वह अनजान लड़की: स्टेशन पर दिनेश के साथ क्या हुआ

दिनेश नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ‘राजधानी ऐक्सप्रैस’ ट्रेन के इंतजार में कुरसी पर बैठा था, तभी जींसटौप, सैंडल पहने और मौडल सी दिखने वाली खूबसूरत सी लड़की दनदनाती हुई आई और उस के दोनों हाथ पकड़ कर ‘जीजूजीजू…’ कहते हुए उस के बगल की कुरसी पर बैठ गई.

वह लड़की लगातार बोले जा रही थी, ‘‘पूरे 2 साल बाद आप मिल रहे हैं. इस बीच आप ने अपनी हैल्थ को काफी मेंटेन कर लिया है. सुषमा दीदी कैसी हैं? प्रेम और बिपाशा की क्या खबर है?’’

दिनेश हैरान था, फिर भी इतनी खूबसूरत लड़की से बात करने का लालच वह छोड़ नहीं पा रहा था. वह भी उस की हां में हां मिलाने लगा. सच कहें, तो उसे भी उस लड़की से बात करने में मजा आने लगा था.

तकरीबन 45 मिनट तक वह लड़की दिनेश से बात करती रही. बीचबीच में वह एकाध शब्द बोल लेता था.

उस लड़की ने पूछा, ‘‘जीजू, आप कहां जा रहे हैं?’’

दिनेश ने थोड़ा झिझकते हुए कहा, ‘‘मैं पटना जा रहा हूं.’’

फिर वह लड़की बोली, ‘‘जीजू, मुझे मुंबई की ट्रेन पकड़नी है. क्या आप मुझे ट्रेन में बिठाने में मदद कर देंगे? प्लीज…’’

दिनेश ने घड़ी देखी. उस की ट्रेन आने में तकरीबन एक घंटे की देरी थी. उस ने लड़की से पूछा, ‘‘तुम्हारी ट्रेन कितने बजे की है?’’

उस ने कहा, ‘‘बस, 10 मिनट में आने वाली है.’’

कुछ देर बाद ही उस लड़की की ट्रेन आ गई. दिनेश ने उस का बैग संभाल लिया और एसी बोगी में उसे बर्थ पर बिठा कर उस का सामान रख दिया.

कुछ पल के बाद लड़की के चेहरे पर बेफिक्री का भाव आया. उस ने दिनेश के दोनों हाथ पकड़ लिए, फिर बोली, ‘‘सर, मैं आप की मदद के लिए सचमुच दिल से आभारी हूं. मेरा नाम प्रिया है. मैं मुंबई में रहती हूं. मैं एक मौडल हूं. ‘‘दरअसल, मैं एक जरूरी काम के सिलसिले में दिल्ली आई थी. आज होटल से निकलते वक्त ही कुछ गुंडेमवाली किस्म के लोग मेरी टैक्सी का पीछा कर रहे थे. उस के बाद वे मेरे पीछेपीछे प्लेटफार्म पर भी घुस आए. फिर आप से मुलाकात हुई और वे गुंडे तितरबितर हो कर लौट गए.

‘‘मैं आप की मदद के लिए सचमुच एहसानमंद हूं. यह रहा मेरा विजिटिंग कार्ड. कभी मुंबई आना हुआ, तो आप मुझे काल कर लेना.’’

दिनेश ने उठतेउठते पूछ ही लिया, ‘माफ कीजिएगा प्रियाजी, मैं भी एक मर्द ही हूं. मुझ पर आप ने कैसे भरोसा कर लिया?’’

प्रिया ने बड़ी शोख अदा से मुसकराते हुए कहा, ‘‘सर, मैं एक राज की बात बताती हूं, लड़कियां किसी जैंटलमैन को पहचानने में कभी भूल नहीं करतीं.’’

प्रिया की यह बात सुन कर दिनेश ने एक लंबी राहत भरी सांस ली, उसे ‘हैप्पी जर्नी’ कहा और ट्रेन से उतर गया.

एक दूजे के हुए रकुलप्रीत और जैकी, वायरल हुई शादी की फोटोज

बौलीवुड की जानीमानी जोड़ी अब एक दूजे के हो गए है. जी हां, साउथ फिल्म और बौलीवुड में पैर जमाने वाली एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह ने शादी कर ली है. रकुल ने जैकी भगनानी संग सात फेरे लिए है.दोनों की शादी की फोटोज भी खूब वायरल हो रही है. जिन्हे फैंस का खूब प्यार मिल रहा है.

 

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आपको बता दें, कि साउथ फिल्म एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी आखिरकार शादी के बंधन में बंध गए हैं. जिसकी पहली फोटोज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. फिल्ममेकर जैकी भगनानी ने अपनी लेडी लव रकुल प्रीत सिंह की मांग भर दी है. इनकी सिंधी वेडिंग हुई है जिसकी तस्वीरे पर लोग खूब कमेंट करते दिख रहे है.

दोनों ही तस्वीरों में बहेद ही खुश नजर आएं है. शादी की तस्वीरों ने फैंस का खूब जीता है. अपनी ब्राइडल फोटोज शेयर कर फिल्म स्टार रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘अब हम दोनों भगनानी’. रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी की शादी की पहली तस्वीरें इंस्टाग्राम पर आते ही छाने लगी हैं.

 

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बता दें कि फिल्म स्टार रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी की ग्रैंड इंडियन वेडिंग गोवा में हुई है. जहां दोनों सितारों ने सात जन्मों के वचन लिए. फिल्म स्टार रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी ने इस दौरान शादी के बाद सनसेट तस्वीरें क्लिक करवाईं. शादी के बाद ये स्टार कपल पैपराजी से मिलना नहीं भूला. रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी ने शादी के बाद पैपराजी से मुलाकात की.

शादी के बाद वायरल हो रही इस तस्वीर में रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी काफी खुश दिखाई दिए. रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी की स्माइल फैंस का दिल लूट रही है.

जिम में पसीने बहाते नजर आई भोजपुरी एक्ट्रेस नम्रता मल्ला, बनाया परफेक्ट फिगर

भोजपुरी सिनेमा की जानी-मानी सेक्सी और बेबाक एक्ट्रेस नम्रता मल्ला का हर कोई दीवाना है. नम्रता सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी फोटोज और वीडियोज शेयर करती रहती है. नम्रता मल्ला का अंदाज इतना कातिलाना है कि हर कोई घायल हो जाता है. बोल्डनेस में नम्रता मल्ला बौलीवुड की सनी लियोनी को भी टक्कर देती हैं. नम्रता मल्ला फैंस के साथ वीडियोज शेयर कर उन्हे खुश करती रहती है. ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है. जो कि सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

 

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आपको बता दें, कि नम्रता मल्ला सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. नम्रता अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं. इस बीच नम्रता मल्ला ने एक बार फिर से फैंस के दिलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. नम्रता मल्ला का एक वीडियो सामने आया है, जो कि इंटरनेट की दुनिया में तेजी से फैल रहा है. इस क्लिप में नम्रता वर्कआउट करती नजर आ रही है. इस वीडियो के जरिए नम्रता ने बताया है कि वो अपना फिगर ऐसे मेंटेन करती हैं. नम्रता मल्ला का ये अंदाज देख फैंस मदहोश हो गए हैं. वीडियो पर लोग जमकर रिएक्ट कर रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, ‘किलर है.

 

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बताते चलें कि भोजपुरी एक्ट्रेस नम्रता मल्ला ने अपनी पहचान म्यूजिक वीडियोज के जरिए बनाई है. उन्होंने पवन सिंह से लेकर खेसारी लाल यादव तक के साथ काम किया है. मालूम हो कि नम्रता मल्ला एक बेहतरीन डांसर है. इस बात की जानकारी उनका इंस्टाग्राम अकाउंट देता है. डांसिंग के मामले में नम्रता मल्ला, तमाम एक्ट्रेसेस को टक्कर देती हैं. भोजपुरी एक्ट्रेस नम्रता मल्ला के ठुमकों पर पूरा यूपी-बिहार फिदा हैं. नम्रता मल्ला की फैन फॉलोइंग भी जबरदस्त है. इंस्टाग्राम पर उन्हें 2.6 मिलियन लोग फॉलो करते हैं.

लगातार बढ़ता कुत्तों का खौफ

देशभर में कुत्तों का खौफ बढ़ रहा है. भोपाल शहर में 16 जनवरी, 2024 को 1-2 नहीं, बल्कि 45 लोगों को कुत्तों ने काट लिया था. इस के हफ्तेभर पहले ही कारोबारी इलाके एमपी नगर में महज डेढ़ घंटे में 21 लोगों को कुत्तों ने काटा था. छिटपुट घटनाओं की तो गिनती ही नहीं.

