फिटनैस किसे कहते हैं, जानकार से जानें यह राज

आजकल लोगों में खुद को सेहतमंद बनाए रखने की जागरूकता बहुत ज्यादा बढ़ गई है. गांव हों या शहर हमारा लाइफ स्टाइल ऐसा हो गया है कि शरीर के बजाय दिमाग का काम बहुत ज्यादा होने लगा है. बहुत कम काम ऐसे रह गए हैं, जहां जिस्मानी ताकत का इस्तेमाल होता हो. इस की वजह से शरीर में लोच और ताकत की कमी होने लगती है, जिस से मानसिक तनाव भी बढ़ जाता है.

इस से मन में सवाल उठना लाजिमी है कि फिटनैस किसे कहते हैं? इस राज से परदा उठाया फरीदाबाद के बिजनैसमैन कपिल गुप्ता ने, जो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से स्पोर्ट्स साइंस ऐंड न्यूट्रिशन का कोर्स कर चुके हैं. इस के अलावा उन्होंने लंदन की नैट ग्लोबल एकेडमी से पेन रिलीफ थैरेपी के कई कोर्स किए हुए हैं. वे मैराथन रनर हैं और क्रौस फिट के ऐक्सपर्ट भी हैं.

कपिल गुप्ता ने बताया, ‘‘फिटनैस के बारे में अलगअलग बातें हर कहीं मौजूद हैं. अब किसे सच मानें और किसे झूठ, यह बड़ा ही पेचीदा मामला है. पर जहां तक मैं समझ पाया हूं तो फिटनैस का मतलब है कि आप अपने रोजमर्रा के कामों को बिना किसी परेशानी के कर सकें. आराम से बिना कोई चोट खाए कहीं भी उठबैठ सकें, कूदफांद सकें.

‘‘बिना दवा के या बिना बीमार हुए अपने मैंटल लैवल को बैलेंस रखते हुए अपने परिवार का खयाल अच्छी तरह से रख सकें. शाम को जब आप काम से घर वापस आएं तो शरीर में पौजिटिव ऐनर्जी बनी रहे. कहने का मतलब है कि फिटनैस शरीर और मन का संतुलन है. अगर इस में कोई गड़बड़ होती है, तो आप फिट नहीं हैं.

‘‘पर, रोजीरोटी के जुगाड़ में एकदम फिट हो पाना बड़ा मुश्किल काम है. जिंदगी इतनी भागदौड़ से भरी हो गई है कि आप तन और मन से हमेशा किसी न किसी तनाव या दबाव में रहते हैं. तो फिर इस समस्या का हल क्या है? हल तो यही है कि हम कसरत करने की ओर फोकस करें. अपने शरीर को समझें और उसी के मुताबिक भोजन करें.

‘‘इस के लिए बहुत सारे तरीके हैं, जैसे जिम जाना, स्ट्रैचिंग, डांस, जुंबा, एरोबिक्स करना, दौड़ना, तेज चलना, साइकिल चलाना, तैरना या कोई ऐसा खेल खेलना, जिस से आप को जिस्मानी मजबूती मिलने के साथसाथ दिमागी तौर पर भी मनोरंजन हासिल हो. इस के अलावा अच्छी किताबें पढ़ना, पौष्टिक भोजन करना और गहरी नींद लेना भी हमें फिट बनाता है.’’

फिट रहने के लिए किनकिन बातों पर ध्यान देना जरूरी है? क्या कम खर्च में भी खुद को फिट रखा जा सकता है? इन दोनों सवालों के जवाब में कपिल गुप्ता ने बताया, ‘‘ऐसा मुमकिन है कि कम खर्च में आप खुद को फिट रख सकें. पर यह एक दिन का काम नहीं है, बल्कि आप को रूटीन में ये सब काम करने होंगे और साथ ही सब्र भी रखना होगा. फिर देखिए कि आप खुद में बहुत अच्छा बदलाव पाएंगे.’’

कपिल गुप्ता ने जो सुझाव दिए हैं, वे इस तरह हैं :

भोजन

इसे फिटनैस के नजरिए से डाइट कहा जाता है, जो फिट रहने में 90-95 फीसदी रोल अदा करती है. अगर किसी के पास कसरत या कोई दूसरी एक्टिविटी करने का बहुत ज्यादा समय नहीं है, तो वह नैचुरल डाइट जैसे हरी सब्जियां और फल के रोजाना के सेवन से खुद को फिट रख सकता है.

हमें जंक या पैकेट फूड से बचना चाहिए. इस के बजाय ताजा भोजन और मोटे अनाज, दाल वगैरह का सेवन करना चाहिए. सुबह के समय सूरज की किरणों से हमें विटामिन डी मिलता है.

उपवास

इसे किसी धर्म से जोड़ें तो यह फिट रहने का अचूक तरीका है. शरीर को जहरीले पदार्थों से दूर रखने का यह बहुत ही पुराना तरीका है. आज तो विज्ञान भी यह बात मानता है कि कुछ घंटे के उपवास से भी शरीर पर बहुत अच्छा असर पड़ता है. इस से हमारी याददाश्त बेहतर होती है. शरीर जल्दी से बीमार नहीं पड़ता है.

एक दिन में 8 से 16 घंटे का उपवास भी कारगर रहता है. इस से हमारा खून साफ होता है, मोटापा नहीं बढ़ता है, पेट सही रहता है और पाचन क्रिया भी सुधर जाती है.

नींद

गहरी नींद अच्छी फिटनैस की निशानी है. इस से शरीर तो फिट होता ही है, मानसिक तनाव भी कम होता है. बड़े शहरों में तो अनिद्रा एक बड़ी गंभीर समस्या बन गई है. लोगों पर काम का दबाव बहुत ज्यादा रहता है, जिस से वे नींद ही नहीं पूरी कर पाते हैं, जबकि 4 घंटे में से 6-8 घंटे की नींद लेना बहुत जरूरी है.

अच्छी नींद लेने के लिए रात का भोजन बड़ा अहम होता है. सोने से 4-6 घंटे पहले रात का भोजन कर लेना चाहिए. सोने से पहले चाय, कौफी या फिर शराब का सेवन न करें. सोने से पहले मोबाइल फोन या टैलीविजन पर कोई ऐसी चीज न देखें, जिस से आप को तनाव हो जाए या मन अशांत हो जाए.

रात को सोने से पहले ज्यादा कसरत भी न करें. इस के बजाय अपने परिवार के साथ समय बिताएं, कोई अच्छी किताब पढ़ें या फिर अपना कोई पसंद का काम जैसे चित्रकारी, लेखन वगैरह करें, जिस से तन और मन का तनाव खत्म हो जाए.

कसरत

रोजाना कम से कम 15 मिनट कसरत जरूर करनी चाहिए, फिर चाहे वह तेज चलना हो, जौगिंग हो, स्ट्रैचिंग हो, दौड़ना हो, तैरना हो या फिर कोई दूसरी एक्टिविटी ही क्यों न हो.

फिट रहने के लिए रोजाना (कम से कम 4 दिन तो जरूर) 15 से 45 मिनट की कसरत से फिट रहा जा सकता है. अगर आप का काम ऐसा है कि कसरत के लिए रोजाना समय नहीं मिल पाता है, तो आप फोन पर बात करते समय चल सकते हैं (लेकिन अपना ध्यान रख कर सड़क वगैरह पर नहीं), औफिस में ही समय निकाल कर स्ट्रैचिंग कर सकते हैं, ताकि आप की कैलोरी बैलेंस हो सके.

पूरा दिन अपना पानी पीने का कोटा जरूर पूरा करें. एक दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं. पानी की कमी से भी शरीर के बीमार होने के चांस बढ़ जाते हैं.

इन सब बातों के अलावा आप हमेशा अच्छा साहित्य पढ़ें. इस में कोई किताब या पत्रिका शामिल हो सकती है. मन को संतुलित रखने में यह जरूरी है कि हम पढ़ क्या रहे हैं.

साथ ही, इस बात पर जरूर फोकस करें कि बेवजह के दिमागी तनाव से बचें. अगर मन शांत रहेगा, सांसें लंबी होंगी और आप का पाचन तंत्र मजबूत रहेगा, तो आप तन और मन से फिट होते जाएंगे.

एक माशूका का खौफनाक बदला

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले सीधी का एक गांव है नौगवां दर्शन सिंह, जिस में ज्यादातर आदिवासी या फिर पिछड़ी और दलित जातियों के लोग रहते हैं. शहरों की चकाचौंध से दूर बसे इस शांत गांव में एक वारदात ऐसी भी हुई, जिस ने सुनने वालों को हिला कर रख दिया और यह सोचने पर भी मजबूर कर दिया कि राजो (बदला नाम) ने जो किया, वैसा न पहले कभी सुना था और न ही किसी ने सोचा था.

इस गांव का एक 20 साला नौजवान संजय केवट अपनी ही दुनिया में मस्त रहता था. भरेपूरे घर में पैदा हुए संजय को किसी बात की चिंता नहीं थी. पिता की भी अच्छीखासी कमाई थी और खेतीबारी से इतनी आमदनी हो जाती थी कि घर में किसी चीज की कमी नहीं रहती थी.बचपन की मासूमियत संजय और राजो दोनों बचपन के दोस्त थे.

अगलबगल में होने के चलते दोनों पर एकदूसरे के घर आनेजाने की कोई रोकटोक नहीं थी. 8-10  साल की उम्र तक दोनों साथसाफ बेफिक्र हो कर बचपन के खेल खेलते थे.चूंकि चौबीसों घंटे का साथ था, इसलिए दोनों में नजदीकियां बढ़ने लगीं और उम्र बढ़ने लगी, तो दोनों में जवान होने के लक्षण भी दिखने लगे. संजय और राजो एकदूसरे में आ रहे इन बदलावों को हैरानी से देख रहे थे.

अब उन्हें बजाय सारे दोस्तों के साथ खेलने के अकेले में खेलने में मजा आने लगा था. जवानी केवल मन में ही नहीं, बल्कि उन के तन में भी पसर रही थी. संजय राजो को छूता था, तो वह सिहर उठती थी. वह कोई एतराज नहीं जताती थी और न ही घर में किसी से इस की बात करती थी.धीरेधीरे दोनों को इस नए खेल में एक अलग किस्म का मजा आने लगा था, जिसे खेलने के लिए वे तनहाई ढूंढ़ ही लेते थे.

किसी का भी ध्यान इस तरफ नहीं जाता था कि बड़े होते ये बच्चे कौन सा खेल खेल रहे हैं.जवानी की आगयों ही बड़े होतेहोते संजय और राजो एकदूसरे से इतना खुल गए कि इस अनूठे मजेदार खेल को खेलतेखेलते सारी हदें पार कर गए. यह खेल अब सैक्स का हो गया था, जिसे सीखने के लिए किसी लड़के या लड़की को किसी स्कूल या कोचिंग में नहीं जाना पड़ता.

