कैरियर इन क्रिएटिव फील्ड

यदि आप क्रिएटिविटी और फैशन को ले कर पैशनिस्ट हैं तो ग्लैमर वर्ल्ड में अपना कैरियर तलाश सकते हैं. इस में थोड़ा रिस्क तो है, लेकिन अगर कामयाब हो गए तो पौपुलैरिटी के साथसाथ पैसा भी खूब है. आज फैशन की दुनिया का दायरा काफी बढ़ गया है. रैंप शो, फैशन शो, ब्रैंड प्रमोशन इवैंट सभी बड़े और मेगा बजट के होने लगे हैं. इन के बढ़ने से आज की जैनरेशन ग्लैमर को बतौर कैरियर अपनाने के लिए उत्सुक है.

युवाओं के लिए यह फील्ड काफी आकर्षक है, क्योंकि इस में क्रिएटिविटी और इमैजिनेशन में ग्लैमर का तड़का लगाने की जरूरत होती है. यंग जैनरेशन हर बार कुछ नया करना चाहती है, इस फील्ड में इस की सब से ज्यादा जरूरत भी है. आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही ग्लैमरस कैरियर औप्शंस के बारे में :

फैशन कोरियोग्राफी

आमतौर पर यों तो फैशन कोरियोग्राफी को ही फैशन डिजाइनिंग समझा जाता है, जबकि ऐसा नहीं है. कोरियोग्राफर पर ही पूरे शो की जिम्मेदारी होती है. किस मौडल को क्या पहनना है, रैंप पर कब किस मौडल को कैसे कैटवाक करनी है, साथ ही शो स्टौपर के साथ मौडल्स की पोजिशंस को भी कोरियोग्राफर ही मैनेज करता है.

डिमांड : आएदिन फैशन शोज और प्रमोशन इवैंट होते रहते हैं. ऐसे में यह इवैंट फैशन इंडस्ट्री में हो रहे अपडेट्स को जानने का भी एक बेहतरीन सोर्स है. साथ ही फैशन कोरियोग्राफर्स की डिमांड भी लगातार बढ़ रही हैं. इतना ही नहीं, कालेज इवैंट्स के अलावा कौर्पाेरेट इवैंट्स में भी फैशन शोज काफी पौपुलर हो रहे हैं.

स्टडी से ज्यादा लाइव ऐक्सपीरियंस: इस फील्ड की खास बात यह है कि इस में थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल पर जोर दिया जाता है. अगर आप में क्रिएटिविटी है तो किसी फैशन कोरियोग्राफर के साथ काम सीख सकते हैं. शुरुआत में कम सैलरी मिलती है. लेकिन जैसेजैसे आप के शोज हिट होते जाते हैं, वैसेवैसे आप की इनकम बढ़ती जाती है. आप चाहें तो आगे चल कर एक ब्रैंड के रूप में भी काम कर सकते हैं. यह आप को अपनी एक अलग पहचान देगा.

नौलेज जरूरी : फैशन कोरियोग्राफर में म्यूजिक के सेलैक्शन और कलैक्शन की समझ के साथसाथ शो के लिए लुक और थीम तैयार करने की भी समझ होनी चाहिए. कोरियोग्राफर को एक ही समय पर कई सारे काम करने पड़ते हैं, जैसे मौडल और डिजाइनर से ड्रैस की फिटिंग चैक कराना, शो को डायरैक्ट करना, डीजे म्यूजिक और लाइट इंजीनियर के साथ कोओर्डिनेट करना.

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मौडलिंग

अट्रैक्टिव लुक और बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स इस क्षेत्र में सफलता का मूलमंत्र है. बीटाउन में ऐंट्री करने वाले कई ऐक्टरऐक्ट्रैस मौडलिंग से ही ऐक्टिंग में आए हैं. ऐश्वर्या राय से ले कर जौन अब्राहम तक सभी पहले मौडलिंग करते थे. यदि आप का चेहरा फोटोजैनिक है और फैशन, ग्लैमर आप को शुरू से ही अट्रैक्ट करता रहा हो तो मौडलिंग आप के लिए बढि़या कैरियर औप्शन होगा.

 टैलीविजन मौडलिंग : इस में आप को मूवी कैमरों के सामने मौडलिंग करनी पड़ती है, जिस का इस्तेमाल टीवी विज्ञापनों, सिनेमा, वीडियो और इंटरनैट में किया जाता है. आजकल डिजिटल मीडियम में भी इस के अवसर बढ़े हैं.

प्रिंट मौडलिंग : इस में स्टिल फोटोग्राफर्स मौडल्स की तसवीरें लेते हैं, जिन का इस्तेमाल अखबार, ब्रोशर्स, पत्रिकाओं, कैटलौग, कैलेंडरों आदि में किया जाता है.

शोरूम मौडलिंग : शोरूम मौडल्स आमतौर पर निर्यातकों, गारमैंट निर्माताओं और बडे़ रिटेलरों के लिए काम करते हुए फैशन को प्रदर्शित करते हैं.

रैंप मौडलिंग : इस में मौडल्स को रैंप पर वाक करते हुए किसी नामी फैशन डिजाइनर के कपड़ों की झलक दिखानी होती है. रैंप मौडल की खड़े होने की अदा, चलने की शैली और बौडी लैंग्वेज का बेहतर होना जरूरी है.

क्या है जरूरी : मौडलिंग के क्षेत्र में आने के लिए यों तो किसी खास तरह की योग्यता का होना जरूरी नहीं है, हां, लड़कियों के लिए इस फील्ड में लंबाई 5 फुट 7 इंच और लड़कों के लिए 5 फुट 10 इंच होनी जरूरी है. इसी के साथ ही अगर आप ने किसी मौडलिंग इंस्टिट्यूट से ट्रेनिंग ले रखी है तो सोने पर सुहागा. 12वीं के बाद आप सीधे इस क्षेत्र में दाखिला ले सकते हैं.

कहां से करें : जे डी इंस्टिट्यूट औफ फैशन डिजाइन मुंबई, नैशनल इंस्टिट्यूट औफ फैशन डिजाइन चंडीगढ़, आर के फिल्म्स ऐंड मीडिया एकेडमी, नई दिल्ली.

फैशन डिजाइनिंग

आज डिजाइनर कपड़ों की बढ़ती मांग के चलते फैशन इंडस्ट्री में तेजी से उछाल आया है. इंडियन फैशन इंडस्ट्री ग्लोबल रूप ले चुकी है. हर महीने करोड़ों का कारोबार होता है. यहां तक कि भारत में तैयार होने वाले कपड़ों की मांग विदेशों में भी खूब है.

ऐसे में फैशन डिजाइनिंग में कैरियर की काफी अच्छी संभावनाएं हैं. ऐक्सपोर्ट हाउस, फैशन डिजाइनर, गारमैंट चेन स्टोर, टैक्सटाइल मिल, लाइफस्टाइल मैग्जीन के साथ आप फैशन मर्चेंडाइजर के रूप में फैशन डिजाइनर के साथ काम कर सकते हैं या ऐक्सपोर्ट हाउस के साथ जुड़ सकते हैं. अगर आप कुछ हट कर करना चाहते हैं तो शू डिजाइनिंग या फिर ज्वैलरी डिजाइनिंग से ले कर ऐक्सैसरी डिजाइनिंग जैसे कैरियर भी चुन सकते हैं. फैशन और ग्लैमर का तालमेल तो हमेशा ही रहा है, यही कारण है कि यह क्षेत्र यूथ को बेहद आकर्षित करता है.

कोर्स : यह प्रोफैशनल कोर्स 12वीं के बाद किया जा सकता है. इस के तहत अपेरल डिजाइनिंग, फैशन डिजाइनिंग, प्रोडक्शन मैनेजमैंट, क्लौथिंग टैक्नोलौजी, टैक्सटाइल साइंस, अपेरल कंस्ट्रक्शन मैथड, फैब्रिक ड्राइंग और प्रिंटिंग, कलर मिक्सिंग तथा कंप्यूटर एडेड डिजाइन आदि क्षेत्रों में से किसी एक का चुनाव कर सकते हैं. इस में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, एडवांस डिप्लोमा, फाउंडेशन डिगरी, डिगरी और पीजी डिगरी तक कोर्स उपलब्ध हैं. निफ्ट जैसे संस्थान में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू के दौर से गुजरना पड़ता है.

कहां से करें : नैशनल इंस्टिट्यूट औफ फैशन टैक्नोलौजी दिल्ली, एमिटी स्कूल औफ फैशन टैक्नोलौजी नोएडा, नैशनल इंस्टिट्यूट औफ फैशन टैक्नोलौजी मुंबई, सिंबायोसिस इंस्टिट्यूट औफ डिजाइन पुणे.

क्या कहना है मौडलिंग से ऐक्टिंग में आए सितारों का

वानी सूद : श्रीदेवी के साथ फिल्म ‘मौम’ और कई टीवी शोज में आने वाली दिल्ली गर्ल वानी सूद कहती हैं, ‘‘ मैं अपने कालेज के फैशन वीक में हिस्सा लेती थी. जब लोगों ने एप्रिशिएट किया तब कई ब्रैंड्स और फैशन शोज में मौडलिंग की. मैं मुंबई मौडलिंग के लिए ही आई थी लेकिन साथ में ऐक्टिंग प्रोजैक्ट्स के लिए औडिशन देती रही, चांस मिला तो ऐक्टिंग में आ गई.’’

अर्जित तनेजा : अर्जित ने भी अपनी शुरुआत मौडलिंग से की थी. वे कहते हैं, ‘‘मैं ने कभी ऐक्टिंग में कैरियर बनाने की नहीं सोची थी. शौकिया मौडलिंग करता था. एक बार किसी फैशन शो के लिए मुंबई जाना पड़ा तो मेरा पोर्टफोलियो वहां शेयर हुआ और मुझे एक टीवी शो के औडिशन के लिए बुला लिया गया.’’

क्रिएटिव सोच वाले ही सक्सैसफुल हैं

दिल्ली एनसीआर में कई बड़े फैशन शोज की कोरियोग्राफी कर चुके पुष्कर कहते हैं, ‘‘फैशन कोरियोग्राफी का क्षेत्र बहुत बड़ा है, इस में हार्डवर्क और कई चैनलों में एकसाथ काम और कोऔर्डिनेशन करना पड़ता है. मेरी टीम कई बार 12 घंटे से भी ज्यादा काम करती है. यह फैशन क्रिएटिव सोच रखने वाले के लिए बिलकुल सही जगह है.’’

यौन बंधक बनने से बचें वरना हो जाएगा कुछ ऐसा

कुछ समय पूर्व मायानगरी मुंबई में एक गिरोह पकड़ा गया, जिस के चंगुल से करीब दर्जन भर लड़कियां मुक्त कराई गईं. उन लड़कियों को बारगर्ल बना कर देह व्यापार के अनैतिक कार्य में लगा दिया गया था. उन में बस एक ही समानता थी. वह यह कि वे रूपवती थीं और मन में मौडल बनने या किसी फिल्म अथवा सीरियल में अभिनय करने की चाह पाले हुए थीं. तफतीश में जो ज्ञात हुआ वह सनसनीखेज था. गिरोह के सदस्यों ने विभिन्न अखबारों में विज्ञापन  छपवा कर देश के अलगअलग हिस्सों में इंटरव्यू के माध्यम से उन की भरती की थी. उन की छिपी आकांक्षाओं को उभारते हुए उन्हें जो सब्जबाग दिखाए गए थे, वे बेहद रोमांचक थे. उन में कोई भी महत्त्वाकांक्षी लड़की फंस सकती थी. उन से वादा किया गया था कि कुछ समय की टे्रनिंग के बाद उन्हें फिल्मों व सीरियलों में काम दिलवा दिया जाएगा. यदि वहां काम न मिला तो कम से कम मौडल तो अवश्य बनवा दिया जाएगा.

लेकिन हुआ क्या

इसी मृगतृष्णा में उन्हें मुंबई ला कर फूहड़ नाचगानों और शरीर उघाड़ू तौरतरीकों की टे्रनिंग दी गई. आधुनिका बनाने के लिए सोचीसमझी साजिश के तहत अभिनय के नाम पर यौन शोषण का शिकार बनाया गया. लगे हाथों फिल्मीकरण की आड़ में उन की पोर्न फिल्में बना ली गईं. अंतत: हश्र यह हुआ कि उन्हें होटलों में डांसर व बारगर्ल का काम दिलवा दिया गया. साथ ही उन्हें हाईप्रोफाइल कालगर्ल बना कर उन की कमान स्वयं के हाथों में रख ली ताकि देह के सौदों में से अधिकांश हिस्सा वे हड़प सकें. उन्हें जब मुक्त करवाया गया तब वे डरीसहमी हुई थीं और उन के खिलाफ एक भी शब्द बोलने को राजी न थीं, क्योंकि ब्लैकमेलिंग के भय से उन की यौन बंधुआ बनी हुई थीं.

