Monsoon Special: छोटे छोटे सुख दुख

मेरी शादी 8 महीने पहले हुई है पर मैं अपने पति को जरा भी पसंद नहीं करती, क्या करूं?

सवाल-

मै 28 साल की हूं. मेरी शादी 8 महीने पहले हुई है. मैं अपने पति को जरा भी पसंद नहीं करती. हालांकि वे उच्च पदस्थ अधिकारी हैं और स्वभाव से भी सरल हैं. मैं मुंबई स्थित एक मल्टीनैशनल कंपनी में जौब करती हूं. मुंबई में रहते हुए ही पिछले 4 सालों से अपने बौयफ्रैंड के साथ रिलेशनशिप में रही. हम लोग एक ही फ्लैट में साथ रहते थे. बौयफ्रैंड बंगाल का रहने वाला है जबकि मैं उत्तराखंड की रहने वाली हूं. हमारे रिश्ते के बारे में मेरे पेरैंट्स को भी जानकारी थी पर उन्हें यह रिश्ता पसंद नहीं था.

बौयफ्रैंड शादी करने के लिए तैयार था. उस के घर वालों को भी कोई आपत्ति नहीं थी. पर मेरे घर वाले जिद कर मुझे एक बार साथ ले गए और शादी का दबाव बनाने लगे. इस दौरान उन्होंने मुझे राजी करने के लिए जातिधर्म व सामाजिक बदनामी का भय भी दिखाया. मैं फिर भी नहीं मान रही थी. फिर एक दिन मेरी मम्मी ने आत्महत्या करने की कोशिश की. उन्हें अस्पताल में भरती कराने तक की नौबत आ गई.

घरपरिवार, मामामामी और यहां तक कि मेरी एक टीचर, जिन्हें मैं बेहद सम्मान देती थी, से मुझ पर दबाव बनवाया जाने लगा. मैं टूट गई और शादी के लिए हां कर दी. पति सुलझे हुए खयाल के लगे. मैं उन के साथ देहरादून भी गई, जहां उन की पोस्टिंग थी.

पर रातदिन बौयफ्रैंड की यादों में ही खोई रहती. नौकरी का हवाला दे कर बाद में मैं मुंबई आ गई और फिर से बौयफ्रैंड के साथ रहने लगी. बौयफ्रैंड बहुत रोया और पति से तलाक लेने की बात पर जोर देता रहा. मैं ने उसे बताया कि मैं पति से सैक्स संबंध बना चुकी हूं, बावजूद इस के वह कह रहा है कि उसे कोई ऐतराज नहीं है और वह मुझे ताउम्र प्यार करता रहेगा. उस के दबाव पर मैं ने एक दिन पति को फोन पर सब सचसच बता दिया. वे कुछ पल तो चुप रहे, फिर कहा कि तुम्हारी अपनी जिंदगी है. तुम जिस के साथ रहना चाहो रहो.

पर मैं तुम्हें तलाक नहीं दूंगा और तुम मेरे पास खुद लौट कर आओ इस का इंतजार करूंगा. मैं ने पति को बहुत समझाने की कोशिश की पर वे नहीं माने और कहते रहे कि तुम नहीं तो कोई नहीं. इधर बौयफ्रैंड से दूर जाने की बात सुनते ही वह परेशान हो जाता है और किसी कीमत पर साथ न छोड़ने की जिद पर अड़ा हुआ है. मैं बहुत उलझन में हूं. समझ नहीं आ रहा क्या करूं. कृपया सलाह दें?

जवाब-

आप अपने घर वालों की इमोशनल ब्लैकमेलिंग की शिकार हुईं, इस में कोई शक नहीं. जातिधर्म व सामाजिक बदनामी का भय दिखा कर उन्होंने आप को मजबूरन शादी करने के लिए राजी किया, यह उन की गलती थी. दूसरी तरफ, अगर आप अपने बौयफ्रैंड के साथ रिलेशनशिप में इतना आगे निकल चुकी थीं

तो आप को भी यह शादी नहीं करनी चाहिए थी. आप और आप का बौयफ्रैंड दोनों अपने पैरों पर खड़े थे और बालिग थे. घर वाले नहीं मान रहे थे तो आप कोर्ट मैरिज कर सकती थीं. देरसबेर वे इस रिश्ते को अपना ही लेते. अब जबकि आप की शादी हो गई है और जैसाकि आप ने बताया कि आप के पति सुलझे हुए इंसान हैं तो आप को अपने पति के साथ ही रहना चाहिए. वर्तमान में बौयफ्रैंड के साथ का रिश्ता अब नाजायज माना जाएगा. बेहतर होता कि बौयफ्रैंड के साथ रिश्ते की बात आप अपने पति से नहीं कहतीं और सब भूल कर नए जीवन की बेहतर तरीके से शुरुआत करतीं. अब जबकि आप ने अपने पति को सब सचसच बता ही दिया है और इस के बावजूद वे आप का साथ देने को तैयार हैं तो जाहिर है वे वाकई सुलझे हुए इंसान हैं जो विवाहरूपी संस्था को कमजोर नहीं होने देना चाहते. तलाक के बाद उन पर भी उंगलियां उठेंगी, यह वे जानते होंगे.

पति अच्छा कमाते हैं, उच्च पदस्थ अधिकारी हैं और आप को दिल से अपना रहे हैं तो बेहतर होगा आप अपने पति के पास लौट जाएं और इस अवैध रिश्ते पर विराम लगा दें.

मानसून स्पेशल : सोने की चिड़िया- भाग-3

‘‘पूछ रही हो तो सुन भी लो. तुम दिन भर गुलछर्रे उड़ाओ और हम तुम्हारी बिटिया को संभालें, यह हम से नहीं होगा.’’

‘‘आप को लगता है कि मैं गुलछर्रे उड़ा कर आ रही हूं? टीना आप से नहीं संभलती यह तो आप ने कभी कहा नहीं. आप कहें तो स्कूल के बाद के्रच में डाल दूंगी,’’ सुहासिनी सीधेसपाट स्वर में बोली थी.

‘‘तो डाल दो न. मना किस ने किया है. अब अम्मां की सेवा करने की नहीं करवाने की उम्र है,’’ बड़े भैया चाय पीते हुए बोले थे और बड़ी भाभी हंस दी थीं.

‘‘मुझे भी एक प्याली चाय दे दो, बहुत थक गई हूं,’’ सुहासिनी ने बात का रुख मोड़ना चाहा था.

