उन दोनों का सच : क्या पति के धोखे का बदला ले पाई गौरा – भाग 2

उस मुश्किल घड़ी में पति की यह हालत देख वह बेहद घबरा गई. वह सोच नहीं पा रही थी कि आखिरकार पति को उस के पीछे एसी की बाहरी यूनिट को साफ करने की जरूरत क्या आन पड़ी और वह भी तब, जब वह घर पर नहीं थी.

उधर पलाश गिरने के बाद पूरी तरह से मौन हो गया था. उस ने गिरने के बाद गौरा से बिलकुल कोई भी बात नहीं की. वह बस वीरान निगाहों से शून्य में ताक रहा था. एक तरफ उस की यह हालत देख उस का कलेजा मुंह में था, वहीं दूसरी ओर उस के प्रति गुस्से का भाव भी था कि आखिर वह बेवजह एसी की बाहरी यूनिट साफ करने उस ऊंचे स्टूल पर चढ़ा ही क्यों जिस से आज उसे अस्पताल में धक्के खाने की नौबत आ गई. उस नाजुक वक्त में बिब्बो ने उसे बहुत सहारा दिया.

बिब्बो भी ग्रैजुएट ही थी, लेकिन दुनिया देखीभाली, खेलीखाई महिला थी. पुरुषों से बेहद धड़ल्ले से बातें करती. सो पलाश के इलाज के सिलसिले में डाक्टरों से बातचीत करने में वही आगे रही .

अस्पताल के डाक्टर मिहिर और उन की टीम ने पलाश का ट्रीटमैंट शुरू किया. गौरा तो बस बेहद घबराई हुई कलेजा मुंह में लिए डाक्टरों और बिब्बो की बातें सुनती रहती. तभी डाक्टर मिहिर ने गौरा से कहा, “गौरा, आप के हसबैंड के ब्रेन का सीटी स्कैन और एमआरआई करवाना पड़ेगा, यह देखने के लिए कि कहीं उन्हें कोई अंदरूनी चोट तो नहीं पहुंची.”

“ठीक है डाक्टर साहब, आप जो ठीक समझें”, गौरा ने डॉक्टर से कहा.

“डाक्टर साहब, पलाश के ब्रेन का सीटी स्कैन और एमआरआई होगा? एक बात बताइए डाक्टर साहब, इन की गरदन के पीछे कुछ दाने हो रहे हैं. सीटी स्कैन और एमआरआई में कोई दिक्कत तो नहीं आएगी?” बिब्बो के मुंह से अनायास यह शब्द निकले ही थे कि अगले ही क्षण अपनी जीभ काटते हुए वह चुप हो गई.

यह वह क्या कह बैठी, अगले ही क्षण उसे एहसास हुआ और वह घबरा गई.

“नहींनहीं, उस की वजह से कोई परेशानी नहीं होगी,” डाक्टर ने जवाब दिया.

इधर बिब्बो के मुंह से पति की गरदन के पीछे हुए दानों के बारे में सुन कर गौरा के जेहन में घंटी बजी, यह बिब्बो को पलाश की गरदन के पीछे के दानों के बारे में कैसे पता? वह एक असहज बेचैनी में डूब गई. बारबार एक ही प्रश्न उस के दिलोदिमाग को मथने लगा, ‘आखिर बिब्बो ने यह बात कैसे बोली?’

पलाश के ब्रेन का सीटी स्कैन और एमआरआई हुआ और उन की रिपोर्ट से पता चला कि पलाश के ऊंचाई से गिरने की वजह से उस के ब्रेन में तीव्र हेमरेज हुआ था. दोनों जांचों की रिपोर्ट आने के बाद डाक्टर ने उस की हालत बेहद गंभीर बताई.

पति की गंभीर हालत के विषय में सुन कर गौरा के हाथों के तोते उड़ गए. डाक्टर ने उसे यह भी कहा कि पलाश की हालत बहुत नाजुक है. अगले ढाई घंटों में कुछ भी हो सकता है.”

आखिरकार डाक्टरों का इलाज रंग लाई. ढाई घंटे सकुशल बिना किसी अनहोनी के बीत गए. उस के बाद पलाश की हालत में शीघ्रता से सुधार हुआ. करीब 1 सप्ताह आईसीयू में रहने के बाद पलाश को एक अलग कमरे में शिफ्ट किया गया. अस्पताल में गुजरा वह समय गौरा के लिए बेहद उथलपुथल भरा रहा, पर वहां बीता आखिरी दिन उसे एक जबरदस्त झटका दे गया.

उस दिन पलाश को अस्पताल से छुट्टी मिलने वाली थी. उसे डिस्चार्ज करने के पहले डाक्टर मिहिर उसे उस की दवाओं और घर पर ली जाने वाली सावधानियों के बारे में बताने के लिए अपने चैंबर ले गए. आधे घंटे बाद डाक्टर से बात कर गौरा जैसे ही पलाश के कमरे में घुसी, यह देख कर उस के पांवों तले जमीन न रही कि पलाश अपनी आंखें मूंदे बिब्बो के दोनों हाथों को अपने हाथों में थामे हुए उन्हें चूम रहा था और बुदबुदा रहा था, “तुम ने मेरी जान बचा दी. अगर तुम मुझे उस दिन वक्त पर अस्पताल नहीं लातीं तो न जाने क्या होता?”

उस के अचानक कमरे में पहुंचने पर बिब्बो ने सकपका कर अपने हाथ पलाश के हाथों की गिरफ्त से छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन पलाश ने उस के हाथ नहीं छोड़े और गौरा पर एक घोर उपेक्षा की दृष्टि डाल वह बिब्बो से इधरउधर की बातें करता रहा.

एक ओर पति की गंभीर शारीरिक हालत, तो दूसरी ओर उस का निर्लज्ज आचरण गौरा के सीने में छुरियां चला रहा था. वह सोच नहीं पा रही थी कि जिंदगी के इस कठिन मुकाम पर वह उन विपरीत परिस्थितियों का सामना कैसे करे? बिस्तर पर पड़े पलाश और बिब्बो का अनवरत प्रेमालाप देख उस का खून उबल उठता, लेकिन वह हालातों के आगे बेबस थी. आर्थिक तौर पर वह पूरी तरह से पलाश पर आश्रित थी.

एक दिन तो हद ही हो गई. उस दिन पलाश अपने 5 साल के बेटे और 7 साल की बेटी के सामने ही गौरा द्वारा परोसी गई लौकी की सब्जी को परे हटा बिब्बो की लाई सब्जी की चटखारे लेते खा रहा था और बिब्बो की कुकिंग की प्रशंसा कर रहा था, “बिब्बो से सीखो सब्जी बनाना. तुम्हें तो तुम्हारी मां ने महज हींगजीरे का छौंक लगाना सिखाया है. बिब्बो के हाथ की बनी यह पनीर की सब्जी खा कर देखो तो समझ आएगा कुकिंग किसे कहते हैं.”

पलाश की इस बात से गौरा का चेहरा स्याह हो आया और उस दिन वह अपनेआप पर काबू नहीं रख पाई और बिब्बो के अपने घर जाते ही घोर आवेश में आ उस से बोल पड़ी, “बिब्बो के हाथ की बनी सब्जी तो बहुत अच्छी लग रही है आप को. उस की तरह मैं भी किसी गैर मर्द के साथ इश्क के पेंच लड़ाऊं तो भी आप को बहुत अच्छा लगेगा न?”

