हाथ अपने हाथ में ले कर उस का स्पर्श महसूस करते हुए कहा, ‘‘मधु, मैं इंतजार में हूं कि कब हम लोग हनीमून के लिए किसी हिलस्टेशन पर जाएंगे. जब ऐसा तुम भी महसूस करो, मुझे बता देना. हम लोग इसी बहाने अंशू को भी साथ ले चल कर घुमा लाएंगे.’’

Monsoon Special: छोटे छोटे सुख दुख- भाग 3

‘‘तुम यहां झगड़ा करने लगे हो… बच्चों के कितनी चोटें लगी हैं… तुम से यह नहीं दिख रहा. इन्हें पहले तुरंत अस्पताल ले जाओ,’’ सुमित रिकशे वाले पर बरस पड़ा.  रिकशे वाला उसे पहचानता था. बोला, ‘‘साहब, मेरा रिकशा तो पूरी तरह टूट गया… जब तक भरपाई नहीं होगी तब तक नहीं छोड़ूंगा इन को.’’ ‘‘चाहे बच्चों का नुकसान हो जाए,’’ सुमित दहाड़ते हुए बोला, ‘‘मैं बच्चों को अस्पताल ले कर जा रहा हूं,’’ कह वह बच्चों को अपने साथ कार तक ले आया. बच्चों को इस हाल में देख कर राशि भी घबरा गई, ‘‘यह क्या हुआ?’’ ‘‘ऐक्सीडैंट हो गया… बच्चे इस समय स्कूल से लौट रहे होंगे,’’ सुमित बोला, ‘‘तुम मनीषा व संजना को फोन कर दो. मैं कार मोड़ कर इन्हें अस्पताल ले जाता हूं. उन्हें वहीं आने के लिए कह दो,’’ और फिर सुमित बच्चों को अस्पताल ले गया. जब तक दोनों बच्चों के मातापिता अस्पताल पहुंचे तब तक मयंक के सिर पर टांके और खुशी के हाथ में प्लास्टर चढ़ चुका था. संजना व मनीषा और उन के पतियों के कृतज्ञन चेहरे बिना कहे भी बहुत कुछ कह रहे थे.

‘‘अभी तो स्थिति कुछ ऐसी बन गई है कि तुम्हारी तीनों सहेलियों के मुंह से फिलहाल बोल नहीं फूटेंगे…’’ सुमित हंस कर राशि की खिंचाई करते हुए बोला, ‘‘फिलहाल कुछ दिन तक तो बहुत मिठास घोल कर बातें करने वाली हैं तीनों… कम से कम जब तक बच्चे ठीक नहीं हो जाते.’’ ‘‘हां, यह तो है. थोड़े दिन की टैंशन खत्म, राशि हंसने लगी.’’ आजकल सबकुछ बहुत अच्छा चल रहा है. शिवानी, संजना, मनीषा, राशि चारों नीचे टहलती हुई मिल जातीं तो बढि़या बातें होतीं. चारों में हंसीमजाक होती, चुहलबाजी भी होती. राशि को अच्छा लग रहा था कि चलो अब सब अच्छा रहेगा. 2 महीने गुजर गए. एक दिन सुबह राशि ने दूध लेने के लिए दरवाजा खोला तो दरवाजे के बीचोंबीच कुत्ते की पौटी पड़ी थी, उफ, राशि मन ही मन भड़क गई कि फिर वही… अब कुछ कहेगी तो मनीषा फिर भड़क जाएगी और नहीं कहती है तो रोज पौटी साफ करनी पड़ेगी. दूसरे दिन सुबह थोड़ा जल्दी उठ कर राशि ने दरवाजा खोल दिया और ऐसे बैठ गई कि यदि कुत्ता पौटी करने आए तो उसे दिखाई दे.

थोड़ी देर में मनीषा का कुत्ता सचमुच आ गया. राशि ने जोर से डांट कर भगा दिया.  इसी बीच दूध वाला भी आ गया. दूध वाले से बोली, ‘‘भैया, जरा नीचे की घंटी बजा कर बता देना कि आप का डौगी फिर यहां दरवाजे के आगे पौटी करने लगा है.’’ दूसरे दिन राशि नीचे टहल रही थी, तो मनीषा ने उसे देख कर फिर मुंह फेर लिया. ‘उफ, अब संजना और रजनी भी यही करेंगी.’

