पढेलिखे इंजीनियर ने मिटा दिया अपना हंसताखेलता परिवार

हत्या करने की वजह बेरोजगारी ही काल बन कर मौत ले आई. माली तंगी से जूझ रहे सुमित को यही ठीक लगा कि सभी की हत्या कर दी जाए और माली तंगी से निजात मिले. परिवार की अच्छी तरह परवरिश न कर पाने के चलते ही उस ने हत्या करने की ठानी. वजह कुछ भी हो, पर एक हंसता-खेलता परिवार मौत के आगोश में चला गया.

यह वारदात गाजियाबाद के इंदिरापुरम के ज्ञानखंड 4 इलाके में हुई. यहां एक साफ्टवेयर इंजीनियर सुमित ने अपनी 30 साला पत्नी अंशु बाला और 3 बच्चों की गला रेत कर हत्या कर दी. बच्चों में 7 साला प्रथमेश, 4 साला आरव और 4 साला बेटी आकृति शामिल हैं. आरव और आकृति जुड़वां हैं.

हत्या को अंजाम देने के बाद सुमित फरार हो गया. वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड ने बताया कि  सुमित शनिवार देर रात 3 बजे बैग ले कर बाहर गया था.

हत्या करने के 16 घंटे बाद यानी रविवार शाम 6 बजे व्हाट्सएप ग्रुप पर सुमित ने यह वीडियो लोड किया. सुमित की बहन ने सब से पहले इस वारदार वाले व्हाट्सएप को देखा. साले पंकज को भी यह वीडियो भेजा और फोन कर कहा कि वह परिवार की जिम्मेदारी नहीं उठा सकता और उस ने सब की हत्या कर दी है. जाओ, शव को फ्लैट से ले आओ. अब मैं भी मरने जा रहा हूं. यह मेरा अंतिम वीडियो है.

पंकज ने ही पुलिस को खबर दी. मौके पर पहुंची पुलिस फ्लैट का दरवाजा तोड़ कर अंदर घुसी. अंदर सभी का गला धारदार हथियार से रेता गया था. शुरुआती जांच में पता चला कि सुमित ने सब से पहले पत्नी का गला रेता, इस के बाद बेड पर सो रहे जुड़वां बच्चों की हत्या की और अंत में बाहर वाले कमरे में बेटे प्रथमेश का धारदार हथियार से गला रेत दिया.

20 अप्रैल की रात को डिनर करने के बाद से ही आरोपित सुमित ने परिजनों की हत्या का मन बना लिया था. पुलिस ने घर के अंदर रखे खाने के बरतन के भी सैंपल लिए हैं. माना जा रहा है कि आरोपित ने खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला कर पिलाया था, ताकि हत्या के समय किसी तरह का शोर न हो.

आरोपित की पत्नी अंशु बाला ने नींद की हालत में विरोध करने की कोशिश की तभी कमरे की दीवार पर खून के निशान भी फोरैंसिक टीम को मिले हैं. इस के अलावा पत्नी के गले के साथसाथ शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी चोट के निशान हैं.

पुलिस की मानें तो घटना वाली जगह पर पुलिस को वारदात में चापड़ मिला है. चापड़ से हत्या करने के बाद पानी या कपड़े से साफ हुआ पाया है. हत्या के करीब 16 घंटे बाद आरोपित सुमित ने वीडियो वायरल कर पत्नी के परिवार को घटना की जानकारी दी.

बता दें कि जमशेदपुर के रहने वाले सुमित बेंगलुरु स्थित लैपटौप कंपनी में इंजीनियर थे. वे 2 साल से गाजियाबाद के ज्ञानखंड 4, इंदिरापुरम में किराए के फ्लैट में रहते थे. कैंसर के कारण जनवरी माह में सुमित ने नौकरी छोड़ दी थी. अंशु बाला मदर प्राइड स्कूल में टीचर थी.

सुमित की नौकरी कैंसर बीमारी के चलते छूट गई थी. बेंगलुरु में सुमित ने जांच कराई तो डाक्टरों ने उसे ब्लड कैंसर बताया था. परिवार की रजामंदी से ही उस ने बेंगलुरु की कंपनी छोड़ दी. इंदिरापुरम, गाजियाबाद में आ कर उस ने जांच कराई तो ब्लड में इंफैक्शन पाया.

(यह घटना 2019 की है. अपने पाठकों को जागरूक करने के उद्देश्य से इसे दोबारा पब्लिश किया जा रहा है)

भीख घोटाला : इन की इजाजत के बिना एक चवन्नी नहीं मांग सकता भिखारी

भारत में ट्रैफिक सिगनल की लाल बत्ती पर किसी फटेहाल औरत का अपनी गोद में बच्चा लिए किसी कार की तरफ दौड़ना या किसी छोटे बच्चे के साथ विकलांग बूढ़े का भीख मांगना दिखाई देना आम बात है. आप को रेलवे स्टेशनों, मैट्रो स्टेशनों, पर्यटन स्थलों, मंदिरों में भीख मांगते हुए कई लोग मिलेंगे और कई ऐसी जगहों पर तो रोजाना मिलेंगे जहां भीड़ ज्यादा होती है.

ऐसी ही कुछ वजहों के चलते भारत में भीख मांगना सब से गंभीर सामाजिक बुराइयों में से एक है. देश में कुछ भिखारी असली हैं, जो काम करने में नाकाम हैं क्योंकि वे बूढ़े या शरीर से लाचार हैं. उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए पैसे की जरूरत है, इसीलिए वे भीख मांगते हैं. ऐसे कई लोग हैं जो गरीबी रेखा से नीचे हैं और अपना पेट भरने के लिए भीख मांगते हैं.

कुछ मामले ऐसे हैं जिन में पूरे परिवार के सदस्य भीख मांगने में शामिल हैं. इस तरह के परिवारों के बच्चे स्कूल नहीं जाते, बल्कि भीख मांगते हैं. वे भीख इसलिए भी मांगते हैं क्योंकि उन के परिवार की एक दिन की आमदनी में पूरे परिवार को खिलाने के लिए जरूरत के मुताबिक पैसा नहीं है.

भीख मांगना एक घोटाला

भारत में भीख मांगने वालों का एक बड़ा रैकेट बन गया है. कई लोगों के लिए भीख मांगना किसी दूसरे पेशे की तरह है. वे पैसे कमाने के लिए बाहर जाते हैं. वे काम कर के नहीं बल्कि भीख मांग कर कमाना चाहते हैं.

ऐसे लोग गिरोह के साथ दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई, कोलकाता जैसे शहरों में भीख मांग रहे हैं. इन गिरोहों के अपने नेता होते हैं. हर नेता भिखारियों के एक समूह को खास इलाका बांटता है और रोजाना की कमाई उन के बीच साझा करता है.

भिखारियों का नेता अपने पास बड़ा हिस्सा रखता है और बाकी हिस्सा भिखारियों में बांट देता है. ये भिखारी भीख मांगने में इतने लीन हो जाते हैं कि इस के अलावा और कोई काम नहीं करना चाहते हैं.

यह पता लगाना मुश्किल है कि कौन असली भिखारी है और कौन बनावटी भिखारी है क्योंकि दोनों देखने में एकजैसे ही लगते हैं. यहां तक कि उन के बच्चों को भीख मांगने और असली दिखने के लिए ठीक से ट्रेंड किया जाता है. जब हम एक जवान को उस के छोटे बच्चे को पकड़े हुए सड़कों पर भीख मांगते हुए देखते हैं तो कभीकभी उन के चेहरे को देख कर हमारे दिल पसीज जाते हैं.

ज्यादातर मामलों में बच्चे को सोते (नशे की हालत में) हुए पाया जाता है, यकीनी तौर पर यह एक घोटाला है. कई स्टिंग औपरेशनों से पता चला है कि भीख मंगवाने में बच्चों को किराए पर लिया जाता है. कभीकभी बच्चों को पूरे दिन के लिए नशा दे दिया जाता है ताकि वे बीमार लगें.

भिखारी को बहुत अच्छे ढंग से ट्रेनिंग दी जाती है ताकि जब वह भीख मांग रहा हो तो आप उन्हें पैसे देने के लिए राजी हो जाएं, खासतौर पर विदेशियों के लिए.

