दीवाली पर लिया फैसला : 500 रुपए के लिए बेटा रखा गिरवी

किदवई नगर कालोनी में बड़ीबड़ी कोठियां बनी हुई थीं. इसी कालोनी में इंजीनियर नागेश साहब की भी एक कोठी थी. कोठी के आउटहाउस में बैजू अपनी बीवी मीना और 8 साल के बेटे संजू के साथ रहता था.

बैजू एक मजदूर था. वह ईंट, गिट्टी और बालू ढोने का काम करता था. उस की मजदूरी से घर का खर्च चलता था. लेकिन उसे शराब पीने की बुरी आदत थी. मजदूरी के मिले थोड़े रुपयों से भी वह ऐश कर लेता था. उसे अपनी बीवीबच्चे की परवाह नहीं थी.

बैजू की बीवी मीना को घर चलाने में बड़ी मुश्किलें होती थीं. इस वजह से वह अपने पति बैजू से चिढ़ी रहती थी. उसे बेटे संजू की परवरिश और पढ़ाई की फिक्र होती थी, लेकिन बैजू को बेटे की पढ़ाई की कोई चिंता नहीं थी.

मीना गोरी और खूबसूरत औरत थी. वह स्मार्ट और फुरतीली थी. उस की पतली कमर और लंबे रेशमी बाल सब को आकर्षित करते थे. वह हंसमुख और बिंदास थी. वह बनठन कर रहने की शौकीन थी. उस का पहनावा सलीकेदार था.

किदवई नगर कालोनी में किराए का घर ले कर रहना बैजू जैसे मजदूर के लिए मुमकिन नहीं था. इस कालोनी में घर का किराया बहुत ज्यादा था. नागेश साहब ने उसे अपनी कोठी के आउटहाउस में रहने को जगह दे दी थी.

नागेश साहब बैजू से किराया नहीं लेते थे. किराए के बदले में नागेश साहब की कोठी में बैजू की बीवी मीना कामवाली बाई की तरह काम करती थी. वह सुबहशाम घर के जूठे बरतन साफ कर देती थी, जिस से मेमसाहब को बननेसंवरने और पार्टियों में जाने की फुरसत मिल जाती थी. नागेश साहब और मेमसाहब दोनों बड़े खुश रहते थे. उन्हें मीना के रूप में नौकरानी जो मिल गई थी.

बैजू एक रात शराब पी कर घर लौटा था. इस से बैजू और मीना में जम कर लड़ाई हो गई थी.

‘‘मैं कहती हूं, तू कब सुधरेगा…’’ मीना ने बैजू से कहा.

‘‘मैं बिगड़ा ही कहां हूं. थोड़ी पी ली तो पहाड़ टूट गया क्या?’’ बैजू ने अपनी सफाई दी.

‘‘500 रुपए मजदूरी के मिलते हैं, जिन में से 300 रुपए की तू दारू पी गया. मुझे घर चलाने के लिए केवल 200 रुपए ही दिए. इतनी महंगाई में घर कैसे चलेगा?’’ मीना ने कहा.

‘‘घर चल जाएगा. हां, नवाबी चाहोगी तो वह नहीं होगा,’’ बैजू ने बेशर्मी से कहा.

इस बात पर बैजू और मीना के बीच हाथापाई हो गई. मीना ने बैजू के पीठ पर 2-4 जोरदार मुक्के मारे. बैजू ने भी मीना को पीट दिया.

संजू अम्मां और बापू की लड़ाई देख कर सहम गया. वह सुबक कर रोने लगा. तब जा कर मियांबीवी शांत हुए.

इसी कलह में सुबह हो गई थी. बैजू साइट पर मजदूरी करने चला गया था. मीना मेमसाहब के जूठे बरतन धो रही थी. मेमसाहब भी वहीं कुरसी पर बैठी थीं.

‘‘अरे मीना, कल रात बैजू के साथ तेरा झगड़ा हुआ था क्या? तुम दोनों के झगड़ने की जोरजोर से आवाजें आ रही थीं,’’ मेमसाहब ने पूछा.

‘‘हां, मेमसाहब. कल रात बैजू दारू पी कर आया था. वह मजदूरी के मिले सारे रुपए दारू में उड़ा देता है,’’ मीना ने उदास लहजे में कहा.

‘‘अरे मीना, इस में बैजू से लड़ने की क्या जरूरत थी. नागेश साहब भी तो क्लब में शराब पीते हैं. मैं ने उन से कभी कोई झगड़ावगड़ा नहीं किया. उलटे रात में उन का प्यार मुझ से बढ़ जाता है,’’ मेमसाहब ने मुसकरा कर कहा.

मेमसाहब की बात सुन कर मीना जलभुन गई और बोली, ‘‘हां मेमसाहब, नागेश साहब और बैजू में बड़ा फर्क है. नागेश साहब के पास क्या कमी है. उन के पास खूब दौलत है. वे क्लब में शराब पी सकते हैं. लेकिन बैजू को मजदूरी के मिले रुपयों से मेरे और संजू के सपने जुड़े हुए हैं. हम उन सपनों को मरते नहीं देख सकते हैं.’’

मीना ने मेमसाहब को लाजवाब कर दिया था. वह झटपट बरतन धो कर वहां से चली गई.

मीना ने संजू को नाश्ता करा कर स्कूल भेज दिया था. थोड़ी दूर संजू का स्कूल था. उस स्कूल में गरीब घरों के बच्चे पढ़ते थे. स्कूल में 2 ही कमरे थे. एक कमरे और आंगन से सटे बरामदे में बच्चों की क्लास चलती थी.

दूसरे कमरे में रामचंद्र फल वाले का फल का गोदाम था. गोदाम से फल की खुशबू आती रहती थी. बच्चे ललचाते रहते थे कि फल चुरा कर कैसे खाए जाएं. वे पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान नहीं लगा पाते थे.

आज रामचंद्र फल वाले ने गोदाम में आम रखे थे. गोदाम से पके आम की रसीली खुशबू आ रही थी. संजू को आम खाने का मन करने लगा. वह गोदाम से आम चुरा कर खाने लगा. किसी बच्चे ने संजू की शिकायत सुनील सर से कर दी. चुरा कर आम खाने पर उन्होंने संजू को खूब डांट लगाई.

शाम को स्कूल के रास्ते बैजू काम पर से घर लौट रहा था. उसे स्कूल के पास सुनील सर मिल गए. उन्होंने संजू की आम चुरा कर खाने वाली बात बैजू से कह दी.

घर पहुंच कर बैजू छड़ी से संजू की पिटाई करने लगा, ‘‘और आम चुरा कर खाएगा.’’

संजू पिटाई से रोने लगा. मीना को संजू की छड़ी से पिटाई देखी नहीं गई. वह बैजू को कोसने लगी, ‘‘कभी बच्चे के लिए आम खरीद कर लाया नहीं, वह चुरा कर नहीं खाएगा तो क्या करेगा.’’

‘‘मेरी महंगे आम खरीदने की औकात नहीं है,’’ बैजू ने कहा.

‘‘और दारू पीने और मुरगा खाने की औकात तो है न,’’ मीना ने डपट कर कहा.

इस बात पर मीना और बैजू में मारपीट हो गई. दोनों एकदूसरे को थप्पड़ और मुक्के से मारने लगे. वे चीखचिल्ला भी रहे थे. संजू अम्मां और बापू के झगड़े से डर कर रोने लगा. कुछ देर बाद दोनों की लड़ाई शांत हुई.

अगली सुबह मीना नागेश साहब की कोठी में जूठे बरतन साफ कर रही थी. मेमसाहब वहीं कुरसी लगा कर बैठी थीं.

बरतन साफ कर मीना घर जाने लगी कि तभी मेमसाहब ने उसे रोक कर कहा, ‘‘मीना, ये लो 200 रुपए. बाजार से चिकन खरीद कर ला दो.’’

‘‘जी मेमसाहब, अभी जाती हूं,’’ मीना रुपए ले कर बाजार से चिकन लाने चली गई.

सब्जी मंडी के नुक्कड़ पर बादल की चिकन, ब्रैड और अंडे की दुकान थी. बादल गठीला नौजवान था. उसे बनठन कर रहना अच्छा लगता था. वह टीशर्ट और जींस पहनता था. उस के पास एक पुरानी मोटरसाइकिल थी, जिस से वह अपने किराए के घर से दुकान आताजाता था.

मीना बादल की दुकान पर आ गई. बादल ने मीना को देखते ही पूछा, ‘‘मीना, आज क्या चाहिए? अंडाब्रैड दे दूं क्या?’’ ‘‘नहीं बादल, सिर्फ एक किलो चिकन दे दो,’’ मीना ने कहा.

बादल ने झटपट उसे चिकन दे दिया. मीना ने उसे 200 रुपए दे दिए.

‘‘दोपहर में आओ न मीना, कुछ इधरउधर घूमेंगे. मैं दुकान पर बैठेबैठे बोर हो जाता हूं,’’ बादल ने मीना से कहा.

‘‘अच्छा, मैं दोपहर में आती हूं. लेकिन बादल, तुम्हारी दुकान तो दोपहर में बंद हो जाती है,’’ मीना ने कहा.

‘‘हां, तभी तो उस समय ही फुरसत मिलती है,’’ बादल ने कहा. मीना मुसकराते हुए चिकन ले कर चली गई.

मीना अकसर मेमसाहब के लिए चिकन और अंडाब्रैड लेने बादल की दुकान पर आती थी. बादल की मीना से दोस्ती हो गई थी.

धीरेधीरे बादल और मीना एकदूसरे को चाहने लगे थे. मीना बादल के गठीले बदन पर मरमिटी थी. मीना भी खूबसूरती में कहां कम थी. बादल उस की देह का दीवाना हो गया था. दोनों को एकदूसरे से प्यार हो गया.

दोपहर में बादल मीना का इंतजार करने लगा. कुछ ही देर में मीना आ गई. बादल मीना को मोटरसाइकिल पर बैठा कर एक ढाबे पर ले गया, जहां दोनों ने गरमागरम डोसा खाया. ढाबे से निकल कर बादल मीना को अपने घर ले गया.

कमरे में मीना पलंग पर लेट गई. उस के साथ बादल भी लेट गया. वह मीना को बांहों में भर कर चूमने लगा. मीना भी बादल को बेतहाशा चूमने लगी.

बादल मीना के उभारों को सहलाने लगा. वे दोनों पूरी तरह प्यार के सुर में आ गए थे. पलभर में दोनों सैक्स करने लगे. जब जिस्म की आग ठंडी हुई, तब दोनों अलग हुए. बादल ने मीना को मोटरसाइकिल से उस के घर के नजदीक छोड़ दिया.

महीने बीतते गए. अब सर्दियां आ गई थीं. जल्दी ही दीवाली आने वाली थी. इस सब के बावजूद बैजू को पिछले 3-4 दिन से काम नहीं मिल रहा था. उस के हाथ में रोज की तरह मजदूरी के पैसे नहीं आ रहे थे. उसे रोज दारू पी कर ऐश करने की आदत थी. वह बैठेबैठे जुगाड़ भिड़ाने लगा.

‘अरे हां, कालोनी के मोड़ के पास चाय वाले प्रभु को जूठे कपप्लेट धोने के लिए एक छोकरा चाहिए था. अपना संजू उस चाय की दुकान में कपप्लेट धो देगा. बदले में प्रभु चाय वाले से उसे 2,000 रुपया महीना देने को बोलूंगा,’ सोच कर बैजू खुशी से झूम उठा.

दूसरे दिन बैजू संजू को स्कूल न भेज कर अपने साथ प्रभु चाय वाले के पास ले गया.

‘‘प्रभु, तुम्हें अपनी दुकान में जूठे कपप्लेट धोने के लिए एक छोकरा चाहिए था न? मेरे बेटे संजू को दुकान में रख लो,’’ बैजू ने कहा.