वह मन ही मन बड़बड़ाई. फिर उस ने भी तय कर लिया कि वह भी किसी की परवाह नहीं करेगी और फिर मुंह पलट टहलने दूसरी तरफ चली गई. रात को सुमित से बोली, ‘‘तुम ठीक कहते थे… मुझे भी यहां रहना अच्छा नहीं लग रहा… यह फ्लैट बेच कर कहीं इंडीपैंडैंट घर देखो.’’   सुमित ने थोड़ी देर उस के चेहरे को निहारा, फिर बोला, ‘‘ठीक है, कल  ही बात करता हूं किसी प्रौपर्टी डीलर से.’’ सुमित के गालब्लैडर में पथरी थी. काफी समय से डाक्टर उसे औपरेशन के लिए कह रहे थे. पर आजकल करतेकरते सुमित टाल रहा था. लेकिन इस बार जब उसे दोबारा से दर्द हुआ तो डाक्टर ने उसे औपरेशन कराने की सख्त हिदायत दे डाली. आखिर सुमित औपरेशन के लिए तैयार हो गया. औपरेशन की डेट फिक्स कर उस ने औफिस से छुट्टी ले ली.

राशि के दोनों बच्चे बहुत छोटे तो नहीं थे, पर उन के खानेपीने की समस्या तो थी ही. औपरेशन के विषय में उस ने सिर्फ शिवानी को ही बताया था, पर यह खबर जंगल में आग की तरह पूरे अपार्टमैंट में फैल गई. सुमित औपरेशन के लिए अस्पताल में ऐडमिट हुआ तो सारा ‘अनामिका अपार्टमैंट’ जैसे वहीं आ गया. सुमित का औपरेशन ठीकठाक हो गया. अस्पताल में कहां से उस के लिए खाना पहुंच रहा है, कहां से सूप, दलिया, खिचड़ी पहुंच रही है, उस के बच्चे कहां खाना खा रहे हैं, बच्चे स्कूल कैसे जा रहे हैं, उन को टिफिन कौन बना कर दे रहा है, घर में काम करने वाली से काम कौन करवा रहा है ये सब सोचने की राशि को फुरसत नहीं थी. बस सारे काम हो रहे थे.

शिवानी के साथ रजनी, संजना, मनीषा बढ़चढ़ कर सब कुछ कर रही थीं. कहीं से नहीं लग रहा था कि वे कभी नाराज भी होती होंगी. सुमित घर आ गया और फिर ठीक हो कर औफिस भी जाने लगा. लेकिन राशि की सोच इस बीच रास्ता बदल चुकी थी. कहीं नहीं जाना है उसे यहां से. यहीं रहेगी. अजीब सा दिल जुड़ गया है इन सब के साथ… छोटेछोटे सुखदुख हैं सब के साथ रहने में… सब जगह कुछ न कुछ होंगे… चलता है. उस ने सोचा सुमित को आज ही न करना पड़ेगा. शिवानी का तरीका सही है, सब के साथ भी और सब से अलग भी सोच कर राशि मुसकरा पड़ी.

एक और परिणीता : भाग 1

चपरासी तो इसलिए खुश हैं कि बाबुओं की तीमारदारी से उन्हें अब कुछ राहत मिलेगी. मेकैनिक खुश हैं कि शिवेन दत्त तकनीकी जानकारी रखते हैं और उन का चयन योग्यता के आधार पर हुआ है, किसी की सिफारिश से नहीं.

दूर संचार विभाग के मैनेजर पद पर आंखें तो बहुत से लोग गड़ाए बैठे थे मगर इन में से एक भी तकनीकी जानकारी नहीं रखता था और विभाग को ऐसे इंजीनियर की तलाश थी जो आज के तेज रफ्तार संचार माध्यमों का सही ढंग से संचालन कर सके. इसीलिए चयन कार्यक्रम में पूरी तरह से पारदर्शिता बरती गई.

दूर संचार विभाग में काम करने वाली महिलाओं का अपना एक संगठन भी था जिस की अध्यक्ष स्वर्णा कपूर थी. वह बोलती कम पर लिखती अधिक थी. आएदिन किसी न किसी पुरुषकर्मी की शिकायत लिख कर वह अधिकारी के पास भेजती रहती थी और पुरुषकर्मी अपना शिकायतीपत्र पी.ए. को कुछ दे कर हथिया लेते थे. कहने का मतलब यह कि स्वर्णा कपूर किसी का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकी.

नई झाड़ू जरा जोरदार सफाई करती है. इस कहावत को ध्यान में रखते हुए सभी पुरुषकर्मी कुछ अधिक चौकन्ने हो गए थे.

शिवेन दत्त ने स्वर्णा कपूर को पहली बार तब देखा जब वह लंबी छुट्टी मांगने उन के पास आई. साड़ी का पल्लू शौल की तरह लपेटे वह किसी मूर्ति की तरह मेज के पास जा खड़ी हुई. शिवेन दत्त खामोशी की उस मूर्ति को देखते ही हतप्रभ रह गए.

