मैं गम की मारी नहीं – भाग 2

रास्ते में उस औरत ने दीपक को यह कह कर चौंकाया था, ‘मैं रोज उसी समय बस स्टौप पर पहुंचती हूं.’

यह सुन कर दीपक ने मोटरसाइकिल धीमी कर ली थी. औरत का साथ सफर में अच्छा होता है. सफर छोटा हो या बड़ा, मजे में कट जाता है.

‘‘आप का एक महीने में किराए का 16-17 सौ रुपए तो खर्च हो जाता होगा?’’ दीपक ने पूछा था.

‘‘हां, इतना तो हो ही जाता है.’’

‘‘आप को वहां पर कौन सा ग्रेड मिलता है?’’

‘‘ट्रेंड गे्रड.’’

‘‘यानी साढ़े 6 हजार रुपए महीना?’’

‘‘प्रोविडैंट फंड, ईएसआई और

20 फीसदी बोनस. कटकटा कर 56 सौ रुपए मिल जाते हैं.’’

‘‘अच्छा है, पक्की नौकरी है. आप सारा खर्च कर डालो, पर सरकारी खाते में प्रोविडैंट फंड के रूप में हर महीने आप के दोढाई हजार रुपए जमा होते

ही हैं. ऊपर से साढ़े 8 फीसदी ब्याज… जिंदगी का यह सब से बड़ा सहारा है.’’

‘‘इसलिए ही तो मैं नौकरी कर रही हूं, ईएसआई अस्पताल से मुफ्त इलाज हो जाता है, दवाएं मिल जाती हैं. सालभर बाद साढ़े 8 हजार रुपए बोनस मिल जाता है, घर का सारा सामान और कपड़ालत्ता आ जाता है.’’

‘‘आप अगर उसी समय पर बस स्टौप पहुंचती हों तो देख लिया करो कि मैं आ रहा हूं कि नहीं. उस समय आप मेरी मोटरसाइकिल पर बैठ कर मायापुरी पहुंच सकती हैं और आप का किराया भी बच सकता है,’’ दीपक बोला था.

‘‘ठीक है,’’ उस ने दबी जबान से कहा था.

इस के बाद जब भी दीपक घर से निकला, गली के छोर पर वह नहीं मिली. बस स्टौप या तो खाली होता या फिर 9 बजे जाने वाली बस के इंतजार में 4-6 लोग खड़े दिखाई देते.

दीपक सोचता, ‘शायद उसे कोई दूसरा लिफ्ट देने वाला मिल जाता हो और वह उस के साथ निकल जाती हो?’

फिर वह सोचता, ‘ऐसा नहीं हो सकता.’

एकएक कर के काफी दिन बीत गए. दीपक के मन से पहले दिन की याद भी निकल रही थी. वह रोजाना गली के छोर वाले बस स्टौप के पास मोटरसाइकिल धीमी कर लेता था कि शायद वह खड़ी हो, पर नहीं होती थी.

उस दिन भी उस औरत ने दीपक से कहा था, ‘किसी पराए मर्द के साथ मोटरसाइकिल पर जाने के लिए बड़ा दिल होना चाहिए. मैं एक औरत हूं, और कोई औरत पराए मर्द के साथ बैठे, बड़ा हिम्मत का काम है.’’

‘‘आज यह हिम्मत कहां से आई?’’ दीपक ने पूछा था.

‘‘आज मजबूरी बन गई.’’

‘‘और आगे?’’

‘‘अब हिचक दूर भाग गई,’’ कह कर वह शरमा गई थी.

‘‘वह कैसे?’’

‘‘पता लग गया कि आप भले और नेक इनसान हैं.’’

‘‘जान कर खुशी हुई कि आप को लगा कि दुनिया एकजैसी नहीं है.’’

इन बातों को महीनाभर हो चला था. उस सुबह दीपक समय से कुछ पहले ही उठ गया था.

पत्नी ने टोका था, ‘‘आजकल नींद नहीं आती आप को. जल्दी उठ जाते हैं. लो, चाय पीओ.’’

‘‘अच्छी पत्नी के यही लक्षण हैं कि वह पति के मन को समझे,’’ चाय का घूंट पी कर दीपक ने कहा था, ‘‘बहुत बढि़या, अच्छी चाय के लिए थैंक्स.’’

पत्नी खिलखिला कर हंस दी थी.

दीपक को नाश्ते में आलू के परांठे और आम का अचार मिला था. खाने में बड़ा मजा आया था.

पत्नी ने टिफिन मोटरसाइकिल की सीट पर रखते हुए कहा था, ‘‘आलूमटर की सूखी सब्जी है.’’

‘‘क्या बात है? आज तो खाने में मजा आएगा. तुम मेरा इसी तरह खयाल रखती रहो,’’ दीपक बोला.

‘‘बातें बनाना तो कोई तुम से सीखे,’’ पत्नी ने प्यार भरा उलाहना दिया था.

दीपक जैसे ही मेन गली के छोर वाले बस स्टौप पर पहुंचा, तो सड़क पर मुड़ते ही किनारे पर वह औरत खड़ी मिल गई.

उस ने अपने हाथ के इशारे से मोटरसाइकिल रुकवाई और चुपचाप पीछे बैठ गई. कुछ खोईखोई, आंखें मानो सोईसोई, अलसाई सी.

दीपक ने भी बिना इधरउधर देखे मोटरसाइकिल को तीसरे गियर में डाल दिया. दरअसल, वह रोजाना के समय से 10 मिनट लेट निकला था. बीच में वह औरत मिल गई. अगर तेज न चलता, तो वह लेट हो जाती.

भीड़ कुछ कम और सड़क साफ दिखी, तो दीपक ने पूछा, ‘‘तकरीबन एक महीने बाद मिली हो आप. क्या आप कहीं चली गई थीं?’’

‘‘नहीं, मैं कहीं नहीं गई थी,’’ उस ने लंबी सांस ली और बताया, ‘‘पति बीमार था. 25 दिन तक तो उस की सेवा में ईएसआई अस्पताल में लगी रही.’’

‘‘क्या हो गया था उन्हें, जो इतने दिन लग गए?’’

‘‘मुंह का कैंसर था. अब वे इस दुनिया में नहीं हैं,’’ उस ने आह भरी, मानो किसी   झं  झट से छुटकारा मिला हो, ‘‘25 साल तक निठल्ला रहा, शराब

पी, जुआ खेला और…’’ कहतेकहते वह रुक गई.

‘‘और क्या?’’ दीपक ने पूछा.

