दूसरी बार पेरेंट्स बनेंगे अनुष्का- विराट, गुड न्यूज हो रही है वायरल

अनुष्का शर्मा और विराट कोहली अपने फैंस के सबसे चहते कपल है. जिनको फैंस को ढेरों प्यार मिलता है. फैंस उनकी पल-पल की खबर जानने के लिए हमेशा उत्सुक रहते है ऐसे में अनुष्का-विराट के फैंस के लिए गुड न्यूज है जी हां, अनुष्का एक बार फिर मां बनने वाली है जिसकी खबरे तेजी वायरल हो रही है दोनों जल्दी एक बाद फिर पैरेंट्स बनेंगे. हालांकि एक्ट्रेस को अभी प्रेग्नेंसी हालत में देखा नहीं गया है लेकिन कई चीजे ये दावा करती है कि वो सबके लिए गुड न्यूज देंगी.

 

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आपको बता दें, कि ऐसी खबर आई है कि ये परिवार 3 से 4 होने वाला है. अनुष्का, विराट और वामिका के बाद अब एक चौथा महमान घर में आने वाला है. रिपोर्ट्स की माने तो अनुष्का शर्मा काफी समय से पब्लिक इवेंट में नजर नहीं आई है. अब इसलिए क्योंकि वह नहीं चाहती कि लोग अभी से अनुमान लगाना शुरु कर देगा. इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि अनुष्का-विराट को मैटेरनिटी क्लिनिक में स्पॉट किया गया था. हालांकि मीडिया को फोटो शेयर करने से मना कर दिया गया था और ये वादा किया कि वह जल्द ही अनाउंसमेंट करेंगे.

 

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बता दें, कि अब तक अनुष्का-विराट ने बेटी वामिका का चेहरा नहीं दिखाया है. दोनों ने पहले ही मीडिया से रिक्वेस्ट की हुई है कि वह बेटी का चहरा नहीं दिखाएंगे. उन्होंने बताया है कि जबतक वह खुद इसे समझ नहीं जाती और खुद सोशल मीडिया पर नहीं आती तब तक चेहरा नहीं दिखाया जाएगा. कई बार तीनों को साथ में स्पॉट किया गया है लेकिन वह हमेशा बेटी का चेहरा छुपा लेते है.

अनुष्का की प्रोफेशनल लाइव

अनुष्का की प्रोफेशनल लाइव की बात करें तो वह कई लंबे समय से पर्दे पर नजर नहीं आई है. वह आखिरी बार साल 2018 में फिल्म जीरों में नजर आई थी जिसमें शाहरुख खान और कैटरीना कैफ लीड रोल में थे.

अब जल्द ही अनुष्का शर्मा फिल्म चकदा एक्सप्रेस में नजर आएंगी. इस फिल्म में झूलन गोस्वामी के किरदार में नजर आएंगी. ये फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी.

बोल्डनेस में उर्फी जावेद को भी टक्कर देती है सोफिया अंसारी, देखें फोटो

वीडियो क्रिएटर सोफिया अंसारी सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव है उनकी वीडियो-फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है सोफिया इंटरनेट की दुनिया में जानी-मानी अदाकारा है. जो कि समय-समय पर अपनी फोटोज और वीडियो शेयर करती है जिसपर लाखों लाइक्स आते है. सोफिया पहले टिकटॉक पर वीडियो बनाती थी, जिसके बाद वो इंस्टाग्राम पर वायरल होने लगी. अब उनके करोडों फोलोअर्स है जो उन्हे बेहद पसंद करते है तो आइए दिखाते है सोफिया की कुछ बोल्ड फोटोज. जिनके सोशल मीडिया पर चर्चे होते रहते है.

 

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सोफिया अंसारी की इन बोल्ड तस्वीरों को देख उनकी तुलना बोल्डनेस के मामले में बडी़ अभिनेत्रियों तक से होने लगी है इनकी फोटोज देख बोल्डनेस के सामने में सुर्खियों में छाई एक्ट्रेस उर्फी जावेद तक को लोग भूल जाएंगे.

 

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अदाकारा सोफिया अंसारी बिकिनी पहनकर मिरर सेल्फी लेते हुए अपनी बोल्ड तस्वीरें फैंस को दिखाती दिखीं. जिसमें उनका परफेक्ट फिगर नजर आया.

 

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बोल्ड तस्वीरों की वजह से अदाकारा सोफिया अंसारी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहती हैं. उनके कई मिलियन फॉलोअर्स हैं.

 

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सामने आई इस तस्वीर में अदाकारा सोफिया अंसारी अपना परफेक्ट फिगर फ्लॉन्ट करती दिखीं। अदाकारा की ये तस्वीर इंस्टाग्राम पर आते ही छा गईं.

 

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इंस्टाग्राम पर सोफिया अंसारी काफी पॉपुलर हैं. अदाकारा ने इंस्टाग्राम पर 9.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं. जो किसी एक्ट्रेस से कम नहीं हैं.

 

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अदाकारा सोफिया अंसारी बिकिनी ही नहीं, साड़ी में भी कई दफा बोल्ड तस्वीरें शेयर कर फैंस को हैरान कर देती हैं. अदाकारा की ये तस्वीरें आते ही छाने लगती हैं.

 

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जानें क्या हैं यौन रोग के शुरुआती लक्षण

शादी के कुछ समय के बाद रेखा के अंदरूनी अंग से कभीकभी कुछ तरल पदार्थ निकलने लगा, पर उस ने इस तरफ खास ध्यान नहीं दिया. मगर कुछ दिनों बाद जब उसे उस तरल पदार्थ से बदबू आने का एहसास होने लगा और अंग में खुजली भी होने लगी तो वह तुरंत डाक्टर के पास गई.

डाक्टर ने जांच कर के रेखा को बताया कि उसे यौन रोग हो गया है, पर घबराने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि समय पर दिखा लिया. इलाज पर कम पैसा खर्च कर बीमारी ठीक हो जाएगी.

सीमा जब अपने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाती तो उसे दर्द होता. उस ने इस परेशानी के बारे में डाक्टर को बताया. डाक्टर ने सीमा के अंगों की जांच कर के बताया कि उसे यौन रोग हो गया है. समय से इलाज कराने पर सीमा की बीमारी दूर हो गई.

यौन रोग पतिपत्नी के संबंधों में बाधक बन जाते हैं. यौन रोग के डर से लोग संबंध बनाने से डरने लगते हैं. कई बार यौन रोगों से अंदरूनी अंग से बदबू आने लगती है, जिस की वजह से सैक्स संबंधों से रुचि खत्म हो जाती है. ऐसे में पतिपत्नी एकदूसरे से दूर जा कर कहीं और संबंध बनाने लगते हैं.

क्या है यौन रोग

यौन रोग शरीर के अदरूनी अंगों में होने वाली बीमारियों को कहा जाता है. यह एक पुरुष और औरत के साथ संपर्क करने से भी हो सकता है और बहुतों के साथ संबंध रखने से भी हो सकता है. यौन रोग से ग्रस्त मां से पैदा होने वाले बच्चे को भी यह रोग हो सकता है. ऐसे में अगर मां को कोई यौन रोग है, तो बच्चे का जन्म डाक्टर की सलाह से औपरेशन के जरीए कराना चाहिए. इस से बच्चा योनि के संपर्क में नहीं आता और यौन रोग से बच जाता है.

कभीकभी यौन रोग इतना मामूली होता है कि उस के लक्षण नजर ही नहीं आते हैं. इस के बाद भी इस के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए यौन रोग के मामूली लक्षण को भी नजरअंदाज न करें. मामूली यौन रोग कभीकभी अपनेआप ठीक हो जाते हैं, पर इन के बैक्टीरिया शरीर में रह जाते हैं, जो कुछ समय बाद शरीर में तेजी से हमला करते हैं. यौन रोग शरीर की खुली और छिली जगह वाली त्वचा से ही फैलते हैं.