‘‘बना लो न बीबी रानी. आज मैं भी बहुत थक गई हूं. वैसे तुम थीं कहां अब तक? आफिस तो 5 बजे बंद होता है और अब तो 7 बजने वाले हैं.’’

‘‘मानसी मिल गई थी, उस से बातें करने में देर हो गई.’’

‘‘मानसी कौन?’’ बड़ी भाभी पूछ बैठी थीं.

‘‘अरे, वही मन्नो, इस की छोटी ननद. वह क्या लेने आई थी तुझ से?’’ मां बिफर उठी थीं.

‘‘कुछ लेने नहीं आई थी. मैं ने ही उसे मौल में देखा था. बेचारी आरोहण के साड़ी कार्नर में सेल्सगर्ल क ा काम करती है.’’

‘‘मां, आप नहीं जानतीं, वहां तो अलग ही खिचड़ी पक रही है. हम ने फ्लैट के लिए केवल 10 लाख मांगे तो मना कर दिया. वहां जाने कितने लुटा कर आई है,’’ अब बड़े भैया भी क्रोध में आ गए थे.

‘‘ठीक है. मेरा पैसा है, जैसे और जहां चाहूंगी खर्च करूंगी,’’ सुहासिनी ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया था.

‘‘फिर यहां क्यों पड़ी हो? वहीं जा कर रहो जहां पैसा लुटा रही हो.’’

‘‘भैया…’’ सुहासिनी इतने जोर से चीखी थी कि घर में हलचल सी मच गई थी.

‘‘चीखोचिल्लाओ मत. माना कि तुम बहुत धनी हो. पर घर में रहना है तो नियमकायदे से रहना होगा. नहीं तो जहां सींग समाएं वहां जाने को स्वतंत्र हो तुम,’’ बड़े भैया अपना निर्णय सुना कर भीतर अपने कमरे में चले गए. सुहासिनी पत्थर की मूर्ति बनी वहीं बैठी रही थी.

तभी अंदर से टीना के रोने की आवाज आई.

‘‘टीना कहां है?’’ सुहासिनी के मुख से अनायास ही निकला था.

‘‘अंदर सो रही है. थोड़ी चोट लग गई है. बड़ी जिद्दी हो गई है. बारबार सीढि़यां चढ़उतर रही थी कि फिसल गई. सिर और चेहरे पर चोट आई है,’’ मां ने अपेक्षाकृत सौम्य स्वर में कहा था.

सुहासिनी लपक कर कमरे में गई और टीना को गोद में उठा लिया. टीना उस के कंधे से लग कर देर तक सिसकती रही थी. सुहासिनी चुपचाप अपने आंसू पीती रही थी.

कुछ ही देर में माथे पर किसी स्पर्श का अनुभव कर वह पलटी थी. मां बड़े प्यार से उस के माथे और कनपटी पर मालिश कर रही थीं.

‘‘भैया की बात का बुरा मान गई क्या बेटी?’’

‘‘नहीं मां, तकदीर ने जो खेल मेरे साथ खेला है उस में भलाबुरा मानने को बचा ही क्या है?’’

‘‘मां हूं तेरी, इतना भी नहीं समझूंगी क्या? इसीलिए तो तुझे यहां ले आई थी. आंखों के सामने रहेगी तो संतोष रहेगा कि सबकुछ ठीकठाक है. सब तुझे बरगलाने का प्रयत्न करेंगे पर तू विचलित मत होना, थकहार कर सब चुप हो जाएंगे.’’

‘‘पर मां, वहां से इस तरह आना कुछ ठीक नहीं हुआ. आप को पता है क्या पीयूष के पिता को पक्षाघात हुआ है…परिवार मुसीबत में है. उन्हें मेरी आवश्यकता है.’’

‘‘कुत्ते की दुम को चाहे कितने दिनों तक दबा कर रखो निक ालने पर टेढ़ी ही रहेगी. तू ने वहां जाने की ठान ली है तो जा पर थोड़े ही दिनों बाद रोतीगिड़गिड़ाती हुई मत आना,’’ मां पुन: क्रोधित हो उठी थीं.

सुहासिनी ने टीना की देखभाल के लिए छुट्टी ले ली थी पर घर में अजीब सी चुप्पी छाई हुई थी मानो सुहासिनी से कोई अपराध हो गया हो.

एक सप्ताह बाद सुहासिनी प्रतिदिन की भांति तैयार हो कर आई थी. उस की सहेली शिखा भी आ गई थी.

‘‘आज टीना भी स्कूल जा रही है क्या?’’ मां ने पूछा था.

‘‘नहीं मां, आज हम दोनों पीयूष के घर जा रहे हैं, अपने घर. मां, हो सके तो मुझे क्षमा कर देना. उन लोगों को इस समय मेरी आवश्यकता है,’’ सुहासिनी ने घर में सभी के गले मिल कर विदा ली थी और बाहर खड़ी टैक्सी में जा बैठी थी. सुहासिनी की मां जहां खड़ी थीं वहीं सिर पकड़ कर बैठ गई थीं.

‘‘देखो मां, तुम्हारी सोने की चिडि़या तो फुर्र हो गई. क्यों दुखी होती हो. पराया धन ही तो था. पराए घर चला गया,’’ व्यंग्यपूर्ण स्वर में बोल कर भैया ने ठहाका लगाया था जिस की कसैली प्रतिध्वनि देर तक दीवारों से टकरा कर गूंजती रही थी.

3 दुल्हनों का एक दूल्हा

मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल का एक छोटा सा जिला है अलीराजपुर. यहां के छोटे से गांव नानपुर में 30 अप्रैल, 2022 को हुई एक शादी पूरे देश में मीडिया की सुर्खियां बन गई. इस शादी में 38 साल के एक दूल्हे ने एक साथ 3-3 दुलहनों के साथ सात फेरे लिए तो अब्बास मस्तान निर्देशित फिल्म ‘किसकिस को प्यार करूं’ की याद आ गई.

2015 में आई इस फिल्म के हीरो देश के जानेमाने स्टैंडअप कौमेडी स्टार कपिल शर्मा थे, जिन्होंने 3 युवतियों से शादी की थी. इस फिल्म में हीरो काकटैल टावर के अलगअलग फ्लैट में अलगअलग टाइम में अपनी बीवियों के साथ रहता है. 3 बीवियों के चक्कर में पड़ कर फिल्म का हीरो चकरघिन्नी बन जाता है.

