मुझे डर लग रहा है कहीं एड्स तो नहीं हो जाएगा

सवाल 

मैं 20 वर्षीय युवक हूं. मैं शुरू से ही काफी अंतर्मुखी स्वभाव का रहा हूं. बहुत ही कम लोगों से मेरी दोस्ती है. चूंकि परिवार में भी मातापिता के अलावा कोई नहीं है और वे दोनों भी नौकरीपेशा हैं, इसलिए घर पर भी ज्यादातर समय मैं अकेला ही रहता हूं. संभवतया इसी वजह से मैं लोगों से जल्दी नहीं घुलमिल पाता. मेरी छवि स्कूल और कालेज में एक पढ़ाकू या यों कहूं कि किताबीकीड़े की रही है. साथ के लड़के कालेज में मौजमस्ती करते थे, नइनई गर्लफ्रैंड्स रखते थे, जबकि मेरा इस ओर कोई रूझान ही नहीं रहा. घर वाले भी चाहते थे कि मैं अच्छे ग्रेड्स लाऊं. मैं उन की इच्छाओं को पूरा करने में लगा रहा हूं.

पिछले महीने पता नहीं एक लड़की का फ्रैंडशिप प्रोपोजल मैं ने कैसे स्वीकार लिया वह भी फेसबुक पर. कुछ दिनों की दोस्ती में ही हम काफी करीब आ गए. हम रोज मिलने लगे थे. एक दिन उस ने डिनर की फरमाइश की और उस दिन हम ने होटल में सहवास भी किया. मेरे लिए यह पहला अनुभव था. इसीलिए मैं इतना कामोत्तेजित हो गया था कि सावधानी के लिए कंडोम भी इस्तेमाल नहीं किया.

हफ्ताभर पहले अपने एक दोस्त से पता चला कि मेरी यह दोस्त कई लोगों के साथ संबंध बना चुकी है. यह सच जानने के बाद से मैं ने उस से मिलना बंद कर दिया है. सारे संबंध समाप्त कर लिए हैं. मसलन चैटिंग फोन वगैरह. मगर इस बात को ले कर दहशत में हूं कि ऐसी लड़की से संबंध बनाने के कारण कहीं मुझे एड्स तो नहीं हो जाएगा?

जवाब 

उस युवती से दोस्ती समाप्त कर के आप ने समझदारी का काम किया है. इस तरह की लड़कियां सीधेसादे युवाओं को फंसा कर ऐश करती हैं और कई बार बदले में यौन रोगों की सौगात भी दे जाती हैं.

तलाकशुदा पत्नी से दोबारा शादी

शायद ही कभी किसी ने देखासुना हो कि तलाक के 4 साल और अलगाव व खटपट के 12 वर्षों बाद पतिपत्नी ने दोबारा शादी कर ली. मामला कुछ कुछ विचित्र किंतु सत्य है जिस के बारे में जान कर महसूस होने लगा है कि तलाक के बाद पति पत्नियों की हालत या मानसिकता पर कोई एजेंसी अगर सर्वे व काउंसलिंग करे तो पति पत्नी का दोबारा मिल कर उजड़ी गृहस्थी को संवार लेना एक संभव काम है.

तलाक व्यक्तिगत, कानूनी, सामाजिक, पारिवारिक हर लिहाज से एक तकलीफदेह प्रक्रिया है जिस की मानसिक यंत्रणा के बारे में शायद भुक्तभोगी भी ठीक से न बता पाएं. इस के बाद भी तलाक के मामले दिनोंदिन बढ़ रहे हैं. इस से यही उजागर होता है कि अकसर पति पत्नी या तो गलतफहमी का शिकार रहते हैं या फिर मारे गुस्से के अपना भलाबुरा नहीं सोच पाते. तलाक में नजदीकी लोगों की भूमिका कहीं ज्यादा अहम हो जाती है जो बजाय बात संभालने के, बिगाड़ते ज्यादा हैं.

यह ठीक है कि कुछ मामलों में तलाक अनिवार्य सा हो जाता है पर अधिकांश मामलों में यह जिद व अहं का नतीजा होता है जो खासतौर से पत्नी के हक में अच्छा नहीं होता. समाज के लिहाज से यह दौर बदलाव का है जिस में महिलाएं पहले सी दोयम दरजे की नहीं रह गई हैं. वे हर स्तर पर समर्थ, सक्षम और जागरूक हुई हैं लेकिन तलाक के बाद ये सभी बातें हवा हो जाती हैं जब उन्हें अपने अकेलेपन का एहसास होता है और वे एक स्थायी असुरक्षा में जीने को मजबूर हो जाती हैं.

मुमकिन है कभी कभी उन्हें लगता हो कि तलाक बेहद जरूरी भी नहीं था. इस से बच कर तलाक के बाद की दुश्वारियों से भी बचा जा सकता था लेकिन बात ‘अब पछताए होत का जब चिडि़या चुग गई खेत’ सरीखी हो जाती है. तलाक का कागज उन्हें नए माहौल और हालत में जीना सिखा देता है, इसलिए चाह कर भी वापस नहीं मुड़ा जा सकता क्योंकि तलाक के बाद पति दूसरी शादी कर नई पत्नी के साथ शान से गुजर कर रहा होता है. वहीं, अधिकांश पत्नियां, जो भारतीय संस्कारों से ग्रस्त ही कही जाएंगी, किसी दूसरे को सहज तरीके से पति मानने या स्वीकारने के लिए खुद को तैयार या सहमत नहीं कर पातीं और जब तक खुद को तैयार कर पाती हैं तब तक उम्र का सुनहरा हिस्सा उन के हाथों से फिसल चुका होता है.