यौन रोग का घाव इतना छोटा होता है कि उस का पता ही नहीं चलता है. पति या पत्नी को भी इस का पता नहीं चलता है. यौन रोगों का प्रभाव 2 से 20 सप्ताह के बीच कभी भी सामने आ सकता है. इस के चलते औरतों को माहवारी बीच में ही आ जाती है. यौन रोग योनि, गुदा और मुंह के द्वारा शरीर में फैलते हैं. यौन रोग कई तरह के होते हैं. इन के बारे में जानकारी होने पर इन का इलाज आसानी से हो सकता है.

हार्पीज: हार्पीज बहुत ही आम यौन रोग है. इस रोग में पेशाब करते समय जलन होती है. पेशाब के साथ कई बार मवाद भी आता है. बारबार पेशाब जाने को मन करता है. बुखार भी हो जाता है. टौयलेट जाने में भी परेशानी होने लगती है. जिसे हार्पीज होता है उस के मुंह और योनि में छोटेछोटे दाने हो जाते हैं. शुरुआत में ये अपनेआप ठीक भी हो जाते हैं. अगर ये दोबारा हों तो इलाज जरूर कराएं.

व्हाट्स: व्हाट्स में शरीर के तमाम हिस्सों में छोटीछोटी फूलनुमा गांठें पड़ जाती हैं. व्हाट्स एचपीवी वायरस यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के चलते फैलता है. यह 70 प्रकार का होता है. अगर ये गांठें अगर शरीर के बाहर हों और 10 मिलीमीटर के अंदर हों तो इन्हें जलाया जा सकता है. 10 मिलीमीटर से बड़ा होने पर औपरेशन के जरीए हटाया जाता है.

योनि में फैलने वाले वायरस को जैनरेटल व्हाट्स कहते हैं. यह योनि में बच्चेदानी के मुख पर हो जाता है. अगर समय पर इलाज न हो तो यह घाव कैंसर का रूप ले लेता है. अगर यह हो तो 35 साल की उम्र के बाद एचपीवी का कल्चर जरूर करा लें. इस से घाव का पूरा पता चल जाता है.

गनेरिया: इस रोग में पेशाब की नली में घाव हो जाता है, जिस से पेशाब की नली में जलन होने लगती है. कई बार खून और मवाद भी आने लगता है. इस का इलाज ऐंटीबायोटिक दवाओं के जरीए किया जाता है. अगर यह बारबार होता है तो इस का घाव पेशाब की नली को बंद कर देता है, जिसे बाद में औपरेशन के द्वारा ठीक किया जाता है.

गनेरिया को साधारण बोली में सुजाक भी कहा जाता है. इस के होने पर तेज बुखार भी आता है. इस के बैक्टीरिया की जांच के लिए मवाद की फिल्म बनाई जाती है. अगर यह बीमारी शुरू में ही पकड़ में आ जाए तो इलाज आसानी से हो जाता है. बाद में इलाज कराने में मुश्किल आती है.

सिफलिस: यह यौन रोग भी बैक्टीरिया के कारण फैलता है. यह यौन संबंध के कारण ही होता है. इस रोग के चलते पुरुषों के अंग के ऊपर गांठ सी बन जाती है. कुछ समय के बाद यह ठीक भी हो जाती है. इस गांठ को शैंकर भी कहा जाता है. शैंकर से पानी ले कर माइक्रोस्कोप द्वारा ही बैक्टीरिया को देखा जाता है. इस बीमारी की दूसरी स्टेज पर शरीर में लाल दाने से पड़ जाते हैं. यह कुछ समय के बाद शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित करने लगता है.

इस बीमारी का इलाज तीसरी स्टेज के बाद मुमकिन नहीं होता है. खराब हालत में यह शरीर की धमनियों को प्रभावित करता है. धमनियां फट भी जाती हैं. यह रोग आदमी और औरत दोनों को हो सकता है. इस का इलाज दवा और इंजैक्शन से होता है.

बुझा दिया घर का चिराग

उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर से कोई 40-45 किलोमीटर दूर बसा है बीरबल अकबरपुर गांव. इसी गांव
में शिवबालक निषाद अपनी पत्नी ममता और 2 बेटियों व एक बेटे के साथ रहता था.

बात 25 जनवरी, 2019 की है. शिवबालक शाम को घर लौटा तो उस का 10 वर्षीय बेटा विवेक घर में नहीं दिखा. पूछने पर बड़ी बेटी ने बताया कि विवेक दोपहर 12 बजे स्कूल से लौट कर खाना खाने के बाद घर से यह कह कर निकला था कि खेलने जा रहा है, तब से वह घर नहीं लौटा.

बेटी की बात सुन कर शिवबालक का माथा ठनका. उस की समझ में नहीं आया कि आखिर बेटा कहां चला गया जो अभी तक नहीं आया. पत्नी घर में नहीं थी, वह अपने मायके फफुआपुर गई हुई थी, इसलिए वह बेटे को ढूंढने के लिए निकल पड़ा. उस ने पड़ोस के बच्चों से पूछा तो उन्होंने बताया कि दोपहर के समय तो विवेक उन के साथ खेल रहा था. उस के बाद कहां गया, उन्हें पता नहीं.

शिवबालक के पड़ोस में हरिकिशन का घर था. शिवबालक ने उस के मंझले बेटे अनिल को विवेक के गायब होने की बात बताई तो वह भी परेशान हो उठा. वह गांव के युवकों को ले कर शिवबालक के साथ विवेक को ढूंढने में जुट गया. इन लोगों ने गांव का चप्पाचप्पा छान मारा, लेकिन विवेक का कहीं पता नहीं चला. घुरऊपुर, गुरडूनपुरवा टैंपो स्टैंड, सजेती बसस्टाप, बाजार आदि जगहों पर भी उस की खोज की गई, लेकिन उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

शिवबालक ने बेटे के गायब होने की जानकारी पत्नी को दे दी थी. ममता को यह खबर मिली तो वह तुरंत गांव लौट आई. उस ने भी अपने हिसाब से विवेक को खोजा. आधी रात तक खोजबीन के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला.

किसी अनहोनी की आशंका में शिवबालक और ममता ने जैसेतैसे रात बिताई. रात भर उन के मन में तरहतरह के खयाल आते रहे. सवेरा होते ही पड़ोसी हरिकिशन का बेटा अनिल शिवबालक के पास आया. वह बोला, ‘‘चाचा, विवेक को हम लोगों ने बहुत खोज लिया. अब हमें पुलिस का सहारा लेना चाहिए. चलो थाने में रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं.’’

उस की बात शिवबालक को भी ठीक लगी. तब दोनों थाना सजेती जा पहुंचे. सुबह का समय था, इसलिए एसओ अमरेंद्र बहादुर सिंह थाने में ही मौजूद थे. शिवबालक ने उन्हें अपने बेटे के गायब होने की बात बताई. थानाप्रभारी ने विवेक की गुमशुदगी दर्ज करा कर जरूरी काररवाई शुरू कर दी.

अमरेंद्र बहादुर भी कई सिपाहियों के साथ गांव के नजदीक के खेतों में बच्चे को ढूंढने लगे. पुलिस के साथ गांव वाले भी थे. वह भी पुलिस की मदद कर रहे थे. इस बीच पुलिस ने गौर किया कि विवेक की खोज में अनिल निषाद कुछ ज्यादा ही सक्रियता दिखा रहा है.

सर्च अभियान के दौरान ही अनिल ने एसओ से कहा, ‘‘दरोगाजी, चलिए उधर सरसों के खेत में देख लेते हैं.’’

अनिल की यह बात एसओ अमरेंद्र बहादुर सिंह की समझ में नहीं आई कि यह सरसों के खेत की ओर चलने को क्यों कह रहा है. फिर भी वह बिना कुछ कहे अनिल के पीछेपीछे सरसों के खेत की ओर चल पडे़.

खेत के अंदर जा कर उस ने सरसों के कुछ पौधों को हाथ से इधरउधर किया, फिर चीख कर बोला, ‘‘सर, विवेक की लाश यहां पड़ी है.’’