बात अकेले सैक्स की भी नहीं थी. दोनों एकदूसरे को बहुत चाहने भी लगे थे और हर रोज एकदूसरे पर इश्क का इजहार भी करते रहते थे. चूंकि अब घर वालों की तरफ से थोड़ी टोकाटाकी शुरू हो गई थी, इसलिए ये दोनों सावधानी बरतने लगे थे.

18-20 साल की उम्र में गलत नहीं कहा जाता कि जिस्म की प्यास बुझती नहीं है, बल्कि जितना बुझने की कोशिश करो उतनी ही ज्यादा भड़कती है. संजय और राजो को तो तमाम सहूलियतें मिली हुई थीं, इसलिए दोनों अब बेफिक्र हो कर सैक्स के नएनए प्रयोग करने लगे थे.

इसी दौरान दोनों शादी करने का भी वादा कर चुके थे. एकदूसरे के प्यार में डूबे कब दोनों 20 साल की उम्र के आसपास आ गए, इस का उन्हें पता ही नहीं चला. अब तक जिस्म और सैक्स इन के लिए कोई नई बात नहीं रह गई थी.

दोनों एकदूसरे के दिल के साथसाथ जिस्मों के भी जर्रेजर्रे से वाकिफ हो चुके थे. अब देर बस शादी की थी, जिस के बाबत संजय ने राजो को भरोसा दिलाया था कि वह जल्द ही मौका देख कर घर वालों से बात करेगा.उन्होंने सैक्स का एक नया ही गेम ईजाद किया था, जिस में दोनों बिना कपड़ों के आंखों पर पट्टी बांध लेते थे और एकदूसरे के जिस्म को सहलातेटटोलते हमबिस्तरी की मंजिल तक पहुंचते थे.

खासतौर से संजय को तो यह खेल काफी भाता था, जिस में उसे राजो के नाजुक अंगों को मनमाने ढंग से छूने का मौका मिलता था. राजो भी इस खेल को पसंद करती थी, क्योंकि वह जो करती थी, उस दौरान संजय की आंखें पट्टी से बंधी रहती थीं.

शुरू हुई बेवफाई जैसा कि गांवदेहातों में होता है,16-18 साल का होते ही शादीब्याह की बात शुरू हो जाती है. राजो अभी छोटी थी, इसलिए उस की शादी की बात नहीं चली थी, पर संजय के लिए अच्छेअच्छे रिश्ते आने लगे थे.

यह भनक जब राजो को लगी, तो वह चौकन्नी हो गई, क्योंकि वह तो मन ही मन संजय को अपना पति मान चुकी थी और उस के साथ आने वाली जिंदगी के ख्वाब यहां तक बुन चुकी थी कि उन के कितने बच्चे होंगे और वे बड़े हो कर क्याक्या बनेंगे.

शादी की बाबत उस ने संजय से सवाल किया, तो वह यह कहते हुए टाल गया, ‘तुम बेवजह चिंता करते हुए अपना खून जला रही हो. मैं तो तुम्हारा हूं और हमेशा तुम्हारा ही रहूंगा.’संजय के मुंह से यह बात सुन कर राजो को तसल्ली तो मिली, पर वह बेफिक्र न हुई.

एक दिन राजो ने संजय की मां से पड़ोसनों से बतियाते समय यह सुना कि  संजय की शादी के लिए बात तय कर दी है और जल्दी ही शादी हो जाएगी.इतना सुनना था कि राजो आगबबूला हो गई और उस ने अपने लैवल पर छानबीन की तो पता चला कि वाकई संजय की शादी कहीं दूसरी जगह तय हो गई थी.

होली के बाद उस की शादी कभी भी हो सकती थी.संजय उस से मिला, तो उस ने फिर पूछा. इस पर हमेशा की तरह संजय उसे टाल गया कि ऐसा कुछ नहीं है. संजय के घर में रोजरोज हो रही शादी की तैयारियां देख कर राजो का कलेजा मुंह को आ रहा था.

उसे अपनी दुनिया उजड़ती सी लग रही थी. उस की आंखों के सामने उस के बचपन का दोस्त और आशिक किसी और का होने जा रहा था. इस पर भी आग में घी डालने वाली बात उस के लिए यह थी कि संजय अपने मुंह से इस हकीकत को नहीं मान रहा था.

इस से राजो को लगा कि जल्द ही एक दिन इसी तरह संजय अपनी दुलहन ले आएगा और वह घर के दरवाजे या खिड़की से देखते हुए उस की बेवफाई पर आंसू बहाती रहेगी और बाद में संजय नाकाम या चालाक आशिकों की तरह घडि़याली आंसू बहाता घर वालों के दबाव में मजबूरी का रोना रोता रहेगा. बेवफाई की दी सजाराजो का अंदाजा गलत नहीं था.

एक दिन इशारों में ही संजय ने मान लिया कि उस की शादी तय हो चुकी है. दूसरे दिन राजो ने तय कर लिया कि बचपन से ही उस के जिस्म और जज्बातों से खिलवाड़ कर रहे इस बेवफा आशिक को क्या सजा देनी है. वह कड़कड़ाती जाड़े की रात थी.

23 जनवरी को उस ने हमेशा की तरह आंख पर पट्टी बांध कर सैक्स का गेम खेलने के लिए संजय को बुलाया. इन दिनों तो संजय के मन मेें लड्डू फूट रहे थे और उसे लग रहा था कि शादी के बाद भी उस के दोनों हाथों में लड्डू होंगे. रात को हमेशा की तरह चोरीछिपे वह दीवार फांद कर राजो के कमरे में पहुंचा, तो वह उस से बेल की तरह लिपट गई.

जल्द ही दोनों ने एकदूसरे की आंखों पर पट्टी बांध दी. संजय को बिस्तर पर लिटा कर राजो उस के अंगों से छेड़छाड़ करने लगी, तो वह आपा खोने लगा. मौका ताड़ कर राजो ने इस गेम में पहली और आखिरी बार बेईमानी करते हुए अपनी आंखों पर बंधी पट्टी उतारी और बिस्तर के नीचे छिपाया चाकू निकाल कर उसे संजय के अंग पर बेरहमी से दे मारा.

एक चीख और खून के छींटों के साथ उस का अंग कट कर दूर जा गिरा.दर्द से कराहता, तड़पता संजय भाग कर अपने घर पहुंचा और घर वालों को सारी बात बताई, तो वे तुरंत उसे सीधी के जिला अस्पताल ले गए. संजय का इलाज हुआ, तो वह बच गया, पर पुलिस और डाक्टरों के सामने झठ यह बोलता रहा कि अंग उस ने ही काटा है.

पर पुलिस को शक था, इसलिए वह सख्ती से पूछताछ करने लगी. इस पर संजय के पिता ने बयान दे दिया कि संजय को पड़ोस में रहने वाली लड़की राजो ने हमबिस्तरी के लिए बुलाया था और उसी दौरान उस का अंग काट डाला, जबकि कुछ दिनों बाद उस की शादी होने वाली है.पुलिस वाले राजो के घर पहुंचे, तो उस के कमरे की दीवारों पर खून के निशान थे, जबकि फर्श पर बिखरे खून पर उस ने पोंछा लगा दिया था.

तलाशी लेने पर कमरे में कटा हुआ अंग नहीं मिला, तो पुलिस वालों ने राजो से भी सख्ती की.पुलिस द्वारा बारबार पूछने पर जल्द ही राजो ने अपना जुर्म स्वीकारते हुए बता दिया कि हां, उस ने बेवफा संजय का अंग काट कर उसे सजा दी है और वह अंग बाहर झाडि़यों में फेंक दिया है, ताकि उसे कुत्ते खा जाएं.

दरअसल, राजो बचपन के दोस्त और आशिक संजय पर खार खाए बैठी थी और बदले की आग ने उसे यह जुर्म करने के लिए मजबूर कर दिया था. राजो चाहती थी कि संजय किसी और लड़की से जिस्मानी ताल्लुकात बना ही न पाए. यह मुहब्बत की इंतिहा थी या नफरत थी, यह तय कर पाना मुश्किल है, क्योंकि बेवफाई तो संजय ने की थी, जिस की सजा भी वह भुगत रहा है.

राजो की हिम्मत धोखेबाज और बेवफा आशिकों के लिए यह सबक है कि वह दौर गया, जब माशूका के जिस्म और जज्बातों से खेल कर उसे खिलौने की तरह फेंक दिया जाता था. अगर अपनी पर आ जाए, तो अब माशूका भी इतने खौफनाक तरीके से बदला ले सकती है.

कोशिशें जारी हैं : सास – बहू का निराला रिश्ता

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जिम में पसीना बहाती भोजपुरी की दिलकश हसीना, नाम है पूनम दुबे

भोजपुरी सिनेमा में फिटनैस और खूबसूरती के मामले में सब से ज्यादा संजीदा हीरोइन पूनम दुबे अपने लुक को ले कर काफी चर्चा में रहती हैं. जिम में पसीना बहाते हुए उन के फोटो और वीडियो अकसर सोशल मीडिया में चर्चा की बात होते हैं.

 

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खुद को चुस्तदुरुस्त रखने के लिए पूनम दुबे अपने वर्कआउट पर खासा ध्यान देती हैं. वे अपनी फिगर और अदाओं से करोड़ों दिलों पर राज करती हैं. पूनम दुबे से उन के फिटनैस सीक्रेट्स के बारे में काफी लंबी बातचीत हुई. पेश हैं, उसी के खास अंश :

आप की फेवरेट ऐक्सरसाइज कौन सी है?

मैं एयर बाइक, लैग्सअप स्ट्रेट आर्म क्रंच, लाइंग लैग रेसेज, वाल सिट, स्ट्रेट लैग पुल्स, पुशअप, डंबल्स, स्क्वैट्स, साइकिलिंग जैसे वर्कआउट और ऐक्सरसाइज करती हूं. इस के अलावा ऐक्सपर्ट की सलाह के हिसाब से भी कुछ वर्कआउट और ऐक्सरसाइज करती हूं. मैं सारे कार्डियो स्क्वैट्स, पुलअप्स, पुशअप्स और फंक्शनल प्रैक्टिस करती हूं.

सोशल मीडिया पर अकसर आप के जिम में वर्कआउट करते हुए फोटो और वीडियो वायरल होते रहते हैं. इस लिहाज से आप एक दिन में कितनी देर तक ऐक्सरसाइज करती हैं?

देखिए, सोशल मीडिया पर वर्कआउट और ऐक्सरसाइज के फोटो शेयर करने का मेरा मकसद सुर्खियां बटोरना नहीं होता है, बल्कि मैं वर्कआउट और ऐक्सरसाइज के फोटो सोशल मीडिया पर इसलिए शेयर करती हूं कि मेरे जैसी लड़कियां जो खुद को फिट रखना चाहती है या ग्लैमर की दुनिया में आना चाहती हैं, वे मेरे इन स्टैप्स से सीख ले कर आगे बढ़ें. जहां तक ऐक्सरसाइज पर टाइम खर्च किए जाने का सवाल है, तो मैं सुबह टहलने से ले कर वर्कआउट और ऐक्सरसाइज पर डेढ़ से 2 घंटे लगाती हूं.