शशिकांत संग वंदना

मध्य प्रदेश के भिंड जिले के इस दिलचस्प मामले को बतौर मिसाल लिया जाए तो तलाकशुदाओं के लिहाज से यह एक अच्छी पहल सिद्ध हो सकती है. वंदना और शशिकांत की शादी साल 2001 में हुई थी. ये दोनों साधारण खातेपीते कायस्थ परिवार के हैं और दोनों के ही पिता पुलिस विभाग में नौकरी करते हैं. शादी के बाद वंदना ससुराल आई तो उसे नया कुछ खास नहीं लगा क्योंकि उस का मायका भी भिंड में ही है. संयुक्त परिवार से संयुक्त परिवार में आने से उसे तालमेल बैठाने में कोई दिक्कत पेश नहीं आई.

शशिकांत प्राइवेट नौकरी करता था. उस की कोई खास आमदनी नहीं थी. संयुक्त परिवारों में खर्चे का पता नहीं चलता, न ही कोई कमी महसूस होती. देखते ही देखते एक साल गुजर गया और वंदना ने एक बच्ची को जन्म दिया जिस का नाम घर वालों ने प्रिया रखा.

शायद आपसी समझ का अभाव था या फिर संयुक्त परिवार की बंदिशें थीं कि दोनों एकदूसरे से असंतुष्ट रहने लगे और जल्द ही आरोपों प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरू हो गया जिन में कोई खास दम नहीं था. यह बात वक्त रहते दोनों समझ नहीं पाए, लिहाजा रोज रोज की खटपट शुरू हो गई. पतिपत्नी के बीच का तनाव और विवाद उजागर हुए तो दोनों के घर वालों ने दखल देते समझाया पर बजाय समझने के दोनों भड़कने लगे और आखिरकार अपना फैसला भी सुना दिया कि अब हम साथ नहीं रह सकते. लिहाजा, हमारा तलाक करा दिया जाए.

दोनों ही परिवारों की भिंड में इज्जत है, इसलिए घर वाले कतराए, लेकिन तमाम समझाइशें बेकार साबित हो चुकी थीं. दोनों कुछ समझने को तैयार नहीं थे. एक दिन वंदना प्रिया को ले कर अपने मायके चली गई तो शशिकांत ने भी आपा खो दिया और तलाक का मुकदमा दायर कर दिया.

8 साल मुकदमा चला. तारीखें पड़ीं, पेशियां हुईं और आखिरकार 2012 में तलाक यानी कानूनन विवाह विच्छेद इस शर्त पर हुआ कि पत्नी व बेटी को गुजारे के एवज शशिकांत 2 हजार रुपए महीने देगा जो कि कुछ साल उस ने दिए भी.

2014 में शशिकांत ने अदालत में एक अर्जी दाखिल कर अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते भरणपोषण राशि देने में असमर्थता जताई तो अदालत ने भरणपोषण का आदेश रद्द कर दिया. अब तक घर और समाज वालों की दिलचस्पी इन दोनों से खत्म हो गई थी. वंदना मायके में थी लेकिन सहज तरीके से नहीं रह पा रही थी. उधर, शशिकांत को भी लग रहा था कि जो कुछ भी हुआ वह ठीक नहीं हुआ.

शशिकांत और वंदना दोनों कशमकश की जिंदगी जी रहे थे. बेटी प्रिया का भी कोई भविष्य नहीं था और सब से ज्यादा तकलीफदेह बात दोनों का एकदूसरे को न भूल पाना थी. झूठा अहं, गुस्सा और ठसक दम तोड़ रहे थे. दोनों को ही बराबर से समझ आ रहा था कि वे जाने अनजाने  जिंदगी की सब से बड़ी गलती या बेवकूफी कर चुके हैं, पर अब कुछ हो नहीं सकता था, इसलिए कसमसा कर रह जाते थे.

जब सब्र टूटा

बीती 9 अक्तूबर को वंदना बेटी प्रिया को ले कर भिंड के एएसपी अमृत मीणा के दफ्तर पहुंची और बगैर किसी हिचक के उन से कहा कि अब उस के सामने खुदकुशी करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. अमृत मीणा ने सब्र से उस की पूरी बात सुनी और तुरंत शशिकांत को तलब किया. थाने में ही उन्होंने दोनों को साथ बैठा कर चर्चा की. 14 साल की होने जा रही प्रिया का हवाला दिया और जमाने भर की ऊंच नीच समझाई तो वंदना और शशिकांत हद से ज्यादा जज्बाती हो उठे और फिर से साथ रहने को तैयार हो गए.

अमृत मीणा भी अपनी पहल और समझाइश का वाजिब असर देखते उत्साहित थे. लिहाजा, उन्होंने इन दोनों की हिचक दूर करते तुरंत दफ्तर में ही उन की दोबारा शादी का इंतजाम कर डाला. दोनों 14 साल का गुबार और भड़ास निकाल चुके थे, इसलिए दोनों शादी के लिए तैयार हो गए ताकि तलाक और अलगाव का एहसास खत्म हो जाए.