कुछ चुप्पी के बाद वह धीरे से बोली, ‘‘और… औरतबाजी की… बड़ा वैसा आदमी था… रात के अंधेरे में मु  झ से   झगड़ा करता था…’’

‘‘क्या?’’

‘‘मैं कमा कर खाती हूं और उस को खिलाती थी.’’

‘‘आप ने जो किया, अच्छा किया. लाज ही औरत की जिंदगी है और आप लाज की पक्की हैं.’’ कह कर दीपक थोड़ा हंस दिया.

 

वेब सीरिज रिव्यू : ‘‘कालकूट – महिला अपराध के मूल मुद्दे से भटकी चूं चूं का मुरब्बा..’’

  • रेटिंगः पांच में से दो स्टार
  • निर्माताः अजीत अंधारे, अमृतपालसिंह बिंद्रा व आनंद तिवारी
  • लेखकः सुमित सक्सेना और अरूणाभ कुमार
  • निर्देषकः सुमित सक्सेना
  • कलाकारः विजय वर्मा,ष्वेता त्रिपाठी षर्मा,सुदेव नायर,सीमा विष्वास, यषपाल षर्मा,गोपाल दत्त,सुजाना मुखर्जी,अषोक सेठ,हीबा कमर,एनब खिजरा, नीता मोहिंद्रा,षषिभू-ुनवजयाण,अमन ब्रम्ह षर्मा,ज्योति वर्मा,रोषन वर्मा व अन्य.
  • अवधिः पांच घंटे ,35 से पचास मिनअ के आठ एपीसोड
  • ओटीटी प्लेटफार्म : जियो सिनेमा

समाज में तेजी से बदलाव हो रहे हैं.इसके बावजूद महिलाओं के प्रति अपराधों की संख्या ब-सजय़ती जा रही है.तो दूसरी तरफ युवा लड़के परिवार के दबाव में न चाहते हुए भी ऐसी लड़की से विवाह के लिए हामी भर देते हैं,जो कि किसी न किसी बीमारी की षिकार है.इन दोनों मुद्दों पर आधारित वेब सीरीज ‘‘कालकूट’’ लेकर आए हैं,मगर फिल्मकार ने दूसरे कई मुद्दे जबरन ठॅूंस कर दोनों मूल मुद्दों के साथ न्याय करने में पूरी तरह से न सिर्फ विफल रहे हैं,बल्कि कहानी का भी बंटाधार कर डाला.इसे ओटीटी प्लेटफार्म ‘जियो सिनेमा’ पर मुफ्त में देखा जा सकता है.

कहानीः

वेब सीरीज ‘‘कालकूट’’ की कहानी षुरू होती है पुलिस सब इंस्पेक्टर रवि-रु39यांकर त्रिपाठी के नौकरी से त्याग पत्र लिखने से.जिसमें वह लिखते है कि वह सरसी पुलिस स्टे-रु39यान और उनकी वर्दी का सम्मान करते हैं,लेकिन यह देखते हुए कि पुलिस स्टे-रु39यान में सभी लोग कैसे काम करते हैं, वह काम करना जारी नहीं रखना चाहते हैं.’रवि की त्यागपत्र की भा-ुनवजया पर एतराज जताकर उनका त्याग पत्र अस्वीकार कर उन्हें पारूल चतुर्वेदी पर हुए एसिड अटैक की जांच की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है.पता चलता है कि पारुल वही लड़की है,जिसका रिष्ता मृदु भा-ुनवजया सब इंस्पेक्टर रवि के लिए आया था.उधर रवि की मां (सीमा बिस्वास) अपने बेटे के लिए रि-रु39यता -सजयूं-सजयने के बारे में एकनि-ुनवजयठ है.खैर,जांच षुरू होते ही रवि के बॉस जगदीष सहाय इस केस को जल्द खत्म करने के मकसद से अपराधी को -सजयूं-सजयने से ज्यादा लड़की के चरित्र पर ध्यान देने के लिए कह देते हैं.

वास्तव में जगदीष सहाय,रविषंकर त्रिपाठी से चि-सजय़ते हैं.रवि के पिता स्व. मणिष्ांकर त्रिपाठी बहुत अच्छे लेखक व कवि थे.जगदी-रु39या,रवि को सौम्य होने के लिए धमकाने का कोई मौका नहीं छोड़ते और उसे ‘‘असली आदमी‘‘ बनने के बारे में व्याख्यान देते रहते हैं.रवि का सहायक यादव कभी रवि तो कभी सहाय की हॉं में हॉं मिलाता है. उधर रवि को जांच करने मे ंसमस्या है,क्योंकि एसिड अटैक की षिकार पारुल को बोलने में परे-रु39यानी होती है.इधर जगदीष सहाय पारूल के चरित्र पर संदेह कर रवि को कोठे पर उसकी जांच करने के लिए भेजते हैं,क्योंकि पायल के बैग से षराब की बोटल मिलती है.लेकिन जगदीष सहाय की सोच गलत साबित होती है.तब अपराधी की तलाष की मुहीम तेज होती है.तो पता चलता है कि पारूल ने अषीष व मनु सहित कुछ लड़को से प्यार व सगाई करने के बाद नाता तोड़ा था. रवि की जांच कई मोड़ों से होकर गुजरती है.अंततः मुख्य आरोपी वही निकलता है जो पहले दिन से अस्पताल में पारूल के साथ रहते हुए पुलिस को बरगलाता आया है.

इस कहानी के साथ रवि की निजी जिंदगी की कहानी भी लती रहती है.जब रवि के लिए षिवानी का रिष्ता आता है,तो उसे आ-रु39यचर्य होता है कि कोई उसके जैसे ‘‘सरल और उबाऊ‘‘ आदमी के साथ कोई लड़की क्यों षादी करना चाहेगी. इसलिए वह उसे टालता रहता है.पर जब पता चलता है कि षिवानी को मिर्गी की बीमारी है,तब वह पारूल पर एसिड फेंकने के रहस्य को सुल-हजयाने व पारूल के स्वस्थ हो जाने पर षिवानी संग विवाह करते हैं.

लेखन व निर्देषनः

कहानी व कमजोर पटकथा के साथ ही लेखक व निर्देषक की अज्ञानता इस सीरीज को बर्बाद करने में कोई कसर बाकी नहीं रखती.सीरीज में पीड़ित लड़की का चरित्र हनन करने में ही लेखक व निर्देषक ने ज्यादा दिमाग लगाया. ‘कालकूट’ में पुलिस इंस्पेक्टर जगदीष सहाय अपराधी को पकड़ने की बनिस्बत लड़की के अतीत, उसके काम, उसके फोन में पुरु-ुनवजयां के नंबरों की संख्या और उसके जीवन के बारे में खोजबीन करने पर ज्यादा जोर देते हैं.तो वहीं स्त्री-ंउचयद्वे-ुनवजया दृ-ुनवजयटकोण का सूक्ष्म चित्रण भी है.किरदारों की आपसी बातचीत के माध्यम से फिल्मकार ने समाज की पितृसत्तात्मक मानसिकता का भी चित्रण किया है.

