शन्नो की हिम्मत: एक बेटी ने कैसे बदली अपने पिता की जिंदगी

Family Story in Hindi: शन्नो थी तो 10 साल की ही, पर उस का बाप फिरोज खान उस से सख्त नफरत करता था. वजह यह थी कि बेटा पैदा न करने के जुर्म में वह शन्नो की मां को अकसर मारतापीटता था, जिस की शन्नो जम कर खिलाफत करती थी. शन्नो की मां अनवरी मजबूरी के चलते पति के सितम चुपचाप सह लेती थी, लेकिन एक दिन शन्नो का सब्र जवाब दे गया और उस ने बाकरपुर थाने जा कर बाप की शिकायत कर डाली. थाना इंचार्ज एसआई पूनम यादव ने सूझबूझ से काम लेते हुए फिरोज खान को हिरासत में ले लिया.

लेकिन जब पुलिस वाले फिरोज खान की कमर पर रस्सा बांधने लगे, तो शन्नो यह देख कर तड़प उठी. वह एसआई पूनम यादव से रोते हुए बोली, ‘‘मैडमजी, पापा को माफ कर दीजिए. आप इन्हें सिर्फ समझा दीजिए कि अब दोबारा कभी अम्मी को नहीं सताएंगे.

‘‘मैं यह नहीं जानती थी कि पापा इतनी बड़ी मुसीबत में फंस जाएंगे. प्लीज, पापा को छोड़ दीजिए,’’ कह कर वह उन से लिपट कर रोने लगी.

‘‘घबराओ नहीं बेटी, तुम्हारे पापा को कुछ नहीं होगा. हम इन्हें समझाबुझा कर जल्दी छोड़ देंगे,’’ एसआई पूनम यादव ने शन्नो को काफी समझाया, लेकिन वह रोतीबिलखती रही.

पापा के बगैर शन्नो थाने से बाहर नहीं आना चाहती थी. बड़ी मुश्किल से उसे घर पहुंचाया गया. इस वाकिए के बाद शन्नो हंसना ही भूल गई. पापा को उस की वजह से जेल जाना पड़ा था. इस बात का उसे बहुत अफसोस था. एसआई पूनम यादव ने फिरोज खान की माली हालत के मद्देनजर उस पर बहुत कम जुर्माना लगाया, जिस से वह एकाध महीने में ही जेल से छूट गया.

एसआई पूनम यादव ने फिरोज खान को जेल से बाहर आने के बाद समझाया, ‘‘देखो फिरोज, तुम ने बेटा पाने की चाहत में बेटियों की जो लाइन लगा रखी है, उस का बोझ तुम्हें अकेले ही उठाना पड़ेगा, इसलिए अब भी वक्त है कि तुम अपनी बेटियों को ही बेटा समझो. उन्हें प्यारदुलार दो.

‘‘अगर तुम्हारे घर बेटा पैदा नहीं हुआ, तो इस की जिम्मेदार तुम्हारी पत्नी नहीं है, बल्कि तुम खुद हो.

‘‘तुम्हारे घर में कोई तुम्हारा दुश्मन नहीं है, बल्कि तुम सब के दुश्मन हो और अपनी जिंदगी के साथ भी दुश्मनी कर रहे हो.

‘‘अब क्या तुम अपनी बेटी शन्नो से इस बात का बदला लोगे कि तुम्हारे द्वारा उस की मां पर ढाए जाने वाले जुल्म से घबरा कर वह थाने चली आई?’’

फिरोज खान सिर झुकाए चुपचाप एसआई पूनम यादव की बातें सुनता रहा.

‘‘खबरदार फिरोज, अब भूल से भी कोई ऐसीवैसी हरकत मत करना.’’

फिरोज खान ने एसआई पूनम यादव की बात को अनसुना कर दिया, क्योंकि उस के मन में शन्नो के लिए बदले की आग सुलग रही थी. घर में कदम रखते ही फिरोज ने शन्नो की पिटाई की.

बेटी को पिटता देख अनवरी बचाने आई, तो फिरोज ने उसे भी खूब मारापीटा, फिर दोनों मांबेटी को घर से निकाल दिया. इस दुखद मंजर को अड़ोसपड़ोस के लोग चुपचाप देखते रहे. किसी के लफड़े में पड़ने की क्या जरूरत है, इस सोच के चलते महल्ले वाले अपनेअपने जमीर को मुरदा बनाए हुए थे. कोई भी यह नहीं सोचना चाहता था कि कल उन के साथ भी ऐसा हो सकता है.

अनवरी शन्नो को साथ ले कर अपने मायके समस्तीपुर चली आई और अपनी बेवा मां से लिपट कर खूब रोई. सारा दुखड़ा सुनाने के बाद अनवरी बोली, ‘‘अम्मां, आज से शन्नो का जीनामरना आप को ही करना होगा.’’

सुबह होते ही अनवरी बस में सवार हो कर ससुराल लौट गई. इस बात को 10 साल बीत गए. शन्नो के ननिहाल वाले गरीब थे, इस के बावजूद मामूमौसी वगैरह ने मिलजुल कर शन्नो की परवरिश की. उसे अच्छी से अच्छी तालीम दे कर कुछ इस तरह निखारा कि अपनेपराए, सभी उस पर नाज करने लगे.

आज शन्नो 18-19 बरस की हो चली थी. इस दौरान फिरोज खान ने उस की कोई खोजखबर नहीं ली, क्योंकि वह उस से बहुत चिढ़ता था. उसी की वजह से उसे जेल जाना पड़ा था. शन्नो की मां अनवरी अकसर मायके आ कर बेटी को देख लेती थी.

इस बार अनवरी मायके आई, तो उस ने मायके के तमाम रिश्तेदारों को इकट्ठा किया और अपनी लाचारी बयान करते हुए शन्नो के हाथ पीले करने की गुहार लगाई. इस पर मायके वालों ने भरपूर हमदर्दी जताई.

शन्नो के बड़े मामू साबिर ने तो मीटिंग के दौरान ही अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा, ‘‘देखिए, आप लोगों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. मैं ने शन्नो के लिए एक अच्छा सा लड़का देख रखा है. वह शरीफ है, कम उम्र का है, पढ़ालिखा है और नौकरी भी बहुत अच्छी करता है.’’

लेकिन जब लड़के की असलियत पता की गई, तो मालूम हुआ कि वह किसी भी नजरिए से शन्नो के लायक नहीं था. वह 50 साल से ऊपर का था और 2 बीवियों को तलाक दे चुका था. नौकरी करने के नाम पर वह दिल्ली में रिकशा चलाता था.

साबिर द्वारा पेश किया गया ऐसा बेमेल रिश्ता किसी को पसंद नहीं आया. नतीजतन, उस रिश्ते को नकार दिया गया. इस पर साबिर ने नाराजगी जताई, तो उस की बड़ी बहन नरगिस बानो ने साबिर को तीखा जवाब दिया, ‘‘लड़का जब इतना ही अच्छा है, तो शन्नो को दरकिनार करो और उस से अपनी बेटी को ब्याह दो.’’

नरगिस बानो के इस फिकरे ने साबिर के होश ठिकाने लगा दिए. वह तिलमिला कर फौरन मीटिंग से उठ गया. शन्नो के लिए एक मुनासिब लड़के की तलाश जारी थी और जल्दी ही नरगिस बानो ने एक लायक लड़के को देख लिया, जो सब को पसंद आया. शादी की तारीख एक महीने के अंदर तय की गई. चंद ननिहाली रिश्तेदारों ने माली मदद में पहल की. इस में नरगिस बानो खासतौर से आगे रहीं.

लड़का पेशे से वकील होने के अलावा एक सच्चा समाजसेवी भी था. उस के स्वभाव में करुणा कूटकूट कर भरी थी. उस ने लड़की वालों से किसी चीज की मांग नहीं की थी.