गौरा की यह हिमाकत देख पलाश आगबबूला हो गया और गुस्से में गौरा पर फट पड़ा, “मैं जो चाहे करूं, तुम होती कौन हो मुझे आंख दिखाने वाली? मेरा ही खाती है और मुझ पर ही गुर्राती है बदजात? इतनी ही ऊंची नाक है तो चली जा अपनी मां के घर.”

गौरा के पास पति की प्रताड़ना को सहने के अलावा और कोई चारा न था. एक बार को तो उस का मन किया कि वह सबकुछ छोड़छाड़ मां के घर चली जाए, लेकिन वृद्धा विधवा मां जो अपना और एक बेटी का गुजारा बड़ी मुश्किल से कर रही हो वह उसे किस दम पर संभालती? सो बस आंखों में पानी भर उस ने पति के इस तिरस्कार को खून के घूंट पीते हुए सहा, लेकिन उस दिन उस ने जिंदगी में पहली बार अपने आत्मनिर्भर होने की दिशा में सोचा.

उन दोनों का सच : क्या पति के धोखे का बदला ले पाई गौरा – भाग 1

“बिब्बो…बिब्बो…” पलाश ने अपने फ्लैट की साइड की बालकनी से अपनी माशूका बिब्बो के बैडरूम से लगी बालकनी में कूद कर उस के बैडरूम के दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं आया.

उसे उस के दरवाजे को खटखटाते 5 मिनट हो गए कि तभी पलाश ने देखा बिब्बो के फ्लैट के ठीक सामने ड्यूटी पर तैनात उन की सोसाइटी का गार्ड शायद उस की दस्तक की आवाज सुन कर उसी तरफ चला आ रहा था. उसी की वजह से वह बिब्बो के घर मेन दरवाजे से नहीं घुस पाता था. गार्ड को अपनी ओर आता देख कर पलाश के पसीने छूट गए. वह अपनेआप को उस से छिपाने के उद्देश्य से झट से नीचे बैठ गया.

करीब 5 मिनट बाद उस ने धीमे से उचकते हुए देखा, गार्ड जा चुका था. उस ने चैन की सांस ली. तभी उसे खयाल आया वह बिब्बो को फोन ही कर देता. वह उसे फोन लगा कर धीमे से फुसफुसाया “बिब्बो… दरवाजा खोलो भई. कितनी देर से तुम्हारी बालकनी में खड़ा हूं.”

“सौरी जानू, नहा रही थी.”

“अब दरवाजा तो खोलो.”

“अभी आई.”

तभी दरवाजा खुला और पलाश झपट कर भीतर घुस गया और चैन की सांस लेते हुए बोला, “यह कमीना गार्ड, इतनी सी देर में उस ने यहां के 10 चक्कर लगा लिए. कुछ ज्यादा ही चौकीदारी करता है यह.”

“ओ जानू, क्यों अपसेट हो रहे हो. जाने दो, उस का तो काम ही है चौकीदारी करना. अब वह तो करेगा ही न. चलो अब यह बताओ जरा, आज मैं कैसी लग रही हूं?”

“गजब ढा रही हो जानेमन. तुम तो हमेशा ही बिजली गिराती हो स्वीटू. तभी तो मैं तुम पर फिदा हूं. चलो अब दूरदूर रह कर मुझे टौर्चर मत करो,” यह कहते हुए पलाश ने हाथ बढ़ा कर बिब्बो को अपनी ओर खींच लिया और बांहों में भर उसे बेहताशा चूमने लगा.

करीब घंटे भर तक प्रेम सागर में गोते लगा कर एकदूसरे से तृप्त हो कर दोनों प्रेमियों को समय का भान हुआ तो पलाश बोला, “1 बजने आए. मैं चलता हूं. गौरा आ जाएगी.”

“गौरा कहां गई है?”

“उस की मां बीमार है. उन्हें देखने गई है.”

“अच्छा.”

“तो ठीक है जान, कल मिलते हैं.”

“ओके स्वीटहार्ट, बायबाय”, यह कहते हुए पलाश बालकनी में आया. वह बालकनी की नीची दीवार पर पैर रखते हुए नीचे कूदा, लेकिन न जाने कैसे उस का संतुलन बिगड़ गया और वह पलक झपकते ही अपनी बालकनी में उतरने की बजाय उसके बाहर अपनी सोसाइटी के कैंपस में गिर गया.

उसे यों सोसाइटी के कैंपस में गिरते देख अपनी बालकनी में खड़ी बिब्बो आननफानन में लगभग दौड़ती हुए बदहवास उस के पास पहुंची. पलाश को यों अविचल जमीन पर पड़े देख बिब्बो का कलेजा मुंह में आ गया और उस ने उस का हाथ पकड़ कर हिलाया, “पलाश…पलाश… आंखें खोलो,” लेकिन उस के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई.

तभी वह दौड़ कर भीतर अपने फ्लैट में गई और एक गिलास में पानी ले आई और उस के चेहरे पर छींटे मारने लगी. 5 मिनट में उसे होश आ गया, लेकिन वह सामान्य नहीं लग रहा था. वह फटीफटी निगाहों से बिब्बो को देख रहा था. उस की शून्य में ताकती दृष्टि से परेशान हो बिब्बो ने उसे झिंझोड़ा और उस से कहा, “पलाश उठो, क्या हुआ? कैसे गिर गए? अपना बैलेंस लूज कर दिया तुम ने,” लेकिन पलाश कुछ नहीं बोला.
इस बार तनिक घबराते हुए उस ने उस के कंधों को थाम उसे उठाने का प्रयास किया, “उठो पलाश, प्लीज उठो. तुम्हें यहां गिरा हुआ देख कर लोग बातें बनाएंगे.”

संयोग से अभी तक पलाश को वहां गिरते हुए किसी ने नहीं देखा था. उस वक्त गार्ड भी अपनी जगह पर नहीं था. उन दोनों को यों साथ देख लेने के खौफ से बिब्बो का घबराहट से बहुत बुरा हाल था. उस ने अपना पूरा दम लगा कर उसे उठाया और अपना सहारा दे उसे उस के फ्लैट में पहुंचा दिया.

पलाश अभी तक सामान्य नहीं था. उसे यों फटीफटी निगाहों से अपने चारों ओर ताकते देख वह बेहद घबरा गई. ‘उसे कोई अंदरूनी चोट तो नहीं लगी’, इस सोच ने उसे बेहद परेशान कर दिया.

वह सोचने लगी, ‘पलाश सामान्य बिहेव नहीं कर रहा. उस के ऊंचाई से गिरने की बात उसकी पत्नी गौरा को बिना बताए नहीं चलने वाला, लेकिन उसे वह कैसे बताए कि वह अपनी बालकनी से उस की बालकनी में कूदने की कोशिश में गिरा. यह तो वह बुरी फंसी.’

घबराहट से उस के होश फाख्ता होने लगे कि तभी पलाश की बालकनी में रखे झाड़न और एक ऊंचे स्टूल को देख कर उस ने सोचा, ‘मैं गौरा से कह दूंगी, पलाश अपनी बालकनी में लगे एसी के ऐक्सटर्नल यूनिट को साफ करने के लिए स्टूल पर चढ़ा था और वह उस से गिर गया. उस समय संयोग से वह भी अपनी बालकनी में थी और वह उस के सामने गिरा था.’