एएसपी के रीडर रविशंकर मिश्रा ने पंडित की भूमिका निभाई और मंत्र पढ़ते हुए दोनों की शादी करा दी. 14 साल बाद इन पतिपत्नी ने दोबारा एकदूसरे को जयमाला पहनाई और शशिकांत वंदना को घर ले कर आ गया. बाकायदा विदाई भी हुई, अमृत मीणा अपनी गाड़ी से दोनों को घर छोड़ कर आए. बहुत कम मौकों और मामलों पर पुलिस वालों का मानवीय पहलू देखने में आता है, जो इस मामले में दिखा. दोबारा विवाह का यह अनूठा मामला था. इस प्रतिनिधि ने बीती 25 नवंबर को वंदना और शशिकांत से बात की. दोनों खुश थे. वे बीती बातें नहीं करना चाहते थे जिन में उन्होंने बेहद तनाव झेला था. वंदना की चहक और शशिकांत की परिपक्वता बता रही थी कि वे इस नई जिंदगी से खुश हैं और चाहते हैं कि दूसरे तलाकशुदा पतिपत्नी भी गुस्सा और पूर्वाग्रह छोड़ कर शादी करें. अगर वे ऐसा करते हैं तो पहले जो खो चुके हैं उसे वे मय ब्याज के हासिल कर सकते हैं.

जल्दबाजी, गुस्सा, अहं, जिद और अपनों के ही भड़काने पर पतिपत्नी तलाक तो ले लेते हैं पर इन में से अधिकांश बाद में पछताते हैं. वजह, दूसरी शादी आसान नहीं होती और अगर हो भी जाए तो तलाक का धब्बा सहज तरीके से जीने नहीं देता और इस पर भी, दूसरे जीवनसाथी के मनमाफिक होने की गारंटी नहीं रहती.

तो फिर तलाक के बाद क्यों न पहले जीवनसाथी की तरफ सुलह का हाथ बढ़ाया जाए, इस अहम सवाल पर वंदना और शशिकांत के मामले से सोचा जाए तो बात बन सकती है.

तलाक के बाद अधिकांश पतिपत्नी अवसाद में ही जीते नजर आते हैं खासतौर से उस सूरत में जब तलाक की कोई ठोस वजह न हो. ज्यादातर तलाकों की वजह बेहद हलकी होती है. ऐसा आएदिन के मामलों से उजागर भी होता रहता है. अगर शादी के बाद एक साल या उस से भी ज्यादा का वक्त पतिपत्नी ने एकसाथ गुजारा है तो एकदूसरे को भुला देना उन के लिए आसान नहीं होता.

तलाक के पहले परिवार परामर्श केंद्र, अदालत और काउंसलर सोचने के लिए वक्त देते हैं लेकिन उस वक्त पतिपत्नी दोनों के दिलोदिमाग में इतना गुस्सा व नफरत का गुबार भरा होता है कि वे सोचते कम, झल्लाते ज्यादा हैं.

तलाक के बाद की दुश्वारियां, अकेलापन, अपनों की अनदेखी वगैरा उन्हें समझ आने लगती हैं. पर चूंकि तलाकशुदा पतिपत्नी की दोबारा शादी की पहल किसी भी स्तर पर नहीं होती, इसलिए सुलह की गुंजाइशें होते हुए भी बात नहीं बन पाती. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि भिंड के इस प्रयोग को दोहराया जाए क्योंकि संभव है पति और पत्नी अपनी गलतियां महसूस करते हुए दोबारा साथ रहना चाहते हों.

तुम कैसी हो: क्यों आशा को अपने पति से शिकायत थी?

मेरे खयाल से मैं ने आशा से नहीं पूछा, ‘तुम कैसी हो.’ कभी नहीं. एक हफ्ते पहले ही शादी की सिल्वर जुबली मनाई है हम ने. इन सालों में मु झे कभी लगा ही नहीं या आप इसे यों कह सकते हैं कि मैं ने कभी इस सवाल को उतनी अहमियत नहीं दी. कमाल है. अब यह भी कोई पूछने जैसी बात है, वह भी पत्नी से कि तुम कैसी हो. बड़ा ही फुजूल सा प्रश्न लगता है मु झे यह. हंसी आती है. अब यह चोंचलेबाजी नहीं, तो और क्या है? मेरी इस सोच को आप मेरी मर्दानगी से कतई न जोड़ें. न ही इस में पुरुषत्व तलाशें. सच पूछिए तो मु झे कभी इस की जरूरत ही नहीं पड़ी.

मेरा नेचर ही कुछ ऐसा है. मैं औपचारिकताओं में विश्वास नहीं रखता. पत्नी से फौर्मेलिटी, नो वे. मु झे तो यह ‘हाऊ आर यू’ पूछने वालों से भी चिढ़ है. रोज मिलते हैं. दिन में दस बार टकराएंगे, लेकिन ‘हाय… हाऊ आर यू’ बोले बगैर खाना नहीं हजम होता. अरे, अजनबी थोड़े ही हैं. मैं और आशा तो पिछले 24 सालों से साथ में हैं. एक छत के नीचे रहने वाले भला अजनबी कैसे हो सकते हैं? मेरा सबकुछ तो आशा का ही है. गाड़ी, बंगला, रुपयापैसा, जेवर मेरी फिक्सड डिपौजिट, शेयर्स,  म्यूचुअल फंड, बैंक अकाउंट्स सब में तो आशा ही नौमिनी है. कोई कमी नहीं है. मु झे यकीन है आशा भी मु झ से यह अपेक्षा न रखती होगी कि मैं इस तरह का कोई फालतू सवाल उस से पूछूं.