शन्नो की बरात आने में 10 दिन बाकी रह गए थे. इसी बीच एक दिन शन्नो के होने वाले पति रिजवान ने नरगिस बानो को फोन कर शादी से इनकार करने का संकेत दिया. वजह पूछने पर उस ने बताया कि लड़की अपने बाप को जेल की हवा खिलवा चुकी है. इस वजह से कोई भी शरीफ लड़का ऐसी लड़की को अपना हमसफर बनाना पसंद नहीं करेगा.

शन्नो के ननिहाल वालों की आंखों में मायूसी का अंधेरा पसर गया. वे आपस में मिलबैठ कर सोचविचार कर रहे थे कि बिगड़ी बात कैसे बनाई जाए, तभी नरगिस बानो के मोबाइल फोन की घंटी बजने लगी. रिजवान का फोन था.

नरगिस बानो ने झट से फोन रिसीव किया और बोलीं, ‘‘तुम्हारे शुभचिंतकों ने हमारी शन्नो के खिलाफ और जो कुछ भी शिकायतें की हैं, तो वे भी हम से कह कर भड़ास निकाल लो.’’

‘ऐसी बात नहीं है, बल्कि मैं ने तो आप लोगों से माफी मांगने के लिए फोन किया है. मुझे माफ कर दीजिए प्लीज.’

नरगिस बानो ने मोबाइल फोन का स्पीकर औन कर दिया, ताकि लड़के की बात उन के अलावा घर के दूसरे लोग भी सुन सकें.

‘आप के ही कुछ सगेसंबंधी मेरे कान भर कर मुझे गुमराह करने पर तुले थे. लेकिन भला हो एसआई पूनम मैडम का, जिन्होंने आप के रिश्तेदारों द्वारा रची गई झूठी कहानी का परदाफाश कर मेरी आंखें खोल दीं.’

‘‘लेकिन, कौन पूनम मैडम?’’ नरगिस बानो ने चौंक कर पूछा.

‘जी, वे एक पुलिस वाली होने के अलावा समाजसेवी भी हैं. उन से मेरी अच्छी जानपहचान है. मैं ने उन से शन्नो और उस के अब्बू फिरोज खान साहब से संबंधित थानापुलिस वाली बात जब बताई, तो उन्हें वह सारा माजरा याद आ गया. तब उन की पोस्टिंग बाकरपुर थाने में थी. उन्होंने मुझे सबकुछ बता दिया है, जिस से सारी बात साफ हो गई और मेरा दिल साफ हो गया.’

शन्नो के ननिहाल वाले गौर से रिजवान की बातें सुन रहे थे. रिजवान ने आगे कहा, ‘बड़े अफसोस की बात है कि अपने लोग भी कितने दुश्मन होते हैं. ऐसे लोग अगर किसी मजबूर का भला नहीं कर सकते, तो कम से कम बुराई करने से परहेज करें.’

और फिर देखते ही देखते शन्नो की शादी रिजवान के साथ करा दी गई. शादी में एसआई पूनम यादव भी दूल्हे की तरफ से शरीक हुई थीं. विदाई के दौरान शन्नो की रोती हुई आंखें किसी को तलाश रही थीं. एसआई पूनम यादव उस की बेचैनी को समझ रही थीं. वे थोड़ी देर के लिए भीड़ से निकल गईं और जब लौटीं, तो उन के साथ शन्नो के अब्बू फिरोज खान थे. उस के हाथ में एक छोटी सी थैली थी.

अपने अब्बू को देखते ही शन्नो उन से लिपट गई और रोने लगी. फिरोज खान ने थैली शन्नो की तरफ बढ़ा दी. इसी बीच एसआई पूनम यादव शन्नो से मुखातिब हुईं, ‘‘तुम्हारे पापा ने कड़ी मेहनत और अरमान से तुम्हारे लिए ये गहने बनवाए हैं, इस की गवाह मैं हूं. मैं चाहे जहां भी रहूं, लेकिन ये कोई भी काम मुझ से मशवरा ले कर ही करते हैं.

‘‘तुम्हारे पापा अब बेटी को मुसीबत समझने की नासमझी से तोबा कर चुके हैं. तुम्हारी सारी बहनें अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं और खूब नाम रोशन कर रही हैं.’’

‘‘मैडमजी ठीक बोल रही हैं बेटी,’’ यह शन्नो की मां अनवरी बानो थीं.

एसआई पूनम यादव बोलीं, ‘‘बस यह समझो कि शन्नो बेटी के अच्छे दिन आ गए हैं. मुबारक हो.’’

शन्नो बोली, ‘‘आप की बड़ी मेहरबानी मैडमजी. आप ने मेरे घर वालों को बिखरने से बचा लिया,’’ इतना कह कर वह एसआई पूनम यादव से लिपट कर इस तरह रो पड़ी, जैसे वह बरसों पहले बाकरपुर थाने में उन से लिपट कर रोई थी.

मौत बनी बीवी की बेवफाई : उत्तर प्रदेश का दिल दहला देने वाला कांड

Husband Wife Crime in Hindi : सरफराज उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)  के जनपद बुलंदशहर (Bulandshaher) के कस्बा सिकंदराबाद के मोहल्ला रिसालदारान के रहने वाले उस्मान का बेटा था. करीब 5 साल पहले उस का निकाह जिले के ही ककोड़ थाना क्षेत्र के गांव बीघेपुर की दरखशा के साथ हुआ था. शादी के बाद दरखशा के मायके वाले दिल्ली (Delhi) जा कर बस गए थे. पिछले 10 दिनों से दरखशा मायके में थी. 2 जनवरी को सरफराज उसे लेने गया था. अगले दिन वह उसे ले कर वापस आ रहा था, तभी कोई काम होने की बात कह कर सरफराज गाजियाबाद (Gaziabad) में रुक गया था. दरखशा वहां से अकेली ही घर आ गई थी.

दरखशा काफी खूबसूरत थी. उसे इस बात का गुमान भी था, इसलिए वह निकाह के बाद भी खूब बनसंवर कर रहती थी. खुश रहना उस की आदत में शुमार था, लेकिन 3 जनवरी, 2017 की शाम को उस के चेहरे पर उदासी और परेशानी झलक रही थी. इस की वजह था उस का शौहर सरफराज. न सिर्फ दरखशा, बल्कि उस के ससुर सहित घर के अन्य लोग भी परेशान थे. वजह यह थी कि सरफराज लापता हो गया था. परेशान ससुर ने दरखशा से पूछा, ‘‘बहू, घर से जाते वक्त उस ने कुछ कहा था तुम से?’’

‘‘उन्होंने कहा था कि एक घंटे बाद घर लौट आऊंगा, लेकिन पता नहीं कहां रह गए? मुझे पता होता कि वह लौट कर नहीं आएंगे तो मैं उन्हें जाने ही नहीं देती.’’ दरखशा ने उदास स्वर में जवाब दिया.

‘‘उसे तो कहीं कोई काम भी नहीं था, फिर अचानक ऐसा कौन सा काम निकल आया कि उसे रुकना पड़ गया?’’

‘‘मैं क्या बता सकती हूं. मैं तो खुद ही उन का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं.’’

सरफराज अचानक कहां लापता हो गया, वह घर क्यों नहीं आया, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी. लेकिन सभी लोग दरखशा को शक की निगाहों से देख रहे थे. इस से वह और भी ज्यादा परेशान थी.

कई घंटे बीतने पर भी जब सरफराज नहीं आया तो सभी को चिंता होने लगी. सरफराज के गाजियाबाद में रुकने की बात घर वालों को दरखशा ने बताई थी. यह अलग बात थी कि कोई भी उस की बात पर भरोसा नहीं कर रहा था. इस की वजह यह थी कि सरफराज सीधासादा युवक था. उस ने घर वालों से कहा था कि वह दरखशा ले कर सीधे घर ही आएगा. गाजियाबाद में न तो उस की कोई रिश्तेदारी थी और न ही कोई काम ही हो सकता था.