भिखारी देश में असामाजिक तत्त्व बन जाते हैं. वे सभी ड्रग्स का सेवन करने लगते हैं. ड्रग्स खरीदने के लिए पहले वे भीख मांगना शुरू करते हैं, फिर जब जेबखर्च धीरेधीरे बढ़ता है तो वे लूट और हत्या जैसे बड़े अपराधों में शामिल हो जाते हैं.

देश में 4 लाख से भी ज्यादा भिखारी हैं. सब से ज्यादा भिखारी पश्चिम बंगाल में हैं और सब से कम भिखारी के मामले में लक्षद्वीप हैं. वहां महज 2 भिखारी हैं.

लोकसभा में एक लिखित सवाल का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जनसंख्या सर्वे 2011 में जमा किए गए आंकड़ों के आधार पर यह जानकारी मुहैया कराई गई है.

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत में कुल 4 लाख, 13 हजार, 670 भिखारी हैं, जिस में से 2 लाख, 21 हजार, 673 मर्द और एक लाख, 91 हजार, 997 औरतें हैं.

देशभर में पश्चिम बंगाल में भिखारियों की तादाद सब से ज्यादा 81 हजार, 224 है. इस के बाद नंबर आता है उत्तर प्रदेश का जहां 65 हजार, 835 भिखारी हैं. तीसरे नंबर पर बिहार है जहां 29 हजार, 723 भिखारी हैं. मध्य प्रदेश में 28 हजार, 695 भिखारी हैं.

पूर्वोत्तर के राज्यों में भिखारियों की तादाद असम में सब से ज्यादा है और मिजोरम में सब से कम. दक्षिण के राज्यों में सब से कम भिखारी केरल में हैं तो सब से ज्यादा भिखारी आंध्र प्रदेश में हैं.

इस आंकड़े के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सहित असम, मणिपुर जैसे राज्यों में मर्द भिखारियों के मुकाबले औरत भिखारियों की तादाद ज्यादा है.

केंद्रशासित प्रदेशों में सब से ज्यादा भिखारी दिल्ली में हैं. दिल्ली में कुल 12,187 भिखारी हैं, जबकि चंडीगढ़ में कुल 723.

क्या करना चाहिए

भारत में तेजी से भिखारियों की तादाद में बढ़ोतरी हो रही है. सरकार, विभिन्न संगठन, कार्यकर्ता दावा करते हैं कि भिखारियों को खत्म करने के लिए कई उपाय किए गए हैं और कुछ हद तक कामयाब भी हुए हैं. लेकिन भीख मांगने की आदत अभी भी जारी है.

हमें भी इस के लिए कुसूरवार ठहराया जाना चाहिए क्योंकि हम भारतीयों के रूप में बहुत रूढ़िवादी और ऊपर वाले से डरने वाले हैं. हम ने अपने मन को धार्मिक सीमा में बांध कर रखा है. यह हमें दान करने के लिए मजबूर करता है और दान करने का सब से आसान तरीका है कि पास के मंदिर में जाएं और वहां पर भिखारियों को भीख दें. यह उन्हें निकम्मा बनाता है और आम आदमी को रिश्वत देने की आदत डालता है.

यह सेवा का काम नहीं है. भीख देना बंद करना चाहिए. भले ही चाहे ऐसा लगे कि हम बेरहम हैं, पर जब कोई छोटा बच्चा सड़क पर भीख मांगने के लिए आए तो उसे पैसा न दिया जाए. यह एक ऐसा कदम है जिस से भिखारियों को कम करने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है.

जब लड़की बोल दे ‘परे हट नामर्द’

अनिल और श्रुति का कई महीने से मिलनाजुलना था. वे दोनों इस रिश्ते को अब शादी में बदलना चाहते थे. एक दिन श्रुति ने उस से कहा कि शादी से पहले वह अनिल के साथ एक बार हमबिस्तर होना चाहती है, लेकिन अनिल शादी से पहले हमबिस्तर होने के पक्ष में नहीं था.

दरअसल, श्रुति नहीं चाहती थी कि उसे शादी के बाद सैक्स संबंधों को ले कर किसी तरह की समस्या झेलनी पडे़, लेकिन जब अनिल श्रुति की दलील सुनने को तैयार नहीं हुआ तो श्रुति को अनिल की मर्दानगी पर कुछ शक होने लगा.

अब श्रुति अनिल को परखना चाहती थी, इसलिए उस ने अनिल के साथ एक दिन बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाया और दोनों एक पिकनिक स्पौट पर साथसाथ एक ही कमरे में रुके, जहां श्रुति ने अनिल के साथ छेड़छाड़ शुरू की, लेकिन इस का अनिल पर कोई असर नहीं हुआ. वह अनिल को सैक्स संबंध बनाने के लिए खुला औफर दे रही थी, लेकिन अनिल के सैक्स के नाम पर दूर भागने से उस के मन में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा.

श्रुति ने कहा कि अगर उस ने उस के साथ सैक्स करने से इनकार किया तो वह लोगों से चिल्ला कर कहेगी कि होटल के कमरे में उसे अकेला पा कर उस ने जबरदस्ती करने की कोशिश की है.

आखिर अनिल भी श्रुति के सामने अपने कपडे़ उतारने को तैयार हो गया, लेकिन लाख प्रयासों के बाद भी अनिल सैक्स के मामले में फुस्स साबित हुआ तो श्रुति का गुस्सा सातवें आसमान पर था, क्योंकि उसे अनिल के नानुकुर का राज पता चल चुका था. वह बोली कि तुम अपनी नामर्दी की बात जानते हुए भी मुझ से यह बात छिपाते रहे. तुम ने प्यार के नाम पर मेरे साथ धोखा किया है.

नामर्दी छिपाने के लिए की जाती है शादी

नामर्दी के मामले में होने वाली शादियां भी अकसर धोखे से ही की जाती हैं, जिस का बाद में खुलासा होना निश्चित होता है. फिर भी नामर्दी के शिकार लोग कालेज में घंटों लड़कियों का इंतजार करने व उन पर डोरे डालने से बाज नहीं आते और जब बात प्यार व सैक्स तक पहुंचती है तब वे अपने पार्टनर के साथ सैक्स करने में आनाकानी करते हैं. ज्यादातर मामलों में शादी से पहले सैक्स संबंध स्थापित न हो पाने की वजह से उस के होने वाले जीवनसाथी को यह पता ही नहीं चलता कि जो व्यक्ति उस के साथ अपनी मर्दानगी की बड़ीबड़ी बातें कर रहा है वह बिस्तर पर जाने के बाद फुस्स साबित होगा.

रिचा के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ. डाक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही वह अपने सहपाठी से प्रेम कर बैठी और बाद में दोनों ने शादी कर ली, लेकिन जब शादी की पहली रात रिचा के लाख प्रयास के बाद भी उस का पति संबंध नहीं बना पाया तो उस ने पति से कहा कि जब उसे पता था कि वह नामर्द है तो फिर मुझे धोखे में रख कर शादी क्यों की? उस के पति राजेश ने उसे विश्वास दिलाया कि उस की यह नामर्दी अस्थायी है जो कुछ दवाओं से दूर हो सकती है, चूंकि रिचा और राजेश मैडिकल सैक्टर से ही थे, इसलिए उन्होंने इस बात को सावधानी से लिया और राजेश आज अपनी अस्थायी नामर्दी से मुक्ति पा कर सफल वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहा है.

चूंकि रिचा एक डाक्टर थी इसलिए उसे पता था कि नामर्दी क्या होती है और उस का निदान किस तरह से संभव है, लेकिन ज्यादातर नामर्दी के मामलों में समस्या को दूर नहीं किया जाता. ऐसे में स्थिति तलाक तक पहुंच जाती है या फिर महिला के अपने पति के अलावा किसी दूसरे के साथ शारीरिक संबंध स्थापित हो जाते हैं, जो आगे चल कर हत्या या आत्महत्या का कारण भी बन जाता है.