आशा तो वैसे भी हर वक्त खिलीखिली रहती है, चहकती, फुदकती रहती है. 50वां सावन छू लिया है उस ने. लेकिन आज भी वही फुरती है. वही पुराना जोश है शादी के शुरुआती दिनों वाला. निठल्ली तो वह बैठ ही नहीं सकती. काम न हो तो ढूंढ़ कर निकाल लेती है. बिजी रखती है खुद को. अब तो बच्चे बड़े हो गए हैं वरना एक समय था जब वह दिनभर चकरघिन्नी बनी रहती थी. सांस लेने की फुरसत नहीं मिलती थी उसे. गजब का टाइम मैनेजमैंट है उस का.

मजाल है कभी मेरी बैड टी लेट हुई हो, बच्चों का टिफिन न बन पाया हो या कभी बच्चों की स्कूल बस छूटी हो. गरमी हो, बरसात हो या जाड़ा, वह बिना नागा किए बच्चों को बसस्टौप तक छोड़ने जाती थी. बाथरूम में मेरे अंडरवियर, बनियान टांगना, रोज टौवेल ढूंढ़ कर मेरे कंधे पर डालना और यहां तक कि बाथरूम की लाइट का स्विच भी वह ही औन करती है.

औफिस के लिए निकलने से पहले टाई, रूमाल, पर्स, मोबाइल, लैपटौप आज भी टेबल पर मु झे करीने से सजा मिलता है. उसे चिंता रहती है कहीं मैं कुछ भूल न जाऊं. औफिस के लिए लेट न हो जाऊं. आलस तो आशा के सिलेबस में है ही नहीं. परफैक्ट वाइफ की परिभाषा में एकदम फिट. कई बार मजाक में वह कह भी देती है, ‘मेरे 2 नहीं, 3 बच्चे हैं.’

आशा की सेहत? ‘टच वुड’. वह  कभी बीमार नहीं पड़ी इन सालों में. सिरदर्द, कमरदर्द, आसपास भी नहीं फटके उस के. एक पैसा मैं ने उस के मैडिकल पर अभी तक खर्च नहीं किया. कभी तबीयत नासाज हुई भी तो घरेलू नुस्खों से ठीक हो जाती है.

दीवाली की शौपिंग के लिए निकले थे हम. आशा सामान से भरा थैला मु झे कार में रखने के लिए दे रही थी. दुकान की एक सीढ़ी वह उतर चुकी थी. दूसरी सीढ़ी पर उस ने जैसे ही पांव रखा, फिसल गई. जमीन पर कुहनी के बल गिर गई. चिल्ला उठा था मैं. ‘देख कर नहीं चल सकती. हरदम जल्दी में रहती हो.’ भीड़ जुट गई, जैसे तमाशा हो रहा हो.

‘आप डांटने में लगे हैं, पहले उसे उठाइए तो,’ भीड़ में से एक महिला आशा की ओर लपकती हुई बोली.

मैं गुस्से में था. मैं ने आशा को अपना हाथ दिया ताकि वह उठ सके. आशा गफलत में थी. मैं फिर खी झ उठा, ‘आशा, सड़क पर यों तमाशा मत बनाओ. स्टैंडअप. कम औन. उठो.’ पर वह उठ न सकी. मैं खड़ा रहा. इस बीच, उस महिला ने आशा का बायां हाथ अपने कंधे पर रखा. दूसरे हाथ को आशा के कमर में डालती हुई बोली, ‘बस, बस थोड़ा उठने के लिए जोर लगाइए,’ वह खड़ी हो गई.

आशा के सीधे हाथ में कोई हलचल न थी. मैं ने उस के हाथ को पकड़ने की कोशिश की. वह दर्द के मारे चीख उठी. इतनी देर में पूरा हाथ सूज गया था उस का.

‘आप इन्हें तुरंत अस्पताल ले जाएं. लगता है चोट गहरी है,’ महिला ने आशा को कस कर पकड़ लिया. मैं पार्किंग में कार लेने चला गया. पार्किंग तक जातेजाते न जाने मैं ने कितनी बार कोसा होगा आशा को. दीवाली का त्योहार सिर पर है. मैडम को अभी ही गिरना था.

महिला ने कार में आशा को बिठाने में मदद की, ‘टेक केअर,’ उस ने कहा. मैं ने कार का दरवाजा धड़ाम से बंद किया. उसे थैंक्स भी नहीं कहा मैं ने. आशा पर मेरा खिसियाना जारी था, ‘और पहनो ऊंची हील की चप्पल. क्या जरूरत है इस सब स्वांग की. जानती हो इस उम्र में हड्डी टूटी तो जुड़ना कितना मुश्किल होता है?’’ मेरी बात सही निकली. राइट हैंड में कुहनी के पास फ्रैक्चर था. प्लास्टर चढ़ा दिया गया था. 20 दिन की फुरसत.

घर में सन्नाटा हो गया. आशा का हाथ क्या टूटा, सबकुछ थम गया, लगा, जैसे घर वैंटिलेटर पर हो. सारे काम रुक गए. यों तो कामवाली बाई लगा रखी थी, पर कुछ ही घंटों में मु झे पता चल गया कि बाई के हिस्से में कितने कम काम आते हैं. असली ‘कामवाली’ तो आशा ही है. मैं अब तक बेखबर था इस से. मेरे घर की धुरी तो आशा है. उसी के चारों ओर तो मेरे परिवार की खुशियां घूमती हैं.