दरखशा के रिश्ते भी उस से तल्खी भरे थे. तल्खी की वजह थी दरखशा के बहके कदम. उस के अपने मायके के गांव के ही एक युवक से प्रेमसंबंध थे और यह बात किसी से छिपी नहीं थी. इस बात को ले कर शौहरबीवी के बीच अकसर तकरार होती रहती थी. सरफराज के घर वालों ने अपने स्तर पर उस की खोजबीन की तो उन्हें कहीं से पता चला कि सरफराज को बीघेपुर गांव के सत्यवीर के साथ देखा गया था.

सत्यवीर ही वह युवक था, जिस के दरखशा से प्रेम संबंध थे. परेशानहाल सरफराज के घर वाले थाना ककोड़ पहुंचे और थानाप्रभारी वी.के. मिश्र से मिल कर उन्हें पूरी बात बताई. उन्होंने सरफराज की गुमशुदगी दर्ज करा कर अपना शक सत्यवीर और उस के साथियों पर जाहिर किया.

अगले दिन कुछ लोग सरफराज की गुमशुदगी को ले कर एसएसपी सोनिया सिंह से मिले तो उन्होंने इस मामले में काररवाई के निर्देश दिए. एसपी (सिटी) मान सिंह चौहान के निर्देशन में थानाप्रभारी वी.के. मिश्र इस मामले की जांच में जुट गए. पुलिस ने दरखशा से पूछताछ की तो वह शौहर के गायब होने को ले कर परेशान होने की बात कह कर सवालों के जवाब देने से बचती रही. इस से पुलिस का शक उस पर और भी बढ़ गया.

पुलिस ने सख्ती की तो दरखशा ने बताया कि सरफराज को सत्यवीर अपने 2 साथियों नितिन और रवि के साथ ले गया था. यह जान कर सभी को अनहोनी की आशंका सताने लगी. पुलिस सत्यवीर और उस के साथियों की तलाश में जुट गई.

अगले दिन यानी 5 जनवरी को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि सत्यवीर अपने साथियों के साथ मारुति जेन कार नंबर डीएल2सीए 1537 से हसनपुर गांव की ओर आएगा.

पुलिस उस की सरगरमी से तलाश में जुटी थी. थानाप्रभारी वी.के. मिश्र ने सड़क पर नाका लगा कर अपने साथियों हैडकांस्टेबल कारेलाल, कांस्टेबल जनेश्वर दयाल, हेमंत, महिला कांस्टेबल मीनाक्षी और मुन्नी देवी के साथ चैकिंग शुरू कर दी. थोड़ी देर बाद पुलिस को बताए गए नंबर की कार आती दिखाई दी तो उन्होंने उसे रोक लिया. सूचना सटीक थी. कार में वही तीनों युवक सवार थे, जिन की पुलिस को तलाश थी. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

थाने ला कर उन तीनों से पूछताछ शुरू हुई तो पहले तो उन्होंने पुलिस को बरगलाने का प्रयास किया, लेकिन जल्दी ही उन्होंने बता दिया कि वे लोग सरफराज की हत्या कर के उस की लाश को ठिकाने लगा चुके हैं. पुलिस ने उन की निशानदेही पर बीघेपुर गांव के जंगल में एक गड्ढे से सरफराज की लाश बरामद कर ली.

हत्या की खबर से गांव में सनसनी फैल गई. शव मिलने की सूचना पर एसडीएम कन्हई सिंह और सीओ यशवीर सिंह भी आ पहुंचे थे. पुलिस ने पंचनामा तैयार कर मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और उस के घर वालों की तहरीर के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. सत्यवीर और उस के दोस्तों से हुई पूछताछ के बाद दरखशा को भी गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि इस साजिश में वह खुद भी शामिल थी.

पुलिस ने सभी से विस्तार से पूछताछ की तो सत्यवीर और दरखशा ने पुलिस को सरफराज की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह अवैध संबंधों के फेर में पत्नी द्वारा प्रेमी के साथ षडयंत्र कर के अपने शौहर को रास्ते से हटाने की कहानी थी.

खूबसूरत दरखशा को जो भी युवक देखता, आहें भर कर रह जाता था. यह बात अलग थी कि पारिवारिक बंदिशों के चलते वह अपने अरमानों की बगिया में किसी युवक को स्थान नहीं दे सकी थी.

लेकिन आखिर ऐसा कब तक चलता. जवानी की दहलीज पर खड़ी दरखशा की जिंदगी में सत्यवीर ने प्रवेश किया. दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे. आतेजाते सत्यवीर अकसर उसे देखता रहता था.

दरखशा कोई नादान नहीं थी. उस की निगाहों की भाषा वह बखूबी समझती थी. वह कब उस के दिल में बस गया, इस का उसे पता तक नहीं चला. चाहत दोनों ओर थी. फलस्वरूप जल्दी ही दोनों चोरीछिपे मिलने लगे. उन का प्यार परवान चढ़ पाता, इसी बीच घर वालों ने दरखशा का निकाह सरफराज से कर दिया. ससुराल आ कर दरखशा ने घरगृहस्थी में मन लगाना शुरू किया, लेकिन वह सत्यवीर को पूरी तरह भूल नहीं सकी.

वक्त अपनी गति से चलता रहा. विवाह के एक साल बाद दरखशा ने एक बेटे को जन्म दिया. सरफराज के आर्थिक हालात ज्यादा अच्छे नहीं थे. दरखशा ने अपने भावी शौहर को ले कर जो सपने संजोए थे, उन पर वह खरा नहीं उतरा था. वह उस की चाहतों का भी उस ढंग से खयाल नहीं रख पाता था, जैसा वह चाहती थी.

दरखशा का मायके आनाजाना लगा रहता था. सत्यवीर उसे जब भी देखता तो देखता ही रह जाता. सत्यवीर ने दोबारा डोरे डाले तो दरखशा ने इस बार भी अपने कदम पीछे नहीं हटाए. एक दिन उस ने दरखशा को रास्ते में रोक कर पूछा, ‘‘कैसी को दरखशा?’’

‘‘बस अच्छी हूं.’’ वह आह भर कर बोली.

‘‘कभीकभी किस्मत भी कैसा मजाक करती है, इंसान जो चाहता है, वह उसे नहीं मिलता.’’

उस का इशारा समझ कर दरखशा उस की नजरों से नजरें मिला कर बोली, ‘‘लेकिन इंसान को कोशिश भी नहीं छोड़नी चाहिए. कौन जाने किस्मत कब जाग जाए.’’

दरखशा का मनमाफिक जवाब सुन कर सत्यवीर बहुत खुश हुआ. उस का हौसला बढ़ गया. इस के बाद उन के बीच फोन पर बातें और छिपछिप कर मुलाकातें होने लगीं. एक दिन दोनों एकांत में मिले तो सत्यवीर ने उस की आंखों में झांक कर कहा, ‘‘मैं तुम से बेइंतहा मोहब्बत करता हूं दरखशा और तुम्हें हमेशा के लिए अपनी बनाना चाहता था, लेकिन…’’

‘‘तुम क्या जानो, मैं ने भी तुम्हें कभी भुलाया नहीं है. तुम पहले शख्स थे, जिस के लिए मेरे दिल में चाहत पैदा हुई थी. सपनों में तुम्हें ही शौहर के रूप में देखती थी.’’

दरखशा की बातें सुन कर सत्यवीर ने बाहें फैलाईं तो वह कटी डाल की तरह उन में आ गिरी. यह सब गलत था, लेकिन दरखशा पतन की उस गर्त में कदम रख चुकी थी, जिस की दलदल में कदम पड़ने पर इंसान उस के अंदर तक धंसता चला जाता है. उन के बीच एक बार अवैध संबंधों का जो सिलसिला शुरू हुआ तो उस ने रुकने का नाम नहीं लिया. अपने संबंधों को उन्होंने काफी छिपा कर रखा.