सौम्या के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ. उस ने कालेज लाइफ में एक युवक से प्रेम किया और उस की रजामंदी से शादी भी हो गई, लेकिन शादी की पहली रात जब सौम्या का पति उस से सैक्स संबंध न बना पाया तो सौम्या और उस के पति में तूतू मैंमैं हो गई और वह बोली कि जब तुम नामर्द थे तो तुम ने मुझ से प्रेम क्यों किया और यह बात छिपा कर शादी क्यों की.

शादी के दूसरे दिन ही सौम्या ने अपने सासससुर से कहा कि वह उन के बेटे से तलाक लेना चाहती है, क्योंकि वह नामर्द है.

सौम्या के मामले में उस का पति शादी न कर के अपनी किरकिरी से बच सकता था, लेकिन शादी के लिए उस ने नामर्दी की बात छिपा कर लोगों में अपनी जगहंसाई कराई, जिस की वजह से वह घोर मानसिक निराशा का शिकार हो गया.

इस तरह के तमाम मामले सामने आते हैं, जिस में युवकों द्वारा युवतियों से धोखे से शादी कर ली जाती है और बाद में पता चलता है कि उस के अंग में या तो तनाव ही नहीं आता या फिर वह सैक्स से पहले ही स्खलित हो जाता है.

शादी से पहले सैक्स संबंध

भारत में शादी से पहले सैक्स संबंध बनाना गलत माना जाता है. ऐसे में जब शादी हो जाए और बिस्तर पर जाने के बाद यह पता चले कि जिस मर्द के साथ उस की शादी हुई है वह नामर्द है तो शादी से पहले संजोए गए उस के सारे सपनों पर न केवल पानी फिर जाता है बल्कि वैवाहिक जीवन भी बरबाद हो जाता है.

ऐसे में अगर युवती ने अपने होने वाले पति के साथ शादी से पहले सैक्स संबंध बनाए हैं तो निश्चित ही उस का वैवाहिक जीवन सुखमय बीतेगा, क्योंकि उसे यह पता होता है कि वह जिस के साथ शादी करने जा रही है उस के साथ सैक्स संबंध सफल होंगे या नहीं.

कालेज लाइफ के दौरान प्यार हो जाना आम बात है और ज्यादातर मामलों में प्यार शादी में बदल जाता है. ऐसे में प्यार करने वाले युवकयुवती में शादी से पहले सैक्स संबंध बन जाना आम बात है. इसे आमतौर पर अच्छा भी माना जा सकता है, क्योंकि इस तरह से शादी करने में धोखे की आशंका एकदम समाप्त हो जाती है.

शादी से पहले अपने होने वाले पति के सैक्स की जानकारी रखना हर महिला का अधिकार होना चाहिए और यह बिना सैक्स संबंध बनाए संभव नहीं है. इसलिए पुराने दकियानूसी खयालों से निकल कर युवाओं को इस की पहल करनी होगी.

नपुंसकता के कारण

सैक्स संबंध में संतुष्टि के मानदंडों का आकलन करना कठिन है, लेकिन शादी से पहले युवती व उस के परिवार वालों को चाहिए कि जिस युवक के साथ उस की बेटी की शादी होने जा रही है वे इस मसले पर उस से खुल कर बात करें और अगर कहीं शक की गुजाइंश हो तो उस युवक से दूरी बना लेनी चाहिए.

यह भी जरूरी नहीं कि पुरुष जिसे नामर्दी समझ रहा है वह असल में हो. यह उस का भ्रम भी हो सकता है, क्योंकि उस के अंग में तनाव न आना किन्हीं दूसरे कारणों की वजह हो सकता है. ऐसे में पुरुष को भी चाहिए कि एक बार सैक्स स्पैशलिस्ट से सलाह जरूर ले.

नामर्दी के ज्यादातर मामले स्थायी नहीं होते. अंग में तनाव न आना, कुछ ही क्षणों में हमबिस्तरी के दौरान पस्त हो जाना, अस्थायी नामर्दी में गिना जाता है. जिस का इलाज संभव है. अगर इस में उस की महिला मित्र द्वारा समझदारी और संयम दिखाया जाए तो पति की इस समस्या से नजात दिलाने में वह मदद कर सकती है.

सैक्स विशेषज्ञ डा. मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि नामर्दी के मामले में यह देखा गया है कि या तो पुरुष के अंग में तनाव आता ही नहीं है और किसी तरह तनाव आता भी है तो वह सैक्स संबंध बनाने से पहले ही पस्त हो जाता है. इस का मतलब जरूरी नहीं कि वह नामर्द हो. हो सकता है कि वह अस्थायी नामर्दी का शिकार हो.

इस अस्थायी नामर्दी के तमाम कारण हो सकते हैं, जिन में मानसिक अवसाद, नशा, धूम्रपान, मधुमेह, हृदय रोग, हाई ब्लडप्रैशर और दवा की अत्यधिक डोज लेना भी शामिल हैं. नामर्दी का कारण अंग में चोट लगने की वजह भी होता है, जिसे समय से इलाज कर दूर किया जा सकता है, इसलिए अगर कोई अस्थायी नपुंसकता का शिकार है तो उसे किसी योग्य डाक्टर को दिखाना चाहिए.

ज्यादा उम्र के शख्स से शादी करने से बचें

आप यदि अपनी उम्र से दोगुनी उम्र के बड़े व्यक्ति से शादी का विचार मन में ला रही हैं तो इस खयाल को मन से निकाल दीजिए, क्योंकि ज्यादातर मामलों में पति की उम्र में ज्यादा अंतर होने से सैक्स ताकत जल्दी खत्म हो जाती है फिर पत्नी को या तो सैक्स के बिना तड़पते हुए बाकी जीवन काटने पर मजबूर होना पड़ता है या तो किसी गैर मर्द से संबंध स्थापित करना पड़ता है, जो ठीक नहीं है.

दूर हो सकती है नामर्दी

पुरुषों की तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियां भी नामर्दी का कारण बन सकती हैं. अगर इन समस्याओं से नजात पा ली जाए तो निश्चय ही नामर्दी की समस्या से छुटकारा मिल सकता है.

डा. अकमलुद्दीन के अनुसार अगर पुरुष को लगता है कि उस के अंग में तनाव नहीं आ रहा है तो उसे डाक्टर से परामर्श लेना नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि नामर्दी के 75 फीसदी मामलों में नामर्दी से छुटकारा पाया जा सकता है.

पुरुष की नामर्दी को दूर करने में महिला पार्टनर भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. उसे कोशिश करनी चाहिए कि पार्टनर के साथ संयम और प्यार से पेश आए और उस में मानसिक तनाव और निराशा की भावना को न उपजने दे.

यदि पति की दिनचर्या अनियंत्रित है तो उस में भी सुधार करने के प्रयास करने चाहिए, पति के अच्छे खानपान व नियंत्रित लाइफस्टाइल को बढ़ावा देना चाहिए. इन उपायों को अपना कर कुछ हद तक नामर्दी की समस्या से नजात पाई जा सकती है.

नामर्दी से छुटकारा दिलाने वाली कई दवाएं भी बाजार में उपलब्ध हैं जिन का सेवन करने से अंग में पर्याप्त तनाव आ जाता है, लेकिन दवाओं का उपयोग बिना डाक्टर के परामर्श के नहीं करना चाहिए. यह जानलेवा भी साबित हो सकता है.

नार्मदी दूर करने में वैक्यूम पंप कारगर साबित हुआ है. रक्त कोशिका संबंधित समस्या या रक्त विकार से पीड़ित पुरुषों के लिए यह उपयोगी साबित हुआ है. यह एक तरह का वैक्यूम पंप होता है जिस को पुरुष अपने अंग में डाल कर पंप करता है. इस से उस के अंग में तनाव आ जाता है और वह सैक्स के लिए तैयार हो जाता है. इस पंप का उपयोग बिना डाक्टरी सलाह के नहीं किया जाना चाहिए.

सैक्स से पहले फोरप्ले व आफ्टर प्ले भी कारगर उपाय हैं. इस से जोश में वृद्धि होती है जिस से अंग में रक्त संचार बढ़ने से तनाव आ सकता है.

