Oops Moment का शिकार हुआ भोजपुरी एक्ट्रेस, रील बनाते हुए उड़ी स्कर्ट

भोजपुरी एक्ट्रेस श्वेता शर्मा (Shweta Sharma) अपने बोल्ड अंदाज के लिए जानी जाती हैं. एक्ट्रेस बोल्डनेस के मामले में नम्रता मल्ला (Namrata Malla) और सोफिया अंसारी (Sofia Ansari) को भी टक्कर देती हैं. श्वेता शर्मा की तस्वीरें और वीडियोज इंटरनेट पर खूब वायरल होते हैं. यही वजह है कि श्वेता शर्मा अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं. इस बीच एक्ट्रेस श्वेता शर्मा का एक पुराना वीडियो सामने आया है, जो कि इंटरनेट पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है. इस क्लिप में श्वेता शर्मा ऊप्स मोमेंट का शिकार हो गई हैं.

 

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भोजपुरी एक्ट्रेस श्वेता शर्मा (Shweta Sharma Video) का एक पुराना वीडियो इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है. इस क्लिप में श्वेता शर्मा गोविंदा की फिल्म ‘जिस देश में गंगा रहता है’ के ‘प्रेम जाल में फंस गयी मैं तो’ गाने पर डांस कर रही हैं. इस बीच उनकी स्कर्ट उड़ जाती है और वो ऊप्स मोमेंट का शिकार हो जाती है. हालांकि एक्ट्रेस श्वेता शर्मा ने इस रील वीडियो में जबरदस्त डांस किया है. लोगों को श्वेता का ये अवतार पसंद आ रहा है. लेकिन कुछ लोग उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं.

 

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भोजपुरी एक्ट्रेस श्वेता शर्मा (Shweta Sharma) ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वो हिपहॉप करती नजर आई थीं. श्वेता शर्मा के इस वीडियो पर लोगों ने दिल खोलकर प्यार बरसाया था. इस क्लिप में श्वेता शर्मा शर्ट के बटन खोल फैंस की धड़कनें तेज कर दी थीं. बताते चलें कि भोजपुरी एक्ट्रेस श्वेता शर्मा की तस्वीरों का फैंस बेसब्री से इंतजार करते हैं। इसी वजह से श्वेता अपने फैंस के साथ तस्वीरें शेयर करती रहती हैं.

नन्हा सा मन: कैसे बदल गई पिंकी की हंसतीखेलती दुनिया

Story in Hindi

दबंग कर रहे दलित दूल्हों की दुर्गति

Society News in Hindi: यह घटना इसी साल के जून महीने की है. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छतरपुर (Chhatarpur) में चौराई गांव का रितेश अपनी शादी पर जैसे ही घोड़ी पर चढ़ा, गांव के कुछ लोगों ने इस बात का विरोध किया. हंगामा बढ़ा, तो पुलिस आई. लेकिन पुलिस की मौजूदगी में ही बरात पर पत्थरबाजी शुरू हो गई. दरअसल, रितेश अहिरवार दलित था. उस की बरात पर पत्थरबाजी इसलिए हुई कि कैसे कोई दलित घोड़ी पर चढ़ कर अपनी बरात ले जा सकता है? इस पूरे मामले में सरकारी काम में बाधा डालने, मारपीट करने और हरिजन ऐक्ट (Harijan Act) के तहत एफआईआर हुई थी. देश का संविधान (constitution) कहने को ही सभी को बराबरी का हक देता है, लेकिन एक कड़वा और अकसर देखा जाने वाला सच यह है कि जो दलित दूल्हा घोड़ी चढ़ने की हिमाकत या जुर्रत करता है, दबंग लोग उस की ऐसी दुर्गति करते हैं कि कहने में झिझक होती है कि वाकई देश में कोई लोकतंत्र वजूद में है, जिस का राग सरकार, नेता, समाजसेवी, राजनीतिक पार्टियां और पढ़ेलिखे समझदार लोग अलापा करते हैं.

छुआछूत दूर हो गई, जातपांत का भेदभाव खत्म हो गया और अब सभी बराबर हैं, ये कहने भर की बातें हैं. हकीकत यह है कि यह प्रचार खुद दबंग और उन के कट्टरवादी संगठन करते रहते हैं, जिस से समाज की अंदरूनी हालत और सच दबे रहें और वे दलितों पर बदस्तूर सदियों से चले आ रहे जुल्मोसितम ढाते हुए ऊंची जाति वाला होने का अपना गुरूर कायम रखें.

जड़ में है धर्म

किसी भी गांव, कसबे या शहर में देख लें, कोई न कोई छोटा या बड़ा बाबा पंडाल में बैठ कर प्रवचन या भागवत बांचता नजर आएगा. ये बाबा लोग कभी बराबरी की, छुआछूत दूर करने की या जातपांत खत्म करने की बात नहीं करते. वजह सिर्फ इतनी भर नहीं है कि धार्मिक किताबों में ऐसा नहीं लिखा है, बल्कि यह भी है कि इन की दुकान चलती ही जातिगत भेदभाव से है.

अपनी दुकान चमकाए रखने के लिए धर्म की आड़ में समाज में पड़ी फूट को हवा दे रहे बाबा घुमाफिरा कर दबंगों को उकसाते हैं और दलितों को उन के दलितपने का एहसास कराते हुए नीचा दिखाने में लगे रहते हैं. इन पर न तो कोई कानून लागू होता है, न ही कोई इन की मुखालफत कर पाता है, क्योंकि मामला धर्म का जो होता है.

फसाद की असल जड़ धर्म और उस के उसूल हैं, जिन के मुताबिक शूद्र यानी छोटी जाति वाले जानवरों से भी गएबीते हैं. उन्हें घोड़ी पर बैठ कर बरात निकालने का हक तो दूर की बात है, सवर्णों के बराबर बैठने का भी हक नहीं है, इसलिए आएदिन ऐसी खबरें पढ़ने में आती रहती हैं कि दलितों को पानी भरने से रोका, वे नहीं माने तो उन की औरतोंबच्चों को बेइज्जत किया, मर्दों को पीटा और इस पर भी नहीं माने तो गांव से ही खदेड़ दिया.

यही वजह है कि करोड़ों दलित दबंगों के कहर का शिकार हो कर घुटन भरी जिंदगी जी रहे हैं, पर उन की सुनने वाला कोई नहीं.

इस पर तुर्रा यह कि हम एक आजाद लोकतांत्रिक देश की खुली हवा में सांस लेते हैं, जिस में संविधान सभी को बराबरी का हक देता है. यह मजाक कब और कैसे दूर होगा, कोई नहीं जानता.

चिंता की बात यह भी है कि दलितों पर जोरजुल्म लगातार बढ़ रहे हैं, जिन की तरफ किसी राजनीतिक पार्टी, नेता या समाज के ठेकेदारों का ध्यान नहीं जो बड़ीबड़ी बातें करते हैं, रैलियां निकालते हैं और दलितों को बरगलाने के लिए बुद्ध और अंबेडकर जयंतियां मनाते हैं. इस साजिश को, जो धर्म और राजनीति की देन है, दलित समझ पाएं तभी वे इज्जत और गैरत की जिंदगी जी पाएंगे.