तनिक देर तक सोचविचार कर उस ने सोचा, ‘हां यही बहाना ठीक रहेगा,’ इस खयाल से उस की व्यग्रता तनिक कम हुई और उस ने झट से पलाश से कहा, “पलाश, मैं अभी बिब्बो को फोन करने जा रही हूं. वह तुम से पूछे कि तुम कैसे गिरे तो तुम्हें कहना है कि तुम उस स्टूल पर एसी की यूनिट साफ करने के लिए चढ़े थे और वहां से गिर गए. ठीक है न? प्लीज, यही बहाना बनाना ठीक रहेगा. और कुछ मत कहना. ओके पलाश, तुम मुझे सामान्य नहीं लग रहे. तुम्हें चैकअप के लिए अस्पताल ले ही जाना होगा, कहीं कोई अंदरूनी चोट न आई हो,” उस से यह कहते हुए बिब्बो ने गौरा को फोन कर उसे फौरन घर आने की ताकीद की.

10-15 मिनट में तो गौरा अपनी मां के घर से लौट आई. पलाश को गिरे हुए करीब घंटा बीत चला था, लेकिन वह अभी भी सामान्य नहीं हुआ था. उस की यह हालत देख कर गौरा पलाश को घर के निकट एक अस्पताल ले गई. बिब्बो उस के साथ साथ अस्पताल गई. उस के मन में अपराध भावना थी कि पलाश उस की वजह से दुर्घटनाग्रस्त हुआ. उस आड़े वक्त में बिब्बो उस के साथसाथ रही. वह अपने घर से एक बड़ी रकम अपने साथ ले गई.

पलाश की पत्नी गौरा मात्र बीए पास, सीधीसादी घरेलू किस्म की औरत थी जिस की दुनिया महज घरगृहस्थी, पति, बच्चों तक ही सीमित थी. वह पुरुषों से पूरे आत्मविश्वास से बात न कर पाती. यहां जयपुर में उस का ऐसा कोई रिश्तेदार न था जो इस मुश्किल घड़ी में अस्पताल के मसलों में उस की मदद कर पाता.

गौरा के मायके में मात्र वृद्धा विधवा मां थी जो अपनी किशोरवय की बेटी के साथ रहतीं. वह बड़ी मुश्किल से लोगों के कपड़े सील कर अपना और अपनी बेटी का पेट पालती. उस के ससुराल में भी उस के मात्र वयोवृद्ध ससुर थे, जो जयपुर के पास के एक गांव में अपनी वृद्धा बहन के साथ रहा करते. इसलिए गौरा को दोनों ही पक्षों से किसी तरह के सहारे की कोई उम्मीद न थी .

मैं गम की मारी नहीं – भाग 1

रज चढ़ आया था. आसमान में कहींकहीं बादलों के टुकड़े तैर रहे थे. साढ़े 8 बज गए थे.

दीपक काम पर जाने के लिए एकदम तैयार बैठा था. उस की पत्नी

ने टिफिन मोटरसाइकिल के ऊपर रख दिया था.

दीपक ने मोटरसाइकिल स्टार्ट की और चल पड़ा. मोटरसाइकिल के शीशे में उस ने पत्नी को देखा. वह हाथ हिला रही थी.

दिल्ली में दोपहिया गाड़ी से जाने वालों की जिंदगी हाथ में रखी कांच की प्लेट की तररह है. न जाने कहां चूक हो जाए और जिंदगीनुमा यह प्लेट टूट कर बिखर जाए.

दीपक अपने घर की गली से मुड़ गया था. आगे मेन सड़क थी और बस स्टौप था. बस स्टौप खाली था. शायद कुछ देर पहले बस सवारियों को भर कर ले गई थी.

तभी एक औरत बदहवास सी दीपक की मोटरसाइकिल के पास आई और बोली, ‘‘प्लीज रुकिए, मेरी बस निकल गई है…’’

‘‘आप को जाना कहां है?’’ दीपक ने मोटरसाइकिल रोक कर पूछा.

‘‘मु  झे मायापुरी में मैटल फोर्जिंग

बस स्टौप के पास जाना है. मैं वहां गारमैंट ऐक्सपोर्ट की एक फैक्टरी में काम करती हूं.’’

‘‘बैठो,’’ दीपक ने कहा और वह औरत मोटरसाइकिल पर बैठ गई.

‘‘आप को कैसे पता कि मैं मायापुरी जाता हूं?’’ दीपक ने उस से पूछा.

‘‘मैं ने आप को कई बार मैटल फोर्जिंग बस स्टौप के पास देखा है,’’ वह औरत बोली.

मैटल फोर्जिंग बस स्टौप के नुक्कड़ से जो सड़क अंदर जाती थी, वहीं से दीपक मुड़ता था और आटो गियर बनाने वाली एक फैक्टरी में इंजीनियर के पद पर काम करता था.

सुबह काम पर आते समय दीपक को पश्चिम विहार के पास लगा था कि आसमान में काले बादल घुमड़ने लगे हैं और ये अब बरसे कि तब बरसे.

तभी पीछे बैठी उस औरत ने कहा, ‘‘पीरागढ़ी के पास तो ऐसा कुछ नहीं था और यहां बादल घुमड़ आए हैं.’’

‘‘हां,’’ इतना कह कर दीपक ने मोटरसाइकिल की रफ्तार और तेज कर दी थी.

‘‘थोड़ी धीरे चलाओ न, डर लग रहा है,’’ वह औरत सहमते हुए बोली.

‘‘बरसात शुरू हो गई, तो हम क्या करेंगे? हमारे पास बरसात से बचने का कोई साधन नहीं है.’’

‘‘हां, यह तो है. सड़कों में भी कई जगह गड्ढे हैं. कोई सड़क साफ नहीं दिखती.’’

‘‘आप मोटरसाइकिल बहुत ज्यादा तेज चला रहे हैं. मेरा दिल धड़क रहा है. बरसात नहीं होगी, आप रफ्तार धीमी करो,’’ वह औरत दोबारा बोली.

‘‘आप ईएसआई अस्पताल वाले बस स्टौप पर उतर जाओ. वहां से बस में चली जाना,’’ दीपक बोला.

‘‘सवा 9 बज रहे हैं, मैं साढ़े 9 बजे तक नहीं पहुंच पाऊंगी.’’

‘‘फिर आप चुपचाप बैठी रहिए, मोटरसाइकिल इसी रफ्तार से चलेगी,’’ दीपक ने राजौरी गार्डन के फ्लाईओवर

से गुजरते हुए कहा, ‘‘तभी आप साढ़े

9 बजे तक अपनी कंपनी पहुंच पाएंगी.’’

‘‘आप ठीक कहते हैं,’’ उस औरत ने मासूमियत से कहा.

‘‘आप की छुट्टी कब होती है?’’

‘‘रोजाना 2 घंटे ओवरटाइम लगता है. सवा 8 बजे छुट्टी होती है.’’

‘‘यानी ओवरटाइम न लगे, तो सवा 6 बजे छुट्टी होती है?’’

‘‘हां, हफ्ते में एक या 2 दिन ही सवा 6 बजे छुट्टी हो पाती है.’’

वे मायापुरी चौक पर थे. फ्लाईओवर के नीचे सामने रैडलाइट थी. वहां भीड़ बहुत थी. हरी बत्ती हुई.

‘‘सवा 6 और सवा 8 की बात सम  झ नहीं आई कि 15 मिनट ज्यादा क्यों?’’ दीपक ने हैरान हो कर पूछा.