‘‘हां, एक छोकरा तो चाहिए था. क्या मेरी दुकान में यह लड़का काम कर लेगा?’’ प्रभु चाय वाले ने संजू को देखते हुए पूछा.

‘‘हां, क्यों नहीं. मजदूर का बेटा है, काम आसानी से कर लेगा,’’ बैजू ने उसे भरोसा दिलाया.

‘‘ठीक है, संजू को आज से ही

काम पर लग जाने दो,’’ प्रभु चाय वाले ने कहा.

कुछ सकुचाते हुए बैजू ने प्रभु चाय वाले से कहा, ‘‘500 रुपए एडवांस चाहिए थे. संजू की पगार से काट लेना.’’

प्रभु चाय वाले ने बैजू पर शक करते हुए बड़ी मुश्किल से 500 रुपए दिए.

बैजू रुपए ले कर चला गया.

जब संजू दोपहर में घर नहीं लौटा, तो मीना घबरा गई. वह स्कूल में संजू को खोजने गई. स्कूल में सुनील सर ने बताया कि आज संजू स्कूल नहीं आया है. तब मीना और ज्यादा घबरा गई.

घबराई मीना कालोनी के मोड़ से हो कर घर लौट रही थी. अचानक उस की नजर प्रभु चाय वाले की दुकान पर पड़ी, जहां संजू जूठे कपप्लेट धो रहा था. यह देख कर वह हैरान रह गई. वह फौरन तेज कदमों से दुकान में चली गई.

‘‘संजू बेटे, यह क्या कर रहे हो?’’ मीना ने पूछा.

‘‘अम्मां, बापू ने मुझे स्कूल न भेज कर इस दुकान में काम पर लगा दिया है,’’ संजू ने बताया.

‘‘हां, बैजू सुबह इसे दुकान में छोड़ कर गया है,’’ प्रभु चाय वाले ने कहा.

यह सुन कर मीना को बैजू पर बहुत गुस्सा आया, लेकिन वह संभल कर प्रभु चाय वाले से बोली, ‘‘संजू को घर जाने दीजिए.’’

‘‘यह कैसे हो सकता है. आज ही इस छोकरे का बाप 500 रुपए एडवांस में ले कर गया है,’’ प्रभु चाय वाले को गुस्सा आया.

‘‘संजू को जाने दीजिए. कल मैं आप के रुपए लौटा दूंगी,’’ मीना ने प्रभु चाय वाले से गुजारिश की.

‘‘ठीक है, छोकरे को ले जाओ, लेकिन कल मेरे रुपए मिल जाने चाहिए,’’ प्रभु चाय वाले ने मीना को धमकाते हुए कहा.

मीना संजू को दुकान से वापस ले कर चली आई थी. रात को बैजू दारू पी कर घर लौटा. उसे देखते ही मीना को काफी गुस्सा आया, लेकिन वह गुस्से को दबा गई.

मीना के चेहरे पर अब कोई उतारचढ़ाव नहीं था. उस ने मन ही मन एक फैसला ले लिया था, जिसे उस ने अपने सीने में छिपा कर रख लिया था.

मीना ने बैजू से शांत हो कर पूछा, ‘‘प्रभु चाय वाले से जो 500 रुपए लिए थे, उन का क्या किया?’’

‘‘उन रुपयों से दारू पी गया,’’ बैजू ने कहा.

‘‘बाप का फर्ज क्या होता है?’’ मीना ने पूछा.

‘‘मुझे नहीं मालूम,’’ बैजू ने कहा.

‘‘क्या एक मजदूर का बेटा पढ़ नहीं सकता है?’’ मीना ने पूछा.

‘‘मजदूर का बेटा पढ़ कर क्या बैरिस्टर बनेगा? उसे एक दिन मजदूरी ही करनी पड़ेगी,’’ बैजू ने कहा.

‘‘इसलिए तुम ने अपने बेटे संजू को स्कूल न भेज कर चाय की दुकान में जूठे कपप्लेट धोने के लिए काम पर लगा दिया,’’ मीना ने उसे नफरत से देखा. बैजू कुछ नहीं बोला. वह बिछावन पर जा कर निढाल हो कर सो गया.

2 दिन के बाद दीवाली थी. सुबह के 8 बज रहे थे. कुनकुनी धूप खिली हुई थी. बैजू मजदूरी करने चला गया था. इसी समय मीना बादल से मिलने उस की चिकन की दुकान पर चली गई.

मीना को देखते ही बादल धीरे से मुसकराया, ‘‘चिकन चाहिए क्या या अंडाब्रैड दे दूं?’’

‘‘नहीं, मुझे 500 रुपए चाहिए. प्रभु चाय वाले को लौटाने हैं,’’ मीना ने कहा.

‘‘500 रुपए, प्रभु चाय वाले को…’’ बादल सोचते हुए बड़बड़ाया.

‘‘हां बादल, बैजू ने प्रभु चाय वाले से एडवांस में 500 रुपए लिए थे. बदले में बेटे संजू को जूठे कपप्लेट धोने के लिए उस की दुकान में काम पर लगा दिया था. मैं संजू को दुकान से वापस ले आई. मैं उस के रुपए लौटा कर संजू को स्कूल भेजना चाहती हूं,’’ मीना ने कहा.

‘‘हां, क्यों नहीं. ये लो 500 रुपए, प्रभु चाय वाले को लौटा देना. वैसे, बैजू का रवैया बेटे के प्रति अच्छा नहीं है. संजू को स्कूल भेज कर पढ़ाना चाहिए था,’’ बादल ने कहा.

‘‘मैं ने फैसला कर लिया है कि अब बैजू के साथ नहीं रहूंगी, क्योंकि मेरी और संजू की जिंदगी उस के साथ रह कर बरबाद हो जाएगी. अब और सहना ठीक नहीं है,’’ मीना ने कहा.

‘‘तुम चाहो तो संजू को ले कर मेरे पास चली आओ. ऐसे आदमी के साथ रहना बिलकुल ठीक नहीं है,’’ बादल ने कहा.

‘‘हां बादल, मुझे एक सहारे की जरूरत है, जिस के साथ मैं चैन से रह सकूं. संजू अच्छे माहौल में रह कर पढ़लिख सके,’’ मीना ने कहा.

‘‘मैं भी अकेले रह कर ऊब चुका हूं. तुम संजू को ले कर आ जाओगी, तब हमारा एक परिवार हो जाएगा. हम साथ रह कर हंसीखुशी से जी सकेंगे,’’ बादल ने कहा.

‘‘आज शाम को संजू को ले कर मैं आ जाऊंगी. तुम मेरा इंतजार करना,’’ कह कर मीना चली गई.

मीना ने प्रभु चाय वाले को रुपए वापस कर दिए. शाम को मीना ने अपने कपड़े और संजू की किताबकौपियां सब एक बैग में रख लीं. बैजू के लौट आने से पहले वह संजू के साथ घर छोड़ कर बादल के घर चली गई. बादल मीना का बेसब्री से इंतजार कर रहा था.

‘‘आ जाओ मीना. आज से मेरे घर की मालकिन तुम हो,’’ बादल ने मीना का स्वागत गर्मजोशी से किया.

‘‘हां बादल, संजू को मिल कर खूब पढ़ानालिखाना है. आज से संजू तुम्हारा भी बेटा है,’’ मीना ने कहा.

बादल ने संजू को प्यार से गले लगा लिया, ‘‘संजू प्यारा बच्चा है. इसे मैं खूब सारा प्यार दूंगा. पढ़ालिखा कर काबिल बनाऊंगा. संजू अब हम दोनों का प्यार है,’’ बादल ने कहा. मीना खुशी से मुसकरा उठी.

बैजू जब रात में घर लौटा, तब मीना और संजू को न पा कर वह सन्न रह गया. उस ने अपने दिल को समझाया कि मीना यहींकहीं बाजार से कोई सामान लेने गई होगी. जब 2-3 घंटे बीत गए, फिर भी मीना घर नहीं लौटी. तब

बैजू घबरा गया. उस ने सब्जी मंडी, बाजारहाट सब जगह मीना को ढूंढ़ा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली. कहार कर बैजू घर लौट आया.

‘‘लगता है, मीना किसी यार के साथ भाग गई,’’ बैजू बड़बड़ाया.

कटोरे में थोड़ी सब्जी और 2-4 रोटियां रखी थीं, जिसे खा कर बैजू सो गया.

सुबह हुई. बैजू की रात बेचैनी में कटी थी. उस के चेहरे पर उदासी थी, मीना उस का घर छोड़ कर जो चली गई थी. वह बेबस था. वह कमरे में खामोश बैठा था.

तभी मेमसाहब ने पुकारा, ‘‘बैजू, मीना को भेज दो. जूठे बरतन धोने के लिए पड़े हैं.’’

बैजू भारी मन से कमरे से बाहर आया. कोठी के बरामदे में मेमसाहब मीना के इंतजार में खड़ी थीं.

‘‘मेमसाहब, मीना रात को ही किसी प्रेमी के साथ भाग गई है,’’ बैजू ने कहा.

‘‘मुझे रात में क्यों नहीं बताया? यह सब कैसे हुआ?’’ मेमसाहब ने थोड़ा हैरान हो कर पूछा.

‘‘मुझे नहीं मालूम, मेमसाहब. रात में काम पर से लौटा, तब मीना और संजू घर पर नहीं थे,’’ कहते हुए बैजू की आंखों में आंसू झिलमिला आए.

‘‘इतनी बड़ी बात हो गई. मैं नागेश साहब से बात करती हूं,’’ कह कर मेमसाहब चली गईं.

नागेश साहब कमरे में बैठे मोबाइल फोन पर किसी से बातें कर रहे थे. उन की बात जब खत्म हुई, तब मेमसाहब ने नागेश साहब से कहा, ‘‘मीना रात से ही घर से गायब हो गई है. पता नहीं, वह कहां चली गई.’’

‘‘बैजू से पूछा कि मीना कहां गई है?’’ नागेश साहब ने कहा.

‘‘हां, पूछा था. बैजू का कहना है कि मीना किसी प्रेमी के साथ भाग गई है,’’ मेमसाहब ने कहा.

‘‘बहुत बुरा हो गया. घर के जूठे बरतन अब कौन साफ करेगा. मीना तो हम लोगों को तकलीफ दे गई,’’ नागेश साहब के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थीं.

‘‘आप ने बैजू के बारे में क्या सोचा है?’’ मेमसाहब ने नागेश साहब से पूछा.

‘‘कुछ नहीं. अपने आउटहाउस से बैजू को निकाल दूंगा. जब मीना थी, तब वह हमारे घर का कामकाज करती थी. हम लोगों को कामवाली बाई की कभी जरूरत नहीं पड़ी. अब बैजू जैसे मजदूर को यहां रखना ठीक नहीं है,’’ नागेश साहब ने कहा.

‘‘ठीक है, मैं अभी बैजू को बुलाती हूं,’’ मेमसाहब ने कहा.

मेमसाहब ने कोठी के बरामदे से बैजू को पुकारा, ‘‘बैजू, तुम को साहब बुला रहे हैं.’’

बैजू मेमसाहब की आवाज सुन कर तुरंत कमरे से बाहर चला आया. वह नागेश साहब के सामने आ कर खड़ा हो गया, ‘‘आप ने बुलाया साहब?’’

‘‘बैजू, मेरा आउटहाउस खाली कर दो. तुम कहीं दूसरी जगह चले जाओ,’’ नागेश साहब ने गंभीर आवाज में कहा.

‘‘लेकिन साहब, मैं रहूंगा कहां…?’’ बैजू गिड़गिड़ाया.