अर्श से फर्श पर जिंदगी

अब दृष्टि दौड़ाइए यौन बंधक बनाए जाने के उच्चस्तरीय सनसनीखेज मामलों पर, जिन्होंने देश को झंझोड़ कर रख दिया था.

याद कीजिए हरियाणा के हिसार में घटित घटना जिस में गीतिका नाम की लड़की राजनेता गोपाल कांडा की शिकार बनी. वह भी ऐसा ही मामला था. गीतिका पहले गोवा के कैसीनो में काम करती थी. वहीं वह कांडा के संपर्क में आई तो उसे सुनहरे सपने दिखा कांडा ने उसे चक्कर में फंसा लिया. मछली को दाना डालने की भांति योजनाबद्ध तरीके से उस ने उसे अपनी एअरलाइंस में नौकरी दे कर यौन बंधक बना लिया. वहां उच्च पद पर बैठा कर शिकंजा और भी कस दिया.

स्थिति समझ आने पर छटपटाहट में गीतिका ने नौकरी छोड़ दी और एकदूसरे एअरलाइंस में काम तलाश लिया. पर कांडा ने पीछा नहीं छोड़ा. झूठे आरोप लगा, वहां से नौकरी छुड़वा कर वह उसे वापस अपनी एअरलाइंस में ले आया. इस के बाद यौन दुराचरण का ऐसा शिकार बनाया कि अंतत: गीतिका को आत्महत्या के लिए विवश होना पड़ा. लेकिन स्यूसाइड नोट में उस ने कांडा के कांडों का भांड़ा फोड़ दिया. तब जा कर यौन बंधक बनाने वाला मामला सामने आया वरना अब तक कांडा न जाने और कितने कांड कर चुका होता.

यौन बंधक बनाने या बनाने की कोशिश करने वालों की फेहरिस्त यों तो काफी लंबी है पर हाल ही में इस मामले का एक सनसनीखेज कांड एशिया के ताकतवर पत्रकारों में गिने जाने वाले तरुण तेजपाल के साथ जुड़ा है. तहलका नामक पत्रिका के प्रकाशक और प्रधान संपादक 51 वर्षीय तरुण तेजपाल पर गोवा के एक फाइव स्टार होटल में अपनी ही मातहत एक युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप है.

भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में गिरफ्तार तेजपाल पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक ऐसी युवती के साथ बलात्कार की कोशिश की जो उन्हें अपना संरक्षक मानती थी.

ले डूबी अतिमहत्त्वाकांक्षा

24 वर्षीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला व उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता अमरमणि त्रिपाठी कांड ने भी पूरे देश को झंझोड़ कर रख दिया. वर्षों चली इस प्रेमकहानी का अंत अंतत: मधुमिता की हत्या के रूप में सामने आया.

देश की अन्य जगहों पर भी सैक्स अपराध में कईयों की जानें गईं तो कई बदनाम भी हुए. भंवरी देवी व महिपाल मदेरना तो अभिषेक मनु सिंघवी और गोपाल कांडा व गीतिका के नाम ऐसे ही कांडों से शर्मसार करने वाले रहे व बहुत कुछ सोचने पर विवश करते हैं.

झूठे प्रलोभन

यौन बंधक जिस युवती को भी बनाया जाता है, उसे बंधक बनाने वाले के इशारों पर यौन शोषण का शिकार बनना पड़ता है. यौन बंधक बनाने वाला चाहे स्वयं उस का यौन शोषण करे अथवा अपने चाहे अनुसार वह उसे किसी और को परोस दे. हालांकि ऐसा करना और करवाया जाना, देह व्यापार जैसा अनैतिक कार्य है किंतु बंधक होने के कारण वह न चाहते हुए भी ऐसा करने हेतु विवश कर दी जाती है.

वैसे कोई भी लड़की जानबूझ कर यौन बंधक नहीं बनना चाहती. वह क्यों चाहेगी कि किसी अन्य के इशारों पर वह अपना शरीर किसी को दे. मगर देखने में आया है कि किसी षड्यंत्र के तहत इस का आरंभ स्वैच्छिक तरीके से होता है, जिस की भनक युवती को तनिक भी नहीं हो पाती.

प्रस्ताव स्वीकारने से पहले

बंधक बनाने के मंतव्य से दिखाए गए सब्जबाग प्राय: वास्तविकता से कोसों दूर होते हैं. योग्यता एवं औफर से वे तनिक भी मेल नहीं खाते. गीतिका के मामले में भी ऐसा ही हुआ. गोपाल कांडा ने आकर्षक प्रस्ताव देते हुए उसे अपनी कंपनी में डायरैक्टर बनाने का प्रस्ताव दे दिया. गीतिका ने पल भर भी नहीं सोचा कि एकाएक मुझ में क्या विशिष्ट योग्यता आ गई कि मैं एअरलाइंस कंपनी में डायरैक्टर बनने के योग्य मान ली गई? उस ने ऐसा सोचा होता तो शायद वह चक्कर में नहीं फंसती.

अत: ऐसे चमकदार प्रस्तावों को स्वीकार करने से पहले समुचित रूप से विचार करें कि प्रस्ताव तर्कपूर्ण है भी या नहीं? याद रखें कि वास्तविक योग्यता से बिलकुल परे ऐसा लुभा लेने वाला प्रस्ताव अंतत: फंसा लेने वाला जाल ही साबित होता है.

मुंबई प्रकरण में जो घटित हुआ वह सुनियोजित अपराध था. उस में युवतियों के घर वाले भी झांसे में आ गए क्योंकि उस में हुए चयन, विज्ञापन व इंटरव्यू में हुई प्रतिस्पर्द्धा के माध्यम से किए गए थे. सामान्यतया ऐसी प्रक्रिया संदेहपूर्ण नहीं मानी जाती. लेकिन जरूरी है कि विज्ञापनों की यथार्थता भली प्रकार परखी जाए. तभी तो प्राय: पत्रपत्रिकाएं विज्ञापन परिशिष्ट पर इस आशय का उल्लेख अवश्य करती हैं- विज्ञापन में किए गए दावे व प्रस्तुतीकरण की यथार्थता पाठक स्वविवेक से परखें. अगर कोई बिना परखे प्रलोभनों में फंसता है तो उस के लिए पत्रपत्रिकाएं जिम्मेदार नहीं मानी जा सकतीं.

समाजसेविका हर्षिता माहेश्वरी का कहना है कि प्राय: बुरी प्रवृत्ति के लोग ऐसी युवतियों को आसानी से शिकार बना लेते हैं, जो अतिमहत्त्वाकांक्षी होती हैं या मातापिता, पति या परिजनों से असंतुष्ट व रुष्ट रहती हैं. वे अपनी पीड़ा की बात अकसर मित्रों व सहेलियों से कहती रहती हैं. धीरेधीरे यह उन की आदत बन जाती है. दुश्चरित्र लोग ऐसी लड़कियों की ही तलाश में रहते हैं और वे अपने लुभाऊ व्यवहार, लच्छेदार बातों व हितचिंतन के ढोंग के जरीए शीघ्र ही उन के विश्वसनीय बन जाते हैं. वे उन्हें भावनात्मक रूप से जाल में फंसा लेने के बाद शिकंजा कसने के उद्देश्य से वे यौनाचार में लिप्त होने को प्राथमिकता देते हैं. उन की कोशिश होती है कि अंतरंग क्षणों को रिकौर्ड कर लिया जाए ताकि उन्हें आसानी से ‘यौन बंधक’ बनाया जा सके.

दुष्चक्र में फंस जाने पर

लड़कियों को जब भी लगे कि वे दुष्चक्र में फंस गई हैं और उन्हें ब्लैकमेल किया जाने लगा है, तो उन्हें बुद्धि व कौशल से निबटने का प्रयास करना चाहिए. सब से पहले तो जो होगा देखा जाएगा के निश्चय के साथ मन को दृढ़ कर, ब्लैकमेलर के इशारों पर नाचना बंद कर दें और चुनौतियों से निबटने के लिए तत्पर हो जाएं ताकि वह धमकियां देने से बाज आए. यह मान कर चलें कि ऐसे लोग अधिकतर धमकियां दे कर भयभीत करने का प्रयास करते हैं, लेकिन धमकियों को कार्यरूप में परिणित करने का उन में साहस नहीं होता.

ऐसे लोग पीडि़ता को बागी हुआ देख, मन ही मन तो डर जाते हैं किंतु ऊपर से कठोर बने रहने का अभिनय करते हुए बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं. उन का अपराधबोध उन्हें भयभीत करने लगता है और वे समझौता करने का दबाव बनाने लगते हैं.

अत: जब भी मुकाबले में उतरें ऐसे प्रस्तावों को कठोरता से नकार दें और पूर्व निश्चय पर दृढ़ता से बनी रहें कि जो होगा देखा जाएगा.

साथ ही उसी क्षण से जितना संभव हो यौन बंधक बनाने वालों व उन के शातिर मास्टर माइंड व्यक्तियों, स्थानों आदि की पहचान व उन के खिलाफ कानूनी सुबूत जुटाने का गुपचुप व सतर्क प्रयास शुरू कर देना चाहिए. घटनास्थल की स्थिति, समय व लिप्तजनों की जानकारी आदि का सिलसिलेवार विवरण स्मृति में संजो कर रखने का प्रयास करें ताकि बताए जाने पर पुलिस व कानूनी एजेंसियां उन बिंदुओं के आधार पर जांच कर सकें.

याद रखें कि कानून जानता है कि बंधक होने के नाते पीडि़त पक्ष द्वारा आदेश मानना परिस्थितिजन्य मजबूरी रही है.

मौका मिलते ही उपलब्ध साधन के माध्यम से पुलिस अथवा किसी नारी संगठन या समाजसेवी संस्थान को संपूर्ण विवरण सहायता याचना के साथ दें ताकि आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक सहायता मिल सके. जब तक पुलिस, घर वालों या संगठनों से वांछित सहायता उपलब्ध न हो, तब तक अपराधियों को किंचित भी संदेह न होने दें. अन्यथा वे सुबूतों को मिटाने का प्रयास करने लगेंगे. यह पीडि़ता की कुशलता पर निर्भर करता है कि वह किस तरह से स्थिति को युक्तिपूर्वक संभाले रखती है.

काम आते हैं अपने ही

हमेशा याद रखें कि कठिन समय में वे ही काम आते हैं, जो वाकई आप के अपने होते हैं. भला मातापिता व परिवारजनों से बढ़ कर अपना और कौन हो सकता है. अत: इस डर से मुक्त हो कर कि नादानियों के लिए वे भलाबुरा कहेंगे, डांटेंगे या नाराज होंगे, उन को सब कुछ सचसच बता दें.

ऐसे विभिन्न प्रकरणों की अनुसंधान अधिकारी रह चुकीं पुलिस अधिकारी स्मृति कुलश्रेष्ठ का कथन है कि ऐसे मामलों में बचाव में ही बचाव है. फंसने से बचना ज्यादा बेहतर है, जबकि फंसने के बाद बचना मुश्किल व बदनामी भरा मार्ग है. तब तक युवती का वर्तमान व भविष्य दांव पर लग चुका होता है. अत: जब कभी ऐसे प्रलोभन भरे प्रस्ताव मिलें या चकाचौंधपूर्ण स्थितियां बनें, बिना बताए अंधेरी गुफा में प्रवेश करने के बजाय घरपरिवार व शुभचिंतिकों की सलाह लें.

वे कहती हैं कि प्राय: लड़कियां समवयस्क सहेलियों से इसलिए सलाह नहीं लेतीं कि मुझे मिल रहा अवसर वे न हथिया लें. मांबाप व सगेसंबंधियों से उन्हें यह डर रहता है कि दकियानूसी सोच के कारण वे इतने अच्छे प्रस्ताव को ठुकरा देंगे. इस कारण वे बिना सोचेविचारे एकपक्षीय निर्णय ले लेती हैं, जो उन के लिए आत्मघाती साबित होता है.

कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि सावधानी में ही समझदारी है, अन्यथा ऐसे प्रकरणों में सावधानी हटते ही दुर्घटना घटने की प्रबल संभावनाएं बनी रहती हैं.

बदले की आग में किया दोस्त का कत्ल

31 मार्च, 2017 को सुबह के करीब 7 बजे की बात है. उत्तरी दिल्ली के थाना तिमारपुर के ड्यूटी अफसर एएसआई सतीश कुमार को पुलिस कंट्रोल रूम से एक चौंकाने वाली खबर मिली. कंट्रोलरूम से बताया गया कि बाहरी रिंग रोड पर गोपालपुर रेडलाइट के पास जो बिजलीघर है, उस के नजदीक तकिए के एक कवर में किसी इंसान के 2 हाथ पड़े हैं.