हालांकि मध्य प्रदेश के रहने वाले इस कहानी के हीरो समरथ मौर्य की कहानी इस फिल्म से उलट है. समरथ ने इन लड़कियों से अलगअलग समय में प्यार तो किया, मगर पिछले 15 सालों से वह तीनों बीवियों के साथ एक ही छत के नीचे रह रहा है.समरथ की तीनों बीवियों में आपस में इतना प्रेम है कि मिलजुल कर घर का सब काम करती हैं. और तो और इन तीनों बीवियों से उस के 6 बच्चे भी हो चुके हैं.

आदिवासी समुदाय में बहुत पहले से लड़केलड़कियों को अपनी पसंद से शादी करने की परंपरा है. भगोरिया मेले में सजसंवर कर आए लड़केलड़की इस दिन झूमते नाचतेगाते हुए आपस में मिलते हैं. होली के 7 दिन पहले भगोरिया मेले की शुरुआत आदिवासी अंचलों में हो जाती है. कामधंधे की तलाश में अपने इलाके से दूर जाने वाले आदिवासी समाज के लोग होली के पहले अपनेअपने घरों को लौट आते हैं और भगोरिया मेले को बड़े उत्साह से मनाते हैं.

लड़की फंसाने के चक्कर में खुद फंसे

भोपाल के बागसेवनिया इलाके के कान्हासैया बिलखिरिया इलाके के रहने वाले गुड्डू चौहान ने अब लड़कियों और उन की दोस्ती से तोबा कर ली है. दरअसल, गुड्डू चौहान के खिलाफ एक लड़की पुष्पा (बदला नाम) ने 24 मई, 2018 को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गुड्डू ने शादी का झांसा देते हुए एक साल तक उस के साथ बलात्कार किया और फिर शादी के अपने वादे से मुकर गया.

हुआ यों था कि 25 साला गुड्डू चौहान और 20 साला पुष्पा की दोस्ती कुछ ज्यादा ही गहरा गई थी. उन के बीच रजामंदी से जिस्मानी ताल्लुकात बने थे. भोपाल में तो इन दोनों के बीच संबंध बनते ही थे पर एक दफा गुड्डू पुष्पा को घुमाने अहमदाबाद भी ले गया था. वहां भी उन दोनों के बीच हमबिस्तरी हुई थी. भोपाल आ कर पुष्पा ने गुड्डू चौहान पर शादी के लिए दबाव डाला तो वह साफ मुकर गया. इस पर तिलमिलाई पुष्पा को अहसास हुआ कि अब तक जो हो रहा था वह रजामंदी नहीं बल्कि जबरदस्ती थी इसलिए उस ने पुलिस का सहारा लिया.

बागसेवनिया थाने में रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस वाले गुड्डू चौहान को जबरदस्ती उठा लाए और उस पर मुकदमा दर्ज कर दिया.

फंसे या फंसाया

गुड्डू चौहान और पुष्पा जैसे मामले रोशनी में आना अब रोजमर्रा की बात हो चली है, जो पहले दोस्ती, फिर प्यार और फिर जिस्मानी ताल्लुकात में बदल जाते हैं. हालांकि इस में लड़का लड़की को बिस्तर तक जबरदस्ती नहीं ले जाता, बल्कि बाकायदा पटाता है. जमाना जिस तेजी से बदल रहा है उस से ज्यादा तेजी से प्यारमुहब्बत के माने बदल रहे हैं. अब वह जमाना लदे ही एक जमाना गुजर गया जब लड़का सालों तक गली में लड़की की एक झलक पाने के लिए एक पैर पर खड़ा रहता था. लड़की प्यार की उस की पेशकश कबूल कर लेती थी तो वह तो दीवानों की तरह नाचने लगता था. प्यार और दोस्ती करने लायक लड़कियां अब राह चलते मिल जाती हैं.

अब प्यार के माने बेहद साफ हैं कि पहले दोस्ती और फिर सीधे हमबिस्तरी. इस दौरान अगर दोनों एकदूसरे को जम जाएं तो शादी भी हो जाती है, नहीं तो कुछ महीनों या सालों बाद दोनों एकदूसरे को बायबाय कर के नए पार्टनर की तलाश में निकल पड़ते हैं. यह सौदा या चलन कतई हर्ज की बात नहीं पर मुसीबत उस वक्त खड़ी हो जाती है जब लड़की यह इलजाम लगाने लगती है कि वह तो भोलीभाली और दूध की धुली है जिसे उस के दोस्त या आशिक ने जबरदस्ती मैला कर दिया है, लिहाजा उसे सजा मिलनी चाहिए.

चूंकि जबरदस्ती की बात अकसर अदालत में साबित नहीं हो पाती है इसलिए आशिक रिहा तो हो जाता है लेकिन पुलिस और कोर्टकचहरी के दौरान जो परेशानियां वह झेलता है उन्हें जिंदगीभर नहीं भूलता. इस बात पर कई दफा अदालतें भी हैरानी जता चुकी हैं कि कैसे कोई लड़का लंबे वक्त तक लड़की से जिस्मानी संबंध बनाता रहा, भले ही उस ने वादा शादी का किया हो या फिर दूसरा कोई लालच दिया हो? लड़की ने तब कोई एतराज क्यों नहीं जताया था? एतराज उसी वक्त क्यों जताया गया जब लड़का पल्ला झाड़ने लगा?

इस बात के कानूनी माने अलग हैं लेकिन ऐसे मामले गुड्डू चौहान जैसे लड़कों के लिए सबक हैं कि अकसर लड़की को फंसाना या पटाना बहुत महंगा पड़ जाता है जिस में पैसों की बरबादी के साथसाथ इज्जत की भी फजीहत होती है. इस बाबत लड़की को पुलिस थाने जा कर एक रिपोर्ट दर्ज करानी होती है. लड़कियां जब फंस जाती हैं तो लड़कों का दिल बल्लियों उछलने लगता है. इस दौरान वे माशूका का दिल जीतने के लिए उन पर तबीयत से पैसा लुटाते हैं और कभीकभी शादी करने का झूठा वादा भी कर लेते हैं, जबकि वे बेहतर जानते हैं कि शादी करना उन का मकसद नहीं, बल्कि मंशा वक्त काटना और मौजमस्ती करना है, वह भी ऐसे कि मामला जोरजबरदस्ती का न लगे.