लेकिन दहशत उस वक्त भी फैली थी, जब अयोध्या इलाके में रहने वाले एक मजदूर परिवार के 7 महीने के मासूम बच्चे को कुत्तों के झुंड ने घसीट कर काटकाट कर मार डाला था. उस बच्चे का एक हाथ ही कुत्तों ने बुरी तरह से चबा डाला था.

देश के हर छोटेबड़े शहर की तरह भोपाल भी कुत्तों से अटा पड़ा है. कुत्तों की सही तादाद का आंकड़ा नगरनिगम के पास भी नहीं है, लेकिन पालतू कुत्तों की संख्या केवल 500 है. इतने ही लोगों ने अपने पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन कराया है, वरना तो पालतू कुत्तों की तादाद 10,000 से भी ज्यादा है.

लेकिन नई समस्या पालतू या आवारा कुत्तों की तादाद से ज्यादा उन का खौफ है, जिस का किसी के पास कोई हल या इलाज नहीं दिख रहा है.

इलाज तो कुत्तों के काटे का भी सभी को नहीं मिल पाता, क्योंकि ऐसे बढ़ते मामलों के मद्देनजर अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजैक्शनों का टोटा पड़ने लगा है.

10 जनवरी, 2024 को कुत्ते के काटने के बाद जब 45 लोग एकएक कर जयप्रकाश अस्पताल पहुंचे थे, तब कुछ को ही ये इंजैक्शन मिल पाए थे.

वैसे तो कुत्तों का खौफ पूरे देश और दुनियाभर में है, लेकिन भोपाल के हादसों ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा है सिवा सरकार और नगरनिगम के, जिन का कहना यह है कि जब वे कुत्तों पर कोई कार्यवाही करते हैं, तो ?ाट से कुत्ता प्रेमी आड़े आ जाते हैं.

14 जनवरी, 2024 को जब नगरनिगम की टीम आवारा कुत्तों को पकड़ने पिपलानी इलाके में पहुंची, तो एक कुत्ता प्रेमी लड़की उस टीम से भिड़ गई. नगरनिगम ने उस लड़की के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी.

यह जान कर हैरानी होती है कि भोपाल में नगरनिगम अमला अब तक तकरीबन 7 कुत्ता प्रेमियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा चुका है.

क्या करें इन कुत्तों का

जाहिर है कि कुत्ता प्रेमियों का विरोध ‘कुत्ता पकड़ो मुहिम’ में बाधा बनता है. कई एनजीओ तो बाकायदा कुत्ता प्रेम से फलफूल रहे हैं. इन की रोजीरोटी ही कुत्ता प्रेम है. इन लोगों को उन मासूमों की मौत से कोई लेनादेना नहीं, जिन्हें कुत्तों ने बेरहमी से काटकाट कर और घसीटघसीट कर मार डाला.

आवारा और पालतू कुत्तों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है, तो इस की बड़ी वजह कुत्तों की नसबंदी न हो पाना भी है जो आसान काम नहीं, लेकिन इस बाबत तो स्थानीय निगमों को जिम्मेदारी लेनी ही पड़ेगी कि वे ढिलाई बरतते हैं और हरकत में तभी आते हैं, जब हादसे बढ़ने लगते हैं.

लाख टके का सवाल जो मुंहबाए खड़ा है वह यह है कि इन कुत्तों का क्या किया जाए? इन्हें मारो तो दुनियाभर के लोगों की हमदर्दी और कानून आड़े आ जाते हैं और न मारो तो बेकुसूर लोग परेशान होते हैं. कई मासूमों की मौत ने तो इस चिंता को और बढ़ा दिया है. जहां नजर डालें, चारों तरफ कुत्ते ही कुत्ते दिखते हैं.

धर्म भी कम जिम्मेदार नहीं

कुत्तों के हिंसक होने की कोई एक वजह नहीं होती. भोपाल के हादसों के बीच कुछ ज्ञानियों ने मौसम को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की, लेकिन यह दलील लोगों के गले नहीं उतरी.

असल में लोगों की धार्मिक मान्यताएं भी इस की जिम्मेदार हैं, जो यह कहती हैं कि कुत्तों को शनिवार के दिन खाना खिलाने से जातक पर शनि और राहू का प्रकोप नहीं होता. भोपाल में जगहजगह ऐसे सीन देखने को मिल जाते हैं, जिन में राहूशनि पीडि़त लोग कुत्तों का भंडारा कर रहे होते हैं.

भोपाल के ही शिवाजी नगर इलाके में हर शनिवार की शाम एक बड़ी कार रुकती है, तो कुत्ते जीभ लपलपाते उस की तरफ लपक पड़ते हैं.

इस गाड़ी से 2 सभ्य सज्जन उतरते हैं और कुत्तों को बिसकुट, रोटी, ब्रैड वगैरह खिलाते हैं और इतने प्यार से खिलाते हैं कि पलभर को आप यह भूल जाएंगे कि इन कुत्तों की वजह से औसतन 5 लोग रोज अस्पतालों के चक्कर काटते हैं और हैरानपरेशान होते हैं.

कहना तो यह बेहतर होगा कि इन धर्मभीरुओं की वजह से लोग तकलीफ उठाते हैं और पैसा भी बरबाद करने को मजबूर होते हैं.

कुत्तों के इस सामूहिक और सार्वजनिक भोज के नजारे में दिलचस्प बात यह भी है कि इस वक्त कुत्ते बिलकुल इनसानों की तरह अपनी बारी के आने का इंतजार इतनी शांति और अनुशासन से करते हैं कि लगता नहीं कि ये वही कुत्ते हैं, जो बड़ी चालाकी से घात लगा कर राह चलते लोगों की पिंडली अपने दांतों में दबा लेते हैं या फिर ग्रुप बना कर ‘भोंभों’ करते हुए राहगीरों और गाडि़यों पर ?ापट्टा मारते हैं.

नेताओं के प्रिय कुत्ते

इस में शक नहीं है कि गाय के साथसाथ कुत्ता पुराने जमाने से ही आदमी का साथी और पालतू रहा है. महाभारत काल में तो कुत्ता पांडवों के साथ स्वर्ग तक गया था.

हुआ यों था कि धर्मराज के खिताब से नवाजे गए युधिष्ठिर के लिए जब स्वर्ग का दरवाजा खुला, तो वे अड़ गए कि जाऊंगा तो कुत्ता ले कर ही, वरना नहीं जाऊंगा.

बात बिगड़ने लगी, तो उपन्यासकार वेद व्यास ने सुखांत के लिए यह बताते हुए सस्पैंस खत्म किया कि उस कुत्ते के वेश में यमराज ही थे, जो युधिष्ठिर का इम्तिहान ले रहे थे.

यानी, पौराणिक काल से ही कुत्ता आम के साथसाथ खास लोगों और शासकों का प्रिय रहा है. मौजूदा दौर में कई नेताओं का कुत्ता प्रेम अकसर खबर बनता है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रिय कुत्ता कालू तो इंटरनैट सैलिब्रिटी कहलाता है. यह लैब्राडोर नस्ल का कुत्ता गोरखपुर में उन के मठ में रहता है और पनीर खाने का शौकीन है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी कुत्तों के शौकीन हैं. उन के नए कुत्ते का नाम ‘नूरी’ है, जो उन्होंने अपनी मां सोनिया गांधी को कर्नाटक चुनाव के दौरान तोहफे में दिया था. इस कुत्ते की नस्ल जैक रसेल टैरियर है.

यहां बताना प्रासंगिक है कि इस कुत्ते (शायद कुतिया) का नाम ‘नूरी’ रखने पर एआईएमआईएम के एक नेता मोहम्मद फरहान ने इसे उन लाखों मुसलिम लड़कियों की बेइज्जती बताया था, जिन का नाम नूरी है.

भोपाल के हादसों के बाद साध्वी उमा भारती ने भी कुत्ता प्रेमियों को लताड़ लगाई थी. कुत्तों के खौफ से बचने के लिए उन्होंने कुत्तों के लिए अलग से अभयारण्य बनाए जाने की बात कही थी. मुमकिन है, अब गौशालाओं की तर्ज पर कुत्ताशालाएं खुलने की मांग उठने लगे.

लेकिन हल यह है

देशभर में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 में 27 लाख,

50 हजार लोगों को कुत्तों ने काटा था. यह एक चिंताजनक आंकड़ा है, क्योंकि इन में से 20,000 लोग रेबीज से मरे. ऐसे में कोई वजह नहीं कि कुत्तों से हमदर्दी रखी जाए, लेकिन उन्हें मार देना भी हल नहीं.