शाम की दवा का टाइम हो गया. आशा ने खुद से उठने की कोशिश की. उठ न सकी. मैं ने ही दवाइयां निकाल कर उस की बाईं हथेली पर रखीं. पानी का गिलास मैं ने उस के मुंह से लगा दिया. मेरा हाथ उस के माथे पर था. मेरे स्पर्श से उस की निस्तेज आंखों में हलचल हुई. बरबस ही मेरे मुंह से निकल गया, ‘‘तुम कैसी हो, आशा?’’

यह क्या, वह रोने लगी. जारजार फफक पड़ी. उस की हिचकियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं. उस के आंसू मेरे हाथ पर टपटप गिर रहे थे. आंसुओं की गरमाहट मेरी रगों से हो कर दिल की ओर बढ़ने लगी. उस के अश्कों की ऊष्मा ने मेरे दिल पर बरसों से जमी बर्फ को पिघला दिया. अकसर हम अपनी ही सोच, अपने विचारों और धारणाओं से अभिशप्त हो जाते हैं. यह सवाल मेरे लिए छोटा था, पर आशा न जाने कब से इस की प्रतीक्षा में थी. बहुत देर कर दी थी मैं ने.

Mother’s Day Top 10 stories: मदर्स डे से जुड़ी टॉप 10 कहानियां

Mother’s Day Top 10 stories :  मातापिता के बिना कोई इस धरती पर नहीं जन्मा है, सभी के माता पिता होते है ऐसे में ये जरूर हो कि उनके लिए कोई खास दिन हो, जो उनके लिए मनाया जाएं. जी हां, मां का दर्जा सबसे बड़ा माना गया है जिसे सभी मदर्स डे के रूप में मनाते है और इस दिन को ओर खास बनाने के लिए मदर्स डे से जुड़ी स्पेशल कहानियां हम आपके देते है. जिन्हे पढ़कर आप मनोरंजन के साथसाथ मां की ममता से भी जुड़ सकें. सरस सलिल में 2024 की कई स्पेशल कहानियां प्रकाशित हुई है जिसमें से टॉप 10 कहानियां आपके लिए है.

1. Mother’s Day 2024: मां का बटुआ – फलसफा जिंदगी का maa ka batua

मैं अकेली बैठी धूप सेंक रही हूं. मां की कही बातें याद आ रही हैं. मां को अपने पास रहने के लिए ले कर आई थी. मां अकेली घर में रहती थीं. हमें उन की चिंता लगी रहती थी. पर मां अपना घर छोड़ कर कहीं जाना ही नहीं चाहती थीं. एक बार जब वे ज्यादा बीमार पड़ीं तो मैं इलाज का बहाना बना कर उन्हें अपने घर ले आई. पर पूरे रास्ते मां हम से बोलती आईं, ‘हमें क्यों ले जा रही हो? क्या मैं अपनी जड़ से अलग हो कर तुम्हारे यहां चैन व सुकून से रह पाऊंगी? किसी पेड़ को अपनी जड़ से अलग होने पर पनपते देखा है. मैं अपने घर से अलग हो कर चैन से मर भी नहीं पाऊंगी.’

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2. Mother’s Day 2024- रोटी बेटी : क्या खुलेगी जात पांत की गांठ Family story

बेटी सरोजिनी छात्रावास के अपने कमरे में रचना बहुत उधेड़बुन में बैठी हुई थी. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह मनीष के सामने कैसे अपने मन में पड़ी गांठ की गिरह को खोले. कितना बड़ा जोखिम था इस गांठ की गिरह को खोलने में, यह सोच कर ही वह कांप गई.

इस तनाव को झेलने के लिए रचना सुबह से चाय के 3 प्याले हर घंटे के भीतर गटक गई थी. वह जानती थी कि वह मनीष से कितना प्यार करती?है और मनीष… वह तो उस के प्यार में दीवाना है, पागल है. इन हालात में कैसे वह उस बात को कह दे, जिस के बाद कुछ भी हो सकता था. लेकिन फिर उस ने सोचा कि अब समय आ गया है कि कुछ बातें तय हो ही जानी चाहिए. कुछ अनकही बातें अब बताई ही जानी चाहिए.

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3. Mother’s Day 2024 : सासुमां के सात रंग – ससुराल में नई बहू का आनाFamily story

जब मैं नईनई बहू बन कर ससुराल आई तो दूसरी बहुओं की तरह मेरे मन में भी सास नाम के व्यक्तित्व के प्रति भय व शंका सी थी. सहेलियों व रिश्तेदारों की चर्चा में हर कहीं सास की हिटलरी तानाशाही का उल्लेख रहता. जब पति के घर गई तो मालूम हुआ कि मेरे पति कुछ ही दिनों बाद विदेश चले जाएंगे. नया घर, नए लोग, नया वातावरण और एकदम नया रिश्ता. मुझे तो सोच कर ही घबराहट हो रही थी.

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4. Mother’s Day 2024-छोटा सा घर: क्या सुषमा अपनी गृहस्थी बसा पाई?Family story

ट्रेन तेज गति से दौड़ी चली जा रही थी. सहसा गोमती बूआ ने वृद्ध सोमनाथ को कंधे से झकझोरा, ‘‘बाबूजी, सुषमा पता नहीं कहां चली गई. कहीं नजर नहीं आ रही.’’