लड़की जब हायहाय करते हुए थाने जा पहुंचती है तो ऐसे मजनुओं को समझ आता है कि असल में उन्होंने लड़की को नहीं फंसाया था बल्कि लड़की उन्हें फंसा रही थी. इस बात का अहसास भी उन्हें हो जाता है कि एक ऐसा जुर्म उन के सिर मढ़ दिया गया है जो उन्होंने किया ही नहीं है.

क्या है दिक्कत

प्यार या हमबिस्तरी करना जुर्म नहीं है और इस बात को कानून भी मानता है कि अगर 2 बालिग अपनी मरजी से हमबिस्तरी करें तो वह कोई गुनाह नहीं होता. इस के बाद भी कानून अकसर लड़कियों के साथ है तो इस बात की भी अपनी अलग अहमियत है कि कहीं सचमुच लड़कियों को प्रेमजाल में फंसा कर उन्हें लड़के धोखा देते हुए उन की जिंदगी बरबाद न करें. यह बात जाने क्यों कोई नहीं सोचता कि इज्जत लुटने, प्यार में बरबाद होने और धोखा खाने की फरियाद ले कर लड़कियां ही थाने और अदालत क्यों जाती हैं, लड़के क्यों नहीं जाते हैं?

इस बहस से परे अहम बात लड़कों की लड़की फंसाने की वह सोच है जिसे वे शान और मर्दानगी समझते हैं और यारदोस्तों के बीच इस के किस्से भी सुनाते हैं. प्यार हो या रजामंदी हो, जब जिस्मानी ताल्लुकात बनते हैं तो इस मर्दानगी में और चार चांद लग जाते हैं. आफत कब और कैसे खड़ी होती है, यह लड़की की रिपोर्ट के बाद लड़कों को समझ आता है, जिस में कई दफा उन का कैरियर भी दांव पर लग जाता है.

एहतियात बरतें

लड़के अकसर जिस्मानी ताल्लुकात बनाने के चक्कर में लड़कियों के हाथों नाचने लगते हैं और उन्हें पूरा हासिल करने के चक्कर में उन की शादी की जिद भी मान लेते है. कानून जिरह के दौरान यह तय करता है कि सुबूतों की बिना पर आरोप सही था या गलत था.

लिहाजा, कभी लड़की, चाहे वह दोस्त हो या माशूका, से भूल कर भी शादी का झूठा वादा नहीं करना चाहिए. उसे साफसाफ बता देना ही बेहतर होता है कि आप उस से संबंध तो बना सकते हैं पर शादी नहीं कर सकते. इस के बाद वह राजी हो तो कोई अड़ंगा पेश नहीं आता.

लड़की के दबाव में अकसर लड़के फेसबुक, ह्वाट्सऐप या लव लैटर्स में शादी का वादा कर लेते हैं जो बाद में उन्हें फंसा देते हैं और न केवल अदालत में बल्कि जाति, समाज और रिश्तेदारी में भी ऐसे अहम सुबूत लड़के के गले का फंदा बन जाते हैं, इसलिए इस तरह के वादे सोचसमझ कर करने चाहिए. भोपाल के गुड्डू चौहान की तरह कई लड़के गर्लफ्रैंड या माशूका को मौजमस्ती की गरज से घुमानेफिराने शहर से बाहर ले जाते हैं और जहां भी होटल में ठहरते हैं वहां आईडी प्रूफ देते हैं. यह बात अकसर लड़की के हक में जाती है. कोशिश यह होनी चाहिए कि लड़की अगर जिस्म सौंपने के एवज में शादी का वादा करे तो उस से बचना चाहिए, खासतौर से सोशल मीडिया और लव लैटर्स में झूठी हां नहीं करनी चाहिए.

यह ठीक है कि लड़की भी सबकुछ अपनी मरजी से कर रही होती है लेकिन पुष्पा की तरह वह कब पुलिस थाने जा पहुंचे इस की कोई गारंटी नहीं, इसलिए एहतियात बरतना जरूरी है. कई दफा कंडोम इस्तेमाल न करने से लड़कियां पेट से हो आती हैं. ऐसी हालत में वे पुलिस और अदालत में जाएं तो लड़कों का बचना मुश्किल हो जाता है. वजह, आजकल इस बाबत डीएनए टैस्ट होने लगा है और लड़के चाह कर भी झूठ बोल कर खुद को बचा नहीं सकते.

ऐसे भी फंसाती हैं आजकल की लड़कियों की सोच काफी बोल्ड होती जा रही है जो रजामंदी को जबरदस्ती बता कर ब्लैकमेल करने से भी नहीं चूकतीं.

कई मामलों में तो लड़कियां जानबूझ कर अपना सबकुछ लड़कों को सौंप देती हैं और इस के सुबूत भी इकट्ठा करती रहती हैं जिस से उन्हें फंसाया जा सके. ऐसा ही एक दिलचस्प और सबक सिखाने वाला मामला जून, 2018 के आखिरी हफ्ते में उजागर हुआ था. दिल्ली के एक कारोबारी पीएन विजय को पटना की एक लड़की प्रियंका ने फेसबुक पर अपने प्रेमजाल में फंसा कर 10 करोड़ रुपए ऐंठ लिए थे.

प्रियंका पटना के साकेतपुरी इलाके के रघुवरी कौंप्लैक्स के फ्लैट नंबर 404 में रहती थी. फेसबुकिया प्यार में ही इतनी भारीभरकम रकम लुटाने के बाद पीएन विजय को अपने ठगे जाने का अहसास हुआ तो उस ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में इस की रिपोर्ट लिखाई.

पुलिस प्रियंका को दिल्ली ले कर आई तो पता चला कि वह तो पहले से ही शादीशुदा है और प्यारमुहब्बत की जज्बाती बातें करते हुए विजय से पैसे ऐंठ रही थी. इस काम में उस का पति सुमन भी साथ दे रहा था. यह रकम पीएन विजय ने प्रियंका द्वारा बताए गए दर्जनभर अलगअलग बैंक खातों में जमा की थी. जब पीएन विजय ने पैसे देने बंद कर दिए तो प्रियंका उसे सोशल मीडिया की बातचीत की बिना पर पुलिस में जाने की धमकी देने लगी थी.

अब इस मामले की जांच चल रही है लेकिन विजय मालीतौर पर अच्छाखासा लुटपिट चुका है. उसे भी यह अंदाजा नहीं था कि वह जिसे फंसाना समझ रहा है वह असल में खुद फंसना है.

बेहतरी तो इसी में है कि लड़की से दोस्ती या इश्क की राह में कदम फूंकफूंक कर रखे जाएं, नहीं तो लेने के देने पड़ जाते हैं.