‘‘यही तो बात है. 15 मिनट में भी वे बहुत कमा लेते हैं. 3-4 सौ लोग काम करते हों, तो कमाई जरूर होती है.’’

वह औरत काफी तजरबे वाली लगी. एक वर्कर किसी सामान के 15 मिनट में 3 पैकेट भी पैक करे, तो सौ वर्कर कितना करेंगे? कई सैक्शन हैं और

कई काम.

‘‘बहुत ज्यादा शोषण है…’’ दीपक बोला, ‘‘ऐक्सपोर्ट की फैक्टरियों में तो ज्यादातर औरतें और लड़कियां ही काम करती हैं.’’

‘‘नहीं, मर्द भी बहुत काम करते हैं.’’

‘‘बहुत सब्र और हिम्मत है आप में. 20 किलोमीटर दूर से आना, रिकशा

और बस का महंगा किराया, भीड़ की तकलीफ और फिर रात को 10 बजे से पहले किसी हालत में घर नहीं पहुंच पाती होंगी?’’ दीपक ने कहा.

वह बेबसी से हंस पड़ी, ‘‘रोजाना 55 रुपए किराया, रात 10 बजे या इस से ऊपर घर पहुंचना. खाना बनाना, खाना, कुछ मैले कपड़े धो कर और बरतन मांज कर सोना… 12 बज जाते हैं. सुबह फिर साढ़े 5 बजे तक उठना…’’

‘‘आप के पति क्या काम करते हैं?’’ दीपक को उस से हमदर्दी हो आई थी.

वह लंबी सांस ले कर बोली, ‘‘मेरा पति शराब पीता है, लड़ाई  झगड़ा करता है, जुआ खेलता है…’’ और वह हंस दी. उस की हंसी में आग थी, ठंडक नहीं.

दीपक ने मैटल फोर्जिंग रैडलाइट से हलका सा अंदर जाती सड़क में मुड़ते हुए मोटरसाइकिल रोक दी और पीछे बैठी उस औरत से बोला, ‘‘आप यहीं उतर जाओ. मैं भी इसी सड़क की आखिरी फैक्टरी में काम करता हूं.’’

वह उतर कर सामने आ गई, ‘‘आप का बहुतबहुत शुक्रिया. मैं भी अगली सड़क के अंदर ही काम करती हूं,’’ वह औरत बोली.

दीपक ने मोटरसाइकिल को गियर में डालते हुए कहा, ‘‘ठीक है, आप समय से दफ्तर पहुंच गईं. मैं चलता हूं…’’

उस ने मुसकरा कर हाथ हिला दिया. उस की मुसकराहट और हाथ हिलाने के अंदाज में यकीन और अपनापन   झलक रहा था. मोटरसाइकिल के शीशे में उस का अक्स दिख रहा था. वह तकरीबन आधा मिनट तक वहां खड़ी दीपक को देखती रही थी.

आगे सड़क के हलके घुमाव से दीपक मुड़ गया था. उस की फैक्टरी आ गई थी.

दीपक के जेहन में दिनभर उस औरत की जिंदगी की तसवीर खिंची रही थी. उस के बच्चे भी होंगे, पढ़ते भी होंगे? उस के मन में ऐसे लोगों के प्रति बेहद नफरत हो गई थी, जो शराब पीते हैं, जुआ खेलते हैं, निठल्ले रहते हैं.

ऐसे लोग इनसान नहीं शैतान होते हैं, जो औरत किसी की मोटरसाइकिल पर मजबूरी में लिफ्ट लेती है, उस के साथ कुछ भी हो सकता है.

 

फिर ट्रोलर्स के निशाने पर आई उर्फी जावेद, ग्रीन आउटफिट में उड़ाए सबके होश

उर्फी जावेद हमेशा ही अपने स्टाइल को लेकर सुर्खियों में बनी रहती है फैशन आइकॉनिक उर्फी हमेशा ही कुछ अतरंगी स्टाइल कैरी करती है जिसे देखने वाले हमेशा देखते ही रह जाते है. लेकिन कई बार उन्हे ट्रोलर्स का निशाना भी बनना पड़ता है. अब हाल ही में उर्फी ने फिर कुछ अतरंगी लिबास कैरी किया. जिसमें वो सबके होश उड़ाती हुई नजर आ रह है लेकिन कई लोगो ने उन्हे इस आउटफिट के लिए ट्रोल भी किया है.

 

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आपको बता दें, कि उर्फी जावेद ऑलिव बार में स्पॉट हुई . जहां की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. इन फोटोज में उर्फी ने ग्रीन क्लर का गाउन पहना हुआ है.लेकिन एक्ट्रेस के गाउन में कंधे से लेकर लेग तक ट्रांसपेरेंट लाइन बनी हुई है जिससे उनका लुक एकदम हटके लग रहा है इस गाउन के ऊपर उर्फी जावेद ने क्रीम कलर का ब्लेजर पहना है. इस स्लिट गाउन के साथ उर्फी जावेद ब्लैक कलर की हाई हील्स पहनें नजर आ रही हैं. फोटो में एक्ट्रेस अपना एक लेग फ्लॉन्ट करती नजर आ रही हैं. इस आउटफिट में फैशन आइकन जबरदस्त लग रही हैं. वही, लोगों ने इस ड्रेस में फोटो को देखकर तरह-तरह के कमेंट करना शुरु कर दिए है.

 

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इन फोटो में आप देख सकते है कि उर्फी पैपराजी को अलग-अलग पोज देती हुई दिख रही है. जिनकी फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.इस आउटफिट में उर्फी जावेद ने बालो का बर्न बनाया हुआ है. जिसपर लोग जमकर कमेंट करते दिख रहे है. उर्फी जावेद की इन तस्वीरों पर एक यूजर ने लिखा, “कपड़ों ऐसे पहनों की चार लोग कहें, आदिमानवों का युग वापस आ गया है.” तो वहीं एक यूजर ने लिखा, “पहचान में ही नहीं आ रही है बिल्कुल भी. उर्फी का हेयर कलर बहुत गंदा लग रहा है.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “बस यही देखना बाकी रह गया है.” इन कमेंट्स पर एक्ट्रेस उर्फी जावेद ने ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया हैं. एक्ट्रेस अपने आउटफिट्स के जरिए भी ट्रोल्स की खूब धज्जियां उड़ाती हैं.

बताते चले कि उर्फी जावेद की इंस्टाग्राम पर काफी लंबी- चौड़ी फैन फॉलोइंग है. एक्ट्रेस को इंस्टाग्राम पर 4.2 मिलियन लोग फॉलो करते हैं. वही एक्ट्रेस जल्द ही बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली है एकता कपूर की फिल्म लव सेक्स एंड धोखा 2 में उर्फी जावेद को कास्ट किया गया है अब देखना ये होगा कि उर्फी इस फिल्म से कितनों का दिल जीतती है.

शर्लिन चोपड़ा को साड़ी में देख भड़के लोग, उर्फी से तुलना करते हुए कही ये बात

बॉलीवुड इंडस्ट्री की बोल्ड एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा एक बार फिर अपने बोल्ड अवतार में लोगो के सामने आई है. जिसे लेकर इन दिनों वह सुर्खियों में बनी हुई है. शर्लिन अक्सर ही अपने बोल्ड लुक को लेकर लोगों का निशाना बनती नजर आई है. ऐसा ही हाल में शर्लीन चोपड़ा ने साड़ी में बोल्ड लुक दिखाया है जिसे देख लोग उन्हे ट्रोल कर रहे है.

