मेरे पति मुझसे संतुष्ट नहीं रहते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 21 साल की महिला हूं. मेरा डेढ़ साल का एक बच्चा है. शादी के बाद से ही पति मेरे साथ सैक्स संबंध को ले कर संतुष्ट नहीं रहते हैं. वे नियमित सैक्स करना चाहते हैं जबकि घर और बच्चे की देखभाल से मैं बेहद थक जाती हूं और रात में जल्द ही मुझे नींद आ जाती है. पति मु झे बहुत प्यार करते हैं, इसलिए मैं उन्हें नाराज भी नहीं देख सकती. कृपया बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

बच्चे पैदा होने के बाद सैक्स संबंध को ले कर महिलाएं आमतौर पर उदासीन हो जाती हैं, जबकि बच्चों की परवरिश के साथसाथ पति के साथ सैक्स संबंध दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाता है.
इस में कोई दोराय नहीं कि एक गृहिणी घर और बच्चों की देखभाल में इतनी व्यस्त रहती है कि खुद के लिए भी समय नहीं निकाल पाती. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि आप घर के कामों को पति के साथ बांट लें. घर की साफसफाई, कपड़े धोना आदि कार्य प्यार से पति से करा सकती हैं.

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इस से आप पर काम का बो झ ज्यादा नहीं पड़ेगा. इस से न केवल आप खुद के लिए वक्त निकाल पाएंगी, बल्कि पति के साथ भी ज्यादा समय बिताने को मिलेगा. फिर जैसाकि आप ने बताया कि आप का बच्चा अब डेढ़ साल का हो चुका है और अब आप शारीरिक रूप से फिट भी हो चुकी हैं, तो ऐसे में सैक्स संबंध का लुत्फ उठा सकती हैं.
अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

अंत भला तो सब भला : नन्द-भाभी की लड़ाई में कौन जीता

संगीता को यह एहसास था कि आज जो दिन में घटा है, उस के कारण शाम को रवि से झगड़ा होगा और वह इस के लिए मानसिक रूप से तैयार थी. लेकिन जब औफिस से लौटे रवि ने मुसकराते हुए घर में कदम रखा तो वह उलझन में पड़ गई.

‘‘आज मैं बहुत खुश हूं. तुम्हारा मूड हो तो खाना बाहर खाया जा सकता है,’’ रवि ने उसे हाथ से पकड़ कर अपने पास बैठा लिया.

‘‘किस कारण इतना खुश नजर आ रहे हो ’’ संगीता ने खिंचे से स्वर में पूछा.

‘‘आज मेरे नए बौस उमेश साहब ने मुझे अपने कैबिन में बुला कर मेरे साथ दोस्ताना अंदाज में बहुत देर तक बातें कीं. उन की वाइफ से तो आज दोपहर में तुम मिली ही थीं. उन्हें एक स्कूल में इंटरव्यू दिलाने मैं ही ले गया था. मेरे दोस्त विपिन के पिताजी उस स्कूल के चेयरमैन को जानते हैं. उन की सिफारिश से बौस की वाइफ को वहां टीचर की जौब मिल जाएगी. बौस मेरे काम से भी बहुत खुश हैं. लगता है इस बार मुझे प्रमोशन जरूर मिल जाएगी,’’ रवि ने एक ही सांस में संगीता को सारी बात बता डाली. संगीता ने उस की भावी प्रमोशन के प्रति कोई प्रतिक्रिया जाहिर करने के बजाय वार्त्तालाप को नई दिशा में मोड़ दिया, ‘‘प्रौपर्टी डीलर ने कल शाम जो किराए का मकान बताया था, तुम उसे देखने कब चलोगे ’’

‘‘कभी नहीं,’’ रवि एकदम चिड़ उठा.