 

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आप जब शूटिंग पर होती हैं या ट्रैवलिंग करती हैं, तो अपनी फिटनैस को कैसे बनाए रखती हैं?

अगर आप को जिम जाने का समय नहीं मिल पा रहा है, तो आप घर पर ही वर्कआउट कर सकती हैं. आप कुरसी पर बैठ कर ऐक्सरसाइज कर सकती हैं. सीढि़यां चढ़ कर वर्कआउट कर सकती हैं.

जिम न जा पाने की हालत में मैं रनिंग का सहारा लेती हूं. अगर आप रोजाना रनिंग करेंगे और हैल्दी डाइट लेते हैं तो भी आप फिट और हैल्दी रह सकते हैं.

जब मैं शूटिंग पर रहती हूं, तब खुद को तनाव से भी मुक्त रखती हूं और मेरी कोशिश रहती है कि ज्यादा से पानी, फलों के जूस और फलों का ही सेवन करूं.

जिम में आप किस तरह के जूते, कपड़े वगैरह का इस्तेमाल करती हैं?

मैं जिम के दौरान नौर्मल फिटिंग के कपड़े पहनती हूं, साथ ही ट्रेनिंग जूते, शेकर और पानी की बोतल, रिस्ट बैंड, तौलिए का उपयोग करना नहीं भूलती हूं. आसपास के शोर से बचने के लिए हैडफोन या ईयरफोन का भी इस्तेमाल करती हूं.

एक फिट बौडी के लिए हैल्दी मैंटल हैल्थ का होना कितना जरूरी है, इस के लिए आप क्या करती हैं?

मैं मैंटल हैल्थ के लिए खुद को टैंशन से दूर रखती हूं, खूब खुश रहने की कोशिश करती हूं और खाली समय में मां और भाई के साथ परिवार में ऐंजौय करती हूं.

आप अच्छी डाइट किसे मानती हैं?

मैं शाकाहारी हूं. मैं ब्रेकफास्ट में ढेर सारे फल लेती हूं. लंच में सलाद, दाल, चावल, पनीर और दही लेती हूं, जबकि डिनर में हरी सब्जी, स्प्राउट्स और पनीर को शामिल करती हूं. मेरे सुबह के नाश्ते में अंकुरित बीजों की मात्रा भरपूर होती है, जिस में विटामिन और खनिज की भरमार होती है.

 

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आप की खूबसूरती और चमकती त्वचा का राज क्या है?

सुबह जब मैं वर्कआउट और ऐक्सरसाइज कर चुकी होती हूं, तो नीबू पानी और जूस लेती हूं. मैं स्किन की चमक बनाए रखने के लिए खूब पानी पीती हूं. इस से मुझे अपनी ऊर्जा को बूस्ट करने में मदद मिलती है.

मेरा खाना प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है, जिस से मुझे पूरी एनर्जी  मिलती है. कभीकभी कुनकुने पानी और नीबू के रस के साथ शहद भी इस्तेमाल करती हूं.

क्या सेहतमंद और फिट रहने का ताल्लुक अच्छी नींद से भी है?

बिलकुल है. हैल्दी रहने का एक राज अच्छी नींद में भी छिपा है, इसलिए अच्छी नींद लेना बेहद जरूरी हो जाता है. रात को अच्छी नींद आए, इस के लिए मैं कुछ देर किताबें पढ़ती हूं और कुछ अच्छे गाने सुनती हूं.

आप अपने ‘सरस सलिल’ के पाठकों को कोई फिटनैस सलाह देना चाहेंगी?

आप की फिटनैस आप के रसोईघर से आप के पेट में जाती है. ऐसे में यह खयाल रखें कि आप अपनी डाइट में जो भी ले रहे हैं, वह आप की फिटनैस को बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है, इसलिए अगर आप फिट और चुस्तदुरुस्त रहना चाहते हैं, तो खाने में हैल्दी चीजों का इस्तेमाल ही करें.

जब आप ऐसा करेंगे, तो खुद को फिजिकली और मैंटली काफी फिट पाएंगे. मानसिक रूप से मजबूत रखने के लिए हर किसी को अपने लाइफस्टाइल को सही रखना चाहिए.

छोटे कपड़ों को लेकर ट्रोल हुई शहनाज गिल, हेटर्स को दिया करारा जवाब

पंजाबी स्टाइल में हिंदी बोलने वाली शहनाज गिल अपने बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती हैं. जब से उन्होंने सलमान खान के ‘बिग बॉस’ में हिस्सा लिया है, तबसे वे किसी भी मामले पर बोलने से पीछे नहीं हटती हैं. पहले सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ के बाद अब शहनाज फिल्म ‘थैंक्यू फॉर कमिंग’ में नजर आ रही हैं. इस फिल्म का उन्होंने खूब जोर-शोर से प्रमोशन किया है.

 

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इस फिल्म में और फिल्म के प्रमोशन के दौरान शहनाज गिल ने काफी बोल्ड और फैशनेबल आउटफिट्स पहने हैं. इसको लेकर शहनाज को काफी ट्रोल भी किया जा रहा है. अब शहनाज ने ट्रोलर्स को अपना करारा जवाब दिया है.

हाल ही में एक इवेंट के दौरान शहनाज गिल से उनके बोल्ड आउटफिट पर हो रही ट्रोलिंग के बारे में पूछा गया. शहनाज से बोला गया कि आपके आउटफिट्स को देखकर किसी ने कमेंट किया कि जो पहने हैं वे भी उतार दो. तो इस पर शहनाज जवाब देती हैं, ‘अगर रिया कपूर बोलेंगे तो वो भी उतार देंगे क्योंकि हम स्टाइलिंग के साथ एकदम भी कॉम्प्रोमाइज नहीं करेंगे. लोग हैरान हैं कि हम इतने छोटे कपड़े कैसे पहन सकते हैं. लोगों को अपना माइंड सेट बदलना होगा. मेरे कपड़ो के लंबाई देखकर मुझे जज न करें. मुझे आप पर्सनली मिलें और 2 मिनट बैठें. आप मेरे फैन न हो जाओ तो कहना.’

 

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शहनाज के इस कमेंट पर उनके साथ भूमि पेडनेकर, कुशा कपिला, शिबानी बेदी और डॉली सिंह ने खूब हूटिंग की. हालांकि सोशल मीडिया पर इस वीडियो के आने के बाद फैंस को शहनाज का यह स्टेटमेंट पसंद नहीं आया.

हेटर्स को लेकर क्या बोलीं शहनाज

इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान शहनाज ने अपने हेटर्स को लेकर बोला था, ‘मेरी बड़ी फैन फॉलोइंग है, लेकिन इसके साथ ही मेरे हेटर्स और ट्रोल्स भी हैं. लोगों को लगता है कि शहनाज जो भी करती है वह उसकी रियल पर्सनैलिटी नहीं है, ये सब फेक है. उन्होंने मेरी जैसी पर्सनैलिटी देखी ही नहीं है. मैं इतनी अलग हूं तो लोग इस बात को डाइजेस्ट ही नहीं कर पाते कि ये कितनी क्यूट है. भाई, मैं क्यूट ही हूं. यदि मैं घातक हूं तो फिर मैं घातक हूं.’

मैं फिलहाल बेरोजगार हूं और घर पर खाली बैठना अच्छा नहीं लगता, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 46 वर्षीय पुरुष हूं, फिलहाल बेरोजगार हूं. घर में एक कमाऊ बेटा है और पत्नी गृहिणी है. पूरा समय टीवी पर समाचार या फिल्में देखते निकलने लगा है. घर का खर्च तो अच्छे से चल रहा है लेकिन बिना काम के मेरा मन दुखी रहता है. घर पर बेकार पड़े हाथ पर हाथ रख बैठे खाना और बेटे को इतनी मेहनत करते देखना अच्छा नहीं लगता. दूसरी नौकरी की तलाश जारी है लेकिन इस ग्लानि में कुछ अच्छा नहीं लग रहा है.

जवाब

देखिए, नौकरी न होने का मतलब यह नहीं है कि आप बेकार हो गए हैं. आप फिलहाल नौकरी नहीं कर रहे हैं तो अपनी पत्नी की मदद कर दिया कीजिए. उन से बात करिए, जो काम आप नौकरी के दौरान नहीं कर पाते थे उन्हें अब कर लीजिए. नौकरी की तलाश जारी रखिए लेकिन जब तक नौकरी नहीं है तब तक इस समय का उपयोग करने की कोशिश कीजिए. ग्लानि से आप खुद को मानसिक प्रताड़ना देने के बजाय और कुछ नहीं कर रहे हैं. हो न हो आप का परिवार भी आप को इस स्थिति में देख खुश नहीं होगा. उन्हें अब तक जो समय नहीं दे पाए वह अब दे दीजिए. जितना सकारात्मक रहेंगे उतने ही खुश रहेंगे. इस कठिन समय को खुद पर हावी मत होने दीजिए.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

जाति से बाहर शादी पर होता बवाल

हमारे देश में इंटरकास्ट लवमैरिज यानी जाति से बाहर शादी करने वालों की तादाद आज भी महज 5 फीसदी ही है. 95 फीसदी लोग अपनी जाति में ही शादी करते हैं. नैशनल काउंसिल औफ एप्लाइड इकोनौमिक रिसर्च और यूनिवर्सिटी औफ मैरीलैंड की एक हालिया स्टडी से पता चलता है कि भारत में 95 फीसदी शादियां अपनी जाति के अंदर होती हैं. यह स्टडी 2011-12 में इंडियन ह्यूमन डवलपमैंट द्वारा कराए गए सर्वे पर आधारित है. इस सर्वे में 33 राज्यों व केंद्रशासित शहरी व गंवई इलाकों में बने 41,554 घरों को शामिल किया गया था.

जब इन घरों की औरतों से पूछा गया कि क्या आप की इंटरकास्ट मैरिज हुई थी, तो महज 5 फीसदी औरतों ने ही हां में जवाब दिया. गंवई इलाकों की तुलना में कसबों के हालात थोड़ा बेहतर हैं.

अपनी ही जाति में शादी करने वालों में मध्य प्रदेश के लोगों की तादाद सब से ज्यादा यानी 99 फीसदी रही, जबकि हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में यह तादाद 98 फीसदी थी.

भारत में कानूनी तौर पर जाति से बाहर शादी करने को मान्यता मिली हुई है. इंटरकास्ट मैरिज को ले कर 50 साल पहले ही कानून पास किया जा चुका है, फिर भी लोग ऐसा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं. इस की अहम वजह यह है कि ऐसा करने पर अपने ही समुदाय के लोग इन लोगों का जीना मुश्किल कर देते हैं.

झारखंड की रहने वाली काजल के घर वालों के साथ महज इस वजह से मारपीट की गई, क्योंकि काजल ने दूसरी जाति के सुबोध कुमार नामक लड़के से लवमैरिज की थी.