उस की बात सुनते ही एसओ तुरंत उस के पास पहुंच गए. सचमुच सरसों की फसल के बीच विवेक की लाश पड़ी थी. लाश को घासफूस से ढका गया था. लेकिन हवा के झोंकों से घासफूस बिखर गया था. जिस से लाश साफ दिखाई दे रही थी.

बेटे की लाश देख कर शिवबालक दहाड़ें मार कर रोने लगा. इस के बाद तो गांव में जिस ने भी सुना, वही लाश देखने भाग खड़ा हुआ. सूचना मिलने पर मृतक विवेक की मां ममता भी रोतीबिलखती वहां पहुंच गई और शव से लिपट कर रोने लगी.

इधर थानाप्रभारी अमरेंद्र बहादुर ने बच्चे की लाश बरामद करने की सूचना पुलिस अधिकारियों को दे दी. नतीजतन कुछ देर बाद एसपी (ग्रामीण) प्रद्युम्न सिंह और सीओ (घाटमपुर) शैलेंद्र सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने लाश का निरीक्षण किया.

उन्हें उस के शरीर पर कोई घाव दिखाई नहीं दिया. गले के निशान से ही अंदाजा लग गया कि उस की हत्या गला घोंट कर की गई होगी. उस के मुंह और नाक में मिट्टी भी भरी हुई थी. हत्या के समय हत्यारे ने यह शायद इसलिए किया होगा ताकि मृतक की आवाज न निकल सके.

सीओ शैलेंद्र सिंह ने विवेक के पिता शिवबालक से पूछा कि उन्हें बेटे की हत्या का किसी पर शक तो नहीं है.

‘‘साहब, बीते साल जून महीने में गांव के इंद्रपाल निषाद के बेटे सर्वेश ने मेरी बेटी नीलम (परिवर्तित नाम) को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की थी. इस की रिपोर्ट दर्ज कराई गई तो पुलिस ने उसे पकड़ कर जेल भेज दिया था. 2 महीने पहले ही वह जेल से छूट कर आया है. हो सकता है मेरे बेटे की हत्या में उस का हाथ हो.’’ शिवबालक ने बताया.

उसी समय थानाप्रभारी अमरेंद्र बहादुर सिंह की निगाह अनिल निषाद पर पड़ी. वह कुछ दूरी पर एक बच्चे से बात कर रहा था और उसे अंगुली दिखा कर धमका रहा था.

थानाप्रभारी की निगाह में अनिल पहले ही शक के घेरे में था. अब उन का शक और गहरा गया. जिस बच्चे को वह धमका रहा था, उन्होंने उस बच्चे को अपने पास बुला कर पूछा, ‘‘बेटा, तुम्हारा नाम क्या है, किस गांव में रहते हो?’’

‘‘मेरा नाम सुमित है. मैं इसी गांव में रहता हूं.’’ बच्चे ने बताया.
‘‘तुम विवेक को जानते थे?’’ उन्होंने पूछा.

‘‘हां साहब, वह मेरा पक्का दोस्त था. वह कक्षा 3 में और मैं कक्षा 4 में पढ़ता हूं.’’
‘‘विवेक को कल किसी के साथ जाते देखा था?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘हां साहब, अनिल उसे खेतों की ओर ले गया था. अनिल ने मुझे 20 रुपए दे कर विवेक को बुलवाया था. तब मैं विवेक को बुला लाया था. इस के बाद अनिल उसे खेतों की तरफ ले कर चला गया था. अनिल अभी मुझे इसी बात की धमकी दे रहा था कि यह बात किसी को न बताना.’’ सुमित ने बताया.

सुमित ने जो बातें पुलिस को बताईं, उस से अनिल पूरी तरह से शक के घेरे में आ गया. उधर शिवबालक के बयानों से सर्वेश पर भी शक था. गांव वालों से भी पुलिस को पता चला कि सर्वेश और अनिल गहरे दोस्त हैं. थानाप्रभारी ने यह जानकारी एसपी (ग्रामीण) प्रद्युम्न सिंह को दे दी तो उन्होंने उन दोनों लड़कों से पूछताछ करने के निर्देश दिए.

इस के बाद थानाप्रभारी ने घटनास्थल की जरूरी काररवाई कर के विवेक का शव पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय चिकित्सालय, कानपुर भिजवा दिया. फिर उन्होंने सर्वेश निषाद और अनिल को उन के घरों से हिरासत में ले लिया और थाने ले आए.

पुलिस ने सब से पहले सर्वेश निषाद को अनिल से अलग ले जा कर विवेक की हत्या के संबंध में सख्ती से पूछताछ की तो उस ने विवेक की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. सर्वेश ने बताया कि उस ने अपने दोस्त अनिल की मदद से विवेक की हत्या की थी.

सर्वेश निषाद ने हत्या का जुर्म कबूला तो अनिल को भी टूटते देर नहीं लगी. दोनों से पूछताछ के बाद विवेक की हत्या की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर से 47 किलोमीटर दूर एक बड़ी आबादी वाला गांव बीरबल अकबरपुर बसा हुआ है. यह एक ऐतिहासिक गांव है. मुगल बादशाह अकबर का यहां किला है, जो समय के थपेड़ों के साथ अब खंडहर में तब्दील हो गया है.

यमुना किनारे बसे इस गांव की आबादी लगभग 10 हजार है. बताया जाता है कि मुगल बादशाह अकबर जब आगरा से अकबरपुर आते थे, तो इसी किले में दरबार लगाते थे.

इसी किले में अकबर की मुलाकात बीरबल से हुई थी. बीरबल की बुद्धिमत्ता से प्रभावित हो कर बादशाह अकबर ने उन्हें अपने दरबार में रख लिया. अपनी बुद्धिमत्ता के चलते बीरबल दरबार में चर्चित हुए तो इस अकबरपुर गांव का नाम बीरबल अकबरपुर पड़ गया. समय बीतते सरकारी रिकौर्ड में भी गांव का नाम बीरबल अकबरपुर दर्ज हो गया.

हाजिरजवाबी और बुद्धिमत्ता का लोहा मनवाने वाले बीरबल का जन्म अकबरपुर गांव से एक किलोमीटर दूर तिलौची में हुआ था. बीरबल के बाल्यावस्था के समय ही उन के पिता की मृत्यु हो गई थी. निर्धन परिवार में जन्मे बीरबल का पालनपोषण उन की मां ने बड़ी कठिन परिस्थितियों में किया था. खेतों पर मजदूरी करने के दौरान मां बीरबल को बांस की टोकरी में लिटा कर लाती थीं और खेत के एक कोने में टोकरी को रख देती थीं.

कहा जाता है कि एक रोज एक साधु खेत से हो कर गुजर रहा था, तभी उस की नजर बीरबल पर पड़ी. उस साधु ने बीरबल की हस्तरेखा तथा मस्तक की लकीरों को गौर से देखा फिर बोला, ‘‘माई, तुम्हारा यह लाल बड़ा बुद्धिमान होगा. यह अपनी बुद्धिमत्ता का लोहा बड़ेबड़ों से मनवाएगा और पूरे देश में चर्चित होगा. यह राजदरबारी होगा.’’

उस साधु की बात सुन कर बीरबल की मां उस के चरणों में झुक गईं और बोलीं, ‘‘बाबा, मैं मजदूरी करती हूं. बेहद गरीब हूं. तुम्हें दक्षिणा भी नहीं दे सकती और न ही भोजन करा सकती हूं. मुझे क्षमा करना.’’ कहते हुए वह रोने लगीं.

साधु बोला, ‘‘रो मत माई, मैं तुम से कुछ मांगने नहीं आया हूं. मैं तो इधर से जा रहा था तो मेरी नजर पड़ गई.’’

इस के बाद वह साधु बीरबल को आशीर्वाद दे कर चला गया. समय बीतते इस साधु की भविष्यवाणी सच निकली. बीरबल, अकबर के राजदरबारी बने और अपनी हाजिरजवाबी के लिए चर्चित हुए.
इसी बीरबल अकबरपुर गांव में शिवबालक निषाद अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी ममता के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा विवेक था.