‘‘2 दिन से घर के सारे लोग बाहर गए हुए हैं और ये 2 दिन हम ने बहुत हंसीखुशी से गुजारे हैं. कल सुबह सब लौट आएंगे और रातदिन का झगड़ा फिर शुरू हो जाएगा. तुम समझते क्यों नहीं हो कि यहां से अलग हुए बिना हम कभी खुश नहीं रह पाएंगे…हम अभी उस मकान को देखने चल रहे हैं,’’ कह संगीता उठ खड़ी हुई.

‘‘मुझे इस घर को छोड़ कर कहीं नहीं जाना है. अगर तुम में जरा सी भी बुद्धी है तो अपनी बहन और जीजा के बहकावे में आना छोड़ दो,’’ गुस्से के कारण रवि का स्वर ऊंचा हो गया था. ‘‘मुझे कोई नहीं बहका रहा है. मैं ने 9 महीने इस घर के नर्क में गुजार कर देख लिए हैं. मुझे अलग किराए के मकान में जाना ही है,’’ संगीता रवि से भी ज्यादा जोर से चिल्ला पड़ी. ‘‘इस घर को नर्क बनाने में सब से ज्यादा जिम्मेदार तुम ही हो…पर तुम से बहस करने की ताकत अब मुझ में नहीं रही है,’’ कह रवि उठ कर कपड़े बदलने शयनकक्ष में चला गया और संगीता मुंह फुलाए वहीं बैठी रही.

उन का बाहर खाना खाने का कार्यक्रम तो बना ही नहीं, बल्कि घर में भी दोनों ने खाना अलगअलग और बेमन से खाया. घर में अकेले होने का कोई फायदा वे आपसी प्यार की जड़ें मजबूत करने के लिए नहीं उठा पाए. रात को 12 बजे तक टीवी देखने के बाद जब संगीता शयनकक्ष में आई तो रवि गहरी नींद में सो रहा था. अपने मन में गहरी शिकायत और गुस्से के भाव समेटे वह उस की तरफ पीठ कर के लेट गई. किराए के मकान में जाने के लिए रवि पर दबाव बनाए रखने को संगीता अगली सुबह भी उस से सीधे मुंह नहीं बोली. रवि नाश्ता करने के लिए रुका नहीं. नाराजगी से भरा खाली पेट घर से निकल गया और अपना लंच बौक्स भी मेज पर छोड़ गया. करीब 10 बजे उमाकांत अपनी पत्नी आरती, बड़े बेटे राजेश, बड़ी बहू अंजु और 5 वर्षीय पोते समीर के साथ घर लौटे. वे सब उन के छोटे भाई के बेटे की शादी में शामिल होने के लिए 2 दिनों के लिए गांव गए थे.

फैली हुई रसोई को देख कर आरती ने संगीता से कुछ तीखे शब्द बोले तो दोनों के बीच फौरन ही झगड़ा शुरू हो गया. अंजु ने बीचबचाव की कोशिश की तो संगीता ने उसे भी कड़वी बातें सुनाते हुए झगड़े की चपेट में ले लिया. इन लोगों के घर पहुंचने के सिर्फ घंटे भर के अंदर ही संगीता लड़भिड़ कर अपने कमरे में बंद हो गई थी. उस की सास ने उसे लंच करने के लिए बुलाया पर वह कमरे से बाहर नहीं निकली. ‘‘यह संगीता रवि भैया को घर से अलग किए बिना न खुद चैन से रहेगी, न किसी और को रहने देगी, मम्मी,’’ अंजु की इस टिप्पणी से उस के सासससुर और पति पूरी तरह सहमत थे. ‘‘इस की बहन और मां इसे भड़काना छोड़ दें तो सब ठीक हो जाए,’’ उमाकांत की विवशता और दुख उन की आवाज में साफ झलक रहा था.