फिल्म में लैंगिक भेदभाव,भ्रूण हत्या से लेकर नवजात लड़की की हत्या, लड़कियों के पहनावे,किन पुरू-ुनवजयां संग बातचीत करती है ,सहित कई मुद्दे उठाए हैं. तो वहीं फिल्मकार ने सीरीज को लंबा खींचते हुए रवि के निजी जीवन पर भी रोषनी डाली है.रवि की बहन व उसके जीजा से जुड़े दृष्य कहीं न कहीं मूल कहानी को बाधित करते हैं.पूरी सीरीज देखने के बाद अहसास होता है कि फिल्मकार ने सीरीज को लंबा खींचने के चक्कर में कहानी में बेवजह के ट्रेक जोड़े हैं.फिल्मकार ने बेवजह राजनीतिक दुष्मनी का ट्रेक जोड़ा फिल्म में अजूबे गरीब दृष्य हैं.क्लायमेक्स से पहले वीर त्रिपाठी के सीन में अपराधी लोहे की सरिया आर पार कर देता है.वीर उसी तरह सरिया के साथ बाइक चलाते हुए कई किलोमीटर तक अपराधी का पीछा करते हैं और अंत में खुद उस सरिया को अपने हाथ से निकालकर उसी सरिए से अपराधी की पिटाइ्र करते हैं.वाह! क्या लेखक व निर्देषक की सोच है.

अभिनयः

पुणे फिल्म संस्थान से स्नातक विजय वर्मा ने राज एंड डीके की लघु फिल्म ‘‘षोर’’ से अभिनय जगत में वापसी की थी.पर उनके अभिनय का जलवा ‘बमफाड़’, ‘यारा’ व् ‘दहाड़’ वेब सीरीज से उभर कर आया. मगर विजय वर्मा की बदनसीबी यह है कि अब तक उन्हे जितने भी किरदार निभाने के अवसर मिले,वह सभी अधपके ही रहे.वेब सीरीज ‘कालकूट’ में वीर षंकर त्रिपाठी का किरदार भी लेखक ने ठीक से नही ग-सजय़ा.तो विजय वर्मा ने भी इस किरदार की सामाजिक, पारिवारिक पृ-ुनवजयठभूमि को सम-हजयने का प्रयास नही किया.यानी कि एक कलाकार के तौर पर उनकी मेहनत में कमी साफ -हजयलकती है.रवि की मां के किरदार में सीमा विष्वास जरुर अपने अभिनय की छाप छोड़ती हैं.

हवलदार यादव के किरदार में सषक्त अभिनेता यषपाल षर्मा को देखकर कोफ्त होती है कि अब वह महज धन कमाने के लिए फालतू किस्म के किरदार निभाने लगे हैं,जिसमें उन्हें कुछ भी करने की जरुरत नही.इतना ही नहीं एसिड पीड़िता पारुल चतुर्वेदी के किरदार में ष्वेता त्रिपाठी षर्मा को देखकर अचरज हुआ.क्योंकि इसमें उनके हिस्से करने को कुछ है ही नही.सिर्फ अस्पताल में चंद दृष्यों में विस्तर पर पड़े रहना है.पारूल के पूव्र मंगेतर मनु के किरदार के साथ न्याय करने में अभिनेता सुदेव नायर विफल रहे हैं.वैसे भी लेखक ने इस किरदार को ठीक से ग-सजय़ा ही नही.जबकि असली अपराधी तो यही है.जगदीष सहाय के किरदार में गोपाल दत्त का अभिनय मोनोटोनस ही है.षिवानी के किरदार में सुजाना खान सिर्फ सुंदर नजर आयी हैं.

 

मैं गम की मारी नहीं – भाग 3

‘‘अब खत्म हुई कहानी,’’ उस ने कुछ चुप रह कर कहा, ‘‘मेरी एक बेटी है और एक बेटा. उस के पढ़नेलिखने और बड़ा होने तक मैं नौकरी करूंगी, उस के बाद मेरा बेटा संभाल लेगा,’’ उस की आंखों में एक अजीब सी चमक थी, मानो कह रही थी, ‘मैं गम की मारी नहीं, चिंता की वजह जा चुका है.’

मैटल फोर्जिंग का बस स्टौप आ गया था. रैडलाइट से बाईं ओर मुड़ कर दीपक ने उसे उतार दिया और बोला, ‘‘अच्छा तो मैं चलता हूं, कल तो आएंगी ही आप?’’

दीपक ने गौर से उस का चेहरा देखा. वह शांत थी. उस के चेहरे पर गम की कोई शिकन नहीं थी, सिर्फ माथे की गोल बिंदी गुम थी.

‘‘मैं रोजाना आऊंगी. आप जैसे नेक इनसान मु  झे मिल गए, अब मेरे अंदर

डर की भावना खत्म हो गई. दुखसुख में सहारा ढूंढूंगी आप में,’’ कह कर वह मुसकरा दी.

दीपक ने कहा, ‘‘दुख हो या सुख, आप मु  झे जब भी याद करोगी, सेवा में हाजिर रहूंगा.’’

उस की आंखों में खुशी के आंसू तैर आए, ‘‘आप इनसान नहीं…’’ कह कर उस ने हाथ से उमड़ते आंसुओं को रोकने की नाकाम कोशिश की.

‘‘आप मु  झे इतना बड़ा मत बनाइए, इनसान ही रहूं तो अच्छा है,’’ कह

कर दीपक ने अपना हाथ हिलाया और मोटरसाइकिल को गियर में डाल दिया.

उस ने शीशे में देखा कि वह पीठ फेर कर जा रही थी. कुछ कदम चलने के बाद उस ने एक बार फिर पीछे मुड़ कर जरूर देखा था. ऊंचे पेड़ों के पत्ते फड़फड़ा रहे थे, मानो खुशी मना रहे हों.