शिवबालक ड्राइवर था. वह लोडर चलाता था. इस के अलावा उस के पास 3 बीघा खेती की जमीन भी थी. लेकिन वह जमीन ऊसरबंजर थी. उस में ज्वारबाजरा के अलावा कोई दूसरी फसल नहीं होती थी.
अतिरिक्त आमदनी के लिए शिवबालक ने दूध का व्यवसाय शुरू कर दिया था. वह सुबह उठ कर गांव से दूध इकट्ठा करता फिर दूध को घाटमपुर कस्बा ले जा कर बेचता था.

वक्त यों ही गुजरता गया. वक्त के साथ शिवबालक के बच्चे भी सालदरसाल बड़े होते गए. बड़ी बेटी नीलम 14 साल की उम्र पार कर चुकी थी. तीनों बच्चे गांव के एसएस शिक्षा सदन स्कूल में पढ़ते थे. नीलम नौवीं कक्षा में पढ़ रही थी.

शारदा के घर से कुछ दूरी पर सर्वेश निषाद रहता था. वह एक अच्छे परिवार का था. सर्वेश अपने पिता की 3 संतानों में मंझला था. वह थोक में सब्जी बेचने का काम करता था. गांव के किसानों से सस्ते दाम पर सब्जियां खरीद कर उन्हें कानपुर की नौबस्ता थोक सब्जी मंडी में अच्छे दामों पर बेचा करता था.

चूंकि सर्वेश अच्छा कमाता था, सो खूब ठाटबाट से रहता था. गले में सोने की चेन, अंगुलियों में अंगूठियां और कलाई में महंगी घड़ी उस की पहचान थी. उस के पास महंगा मोबाइल रहता था. सर्वेश जिस तरह से अच्छी कमाई करता था, उसी तरह शराब और अय्याशी में वह अपनी कमाई लुटाता था.

उस के पिता इंद्रपाल उस की इस फिजूलखर्ची से परेशान थे. उन्होंने उसे बहुत समझाया और डांटाफटकारा भी लेकिन सर्वेश का रवैया नहीं बदला.

एक रोज नीलम स्कूल जा रही थी, तभी सर्वेश की नजर उस पर पड़ी. खूबसूरत नीलम को देख कर सर्वेश का मन मचल उठा. वह उसे फांसने का तानाबाना बुनने लगा. मौका मिलने पर वह उस से बात करने का प्रयास करता. लेकिन नीलम उसे झिड़क देती थी. तब सर्वेश खिसिया जाता.

आखिर जब उस के सब्र का बांध टूट गया तो उस ने एक रोज मौका मिलने पर नीलम का हाथ पकड़ लिया और बोला, ‘‘नीलम, मैं तुम्हें चाहता हूं. तुम्हारी खूबसूरती ने मेरा चैन छीन लिया है. तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूं.’’

नीलम अपना हाथ छुड़ाते हुए गुस्से से बोली, ‘‘सर्वेश, तुम यह कैसी बहकीबहकी बातें कर रहे हो, मैं तुम्हारी जातिबिरादरी की हूं और इस नाते तुम मेरे भाई लगते हो. भाई को बहन से इस तरह की बातें करते शर्म आनी चाहिए.’’

‘‘प्यार अंधा होता है नीलम. प्यार जातिबिरादरी नहीं देखता.’’ वह बोला.

‘‘होगा, लेकिन मैं अंधी नहीं हूं. मैं ऐसा नहीं कर सकती. नफरत करती हूं. और हां, आइंदा कभी मेरा रास्ता रोकने या हाथ पकड़ने की कोशिश मत करना, वरना मुझ से बुरा कोई न होगा, समझे.’’ नीलम ने धमकाया.

सर्वेश समझ गया कि नीलम अब ऐसे नहीं मानेगी. उसे अपनी खूबसूरती और जवानी का इतना घमंड है तो वह उस के घमंड को हर हाल में तोड़ कर रहेगा.

सर्वेश का एक दोस्त था अनिल निषाद. दोनों ही हमउम्र थे सो उन में खूब पटती थी. एक रोज दोनों शराब पी रहे थे, उसी दौरान सर्वेश बोला, ‘‘यार अनिल, मैं नीलम से प्यार करता हूं, लेकिन वह हाथ नहीं रखने दे रही.’’

‘‘देख सर्वेश, मैं एक बात बताता हूं कि नीलम ऐसीवैसी लड़की नहीं है. उस का पीछा छोड़ दे. कहीं ऐसा न हो कि उस का पंगा तुझे भारी पड़ जाए.’’ अनिल ने सर्वेश को समझाया.

‘‘अरे छोड़ इन बातों को, मैं भी जिद्दी हूं. मैं आज चैलेंज करता हूं कि नीलम अगर राजी से नहीं मानी तो मुझे दूसरा रास्ता अपनाना पड़ेगा.’’ सर्वेश ने कहा.

सर्वेश ने नीलम के ऊपर लाख डोरे डालने की कोशिश की लेकिन हर बार उसे बेइज्जती का सामना करना पड़ा. बात 13 जून, 2018 की है. उस रोज शाम 5 बजे नीलम दिशामैदान जाने को घर से निकली, तभी सर्वेश ने उस का पीछा किया. नीलम जैसे ही झाडि़यों की तरफ पहुंची, तभी सर्वेश ने उसे दबोच लिया और उसे जमीन पर पटक कर उस के साथ जबरदस्ती करने लगा.

नीलम उस की पकड़ से छूटने का प्रयास करने लगी लेकिन सर्वेश पर जुनून सवार था. तब नीलम ने हिम्मत जुटाई और सर्वेश के हाथ पर दांत से काट लिया. सर्वेश की पकड़ ढीली हुई तो वह चिल्लाती हुई सिर पर पैर रख कर गांव की ओर भागी. अपने घर पहुंचते ही नीलम मूर्छित हो कर देहरी पर गिर पड़ी.
ममता ने नीलम को अस्तव्यस्त कपड़ों में देखा तो समझ गई कि उस के साथ क्या हुआ है. मां ने नीलम के चेहरे पर पानी के छींटे मारे तो कुछ देर बाद उस ने आंखें खोल दीं. उस के बाद उस ने मां को सर्वेश की करतूत बताई. यह सुन कर ममता गुस्से से भर उठी.

वह शिकायत ले कर सर्वेश के पिता इंद्रपाल के पास पहुंची तो उस ने बेटे को डांटनेसमझाने के बजाय उस का पक्ष लिया और उलटे उस की बेटी नीलम के चरित्र पर ही अंगुली उठाने लगा.

ममता ने यह बात अपने पति को बताई. इस के बाद दोनों पतिपत्नी थाना सजेती पहुंच गए. उन्होंने सर्वेश के खिलाफ दुष्कर्म की कोशिश करने का मुकदमा दर्ज करा दिया. रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस सक्रिय हुई और आननफानन में सर्वेश को गिरफ्तार कर कानपुर जेल भेज दिया.

सर्वेश 4 महीने जेल में रहा. 20 अक्तूबर, 2018 को उस की जमानत हुई. जेल से बाहर आने के बाद सर्वेश के दिल में ममता और उस की बेटी नीलम के प्रति बदले की आग भभक रही थी. क्योंकि उन की वजह से वह जेल जो गया था.

बदला कैसे लिया जाए, इस विषय पर उस ने अपने दोस्त अनिल से विचारविमर्श किया तो तय हुआ कि ममता के कलेजे के टुकड़े विवेक को मार दिया जाए. विवेक शिवबालक का एकलौता बेटा था. इस के बाद दोनों ने योजना बनाई और समय का इंतजार करने लगे.

25 जनवरी, 2019 को अपराह्न 2 बजे शिवबालक का 10 वर्षीय बेटा विवेक अपने साथियों के साथ गली में खेल रहा था, तभी सर्वेश की नजर उस पर पडी़. अनिल भी उस के साथ था. सर्वेश ने अनिल के कान में कुछ कानाफूसी की फिर गांव के बाहर चला गया.