स्थायी नामर्दी की दशा में पुरुष को शादीविवाह जैसे पचडे़ से दूर रहना चाहिए, क्योंकि न तो यह शादी सफल हो सकती है और न ही उस का विवाहित जीवन.

अगर मातापिता की तरफ से अरेंज मैरिज का दबाव बनाया जाए तो नामर्दी के शिकार युवक को खुल कर अपनी समस्या उन्हें बतानी चाहिए, ताकि सोचसमझ कर फैसला लिया जा सके और शादी के बाद होने वाली किल्लत और जिल्लत दोनों से बच सकें.

अपने घर में: सासबहू की बेमिसाल जोड़ी

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रकुल प्रीत ने सेक्स एजुकेशन पर कहीं ये बात, निभा चुकी है कंडोम टेस्टर का रोल

समाज में आजकल सेक्स एजुकेशन को लेकर बातें तेज हो रही है ये मुद्दा धीरे-धीरे सभी के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है. हाल ही में कई ऐसी फिल्में भी आई जिनमें सेक्स एजुकेशन को लेकर बातें हुई है. जैसे की ओएमजी2, छतरीवाली, डॉक्टर जी, जनहित में जारी, हेलमैट ऐसी कई फिल्में है जिनमें सेक्स एजुकेशन का मुद्दा उठाया गया है अब हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस रकुल प्रीत ने इस पर अपनी राय साझा की है.

 

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आपको बता दें, कि हाल ही में रकुल प्रीत से एक इंटरव्यू में पूछा गया कि बीते कुछ समय में आई ओएमजी 2, डॉक्टर जी (Doctor G) और छतरीवाली जैसी फिल्मों में सेक्स एजुकेशन पर जो बातें हुई हैं, उनके बारे में आपकी क्या राय हैॽ इस पर रकुल प्रीत सिंह ने कहा कि मेरा मानना है कि फिल्में बड़ी संख्या में लोगों को सिखा सकती हैं. हमारे समाज में हर कुछ किलोमीटर पर लोगों के सोचने का ढंग बदला हुआ मिलता है. दुनिया को लेकर सबका एक्सपोजर अलग-अलग है. ऐसे में सेक्स एजुकेशन हर किसी के लिए महत्वपूर्ण है. रकुल ने कहा कि मेरा मानना है कि लोगों को अच्छी बातें सिखाने के लिए फिल्में बहुत काम आ सकती हैं. ओएमजी 2 ने यही किया है. अपनी फिल्म का जिक्र करते हुए रकुल प्रीत सिंह ने कहा कि हमने फिल्म छतरीवाली में भी यौन शिक्षा का जिक्र किया था.

 

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बताते चले कि छतरवाली में रकुल प्रीत सिंह ने एक कंडोम कंपनी कंडोम टेस्टर (Condom Tester) की भूमिका निभाई थी. एक्ट्रेस ने वह कारण भी गिनाए हैं, जिनकी वजह से इस मुद्दे पर बात करना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि देश में बलात्कार बढ़ रहे हैं. हमने चंद्रमा पर कदम रख दिए हैं, लेकिन हम ऐसी सभ्यता में रह रहे जहां बच्चों, किशोरियों, महिलाओं और यहां तक कि बूढ़ी महिलाओं का भी बलात्कार (Rape) होता है. शिक्षा ही लोगों को जागरूक करने का सबसे अच्छा तरीका है. उन्होंने कहा कि लोगों को बताने की जरूरी है कि स्त्री और पुरुष के शरीर अलग-अलग हैं. रकुल प्रीत सिंह ने कहा कि मेरा मानना है कि जितना अधिक हम इस बारे में बातचीत को सामान्य बनाएंगे, लोग सेक्स के मुद्दे पर उतने ही सहज हो पाएंगे.

‘ड्राइवर्स फुट’ : इस बीमारी से बच कर रहें

32 साल के राहुल ने अपना कारोबार शुरू किया था, जिस के सिलसिले में उसे रोज दिल्ली से गुड़गांव जाना पड़ता था. रोजाना 5-6 घंटे गाड़ी चलाने से उसे दाएं पैर में तकलीफ होने लगी. आराम करने से भी कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि उस का दर्द और बढ़ गया. यहां तक कि उस ने गाड़ी चलाना भी छोड़ दिया. पैर में तेज दर्द होने के चलते उसे अपने निजी काम करने में भी परेशानी होने लगी.

मजबूर हो कर राहुल को डाक्टर के पास जाना पड़ा. उसे दर्द दूर करने और दूसरी दवाएं दी गईं. इस से उसे थोड़ी देर के लिए तो आराम हो जाता, लेकिन फिर दर्द शुरू हो जाता.

पूरी जांच करने के बाद पता चला कि राहुल को ‘ड्राइवर्स फुट’ की समस्या है, जिस के चलते उस के प्लांटर फैशिया में तकलीफ हो रही थी.

यह प्लांटर फेशिया पैरों के दर्द की एक सामान्य समस्या है, जो अकसर लंबे समय तक गाड़ी चलाने से हो जाती है. ट्रैफिक जाम में इंतजार करने और 2-3 घंटे तक लगातार ड्राइविंग करने से न केवल एडि़यों में दर्द होने लगता है, बल्कि दाएं पैर में सुन्नपन महसूस होने लगता है और दर्द बढ़तेबढ़ते कमर के निचले हिस्से तक चला जाता है.

अगर इस समस्या का लंबे समय तक इलाज न कराया जाए, तो दर्द बढ़ जाता है, जिसे ‘प्लांटर फैशिया’ कहते हैं. इस के साथसाथ एड़ी और फुट की बाल में भी दर्द होता है.

क्या है ‘ड्राइवर्स फुट’

यह पैरों के दर्द की एक सामान्य समस्या है, जो ज्यादातर ड्राइवरों को हो जाती है. अगर इस समस्या का इलाज न कराया जाए, तो इस से कई दूसरी बड़ी समस्याएं पैदा हो जाती हैं.

जो लोग लंबे समय तक लगातार ड्राइविंग करते हैं, उन्हें इस समस्या का शिकार होने का डर ज्यादा होता है. आमतौर पर दर्द पैर की एडि़यों में महसूस होता है. पैर के अंगूठे में भी तेज दर्द होता है, फुट की आर्च में भी सूजन आ जाती है और फुट के अंगूठे की बाल में भी लगातार दर्द होता है, क्योंकि यह हिस्सा लगातार ऐक्सिलेटर पर रहता है. ट्रैफिक जाम इस दर्द को ज्यादा बढ़ा देता है, क्योंकि इस दौरान लंबे समय तक पैर एक ही हालत में रहता है.

ये हैं लक्षण

फुट की बाल में दर्द होना

पैर का वह भाग, जो पैडल से टच होता है, उस में सब से ज्यादा दर्द होता है. लगातार पैडल को दबाने से दर्द और बढ़ जाता है, जिस के चलते पैरों की उंगलियों पर खरोंचें आ जाती हैं और हड्डियों में तेज दर्द होता है.

एडि़यों में दर्द होना

ड्राइविंग करते समय हमेशा एडि़यां गाड़ी के फर्श पर होती हैं, इस से उन में खरोंच आ सकती है और दर्द हो सकता है. ब्रेक लगाने, ऐक्सिलेटर दबाने वगैरह से यह दर्द और बढ़ सकता है.

पैरों के अगले हिस्से में दर्द होना

ज्यादा ट्रैफिक में लंबे समय तक पैडल को दबाने से पैरों में तनाव हो सकता है. इस से पंजों के आगे के हिस्से में दर्द हो सकता है.

हालांकि, यह दर्द तुरंत गायब हो जाता है, लेकिन जो लोग रोजाना लंबी दूरी तक ड्राइविंग करते हैं या पेशेवर ड्राइवर हैं, उन्हें इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर समय रहते इलाज न कराया जाए, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं.

फुट की आर्च में सूजन हो जाना

आमतौर पर जिन लोगों को इस तरह की समस्या होती है, उन्हें एड़ी और फुट की आर्च में तेज दर्द होता है. लंबे समय तक ड्राइव करने के बाद जब गाड़ी से उतरते हैं, तब यह दर्द और ज्यादा बढ़ जाता है.