सोमनाथ ने हाथ ऊंचा कर के स्विच दबाया तो चारों ओर प्रकाश फैल गया. फिर वे आंखें मिचमिचाते हुए बोले, ‘‘आधी रात को नींद क्यों खराब कर दी… क्या मुसीबत आन पड़ी है?’’

‘‘अरे, सुषमा न जाने कहां चली गई.’’

‘‘टायलेट की ओर जा कर देखो, यहीं कहीं होगी…चलती ट्रेन से कूद थोड़े ही जाएगी.’’

‘‘अरे, बाबा, डब्बे के दोनों तरफ के शौचालयों में जा कर देख आई हूं. वह कहीं भी नहीं है.’’

बूआ की ऊंची आवाज सुन कर अन्य महिलाएं भी उठ बैठीं. पुष्पा आंचल संभालते हुए खांसने लगी. देवकी ने आंखें मलते हुए बूआ की ओर देखा और बोली, ‘‘लाइट क्यों जला दी? अरे, तुम्हें नींद नहीं आती लेकिन दूसरों को तो चैन से सोने दिया करो.’’

‘‘मूर्ख औरत, सुषमा का कोई अतापता नहीं है…’’

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5. Mother’s Day 2024- मां: गु़ड्डी अपने बच्चों को आश्रम में छोड़कर क्यों चली गई Family story

रात के 10 बजे थे. सुमनलता पत्रकारों के साथ मीटिंग में व्यस्त थीं. तभी फोन की घंटी बज उठी…

‘‘मम्मीजी, पिंकू केक काटने के लिए कब से आप का इंतजार कर रहा है.’’

बहू दीप्ति का फोन था.

‘‘दीप्ति, ऐसा करो…तुम पिंकू से मेरी बात करा दो.’’

‘‘जी अच्छा,’’ उधर से आवाज सुनाई दी.

‘‘हैलो,’’ स्वर को थोड़ा धीमा रखते हुए सुमनलता बोलीं, ‘‘पिंकू बेटे, मैं अभी यहां व्यस्त हूं. तुम्हारे सारे दोस्त तो आ गए होंगे. तुम केक काट लो. कल का पूरा दिन तुम्हारे नाम है…अच्छे बच्चे जिद नहीं करते. अच्छा, हैप्पी बर्थ डे, खूब खुश रहो,’’ अपने पोते को बहलाते हुए सुमनलता ने फोन रख दिया. दोनों पत्रकार ध्यान से उन की बातें सुन रहे थे.

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6. Mother’s Day 2024: ममता के रंग – कैसी थी प्राची की अम्मा family story

‘‘दीदी, वे लोग आ गए,’’ कहते हुए पोंछे को वहीं फर्श पर फेंकते हुए कजरी जैसे ही बाहर की तरफ दौड़ी, प्राची का दिल जोर से धड़क उठा. सिर पर पल्ला रखते हुए उस ने एक बार अपनेआप को आईने में देख लिया. सच, एकदम आदर्श बहू लग रही थी.

मन में उठ रही ढेरों शंकाओं ने प्राची को परेशान कर दिया. जब नईनवेली दुलहन ससुराल आती है, तब सास उस की आरती उतारती है. लेकिन यहां पर किस्सा उलटा था, बहू के घर सास पहली बार आ रही थी.

अम्मा प्राची और कुणाल के विवाह के खिलाफ थीं, इसलिए दोनों ने कोर्टमैरिज कर ली थी. शादी को साल भर होने जा रहा था कि अम्मा ने सूचित किया कि वे आ रही हैं.

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7. Mother’s Day 2024 : दोबारा आना – मां की हरकतें देख क्या एहसास हुआ Family story

90 के दशक के बीच का दौर था. वरुण आईआईटी से कंप्यूटर साइंस में बीटैक कर चुका था. उसे कैंपस से सालभर पहले ही नौकरी मिल चुकी थी. उसे इंडिया की टौप आईटी कंपनी के अतिरिक्त अमेरिका की एक स्टार्टअप कंपनी से नौकरी का औफर था.

वरुण के मातापिता चाहते थे कि उन का बेटा इंडिया में ही नौकरी करे, पर वरुण अमेरिका जाना चाहता था. अमेरिकी कंपनी उसे बेहतर वेतन औफर कर रही थी. इकलौते बेटे की खुशी के लिए मातापिता ने उस के अमेरिका जाने के लिए हामी भर दी.

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8. Mother’s Day 2024: एक बेटी तीन मांएं, क्या था यह राजFamily story

90 के दशक के बीच का दौर था. वरुण आईआईटी से कंप्यूटर साइंस में बीटैक कर चुका था. उसे कैंपस से सालभर पहले ही नौकरी मिल चुकी थी. उसे इंडिया की टौप आईटी कंपनी के अतिरिक्त अमेरिका की एक स्टार्टअप कंपनी से नौकरी का औफर था.

वरुण के मातापिता चाहते थे कि उन का बेटा इंडिया में ही नौकरी करे, पर वरुण अमेरिका जाना चाहता था. अमेरिकी कंपनी उसे बेहतर वेतन औफर कर रही थी. इकलौते बेटे की खुशी के लिए मातापिता ने उस के अमेरिका जाने के लिए हामी भर दी.

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9. Mother’s Day 2024: अर्धविक्षिप्त बच्चे की मां का दर्द  Family story

आटा खत्म हो गया था किंतु सुदीर्घ की भूख नहीं, वह उसी प्रकार थाली पर हाथ रखे टुकुरटुकुर देख रहा था. 16 रोटियां वह खा चुका था. मां हो कर भी मैं उस की रोटियां गिन रही थी. फिर आटा गूंध कर सुदीर्घ को खिलापिला कर जब मैं उठी तो रात के साढ़े 10 बज रहे थे.