दिक्कत तब आई, जब सत्यवीर ने दरखशा की ससुराल भी जाना शुरू कर दिया. इस के बाद तो उन के संबंधों को चर्चा में आते देर नहीं लगी. उड़तेउड़ते यह बात सरफराज के कानों तक भी पहुंची, लेकिन उस ने कभी इस पर विश्वास नहीं किया. एक दिन जब वह सुधबुध खो कर बांहों में समाए हुए थे तो सरफराज अचानक घर आ गया. उस ने बीवी को गैरमर्द की बांहों में देखा तो आगबबूला हो उठा.

उस ने सत्यवीर को खरीखोटी सुनाई तो वह सिर झुकाए चुपचाप निकल गया. इस के बाद उस ने दरखशा को जम कर लताड़ा, ‘‘मैं आज तक यही समझता रहा कि तुम पाकसाफ औरत हो, लेकिन मुझे पता नहीं था कि तुम इतनी नापाक हो. अपने यार के साथ न जाने कब से गुलछर्रे उड़ा रही हो.’’

दरखशा की गलती थी, इसलिए उस ने खामोश रहना ही बेहतर समझा. इस घटना के बाद दरखशा वक्ती तौर पर बदल गई, लेकिन जल्दी ही उस ने फिर से पुराना ढर्रा अख्तियार कर लिया. दरअसल वे दोनों एकदूसरे की जिस्मानी जरूरत का जरिया बन चुके थे. सत्यवीर को ले कर घर में आए दिन झगड़ा होने लगा. यह झगड़ा बढ़ता तो सरफराज उस के साथ मारपीट भी कर देता.

दिसंबर, 2016 के दूसरे सप्ताह में दोनों के बीच जम कर झगड़ा हुआ. नाराज हो कर दरखशा अपने मायके चली गई. इस दौरान वह सत्यवीर के बराबर संपर्क में रही. सत्यवीर उस से मिलने दिल्ली भी गया. तब दरखशा ने मायूसी से कहा, ‘‘तुम जानते हो सत्यवीर, मैं क्या कुछ झेल रही हूं. यह पक्का है कि अब सरफराज मुझे कभी तुम से नहीं मिलने देगा. लेकिन मैं तुम से मिले बिना रह नहीं सकती. अब तुम्हारी खातिर उस के जुल्मों से मेरी जान भी चली जाए तो मुझे परवाह नहीं.’’

सत्यवीर ने उस के होंठों पर अपनी हथेली रख कर कहा, ‘‘कैसी मनहूस बातें करती हो तुम. जान ही जाएगी तो तुम्हारी नहीं, सरफराज की जाएगी.’’

‘‘मैं खुद भी कब से यही चाहती हूं. अपने प्यार के लिए इस दीवार को आज नहीं तो कल हमें गिराना ही होगा. तड़पभरी जिंदगी मैं अब और नहीं जी सकती.’’

बस, उसी दिन सत्यवीर ने सरफराज की हत्या करने का मन बना कर कहा, ‘‘फिक्र न करो, मैं जल्दी ही कुछ करूंगा.’’

इस के बाद सत्यवीर वापस चला आया. वह जानता था कि हत्या करना उस के अकेले के वश में नहीं है. उस ने दरखशा से अपने रिश्तों की बात बता कर कस्बा जारचा निवासी अपनी बुआ के बेटे रवि और ग्राम लखनावली निवासी दोस्त नितिन से इस मुद्दे पर बात की.

सत्यवीर शातिर था. वह जानता था कि ये लोग बिना लालच के साथ नहीं देंगे, लिहाजा उस ने उन के सामने लालच का पासा फेंकते हुए कहा, ‘‘तुम लोग साथ दोगे तो तुम लोगों को भी हमेशा दरखशा के साथ मौजमस्ती कराऊंगा.’’

‘‘अगर वह नहीं मानी तो?’’ रवि ने सवाल किया.

‘‘मैं ने उस के सामने शर्त रख दी थी और वह इस के लिए खुशीखुशी तैयार है.’’

इस के बाद वे दोनों भी उस का साथ देने को तैयार हो गए. इस के बाद उन्होंने सरफराज की हत्या की योजना बना डाली. 2 जनवरी को सरफराज दरखशा को लेने ससुराल गया तो दरखशा ने यह बात सत्यवीर को फोन से बता दी.

अगले दिन सत्यवीर रवि और नितिन को ले कर कार से दिल्ली चला गया और दरखशा के बताए स्थान पर खड़ा हो गया. सरफराज और दरखशा वहां पहुंचे तो सत्यवीर ने बताया कि वे लोग दिल्ली किसी काम से आए थे, अब वापस जा रहे हैं.

योजना के मुताबिक दरखशा ने उन्हें भी साथ ले चलने को कहा. सरफराज उन के झांसे में आ गया. रास्ते में सभी ने चाय पी. दरखशा ने चकमा दे कर सरफराज की चाय में नशीली दवा मिला दी, जिस के बाद वह कार में ही सो गया. दरखशा को सिकंदराबाद उतार कर सत्यवीर सरफराज को अपने गांव के जंगल में ले गया, जहां तीनों ने मिल कर फावड़े से गला काट कर उस की हत्या कर दी.

बेहोशी के चलते वह विरोध भी नहीं कर सका. इस के बाद उन्होंने शव को एक गड्ढे में दबा दिया और अपनेअपने घर चले गए.

उधर दरखशा ने सरफराज के गाजियाबाद में रुकने की मनगढ़ंत कहानी सुना दी. लेकिन वह अपने ही जाल में उलझ गई. शौहरबीवी के रिश्ते विश्वास के होते हैं, जब कोई इस तरह से किसी को धोखा दे तो अंजाम कभी अच्छा नहीं होता. दरखशा ने भी शौहर को धोखा दे कर पतन की दलदल में कदम न रखे होते तो ऐसी नौबत कभी न आती.

पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ लिखापढ़ी कर के न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मेरे पति सेक्स करने के लिए जोर देते हैं पर मेरा कई बार मन नहीं होता, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 54 वर्षीया विवाहिता हूं. मेरे दोनों बच्चे कालेज जाने लगे हैं. पति बिजनैसमैन हैं. बच्चों के कालेज जाने के बाद घर पर हम दोनों अकेले रह जाते हैं और पति सैक्स करने पर जोर देते हैं. जबकि, मेरा कई बार सैक्स करने का बिलकुल मन नहीं होता, फिर भी करते हैं. मुझे मजबूरन साथ देना पड़ता है. पति का ऐसा व्यवहार करना क्या कहलाएगा?

जवाब

यदि कोई पुरुष अपनी पत्नी को उस की इच्छा के विरुद्ध सैक्स करने पर मजबूर करता है तो इसे मैरिटल रेप या बलात्कार कहते हैं. शादीशुदा होने का यह अर्थ नहीं होता कि दोनों में से कोई भी अपने साथी पर दबाव डाल सकता है. पतिपत्नी के बीच भी यौन संपर्क आपसी सहमति से ही होना चाहिए. शादीशुदा होने या किसी व्यक्ति के साथ संबंध में होने का मतलब यह नहीं होता है कि वे हमेशा सैक्स करना चाहें. ऐसा भी समय हो सकता है जब एक पार्टनर सैक्स न करना चाहता हो, तो ऐसे में उस की इस इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

गांव देहात में मुश्किल हो गया शहनाई बजवाना

Marriage is Big Issue in Village Area: शहरों में अखबारों में शादी के इश्तिहार देने, मैरिज ब्यूरो (Marriage Bureau) , मैट्रिमोनियल साइट (Matrimonial Site) और गैरबिरादरी (Intercaste) में शादीब्याह कराने के बहुत से रास्ते हैं. इन के जरीए शादी के लिए दूल्हादुलहन (Bride and Groom) की तलाश की जा सकती है, पर गांवों में अभी भी केवल परिचितों का ही सहारा है. शहरीकरण का असर बढ़ने से गांव से शहर की तरफ तो लोग जा रहे हैं. गांव के लोगों की गांव में ही शादियां न के बराबर होती हैं. इस वजह से अब गांव में शादी के रिश्ते खोजना मुश्किल होने लगा है.