इस बात को 2 साल हो चुके हैं. शादी के वक्त दोनों बालिग थे और इस रिश्ते को उन के परिवार वालों की हामी भी मिली हुई थी, फिर भी यह बात उन के समुदाय के दूसरे लोगों को हजम नहीं हो रही थी. गांव के कुछ दबंगों द्वारा उन्हें धमकियां दी जाती थीं. जुर्माने के तौर पर उन्होंने रुपयों की भी मांग रखी थी.

16 मई, 2016 को समाज का गुस्सा इतना उबला कि 4-5 लोग लाठियां ले कर काजल के पिता एस. प्रजापति के घर पहुंच गए. काजल के मांबाप और दोनों भाइयों को पहले बंधक बनाया गया और फिर उन की जम कर पिटाई की गई. घायल परिवार रोताबिलखता थाने पहुंचा.

दिल की आवाज सुनने का यह हश्र सिर्फ काजल का ही नहीं हुआ है, बल्कि ऐसे हजारों नौजवान जोड़े हैं, जिन्हें अपनी जाति से बाहर शादी करने की सजा भुगतनी पड़ी है. उन्हें जिस्मानी व दिमागी रूप से इतना सताया जाता है कि कई दफा थकहार कर वे खुदकुशी तक कर लेते हैं और यह सब करने वाले आमतौर पर उन के घर वाले नहीं, बल्कि उन की जाति और गांव के लोग होते हैं.

जरा सोचिए, भारत में तकरीबन 3 हजार जातियां और 25 हजार उपजातियां हैं. शादी के वक्त न सिर्फ जाति, बल्कि उपजाति का भी खयाल रखना पड़ता है. इस के बाद जाहिर है कि हर इनसान की अपनी खास पसंद होती है. उसे खास भाषा, माली हालत, प्रोफैशन, उम्र, सामाजिक बैकग्राउंड वगैरह भी देखना होता है. जाहिर है, इन सब के बीच अपने जीवनसाथी का चुनाव करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है.

इस का नतीजा यह निकलता है कि डिमांड और सप्लाई का सिद्धांत काम करने लगता है और शादी के बाजार में लड़कों की कीमत आसमान छूने लगती है. यहीं से दूसरी सामाजिक बुराइयां भी पनपने लगती हैं.

जानें क्या करें जब सेक्स लगने लगे बोरिंग

विवाह के कुछ वर्ष बाद न सिर्फ जीवन में बल्कि सेक्स लाइफ में भी एकरसता आ जाती है. कई बार कुछ दंपती इस की तरफ से उदासीन भी हो जाते हैं और इस में कुछ नया न होने के कारण यह रूटीन जैसा भी हो जाता है. रिसर्च कहती है कि दांपत्य जीवन को खुशहाल व तरोताजा बनाए रखने में सेक्स का महत्त्वपूर्ण योगदान है. लेकिन यदि यही बोरिंग हो जाए तो क्या किया जाए?

पसंद का परफ्यूम लगाएं

अकसर महिलाएं सेक्स के लिए तैयार होने में पुरुषों से ज्यादा समय लेती हैं और कई बार इस वजह से पति को पूरा सहयोग भी नहीं दे पातीं, इसलिए यदि आज आप का मूड अच्छा है तो आप वक्त मिलने का या बच्चों के सो जाने का इंतजार न करें. अपने पति के आफिस से घर लौटने से पहले ही या सुबह आफिस जाते समय कानों के पीछे या गले के पास उन की पसंद का कोलोन, परफ्यूम लगाएं, वही खुशबू, जो वे रोज लगाते हैं. किन्से इंस्टिट्यूट फौर रिसर्च इन सेक्स, जेंडर एंड रिप्रोडक्शन के रिसर्चरों का कहना है कि पुरुषों के परफ्यूम की महक महिलाओं की उत्तेजना बढ़ाती है और सेक्स के लिए उन का मूड बनाती है.

साइक्लिंग करें

अमेरिकन हार्ट फाउंडेशन द्वारा जारी एक अध्ययन में स्पष्ट हुआ कि नियमित साइक्लिंग जैसे व्यायाम करने वाले पुरुषों का हृदय बेहतर तरीके से काम करता है और हृदय व यौनांगों की धमनियों व शिराओं में रक्त के बढ़े हुए प्रवाह के कारण वे बेडरूम में अच्छे प्रेमी साबित होते हैं. महिलाओं पर भी साइक्लिंग का यही प्रभाव पड़ता है. तो क्यों न सप्ताह में 1 बार आप साइक्लिंग का प्रोग्राम बनाएं.

हालांकि साइक्लिंग को सेक्स विज्ञानी हमेशा से शक के दायरे में रखते हैं, क्योंकि ज्यादा साइक्लिंग करने से साइकिल की सीट पर पड़ने वाले दबाव के कारण नपुंसकता हो सकती है. लेकिन कभीकभी साइक्लिंग करने वाले लोगों को ऐसी कोई समस्या नहीं होती.

स्वस्थ रहें

वर्जिनिया की प्रसिद्ध सेक्स काउंसलर एनेट ओंस का कहना है कि कोई भी शारीरिक क्रिया, जिस के द्वारा आप के शरीर के रक्तप्रवाह की मात्रा कम होती है, सेक्स से जुड़ी उत्तेजना को कम करती है. सिगरेट या शराब पीना, अधिक वसायुक्त भोजन लेना, कोई शारीरिक श्रम न करना शरीर के रक्तप्रवाह में गतिरोध उत्पन्न कर के सेक्स की उत्तेजना को कम करता है. एक स्वस्थ दिनचर्या ही आप की सेक्स प्रक्रिया को बेहतर बना सकती है.

दवाइयां

वे दवाइयां, जिन्हें हम स्वस्थ रहने के लिए खाते हैं, हमारी सेक्स लाइफ का स्विच औफ कर सकती हैं. इन में से सब से ज्यादा बदनाम ब्लडप्रेशर के लिए ली जाने वाली दवाइयां और एंटीडिप्रेसेंट्स हैं. इन के अलावा गर्भनिरोधक गोलियां और कई गैरहानिकारक दवाइयां भी सेक्स की दुश्मन हैं, इसलिए कोई नई दवा लेने के कारण यदि आप को सेक्स के प्रति रुचि में कोई कमी महसूस हो रही हो तो अपने डाक्टर से बात करें.

सोने से पहले ब्रश

बेशक आप अपने साथी से बेइंतहा प्रेम करती हों, लेकिन अपने शरीर की साफसफाई का ध्यान अवश्य रखें. ओरल हाइजीन का तो सेक्स क्रीडा में महत्त्वपूर्ण स्थान है. यदि आप के मुंह से दुर्गंध आती हो तो आप का साथी आप से दूर भागेगा, इसलिए रात को सोने से पहले किसी अच्छे फ्लेवर वाले टूथपेस्ट से ब्रश जरूर करें.

स्पर्श की चाहत को जगाएं

आमतौर पर लोगों को गलतफहमी होती है कि अच्छी सेक्स क्रीडा के लिए पहले से मूड होना या उत्तेजित होना आवश्यक है, लेकिन यह सत्य नहीं है. एकसाथ समय बिताएं, बीते समय को याद करें, एकदूसरे को बांहों में भरें. कभीकभी घर वालों व बच्चों की नजर बचा कर एकदूसरे का स्पर्श करें, फुट मसाज करें. ऐसी छोटीछोटी चुहलबाजी भी आप का मूड फ्रेश करेगी और फोरप्ले का काम भी.

थ्रिलर मूवी देखें

वैज्ञानिकों का मानना है कि डर और रोमांस जैसी अनुभूतियां मस्तिष्क के एक ही हिस्से से उत्पन्न होती हैं, इसलिए कभीकभी कोई डरावनी या रोमांचक मूवी एकसाथ देख कर आप स्वयं को सेक्स के लिए तैयार कर सकती हैं.

फ्लर्ट करें

वैज्ञानिकों का मानना है कि फ्लर्टिंग से महिलाओं के शरीर में आक्सीटोसिन नामक हारमोन का स्राव होता है, जो रोमांटिक अनुभूतियां उत्पन्न करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए दोस्तों व सहेलियों के बीच सेक्सी जोक्स का आदानप्रदान करें, कभीकभी किसी हैंडसम कुलीग, दोस्त के साथ फ्लर्ट भी कर लें. अपने पति के साथ भी फ्लर्टिंग का कोई मौका न छोड़ें. आप स्वयं सेक्स के प्रति अपनी बदली रुचि को देख कर हैरान हो जाएंगी.

दोस्त कौन अच्छे कौन सच्चे

सही कहा है अच्छा दोस्त वह नहीं होता जो मुसीबत के समय उपदेश देने लगे वरन अच्छा दोस्त वह होता है, जो अपने दोस्त के दर्द को खुद महसूस करे और बड़े हलके तरीके से दोस्त के गम को कम करने का प्रयास करे. यह एहसास दिलाए जैसे यह गम तो कुछ है ही नहीं. लोग तो इस से ज्यादा गम हंसतेहंसते सह लेते हैं.

वैसे भी सही रास्ता दिखाने के लिए किताबें हैं, उपदेश देने के लिए घर के बड़े लोग हैं और उलाहने दे कर दर्द बढ़ाने के लिए नातेरिश्तेदार हैं. ये सब आप को आप की गलतियां बताएंगे, उपदेश देंगे पर जो दोस्त होता है वह गलतियां नहीं बताता, बल्कि जो गलती हुई है उसे कुछ समय को भुला कर दिमाग शांत करने का रास्ता बताता है. आप के सारे तनाव को बड़ी सहजता से दूर करता है.

तभी तो कहा जाता है कि पुराना दोस्त वह नहीं होता जिस से आप तमीज से बात करते हैं वरन पुराना दोस्त तो वह होता है, जिस के साथ आप बदतमीज हो सकें. दोस्ती का यही उसूल होता है कि अपने दोस्त के गमों को आधा कर दे और खुशियों को दोगुना. केवल पुराने दोस्त ही ऐसे होते हैं, जो हमें और हमारे एहसासों को गहराई से सम झने और महसूस करने में सक्षम होते हैं.

सच है कि दोस्ती का रिश्ता बहुत ही प्यारा और खूबसूरत होता है. सच्चे दोस्त आप को भीड़ में अकेला नहीं छोड़ते, बल्कि आप की दुनिया बन जाते हैं. वे हमेशा आप के साथ होते हैं भले ही परिस्थितियां आप को दूर कर दें. वे आप से जुड़े रहने का कोई न कोई तरीका खोज निकालते हैं. वे आप का हौसला बनते हैं. एक समय आ सकता है जब आप के घर वाले आप को छोड़ दें, एक समय वह भी आ सकता है जब आप का बौयफ्रैंड/गर्लफ्रैंड या आप का जीवनसाथी भी आप की सोच को गलत ठहराने लगे, आप से दूरी बढ़ा ले? पर आप के सच्चे दोस्त ऐसा कभी नहीं करते. अगर दोस्तों को आप अपने मन की उल झन बताते हैं तो वे उन्हें सम झते हैं क्योंकि वे आप को गहराई से सम झते हैं, वे आप के अंदर  झांक सकते हैं.