स्वर्णा पलकें झुकाए दृढ़ स्वर में बोली, ‘‘अगर आप छुट्टी मंजूर नहीं करेंगे तो मैं नौकरी से इस्तीफा दे दूंगी, क्योंकि मैं कभी छुट्टी नहीं लेती हूं.’’

शिवेन दत्त जैसे जाग पड़े, ‘‘तो फिर आज क्यों? और वह भी इतनी लंबी छुट्टी ली जा रही है?’’

‘‘एम.ए. फाइनल की परीक्षा देनी है मुझे.’’

शाम को काम खत्म कर शिवेन जाने लगे तो अपने पी.ए. से पूछ बैठे, ‘‘कब से हैं मिसेज कपूर यहां?’’

‘‘5 बरस तो हो ही गए हैं. पर सर, आप इन्हें मिसेज नहीं मिस कहिए.’’

‘‘शटअप,’’ शिवेन ने डांट दिया.

बचपन में मैनिंजाइटिस होने से स्वर्णा का मुंह टेढ़ा हो गया और जवानी में वह हताश व कुंठित थी, क्योंकि दोनों छोटी बहनों की शादी हो चुकी थी.

स्वर्णा को सितार सिखाने वाली महिला, जिसे पति की जगह दूर संचार विभाग में नौकरी मिली थी, ने स्वर्णा को दूर संचार विभाग में काम करने का रास्ता दिखाया और वह टेलीफोन आपरेटर बन गई.

शिवेन का अपने विभाग पर ऐसा दबदबा कायम हुआ कि हर बात में निंदा करने वाले भी अब उन की बात मानने लगे. यही नहीं, उन्होंने अपनी मेजकुरसी हाल में ही एक ओर लगवा ली ताकि सब को उन के होने का एहसास बना रहे. उन से खार खाने वाले अधेड़ उम्र के सहकर्मी भी उन के विनम्र स्वभाव से दब गए.

3 महीने पलक झपकते ही निकल गए. स्वर्णा जब लौट कर दफ्तर आई तो किसी पुराने मनचले ने फब्ती कसी, ‘‘डिगरी पर डिगरी लिए जाओ, बरात नहीं आने वाली.’’

इस फब्ती से प्रथम श्रेणी में डिगरी हासिल करने का गर्व व खुशी मटियामेट हो गई. स्वर्णा ने एक बार फिर अपने आंसू पी लिए.

शिवेन के पी.ए. ने जा कर जब यह छिछोरा व्यंग्य उन्हें सुनाया तो वह भी तिलमिला पड़े पर वह जानते थे कि स्वर्णा उन से कहने नहीं आएगी.

अगली बार वह स्वर्णा के सामने से गुजरे तो अनायास रुक गए और एक अभिभावक की तरह उन्होंने नम्र स्वर में पूछा, ‘‘पास हो गईं?’’

‘‘जी,’’ स्वर्णा ने गरदन नीची किए ही उत्तर दिया.

‘‘मिठाई नहीं खिलाओगी?’’

‘‘जी, पापाजी से कह दूंगी.’’

अगले दिन स्वर्णा मिठाई का कटोरदान ले कर शिवेन की मेज के सामने जा खड़ी हुई तो वह कुछ झेंप से गए.

‘‘अरे, आप…मैं ने तो यों ही कह दिया था.’’

‘‘मैं ने खुद बनाए हैं,’’ स्वर्णा उत्साह से बोली.

शिवेन ने 1 लड्डू उठा लिया और कहा कि बाकी लड्डुओं को अपने सहकर्मियों में बांट दो.

इस के कुछ दिन बाद ही सरकारी आदेश आया कि रात की ड्यूटी के लिए कुछ टेलीफोन आपरेटर रखे जाएंगे जिन्हें तनख्वाह के अलावा अलग से भत्ता मिलेगा. मौजूदा कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी. स्वर्णा ने रात की शिफ्ट में काम करने का मन बनाया तो मिसेज ठाकुर भी उस के साथ हो लीं. तय हुआ कि रात को आते समय दफ्तर के ही सरकारी चौकीदार को कुछ रुपए महीना दे देंगी ताकि वह उन को घर तक छोड़ जाया करेगा. यह सबकुछ इतना गोपनीय ढंग से हुआ कि विभाग में किसी को पता ही नहीं चला.

KKK 12 : कनिका मान स्टंट के दौरान हुई इस खतरनाक जानवर की शिकार

बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी का  धमाकेदार शो खतरों के खिलाड़ी टीवी पर प्रसारित होते ही धमाल मचाना शुरू कर दिया है.