‘‘बैजू, तुम कहीं भी जाओ. मुझे मेरा घर 1-2 दिन में खाली मिलना चाहिए,’’ नागेश साहब ने जोर दे कर कहा.

बैजू अब करता भी क्या. वह बहुत मजबूर था. वह 2 दिन बाद नागेश साहब की कोठी का आउटहाउस खाली कर के चला गया. नशे की लत ने उस की जिंदगी से परिवार और दीवाली की खुशियां छीन ली थीं.

लौट आई सुनीता : अपहरण की शिकार एक लड़की

कमिल बहुत देर तक उसे देखता रहा. अस्पताल के बिस्तर नंबर 8 पर पड़ी लड़की सुनीता ही थी. वह भूल भी कैसे सकता था उसे.

‘‘मैं कल पूरी तरह तैयार हो कर कोर्ट पहुंच जाऊंगी. आप भी जल्दी से आ जाना कमिल… इंतजार मत कराना. कुछ हो न जाए…’’ सुनीता ने थोड़ा उतावलेपन में कहा था.

जाने से पहले सुनीता अपने कमिल के सीने से लग गई थी. उस ने तो कोर्ट मैरिज के लिए पहले ही रजिस्ट्रेशन करा रखा था, जब सुनीता ने उस से बोला था, ‘‘कमिल, मैं तुम से जल्द से जल्द शादी करना चाहती हूं.’’

कमिल को इस जल्दी के बारे में तो पता नहीं था, पर इतना वह समझ गया था कि सुनीता अब उस की होने वाली है. रजिस्ट्रेशन के बाद उस ने सुनीता को बता दिया था कि कल कोर्ट में उन्हें शादी के लिए बुलाया गया है. यह सुन कर सुनीता खुश हो गई थी.

कमिल समय से पहले ही कोर्ट पहुंच गया था. उस ने नया कुरतापाजामा पहना था और सुनीता के लिए भी वह एक नई साड़ी लाया था. चमचमाते गुलाब की फूलमाला का पैकेट भी उस के हाथों में था.

सारी तैयारी कर के सुनीता का इंतजार करता रहा कमिल. वकील साहब ने भी बता दिया था कि जज साहब ने जो समय दिया है, उस समय तक दोनों को कोर्ट में दाखिल हो जाना होगा.

कमिल ने बड़े यकीन के साथ वकील साहब से कहा था, ‘‘जी जरूर. आप निश्चिंत रहें. मुझ से ज्यादा जल्दी तो उसे है. आप तैयारी पूरी रखें.’’

समय निकलता जा रहा था. कमिल की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. वह बारबार घड़ी देख रहा था.

वह कई बार घड़ी को हिला कर देख चुका था कि कहीं वह बंद तो नहीं हो गई, पर उस के कांटे तो बराबर खिसक रहे थे. वकील साहब भी परेशान थे. वे भी बारबार अपनी घड़ी देख रहे थे.

‘‘देखो भाई, कोर्ट का समय निकला जा रहा है. बाद में मजिस्ट्रेट साहब शादी नहीं कराएंगे. या तो वे इस अर्जी को खारिज कर देंगे या दूसरी तारीख देंगे, जो कम से कम एक महीने के बाद की होगी,’’ यह कहते हुए वकील साहब के चेहरे पर भी तनाव फैलता जा रहा था.

कोर्ट का समय निकले भी 2 घंटे से ज्यादा हो चुका था. कोर्ट बंद हो चुका था, पर कमिल बैठा अपनी सुनीता का इंतजार कर रहा था. उसे भरोसा था कि सुनीता जरूर आएगी, पर वह नहीं आई. रात का अंधेरा फैलने के बाद वह उदास कदमों से घर लौट आया था.

अब से कई साल पहले ट्रेन में सफर करने के दौरान कमिल की सुनीता से मुलाकात हुई थी. दोनों आमनेसामने की सीट पर बैठे थे.

‘‘क्या आप आलूबड़ा खाएंगी? यहां के आलूबड़े बहुत मशहूर हैं…’’ कहतेकहते कमिल ने एक आलूबड़ा सुनीता की ओर बढ़ा दिया था.

सुनीता ने हिकारत से कमिल को घूरा और बोली, ‘‘जी नहीं. मैं बाहर की चीज नहीं खाती,’’ और उस ने अपना चेहरा दूसरी ओर घुमा लिया था.

कमिल को भी अपनी गलती का अंदाजा हो चुका था. जब वे एकदूसरे को जानतेपहचानते ही नहीं हैं, तो उसे उस लड़की के सामने आलूबड़ा खाने का प्रस्ताव रखना ही नहीं चाहिए था.

‘सौरी’ कह कर कमिल चुपचाप आलूबड़ा खाने लगा. आलूबड़ा बहुत तीखा था. वह पूरा आलूबड़ा खाता, इस के पहले ही होंठों से ‘सी… सी…’ की आवाज निकलनी शुरू हो गई थी. उसे पानी की सख्त जरूरत थी, जो उस के पास नहीं था.

सुनीता के पास पानी की बोतल नजर आ रही थी, पर कमिल की हिम्मत नहीं हो रही थी उस से मांगने की. वह पानी को यहांवहां तलाशता रहा. सुनीता ने शायद उस की ‘सी… सी…’ की आवाज सुन ली थी.

‘‘यह लीजिए… पानी पी लीजिए… इसी वजह से मैं बाहर की चीज नहीं खाती,’’ कहते हुए सुनीता ने पानी की बोतल कमिल की ओर बढ़ा दी.

पहले तो कमिल का मन हुआ कि वह भी कह दे कि मैं किसी अजनबी के हाथ का पानी नहीं पीता, पर इस समय उसे पानी की बहुत जरूरत थी, सो उस के हाथ से पानी की बोतल ले कर वह गटागट पी गया.

‘‘थैंक्स. आज तो मेरे प्राण ही निकल जाते,’’ कमिल ने कहा.

सुनीता मुसकरा दी थी. स्टेशन आने पर दोनों साथसाथ ही प्लेटफार्म पर उतरे थे.

‘‘अच्छा… आप भी यहीं रहती हैं या पहली बार आना हुआ है?’’ कमिल ने सुनीता से पूछा.

‘‘जी, मैं यहीं रहती हूं,’’ सुनीता ने छोटा सा जवाब दिया था.

‘‘वाह… अब अगर मैं पूछ लूंगा कि आप यहां कहां रहती हैं, तो आप को बुरा लगेगा,’’ यह कहते हुए कमिल के चेहरे पर सवालिया निशान उभर आया था.

‘‘जगदीश वार्ड में… वह पुरानी गल्ला मंडी है न, उस के पीछे है,’’ सुनीता बोली.

‘‘अच्छा, वह जगह तो मैं जानता हूं. मैं भी इसी शहर का रहने वाला हूं. सारी उम्र यहीं गुजर गई है.’’

‘‘ओह… वैसे, आप की उम्र 100 के आसपास होगी…’’ सुनीता ने कमिल को छेड़ा था. फिर वे दोनों अपनेअपने घर चले गए थे.

कमिल और सुनीता की बहुत दिन बाद शादी की एक रिसैप्शन में दोबारा मुलाकात हुई थी. वैसे तो कमिल का इरादा सुनीता को घूरने का बिलकुल भी नहीं था, पर वह इतनी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी कि वह अपनी पलकें तक भी नहीं झपका पा रहा था.

सुनीता गोरे रंग की पतली लड़की थी. लेकिन इस के बावजूद उस की देह में गजब की कसावट थी. सांचे में ढला बदन किसी को भी अपना दीवाना बना सकता था.

रिसैप्शन में सुनीता ने पीले रंग का सलवारसूट पहना था. चेहरे पर लाल रंगत थे. उस ने खुले बालों में पीले रंग का बड़ा क्लिप लगा रखा था.

‘‘ओ जनाब, लड़कियों को ऐसे नहीं घूरते,’’ कह कर सुनीता हंस पड़ी. उस की हंसी गूंज गई थी सारे वातावरण में. कुछ चेहरे घूम गए उन दोनों की ओर. कमिल झोंप सा गया.

‘सौरी’ कहते हुए कमिल ने न चाहते हुए भी अपनी नजरें हटा लीं.

‘‘वैसे, अगर आप का कोई नाम हो बता ही दें, क्योंकि आप मुझे यों ही बारबार मिलते रहेंगे, तो मुझे भी तो आप के बारे में पता होना चाहिए न.’’

‘‘जी, कमिल शर्मा,’’ अब कमिल सुनीता की ओर नजर भी नहीं डाल पा रहा था. इस वजह से वह दूसरी ओर देखते हुए बोला.

‘‘मुझे सुनीता कहते हैं. मेरी पढ़ाई पूरी हो चुकी है. नौकरी की तलाश कर रही हूं… वैसे, आप ने खाना खाया?’’

‘‘नहीं. मैं ऐसे कार्यक्रमों में खाना नहीं खाता.’’

‘‘तभी तो इतनी हैंडसम पर्सनैलिटी हैं,’’ कहते हुए सुनीता ने कमिल को ऊपर से नीचे तक देखा.

‘‘अच्छा, चलती हूं. फिर मिलूंगी कमिल…’’ कहते हुए सुनीता के चेहरे पर मुसकान बिखरी नजर आ रही थी.

एक दिन सुनीता अपनी मां के साथ बाजार में कमिल से मिली. उस ने कमिल का परिचय अपनी मां से कराया.

बातोंबातों में सुनीता ने कहा, ‘‘10 तारीख को मुझे भोपाल जाना है… एक  इंटरव्यू है…’’

‘‘अच्छा… बधाई…’’

‘‘अगर ज्यादा बिजी न हो तो चलो तुम भी… शाम को लौट आएंगे…’’ सुनीता ने कहा.

कमिल को अच्छा लगा था. इस बहाने सुनीता से और मेलजोल बढ़ जाएगा और अकेली लड़की को सहारा मिल जाएगा. कमिल ने हामी भर दी.

भोपाल से लौटने के बाद सुनीता और कमिल काफी नजदीक आ चुके थे. आनेजाने के समय बहुत सारी बातें हुईं, एकदूसरे की पसंद को समझ और पहचाना.

लेकिन पिछले कुछ दिनों से सुनीता कुछ अनमनी सी लग रही थी. एक दिन उस ने बोला था, ‘‘कमिल, मैं तुम से शादी करना चाहती हूं… बहुत जल्दी…’’ उस के चेहरे पर तनाव दिखाई दे रहा था.

‘‘देखो, ऐसे फैसले जल्दी में नहीं लिए जाते…’’

‘‘वह मैं नहीं जानती. कमिल, हम जल्दी ही शादी करेंगे. मंदिर में… नहीं… कोर्ट में… तुम अर्जी दे दो, मैं दस्तखत कर देती हूं… तुम न मत कहना प्लीज…’’

कमिल हालात की गंभीरता को जानते हुए भी सहमत हो गया था और उस ने कोर्ट में अर्जी दे दी थी. कोर्ट ने आज की ही तारीख दी थी, पर सुनीता आई ही नहीं.

सुनीता से अचानक बिछड़ने के बाद कमिल का सैलेक्शन सबइंस्पैक्टर के पद पर हो गया था. ट्रेनिंग के बाद वह दूसरे शहर में चला गया था.

उस दिन की घटना से कमिल बहुत मुश्किलों के बाद उबर पाया था. एक ही बात उस के दिमाग में बारबार घूम जाती थी कि सुनीता आखिर आई क्यों नहीं? उस ने खुद ही शादी के लिए जिद की थी, तो उस ने धोखा क्यों दिया? नहीं आ पा रही थी, तो खबर भी दे सकती थी… इस तरह की बातें सोचतेसोचते कमिल की नाराजगी हद से ज्यादा बढ़ जाती थी.