आपको बता दें, कि मुबंई की सड़को पर शर्लिन चोपड़ा सबके सामने नजर आई है जहां पैपराजी ने उन्हे घेर लिया और जमकर फोटोज खींचे. शर्लीन चोपड़ा ने ग्रीन रंग की साड़ी कैरी की हुई है.जिसे देख लोगों के होश उड़ गए है. अदाकारा की ऐसी तस्वीरें देख लोग उन्हे सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल कर रहे है. उनकी ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है जिसे देख लोगों का खून खोल उठा है कई लोग उनके स्पोर्ट में बोल रहे है तो कई उनको भद्दे कमेंट्स कर रहे है.

 

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अदाकारा शर्लिन चोपड़ा की ये तस्वीरें देखने के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर कमेंट कर उन्हें ‘वाहियात’ बताया है. जबकि कुछ लोग उन्हें ‘बेहूदा’ कहते दिखे. बोल्डनेस के मामले में अदाकारा उर्फी जावेद भी किसी से पीछे नहीं हैं. इसी वजह से वो अक्सर ट्रोल होती रहती हैं. मगर एक्ट्रेस की ये तस्वीरें देखने के बाद लोग उनकी तुलना उर्फी जावेद से करने लगे. शर्लिन चोपड़ा की इन तस्वीरों पर लोग कमेंट कर रहे हैं. एक यूजर ने तो कमेंट कर यहां तक लिख दिया कि इससे तो उर्फी जावेद ही अच्छी है. अदाकारा शर्लिन चोपड़ा के हेटर्स यहीं नहीं रुके. कई लोगों ने कमेंट कर उनके ड्रेसिंग स्टाइल और लुक को ‘भद्दा’ तक बता दिया है.

 

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दरअसल, सामने आईं तस्वीरों में अदाकारा साड़ी के पल्लू को साइड में टिकाए हुए थीं. जिसे देखकर लोग उन्हें बुरी तरह से ट्रोल करते दिखे.शर्लीन चोपड़ा की इंस्टाग्राम पर अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है उनके इंस्टाग्राम पर 8.8 मिलयन फॉलोअर्स है.

जब दोस्ती पर भारी पड़ गया शराब का नशा

उड़ीसा के रहने वाले 25 साल के कुमार मांझी की अपने से 10 साल बड़े सीतापुर निवासी पूरन से गहरी दोस्ती थी. दोनों साथ मिल कर कोई छोटामोटा काम करते और जो कमाते, उसी से गुजरबसर करते थे. इन के परिवार भी थे, लेकिन दोनों ही घर वालों के साथ नहीं रहते थे. ये दिन भर में जो कमाते थे, शाम को सीतापुर रोड पर कूड़ाखाना के पास स्थित देशी शराब के ठेके पर जा कर शराब में उड़ा देते थे.

मांझी और पूरन की दोस्ती इतनी गहरी थी कि दोनों को ही एकदूसरे के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता था. यहां तक कि उन्हें परिवार की भी कमी नहीं खलती थी. दोनों की उम्र में 10 साल का अंतर था, लेकिन वे लगते हमउम्र थे. इन की गहरी दोस्ती होने की वजह यह थी कि दोनों ही आपस में एक जैसा व्यवहार करते थे. दोनों की पसंद भी एक जैसी थी.

कई बार मांझी और पूरन के अन्य साथी इन के साथ रहना चाहते या बात करना चाहते तो दोनों ही उन से कन्नी काट लेते थे. दोनों ही पक्के शराबी थे. बिना शराब के वे एक भी दिन नहीं रह सकते थे. लेकिन शराब पीने के बाद अकसर दोनों में लड़ाई हो जाती थी. कई बार मारपीट भी हो जाती थी, इस के बावजूद दोनों देर तक एकदूसरे से अलग नहीं रह पाते थे.

रात में लड़ाई होती थी तो सवेरा होतेहोते सब ठीक हो जाता था. यह देख कर उन के अन्य दोस्त कहते भी थे कि मांझी और पूरन कब लड़ते हैं, पता ही नहीं चलता, सवेरे दोनों का चायनाश्ता एक साथ होता है. इस के बाद वे साथसाथ ही काम पर जाते थे.

पूरन और कुमार मांझी ने उस रात भी जम कर शराब पी थी. इस के बाद दोनों में लड़ाई शुरू हो गई. बात बढ़ी तो पूरन ने कहा, ‘‘मांझी, तू कभी पैसे खर्च नहीं करता. हमेशा मेरे पैसे ही खर्च कराता है.’’

‘‘हमारे बीच पैसा आ गया, इस का मतलब हमारी दोस्ती खतम.’’ मांझी ने कहा.

‘‘भई, दोस्ती रहे या खतम हो जाए, हम इस बारे में कुछ नहीं जानते. हम तो यह जानते हैं कि पैसे का सही से हिसाब होना चाहिए. पिछली बार के 100 रुपए अभी तक तुम ने नहीं दिए हैं.’’ पूरन ने कहा.

‘‘लेकिन मैं ने तो कई बार पैसे खर्च किए हैं, उन का क्या होगा?’’ मांझी ने कहा.

इस के बाद उन के बीच बात बढ़ गई. दोनों ही नशे में थे. ऐसे में आगापीछा सोचे बगैर आपस में हाथापाई करने लगे. मारपीट में उन्हें ध्यान ही नहीं रहा कि वे क्या कर रहे हैं. मांझी ज्यादा नशे में था, इसलिए पूरन ने उसे पीट दिया. मारपीट कर के पूरन बैठ गया. नशे की वजह से उसे झपकी आ गई.

नशा कम होने पर मांझी थोड़ा होश में आया तो उसे याद आया कि पूरन ने उसे मारा था. उसे गुस्सा आ गया और ईंट उठा कर उस ने पूरन के सिर पर दे मारी. तब उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि इस से पूरन मर भी सकता है.

रात में दोनों रघुवर पैलेस के पास खाली प्लौट में बैठे थे. सवेरे 4 बजे कुमार मांझी इंजीनियरिंग कालेज चौराहे पर स्थित अनिल की दुकान पर पहुंचा. दोनों अकसर यहीं चायनाश्ता करते थे. कुमार के कपड़ों में खून लगा देख कर अनिल ने पूछा, ‘‘तेरे कपड़ों में खून कहां से लगा, पूरन कहां गया?’’

मांझी ने कहा, ‘‘कल रात पूरन से सौ रुपए को ले कर लड़ाई हो गई थी. वह मुझे बेईमान कह रहा था. जब मैं ने उसे सच बताया तो वह झगड़ा करने लगा. झगड़ा ज्यादा बढ़ा तो मैं ने ईंट से मार कर उस की हत्या कर दी. लेकिन अनिल भाई, अब मुझे अपनी गलती का अहसास हो रहा है. उस की मौत का मुझे पछतावा हो रहा है.’’

उस से कुछ कहने के बजाय अनिल ने उसे दुकान पर बैठा दिया और पुलिस को सूचना देने के लिए फोन करने लगा. लेकिन दूसरी ओर से फोन उठा ही नहीं. करीब 7 बजे अनिल ने रघुवर पैलेस के मैनेजर वीरेंद्र को घटना की सूचना दी तो वीरेंद्र ने जानकीपुरम थाने में तैनात सबइंसपेक्टर को फोन कर के इस बात की जानकारी दे दी.