बेहतर तो यह होगा कि लोग कुत्ते पालना बंद करें, इन्हें खाना देना बंद करें, अपने धार्मिक अंधविश्वास छोड़ें. इन सब से समस्या खत्म भले न हो, लेकिन कम तो जरूर होगी.

मैं 32 साल के शादीशुदा आदमी से प्यार करती हूं, लेकिन क्यों वो मुझे धोखा दे रहा है?

सवाल

मैं 22 साल की हूं और एक 32 साल के आदमी से प्यार करती हूं. वह पिछले 2 साल से मुझे जानता है और मेरे साथ जिस्मानी सुख भी ले चुका है. पर अब लगता है कि वह शादीशुदा है और मुझे सिर्फ इस्तेमाल कर रहा था, क्योंकि जब भी मैं उस के घर जाने की बात करती हूं, तो वह टाल जाता है.

मुझे इस बात से तनाव रहने लगा है और अब तो मेरे घर वाले भी मुझ पर शादी करने का दबाव बनाने लगे हैं. मैं क्या करूं?

सवाल

आप लुटपिट चुकी हैं, लेकिन बरबाद नहीं हुई हैं. जो भी हुआ, आप की रजामंदी से हुआ. आप को आप के आशिक ने जिन बातों की बाबत अंधेरे में रखा, उस के लिए टैंशन लेने से आप को कुछ हासिल नहीं होने वाला. बेहतर होगा कि अब आप चुपचाप घर वाले जहां कहें, वहां शादी कर लें, लेकिन अपने आशिक से एकदम नहीं, बल्कि धीरेधीरे नाता तोड़ें.

उस के घर जाने से आप को कुछ हासिल नहीं होने वाला. उस की बीवी आप को ही दोष देगी. अगर आप की मंशा प्रेमी की जिंदगी में भी तनाव घोलने की है, तो यह खयाल दिल से निकाल दें, क्योंकि इस में आप का ज्यादा नुकसान होगा.

400 पार : दावा या महज शिगूफा

भारतीय जनता पार्टी ने अपने अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा खोल दिया है. साल 2024 में वह पूरे भारत को जीतना चाहती है. इस के लिए उस ने लोकसभा की 400 सीटें जीतने का टारगेट रखा है.

भारत के इतिहास में 400 सांसदों की जीत केवल साल 1984 में मिली थी, जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी. राजीव गांधी उस समय कांग्रेस के नेता थे. इस हमदर्दी वाले चुनाव में कांग्रेस को लोकसभा की 404 सीटें मिली थीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नाम इतिहास में लिखवाने का शौक है. ऐसे में वे 2024 के लोकसभा चुनाव में राजग गठबंधन को 400 से ज्यादा सीटें हासिल करने का टारगेट ले कर चल रहे हैं.

पौराणिक कहानियों में तमाम ऐसे राजाओं की कहानियां दर्ज हैं, जो अपनी ताकत दिखाने के लिए अश्वमेध यज्ञ करते थे. इस के लिए वे अपना एक घोड़ा छोड़ते थे. घोड़ा जो भी पकड़ता था, उसे राजा से लड़ना होता था.

मजेदार बात यह है कि यह घोड़ा केवल कमजोर राज्यों की तरफ जाता था. भारत के किसी भी राजा ने दूसरे देशों पर अपना ?ांडा नहीं लहराया है. जिस तरह से मुगलों ने भारत पर हमला किया, उस तरह भारत के किसी राजा ने दूसरे देश को अपने कब्जे में नहीं किया. इस से यह पता चलता है कि अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा अपने ही आसपास के राज्य के राजाओं के लिए छोड़ा जाता था.

खोया चाल, चरित्र और चिंतन

लोकतंत्र में अश्वमेध घोड़ा तो नहीं छोड़ा जा सकता, ऐसे में इस के लिए दूसरी पार्टियों को खत्म करना जरूरी हो गया है. इस के लिए भाजपा तोड़फोड़ और दलबदल को बढ़ावा दे रही है. बिहार में जद (यू) और राजद गठबंधन को तोड़ कर नीतीश कुमार को भाजपा ने अपनी तरफ मिला लिया.

उत्तर प्रदेश में भाजपा के जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल पर डोरे डाल रही है. महाराष्ट्र में शिवसेना को तोड़ कर एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाया गया. इस के साथ ही विरोधी नेताओं को दबाने के लिए सीबीआई और ईडी का सहारा लेना पड़ रहा है.

इस तरह के काम हमेशा कमजोर लोग करते हैं. भाजपा खुद को ताकतवर कहती है, सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी बताती है, लेकिन इस के बाद भी उसे छोटे दलों में तोड़फोड़ करनी पड़ती है.

चंडीगढ़ में मेयर का चुनाव जीतने के लिए इसी तरह का काम किया गया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट तक को कड़ी टिप्पणी करनी पड़ी है.

चुनाव में दलबदल कोई नई बात नहीं है. हरियाणा में 1980 के दशक में ‘आयाराम गयाराम’ नाम से दलबदल मशहूर था. उत्तर प्रदेश में भाजपा, बसपा और सपा की सरकार के दौर में साल 1989 के बाद से साल 2007 तक यह खूब हुआ. इस में संस्कारवान कही जाने वाली भाजपा का बड़ा योगदान रहा है.

बिना विपक्ष कैसा लोकतंत्र

राजनीति में पालाबदल संस्कृति धर्म के रास्ते आई. पौराणिक कहानियों में कई जगहों पर यह बताया गया है कि देवता भी एकदूसरे के पक्ष में पालाबदल करते रहते थे. उन की कहानियां सुना कर नेता अपने पालाबदल को सही ठहराते हैं. वे कहते हैं कि इंसाफ के लिए बोला गया झठ कभी झठ नहीं होता.

‘रामायण’ में राम ने छिप कर राजा बाली को मारा. बाली ने अपना कुसूर पूछा, तो राम ने कहा कि अपने भाई का राज्य और पत्नी हासिल करने के अपराध का दंड है. विभीषण ने रावण के अधर्म को ढाल बना कर पाला बदल लिया. ‘महाभारत’ में कृष्ण ने दोनों पाले में रहने का फैसला करते समय कहा कि वे युद्ध नहीं करेंगे. इस के बाद भी वे परोक्ष रूप से युद्ध में हिस्सा लेते रहे.

आज भी नेता जब पाला बदलते हैं, तो कहते हैं कि उस पार्टी का लोकतंत्र खत्म हो गया था, वहां दम घुट रहा था. अब आजादी की सांस ले रहे हैं, घरवापसी हो गई है. संविधान बचाने के लिए दलबदल जरूरी था.

नेताओं के जैसे ही घर, परिवार और महल्लों में अलगअलग पाले बन जा रहे हैं. घरों में 2 ही भाई हैं, तो दोनों के बीच पाले बन गए हैं. उन के बीच खींचतान होती है. पालाबदल की यह संस्कृति धर्म से राजनीति, राजनीति से घरों तक फैल रही है. इस से घर का अमनचैन बिगड़ रहा है.

लोकतंत्र में अगर विधायकों, सांसदों को बचाने के लिए कभी हैदराबाद, कभी गोवा और कभी गुवाहाटी के रिजौर्ट में कैद रखना पड़े, तो यह कैसा लोकतंत्र और कैसी आजादी? दलबदल करने वाला नेता तो इस का जिम्मेदार है ही, जो ताकत इस के लिए मजबूर कर रही है, वह और भी ज्यादा जिम्मेदार है.

केवल 400 के पार जाने से क्या हासिल होगा? लोकतंत्र में संख्या का बल तो अहमियत रखता ही है, उस से ज्यादा अहमियत विपक्ष भी रखता है. सब सांसद हां में हां ही मिलाते रहेंगे, तो जनता की आवाज को कौन उठाएगा?

सबसे बेहतर है सप्ताह में एक बार सेक्स

आम धारणा है कि ज्यादा सेक्स से संबंध ज्यादा बेहतर होते हैं, लेकिन इसके विपरीत एक शोध में यह बताया गया है कि सप्ताह में एक बार सेक्स करने वाले जोड़े सबसे ज्यादा खुश रहते हैं. प्रमुख शोधार्थी कनाडा के टोरंटो-मिसीसोगा विश्वविद्यालय की एमी मूज बताती हैं, “हालांकि ज्यादा से ज्यादा सेक्स को खुशी से जोड़ा गया है. लेकिन सप्ताह में एक बार सेक्स सबसे बेहतर है.”

मूज कहती हैं, “हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि अपने साथी के साथ अंतरंग संबंध बनाए रखना जरूरी है. इसके लिए रोज सेक्स करने की कोई जरूरत नहीं है.”