वारिस- भाग 1: कौन-सी मुक्ति का इंतजार कर रही थी ममता

सुरजीत के घर में अनजान औरत को देख नरेंद्र चौंक गया. पूछने पर मालूम हुआ कि वह ‘कुदेसन’ है. रहरह कर उसे अपने घर में रह रही उस औरत का खयाल आने लगा. कहीं वह भी ‘कुदेसन’ तो नहीं.

होश संभालने के साथ ही नरेंद्र उस औरत को अपने घर में देखता आ रहा था. वह कौन थी, उसे नहीं पता था.

बचपन में जब भी वह किसी से उस औरत के बारे में पूछता था तो वह उस को डांट कर चुप करा देता था.

घर के बाईं ओर जहां गायभैंस बांधे जाते थे उस के करीब ही एक छोटी सी कोठरी बनी हुई थी और वह औरत उसी कोठरी में सोती थी.

मां का व्यवहार उस औरत के प्रति अच्छा नहीं था जबकि उस का बाप  बलवंत और बूआ सिमरन उस औरत के साथ कुछ हमदर्दी से पेश आते थे.

नरेंद्र की मां बलजीत का सलूक तो उस औरत के साथ इतना खराब था कि वह सारा दिन उस से जानवरों की तरह काम लेती थी और फिर उस के सामने बचाखुचा और बासी खाना डाल देती थी. कई बार तो लोगों का जूठन भी उस के सामने डालने में बलवंत परहेज नहीं करती थी. लेकिन जैसा भी, जो भी मिलता था वह औरत चुपचाप खा लेती थी.

होश संभालने के बाद नरेंद्र ने घर में रह रही उस औरत को ले कर एक और भी अजीब चीज महसूस की थी. वह हमेशा नरेंद्र की तरफ दुलार और हसरत भरी नजरों से देखती थी. वह उसे छूना और सहलाना चाहती थी. पर घर के किसी सदस्य के होने पर उस औरत की नरेंद्र के करीब आने की हिम्मत नहीं होती थी. लेकिन जब कभी नरेंद्र उस के सामने अकेले पड़ जाता और आसपास कोई दूसरा नहीं होता तो वह उस को सीने से लगा लेती और पागलों की तरह चूमती.

ऐसा करते हुए उस की आंखों में आंसुओं के साथसाथ एक ऐसा दर्द भी होता था जिस को शब्दों में जाहिर करना मुश्किल था.

‘कुदेसन’ शब्द को नरेंद्र ने पहली बार तब सुना था जब उस की उम्र 14-15 साल की थी.

गांव के कुछ दूसरे लड़कों के साथ नरेंद्र जिस सरकारी स्कूल में पढ़ने जाता था वह गांव से कम से कम 2 किलोमीटर की दूरी पर था.

नरेंद्र के साथ गांव के 7-8 लड़कों का समूह एकसाथ स्कूल के लिए जाता था और रास्ते में अगर कोई झगड़ा न हुआ तो एकसाथ ही वे स्कूल से वापस भी आते थे.

सुबह स्कूल जाने से पहले सारे लड़के गांव की चौपाल पर जमा होते थे. एकसाथ मस्ती करते हुए स्कूल जाने में रास्ते की दूरी का पता ही नहीं चलता था और जब कभी समूह का कोई लड़का वक्त पर चौपाल नहीं पहुंचता था तो उस की खोजखबर लेने के लिए किसी लड़के को उस के घर दौड़ाया जाता था. हमारे साथ स्कूल जाने वाले लड़कों में एक सुरजीत भी था जिस के साथ नरेंद्र की खूब पटती थी. दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे. नरेंद्र कई बार सुरजीत के घर भी जा चुका था.

एक दिन जब स्कूल जाते समय  सुरजीत गांव की चौपाल पर नहीं पहुंचा तो उस की खोजखबर लेने के लिए नरेंद्र उस के घर पहुंच गया.

पहले तो घर में दाखिल हो कर नरेंद्र ने देखा कि सुरजीत को बुखार है. वह वापस मुड़ा तो उस की नजर सुरजीत के घर में एक औरत पर पड़ी जो उस के लिए अनजान थी.

वह जवान औरत गांव में रहने वाली औरतों से एकदम अलग थी, बिलकुल उसी तरह जैसे उस के अपने घर में रह रही औरत उसे नजर आती थी. चूंकि नरेंद्र को स्कूल जाने की जल्दी थी इसलिए उस ने इस बारे में सुरजीत से कोई बात नहीं की.

2 दिन बाद सुरजीत स्कूल जाने वाले लड़कों में फिर से शामिल हो गया तो छुट्टी के बाद गांव वापस लौटते हुए नरेंद्र ने उस से उस अजनबी औरत के बारे में पूछा था. इस पर सुरजीत ने कहा, ‘बापू ने ‘कुदेसन’ रख ली है.’

‘‘कुदेसन, वह क्या होती है?’’ नरेंद्र ने हैरानी से पूछा.

‘‘मैं नहीं जानता. लेकिन ‘कुदेसन’ के कारण मां और बापू में रोज झगड़ा होने लगा है. मां कुदेसन को घर में एक मिनट भी रखने को तैयार नहीं, लेकिन बापू कहता है कि भले ही लाशें बिछ जाएं, कुदेसन यहीं रहेगी,’’ सुरजीत ने बताया.

‘‘मगर तेरा बापू इस कुदेसन को लाया कहां से है?’’

‘‘क्या पता, तुम को तो मालूम ही है कि मेरा बापू ड्राइवर है. कंपनी का ट्रक ले कर दूरदूर के शहरों तक जाता है. कहीं से खरीद लाया होगा,’’ सुरजीत ने कहा.

सुरजीत की इस बात से नरेंद्र को और ज्यादा हैरानी हुई थी. उस ने जानवरों की खरीदफरोख्त की बात तो सुनी थी मगर इनसानों को भी खरीदा या बेचा जा सकता है यह बात वह पहली बार सुरजीत के मुख से सुन रहा था.

‘कुदेसन’ शब्द एक सवाल बन कर नरेंद्र के जेहन में लगातार चक्कर काटने लगा था. उस को इतना तो एहसास था कि ‘कुदेसन’ शब्द में कुछ बुरा और गलत था. किंतु वह बुरा और गलत क्या था? यह उस को नहीं पता था.