इस के बाद 9 बजे पुलिस मौके पर पहुंची और लाश को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस में पुलिस को कुछ समय लग गया. तब तक कुमार मांझी को पूरी तरह होश आ गया था. होश में आने के बाद उसे पता चला कि मामला पुलिस तक पहुंच गया है तो पुलिस की मार की डर से वह कांपने लगा.

दोस्त की हत्या के साथसाथ पुलिस की मार का डर उसे सताने लगा. वहां मौजूद लोगों ने जब उसे बताया कि हत्या के बाद फांसी हो सकती है तो वह काफी डर गया. हत्या के आरोप में मिलने वाली सजा के डर से वह जंगल की ओर भागा.

अनिल ने मांझी को भागते देखा तो उसे पकड़ने के लिए शोर मचाने लगा. आसपास के लोगों ने उस का पीछा किया. लेकिन तब तक वह गुडंबा के जंगल में घुस गया, जहां एक पेड़ के पीछे छिप गया. पुलिस अन्य लोगों को साथ मिल कर मांझी की तलाश करती रही. करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद मांझी को पकड़ लिया गया और थाने लाया गया.

थाना जानकीपुरम के थानाप्रभारी इंसपेक्टर सतीश सिन्हा ने बताया कि अपने दोस्त की हत्या के आरोप में पकड़े गए कुमार मांझी ने स्वीकार कर लिया है कि सौ रुपए के विवाद में उस ने दोस्त की हत्या को अंजाम दिया था.

शुक्रवार की रात कुमार मांझी से मृतक पूरन ने सौ रुपए उधार मांगे थे. पैसे न होने पर कुमार ने देने से मना कर दिया, जिसे ले कर दोनों के बीच कहासुनी हो गई. बात हाथापाई तक पहुंच गई. मारपीट के दौरान कुमार ने ईंट से पूरन के सिर पर कई वार कर दिए, जिस से उस की मौके पर ही मौत हो गई.

मांझी और पूरन की दोस्ती पर शराब का नशा भारी पड़ा. अगर दोनों शराब न पीते होते तो सौ रुपए जैसी मामूली रकम के लिए मांझी अपने सच्चे दोस्त की हत्या कतई नहीं कर सकता था. पूछताछ के बाद पुलिस ने कुमार मांझी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

मेरे प्रेमी के साथ शारीरिक संबंध थे लेकिन अब मुझे लग रहा है कि कहीं यौन रोग का शिकार न हो जाऊं, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 24 साल है. मैं एक कंसलटैंसी में काम करती हूं. मेरे अपने प्रेमी के साथ शारीरिक संबंध थे. हालांकि हम सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते रहे. लेकिन फिर भी मुझे लग रहा है कि कहीं किसी यौन रोग का शिकार न हो जाऊं, बताएं, मैं क्या करूं?

जवाब

आप किसी अच्छे गाइनेकोलौजिस्ट के पास जाएं और अपनी जांच करवाएं. आप का गर्भावस्था परीक्षण भी किया जा सकता है. साथ ही, भविष्य के लिए आप को सलाह है कि खुद को किसी ऐसी गतिविधि में फिर से शामिल न करें.

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बेहतर सेक्स के लिए यौन रोगों से बचिए

प्रतिभा की शादी को कई साल हो गए थे. समय पर 2 बच्चे भी हो गए पर कुछ समय के बाद प्रतिभा को लगा कि उस के अंग से कभी कभी तरल पदार्थ निकलता है. शुरुआत में प्रतिभा ने इसे मामूली समझ कर नजरअंदाज कर दिया. मगर कुछ दिनों बाद उसे महसूस हुआ कि इस तरल पदार्थ में बदबू भी है जिस से अंग में खुजली होती है. प्रतिभा ने यह बात स्त्रीरोग विशेषज्ञा को बताई. उस ने जांच कर के प्रतिभा से कहा कि उस को यौनरोग हो गया है, लेकिन इस में घबराने वाली कोई बात नहीं है. प्रतिभा ने तो समय पर डाक्टर को अपनी समस्या बता दी पर बहुत सारी औरतें प्रतिभा जैसी समझदार नहीं होतीं. वे इस तरह के रोगों को छिपाती हैं. पर यौनरोगों को कभी छिपाना नहीं चाहिए. दीपा जब अपने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाती थी, तो उसे दर्द होता था. इस परेशानी के बारे में उस ने डाक्टर को बताया. डाक्टर ने दीपा के अंग की जांच कर के बताया कि उसे यौनरोग हो गया है. डाक्टर ने उस का इलाज किया. इस के बाद दीपा की बीमारी दूर हो गई.

प्रदीप को पेशाब के रास्ते में जलन होती थी. वह नीमहकीमों के चक्कर में पड़ गया पर उसे कोई लाभ नहीं हुआ. तब उस ने अच्छे डाक्टर से इस संबंध में बात की तो डाक्टर ने कुछ दवाएं लिखीं, जिन से प्रदीप को लाभ हुआ. डाक्टर ने प्रदीप को बताया कि उस को यौनरोग हो गया था. इस का इलाज नीमहकीमों से कराने के बजाय जानकार डाक्टरों से ही कराना चाहिए.

क्या होते हैं यौनरोग

मक्कड़ मैडिकल सैंटर, लखनऊ के डाक्टर गिरीश चंद्र मक्कड़ का कहना है कि यौनरोग शरीर के अंदरूनी अंग में होने वाली बीमारियों को कहा जाता है. ये पतिपत्नी के शारीरिक संपर्क करने से भी हो सकते हैं और बहुतों के साथ संबंध रखने से भी हो सकते हैं. अगर मां को कोई यौनरोग है, तो बच्चे का जन्म औपरेशन के जरिए कराना चाहिए. इस से बच्चा योनि के संपर्क में नहीं आता और यौनरोग से बच जाता है. कभीकभी यौनरोग इतना मामूली होता है कि उस के लक्षण नजर ही नहीं आते. इस के बाद भी इस के परिणाम घातक हो सकते हैं. इसलिए यौनरोग के मामूली लक्षण को भी नजरअंदाज न करें. मामूली यौनरोग कभीकभी खुद ठीक हो जाते हैं. पर इन के बैक्टीरिया शरीर में पड़े रहते हैं और कुछ समय बाद वे शरीर में तेजी से हमला करते हैं. यौनरोग झ्र शरीर के खुले और छिले स्थान वाली त्वचा से ही फैलते हैं.

हारपीज : यह बहुत ही सामान्य किस्म का यौनरोग है. इस में पेशाब करने में जलन होती है. पेशाब के साथ कई बार मवाद भी आता है. बारबार पेशाब जाने का मन करता है. किसीकिसी को बुखार भी हो जाता है. शौच जाने में भी परेशानी होेने लगती है. जिस को हारपीज होता है उस के जननांग में छोटेछोटे दाने हो जाते हैं. शुरुआत में यह अपनेआप ठीक हो जाता है, मगर यह दोबारा हो तो इलाज जरूर कराएं.

वाट्स : वाट्स में शरीर के तमाम हिस्सों में छोटीछोटी गांठें पड़ जाती हैं. वाट्स एचपीवी वायरस के चलते फैलता है. ये 70 प्रकार के होते हैं. ये गांठें अगर शरीर के बाहर हों और 10 मिलीमीटर के अंदर हों तो इन को जलाया जा सकता है. इस से बड़ी होने पर औपरेशन के जरिए हटाया जा सकता है. योनि में फैलने वाले वायरस को जेनेटल वाट्स कहते हैं. ये योनि में बच्चेदानी के द्वार पर हो जाते हैं. समय पर इलाज न हो तो इन का घाव कैंसर का रूप ले लेता है. इसलिए 35 साल की उम्र के बाद एचपीवी वायरस का कल्चर जरूर करा लें.