किसी ने कितने पते की बात कही है: बैठ के जिन के साथ हम अपना दर्द भूल जाते हैं, ऐसे दोस्त सिर्फ खुश नसीबों को ही मिल पाते हैं…

आज वयस्कों को दोस्तों की और ज्यादा जरूरत है, क्योंकि रिश्तेदार तो कई शहरों में बिखरे रहते हैं. मौके पर वे कभी चाह कर भी काम नहीं आ पाते तो कभी मदद करने की उन की मंशा ही नहीं होती. वे बहाने बनाने में देर नहीं लगाते. मगर सच्चे दोस्त किसी भी तरह आप की मदद करने पहुंच ही जाते हैं. इसीलिए तो कहा जाता है कि दोस्ती का धन अमूल्य होता है. यही नहीं बातचीत करने और दिल का हाल बता कर मन हलका करने के लिए भी एक साथी यानी दोस्त की जरूरत सब को होती है.

क्यों जरूरी हैं दोस्त

दोस्त कुछ नया सीखने का अवसर देते हैं. नई भाषा, नई सोच, नई कला और नई सम झ ले कर आते हैं. हमें कुछ नया करने और सीखने का मौका और हौसला देते हैं. हमारे डर को भगाते हैं और सोच का दायरा बढ़ाते हैं. मान लीजिए आप का दोस्त एक कलाकार या लेखक है तो उस के साथसाथ आप भी अपनी कला निखारने का प्रयास कर सकते हैं. कुछ आप उसे सिखाएंगे तो कुछ उस से सीखेंगे भी. दोस्त आप को कठिनाइयों का सामना करने में मदद करते हैं, सही सलाह देते हैं, आप की भावनाओं को सम झते हैं, अवसाद से बचाते हैं. दोस्तों के साथ आप घरपरिवार के साथसाथ कार्यालय की समस्याओं पर भी चर्चा कर सकते हैं.

दोस्त कहां और कैसे खोजें

आप उन स्थानों पर दोस्तों की तलाश करें जहां आप की रुचियां आप को ले जाती हैं. मसलन, प्रदर्शनी, फिटनैस क्लब, संग्रहालय, क्लब, साहित्यिक मंच या फिर कला से जुड़ी दूसरी संस्थाएं. आप डांस अकादमी या स्विमिंग सेंटर भी जा सकते हैं और वहां अच्छे दोस्त पा सकते हैं. ऐसी जगहों पर आप को अपने जैसी सोच वाले लोग मिलेंगे. आप सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लौग्स पर भी अपनी अभिरुचि से जुड़े दोस्तों की तलाश कर सकते हैं.

पड़ोसी हो सकते हैं अच्छे दोस्त

अकसर हम अपनी सोसाइटी या अपार्टमैंट के लोगों को भी नहीं पहचानते. आसपास रहने वाले लोगों के साथ भी हैलोहाय से ज्यादा संबंध नहीं रखेते. कभी गौर करें कि आप अपने पास रहने वाले लोगों के साथ कितनी बार संवाद करते हैं? क्या त्योहारों के मौकों पर उन्हें तोहफे देने, खुशियां बांटने या कुशलमंगल जानने जाते हैं? सच तो यह है कि हम उन्हें इग्नोर करते हैं पर वास्तव में एक पड़ोसी अच्छा दोस्त बन सकता है और आप इस दोस्त से रोजना मिल सकते हैं, साथ घूमने जा सकते हैं, बातें कर सकते हैं, कठिन समय में ये तुरंत आप की मदद को हाजिर हो सकते हैं.

औफिस में ढूंढें दोस्त

औफिस में हम अपनी जिंदगी का सब से लंबा वक्त बिताते हैं. यहां आप को समान सामाजिकमानसिक स्तर के लोगों की कमी नहीं होगी. बहुत से औप्शंस मिलेंगे. कई बार हम औफिस के लोगों से केवल काम से जुड़ी बातें ही करते हैं और औपचारिक रिश्ता ही रखते हैं पर जरा इस से आगे बढ़ कर देखें. कुछ ऐसे दोस्त ढूंढें जिन के साथ काम के सिलसिले में आप की प्रतिस्पर्धा नहीं या फिर जो आप के साथ चलना जानते हैं. ऐसे दोस्त न केवल आप के मनोबल को बढ़ाएंगे, बल्कि दिनभर के काम के बीच आप को थोड़ा रिलैक्स होने का मौका भी देंगे. यदि आप अपने औफिस के दोस्तों के प्रति ईमानदार रहते हैं और उन के सुखदुख में काम आते हैं, तो यकीन मानिए वे भी हमेशा आप का साथ देंगे.

इंटरनैट

इंटरनैट के माध्यम से आप अच्छे दोस्त ढूंढ़ सकते हैं. यह आप पर निर्भर करता है कि आप उन के साथ सालों की घनिष्ठ मित्रता के बंधन में बंधे रहना चाहते हैं या सिर्फ चैट कर मजे करना चाहते हैं खासकर विपरीतलिंगी व्यक्ति के साथ अकसर दोस्ती आकर्षणवश हो जाती है. लोग जिंदगी का मजा लेना चाहते हैं, पर इस सोच से अलग दोस्ती में घनिष्ठता और ईमानदारी रखना आप की जिम्मेदारी है.

अब सवाल उठता है कि औनलाइन दोस्त कैसे ढूंढें़? आज के समय में आप के पास इंटरनैट पर बहुत से औप्शंस हैं. आप स्काइप, फेसबुक, ट्विटर, डेटिंग साइट््स आदि पर दोस्त खोज सकते हैं. इस के लिए सोशल नैटवर्क पर अपने पेज को ठीक से डिजाइन करने की आवश्यकता है. इस के अलावा आप अपने कुछ विचार या मैसेज भी पोस्ट कर सकते हैं. सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर अपनी बात रख सकते हैं. दूसरों के पोस्ट पर अपने कमैंट्स दे कर समान सोच वाले लोगों से संपर्क बढ़ा सकते हैं.

पुराने दोस्त हैं कीमती

यदि आप बचपन में कुछ ऐसे दोस्त बनाने में कामयाब रहे जो अब भी आप के साथ हैं तो इस से अच्छा आप के लिए और कुछ नहीं हो सकता. यदि आप के अपने पूर्व सहपाठियों के साथ संबंध नहीं हैं तो उन्हें खोजने का प्रयास करें. आज सोशल नैटवर्क का उपयोग कर यह काम बड़ी आसानी से किया जा सकता है. कौन जानता है शायद आप भी आपसी विश्वास और स्नेह पर बने अपने पिछले दोस्ती के रिश्तों को पुनर्जीवित करने में सक्षम हो जाएं.

सब से विश्वसनीय दोस्त बचपन के दोस्त ही होते हैं. इन के साथ आप बिना किसी हिचकिचाहट अपने दुखदर्द, अपनी तकलीफें और सीक्रेट शेयर कर सकते हैं. लंगोटिया यार साधारणतया कभी धोखा नहीं देते, क्योंकि वे आप को सम झते हैं. वे परिस्थितियों को देख कर नहीं, बल्कि आप के दिल की सुन कर सलाह देते हैं.

दोस्त बनाने के लिए क्या है जरूरी

आप को अजनबियों के साथ भी एक आम भाषा में अपनी भावनाएं व्यक्त करना और दूसरों का ध्यान आकर्षित करना आना चाहिए. कुछ लोग जन्म से ही इस कला में निपुण होते हैं. सब से जरूरी है कि दूसरों में रुचि लीजिए. दूसरों के हक के लिए आवाज उठाएं. अपनी भावनाएं शेयर कीजिए तभी सामने वाला आप के आगे खुलेगा और आप को दोस्त बनाने के लिए उत्सुक होगा.

सलीकेदार कपड़े पहनें

अपने कपड़ों के प्रति सतर्क रहें. कपड़े ऐसे हों जो आप के आकर्षण को बढ़ाएं और व्यक्तित्व को उभारें. कपड़ों के साथ ही अपने अंदर से आ रही गंध के प्रति भी सचेत रहें. मुंह से बदबू या कपड़ों से पसीने की गंध न आ रही हो. हलकी खुशबू का इस्तेमाल करें. बालों को सही से संवारें. इंसान दोस्त उसे ही बनाना चाहता है जो साफसुथरा और सलीकेदार हो.

जानबूझ कर शेखी न बघारें

अकसर लोग शेखी बघारने के क्रम में  झूठ का ऐसा जाल बुनते हैं कि फिर खुद ही उस में उल झ कर रह जाते हैं. इसी तरह दूसरों की नजरों में आने के लिए कुछ ऐसा न बोल जाएं जो मूर्खतापूर्ण लगे.

 झगड़ा जल्दी सुल झाएं

दोस्त के साथ आप का  झगड़ा हो गया है तो यह जानने की कोशिश में न उल झें कि आप में से कौन सही है और कौन दोषी है, बल्कि सुलह करने वाले पहले व्यक्ति बनें. दोस्ती को खत्म करना बहुत सरल है पर इसे बनाए रखना बहुत कठिन. लंबे और विश्वसनीय रिश्ते के लिए एक मजबूत नींव बनाना कठिन काम है, पर वह नींव आप को ही तैयार करनी है.

याद रखिए 2 लोग जिन के शौक और दृष्टिकोण विपरीत हैं कभी दोस्त नहीं बन सकते. इसलिए समान हित और सोच वालों को अपना दोस्त बनाएं और जीवन के एकाकीपन को दूर करें.

गहरी दोस्ती के राज

अपने दोस्त के लिए हमेशा खड़े रहें. यदि धन से उस की मदद नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं, मन से उस का साथ दें. उस को मानसिक सपोर्ट दें. उस की परेशानियों को बांटें और समस्याओं को सुल झाने का प्रयास करें. जब भी उसे आप की सहायता की जरूरत पड़े तो तुरंत आगे आएं. हमेशा कोशिश करें कि सामने वाले ने आप के लिए जितना किया जरूरत पड़ने पर आप उस से बढ़ कर उस के लिए करें. इस से आप को भी संतुष्टि मिलेगी और उस के दिल में भी आप के लिए सम्मान और प्यार बढ़ेगा. तभी तो आप की दोस्ती ज्यादा गहरी और लंबी चल सकेगी.

पैसे के मामलों में थोड़ी तटस्थता रखें

पैसों के मामले में थोड़े तटस्थ रहें. जब भी आप साथ कहीं घूमने जाते हैं, कोई चीज खरीदते हैं या दोस्त आप के लिए कुछ ले कर आता है तो पैसों का हिसाबकिताब बराबर रखने का प्रयास करें. जब भी आप दोनों मिल कर कुछ खर्च कर रहे हों तो किसी एक पर अधिक भार न पड़ने दें. भले ही छोटेमोटे खर्च ही क्यों न हुए हों, कोशिश करें कि खर्च आधाआधा बांट लें. अगर आप 4-5 दोस्त हैं तो सब मिल कर रुपए खर्च करने की कोशिश करें.