सैक्स पर चर्चा : नीतीश कुमार के बयान पर ओछी राजनीति

Political News in Hindi: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) आज उम्र की जिस दहलीज पर हैं, उन के द्वारा औरतों के सिलसिले में सैक्स को ले कर जिस तरह का बयान बिहार विधानसभा में आया और फिर थोड़े ही समय में नीतीश कुमार ने जिस अदबी के साथ माफी मांगी तो फिर नैतिकता का तकाजा यह है कि मामला खत्म हो जाता है. मगर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narender Modi) ने जैसे नीतीश कुमार के बयान को लपक लिया और बांहें खींच रहे हैं, वह यह बताता है कि भारतीय जनता पार्टी और उस का नेतृत्व आज कैसी राजनीति कर रहा है और देश को गड्ढे की ओर ले जाने में रोल निभा रहा है.

आप कल्पना कीजिए कि देश में अगर अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री होते तो क्या इस मामले को नरेंद्र मोदी की तरह तूल देते? आज देश में अगर पीवी नरसिंह राव प्रधानमंत्री होते या फिर डाक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होते, तो क्या इस तरह मामले को तूल दिया जाता? शायद कभी नहीं.

दरअसल, नरेंद्र मोदी की यह फितरत है कि वे अपने लोगों को तो हर अपराध के लिए माफ कर देते हैं, मगर गैरों को माफ नहीं करते. उन के पास बरताव करने के दूसरे तरीके हैं, जो कम से कम प्रधानमंत्री पद पर होते हुए उन्हें शोभा नहीं देता.

देश का आम आदमी भी जानता है कि किसी भी विधानसभा में दिया गया बयान रिकौर्ड से हटाया भी जाता है और उस पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती. मगर भाजपा जिस तरह नीतीश कुमार पर हमलावर है, वह बताता है कि उसे न तो संविधान से सरोकार है और न ही किसी नैतिकता से. किसी की छवि को खराब करना और किसी भी तरह सत्ता हासिल

करना ही आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा का मकसद बन कर रह गया है.

शायद यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 8 नवंबर, 2023 को बिहार विधानसभा में महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को ले कर बिना नाम लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना की और कहा, ‘‘महिलाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए वह जो भी कर सकेंगे, करेंगे. महिलाओं का इतना अपमान होने के बावजूद विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’

के घटक दलों ने एक शब्द भी नहीं बोला है.’’

नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘कल ‘इंडिया’ गठबंधन के बड़े नेताओं में से एक, जो ब्लौक का झंडा ऊंचा रख रहे हैं और वर्तमान सरकार (केंद्र में) को हटाने के लिए तरहतरह के खेल खेल रहे हैं, उन्होंने माताओंबहनों की उपस्थिति में राज्य विधानसभा में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिस के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता… उन्हें इस के लिए शर्म तक महसूस नहीं हुई. ऐसी दृष्टि रखने वाले आप का मानसम्मान कैसे रखेंगे? वे कितना नीचे गिरेंगे? देश के लिए कितनी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.’’

जबकि यह कानून है कि विधानसभा में दिए गए बयान पर कोई कानूनी संज्ञान नहीं दिया जा सकता, इस के बावजूद भाजपा नेतृत्व में वह सब किया जा रहा है जो कानून के खिलाफ है. इस का सब से बड़ा उदाहरण है महिला आयोग द्वारा नीतीश कुमार के वक्तव्य पर संज्ञान लिया जाना.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने बिहार विधानसभा के अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी को पत्र लिख कर यह आग्रह किया कि वे सदन के भीतर की गई अपमानजनक टिप्पणी के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करें.

पत्र में आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि हम जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा ऐसे बयानों की कड़ी निंदा करती हैं.

दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब यह कहते हैं कि महिलाओं के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करूंगा, तो हंसी आती है, क्योंकि देश ने देखा है कि किस तरह देश की बेटियों ने जंतरमंतर पर भाजपा के एक सांसद और महत्त्वपूर्ण पदाधिकारी के खिलाफ अनशन किया था, मगर आज तक उन्हें इंसाफ नहीं मिल पाया है.

सनकी हत्यारा : खून से लथपथ लाश और बेसबौल का डंडा

Crime News in Hindi: सोमनाथ से जबलपुर (Jabalpur) तक आने वाली सोमनाथ एक्सप्रैस ट्रेन 17 दिसंबर, 2018 को शाम करीब 5 बजे जब जबलपुर स्टेशन पहुंची तो सैकड़ों यात्रियों के साथ एक कोच में सवार मनीष वाजपेयी भी प्लेटफार्म नंबर 3 पर उतरे. मनीष वाजपेयी नर्मदा विकास प्राधिकरण (Narmda Development Authority) में इंसपेक्टर (Inspector) के पद पर नौकरी करते थे. मनीष का परिवार जबलपुर के गढ़ा थाना इलाके में इंदिरा गांधी वार्ड की अजनी सोसाइटी में रहता था. मनीष की पोस्टिंग जबलपुर के नजदीक जिले नरसिंहपुर में थी इसलिए वह रोज सुबह ट्रेन से जाने के बाद शाम को सोमनाथ एक्सप्रैस (Somnath Express) से ही वापस घर आ जाते थे. मनीष के 2 बेटे हैं, जिन में से बड़ा बेटा इंदौर में इंजीनियर है और छोटा बेटा नरसिंहपुर के पास मुगली गांव में अपने नानानानी के पास रह कर खेती का काम संभालता है. इस तरह उन की पत्नी विनीता दिन भर में अकेली रह जाती थी. इसलिए शाम को स्टेशन से उतर कर घर जाने से पहले मनीष पत्नी को फोन जरूर करते थे ताकि घर की जरूरत का सामान रास्ते से खरीदते हुए घर पहुंचे.

उस रोज भी मनीष ने जबलपुर स्टेशन से बाहर निकल कर पत्नी विनीता से बात की और फिर सीधे घर पहुंच गए. घर पहुंचने तो उन्हें दरवाजे के चैनल गेट पर अंदर से ताला पड़ा मिला. घर में अकेले रहने पर विनीता चैनल पर ताला लगा देती थी. मनीष ने घंटी बजाई और कुछ देर तक पत्नी द्वारा दरवाजा खोलने का इंतजार किया. लेकिन काफी देर बाद भी विनीता दरवाजा खोलने नहीं आई तो मनीष ने कई बार दरवाजा पीटा व घंटी बजाई. उन्होंने पत्नी के मोबाइल पर भी रिंग की परंतु कोई परिणाम नहीं निकला.
इसी बीच पड़ोस में रहने वाले अशोक वर्मा बाहर आए तो मनीष को दरवाजे पर खड़ा देख कर वह एक मिनट उन के पास रुक कर बात करने लगे. तब मनीष ने विनीता द्वारा दरवाजा न खोलने की बात उन्हें बताई तो अशोक शर्मा ने कहा कि हो सकता है कि विनीता वाशरूम में हो. अशोक मनीष को तब तक अपने घर चाय पीने के लिए ले गए.

मनीष अशोक वर्मा के घर चाय पीतेपीते भी कई बार पत्नी का मोबाइल नंबर मिलाते रहे. लेकिन पत्नी के मोबाइल की घंटी लगातार बज रही थी, पर वह फोन नहीं उठा रही थी. मनीष परेशान थे कि आखिर वह कहां है जो फोन भी नहीं उठा रही.

चाय पीने के बाद दोनों फिर बाहर आ गए. मनीष ने फिर से अपने घर की घंटी बजाई पर कोई नतीजा नहीं निकला. फिर मनीष के कहने पर अशोक वर्मा अपने घर के आंगन से बाउंड्री वाल फांद कर मनीष की छत पर पहुंचे. उन्होंने घर में उतर कर कमरे का नजारा देखा तो वहां उन्हें सब कुछ ठीक नहीं लगा.
अशोक को घबराया देख खुद मनीष भी बाउंड्री वाल फांद कर अपने घर में दाखिल हो गए. जब वह ऊपर की मंजिल पर पहुंचे तो वहां का नजारा देख कर उन के होश उड़ गए.