हालांकि पिछले कई शोधों और स्वयं-सहायता पुस्तकों में यह बताया जाता रहा है कि ज्यादा सेक्स से ज्यादा खुशी मिलती है.

लेकिन 30,000 अमेरिकी नागरिकों पर चार दशकों तक किए गए इस शोध में पहली बार यह पता चला है कि जिन जोड़ो ने सप्ताह में औसतन एक से ज्यादा बार सेक्स किया उनके आपसी रिश्तों से इसका कोई संबंध नहीं देखा गया.

यह शोध सोशल साइकोलॉजिकल और पर्सनैलिटी साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है. मूज कहती है, “हमारे निष्कर्ष युवा या बुजुर्ग जोड़ों, नए-नए शादीशुदा या फिर जिनकी शादी दशकों पहले हुई हो, सब पर समान रूप से लागू होते हैं.”

मूज कहती हैं कि इस सर्वेक्षण का मकसद यह नहीं है कि जोड़े सप्ताह में एक बार सेक्स के औसत तक पहुंचने के लिए कम या ज्यादा सेक्स करने लगे. लेकिन अपने साथी के साथ इस संबंध में बात जरूर करें कि क्या वे उनकी यौन जरूरतों को पूरा कर पा रहे हैं.

वे कहती हैं, “अपने साथी के साथ अंतरंग संबंध बनाए रखना जरूरी है न कि ज्यादा से ज्यादा सेक्स करना.”

फर्जी फाइनैंस कंपनियों के लालच में लुटते लोग

रामनाथ ने नया घर खरीदने के लिए जिस फाइनैंस कंपनी में पेट काट कर तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए 50 हजार रुपए की रकम जमा कराई थी, वहां अब अलीगढ़ी ताला झूल रहा था. जबकि फाइनैंस कंपनी ने तो यही कहा था कि कुछ ही समय में उस का पैसा दोगुना कर वापस लौटा दिया जाएगा. वह समय आज तक नहीं आया और शायद आएगा भी नहीं. जानकारी के मुताबिक, राजस्थान के कई शहरों खासकर जयपुर, जोधपुर, कोटा, भीलवाड़ा व उदयपुर में कई फाइनैंस कंपनियों की धोखाधड़ी के सैकड़ों मामले दर्ज हुए हैं.

जेवीजी फाइनैंस कंपनी, हीलियस ग्रुप, राप्ती ग्रुप, फर्स्ट ग्रुप, यंग फौर्मर कंपनी, स्वर्ण भूमि फाइनैंस कंपनी, लोक विकास फाइनैंस कंपनी, चंबल वित्त विकास, अनंज ग्रुप, नौर्थसाउथ ग्रुप फाइनैंस कंपनी, फौरैस्ट इंडिया फाइनैंस कंपनी वगैरह कंपनियों में लाखों लोगों की पूंजी फंसी हुई है.

जयपुर के पास ही सांगानेर इलाके में स्वर्ण भूमि फाइनैंस कंपनी के ताला लगे दफ्तर की तरफ देखते हुए सांगानेर में किराना स्टोर की दुकान चला रहे अशोक कुमार से जब पूछा गया कि स्वर्ण भूमि फाइनैंस कंपनी का क्या मतलब है? तो उस ने एक फीकी मुसकान के साथ जवाब दिया, ‘‘स्वर्ण कमाओ और भूमिगत हो जाओ.’’

लोक विकास कंपनी से गुस्साए देवेंद्र का कहना है, ‘‘मेरी सारी बचत लुट गई. रोजाना पैसा जमा करने का खाता खोला था. अपने जमा 16 हजार रुपए और ब्याज लेना था. इस से पहले ही कंपनी रफूचक्कर हो गई.’’

दुकानदार कन्नूलाल का कहना था, ‘‘यह एक छूत की बीमारी की तरह था. हम ने उम्मीद लगाई थी कि शायद हम भी कुछ दिनों में अमीर हो जाएंगे, इसलिए एक लाख रुपए की पूंजी सावधि खाते में लगा दी. पर होश तब आया, जब फूटी कौड़ी भी नहीं मिली.’’

गणेश प्रजापत ने रिटायरमैंट के बाद पहले तो कोई छोटामोटा धंधा करने का मन बनाया, लेकिन बाद में पता नहीं क्या सूझा कि लोक विकास कंपनी में पैसा लगा बैठे. अब न तो कंपनी का पता है और न ही रकम का.

फर्जी गैरबैंकिंग कंपनियों का निवेशकों की रकम ले कर छूमंतर होने का सिलसिला पिछले 10-15 सालों में ज्यादा बढ़ा है. हैरान करने वाली बात यह है कि गैरबैंकिंग फाइनैंस कंपनियों ने एजेंटों का जाल फैला कर उन के बूते अपना गोरखधंधा जमाया और रकम बटोरते ही उड़ गए.

लेकिन सब से ज्यादा बुरी गत तो एजेंटों की हुई. इन में से कुछ ने तो खुदकुशी कर ली, तो कई एजेंट भाग गए और जो लोकल इलाके में अपनी साख बनाए हुए थे, उन्हें अपना घरमकान तक बेचना पड़ा.

कदम कदम पर ठगी

कार फाइनैंस के बहाने रकम उड़ाने वाले जालसाज दिनेश शर्मा ने नौकरी दिलाने के नाम पर भी लोगों से लाखों रुपए की ठगी की. उस ने खुद को एक जानीमानी फाइनैंस कंपनी का रिकवरी एजेंट बताते हुए एक लोकल अखबार में इश्तिहार दिया कि दोपहिया और चौपहिया गाड़ी के लिए लोन लेने वाले मिलें. मिलने के लिए उस ने एक मोबाइल नंबर दिया था.

जयपुर की लालकोठी कालोनी में विधानसभा भवन के पीछे रहने वाले नरेंद्र अवस्थी ने दिनेश शर्मा से एक कार खरीदने के लिए फाइनैंस कराने के लिए कहा. सवा 2 लाख रुपए की पुरानी कार के लिए नरेंद्र अवस्थी के पास एक लाख, 20 हजार रुपए थे. एक लाख रुपए फाइनैंस कराने की बात तय हुई.

दिनेश शर्मा के कहने पर 1 सितंबर, 2015 को नरेंद्र अवस्थी रुपए ले कर आईसीआईसीआई बैंक पहुंचा. दिनेश शर्मा ने उसे रिसैप्शन पर बैठा दिया और रुपए खाते में जमा कराने के बहाने ले कर चला गया. जब वह काफी देर तक नहीं लौटा, तो नरेंद्र अवस्थी ने उसे काफी खोजा. इस के बाद उस ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई.

दूसरी घटना में सूर्य नगर, जयपुर के रहने वाले दांतों के डाक्टर सुमित कुमार ने बजाज नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई.

रिपोर्ट के मुताबिक, जगतपुरा रोड पर रहने वाले श्रवण लाल जांगिड़ ने उन के मकान को जयपुर डवलपमैंट अथौरिटी में कराने के लिए 40 हजार रुपए ले लिए. बदले में फर्जी कागजात थमा दिए.

आनेजाने के दौरान सुमित कुमार की बीवी की नौकरी और इनकम टैक्स दफ्तर में फाइल खुलवाने के लिए अगस्त महीने में 50 हजार रुपए और ले लिए. वे कागजात जयपुर डवलपमैंट अथौरिटी में दिखाने पर श्रवण लाल जांगिड़ की पोल खुली.

जयपुर में एक कंपनी ने अपनी चेन स्कीम में लुभावने ख्वाब दिखा कर दौसा जिले के हजारों लोगों को सदस्य बनाया और 13 करोड़ रुपए ठग कर उस के कर्ताधर्ता फरार हो गए. परेशान लोगों ने थाने में रिपोर्ट लिखाई. केस की जांच चल रही है.

दरअसल, आम आदमी की कमाई को अगर कोई ठगता है, तो इस में कुसूर उन लोगों का भी है, जिन्हें अपने पैसे को हिफाजत से रखने का सलीका नहीं है.

चढ़ावे के नाम पर पंडेपुजारी, पार्टी के नाम पर नेता व टैक्सों के नाम पर सरकारें आम जनता की जेब हलकी करती हैं. ऐसे में अगर बोगस कंपनियां भी बहती गंगा में हाथ धो लें, तो हैरत कैसी?

यह बात दीगर है कि हमारे देश में धर्म, जाति व मजहब के नाम पर दाढ़ीचोटी वाले सदियों से भोलेभाले गरीबों को चूस रहे हैं, तभी तो मठमंदिरों, बाबाओं के पास अपार धनदौलत है.

बचत करना और उस को संभाल कर रखना जरूरी है, ताकि रकम के डूबने की नौबत न आए. हिफाजत के लिहाज से बैंक, पोस्ट औफिस व सरकारी स्कीमों को बेहतर माना जाता है.