इधर अनिल ने विवेक के साथ खेल रहे सुमित को अपने पास बुलाया और उसे 20 रुपए का नोट दे कर कहा, ‘‘सुमित, तुम विवेक को ले कर गांव के बाहर ले आओ. वहां तुम दोनों को बिस्कुट, टौफी खिलाएंगे.’’
सुमित लालच में आ गया. वह विवेक को ले कर गांव के बाहर पहुंच गया. अनिल वहां विवेक के आने का ही इंतजार कर रहा था.

अनिल ने सुमित को वहीं से वापस कर दिया. वह विवेक को बहला कर सरसों के खेत पर ले गया. वहां सर्वेश पहले से मौजूद था. नफरत से भरे सर्वेश ने विवेक का हाथ पकड़ा और उसे घसीटते हुए खेत के अंदर ले गया. और विवेक को जमीन पर पटक कर बोला, ‘‘तेरी बहन ने मुझे जेल भिजवाया था. उस का बदला आज तुझे जान से मार कर लूंगा.’’

अनिल जो अब तक खेत के बाहर रखवाली कर रहा था, वह भी खेत के अंदर पहुंच गया. इस के बाद दोनों मिल कर विवेक का गला दबाने लगे. विवेक चीखने लगा तो दोनों ने गला दबाकर विवेक को मार डाला और फिर लाश को घासफूस से ढक कर वापस घर आ गए.

इधर शाम 5 बजे शिवबालक घर आया तो उसे विवेक दिखाई नहीं दिया, विवेक के बारे में उस ने शारदा से पूछा तो उस ने गली में खेलने की बात बताई. लेकिन शिवबालक का माथा ठनका.

वह उस की खोज में जुट गया. लेकिन विवेक नहीं मिला. दूसरे दिन उस की लाश सरसों के खेत में पुलिस की मौजूदगी में मिली. पुलिस ने शव को कब्जे में ले कर जांच शुरू की तो बदला लेने के लिए मासूम की हत्या का परदाफाश हुआ.

27 जनवरी, 2019 को थाना सजेती पुलिस ने अभियुक्त सर्वेश निषाद व अनिल को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया. कथा संकलन तक उन की जमानत नहीं हुई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मेरा मंगेतर तारीफ नहीं करता, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 26 वर्षीय युवती हूं, जल्दी ही मेरी शादी होने वाली है. मैं और मेरा मंगेतर अकसर मिलतेजुलते हैं. मैं जब भी उस से मिलने जाती हूं, अपनी तरफ से काफी बनसंवर कर जाती हूं. चाहती हूं कि वह मेरी तारीफ करे कि मैं कैसी लग रही हूं. लेकिन जब मैं पूछती हूं तो ही बताता है, खुद अपनेआप तारीफ नहीं करता. मुझे यह अच्छा नहीं लगता. कैसे पता करूं कि वह मेरी ड्रैसिंग सैंस के बारे में क्या महसूस कर रहा है?

जवाब

सब का अपनाअपना स्वभाव होता है. हो सकता है अभी आप का मंगेतर आप से ज्यादा खुला न हो. या हो सकता है आप के मंगेतर को पता ही न हो कि लड़कियों को खुश कैसे किया जाता है. या यह भी हो सकता है वह इन सब बातों को महत्त्व ही न देता हो.

हमारी राय यह है कि आप खुद ही अपने पार्टनर से पूछें कि ‘क्या मेरे पास एक अच्छा ड्रैसिंग सैंस है. आप को पता होना चाहिए कि वह आप के ड्रैसिंग सैंस के बारे में क्या महसूस करता है. हो सकता है कि आप का अपना स्टाइलिंग सैंस हो, लेकिन अगर आप को पार्टनर का आइडिया अच्छा लगे, तो आप को उस पर ध्यान देना चाहिए.

इस के अलावा, कभीकभी अपने पार्टनर को इंप्रैस करने के लिए आप खुद को उस की पसंद के अनुसार ड्रैसअप करें. इस से रिश्ते को स्पाइसअप करने में मदद मिलती है. लड़कों के लिए अपने पार्टनर से इमोशनल बौंडिंग के साथसाथ फिजिकल अपीयरैंस भी काफी माने रखता है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

कहां हैं गूगल फेसबुक के देसी विकल्प

एक दौर था जब आईटी सैक्टर में भारत की तूती बोलती थी. दावा किया जाता था कि आईटी यानी सूचना तकनीक की मशीनी दुनिया में भारतीय युवा प्रतिभाओं ने जो कमाल किया है, उस के दम पर भारत पूरे विश्व का ग्रोथ इंजन बना हुआ है. इस की 2 वजहें थीं, पहली-कंप्यूटर, इंटरनैट विषयों को समझने की सही वक्त पर शुरुआत और दूसरी, युवाओं का अंगरेजी ज्ञान.

इन 2 वजहों से भारतीय युवा देखतेदेखते पूरी दुनिया पर छा गया, लेकिन यह कमाल सिर्फ सर्विस सैक्टर में हुआ यानी हम ने जो ज्ञान हासिल किया वह अमेरिका, ब्रिटेन आदि मुल्कों में नौकरी पाने में लगाया. कुछ मानो में यह कमाल आज तक जारी है. गूगल के सीईओ के रूप में सुंदर पिचाई की मौजूदगी यह बात साबित करती है.

लेकिन ऐसा चमत्कार भारत और भारतीय प्रतिभाएं वहां नहीं कर सकतीं, जहां चीन ने बाजी मार ली. यह मामला गूगल, फेसबुक, ट्विटर, अलीबाबा और माइक्रोसौफ्ट जैसी इंटरनैट सेवाएं विकसित करने का है. इन ज्यादातर चीजों में किसी न किसी स्तर पर भारतीय आईटी पेशेवरों ने अपना योगदान दिया है, लेकिन ऐसा ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कोई कारनामा भारतीय जमीन पर नहीं हो सका. इस के लिए जहां एक ओर हमारे देश के नीतिनिर्धारक नेता जिम्मेदार हैं जो देश और समाज को ऐसे मामलों में कोई नई दृष्टि व योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वैसा मंच नहीं दे पाते हैं, तो दूसरी ओर बड़ी समस्या जनता के स्तर पर है.

भारत की जनता एक ओर तो भेड़चाल में विश्वास करती है, विदेशी चीजों के विकल्प के रूप में किसी नए प्रयोग को आजमाने में नाकभौं सिकोड़ती है तो दूसरी तरफ, देश की भलाई के लिए कोई पाबंदी लगाई जाएगी, तो लोकतंत्र की दुहाई दे कर वह सरकार को कोसने में जुट जाती है.

दिक्कतें देसी, हल भी हों देसी

देश में गूगल, फेसबुक आदि के देसी विकल्प बनाने का इस संबंध में एक उदाहरण हो सकता है. इस की बात देश में गाहेबगाहे उठती रही है. दिसंबर 2017 में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा ने ऐसी ही एक बात पुणे में आयोजित कार्यक्रम ‘इंडिया आइडियाज कौन्क्लेव’ में कही थी. भारतीय उद्यमियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि अगर समस्याएं देसी हैं, तो उन के समाधान भी देसी होने चाहिए. इस के लिए भारत को गूगल, फेसबुक, अलीबाबा जैसी अंतर्राष्ट्रीय महारथी कंपनियों जैसी कामयाबी के समकक्ष अपना मौडल खड़ा करना चाहिए. ताकि जब देसी समस्याओं के समाधान की बात उठे, तो उन्हें हल करने के तरीके हमारे अपने हों.

उल्लेखनीय है कि हमारी सरकारें इस मसले को ले कर लगातार चिंता व्यक्त करती रही हैं. प्रकाश जावड़ेकर भी वर्ष 2017 में लोकसभा में फेसबुक, ट्विटर, गूगल और माइक्रोसौफ्ट आदि के देसी विकल्प बनाने की बात कह चुके हैं.