सुदीर्घ वहीं थाली में हाथ धो कर जमीन पर औंधा पड़ा सो रहा था, उसे किसी तरह खींच कर बिस्तर पर लिटाया. उस की मसहरी लगाई. इस के बाद मैं भी लेट गई.

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10. Mother’s Day 2024: प्यार का पलड़ा : कष्ट में सासू मां family story

सास की बिगड़ती स्थिति को देख कर तनु दुखी थी. वह मांजी को भरपूर सुख और आराम देना चाहती थी पर घर में काम इतना अधिक रहता था कि वह चाह कर भी मांजी की सेवा के लिए पूरा समय नहीं निकाल पाती थी.

जब से एक दुर्घटना में आभा के पैर की हड्डी टूटी, वह सामान्य नहीं हो पाई थीं. चूंकि आपरेशन द्वारा पैर में नकली हड्डी डाली गई थी जो उन्हें जबतब बेचैन कर देती और वह दर्द से घंटों कराहती रहतीं. कहतीं, ‘‘बहू, डाक्टरों ने मेरे पैर में तलवार तो नहीं डाल दी, बड़ी चुभ रही है.’’

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बेंगलुरू के रेस्टोरेंट में बिना किड्स के डिनर डेट पर गए विराट और अनुष्का, देखे फोटोज

अनुष्का शर्मा और विराट कोहली की लव स्टोरी किसी से छिपी नहीं है बौलीवुड और क्रिकेट के बीच का ये प्यार लोगों के दिलों पर छा गया है. कपल की लव स्टोरी के बाद दोनों दो बच्चों के माता-पिता बन चुके है. फैंस उनके बच्चों के झलक पाने के लिए बेताब रहते है. हाल ही में एक्ट्रेस अकाय को जन्म देने के बाद पहली बार इंडिया वापस लौटी. ऐसे फैंस उन्हे देखने के लिए बेताब थे. जिसके बाद दोनों बिना किड्स के एक रेस्टोरेंट में डिनर डेट में शामिल हुए. जिनकी तस्वीरें धड़ल्ले से वायरल हो रही है.


आपको बता दें कि बेटे को जन्म देने के बाद अनुष्का शर्मा अप्रैल में मुंबई लौटीं. उन्होंने IPL मैच के दौरान अपनी मौजूदगी से लोगों का ध्यान खींचा. रॉयल चैलेंजर्स बंगलुरु (RCB) के मैच के वक्त वह हमेशा की तरह विराट और टीम को सपोर्ट करती भी नजर आईं. अनुष्का जब से इंडिया लौटी हैं, तब से उनसे जुड़े हर अपडेट पर फैंस की पैनी नजर रहती है. अब अनुष्का की विराट के साथ बेंगलुरु के रेस्टोरेंट से कुछ तस्वीरें सामने आई हैं.

अनुष्का और विराट दो प्यारे बच्चों के पेरेंट्स हैं. कपल की बेटी वामिका की कई मौकों पर फोटो सामने आई है, लेकिन ऑफिशियल तौर पर इसे कभी शेयर नहीं किया गया. कपल अपनी प्राइवेसी को लेकर बेहद सख्त है. ऐसे में फैंस वामिका और अकाय का चेहरा देखने के इंतजार में ही बैठे हैं. इस बीच बेंगलुरु में ब्रंच आउटिंग के दौरान अनुष्का और विराट की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर कहर ढा रही हैं.

बता दें कि फैन पेज पर शेयर की गई इन तस्वीरों में अनुष्का और विराट के अलावा अन्य लोग भी नजर आ रहे हैं. दोनों ने ब्लैक कलर का आउटफिट पहना है. अनुष्का व्हाइट प्रिंटेड ब्लैक टॉप में नजर आ रही हैं, तो विराट ने ब्लैक टीशर्ट और कैप में स्माइल के साथ पोज दिया है. इस फोटो को देखकर हर कोई इनकी तारीफ कर रहा है और इन पर प्यार लुटा रहा है. इन फोटोज में बाकी लोग भी हैं. हालांकि, कपल के बच्चे नजर नहीं आए.


अनुष्का शर्मा लंबे समय बाद लंदन से इंडिया लौटी हैं. उनकी प्रोफेशनल लाइफ की बात करें, तो एक्ट्रेस काफी समय से ‘चकदा एक्सप्रेस’ को लेकर सुर्खियां बटोर रही हैं. इसमें अनुष्का क्रिकेटर झूलन गोस्वामी के रोल में होंगी.

Priyanka chopra ने बेटी मालती, सास और मां के साथ शेयर की फोटो, दूर देश में मनाया मदर्स डे

भले ही मदर्स डे बीत गया हो लेकिन सेलिब्रिटीज ने कैसे मदर्स डे मनाया ये अब जारी है इसकी झलक सोशल मीडिया पर खूब देखने को मिल रही है, वही विदेश में रहनी वाली बौलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चौपड़ा ने भी मदर्स डे सेलिब्रेट किया और बेटी मालती के साथ एक क्यूट सा वीडियो शेयर किया. एक्ट्रेस ने खास अपनी मां और सास के साथ भी फोटो शेयर की है. जिसे देख फैंस बेहद खुश है.