आज सुबह ही कमिल को सूचना मिली थी कि एक लड़की बेहोशी की हालत में रेलवे प्लेटफार्म से कुछ ही दूरी पर पड़ी हुई है. वह दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचा था. सुनीता को पहचानने में उसे जरा भी मुश्किल नहीं हुई थी.

कमिल ने जल्दीजल्दी कागजी खानापूरी कर के सुनीता को अस्पताल में भरती करा दिया था. वह खुद उस की देखभाल कर रहा था.

जब सुनीता को होश आया, तो उस ने अपने सामने कमिल को खड़ा पाया. वह चौंक गई. उस की आंखों में आंसू आ गए थे. कमिल ने उस का हाथ अपने हाथों में ले लिया था.

‘‘अपनेआप को संभालो सुनीता…’’

पर सुनीता रोती रही. जब वह सामान्य हुई, तो उस ने अपनी आपबीती बतानी शुरू कर दी. यह सच है कि सुनीता को नौकरी के लिए इतनी जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं थी, पर जोशजोश में वह एक कंपनी की सेल्सगर्ल बन गई थी. वह सामान की डिलीवरी करती थी, बदले में उसे मोटी तनख्वाह दिए जाने की बात की गई थी. डिलीवरी किस चीज की हो रही है, यह सुनीता ने जानने की कोशिश की, पर उसे नहीं बताया गया.

पर एक दिन सुनीता जान ही गई थी कि वह नशीली दवाओं की डिलीवरी करने के लिए रखी गई है. जब उसे हकीकत का पता चला तो उस ने काम करने से साफ इनकार कर दिया, इस के बाद ही उसे धमकियां मिलने लगी थीं.

सुनीता ने शादी के लिए जो जल्दबाजी दिखाई थी, उस के पीछे भी यही वजह थी. उस दिन वह कोर्ट के लिए समय से पहले ही निकल गई थी. पर कोर्ट पहुंचने से पहले ही उस का अपहरण कर लिया गया था.

चूंकि सुनीता ने घर में एक खत छोड़ दिया था कि वह अपनी मरजी से शादी कर रही है, उसे खोजने की कोशिश न करें, इस नाराजगी में घर के लोगों ने भी उसे खोजने की कोशिश नहीं की.

सुनीता के साथ बहुत जुल्म किए गए थे. कई जगहों पर बंदी बना कर रखा गया था और अब अपहरण करने वाले उसे इस शहर में ले आए थे. पर जब कमिल ने अपने इलाके के अपराधियों पर अंकुश लगाना शुरू किया, तो वे लोग डर के मारे सुनीता को बेहोशी की हालत में छोड़ कर भाग गए.

सुनीता की मदद से कमिल को आरोपियों को खोजने में ज्यादा परेशानी भी नहीं हुई थी. अस्पताल से वह सुनीता को अपने घर ले कर आ गया था.

‘‘आप ने अभी तक शादी नहीं की है शायद…’’ सुनीता ने सवालिया निगाहों से कमिल की ओर देखा.

‘‘उस दिन जब तुम कोर्ट में नहीं आई, तभी मैं ने तय कर लिया था कि अब मैं कभी शादी नहीं करूंगा…’’ कमिल ने बताया. सुनीता खामोश रही.

‘‘मुझ अब समझ आ गया कि तुम ने मुझे धोखा नहीं दिया था.’’

सुनीता ने केवल नजरें उठा कर कमिल की ओर देखा.

‘‘क्या तुम मुझ से शादी करोगी… उस दिन वाले वादे के मुताबिक?’’ कमिल ने पूछा.

सुनीता के चेहरे पर मुसकान खिल गई और वह कमिल के गले से लग गई.

सावधान! औरत तांत्रिकों का बढ़ता नैटवर्क

भूतप्रेत, टोनाटोटका व पेट से न होने के नाम पर झाड़फूंक की दुकान चलाने वाले ठग तांत्रिकों के निशाने पर ज्यादातर औरतें ही रही हैं, क्योंकि उन को तमाम ऐसी अंदरूनी व दिमागी बीमारियां होती हैं, जिन को ठग तांत्रिक ऊपरी साया बता कर आसानी से बेवकूफ बना देते हैं.

इन पाखंडी तांत्रिकों के जाल में फंस कर औरतें न केवल खुद की सेहत के साथ खिलवाड़ करती हैं, बल्कि अपना पैसा, समय और इज्जत भी गंवा बैठती हैं. कभीकभी ऐसी औरतों के साथ हमबिस्तरी का वीडियो बना कर शातिर तांत्रिक उन्हें ब्लैकमेल भी करते हैं.

झाड़फूंक के नाम पर बाबाओं के पास जाने वाली औरतों में ज्यादातर दलित व पिछड़े तबके की औरतें होती हैं, जिन के मन में बचपन से ही यह भर दिया जाता है कि इन की हर समस्या की वजह ऊपरी साया व टोनाटोटका ही है. ऐसे में ढोंगी तांत्रिकों द्वारा खास तरह की पूजा का ढोंग किया जाता है. इस दौरान ये बाबा औरतों की इज्जत लूटने में कोई गुरेज नहीं करते हैं.

ढोंगी बाबाओं द्वारा इज्जत के साथ खिलवाड़ किए जाने के मामलों में औरतें इसलिए विरोध नहीं कर पाती हैं, क्योंकि उन्हें यह भरोसा होता है कि हो सकता है कि बाबा के साथ हमबिस्तरी से ही उन की गोद भर जाए.

किसीकिसी मामले में लोकलाज के डर से भी औरतें अपने साथ हुई ज्यादती की बात छिपा जाती हैं, लेकिन झाड़फूंक के नाम पर कई औरतों के साथ सैक्स करने की वजह से इन बाबाओं को भी इन्फैक्शन व एड्स जैसी बीमारियां लग जाती हैं, जो औरतों में भी आ जाती हैं.

चूंकि अब झाड़फूंक के नाम पर पाखंडी तांत्रिकों द्वारा औरतों के साथ हमबिस्तरी के कई मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में मर्द अपने घर की औरतों को उन के पास ले जाने में कतराने लगे हैं.

औरतों की तादाद में आई कमी को देखते हुए बाबा भी अपने इस धंधे को चलाने के लिए दूसरा जरीया ढूंढ़ने लगे हैं. वे औरतों को विश्वास में लेने के लिए अपने घर की औरतों या चेलियों को आगे कर उन्हें बड़ा तांत्रिक साबित कर रहे हैं, ताकि धंधा चलता रहे.

औरत तांत्रिकों की तादाद व उन की कमाई में इजाफे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के नामीगिरामी टैलीविजन चैनलों, अखबारों व पत्रपत्रिकाओं में महंगेमहंगे इश्तिहार छपवा कर बड़ी से बड़ी समस्याओं के समाधान का दावा किया जा रहा है.

आसानी से झांसे में

 औरत तांत्रिकों द्वारा पीडि़त औरतों को आसानी से झांसे में ले लिया जाता है, क्योंकि ये तांत्रिक उन से जुड़ी अंदरूनी व घरेलू समस्याओं को आसानी से समझती हैं. यहां तक कि हमबिस्तरी की बातों को भी उगलवाने में वे कामयाब होती हैं. इस के बाद झाड़फूंक के नाम पर पीडि़त औरतों का जिस्मानी, माली व दिमागी शोषण शुरू हो जाता है.

मर्द तांत्रिकों की चाल

झाड़फूंक के नाम पर ठगी की दुकान चलाने वाली औरत तांत्रिकों के पीछे शातिर किस्म के मर्दों का हाथ होता है. ऐसे में जब कोई पीडि़त औरत पेट से न होने की समस्या ले कर इन तांत्रिकों के पास पहुंचती है, तो ये उन के ऊपर दुष्ट आत्मा का साया बता कर उसे नष्ट करने के लिए विशेष पूजा, अनुष्ठान वगैरह कराने की सलाह देती हैं.

अंधविश्वास में जकड़ी औरतें बच्चा पाने की चाह में इन तांत्रिकों पर आसानी से आंखें मूंद कर विश्वास कर लेती हैं और फिर तय समय पर ये तांत्रिक अकेले में अनुष्ठान के नाम पर उन्हें बुलाते हैं.

पेट से होने के लालच में औरत के परिवार वाले भी उसे पूजा के नाम पर अकेला छोड़ देते हैं. इस की वजह यह भी होती है कि झाड़फूंक करने वाली एक औरत होती है, जिस से इज्जत लुटने का खतरा नहीं हो सकता, लेकिन ये औरत तांत्रिक ऐसे अनुष्ठान उन कमरों में करती हैं, जहां घुप अंधेरा होता है.

झाड़फूंक के दौरान पीडि़ता को नशीली दवा मिला कर प्रसाद दे दिया जाता है, जिस से वह अपनी सुधबुध खो बैठती है. इस के बाद हवस के भूखे औरत तांत्रिक के गुरु व परिवार के मर्द उस की इज्जत लूट लेते हैं.

अगर इज्जत लूटने वाले के वीर्य में बच्चा पैदा करने की कूवत होती है, तो वह पीडि़ता पेट से हो जाती है. चूंकि झाड़फूंक के दौरान वह अपने होश में नहीं होती है, ऐसे में उसे यह नहीं पता चल पाता कि उस के पेट से होने का राज क्या है और वह तांत्रिक की चमत्कारी शक्तियों का असर मान कर उस की मुरीद बन बैठती है.

कभी कभार अगर बाबाओं द्वारा इज्जत से खिलवाड़ के मामले में पीडि़ता होश में आ भी जाती है, तो वह इस वजह से खुल कर विरोध नहीं कर पाती कि हो सकता है कि उसे बाबा की वजह से ही बच्चे का सुख मिल जाए और उसे बांझपन के ताने से नजात मिल जाए.

इश्तिहारों पर बेहिसाब खर्च

 झाड़फूंक से होने वाली मोटी कमाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि औरत तांत्रिकों के बड़ेबड़े इश्तिहार टैलीविजन चैनलों, अखबारों व पत्रपत्रिकाओं में दिखाए व छापे जाते हैं, जिस के लिए औरत तांत्रिकों द्वारा भारीभरकम रकम का भुगतान किया जाता है, जो झाड़फूंक के दौरान कई गुना के रूप में वापस आ जाती है.

देश की नामीगिरामी पत्रिका में छपे एक औरत तांत्रिक के इश्तिहार का मजमून इस तरह था: ‘फ्री… फ्री… फ्री…’ समस्या कैसी भी हो, जड़ से खत्म. 5 घंटे में समस्या का समाधान. सौ फीसदी गारंटी.  गुरु मां गायत्री देवी घर बैठे गारंटी समाधान.

एक औरत ही औरत का दुख समझती है. कृपया दुखी माताएं व बहनें ही फोन करें. धोखा नहीं पक्का वादा. मैं कहती नहीं कर के दिखाती हूं केवल एक फोन ही आप के जीवन की दिशा व दशा बदल सकता है, ब्लैक मैजिक व ब्लैकमेलिंग से परेशान अवश्य फोन करें.

लव मैरिज, कारोबार, विदेश में रिश्ता करवाना, सौतन दुश्मन से छुटकारा, जिस को चाहोगे तुरंत वश में कर के दूंगी, काम नहीं होने पर पैसा वापस.

नोट: आप का पति, प्रेमी, बेटा किसी के वश में हो, प्यार में धोखा, निराश प्रेमीप्रेमिका, एक बार अवश्य फोन करें, लाटरी, सट्टा नंबर हासिल करें. स्थायी पता चंडीगढ़ मोबाइल नंबर 0988895×××.

दुख की बात है कि इस तरह के इश्तिहारों में लोग फंस कर लुटने को तैयार बैठे होते हैं.