मामला हत्या का लग रहा था. दरअसल, कुछ शातिर हत्यारे किसी का कत्ल करने के बाद पहचान छिपाने के लिए उस के अंग काट कर अलगअलग जगहों पर फेंक देते हैं. इस से पुलिस भी भ्रमित हो जाती है. ड्यूटी अफसर ने इस काल से मिली सूचना एएसआई अशोक कुमार त्यागी के नाम मार्क कर दी.

एएसआई अशोक कुमार त्यागी कांस्टेबल अनिल कुमार को साथ ले कर सूचना में बताए गए पते की तरफ रवाना हो गए. वह जगह थाने से करीब 2 किलोमीटर दूर थी इसलिए वह 10 मिनट के अंदर वहां पहुंच गए. वहां पर तमाम लोग जमा थे. भीड़ को देख कर उधर से गुजरने वाले वाहनचालक भी रुक रहे थे. एएसआई ने मुआयना किया तो वास्तव में एक मटमैले छींटदार तकिए के कवर में 2 हाथ रखे मिले.

उन्होंने इस की सूचना थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर को दे दी. थानाप्रभारी कुछ देर पहले ही रात्रि गश्त से थाने लौटे थे. एएसआई अशोक कुमार से बात कर के वह भी एसआई हरेंद्र सिंह, एएसआई उमेश कुमार, हेडकांस्टेबल राजेश, कांस्टेबल कमलकांत और निखिल कुमार को ले कर कुछ ही देर में बिजलीघर के पास पहुंच गए.

मौके पर पहुंचने के बाद थानाप्रभारी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और फोरैंसिक टीम को भी सूचना दे दी. इन दोनों टीमों के पहुंचने तक पुलिस उन अंगों से दूर रही. करीब आधे घंटे में फोरैंसिक और क्राइम इनवैस्टीगेशन की टीमें वहां पहुंच गईं. मौके के फोटो वगैरह खींचने के बाद पुलिस ने तकिए को उठा कर उलटा किया तो उस में से 2 बाहों के अलावा पीले रंग की एक पौलीथिन भी निकली. दोनों बाहों को कंधे से काटा गया था.

उस थैली को खोला गया तो उस में एक युवक का सिर था. सिर और हाथ देख कर वहां मौजूद सभी लोग चौंक गए. फोरैंसिक टीम और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम का काम निपट जाने के बाद थानाप्रभारी ने जांच शुरू कर दी. वहां पर मृतक के चेहरे को कोई भी नहीं पहचान पाया, क्योंकि हत्यारे ने चाकू से उस के चेहरे को बुरी तरह से गोद डाला था. उस के दाहिने हाथ पर ‘ऊं साईंराम’ गुदा हुआ था. जरूरी काररवाई करने के बाद पुलिस ने उन तीनों अंगों को अपने कब्जे में ले लिया.

मृतक के अन्य अंग भी हत्यारे ने कहीं आसपास ही डाले होंगे, यह सोच कर थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर बुराड़ी से कश्मीरी गेट की तरफ जाने वाली सड़क की साइड को बड़े ध्यान से देखते हुए चल रहे थे. करीब 100 मीटर चलने पर खून से सनी एक चादर पड़ी मिली. वहीं पर एक विंडचिटर, स्वेटर, लोअर, शर्ट और एक जींस भी पड़ी थी. कांस्टेबल अनिल को वहां छोड़ कर थानाप्रभारी करीब 200 मीटर आगे बढ़े थे कि सड़क किनारे बाईं टांग पड़ी मिली, जो जांघ से कटी हुई थी.

कांस्टेबल कमलकांत को हिफाजत के लिए वहां छोड़ कर थानाप्रभारी और आगे बढ़े. वहां से वह 200 मीटर आगे सड़क के बाईं ओर उन्हें दाहिनी टांग भी पड़ी मिल गई. मृतक का हाथपैर और सिर बरामद हो चुके थे. अब केवल धड़ बरामद करना था. उस की खोजबीन के लिए वह और आगे बढ़े. बाहरी रिंगरोड पर जहां तक उन के थाने की सीमा थी, वहां तक उन्होंने सड़क के दोनों तरफ काफी खोजबीन की. झाडि़यां भी देखीं पर कहीं भी धड़ नहीं मिला.

फोरैंसिक टीम और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम भी उन जगहों पर पहुंच गई, जहां दोनों टांगें मिली थीं. उन का काम निपट जाने के बाद थानाप्रभारी ने पंचनामे की काररवाई पूरी की. इस के बाद सिर, दोनों हाथों और दोनों पैरों को सब्जीमंडी मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया. खबर मिलने पर डीसीपी जतिन नरवाल ने भी उन जगहों का निरीक्षण किया, जहांजहां पर वे कटे अंग मिले थे.

दोपहर करीब 12 बजे उत्तरी जिला पुलिस को वायरलैस द्वारा मैसेज मिला कि मजनूं टीला गुरुद्वारे के पास स्थित संजय गांधी अखाड़े के नजदीक फुटपाथ के किनारे प्लास्टिक का सफेद रंग का बोरा पड़ा हुआ है. उस बोरे से दुर्गंध आ रही है और उस पर मक्खियां भिनभिना रही हैं. यह इलाका थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में आता था, इसलिए वहां के थानाप्रभारी 10 मिनट में ही मौके पर पहुंच गए.

चूंकि यह मैसेज पूरे जिले में प्रसारित हुआ था, जिसे तिमारपुर के थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर ने भी सुना था. मैसेज सुनते ही ओ.पी. ठाकुर के दिमाग में विचार आया कि कहीं उस बोरे में उस व्यक्ति का धड़ तो नहीं है, जिस के अन्य अंग उन के इलाके में मिले थे. लिहाजा वह भी संजय अखाड़े के पास पहुंच गए.

सिविल लाइंस थानाप्रभारी ने जब उस बोरे को खुलवाया तो एक चादर में लपेट कर रखी हुई सिरविहीन लाश दिखी. यह देख तुरंत क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और फोरैंसिक टीम को खबर दे दी गई. कुछ देर में दोनों टीमें मौके पर पहुंच गईं. पुलिस ने चादर में लिपटी हुई लाश बाहर निकलवाई. वह किसी युवक का धड़ था. धड़ देख कर थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर को लगा कि यह धड़ उसी युवक का हो सकता है, जिस के और अंग बरामद किए गए हैं.

क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और फोरैंसिक टीम का काम निपट जाने के बाद ओ.पी. ठाकुर ने इस की सूचना डीसीपी को दी. डीसीपी के निर्देश पर थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर ने पंचनामे की काररवाई कर के उस धड़ को भी सब्जीमंडी मोर्चरी भिजवा दिया.

डाक्टरों ने जांच कर बता दिया कि धड़ और कटे हुए सारे अंग एक ही व्यक्ति के हैं. इस से यह बात जाहिर हो रही थी कि हत्यारे बेहद शातिर हैं. उन्होंने मृतक के अंगों को अलगअलग जगहों पर इस तरह डाला था, जिस से पुलिस उन तक न पहुंच सके. लाश के सारे टुकड़े बुराड़ी से कश्मीरी गेट बसअड्डे की तरफ जाने वाली सड़क पर ही डाले गए थे. इस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि हत्यारों ने लाश ठिकाने लगाने के लिए या तो स्कूटर या स्कूटी का प्रयोग किया होगा या फिर लाश औटोरिक्शा अथवा कार वगैरह से ठिकाने लगाई होगी.

पुलिस के सामने सब से बड़ी चुनौती मृतक की शिनाख्त करने की थी. वह कौन था, कहां का रहने वाला था, यह सब पता लगाना आसान नहीं था, क्योंकि मौके से पुलिस को ऐसी कोई चीज नहीं मिली थी, जिस से मृतक की शिनाख्त में सहयोग मिल सके. बस दाहिने बाजू पर ‘ॐ साईंराम’ गुदा था.

मृतक का हुलिया बताते हुए थानाप्रभारी ने सब से पहले दिल्ली के समस्त थानों में मैसेज भेज कर यह जानने की कोशिश की कि इस हुलिए से मिलताजुलता कोई व्यक्ति गायब तो नहीं है. पर किसी भी थाने में इस हुलिए से मिलतेजुलते किसी व्यक्ति की गुमशुदगी की सूचना दर्ज नहीं थी.

31 मार्च को ही शाम के समय बुराड़ी थाने के संतनगर की गली नंबर 92 की रहने वाली शकुंतला नाम की महिला थाने पहुंची. शकुंतला ने ड्यूटी अफसर को बताया कि उस का 26 वर्षीय बेटा नितिन कल रात से घर नहीं आया है. उन्होंने बेटे का हुलिया भी बता दिया.

ड्यूटी अफसर को यह बात तो पता थी ही कि तिमारपुर पुलिस ने किसी व्यक्ति की 6 टुकड़ों में कटी लाश बरामद की है, इसलिए उन्होंने शकुंतला से कहा, ‘‘मैडम, हम तो यही चाहते हैं कि नितिन जहां भी हो सहीसलामत हो. पर आज तिमारपुर थाना पुलिस ने एक लाश बरामद की है, जिस की शिनाख्त अभी नहीं हो सकी है. आप एक बार तिमारपुर थाने जा कर संपर्क कर लें तो अच्छा रहेगा.’’

इतना सुन कर शकुंतला घबराते हुए बोलीं, ‘‘नहीं मेरे बेटे के साथ ऐसा नहीं हो सकता.’’

उधर ड्यूटी अफसर ने तिमारपुर के थानाप्रभारी को फोन कर के बताया कि संतनगर की एक महिला अपने 26 साल के बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराने आई है. इन का बेटा कल से गायब है. यह खबर मिलने पर थानाप्रभारी ने एसआई हरेंद्र सिंह को बुराड़ी थाने भेज दिया. हरेंद्र सिंह ने बुराड़ी थाने में बैठी शकुंतला से उस के बेटे नितिन के गायब होने के बारे में बात की. फिर वह उसे अपने साथ तिमारपुर थाने ले गए.

सब से पहले उन्होंने महिला को बरामद की गई लाश के सारे टुकड़ों के फोटो दिखाए. उस के दाहिने बाजू पर ‘ॐ साईंराम’ लिखा था. यही नितिन के सीधे हाथ पर भी लिखा था. उस का चेहरा ज्यादा क्षतिग्रस्त था इसलिए वह उसे ठीक से नहीं पहचान सकी. इस पर एसआई हरेंद्र सिंह उसे सब्जीमंडी मोर्चरी ले गए.

दरअसल, हत्यारों ने मृतक के चेहरे को चाकू से गोद दिया था, जिस से चेहरा बुरी तरह बिगड़ गया था. फिर भी उस बिगड़े चेहरे और हाथ पर गुदे टैटू से शकुंतला ने लाश की पहचान अपने बेटे नितिन के रूप में कर ली. इस के बाद तो वह वहीं पर दहाड़ें मारमार कर रोने लगी.

पुलिस ने उसे सांत्वना दे कर जैसेतैसे चुप कराया. इस के बाद शकुंतला ने नितिन की हत्या की जानकारी अपने पति और अन्य लोगों को दी. खबर मिलते ही शकुंतला के पति लालता प्रसाद मोहल्ले के कई लोगों के साथ सब्जीमंडी मोर्चरी पहुंच गए. किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि नितिन की कोई इस तरह हत्या कर सकता है. बहरहाल पोस्टमार्टम कराने के बाद लाश के सभी टुकड़े लालता प्रसाद को सौंप दिए गए.

लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस का अगला काम हत्यारों तक पहुंचना था. डीसीपी जतिन नरवाल ने थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर की अगुवाई में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में इंसपेक्टर संजीव वर्मा, एसआई अमित भारद्वाज, हरेंद्र सिंह, एएसआई सतेंद्र सिंह, हेडकांस्टेबल सुनील, राजेश, कांस्टेबल कुलदीप, निखिल, कमलकांत, विकास और सुनील कुमार आदि को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने सब से पहले मृतक नितिन उर्फ सुमित उर्फ भोला के परिजनों से बात की. उस की मां शकुंतला ने बताया कि नितिन हैदरपुर में जौनसन एंड जौनसन कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर के यहां सेल्समैन था. वह कल यानी 30 मार्च को अपनी ड्यूटी खत्म कर के 6 बजे घर आ गया था. बाद में वह किसी से मिलने बाहर चला गया था.

जब वह काफी देर तक नहीं लौटा तो उसे कई बार फोन किया पर उस ने नहीं उठाया. सुबह होने तक भी जब नितिन घर नहीं लौटा तो उसे फोन किया पर उस का फोन बंद मिला. उस के दोस्तों और अन्य लोगों को फोन कर के उस के बारे में मालूम किया गया, लेकिन कोई पता नहीं चला. थकहार कर वह थाने में गुमशुदगी लिखाने पहुंची.