लोकसभा में आईआईआईटी बिल (प्राइवेटपब्लिक मोड) 2017 पेश करते वक्त केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने यह अफसोस जताया था कि भारतीय आईटी प्रतिभाओं को भले ही दुनिया सलाम ठोकती हो, लेकिन इस सच से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस में कई कमियां और विसंगतियां हैं, जिन का खमियाजा आईटी सैक्टर भुगत रहा है. सब से बड़ी खामी यह है कि भारत आज तक न तो अपना माइक्रोसौफ्ट बना पाया, न फेसबुक, न ट्विटर, न गूगल. ऊपर से विडंबना यह है कि इन सारी कंपनियों में भारतीय पेशेवर ही नौकरी कर रहे हैं और शीर्ष पदों पर काबिज हैं. ये प्रतिभाएं भी उन अमेरिकी, यूरोपीय चुनौतियों का विकल्प नहीं पेश कर पाईं जिन का आज दुनिया में सिक्का चल रहा है.

पिछली यूपीए सरकार के समय तत्कालीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने भी इंटरनैट के लिए गूगल की तरह स्वदेशी सर्च इंजन की जरूरत बताई थी.

मालिक नहीं महज ग्राहक हैं हम

यह सच है कि आईटी सैक्टर के अगुआ देश (भारत) के लोग अभी भी इंटरनैट के उपभोक्ता बने हुए हैं, आविष्कारक नहीं. इस से रोजगार, कमाई, बौद्धिक संपदा अधिकार आदि कई मुद्दों पर देश को पिछड़ना पड़ रहा है. हम सिर्फ बाजार, ग्राहक हैं. यह बात इस से साबित होती है कि देश में सामान और सेवाएं बेचने वाले ई-कौमर्स सरीखे काफी इंतजाम हुए हैं, जैसे फ्लिपकार्ट, मिंत्रा, जबौंग, बिग बास्केट और शादीडौटकौम जैसी वैबसाइटों की भरमार है. लेकिन ये सभी सामान और सेवाएं खरीदनेबेचने के प्रबंधों से ज्यादा कुछ नहीं हैं.

ये अमेजोन और इसी तरह की अन्य विदेशी ई-कौमर्स कंपनियों की नकल पर खड़ी की गई हैं. इन में आविष्कार वाली कोई बात नहीं है. इन से कुछ रोजगार तो अवश्य मिले पर देश की आविष्कार वाली वह छवि नहीं बनी, जो हमारी कथित पूरब का ज्ञान वाली इमेज के हिसाब से बौद्धिक अधिकारों (पेटैंट) की फीस से मिलने वाली बेशुमार पूंजी पैदा करती. यह काम तभी हो सकता था जब भारत में ही गूगल, फेसबुक जैसी चीजों के देसी मौडल खड़े किए जाते और उन्हें अपनाया जाता.

देश को इंटरनैट के ऐसे देसी विकल्प सिर्फ इसलिए नहीं चाहिए कि इसी मामले में हम अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे, बल्कि इस की जरूरत कई अन्य वजहों से है, जिस का एक खुलासा वर्ष 2017 में पीडब्ल्यूसी ग्लोबल 100 सौफ्टवेयर लीडर्स के चयन वाली रिपोर्ट से हो चुका है. इस रिपोर्ट में दुनिया की शीर्ष 100 आईटी कंपनियों का वैश्विक चयन किया गया था, जिस में भारत की 16 कंपनियां स्थान बना सकती थीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी सैक्टर में कमाई के मामले में साल 2011 में उभरते बाजार में भारत की 5वीं रैंकिंग थी, जबकि सौफ्टवेयर रैवेन्यू के मामले में 2,738 मिलियन डौलर की कमाई के साथ चीन इस लिस्ट में सब से ऊपर था. चीन के बाद इसराईल, रूस, ब्राजील का नंबर था और उस के बाद भारत का. 100 देशों की लिस्ट में 5वीं रैंकिंग बहुत बुरी नहीं मानी जा सकती, लेकिन यह उपलब्धि हमारे लिए गौरव का विषय नहीं है. कुछ समय पहले तक युवा प्रतिभाओं के बल पर भारत ने अमेरिका की सिलिकौन वैली से ले कर दुनिया के कई विकसित देशों में जिस तरह आईटी सैक्टर में अपनी योग्यता का परचम लहराया था, उस से लगता था कि दशकों तक भारत को कम से कम इस मामले में कोई चुनौती नहीं मिल सकेगी.

भारत में पिछले 2 दशकों में जो बीपीओ इंडस्ट्री खड़ी हुई, कहा जाता था कि उस में उसे कोई चुनौती नहीं है. लेकिन न सिर्फ इस सैक्टर में भारत धीरेधीरे अपनी चमक खो रहा है, बल्कि इनोवेशन (नवाचार) के मामले में भी भारत पिछड़ गया है.

हालात यह है कि आज हम माइक्रोसौफ्ट विंडोज, गूगल, फेसबुक, व्हाट्सऐप जैसी तमाम चीजों के ग्राहक या उपभोक्ता मात्र बन कर रह गए हैं. इस मामले में हमारे आविष्कार जरा भी नहीं हैं. हालांकि, यहां एक बड़ा प्रश्न यह भी है कि भारतीय आईटी उद्योग में ऐसी क्या समस्याएं पैदा हुईं जिन्होंने उसे ऐसे सैक्टर में आगे बढ़ने से रोक दिया, जिस में कभी उस की तूती बोलती थी.

गूगल की नहीं चलने दी चीन ने

आईटी तकनीक के साथसाथ अंगरेजी सीख कर इस क्षेत्र में भी अब चीन, फिलीपींस जैसे देश भी प्रतिस्पर्धा देने की हैसियत में आ गए हैं. ये देश कभी अंगरेजी बोलचाल की शैली और लहजे में कमियों के कारण काफी पिछड़े हुए थे. आईटी संबंधी ग्लोबल कामकाज में उन का दखल अब आईटी ज्ञान की बदौलत बढ़ा है. चीन जैसे मुल्क सौफ्टवेयर में ही नहीं, बल्कि हार्डवेयर के कामकाज में कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं. ये मुल्क ऐसा इसलिए कर पाए क्योंकि इन्होंने न केवल भारत जैसे देशों को उन क्षेत्रों मेें कड़ी टक्कर दी जिन का इन्हें विशेषज्ञ माना जाता था बल्कि उन्होंने आईटी के सभी क्षेत्रों में नए अवसरों को तलाशा और उन का दोहन किया.

उल्लेखनीय यह भी है कि चीन ने दुनिया के अग्रणी ब्रैंडों को अपने यहां हावी नहीं होने दिया और उन के बेहतरीन देसी विकल्पों को पेश कर के दिखा दिया कि न तो वह अपने बाजार का किसी अन्य देश या विदेशी कंपनी को दोहन करने देगा और न ही खुद होड़ में बने रहने का कोई मौका गंवाएगा. चीन ने अपने यहां न तो गूगल की एक चलने दी और न ही ट्विटरफेसबुक की. इन के विकल्प उस ने पेश कर दिए हैं और वे बेहद प्रचलित हैं.

एक इलाज है पाबंदी

आतंकी गतिविधियों पर रोक, साइबर सुरक्षा, खोज की नई तकनीक विकसित करने और कमाई जैसे कुछ कारण हैं जिन के आधार पर देसी फेसबुक, ट्विटर और सर्च इंजन गूगल की इस जरूरत को वाजिब ठहराया जा सकता है. हमारे देश में इस आवश्यकता को परखने का एक प्रमुख नजरिया यह भी हो सकता है कि चीन की तरह भारत में इंटरनैट एक दायरे में रह कर काम करे. इसलिए बहुत से लोग इस हदबंदी के पैरोकार होंगे.

आतंकी गतिविधियों से ले कर अश्लील सामग्रियों के प्रसार तक कई ऐसी आपत्तिजनक बातें और चीजें भारत जैसे लोकतांत्रिक  देश में भी इंटरनैट के लिए कुछ बंदिशों और कायदेकानूनों की मांग करते हैं. पर इंटरनैट पर जैसी लगाम पड़ोसी मुल्क चीन में लगाई गई है, क्या वैसा सबकुछ भारत में मुमकिन है? फिलहाल नहीं.