उन की पत्नी विनीता खून से लथपथ फर्श पर पड़ी थी. विनीता के गले में पतली रस्सी भी बंधी थी. और पास ही खून से सना बेसबौल का डंडा पड़ा था. यह सब देख कर मनीष अपना होश खो बैठे. उन्होंने तत्काल गैलरी के गेट का ताला तोड़ कर पुलिस व ऐंबुलेंस को फोन किया.

घटना की जानकारी मिलते ही गढ़ा थानाप्रभारी शफीक खान पुलिस फोर्स ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. पहली ही नजर में साफ था कि विनीता की मौत हो चुकी थी. गले में रस्सी बंधी थी और चेहरा पूरी तरह से खराब हो चुका था. मामला हत्या का देख कर थानाप्रभारी ने एसपी अमित सिंह, एएसपी संजीव उइक सीएसपी दीपक मिश्रा को भी घटना की जानकारी दे दी. जिस से एएसपी उइक और सीएसपी दीपक मिश्रा के अलावा एफएसएल और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की टीम भी मौके पर पहुंच गई.

इंसपेक्टर खान ने पूरे मकान का बारीकी से निरीक्षण किया तो पाया कि हत्यारे ने मकान में फ्रेंडली एंट्री की थी. इस का मतलब यह निकला कि हत्यारा विनीता का परिचित ही था. घटनास्थल की जांच और जरूरी काररवाई करने के बाद पुलिस ने विनीता की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

पुलिस ने मनीष से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन की शाम करीब 5 बजे विनीता से फोन पर उस समय बात हुई थी जब वह ट्रेन से जबलपुर स्टेशन पर उतरे थे. स्टेशन से घर आने में उन्हें 25 मिनट लगे थे. उसी दौरान विनीता के साथ वारदात हुई थी.

चूंकि घर का सभी सामान सुरक्षित था इसलिए हत्या का मकसद लूट नहीं था. 25 मिनट में इतनी सफाई से हत्या कर हत्यारा भाग ही नहीं सकता था. इस से साफ था कि हत्यारा विनीता के साथ घर में पहले से मौजूद रहा होगा. हत्यारा विनीता का मोबाइल अपने साथ ले गया. मतलब साफ था कि मोबाइल के माध्यम से हत्यारे की पहचान संभव थी.

पुलिस ने मृतका विनीता के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाने के अलावा उस के बैकग्राउंड की भी जांच शुरू कर दी. इस के अलावा मनीष वाजपेयी के यहां आनेजाने वालों की सूची बना कर उन सब से भी पूछताछ की.

इस दौरान पता चला कि इन सब में से एक परिचित शहर से लापता मिला और उस का मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था. इसलिए पुलिस ने शक की सुई उसी आदमी की तरफ घुमा दी.

इसी बीच पुलिस का ध्यान एक ऐसे फोन नंबर की तरफ भी गया जिस से विनीता के पास अकसर फोन आता था. इस नंबर पर दोनों के बीच वाट्सऐप पर हुई चैटिंग की पुलिस ने जांच की तो पता चला कि उक्त नंबर वाला युवक विनीता पर अनैतिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था.

पुलिस ने इसी बात को ध्यान में रख कर जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि घटना वाले समय उक्त फोन नंबर जबलपुर में ही था. इतना ही नहीं दोपहर 12 बजे से साढ़े 5 बजे के बीच उस की लोकेशन भी विनीता के घर के पास के टौवर के टच में थी. यह फोन घटना से 3 दिन पहले से जबलपुर में था और घटना वाले दिन सुबह के समय उस फोन से विनीता से बात भी की थी.

इसलिए पुलिस ने पूरा ध्यान इस फोन नंबर पर ही लगा दिया. उस फोन का सिमकार्ड शिवकांत उर्फ रिंकू पुत्र धर्मनारायण पांडे, निवासी बड़ा शिवाला मझनपुर, जिला कौशांबी, उत्तर प्रदेश के नाम से खरीदा गया था.

पुलिस ने इस संदिग्ध फोन नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया. साइबर सेल की मदद से जांच टीम को जानकारी मिली कि उस फोन की लोकेशन कस्बे में कक्षपुर ब्रिज के पास है. टीम तुरंत वहां पहुंच गई और एक युवक को कक्षपुर ब्रिज के पास से गिरफ्तार कर लिया.

उस ने अपना नाम शिवकांत उर्फ रिंकू बताया. उस के कपड़ों पर खून के कुछ दाग लगे मिले जिस से पुलिस को पूरा भरोसा हो गया कि विनीता का कातिल कोई और नहीं रिंकू ही है. पूछताछ में रिंकू विनीता को जानने से भी इनकार करता रहा लेकिन जब पुलिस ने उस का मिलान विनीता के घर के पास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से किया तो रिंकू दोपहर लगभग 12 बजे विनीता के घर आता हुआ और शाम साढ़े 5 बजे वहां से वापस जाता दिखा.

अब रिंकू सीसीटीवी फुटेज को गलत साबित नहीं कर सकता था. लिहाजा चारों तरफ से घिर जाने पर रिंकू ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने विनीता की हत्या की जो कहानी बताई, वह हैरान कर देने वाली निकली—

कोई 25 साल पहले नरसिंहपुर के मुगली गांव की रहने वाली विनीता की शादी नर्मदा विकास प्राधिकरण में कार्यरत मनीष वाजपेयी के साथ हुई थी. दोनों के 2 बेटे हैं.

मनीष संपन्न परिवार के अकेले बेटे थे तो वहीं विनीता भी उच्च परिवार की एकलौती बेटी थी. सरकारी नौकरी में मनीष अच्छे पद पर थे. इसलिए घर में रुपएपैसों की कोई कमी नहीं थी.

पूरा परिवार काफी सभ्य और सुलझे विचारों वाला था. विनीता धार्मिक प्रवृत्ति की थी. वह शहर में होने वाले धार्मिक आयोजनों में अकसर शामिल होती रहती थी. विनीता जितनी सुंदर देखने में थी, उतनी ही वह मन की भी साफ थी.

कुछ समय पहले वह एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने वृंदावन गई थी. उस कार्यक्रम में कौशांबी से शिवकांत मिश्रा उर्फ रिंकू फोटोग्राफी करने वहां आया हुआ था. उस कार्यक्रम में शामिल कई लोग रिंकू से अपने फोटो खिंचवा रहे थे. विनीता को ऐसे मौके पर फोटो खिंचाने का शौक नहीं था. इसलिए वह चुपचाप भीड़ से अलग खड़ी थीं.  इस दौरान रिंकू की नजर विनीता पर पड़ी तो वह उस की सुंदरता पर मोहित हो गया. वह विनीता के पास आ गया और विनीता से अपनी फोटो खिंचवाने का आग्रह करने लगा.
पहले तो विनीता ने उसे मना कर दिया लेकिन जब रिंकू ने जिद की तो विनीता ने अपने कुछ फोटो उस से खिंचवाए. जिस के बाद औनलाइन फोटो भेजने के लिए रिंकू ने उन का वाट्सऐप नंबर भी ले लिया.
इस के 2 दिन बाद रिंकू ने विनीता के सारे फोटो वाट्सऐप से भेज दिए. साथ ही फोटो खिंचवाने के लिए उस ने विनीता का आभार भी व्यक्त किया.