इस जानकारी के बाद पुलिस ने नितिन के दोस्तों से पूछताछ करनी शुरू कर दी.

8-10 दोस्तों से पूछताछ करने के बाद एक दोस्त ने पुलिस को बताया कि नितिन 30 मार्च की शाम सवा 6 बजे सरदा मैडिकल स्टोर के सामने देखा गया था. वह किसी की मोटरसाइकिल पर बैठा था. सरदा मैडिकल स्टोर संतनगर में मेनरोड पर ही है. पुलिस ने उस मैडिकल स्टोर पर पहुंच कर नितिन के बारे में पता किया तो पता चला कि वहां काम करने वाला कोई भी व्यक्ति नितिन को नहीं जानता था.

इस के बाद पुलिस ने वहां मार्केट में दुकानों के सामने लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी. फुटेज देखते समय नितिन के कुछ दोस्तों को भी बैठा लिया गया था, जिस से वह नितिन को आसानी से पहचान सकें. एक फुटेज में नितिन मोटरसाइकिल पर जाता दिख गया. दोस्तों ने बता दिया कि वह हैप्पी नाम के दोस्त के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहा है. हैप्पी संतनगर की ही गली नंबर 18 में रहने वाले सुनील कपूर का बेटा था. पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि हैप्पी बदमाश और दबंग किस्म का है.

पुलिस जब उस के घर पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला. घर वालों ने बताया कि वह कहीं रिश्तेदारी में गया है. जिस मोटरसाइकिल पर वह फुटेज में दिखा था, वह उस के घर के सामने खड़ी दिखी. इस के अलावा उस के घर के सामने एक वैगनआर कार भी खड़ी थी.

इस के बाद पुलिस ने हैप्पी के बारे में गोपनीय जांच शुरू कर दी. इस जांच में पुलिस को उस के बारे में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां मिलीं. यह भी पता चला कि हैप्पी और उस के मामा का लड़का पवन नितिन से गहरी दुश्मनी रखते थे.

पुलिस टीम ने हैप्पी को तलाश करने के बजाय उस के खिलाफ सबूत जुटाने शुरू कर दिए. उस के फोन की काल डिटेल्स पाने के लिए संबंधित मोबाइल कंपनी को लिख दिया गया. पुलिस ने हैप्पी की उस रात की मूवमेंट देखने के लिए पुन: आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी. फुटेज में रात 1 बजे के आसपास उसी वैगनआर कार की मूवमेंट दिखाई दी जो उस के घर के सामने खड़ी पाई गई थी. इस से पुलिस को शक हुआ कि नितिन की हत्या में हैप्पी का हाथ हो सकता है.

नितिन से हैप्पी और उस के मामा का लड़का पवन रंजिश रखते थे. हैप्पी तो घर से गायब था जबकि पवन संतनगर की गली नंबर 88 में रहता था. पुलिस टीम पवन के घर पहुंच गई. वह घर पर ही मिल गया. पुलिस को देख कर वह घबरा गया. पुलिस ने उस से हैप्पी के बारे में पूछा तो उस ने अनभिज्ञता जताई.

पुलिस ने पवन के कमरे की गहनता से जांच की तो बैड के पास खून के छींटे मिले. उन छींटों के बारे में पूछा गया तो वह इधरउधर की बातें करने लगा. तभी थानाप्रभारी ओ.पी. ठाकुर ने उस के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया. एक थप्पड़ लगते ही पवन लाइन पर आ गया. अचानक उस के मुंह से निकल गया, ‘‘सर, नितिन को मैं ने नहीं बल्कि हैप्पी ने मारा था.’’

केस का खुलासा होते ही थानाप्रभारी ने राहत की सांस ली. उन्होंने पवन को हिरासत में ले लिया. इस के बाद हैप्पी के घर के बाहर खड़ी सीबीजेड मोटरसाइकिल और वैगनआर कार कब्जे में लेने के बाद हैप्पी के घर वालों पर उसे तलाश करने का दबाव बनाया. कार चैक की गई तो उस की सीट कवर पर भी खून के धब्बे पाए गए. पुलिस ने पवन से नितिन की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस की हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह दोस्ती में अविश्वास की भावना से उपजी हुई निकली.

26 वर्षीय नितिन उर्फ सुमित उर्फ भोले उत्तरी दिल्ली के थाना बुराड़ी के संतनगर में अपने परिवार के साथ रहता था. वह जौनसन एंड जौनसन कंपनी के हैदरपुर डिस्ट्रीब्यूटर के यहां सेल्समैन था. नितिन की संतनगर के ही रहने वाले सूरज और विक्की से अच्छी दोस्ती थी. तीनों दोस्त साथ खातेपीते थे.

एक बार नितिन को कुछ पैसों की जरूरत पड़ी तो उस ने विक्की से पैसे मांगे. दोस्त की जरूरत को समझते हुए विक्की ने उसे 10 हजार रुपए उधार दे दिए. कई बार पैसों की वजह से अपने नजदीकी संबंधों और यहां तक कि रिश्तेदारी तक में दरार पड़ जाती है. यही बात इन दोस्तों के बीच भी हुई. निर्धारित समय पर जब नितिन ने विक्की के पैसे नहीं लौटाए तो विक्की ने उस से तकाजा करना शुरू कर दिया. नितिन कोई न कोई बहाना बना कर उसे टालता रहा.

नितिन के बारबार किए जा रहे झूठे वादों से विक्की भी परेशान हो गया. 10 हजार की रकम कोई छोटीमोटी तो होती नहीं जो विक्की छोड़ देता. दोस्ती में भी कोई दरार न आए इसलिए वह उस से पैसे लौटाने को कहता रहा. बारबार पैसों का तकाजा करना नितिन को पसंद नहीं था. इस बात पर कभीकभी उन दोनों के बीच तकरार हो जाती थी.

15 अगस्त, 2015 की बात है. नितिन, विक्की और सूरज यमुना किनारे पार्टी करने गए थे. नितिन तो वापस आ गया लेकिन विक्की और सूरज नहीं आए. घर वालों ने पूछा तो नितिन ने बता दिया कि वे दोनों नदी में डूब गए. जवान बच्चों के डूबने की बात पर उन के घरों में हाहाकार मच गया. पुलिस को सूचना दी गई तो पुलिस ने गोताखोरों की मदद से सूरज और विक्की की लाशें बरामद करने की कोशिश की लेकिन उन की लाशों का पता तक नहीं चला. सूरज विक्की का ममेरा भाई था.

विक्की के भाई हैप्पी और सूरज के भाई पवन को नितिन पर शक था. उन का मानना था कि नितिन ने उधारी के पैसों से बचने के लिए दोनों को मार डाला. उन का कहना था कि नितिन ने विक्की और सूरज को शराब पिलाने के बाद गला घोंट कर हत्या कर दी होगी और उन की लाशें पत्थर के साथ बांध कर नदी में डाल दी होंगी.

दोनों ही आपराधिक प्रवृत्ति के थे. दोनों पर ही चोरी, लूट आदि के कई मुकदमे चल रहे थे. उन्होंने दिल्ली पुलिस की औपरेशन सेल से नितिन की शिकायत की थी. औपरेशन सेल ने इस मामले की जांच शुरू कर दी. शिकायत के लगभग एक साल बाद भी जब इस मामले में कोई नतीजा नहीं निकला तो पवन और हैप्पी को निराशा हुई. उन्होंने सोचा कि नितिन ने पुलिस से सांठगांठ कर के काररवाई दबवा दी है. वे नितिन को ही अपने भाइयों का कातिल मान रहे थे. उस के किए की वे उसे सजा दिलाना चाहते थे.

जब उन्हें लगा कि उसे कानूनी सजा नहीं मिल पाएगी तो उन्होंने खुद ही नितिन को सजा देने की ठान ली और सोच लिया कि जिस तरह उन के भाइयों की लाश आज तक नहीं मिल सकी है, उसी तरह नितिन की हत्या कर के लाश इस तरह से ठिकाने लगाएंगे कि उस के घर वाले ढूंढते ही रहें.

नितिन से उन दोनों की बोलचाल तक बंद हो चुकी थी, लेकिन अपना मकसद पूरा करने के लिए उस से नजदीकी संबंध बनाने जरूरी थे. इसलिए पवन और हैप्पी ने अपनी योजना के तहत उस से दोस्ती की. चूंकि नितिन भी शराब का शौकीन था इसलिए उस ने सारे गिलेशिकवे भुला कर हैप्पी और पवन से दोस्ती कर ली.

लेकिन हैप्पी और पवन के मन में तो कोई दूसरी ही खिचड़ी पक रही थी, जिस से नितिन अनभिज्ञ था. लेकिन इस से पहले नितिन पर अपना विश्वास जमाना जरूरी था ताकि काम आसानी से हो सके.

हैप्पी संतनगर की गली नंबर-18 में अपने परिवार के साथ रहता था जबकि उस का ममेरा भाई पवन गली नंबर-88 में अकेला रहता था. पवन दुकानों पर कौस्मेटिक सामान सप्लाई करता था. उस ने अपने कमरे के ताले की एक चाबी हैप्पी को दे रखी थी और एक खुद रखता था. कभीकभी वे नितिन के साथ इसी कमरे में दारू की पार्टी रखते थे.

हैप्पी नितिन को ठिकाने लगाने के तरहतरह के प्लान बनाता पर उसे मौका नहीं मिल पा रहा था. 30 मार्च, 2017 की शाम को हैप्पी अपनी सीबीजेड मोटरसाइकिल से आ रहा था, तभी संतनगर बसअड्डे पर उसे नितिन दिखाई दिया. दरअसल, ड्यूटी के बाद वह घर हो कर बाहर बाजार में आ गया था. नितिन को देखते ही उस ने उस से बात की और पार्टी करने के बहाने उसे गली नंबर-88 में पवन के कमरे पर ले गया. जाते समय हैप्पी ने शराब की बोतल खरीद ली थी. पवन के कमरे की एक चाबी उस के पास पहले से थी. लिहाजा ताला खोल कर हैप्पी और नितिन शराब पीने बैठ गए. हैप्पी ने सोच लिया था कि वह आज नितिन का काम तमाम कर के रहेगा.

लिहाजा उस दिन उस ने नितिन को खूब शराब पिलाई और खुद कम पी. उस की शराब में उस ने नशीली दवा भी मिला दी थी. नितिन जब शराब के नशे में चूर हो गया तभी हैप्पी ने उसे धक्का दे दिया. नितिन फर्श पर गिर गया. हैप्पी ने आव देखा न ताव चाकू से उस का गला रेत दिया. खून को उस ने एक कपड़े से पोंछ दिया तथा लाश चादर में लपेट कर बैड में छिपा दी और ताला लगा कर घूमने निकल गया.

पवन उस समय तक भी कमरे पर नहीं लौटा था. हैप्पी ने कुछ देर बाद पवन को फोन किया, ‘‘नितिन का मर्डर कर के मैं ने तो अपना इंतकाम पूरा कर लिया, तू भी आ जा.’’

थोड़ी देर बाद पवन कमरे पर लौटा तो उसी समय हैप्पी भी वहां पहुंच गया. हैप्पी ने बैड से नितिन की लाश बाहर निकाली. इस के बाद उन्होंने सब से पहले धड़ से सिर अलग किया. फिर उस की दोनों बाहों को कंधों से काट कर अलग किया. इस के बाद दोनों टांगों को भी काट दिया. पवन के दिल में भी नितिन के प्रति खुंदक भरी हुई थी. गुस्से में उस ने भी उस के चेहरे को चाकू से इस तरह गोद डाला कि उसे कोई पहचान तक न सके.

इस के बाद दोनों भाइयों ने उस की लाश के टुकड़ों को ठिकाने लगाने की योजना बनाई. नितिन के कटे सिर को उन्होंने एक पौलीथिन में बांध लिया. फिर उसे तकिए के कवर में रख लिया. तकिए के उसी कवर में उन्होंने उस की दोनों भुजाओं को भी रख लिया. धड़ को उन्होंने एक चादर में लपेटा और प्लास्टिक की एक बोरी में डाल लिया.

हैप्पी अपनी वैगनआर कार नंबर एचआर-26एएस-3712 ले आया. रात एक बजे के करीब जब अधिकांश लोग गहरी नींद सो रहे थे, तभी हैप्पी और पवन ने नितिन की लाश के सभी टुकडे़ कार में रखे.

कार ले कर वे कश्मीरी गेट बसअड्डे की तरफ बाहरी रिंगरोड से चल दिए. गोपालपुर बिजलीघर के नजदीक कार रोक कर उन्होंने तकिए का कवर बाहर फेंक दिया. वहां से 100 मीटर चलने के बाद खून से सनी चादर सड़क के किनारे फेंक दी. वहीं पर कुछ और कपड़े फेंके. वहां से करीब 200 मीटर आगे सड़क के बाईं ओर को उन्होंने एक पैर फेंक दिया.