कई बैंकों में ऐसा हो चुका है कि बैंक के मुलाजिमों ने अपने रिकौर्ड से खाताधारकों के दस्तखत देख कर फर्जी दस्तखत किए और मीआद खत्म होने से पहले खुद ही उस की फर्जी अर्जी लगा कर रकम निकाल ली. एटीएम से दूसरों का पैसा निकाल लेना तो अब मामूली बात है.

बरतें चौकसी

गौरतलब है कि हमारे देश के कारपोरेट जगत में गड़बड़ी व धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. हालांकि सरकार ने कंपनियों के लिए कारोबार

के सही हालात दिखाना कानूनन जरूरी किया हुआ है. सेबी, यूटीआई व आईसीआईसीआई बैंक वगैरह कई संस्थाएं व संगठन भी इश्तिहार देते रहते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग उन पर ध्यान ही नहीं देते. वे इस बात की परवाह नहीं करते कि कहीं भी पैसा लगाने का फैसला करने से पहले जागरूक होना बेहद जरूरी है.

बीवी एक तोहफा : शबनम का पति

शबनम और सीमा बचपन से ही साथ पढ़ी थीं. शबनम शुरू से ही सहमीसहमी सी रहती थी. वह किसी से भी ज्यादा बात नहीं करती थी. लेदे कर बस एक सीमा ही थी उस की खास सहेली, जिस से वह अपने सुखदुख की बातें कर लिया करती थी.

एक लड़का रोज शबनम का पीछा करता था और उसे छेड़ता था. शबनम को यह सब अच्छा नहीं लगता था. वह उसे बिलकुल पसंद नहीं करती थी.

एक दिन शबनम स्कूल नहीं आई. सीमा उस से मिलने उस की कोठी पर गई. शबनम गुमसुम बैठी थी और किसी बात पर रोए जा रही थी.

सीमा ने शबनम की बदहवासी की वजह पूछी, तो उस ने बताया, ‘‘बबलू नाम का एक लड़का मेरे बड़े अब्बू के बेटे राज का दोस्त है, जो मुझे हर समय परेशान करता है और राज भी उसे कुछ नहीं कहता है.

‘‘मेरे अब्बू बहुत तेज मिजाज के हैं. उन्हें भनक भी हुई तो वे मेरी तालीम रुकवा देंगे. मैं क्या करूं, कुछ सम?ा नहीं पा रही हूं. अब तू ही कोई बेहतर रास्ता सुझ.’’

सीमा ने उस से कहा, ‘‘कल हम दोनों साथ ही स्कूल चलेंगी.’’

अगले दिन हम एकसाथ स्कूल गईं. वह लड़का बबलू फिर शबनम के सामने आ गया और उस का हाथ पकड़ लिया.

सीमा ने शबनम को हिम्मत दिलाई और उस ने बबलू को एक जोरदार तमाचा जड़ दिया. उस दिन के बाद से बबलू दिखाई नहीं दिया.

समय गुजरा और एक दिन शबनम का निकाह राज से तय हो गया. शबनम तैयार न थी, फिर भी घर वालों के दबाव में उस ने यह निकाह कर लिया.

सुहागरात पर एक लड़की कितने ही सपने संजोती है, आखिर अरमान तो सब के दिल में मचलते हैं. सुहाग सेज पर आने वाली नई जिंदगी के सपनों में खोई शबनम राज का इंतजार कर रही थी. पूरे कमरे में अगरबत्ती की खुशबू में मिली मोगरे और गुलाब के फूलों की खुशबू मदहोश करने वाली थी.

बिस्तर के एक तरफ की टेबल पर बादाम, काजू जैसे मेवों से भरी प्लेट और साथ में एक गिलास दूध का रखा था और दूसरी तरफ की टेबल पर एक देशी ब्रांड की शराब की बोतल के साथ कांच के 2 गिलास थे.

शबनम मन ही मन सोचने लगी, ‘जब राज आएगा तो क्या वह दूध का गिलास आधाआधा कर के पीएगा या आजकल के लोग दूध के बजाय शराब के पैग टकराना पसंद करते हैं, तो क्या राज भी ऐसा करेगा? लेकिन अगर ऐसा हुआ तो मैं ने तो कभी पी ही नहीं, तब तो मुझे जल्दी ही नशा हो जाएगा.’

इतने में अचानक हुई आहट से शबनम चौंक गई. जैसे ही दरवाजा खुला उस के दिल की धड़कनें तेज हो गईं, पलकें शर्म से झक गईं, चेहरे पर इश्क की रंगत की लाली झलकने लगी, सांसें भी तेजी से चलने लगीं, दिल की धड़कन इतनी तेज हो गई कि उसे ‘धकधक’ सुनाई देने लगी.

आज शबनम बला की खूबसूरत लग रही थी. सुर्ख लाल जोड़े में उस का गोरा बदन और भी निखर कर आ रहा था. खूबसूरत जड़ाऊ हार उस की सुराहीदार गरदन को निखार रहा था. माथे का टीका चांद से मुखड़े को चार चांद लगा रहा था. सीना तेज सांस की वजह से ऊपरनीचे ऐसे हो रहा था, मानो कोई 2 गेंद उछाल रहा हो. आज शबनम कयामत ढा रही थी.

जैसेजैसे कदमों की आहट नजदीक आ रही थी, वैसेवैसे शबनम का दिल भी उछल कर बाहर आने को बेताब हो रहा था. लेकिन उस ने खुद पर काबू रखा, अपने अरमानों को अपनी मुट्ठी में दबाए वह राज की छुअन का बेसब्री से इंतजार करने लगी. उस के अरमान मचलने लगे. मन चाहा कि राज जल्दी से आए और उसे अपनी मजबूत बांहों में कस कर बांध ले.

शबनम के होंठ राज के होंठों को अपना रस पिलाने के लिए तड़प उठे कि अचानक उस का घूंघट उठाने के लिए एक हाथ जैसे ही बढ़ा, तो शबनम हाथ के इशारे से रोकते हुए बोली, ‘‘हाय, पहले दरवाजा तो बंद कीजिए.’’

जैसे ही शबनम ने यह कहा, तो जवाब में वह एक अनजान आवाज से चौंकी. वह आवाज बबलू की थी.

बबलू अपने हाथ पर बंधे गजरे की खुशबू सूंघते हुए बोला, ‘‘जानेमन, दरवाजा बंद हो या खुला रहे क्या फर्क पड़ता है, बाहर पहरे पर आप का शौहर राज बैठा है न.’’

शबनम घबरा कर बिस्तर से छलांग लगा कर उठी और बाहर की तरफ भागने लगी, तो बबलू ने उस का हाथ पकड़ लिया और बोला, ‘‘जा कहां रही हो? इतने सालों से जो दिल में आग लगी है, उसे तो बु?ा दो, फिर चली जाना जहां जाना हो.’’

शबनम छटपटाते हुए राज को आवाज लगाने लगी. आवाज सुन कर राज अंदर आया और बोला, ‘‘क्यों शोर मचा रखा है… बबलू अपना यार ही तो है, कोई गैर थोड़े ही है. अपना मुंह बंद रखो और चुपचाप बबलू की बात मानो.

‘‘और हां, मैं कहीं काम से जा रहा हूं, सुबह तक आ जाऊंगा. आने पर कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए,’’ ऐसा कह कर राज बाहर जाते हुए दरवाजा बंद कर गया.

यह सुन कर शबनम की आंखों से केवल आंसू नहीं निकल रहे थे, बल्कि दर्द बह रहा था. क्या करे और क्या न करे, उसे कुछ समझ नहीं आया.

बबलू ने शबनम को अपनी बांहों में जकड़ लिया. शबनम जल बिन मछली की तरह तड़प कर रह गई. उस की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे और बबलू उस के जिस्म को भूखे भेडि़ए की तरह नोंचनेखसोटने लगा था.

अचानक राज घर पर वापस किसी काम से आया, तो जैसे ही उस ने दरवाजा खोला, तो शबनम दौड़ कर राज के पास आ गई.

‘‘आप ने किस गुनाह की सजा दी है मुझे? मैं ने आप का क्या बिगाड़ा था, जो आप ने इतनी घिनौनी हरकत की? क्या कोई इस तरह सुहागरात पर अपनी बीवी के साथ ऐसा सुलूक करता है, जैसा आप कर रहे हैं?’’

‘‘अरे जानेमन, इस में इतना नाराज होने की क्या बात है? तुम्हें सुहागरात ही तो मनानी थी न, तो मैं या बबलू हो, क्या फर्क पड़ता है?