रामपुर कलां गांव के रहने वाले 70 साल के बुजुर्ग प्रेमपाल कहते हैं, ‘‘समय के साथसाथ गांव की सोच बदली नहीं है, जबकि हालात बदल गए हैं.

‘‘पहले दूरदूर तक नातेरिश्तेदार शादी लायक लड़का या लड़की पर नजर रखते थे. शादी लड़के की पढ़ाईलिखाई से ज्यादा उस के घरपरिवार की हैसियत पर निर्भर करती थी. जिस की खेती अच्छी होती थी उस को ज्यादा अमीर माना जाता था. पर अब नौकरी वाले लड़कों को अहमियत मिलने लगी है.

‘‘शादी के बाद अगर किसी तरह का विवाद होता भी था तो उसे आपस में सुलझा लिया जाता था. अब ऐसे विवाद कोर्ट और पुलिस तक पहुंचने के बाद ही सुलझते हैं. ऐसे में शादी कराने वाले बिचौलिए के रिश्ते खराब होने लगे हैं. वह फालतू के विवाद में नहीं पड़ना चाहता.’’

बिचौलिया वह होता है जो यह बताता है कि शादी के लायक लड़का या लड़की किस घर में है. इस काम को करने वाले लोग हर गांवदेहात में होते थे. नातेरिश्तेदार होने के साथसाथ शादी कराने वाले पंडित तक इस में शामिल होते थे.

शादी कराने के एवज में पंडित को  दक्षिणा मिलने के साथ ही चढ़ावा भी मिलता था. बिचौलिए को किसी तरह का कोई माली फायदा नहीं होता था. शादी में मिलने वाले शगुन और सम्मान में बिचौलिए को खास अहमियत दी जाती थी. यही उस का इनाम होता था.

इन की बढ़ी जिम्मेदारी

अब शादी के लिए रिश्तों की तलाश करने का काम घरपरिवार के लोगों के ही जिम्मे बचा है. अपनी लड़की के लिए दामाद की तलाश कर रहे देव कुमार बताते हैं, ‘‘हम गांव के लोग आपसी जानपहचान के बल पर ही रिश्तों को तलाशने का काम करते हैं. एक शादी करने के लिए कईकई रिश्तों को देखनासमझना पड़ता है. हम अच्छा पढ़ालिखा नौकरी वाला दामाद खोजने की कोशिश करते हैं.

‘‘पहले जहां गांव की खेती, घर और जमीन ही अच्छे रिश्ते का पैमाना होती थी वहीं अब लड़के की नौकरी पहली प्राथमिकता हो गई है. केवल सवर्णों की ही बात नहीं है, बल्कि दलितों और पिछड़ों में भी ऐसे लड़कों को अहमियत दी जाती है जो कामधंधा करते हों.’’

समाजसेवी दिनेश लाल मानते हैं कि आज के समय में गांवों में शादी के लिए रिश्तों को खोजना मुश्किल काम हो गया है. वजह यह है कि रिश्ता खोजने के जितने तरीके शहरों में हैं उतने गांव में नहीं हैं. इस के लिए गांव के लोगों की सोच में बदलाव लाना पड़ेगा. जातिवाद और ऊंचनीच का भेदभाव खत्म करना होगा.

गांव को ले कर लड़कियों की एक यह भी सोच होती है कि गांव में रहने वाले लड़के गालीगलौज, मारपीट और नशा करते हैं, इस वजह से इन से दूर रहो. गांव में कमाई का अहम जरीया खेतीबारी थी, पर अब वह मुनाफे की नहीं रही. गांव के लोग जमीनें बेच कर शहर या कसबों में बसने लगे हैं. ऐसे में गांवदेहात में अच्छे रिश्ते मिलने के मौके कम होते जा रहे हैं.

तरक्की में रुकावट

बहुत से गांव अभी भी ऐसे हैं जहां सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तरह से कमी है. इन गांवों के लोग साफतौर पर कहते हैं कि इन वजहों से गांव में शादी करने वाले लोगों की तादाद लगातार घटती जा रही है. शादी अगर हो भी जाती है तो बाद में विवाद होते हैं.

शादी के बाद होने वाले झगड़ों की वजह से शादी का रिश्ता बताने वाले कम होते जा रहे हैं. लोग शादी के पचड़े में पड़ना ही नहीं चाहते हैं. गांव में तरक्की अगर होती भी है तो सड़क तक दिखती है. सड़क से नीचे उतरते ही उस की पोल खुल जाती है.

जरूरत इस बात की है कि गांव में उद्योगधंधे लगें, जिस से वहां पैसे का आना बढ़ सके, सुविधाएं आ सकें तभी वहां की सोच और हालात बदल सकते हैं. तमाम कोशिशों के बाद भी अभी गांव में शौचालय नहीं बन सके हैं. जहां ये बने भी हैं, वहां उन का इस्तेमाल नहीं होता है.

गांवदेहात के आसपास अभी भी अच्छे डाक्टर नहीं हैं. ऐेसे में झोलाछाप डाक्टर ही वहां इलाज करते हैं. बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छे स्कूलों की भी कमी है. बाजारों में शहरों जैसी चकाचौंध नहीं है. ऐसे में यहां खरीदारी करना भी अच्छा नहीं लगता. इन सब के बीच एक खास वजह यह भी है कि औरतों का सम्मान भी यहां नहीं है. पहले आपसी रिश्तों में औरतों का सम्मान बहुत होता था, पर अब इस में कमी आती जा रही है.

जातिगोत्र की परेशानी

गांव के परिवार अभी भी जातिगोत्र की ऊंचनीच में फंसे हैं. गैरबिरादरी में शादी तो बड़ी दूर की बात है. अपनी ही जाति में काबिल लड़कों की तादाद सब से कम मिलती है. अगर मिलती भी है तो वहां दहेज ज्यादा देना पड़ता है. अब दहेज की मांग इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि काबिल लड़कों की तादाद बहुत कम है. उन के लिए शादी के औफर ज्यादा हैं.

जब बात अपनी जाति की आती है तो यह परेशानी और भी बढ़ जाती है. अपनी ही जाति में मनपसंद लड़के बहुत कम मिलते हैं. काबिलीयत के पैमाने के बाद पर्सनैलिटी के हिसाब से देखें तो भी गांव के लड़के लड़कियों से कमतर दिखते हैं.

गांव के लोगों में गैरबिरादरी में शादी करने का रिवाज नहीं है पर अगर इस चक्कर में शादी की उम्र निकलने लगती है तो बहुत से लोग दूरदराज से शादी कर के लड़की ले आते हैं, जिन की जाति के बारे में किसी को कुछ पता नहीं होता है. धीरेधीरे उन लड़कियों को सामाजिक मंजूरी भी मिल जाती है.

हरियाणा और पंजाब में ऐसे बहुत से उदाहरण मिलते हैं, जहां बिहार, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल की रहने वाली लड़कियां आ जाती हैं. कई लोग तो खरीद कर ऐसी लड़कियों को लाते हैं. इन प्रदेशों में गरीबी ज्यादा है. परिवार में लड़कियों की तादाद ज्यादा होती है. बहुत सारे दलाल शादियां कराने का ठेका लेते हैं.