वहां से 200 मीटर और चल कर उन्होंने दूसरा पैर भी सड़क किनारे फेंक दिया. अब उन के पास केवल धड़ बचा था. धड़ वाली बोरी उन्होंने मजनूं का टीला गुरुद्वारे से लगे संजय अखाड़े के नजदीक फुटपाथ के किनारे रख दी.

लाश ठिकाने लगाने के बाद वे दोनों कमरे पर लौट आए. उन्होंने कमरे में जहांतहां लगा खून पोंछ दिया. कार की सीट पर भी खून के कुछ धब्बे लगे थे. वह भी साफ कर दिए. लेकिन किसी तरह बैड पर लगा खून का दाग रह गया, जिस से पुलिस उन तक पहुंच गई.

पवन से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने 2 अप्रैल, 2017 को उसे तीसहजारी कोर्ट में महानगर दंडाधिकारी पवन कुमार के समक्ष पेश कर के 3 दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में उस की निशानदेही पर हत्या से संबंधित कुछ और सबूत जुटाए. फिर 4 अप्रैल को उसे फिर से न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. बाद में हैप्पी को पुलिस ने बिहार के नालंदा से गिरफ्तार कर लिया. अदालत में पेश कर के उसे भी जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित

मैं कोर्ट मैरिज करना चाहता हूं, क्या करूं?

सवाल

मैं और मेरा बौयफ्रैंड तामझाम के साथ शादी नहीं करना चाहते. हम जानना चाहते हैं कि कोर्ट में शादी करने के लिए क्या क्या चाहिए?

जवाब

कोर्ट मैरिज के लिए चाहिए :

पहचान प्रमाणपत्र.

कम्पलीट आवेदनपत्र और अनिवार्य शुल्क.

दूल्हादुल्हन के पासपोर्ट साइज के  4 फोटोग्राफ्स.

जन्म प्रमाणपत्र या मार्कशीट दसवीं की.

शपथपत्र जिस से साबित हो कि दूल्हादुल्हन में कोई भी अवैध रिश्ते में नहीं है.

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यही है मुहब्बत की हकीकत

एक नई तहजीब भी इन युवाओं में गहराई से पैठ कर रही है, वह है डेटिंग यानी युवकयुवतियों का एकांत मिलन. शोध के अनुसार, 93% युवकयुवतियों ने डेटिंग करना स्वीकार किया. इन में से एक बड़ा वर्ग डेटिंग के समय स्पर्श, चुंबन या सहवास करता है. इस शोध का गौरतलब तथ्य यह है कि अधिकांश युवक विवाहपूर्व यौन संबंधों के लिए अपनी मंगेतर को नहीं बल्कि किसी अन्य युवती को चुनते हैं. पहले इस आयु के युवाओं को विवाह बंधन में बांध दिया जाता था और समय आने तक जोड़ा दोचार बच्चों का पिता बन चुका होता था.

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रात में परफ्यूम लगाने के हो सकते है कई नुकसान, हो जाइए सावधान

परफ्यूम का इस्तेमाल हम सभी करते हैं, लेकिन हम इस बात से अंजान होते हैं कि हमें इसे इस्तेमाल कब करना चाहिए और कब नहीं करना चाहिए. क्योकि ऐसा करने से आपके कई काम बिगड़ सकते है और सवर सकते है तो ऐसे में परफ्यूम को लेकर आपको सावधान होना पडेगा. खासतौर पर जब आप रात में परफ्यूम का इस्तेमाल करते हो.

आजकल परफ्यूम लगाना बहुत ही आम बात है. लोग बाहर आने-जाने में अक्सर परफ्यूम का प्रयोग करते हैं. लेकिन परफ्यूम का इस्तेमाल अगर आप दिन के समय करते हैं तो आपको इससे कोई हानि नहीं होती.वहीं रात में सोने से पहले अगर आप पर परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं तो ये आपके लिए हानिकारक हो सकता है.

रात के समय परफ्यूम लगाना अच्छा नहीं माना जाता. शास्त्रों में रात के समय किसी भी तरह की खुशबू वाली चीज का लगाना सही नहीं माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि रात के समय नकारात्मक शक्तियां हमारे आस-पास सक्रिय होती है और रात के समय किसो को भी अपने वश में कर लेती है. इसीलिए रात के समय परफ्यूम लगाने को मना किया जाता है.

ऐसा भी माना जाता है की रात के समय खुशबूदार चीजों का इस्तेमाल करने से भूत-प्रेत उसकी ओर आकर्षित होने लगते है ये नाकारात्मक शक्तियां हमारी शरीर की पॉजीटिव एनर्जी को खत्म कर देती है.

शरीर में नेगेटिव एनर्जी के आने से आप परेशान रहने लगेंगे. इसीलिए रात के समय परफ्यूम ना लगाएं और ना ही खुशबूदार चीजों का इस्तेमाल करें.

Top 10 Adhuri Prem Kahaniya अधूरी प्रेम कहानियां हिन्दी में

पढ़िए सबसे बेस्ट अधूरी प्रेम कहानी हिंदी में सरस सलिल एक ऐसी पत्रिका है जो आपको अन्य आर्टिकल के साथ-साथ नई-नई हिंदी कहानियां पढ़ने को मौका भी देती है. कहानियां भी ऐसी जो आपको आपकी निजी जिंदगी से जोड़ सके. तो आज हम कुछ ऐसी ही कहानियों की बात करें जिसमें केवल प्यार की अधूरी कहानियां शामिल होगी. जो कहानी प्यार के एंगल से शुरु हुई हो और प्यार के अधूरे होने पर ही खत्म हो. प्यार की अधूरी कहानियों में सिर्फ दो प्रेमी का अधूरा प्यार दिखाया जाएगा.

1. बेवफाई : अनाथ रमइया को कैसे हुई जेल

रमइया गरीब घर की लड़की थी. सुदूर बिहार के पश्चिमी चंपारण की एक छोटी सी पिछड़ी बस्ती में पैदा होने के कुछ समय बाद ही उस की मां चल बसीं. बीमार पिता भी दवादारू की कमी में गुजर गए.

अनाथ रमइया को दादी ने पालपोस कर बड़ा किया. वे गांव में दाई का काम करती थीं. इस से दादीपोती का गुजारा हो जाया करता था.

रमइया जब 7 साल की हुई, तो दादी ने उसे सरकारी स्कूल में पढ़ने भेजा, पर वहां उस का मन नहीं लगा. वह स्कूल से भाग कर घर आ जाया करती थी. दादी ने उसे पढ़ाने की बहुत कोशिश की, पर हठीली पोती को नहीं पढ़ा पाईं.

रमइया अब 16 साल की हो गई. चिकने बाल, सांवली रंगत और बड़ीबड़ी पनीली आंखों में एक विद्रोह सा झलकता हुआ.

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2. अधूरे जवाब: क्या अपने प्यार के बारे में बता पाएगी आकांक्षा?

Adhuri prem kahani in hindi

कैफे की गैलरी में एक कोने में बैठे अभय का मन उदास था. उस के भीतर विचारों का चक्रवात उठ रहा था. वह खुद की बनाई कैद से आजाद होना चाहता था. इसी कैद से मुक्ति के लिए वह किसी का इंतजार कर रहा था. मगर क्या हो यदि जिस का अभय इंतजार कर रहा था वह आए ही न? उस ने वादा तो किया था वह आएगी. वह वादे तोड़ती नहीं है…

3 साल पहले आकांक्षा और अभय एक ही इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ते थे. आकांक्षा भी अभय के साथ मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थी, और यह बात असाधारण न हो कर भी असाधारण इसलिए थी क्योंकि वह उस बैच में इकलौती लड़की थी. हालांकि, अभय और आकांक्षा की आपस में कभी हायहैलो से ज्यादा बात नहीं हुई लेकिन अभय बात बढ़ाना चाहता था, बस, कभी हिम्मत नहीं कर पाया.

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3. अधूरी प्यास: नव्या पर लगा हवस का चसका

Adhuri prem kahani in hindi

चढ़ती हुई बेल… कैसी दीवानी होती है… नयानया जोबन, अल्हड़पन, बदहवास सी, बस अपनी मस्ती में सरसराती हुई छुईमुई सी हिलोरें लेती है… जिस का सहारा मिल गया, उसी से लिपट जाती है.ऐसा ही तो नव्या के साथ हो रहा था. अभीअभी जवानी की दहलीज पर कदम रखा था मानो एक नशा सा चढ़ने लगा था. एक खुमारी सी…

आईने में खुद को कईकई बार देखना, उभरते अंगों को देख कर मुसकराना और अकेले में उभारों को हलके से छूना और मस्त हो जाना. नहीं संभाल पा रही थी वह अपनी भावनाओं को, अब तो बस वह समा जाना चाहती थी किसी की मजबूत बांहों में, जहां उस के हर अंग पर पा सके वह किसी का चुंबन और सैक्स की गहराई का मजा ले सके.‘‘नव्या, यह क्या तू हर समय आईने के सामने खड़ी रहती है… स्कूल नहीं जाना है क्या? इम्तिहान सिर पर हैं…’’

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4. दूरियां: क्या काम्या और हिरेन के रिश्ते को समझ पाया नील Adhuri prem kahani in hindi

दीवाली में अभी 2 दिन थे. चारों तरफ की जगमगाहट और शोरशराबा मन को कचोट रहा था. मन कर रहा था किसी खामोश अंधेरे कोने में दुबक कर 2-3 दिन पड़ी रहूं. इसलिए मैं ने निर्णय लिया शहर से थोड़ा दूर इस 15वीं मंजिल पर स्थित फ्लैट में समय व्यतीत करने का. 2 हफ्ते पहले फ्लैट मिला था. बिलकुल खाली. बस बिजलीपानी की सुविधा थी. पेंट की गंध अभी भी थी.

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5. आधा चांद: क्यूं परेशान थी राधिका

Adhuri prem kahani in hindi

इन सितारों के बीच भी क्या यह चांद खुद को अकेला महसूस करता होगा? क्या यह भी किसी से मिलने के लिए रोज आसमान में आता है? क्या ये तारे भी इस की भाषा समझते हैं? क्या इसे भी किसी की याद आती होगी? कैसे अजीब से सवाल आते रहते हैं मेरे मन में, जिन का जवाब शायद किसी के पास नहीं, या फिर ये सवाल ही फुजूल हैं.

मेरी आदत है, हर रोज यों ही 10 बजे छत पर आ कर इस चांद को निहारने की. इस समय जब सब लोग परिवार के साथ टैलीविजन देखते हैं या मोबाइल में मैसेज टाइप कर रहे होते हैं, मैं यहां आ जाता हूं, इस चांद से बातें करने, क्योंकि एक यही तो है, जो मेरे इन तनहाई के दिनों में मुझे सुनता है, मेरा दर्द समझता है. जब हम प्यार में होते हैं, तो चांद में महबूब का अक्स देखते हैं और वहीं दूसरी तरफ जब दर्द में होते हैं, तो उस में हमदर्द तलाश कर लेते हैं और चांद की खूबी है कि यह सब बन जाता है.

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6. इंतजार तो किया होता : आरिफ की मासूम बेवफाई Adhuri prem kahani in hindi

कालेज का पहला दिन था, इसलिए शब्बी कुछ जल्दी ही आ गई थी. वह बहुत ही सुंदर और शर्मीली लड़की थी. उसे कम बोलना पसंद था.

धीरेधीरे कालेज में शब्बी की जानपहचान बढ़ती गई. लड़के तो उस की तारीफ करते न थकते, पर शब्बी किसी भी लड़के की तरफ अपनी नजर नहीं उठाती थी.

एक दिन आसमान पर बादल घिर आए थे. बिजली चमक रही थी. शब्बी तेज कदम बढ़ाते हुए अपने घर की तरफ जा रही थी. अचानक बूंदाबांदी शुरू हो गई, तो वह एक घर के बरामदे में जा कर खड़ी हो गई.

अचानक शब्बी की नजर एक खूबसूरत लड़के आरिफ पर पड़ी. वह उसे देख कर घबरा गई. तभी आरिफ ने मुसकान फेंकते हुए कहा, ‘‘शब्बीजी, आप अंदर आइए न… बाहर क्यों खड़ी हैं?’’

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7. बंद किताब : अभिषेक की चाहत 

Adhuri prem kahani in hindi

‘‘बनो मत. मैं ने जोकुछ कहा है, वह तुम्हारे ही मन की बात है. तुम्हारी उम्र इस समय 30 साल से ज्यादा नहीं है, जबकि तुम्हारे पति 60 से ऊपर के हैं. औरत को सिर्फ दौलत ही नहीं चाहिए, उस की कुछ जिस्मानी जरूरतें भी होती हैं, जो तुम्हारे बूढ़े प्रोफैसर कभी पूरी नहीं कर सके.