चीन इंटरनैट पर ऐसी पाबंदी इसलिए लगा पा रहा है क्योंकि वहां इन चीजों के विकल्प बनाए गए हैं. वहां अगर गूगल को काम नहीं करने दिया जाए, तो उस का बेहतर विकल्प बायदु डौटकौम हाजिर है. इसी तरह  यदि ट्विटर बंद कर दिया जाता है तो चीन उस के बदले वेईबो पर वही सेवा देने लगता है. यही नहीं, चीन की सरकार इंटरनैट के हर डाटा कोे संचालित करने वाले विशालकाय सर्वर भी बीजिंग में स्थापित करना चाहती है ताकि सारे डाटा को जब चाहे रोका और खंगाला जा सके.

साफ है कि यदि भारत को चीन जैसा नियंत्रित इंटरनैट चाहिए तो उसे गूगल, ट्विटर और फेसबुक जैसी चीजों का विकल्प देना होगा क्योंकि अब इन के बिना दुनिया चल नहीं सकती. पर देसी इंटरनैट विकल्पों की मांग का अकेला यही औचित्य नहीं है. कहने को तो इस के लिए सीधे गूगल, ट्विटर, फेसबुक से बात की जा सकती है कि वे हमारे देश के लिए अलग से गूगल आदि ला दें. चीन में ऐसा प्रयोग किया जा चुका है.

चीनी सरकार की बंदिशों के आगे झुकते हुए गूगल ने 2006 में चीन में अपना सैल्फ सैंसर्ड सर्च इंजन लौंच किया था. तब उस ने चीन सरकार के कुछ दिशानिर्देशों का पालन करने की हामी भरी थी, लेकिन इस से काम नहीं चला. लिहाजा, विशुद्ध चीनी सर्च इंजन बायदु डौटकौम लाया गया, जो उसी तरह काम करता है जैसा चीनी सरकार चाहती है.

हैकिंग का मसला भी सुलझेगा

देसी विकल्पों की खोज का दूसरा मकसद साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना है. अभी साइबर सिक्योरिटी का आलम यह है कि सरकारी संस्थानों की वैबसाइटों को तो जब चाहे, जो चाहे हैक कर लेता है. वहां से डाटा चुराना कोई मुश्किल नहीं है, लेकिन सरकार भी जानती है कि इन चुनौतियों के मद्देनजर माइक्रोसौफ्ट जैसे एक स्वदेशी औपरेटिंग सिस्टम  (ओएस) को विकसित करने की जरूरत है. हालांकि दावा किया जाता रहा है कि इस मोरचे पर अपने देश में काम शुरू हो चुका है.

डीआरडीओ यानी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के करीब 150 कंप्यूटर इंजीनियर विंडोज और लाइनैक्स जैसे विदेशी व आयातित ओएस जितना ही सक्षम व ताकतवर औपरेटिंग सिस्टम विकसित कर रहे हैें.

इंटरनैट की किसी उपयोगिता के देसी अवतार के बारे में विचार करने के साथसाथ जरूरी यह भी है कि उस की व्यावहारिकता के पहलू पर भी गौर किया जाए. कहीं ऐसा न हो कि सरकारी मदद से विकसित होने और चलने वाली अन्य परियोजनाओं की तरह देसी इंटरनैट, आईटी के विकास का काम सरकारी गति से ही आगे बढे़ और सिर्फ जनता से वसूले गए टैक्स की बरबादी का सबब बन जाए.

सरकार को ऐसी किसी भी परियोजना में हाथ डालने से पहले यह गौर करना चाहिए कि वे योजनाएं आम जनता को आकर्षित करने वाली और देश के आईटी उद्योग को मजबूत करने वाली साबित हों. जनता को भी इस में सहयोग करना होगा. कहीं ऐसा न हो कि किसी दिन सरकार अपनी ओर से गूगलफेसबुक पर प्रतिबंध लगाते हुए उन के बेहतर औप्शन पेश करे, तो जनता उन्हें आजमाए बिना ही सरकार की लानतमलामत में जुट जाए.

आजकल तो यह ट्रैंड भी खूब चल निकला है कि देश के फायदे की किसी भी सरकारी बात पर जनता बिना जांचेपरखे टीकाटिप्पणी करने लगती है और टीवी चैनल वाले 8-10 लोगों को स्टूडियो में बिठा कर दिनरात आलोचना का कीर्त चालू कर देते हैं. ऐसे में सरकार को जनमत के दबाव में अपना फैसला बदलना पड़ता है क्योंकि सत्ता में बैठी पार्टी को लगता है कि  उसे आगे भी सरकार बनानी है, तो जनता जैसा चाहती है, वैसा ही करना होगा.

इस में नेताओं का दोष यह है कि वे जनता को समझा नहीं पाते हैं कि सरकार जो फैसला कर रही है, वह आखिरकार पूरे देश के लिए अच्छा होगा.

चीन ने कब क्या बैन किया

चीनी सरकार की यह नीति रही है कि विदेश से आने वाली कोई भी सूचना उस के नागरिकों तक सीधे नहीं पहुंच सकती. यह पहले विदेशी कंपनियों के स्वामित्व वाली सभी चीजों को फिल्टर करती है ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं कोई चीन की आलोचना तो नहीं कर रहा है. इस के लिए चीन की सरकार ने पूरी दुनिया में मशहूर कई ऐप्स (अप्लीकेशंस) अपने यहां प्रतिबंधित कर रखे हैं.

चीन ने अपने बेहद कड़े साइबर सुरक्षा कानूनों का हवाला देते हुए मुफ्त में औनलाइन बातचीत और मैसेजिंग की सुविधा देने वाले स्काइप पर अक्तूबर 2017 में रोक लगा दी थी. दावा किया गया कि इस के स्वामित्व वाली कंपनी माइक्रोसौफ्ट ऐप्पल के चीन स्थित ऐप स्टोरों से स्काइप को पूरी तरह हटा दिया गया था.

स्काइप जैसे ऐप पर पाबंदी वर्ष 2017 की शुरुआत में ही वहां लग चुकी है. चीन में व्हाट्सऐप की जगह उस के चीनी विकल्प वीचैट को पेश किया गया, जिस के वहां करीब 9 करोड़ उपभोक्ता हैं.

वर्ष 2014 में जब युवाओं के कुछ संगठनों ने हौंगकौंग में बेहद चर्चित आंदोलन ‘अंबे्रला रिवोल्यूशन’ चलाया तो इस के लिए फोटो शेयरिंग ऐप इंस्टाग्राम को अपने आंदोलन का जरिया बनाया. यह देखते हुए चीन ने अपने यहां इस ऐप को बैन कर दिया.

कुछ ऐसा ही नजारा तब दिखा जब जुलाई 2009 में चीन के शिंजिंयाग प्रांत में हुए उरुमक्वी दंगों में फेसबुक के बढ़चढ़ कर इस्तेमाल की बात पता चली. इस के बाद चीन ने तुरंत फेसबुक पर रोक लगा दी, हालांकि हौंगकौंग और मकाऊ के कुछ इलाकों में कुछ शर्तों के साथ इस के प्रयोग की छूट दी गई.

चीन ने जून 2009 में ट्विटर के साथसाथ ब्लौगिंग के प्लेटफौर्म ब्लौगर और वर्डप्रैस पर भी रोक लगा दी थी. हालांकि, कुछ चीनियों ने इस पाबंदी को धता बताते हुए जुगाड़ के जरिए इन का इस्तेमाल जारी रखा.

यूट्यूब पर भी चीन में सब से पहले 2007-08 के कुछ महीनों के लिए रोक लगाई गई थी, पर इस पर बाद में पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई. अब यूट्यूब सिर्फ हौंगकौंग, मकाऊ, शंघाई फ्री टे्रड जोन में ही देखा जा सकता है.

चीन में सब से ज्यादा चर्चा वर्ष 2014 में गूगल व जीमेल पर रोक लगाने की हुई. असल में गूगल और चीन के रिश्तों में हर समय उतारचढ़ाव आता रहा है. फिलहाल वहां इस पर पाबंदी है. लेकिन वर्ष 2010 से गूगल ने अपना कामकाज हौंगकौंग की ओर शिफ्ट कर दिया जहां इस पर सैंसर की कोई पाबंदी नहीं है.