विनीता जैसी खुद सरल स्वभाव की थी, वैसा ही वह फोटोग्राफर रिंकू को समझ रही थी. लेकिन रिंकू ऐसा था नहीं. कुछ दिन बाद फोटो मिलने की बात पूछने के बहाने रिंकू ने विनीता को फोन किया और दोस्ती बढ़ाने के लिए वह उस से मीठीमीठी बातें करने लगा. धीरेधीरे जब उस ने विनीता के घर का पता सहित उस के बारे में सब कुछ जान लिया तो वह अपनी औकात पर आ गया.

वाट्सऐप मैसेज भेज कर वह विनीता से उस की खूबसूरती की तारीफ करने लगा और बातोंबातों में उस ने उस से अपने प्यार का इजहार भी कर दिया. विनीता को यह बात अजीब लगी. कोई दूसरी महिला होती तो शायद वह उस की शिकायत पुलिस से कर देती. लेकिन विनीता ने ऐसा न कर के पहले उसे समझाने की कोशिश की लेकिन वह उसे जितना समझाने की कोशिश करती, रिंकू उतनी ही आशिकी भरी बातें करता.

विनीता ने एक गलती जो की थी, वह यह थी कि जिस रोज रिंकू ने पहली बार उस से इश्क का इजहार किया था, उसी रोज उसे बात पति को बता देनी चाहिए थी, पर नहीं बताई. दरअसल उस का सोचना था कि वह अपने स्तर से इस समस्या को सुलझा लेगी. लेकिन अब पानी सिर से ऊपर पहुंचने लगा था.
समस्या कितनी बड़ी है इस बात का अंदाजा उसे उस रोज लगा जब रिंकू कई दूसरे कार्यक्रम में फोटोग्राफी करने जबलपुर तक आने लगा. विनीता के घर का पता उस ने पहले ही ले लिया था.
उसे यह भी मालूम था कि विनीता अकसर घर पर अकेली रहती है. इसलिए वह रोज अचानक ही वह उस के घर आ धमका.

उस के घर आ कर भी वह उस से अपने प्यार का इजहार करने लगा. इस पर विनीता ने उसे समझाया, ‘‘देखो रिंकू, मैं शादीशुदा हूं, इसलिए मुझ से इस तरह की उम्मीद करना गलत है.’’
‘‘मैं शादी करने की बात कहां कर रहा हूं. मैं तो केवल साथ में एक रात बिताने की मांग कर रहा हूं.’’ रिंकू ने बेशर्मी से कहा.

उस की बात पर विनीता को गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन कोई तमाशा खड़ा न हो इसलिए उसे समझाबुझा कर वापस भेज दिया. लेकिन इस घटना के बाद वह विनीता को वाट्सऐप पर काफी अश्लील मैसेज भेजने लगा. जिस से तंग आ कर विनीता ने उसे सख्त शब्दों में आगे से कोई मैसेज या फोन न करने की चेतावनी दे दी.

रिंकू ने पुलिस को बताया कि वह विनीता की खूबसूरती का इतना दीवाना हो चुका था कि वह हर हाल में उसे पाना चाहता था. घटना वाले दिन जब वह जबलपुर आया तो उस ने पहले ही निर्णय कर लिया था कि इस बार विनीता के घर से खाली वापस नहीं आएगा. इसलिए उस रोज मनीष के नरसिंहपुर के लिए रवाना होते ही वह उस के घर पहुंच गया.

घर पहुंच कर वह विनीता पर अपनी बात मनवाने का दबाव बनाने लगा. लेकिन विनीता ने साफतौर पर उस की बात मारने से इनकार कर दिया. इतना ही नहीं उस ने रिंकू से वहां से चले जाने को कह दिया.

लेकिन रिंकू उस के घर पर जम कर बैठ गया. इस पर विनीता ने उस से कहा कि अगर अब भी वह सही रास्ते पर नहीं आया तो वह उस की सारी वाट्सऐप चैटिंग पति को दिखा कर उस की शिकायत पुलिस से भी कर देगी. पर विनीता की बात का रिंकू पर कोई असर नहीं पड़ा.

इसी बीच शाम 5 बजे मनीष ने जबलपुर स्टेशन आ कर विनीता को फोन किया तो उस समय रिंकू वहीं बैठा था. उसे लगा कि आज विनीता अपने पति को सब कुछ बता देगी. इसलिए विनीता के साथ वह जबरदस्ती करने लगा. उस का सोचना था कि अगर वह किसी तरह से संबंध बनाने में कामयाब हो गया तो शायद वह उस की शिकायत पति से नहीं कर पाएगी.

लेकिन विनीता ने रिंकू को धक्का दे कर खुद से दूर कर दिया और बचने के लिए वह ऊपर के कमरे में भागी, जहां पीछे से रिंकू भी पहुंच गया. उसी समय रिंकू ने साथ लाई पतली रस्सी उस के गले पर कस दी जिस से उस की सांस रुक गई. फिर पास रखे बेसबौल के डंडे से उस के चेहरे पर बेहताशा वार किए. उसे लगा कि यह मर चुकी है, तो वह वहां से विनीता का फोन ले कर भाग गया.

उस ने विनीता का फोन कक्षपुरा ब्रिज के पास छिपा दिया था, जो पुलिस ने बरामद कर लिया. रिंकू का सोचना था कि विनीता ने उस की पहचान के बारे में किसी तीसरे को जानकारी नहीं दी है इसलिए उस का नाम कभी भी इस मामले में सामने न आने पर वह कभी नहीं पकड़ा जाएगा.

पर उस की सोच गलत साबित हुई. पुलिस ने रिंकू से पूछताछ करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया.

मेरी आंटी नाजायज रिश्ता बनाना चाहती हैं, क्या करूं?

सवाल

मैं 21 साल का नौजवान हूं. मेरे पड़ोस में 40 साल की एक आंटी रहती हैं. उन के पति बड़े ही शरीफ आदमी हैं, पर वे आंटी मुझे थोड़ी पेचीदा लगती हैं और किसी न किसी बहाने मुझे अपने घर बुलाती रहती हैं. वे मेरे साथ नाजायज रिश्ता बनाना चाहती हैं.

वे आंटी बहुत ज्यादा मादक हैं और मेरा मन भटकाती रहती हैं. इस बात से मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं. मेरा पढ़ाई में भी मन नहीं लगता है. अगर परिवार में किसी को इस बात का पता चल गया, तो मेरे पिताजी मेरा जीना मुश्किल कर देंगे. मैं क्या करूं?

जवाब

गेंद आप के पाले में है, पर किसी भी नाजायज रिश्ते का अंजाम आमतौर पर अच्छा नहीं निकलता. उस आंटी को हो सकता है कि अंकल से संतुष्टि न मिलती हो, इसलिए वह आप को फंसा रही है. फंसना तो पलभर का काम है, लेकिन निकलने में अच्छेअच्छे रो देते हैं. इसलिए बेहतर है कि न फंसें, क्योंकि आप के पिताजी आप को माफ नहीं करेंगे और फिर आप का मजा सजा में तबदील हो जाएगा.