गनोरिया : इस रोग में पेशाब नली में घाव हो जाता है जिस से पेशाब नली में जलन होने लगती है. कई बार खून और मवाद भी आने लगता है. इस का इलाज ऐंटीबायोटिक दवाओं के जरिए किया जाता है. अगर यह रोग बारबार होता है, तो इस का घाव पेशाब नली को बंद कर देता है. इसे बाद में औपरेशन के जरिए ठीक किया जाता है. गनोरिया को सुजाक भी कहा जाता है. इस के होने पर तेज बुखार भी आता है. इस के बैक्टीरिया की जांच के लिए मवाद की फिल्म बनाई जाती है. शुरू में ही यह बीमारी पकड़ में आ जाए तो अच्छा रहता है.

सिफलिस : यह यौनरोग भी बैक्टीरिया के कारण फैलता है. यह यौन संबंधों के कारण ही फैलता है. इस रोग के चलते पुरुषों के अंग के ऊपर गांठ सी बन जाती है. कुछ समय के बाद यह ठीक भी हो जाती है. इस गांठ को शैंकर भी कहा जाता है. शैंकर से पानी ले कर माइक्रोस्कोप के सहारे देखा जाता है. पहली स्टेज पर माइक्रोस्कोप के सहारे ही बैक्टीरिया को देखा जा सकता है. इस बीमारी की दूसरी स्टेज पर शरीर में लाल दाने से पड़ जाते हैं. यह बीमारी कुछ समय के बाद शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित करने लगती है. इस बीमारी का इलाज तीसरी स्टेज के बाद संभव नहीं होता. यह शरीर की धमनियों को प्रभावित करती है. इस से धमनियां फट भी जाती हैं. यह रोग आदमी और औरत दोनों को हो सकता है. दवा और इंजैक्शन से इस का इलाज होता है.

क्लामेडिया : यह रोग योनि के द्वारा बच्चेदानी तक फैल जाता है. यह बांझपन का सब से बड़ा कारण होता है. बीमारी की शुरुआत में ही इलाज हो जाए तो अच्छा रहता है. क्लामेडिया के चलते औरतों को पेशाब में जलन, पेट दर्द, माहवारी के समय में दर्द, शौच के समय दर्द, बुखार आदि की शिकायत होने लगती है.

यौनरोगों से बचाव

  • अंग पर किसी भी तरह के छाले, खुजलाहट, दाने, कटनेछिलने और त्वचा के रंग में बदलाव की अनदेखी न करें.
  • जब भी शारीरिक संबंध बनाएं कंडोम का प्रयोग जरूर करें. यह यौनरोगों से बचाव का आसान तरीका है.
  • कंडोम का प्रयोग ठीक तरह से न करने पर भी यौनरोगों का खतरा बना रहता है.
  • ओरल सेक्स करने वालों को अपनेअपने अंग की साफसफाई का पूरा खयाल रखना चाहिए.
  • यौनरोग का इलाज शुरुआत में सस्ता और आसान होता है. शुरुआत में इस से शरीर को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता है.
  • गर्भवती औरतों को अपनी जांच समयसमय पर करानी चाहिए ताकि उस से बच्चे को यौनरोग न लग सके.
  • नीमहकीमों के चक्कर में पड़ने के बजाय डाक्टर की सलाह से ही दवा लें.
  • अंग की साफसफाई से यौनरोगों से दूर रहा जा सकता है.
  • औरतों को यौनरोग ज्यादा होते हैं. अत: उन्हें पुरुषों से ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.
  • यौनरोगी के संपर्क में जाने से बचें. बाथरूम की ठीक से साफसफाई न करने से भी एक व्यक्ति का यौनरोग दूसरों को लग सकता है.

जानें सेक्स ड्राइव में कमी की वजहें

मोना और मौलोए उन हैप्पी मैरिट कपल्स में से हैं जिन्होंने शादी के बाद अपनी मैरिट लाइफ खूब इंजौय की. शादी के 2 साल बाद एक प्यारा सा बेटा और 5वें साल में खूबसूरत सी बेटी के मातापिता बन गए. विवाह के बाद कोई दिन ऐसा न जाता जब दोनों अंतरंग न होते हों. दोनों की सैक्स लाइफ भरपूर रंगीन थी. बच्चे होने के बाद भी दोनों ने अपनी सैक्स लाइफ में कमी नहीं आने दी लेकिन फिर जैसेजैसे बच्चे बड़े होने लगे और मौलोए की औफिस की जिम्मेदारियां हद से ज्यादा बढ़ने लगीं, मोना भी बच्चों की परवरिश में व्यस्त होने लगी, घर के काम बढ़ने लगे, मोना और मौलोए के बीच की नजदीकियां धीरेधीरे कम होने लगीं.

ऐसा नहीं था कि दोनों के बीच प्यार कम हो रहा था या दोनों एकदूसरे के लिए प्यार महसूस नहीं करते थे या सैक्स के लिए उन की चाह कम हो गईर् थी लेकिन अब पहले जैसी गरमजोशी व उतावलापन, एकदूसरे के प्रति खिंचाव कम होने लगा था. वह सोचने लगे थे शायद 40+ और बढ़ती हुई उन की उम्र का तकाजा है.

ऐसे कितने ही कपल हैं जिन के सामने ये समस्या आती है. कुछ कपल यह सोच कर अपने मन को तसल्ली देने लगते हैं कि यार अब तो उग्र बढ़ रही है, सैक्स में रुचि कम हो ही जाती है.

लेकिन सच में क्या ऐसा होता है यदि आप पार्टनर के साथ सैक्स का आनंद उठाते हैं तो कभी भी सेक्स में आप की रुचि कम नहीं हो सकती. इस के बावजूद देखने में आ रहा है कि युवा मैरिट कपल में कामेच्छा, सैक्स की कमी हो रही है. वे सैक्स में उतना इंजौय नहीं करते जितना कि उन्हें करना चाहिए. यदि आप भी उन कपल्स में से हैं तो सजग हो जाइए. कोशिश कीजिए और जानिए ऐसा क्यों हो रहा है, आखिर यह कमी क्यों आ रही है.

आप के सैक्सुअल रिलेशन में कमी की कही ये वजहें तो नहीं :

अधिक तनाव : घर का तनाव, बच्चों का तनाव, औफिस का तनाव, रिश्तेदारों का तनाव और भी न जाने कैसीकैसी बातें रोजमर्रा में होती रहती हैं जिन से हमारा दिमाग तनावमुक्त नहीं हो पाता. तनाव से निपटने का समाधान मिलता नहीं है और हम हर समय तनाव से ग्रस्त रहते हैं, जो वजह बनती है सैक्स में कमी की. डाक्टरों का मानना है तनाव की वजह से कार्टिसोल नाम का स्ट्रैस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, इस से टेस्टोस्टोन और लिबिडो कम हो जाते हैं, यही कारण है कि सैक्स की चाह कम हो जाती है. यदि अपनी जिंदगी में सैक्स की गर्मजोशी बरकरार रखना चाहते हैं तो तनाव से दूरी बनाएं.