‘‘10 साल पहले किन हालात में तुम्हारी शादी हुई थी, वह भी मैं जानता हूं. उस समय तुम 20 साल की थीं और प्रोफैसर साहब 50 के थे. शादी से ले कर आज तक मैं ने तुम्हारी आंखों में खुशी नहीं देखी है. तुम्हारी हर मुसकराहट में मजबूरी होती है.’’

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8. यादों के सहारे : प्यार की अनोखी दास्तां 

Adhuri prem kahani in hindi

‘‘ तुम ने यह क्या फैसला कर लिया जेबा?’’ कार रोकते हुए प्रेम ने जेबा से पूछा.

‘‘इस के अलावा मैं और कर भी क्या सकती थी. मैं ने कोई गलत फैसला तो नहीं किया न?’’ प्रेम के करीब ही पार्क की नरम घास पर बैठते हुए जेबा ने जवाब दिया.

‘‘देखो जेबा, सवाल गलत और सही का नहीं, तुम्हारी जिंदगी का है.’’

‘‘तो फिर मैं क्या करूं?’’

‘‘हम इस शहर के बाहर चल कर कहीं शादी कर लेंगे.’’

‘‘हम चाहे कहीं भी जाएं, यह जालिम दुनिया वाले तो वहां होंगे ही. वैसे भी मेरे मांबाप चाहे जैसे भी हों, मैं उन के साथ धोखा नहीं कर सकती. मैं तुम्हारी यादों के सहारे जिंदगी गुजार दूंगी. किसी और मर्द से तो शादी कर ही नहीं सकती हूं, क्योंकि यह उस के साथ नाइंसाफी होगी. हां, तुम्हें पूरी इजाजत है, तुम जिस लड़की को पसंद करो, उस से शादी कर लेना.’’

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9. मिस्टर बेचारा : क्या पूरा हो पाया चंद्रम का प्यार

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दरवाजा खुला. जिस ने दरवाजा खोला, उसे देख कर चंद्रम हैरान रह गया. वह अपने आने की वजह भूल गया. वह उसे ही देखता रह गया.

वह नींद में उठ कर आई थी. आंखों में नींद की खुमारी थी. उस के ब्लाउज से उभार दिख रहे थे. साड़ी का पल्लू नीचे गिरा जा रहा था.

उस का पल्लू हाथ में था. साड़ी फिसल गई. इस से उस की नाभि दिखने लगी. उस की पतली कमर मानो रस से भरी थी.

थोड़ी देर में चंद्रम संभल गया, मगर आंखों के सामने खुली पड़ी खूबसूरती को देखे बिना कैसे छोड़ेगा? उस की उम्र 25 साल से ऊपर थी. वह कुंआरा था. उस के दिल में गुदगुदी सी पैदा हुई.

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10. कांटे गुलाब के: अमरेश और मिताली की प्रेम कहानी

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सुबह के 8 बज रहे थे. किचन में व्यस्त थी. तभी मोबाइल की घंटी बज उठी. मन में यह सोच कर खुशी की लहर दौड़ गई कि अमरेश का फोन होगा. फिर अचानक मन ने प्रतिवाद किया. वह अभी फोन क्यों करेगा? वह तो प्रतिदिन रात के 8 बजे के बाद फोन करता है.

अमरेश मेरा पति था. दुबई में नौकरी करता था. मोबाइल पर नंबर देखा, तो झट से उठा लिया. फोन मेरी प्रिय सहेली स्वाति ने किया था. बात करने पर पता चला कि कल उस की शादी होने वाली है. शादी में उस ने हर हाल में आने के लिए कहा. शादी अचानक क्यों हो रही है, यह बात उस ने नहीं बताई. दरअसल, उस की शादी 2 महीने बाद होने वाली थी. जिस लड़के से शादी होने वाली थी, उस की दादी की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गईर् थी. डाक्टर ने उसे 2-3 दिनों की मेहमान बताया था. इसीलिए घर वाले दादी की मौजूदगी में ही उस की शादी कर देना चाहते थे.

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‘लव बाइट’ के साथ पकड़े गए थे ये फिल्म सितारे, शाहरुखान से ले कर सारा भी हैं शामिल

बौलीवुड सितारे अपने कैरियर के साथसाथ अपनी निजी जिंदगी को ले कर भी खूब सुर्खियों बटोरते हैं. हालांकि वे अपनी पर्सनल लाइफ को ले कर ज्यादा सस्पैंस बनाए रखते हैं और फैंस भी उन की पर्सनल लाइफ के बारे में जानने के लिए उतावले रहते हैं. तो ऐसे कई फिल्म सितारे हैं जो सरेआम ‘लव बाइट’ के साथ पकड़े गए हैं. ‘लव बाइट’ का मतलब है प्यार के दौरान बनाए गए चूमने, काटने या नोंचने के निशान. इस में शाहरुखान से ले कर सलमान खान तक शामिल हैं. साथ ही सारा अली खान को भी ऐसी हालत में रंगे हाथों पकड़ा गया है.

 

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सब से पहला नाम बौलीवुड के किंग यानी शाहरुख खान का आता है. शाहरुख खान कुछ साल पहले एक इवैंट में शामिल हुए थे, जहां उन के ‘लव बाइट’ ने फैंस का खूब ध्यान खींचा था.

खूबसूरत हीरोइन जैकलीन फर्नांडिस की महाठग सुकेश चंद्रशेखर के साथ कुछ प्राइवेट तसवीरें वायरल हुई थीं, जिन से सोशल मीडिया पर बवाल मचा गया था.

 

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इस लिस्ट में प्रियंका चोपड़ा का नाम भी शामिल है. उन की कई साल पहले कुछ तसवीरें वायरल हुई थीं, जिन में उन की के गरदन पर मौजूद ‘लव बाइट’ ने लोगों का ध्यान खींच लिया था.

 

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सलमान खान भी एक बार ‘लव बाइट’ के साथ मीडिया के कैमरे में कैद हो गए थे. उन की वह तसवीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी.

 

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सैफ अली की बेटी और हीरोइन सारा अली खान भी ‘लव बाइट’ के साथ पैपराजी के कैमरे में कैद हो गई थीं. सारा अली खान की जब ये तसवीरें सामने आईं, उस दौरान सारा अली खान किसी को डेट कर रही थीं.

इसी तरह सारा अली खान की सौतेली मां और हीरोइन करीना कपूर कुछ साल पहले एक इवैंट में शामिल हुई थीं, जिस में उन्होंने व्हाइट कलर का बैकलेस गाउन पहना था. इस दौरान करीना की कमर पर ‘लव बाइट’ का निशान साफ नजर आ रहा था.

 

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हैंडसम हीरो सैफ अली खान भी ‘लव बाइट’ के साथ मीडिया के कैमरे में कैद हो गए थे. दरअसल, सैफ अली खान जब अपने मेकअप रूम से निकल रहे थे तो उन्हें पैपराजी ने अपने कैमरे में कैद कर लिया था. इस दौरान उन की गरदन पर ‘लव बाइट’ साफ नजर आ रहा था.

 

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टैलीविजन कलाकार तेजस्वी प्रकाश को मुंबई में पैपराजी ने अपने कैमरे में कैद कर लिया था. इस दौरान तेजस्वी की गरदन पर बने ‘लव बाइट’ ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं.

करिश्मा पर भड़की रवीना टंडन, इंटरव्यू में किए नए खुलासे

बौलीवुड की जानीमानी हीरोइन रवीना टंडन इन दिनों अपने बयान को ले कर सुर्खियों में हैं. उन्होंने करिश्मा कपूर को ले कर चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने मीडिया में सब के सामने कुछ ऐसी बातों से परदा उठाया है जिस का जिक्र आज से पहले नहीं हुआ है.

जी हां, रवीना टंडन ने बौलीवुड की कुछ हस्तियों पर निशाना साधा है और बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें फिल्म से बाहर कर दिया था.

आपको बता दें कि रवीना टंडन ने हाल ही में एक इंटरव्यू दिया है, जिस में उन्होंने अपने साथ हुई राजनीति पर नए खुलासे किए हैं. साथ ही, उन्होंने भाजपा और कांग्रेस पर भी बात की है. उन्होंने बताया कि कौन सी पार्टी उन की फेवरेट है.

रवीना टंडन से जब इंटरव्यू के दौरान करिश्मा कपूर पर सवाल किया गया तो उन्होंने बताया, ‘मैं हैल्दी कॉम्पीटिशन पर विश्वास रखती आई हूं. मेरे बारे में कोई यह नहीं कह सकता है कि रवीना ने मुझे इस प्रोजैक्ट से बाहर निकालवा दिया है या रवीना ने किसी न्यूमेकर के साथ काम करने से मना कर दिया हो. मैं ने कभी भी इस तरह की राजनीति और गुटबाजी नहीं की है. लेकिन दूसरों ने मेरे खिलाफ कई बार गुटबाजी की है और मुझे फिल्मों से बाहर निकाला है.’

रवीना ने आगे इंटरव्यू में बताया कि राजनीति के कारण उन की कौनकौन सी फिल्में चूक गई थीं. पहले उन्होंने बताया कि डेविड धवन और गोविंदा ने उन्हें बताया था कि वे मेरे साथ ‘साजन चले ससुराल’ करना चाहते थे, लेकिन वे मुझे इस फिल्म में कास्ट नहीं कर पाएं. अब तब्बू तो इस तरह की राजनीति नहीं कर सकती हैं और न ही वे दूसरे के बारे में कुछ बोलती हैं.

बता दें कि डेविड धवन की मूवी ‘साजन चले ससुराल’ में तब्बू और करिश्मा मुख्य भूमिका में थीं. यह फिल्म 1996 की सब से हिट फिल्म साबित हुई थी.

कौन सी राजनीतिक पार्टी पसंद करती हैं रवीना?

रवीना टंडन ने इंटरव्यू के दौरान इस बात का भी जिक्र किया है कि वे किस पार्टी को पसंद करती हैं. दरअसल, इस साल की शुरुआत में रवीना को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया था. इस के बाद सोशल मीडिया पर रवीना टंडन को खूब ट्रोल किया गया था. ट्रोलर्स ने उस समय कहा था कि रवीना को यह अवार्ड इसलिए मिला है क्योंकि वे भाजपा की खास हैं.

इस पर उन्होंने ट्रोलर्स को जवाब देते हुए कहा, ‘अगर मैं भाजपा की खास होती तो मुझे कांग्रेस कार्यकाल में मिला सम्मान न मिलता और मैं याद दिला दूं कि मुझे कांग्रेस ने इलैक्शन के दौरान सीट भी औफर की है. लेकिन मैं राजनीति के लिए तैयार नहीं थी.’

सैक्स में जल्दी पस्त

रमेश और प्रदीप बहुत अच्छे दोस्त थे. रमेश की शादी पहले हो गई थी. उस के बाद प्रदीप की शादी हुई. दोनों के बीच पतिपत्नी के आपसी संबंधों पर भी बात होती थी. इन में सब से बड़ा मुद्दा पत्नी के साथ सैक्स का होता था. इस में भी सब से हौट टौपिक यह होता था कि सैक्स में कितना समय लगता है. दोस्त होने के चलते वे दोनों खुल कर बात कर लेते थे.

एक दिन प्रदीप ने कहा, ‘‘यार, मेरा तो कई बार जल्दी ही डिस्चार्ज हो जाता है. अब तो पत्नी भी थोड़ा अलग तरह से सोचने लगी है. मैं ने कई जगह पढ़ा, सुना और देखा कि लोग लंबेलंबे समय तक संबंध बनाते हैं. जल्दी डिस्चार्ज नहीं होते. मैं ने सोचा कि क्यों न तुम से ही पूछ लिया जाए. तुम्हारी शादी को तो काफी समय हो गया है.’’

इस पर रमेश बोला, ‘‘दोस्त, यह सबकुछ आपसी तालमेल और अनुभव पर निर्भर करता है. इस को ऐसे समझो कि जैसे बचपन में साइकिल चलाना सीखते हैं तो पहले गिरते हैं, फिर संभलते हैं, तब कहीं जा कर अच्छी साइकिलिंग कर पाते हैं.

‘‘शादी के बाद पतिपत्नी दोनों को अनुभव कम होता है. ऐसे में कई बार नाकामी हाथ लगती है. आदमी जल्दी पस्त हो जाता है, जिसे शीघ्रपतन भी कहते हैं. पत्नी का सहयोग इस परेशानी को दूर करने का सब से अच्छा रास्ता होता है. यह कोई बीमारी नहीं है. यह तजरबे की कमी होती है.’’

शीघ्रपतन केवल प्रदीप की समस्या नहीं है. ऐसे तमाम नौजवान हैं, जो यह मानते हैं कि सैक्स में वे जल्दी पस्त हो जाते हैं. ऐसे लोग कई बार मानसिक रोग के शिकार हो जाते हैं. उन्हें लगता है कि वे सैक्स में अपने साथी को संतुष्ट नहीं कर सकते हैं. यह सोच जब दिमाग पर हावी होती है, तो परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है.