आप अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दें, जो मादकता से ज्यादा अहम और जरूरी है. भविष्य उसी से बनेगा, आंटी के हुस्न से नहीं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

सुहागरात: मिलन की रात, बन जाए बात

Sex News in Hindi: अनिल और सुधा की शादी की पहली रात थी. शादी में आए लोगों के जातेजाते रात का 1 बज गया. तब अनिल की बहन को ध्यान आया कि इस नवविवाहित जोड़े को तो अपने कक्ष में भेजो. चूंकि रात काफी बीत चुकी थी, इसलिए अपने कक्ष में पहुंचते ही अनिल आननफानन सहवास करने लगा तो एक हलकी सी चीख के साथ सुधा उस के बाहुपाश से अलग हो गई. बोली कि नहीं, मैं यह बरदाश्त नहीं कर सकूंगी. मुझे दर्द होता है. बेचारा अनिल मन मसोस कर रह गया. सुधा की दिन पर दिन बीतते चले गए और फिर दर्द की तीव्रता भी बढ़ती चली गई. पहली रात की मिठास कड़वाहट में बदल गई थी. फिर एक दिन जब अनिल ने यह बात अपने दोस्त को बताई तो उस की सलाह पर वह पत्नी के साथ चिकित्सक के पास पहुंचा. तब जा कर दोनों सहवास का आनंद उठाने में कामयाब हो पाए. वास्तव में सहवास परम आनंद देता है. मगर इस में इस तरह की कोई परेशानी हो जाए तो नौबत तलाक तक की भी आ जाती है.

आइए, जानें कि ऐसी स्थिति आने पर क्या करें:

– पतिपत्नी को चाहिए कि भले प्रथम 1-2 मिलन में दर्द हो, तो भी वे संपर्क बनाना न छोड़ें. कामक्रीड़ा करते रहें ताकि एकदूसरे के प्रति आकर्षण बना रहे और दर्द की बात मन में न बैठे.

– चूंकि यह शारीरिक से ज्यादा मनोवैज्ञानिक समस्या है, अत: मानसिक स्तर पर भी मजबूत बने रहें.

– ऐसे पतिपत्नी को चाहिए कि वे यह सोच कर कि सहवास नहीं करेंगे, प्रतिदिन यौनक्रीड़ा यानी आलिंगन, चुंबन, बाहुपाश में बांधना, सहलाना आदि करते रहें. यौनक्रीड़ा में बहतेबहते उन्हें पता भी नहीं चलेगा कि वे कब सहवास में सफल हो गए. तब सारा डर जाता रहेगा.

– यदि एकदूसरे के प्रति पूर्ण आकर्षण न हो कर कोई गिलाशिकवा, नफरत, गुस्सा हो तो उसे दिमाग से निकाल देने मात्र से दर्दयुक्त सहवास की समस्या समाप्त हो सकती है.

– यदि पहले कभी बलात्कार हुआ हो या आप के पुरुष साथी (वह पति ही क्यों न हो) ने यदि आप के जननांगों को चोट पहुंचाई हो तब भी ऐसी स्थिति में भी स्त्री को सहवास से भय पैदा हो जाता है. इस स्थिति का यथोचित समाधान आवश्यक है.

दर्दयुक्त सहवास के अन्य कारण पुरुषों में

– अंग में कड़ापन न आने के कारण भी सैक्स नामुमकिन हो जाता है.

– यदि आप अत्यधिक मोटापे से ग्रस्त हैं तब भी यह स्थिति पैदा हो जाती है.

– यौन संपर्क के प्रति नकारात्मक रवैया भी यह स्थिति पैदा कर देता है. इस के अलावा सैक्स के अन्य तरीकों को तवज्जो देना भी इस स्थिति के लिए उत्तरदायी हो सकता है.

– जननांग में कोई जन्मजात कमी.

स्त्रियों में

– यौन संपर्क के वक्त जननांग में स्थित खास प्रकार की ग्रंथियां कुछ लसलसा सा पदार्थ स्रावित करती हैं जो पुरुष के अंग को योनि में प्रवेश कराने में मददगार होता है. कई बार ये ग्रंथियां अपना यह कार्य करना बंद कर देती हैं. फलस्वरूप योनि में कथित सूखापन रहता है, जिस से सहवास में दर्द होता है. अकसर यह स्थिति डर या फिर गैरजिम्मेदाराना तरीके से स्थापित यौन संबंध से उत्पन्न होती है.

– यदि स्त्री को अत्यधिक मोटापा है या पैरों अथवा कूल्हों की हड्डियों का कोई रोग है, तब भी यह स्थिति आ सकती है.

– यदि जन्मजात योनि के ऊपर की झिल्ली (हाईमन) बहुत ज्यादा मोटी या सख्त हो तो भी सहवास के वक्त तकलीफ होती है.

– जिन स्त्रियों की शादी देर से होती है उन में योनि का लचीलापन कमजोर हो जाता है तथा मार्ग भी संकरा हो जाता है, जिस से मिलन के वक्त तकलीफ होती है.

– योनि मार्ग में अगर कोई सर्जरी हुई हो या वहां चोट आदि लगी हो तब भी संभोग के वक्त दर्द होता है.

– ऊपरी सतह पर कुछ व्याधियां भी सहवास को दर्दयुक्त बनाती हैं जैसे बवासीर, खूनी मस्से, पेशाब के मार्ग में संक्रमण, जन्म से ही योनि मार्ग की लंबाई कम होना आदि.

– इसी तरह अंदर की व्याधियां भी इस स्थिति के लिए उत्तरदायी होती हैं जैसे सर्विक्स संक्रमण, ओवरी का संक्रमण, गर्भाशय का क्षय रोग आदि.

शिकार: किसने उजाड़ी मीना की दुनिया

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‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर बने फर्जी आयकर अफसर

Crime News in Hindi: मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore) की एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र से एक युवक मिलने पहुंचा. उस ने अपना नाम शुभम साहू और पता राजनगर एक्सटेंशन (Rajnagar Extension) का बताया. युवक ने झिझकते हुए एसएसपी से कहा, ‘‘मैडम, मैं परेशान हूं. आप को एक महत्त्वपूर्ण सूचना देना चाहता हूं.’’ एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र ने युवक को सामने रखी कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए कहा, ‘‘शुभम, तुम क्या बताना चाहते हो, खुल कर बताओ. हम से जो मदद हो सकेगी, करेंगे.’ ‘‘मैडम, बात दरअसल यह है कि कुछ लोग फरजी आयकर अफसर (Income Tax Officer) बन कर लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर बेवकूफ बना रहे हैं. इस के एवज में वे मोटी रकम लेते हैं.’’ शुभम ने डरतेडरते बताया. ‘‘तुम्हें यह बात कैसे पता चली कि वे फरजी तरीके से आयकर विभाग में नौकरी लगवा रहे हैं.’’ एसएसपी ने सवाल किया.

एसएसपी के सवाल पर शुभम चुप हो गया. इस पर एसएसपी ने उसे भरोसा दिलाते हुए पूछा, ‘‘वे कौन लोग हैं और कहां रहते हैं.’’

‘‘मैडम, मैं जौब की तलाश में था. इस बीच मेरे दोस्त पवन सोलंकी ने एक दिन मेरी मुलाकात देवेंद्र डाबर से करवाई.’’ शुभम ने धीरेधीरे कहा, ‘‘देवेंद्र डाबर ने खुद को इनकम टैक्स का चीफ इनवैस्टीगेशन औफिसर बताया था.’’

आयकर विभाग के चीफ इनवैस्टीगेशन औफिसर की बात सुन कर इस मामले में एसएसपी की भी दिलचस्पी बढ़ गई. उन्होंने अर्दली से कह कर शुभम के लिए पानी मंगवाया. शुभम ने पानी पी लिया तो एसएसपी ने उस से कहा, ‘‘देवेंद्र डाबर से मुलाकात में आप की क्या बात हुई?’’

एसएसपी के प्यार भरे व्यवहार से शुभम की झिझक कम हो गई थी. उस ने कहा, ‘‘मैडम, देवेंद्र का शानदार औफिस है. उस के पास खाकी वरदीधारी चपरासी, ड्राइवर, सरकारी गाड़ी और कई लोगों का स्टाफ है.’’