‘कुदेसन’ शब्द को ले कर घर में किसी से कोई सवाल करने की हिम्मत उस में नहीं थी. बाहर किस से पूछे यह नरेंद्र की समझ में नहीं आ रहा था.

असमंजस की उस स्थिति में अचानक ही नरेंद्र के दिमाग में अमली चाचा का नाम कौंधा था.

अमली चाचा का असली नाम गुरबख्श था. अफीम के नशे का आदी (अमली) होने के कारण ही गुरबख्श का नाम अमली चाचा पड़ गया था. गांव के बच्चे तो बच्चे जवान और बड़ेबूढे़ तक गुरबख्श को अमली चाचा कह कर बुलाते थे. दूसरे शब्दों में, गुरबख्श सारे गांव का चाचा था.

गांव की चौपाल के पास ही अमली चाचा पीपल के नीचे जूतों को गांठने की दुकानदारी सजा कर बैठता था. वह अकेला था, क्योंकि उस की शादी नहीं हुई थी. एकएक कर के उस के अपने सारे मर गए थे. आगेपीछे कोई रोने वाला नहीं था अमली चाचा के. गांव के हर शख्स से अमली चाचा का मजाक चलता था.

बड़े तो बड़े, नरेंद्र की उम्र के लड़कों के साथ भी उस का हंसीमजाक चलता था. आतेजाते लड़के अमली चाचा से छेड़खानी करते थे और वह इस का बुरा नहीं मानता था. हां, कभीकभी छेड़खानी करने वाले लड़कों को भद्दीभद्दी गालियां जरूर दे देता था.

शरारती लड़के तो अमली चाचा की गालियां सुनने के लिए ही उस को छेड़ते थे.

6 महीने बाद ही बंद होगा ‘मोसे छल किए जाए’, KBC की होगी वापसी

सोनी टीवी का पसंदीदा शो मोसे छल किया जाए जल्द ही खत्म होने वाला है. खबर है कि इस टीवी सीरियल को अमिताभ बच्चन का शो कौन बनेगा करोड़पति शो रिप्लेस करने वाला है.

यह सीरियल 7 फरवरी को शुरू किया गया था. लेकिन अब 6 महीने में ही टीवी सीरियल की पर्दे से छुट्टी की जा रही है. अगले महीने की 7 तारीख को मोसे छल किया जाए ऑफएयर हो जाएगा. चर्चा ये भी है कि विधि पांड्या औऱ विजयेंन्द्र कुमार दर्शकों को उतना खुश नहीं कर पाएं जितना करना चाहिए था.

जिस वजह से यह टीवी सीरियल को कम समय में ही बंद किया जा रहा है. ऐसे में इस सीरियल की स्टार कास्ट विधि पांड्या ने खुद इस बात का खुलासा किया है  कि हां यह सच है कि उनका शो जल्द बंद होने वाला है.

उन्होंने कहा कि हां हमारे शो का आखिरी एपिसोड 7 अगस्त को खत्म होगा. इससे पहले अदाकारा को उड़ान टीवी सीरियल में देखा गया था जो करीब 3.30 साल तक चला था. टीवी अदाकारा ने इस बात का खुलासा किया की, भले ही मैं और मेरे कोस्टार टीवी पर एक-दूसरे से नफरत करते हैं लेकिन असल जिंदगी में हम एक दूसरे से काफी ज्यादा क्लोज हैं.

अदाकारा ने कहा कि उनका और विजेन्द्र का रिश्ता अब पहले से सही हो गया है. असल जिंदगी में वह 7,8 साल से अच्छे दोस्त हैं. वह पहले से ज्यादा एक -दूसरे को अच्छी तरह से जानने लगे हैं.

इसके अलावा अदाकारा ने यह भी कहा कि हमने कई ऐसे शोज देखे हैं जो मात्र 3 महीने में ही बंद हो जाते हैं. जिससे उनके सीरियल की टीआरपी अच्छे से नहीं चल पाती है. जिस वजह से सभी सीरियल बंद हो जाते हैं.

खैर अगर बात करें इस शो को रिप्लेस करने वाले सीरियल की तो उसका इंतजार फैंस को हमेशा रहता है. कौन बनेगा करोड़पति का इंतजार हमेशा लोगों को रहता है.

 

तेजो से शादी करेगा फतेह! फिर टूटेगा जैस्मिन का सपना

टीवी सीरियल उड़ारिया में जैस्मिन एक बार फिर से फतेह के पीछे पड़ गई है. जबसे वह विधवा हुई है. उसके बाद से वह हमेशा से फतेह को पाने की प्लानिंग करती रहती है.

जैस्मिन तेजो को पागलखाने भेजने की तैयारी कर रही है, इसी बीच इस सीरियल में जबरदस्त हंगामा होने वाला है. हाल ही में रिलीज हुए प्रोमो में दिखाया गया है कि तेजो के घरवाले उसे पागल खाना लेके जाते नजर आ रहे हैं.

तेजो को बचाने के लिए फतेह उससे शादी करने वाला है. जैसे ही इस बात की जानकारी जैस्मिन को लगेगी उसके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी. वहीं परिवार के लोग भी यह हजम नहीं कर पाएंगे की तेजो और फतेह शादी के बंधन में बंधने वाले हैं.

कुछ वक्त पहले इस सीरियल में इस बात का खुलासा हुआ था कि अब तेजो को पिछला कुछ भी याद नहीं है. जो पता चलते ही जैस्मिन इस बात का फायदा उठाने के लिए तैयार हो गई थी. हालांकि जैस्मिन उस बार भी अपने बुरे इरादे में कामयाब नहीं हो पाई थी और इस बार भी वह कामयाब नहीं होगी.

यह सीरियल लोगों के पसंदीदा शो में से एक है. जिसे लोग ज्यादातर देखना पसंद करते हैं. इस सीरियल की टीआरपी बाकी सीरियल से ज्यादा हमेशा रहती है.

वैसे इस सीरियल को देखने वाले फैंस को हमेशा इस बात का इंतजार रहता है कि तेजो और फतेह एक कब होंगे. हालांकि इस बार जो सीन दिखाया जा रहा है उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार फतेह ने ठान लिया है कि तेजो को अपना बनाकर रहेगा.

अब फतेह को भी अपनी गलती का एहसास होने लगा है कि उसने पिछले दिनों जो तेजो के साथ किया वह बिल्कुल भी अच्छा नहीं किया है. जिसके बाद से वह तेजो को कोई भी परेशानी नहीं देना चाहता  है.