भोजपुरी एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे और दिनेश की ‘मंडप’ का पोस्टर रिलीज, शादी के जोड़े में आए नजर

भोजपुरी एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे ने अपनी अदाकारी से भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई हुई है जो कि अपनी अदाओं के लिए जानी जाती है आम्रपाली सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव है समय-समय पर पोस्ट अपडेट करती रहती है. जिसे लेकर वो अक्सर सुर्खियों में रहती है अब हाल ही में आम्रपाली ने एक पोस्टर पोस्ट किया है जिसमें वह दिनेश लाल यादव के साथ शादी के जोड़े में नजर आ रही है इस फोटो को देख हर कोई हैरान है तो आखिर क्या है पोस्टर का मामला आइए बातते है.

 

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आपको बता दें, कि आम्रपाली एक ऐसी एक्ट्रेस है जिन्होने कई स्टार के साथ काम किया है आम्रपाली दुबे ने दिनेश लाल यादव से लेकर पवन सिंह के साथ तक काम किया है. जिसमें सबसे ज्यादा फैंस को उनकी दिनेश लाल यादव के साथ पसंद किया जाता है अब हाल में दोनों की फिल्म मंडप आ रही है जिसका पहला पोस्टर रिलीज हुआ है. जिसमें दोनों शादी के जोड़े में नजर आ रहे है.

दोनों की इस फोटो को फैंस खूब पसंद कर रहे है और पोस्ट को वायरल कर रहे है. इस पोस्टर को पहली बार देखने पर कई लोग कंफ्यूज हो गए थे. लोगों को पहली नजर में ये लगा कि कहीं दोनों ने सच में शादी तो नहीं कर ली. हालांकि बाद में गौर करने पर पता चला कि ये आम्रपाली और दिनेश लाल यादव की अपकमिंग फिल्म का पोस्टर है. मंडप के फर्स्ट लुक को दखकर ऐसा लग रहा है कि इसमें आम्रपाली और निरहुआ पति-पत्नी का किरदार निभाने वाले हैं.

 

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आम्रपाली और दिनेश लाल यादव की जोड़ी को पर्दे पर काफी पसंद किया जाता है जिससे लेकर कई बार ये बातें भी सामने आई है कि दोनों एक -दूसरे को डेट कर रहे है, लेकिन दोनों ने कई बार कहा कि वह सिर्फ अच्छे दोस्त है और कुछ नहीं. बता दें, आम्रपाली को कई फिल्मों में शादी के लिबास में देखा गया है लेकिन असल जिंदगी में आम्रपाली आज भी सिंगल है.

 

BB OTT2: यूट्यूबर ध्रुव राठी ने वाइल्ड कार्ड एंट्री पर तोड़ी चुप्पी, एल्विश यादव को लेकर कही ये बात

मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी (Dhruv Rathee) के बारें में तो आपने सुना ही होगा, अब खबर वायरल हो रही है कि जल्द ही ध्रुव राठी बिग बॉस में नजर आएंगे लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है ये खुद ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया पर बताई है अपना एक वीडियो बना कर उन्होने इस खबर पर अपनी चुप्पी तोड़ी है साथ ही सलमान खान के शो बिग बॉस ओटीटी2 (Bigg Boss OTT 2)  की जमकर धज्जियां उड़ाई है और एल्विश यादव को लेकर कुछ बातें भी कही है.

 

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आपको बता दें, कि ध्रुव राठी ने अपने यूट्यूब चैनल पर जारी किए इस वीडियो में बताया कि किसी भी मीडिया संस्थान से उनसे इस बात की पुष्टि नहीं की कि वह ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में जा भी रहे हैं या नहीं. ध्रुव राठी ने कहा, “अभी तक ना तो मुझसे किसी ने पूछा बिग बॉस में इस सीजन में जाने के लिए और ना ही मैंने किसी को बोला कि मुझे बिग बॉस में जाना है. इससे हमारे भारतीय मीडिया का स्टैंडर्ड पता चलता है, वह बिना सिर- पैर के कुछ भी चीजें छाप देते हैं.” वहीं ध्रुव राठी ने यह भी कहा कि अगर बिग बॉस के लिए मुझे लाखों- करोड़ों रुपये भी ऑफर किए जाए तो भी मैं ऐसे बकवास शो में जिंदगी में कभी नहीं जाऊंगा. ध्रुव राठी ने कहा, “मेरी राय में यह बहुत चीप तरीका है पैसा और फेम कमाने का, जिससे समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है.

बताते चले कि ध्रुव राठी ने अपना निशाना एल्विश यादव को बनाया है जिसपर उन्होने वीडियो में बताया है कि “एक समय पर ये लड़का, जिसका नाम सिद्धार्थ यादव है, इसने एक यूट्यूब वीडियो बनाया था, जिसमें इसने कहा था कि हमारे देश में कितने वेले लोग हैं कि वो सलमान खान की फिल्में देखते हैं, जिनका कोई सिर- पैर नहीं होता. बात कहीं ना कहीं ठीक भी कही थी. लेकिन आज यह खुद बिग बॉस के घर में खड़ा है. लेकिन सच बात यह है कि बिग बॉस इस टाइप के लोगों के लिए सबसे फिट जगह है. ऐसे ही लोग डिसर्व करते हैं बिग बॉस में जाना और इन्हें जीतना भी. मुझे यकीन है कि यह इस शो को जीत भी सकता है क्योंकि कुछ खास क्वालिटी हैं, जो इस शो के कॉन्सेप्ट में चाहिए होती हैं और इसी के बेसिस पर यह शो चलता है.”

भाई ने ही कराई अपने भाइयों की हत्या

24 नवंबर, 2016 की रात पटना के जमाल रोड स्थित कुमार कौंप्लेक्स की चौथी मंजिल पर स्थित फ्लैट में रहने वाले शिवराज चौधरी के बेटों अभिषेक और सागर चौधरी की हत्या हो गई थी. दोनों भाइयों की लाशें पुलिस ने फ्लैट के एक ही कमरे से बरामद की थीं. दोनों भाई यह फ्लैट किराए पर ले कर रह रहे थे. हत्यारों ने दोनों भाइयों की बड़ी बेरहमी से हत्या की थी. हत्या के बाद गुप्तांग भी काट लिए थे. अभिषेक का सिर धड़ से अलग कर दिया गया था. सागर के गले में प्लास्टिक की रस्सी लपेटी थी, जिस से अंदाजा लगाया गया था कि उस की हत्या गला दबा कर की गई थी.

हत्यारों ने अभिषेक और सागर की हत्या में चाकू का भी उपयोग किया गया था. उन के शरीर पर चाकुओं के करीब 25-30 घाव थे. शरीर का कोई भी अंग बाकी नहीं था, जहां चाकू का घाव न रहा हो. इस से साफ लग रहा था कि हत्यारों को मृतकों से काफी खुन्नस थी.