‘‘अरे वाह, इतना सारा स्टाफ, सरकारी गाड़ी वगैरह सब कुछ है.’’ एससपी ने शुभम की बातों पर शंका जताते हुए कहा, ‘‘कहीं ऐसा तो नहीं कि जिसे तुम फरजी आयकर अफसर बता रहे हो, वह वास्तव में ही सरकारी अफसर हो?’’

‘‘नहीं मैडम, देवेंद्र डाबर पूरी तरह फरजी है.’’ शुभम ने अपनी बात मजबूती से रखते हुए कहा, ‘‘मैं ने उस से जौब के बारे में कहा, तो उस ने मेरी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तथा 4 पासपोर्ट साइज की फोटो ले लीं. देवेंद्र ने मुझे फील्ड अफसर की नौकरी देने की बात कही थी.

‘‘मैं नौकरी करने लगा. कई महीने नौकरी करने के बाद भी मुझे वेतन नहीं मिला. मैं ने देवेंद्र से इस बारे में कई बार कहा तो उस ने भारत सरकार से बजट नहीं आने की बात कही.’’ शुभम ने बताया, ‘‘वेतन नहीं मिलने से मैं परेशान हो गया. फिर मैं ने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई, तो पता चला कि देवेंद्र ने इसी तरह आयकर विभाग में नौकरी देने के नाम पर कई लोगों से लाखों रुपए ले रखे हैं.’’

शुभम की सारी बातें सुनने के बाद एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र कुछ देर सोचती रहीं. फिर उन्होंने शुभम से लिखित में एक शिकायत देने को कहा. इसी के साथ उन्होंने देवेंद्र के औफिस और कामकाज के बारे में सवाल कर शुभम से कई जानकारियां लीं.

एसएसपी ने ये जानकारियां अपनी डायरी में नोट कर लीं. फिर शुभम को आश्वस्त किया कि हम इस मामले की जांच कराएंगे. अगर देवेंद्र डाबर फरजी आयकर अफसर बन कर लोगों से इस तरह की धोखाधड़ी कर रहा है तो उस पर काररवाई जरूर की जाएगी. एसएसपी को लिखित शिकायत दे कर शुभम वहां से चला आया.

शुभम के जाने के बाद एसएसपी ने पूरे मामले पर गंभीरता से विचार किया. फिर एएसपी अमरेंद्र सिंह को देवेंद्र डाबर के बारे में बता कर सूचनाएं जुटाने को कहा.

एएसपी अमरेंद्र सिंह ने थाना राजेंद्र नगर के टीआई सुनील शर्मा को इस मामले की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी. टीआई ने अपने सहयोगियों के साथ कई दिनों तक जांचपड़ताल कर देवेंद्र डाबर के बारे में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां जुटा लीं.

देवेंद्र के संबंध में जुटाई जानकारियां जब एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र तक पहुंचीं तो वे भी चौंकी. उन्होंने एएसपी अमरेंद्र सिंह को देवेंद्र डाबर के कार्यालय पर तुरंत छापा मारने को कहा.

पुलिस टीम ने 23 अप्रैल को इंदौर शहर के सिलिकौन सिटी में एक मकान पर छापा मारा. इस मकान को आयकर विभाग का कार्यालय बनाया हुआ था. मकान के बाहर सफेद रंग की एक सफारी गाड़ी खड़ी थी. गाड़ी पर भारत सरकार के लोगो सहित आयकर विभाग की प्लेट लगी हुई थी.

पुलिस अधिकारियों ने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की. लोगों ने पुलिस अधिकारियों को अपने अधिकारी देवेंद्र डाबर से मिलवा दिया. देवेंद्र डाबर अपने शानदार औफिस में बैठा था. बाहर चपरासी खड़ा था. उस के कमरे के बाहर चीफ इनवैस्टीगेशन औफिसर की नेमप्लेट लगी हुई थी.

अधिकारियों ने पूछताछ की तो देवेंद्र ने खुद को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी के इंटेलिजेंस ऐंड क्रिमिनल इनवैस्टीगेशन डिपार्टमेंट का चीफ इनवैस्टीगेशन औफिसर बताया. उस ने पुलिस टीम को अपना पहचानपत्र भी दिखाया. पुलिस ने उस से सवालजवाब किए तो उस का फरजीवाड़ा सामने आ गया. न तो वह ठीक ढंग से अंगरेजी में बात कर सका और न ही सीबीडीटी या आयकर विभाग के बारे में गहराई की बातें बता सका.

देवेंद्र डाबर से पूछताछ में उस का फरजीवाड़ा सामने आ गया. फिर भी पुलिस अधिकारियों ने सावधानी के तौर पर आयकर विभाग के कार्यालय में फोन कर यह जानना चाहा कि देवेंद्र डाबर नाम का कोई अधिकारी विभाग में कार्यरत है या नहीं. पता चला कि विभाग में न तो इस नाम का कोई अधिकारी है और न ही विभाग में इस तरह की कोई पोस्ट है.

पुलिस ने देवेंद्र डाबर के अलावा वहां काम कर रहे 4 अन्य कर्मचारियों सुनील मंडलोई, रवि सोलंकी, दुर्गेश गहलोत और सतीश गावड़े को गिरफ्तार कर लिया.

कई घंटे की जांचपड़ताल और तलाशी के बाद वहां से लैपटाप, प्रिंटर, सफारी गाड़ी, एयरगन, भारत सरकार लिखी आईडी, आयकर विभाग की फरजी सील, सिक्के, नियुक्ति पत्र, आदेश पत्र, बड़ी संख्या में गोपनीय लिखे रजिस्टर, दस्तावेज, खाकी वर्दियां, भारत सरकार लिखी नेम प्लेट आदि जब्त की गईं.

पुलिस ने गिरफ्तार पांचों आरोपियों से अलगअलग पूछताछ की. इस में पता चला कि केवल 12वीं पास देवेंद्र डाबर चर्चित फिल्म ‘स्पैशल-26’ की तर्ज पर 5 साल से आयकर विभाग का फरजी कार्यालय चला रहा था. देवेंद्र ही इस गिरोह का सरगना था. सुनील मंडलोई उस का दोस्त है. वह बीई की तैयारी कर रहा था. देवेंद्र ने सुनील को सीनियर फील्ड औफिसर बना रखा था.

लोगों को आयकर विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर देवेंद्र के कहने पर वह भी पैसे लेता था. रवि सोलंकी देवेंद्र का रिश्तेदार निकला. उसे देवेंद्र ने सीनियर इनवैस्टीगेशन औफिसर बना रखा था. वह कार्यालय के अन्य कर्मचारियों की ओर से व्यापारियों और आयकर चोरों से संबंधित तैयार रिपोर्ट को सत्यापित कर उन की फाइलों पर हस्ताक्षर करता था.

दुर्गेश गहलोत देवेंद्र का पीए था. उस के पास कार्यालय का अधिकांश रिकौर्ड रहता था. कर्मचारियों के हाजिरी रजिस्टर भी वही रखता था.

सतीश गावड़े देवेंद्र का वाहन चालक और पर्सनल गनमैन था. वह एयरगन रखता था और देवेंद्र डाबर को आयकर विभाग का चीफ इनवैस्टीगेशन औफिसर बताता था.

देवेंद्र और अन्य गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में फिल्म ‘स्पैशल-26’ की तर्ज पर आयकर विभाग की फरजी टीम बनाने की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है—

लरूप से कुक्षी धार और फिलहाल इंदौर में भील कालोनी मूसाखेड़ी के रहने वाले देवेंद्र डाबर के पिता माधव लाल सरकारी नौकरी से रिटायर्ड क्लर्क हैं. देवेंद्र ने 12वीं पास करने के बाद नौकरी के लिए भागदौड़ शुरू की. लेकिन अधिकांश जगह उसे निराशा मिली. इस का कारण यह था कि वह केवल 12वीं पास था. उसे कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान जरूर था, लेकिन केवल कंप्यूटर के ज्ञान के आधार पर उसे अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी नहीं मिल सकती थी.