‘‘रवि भी बेकार में ही घर से कभी अलग न होने की जिद पर अड़ा हुआ है. शायद किराए के घर में जा कर संगीता बदल जाए और इन दोनों की विवाहित जिंदगी हंसीखुशी बीतने लगे,’’ आरती ने आशा व्यक्त की.‘‘किराए के घर में जा कर बदल तो वह जाएगी ही पर रवि को यह अच्छी तरह मालूम है कि उस के घर पर उस की बड़ी साली और सास का राज हो जाएगा और वह इन दोनों को बिलकुल पसंद नहीं करता है. बड़े गलत घर में रिश्ता हो गया उस बेचारे का,’’ उमाकांत के इस जवाब को सुन कर आरती की आंखों में आंसू भर आए तो सब ने इस विषय पर आगे कोई बात करना मुनासिब नहीं समझा.

शाम को औफिस से आ कर रवि उस से पिछले दिन घटी घटना को ले कर झगड़ा करेगा, संगीता की यह आशंका उस शाम भी निर्मूल साबित हुई. रवि परेशान सा घर में घुसा तो जरूर पर उस की परेशानी का कारण कोई और था. ‘‘मुझे अस्थाई तौर पर मुंबई हैड औफिस जाने का आदेश मिला है. मेरी प्रमोशन वहीं से हो जाएगी पर शायद यहां दिल्ली वापस आना संभव न हो पाए,’’ उस के मुंह से यह खबर सुन कर सब से ज्यादा परेशान संगीता हुई.

‘‘प्रमोशन के बाद कहां जाना पड़ेगा आप को ’’ उस ने चिंतित लहजे में पूछा.

‘‘अभी कुछ पता नहीं. हमारी कंपनी की कुछ शाखाएं तो ऐसी घटिया जगह हैं, जहां न अच्छा खानापीना मिलता है और न अस्पताल, स्कूल जैसी सुविधाएं ढंग की हैं,’’ रवि के इस जवाब को सुन कर उस का चेहरा और ज्यादा उतर गया.

‘‘तब आप प्रमोशन लेने से इनकार कर दो,’’ संगीता एकदम चिड़ उठी, ‘‘मुझे दिल्ली छोड़ कर धक्के खाने कहीं और नहीं जाना है.’’ ‘‘तुम पागल हो गई हो क्या  मैं अपनी प्रमोशन कैसे छोड़ सकता हूं ’’ रवि गुस्सा हो उठा.

‘‘तब इधरउधर धक्के खाने आप अकेले जाना. मैं अपने घर वालों से दूर कहीं नहीं जाऊंगी,’’ अपना फैसला सुना कर नाराज नजर आती संगीता अपने कमरे में घुस गई.

आगामी शनिवार को रवि हवाईजहाज से मुंबई चला गया. उस के घर छोड़ने से पहले ही अपनी अटैची ले कर संगीता मायके चली गई थी. रवि के मुंबई चले जाने से संगीता की किराए के अलग घर में रहने की योजना लंगड़ा गई. उस के भैयाभाभी तो पहले ही से ऐसा कदम उठाए जाने के हक में नहीं थे.

उस की दीदी और मां रवि की गैरमौजूदगी में उसे अलग मकान दिलाने का हौसला अपने अंदर पैदा नहीं कर पाईं. विवाहित लड़की का ससुराल वालों से लड़झगड़ कर अपने भाईभाभी के पास आ कर रहना आसान नहीं होता, यह कड़वा सच संगीता को जल्द ही समझ में आने लगा. कंपनी के गैस्टहाउस में रह रहा रवि उसे अपने पास रहने को बुला नहीं सकता था और संगीता ने अपनी ससुराल वालों से संबंध इतने खराब कर रखे थे कि वे उसे रवि की गैरमौजूगी में बुलाना नहीं चाहते थे.