मैं आगे पढ़ना चाहती हूं पर मेरी सास कहती हैं बहू-बेटियां घर से बाहर नहीं जाती, मैं क्या करुं?

सवाल 

मैं 20 वर्षीया शादीशुदा युवती हूं. विवाह को 3 वर्ष हो चुके हैं. 1 साल की एक बेटी भी है. पति दिल्ली में नौकरी करते हैं. मैं यहां ससुराल में रहती हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरा मायका शहर में है इसलिए मैं गांव के रहनसहन से बिलकुल भी परिचित नहीं हूं. शादी के लिए भी मैं ने इसीलिए हां कर दी थी कि मुझे लगा था कि पति दिल्ली में नौकरी करते हैं इसलिए विवाह के बाद वे मुझे अपने साथ ले जाएंगे. पर ऐसा हुआ नहीं.

ससुराल में रहते हुए मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करती हूं कि सास को खुश रखूं पर वे बातबात पर टोकती रहती हैं. उन्हें मेरी कोई आदत, कोई काम पसंद नहीं आता. क्या करूं समझ में नहीं आ रहा? मैं आगे पढ़ना चाहती हूं. नौकरी करना चाहती हूं पर सास और देवर साफ मना कर देते हैं कि उन की बहूबेटियां घर से बाहर नहीं जातीं.

घर की चारदीवारी में मेरा दम घुटता है. मैं मायके भी नहीं जा सकती. पति को अपनी समस्या बताती हूं तो वे अपनी बेबसी बता देते हैं. अपने घर वालों के खिलाफ जाना तो दूर कभी मेरी ओर से बात भी नहीं करते. कई बार तो इतना गुस्सा आता है कि मन करता है कि घर से भाग जाऊं या तलाक दे दूं. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब 

अभी आप की बच्ची छोटी है इसलिए 1-2 साल ससुराल में रहने से उस की अच्छे से परवरिश हो जाएगी. उस के बाद आप पति को उन के साथ रहने के लिए मना सकती हैं. यदि वे आप की बात नहीं सुनते तो आप के घर वाले आप के पति और उन के परिवार वालों को समझा सकते हैं कि वे आप को पति के साथ रहने की अनुमति दे दें. इस से पति को भी सुविधा रहेगी.

साथ ही सास और परिवार वालों को भरोसा दिलाएं कि आप लोग गांव आते रहेंगे. हो सकता है कि शुरूशुरू में इस बात को मानना उन्हें उतना सहज न लगे पर कुछ समय बाद सब सामान्य हो जाएगा.

शहर में रह कर आप न सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकती हैं, बेटी को भी अच्छे स्कूल में पढ़ा सकती हैं. पर इस सब के लिए आप को थोड़ा धीरज से काम लेना होगा. ठंडे दिमाग से सोचने पर हर समस्या का हल निकल जाता है. विवेक से काम लेंगी तो घर से भागने या तलाक जैसे मूर्खतापूर्ण हल के बारे में सोचने का मौका नहीं मिलेगा.

Monsoon Special: छोटे छोटे सुख दुख- भाग 1

राशि हाथों का सामान संभालती हुई तेजी से बिल्डिंग के अंदर घुस कर लिफ्ट की तरफ बढ़ी. लिफ्ट का दरवाजा खुला था. जल्दी से अंदर प्रवेश कर चौथी मंजिल का बटन दबा दिया. अब उस ने ध्यान दिया तो उस के पड़ोसी तीसरी मंजिल पर रहने वाले रोनितजी तना हुआ चेहरा लिए खड़े थे. राशि ने हलके से मुसकराने की कोशिश की यह सोच कर कि अगर रोनितजी के चेहरे पर कुछ सहज भाव दिखे तो वह दुआसलाम कर सकती है पर रोनितजी का तना चेहरा तना ही रहा.

कैसेकैसे लोग होते हैं इस दुनिया में… मिनटों की बात घंटों, घंटों की बात दिनों, दिनों की बात महीनों और महीनों की सालों… यहां तक कि पूरी जिंदगी याद रखते हैं, राशि मन ही मन बड़बड़ाई. रोनित तीसरी मंजिल पर बाहर निकल गए. अपने फ्लैट पर जा कर राशि ने बैल बजाई.

‘‘बहुत देर कर दी… मोबाइल भी नहीं उठा रही थी… मुझे बहुत चिंता हो रही थी,’’ सुमित राशि को देखते ही बोला. ‘‘उफ, अंदर तो आने दो… कितनी गरमी है बाहर… सड़क के शोर में मोबाइल की आवाज सुनाई नहीं दी होगी,’’ कह वह अंदर आ गई. सुमित उस के लिए पानी ले आया. अक्तूबर का महीना खत्म होने को था पर गरमी अभी भी जारी थी. राशि ने पंखा चला दिया और सुस्ताने बैठ गई.

‘‘पता है, अभी लिफ्ट में रोनितजी मिल गए… लगता है इन लोगों का गुस्सा तो जिंदगीभर खत्म नहीं होगा… मनीषा भी पता नहीं आए दिन क्या कह कर भरमाती रहती है अपने पति को… बात खत्म होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है,’’ राशि कुछकुछ हताश सी बोली. ‘‘छोड़ो न उन को…’’ सुमित उसे शब्दों से दिलासा देते हुए बोला, ‘‘मैं तो पहले ही सोसाइटी के फ्लैट्स में आने के पक्ष में नहीं था… अपना इंडीपैंडैंट घर चाहता था… फ्लैट्स में न फर्श अपनी न छत… कुछ भी गड़बड़ होती है तो ऊपरनीचे वालों के साथ मुश्किल हो जाती है… पर तुम्हें ही शौक था फ्लैट लेने का कि वहां साथ हो जाता है… मिलजुल कर तीजत्योहार मन जाते हैं…’’ ‘‘गलत भी तो नहीं कहा था… और लोग तो ठीक ही हैं… पर अपने निकट पड़ोसी ही ऐसे निकलेंगे सोचा नहीं था.’’ राशि हंसमुख स्वभाव की खुशमिजाज महिला थी. छोटेछोटे 2 बच्चे स्कूल में पढ़ते थे. अनामिका अपार्टमैंट नामक इस बिल्डिंग में 1 साल पहले ही उन्होंने फ्लैट खरीदा था. 4 मंजिला इस बिल्डिंग में कुल मिला कर 16 फ्लैट्स थे.