इलाज भी है

ऐक्सरसाइज और स्ट्रैचिंग?

इस दर्द से आराम पाने के लिए सब से पहला जरूरी और आसान उपाय है कि स्ट्रैचिंग और ऐक्सरसाइज करें. स्ट्रैचिंग सब से अच्छा उपाय है, क्योंकि इस से एडि़यों, आर्च और बाल सौकेट का तनाव कम होता है. लौंग ड्राइव से बचें, ज्यादा भारी सामान उठाने से तुरंत आराम मिल जाता है. शरीर के प्रभावित क्षेत्र पर दिन में कई बार 20-30 मिनट तक बर्फ लगाएं, इस के साथ ही प्लांटर फैशिया और एचिलिस टेंडन को स्ट्रैच करने के लिए ऐक्सरसाइज करें. इस से न केवल आप को आराम मिलेगा, बल्कि दोबारा यह समस्या होने का डर भी कम हो जाएगा.

दवाएं

शुरुआती दौर में हील पैड्स के साथ सूजन कम करने वाली दवाएं ही  काफी रहती हैं.

सर्जरी 

बहुत ही कम मामलों में सर्जरी की जरूरत होती है. अगर समय के साथ हालात गंभीर हो जाते हैं और अगर दवाओं से भी इलाज न हो पाए, तो डाक्टर सर्जरी करने की सलाह भी दे सकते हैं.

ऐसे करें रोकथाम

  • अगर आप लंबे समय से ड्राइविंग कर रहे हैं, तो ऐंठन से बचने के लिए तुरंत ड्राइविंग बंद कर दें.
  • अपने पैरों के खून के बहाव को ठीक करने के लिए मसाज करें और हलके हाथ से रगड़ें. इस से मांसपेशियां रिलैक्स होंगी और ऐंठन कम हो जाएगी.
  • हमेशा आरामदायक जूते पहनें, जो आप के पैरों में अच्छी तरह फिट हों.
  • मांसपेशियों में लगातार ऐंठन, शरीर में विटामिन और इलैक्ट्रोलाइट की कमी से भी यह समस्या हो सकती है. सही मात्रा में ऐसी तरल चीजों का सेवन करें, जिन में पोटैशियम और मैग्नीशियम ज्यादा मात्रा में हो.

मेरा छोटा भाई धौंस जमाने की कोशिश करता है मैं उससे तंग आ गई हूं, क्या करूं?

सवाल

मेरे भाई का व्यवहार और मेरा व्यवहार बेहद अलग है. वह मुझ से एक साल छोटा है और धौंस जमाने की कोशिश करता है. मैं जिस लड़के के साथ रिलेशनशिप में हूं, उसे मेरा भाई बिलकुल पसंद नहीं करता. मुझे उस की पसंदनापसंद से कुछ लेनादेना नहीं है, लेकिन वह मुझे मम्मीपापा को सब बता देने की धमकी देने लगा है. इस के चलते कभी वह मुझ से पैसे मांगता है, तो कभी कालेज के प्रोजैक्ट्स बनवाता है. हम एक ही कालेज में सीनियरजूनियर हैं, इसलिए उसे यह सब पता चल गया. मैं उस से तंग आ गई हूं.

जवाब

आप का भाई आप को तंग कर रहा है तो आप भी उसे तंग करना शुरू कर दीजिए. वह आप की खोजखबर रखता है तो आप भी रखना शुरू कर दीजिए. पहले तो उसे शांति से समझाइए कि वह आप को ब्लैकमेल करना बंद करे, नहीं तो आप उस के दोस्तों के सामने उस की घर की बातें खोलना शुरू कर देंगी. वह बात समझ जाए तो ठीक, नहीं तो कालेज में उस के दोस्तों के सामने आप भी उस के एकदो राज बता दीजिए. वह दोस्तों के सामने झेंप उठेगा और आप को परेशान करना बंद कर देगा. वह आप को घर में धमकी देता है तो आप उसे कालेज में दे दीजिए. आखिर, थोड़ा शातिर तो आप को भी बनना ही होगा.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

सफेद कार का आतंक

12 जून, 2017 को गुमानी शंकर जिस वक्त कोटा से रवाना हुए, उस समय सुबह के 9 बजे थे. कारोबारी गुमानी शंकर को अपने परिवार के साथ एक वैवाहिक समारोह में भाग लेने श्यामनगर जाना था. गाड़ी वह खुद ड्राइव कर रहे थे. बगल वाली सीट पर उन का पोता हिमांशु बैठा था, जबकि पीछे की सीट पर उन की पत्नी लाडबाई और बहू सुनीता बैठी थी. उन्होंने हाईवे पर अनंतपुरा बाईपास से गुजर कर करीब एक किलोमीटर का फासला तय किया था कि रियरव्यू में उन्हें दाईं तरफ से सफेद रंग की एक कार तेजी से आती दिखाई दी.

गुमानी शंकर बहुत अच्छे ड्राइवर नहीं थे, इसलिए उन्होंने उस कार को साइड देने के लिए अपनी कार की रफ्तार कम कर ली. पीछे से आती कार तेजी से आगे निकल कर गुमानी शंकर की कार के आगे जाकर रुक गई. मजबूरी में गुमानी शंकर को अपनी कार रोकनी पड़ी.

इस से पहले कि गुमानी शंकर कुछ समझ पाते, मुंह पर ढांटा बांधे भारीभरकम एक आदमी ड्राइविंग सीट की ओर का गेट खोल कर फुरती से उन्हें परे धकेलते हुए अंदर आ घुसा और चाबी निकाल कर इग्नीशन औफ कर दिया. चाबी जेब में रख कर उस व्यक्ति ने गन चमकाई तो गुमानी शंकर की आंखें फटी रह गईं. उन के मुंह से बोल तक नहीं निकला. उस ने धमकाते हुए कहा, ‘‘खबरदार! कोई जरा भी आवाज नहीं निकालेगा.’’

गुमानी शंकर की अपनी जगह से हिलने तक की हिम्मत नहीं हुई. उस आदमी की बात से सभी समझ गए कि ये लुटेरे हैं. उस ने पहले डैश बोर्ड टटोला, उस के बाद उन के कपड़ों की तलाशी ली. उसे 30 हजार रुपए मिले, जिन्हें उस ने अपनी जेब में रख लिए.

गुमानी शंकर चाह कर भी कोई विरोध नहीं कर सके. उस ने महिलाओं के गले से मंगलसूत्र तोड़  लिए. गुमानी शंकर ने दिलेरी दिखाने की कोशिश में मुंह खोलना चाहा, लेकिन अपनी तरफ तनी हुई गन ने उन के कसबल ढीले कर दिए. तभी लुटेरों में से एक ने कहा, ‘‘जा रहे हैं सेठ, अफसोस है कि माल उम्मीद से बहुत कम मिला. अब यह सोच कर हलकान मत होना कि हम कौन हैं. बेहतरी इसी में है कि इस वारदात को ही भूल जाओ.’’

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इस के बाद लुटेरे फुरती से अपनी कार में सवार हुए और कार मोड़ कर अनंतपुरा की तरफ निकल गए. गुमानी शंकर ने कार से बाहर निकल कर उन्हें देखना चाहा, लेकिन तब तक वे आंखों से ओझल हो चुके थे. उन्होंने तत्काल मोबाइल निकाल कर पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर मिलाया. लेकिन पुलिस से संपर्क नहीं हो सका. थकहार कर वह ड्राइविंग सीट पर बैठ गए.

अब तक एक बात उन के दिलोदिमाग में घर कर गई थी कि लुटेरे सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार में आए थे और उस पर नंबर प्लेट नहीं थी. उन की भाषा भरतपुरिया लहजा लिए हुए थी, इस का मतलब वे उधर के थे.

लुटेरों का अगला शिकार गोविंदनगर निवासी सुरेंद्र नायक बने. नायक अपनी पत्नी टीना के साथ बाइक पर थे. गुरुवार 15 जून की सुबह 9 बजे नायक डीडीआई अस्पताल के मुहाने पर पहुंचे थे कि ट्रैफिक नियमों को दरकिनार करते हुए सामने से तेजरफ्तार आ रही सफेद कार को देख कर वह हड़बड़ा गए.