सब से पहले संगीता के संबंध अपनी भाभी से बिगड़ने शुरू हुए. घर के कामों में हाथ बंटाने को ले कर उन के बीच झड़पें शुरू हुईं और फिर भाभी को अपनी ननद की घर में मौजूदगी बुरी तरह खलने लगी. संगीता की मां ने अपनी बेटी की तरफदारी की तो उन का बेटा उन से झगड़ा करने लगा. तब संगीता की बड़ी बहन और जीजा को झगड़े में कूदना पड़ा. फिर टैंशन बढ़ती चली गई. ‘‘हमारे घर की सुखशांति खराब करने का संगीता को कोई अधिकार नहीं है, मां. इसे या तो रवि के पास जा कर रहना चाहिए या फिर अपनी ससुराल में. अब और ज्यादा इस की इस घर में मौजूदगी मैं बरदाश्त नहीं करूंगा,’’ अपने बेटे की इस चेतावनी को सुन कर संगीता की मां ने घर में काफी क्लेश किया पर ऐसा करने के बाद उन की बेटी का घर में आदरसम्मान बिलकुल समाप्त हो गया. बहू के साथ अपने संबंध बिगाड़ना उन के हित में नहीं था, इसलिए संगीता की मां ने अपनी बेटी की तरफदारी करना बंद कर दिया. उन में आए बदलाव को नोट कर के संगीता उन से नाराज रहने लगी थी.

संगीता की बड़ी बहन को भी अपने इकलौते भाई को नाराज करने में अपना हित नजर नहीं आया था. रवि की प्रमोशन हो जाने की खबर मिलते ही उस ने अपनी छोटी बहन को सलाह दी, ‘‘संगीता, तुझे रवि के साथ जा कर ही रहना पड़ेगा. भैया के साथ अपने संबंध इतने ज्यादा मत बिगाड़ कि उस के घर के दरवाजे तेरे लिए सदा के लिए बंद हो जाएं. जब तक रवि के पास जाने की सुविधा नहीं हो जाती, तू अपनी ससुराल में जा कर रह.’’ ‘‘तुम सब मेरा यों साथ छोड़ दोगे, ऐसी उम्मीद मुझे बिलकुल नहीं थी. तुम लोगों के बहकावे में आ कर ही मैं ने अपनी ससुराल वालों से संबंध बिगाड़े हैं, यह मत भूलो, दीदी,’’ संगीता के इस आरोप को सुन कर उस की बड़ी बहन इतनी नाराज हुई कि दोनों के बीच बोलचाल न के बराबर रह गई. रवि के लिए संगीता को मुंबई बुलाना संभव नहीं था. संगीता को बिन बुलाए ससुराल लौटने की शर्मिंदगी से हालात ने बचाया.

दरअसल, रवि को मुंबई गए करीब 2 महीने बीते थे जब एक शाम उस के सहयोगी मित्र अरुण ने संगीता को आ कर बताया, ‘‘आज हमारे बौस उमेश साहब के मुंह से बातोंबातों में एक काम की बात निकल गई, संगीता… रवि के दिल्ली लौटने की बात बन सकती है.’’

‘‘कैसे ’’ संगीता ने फौरन पूछा.

अनुंकपा के आधार पर उस की पोस्टिंग यहां हो सकती है.’’

‘‘मैं कुछ समझी नहीं ’’ संगीता के चेहरे पर उलझन के भाव उभरे.

‘‘मैं पूरी बात विस्तार से समझाता हूं. देखो, अगर रवि यह अर्जी दे कि दिल के रोगी पिता की देखभाल के लिए उस का उन के पास रहना जरूरी है तो उमेश साहब के अनुसार उस का तबादला दिल्ली किया जा सकता है.’’ ‘‘लेकिन रवि के बड़े भैयाभाभी भी तो मेरे सासससुर के पास रहते हैं. इस कारण क्या रवि की अर्जी नामंजूर नहीं हो जाएगी ’’

‘‘उन का तो अपना फ्लैट है न ’’

‘‘वह तो है.’’

‘‘अगर वे अपने फ्लैट में शिफ्ट हो जाएं तो रवि की अर्जी को नामंजूर करने का यह कारण समाप्त हो जाएगा.’’

‘‘यह बात तो ठीक है.’’

‘‘तब आप अपने जेठजेठानी को उन के फ्लैट में जाने को फटाफट राजी कर के उमेश साहब से मिलने आ जाओ,’’ ऐसी सलाह दे कर अरुण ने विदा ली. संगीता ने उसी वक्त रवि को फोन मिलाया.