‘‘बबलू अपना जिगरी यार है. अगर उसे कोई चीज पसंद आए और उसे वह हासिल न करे, ऐसा आज तक हुआ नहीं, तो भला अब कैसे होता? और उस ने मुंहमांगी कीमत भी तो दी है… देख कितने रुपए हैं. तुम ने सारी जिंदगी इतने रुपयों की शक्ल नहीं देखी होगी…’’

ऐसा कहते हुए राज नोटों के बंडल उस के सामने रखते हुए आगे बोला, ‘‘अरे, अब मैं भी परिवार वाला हो गया हूं, भला मेरी तनख्वाह से परिवार कहां से पालूंगा? इसलिए कुछ इंतजाम तो करना था. मुझे यह रास्ता बहुत बढि़या लगा. इस में कमाई अच्छी है. बस, तुम साथ देती रहना.’’

यह सुन कर शबनम के रोंगटे खड़े हो गए कि राज क्या करने की सोच रहा है. हर रात उस के जिस्म का सौदा?

इधर राज को देख बबलू को भी गुस्सा आ गया, ‘‘राज, क्या यार तू इतनी जल्दी वापस आ गया. अभी तो मजा लेना शुरू भी नहीं किया. अभी तक तो देख हम दोनों ने कपड़े पहने हुए हैं.’’

‘‘यार बबलू, माफ कर दे. तेरा मजा खराब करने का मेरा कोई इरादा नहीं था. मैं रोज रात को दवा लेता हूं, तब मेरी रात कटती है. अगर मैं दवा न लेता तो सारी रात तड़पता रहता. मैं वही दवा लेना भूल गया था. बस, वही लेने आया हूं.’’

‘‘चलचल, अब जल्दी से अपनी दवा उठा और चलता बन. मुझ से अब और बरदाश्त नहीं हो रहा. मैं इस कली को मसलने के लिए कब से तड़प रहा हूं,’’ बबलू बोला.

राज जब बिस्तर की दराज में से दवा निकालने लगा, तो उस की नजर शराब की बोतल पर पड़ी, जो ज्यों की त्यों रखी थी.

‘‘यार बबलू, इस के 2 पैग लगा और इसे भी थोड़ी सी पिला दे, फिर देख कैसा मजा आएगा,’’ राज बोला.

‘‘हां यार, यह तो मैं ने देखी ही नहीं. जहां शबनम नाम की बोतल हो, वहां कोई दूसरी बोतल किसे नजर आएगी,’’ बबलू ने कहा, तो वे दोनों हंसने लगे.

राज दवा ले कर चला गया, तो बबलू ने 2 पैग बनाए.

इधर बबलू शराब के पैग बना रहा था, उधर शबनम के दिमाग में भी कुछ चल रहा था. वह सोच रही थी कि अगर आज ?ाक गई, तो राज रोज यही खेल खेलेगा उस के साथ. उसे इस जहन्नुम से निकलने के लिए कुछ न कुछ करना ही होगा.

बबलू ने 2 गिलास में शराब डाल कर एक गिलास शबनम की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘आज तुम भी इस का स्वाद चख कर देखो. इस के अंदर जाते ही तुम्हें जन्नत का नजारा दिखने लगेगा.’’

जब बबलू शबनम के साथ जबरदस्ती करने लगा, तो शबनम ने चुपचाप गिलास ले कर उसे बातों में उलझ दिया और इस तरह बबलू ने गटागट 4 पैग पी लिए, मगर शबनम ने शराब को छुआ तक नहीं.

बबलू ने नशे में अपने हाथ पर बंधे गजरे की महक को सूंघा और फिर शबनम के बदन को सूंघने लगा, फिर अपने हाथ पर बंधी फूलों की वेणी उतार कर फेंकते हुए कहने लगा, ‘‘इन फूलों में वह महक कहां, जो तेरे बदन में है. तेरे सामने ये फूल सब बेमानी हैं.’’

अब बारी थी शबनम को अपने प्लान को अंजाम देने की. जैसे ही बबलू शराब के नशे में शबनम को पकड़ने लगा, वह शराब की बोतल से उस के सिर पर लगातार वार करने लगी, जिस से उस के सिर से खून की जबरदस्त धारा बहने लगी और कुछ ही पलों में बबलू का शरीर शांत हो कर लुढ़क गया.

इस के बाद शबनम ने राज को फोन कर के खुद ही बुलाया. राज बबलू की लाश और शबनम के हाथ में बोतल देख कर घबरा गया. इस से पहले वह कुछ कहता, शबनम बोल उठी, ‘‘ज्यादा तमाशा करने की जरूरत नहीं है. मैं ने जो किया है, सोचसमझ कर किया है. मैं ने पुलिस को फोन कर के बुला लिया है.’’

राज कुछ सोच कर अचानक से शबनम के कपड़ों को थोड़ा सा कहींकहीं से फाड़ने लगा और उस के बाद खुद के शरीर पर भी चोटें लगाने लगा.

‘‘राज, तुम यह क्या कर रहे हो?’’

‘‘शबनम, तुम्हें जो ठीक लगा वह तुम ने किया, अब मुझे जो सही लग रहा है, वह मैं कर रहा हूं.’’

थोड़ी ही देर में पुलिस आ गई. तब तक शबनम के अब्बूअम्मी और बहुत से रिश्तेदार भी आ गए. सब को अचरज था कि नईनई ब्याहता के कमरे में किसी बाहरी आदमी की लाश पड़ी थी.

एक नए जोड़े के कमरे के हालात बेतरतीब से थे. दुलहन के अधफटे कपड़े थे और दूल्हे के शरीर पर चोटें लगी थीं. सब से अचरज वाली बात यह थी कि एक पराए मर्द की लाश सुहागरात वाले कमरे में कहां से आई?

इंस्पैक्टर के पूछने पर शबनम ने बताया, ‘‘यह आवारा मुझे पहले से ही छेड़ता था और आज पहली रात को मुझे बदनाम करने के लिए कमरे में घुस आया.

‘‘मैं ने समझ कि राज आया है. मैं राज के इंतजार में तड़प रही थी और मैं ने राज के अंदर आते ही बत्ती बुझा दी और अपने ऊपर के कपड़े उतार कर लेट गई.

‘‘इसी बीच कमरे में आया बबलू बिना कुछ बोले मेरे जिस्म के साथ खेलने लगा, तो मैं ने झट से चादर से बदन ढक कर बत्ती जला दी और फटाफट कपड़े पहनने लगी कि तभी राजू भी आ गया और बबलू से उस की लड़ाई होने लगी.

‘‘बबलू राज पर लगातार हमला कर रहा था. किसी अनहोनी के डर से न जाने मुझे क्या सूझ कि मैं ने पास पड़ी शराब की बोतल उठाई और बबलू के सिर पर वार करने लगी. इस तरह बबलू मारा गया.’’

शबनम का पुलिस को इस तरह का बयान दे कर राज को बेगुनाह साबित करना, राज को अंदर तक सालने लगा. जिस शबनम का वह सौदा कर रहा था, आज वही उसे बचा कर खुद सूली पर चढ़ रही थी.

लेकिन न तो पुलिस और न ही शबनम के अम्मीअब्बा शबनम की बात पर यकीन कर रहे थे. पुलिस दोनों को पकड़ कर ले गई.

आखिर में राज को गुनाह कबूल करना पड़ा कि उस ने खुद ही सुहागरात के लिए बबलू को बुला कर शबनम का सौदा किया था.

राज को अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई, लेकिन जातेजाते वह शबनम के लिए अदालत में ही ‘तलाक, तलाक, तलाक’ कह कर उसे इस निकाह से आजाद कर गया.

शबनम ने कुछ समय के बाद दूसरा निकाह कर लिया और अपने नए शौहर के साथ दूसरे शहर में जा बसी.

दांव पर जिंदगी : आरती को बहू भात खाना क्यों पड़ा भारी

आरती को बहू भात खाने जाना बहुत महंगा पड़ा. उस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी.

‘‘लाल, तुम्हारी पत्नी तो बड़ी मस्त है. बहुत मजा आया, पूरा वसूल हो गया,’’ उस आदमी के मुंह से निकलने वाले ये वे शब्द थे, जो बेहोश होने के पहले आरती के कानों में समाए थे.

आवाज सुनीसुनी सी लगी थी. उस के पहले के वे 3 आदमी कौन थे, आरती जान नहीं पाई थी. सब ने अपने चेहरों को ढक रखा था. कोई कुछ बोल भी नहीं रहा था,

जैसे सबकुछ योजना बना कर हो रहा था. एक के बाद एक चढ़े, कूदे और उतर गए. जैसे बेटिकट लफंगे बसों में चढ़तेउतरते हैं.