पुलिस ने रोहतास, पटना और भोजपुर के ऐसे 9 लोगों से पूछताछ की, जिन का अभिषेक से संबंध था. ये सभी अभिषेक और सागर के करीबी रिश्तेदार थे. इन लोगों से पूछताछ में पता चला था कि सासाराम के बंजारी इलाके की रहने वाली किसी लड़की से अभिषेक का विवाह होने वाला था.

उस लड़की से अभिषेक की सगाई 16 सितंबर, 2016 को रोहतास में हुई थी. 23 नवंबर को शादी होने वाली थी. सगाई के बाद लड़की से अभिषेक की फोन पर बातें होने लगी थीं. लेकिन कुछ दिनों बाद ही सगाई टूट गई थी.

पुलिस ने जब इस की वजह पता की तो घर वालों ने बताया कि लड़की के सुंदर न होने की वजह से यह सगाई टूटी थी. अभिषेक के पिता शिवराज चौधरी का कहना था कि अभिषेक की सगाई होने के कुछ दिनों बाद ही उस की मर्चेंट नेवी में नौकरी लग गई थी.

मई, 2017 में उसे मुंबई जा कर नौकरी जौइन करनी थी. इसी बात को ले कर उसे विवाह में मामला उलझ गया था. अभिषेक के कैरियर को देखते हुए लड़की के घर वालों से विवाह के लिए मना कर दिया गया था, जिस की वजह से दोनों परिवारों में काफी विवाद हुआ था. अभिषेक के घर वालों ने दहेज के रूप में लड़की वालों से एक लाख रुपए एडवांस ले रखे थे.

24 नवंबर की सुबह 7 बजे अभिषेक नारायणपुर गांव के अपने घर से पटना पहुंचा था, जहां उस की मुलाकात कुछ दोस्तों से हुई थी. दोपहर 2 बजे वह अपने जीजा अमित से मिला था. वह पटना हाइकोर्ट में वकालत करते हैं. उसी दिन अभिषेक के मंझले भाई सागर को किसी काम से घर जाना था. वह घर के लिए निकला जरूर, पर पहुंचा नहीं.

अभिषेक और सागर के सब से छोटे भाई का नाम अमित चौधरी उर्फ भोलू है. पहले पुलिस को उसी पर दोनों भाइयों की हत्या का शक था. पुलिस उस से पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन घर वाले पुलिस से कह रहे थे कि वह बीमार है. घर वालों का कहना था कि 2 भाइयों की हत्या की वजह से वह गहरे सदमे में हैं.

गौरतलब है कि हत्या के बाद भोलू और उस के मामा ही सब से पहले कमरे में पहुंचे थे. पुलिस को यह भी लग रहा था कि कहीं दोनों भाइयों की हत्या प्रेमप्रसंग की वजह से तो नहीं हुई है. लेकिन घटनास्थल की स्थिति से लग रहा था कि इस हत्याकांड में किसी जानपहचान वाले का हाथ है. इस की वजह यह थी कि हत्यारा आराम से दोनों के कमरे में पहुंच गया था और दोनों की हत्या कर के चला गया था.

हत्या वाले दिन दोपहर 2 बजे अभिषेक ने पिता शिवराज चौधरी और मां रेणु देवी को फोन कर के बात की थी. अभिषेक का बहनोई अमित दोनों का खाना पहुंचाता था. दोनों भाई पटना में रह कर मोबाइल फोन एसेसरीज का कारोबार करते थे. इस के अलावा दोनों भाई आरा से बिहटा ट्रक चलवाते थे.

उन का बालू का ठेका भी था. बालू के ठेके और ट्रक को ले कर कई बार दोनों भाई विवादों में फंस चुके थे. उन का एक डंपर उत्तर प्रदेश में भी चलता था. शिवराज चौधरी का कहना था कि उन के बेटों की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. दोनों बेटों की हत्या से उन के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था.

पहले दोनों भाई गांव में किराए पर जेनरेटर चलाते थे. इस के बाद उन्होंने पोल्ट्री फार्म और डेयरी फार्म का भी काम किया. पास में कुछ पैसे आए तो उन्होंने पटना में कारोबार करने का विचार किया. पटना आ कर दोनों ने 2 ट्रक खरीदे और उन्हें किराए पर चलाने लगे.

सन 2014 में जमाल रोड स्थित कुमार कौंप्लेक्स में उन्होंने रहने के लिए राजकुमार गुप्ता का फ्लैट किराए पर लिया था. मकान मालिक ने बताया था कि दोनों भाई काफी शांत स्वभाव के थे. उन का बाहरी लोगों से कोई लेनादेना नहीं था.

हत्यारा दोनों भाइयों के मोबाइल फोन भी ले गया था. शायद हत्यारों का सोचना था कि मोबाइल फोन गायब होने से पुलिस को कोई सबूत नहीं मिलेगा, लेकिन वही पुलिस के लिए तुरुप का पत्ता साबित हुआ.

पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा ली थी. वहीं 24 साल के अमित को अपने भाइयों की हत्या करवाने का जरा भी मलाल नहीं था. उस का कहना था कि उसे अपने भाइयों से नफरत हो गई थी. बड़ा भाई अभिषेक हमेशा परेशान करता रहता था. मंझला भाई सागर हमेशा उसे डांटतामारता रहता था. उन्होंने अपना धंधा तो चमका लिया था, जबकि उसे कोई काम नहीं करने दे रहे थे.

जब अभिषेक ने उसे घर से भगा दिया तो उसे लगा कि अगर दोनों भाइयों को रास्ते से हटा दिया जाए तो पिता और भाइयों की सारी संपत्ति उस की हो जाएगी. उस के बाद वह अकेला ऐश करेगा. इसी लालच में उस ने अपने भाइयों अभिषेक और सागर की हत्या करने का विचार बना लिया था.

22 अक्तूबर को अभिषेक और सागर ने अमित को घर से भगा दिया था. पहले अभिषेक ने एक ट्रक खरीदा था, उस के कुछ दिनों बाद सागर ने एक ट्रक खरीदा था. दोनों मिल कर तीसरा ट्रक खरीदना चाहते थे. अमित भी अपना एक ट्रक खरीदना चाहता था, जिस के लिए वह भाइयों से रुपए मांग रहा था. लेकिन भाइयों ने रुपए देने से ही मना ही नहीं कर दिया, बल्कि उसे घर से भाग जाने के लिए कह दिया.