नायक बाइक का संतुलन संभाल पाते, उस के पहले ही कार से फुरती से निकल कर 2 ढांटाधारी युवकों ने उन्हें घेर लिया. उन में से एक ने गन दिखा कर बाइक की चाबी निकाल ली. जबकि दूसरे ने यह कहते हुए झटके से नायक की पत्नी के गले से मंगलसूत्र खींच लिया कि दिनदहाड़े इतने कीमती जेवर पहन कर घर से निकलना अच्छा नहीं है. आइंदा से इस बात को याद रखना.

कोई कुछ समझ पाता, उस के पहले ही दोनों युवक कार में बैठ कर छूमंतर हो गए. लुटेरे बाइक की चाबी भी साथ ले गए थे. नतीजतन नायक के पास हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं रहा. पीसीआर को सूचना दी गई तो थोड़ी देर में पुलिस की टीम वहां पहुंच गई, लेकिन तब तक उन के करने के लिए कुछ नहीं बचा था. ताज्जुब की बात यह थी कि भीड़भरी सड़क पर इतनी बड़ी वारदात हो रही थी और किसी ने उन की मदद नहीं की.

अगले 8 दिनों में कोटा महानगर के अलगअलग इलाकों में दिनदहाड़े लूट की एक दरजन वारदातों ने शहर में तहलका मचा दिया. बदमाश बेखौफ हो कर हाईवे पर दिनदहाड़े हथियारों के बल पर जिस तरह लूटपाट कर रहे थे, पुलिस के लिए खुली चुनौती थी.

हर वारदात में बिना नंबर की स्विफ्ट डिजायर कार और गन के साथ लूटपाट करने वाले दो ढांटाधारी युवकों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया था कि सभी वारदातें एक ही गिरोह कर रहा है. क्योंकि हर वारदात का स्टाइल एक जैसा था. ट्रैफिक नियमों को धता बताते हुए अचानक शिकार के सामने नमूदार होना और गन दिखा कर जो भी मालमत्ता मिले, लूट कर भाग जाना.

लूटी जाने वाली कार और बाइक सवार को निहत्था करने के मकसद से चाबी साथ ले जाना भी उन की वारदात में शामिल था, ताकि उन का पीछा न किया जा सके. वारदातों से सहमे लोगों में भरोसा बनाए रखने के लिए एसपी अंशुमान भोमिया ने मीडिया के जरिए लोगों को आश्वस्त किया कि लूट के मामलों की गहराई से जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि अपराधियों और अपराध में इस्तेमाल की जा रही कार के बारे में पता लगाया जा रहा है. अपराधी जल्दी ही पुलिस की गिरफ्त में होंगे. इस बीच पुलिस यह जान चुकी थी कि लुटेरों की कार का नंबर आरजे25 सीए 4717 है.

लुटेरे सिर्फ कोटा तक ही सीमित रहे हों, ऐसा नहीं था. जब एसपी अंशुमान भोमिया अपने मातहतों के साथ लूट की घटनाओं की समीक्षा कर रहे थे, उन्हें चौंकाने वाली सूचना मिली कि लूट की ऐसी ही वारदातें बूंदी, टोंक, बारां और उदयपुर में भी हो चुकी हैं.

लुटेरे जीआरपी थाना क्षेत्र, सवाई माधोपुर में 2 ट्रेनों में भी लूट की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं. ट्रेनों में लूटपाट के दौरान उन्होंने सिर्फ महिलाओं को ही निशाना बनाया था. उन्होंने महिलाओं से कहा था कि किसी भी तरह की गलत हरकत से बचना चाहती हैं तो बिना देर किए जेवर उतार कर दे दें. डरीसहमी महिलाओं ने एक पल की भी देर नहीं की थी.

एक तरफ पुलिस सफेद स्विफ्ट डिजायर कार वाले लुटेरों की तलाश में भटक रही थीं तो दूसरी तरफ उन की गतिविधियां चरम पर थीं. हालात दिनोंदिन पेचीदा होते जा रहे थे. इस पर कोटा संभाग के आईजी विशाल बंसल ने एसपी अंशुमान भोमिया को सलाह दी कि लुटेरों को गिरफ्तार करने के लिए विशेष दल का गठन कर के कोटा, बूंदी और टोंक पुलिस का जौइंट औपरेशन शुरू कराएं.

एसपी अंशुमान भोमिया लुटेरों को पकड़ने के लिए एडीशनल एसपी अनंत कुमार के निर्देशन में डीएसपी शिवभगवान गोदारा, राजेश मेश्राम, सीआई अनिल जोशी, लोकेंद्र पालीवाल, धनराज मीणा, शौकत खान, रामनाथ सिंह और सर्किल इंसपेक्टर श्रीचंद को शामिल कर के विशेष टीमों का गठन कर दिया.

पहली टीम सीआई लोकेंद्र पालीवाल की अगुवाई में कोटा, बूंदी हाईवे पर नजर रख रही थी, जबकि दूसरी टीम अनिल जोशी के नेतृत्व में मुखबिर तंत्र के जरिए शहर से रिसने वाली सूचनाएं खंगाल रही थी. बूंदी और टोंक पुलिस ने भी अपने खुफिया तंत्र को हाईवे पर मुस्तैद कर दिया था.

बूंदी के एसपी राजेंद्र सिद्धू के निर्देशन में लुटेरों की तलाश में जुटी पुलिस की जांच में 2 बातें सामने आईं. पहली तो यह कि लुटेरे नाकों से गुजरने से बच रहे थे, साथ ही उन के निशाने पर वही लोग होते थे, जिन के साथ महिलाएं होती थीं. लुटेरे जरूरत से ज्यादा दुस्साहसी थे. यही वजह थी कि वे हर वारदात में एक ही स्विफ्ट डिजायर कार इस्तेमाल कर रहे थे और घूमफिर कर उन्हीं इलाकों में वारदात कर रहे थे.

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पुलिस ने लूट में इस्तेमाल की जा रही कार को टारगेट कर के पूरे कोटा शहर की कड़ी नाकेबंदी कर दी. नाकेबंदी के दौरान करीब एक हजार कारों को चैक किया गया, लेकिन निराशा ही हाथ लगी.

लुटेरों की टोह में पुलिस पूरी तरह सक्रिय थी, लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लग रही थी. कशमकश के दौरान एसपी अंशुमान भोमिया के दिमाग में एक खयाल कौंधा, हालांकि खयाल दूर की कौड़ी था, लेकिन टटोलने में कोई हर्ज नहीं था.

दूर की यह कौड़ी 31 मई की वारदात से जुड़ी थी, जिस में जीआरपी पुलिस ने जयपुर सुपरफास्ट में लूटपाट करने वाले अबरार और सोनू मीणा नाम के 2 लुटेरों को सवाई माधोपुर से पकड़ा था. पूछताछ में उन्होंने अपने 2 साथियों के नाम भी बताए थे, जो फरार हो गए थे.

जीआरपी थानाप्रभारी गंगासहाय शर्मा के मुताबिक उन के नाम वारिस उर्फ भूरिया तथा राजेश मीणा थे. अंशुमान भोमिया ने एडीशनल एसपी अनंत कुमार शर्मा को मन की बात बताई तो वह भी सहमत हो गए. उन के बारे में पुलिस को जो पुख्ता जानकारी हासिल हुई, उस के मुताबिक, दोनों ही जेल से हाल ही में छूटे थे.

21 जून बुधवार की रात जौइंट औपरेशन के तहत अनंत कुमार शर्मा अपनी गाड़ी से गश्त कर रहे थे. अचानक वायरलैस से उन्हें सूचना मिली कि लुटेरे टोंक जिले में वारदात करने के बाद उनियारा की तरफ जा रहे हैं. बूंदी के एसपी राजेंद्र सिद्धू को इस बाबत सूचना मिल चुकी थी और उन की हिदायत पर लाखेरी और इंद्रगढ़ पुलिस स्विफ्ट डिजायर कार का पीछा कर रही थी.

राजेंद्र सिद्धू ने टोंक और उनियारा पुलिस को भी सतर्क कर दिया था. सूत्रों से पता चला कि स्विफ्ट डिजायर कार में बैठे लुटेरों ने खतरा भांप कर इंद्रगढ़ लाखेरी पुलिस पर फायर भी किया था, लेकिन उन्होंने पीछा करना नहीं छोड़ा.

पुलिस के इस जौइंट औपरेशन में कोटा, बूंदी और टोंक पुलिस ने लुटेरों को चारों ओर से घेर लिया. नतीजतन टोंक जिले के थाना सोंप में पुलिस ने उन्हें कल्याणपुरा पायगा गांव के पास रोक लिया. पकड़े गए युवक वारिस उर्फ भूरिया तथा राजेश मीणा थे. अनंत कुमार शर्मा भी पुलिस टीम के साथ पहुंच गए थे. थाना सोंप में काररवाई के बाद दोनों लुटेरों और जब्त कार को लाखेरी, इंद्रगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया.

पुलिस उन्हें ले कर बूंदी के लिए रवाना हुई. उन के पास भारी संख्या में जेवरात के अलावा 66 हजार रुपए नकद, एक देशी कट्टा और रिवौल्वर था. पूछताछ में उन्होंने बूंदी और सवाई माधोपुर में वारदातों के अलावा कोटा हाईवे पर की गई वारदातों को भी स्वीकार किया. बूंदी में 5 मामले दर्ज होने से लुटेरों को पहले बूंदी पुलिस को सौंपा गया.

अनिल कुमार शर्मा कोटा पहुंचे तो 2 अन्य लुटेरों के पकड़े जाने की सूचना मिली. इन के नाम मनोज उर्फ बंटी तथा दानिश थे. दोनों के कब्जे से 2 भरी हुई पिस्टलें बरामद हुई थीं. अंशुमान भोमिया के मुताबिक आरोपियों से शुरुआती पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है कि उन्होंने कुछ समय पहले ही यह कार सवाई माधोपुर के एक व्यक्ति से डेढ़ लाख रुपए में खरीदी थी. लेकिन सौदे की रकम अभी तक नहीं चुकाई गई थी.

एसपी भोमिया ने बताया कि लुटेरों ने वारदातों में जिस कार का उपयोग किया था, उस के आगेपीछे के 4 और 7 नंबर साफ कर दिए गए थे. इस से 17 का अंक ही नजर आ रहा था. उन्होंने बताया कि नाकेबंदी के दौरान एक हजार से ज्यादा सफेद स्विफ्ट डिजायर कारों को चैक किया गया था. फिलहाल आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों के आधार पर

संतरा खाने से भी हो सकती है कई बीमारियां, जानिए इसके नुकसान

संतरा का स्वाद भला किसी अपनी तरफ आकर्षित नहीं करता, इसमें एस्कॉर्बिक एसिड यानी विटामिन सी की भरपूर होता है, जिसके जरिए इम्यूनिटी बूस्ट की जा सकती है. जिसके बाद वायरल इंफेक्शन का खतरा कम हो जाता है. ऐसे में सर्दी, खांसी, जुकाम और फ्लू जैसी बीमारियां ज्यादा परेशान नहीं करतीं. भले ही संतरे में फायदों की भरमार है, लेकिन कई मामलों में इसके नुकसान भी सामने आ सकते हैं.

1. एलर्जी

संतरा खाने एक गंभीर खतरा हो सकता है, वो है एलर्जी. ये खतरनाक स्थिति उन लोगों को प्रभावित कर सकती है जिन्होंने संतरे को कभी भी पहले नहीं खाया है. संतरे के कारण स्किन में जलन और खुजली हो सकती है, इसके साथ कुछ लोगों की त्वचा लाल हो जाती है.इसके अलावा, संतरे के सेवन से इंसान को गले में सूजन, फेफड़ों में समस्या, और आंखों में एलर्जी की शिकायत हो सकती है.

2. फोटोटॉक्सिसिटी

संतरे के बीजों में खास तौर से लिमोनिन पाया जाता है. ये एक उच्च प्रकार की फाइटोकेमिकल होते है जिसे सीमित मात्रा में खआना चाहिए. इसमें त्वचा में सूजन होने लगती है और सूरज की किरणों का असर स्किन पर होने लगता है. संतरे के कारण आप फोटोटॉक्सिसिटी  के शिकार बन सकते हैं.

3. साइट्रस सेंसिटिविटी

कई लोग खट्टे फल और सब्जियों के प्रति संवेदनशीद होते हैं, इस परेशानी को साइट्रस सेंसिटिविटी कहा जाता है, इससे बचने के लिए लिए आपको संतरे और नींबू का सेवन बेहद कम कर देना चाहिए वरना होंठ, जुबान और गले में चुभन या खुजली पैदा हो सकती है.

सैक्स स्प्रे : दे मजबूती चरम तक

अच्छा सैक्स पार्टनर वही है, जो दूसरे को चरम तक पहुंचाए, लेकिन कई मर्द पहले ही ढेर हो जाते हैं. ऐसे में सैक्स स्प्रे आप की मदद कर सकता है.

अकसर कई लोगों के दिमाग में यह सवाल चलता रहता है कि पोर्न फिल्मों में दिखाए गए मर्द इतनी ज्यादा देर तक लगातार सैक्स कैसे कर लेते हैं? वे अपनी कल्पना के घोड़ों को दौड़ाते हैं और सोचते रहते हैं कि इतने लंबे समय तक सैक्स करने से उन्हें अच्छाखासा टाइम मिल जाता है और वे सैक्स की हर पोजीशन को ऐंजौय कर पाते हैं.

सैक्स एक ऐसा मुद्दा है, जिस में आम आदमी पोर्न फिल्मों से तो सैक्स की अलगअलग पोजीशन सीख लेते हैं और मन में अपनी पार्टनर के साथ उसी तरह की सैक्स पोजीशन ट्राई करने को मन उबाल मार रहा होता है, पर जब बात सच में अपनी पार्टनर के साथ बिस्तर पर समय बिताने की आती है, तो मुश्किल से 2 मिनट भी टिक नहीं पाते और जल्दी पस्त हो जाते हैं.

उत्तर प्रदेश के 34 साल के मिथिलेश कुमार की भी कुछ ऐसी ही कुंठाएं थीं. पहले पढ़ाई, फिर कमाईधमाई की जद्दोजेहद में शादी देर से हुई. 30 साल का हुआ, परिवार को पालने लायक बना तो शादी की.

सैक्स को ले कर मिथिलेश के मन में कई अरमान थे कि पत्नी के साथ ऐसे होगा, वैसे होगा. दोस्तों से भी टिप्स लीं, पोर्न साइट पर सैक्स पोजीशन खूब देखीं. शादी से 2 महीने पहले दूध में हलदी डाल कर खूब पिया, पर शादी की रात वह पत्नी के सामने जल्दी ढेर हो गया. उसे पता चला कि उस की माइलेज इतनी नहीं है. उस के अंग का तनाव 15-20 सैकंड में ही ढीला पड़ गया.

मिथिलेश को पहले यह शादी की घबराहट जैसा लगा, लेकिन बाद में भी उस का काम बहुत जल्दी हो जाता, जबकि पत्नी अभी शुरू भी नहीं हो पाती थी. इस से उसे लगा कि वह सैक्स में अच्छा नहीं है.

मिथिलेश जैसे कई मर्दों के मन में यह चीज ठहर जाती है और वे तनाव महसूस करने लगते हैं. इस तनाव में वे सैक्स को ले कर और ज्यादा भ्रमित करने वाली चीजों का इस्तेमाल करने लगते हैं.

कई तो नीमहकीम के चक्कर लगाने शुरू कर देते हैं और अपनी जेब कटवा रहे होते हैं. सही जानकारी की कमी में वे गलत तरीके अपनाने लगते हैं और आखिर में होता यह है कि वे अपनी सैक्स लाइफ ही बरबाद कर बैठते हैं.

हर मर्द चाहता है कि वह सैक्स के दौरान लंबे समय तक टिक सके या सैक्स का लंबे समय तक मजा उठा सके. वैसे तो सैक्स में आधा काम साइकोलौजी यानी मन के विज्ञान का होता है यानी मन पर काबू कर के सही टाइमिंग से सैक्स का मजा उठाया जा सके, जैसे लंबे समय तक सैक्स के लिए कहां और कैसे ऊर्जा खर्च करनी है, कितना फोरप्ले करना है, कब इंटरकोर्स करना है और उस दौरान कब खुद पर काबू पाना है वगैरह.

पर अगर ऐसा न हो पाए तो? इस के लिए बाजार में ऐसे बहुत से प्रोडक्ट हैं, जिन से सैक्स का ज्यादा समय तक मजा उठाया जा सकता है. बस समस्या आती है सही जानकारी की कि ऐसे प्रोडक्ट हैं कौन से और इन का इस्तेमाल कैसे किया जाए. बहुत से लोगों को सही प्रोडक्ट मिल भी जाते हैं, पर वे उन का इस्तेमाल ठीक से नहीं कर पाते हैं, जिस के चलते बात वहीं की वहीं आ ठहरती है.

ऐसे में हम बताएंगे कि अंग को लंबे समय तक तनाव में रखने वाले वे प्रोडक्ट, जिन से अच्छे सैक्स का मजा उठाया जा सके.

बहुत से लोग लंबी सैक्स ड्राइव के लिए सिर्फ वियाग्रा गोली को ही जानते हैं. चूंकि यह गोली होती है, जिसे निगलना होता है, तो बहुत से लोग घबराते हैं कि कहीं इस के साइड इफैक्ट न हो जाएं. निराश मत होइए, क्योंकि बाजार में ऐसे बहुत सारे सैक्स स्प्रे हैं, जिन का इस्तेमाल खूब होता है.

क्या है सैक्स स्प्रे

कई मर्द अपनी सैक्स टाइमिंग बढ़ाना चाहते हैं, क्योंकि लंबे समय तक सैक्स करने से चरमसुख मिलता है. यह औरत साथी को काफी अच्छा लगता है.

हर मर्द यह चाहता है कि सैक्स के दौरान उस की पार्टनर उस से संतुष्ट हो, क्योंकि सैक्स का मजा तभी दोगुना होता है, जब सैक्स के दौरान दोनों पार्टनर एकदूसरे में खो जाएं, इसलिए अपनी पार्टनर को खुश करने के लिए मर्द इस तरह के स्प्रे का इस्तेमाल कर सकते हैं.

यह स्प्रे मर्दों के लिए बनाया गया है. अगर आप सैक्स दवाएं खाने से बचना चाहते हैं, तो इस तरह के स्प्रे का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है.

स्प्रे का इस्तेमाल ऐसे अमेजन पर दी गई जानकारी के मुताबिक, सैक्स स्प्रे का इस्तेमाल 21 साल या उस से ज्यादा उम्र के मर्द कर सकते हैं. यह शरीर पर लगाने वाले डियोड्रैंट की तरह होता है. इस को अपने प्राइवेट एरिया यानी मर्दाना अंग के ऊपर स्प्रे करना होता है.

उदाहरण के लिए बोल्ड केयर का टौपिकल स्प्रे है. यह मर्दों के लिए बना स्प्रे है. इस को सैक्स करने के 10-15 मिनट पहले अपने अंग के ऊपरी हिस्से पर 10 सैंटीमीटर की दूरी से स्प्रे करना होता है. इसे एक से ले कर 4 बार ही स्प्रे करना होता है.

कंपनी का दावा है कि इस से अंग पूरी तरह से सख्त हो जाता है. तकरीबन 100 ग्राम स्प्रे की कीमत 300 रुपए से ले कर 500 रुपए के बीच होती है.

अंग के सख्त हो जाने के बाद एक टिशु से अंग को साफ करना होता है. ऐसे ही अपने हाथ धो लेने होते हैं. इस स्प्रे से सैक्स टाइमिंग बढ़ जाती है.

बाजार में मिलने वाले सैक्स स्प्रे

कई लोग इस बात की चिंता में रहते हैं कि वे इसे ले लें, पर उन्हें पता नहीं होता कि इस तरह के स्प्रे कौन से ब्रांड के मुहैया हैं. ऐसे में कई कंपनियां हैं, जो सैक्स स्प्रे बनाती हैं, जिन के कुछ नाम यहां बताते हैं, जैसे जोवान कंपनी का ‘सैक्स अपील’ स्प्रे है. यह 150 मिलीलिटर में आता है. इस की कीमत बाजार में 500 से 1,000 रुपए के बीच है.

बोल्ड केयर का ‘गोल्ड टौपिकल स्प्रे’ है. यह काफी बेहतर माना जाता है.  इस कंपनी का 20 ग्राम का स्प्रे तकरीबन 500 रुपए तक में आता है.

किंडले का ‘सैक्स स्प्रे’ है. यह नौनअल्कोहोलिक है. इसे खूब पसंद किया जाता है. इस 20 ग्राम के स्प्रे की कीमत 400 रुपए के आसपास है.

मैन मैटर्स का ‘एंडयोर स्प्रे’ है. इस की कीमत 400 रुपए है. यह 14 ग्राम की स्प्रे बोतल में आता है. डाक्टर मोरपेन ‘डिले एक्सीग्रा स्प्रे’ की कीमत 400 रुपए के आसपास है, यह 20 ग्राम का है. ऐसे ही एक ‘विगोर स्प्रे’ भी आता है.

कैसे काम करता है

अब जानना जरूरी है कि यह स्प्रे काम कैसे करता है. दरअसल, यह स्प्रे स्किन को हलके से सुन्न करता है, जिस से सैक्स टाइमिंग बढ़ती है और क्लाइमैक्स को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.

यह लिडोकेन और आइसोप्रोपिल अलकोहल से बना होता है. यह स्प्रे 10 मिनट के भीतर अपना असर दिखाना शुरू करता है. इतना ही नहीं, यह नौनट्रांसफरेबल फार्मूले पर काम करता है यानी पार्टनर को इस का अहसास नहीं होता है.

प्रीमैच्योर इजैकुलेशन जैसी समस्या में यह स्प्रे गेम चेंजर साबित हो सकता है. यह स्किन पर एनेस्थैटिक के रूप में काम करता है, जो संवेदनशीलता को तो कम करता है, लेकिन मजे को कई गुना बढ़ा देता है. इस से मर्द के पस्त होने में देरी होती है.

ऐसे हालात में न करें इस्तेमाल

क्लाइमैक्स स्प्रे का इस्तेमाल करने से साइड इफैक्ट हो सकते हैं, लेकिन ये साइड इफैक्ट आमतौर पर महसूस नहीं होते. ऐसे में ध्यान रहे, जब भी त्वचा पर चकत्ते आएं, खुजली हो, इस्तेमाल वाली जगह पर जलन महसूस हो या अनिद्रा जैसे लक्षण दिखें, तो इसे इस्तेमाल करना रोक दें. बेहतर होगा कि तुरंत डाक्टर से सलाह लें, जिस से कि आप को कोई गंभीर समस्या न हो.

ऐसे में कुछ तरह की सावधानियां इस तरह के स्प्रे इस्तेमाल करते हुए बरतें, जैसे :

* यह स्प्रे मर्दों के इस्तेमाल के लिए होता है.

* अगर आप ग्लूकोमा की बीमारी से पीडि़त हैं या आप हाइपर सैंसेटिव हैं, तो इस स्प्रे का इस्तेमाल न करें.

* यह स्प्रे अंग पर लगाने के लिए है और केवल बाहरी इस्तेमाल के लिए होता है.

* इस स्प्रे को इस्तेमाल करते समय आंखों को दूर रखें. सांसों से भी दूर रखना चाहिए.

* स्प्रे को 10 बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और सैक्स करने के बाद अंग को अच्छे से साफ करना चाहिए.

* अगर आप को इस में मौजूद सामग्री से एलर्जी है, तो इस का इस्तेमाल न करें.

* अगर आप पहले से ही कोई विटामिन ले रहे हैं, तो इस स्प्रे का इस्तेमाल करने से पहले डाक्टर की सलाह जरूर लें.

* इस स्प्रे को अलकोहल के साथ इस्तेमाल में न लें.

 

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