सभी बनते हैं शिकार

इन औरत तांत्रिकों के पास पढ़ेलिखे व अनपढ़ लोग समान रूप से ठगी का शिकार बनते हैं. क्योंकि इन के मन में बचपन से ही भूतप्रेत व ऊपरी साए के प्रति इस तरह का डर बिठा दिया जाता है, जिसे वे मन से नहीं निकाल पाते हैं.

इस तरह का एक उदाहरण गोंडा व बस्ती जिले की सीमा से लगने वाले मेहदिया ढडौवा गांव में देखने को मिला, जहां दिल्ली से 8 सौ किलोमीटर की दूरी तय कर बीएड पास एक औरत ‘बड़की माई’ नाम से विख्यात किस्मती देवी नाम की अनपढ़ औरत तांत्रिक के पास झाड़फूंक कराने आई थी.

इस औरत की समस्या यह थी कि इसे शादी के 6 साल बाद भी बच्चे नहीं पैदा हो रहे थे. अंधविश्वास की शिकार इस औरत को विश्वास था कि यहां आने से उस की यह मुराद पूरी होगी.

यहां हर सोमवार व शुक्रवार को झाड़फूंक कराने के लिए ऐसे तमाम लोग आते हैं, जो पढ़ेलिखे होते हैं, लेकिन अपनी आंखों पर चढ़े अंधविश्वास के चश्मे के चलते ठगी का शिकार होते हैं.

यहां एक दिन में तकरीबन 50 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठा होती है. ऐसे में अगर हर पीडि़ता से 10 रुपए की औसत कमाई को देखा जाए, तो भी यह हफ्ते के 2 दिनों को मिला कर 10 लाख रुपए आसानी से इकट्ठा कर लेती है.

इसी तरह की झाड़फूंक की दुकान चलाने वाली बडगो गांव की पिछड़े तबके की एक अनपढ़ औरत काली माई के नाम पर झाड़फूंक का धंधा चलाती है, जहां रोजाना हजारों की तादाद में लोग बेवकूफ बनने चले आते हैं.

महज कोरी कल्पना

बस्ती जिला चिकित्सालय में डाक्टर वीके वर्मा का कहना है कि भूतपे्रत, तंत्रमंत्र व ऊपरी साया महज कोरी कल्पना है. इस की वजह न तो कभी थी और न है, बल्कि सदियों से पोंगापंथ की दुकान चलाने वाले लोगों ने जनता के मन में इस तरह का वहम बिठा कर उन्हें लूटने का जरीया बनाया है.

डाक्टर वीके वर्मा के मुताबिक, बचपन में भूतप्रेतों की कहानियां, डरावनी फिल्में देखसुन कर लोग मन में यह वहम पाल बैठते हैं कि हमारे आसपास भी बुरी आत्माएं मौजूद होती हैं, जिन की जद में हम कभी न कभी आ ही जाते हैं, लेकिन यह मन का वहम  होता है, क्योंकि बुरी आत्माओं व तंत्रमंत्र का वजूद है ही नहीं.

कैटाटोनिया व साइकोसिस जैसी बीमारियों के चलते औरतें अजीबोगरीब हरकतें करना शुरू कर देती हैं, जिसे घर के लोग आत्माओं का साया मान बैठते हैं. वहीं गर्भाशय में गांठ होना, प्रजनन अंगों में संक्रमण वगैरह के चलते पेट से न होने की समस्या जन्म लेती है, जिसे पाखंडी तांत्रिक भूतप्रेत का साया साबित कर देते हैं.

वकील कृष्ण कुमार उपाध्याय का कहना है कि झाड़फूंक करने वाला चाहे औरत हो या मर्द दोनों ही जुर्म में बराबर के भागीदार होते हैं. ऐसे में लोगों को भूतप्रेत व झाड़फूंक के नाम पर उन का शोषण करना और कभीकभी समस्या के समाधान के लिए तांत्रिकों द्वारा नरबलि के लिए उकसावा देना अपराध की श्रेणी में आता है.

 

खाकी वरदी वाले डकैत

ट्रेडिंग व्यापारी अंकित अग्रहरि लखनऊ की ओमेक्स रेजीडेंसी स्थित अपने फ्लैट नंबर 104 में बैठे चाय पी रहे थे. उन के साथ उन के सहयोगी सचिन कटारे, अश्वनि पांडेय, कुलदीप यादव, अभिषेक वर्मा, जितेंद्र तोमर, अभिषेक सिंह व शुभम गुप्ता भी थे. चाय के साथसाथ इन लोगों के बीच अपने बिजनैस के संबंध में बातचीत हो रही थी.

दरवाजे पर दस्तक हुई तो अंकित ने पूछा कौन? इस पर अपार्टमेंट के चौकीदार योगेश ने कहा, ‘‘साहब मैं चौकीदार हूं.’’

अंकित ने यह सोच कर दरवाजा खोल दिया कि चौकीदार किसी काम से आया होगा. दरवाजा खुलते ही 7 लोग चौकीदार को पीछे धकेलते हुए धड़ाधड़ फ्लैट में घुस आए. इन में से 2 लोग पुलिस की वरदी में थे. फ्लैट के अंदर आते ही उन लोगों ने अंकित व उन के साथियों पर पिस्तौल तान कर गोली मारने की धमकी देते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे यहां ब्लैकमनी रखी है.’’

अंकित अग्रहरि ने इनकार किया तो वे लोग धमकाते हुए मारपीट पर उतारू हो गए. फिर उन लोगों ने खुद ही कमरे के डबलबैड और दीवान से बिस्तर हटा कर नीचे डाल दिए और बैड बौक्स व दीवान में रखे रुपए निकाल कर साथ लाए थैले और बैग में भरने लगे. अंकित और उस के साथियों ने रोकने की कोशिश की तो उन्होंने सभी की लातघूसों से जम कर पिटाई कर दी. इस से घबरा कर सारे लोग डर कर चुपचाप खड़े हो गए.

अंकित और उस के साथी समझ गए थे कि पुलिस वरदी में आए लोग बदमाश हैं और लूटपाट के इरादे से चौकीदार को मोहरा बना कर फ्लैट में घुसे हैं. इस काररवाई के दौरान उन्होंने किसी को भी मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करने दिया.

वरदी वालों के साथ आया एक व्यक्ति, जिसे वे लोग मधुकर के नाम से बुला रहे थे,रुपए से भरा थैला व बैग ले कर फ्लैट से निकल गया. इस के बाद खुद को दरोगा बताने वाले आशीष ने अहिमामऊ चौकी प्रभारी प्रेमशंकर पांडेय को फ्लैट में पिस्टल व 4 कारतूस मिलने की जानकारी दे कर वहां आने को कहा. लेकिन चौकीप्रभारी ने आरोपियों को थाने ले जाने को कहा.

यह सुन कर अंकित और उन के साथियों की जान में जान आई. वे लोग समझ गए कि उन के यहां रेड के नाम पर पुलिस ने डकैती डाली है. दरोगा पवन और आशीष सभी को बाकी रकम, पिस्टल व 4 कारतूसों के साथ थाने ले आए.

बिजनैसमैन अंकित व उस के सहयोगियों को पुलिस द्वारा पकड़ कर ले जाने की जानकारी मिलते ही ओमेक्स अपार्टमेंट में हड़कंप सा मच गया. जितने मुंह उतनी बातें. लोग कह रहे थे,‘‘अंकित छुपा रूस्तम निकला. वह व्यापार की आड़ में हथियारों की तस्करी करता था. उस के फ्लैट पर कुछ लोग हथियार लेने आए थे. सूचना मिलने पर पुलिस ने रेड डाल कर ब्लैकमनी, हथियार और हथियार खरीदने आए लोगों को पकड़ लिया.’’

बाद में पता चला कि छापा मारने वाली पुलिस टीम में लखनऊ के थाना गोसाईगंज के सब-इंस्पेक्टर पवन मिश्रा, सबइंस्पेक्टर आशीष तिवारी, मुखबिर मधुकर मिश्रा, सिपाही प्रदीप भदौरिया, ड्राइवर आनंद यादव  के अलावा 2 अन्य लोग शामिल थे. ये लोग 2 गाडिय़ां ले कर आए थे.

बिजनैसमैन अंकित अग्रहरि मूलरूप से धनपतगंज,सुल्तानपुर का रहने वाला है. उस का कोयला और मौरंग का बिजनैस है. लखनऊ में वह अपने सहयोगी के पास रह कर कारोबार करता है. लखनऊ की ओमेक्स रेजीडेंसी में उस ने किराए का फ्लैट ले रखा था. घटना के समय उस के फ्लैट में 3.38 करोड़ रुपए रखे थे. अंकित को यह रकम बांदा में अपनी खदान पर पहुंचानी थी.

पुलिसकर्मियों ने इस मामले में डकैती के साथ-साथ गुडवर्क दिखाने की भी साजिश की. उन्होंने मुखबिर मधुकर मिश्रा को लूटे गए एक करोड़ 85 लाख रुपयों सहित पहले ही भगा दिया था. जबकि लूट के बाद बाकी बची रकम एक करोड़ 53 लाख के साथ कारोबारी अंकित व उस के साथियों को पुलिस वाले थाना गोसाईगंज ले गए. वहां पकड़े गए लोगों और कालेधन पर काररवाई को ले कर विचारविमर्श होता रहा.

लुटेरे पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया पर फ्लैट से 1.53 करोड़ रुपए का काला धन मिलने और पिस्टल सहित कारोबारियों के पकड़े जाने का मैसेज वायरल कर वाहवाही लूटने की कोशिश की. दोनों दरोगा पवन व आशीष अपनी करतूत में सफल हो चुके थे, लेकिन उन का झूठ ज्यादा देर नहीं टिक सका. मैसेज वायरल होने से खाकी वरदी अपने ही जाल में फंस गई.

ऐसी खुली पोल….

सूचना पा कर सीओ मोहनलालगंज राजकुमार शुक्ला भी थाना गोसाईगंज पहुंच गए. उन की व थानाप्रभारी गोसाईगंज अजय प्रकाश त्रिपाठी की मौजूदगी में रकम गिनी गई. पूरी रकम 500 और 2000 के नोटों की शक्ल में थी. बड़ी रकम देख कर उन्होंने आयकर विभाग के अफसरों को सूचना दे दी.

आयकर अधिकारी थाने पहुंचे तो अंकित ने बताया कि उन के फ्लैट में 3.38 करोड़ रुपए रखे थे, यह रकम उन्हें बांदा में अपनी खदान पर पहुंचानी थी. अंकित ने बताया,‘‘पुलिस ने रेड के दौरान एक करोड़ 85 लाख रुपए निकाल लिए थे, जिन्हें ले कर उन के साथी पहले ही वहां से चले गए.’’

फ्लैट में मौजूद अंकित के सहयोगियों में से एक व्यक्ति कैबिनेट मंत्री का करीबी था. उस व्यक्ति को थाने लाने व रुपए बरामद होने की जानकारी मिलते ही मंत्री ने पुलिस अधिकारियों को फोन किया. करीब 2 घंटे से थाने में पूछताछ कर रही पुलिस मंत्री का फोन आते ही सकते में आ गई.

दूसरी ओर आयकर अफसरों ने तत्काल बरामद रकम कब्जे में ले ली और कारोबारियों से पूछताछ में जुट गए. कालेधन का कोई साक्ष्य न मिलने से पुलिस का खेल बिगड़ गया. कारोबारी अंकित द्वारा सच्चाई बताने से पुलिस वालों द्वारा अंकित के फ्लैट में घुस कर 1.85 करोड़ रुपए लूटने के मामले में पुलिस की गरदन फंस गई.

मंत्री ने एसएसपी कलानिधि नैथानी को फोन पर नाराजगी जताई. एसएसपी को पूरी घटना का पता चला तो उन्होंने एसपी (ग्रामीण) विक्रांतवीर और सीओ (मोहनलालगंज) राजकुमार शुक्ला को जांच के लिए मौके पर भेजा. जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिसकर्मियों की साजिश की पोल खुल गई.