देवेंद्र भले ही ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था, लेकिन उस के सपने बड़े थे. वह अफसरों की तरह रुतबे और शानोशौकत से रहना चाहता था. यह उस के लिए किसी भी तरह से संभव नहीं था. इसी दौरान एक बार उस ने अखबारों में आयकर विभाग का एक विज्ञापन पढ़ा. इस विज्ञापन में बताया गया था कि बेनामी संपत्ति की जानकारी देने पर आयकर विभाग 10 प्रतिशत कमीशन देता है.

यह सूचना पढ़ने के बाद देवेंद्र के दिमाग में आयकर विभाग के जरिए पैसा कमाने का विचार आया. यह संयोग रहा कि उसी दौरान एक दिन देवेंद्र ने अक्षय कुमार और अनुपम खेर अभिनीत फिल्म ‘स्पैशल-26’ देखी. यह फिल्म देख कर उस ने आयकर विभाग के समानांतर अपनी टीम खड़ी करने का फैसला कर लिया.

देवेंद्र ने सब से पहले इंटरनेट के माध्यम से आयकर विभाग के सेटअप और पूरी कार्यप्रणाली को समझा. इस के बाद आयकर विभाग के अधिकारियों के पदनाम, विभाग की अलगअलग विंग और उन के काम करने के तरीकों की जानकारी जुटाई.

उस ने आयकर विभाग के पत्राचार के तरीके भी समझ लिए. अखबारों और इलैक्ट्रौनिक मीडिया पर आयकर विभाग के छापे और सर्वे से संबंधित रोजाना आने वाली खबरों को वह ध्यान से देखने लगा.
आयकर विभाग में किसकिस तरह के टैक्स वसूले जाते हैं और किन लोगों से वसूले जाते हैं, ये बातें जानने और समझाने के लिए उस ने बाजार से आयकर संबंधी किताबें खरीद कर पढ़ीं. आयकर रिटर्न के बारे में भी देवेंद्र ने जानकारी हासिल की.

इस के बाद देवेंद्र ने सब से पहले आयकर विभाग का परिचयपत्र बनाया, जिस में उस ने खुद को चीफ इनवैस्टीगेशन औफिसर दर्शाया. उस ने भारत सरकार के वाटर मार्क वाले लोगो के लेटरपैड भी तैयार करवा लिए.

सन 2014 में उस ने इंदौर के मूसाखेड़ी में आयकर विभाग का अपना कार्यालय बनाया. इसी के साथ उस ने अपने कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच खुद को आयकर विभाग का अफसर बता कर उन्हें नौकरी दे दी. देवेंद्र ने इन लोगों को अलगअलग पदनाम दे कर जिम्मेदारियां सौंप दीं. फिर इन्हीं रिश्तेदारों और दोस्तों के माध्यम से वह बेरोजगार युवाओं को आयकर विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने लगा.

देवेंद्र बेरोजगार युवाओं से 50 हजार से एक लाख रुपए तक ले कर आयकर विभाग में अलगअलग पदनाम से नौकरी देने लगा. इन युवाओं को वह बाकायदा भारत सरकार का लोगो लगा नियुक्तिपत्र देता था. यह पत्र देते समय वह कहता था कि हमारा काम बेहद गोपनीय है, इसलिए अपने काम के बारे में किसी को मत बताना.

इसी के साथ वह नौकरी जौइन करने वाले को गोपनीयता की शपथ भी दिलवाता था. वह अपने कर्मचारियों से शपथपत्र भी भरवाता था. इस में यह शर्त लिखी होती थी कि अगर विभाग की गोपनीयता भंग की तो आयकर कानून के तहत 50 हजार रुपए जुरमाना और एक साल की सजा हो सकती है.
जुरमाने और सजा के डर से देवेंद्र के कर्मचारी किसी से अपनी असलियत नहीं बताते थे. किसी को यह भी नहीं बताते थे कि वे आयकर विभाग में काम करते हैं या उन का औफिस कहां है.

अपने कर्मचारियों के माध्यम से देवेंद्र आयकर चोरी के नाम पर धन्ना सेठों और काले धंधे करने वाले कारोबारियों की सूचनाएं जुटाता था. ऐसे लोगों की सूचनाएं जुटा कर वह फाइलों में उन का पूरा ब्यौरा दर्ज करवाता था. ऐसी ही सूचनाओं के आधार पर 4 साल पहले देवेंद्र ने अपने कर्मचारियों के साथ बुरहानपुर में एक व्यक्ति के घर पर आयकर विभाग की फरजी रेड मारी थी. इस रेड में देवेंद्र को क्या मिला, इस का पूरी तरह खुलासा नहीं हो सका.

देवेंद्र का आयकर विभाग के फरजीवाड़े का काम अच्छे तरीके से चल रहा था. इस बीच देवेंद्र ने बड़ा हाथ मारने के मकसद से करीब एक साल पहले इंदौर की सिलिकौन सिटी में 14 हजार रुपए महीने का एक मकान किराए पर ले लिया. इस मकान में उस ने शानदार औफिस बनाया.

इस औफिस में देवेंद्र ने अपने कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ा ली. कई युवाओं को पैसे ले कर फील्ड औफिसर की नौकरी दे दी. कई चपरासी भी रख लिए. पूरे व्यवस्थित तरीके से उस ने कार्यालय बना लिया. इस औफिस में वह खुद सब से बड़ा अफसर था. दुर्गेश गहलोत उस का पीए था.

देवेंद्र भारत सरकार लिखी सफारी गाड़ी में आताजाता था. साथ में वह गनमैन रखता था. सतीश गावड़े उस का गनमैन भी था और वाहन चालक भी. सतीश ही एयरगन रखता था. देवेंद्र फरजी नौकरी देने के बाद आयकर विभाग का कामकाज समझाने के लिए होटलों में नवनियुक्त कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी देता था. सुनील मंडलोई और रवि सोलंकी इन कर्मचारियों को ट्रेनिंग देते थे.

अपने कर्मचारियों को आयकर विभाग की नौकरी का विश्वास दिलाने के लिए कई प्रपंच रचता था. देवेंद्र अपने एकदो कर्मचारियों को आयकर विभाग के कार्यालय ले जाता. वहां वह अपने कर्मचारियों को गनमैन सतीश गावड़े की निगरानी में बाहर ही छोड़ देता. फिर चीफ कमिश्नर साहब के पास जाने की बात कह कर बड़े अधिकारी की तरह डायरी हाथ में ले कर तेज कदमों से चलते हुए आयकर विभाग की बिल्डिंग में चला जाता. थोड़ी देर बाद बाहर आ कर वह अपने कर्मचारियों के साथ अपने दफ्तर चला जाता.

नवंबर 2018 में मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान देवेंद्र डाबर ने फरजी आदेश जारी कर अपने कर्मचारियों की विधानसभा चुनाव में ड्यूटी लगा दी.

यह ड्यूटी इसलिए लगाई ताकि कर्मचारियों को यह भरोसा रहे कि सरकारी कर्मचारी ही हैं, क्योंकि चुनावों में आमतौर पर सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है. देवेंद्र ने अपने कर्मचारियों की ड्यूटी पीथमपुर में वाहनों की जांच के लिए लगाई ताकि चुनाव में अवैध और कालेधन की आवाजाही न हो सके.