जहां तक बात कुछ बड़ी परेशानियों के समय खर्च करने की आती है जैसे घर में बीमारीहारी हो जाए या आप का दोस्त किसी क्रिमिनल केस में फंस जाए और उसे आप की मदद की जरूरत हो जैसे बेल देनी हो या उस के लिए कोई काबिल वकील तलाश करना हो अथवा मैडिकल ट्रीटमैंट के लिए तुरंत पैसों की जरूरत हो तो इस तरह के मामलों में कभी भी रुपए खर्च करने में आनाकानी न करें. यानी जब बात जान पर आ जाए तो बिना कुछ सोचे दिल खोल कर खर्च करें, क्योंकि यह बात आप का दोस्त जिंदगीभर नहीं भूल सकेगा और समय आने पर आप के लिए वह भी जान की बाजी लगा देगा. इसलिए अपने दोस्त होने की जिम्मेदारी को ऐसे समय जरूर निभाएं.

घबराएं नहीं भरोसेमंद बनें

यदि आप दोनों की जीवनस्तर में काफी असमानताएं हैं यानी कोई अमीर है और दूसरा गरीब तो ऐसी स्थिति में भी आप की दोस्ती पर कोई फर्क न पड़े. दोस्ती के लिए सिर्फ एक भरोसा, एक विश्वास और एक अपनापन ही सब से अहम होता है. यदि आप सामने वाले के लिए भरोसेमंद साबित होते हैं, जरूरत के वक्त उस के साथ खड़े रहते हैं, उस के सीक्रेट्स किसी से शेयर नहीं करते और उसे भरपूर मानसिक सपोर्ट देते हैं तो यकीन मानिए आप दोनों की दोस्ती की नींव बहुत मजबूत और गहरी रहने वाली है. आर्थिक स्तर का कोई असर आप की दोस्ती पर नहीं पड़ेगा.

विवाहितों में दोस्ती

दोस्ती का एक खूबसूरत पहलू यह भी हो सकता है कि आप दोनों पतिपत्नी की दोस्ती किसी ऐसे कपल से हो जो बिलकुल आप के जैसे हों. ऐसी दोस्ती का अलग ही आनंद होता है. इस में ध्यान देने की बात यह है कि आप दोनों समान रूप से उस कपल के साथ जुड़े हों यानी आप की जीवनसाथी भी उस कपल के साथ दोस्ती ऐंजौय कर रही हो और किसी तरह की मिसअंडरस्टैंडिंग क्रिएट न हो रही हो. इस तरह 2 कपल्स की दोस्ती 2 परिवारों की दोस्ती जैसी हो जाती है. आप चारों मिल कर एक खूबसूरत परिवार जैसा रिश्ता बना लेते हैं. आप चारों मिलबैठ कर बातें करें. ऐसी दोस्ती महानगरों में बहुत उपयोगी है. इस से अकेलापन तो दूर होगा ही विश्वसनीय रिश्ते भी मिल जाते हैं.

इसी तरह पतिपत्नी आपस में भी एकदूसरे के दोस्त बने रहने चाहिए. जब तक जीवनसाथी को आप दोस्त नहीं मानते तब तक सही अर्थों में आप जीवन के सुखदुख में एकदूसरे का साथ नहीं दे पाएंगे. इसलिए हमेशा एकदूसरे को अपना दोस्त मानें. इस से रिश्ते में गहराई आती है.

रहस्य छिपा कर रखने की आदत डालें

दोस्ती का एक बहुत बड़ा उसूल होता है कि अपने दोस्त के राज कभी न खोलें. उन्हें किसी से शेयर न करें, क्योंकि सामने वाला आप को बहुत विश्वास के साथ अपना मान कर अपने सीक्रेट्स, फीलिंग्स या वीकनैस शेयर करता है. उन बातों को यदि आप किसी से कह देंगे तो फिर दोस्ती टूटने में एक पल का समय नहीं लगेगा. इसलिए सामने वाले को यह भरोसा दिलाएं कि आप किसी भी परिस्थिति में उस के राज किसी से नहीं कहेंगे. ऐसी दोस्ती में ही व्यक्ति दोस्त को अपना सबकुछ बता सकता है और अपना मन हलका कर सकता है.

राजनीति की अंधी गली में खोई लड़की

जब मध्य प्रदेश की सत्ता भाजपा के हाथ से फिसल कर कांग्रेस की झोली में गई थी और मुख्यमंत्री कमलनाथ बने थे, तब सन्नाटा केवल राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में ही नहीं था, बल्कि संगठित और असंगठित अपराधों और अपराधियों सहित पुलिस महकमे में भी था. लोग उत्सुकता से नए मुख्यमंत्री और सरकार के मूड को ले कर बैचेन थे कि वह कैसा होगा.

मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर, जिसे मिनी मुंबई भी कहा जाता है, के चर्चित ट्विंकल हत्याकांड का मामला कमलनाथ की जानकारी में आया तो उन्होंने सख्ती दिखाते हुए पुलिस विभाग को कई नसीहतों के साथ निर्देश दिए. इसे इन निर्देशों या कमलनाथ के मूड का नतीजा ही कहा जाएगा कि 11 जनवरी को ट्विंकल के हत्यारे गिरफ्तार कर लिए गए. यह और बात है कि इस मामले की हकीकत 26 महीने बाद सामने आई.

ट्विंकल की दास्तां राजनीतिक भी है, पारिवारिक भी और सामाजिक भी, जिसे समझने के लिए कुछ महीने पहले जाना जरूरी है जिस से समझ आ जाए कि असल में हुआ क्या था और क्यों और कैसे मध्यमवर्गीय महत्त्वाकांक्षी युवतियां गलत हाथों में पड़ कर या तो अपनी जिंदगी बरबाद कर लेती हैं या फिर गंवा ही देती हैं.

कहानी ट्विंकल की

22 वर्षीय ट्विंकल डागरे खासी खूबसूरत और आकर्षक युवती थी. एलएलबी कर रही ट्विंकल महत्त्वाकांक्षी और जिद्दी भी थी जो अपनी जिंदगी से ताल्लुक रखने वाले फैसलों के लिए किसी की, खासतौर से अपने अभिभावकों की भी मोहताज नहीं रहती थी.

बाणगंगा इलाके में रहने वाले डागरे परिवार के मुखिया संजय डागरे शू स्टोर के मालिक हैं, जिस से उन्हें पर्याप्त आमदनी हो जाती है. उन की पत्नी यानी ट्विंकल की मां रीटा डागरे हालांकि गृहिणी हैं लेकिन इंदौर भाजपा महिला मोरचे से भी जुड़ी हैं. ट्विंकल का छोटा भाई अभी पढ़ रहा है.

बात 16 अक्तूबर, 2016 की है. उस दिन ट्विंकल काफी खुश थी. आमातैर पर सुबह देर से बिस्तर छोड़ने वाली ट्विंकल उस दिन जल्दी उठ गई थी और सजसंवर रही थी. उस ने तैयार हो कर दुलहन जैसा सिंगार किया और ड्रैस भी दुलहन सरीखी ही पहनी.

इस गेटअप में वह सचमुच इतनी आकर्षक लग रही थी कि उसे किसी की नजर भी लग सकती थी. दूसरे दिन करवाचौथ का त्योहार था, जिस की इंदौर में भी खासी चहलपहल थी.

ट्विंकल की शादी अभी नहीं हुई थी और हुई भी थी तो उस की जानकारी किसी को नहीं थी. करवाचौथ का व्रत आजकल अविवाहित युवतियां भी रखने लगी हैं जो एक फैशन भर है. लेकिन ट्विंकल ने सोलह सिंगार किसी खास मकसद से किए थे.

जब वह सजसंवर कर घर के बाहर जाने लगी तो बेटी को दुलहन सा सजा देख कर मां रीटा की त्यौरियां चढ़ गईं. उन्होंने तल्ख लहजे में पूछा, ‘‘कहां जा रही हो?’’

इस सवाल की उम्मीद ट्विंकल को थी, लिहाजा वह बेहद सर्द लहजे में बोली, ‘‘नाश्ता लेने जा रही हूं.’’

रीटा अब तक झल्ला चुकी थीं और काफी कुछ उन की समझ में भी आ रहा था, इसलिए वे बेटी को समझाने की गरज से बोलीं, ‘‘नाश्ता लेने जा रही हो, वह भी दुलहन बन कर.’’

मां के तेवर देख ट्विंकल को भी समझ आ गया था कि वह ऐसे मानने वाली नहीं हैं. लिहाजा वह मुस्करा कर बोली, ‘‘अरे कल करवाचौथ है, सो उस बदनावर वाले से मिलने जा रही हूं.’’

बदनावर इंदौर से 100 किलोमीटर दूर बसा एक छोटा सा कस्बा है. यहां रहने वाले एक युवक अमित से ट्विंकल की शादी तय हो चुकी थी, जो 4 महीने बाद फरवरी में होनी थी. बदनावर का नाम सुनते ही रीटा को तसल्ली हुई कि बेटी वहां नहीं जा रही, जहां की उन्हें आशंका थी, इसलिए उन्होंने उसे रोका नहीं. और फिर वह यह भी जानती थीं कि रोकने से वह रुकेगी भी नहीं.

फिर कभी नहीं लौटी ट्विंकल

यह ट्विंकल की जिंदगी का सूचनात्मक पहलू है कि वह एक मध्यमवर्गीय खातेपीते परिवार की युवती थी, लेकिन उस की जिंदगी का दूसरा पहलू राजनीतिक था. वह कोई गैरमामूली नहीं तो मामूली युवती भी नहीं थी. इंदौर में उस की अपनी अलग पहचान थी. वह एक उभरती युवा नेत्री के तौर पर पहचानी जाती थी. राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों को उस में अपार संभावनाएं दिखती थीं. पहले वह भाजपा में पार्टी की प्रवक्ता थी लेकिन कुछ दिनों पहले उस ने कांग्रेस जौइन कर ली थी.

अखबारों में ट्विंकल के बयान और फोटो छपने लगे तो लोग उस में दिलचस्पी लेने लगे. हालांकि उस की चर्चा की वजह उस की खूबसूरती ज्यादा थी. इस में कोई दो राय नहीं कि राजनीति में हमेशा ही खूबसूरत युवतियों और महिलाओं की खासी पूछपरख होती रही है. ट्विंकल भी इस का अपवाद नहीं थी. अपने सौंदर्य को भुनाने का वह कोई मौका नहीं चूकती थी.

बहरहाल 16 अक्तूबर, 2016 को वह घर से निकली तो फिर कभी वापस नहीं आई. उस के जाने के बाद रीटा बेफिक्र हो गई थीं, क्योंकि अमित अच्छे और खातेपीते घर का लड़का था और हर लिहाज से ट्विंकल के लिए उपयुक्त था इसलिए उन्होंने बदनावर का नाम सुनने के बाद ट्विंकल को नहीं रोका था.