‘‘तुम जा कर भैयाभाभी से मिलो, संगीता. मैं भी उन से फोन पर बात करूंगा,’’ रवि सारी बात सुन कर बहुत खुश हो उठा था. संगीता को झिझक तो बड़ी हुई पर अपने भावी फायदे की बात सोच कर वह अपनी ससुराल जाने को 15 मिनट में तैयार हो गई. रवि के बड़े भाई ने उस की सारी बात सुन कर गंभीर लहजे में जवाब दिया, ‘‘संगीता, इस से ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है कि रवि का तबादला दिल्ली में हो जाए पर मुझे अपने फ्लैट को किराए पर मजबूरन चढ़ाना पढ़ेगा. उस की मासिक किस्त मैं उसी किराए से भर पाऊंगा.’’ रवि और संगीता के बीच फोन पर 2 दिनों तक दसियों बार बातें हुईं और अंत में उन्हें बड़े भैया के फ्लैट की किस्त रवि की पगार से चुकाने का निर्णय मजबूरन लेना पड़ा.

सप्ताह भर के अंदर बड़े भैया का परिवार अपने फ्लैट में पहुंच गया और संगीता अपना सूटकेस ले कर ससुराल लौट आई. रवि ने कूरियर से अपनी अर्जी संगीता को भिजवा दी. उसे इस अर्जी को रवि के बौस उमेश साहब तक पहुंचाना था. संगीता ने फोन कर के उन से मिलने का समय मांगा तो उन्होंने उसे रविवार की सुबह अपने घर आने को कहा. ‘‘क्या मैं आप से औफिस में नहीं मिल सकती हूं, सर ’’ संगीता इन शब्दों को बड़ी कठिनाई से अपने मुख ने निकाल पाई.

‘‘मैं तुम्हें औफिस में ज्यादा वक्त नहीं दे पाऊंगा, संगीता. मैं घर पर सारे कागजात तसल्ली से चैक कर लूंगा. मैं नहीं चाहता हूं कि कहीं कोई कमी रह जाए. यह मेरी भी दिली इच्छा है कि रवि जैसा मेहनती और विश्वसनीय इनसान वापस मेरे विभाग में लौट आए. क्या तुम्हें मेरे घर आने पर कोई ऐतराज है ’’

‘‘न… नो, सर. मैं रविवार की सुबह आप के घर आ जाऊंगी,’’ कहते हुए संगीता का पूरा शरीर ठंडे पसीने से नहा गया था. उस के साथ उमेश साहब के घर चलने के लिए हर कोई तैयार था पर संगीता सारे कागज ले कर वहां अकेली पहुंची. उन के घर में कदम रखते हुए वह शर्म के मारे खुद को जमीन में गड़ता महसूस कर रही थी. उमेश साहब की पत्नी शिखा का सामना करने की कल्पना करते ही उस का शरीर कांप उठता था. रवि के मुंबई जाने से कुछ दिन पूर्व ही वह शिखा से पहली बार मिली थी. उस मुलाकात में जो घटा था, उसे याद करते ही उस का दिल किया कि वह उलटी भाग जाए. लेकिन अपना काम कराने के लिए उसे उमेश साहब के घर की दहलीज लांघनी ही पड़ी.

अचानक उस दिन का घटना चक्र उस की आंखों के सामने घूम गया. उस दिन रवि शिखा को एक स्कूल में इंटरव्यू दिलाने ले जा रहा था. रवि का बैंक उस स्कूल के पास ही था. उसे बैंक में कुछ पर्सनल काम कराने थे. जितनी देर में शिखा स्कूल में इंटरव्यू देगी, उतनी देर में वह बैंक के काम करा लेगा, ऐसा सोच कर रवि कुछ जरूरी कागज लेने शिखा के साथ अपने घर आया था. संगीता उस दिन अपनी मां से मिलने गई हुई थी. वह उस वक्त लौटी जब शिखा एक गिलास ठंडा पानी पी कर उन के घर से अकेली स्कूल जा रही थी. वह शिखा को पहचानती नहीं थी, क्योंकि उमेश साहब ने कुछ हफ्ते पहले ही अपना पदभार संभाला था.