जल्दी पस्त होने की वजह
लखनऊ के डाक्टर जीसी मक्कड़ कहते हैं, ‘‘सैक्स आपसी तालमेल और अनुभव पर ही सुंतष्टि देता है. शीघ्रपतन के कई कारण होते हैं. इस के लिए जरूरी है कि पहले उस के लक्षणों को पहचाना जाए और उस के अनुसार इलाज किया जाए. कई बार केवल समझाने से ही समस्या का समाधान हो जाता है. अगर दिक्कत शारीरिक है, तो उस का अलग इलाज होता है.’’

30 से 40 फीसदी लोग इस परेशानी से पीड़ित हैं. जल्दी पस्त होने के कारणों में तनाव, अवसाद, शारीरिक कमजोरी, स्तंभन दोष यानी नपुंसकता प्रमुख होते हैं. शारीरिक कारण जैसे ब्लड प्रैशर में बढ़ोतरी, मधुमेह, थायराइड की समस्या या प्रोस्टैट रोग आदि भी हो सकते हैं.

दिमागी कारणों में शुरुआती यौन अनुभव, यौन शोषण, शीघ्रपतन की चिंता करना, गलत सोच, जो हस्तमैथुन को बढ़ावा देती है, शराब या नशीली दवाओं का सेवन और नींद न आना भी शामिल हैं. हस्तमैथुन के कारण भी कई बार जल्दी स्खलन हो जाता है.

खानपान और खराब जीवनशैली के कारण भी यह परेशानी होती है. खानपान की आदत का खराब होना, उचित मात्रा में समय पर भोजन न करना, विटामिन की कमी होना, पाचन तंत्र कमजोर होना और लगातार पेट खराब रहना, लंबे समय तक कब्ज रहना और खून व भूख की कमी से हार्मोन बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं, जिस से शरीर में वीर्य कम मात्रा में बनता है. अंग की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिस से वीर्य का स्खलन जल्दी हो जाता है.

कैसे जानें यह होता है
सैक्स के दौरान समय से पहले वीर्य का जल्दी निकल जाना शीघ्रपतन कहलाता है. इसी को जल्दी पस्त होना कहते हैं. इस में अंग के योनि में प्रवेश के समय ही स्खलन होने लगता है. कई बार यह 1-2 बार अंग के प्रवेश पर ही हो जाता है. इस से कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं.

आत्मग्लानि, हीनभावना, असंतुष्ट होना और नैगेटिव सोच मन में भर जाती है. लोग अपने को कमजोर समझने लगते हैं. उन्हें लगता है कि साथी उन को छोड़ कर कहीं और जा सकता है.

कई बार बढ़ती उम्र की वजह से अंग की नसें कमजोर व ढीली हो जाने से उस में ढीलापन आ जाता है. इस वजह से यह वीर्य को रोके रखने में कामयाब नहीं होता और शीघ्रपतन हो जाता है.

शीघ्रपतन की परेशानी केवल मर्दों में होती है. औरतों को यह नहीं होता है. शीघ्रपतन का कोई निश्चित मापदंड नहीं है. यह हर इनसान के मानसिक और शारीरिक हालात पर निर्भर होता है.

समझदारी से लें काम
ज्यादातर लोग ब्लू फिल्में देखने, किताबों में गलत जानकारी पढ़ने से यह मान लेते हैं कि वे जल्दी पस्त हो जाते हैं. ब्लू फिल्मों में जो दिखाया जाता है, वह सच नहीं होता. वे फिल्में होती हैं और उन में दिखाए जाने वाले ऐक्टर होते हैं. ऐसे में उन से तुलना करना ठीक नहीं होता है.

कई जगहों पर नीमहकीम यह बताते हैं कि स्वप्नदोष और हस्तमैथुन के चलते लोग सैक्स में जल्दी पस्त हो जाते हैं, जो कि गलत सोच है.

आपसी सहयोग और समझदारी से जल्दी पस्त होने की परेशानी से बचा जा सकता है. सैक्स करने से पहले उस की तैयारी करें, जिसे फोरप्ले कहते हैं. साथी से यह जानने की कोशिश करें कि उसे क्या पसंद है.

सैक्स में जल्दबाजी न करें. सैक्स के लिए ऐसी जगह हो, जहां किसी तरह की असुरक्षा का माहौल न हो. इस तरह से जल्दी पस्त होने की परेशानी से बचा जा सकता है.

बदले पे बदला

नए साल का पहला दिन हर किसी के लिए खास होता है. तरुण के लिए इस साल का पहला दिन
कुछ ज्यादा ही खास था, क्योंकि इस दिन उस की प्रेमिका मेघा उसे अपना सब कुछ सौंप देने वाली थी. मेघा के बारे में सोचसोच कर तरुण पर तरुणाई सवार होती जा रही थी. दिसंबर 2018 के आखिरी दिन उस ने गिनगिन कर कैसे काटे थे, यह वही जानता था.

जवानी की दहलीज की सीढि़यां चढ़ रही मेघा बेहद खूबसूरत और छरहरी थी. साथ ही इतनी सैक्सी भी कि उस से अपने यौवन का भार उठाए नहीं उठता था. यही हाल 24 वर्षीय तरुण का भी था, जिस के लबों पर बरबस ही यह गाना रहरह कर आ जाता था, ‘उम्र ही ऐसी है कुछ ये तुम किसी से पूछ लो, एक साथी की जरूरत होती है हर एक को…’

पहली जनवरी को तरुण पर्वतों से टकराने नहीं बल्कि एक ऐसा पर्वत चढ़ने जा रहा था, जिस की ख्वाहिश हरेक युवा को होती है. फिर उसे तो बगैर कोई खास कोशिश किए अपनी प्रेमिका से सब कुछ मिलने जा रहा था. उस के पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे.

सुबह जब दुनिया भर के लोग नए साल के जश्न की तैयारियों में लगे थे, तब तरुण खासतौर से सजसंवर कर घर से निकला. उस दिन मोबाइल पर मेघा से उस की कई बार बात हुई थी.

उस से मिलने को बेचैन तरुण हर बार घुमाफिरा कर यह जरूर कंफर्म कर लेता था कि मेघा का सैक्सी पार्टी देने का मूड कहीं बदल तो नहीं गया. हर बार जवाब उम्मीद के मुताबिक मिलता तो उस का हलक सूखने लगता और सीने में दिल की धड़कन बढ़ जाती.

तरुण खुद भी कम हैंडसम नहीं था. लंबे चेहरे पर हलकी सी दाढ़ी और सिर पर घने घुंघराले बालों वाले तरुण के पास किसी चीज की कमी नहीं थी. अपने मातापिता का एकलौता और लाडला बेटा था वह, जिसे काम भी अच्छा मिल गया था. वह बिलासपुर की ट्रैफिक पुलिस के लिए सीसीटीवी कैमरे ठेके पर चलाता था, जिस से उसे खासी आमदनी हो जाती थी.

सुबह ही सजसंवर कर तैयार हो गए तरुण ने मां राजकुमारी को पहले ही बता दिया था कि साल का पहला दिन होने के चलते काम ज्यादा है, इसलिए वह आज थोड़ी देर से आएगा.

राजकुमारी ने अपने पति शांतनु के साथ दोपहर तक तरुण का इंतजार किया, लेकिन खाने के तयशुदा वक्त पर वह नहीं आया तो उन्होंने उस के मोबाइल पर फोन किया. लेकिन हर बार उन के हाथ निराशा ही लगी. क्योंकि तरुण का फोन बंद था. पतिपत्नी दोनों ने बेटे को हरसंभव जगह पर देखा, लेकिन वह नहीं मिला तो वे चिंतित हो उठे.

बात थी भी कुछ ऐसी कि उन का चिंतित होना स्वाभाविक था, इसलिए सूरज ढलने से पहले तक दोनों ने तरुण को ढूंढा और जब उस की कोई खबर नहीं मिली तो दोनों रात 10 बजे सरकंडा थाने जा पहुंचे और बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दी.

यहां तक बात सामान्य थी, लेकिन जब राजकुमारी ने प्रभात चौक निवासी अपनी ही पड़ोसन बेबी और उस के पति बालाराम मांडले पर तरुण के अपहरण का शक जताया तो पुलिस वालों का माथा ठनका.

पुलिस वालों का माथा ठनकने के पीछे ठोस वजह भी थी, जो शुरुआती जांच और पूछताछ में ही सामने आ गई थी. यह वजह तरुण के अपहरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण और दिलचस्प थी, साथ ही चिंताजनक भी.

हुआ यूं था कि कुछ साल पहले बेबी प्रभात चौक चिंगराजपुरा में रहने आई थी. उस का घर शांतनु रातड़े के घर से लगा हुआ था. 40 साल की बेबी 3 जवान होते बेटों की मां थी. उस के भरेपूरे और गदराए बदन को देख शायद ही कोई मानता कि वह 40 साल की है. लेकिन यह मीठा सच था.

एक प्राइवेट अस्पताल में काम करने वाली बेबी मांडले की खूबसूरती और जिस्मानी कसावट किसी सबूत की मोहताज नहीं थी.

अपनी इस नई पड़ोसन पर शांतनु खुद को मर मिटने से रोक नहीं पाया और जल्द ही दोनों में शारीरिक संबंध बन गए. यह सब अचानक नहीं हुआ, बल्कि दोनों परिवारों में पहले निकटता बढ़ी और फिर सभी सदस्य एकदूसरे के यहां आनेजाने लगे.

शांतनु बेबी के चिकने जिस्म की ढलान पर फिसला तो शुरुआती मौज के बाद जल्दी ही दुश्वारियां भी पेश आने लगीं. शांतनु और बेबी का वक्तबेवक्त मिलना दोनों के घर वालों खासतौर से बेटों को रास नहीं आया तो निकटता की जगह कलह ने ले ली.

अधेड़ उम्र के शांतनु और बेबी के रोमांस के किस्से चिंगराजपुरा में चटखारे ले कर कहे सुने जाने लगे. लेकिन उन दोनों पर जगहंसाई और कलह का कोई खास फर्क नहीं पड़ा. दोनों एकदूसरे में समा जाने का मौका कब कैसे निकाल लेते थे, इस की हवा भी किसी को नहीं लगती थी.

घर वालों का ऐतराज बढ़ने लगा तो इन अधेड़ प्रेमियों ने सब को चौंकाते हुए साथ रहने का फैसला ले लिया. पत्नी बेबी का यह रूप देख उस का पति बालाराम अपने बेटों को ले कर राजकिशोर यानी आर.के. नगर में जा कर रहने लगा. राजकुमारी भी तरुण को ले कर पति से अलग रहने लगी.

उधर शांतनु और बेबी बिना शादी किए पतिपत्नी की तरह साथ रहने लगे, जिन की मौजमस्ती के सारे बैरियर खुद उन के रास्ते से हट गए थे.

हालांकि जब भी राजकुमारी और बेबी मोहल्ले में आमनेसामने पड़ जातीं तो उन में खूब कलह होती थी. दोनों बीवियों की इस लड़ाई से शांतनु कोई वास्ता नहीं रखता था, उस का मकसद तो बेबी का शरीर था, जिस पर अब उस का पूरी तरह मालिकाना हक था.

इसी दौरान तरुण को सिविललाइंस थाने में यातायात पुलिस के सीसीटीवी का काम मिल गया तो उस की इमेज भी एक पुलिस वाले की बन गई. यह दीगर बात थी कि वह सिर्फ डाटा रिकौर्ड करने का काम करता था.

तरुण की गुमशुदगी से इस कहानी का गहरा ताल्लुक है, यह पुलिस वालों को उस वक्त और समझ आ गया जब उन की जानकारी में यह बात भी आई कि बेबी और शांतनु कुछ दिनों तक साथसाथ रहे थे. बाद में दोनों अपनेअपने घरों को लौट आए थे.

दरअसल, दोनों का जी एकदूसरे से भर गया था या कोई और वजह थी, यह तो किसी को नहीं पता. लेकिन बात तब गंभीर लगी जब पिछले साल सितंबर में बेबी के बड़े बेटे नीलेश मांडले की लाश संदिग्ध अवस्था में बिलासपुर कोटा रेलवे लाइन पर मिली.

बेबी को शक था कि कहीं तरुण ने उस से बदला लेने के लिए नीलेश की हत्या कर या करवा न दी हो. जबकि पुलिस की जांच में इसे खुदकुशी माना गया था. इस से बेबी को लगा कि नीलेश के पुलिस से नजदीकी संबंध होने के चलते पुलिस वाले मामले को खुदकुशी करार दे कर दबा रहे हैं.