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर देवेंद्र अपने कार्यालय में तिरंगा झंडा भी फहराता था. इस मौके पर वह कर्मचारियों को भी बुलाता था. उस के औफिस में स्टाफ खाकी वरदी में रहता था. ये कर्मचारी देवेंद्र को सैल्यूट करते थे. देवेंद्र इन कर्मियों के साथ सेल्फी भी लेता था.

देवेंद्र ने फील्ड अफसर और खबरी के पद पर लगाए युवाओं को रईस लोगों की चलअचल संपत्तियों की जानकारी हासिल करने की जिम्मेदारी सौंप रखी थी. ये कर्मचारी बड़े व्यापारियों, बिल्डरों, प्रौपर्टी कारोबारियों, ब्याज पर पैसा देने वालों और काला धंधा करने वाले लोगों की संपत्तियों, उन की गाडि़यों और कारोबार के बारे में आसपास के लोगों से जानकारी जुटाते थे.

ये कर्मचारी अपने अधिकारी सीनियर फील्ड औफिसर सुनील मंडलोई और सीनियर इनवैस्टीगेशन औफिसर रवि सोलंकी को रिपोर्ट करते. यह रिपोर्ट रजिस्टर में दर्ज कर के अलग से फाइल बनाई जाती और उस पर लिखा जाता कि अगर इस व्यक्ति के यहां इनकम टैक्स की रेड डाली जाए तो बड़ी मात्रा में आयकर चोरी का खुलासा हो सकता है.

मास्टरमाइंड देवेंद्र ने खरगोन, कुक्षी, खंडवा, मनावर, देवास, झाबुआ, आलीराजपुर, उदय नगर, बेटम, देपालपुर, पीथमपुर, धार व बड़वानी सहित कई शहरों में रहने वाले रईसों की इस तरह की फाइलें बना रखी थीं.

उस ने कुछ नेताओं की भी इस तरह की फाइलें बना रखी थीं. सभी फाइलों और रजिस्टरों के प्रत्येक पेज पर सरकारी विभागों की तरह मोहर व दस्तखत होते थे. देवेंद्र के कर्मचारियों ने अपनी रिपोर्ट में किसी को 50 और किसी को 30 करोड़ की आसामी बता रखा था.

देवेंद्र के कार्यालय से मिले रजिस्टर और फाइलों में जिन लोगों के यहां इनकम टैक्स रेड की सिफारिश की गई थी, पुलिस उन के बयान लेने के बारे में विचार कर रही है ताकि पता चल सके कि देवेंद्र की टीम ने कहीं फरजी रेड तो नहीं डाली थी.

जांच में यह बात भी सामने आई कि आरोपी देवेंद्र का मकसद ऐसे लोगों की जानकारी जुटा कर आयकर विभाग को देना था ताकि आयकर विभाग रेड मारे और उसे 10 प्रतिशत कमीशन मिल जाए. इस के विपरीत यह भी सच है कि देवेंद्र ने आयकर विभाग को ऐसी एक भी जानकारी नहीं दी.

यह तय है कि देवेंद्र डाबर की टीम का खुलासा हो गया अन्यथा शातिर दिमाग देवेंद्र अपनी टीम के साथ धन्ना सेठों के यहां इनकम टैक्स की फरजी रेड डाल सकता था.

आयकर विभाग भी समानांतर आयकर विभाग चलाने वाले इस गिरोह का खुलासा होने पर चौंक गया. इंदौर की एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आयकर विभाग के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर ए.के. चौहान से मुलाकात कर इस पूरे मामले की जानकारी दी. पुलिस इस गिरोह के बारे में पूरी जांचपड़ताल में जुटी हुई है.

गिरोह का खुलासा होने के बाद कई युवाओं ने पुलिस को शिकायत की है कि देवेंद्र डाबर ने नौकरी के नाम पर उन से 60-60 हजार रुपए लिए. जांच में सामने आया है कि देवेंद्र ने आयकर विभाग के नाम पर करीब 80 लोगों की टीम बना रखी थी.

मोटे तौर पर माना जा रहा है कि देवेंद्र ने युवाओं को नौकरी देने के नाम पर ही 60 से 80 लाख रुपए की ठगी की थी. ठगी के पैसों से ही कभीकभी वह कर्मचारियों को वेतन दे देता था. कभी कोई वेतन की बारबार मांग करता तो कहता कि भारत सरकार से अभी बजट नहीं आया है.

वह गोपनीयता के नाम पर लोगों में सजा और जुरमाने का भय बनाए रखता था, इसलिए पीडि़त युवा अपनी समस्या किसी को बता भी नहीं पाते थे. वे सरकारी नौकरी होने का भ्रम पाल कर कभी न कभी पूरी तनख्वाह मिलने का ख्वाब संजोए थे.

पुलिस को देवेंद्र के बैंक खातों की जानकारी भी मिली है. इन खातों में हुए लेनदेन की डिटेल बैंक से मांगी गई है. देवेंद्र भले ही खुद को आयकर विभाग का चीफ इनवैस्टीगेशन औफिसर बताता था, लेकिन उस की पत्नी एक साधारण सी आशा कार्यकर्ता है. उस से देवेंद्र ने प्रेम विवाह किया था.

यह विडंबना है कि 12वीं पास युवक 5 साल तक फिल्म ‘स्पैशल 26’ की तर्ज पर ‘स्पैशल 80’ टीम बना कर फरजी तरीके से आयकर विभाग के समानांतर काम करता रहा. वह पैसे ले कर युवाओं को आयकर विभाग में फरजी नौकरी देता रहा, बड़े व्यापारियों और रईसों की चलअचल संपत्तियों की जानकारी जुटाता रहा. इनकम टैक्स की फरजी रेड भी मारता रहा, लेकिन किसी भी सरकारी एजेंसी को इस फरजीवाड़े का पता नहीं चल सका.

मुझे ब्लू फिल्में देखने की लत लग गई है, क्या करूं?

सवाल

मैं 19 साल की लड़की हूं और इस बार 12वीं क्लास में कौमर्स से पढ़ रही हूं. लौकडाउन के दौरान मुझे मोबाइल पर ब्लू फिल्में देखने की लत लग गई है, जिस के कुछ सीन कभी भी मेरे रोंगटे खड़े कर देते हैं. अब तो कौपीकिताबों में भी वही सब दिखता है. इस से पढ़ाई का नुकसान हो रहा है.

मम्मीपापा सोचते हैं कि लड़की मोबाइल में पढ़ रही है. मुझे इस बात का भी दुख होता है कि मैं उन्हें धोखा दे रही हूं, लेकिन यह आदत छोड़ नहीं पा रही हूं. आप सलाह दें कि मैं ऐसा क्या करूं, जिस से फेल भी न होऊं और ब्लू फिल्मों का भी मजा ले सकूं?

जवाब

आप दोनों काम एकसाथ कर सकती हैं, लेकिन इस के लिए आप को धीरेधीरे पढ़ाई में ज्यादा वक्त देना होगा. ब्लू फिल्मों का चसका नुकसानदेह है. कोशिश कर के इस से छुटकारा पाएं. शौकिया ये फिल्में देखना हर्ज की बात नहीं, लेकिन इम्तिहान में यह सब नहीं पूछा जाएगा.

आजकल लड़के तो लड़के, स्कूलकालेज की बहुत सी लड़कियां मोबाइल का इसी तरह इस्तेमाल कर रही हैं. इस की अति उन का ही नुकसान कर रही है. फेल होने के बाद इस लत को कोसें, उस से तो बेहतर है कि अभी से इसे कम करें.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem
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