पहले सेक्स करने के ये हैं फायदे

Sex Benefits in Hindi: आपको इस नए रिश्ते (Relation) में अभी कुछ ही महीने हुए हैं. अभी तक आप लोग एक दूसरे को ढंग से जान भी नहीं पाए हैं कि अचानक ही एक मुलाकात में आप दोनों की चर्चा इस दिशा में बढ़ जाती है कि पूर्व में आप दोनों के कितने रिश्ते रहे हैं. ना सिर्फ आपको अतीत में रहे आपकी गर्लफ्रेंड के बौयफ्रेंडों (Girlfriend-Boyfriend) की संख्या जानकर आश्चर्य होता है, आपकी साथी की प्रतिक्रिया भी आपके पुराने रिश्तों के बारे में जानकर कुछ अजीब ही होती है. कई बार देखा गया है कि जब भी कोई नया रिश्ता शुरू होता है तो दोनों ही साथियो के पूर्व में शारीरिक सम्बन्ध (Physical Relation) भी रहे होते हैं. फिर चाहे वो सम्बन्ध गंभीर रिश्तों के दौरान बने हो या फिर वो एक रात के रिश्ते हो.

ऐसा हो सकता है कि होने वाले साथी के पूर्व में रहे रिश्तों के बारे में जानना किसी के लिए कामोत्तेजक हो या फिर यह भी हो सकता है कि किसी को इस बारे में जानकर बिलकुल भी अच्छा नहीं लगे. लेकिन शोधकर्ता अभी भी निश्चित रूप से किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं कि स्पष्ट रूप से कह सकें कि आखिरकार अपने साथी के पूर्व में रहे रिश्तों के बारे में जानकर लोगों को कैसा लगता है.

सेक्स का अनुभव – कितना फायदेमंद?

यूके के शोधकर्ताओं के एक समूह ने इस बारे में जानने के लिए 18 से 35 साल के 188 युवाओं को इकठ्ठा किया. उन्हें कुछ काल्पनिक लोगों की एक सूची दी गयी जिनके पूर्व में शून्य से लेकर 60 तक या उससे ज्यादा रिश्ते रहे थे. फिर उनसे पूछा गया कि वो उन लोगों के साथ रिश्ता जोड़ने में कितने तैयार होंगे. उन्हें अपने जवाब में 1 से लेकर 9 तक अंक देने थे.

जो लंबे चलने वाले रिश्ते चाहते थे उनकी नजर में वो लोग पहली पसंद थे जिनके पूर्व में दो साथी रहे थे. ऐसे लोगों की औसतन उम्र 21 साल थी. जब सूचना को अलग तरीके से आयोजित किया गया तो यह साफ हो गया कि अधिक उम्र के सहभागियों की नजर में आदर्श साथी वो था जिसके पूर्व में दो से ज्यादा रिश्ते रहे थे.

लेकिन उम्र पर ध्यान दिए बिना गौर किया गया तो एक बात स्पष्ट हो गयी थी, खासकर यूके के नागरिकों के लिए. लोगों को यह तो अच्छा लगता है कि उनके संभावित साथी के पास थोड़ा बहुत यौनिक अनुभव हो, लेकिन अगर किसी के पूर्व में बहुत ज्यादा साथी रहे हों तो यह बात ज्यादातर लोगों को आकर्षित नहीं करती और यह अध्ययन में हिस्सा लेने आये पुरुषों और महिलाओं, दोनों के ही जवाबों से स्पष्ट थी.

लेकिन जब बात हो लघु अवधि के रोमांस के लिए साथी ढूंढने की तो पुरुष और महिलाओं के जवाबों में असमानता पायी गयी. पुरुषों को वो महिलाएं पसंद आयी जिनके पूर्व में दो से लेकर 10 साथी रहे हों, जबकि दूसरी और महिलाएं उन पुरुषों के साथ रिश्ता बनाने की इच्छुक थी जिनके पूर्व में दो से लेकर पांच महिलाओं के साथ शारीरिक सम्बंध रहे हों.

सेक्स और संस्कृति

तो पुरुषों और महिलाओं को दीर्घ-कालिक रिश्तों के लिए ऐसे साथी क्यों पसंद आते हैं जिनको सेक्स का बहुत ज्यादा नहीं, बस थोड़ा बहुत अनुभव हो?

शोधकर्ताओं का कहना था कि अध्ययन से निकले निष्कर्ष उन्हीं संस्कृतियों के लिए उपयुक्त होंगे जहाँ शादी से पहले सेक्स करना स्वीकार्य है. जाहिर सी बात है कि विश्व के उन हिस्सों में जहां शादी से पहले सेक्स को गलत समझा जाता है, वहां एक प्रतिबद्ध रिश्ते से पहले किसी भी प्रकार के यौनिक अनुभव का होना कतई वांछनीय नहीं है.

लेकिन शोधकर्ता यह भी कहते हैं कि ब्रिटैन जैसी कुछ उदार संस्कृतियों में बिलकुल भी यौन अनुभव नया होने का अर्थ यह निकाला जा सकता है कि शायद उस व्यक्ति में सामाजिक कौशल और रिश्तों की समझ की कमी है. अगर आपका अभी तक कोई बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड नहीं है तो हो सकता है कि आप में कोई कमी है!

इसके साथ-साथ कई बार यह भी देखा गया है कि लोग दूसरो के प्रति सिर्फ इसलिए आकर्षित हो जाते हैं क्योंकि और लोग भी उनकी तरफ आकर्षित हैं. इसे ‘मेट-चॉइस कोपयिन्ग’ का नाम दिया गया है. आपके पास यौन अनुभव है तो इसका मतलब है कि लोग आपको पसंद करते हैं और इसलिए किसी को आप अच्छे लग सकते हैं.

धोखेबाज?

संस्कृति चाहे कोई भी हो, शोधकर्ताओं को लगता है कि जिन लोगों के पूर्व में बहुत सारे प्रेमी रहे हैं, वो उन लोगों की पहली पसंद कभी नहीं बन पाते जो अपने साथी के साथ दीर्घ-कालिक रिश्ता बनाना चाहते हैं. शायद उन्हें यह लगता हो कि जिस व्यक्ति के इतने सारे साथी हो उससे यौन संक्रमण का खतरा हो सकता है. शोधकर्ता कहते हैं कि आंकड़ों पर नजर डालें तो जिस व्यक्ति के कई साथी रहे हों, उसके लिए किसी दीर्घकालिक रिश्ते में रहना या किसी रिश्ते में ईमानदार रहना मुश्किल हो सकता है.

नम्रता मल्ला का नया वीडियो हुआ वायरल, बोल्डनैस का लगाया तड़का

भोजपुरी कलाकार नम्रता मल्ला अपनी खूबसूरती और डांसिंग के लिए जानी जाती हैं. नम्रता मल्ला जैसे ही ठुमके लगाती हैं पूरा यूपीबिहार झूमने लगता है. नम्रता मल्ला डांसिंग के मामले में हरियाणा की डांस क्वीन सपना चौधरी को भी टक्कर देती हैं.

 

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इस बीच भोजपुरी डांसर नम्रता मल्ला का एक कातिलाना वीडियो सामने आया है, जिस में वे गजब का डांस कर रही हैं. उन का यह अंदाज फैंस को काफी पसंद आ रहा है. यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

भोजपुरी हीरोइन नम्रता मल्ला ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को अपडेट करते हुए एक वीडियो शेयर किया है. इस क्लिप में नम्रता मल्ला अपने ही गाने ‘छम्माछम्मा’ पर कमरतोड़ डांस करती नजर आ रही हैं. इस वीडियो में नम्रता मल्ला का अंदाज इतना कातिलाना है कि हर कोई घायल हो जाता है. इस क्लिप में नम्रता मल्ला बेहद बोल्ड लग रही हैं. लोग इस वीडियो पर जम कर प्यार बरसा रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, ‘तुम ने आफत मचा दी है.’ दूसरे यूजर ने लिखा, ‘नम्रताजी, मार ही डालोगी आप.’

 

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आप को बता दें कि नम्रता मल्ला सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रहती हैं. वे अकसर अपने फैंस के साथ तसवीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं. उन के हर पोस्ट पर फैंस लुटाते हैं.