न आरती चीख पा रही थी और न हिलडुल पा रही थी. पहले ही मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया था. दम घुट रहा था. जो आता जोश से भरा हुआ होता और उस की जान हलक में आ जाती थी.

फिर वहां क्याकुछ हुआ, आरती को कुछ भी पता नहीं. होश आया, तो घर के बिस्तर में पड़ी थी और घर वाले उसे घेरे खड़े थे.

आरती की आंखें लाल को ढूंढ़ रही थीं. वह एक ओर कोने में दुबका सा खड़ा था… चुपचाप. उसे देख कर आरती का मन नफरत से भर उठा. दिल में एक हूक सी उठी, एक सैलाब सा उमड़ा, उस दर्द का, जो वह अभीअभी भोग कर आई थी.

‘‘थाने चलो,’’ अगले दिन सुबह उठते ही आरती ने लाल से कहा.

‘‘होश में आओ, पागल मत बनो, लोग जानेंगेसुनेंगे तो क्या कहेंगे? बाकी की जिंदगी बदनामी ओढ़ कर जीना पड़ेगा. मुंह बंद रखो और रात की घटना को एक डरावना सपना समझ कर भूल जाओ,’’ लाल ने धीरे से कहा.

‘‘यह मेरी जिंदगी का सवाल है. मैं गायबकरी नहीं हूं, तुम थाने चलो,’’ आरती ने जोर दिया और घर से बाहर निकल आई.

आरती ने अपना लिखित बयान थाने में दर्ज करा दिया.

‘‘आप ने लिखा है कि आखिरी वाले आदमी की आवाज सुनीसुनी सी लगी थी?’’ थानेदार रंजन चौधरी ने आरती से पूछा.

‘‘जी हां सर, कुछ दिन पहले एक शाम को ‘लाल’ कह कर घर के बाहर से किसी आदमी ने आवाज दी थी, तब मैं आंगन में थी. यह वही आवाज थी.’’

‘‘घटना के पहले की कुछ बातें बता सकती हैं आप?’’

‘‘सर, घर से हम दोनों 9 बजे चल दिए थे. नर्रा गांव के बाद ही जंगल शुरू हो जाता है. सिंगारी मोड़ पर हमें मुड़ना था. लाल ने हौर्न बजाया, तो मैं ने

पूछा था, ‘रात को हौर्न बजाने का क्या मतलब?’

‘‘लाल ने कहा था, ‘गलती से बज गया था.’’’

आरती का बयान दर्ज कर लिया गया. थानेदार रंजन चौधरी ने लाल पर एक नजर डाली, लेकिन कुछ कहा नहीं. लाल उन की चुभती नजरों का सामना न कर सका. उस का गला सूखने लगा था.

बाद में एक महिला कांस्टेबल की निगरानी में मैडिकल टैस्ट के लिए आरती को सदर अस्पताल भेज दिया गया. शाम को मैडिकल रिपोर्ट मिल गई थी. सामूहिक बलात्कार की तसदीक हो चुकी थी.

अगले दिन पुलिस ने लाल को उस के घर से उठा लिया. घर वालों ने इस का कड़ा विरोध किया. लाल के बड़े भाई ने मंत्री से शिकायत करने की धमकी तक दे डाली, ‘‘गुनाहगारों को पकड़ने की जगह मेरे भाई को ले जा रहे हैं. यह आप अच्छा नहीं कर रहे हैं. आप को मंत्रीजी के सामने इस का जवाब देना पड़ेगा.’’

‘‘आप को जहां शिकायत करनी है, कीजिए, पर इतना जान लीजिए कि इस कांड की गुत्थी आप के भाई से जुड़ी हुई है,’’ थानेदार रंजन चौधरी ने कहा.

आरती बलात्कार कांड में उस वक्त एक नया मोड़ आ गया, जब लाल की गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद उस की निशानदेही पर गुप्त छापामारी कर पुलिस ने उन चारों बलात्कारियों को एकसाथ धर दबोचा.

उस के पहले थाने ले जा कर पुलिस ने लाल का अच्छे ढंग से स्वागत किया था. पहले पानी और फिर चाय पिलाई गई, फिर पूछा गया, ‘‘तुम्हारा कहना है कि उस बलात्कारी को तुम नहीं जानते हो, जो तुम्हारा नाम जानता है?’’

‘‘मैं सच कहता हूं सर, मैं उसे नहीं जानता.’’

‘‘तुम सब जानते हो…’’ बाकी शब्दों को लाल के गाल पर पड़े थानेदार रंजन चौधरी के जोरदार चांटे ने पूरा कर दिया था. फिर तो वह तोते की तरह बोलना चालू हो गया था.

इस के बाद कुछ घंटे चली धर पकड़ के बाद उन चारों के बयान ने पूरे इलाके में एक सनसनी सी फैला दी थी. गलीमहल्लों में जिसे देखो वही लाल और आरती के संबंधों की बाल की खाल उतारने में लगा हुआ था.

आरती के भीतर भी एक तूफान उठा हुआ था, जो उस के दिलोदिमाग को मथ रहा था. एक दागदार जिंदगी की चादर को ओढ़े वह किस तरह जी पाएगी? लोगों की चुभती नजरों का सामना वह कैसे करेगी? यही सब सोचसोच कर उस का दिमाग फटा जा रहा था.

अब तो राजेश भी आरती से दूर जा चुका था. 10 साल पहले उस की बेरंग जिंदगी में एक बदलाव आया था. वह पैंशन डिपार्टमैंट में राजेश की असिस्टैंट थी. काम करतेकरते दोनों कब इतने करीब आ गए कि एकदूसरे को देखे बिना रहना मुश्किल हो गया.

यह सिलसिला 10 साल तक बड़े आराम से चला कि अचानक एक दिन आरती ने राजेश से कहा, ‘‘अब हम  एक ही औफिस में एकसाथ रह कर काम नहीं कर सकते. लाल को हमारे रिश्ते की भनक लग चुकी है.’’

आरती डर गई थी. अपने लिए नहीं, बल्कि राजेश के लिए. वह राजेश से बेइंतिहा प्यार जो करने लगी थी.

लोग भी कहते हैं कि जुआरी और शराबियों से जितना दूर रहो, उतना ही बेहतर है, फिर आरती का पति लाल तो एक अव्वल दर्जे का जुआरी था और शराबी भी.

कुलमिला कर आरती एक बेस्वाद जिंदगी जी रही थी, जिस में न प्यार का गुलकंद था और न उमंग की कोई तरंग. इस उबाऊ जिंदगी से राजेश ने अपनी बांहों में भर कर उसे उबार लिया था.

पति के दबाव में आ कर आरती ने राजेश से एक दिन दूरी बना ली, पर राजेश हर हाल में आरती के साथ जुड़ा रहना चाहता था, ‘‘आरती, मैं तुम्हें आसमान के चांदतारे तो ला कर नहीं दे सकता, पर अपनी पलकों पर जरूर बिठा कर रखूंगा. मैं तुम्हें कभी धोखा नहीं दूंगा, यह मैं वादा करता हूं.

‘‘तुम मु?ो छोड़ने की बात मत करो, मैं तुम्हारे बगैर जी नहीं पाऊंगा,’’ राजेश रोने लगा था.

‘‘राजेश, मैं तुम्हारी जुदाई बरदाश्त कर लूंगी. हर हाल में जी लूंगी, लेकिन तुम्हें कुछ हो जाए, यह मैं सहन नहीं कर सकूंगी. लाल गुस्से में पागल हो चुका है, मैं उस पर भरोसा नहीं कर सकती. हमारा प्यार जिंदा रहे, इस के लिए तुम्हें जिंदा रहना होगा.’’

‘‘तुम्हारी खुशी में ही मेरी खुशी है,’’ आंसू पोंछते हुए राजेश चला गया था.

एक हफ्ते बाद ही राजेश ने अपना तबादला दूसरे एरिया में करवा लिया था. फिर दोनों कभी नहीं मिले.

अखबार से ही राजेश को आरती के साथ हुए बलात्कार की जानकारी हुई. वह गुस्से से सुलग उठा और कभी फोन न करने की अपनी कसम तोड़ डाली, ‘‘आखिर उस जल्लाद ने अपना असली रूप दिखा ही दिया न. मैं कहता रहा, वह तुम्हें धोखा देगा. अब क्या कहूं…’’

‘तुम कैसे हो?’ फोन रिसीव करते ही आरती की आंखों से आंसू झरने लगे थे.

‘‘यह सब जान कर कैसे कहूं कि मैं ठीक हूं.’’

राजेश का फोन आना आरती के घायल तनमन पर चंदन के लेप जैसा था. एक पल के लिए वह अपने जख्मों को भूल गई थी.