उन की सोसाइटी की एक समिति बनी हुई थी, जिस में हर तीजत्योहार या नया साल आने पर परिवार को कुछ रुपए जमा करने पड़ते थे. मिलजुल कर त्योहार मनता, डिनर होता अच्छा लगता था. कभी कपल्स के प्रोग्राम होते तो कभी सिर्फ लेडीज के. तीज, करवाचौथ या वूमंस डे पर लेडीज मिल कर प्रोग्राम कर लेतीं. 16 परिवारों में 2-3 परिवारों को छोड़ कर बाकी सब परिवार समझदार व मिलजुल कर रहने वाले थे. अलगअलग एजग्रुप के होने के बावजूद कभी किसी के बीच कोई खास दिक्कत नहीं आई.

जब 1 साल पहले उन्होंने यह फ्लैट खरीदा था तो सामने के फ्लैट में रहने वाली शिवानी ने उसे आगाह किया था कि तुम्हारे नीचे के फ्लैट में रहने वाली मनीषा से जरा बच कर चलना, बहुत ही सैंसिटिव नेचर की है. जराजरा सी बात पर बुरा मान कर मुंह फुला कर बैठ जाती है… अब ऐसा भी कहीं होता है, सब के साथ रह कर तो थोड़ाबहुत हंसीमजाक चलता ही है… छोटीछोटी बातें तो होती रहती हैं. नजरअंदाज करना आना चाहिए… पर मनीषा का स्वभाव ही निराला है… कोई ऐसा नहीं है, जिस से उस की नाराजगी न हुई हो. राशि ने यह बात जब सुमित को बताई, तो वह ठठा कर हंस पड़ा था, ‘‘हो गई न तेरीमेरी उस की बात शुरू… टिपिकल औरतों वाली बात… इन सब चक्करों में ज्यादा मत उलझना… तुम्हारा लेखन कार्य बाधित होगा… बस हैलो सब से रखो. खिचड़ी किसी के साथ मत पकाओ…’’ धीरेधीरे राशि की सब से जानपहचान होने लगी. मनीषा से शुरू में तो उसे कोई परेशानी नहीं महसूस हुई. वैसे भी वह किसी के व्यक्तिगत जीवन से अधिक लेनादेना नहीं रखती थी.

इसलिए उस की अधिकतर लोगों से पट जाती थी. उस ने ध्यान दिया कि मनीषा, रजनी व संजना की आपस में खूब बनती थी. संजना राशि के ऊपर वाले फ्लैट में रहती थी और रजनी शिवानी के नीचे वाले फ्लैट में यानी सारा कबाड़ मेरे आसपास ही इकट्ठा है. राशि मन ही मन हंसी. मनीषा, संजना व रजनी ये तीनों महिलाएं अपने असहयोगी स्वभाव के लिए पूरे अनामिका अपार्टमैंट में बदनाम थीं और जानेअनजाने उन के पति भी. राशि को अभी कुछ ही महीने हुए थे यहां आए हुए. एक दिन सुबह दूधवाले के घंटी बजाने पर उस ने दरवाजा खोला तो ठीक दरवाजे पर कुत्ते ने पौटी की हुई थी. सुबहसुबह पौटी देख कर दिमाग भन्ना गया. दूध ले कर वह अंदर चली गई. उस दिन सफाई वाली से मिन्नत कर के अलग से पैसे दे कर उस ने पौटी साफ करवा दी. लेकिन उस के बाद यह रोज ही होने लगा. एक दिन राशि ने तैश में आ कर सामने शिवानी के फ्लैट की घंटी बजा दी.

शिवानी बाहर आ गई.  ‘‘शिवानी, यह कुत्ता किस ने पाल रखा है… रोज मेरे दरवाजे पर पौटी कर जाता है… मैं परेशान हो गई हूं.’’ जवाब में शिवानी के होंठों पर रहस्यमय मुसकराहट उभर आई. बोली, ‘‘मनीषा ने पाल रखा है… छोड़ देती है उसे सुबह बाहर… फिर यह नहीं देखती कि नीचे गया या ऊपर… आजकल ऊपर आने की आदत पड़ गई होगी… मैं भी परेशान हो गई थी इस बात से… कुछ बोलो तो बुरा मान जाती है…’’ कुछ सोच कर राशि नीचे उतरी और मनीषा के फ्लैट की घंटी दबा दी. दरवाजा खुलने तक वह अपने चेहरे पर शांत मुसकराहट ले आई थी. मनीषा ने दरवाजा खोला, तो राशि ने कहा, ‘‘हैलो मनीषा…’’ ‘‘अरे राशि तुम… आओआओ बैठो…’’ ‘‘नहीं इस समय मैं बैठने नहीं आई हूं… बस एक छोटी सी समस्या थी… दरअसल, तुम्हारा डौगी रोज ऊपर जा कर मेरे दरवाजे के सामने पौटी कर देता है… मुझे रोज सफाई करवानी पड़ती है… बहुत दिक्कत होती है… मैं सोच रही थी, अगर तुम उसे चेन से बांध कर सड़क पर ले जाओ तो मेरी परेशानी खत्म हो जाएगी और डौगी को भी अच्छी आदत पड़ जाएगी.’’ सुनते ही मनीषा का चेहरा गुस्से से तन गया, ‘‘राशि तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे तुम ने उसे खुद पौटी करते देखा हो… बिल्डिंग का गेट खुला रहता है हर वक्त. दरबान भी ध्यान नहीं रखता है… आसपास के अपार्टमैंट वाले भी अपनाअपना कुत्ता खुला छोड़ देते हैं सड़क पर… पता नहीं कौन आ कर जाता होगा.’’ मनीषा की ऊंची होती आवाज से राशि संकोच से गड़ गई कि आसपास के फ्लैट्स के दरवाजे न खुलने लग जाएं. ‘‘हो सकता है मनीषा,’’ कह कर वह बात खत्म कर लौट गई.

पर उस के बाद उस के दरवाजे पर कुत्ते की पौटी बंद हो गई. इस के बाद वह जब भी मनीषा से टकराई, मनीषा ने सीधे मुंह बात नहीं की. उस का व्यवहार देख कर राशि सोच में पड़ गई कि आखिर उस की गलती क्या है. शायद शिवानी सही कहती है. उस दिन राशि सुबह उठी तो फ्लश जाम हो गया. फ्लश से पानी नीचे नहीं जा पा रहा था और ऊपर के फ्लैट से फ्लश हो कर पानी नीचे न जा पाने के कारण नाली में भर कर उन के पौट से बाहर निकलने को हो रहा था.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें