Story in Hindi
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भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह आए दिन किसी ना किसी वजह से सुर्खियों में रहती है कभी उनके गानें उनको चर्चा में बनाएं रखते है तो कभी उनकी सोशल मीडिया पोस्ट वायरल होती रहती है लेकिन हाल में कुछ ऐसा हुआ कि एक्ट्रेस को शो छोड़कर भागना तक पड़ गया. दरअसल, एक्ट्रेस एक स्टेज शो में पहुंची थी. जहां हजारों की तदाद में भीड़ जमा हुई थी, एक्ट्रेस का गाने को का शो था, लेकिन भीड़ अक्षरा को देख कर काफी बेकाबू हो गई और हंगामा शुरु कर दिया. ये देख शो में अफरा-तफरी मच गई. मौजूद बाउंसर भी कुछ नही कर सकें.
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आपको बता दें, कि अक्षरा सिंह का गणपति के महोत्सव में एक शो था जो कि यूपी के जौनपुर में था. जहां गाने के लिए एक्ट्रेस को बुलाया गया था. यहां हजारों की तदाद मे लोग इकठ्टा हुए थे. लेकिन अक्षरा सिहं के गाना गाते ही यहा भीड़ में हंगामा शुरु हो गया. लोगों ने एक-दूसरे के ऊपर कुर्सियां फैंकनी शुरु कर दी. शो में पुलिस और 300 बाउंसर मौजूद थे. जो कि भीड़ का कंट्रोल नहीं कर पाएं.बता दें, अक्षरा सिंह ने दो गाने गाए थे, लेकिन जैसे ही वो तीसरा गाना गाने लगी तो भीड़ ने शोर मचाना शुरु कर दिया और हंगामा शुरु हो गया. ये प्रोग्राम शाम का था.
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ये शो आईएएस अभिषेक सिंह की ओर से था. जिसका आयोजन टीडी कॉलेज के मैदान में रखा गया था, जहां जनता स्टार्स को गाना गाते देख बेकाबू हो गई, लेकिन इसके पीछे की वजह यह थी, कि गणेश उत्सव में अश्लील गाने गाए जा रहे थे, जिसका लोगों ने जमकर विरोध किया. ये देख जनता आग बबूला हो गई और कुर्सियां फैंकनी शुरु कर दी. इसी दौरान हनी सिंह और अक्षरा सिंह मौके से भाग निकले. वही,बवाल के दौरान कई लोगों को चोटें भी आई.
सलमान खान के हिट शो बिग बॉस ओटीटी2 के विनर एल्विश यादव इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में छाए हुए है, कभी उनका लाइव आना, कभी उनकी कोई वीडियो उनको चर्चा में ले आती है. ऐसे में अब एल्विश यादव को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है जिसे सुनकर शहनाज गिल भी हैरान रह गई है.
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आपको बता दें, कि हाल में एल्विश यादव शहनाज गिल के शो ‘देसी वाइब्स विद शहनाज गिल’ में नजर आए थे, जहां उन्होने शहनाज से ढेर सारी बातें की है.और बातों-बातों में उन्होने बताया कि अबतक उन्हे बिग बॉस विनर बनने के बाद भी जितने की राशी 25 लाख रुपए नहीं मिले है. ये बात सामने आते ही हर कोई सुनकर हैरान है यहां तक की खुद शहनाज गिल भी दंग रह गई.
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एल्विश शो में ये भी बताते है कि शो में जाने से पहले उन्होने कई बार पूछा था कि वाइल्ड कार्ड एंट्री को वोट मिलते है न? तब मेकर्स की तरफ से जवाब आया था कि वाइल्ड कार्ड को वोट मिलेंगे तो ज़रुर जिताएंगे. याद दिला दें कि एल्विश यादव ने बिग बॉस में ताबड़तोड़ वोटिंग हासिल की थी, जबकि वे वाइल्ड कार्ड एंट्री से शो में आए थे, लेकिन फिर भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुए और फिनाले में अभिषेक मल्हान को मात दी है. इसके बाद बातों ही बातों में बताया कि उन्हे ट्रॉफी तो मिली लेकिन अभी तक 25 लाख का कैश नहीं दिया है.
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इंटरव्यू के दौरान एल्विश के पास दो मोबाइल फोन थे, तो शहनाज ने पूछा कि वो तीसरा फोन कब खरीद रहे है. तो इस पर एल्विश कहते है कि उनके पास तीन पहले से फोन है तो इस पर तपाक से शहनाज पूछती है कि चौथा फोन कब ले रहे हो.इस सवाल पर एल्विश जवाब देते है कि चौथा भी ले लेंगे. जब बिग बॉस वाले 25 लाख रुपए भेज देंगे. ये सुनकर शहनाज गिल पहले हैरान होती है फिर कहती है ‘ये तो गलत है’.
32 साल के निर्मल के सामने यह दिक्कत थी कि जब भी वह अपनी पत्नी के पास हमबिस्तरी के लिए जाता था, जल्दी ही पस्त हो जाता था. यह बात उस ने अपने दोस्त संदीप को बताई, तो वह बोला, ‘‘दिक्कत की कोई बात नहीं. तू किसी भी मैडिकल स्टोर पर जा कर सैक्स की गोली मांग लेना. एक घंटे पहले खा लेना, फिर देखना कि कितना असर होता है. रातभर भी थकेगा नहीं.’’
संदीप की बात सुन कर निर्मल ने वही किया. पर इस के बाद उसे अलग तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा. गोली खाने के बाद उस के अंग में तनाव तो आ गया, पर उस की सांसें तेज चलने लगीं, मन घबराने लगा, जिस से वह हमबिस्तरी कर ही नहीं पा रहा था.
जब थोड़ी देर तक यही माहौल बना रहा, तो संदीप पास वाले डाक्टर के पास गया और पूरी बात बताई.
डाक्टर ने जांच की और बताया, ‘‘तुम्हें ब्लड प्रैशर की बीमारी है. दवा खाने से ब्लड प्रैशर बढ़ गया है. जब ब्लड प्रैशर नौर्मल होगा, तभी यह परेशानी दूर होगी.’’
सैक्स के दौरान अंग जब सही तरह से उत्तेजित नहीं होता, तो सैक्स करने में मजा नहीं आता. कई बार अंग औरत में प्रवेश ही नहीं कर पाता. इस की वजह से शीघ्रपतन भी हो जाता है.
यह समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है. सब से बड़ी दिक्कत यह होती है कि इस मुद्दे पर खुल कर बात नहीं होती है. लोग चोरीछिपे दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, डाक्टर की सलाह नहीं लेते हैं. आधीअधूरी जानकारी हासिल कर के सैक्स की गोलियों का सेवन करते हैं.
सैक्स के लिए सब से मशहूर और कारगर दवा का नाम ‘वियाग्रा’ है, पर दूसरी दवाओं की तरह इस के बेवजह इस्तेमाल के खतरनाक नतीजे हो सकते हैं. लिहाजा, बिना सोचेसमझे सैक्स की गोलियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. खासकर नौजवान अपनी मर्दानगी बढ़ाने, लंबे समय तक मजा लेने और अपने पार्टनर के सामने शर्मिंदा न हों, इस डर से ‘वियाग्रा’ जैसी दवा का सेवन करते हैं, जो जोखिम भरा कदम भी हो सकता है.
अब ‘वियाग्रा’ जैसी कई गोलियां बाजार में बिक रही हैं. इन दवाओं को बेचने वाले ही इस के सब से बड़े प्रचारक होते हैं, जबकि इन गोलियों का बिना जानेसमझे इस्तेमाल करना बड़ा ही खतरनाक होता है.
सैक्स की गोलियों का इस्तेमाल अमूमन उन लोगों को करना चाहिए, जिन्हें नामर्दी की समस्या हो. अगर किसी आदमी को थोड़ी सी मेहनत से छाती में दर्द होता हो और उस की सांस लेने की गति तेज हो जाती हो, तो उसे बिना डाक्टर की सलाह के सैक्स की गालियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि कभीकभी इस के खतरनाक साइड इफैक्ट हो जाते हैं, जो जिंदगीभर के लिए तकलीफ की वजह बन जाते हैं.
तमाम लोग इन सैक्स की गोलियों के आदी होते हैं, जिस से वे कई तरह की बीमारियों से घिर जाते हैं. इस के साइड इफैक्ट बेहद ही खतरनाक हो जाते हैं. आंखों पर इस का बुरा असर पड़ सकता है, जिस से इनसान हमेशा के लिए अंधा भी हो सकता है.
सैक्स की गोलियों के सेवन से कई बार अंग में लंबे समय तक उत्तेजना बनी रहती है. ऐसे में अंग की नसों पर खराब असर पड़ता है. इस के साथ ही सिरदर्द, चक्कर आना, आंखों पर प्रभाव, गरमी लगना, नाक का बंद होना और जी मिचलाना जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं.
इस के साथ ही साथ सीने में दर्द, सांस की समस्या, घुटन, पलक और चेहरे में सूजन और हार्ट अटैक तक आ सकता है.
एचआईवी के मरीज अगर रिटोनविर नाम की दवा ले रहे हैं, तो वे सैक्स की गोलियों का इस्तेमाल करने से बचें. अगर आप को हार्ट अटैक या फिर स्ट्रोक हो चुका है, तो सैक्स की गोलियो का मनमाना इस्तेमाल बेहद खतरनाक हो सकता है.
जो लोग ब्लड प्रैशर की दवा ले रहे हैं या जिन्हें डाइबिटीज है, तो उन्हें भी ऐसी दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. किडनी की परेशानी है, तो डाक्टर की सलाह के बिना सैक्स की दवाएं कदापि न लें.
सैक्स की गोलियों में नाइट्रिक औक्साइड का इस्तेमाल किया जाता है. यह शरीर की नसों पर खतरनाक असर डालता है. अंग में तनाव के लिए गोली शरीर में खून का संचार बढ़ा देती है, जो कई बार खतरा पैदा कर देता है.
सैक्स की गोलियां खाली पेट लेते हैं, तो वे जल्दी असर करती हैं. खाना खाने के बाद असर कम होता है. ऐसे में ज्यादातर लोग खाली पेट उन्हें लेते हैं, जिस से दवा शरीर पर बुरा असर डालती है. सैक्स की गोलियां सैक्स के एक घंटे पहले लेनी चाहिए. कई बार इस्तेमाल के बाद भी अंग में तनाव और दर्द 4 घंटे से ज्यादा बना रहता है.
बाजार में कई तरह की नकली दवाएं भी बेची जाती हैं. उन से भी नुकसान होता है. ऐसे में सैक्स की गोलियों का इस्तेमाल डाक्टर की सलाह पर बहुत सावधानी से करें.
जब जब इश्क की कलम से दिल के कागज पर मोहब्बत की इबादत लिखी गई है, तबतब मोहब्बत करने वाले फना हुए हैं. इस तरह की कहानी में तब और दिलचस्प मोड़ आया है, जब वह त्रिकोण प्रेम पर आधारित हुई है और प्रेम त्रिकोण की कहानी में अकसर खूनी खेल सामने आता है. कुछ ऐसा ही इस त्रिकोण प्रेम में भी हुआ.
8 दिसंबर, 2017 की अलसाई सुबह चटख धूप के साथ खिली. लोग अपने घरों से निकल कर अपनी दिनचर्या में रम रहे थे.
उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के बिलरियागंज थाने के भदाव गांव के कुछ लोग अपने खेतों की तरफ जा रहे थे. तभी गांव से बाहर कच्ची सड़क से दाईं ओर करीब 500 मीटर की दूरी पर कुदारन तिवारी के खेत में सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार लावारिस हालत में खड़ी दिखी. उत्सुकतावश लोग उस कार की ओर चले गए कि सुबहसुबह खेत में किस की कार खड़ी है.
लोगों ने जब कार के भीतर झांक कर देखा तो भीतर कोई नहीं था. कार का नंबर था यूपी53सी 3262. कार से कुछ दूरी पर एक युवक की लाश पड़ी थी. उस के सिर के घाव से लग रहा था कि किसी ने सिर में गोली मार कर उस की हत्या की है. उस का चेहरा खून से सना था.
मृतक काले रंग की पैंट और नीलेपीले रंग की धारीदार डिजाइन वाली जैकेट पहने था. उस के पैरों में कोई चप्पल या जूते नहीं थे. चेहरे पर दाढ़ी थी. वह शक्लसूरत और पहनावे से किसी अच्छे परिवार का लग रहा था.
लाश पड़ी होने की जानकारी मिलते ही आसपास के गांव के और लोग भी वहां जुटने लगे. उसी भीड़ में से किसी ने 100 नंबर पर फोन कर के इस की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. चूंकि मामला बिलरियागंज थाने का था, इसलिए पुलिस कंट्रोलरूम ने बिलरियागंज थाने को घटना की इत्तला दे दी. लाश मिलने की खबर पा कर बिलरियागंज के थानाप्रभारी विजय प्रताप यादव पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.
घटनास्थल पहुंचने के बाद थानाप्रभारी ने अपने आला अधिकारियों को भी मामले की सूचना दे दी. इस के अलावा उन्होंने फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को भी सूचना दे कर मौके पर बुला लिया.
खबर पा कर एसपी अजय कुमार साहनी, एसपी (देहात) एन.पी. सिंह, सीओ (सगड़ी) सुधाकर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने कार के नंबर की जांच की तो वह नंबर गोरखपुर आरटीओ का था.
जांचपड़ताल से पता चला कि वह कार गोरखपुर के दीपक सिंह के नाम से रजिस्टर्ड थी. इस से यही अंदाजा लगाया गया कि मृतक गोरखपुर का रहने वाला होगा. फिर पुलिस ने मृतक के कपड़ों की तलाशी ली तो उस की जेब से सगड़ी के बाबू शिवपत्तर राय स्मारक कालेज का एक परिचयपत्र मिला. उस परिचयपत्र से उस की शिनाख्त एमए के छात्र विभांशु प्रताप पांडेय के रूप में हुई, जिस में उस का पता गांव भौवापार थाना बेलीपार लिखा था.

कार की तलाशी लेने पर डिक्की में उल्टी और खून के धब्बे मिले. कार में एक जोड़ी लेडीज चप्पल पड़ी मिली. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा था कि बदमाश हत्या कहीं और कर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे थे, लेकिन कार खेत में फंस जाने की वजह से दूर नहीं भाग सके और उस की लाश फेंक कर फरार हो गए. इस का मतलब साफ था कि कार में कोई महिला भी सवार थी. वह कौन थी? यह मामला और भी पेचीदा हो गया.
पुलिस इस मामले को प्रेम संबंधों से जोड़ कर देखने लगी थी. कार में लेडीज चप्पल और उल्टी ने गुत्थी बुरी तरह उलझा कर रख दी थी. विभांशु के मुंह से झाग निकले थे. वह झाग किसी जहरीले पदार्थ के सेवन से थे या किसी और के, यह बात जांच के बाद ही पता चलना था.
मौके की जरूरी काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दी. कागजी काररवाई पूरी करने के पहले पुलिस ने घटना की सूचना मृतक के परिजनों को दे दी थी. सूचना मिलने के बाद वह भी घटनास्थल पर पहुंच गए.
मृतक के बड़े भाई जोकि पेशे से एक वकील थे, उन की तहरीर पर पुलिस ने रुचि राय पुत्री अरविंद राय, ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय और उस के भाई सत्यम राय सहित 8 अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.
सभी आरोपी कोतवाली जीयनपुर के बांसगांव के निवासी थे. घनश्याम पांडेय का आरोप था कि भाई को उस की प्रेमिका रुचि राय ने फोन कर के बुलाया था और उस की हत्या करवा दी. रिपोर्ट नामजद लिखाई गई थी, इसलिए पुलिस ने नामजद आरोपियों की तलाश शुरू कर दी.
चूंकि वादी घनश्याम पांडेय एक वकील के साथसाथ रसूखदार और ऊंची पहुंच वाला था, पुलिस की थोड़ी सी भी चूक कानूनव्यवस्था बिगाड़ सकती थी, इसलिए एसपी अजय कुमार साहनी ने सीओ सुधाकर सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम को निर्देश दे दिए थे कि नामजद आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए.
पुलिस टीम ने आरोपियों के घर दबिश डाली तो वह अपने ठिकानों पर नहीं मिले. उन के न मिलने पर पुलिस की समस्या और बढ़ गई. उन की तलाश के लिए पुलिस ने अपने सभी मुखबिरों को भी अलर्ट कर दिया.
9 दिसंबर, 2017 की सुबह थानाप्रभारी विजय प्रताप यादव को एक मुखबिर ने आरोपी ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय के बारे में एक महत्त्वपूर्ण जानकारी दी. उस से मिली जानकारी के बाद थानाप्रभारी अपनी टीम के साथ सगड़ी-खालिसपुर मार्ग पर पहुंच गए. श्यामनारायण वहीं खड़ंजे के पास खड़ा मिल गया. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. वह वहां से कहीं भागने की फिराक में था.
तलाशी लेने पर उस के पास से एक पिस्टल .32 बोर व 2 जिंदा कारतूस के अलावा एक कारतूस का खोखा भी मिला. थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई, उस ने विभांशु की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया.
पुलिस ने उस के पास से जो पिस्टल बरामद किया था, उसी से उस ने विभांशु की हत्या की थी. उस ने उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह प्रेम त्रिकोण वाली निकली—
22 वर्षीय विभांशु प्रताप पांडेय उर्फ विभू मूलरूप से गोरखपुर के बेलीपार थाना क्षेत्र के ऊंचगांव (भौवापार) के रहने वाले रमाशंकर पांडेय का बेटा था. रमाशंकर पांडेय के 7 बेटों में विभांशु सब से छोटा और सब का दुलारा था. रमाशंकर पांडेय के सभी बेटे अपने पैरों पर खड़े थे. सब से बड़ा बेटा घनश्याम पांडेय अधिवक्ता था. अन्य बेटे भी अच्छे पदों पर कार्यरत थे.
विभांशु ही घर पर रह कर खेती के काम में पिता का हाथ बंटाता था. इस के साथ वह आजमगढ़ के बाबू शिवपत्तर राय स्मारक कालेज से एमए की पढ़ाई भी कर रहा था. वह काफी मेहनती युवक था. उस की एक खास बात थी कि वह जिस भी काम को करने की ठान लेता, उसे हर हाल में पूरा करने की कोशिश करता.
खैर, गोरखपुर से आजमगढ़ की कुल दूरी 85 किलोमीटर थी. विभांशु कालेज अपनी बाइक से आताजाता था. वैसे आजमगढ़ के रामगढ़ व जमसर गांव में उस की रिश्तेदारियां थीं. जिस दिन उस का मन कालेज से घर लौटने का नहीं होता तो वह इन में से अपनी किसी रिश्तेदारी में रुक जाता था. अपने रुकने की खबर वह फोन कर के घर वालों को दे देता था.
सन 2015 की बात है. रिश्तेदारी में आतेजाते एक दिन विभांशु की नजर एक खूबसूरत युवती पर पड़ी तो वह उसे अपलक निहारता रह गया. पहली ही नजर में वह उस के कजरारे नैनों के तीर से घायल हो गया था. उस ने अपने स्रोतों से पता किया तो जानकारी मिली कि उस का नाम रुचि राय है और वह पड़ोस के कल्याणपुर बांसगांव में रहती है.
रुचि के दिल में प्यार का रंग भरने के लिए विभांशु रिश्तेदारों के यहां ज्यादा समय बिताने लगा. वहीं रह कर पढ़ने लगा. घर वाले इस बात से बेखबर थे कि विभांशु पर प्रेम रोग का रंग चढ़ने लगा है. एक दिन की बात है. विभांशु कालेज से घर आ रहा था तभी सड़क पर उसे रुचि जाती हुई दिखाई दी. रुचि को देख कर उस का दिल जोरजोर से धड़कने लगा.

विभांशु ने तय किया कि आज वह उस से बात कर के ही रहेगा. थोड़ी दूर बढ़ने के बाद विभांशु ने अपनी बाइक उस के नजदीक ले जा कर रोक दी. अचानक पास बाइक रुकी देख रुचि सहम गई. इस से पहले कि वह कुछ कहती, विभांशु बोला, ‘‘मैं आप से कुछ बात करना चाहता हूं.’’
इतना सुनते ही रुचि चौंकते हुए बोली, ‘‘आप को मैं पहचानती नहीं. और मैं अजनबियों से बात नहीं करती.’’
‘‘लेकिन मैं आप को अच्छी तरह जानतापहचानता हूं. रुचि राय नाम है आप का और कल्याणपुर बांसगांव में रहती हैं.’’ उस ने कहा.
अपना नाम सुन कर रुचि हैरान रह गई कि अजनबी युवक को मेरा नाम और पता कैसे पता चला. बिना कोई उत्तर दिए वह आगे बढ़ गई पर विभांशु भी उस के पीछेपीछे बाइक से आ रहा था. रास्ता सुनसान था. पीछे बाइक सवार युवक को अपनी ओर आते देखा तो रुचि सहम गई.
वह तेजतेज कदमों से आगे बढ़ने लगी. विभांशु ने आगे बढ़ कर उस का रास्ता फिर रोक लिया और बोला, ‘‘मुझे गलत मत समझो, मैं कोई लुच्चालफंगा नहीं हूं.’’
‘‘रास्ता रोकने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी? हट जाओ मेरे रास्ते से वरना अभी शोर मचा दूंगी.’’ हिम्मत बटोर कर वह बोली, ‘‘मुझे ऐसीवैसी लड़की मत समझना, वरना अभी दिन में ही तारे दिखा दूंगी.’’
‘‘नाराज क्यों हो रही हैं. नहीं रोकूंगा, जाइए. वैसे मैं अपने बारे में तो बताना भूल गया. मेरा नाम विभांशु प्रताप पांडेय है और पड़ोस के गांव रामगढ़ में रहता हूं. अभी तुम जाओ, मैं फिर मिलूंगा.’’
कह कर विभांशु बाइक तेज गति से चला कर वहां से निकल गया. उस के जाने के बाद रुचि की जान में जान आई. रास्ते भर वह यही सोचती रही कि इस युवक को मेरा नाम और पता कैसे मालूम हुआ. सोचतेसोचते घर कब पहुंची उसे पता नहीं चला.
बात आईगई, खत्म हो गई और वह अपने कामों में लग गई. अब जब भी वह मिलती विभांशु हायहैलो कर के निकल जाता था. पर यह इत्तफाक था या कुछ और कि उस दिन के बाद रुचि से रास्ते में उस की मुलाकात अकसर हो जाया करती थी. विभांशु की आशिकी की निगाहें देख कर रुचि के दिल में भी उस के लिए चाहत के बीज अंकुरित होने लगे.
इस के बाद विभांशु जब भी उस से हायहैलो कहता, वह भी मुसकरा पड़ती थी. अपनी ओर उसे आकर्षित हुआ देख कर विभांशु की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. फिर उन के बीच बातचीत भी होने लगी.
मौका देख कर उन्होंने एकदूसरे से अपनी मोहब्बत का इजहार भी कर दिया. रुचि और विभांशु की मोहब्बत की गाड़ी पटरी पर दौड़ी तो वो भविष्य के सपने बुनने लगे और शादी तक के सपने देखने लगे. यह पंछी प्यार की उड़ान भरने लगे. दोनों बाइक पर इधरउधर खूब घूमने लगे. इस बात पर भी उन्होंने ध्यान नहीं दिया कि जानने वालों ने उन्हें देखा भी है या नहीं. लिहाजा उन के प्यार की चर्चा गलीमोहल्लों में होने लगी थी.
रुचि और विभांशु की मोहब्बत की खुशबू कल्याणपुर बांसगांव के ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय तक पहुंची. श्यामनारायण राय रुचि का हमउम्र और अविवाहित था. लिहाजा उस का मन मचल गया और वह रुचि की ओर आकर्षित हो गया. रुचि को पाने की हसरतें उमंगें भरने लगीं. किसी के माध्यम से उस ने अपनी मोहब्बत का पैगाम रुचि तक भिजवाया पर रुचि ने उस का पैगाम ठुकरा दिया.
श्यामनारायण काफी दबंग और पहुंच रखने वाला था. उस की मोहब्बत एकतरफा थी, जबकि रुचि विभांशु से प्यार करती थी. रुचि द्वारा ग्रामप्रधान को लिफ्ट न देने पर वह बौखला गया. इसलिए उस ने तय कर लिया कि वह रुचि और विभांशु की मोहब्बत में बाधा को सफल नहीं होने देगा.
विभांशु भी कमजोर नहीं था. ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय से मुकाबला करने के लिए उस के सामने आ खड़ा हुआ. यह बात श्यामनारायण को काफी नागवार लगी कि एक बाहरी युवक उसी के घर में घुस कर उसे ही चुनौती देने पर आमादा है. यह बात उस के बरदाश्त के बाहर थी.
रुचि को चाहने वाले 2 लोग थे लेकिन रुचि तो उन में से केवल एक को ही चाहती थी. लिहाजा रुचि को ले कर उन दोनों के बीच विवाद खड़ा हो गया जो थमने के बजाय बढ़ता ही गया.
अक्तूबर, 2017 की बात है. विभांशु दशहरे का मेला घूमने गया था. फोन कर के उस ने रुचि को भी मेले में बुला लिया था. काफी देर तक साथसाथ मेला घूमने के बाद दोनों अपनेअपने घरों को रवाना हुए. प्रेमिका से विदा होते विभांशु ने उसे फ्लाइंग किस दिया. रुचि ने मुसकरा कर इस का जवाब दे दिया.
इत्तफाक से उसी समय श्यामनारायण भी कहीं से उधर आ पहुंचा. उस ने दोनों को किस लेतेदेते देख लिया था. यह देख कर उस का खून खौल उठा. उस ने आव देखा न ताव, कुछ ग्रामीणों को आवाज लगा दी.
ग्रामप्रधान की आवाज सुन कर गांव के तमाम लोग वहां पहुंच गए. प्रधान ने विभांशु पर गांव की लड़की को छेड़ने का आरोप लगाया. इस के बाद तो ग्रामीण भड़क गए. विभांशु वहां से भागा तो उन्होंने दौड़ कर उसे दबोच लिया. इस के बाद उस की जम कर पिटाई की.
पिटाई के बाद भी उन्होंने विभांशु को नहीं छोड़ा बल्कि प्रधान श्यामनारायण ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया. जीयनपुर के थानाप्रभारी ने विभांशु को लड़की छेड़ने के आरोप में जेल भेज दिया. इस तरह प्रधान ने विभांशु को जेल भिजवा कर अपनी खुन्नस निकाल ली.
घर वालों को जब यह पता चला कि लड़की छेड़ने के आरोप में विभांशु जेल में बंद है तो वे परेशान हो गए. शर्म के मारे उन का चेहरा झुक गया. किसी तरह विभांशु के बड़े भाई वकील घनश्याम पांडेय ने उस की जमानत कराई. घर वालों ने विभांशु को खूब डांटा, साथ ही समझाया कि ये इश्कविश्क का चक्कर छोड़ कर पढ़ाई पर ध्यान दो. जब समय आएगा तो किसी अच्छी लड़की से शादी करा कर गृहस्थी बसा दी जाएगी.
परिवार के दबाव में आ कर उस समय तो कह दिया कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेगा, जिस से परिवार की बदनामी हो लेकिन वह दिल से रुचि को निकाल नहीं पाया. साथ ही वह श्यामनारायण द्वारा जेल भिजवा देने वाली बात से काफी आहत था. उस ने तय कर लिया कि वह इस का बदला जरूर लेगा.
वह प्रधान श्यामनारायण से बदला लेने का मौका ढूंढने लगा. इसी बीच 4 दिसंबर, 2017 को ग्रामप्रधान श्यामनारायण पर किसी ने हमला कर दिया. प्रधान का पूरा शक विभांशु पर आ गया. प्रधान ने तय कर लिया कि वह विभांशु को सूद के साथ इस का भुगतान करेगा. जबकि वास्तविकता यह थी कि विभांशु का उस हमले से कोई लेनादेना नहीं था और न ही उस ने ऐसा किया था.
बहरहाल, इश्क की जलन ने एक नाकाम प्रेमी श्यामनारायण राय को इंसान से शैतान बना दिया था. वह विभांशु के खून का प्यासा हो गया. वह मौके की तलाश में था लेकिन उसे मौका नहीं मिल पा रहा था.
7 दिसंबर, 2017 की शाम 6 बजे रुचि ने विभांशु को फोन कर के मिलने के लिए आजमगढ़ बुलाया. प्रेमिका के बुलावे पर वह बेहद खुश था. तैयार हो कर वह बाइक ले कर रुचि से मिलने निकल गया. घर से निकलते समय उस ने घर वालों से यही कहा था कि वह शहर जा रहा है और थोड़ी देर में आ जाएगा.
विभांशु पहले अलहलादपुर में रहने वाले अपने दोस्त दीपक सिंह के घर गया. वहां उस ने बाइक खड़ी की ओर उस की स्विफ्ट डिजायर कार ले कर प्रेमिका से मिलने आजमगढ़ रवाना हो गया. यह बात पता नहीं कैसे प्रधान श्यामनारायण को पता चल गई. फिर तो उस की बांछें खिल उठीं. वह कल्याणपुर बांसगांव से पहले खालिसपुर गांव के पास घात लगा कर बैठ गया. रात 11 बजे के करीब विभांशु स्विफ्ट डिजायर कार ले कर गुजरा.
प्रधान ने गाड़ी में विभांशु को जाते देख लिया. प्रधान मोटरसाइकिल पर था. उस ने कार का पीछा किया और ओवरटेक कर के उसे रोक लिया. सुनसान जगह पर प्रधान को देख विभांशु का माथा ठनक गया. वह कार ले कर वहां से भागना चाहा लेकिन कार के आगे प्रधान और उस की बाइक थी, इसलिए वहां से नहीं भाग सका.
सड़क पर ही दोनों के बीच बहस छिड़ गई. बात काफी बढ़ गई. मामला गालीगलौज से हाथापाई तक पहुंच गया. प्रधान श्यामनारायण का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया. उस ने कार का दरवाजा खोल कर विभांशु को खींच कर बाहर निकाल लिया. उसी समय उस ने कमर से लाइसेंसी पिस्टल निकाली और उस के सिर में गोली मार दी.

गोली लगते ही विभांशु कटे पेड़ की तरह धड़ाम से सड़क पर गिर गया और मौके पर ही उस की मौत हो गई. इस के बाद प्रधान ने फोन कर के छोटे भाई सत्यम राय उर्फ रजनीश को मौके पर बुला लिया.
श्यामनारायण और सत्यम दोनों ने मिल कर उसे कार की पिछली सीट पर डाला फिर लाश ठिकाने लगाने के लिए गांव के बाहर ले गए.
वह कार को सड़क से नीचे खेत में ले गए. वहां से वह नहर की ओर ले जा रहे थे, तभी कार कुदारन तिवारी के खेत में जा कर फंस गई. वहां से कार नहीं निकली तो वह वहीं खेत में छोड़ दी और लाश भी कुछ आगे डाल दी. इस के बाद वे घर लौट आए और इत्मीनान से सो गए.
उन्हें विश्वास था कि पुलिस को उन पर शक नहीं होगा पर जब मृतक के भाई घनश्याम पांडेय ने नामजद रिपोर्ट लिखाई तो प्रधान श्यामनारायण पुलिस से बचने के लिए घर से निकल कर सगड़ी-खालिसपुर मार्ग पर जा कर खड़ा हो गया और उधर से आने वाले वाहन का इंतजार करने लगा. इस से पहले कि वह वहां से कहीं जाता, थानाप्रभारी विजयप्रताप यादव ने उसे मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार कर लिया.
प्रधान श्यामनारायण राय से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. इस के 3 दिनों के बाद उस का छोटा भाई सत्यम राय उर्फ रजनीश भी बांसगांव से गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ में उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया.
कथा लिखे जाने तक पुलिस कार में मिली महिला की सैंडिल और उल्टी के बारे में जांचपड़ताल कर रही थी. आरोपी रुचि राय फरार चल रही थी. पुलिस उस की तलाश में जुटी हुई थी.
– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
सवाल
मैं 42 वर्षीय पुरुष हूं. पहली पत्नी की कैंसर से मृत्यु हो गई. दूसरा विवाह किया तो पत्नी से बनी नहीं और तलाक हो गया. मेरे मातापिता ने मुझे दूसरे विवाह के लिए मना किया था क्योंकि वह मुझसे 5 वर्ष बड़ी थी और उस का एक बेटा भी था, लेकिन मैं नहीं माना क्योंकि मैं उस के बेटे को अपना कर पिता बनने का सुख पाना चाहता था पर उस के बेटे ने मुझे कभी अपना पिता नहीं माना और पत्नी भी हर बात में बेटे का ही पक्ष लेती थी. इसी बात पर हमारी तूतू मैंमैं हो जाती थी और एक साल के भीतर ही हमारा तलाक हो गया. बहुत अकेला महसूस करता था. जिंदगी जीने का कोई मकसद नहीं रह गया था तो मातापिता की सलाह मानते हुए मैं ने एक बच्चा गोद ले लिया.
अब सब ठीक लगता है. मातापिता घर में बच्चा आने से खुश हैं. मुझे भी पिता बनने का सुख मिल गया. लेकिन पुरुष हूं, एक पार्टनर की कमी खलती है. तीसरी शादी करने की हिम्मत नहीं है. क्या करूं?
जवाब
आप की फीलिंग्स को हम अच्छी तरह सम झ रहे हैं. गृहस्थी का सुख आप को नहीं मिला. पिता बन गए हैं लेकिन पुरुष होने के नाते आप की कुछ शारीरिक जरूरतें भी हैं जिन का आप के जीवन में अभाव है. आप तीसरी शादी करें, इस हक में न तो अब आप के मातापिता हैं और न आप की हिम्मत है.
आप को ऐसे रिलेशनशिप की जरूरत है जहां आप का पार्टनर आप को समझे और आप उसे. आप उस से अपनी फीलिंग्स शेयर कर सकें. मैंटली और फिजिकली आप दोनों एकदूसरे को कंप्लीट कर सकें. आजकल ऐसी बहुत सी वैबसाइट्स हैं जहां आप ही की तरह कई लोग पार्टनर तलाश रहे होते हैं. बहुत सोचसमझ कर देखपरख कर आप डेटिंग करिए. लेकिन हमारी हिदायत है कि किसी के झांसे में बिलकुल मत आइएगा. ऐसी साइट्स पर धोखेबाज, पैसे लूटने वाले बहुत होते हैं, इसलिए पूरी जांचपड़ताल करने के बाद ही आगे बढ़ें. मातापिता को कुछ बताने की जरूरत नहीं, आप की जिंदगी है. अपनी खुशी कैसे बरकरार रखनी है, यह आप के खुद के हाथ में है.
प्राचीन समय में जब डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते थे, तब हम घरेलू नुस्खें ही अपनाते थे. उस समय आयुर्वेद को प्रचलन ज्यादा हुआ करता था, आज ऐसा ही एक फूल है जो कि बहुत ही फायदेमंद है ज्यादातर झड़ते बालों को लिए ये काफी लाभकारी होता है. गुड़हल का फूल आसानी से सभी के घरों में या बगीचें में मिल जाता है. जिसे इस्तेमाल करने से आप कई तरह की समस्याओं से नीजात पा सकते है.
गुड़हल के फूल बालों का झड़ना रोकने के अलावा उनकी रीग्रोथ में भी मदद करता है. गुड़हल का फूल समय से पहले बालों को सफेद होने से भी रोकता है. इतना ही नहीं, कई स्टडी में पाया गया है कि गुड़हल सिर के गंजे हो चुके हिस्सों में भी बाल उगाने में सक्षम है. बालों के लिए गुड़हल के प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं.
अक्सर समय के साथ बालों में वॉल्यूम और चमक खोने लगती है. गुड़हल के फूल में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अमीनो एसिड बालों को पोषक तत्व प्रदान करते हैं जिससे बालों को बढ़ने में मदद मिलती है. ये अमीनो एसिड्स केराटिन नाम का एक खास तरह का स्ट्रक्चर प्रोटीन बनाते हैं जो बालों को बनाने में विशेष भूमिका निभाते हैं.
गुड़हल के फूलों और पत्तियों में काफी मात्रा में म्यूसिलेज होता है. ये किसी नेचुरल कंडीशनर की तरह काम करता है. अगर आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि गुड़हल के फूलों और पत्तियों को क्रश करने पर ये लिसलिसी और चिपचिपी हो जाती हैं और यही लसलसा पदार्थ कंडीशनर की तरह काम करता है.
गुड़हल का इस्तेमाल सफेद बालों को छुपाने के लिए वाली प्राकृतिक डाई के रूप में किया जाता था. गुड़हल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन मेलेनिन प्रोडक्शन में मदद करते हैं. मेलेनिन वो पिगमेंट है जो बालों को उसका नेचुरल कलर देता है. इसलिए, अगर आप गुड़हल/ हिबिस्कस युक्त प्रोडक्ट्स को नियमित रूप से बालों की सेहत को बनाए रखने के लिए करते हैं, तो ये आपके बालों को हेल्दी रखने में बड़ा ही कारगर साबित हो सकता है.
Story in hindi
इन दिनों अनिल कपूर अपनी दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका को लेकर सुर्खियों में बने हुए है. उन्होने अपने पर्सनैलिटी राईट्स के लिए याचिका दर्ज कराई है. जिसको लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है. दरअसल, अब अनिल कपूर की अवाज-नाम और उनके डॉयलॉग उनकी इज्जात के बिना नहीं इस्तेमाल किए जाएंगे. अगर अनिल कपूर को कॉपी करना है तो उनसे पहले पूछना पडेगा.
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आपको बता दें, कि बॉलीवुड में अनिल कपूर अपनी दमदार एक्टिंग के लिए जाने जाते है. उनके डॉयलॉग, उनकी एक्टिंग लोगों को खूब पसंद आती है उनका झक्कास डॉयलॉग तो सबने सुना ही होगा. लेकिन अब ये डॉयलॉग उनसे बिना पूछे नहीं लिए जाएंगे. दरअसल, अनिल कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट में कुछ दिनों पहले ही एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ लोग बिना उनकी इजाजत लिए उनके नाम और आवाज का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में अनिल कपूर ने कोर्ट से मांग की थी कि उनकी आवाज या किसी भी पॉपुलर किरदार का इस्तेमाल किए जाने पर रोक लगाएं. इस बीच अब कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुना दिया है.मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘लखन’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘नायक’ जैसे किरदारों का इस्तेमाल करने पर बैन लगा दी है. वहीं अब लोग ‘झक्कास’ जैसे फ्रेज भी नहीं बोल पाएंगे.
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बताते चले कि इससे पहले बॉलीवुड की अभिनेता अमिताभ बच्चन ने ऐसी याचिका दायर की थी, जिसमें के बाद कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था. अमिताभ ने तस्वीर, नाम, किरदार का इस्तेमाल ना किया जाएं को लेकर याचिक डाली थी और अब अनिल कपूर ने ऐसा किया है बता दें, अनिल कपूर की हाल ही में वेब सीरीज आई थी. जिसमें वो आदित्य रॉय कपूर के साथ ‘द नाइट मैनेजर’ में नजर आए थे. इस सीरीज को लोगों का खूब प्यार मिला था.
बॉलीवुड की हसीना कंगना रनौत अक्सर ही अपनी फिल्म और बेबाक बातों के लिए जानी जाती है नका सुर्खियों में आना कोई नई बात नहीं है वह अक्सर ही मीडिया की लाइमलाइट में बनीं रहती है कई बार वो अपने लुक्स को लेकर चर्चा में रहती है ऐसा ही इस बार कंगना ने बताया है कि पहले वो छोटे कपडों में नजर आती थी अब वो साड़ी लुक्स में ही क्यो दिखतीं है. आपने गौर किया होगा कगंना कोई इवेंट हो या फंक्शन साडी में ही नजर आती है तो अब कंगना ने इसकी वजह बताई है आइए जानते है.
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हाल ही में कंगना रनौत ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनका ड्रेसिंग स्टाइल कैसे बदल गया है कभी वो शॉर्ट्स पहना करती थी, लेकिन अब हर जगह वह साड़ी में नजर आती है. इतना ही नहीं कंगना ने इंडिया-भारत डिबेट पर भी अपनी राय रखी है.उन्होने विपक्ष गठबंधन का नाम इंडिया होने पर तंज कसा है कंगना ने कहा कि उन्हे इंडिया शब्द से नफरत नहीं है.बल्कि भारत कहना पसंद है. कंगना रनौत का कहना है कि विपक्ष के सदस्यों पर भ्रष्टाचार का आरोप है फिर भी उन्होने गठबंधन का नाम INDIA रख लिया है. किसी ने आपत्ति नहीं जताई क्योकि लोकतात्रिंक देश है. इसी बीच कगंना ने बताया कि वह पहले शॉर्ट्स और अब साड़ी क्यो पहनती है.
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कंगना ने इंटरव्यू में बताया कि पहले भारतीय होने पर उन्हे पहले शर्म आती थी,इसिलए वह शॉर्ट्स और वेस्टर्न कपडे ज्यादा पहनती थी. मैं कुछ भी लगना चाहती थी लेकिन भारतीय नहीं.क्योकि हमारे देश को तब गरीब समझा जाता था, लेकिन अब मुझे अपनी संस्कृति पर गर्व है और मैं इसलिए साड़ी पहनना पसंद करती हूं. इसलिए जब आप आपनी संस्कृति की अहमियत समझते है. तो आपके पास इससे अपनाने का ऑप्शन होता है. कंगना आगे बताती है कि मुझे भारत कहना पसंद है.लेकिन कभी-कभी मैं इंडिया भी कहती हूं. लेकिन जुबान फिसल जाती है तो मुझे इससे नफरत नहीं होती है. वो भी हमारा पास्ट था.