कोई वजह थी जो रीटा और उन के पति संजय चाहते थे कि ये 4 महीने जब तक बेटी की शादी न हो जाएं, ठीकठाक तरीके से गुजर जाएं. डागरे परिवार की यह काफी अहम और चिंताजनक वजह थी जिस का गहरा संबंध ट्विंकल की गुजरी जिंदगी से था.

परेशान हो गए रीटा और संजय

ट्विंकल के जाने के बाद रीटा अपने काम में लग गईं और संजय अपनी दुकान पर चले गए. शाम के बाद रात भी हो गई लेकिन बेटी वापस नहीं आई तो उन्हें थोड़ी चिंता हुई. कई बार उन्होंने ट्विंकल को फोन किया, लेकिन हर बार उस का मोबाइल स्विच्ड औफ मिला.

ट्विंकल अकसर देर रात घर वापस लौटती थी. कई बार तो वह दूसरे दिन आती थी, लेकिन इस बाबत फोन पर मांबाप को बता जरूर देती थी. न जाने क्यों उस दिन भी उस के वक्त पर घर न लौटने पर रीटा और संजय ने कोई खास तवज्जो नहीं दी और सुबह देखेंगे, सोच कर सो गए.

दूसरे दिन सुबह दोनों को फिर बेटी की सुध आई तो उन्होंने अमित को फोन किया. क्योंकि वह उस के पास जाने की बात कह कर गई थी. संजय ने जब अमित को फोन कर ट्विंकल के बारे में पूछा तो उस का जवाब सुन कर वे चौंक उठे. अमित ने बताया कि न तो ट्विंकल बदनावर आई है और न ही उस की उस से कोई बात हुई है.

इतना सुनने के बाद संजय और रीटा को मानो सांप सूंघ गया. एक आशंका जो रहरह कर उन के दिलोदिमाग में उमड़घुमड़ रही थी, उस का नाम था जगदीश उर्फ कल्लू करोतिया. कल्लू के बारे में सोचसोच कर ही दोनों के हाथपैर फूलने लगे थे और दिमाग सुन्न हो चला था.

इंदौर की राजनीति में कल्लू करोतिया एक जानामाना नाम है. भाजपा का अहम चेहरा रहे कल्लू की उम्र 65 साल है. वह भाजपा से पार्षद भी रह चुका है और इंदौर भाजपा का महामंत्री भी, जो उन दिनों काफी अहम पद होता था क्योंकि भाजपा तब सत्ता में थी.

छात्र जीवन से राजनीति कर रही ट्विंकल ने जब सक्रिय राजनीति में आने का फैसला लिया तो उसे किसी ऐसे शख्स की तलाश थी जो उसे भाजपा में ला कर महत्त्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाली पोस्ट दिला सके.

जगदीश करोतिया की भाजपा में खासी पैठ थी, क्योंकि वह रैलियों के लिए भीड़ जुटाता था. हर धरनेप्रदर्शन में आगे रहता था और पार्टी के लिए आधी रात को भी तैयार रहता था.

चूंकि रीटा भी भाजपा में थी, इसलिए ट्विंकल ने जब कल्लू को अपनी इच्छा बताई तो बुढ़ाते कल्लू की जवान हसरतें कुलबुलाईं.

बहुत जल्द ट्विंकल और कल्लू की मुलाकातें बढ़ने लगीं और कल्लू उसे सियासत का ककहरा पढ़ाने लगा. राजनीति का ककहरा पढ़ने के लिए ट्विंकल ने कल्लू को अपना गौडफादर मान लिया था.

कल्लू ने उसे जल्द ही पार्टी प्रवक्ता बनवा दिया तो ट्विंकल खुद को तजुर्बेकार और समझदार समझने लगी. नासमझ ट्विंकल को लगने लगा था कि अब बस दिल्ली दूर नहीं है. जल्द ही वह विधायक, सांसद और मंत्री भी बन सकती है, जिस का रास्ता पार्षदी से हो कर जाता है.

चिड़िया खुद दाना चुगने को बेताब थी, यह सोचसोच कर कल्लू के अंदर का हैवान अंगड़ाइयां लेने लगा था. उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि अपनी कुत्सित इच्छा पूरी कैसे करे.

भरेपूरे परिवार के मुखिया कल्लू के 3 जवान बेटे हैं और पत्नी भी. लिहाजा ट्विंकल उस के पास होते हुए भी काफी दूर थी. यह तो कल्लू जानता था कि अगर एक दफा भी ट्विंकल का नाम उस के साथ गलत तरीके से जुड़ा तो लेने के देने पड़ जाएंगे.

अब हर जगह ट्विंकल उस के साथ नजर आने लगी थी. स्कूटर पर पीछे की सीट पर सट कर बैठी ट्विंकल उसे डैडी और बड़े पापा संबोधन से बुलाती थी, तो कल्लू का दिल रोने लगता था कि ट्विंकल भी उसे औरों की तरह कल्लू कह कर क्यों नहीं बुलाती.

ट्विंकल अब भाजपा के कार्यक्रमों में भाग लेने लगी थी और बड़े नेताओं जैसे नाजनखरे भी दिखाने लगी थी. इंदौर की उभरती नेत्रियों की लिस्ट में अब उस का नाम भी शुमार होने लगा था.

संजय और रीटा अपनी बेटी की तरक्की से खुश थे और उस पर फख्र भी करने लगे थे. उन्हें उम्मीद हो चली थी कि ट्विंकल एक दिन बड़ा मुकाम हासिल कर उन का नाम रोशन करेगी.

इधर कल्लू और ट्विंकल के बीच क्या खिचड़ी पक रही है, यह कोई नहीं जानता था. दूसरे मामलों की तरह इस बेमेल प्यार की शुरुआत कैसे हुई, इस की किसी को हवा भी नहीं लगी. ट्विंकल दीवानियों की तरह कल्लू पर मरने लगी थी और उस से शादी करने की जिद भी पकड़ बैठी थी.

ट्विंकल ने जो मां को बताया

इस वाकये का दूसरा पहलू रीटा की जुबानी मानें तो यह है कि अब से (हादसे से) कोई 4 साल पहले कल्लू ने धोखे से ट्विंकल का बलात्कार किया था. यह बात खुद ट्विंकल ने उन्हें बताई थी.

ट्विंकल के मुताबिक एक दिन कल्लू उसे दिलीप सिंह कालोनी के एक फ्लैट में ले गया था. वहां शिकंजी में नशीला पदार्थ पिलाने के बाद वह बेहोश हो गई. जब ट्विंकल होश में आई तो उस के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था. तब वह 18 साल की थी. होश में आने पर ट्विंकल को समझ आ गया कि कल्लू उर्फ डैडी उर्फ बड़े पापा ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा है.

राजनीति में सख्त तेवर दिखाती रहने वाली ट्विंकल ने इस पर कल्लू से झगड़ा किया तो कल्लू पर कोई असर नहीं हुआ, जो सामाजिक मनोविज्ञान का उस से बड़ा ज्ञाता था. कल्लू को पता था कि अव्वल तो कहीं मुंह न दिखा पाने वाली ट्विंकल अपने बलात्कार का कहीं, खासतौर से घर पर जिक्र नहीं करेगी और खुदा न खास्ता कर भी देगी तो इज्जत के चलते संजय और रीटा रिपोर्ट दर्ज नहीं कराएंगे.

कल्लू का अंदाजा सटीक निकला. डागरे दंपति ने उस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई क्योंकि रीटा बेहतर जानती थीं कि राज भाजपा का है इसलिए कल्लू का कुछ नहीं बिगड़ेगा.

ट्विंकल कुछ दिन गुमसुम रही लेकिन उस में आत्मविश्वास मानो कूटकूट कर भरा था, इसलिए उस के दम पर जल्द ही फिर से राजनीति के मैदान में आ गई. ट्विंकल को समझ आ गया था कि बेवजह का हल्ला मचाने से कुछ हासिल होने वाला नहीं है.

उस ने बजाय कल्लू से नाता तोड़ने के इस रिश्ते में और गाढ़ा रंग भरना शुरू कर दिया. अब आए दिन दोनों हमबिस्तर होने लगे. फर्क सिर्फ इतना आया था कि अब पहले की तरह कल्लू को कथित रूप से ट्विंकल को बेहोशी की दवाई देने की जरूरत नहीं पड़ती थी, उलटे ट्विंकल अपनी अदाओं और हरकतों से उसे मदहोश करने लगी थी.

राजनीति में ऐसा होना कोई नई या ढकीमुंदी बात नहीं है, लेकिन ट्विंकल के मन में कुछ और ही था. इसलिए अब उस का कल्लू के घर आनाजाना बढ़ गया था. कल्लू भी खुश था कि कुछ नहीं बिगड़ा और खुद ट्विंकल पके आम की तरह उस की गोद में आ गिरी.

बहुत जल्द ही कल्लू के तीनों बेटों और पत्नी को भी मालूम हो गया कि ट्विंकल और कल्लू के बीच एक नाजायज रिश्ता कायम हो चुका है और कल्लू अब पूरी तरह ट्विंकल की गिरफ्त में आ चुका है. हल्ला तब मचा, जब एक दिन ट्विंकल ने कल्लू से शादी करने का फैसला सुना दिया. इस पर कल्लू के घर इतना कोहराम मचा कि वह घबरा उठा.

उस दिन कल्लू की पत्नी और ट्विंकल के बीच जम कर झगड़ा हुआ और इतना हुआ कि कल्लू की पत्नी ने कपड़े धोने वाली मोगरी से ट्विंकल की धुनाई कर डाली. यह वीभत्स और हिंसक नजारा देख कल्लू के बेटे अजय की पत्नी बेहोश हो गई थी.

ट्विंकल को चोट ज्यादा लगी थी इसलिए कल्लू ने अस्पताल ले जा कर उस का इलाज करवाया और उसे समझाबुझा कर जैसेतैसे सिचुएशन मैनेज कर ली. लेकिन इस पके नेता को इतना तो समझ आ गया था कि ट्विंकल अब अपनी पर उतारू हो आई है और आसानी से मानेगी नहीं.

अब कल्लू ट्विंकल से छुटकारा पाने के लिए छटपटा रहा था और ट्विंकल थी कि किसी प्रेत की तरह उस के घर की मुंडेर पर विराजमान हो चली थी, जिसे अब न नाम की परवाह थी और न ही बदनामी की चिंता. यह सब चिंता उस ने कल्लू के पाले में डाल दी थी.

इसी दौरान ट्विंकल ने बदनावर में रहने वाले अमित से सगाई कर ली थी, जिस से कल्लू और उस के परिवार ने चैन की सांस ली थी. लेकिन उन की यह गलतफहमी 16 अक्तूबर, 2016 को तब चूर हो गई जब ट्विंकल सुबहसुबह उन के यहां फिर आ धमकी.