इसी से नाराज हो कर अमित ने दोनों बड़े भाइयों अभिषेक और सागर को सबक सिखाने का मन बना लिया. अभिषेक ने फ्लैट की 3 चाबियां बनवा रखी थीं, जिस में से एक चाबी अभिषेक के पास रहती थी तो दूसरी सागर के पास रहती थी. जबकि तीसरी चाबी दरवाजे के ऊपर वेंटीलेटर पर रखी रहती थी. उस के बारे में उन दोनों के अलावा अमित और उन के पिता शिवराज चौधरी को पता था.

अमित के रिश्तेदारों का कहना था कि अमित इधर गलत लोगों की संगत में पड़ गया था. ऐसे लोगों से दूर रखने के लिए अभिषेक ने उसे बालू के कारोबार में लगा दिया था, जहां वह रुपयों की हेराफेरी करने लगा था. अभिषेक ने उसे कई बार समझाया, पर वह नहीं माना. दिवाली के पहले अमित की चोरी पकड़ी गई तो सागर ने उस की पिटाई कर दी थी.

शायद पिटाई से ही नाराज हो कर अमित ने अपराधियों के साथ मिल कर भाइयों की हत्या की साजिश रच डाली थी. अमित अपना ट्रक खरीदना चाहता था, जिस के लिए वह भाइयों से रुपए मांग रहा था. रुपए देने के बजाय दोनों भाई यही सलाह दे रहे थे कि वह पहले ट्रक चलवाने वाले कारोबार को अच्छी तरह समझ ले, उस के बाद ही वह इस कारोबार को शुरू करे.

बगैर समझेबूझे कोई काम करने से रुपए डूब सकते हैं. अमित भाइयों की बात मानने के बजाय ट्रक खरीदने की जिद पर अड़ा था. अभिषेक ने रुपए देने से मना कर दिया तो अमित उस के दुश्मन संतोष से जा मिला. आरा के नारायणपुर गांव के ही रहने वाले संतोष से अभिषेक का कुछ दिनों पहले ही झगड़ा हुआ था.

अमित ने उसी के साथ मिल कर अभिषेक की हत्या की योजना बनाई. संतोष को भी अभिषेक से बदला लेना था, इसलिए वह तुरंत उस की हत्या करने को तैयार हो गया. उसे इस काम के लिए ढाई लाख रुपए देने को भी कहा था. संतोष ने उसे अपने गैंग में शामिल करने का वादा किया था.

कुमार कौंप्लेक्स से कुछ दूरी पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में पुलिस को 3 सदिग्धों की फोटो मिली. उन फोटो को ले कर पुलिस आरा पहुंची तो तीनों की पहचान हो गई. पता चला कि वे आरा के छुटभैए अपराधी थे, जिन का नाम संतोष, नीतीश और सच्चिदानंद था. इस के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया तो उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया कि अमित ने ही उन्हें भाइयों की हत्या की सुपारी दी थी.

पुलिस ने अमित को भी गिरफ्तार कर लिया था. इस के बाद उस की निशानदेही पर रितेश और रमेश को भी आरा से गिरफ्तार कर लिया गया. इन के पास से 8 मोबाइल फोन, 3 चाकू और एक हथौड़ा बरामद किया गया. संतोष अभी नहीं पकड़ा जा सका है. पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए ताबड़तोड़ छापे मार रही है. आरा में उस के खिलाफ दरजनों मामले दर्ज हैं.

पुलिस ने अमित से सख्ती से पूछताछ की तो वह घबरा गया. पुलिस ने उस से पूछा कि वह घटना वाले दिन कहां था तो उस ने कहा कि वह आरा में ही था. लेकिन मोबाइल फोन की लोकेशन से उस का झूठ पकड़ा गया. लोकेशन के अनुसार उस दिन वह पटना में था. इस के बाद पुलिस ने सख्ती की तो उस ने सच्चाई उगल दी.

अमित ने जो बताया उस के अनुसार, 23 नवंबर, 2016 की रात सागर जमाल रोड वाले फ्लैट में अकेला था. अमित, संतोष, सच्चिदानंद और नीतीश को साथ ले कर फ्लैट पर पहुंचा. अमित खुद नीचे रह गया, जबकि तीनों अपराधियों को ऊपर भेज दिया. हत्यारों ने सागर के सिर पर हथौड़ा मार कर बेहोश कर दिया.

उस के बाद अंगौछे से गला कस कर हत्या कर दी. उन्होंने अमित को बताया कि सागर को मार दिया है तो वह ऊपर पहुंचा और सागर की लाश को घसीट कर पूजाघर में छिपा दिया. सागर की हत्या कर के सभी बाहर आ गए और दरवाजा लौक कर के अभिषेक के पीछे लग गए.

24 नवंबर, 2016 को 10 बजे अभिषेक फ्लैट पर पहुंचा तो पीछा करता हुआ अमित, संतोष, रितेश और रमेश के साथ फ्लैट पर पहुंच गया. इस बार भी अमित नीचे ही खड़ा रहा और तीनों अपराधी अभिषेक के फ्लैट पर जा पहुंचे.

उन्होंने अभिषेक के सिर पर भी हथौड़ा मार कर बेहोश कर दिया और फिर गला रेत कर हत्या कर दी. उस के प्राइवेट अंगों को भी काट दिया. इस के बाद अमित कमरे में पहुंचा और अभिषेक की लाश को भी पूजाघर में ले जा कर छिपा दिया.

इस के बाद दोनों लाशों पर एसिड डाल कर जलाने की कोशिश की. उस ने कमरे में फैले खून को साफ किया और बाहर से दरवाजा बंद कर के सब के साथ फरार हो गया.

पटना के एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि संपत्ति विवाद और ईर्ष्या की वजह से अभिषेक और सागर के छोटे भाई अमित ने ही उन की हत्या करवाई थी. 3 भाइयों में अभिषेक सब से बड़ा था और सागर उस से छोटा, अमित सब से छोटा था. 23 नवंबर को अमित के मोबाइल फोन की लोकेशन पटना की पाई गई तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया था.

बीए करने के बाद अमित नौकरी खोज रहा था. जब कहीं नौकरी नहीं मिली तो वह अपने दोनों बड़े भाइयों से रुपए मांगने लगा था. कुछ समय तक अभिषेक रुपए देता रहा. उस के बाद में उस ने अभिषेक से कहा कि वह अपना अलग धंधा करना चाहता है, जिस के लिए वह उसे रुपए दे.

पिछली दिवाली से ही अमित अपने भाइयों से कारोबार के लिए रुपए मांग रहा था. जबकि वे टालमटोल कर रहे थे. अभिषेक के रवैए से नाराज हो कर अकसर अमित घर में हंगामा करता रहता था.