एसएसपी कलानिधि नैथानी के अनुसार,फ्लैट में करोड़ों रुपए बरामद होने की सूचना पर जब उन्हें घटना के समय एसआई पवन मिश्रा के वहां होने की बात पता चली तो वह चौंके. पवन मिश्रा लंबे समय से गोसाईगंज थाने से गैरहाजिर चल रहा था. उस ने अपनी आमद पुलिस लाइन में कराई थी. उस का वहां होना चौंकाने वाली बात थी. उन्हें तभी लग गया था कि कुछ गड़बड़ी है.

एसपी (ग्रामीण) विक्रांतवीर ने जांच के दौरान 9 मार्च की सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी. सीसीटीवी की फुटेज ने सारे राज खोल दिए. आरोपियों ने 10 मिनट में ही 2 बैगों में 1.85 करोड़ रुपए भर लिए थे. मुखबिर मधुकर अपार्टमेंट के नीचे गाड़ी लिए खड़ा था. फुटेज में दरोगा पवन मिश्रा उस की गाड़ी में रुपए रखवाते दिखाई दे रहा था. रुपए ले कर मधुकर वहां से चला गया था.

इस बारे में जब दरोगा पवन मिश्रा से पूछा गया कि बैग बाहर भेजने के बाद सूचना क्यों दी, पहले क्यों नहीं? तो वह कोई जवाब नहीं दे सका. उस के चेहरे का रंग उड़ गया और वह बगलें झांकने लगा.

आरोपी सिपाही प्रदीप फ्लैट में सरकारी एके47 राइफल ले कर दाखिल हुआ था, जिस से वह अंदर मौजूद लोगों पर दबाव बना सके. पुलिस ने उस से ले कर सरकारी असलहा जब्त कर लिया. एसपी (देहात) विक्रांतवीर के अनुसार,सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 2 अन्य आरोपियों की पहचान राधाकृष्ण उपाध्याय और यशराज तिवारी के रूप में हुई.

बंदूक के दम पर हुई यह वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी. अंकित अग्रहरि की तहरीर पर गोसाईगंज थाने में इसी थाने में तैनात एसआई पवन मिश्रा, एसआई आशीष तिवारी,मुखबिर मधुकर मिश्रा व 4 अन्य के खिलाफ बंधक बना कर डकैती व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया.

एसएसपी ने दोनों दरोगाओं को निलंबित कर पूछताछ की. इस के साथ ही पुलिस फ्लैट से रुपयों का बैग ले कर निकले मुखबिर मधुकर और उस के अज्ञात सहयोगियों की सरगर्मी से तलाश में जुट गई.

फ्लैट से मिले कुल 1.53 करोड़ रुपए बक्से में रखवा कर सील करने के बाद आयकर विभाग को सौंप दिए गए. सीओ के मुताबिक नोटों की गड्डियां बैड व दीवान में छिपा कर रखी गई थीं. इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से आई,इस की जांच रेवेन्यू व इनकम टैक्स अधिकारी कर रहे हैं.

लूटपाट की पुष्टि होने के बाद एसएसपी के आदेश पर गोसाईगंज पुलिस ने एसआई पवन मिश्रा, आशीष तिवारी, सिपाही प्रदीप भदौरिया व ड्राइवर आनंद यादव को गिरफ्तार कर लिया.

एसपी (ग्रामीण) के निर्देश पर पवन व आशीष के घर पर पुलिस टीम भेजी गई. दोनों के यहां से करीब 36 लाख रुपए बरामद हुए. हालांकि इस बारे में पुलिस कुछ बोलने को तैयार नहीं थी.

अलबत्ता एसएसपी ने प्रैसवार्ता में बताया,‘‘आनंद के पास से 40 हजार व प्रदीप के घर से 2 लाख रुपए के साथ पुलिस ने घटना में इस्तेमाल इनोवा और एक अन्य कार बरामद कर ली. आनंद प्रदीप का निजी चालक है. पुलिस द्वारा लूटे गए शेष रुपए कहां गए, पता अभी तक नहीं लग सका है.’’

पुलिस की जांचपड़ताल के दौरान यह बात सामने आई कि मुखबिर मधुकर मिश्रा ने दोनों दरोगाओं पवन व आशीष को बताया था कि अंकित अग्रहरि के फ्लैट में करोड़ों रुपए की ब्लैकमनी और असलहों की खेप रखी है. इसी को आधार बना कर दोनों दरोगा, सिपाही, मुखबिर और अन्य साथियों के साथ अंकित के फ्लैट पर पहुंचे थे.

मुखबिर मधुकर गोसाईगंज थाने गया था, जहां उस ने दोनों दरोगाओं के साथ मिल कर योजना बनाई थी. थाने में ही उन्होंने यह तय किया था कि कितना रुपया दिखाया जाएगा और कितना हड़पना है. थाने में बनी योजना के बावजूद थानाप्रभारी अजय त्रिपाठी सहित अन्य पुलिस वालों को इस योजना की भनक तक नहीं लगी थी.

बिजनैसमैन अंकित के फ्लैट से .32 बोर की पिस्टल व 4 कारतूस बरामद हुए थे. ये पिस्टल किस की है, इस की जांच की जा रही है. कहीं ये पिस्टल लूटने आए दरोगा की तो नहीं है, इस संबंध में भी पुलिस जांचपड़ताल कर रही है. पिस्टल व कारतूस सील कर के मालखाने में जमा करा दिए गए.

दरोगा पवन मिश्रा और आशीष तिवारी घूसखोरी के लिए थे बदनाम…………. 

दरोगा पवन मिश्रा व आशीष तिवारी के खिलाफ घूसखोरी की पहले भी कई शिकायतें थीं. कुछ महीने पहले सीओ मोहनलालगंज के कार्यालय से दोनों की बाकायदा लिखित शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई थी. शिकायत में कहा गया था कि पवन जमीन संबंधी मामलों में सांठगांठ कर के घूसखोरी कर रहा है.

 अपने साथ दरोगा आशीष व अन्य पुलिसकर्मियों को भी साथ मिला रखा है. अगर इस शिकायत पर संबंधित अधिकारियों ने संज्ञान ले लिया होता तो आरोपित दरोगा डकैती के बारे में सोचते भी नहीं. पूरे प्रकरण में अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है.

कोयला कारोबारी के घर डकैती की घटना से चर्चा में आए मधुकर शुक्ला के खिलाफ वजीरगंज के अलावा ट्रांस गोमती, गाजीपुर आदि के थानों में पहले से ही एफआईआर दर्ज हैं. वहीं एएसपी (क्राइम) का गनर रह चुका लालपुरवा, खैरीघाट, बहराइच निवासी सिपाही प्रदीप झांसी परिक्षेत्र में मारपीट के एक मामले में जेल भी जा चुका है.

प्रदीप ट्रक चलवाता है. निलंबित दरोगा पवन और आशीष दोनों ही प्रेमनगर,झांसी के रहने वाले हैं. वहीं पकड़ा गया चालक आनंद यादव महिपाल खेड़ा,अर्जुनगंज का रहने वाला है. गिरफ्तार दरोगा पवन, आशीष और सिपाही प्रदीप व उस के चालक आनंद को पुलिस ने 10 मार्च को रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया. न्यायालय ने चारों आरोपियों को न्यायायिक हिरासत में जेल भेज दिया.

राजधानी के चर्चित गोसाईगंज डकैती कांड में आरोपी मधुकर मिश्रा ने 11 मार्च को कोर्ट में सरेंडर कर दिया. पुलिस को सूचना मिली थी कि मधुकर 11 मार्च को कोर्ट में सरेंडर कर सकता है. पुलिस को सादे कपड़ों में लगाया गया था. इस के बावजूद आरोपी ने स्पैशल सीजेएम-6 के न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पुलिस ने डकैती की वारदात को अंजाम दे कर खाकी वरदी को दागदार कर दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मैं शादीशुदा हूं पर अपने एक्स बौयफ्रैंड से बात करती हूं, क्या यह सही है?

सवाल

मैं कालेज टाइम में किसी लड़के से बहुत प्यार करती थी. मगर कभी उस से अपने प्यार का इजहार नहीं कर सकी. बाद में मेरी अरेंज्ड मैरिज हो गई. पति काफी अंडरस्टैंडिंग और केयरिंग नेचर के हैं. मैं अपनी जिंदगी में काफी खुश थी, मगर एक दिन अचानक जिंदगी में तूफान आ गया. दरअसल, फेसबुक पर उसी लड़के का मैसेज आया कि वह मुझ से बात करना चाहता है. मेरे मन में दबा प्यार फिर से जाग उठा. मैं ने तुरंत उस के मैसेज का जवाब दिया. फेसबुक पर हमारी दोस्ती फिर से परवान चढ़ने लगी. मैं अपना खाली समय उस से बातें करने में गुजारने लगी.

धीरेधीरे शर्म और संकोच की दीवारें गिरने लगीं. फिर एक दिन उस ने मुझे अकेले में मिलने बुलाया. मैं उस के इरादों से वाकिफ हूं, इसलिए हिम्मत नहीं हो रही कि इतना बड़ा कदम उठाऊं या नहीं. उधर मन में दबा प्यार मुझे यह कदम उठाने की जिद कर रहा है. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

यह बात सच है कि पहले प्यार को इंसान कभी नहीं भूल पाता, मगर जब जिंदगी आगे बढ़ चुकी हो तो लौट कर उस राह जाना मूर्खता होगी. वैसे भी आप को कोई अपने पति से शिकायत नहीं है. ऐसे में प्रेमी से रिश्ता जोड़ कर नाहक अपनी परेशानियां न बढ़ाएं.

उस लड़के को स्पष्ट रूप से ताकीद कर दें कि आप उस से केवल हैल्दी फ्रैंडशिप की उम्मीद रखती हैं, जो आप के जीवन की एकरसता दूर कर मन को सुकून और प्रेरणा दे. मगर शारीरिक रूप से जुड़ कर आप इस रिश्ते के साथसाथ अपने वैवाहिक रिश्ते के साथ भी अन्याय करेंगी. इसलिए देर न करते हुए बिना किसी तरह की दुविधा मन में लिए अपने प्रेमी से इस बारे में बात कर उसे अपना फैसला सुनाएं.

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डिलीवरी के बाद इस तरह बनाएं पति से संबंध

‘‘तुम क्या पहली औरत हो, जो मां बनी हो?’’

‘‘डिलीवरी के बाद तुम्हारे अंदर कितना बदलाव आ गया है, सिवा बच्चे के, तुम्हें तो और कुछ सूझता ही नहीं है.’’

‘‘लगता है, तुम्हारा बच्चा ही तुम्हारे लिए महत्त्वपूर्ण हो गया है, तभी तो मेरे पास तक आने में हिचकिचाने लगी हो.’’

इस तरह की न जाने कितनी बातें औरतें शिशु जन्म के बाद अपने पतियों से सुनती हैं, क्योंकि पति की यौन संबंध बनाने की मांग को ठुकराने की गलती उन से होती है. मगर प्रसव के बाद कुछ महीनों तक न तो औरत की यौन संबंध बनाने की इच्छा होती है, न ही डाक्टर ऐसा करने की सलाह देते हैं.