स्टील के बर्तन में पकाएं जाने वाला खाना हो सकता है नुकसानदायक

इस बात से तो आप सभी वाकिफ होंगे कि पुराने जमाने में भोजन पकाने के लिए मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल किए जाते थे. लेकिन धीरे-धीरे ये बर्तन क्ले पॉट की जगह मेटल में बदल गए. आज के समय में हमारे घरों में स्टील के बर्तन ज्यादा पाएं जाते है लेकिन कई लोगों का मानना है कि इस तरह के बर्तन में पकाया जाने वाला खाना आपकी सेहत के लिए नुकसान दायक होता है. तो आइए आज इस आर्टिकल में हम यही जानेंगे कि स्टील में पकाएं जाने वाला आपको कितना नुकसान दे सकता है.

स्टील के बर्तन में खाना पकाने के नुकसान

स्टील के बर्तन में खाना पकाने से इसके अंश खाने में मिल सकते हैं. इनका बेस काफी पलता होता है, इसलिए जिस भोजन को हल्की आंच में देर तक पकाने की जरूरत पड़ती है, उसे इससे दूर रखना चाहिए, वरना खाना खराब हो सकता है, या जल सकता है.

अगर स्टील के बर्तन को उसके स्मोक पॉइंट से ज्यादा हीट तक ले जाए तो इनमें मौजूद ट्राइग्लिसराइड्स टूटने लगते हैं और वो फ्री फैटी एसिड बन जाता है. ये न ही पानी में घुल पाते हैं और न ही हमारा पेट इनका पाचन सही तरीके से कर पाता है.

इन चीजों को स्टील के बर्तन में न पकाएं

स्टील के बर्तन में ऐसी चीजें पकाने की सलाह नहीं दी जाती जो पानी और नमक घोलकर तैयार किया जाता है. आमतौर पर हम नूडल्स, पास्ता, मैक्रोनी को स्टील के पैन में बनाते हैं. इससे नमक और तेल बर्तन के बेस में जम जाते हैं और इससे खारे पानी का निशान बन जाता है और रिएक्ट कर सकता है.

स्टील के बर्तन को ओवन में न डालें

कई बार हम आसल की वजह से स्टील के बर्तन ओवन में डाल देते हैं, जो नुकसानदेह और रिस्की भी है. चूंकि कोई भी मेटल इलेक्ट्रिसिटी का कंडक्टर होता है, इसलिए इसमें आग लगने का डर रहता है. ऐसा करना आपकी सुरक्षा के लिए खतरा है.

एक घड़ी औरत : प्रिया की जिंदगी की कहानी

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ऑनलाइन लीक हुई कंगना रनौत की चंद्रमुखी 2, एक्ट्रेस को लगा तगड़ा झटका

एक्ट्रेस कंगना रनौत अक्सर अपने बयानों और फिल्मों को लेकर चर्चा में बनीं रहती है अब हाल ही में उनकी अपकमिंग फिल्म चंद्रमुखी 2 को लेकर खबरे तेज होने लगी है लेकिन इससे पहले ही एक्ट्रेस को बड़ा झटका लगा है. करीब डेढ़ साल बाद स्क्रीन पर वापस लौटी है कि तभी उनकी फिल्म ऑनलाइन लीक हो गई है. हालांकि फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ये लीक हो गई है. जिससे एक्ट्रेस को काफी दुख पहुंचा है.

 

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आपको बता दें, कि कंगना रनौत की चंद्रमुखी 2 सभी सिनेमाघरों में 28 सितंबर को रिलीज हो चुकी है फिल्म फुकरे 3 और वैक्सीन वॉर से बॉक्स ऑफिस पर क्लैश हुई है और खबर है कि फिल्म ऑनलाइन एचडी में लीक हो चुकी है. हालांकि ये पहला मामला नहीं है जब कोई फिल्म रिलीज होते ही लीक हो गई हो. इससे पहले भी कई बड़ी फिल्म ऑनलाइन लीक हो चुकी है. बता दें, इससे फिल्म की कलेक्शन पर फर्क पडेगा.

 

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गौरतलब है कि कंगना रनौत की फिल्म ‘चंद्रमुखी 2’ साल 2005 में रिलीज हुई साउथ स्टार रजनीकांत की चंद्रमुखी 2 का सीक्वल है. पी वासु के डायरेक्शन में बनी कंगना रनौत की फिल्म ‘चंद्रमुखी 2’ को लेकर उनके फैंस एक्साइटेड थे. फिल्म के रिलीज होते ही फैंस का इंतजार खत्म हो गया है. कंगना रनौत के फैंस काफी समय से अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस की फिल्म का इंतजार कर रहे थे.

क्या है अगला प्रोजेक्ट

बता दें, इससे पहले कंगना रनौत ने साल 2022 की मई में रिलीज हुई फिल्म ‘धाकड़’ में नजर आई थीं. कंगना रनौत की ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप हुई थी. इस तरह से फैंस को करीब डेढ़ साल बाद उनकी फिल्म देखने का मौका मिला है. वर्क फ्रंट की बात करें तो कंगना रनौत अब फिल्म ‘तेजस’ और फिल्म ‘इमरजेंसी’ में काम करती नजर आएंगी.

14 साल छोटी हीरोइन को चूमते दिखे भोजपुरी स्टार रविकिशन

भोजपुरी फिल्म के जाने-माने स्टार रवि किशन इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है रवि किशन ना केवल भोजपुरी फिल्मों के लिए जाने जाते है बल्कि बौलीवुड फिल्मों में भी उन्होंने अभिनय किया है. उन्होने बौलीवुड को भी कई हिट फिल्में दी है अब जल्द ही वह अक्षय कुमार की फिल्म मिशन: रानीगंज द ग्रेट भारत रेस्क्यू में नजर आएंगे. इस फिल्म में लीड रोल में अक्षय कुमार और परिणीति चौपड़ा होगीं, हालांकि रवि किशन इस फिल्म से ज्यादा अपने बोल्ड सीन वाले भोजपुरी गाने को लेकर चर्चा में बने हुए है. जो कि इंटरनेट पर धमाल मचा रहा है.

 

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आपको बता दें, कि भोजपुरी गाना कवन जादू इन दिनों सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. जिसमे रवि किशन एक्ट्रेस मोनालिसा रोमांस करते दिख रहे है. काफी बोल्ड सीन करते हुए एक्ट्रेस के साथ नजर आ रहे है इतना ही नहीं, एक्ट्रेस के साथ लिपलॉक करते दिख रहे है. जो कि इंटरनेट वर्ल्ड में धडल्ले से वायरल हो रहा है. हालांकि ये गाना पुराना है लेकिन लोग इसके इंटीमेट सीन देख अपना मनोरंजन कर रहे है.

बता दें कि इस गाने को बॉलीवुड के स्टार सिंगर उदित नारायण और सोनाली दत्त ने गाया है. वहीं गाने के बोल अखिलेश पांडे ने लिखे हैं और संगीत गणेश पांडे ने दिया है. मालूम हो कि रवि किशन ने भोजपुरी इंडस्ट्री को दोबारा खड़ा किया था. इसके लिए उन्होंने काफी कड़ी मेहनत की थी. हालांकि आपको बता दें, कि रवि किशन अपने से 14 साल छोटी एक्ट्रेस के साथ इस गाने में रोमांस कर रहे है.

टीवी की दुनिया में हिट है मनोलिसा

भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा अब टीवी की दुनिया में धमाल मचा रही हैं. उन्होंने कई टीवी शोज में काम किया है. इसके अलावा मोनालिसा, बिग बॉस में भी नजर आई थीं. इसी शो के बाद लोग उन्हें जानने लगी थीं. मोनालिसा अपने बोल्ड अंदाज के लिए भी जानी जाती हैं. एक्ट्रेस मोनालिसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं.मोनालिसा के हर पोस्ट पर लाखों लोग प्यार बरसाते हैं.

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