शिवराज चौधरी के 7 बच्चे हैं. अभिषेक, सागर और अमित के अलावा उन की 4 बेटियां हैं. चारों बेटियों का विवाह हो चुका है. घर वालों का कहना है कि अमित के रवैए और उस की अपराधियों से दोस्ती की वजह से घर के सभी लोग परेशान थे. उस पर किसी के समझाने का असर नहीं हो रहा था. वह रातोंरात करोड़पति बनने के सपने देखा करता था.

अभिषेक और सागर को उस के ही छोटे भाई अमित ने मौत के घाट उतरवा दिया था. अब वह जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया है. एक साथ तीनों बेटों के खोने के दर्द में डूबे शिवराज चौधरी आंखों में आंसू लिए कहते हैं कि उन का परिवार और जिंदगी दोनों बरबाद हो गई.

उन की पत्नी रेणु चौधरी बुत बनी बैठी रहती हैं. उन्हें किसी चीज की सुध नहीं है. उन की सूनी आंखें मानो हर पल अपने बच्चों को ढूंढती रहती हैं. शिवराज कहते हैं कि दौलत के लिए भाइयों के झगड़े के बारे में कई कहानियां सुनी थीं, पर उन के ही बेटे ने एक दर्दनाक कहानी बना डाली. अब उन की जिंदगी बेकार है.

मैं अपनी चाची के कपड़े चुरा कर मास्टरबेट करता हूं और उनके साथ सेक्स करना चाहता हूं, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 18 साल का हूं और 5 सालों से मास्टरबेट कर रहा हूं. अब मैं पड़ोस की 36 साला विधवा चाची के साथ सेक्स करना चाहता हूं. मैं उन के अंदरूनी कपड़े चुरा कर उन में मास्टरबेट भी करता हूं. मुझे सही सलाह दें?

जवाब-

आप हस्तमैथुन या हमबिस्तरी के चक्कर में पड़ने के बजाय अपनी पढ़ाई व कैरियर पर ध्यान दें. दोगुनी उम्र की चाची के चक्कर में आप तबाह हो सकते हैं. एक बार कुछ बन गए, तो जिंदगी में सोने के बहुत मौके मिलेंगे. बेहतर होगा कि सिर्फ खेलकूद व पढ़ाई वगैरह में ही ध्यान दें.

अपने से विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षित होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन पुरूषों में यह बात देखी गई है कि वह अक्सर ही अपने से बड़ी उम्रदराज की महिलाओं के प्रति एक अजीब सा आकर्षण महसूस करते हैं. एक शोध में यह भी पाया गया है कि पुरुष अपने से बड़ी उम्र की औरतों से संबंध बनाने के बाद ज्यादा मानसिक और शारीरिक संतुष्टि प्राप्त करते हैं. इसके पीछे के कारणों को खोजा गया तो सबसे पहला कारण निकला कि अधिक उम्र की महिलाओं का जिम्मेदार होना. वह पुरुष के मानसिक और शारीरिक संतुलन का ज्यादा अच्छे से मैनेज कर लेती हैं, इस कारण से पुरुष को एक संतुष्टि की अनुभूति होती है.अपने से बड़ी उम्र की महिलाएं क्यों करती हैं आकर्षित…

दूसरा कारण- यौन संबंधों के दौरान सही तरीके से तालमेल, इस कारण से पुरुष को लगता है कि उनसे उम्र में बढ़ी औरत उसे ज्यादा अच्छे से समझती है.

तीसरा कारण- 40 से 50 साल की उम्र में उत्तेजना का बढ़ना,इसलिए वह कम उम्र की महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा उम्र की महिलाएं पुरूषों को ज्यादा संतुष्ट कर सकती हैं. इसके साथ ही बड़े उम्र की महिलाओं में घमंड नहीं होता और यह बात पुरुषों को बहुत पसंद आती है.

अगर सेक्स की चिंता सताती है तो घबराएं नहीं

आपको अपने बौयफ्रेंड के साथ सेक्स करते हुए तीन महीने हो गए हैं. लेकिन आपको लग रहा है कि चीजें वैसी नहीं हैं जैसी होनी चाहिए. ऐसा नहीं है कि आपके साथी को कोई लिंग समस्या है बस कई बार वो उतना देर नहीं रुक पाता जितना कि आप चाहती हैं. लेकिन आपकी समस्या बिलकुल अलग है. आपको कभी अच्छा ही नहीं लगता. असल में आपके लिए यह हमेशा कष्टदायक है. और आपको कभी भी ओर्गास्म नहीं हुआ है – और हुआ भी हो तो कम से कम आपको तो पता नहीं चला.

यह जानकर अच्छा लगेगा… कि आप अकेले नहीं है

वास्तव में किशोर और युवा वयस्कों में सेक्स सम्बंधित समस्याएं बहुत आम हैं. लेकिन अभी तक हुए इस आयु वर्ग के अधिकांश अध्ययनों ने अवांछित गर्भधारण और एसटीडी जैसी चीजों पर ही ध्यान केंद्रित किया है.

उन्नत शिश्न से लेकर ओर्गास्म तक

यही कारण है कि कनाडाई शोधकर्ताओं के एक समूह ने इस अध्ययन में भाग लेने के लिए 16 से 21 वर्ष की आयु के 400 से अधिक छात्रों को इक्कठा किया. शुरुआत में, और फिर दो साल तक, हर छह महीने में छात्रों ने अपने यौन जीवन के बारे में औनलाइन सर्वेक्षण भरा.

शोधकर्ताओं ने उन लोगों से सिर्फ ‘शीघ्र स्खलन’ जैसी युवाओं की आम समस्याओं के बारे में ही नहीं पूछा. बल्कि, उनके सवाल उन समस्याओं के बारे में भी थे जिन्हें आप 30 से ऊपर के वयस्कों के साथ जोड़ते हैं. जैसे लिंग को उन्नत करने में परेशानी या ज्यादा देर तक टिके रहने की समस्याएं. इसी दौरान लड़कियों ने लुब्रिकेशन, ओर्गास्म और संभोग के दौरान दर्द जैसी समस्याओं के बारे में अपने विचार व्यक्त किये.

अधिकांश युवाओं के लिए सेक्स पूरी तरह से संतोषजनक नहीं है

सर्वेक्षण ने दर्शाया कि लगभग 80 प्रतिशत लोगों ने हाल ही में सेक्स के दौरान कुछ समस्या का सामना किया था. और लगभग आधे लोगों के लिए, यह मुद्दा तनावपूर्ण था.