आरती बिस्तर पर लेटे हुए कभी ऊपर छत को, तो कभी उस छिपकली को देख रही थी, जिस ने अभीअभी एक कीड़े को निगला था. वह खुद को समझने और समझाने में लग गई थी.

आज ही सभी अखबारों में आरती बलात्कार कांड को ले कर खबरें छपी थीं. पर उन चारों आरोपियों के बयान खटिया के 4 पायों की तरह थे. देह से वे चारों अलग थे, लेकिन बयान उन चारों के अलग नहीं थे. सब ने एकसुर में कहा था, ‘हम ने कोई बलात्कार नहीं किया है. हम ने इस के लिए पैसे दिए थे.’

बयान की शुरुआत पहले आरोपी घनश्याम साहू से हुई थी, ‘‘हमेशा की तरह उस दिन भी हम पांचों जुआ खेल रहे थे. लाल सारा पैसा हार चुका था. वह उठ कर जाने लगा. थोड़ी दूर जा कर रुक गया. फिर पीछे मुड़ा और सामने आ कर बोला, ‘मैं एक दांव और खेलूंगा, एक लाख का. बोलो, खेलते हो?’

‘‘लेकिन, मैं ने साफ मना कर दिया कि उधार का हम नहीं खेलेंगे. यह सुन कर लाल एकदम से बोल उठा,

‘10 लाख हैं मेरे पास.’

‘‘यह सुन कर फूचा बोला, ‘अभी तुम्हारी जेब में 10 टका नहीं था, यह

10 लाख कहां से आ गया?’

‘‘यह सुन कर लाल ने कहा, ‘मेरी पत्नी कितने लाख की है, मालूम है न तुम लोगों को…’

‘‘मैं ने उस का मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘हांहां, मालूम है, पर उस से क्या? जुआ खेलने के लिए तो तुम्हें वह 100 का नोट भी नहीं देती.’

‘‘तभी लाल ऊंची आवाज में बोला, ‘एक लाख के रूप में मैं उसी पत्नी को आज दांव पर लगाता हूं.’

‘‘मैं ने हैरान हो कर कहा, ‘होश में तो है? पत्नी को दांव पर लगाएगा? महाभारत याद है न?’

‘‘पर जुए का नशा लाल पर भूत की तरह चढ़ गया था. वह नहीं माना. मैं सोच में पड़ गया था. मैं लाल की पत्नी और उस के स्वभाव को जानता था. जान लेगी तो सब की जान ले लेगी. कोई भी उस के सामने जाने से डरता था, मजाक करना तो दूर की बात.

‘‘हम चारों अभी कुछ सोच ही रहे थे कि तभी सोमा मोदी बोल उठा, ‘अगर लाल इतना बोल रहा है तो मान जाओ. हमारा क्या जाएगा, हारेंगे तो उस का पैसा उसे लौटा देंगे… और अगर जीत गए तो…’ बोलतेबोलते वह रुक गया था.

‘‘फिर उसी जगह हम पांचों बैठ गए थे. ताश की नई बाजी बिछ गई. खेल शुरू हो गया. हम देह की नसों में तनाव महसूस करने लगे थे. लाल का और भी बुरा हाल था.’’

‘‘फिर क्या हुआ था?’’ थानेदार रंजन चौधरी ने पूछा.

‘‘पहले की 2 बाजी में हारजीत का फैसला न हो सका,’’ घनश्याम ने कहना जारी रखा, ‘‘फिर हम तीसरी बाजी खेलने बैठे. लाल ने 3 बार खेल को बीच में रोका. हर बार उस की सोच बदलीबदली सी लगी. हम उस की ओर देखते, तो वह जाहिल की माफिक हंस देता.

‘‘यही आखिरी बाजी होगी, इस के बाद हम नहीं खेलेंगे. जब मैं ने ऐसा कहा, तो लाल ने मुझे घूर कर देखा.

‘‘खेल शुरू हुआ… 5 मिनट…

10 मिनट.. और 15 मिनट… अब की जीत का इक्का मेरे हाथ में था. खेल खत्म हो चुका था. लाल बाजी और दांव पर लगाई पत्नी को हार चुका था.

‘‘लाल ने कुछ नहीं कहा. मैं ने आहिस्ता से नजरें उठा कर लाल को देखा. वह शांत नहीं दिख रहा था.

‘‘तभी मैं ने कहा, ‘लाल, जुए में हम ने तुम्हारी पत्नी जीत तो ली है, पर फायदा क्या? यह बात जो भी उसे कहने जाएगा, उसे चप्पल खानी पड़ेगी और हम नहीं चाहते हैं कि जीत कर किसी की चप्पल खाएं.’

‘‘इस पर लाल ने कहा, ‘तो तुम्हें जीत का फायदा चाहिए?’

‘‘यह सुन कर हम चारों साथियों ने लार टपकाते हुए हामी भरी. लाल ने कहा, ‘ठीक है, तुम चारों मेरे बैंक अकाउंट में अभी एक लाख रुपए भेजो.’

‘‘मैं ने कहा, ‘हम चारों तुम्हें एक लाख रुपए क्यों दें?’

‘‘यह सुन कर लाल ने कहा, ‘तब फिर मेरी पत्नी से जा कर कहो कि हम ने तुम्हें जुए में जीता है.’

‘‘हम चारों एकदूसरे का मुंह देखने लगे. आखिर में हम ने लाल की बात मान ली और उस के खाते में एक लाख रुपए भेज दिए.

‘‘लाल ने कहा,

‘4 दिन बाद इस पैसे

का मजा लेने के लिए तैयार रहना.’’’

‘‘तुम ने अपनी ही पत्नी के साथ ऐसा खेल क्यों खेला..?’’ थानेदार रंजन चौधरी ने लाल से पूछा.

‘‘वह मेरी नाम की ही पत्नी है. उस की जिंदगी के साथ मेरा कोई मेल नहीं है. वह हमारे घर में रहती जरूर है, लेकिन मैं उस के दिल में नहीं रहता.

‘‘मेरी पत्नी हो कर भी वह मेरे साथ एक बंटी हुई जिंदगी जी रही है. उस की आंखों में तो राजेश बसा हुआ है. उस के साथ जोकुछ भी हुआ, उस पर मुझे जरा भी अफसोस नहीं है. वह इसी लायक है.’’

‘बंटी हुई जिंदगी जी रहा हूं, इसीलिए ऐसा किया,’ कुछ अखबारों में लाल के इसी बयान को हैडलाइन बनाया था.

दूसरे दिन चारों बलात्कारियों के साथ लाल को भी टेनुघाट जेल भेज दिया गया. बलात्कारियों के बयान और पुलिस चार्जशीट को अदालत ने गंभीर अपराध माना और इसी को आधार बनाया. हफ्तेभर में कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला भी सामने आ गया.

अपने फैसलों की वजह से चर्चित जज मोहन मलिक के सामने बचाव पक्ष के धाकड़ वकील सतीश मेहता की एक भी दलील काम नहीं आई. जज साहब ने उन की एक नहीं सुनी और चारों आरोपियों को 20-20 साल की और मुख्य आरोपी मानते हुए लाल को आजीवन कारावास की सजा सुना दी.

2 बेटों की मां आरती को अब अपनी जिंदगी का फैसला करना था, जो आसान नहीं था. उसे अपनों के द्वारा छला गया था और शरीर को जलील किया गया था.

घर के बाहर काफी भीड़ जमा हो गई थी. तभी आरती का बड़ा बेटा रूपेश बाहर आ कर बोला, ‘‘लाल हमारा बाप है, पर अब वह हमारे लिए मर चुका है. उस ने हमारी मां और हमें भी समाज में जलील किया है.’’

40वां बसंत पार कर चुकी आरती का बदन आज भी लोगों को लुभा रहा था और यह उसे भी बखूबी पता था, पर उसे यह पता नहीं था कि जिंदगी एक दिन उसे ऐसे मोड़ पर ला खड़ा कर देगी, जहां टैलीविजन चैनल वालों के सामने उसे अपनी बात रखने की नौबत आ पड़ेगी.

आरती ने एक नजर बाहर खड़ी भीड़ को देखा और इतना भर कहा, ‘‘घर और इज्जत जब दांव पर लग जाए, तब उस बंधन को तोड़ कर बाहर निकल जाना ही बेहतर है. औरतें ताश का पत्ता नहीं होती हैं, उन का भी अपना वजूद होता है,’’ बोलतेबोलते आरती की आवाज गंभीर होती चली गई. इसी के साथ वह कमरे की ओर मुड़ गई.

‘‘इस तरह का हिम्मत से भरा फैसला हर औरत नहीं ले सकती,’’ बाहर खड़ी भीड़ में से किसी ने कहा.

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