नम्रता मल्ला की फैन फौलोइंग काफी तगड़ी है, इस मामले में वे बौलीवुड और टीवी हीरोइनों को टक्कर देती हैं. बता दें कि इंस्टाग्राम पर नम्रता मल्ला को 2.5 मिलियन लोग फौलो करते हैं. नम्रता मल्ला ने कई म्यूजिक वीडियो में अपना जलवा बिखेरा हैं. उन का ‘और पवन सिंह का गाना ‘लाल घाघरा काफी पौपुलर हुआ था. इस गाने ने इंटरनैट पर जम कर गर्दा उड़ाया था.

शुभमन गिल संग अफेयर की चर्चाओं पर सारा अली खान ने तोड़ी चुप्पी

बौलीवुड की जानीमानी एक्ट्रेस सारा अली खान अपनी एक्टिंग और बिंदास वीडियोज के लिए जानी जाती है उनका लोगों के साथ मिलनाजुलना लोगों को खूब पसंद आता है. वही, उनका स्टाइल भी काफी यूनिक है. ऐसे में सारा अली खान की फिल्मों के अलावा अफेयर्स की भी चर्चाएं होती रहती है शुभमन गिल के साथ उनका कई बार नाम जोड़ा जा चुका है, अब सारा अली खान ने ‘कौफी विद करण 8’ शो में इस बात का खुलासा किया है. कि इन बातों में कितनी सच्चाई है.

 

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आपको बता दें, करण जोहर का शो कौफी विद करण 8 शुरु हो चुका है. शो के पहले गेस्ट दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह बने थे. जिनकी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी. अब वही, इस शो में दूसरे गेस्ट बनने जा रहे है सारा अली खान और अन्नया पांडे. जिसका प्रोमो वीडियो सामने आया है इस वीडियो में सारा से उनके अफेयर्स को लेकर सवाल किए गए है. जिस पर सारा ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है. पहला सवाल उनसे शुभमन गिल को लेकर किया गया.

आपको बता दें कि सारा अली खान का नाम काफी लंबे समय तक शुभमन गिल से जुड़ता रहा है. शुभमन गिल और सारा अली खान के अफेयर को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी दावा किया गया था. लेकिन करण जौहर के चैट शो ‘कॉफी विद करण 8’ में सारा अली खान फर्जी साबित कर दिया. सारा अली खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

 

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इस वीडियो में करण जौहर पूछा कि शुभमन गिल संग अफेयर की अफवाहें उड़ी थी. इसके जवाब में सारा अली खान ने कहा- ‘आप गलत सारा को लेकर आ गए है. सारा का सारा दुनिया गलत सारा के पीछे पड़ा है.’ सारा अली खान के इस जवाब के बाद सारा तेंदुलकर चर्चा में आ गई हैं. आपको बताते चले कि सारा तेंदुलकर का नाम भी शुभमन गिल संग जुड़ चुका है.

इस चैट शो में सारा अली खान के साथ उनकी दोस्त अनन्या पांडे भी नजर आईं थी. इस दौरान सारा अली खान ने रेड कलर की ड्रेस पहन रखी थी. तो वहीं अनन्या पांडे ब्लैक कलर की बोल्ड ड्रेस में नजर आईं. अनन्या पांडे ने भी शो के दौरान अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़े कई बड़े खुलासे करने वाली हैं.

इलैक्शन की तैयारी : गोपाल फंसा बवाल में

जोरजोर से लाउडस्पीकर से नेताजी के पहुंचने की खबर दी जा रही थी. हालांकि धीमी आवाज में लाउडस्पीकर बजाने का सरकारी आदेश था, फिर भी पुलिस वाले चुप्पी साधे थे. जनता धूप में घंटों बैठी इंतजार कर रही थी. भरी दोपहरी में पास के एक खेत में उन का हैलीकौप्टर लैंड करने वाला था.

गोपाल अपने खेत में किनारे चुपचाप खड़ा उन के आने का इंतजार कर रहा था. वह सहमा हुआ था. पिछली रात पुलिस वालों ने उस के खेत में लगे गेहूं को जला डाला था, क्योंकि नेताजी का हैलीकौप्टर उसी के खेत में उतरना था. उस की पहुंच भी अगर नेताजी तक होती, तो शायद ऐसा नहीं होता.

महाजन से कर्ज ले कर उस ने फसल को बड़ी मेहनत से लगाया था. अब तो वह इस साल भी उन का कर्ज नहीं भर पाएगा. खाने के लाले तो पड़ ही गए थे, ऐसे में खुदकुशी ही उस के लिए आखिरी रास्ता दिख रहा था.

थोड़ी देर में नेताजी का हैलीकौप्टर जैसे ही खेत में उतरा, चारों तरफ काले कपड़े वाले बंदूकधारी उन्हें घेर कर खड़े हो गए. अब उन के आसपास कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता था.

गोपाल भी गेहूं जलाने का मुआवजा लेने के लिए अर्जी लिए खड़ा था. लेकिन सिक्योरिटी वालों ने उसे डंडे मार कर भगा दिया.

नेताजी मंच पर पहुंच चुके थे. उन के नाम का जयकारा लग रहा था. काली वरदी में बौडीगार्ड की नजरें चारों तरफ थीं. उन की जान को खतरा बढ़ गया था, क्योंकि वे सरकार के खिलाफ जोरदार आवाज उठा रहे थे.

थोड़ी ही देर में नेताजी का भाषण शुरू हो गया, ‘‘ऐनकाउंटर का दौर जारी है. पुलिस भरम में है. हर मंच पर मुख्यमंत्रीजी की बस एक ही रट है ‘ठोंक दो’. कभीकभी तो पुलिस समझ नहीं पाती कि किसे रोकना है और किसे ठोंकना है. ऐनकाउंटर किसी भी तरह से सही नहीं हो सकता. इंसाफ कानूनी तरीके से होना चाहिए. आज कोई भी महफूज नहीं है. बेरोजगारी हद पर है. लोग अपनेआप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं.

‘‘एक बार आप हमें भी मौका दें. मेरी पार्टी ‘जंगलराज’ की जगह ‘मंगलराज’ लाएगी. सभी को बिजली, पानी और रोजगार मुहैया कराएगी. प्रदेश में अमन और शांति होगी.’’

मैं भी भीड़ में खड़ा उन की बातें सुन रहा था, तभी मेरा दोस्त विराट दिखाई दिया. मैं उस के पास जा कर कहने लगा, ‘‘बात तो सच ही कह रहे हैं नेताजी. प्रदेश में अपराध चोटी पर है. अपराधियों के मनोबल बढ़े हुए हैं. जब कोई नेता सिक्योरिटी के घेरे में मारा जा सकता है, तो आम आदमी की क्या बिसात है?’’

‘‘मगर बात यह भी तो है कि अब प्रोफैशनल अपराधी या माफिया किसी को धमकाते तो नहीं हैं. पहले राज्य की साख पर सवाल उठते थे. अब अपराधी खाक में मिल रहे हैं. वे मिट्टी में मिलाए जा रहे हैं. उन का साम्राज्य खत्म हो रहा है. शहर में पिछले कई सालों से दंगेफसाद नहीं हुए हैं. प्रदेश में कानून का राज है,’’ विराट ने जवाब दिया.

‘‘यार, कैसी बात करते हो? प्रदेश ऐनकाउंटर राज्य बन गया है. फेक ऐनकाउंटर हो रहे हैं. अपने आदमियों को सिक्योरिटी दी जा रही है. दंगे करा कर उन्हें सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है.

‘‘कोर्ट को इन बेहद संगीन और चिंताजनक हालात का संज्ञान लेना चाहिए. दिनदहाड़े लोगों की हत्या हो रही है. तुष्टीकरण की राजनीति हावी है और तुम कह रहे हो अमन और शांति है,’’ मैं ने उसे समझाया.

उधर नेताजी का चुनावी भाषण जारी था. वे उस माफिया का जिक्र कर रहे थे, जिस की पिछले हफ्ते हत्या हो गई थी. वह मेरे गांव का प्रधान था. उस ने 8 साल की बच्ची के साथ बलात्कार कर उस की हत्या कर दी थी.