अत्याधिक ऐक्सरसाइज : यों तो ऐक्सरसाइज शरीर के लिए अति उत्तम है लेकिन कहते हैं न हर चीज की अति बुरी होती है. जी हां, यदि आप ऐक्सरसाइज लवर हैं तो आप के जीवन का लव कम हो सकता है.

आप ऐक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या के कई घंटे देते हैं तो इस से नैगेटिव रिजल्ट सामने आएंगे, जैसे कि एक रिसर्च कहती है कि एक्सरसाइज करते समय जो मेहनत आप करते हैं उस से शरीर में तनाब बढ़ता है जिस से एंड्रोक्राइन सिस्टम में गड़बड़ी होती है, जिस की वजह से टैस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है जिस से सैक्स के प्रति चाह में कमी आती है.

यही नहीं अतिरिक्त एक्सरसाइज की वजह से एस्ट्रोजेन के स्तर में भी कमी हो सकती है जिस से कामेच्छा कम होने की आशंका होती है. आप हर समय थकान और सुस्ती महसूस करते हैं और यही कारण है कि सैक्स से दूर रहते हैं.

नींद का पूरा न होना : आजकल व्यक्ति की दिनचर्या बहुत व्यस्त हो गई है. कामकाज के चक्कर में सारा दिन भागादौड़ी लगी रहती है. रात में व्यक्ति थकान से चूर होता है. ऐसे में सैक्स में कमी आना वाजिब है. बात सिर्फ काम की अधिकता की नहीं, काम की वजह से रात को पर्याप्त नींद नहीं लेने के कारण भी थकान से भरे रहते हैं जिस से सैक्स की चाह में कमी आ सकती है. आराम न करने से लिबिडो कम हो सकता है. जिस से अवसाद, वजन बढ़ने की समस्या भी सैक्स में कमी लाती है. सीधे तौर पर कहें तो सैक्स में इच्छा बढ़ानी है तो पर्याप्त आराम और नींद लें.

दवाइयां भी बन सकती हैं वजह : कुछ ऐसी दवाइयां हैं जो आप अपनी आम बीमारियों को दूर करने के लिए लेते हैं लेकिन इन दवाओं के सेवन से आप की सैक्स इच्छा में कमी आ सकती है जैसे कि उक्त रक्तचाप की दवाएं, हार्मोंन संबंधी दवाइयां, पेनकिलर्स, अस्थमा में ली जाने वाली दवाइयां, एंटी डिप्रैसेंट दवाएं ऐसी है जिन के नियमित लेने से सैक्स में रुचि कम होने लगती है.

टेक्नोलौजी बढ़ाए दूरियां : आज व्यक्ति सोने से पहले, सुबह उठने के बाद, मैट्रो में सफर करते हुए, जब खाली समय मिले तो उंगलियां मोबाइल पर चलने लगती हैं. इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी जिंदगी के अभिन्न अंग बन गए हैं, जबकि इन तकनीकी गेजेट्स से कुछ समय के लिए दूरी बनाए रखनी चाहिए. लेकिन हम ने टेक्नोलौजी को अपने से चिपका लिए है जिस की वजह से सैक्स इच्छा दिनोंदिन घट रही है.

यदि कुदरत के इस सुख को भोगना चाहते हैं तो इन कृत्रिम सुख से दूर रहें. मोबाइल से नजरें उठा कर अपने पार्टनर पर ध्यान दें. इसे अपना समय दें. सैक्स की बातें करें. यकीन मानिए इस तरह सैक्स के प्रति चाह अपनेआप बढ़ जाएगी.

दमा निकाल देता है दम

दमा बीमारी को इंगलिश में अस्थमा कहा जाता है. इस में तेज खांसी, घरघराहट और मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है. दमा में सांस लेने की नली में सूजन आ जाती है. बलगम पैदा होने लगता है. इस से सांस लेना मुश्किल हो जाता है.

दमा को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है. इलाज और बचाव से इस को कंट्रोल किया जा सकता है.

दमा अकसर समय के साथ बदलता है. दमा के लक्षण मामूली से गंभीर और हर किसी के लिए अलग हो सकते हैं. मरीज को बारबार दमा के दौरे पड़ सकते हैं. कई बार किसी एक निश्चित समय पर ही दमा के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि कसरत करते समय यह तकलीफ ज्यादा दिखती है.

दमा को एक विकलांगता माना जाता है, क्योंकि यह लंबे समय तक शारीरिक दुर्बलता पैदा करता है. यह रोजमर्रा की जिंदगी की गतिविधियों में बाधा डाल सकता है, जो जिंदगी को और ज्यादा मुश्किल बना सकता है.

दमा में सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होती है. धीरेधीरे होने वाला दर्द तेज दर्द में बदल जाता है. ऐसा महसूस हो सकता है कि छाती पर कोई चट्टान रखी है.

इस बारे में डाक्टर मनोज श्रीवास्तव कहते हैं, “दमा का स्थायी इलाज नहीं है. ऐसे में बचाव और परहेज से ही इस को संभाला जा सकता है. ज्यादा दिक्कत होने पर डाक्टरी दवाओं से राहत मिलती है. मसला सांस से जुड़ा होता है तो लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है. धुआं, धूल और धूम्रपान से बच कर रहिए.”

दमा के लक्षण

दमा के लक्षणों में तेज सांस चलना, सांस फूलना, सीने में जकड़न या दर्द, सांस की तकलीफ, खांसी या घरघराहट के चलते नींद में परेशानी होती है. इस के साथ ही सांस छोड़ते समय सीटी सी बजना या घरघराहट की आवाज आना दमा की वजह मानी जाती है. खांसी या घरघराहट के दौरे सर्दी और बुखार में ज्यादा होने लगते हैं.

कई बार दमा अचानक बहुत परेशान करता है. तत्काल राहत के लिए इनहेलर का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ती है. दमा से पीड़ित शख्स की जांच के लिए छाती का एक्सरे, सांस की जांच, स्पिरोमैट्री, नाइट्रिक आक्साइड टैस्ट, इमेजिंग टैस्ट और एलर्जी टैस्ट किया जाता है.

दमे का इलाज

सांस की तकलीफ बढ़ाने वाले काम कम करने चाहिए. बीमारी को कम करने या कंट्रोल में रखने की कोशिश करनी चाहिए. दूध और उस से बनी चीजों का इस्तेमाल कम करें. ज्यादातर लोगों में दमा की 60 फीसदी वजह दूध और दूध से बनी चीजें ही होती हैं. केला, कटहल और पकाई हुई चुकंदर न लें.

सरसों का तेल कपूर के साथ मिला कर इस्तेमाल कर सकते है. इस मिश्रण को छाती में हर जगह रगड़ें. तेल को लगाने से पहले गरम कर लें. यह तेजी से राहत देने में मदद करेगा. इस के साथ ही अदरक का इस्तेमाल खाने में या इस का रस चूसने में करें. इस से फायदा होता है.

कौफी में मौजूद कैफीन दमा के इलाज में मदद करता है. खट्टे फलों में विटामिन सी होता है जो सूजन को कम करता है, इसलिए अपने दैनिक आहार में नीबू को शामिल कर सकते हैं. दिन में कम से कम 8 गिलास पानी का सेवन लाभकारी होता है.

सब से जरूरी बात यह है कि माहिर डाक्टर की कही गई हिदायतों को नजरअंदाज मत करें और उस के कहे मुताबिक दवा का सेवन करें.

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