इस बारे में उस ने शांतनु से बात की तो शांतनु ने अपने बेटे तरुण का पक्ष लिया. इस से बेबी और ज्यादा तिलमिला उठी. उसे लगा कि बापबेटे दोनों उसे बेवकूफ बना रहे हैं. शांतनु की चाहत उस के शरीर तक ही सीमित है, उसे नीलेश की मौत से कोई लेनादेना नहीं है. नीलेश की जगह अगर तरुण मरा होता तो उसे समझ आता कि जवान बेटे को खो देने का दर्द क्या होता है.

जिस तरह दोनों अपनेअपने परिवार से अलग हुए थे, इस मसले पर विवाद होने के बाद अपनेअपने घरों को कुछ इस तरह लौट गए, मानो कुछ हुआ ही न हो. शांतनु राजकुमारी और तरुण के पास अपने घर चला गया और बेबी बालाराम और दोनों बेटों के पास चली गई.

तरुण के गायब होने का इस कहानी से संबंध जोड़ते हुए पुलिस ने तफ्तीश शुरू की और दूसरे दिन सुबह को बेबी और बालाराम को थाने बुला लिया. जब दोनों से तरुण के बाबत पूछताछ की गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता. चूंकि दोनों सच बोलते लग रहे थे, इसलिए पुलिस वालों ने उन्हें जाने दिया.

लेकिन तरुण का अभी तक कहीं अतापता नहीं था. अब तक किसी को उस के और मेघा के प्रेम प्रसंग के बारे में कुछ मालूम भी नहीं था. अगर वह किसी हादसे का शिकार हुआ होता तो अब तक उस का पता चल जाता, लेकिन पूछताछ और जांच में ऐसी कोई बात या घटना सामने नहीं आई थी, जो तरुण से ताल्लुक रखती हो.

लेकिन जांच के दौरान पुलिस वालों को पता चला कि तरुण आखिरी बार मेघा गोयल के साथ दिखा था, जो लिंगियाडीह की रहने वाली थी. पूजा और इमरान नाम के 2 गवाहों ने इस बात की पुष्टि की थी कि मेघा 1 जनवरी की दोपहर तरुण की बाइक पर सवार हो कर उस के साथ आर.के. नगर की तरफ जाती हुई दिखी थी.

मेघा तक पहुंचने के लिए पुलिस ने मोबाइल फोनों का सहारा लिया. तरुण के फोन की काल डिटेल्स निकालने पर पता चला कि पहली जनवरी को उस की एक खास नंबर पर ज्यादा और काफी लंबी बातें हुई थीं. लेकिन यह नंबर उस ने सेव नहीं किया था.

तरुण का मोबाइल नंबर ट्रेस करने पर पता चला कि उस की लोकेशन दोपहर 2 बजे से ले कर शाम 6 बजे तक आर.के. नगर में थी. बाद में उस की लोकेशन कोटा की मिली जो बिलासपुर से 30 किलोमीटर दूर है.

पुलिस वालों ने बेबी और बालाराम को पूछताछ के बाद जाने तो दिया, लेकिन दोनों पर शक बरकरार था. तरुण के फोन के इस अज्ञात नंबर और बेबी के फोन की लोकेशन एक साथ मिल रही थी. यह बात इस लिहाज से खटके की थी कि कहीं यह नंबर बेबी का ही तो नहीं है. इधर तरुण की गुमशुदगी की चर्चा पूरे बिलासपुर और छत्तीसगढ़ में होने लगी थी.

अब तक यह भी साफ हो गया था कि तरुण आखिरी बार कोटा में था. लेकिन किस हालत में, यह पता नहीं चल पा रहा था. मेघा के फोन के सहारे पुलिस ने उसे धर दबोचा तो एक नई सनसनीखेज और रोमांचक कहानी इस तरह सामने आई.

शुरू में मेघा ने यह तो मान लिया कि तरुण उस के साथ था, लेकिन उस ने यह कहते पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी की कि वह अपने घर चला गया था. लेकिन जल्दी ही वह पुलिस वालों के सामने टूट गई और तरुण की हत्या की बात स्वीकार ली. उस ने हैरतंगेज बात यह बताई कि कत्ल की इस वारदात में उस का साथ बेबी और बालाराम सहित उन के 2 बेटों योगेश और अभिषेक ने भी दिया था.

तरुण की हत्या की योजना बेबी ने ही बनाई थी, जो शांतनु से अलग होने के बाद से ही बदले की आग में जल रही थी. इसी दौरान उसे पता चला कि उस के बड़े बेटे नीलेश का प्रेम प्रसंग मेघा गोयल से था. दोनों साथसाथ पढ़ते थे.
बेबी जब मेघा से मिली तो उस की चंचलता देख उस की बांछें खिल उठीं. बातों ही बातों में उसे पता चला कि मेघा भी नीलेश की मौत के बाद से खार खाए बैठी है और उस के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है.

बेबी उसे यह विश्वास दिलाने में सफल हो गई कि तरुण ही नीलेश का हत्यारा है और वह भी उस से बदला लेना चाहती है. मेघा जब इस बाबत तैयार होती दिखी तो बेबी ने उस से वादा किया कि तरुण की मौत के बाद वह उसे घर की बहू जरूर बनाएगी.
पर हत्या कैसे की जाए, इस की योजना बेबी ने मेघा को बता दी. साथ ही उसे एक सिम भी खरीद कर दे दिया. योजना के मुताबिक मेघा ने तरुण को फोन करने शुरू किए. लेकिन बात करने के बजाय वह हर बार रौंग नंबर कह कर फोन काट देती थी.
आवाज सुन कर ही तरुण ने अंदाज लगा लिया कि जिस की आवाज इतनी खनक भरी है, वह लड़की जरूर सुंदर होगी. धीरेधीरे यह रौंग नंबर राइट नंबर में तब्दील हो गया और मेघा व तरुण लंबीलंबी बातें करने लगे.
जब तरुण जाल में फंसने लगा तो बेबी ने मेघा को समझाया कि लोहा गरम हो चुका है, अब चोट करने का वक्त आ गया है. चूंकि मिलने के लिए एकांत की जरूरत थी, इसलिए बेबी ने आर.के. नगर में 4 हजार रुपए महीने पर एक मकान किराए पर ले लिया.
किसी गुरु की तरह मेघा को समझाते हुए बेबी ने मंत्र दिया कि सैक्स हर मर्द की कमजोरी होती है, इसलिए तुम अकेले में तरुण को अपने हुस्न की पूरी झलक दिखा देना. इस से उस की प्यास और भड़केगी, लेकिन भूल कर भी उस की प्यास बुझा मत देना. इस के बाद हम उसे जब, जहां, जैसे बुलाएंगे, वह सिर के बल दौड़ा चला आएगा.

मेघा पहले एक होटल में तरुण से मिली तो वह अपनी खूबसूरत और सैक्सी टेलीफोनिक प्रेमिका को देखते ही पागल सा हो उठा. मेघा ने जब यह खबर बेबी को बताई तो उस ने उस से कहा कि पहली जनवरी को तरुण को अकेले में मिलने के लिए बुलाए.
इधर मेघा के हुस्न और इश्क के समंदर में खयाली गोते लगा रहे तरुण को सपने में भी अंदाजा नहीं था कि वह उस के सौतेले भाई नीलेश की प्रेमिका है, जो उस की मौत की स्क्रिप्ट लिख रही है और जिस की डायरैक्टर बेबी है.
कुछ दिन बातों में और बीते तो तरुण खुल कर मेघा से कहने लगा कि एक बार मेरी प्यास बुझा दो. इस पर मेघा ने उसे बताया कि वह इस के लिए तैयार है.
उस ने यह भी कहा कि इस के लिए नए साल का पहला दिन ठीक रहेगा. इशारों में नहीं बल्कि उस ने खुल कर तरुण को यह भी बता दिया कि वह किस्मत वाला है, क्योंकि इस दिन उसे तोहफे में कुंवारापन मिलेगा.
इतना सुनना भर था कि तरुण की नींद, भूखप्यास सब गायब हो गई और वह बेसब्री से 1 जनवरी का इंतजार करने लगा. उस दिन वह मां राजकुमारी से झूठ बोल कर मेघा से मिलने आर.के. नगर के सूने मकान में गया तो मेघा ने उसे सब्र रखने की बात कह कर कौफी पिलाई, जिस में उस ने ढेर सारी नींद की गोलियां मिला दी थीं.
तरुण यह सोचसोच कर खुश था कि जल्द ही मेघा का नग्न संगमरमरी जिस्म उस की बांहों में मचल रहा होगा. दूसरी तरफ मेघा यह सोचसोच कर खुश हो रही थी कि आज वह अपने प्रेमी नीलेश की मौत का बदला लेगी.
कौफी पीने के बाद भी तरुण पर नींद की गोलियों का उतना असर नहीं हुआ, जितना उस की हत्या के लिए चाहिए था. बेकाबू हो आया तरुण अब शराफत भूल कर सैक्स करने पर आमादा हो गया था, इसलिए मेघा ने चालाकी से उसे क्लोरोफार्म सुंघा कर बेहोश कर दिया. तरुण को तो पता भी नहीं चला होगा कि वह मेघा के नहीं बल्कि मौत के आगोश में है.
तरुण की बेहोशी की खबर मेघा ने बेबी को दी तो वह पति बालाराम और दोनों बेटों योगेश व अभिषेक को ले कर आ गई. इन पांचों ने मिल कर बेहोश तरुण के हाथपैर रस्सी से कस कर बांधे और मुंह पर टेप चिपका दी.

बेहोश तरुण को अपनी कार में डाल कर बेबी कोटा ले आई. कोटा के नजदीक बेबी का गांव अमने था. वहां 5 दिन पहले ही तरुण की कब्र खोदी जा चुकी थी. नए साल के पहले दिन लगभग शाम 7 बजे इन पांचों ने मिल कर बेहोश तरुण को उस कब्र में जिंदा दफन कर दिया.
इतना जानने के बाद पुलिस वालों के पास कानूनी खानापूर्तियां करना ही बाकी रह गया था. सभी को गिरफ्तार कर जब विस्तार से पूछताछ की गई तो इन्होंने बताया कि तरुण की चप्पलें, बाइक और मोबाइल फोन इन्होंने बिलासपुर से कोटा के रास्ते में अलगअलग जगहों पर फेंक दिए थे, जिन्हें पुलिस ने बाद में बरामद भी कर लिया. मेघा ने क्लोरोफार्म एक कैमिस्ट की दुकान से खुद को बीफार्मा की छात्रा बता कर खरीदा था और मांगने पर अपना आइडेंटिटी कार्ड भी दिखाया था.

3 जनवरी को पुलिस पांचों को ले कर अपने गांव गई, जहां उन की बताई जगह को खोदा गया. पुलिस ने एसडीएम और तहसीलदार की मौजूदगी में तरुण की लाश बाहर निकाली जो करीब 4 फुट के गड्ढे में दफनाई गई थी.
गड्ढा खोद कर तरुण की लाश निकालने में करीब 2 घंटे लग गए. इस दौरान आसपास के गांवों के लोग भी इस सनसनीखेज और अजीबोगरीब हत्याकांड की खबर सुन कर वहां इकट्ठा हो गए थे.
पंचनामा बनाने और दूसरी खानापूर्ति करने के बाद तरुण की लाश राजकुमारी और शांतनु को सौंप दी गई. पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई बेबी की मारुति कार भी जब्त कर ली.
इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी को सुलझाने में सरकंडा थाना इंचार्ज संतोष जैन, एसआई आर.ए. यादव और विनोद वर्मा सहित हैडकांस्टेबल निमोली ठाकुर, आर. मुरली भार्गव, अतुल सिंह, अनूप मिश्रा, रीना सिंह सहित साइबर सैल के सबइंसपेक्टर प्रभाकर तिवारी, हेमंत आदित्य, नवीन एक्का और शकुंतला साहू का उल्लेखनीय योगदान रहा.

4 जनवरी को एक प्रैस कौन्फ्रैंस में बिलासपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अर्चना झा और साइबर सैल के डीएसपी प्रवीण चंद्र राय जब तरुण हत्याकांड का खुलासा कर रहे थे, तब मीडिया वाले इस कहानी को किसी जासूसी उपन्यास की तरह सुन रहे थे.
मामला था भी कुछ ऐसा, जिस में एक व्यभिचारी पिता की दूसरी बीवी एकलौते बेटे की मौत की वजह बनी थी.
साथ ही एक लड़की द्वारा फिल्मी स्टाइल में अपने प्रेमी की कथित हत्या का बदला लेने पर उतारू हो गई थी. लेकिन अब वह बजाय ससुराल के ससुराल वालों के संग ही जेल में है.

(यह घटना 2018 की है. अपने पाठकों को जागरूक करने के उद्देश्य से इसे दोबारा पब्लिश किया जा रहा है)

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