इस शो को देखने वाले फैंस को काफी दिनों से इस शो को देखने का इंतजार था. इस शो में इस बार प्रतीक सहजपाल, कनिका मान , रूबीना दिलैक के अलावा और भी कई मशहूर हस्तियों ने हिस्सा लिया है. इस शो ने पहले सप्ताह में ही अपने खतरनाक स्टंट से लोगों का पसीना छुुड़वा दिया है. इस शो का वीडियो लगातार टीवी पर वायरल हो रहा है.

 

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जिसे देखकर फैंस का रूह कांप उठा है. शो का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें कनिका मान को पिंजरे में लकड़बग्घे के साथ बंद कर दिया गया है. जैसे ही रोहित शेट्टी अपने इस स्टंट के बारे में अपने कंटेस्टेंट को बताते हैं सभी के हाथ पैर फूलने लग जाते हैं.

कनिका मान को जैसे ही पता चलता है कि इसके बाद से उन्हें ही इस शो में स्टंट को करना है तो वह जोर- जोर से रोने  लगती है. जिसके बाद से बाकी सभी कंटेस्टेंट के भी हालात खराब हो जाते हैं. अभी तक इस शो का ट्रोलर ही लॉच हुआ है . इस शो को देखने के लिए फैंस बहुत इंतजार कर रहे हैं.

अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह शो बाकी सभी शो से काफी अलग होने वाला है. खैर यह पहली बार नहीं है इससे पहले भी इस शो में कई तरह के खतरनाक स्टंट देखने को मिल चुके हैं. फैंस को भी इस शो का इंतजार रहता है.

इससे पहले शो के दिन रूबीना दिलैक को हवा में स्टंट करते देख फैंस परेशान हो गए थें, उन्हें रूबीना दिलैक का स्टंट काफी ज्यादा पसंद भी आया था. अब देखते हैं इस बार कौन बनेगा विनर.

आम्रपाली दुबे और खेसारीलाल की नई फिल्म का ट्रेलर हुआ रिलीज, फैंस कर रहे हैं पसंद

अम्रपाली दूबे और खेसारी लाल यादव इन दिनों अपनी नई फिल्म को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर का इंतजार भोजपुरी फिल्म देखने वाले दर्शकों को लंबे समय से इंतजार था.

जैसे ही इस फिल्म का ट्रेलर लॉच हुआ फैंस ने कुछ घंटे में ही 3.5 ट्रीलियन देख लिया. ट्रेलर में खेसारी लाल और अम्रपाली दूबे की कैेमेस्ट्री को खूब पसंद किया जा रहा है. बता दें कि इस फिल्म का नर्देशन खेसारी लाल ने किया .इस फिल्म में खेसारी लाल यादव का इमोशनल अवतार देखने को मिलेगा. इससे पहले भी खेसारी लाल यादव और अम्रपाली दूबे का कैमेस्ट्री लोगों का खूब पसंद आया है. जिससे लोग इन्हें एक साथ देखना पसंद करते हैं.

कई सारी फिल्मों में  इन दोनों को एक साथ देखा जा चुका है. इन दोनों की जोड़ी लोगों को खूब पसंद आता है. अगर खेसारी लाल यादव के वर्कफ्रंट की बात करें तो इन दिनों वह बीजेपी के नेता बन चुके हैं. उन्हें लोग खूब पसंद भी करते हैं.

अब फैंस को इस फिल्म का इंतजार है कि कब यह फिल् पर्दे पर आएगी. फैंस सोशल मीडिया पर फैंस उन्हें पसंद किया जा रहा है.

इस फिल्म में दोनों का एक अलग तरह का रोमांस देखने को मिलेगा. जिसे देखने के लिए बेताब हैं. इस फिल्म का निर्देशन राजेश मिश्रा जी कर रहे हैं.

इस फिल्म का नाम भी लोगों को पसंद आ रहा है. जिसका नाम है’ डोली सजा के रखना’ इसका नाम सुनते ही आपके मन में आ जाएगी कि यह कोई ऐसा फिल्म नहीं है इसे रोमांटिक फिल्म की तरह देखा जाएगा. इस फिल्म की कहानी अभी तक बनी सभी फिल्मों से अलग है.

इस फिल्म में खेसारी लाल यादव दुल्हा बनेंगे तो वहीं आम्रपाली दुबे उनकी दुल्हन बनेंगी. जिसे दर्शकों के लिए देखना काफी ज्यादा दिलचस्प होगा. हालांकि अभी तक रिलीज डेट का खुलासा नहींं हुआ है.

 

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