यह ट्विंकल की दीवानगी थी या प्रतिशोध था. उस ने कल्लू यानी जगदीश के नाम का टैटू हाथ पर गुदवा लिया था. जाहिर है दोनों परिवारों में कलह और तनाव भी था. कह सकते हैं कि अब कुछ भी छिपा नहीं रह गया था. पर बात अभी तक दुनिया के सामने नहीं आई थी लेकिन घायल नागिन की तरह फुफकार रही ट्विंकल से कल्लू का परिवार खौफ खाने लगा था.

दृश्यम से ली प्रेरणा

ट्विंकल नाम के खौफ से छुटकारा पाने के लिए करोतिया परिवार में लंबीलंबी मीटिंगें हुईं, जिन में यह तय किया गया कि पानी चूंकि अब सिर और घर के ऊपर से गुजर चुका है, इसलिए कुछ करना चाहिए.

जगदीश करोतिया के 3 बेटे हैं. सब से बड़ा विजय 38 साल का, मंझला अजय 31 साल और सब से छोटा विजय 26 साल का है. करोतिया परिवार बौखलाहट में कुछ भी करने को तैयार था.

साल 2016 के शुरुआत में ट्विंकल ने अजय को फांसा था या अजय ने ट्विंकल को, यह कहना तो मुश्किल है लेकिन दोनों काफी नजदीक आ गए थे. अजय और ट्विंकल के बीच फोन पर लंबीलंबी बातें होने लगी थीं और दोनों ने गुपचुप मंदिर में शादी भी कर ली थी. इस के बाद भी ट्विंकल कल्लू से भी शादी करने की जिद पकड़े बैठी थी.

यह वाकई हैरानी और दिलचस्पी की बात है कि ट्विंकल कल्लू के बाद उस के बेटे अजय से भी रिश्ता जोड़ बैठी थी. अब अगर अजय को उस का पति मानें तो कल्लू उस का ससुर हुआ, लेकिन ट्विंकल को शरमोहया या रिश्तेनातों की परवाह नहीं रह गई थी.

वह तो किसी भी कीमत पर कल्लू से बदला लेना चाहती थी और करोतिया परिवार में उस की वजह से पसरती कलह से उसे जो खुशी मिलती थी, शायद ही वह उसे शब्दों में बयां कर पाती.

ट्विंकल से छुटकारा पाने और बाद में बचने की साजिश रच रहे करोतिया परिवार के मझले बेटे अजय ने ट्विंकल को इस हद तक शीशे में उतार लिया था कि उस ने एक बार अजय को मैसेज किया था कि वह अपने मांबाप (रीटा और संजय) से तंग आ चुकी है और इस दुनिया से जा रही है.

जाहिर था कलह डोगरे परिवार में भी पसरी हुई थी. लेकिन हालत ऐसी थी कि हर कोई अपनी इज्जत देख रहा था, ट्विंकल पर किसी का जोरनहीं चल रहा था. कल का दबंग कल्लू अब चूहे की तरह भाग रहा था और ट्विंकल किसी बिल्ली की तरह उस का शिकार करते मनोरंजक और हिंसक खेल खेल रही थी.

तीनों बेटों और कल्लू ने आखिरी फैसला यह लिया कि अब ट्विंकल से छुटकारा पाने का एकलौता उपाय उसे हमेशा के लिए सुला देना है. इस के बाद उन्होंने अजय देवगन अभिनीत ‘दृश्यम’ फिल्म कई बार देखी, जिस से ट्विंकल का कत्ल कर आसानी से बचा जा सके.

कैसे हुई ट्विंकल की हत्या और किस नाटकीय तरीके से ये लोग पकड़े गए, यह जानने से पहले वापस 16 अक्टूबर 2016 की तरफ रुख करना जरूरी है.

जब 17 अक्तूबर को भी ट्विंकल वापस नहीं लौटी और अमित ने भी साफ कर दिया कि ट्विंकल ने उस से कोई संपर्क नहीं किया था, तो संजय और रीटा समझ गए कि वह कल्लू के यहां गई होगी. जिसके बेटे अजय के उकसाने पर वह उन के ही खिलाफ एक बार रिपोर्ट दर्ज करा चुकी थी.

बेटी की चिंता में गुजरे कल की बातें भूल कर 18 अक्तूबर, 2016 को दोनों ने बाणगंगा थाने जा कर ट्विंकल की गुशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. दोनों ने कल्लू और उस के बेटों अजय व विजय पर ट्विंकल के अपहरण का शक जाहिर किया. लेकिन उम्मीद के मुताबिक पुलिस वालों ने कल्लू के रसूख का लिहाज किया और सिर्फ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर डागरे दंपति को चलता कर दिया.

गरमाई राजनीति

जब पुलिस ने कल्लू और उस के बेटों के खिलाफ कोई काररवाई नहीं की तो संजय और रीटा को लगने लगा कि उन की बेटी जरूर किसी अनहोनी का शिकार हो गई है.

पुलिस वालों ने मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन एक कांग्रेसी नेत्री के गायब होने की खबर पर न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की राजनीति गरमाने लगी. तो दिखावे के लिए कल्लू को थाने बुला कर पूछताछ की गई.

कल्लू ने ट्विंकल के बारे में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि वह तो उस की बेटी जैसी है, जिसे उस ने ही राजनीति में अंगुली पकड़ कर चलना सिखाया है तो वह क्यों उस का अपहरण करेगा, जबकि गायब होने के पहले ट्विंकल हर समय उस के साथ रहती थी. पुलिस ने अपना काम कर दिया लेकिन कांग्रेसी जब तब इस मुद्दे को उछालते रहे. तब पुलिस ने एसआईटी का गठन कर डाला लेकिन वह भी कछुए की चाल से काम करती रही.

इसी तरह के होहल्ले में 28 महीने गुजर गए, लेकिन ट्विंकल की गुमशुदगी की गुत्थी नहीं सुलझ रही थी.

पुलिस का शक ट्विंकल के मंगेतर अमित पर भी गया था और रीटा और संजय पर भी, क्योंकि ट्विंकल ने एक बार उन के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी.

नवंबर दिसंबर, 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेसियों ने ट्विंकल की गुमशुदगी का मामला उठाते हुए कल्लू पर निशाना साधा था.

पर पुलिस कल्लू को बचाने की कोशिश में लगी रही. मुख्यमंत्री की कुरसी संभालते ही जब मामला कमलनाथ की जानकारी में यह मामला आया तो उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि ट्विंकल वाले मामले में जल्दी ठोस काररवाई की जाए.

होनहार और समझदार पुलिस वाले समझ गए कि अब उन्हें क्या करना है और उन्होंने कमलनाथ की मंशा के मुताबिक ट्विंकल के हत्यारों को पकड़ भी लिया, जिस से 11 जनवरी को सूबे की सियासत कड़कड़ाती सर्दी में गरमा उठी.

परदा गिरा या उठा

डीआईजी हरिनारायण चारी मिश्रा ने 11 जनवरी को एक पत्रकारवार्ता में खुलासा किया कि ट्विंकल डागरे के हत्यारे पकड़ लिए गए हैं, जिन के नाम जगदीश करोतिया उर्फ कल्लू पहलवान, उस के बेटे अजय, विजय और विनय के अलावा 5वां आरोपी नीलेश कश्यप उर्फ नीलू है.

पुलिसिया पूछताछ में अजय ने स्वीकार लिया कि उस के पिता और ट्विंकल के नाजायज ताल्लुकात थे और ट्विंकल कल्लू के साथ रहने की जिद पकड़े हुई थी.

अजय के मुताबिक इस बात को ले कर घर में कलह होने लगी थी और पिता का पौलिटिकल कैरियर भी प्रभावित हो रहा था. लिहाजा इन सभी ने ट्विंकल को हमेशा के लिए रास्ते से हटा देने की योजना बनाई.

योजना के मुताबिक 16 अक्तूबर, 2016 की सुबह ट्विंकल को घर बुलाया गया. घर से अजय उसे एमआर10 स्थित नीलेश के खेत पर ले गया. यहां कल्लू ने ट्विंकल को समझाने की कोशिश की. इस पर ट्विंकल ने बगैर घबराए कल्लू को मुंहतोड़ जवाब यह दिया कि यह बात पहले क्यों नहीं सोची थी.

इस पर गुस्साए कल्लू ने एक जोरदार थप्पड़ ट्विंकल के गाल पर जड़ दिया और इस के तुरंत बाद ही अजय ने रस्सी से उस का गला घोंट दिया. कुछ देर छटपटाने के बाद ट्विंकल हमेशा के लिए शांत हो गई.

इन हत्यारों का इरादा ट्विंकल की लाश को वहीं दफन करने का था, लेकिन नीलेश डर गया और उस ने अपने खेत में लाश दफनाने से मना कर दिया. इस के बाद तीनों बापबेटे ट्विंकल की लाश को कपड़े में लपेट कर कार की डिक्की में डाल कर अपने घर ले गए.

अगले दिन तड़के ये सभी ट्विंकल की लाश को अवंतिका नगर स्थित एक अगरबत्ती के कारखाने के पास खाली प्लौट पर ले गए. यहां कल्लू ने नगर निगम के कर्मचारियों से कहा कि एक पार्षद का कुत्ता मर गया है, उसे दफनाना है इसलिए गड्ढा खोदो. चूंकि कल्लू खुद पार्षद रह चुका था, इसलिए उस की नगरनिगम में अच्छी जानपहचान और दबदबा था. कर्मचारियों ने उस के कहने पर गड्ढा खोद दिया.

इन लोगों ने ट्विंकल की लाश इस गड्ढे में दफना दी और ऊपर से घासफूस और कचरा डाल कर उसे जला दिया. फिर 2 दिन बाद इन्होंने ट्विंकल की हड्डियां नाले में बहा दीं.

कहीं कोई कमी न रह जाए, इसलिए दृश्यम फिल्म की ही तर्ज पर ट्विंकल का मोबाइल बदनावर ले जा कर फेंक दिया, जहां उस की आखिरी लोकेशन मिली भी थी.

अब पुलिस सूखी मिट्टी में सबूत ढूंढ रही है. ट्विंकल का ब्रेसलेट और बिछुए जब्त कर लिए गए हैं. इस मामले में 200 के लगभग लोगों से पूछताछ की गई.

अब पुलिस लाख बार अपनी पीठ थपथपाती रहे, लेकिन पुलिस महकमे में पसरा भ्रष्टाचार ही इस मामले से उजागर हुआ है. अगर पुलिस वालों ने यही फुरती 18 अक्तूबर, 2016 को दिखाई होती तो लगता कि पुलिस वक्त पर भी काररवाई करती है.

रीटा अब मान रही हैं कि उन्होंने ट्विंकल के दुष्कर्म की रिपोर्ट न लिखा कर गलती की थी. इस गलती की सजा ट्विंकल ने तो मर कर भुगती और अब वे भी भुगत रही हैं.

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