 

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आपको बता दें कि फिल्म ‘हेड्स ऑफ स्टेट’ अब पूरी हो चुकी है और अब प्रियंका अपना पूरा वक्त अपने पति निक जोनस और बेटी मालती मैरी के साथ बीता रही हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर निक के साथ कोजी वीडियो शेयर किया है साथ ही बेटी मालती मैरी का एक बेहद ही क्यूट वीडियो भी सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. जिसमें प्रियंका बेटी मालती को कंधे पर उठा का अप एंड डाउन करती नजर आ रही है.

प्रियंका चौपड़ा एक फोटो में अपनी सासू मां कें साथ खड़ी है. तो एक में प्रियंका अपनी मां के साथ दिख रही है. जिसके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा है कि अपनी मां, दादी, मौसी, सास और बेटी मालती मैरी को याद किया है और सबको धन्यवाद दिया है. प्रियंका की तरह निक जोनस ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ फोटोज शेयर की है, जिसमें वह अपनी क्यूट फैमिली के साथ दिख रहे हैं. इस बीच निक ने प्रियंका और अपनी बेटी मालती का एक वीडियो भी शेयर किया है.

 

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प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस की तरफ से सामने आई ये फोटोज सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रही हैं. इन सभी फोटोज को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. कई फैंस ने प्रियंका को मदर्स डे की बधाई दी है. इसी तरह निक जोनस के पोस्ट पर भी प्यार लुटाया जा रहा है. हालांकि, निक जोनस द्वारा शेयर की गई प्रियंका और मैरी की वीडियो पर लोगों ने सबसे ज्यादा कमेंट किए हैं. एक यूजर ने लिखा, ‘मैं आपकी वाइफ और बेटी के लिए ओब्सेस्ड हूं.’ इसी तरह के और भी कमेंट्स आ रहे हैं.

फैट से हो सकता है लिवर कमजोर, जानें कैसे रहें स्वस्थ

आपके शरीर में जमा फैट कई सेहत से जुड़ी समस्या पैदा कर सकता है इसलिए समय समय पर हमें अपनी सेहत पर ध्यान देने की जरुरत होती पर बिजी लाईफ के चलते हम ऐसा कर नहीं पाते. फैट ना सिर्फ शरीर बल्कि आपके सोचने समझने पर भी प्रभाव डालता. एक उदहारण के तौर पर समझिए तो शरीर एक इंजन है जिसे समय समय पर सफाई और औयल की जरुरत होती है.

अगर ये सफाई और समय कर औयलिंग ना हो तो इंजन ठप्प पड़ जाता हैं शरीर का फैटी, लिवर में सूजन को दर्शाता है. इससे तमाम लोग प्रभावित होते हैं. इस स्थिति में लिवर में फैट जमा होने लगता है. कई बार ज्‍यादा शराब के सेवन से भी फैटी लिवर की समस्‍या हो जाती है. यह तब भी हो सकता है जब आप शराब न पीते हों. हालांकि, नौन-एल्‍कोहौलिक फैटी लिवर रोग का शराब से कोई खास जुड़ाव नही है. इसलिए आज हम लेकर आए है कुछ टिप्स और खाने में बदलाव के फायदे जिसे अपनाकर आप भी स्वस्थ रहेंगे.

लहसुन

दुनिया भर में भोजन और प्राकृतिक उपचार के रूप में लहसुन का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है. एडवांस्ड बायोमेडिकल रिसर्च में एक अध्ययन में पाया गया कि लहसुन पाउडर की खुराक फैटी लिवर की बीमारी वाले लोगों में वसा और शरीर के वजन दोनों को कम करने में मदद कर सकती है.

ग्रीन टी

यह दावा किया जाता है कि ग्रीन टी फैटी लिवर डिजीज सहित कई बीमारियों की रोकथाम और उपचार पर लाभकारी प्रभाव डालती है. शोध बताते हैं कि इस लोकप्रिय पेय को पीने से वसा के अवशोषण में बाधा उत्पन्न हो सकती है, हालांकि फैटी लिवर रोग की रोकथाम और उपचार में ग्रीन टी की प्रभावकारिता का पता लगाने के लिए अधिक काम करने की आवश्यकता होती है. कई अध्ययनों से यह भी पता चला है कि ग्रीन टी में एंटीऑक्सिडेंट प्रभावी रूप से वजन घटाने में सहायता कर सकते हैं.

ब्रोकली

क्रूसीफेरस कुल की इस सब्‍जी में स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा से जुड़े कई यौगिक होते हैं और कुछ कैंसर के कम जोखिम से जुड़े हैं- जैसे ब्रेस्‍ट, प्रोस्टेट, कोलन और लिवर कैंसर. अध्ययनों से पता चलता है कि ब्रोकली चूहों में लिवर में वसा के निर्माण को रोकने में मदद कर सकती है. हरी सब्जियां का सेवन करने से वजन घटाने को बढ़ावा मिलता है.

अखरोट

अखरोट ओमेगा -3 फैटी एसिड में उच्च होते हैं, जो कि नॉन-एल्‍कोहोलिक फैटी एसिड रोग वाले लोगों में वसा और सूजन को कम करने में मदद करते हैं. शोध में पाया गया है कि जिन लोगों को फैटी लिवर की बीमारी होती है वे अखरोट का सेवन कर सकते हैं, इससे उनके लिवर फंक्‍शन में सुधार होता है. तो ये वो कुछ खाने के आइटम्स जिसे आपने खानपान में शामिल कर आप फैट समस्या से निजाद पा सकते हैं.

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