शारीरिक व मानसिक थकान

बच्चे के जन्म के बाद मानसिक व शारीरिक तौर पर एक औरत का थकना स्वाभाविक है. चूंकि प्रैग्नैंसी के 9 महीनों के दौरान उसे कई तरह के उतारचढ़ावों से गुजरना पड़ता है. बच्चे को जन्म देने के बाद भी उस के अंदर अनेक सवाल पल रहे होते हैं. कमजोरी और शिशु जन्म के साथ बढ़ती जिम्मेदारियां, रात भर जागना और दिन का शिशु के साथ उस की जरूरतें पूरी करतेकरते गुजर जाना आम बात होती है. औरत के अंदर उस समय चिड़चिड़ापन भर जाता है. नई स्थिति का सामना न कर पाने के कारण अकसर वह तनाव या डिप्रैशन का शिकार भी हो जाती है.

मां बनने के बाद औरत कई कारणों की वजह से सैक्स में अरुचि दिखाती है. सब से प्रमुख कारण होता है टांकों में सूजन होना. अगर ऐसा न भी हो तो भी गर्भाशय के आसपास सूजन या दर्द कुछ समय के लिए वह महसूस करती है. थकावट का दूसरा बड़ा कारण होता है 24 घंटे शिशु की देखभाल करना, जो शारीरिक व मानसिक तौर पर थकाने वाला होता है. इसलिए जब भी वह लेटती है, उस के मन में केवल नींद पूरी करने की ही इच्छा होती है. कई औरतों की तो सैक्स की इच्छा कुछ महीनों के लिए बिलकुल ही खत्म हो जाती है.

अपने शरीर के बदले हुए आकार को ले कर भी कुछ औरतों के मन में हीनता घिर जाती है, जिस से वे यौन संबंध बनाने से कतराने लगती हैं. उन्हें लगने लगता है कि वे पहले की तरह सैक्सी नहीं रही हैं. स्ट्रेच मार्क्स या बढ़ा हुआ वजन उन्हें अपने ही शरीर से प्यार करने से रोकता है. बेहतर होगा कि इस तरह की बातों को मन में लाने के बजाय जैसी हैं, उसी रूप में अपने को स्वीकारें. अगर वजन बढ़ गया है, तो ऐक्सरसाइज रूटीन अवश्य बनाएं.

दर्द होने का डर

अकसर पूछा जाता है कि अगर डिलीवरी नौर्मल हुई है, तो यौन संबंध कब से बनाने आरंभ किए जाएं? इस के लिए कोई निर्धारित नियम या अवधि नहीं है, फिर भी डिलीवरी के 11/2 महीने बाद सामान्य सैक्स लाइफ में लौटा जा सकता है. बच्चे के जन्म के बाद कई औरतें सहवास के दौरान होने वाले दर्द से घबरा कर भी इस से कतराती हैं.

औरत के अंदर दोबारा यौन संबंध कायम करने की इच्छा कब जाग्रत होगी, यह इस पर भी निर्भर करता है कि उस की डिलीवरी कैसे हुई है. जिन औरतों का प्रसव फोरसेप्स की सहायता से होता है, उन्हें सैक्स के दौरान निश्चिंत रहने में अकसर लंबा समय लगता है. ऐसा ही उन औरतों के साथ होता है, जिन के योनिमार्ग में चीरा लगता है. सीजेरियन के बाद टांके भरने में समय लगता है.

उस समय किसी भी तरह का दबाव दर्द का कारण बन सकता है. फोर्टिस ला फेम की गायनाकोलौजिस्ट डा. त्रिपत चौधरी कहती हैं, ‘‘प्रसव के बाद 2 से 6 हफ्तों तक सैक्स संबंध नहीं बनाने चाहिए, क्योंकि बच्चे के जन्म के बाद औरत न सिर्फ अनगिनत शारीरिक परिवर्तनों से गुजरती है, वरन मानसिक व भावनात्मक बदलाव भी उस के अंदर समयसमय पर होते रहते हैं. चाहे डिलीवरी नौर्मल हुई हो या सीजेरियन से, दोनों ही स्थितियों में कुछ महीनों तक यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए.

‘‘डिलीवरी के बाद के जिन महीनों को पोस्टपार्टम पीरियड कहा जाता है, उस दौरान औरत के अंदर सैक्स संबंध बनाने की बात तक नहीं आती. प्रसव के बाद कुछ हफ्तों तक हर औरत को ब्लीडिंग होती है. ब्लीडिंग केवल रक्त के रूप में ही नहीं होती है, बल्कि कुछ अंश निकलने व डिस्चार्ज की तरह भी हो सकती है. वास्तव में यह पोस्टपार्टम ब्लीडिंग औरत के शरीर से प्रैग्नैंसी के दौरान बचे रह गए अतिरिक्त रक्त, म्यूकस व प्लासेंटा के टशू को बाहर निकालने का तरीका होती है. यह कुछ हफ्तों से ले कर महीनों तक हो सकती है.

‘‘डिलीवरी चाहे नौर्मल हुई हो या सीजेरियन से औरत के योनिमार्ग में सूजन आ जाती है और टांकों को भरने में समय लगता है. अगर इस दौरान यौन संबंध बनाए जाएं तो इन्फैक्शन होने की अधिक संभावना रहती है. औरत किसी भी तरह के इन्फैक्शन का शिकार न हो जाए, इस के लिए कम से कम 6 महीनों बाद यौन संबंध बनाने की सलाह दी जाती है. योनिमार्ग या पेट में सूजन, घाव, टांकों की वजह से सहवास करने से उसे दर्द भी होता है.’’

क्या करें

अगर बच्चा सीजेरियन से होता है, तो कम से कम 6 हफ्तों बाद यौन संबंध बनाने चाहिए. लेकिन उस से पहले डाक्टर से जांच करवानी जरूरी होती है कि आप के टांके ठीक से भर रहे हैं कि नहीं और आप की औपरेशन के बाद होने वाली ब्लीडिंग रुकी कि नहीं. यह ब्लीडिंग यूट्रस के अंदर से होती है, जहां पर प्लासेंटा स्थित होता है. यह ब्लीडिंग हर गर्भवती महिला को होती है, चाहे उस की डिलीवरी नौर्मल हुई हो या सीजेरियन से.

अगर डाक्टर सैक्स संबंध बनाने की इजाजत दे देते हैं, तो इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि टांके अगर पूरी तरह भरे नहीं हैं तो किस पोजीशन में संबंध बनाना सही रहेगा. पति साइड पोजीशन रखते हुए संबंध बना सकता है, जिस से औरत के पेट पर दबाव नहीं पड़ेगा. अगर उस दौरान स्त्री को दर्द महसूस हो, तो उसे ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि कई बार थकान या अनिच्छा की वजह से योनि में तरलता नहीं आ पाती.

अगर औरत को दर्द का अनुभव होता हो तो पति पोजीशन बदल कर या ओरल सैक्स का सहारा ले सकता है. साथ ही, वैजाइनल ड्राईनैस से बचने के लिए ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल करना अनिवार्य होता है. चूंकि प्रैग्नैंसी के बाद वैजाइना बहुत नाजुक हो जाती है और उस में एक स्वाभाविक ड्राईनैस आ जाती है, इसलिए नौर्मल डिलीवरी के बाद भी सैक्स के दौरान औरत दर्द महसूस करती है.

पोस्टपार्टम पीरियड बहुत ही ड्राई पीरियड होता है, इसलिए बेहतर होगा कि उस के खत्म होने के बाद ही यौन संबंध बनाए जाएं. प्रसव के 1-11/2 महीने बाद यौन संबंध बनाने के बहुत फायदे भी होते हैं. सैक्स के दौरान स्रावित होने वाले हारमोंस की वजह से संकुचन होता है, जिस से यूट्रस को सामान्य अवस्था में आने में मदद मिलती है और साथी के साथ दोबारा से शारीरिक व भावनात्मक निकटता कायम करने में यौन संबंध महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

प्रसव के बाद कुछ महीनों तक पीरियड्स अनियमित रहते हैं, जिस की वजह से सुरक्षित चक्र के बारे में जान पाना असंभव हो जाता है. इस दौरान गर्भनिरोध करने के लिए कौपर टी का इस्तेमाल करना या ओरल पिल्स लेना सब से अच्छा रहता है. अगर प्रसव के बाद कई महीनों तक औरत के अंदर यौन संबंध बनाने की इच्छा जाग्रत न हो तो ऐसे में पति को बहुत धैर्य व समझदारी से उस से बरताव करना चाहिए.

पति का सहयोग

जैसे ही औरत शारीरिक व भावनात्मक रूप से सुदृढ़ हो जाती है, संबंध बनाए जा सकते हैं. इस दौरान पति के लिए इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है कि वह पत्नी पर किसी भी तरह का दबाव न डाले या जबरदस्ती सैक्स संबंध बनाने के लिए बाध्य न करे. हफ्ते में 1 बार अगर संबंध बनाए जाते हैं, तो दोनों ही इसे ऐंजौय कर पाते हैं और वह भी बिना किसी तनाव के. पति को चाहिए कि वह इस विषय में पत्नी से बात करे कि वह संबंध बनाने के लिए अभी तैयार है कि नहीं, क्योंकि प्रसव के बाद उस की कामेच्छा में भी कमी आ जाती है, जो कुछ समय बाद स्वत: सामान्य हो जाती है.

47 साल की उम्र में घोड़ी चढ़ेंगे रणदीप हुड्डा, गर्लफ्रैंड के साथ लेंगे सात फेरे

हिंदी फिल्मों के हीरो रणदीप हुड्डा अपनी ऐक्टिंग के लिए खासा जाने जाते है. बौलीवुड में उन्होंने अपनी ऐक्टिंग के दम पर काफी नाम कमाया है. फिल्म ‘हाईवे’ में उन्होंने रंग जमा दिया था. अपनी ऐक्टिंग के अलावा रणदीप हुड्डा अपनी निजी जिंदगी को ले कर भी अकसर सुर्खियों में रहते हैं और अब खबर है कि वे घोड़ी चढ़ने के लिए तैयार हैं.

 

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जी हां, रणदीप हुड्डा 47 की उम्र में शादी करने जा रहे है. जानिए कौन हैं उन की दुलहन. आप को बता दें कि इस महीने के आखिरी तक रणदीप शादी के बंधन में बंध जाएंगे. यह शादी वे अपनी गर्लफ्रैंड लिन लैशराम से करने जा रहे है. वे भी ऐक्ट्रैस हैं, जिन्हें हाल ही में सुजाय घोष की फिल्म ‘जाने जां’ में देखा गया था. रणदीप हुड्डा की शादी में उन के नजदीकी लोग ही शामिल होंगे, जिन में दोस्त और परिवार वाले शामिल होंगे.

हालांकि अभी तक रणदीप हुड्डा ने इस पर अधिकारिक तौर पर कोई कमैंट नहीं किया है. वे अपनी शादी को काफी निजी रखना चाहते हैं. वे मीडिया अटैंशन नहीं चाहते हैं, इसलिए शादी के बाद इस बात का ऐलान करेंगे.

 

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आप को बता दें कि रणदीप हुड्डा और लिन लैशराम के बीच 10 साल का फासला है. लिन 37 साल की हैं. वैसे, रणदीप हुड्डा ने कभी अपनी रिलेशनशिप को ले कर कुछ नहीं कहा है लेकिन सोशल मीडिया पर लिन के साथ कई फोटो शेयर की हुई हैं. साल 2021 में पहली बार उन्होंने लिन के साथ रिलेशनशिप में होने पर हिंट दिया था.

रूबीना ने शेयर किया अपना मैटरनिटी फोटोशूट, ट्रोलर्स ने ले ली क्लास

टैलीविजन की फेमस हीरोइन और ‘बिग बौस’ विजेता रूबीना दिलैक इन दिनों अपनी प्रेग्नेंसी को ले कर चर्चा में बनी हैं. वे जल्द ही मां बनने वाली हैं. वे अपने पहले बच्चे को जन्म देंगी.