इस दर्दनाक घटना से गांव वाले बहुत ही नाराज थे. लेकिन किसी की हिम्मत नहीं थी कि वह थाने में जा कर रिपोर्ट लिखवाए. सभी डरे हुए थे. सब को पता था कि जो भी थाने जाएगा, थानेदार उसी को ठोंक देगा. प्रधान की पहुंच ऊपर तक थी.

नेताजी पुलिस के निकम्मेपन पर नाराज थे. कह रहे थे, ‘‘कचहरी में दिनदहाड़े गोली चलती है और गवाह को मार दिया जाता है. पूरे प्रदेश में गुंडेमाफिया का राज है. कानून व्यवस्था चरमरा गई है. अब तो लोगों की जान पर आ पड़ी है.’’

आधे घंटे का भाषण खत्म हो गया था. सभी अपनेअपने घर जाने लगे. भाड़े पर लाए गए लोग झंडे लहराते हुए नारे लगा रहे थे.

कुछ लोग आसपास की दुकानों पर बैठ कर तरहतरह की बातें कर रहे थे. मैं खड़ा हो कर सुनने लगा.

‘यह सरकार गुंडेबदमाशों को छोड़ने वाली नहीं है. इन्हें मिट्टी में मिला कर ही दम लेगी…’

‘अगर बहनबेटियों पर बुरी नजर डाली तो कुचल दिए जाओगे, मकानों और दुकानों का पता नहीं चलेगा. अब बुलडोजर अगले चुनाव तक रुकने वाला नहीं…’

लोग सरकार के पक्ष और विपक्ष में बहसबाजी कर रहे थे. कोई कह रहा था, ‘अरे, गुंडेबदमाशों की सजा उन के बालबच्चों को देना कहां का इंसाफ है.’

‘कैसी बात करते हो… उन के उजड़े आशियानों का मलबा भी अब कोई बीनने वाला नहीं रहेगा…’

‘मुख्यमंत्रीजी तो सीना ठोंक कर कह रहे हैं कि जिन घरों से पत्थर आए हैं, उन्हें पत्थर का ढेर बना देंगे…’

‘अरे भाई, देश में जेलों की संख्या बढ़ रही है. इस का मतलब तो साफ है कि अपराधियों की संख्या बढ़ रही है. लोग पहले से कहीं ज्यादा की संख्या में अपराध कर रहे हैं.

‘यह कैसा सुशासन है? जिस देश में जितनी ज्यादा जेलों की संख्या होगी, उतना ही ज्यादा वहां के लोगों का चरित्र गिरा हुआ होगा. वहां अपराधियों का बोलबाला होगा…’

‘भैया, जेल में बंद उन लोगों के बारे में भी जरा सोचिए, जो एक थप्पड़ मारने के चलते कई सालों से जेल में बंद हैं. उन को न तो अपना अधिकार पता है और न संविधान…’

‘यह कैसा विकास है? क्या जेलों की संख्या बढ़ना ही विकास है? हां, छापेमारी में विकास जरूर तेजी से हुआ है. वह भी अपने लोगों पर नहीं…’

मैं भी सोचने लगा, ‘बात तो पते की है. कैदियों का एक बड़ा वर्ग अनपढ़, सामाजिक रूप से कमजोर और गरीब होता है. वे लोग अपने मामले से जुड़े दस्तावेजों को पढ़ भी नहीं पाते और न ही कानूनी प्रक्रियाओं की उन्हें समझ है. वे जेल से बाहर भी नहीं आना चाहते, क्योंकि बाहर आने पर समाज उन से बुरा बरताव करता है.

‘गरीब अपराधी अपनी सजा पूरी करने के बाद भी घर नहीं जाना चाहते. कई बार तो परिवार वाले भी उन्हें लेने नहीं आते. बूढ़े कैदी तो जिंदगी की आखिरी सांस तक जेल में ही रहना चाहते हैं. गरीब जनता ही दोनों तरफ से पीसी जाती है.’

पूरे रास्ते लोग तरहतरह की बातें कर रहे थे. मुझे से भी रहा नहीं गया और बोल पड़ा, ‘‘इसी को कहते हैं भोगराज. सत्ता का भोग नसीब से ही मिलता है.’’

मैं तेजी से अस्पताल की ओर बढ़ रहा था. मुझे अपनी मैडिकल रिपोर्ट लेनी थी. तभी अचानक चौराहे पर गोली चलने की आवाज आई. कोई ‘जय श्रीराम… जय श्रीराम’ का नारा लगा रहा था. हम भी तेजी से चौराहे की तरफ बढ़ गए.

चौराहे पर पुलिस की भीड़ थी. मैं ने हैरानी से लोगों से पूछा, ‘‘क्या हुआ? ‘जय श्रीराम’ का नारा क्यों लग रहा था?’’

बगल में खड़े आदमी ने सहमी आवाज में बताया, ‘‘हत्या कर दी गई.’’

‘‘किस की?’’

‘‘बाहुबली की.’’

‘‘मर्डर हुआ या ऐनकाउंटर,’’ मैं ने हैरानी से पूछा.

‘‘मर्डर…’’

‘‘फिर इस में ‘राम’ का नारा क्यों?’’

‘‘यही तो राजकाज है भैया. पहले ‘राम’ घटघट में थे, अब इन लोगों ने उन्हें घट से घाट तक घसीट लिया है,’’ वह आदमी यह कहते हुए धीरे से खिसक लिया.

तभी अचानक मेरी पत्नी का फोन आ गया. वे बड़ी घबराई हुई सी बोल रही थीं, ‘‘अरे, कहां हो…? जल्दी घर आ जाओ.’’

‘‘क्या हुआ…? इतना परेशान क्यों दिख रही हो?’’

‘‘सभी जगह छापे पड़ रहे हैं. शर्माजी, वर्माजी, शुक्लाजी बाहर खड़े हैं. अंदर घर में पुलिस घुसी है. मुझे घबराहट हो रही है.’’

मैं भी घबरा गया, आटोरिकशा खोजने लगा. पर कोई न मिला. सभी जान बचा कर भाग गए थे. रोड सुनसान हो गई थी. चप्पेचप्पे पर पुलिस डंडा लिए खड़ी थी. सभी थानों को हाई अलर्ट पर रखा गया था. इंटरनैट सेवाएं बंद कर दी गई थीं. मैं पैदल ही किसी तरह घर की तरफ भागा.

श्रीमतीजी दरवाजे पर खड़ी बड़ी बेसब्री से मेरा इंतजार कर रही थीं. मुझे देखते ही उन की जान में जान आई. लेकिन कमरे में घुसते ही वे बरस पड़ीं, ‘‘ऐसे हालात में तुम क्या कर रहे थे. रिपोर्ट लाए क्या?’’

‘‘क्या बताऊं… अस्पताल तो जा ही नहीं सका. नेताजी के भाषण के बाद ही मर्डर और फिर हाई अलर्ट. बस समझ कि जान बचा कर भागा, वरना मुझे भी डंडे पड़ते और जेल में बंद होता सो अलग…’’ सहमा सा मैं सोफे पर जा कर बैठ गया.

तभी निशी बिटिया खुशी से दौड़ते हुए मेरे पास आई और बोलने लगी, ‘‘पापा, 5 दिन के लिए स्कूल बंद हो गए हैं. टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज चल रही है. ऐसा क्यों हो गया पापाजी?’’

मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि उस नासमझ को क्या बताऊं. लेकिन वह जिद करने लगी, तो मुझे बोलना ही पड़ा, ‘‘बेटी, अगले इलैक्शन की तैयारी हो रही है.’’

उसे कुछ समझ में नहीं आया और खेलने भाग गई. स्कूल बंद होने से महल्ले के बच्चे बहुत खुश थे.

बोया पेड़ बबूल का : मांबेटी का द्वंद्व

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