शोधकर्ताओं ने जाना कि एक चीज है जिससे फर्क पड़ता है – यौन आत्मसम्मान. वे लड़के-लडकियां जो सेक्स के दौरान अपने प्रदर्शन और वे कैसे दिखते हैं, इस बारे में निश्चिन्त रहते हैं, यौन समस्याओं से भी उनका सामना कम ही होता है.

सबसे आम समस्याएं

पुरुषों के लिए, एक सामान्य चिंता है … अनुमान लगाएं. आप सोच रहे होंगे कि शायद सेक्स नहीं मिलना? चलिए सोचने का एक मौका और देते हैं! दरअसल, सेक्स के लिए कम इच्छा होना सबसे आम समस्या है! सेक्स के दौरान पूर्ण संतुष्टि ना हो पाना भी लड़को में एक आम समस्या है. असल में, अध्ययन में भाग लेने वाले लगभग आधे लोगों ने यौन संतुष्टि की कमी या कम कामेच्छा का अनुभव किया था. उन्नत शिश्न से जुड़ी समस्याएं – जैसे लम्बे समय तक टिके रहना – भी लगभग आधे लोगों के लिए परेशानी से कम नहीं थी.

दूसरी ओर, महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या थी ओर्गास्म तक नहीं पहुंच पाना. लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं सेक्स के दौरान चरमोत्कर्ष से दूर रह जाती थी. लगभग आधी महिलाओं ने यह भी कहा कि वे संभोग के दौरान यौन संतुष्ट नहीं हैं और दर्द का अनुभव करती हैं.

सेक्स हुआ बेहतर!

महिलाओं के लिए अच्छी खबर यह है कि उम्र के साथ सेक्स बेहतर हो जाता है! जैसा कि अध्ययन आगे बढ़ा और महिलाओं ने भी और सेक्स किया उन्हें आभास होना शुरू हो गया कि उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं और शायद इससे उनके यौन आत्म-सम्मान में भी वृद्धि हुई – तनावपूर्ण समस्याएं धीरे-धीरे  कम आम होती चली गयी. जो महिलाएं बिस्तर पर अपनी पसन्द और नापसंदियों को कहने में सहज थी, उनके साथ भी सेक्स से जुड़ी समस्याओं के कम होने की संभावना थी.

इसलिए यदि आप युवा हैं और जवान हैं लेकिन सेक्स की नौका कभी-कभी डगमगा जाती है तो आप अकेले नहीं है!

युवा लोगों की सेक्स समस्याओं से निपटने के लिए कुछ सुझाव

1. सेक्स के दौरान दर्द

फोरप्ले में बहुत समय बिताएं – चूमना, सहलाना, चाटना – जिससे सेक्स से वातावरण में उत्तेजना और योनि में नमी बढ़ जाए. शायद आपको लुब्रीकेंट की जरुरत नहीं है लेकिन लुब्रीकेंट से मजा कई गुना बढ़ सकता है!

2. ओर्गास्म नहीं हो रहा?

संभोग अद्भुत है, लेकिन वास्तव में ज्यादातर महिलाओं के लिए यह ओर्गास्म नहीं है. वो चाहती हैं कि उनकी योनि पर और ध्यान दिया जाए – चुंबन, सहलाना, थपथपाना, चाटना और समय देना! (क्यों जल्दबाज़ी करनी है, इससे बेहतर और क्या कर सकते हैं आप?)

3. लिंग समस्याएं?

चुप रहने से काम नहीं चलेगा. अपने साथी से बात करने की हिम्मत करें. साथ ही साथ लिंग से ध्यान हटाकर सेक्स की अन्य मज़ेदार बातों का मज़ा उठाएं – जैसे अपने साथी को आनंद देना. और फिर आप पाएंगे कि आपका लिंग भी और मज़े करना चाहता है!

4. शीघ्र स्खलन

ऐसा नहीं होने का बहाना करने से अच्छा है अपने साथी से बात करें. धीरे-धीरे रुक-रुक कर आगे बढ़ें. छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें और अभ्यास के साथ आप सेक्स की अवधि जरूर बड़ा पाएंगे.

5. सेक्स के कारण तनाव?

इस बारे में परेशान होना ही कई समस्याओं का कारण हो सकता है. अपनी चिंताओं के बारे में अपने साथी से बात करने की हिम्मत जुटाना असल में फायदेमंद हो सकता है. और अवांछित गर्भावस्था या एसटीडी को चिंता ना बनने दें- कंडोम और गर्भनिरोधक का उपयोग करें.

रात में अच्छी नींद के लिए खाएं ये चीजें, नुस्खे है फायदेमंद

हमारी दिनचर्या का सबसे अहम हिस्सा होता है रात की नींद. जिसके लिए ज़रुरी है कि रात में हम ऐसी चीजे खाकर सोएं जिससे आपको नींद अच्छी आए. पूरे दिन की थकान को दूर करने के लिए ज़रुरी है कि हम अपने शरीर को आराम दें और ये सिर्फ रात की नींद से ही पूरा हो सकता है तो ऐसे में आज हम आपके लिए कुछ उन डाइट्स की जानकारी देंगे जिससे आप रात को अच्छी तरह सो पाएं और अपने पूरे दिनभर की थकान को दूर कर सकें.

  1. दूध: दूध में ट्रिप्टोफैन नामक एक एमिनो एसिड होता है जो मेलेटोनिन हार्मोन के निर्माण में मदद करता है. यह हार्मोन हमें नींद लाने में मदद करता है. इसलिए, सोने से पहले एक ग्लास गर्म दूध पीने से अच्छी नींद आती है.

2. बादाम: बादाम में मैग्नीशियम पाया जाता है जो नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है. इसके अलावा, बादाम में विटामिन E भी पाया जाता है जो आपकी त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है.

3. केला: केला में पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो मांसपेशियों को शिथिल करने और तनाव को कम करने में मदद करता है. इससे नींद अच्छी आती है.

4. जयफल: जयफल में ट्रिप्टोफैन पाया जाता है जो नींद की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा, इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं.

5. चॉकलेट: डार्क चॉकलेट में सेरोटोनिन होता है, जो मनोविज्ञानिक स्थिति को सुधारता है और आपको अच्छी नींद दिलाता है. लेकिन याद रखें, यह हाई कैलोरी खाद्य पदार्थ है, इसलिए इसका सेवन संतुलित रखें.

हवस की मारी : रेशमा और विजय की कहानी

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