 

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प्रेग्नेंसी में रूबीना हर जगह स्टाइलिश लुक में नजर आई हैं. हाल ही में उन्होंने ने अपनी पति अभिनव शुक्ला के साथ मैटरनिटी फोटोशूट कराया है, जिस पर ट्रोलर्स जम कर उन की क्लास लगाते हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन रूबीना ने भी ट्रोलर्स को जवाब देते हुए एक वीडियो शेयर किया है. हालांकि लोगों के यह वीडियो पसंद नहीं आया है.

यह वीडियो रूबीना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. वीडियो में वे बेबी बंप में नजर आ रही हैं. वे और अभिनव अलगअलग अंदाज में पोज दे रहे हैं. कभी वे कैमरे की तरफ देखती हैं, तो कभी अभिनव उन पर प्यार लुटाते नजर आ रहे हैं. दोनों ने मैचिंग व्हाइट कलर की आउटफिट पहनी हुई है.

 

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इस वीडियो में रूबीना किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही हैं. इस वीडियो के साथ रूबीना ने कैप्शन में हार्ट का इमोजी बनाया हुआ है. वीडियो शेयर होते ही वायरल हो गया था. कुछ लोगों को यह वीडियो पसंद आया तो कुछ ट्रोलर्स ने रूबीना की क्लास लगा दी. कमैंट सैक्शन में लोगों ने उन्हे ट्रोल करना शुरू कर दिया.

एक यूजर ने लिखा है कि ‘आप को कुछ और नहीं मिला पहनने को’. दूसरे ने लिखा है कि ‘आप लोग प्रेग्नेंट होते हो तो ऐसे दिखाते हो जैसे मिडिल क्लास में पैरेंट्स बनते ही नहीं हैं. शर्मनाक है यह’. एक यूजर ने कहा कि ‘यह एकदम डिजास्टर है. बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा है. इस बात का क्या प्वाइंट है कि प्रेग्नेंसी में आप न्यूड हो जाओ’. एक यूजर कहते हैं कि ‘क्या बेशर्मी है यार. सैलिब्रिटी ने तो सारी की सारी हदें ही पार कर दी हैं’.

बताते चले कि रूबीना और अभिनव ने जून, 2018 में शादी की थी. अब शादी के 5 साल बाद रूबीना मां बनने जा रही हैं. इस साल सिंतबर में एक पोस्ट लिख कर उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में कंफर्म किया था.

मैं एक लड़की को पसंद करता हूं, पर डरता हूं कहीं वह मुझे गलत समझ जाये!

सवाल

मैं 23 वर्षीय नौजवान हूं. कुछ दिन हुए हम ने दूसरी कालोनी में घर शिफ्ट किया है. वहां बने पार्क में रोज सुबह वौक के लिए जाता हूं. वहां रोज मैं एक लड़की को देखता हूं. हम सेम टाइम पर पार्क में एंटर करते हैं और लगभग एकसाथ आगेपीछे वौक करते रहते हैं. मुझे वह लड़की पसंद आने लगी है. यहां तक कि रात से ही यह सोच कर खुश होने लगता हूं कि कल पार्क में वह दिखेगी. मैं उस से बात करने से अपनेआप को रोक नहीं पा रहा. लेकिन यह सोच कर खुद को रोक लेता हूं कि उस ने मेरी दोस्ती को न अपनाया या मुझे गलत सम झ लिया तो? समझ नहीं आ रहा क्या करूं?

जवाब

अकसर लड़कों के सामने यह समस्या आती है. आप अच्छी तरह सम झ लीजिए कि लड़की कितनी ही फौरवर्ड और एडवांस हो, अगर दोस्ती करनी है तो लड़के को ही दोस्ती के लिए पहल करनी पड़ेगी. वह लड़की पूरी तरह से आप के लिए अनजान है, इसलिए जरा संभल कर बात करनी होगी. बेहतर यही होगा कि जब लड़की अकेली हो, तभी आप उस से जा कर बात करें. आसपास कोई न हो जिस से वह आप से बात करने में हिचकिचाए नहीं.

जब भी बात करें, पूरे आत्मविश्वास के साथ बात करें. डरडर के बात करेंगे तो लड़की आप को डरपोक सम झेगी और आप की दोस्ती शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगी. आप यह भी नोटिस करें कि वह आप की बातें सुन भी रही है या नहीं, आप में दिलचस्पी ले रही है या नहीं. ज्यादा मत बोलना. उसे भी बोलने का मौका देना.

ऐसा जरूरी नहीं कि पहली बार की बात में ही वह आप की दोस्त बन जाए. कई बार थोड़ा समय लगता है पर देरसवेर वह आप की दोस्त जरूर बन जाएगी. बातें शुरू होने के बाद उस की तारीफ करना न भूलें. लड़कियों को तारीफ बहुत पसंद होती है. अगर कुछ न सू झे तो उस के कपड़ों, उस की मुसकान की तारीफ करें. जब बात शुरू हो जाए तो आई कौन्टैक्ट बनाएं. मतलब आंखों में आंखें डाल कर बात करें. इस से नजदीकी बढ़ेगी और लड़की को भी अपनापन लगेगा.

तो बस, लड़की से बात करने को तैयार हो जाओ. ऐसा न हो लड़की के सामने आप की बोलती बंद हो जाए. डोंट वरी, आप नौजवान हैं, हिम्मती हैं. लड़की को अगर आप पसंद हैं, तो फिर दोस्ती होने में देर नहीं लगेगी.

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त्योहार पर जेवर खरीदें सावधानी से

बिहार के गया जिले का रहने वाला दिवाकर कुमार दिल्ली में अपने परिवार के साथ नांगलोई इलाके में रहता है. उस की पत्नी सुनीता की फरमाइश है कि इस बार दीवाली पर उसे सोने के झुमके मिल जाएं, तो सोने पे सुहागा हो जाए.

दीवाली से कई दिन पहले खासतौर पर धनतेरस पर लोग अपने घरपरिवार के लिए कोई न कोई ऐसा सामान खरीदते हैं, जो किसी धातु से बना हो. ऐसा माना जाता है कि धनतेरस पर बरतन, गहने वगैरह की खरीदारी से घर में बरकत बनी रहती है.

चूंकि पहले आम घरों में भी पीतल से बने बरतन होते थे, तो लोग ज्यादातर वही खरीदते थे और अगर जमापूंजी बच गई है, तो सोने का कोई छोटामोटा गहना जैसे अंगूठी, मंगलसूत्र, चूड़ी, कान की बाली वगैरह की खरीदारी कर ली जाती थी.

वैसे तो दिवाकर का हाथ थोड़ा तंग था, फिर भी दीवाली के बारे में सोच कर वह और सुनीता एक लोकल सुनार के पास गए और उन्हें वहां झुमके पसंद भी आ गए, पर जिस तरह से सुनार उन झुमकों की कीमत बता रहा था, वह दिवाकर को समझ नहीं आ रही थी. वे झुमके कितने कैरेट के थे, उन का भार कितना था, मेकिंग चार्ज में भी कोई साफगोई नहीं दिखाई दे रही थी. सब से बड़ी बात तो यह कि वह सुनार कच्ची रसीद बनाने पर ज्यादा जोर दे रहा था.

सुनीता कहती रह गई, पर दिवाकर को इस खरीदारी में बड़ा झल नजर आया और वह बिना झुमके लिए घर आ गया.

दरअसल, अब चूंकि सुनार और ग्राहक का वह भरोसे वाला रिश्ता कमजोर पड़ने लगा है, तो लोग पहले से ज्यादा सावधान हो गए हैं और सरकारी इश्तिहारों में सोने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए पहले ही सावधान हो जाते हैं.

एक जागरूक ग्राहक को पता होना चाहिए कि अगर वह सोने का कोई बिसकुट खरीद रहा है, तो 24 कैरेट सोने का जो भाव चल रहा है, वही उस बिसकुट की कीमत होगी. पर अगर वह सोने के गहने खरीद रहा है, तो उसे याद रखना होगा कि भारत में 5 हालमार्क श्रेणियों 23, 22, 20, 18 और 14 कैरेट में गहने बनते हैं. उसी के मुताबिक सोने की कीमत तय होती है.

जितना कम कैरेट होगा, सोना भी उतना ही कम खरापन लिए होगा.

अगर 24 कैरेट में 100 फीसदी सोना होता है, तो 23 कैरेट में 95.88 फीसदी, 22 कैरेट में 91.66 फीसदी, 20 कैरेट में 84 फीसदी, 18 कैरेट में 75.76 फीसदी और 14 कैरेट में 58.50 फीसदी सोना पाया जाता है.

लिहाजा, धोखाधड़ी से बचने के लिए ग्राहक को हमेशा हालमार्क के निशान वाला ही गहना खरीदना चाहिए. इस के अलावा गहनों पर बीआईएस का ‘तिकोना मार्क’ लिखा होना चाहिए, जो यह बताए कि इसे ब्यूरो औफ इंडियन स्टैंडर्ड्स से मंजूरी मिली हुई है.

इसी के साथ गहनों पर पीछे या अंदर की तरफ एक एचयूआईडी यानी हालमार्क यूनीक आइडैंटिटिफिकेशन नंबर भी लिखा होता है, जो 6 अंकों का खास तरह का कोड होता है, जिस में कुछ अंक और कुछ वर्ण लिखे होते हैं. अगर ऐसा नहीं है तो गहना हालमार्क का नहीं है. इस में मिलावट हो सकती है.

अमूमन लोग किसी गहने की कीमत के गणित में उलझ कर रह जाते हैं और सुनार जो कीमत बताता है, वह भी उन के पल्ले कम ही पड़ती है, पर इस सब के बावजूद ग्राहकों को अपने कान थोड़े खुले रखने चाहिए और थोड़ा हिसाब खुद भी लगा लेना चाहिए.

याद रखें कि जितने कैरेट का गहना है, उस की कीमत उस कैरेट की कीमतों के हिसाब से होगी. मान लीजिए,

24 कैरेट सोने की कीमत 60,000 रुपए प्रति 10 ग्राम है, तो 22 कैरेट सोने की कीमत 60,000 रुपए की 91.66 फीसदी की जो भी कीमत निकलेगी वह होगी. ऐसा ही 18 कैरेट में होगा. यह 24 कैरेट सोने की कीमत की 75 फीसदी कीमत होगी.

गहने के डिजाइन के हिसाब से सुनार बनवाई के भी पैसे जोड़ता है. अमूमन सुनार प्रति ग्राम सोने पर 10 फीसदी से ले कर 30 फीसदी तक का मार्जिन लेते हैं. एक समझदार और होशियार ग्राहक इस मेकिंग चार्ज पर मोलभाव कर के गहने की कीमत कम करा सकता है.

यह मेकिंग चार्ज साधारण डिजाइन की चीजें खरीदने पर कम लगता है, लेकिन बारीक और गहराई वाले डिजाइनर गहनों पर ज्यादा लगता है.

ग्राहक को दिक्कत तब आती है, जब वह अपना सोना लौटाने या बेचने जाता है. तब यह मेकिंग चार्ज उसे वापस नहीं मिलता, बल्कि सिर्फ सोने का दाम मिलता है.

ग्राहक को अपने खरीदे गए गहने का वजन बड़े ध्यान से चैक करना चाहिए. वजन की थोड़ी भी कमी ज्यादा चपत लगा सकती है. इस के अलावा हमेशा पक्का बिल ही लें. उस में गहने के बारे में दी गई जानकारी जैसे मेकिंग चार्ज, हर तरह के टैक्स, वजन वगैरह को भी जरूर चैक करें. इस के अलावा बाजार में घूम कर कई दुकानों पर गहने देख लेने चाहिए.

त्योहार पर अपनों के लिए सोना जरूर खरीदें. इस तरह के तोहफों से आपसी रिश्ता मजबूत होता है और मुश्किल समय में यही सोना आप के काम भी आ सकता है.

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