‘‘कौन हो तुम  मेरे घर में किसलिए आना हुआ ’’ संगीता ने बड़े खराब ढंग से शिखा से पूछा था.

‘‘रवि और मेरे पति एक ही औफिस में काम करते हैं. मेरा नाम शिखा है,’’ संगीता के गलत व्यवहार को नजरअंदाज करते हुए शिखा मुसकरा उठी थी.

‘मेरे घर मेें तुम्हें मेरी गैरमौजूदगी में आने की कोई जरूरत नहीं है… अपने पति को धोखा देना है तो कोई और शिकार ढूंढ़ो…मेरे पति के साथ इश्क लड़ाने की कोशिश की तो मैं तुम्हारे घर आ कर तुम्हारी बेइज्जती करूंगी,’’ उसे यों अपमानित कर के संगीता अपने घर में घुस गई थी. तब उसे रोज लगता था कि रवि उस के साथ उस के गलत व्यवहार को ले कर जरूर झगड़ा करेगा पर शिखा ने रवि को उस दिन की घटना के बारे में कुछ बताया ही नहीं था. अब रवि की दिल्ली में बदली कराने के लिए उसे शिखा के पति की सहायता चाहिए थी. अपने गलत व्यवहार को याद कर के संगीता शिखा के सामने पड़ने से बचना चाहती थी पर ऐसा हो नहीं सका.

उन के ड्राइंगरूम में कदम रखते ही संगीता का सामना शिखा से हो गया.

‘‘मैं अकारण अपने घर आए मेहमान का अपमान नहीं करती हूं. तुम बैठो, वे नहा रहे हैं,’’ उसे यह जानकारी दे कर शिखा घर के भीतर चल दी.

‘‘प्लीज, आप 1 मिनट मेरी बात सुन लीजिए,’’ संगीता ने उसे अंदर जाने से रोका.

‘‘कहो,’’ अपने होंठों पर मुसकान सजा कर शिखा उस की तरफ देखने लगी.

‘‘मैं…मैं उस दिन के अपने खराब व्यवहार के लिए क्षमा मांगती हूं,’’ संगीता को अपना गला सूखता लगा.

‘‘क्षमा तो मैं तुम्हें कर दूंगी पर पहले मेरे एक सवाल का जवाब दो…यह ठीक है कि तुम मुझे नहीं जानती थीं पर अपने पति को तुम ने चरित्रहीन क्यों माना ’’ शिखा ने चुभते स्वर में पूछा.

‘‘उस दिन मुझ से बड़ी भूल हुई…वे चरित्रहीन नहीं हैं,’’ संगीता ने दबे स्वर में जवाब दिया.

‘‘मेरी पूछताछ का भी यही नतीजा निकला था. फिर तुम ने हम दोनों पर शक क्यों किया था ’’

‘‘उन दिनों मैं काफी परेशान चल रही थी…मुझे माफ कर…’’

‘‘सौरी, संगीता. तुम माफी के लायक नहीं हो. तुम्हारी उस दिन की बदतमीजी की चर्चा मैं ने आज तक किसी से नहीं की है पर अब मैं सारी बात अपने पति को जरूर बताऊंगी.’’

‘‘प्लीज, आप उन से कुछ न कहें.’’

‘‘मेरी नजरों में तुम कैसी भी सहायता पाने की पात्रता नहीं रखती हो. मुझे कई लोगों ने बताया है कि तुम्हारे खराब व्यवहार से रवि और तुम्हारे ससुराल वाले बहुत परेशान हैं. अपने किए का फल सब को भोगना ही पड़ता है, सो तुम भी भोगो. शिखा को फिर से घर के भीतरी भाग की तरफ जाने को तैयार देख संगीता ने उस के सामने हाथ जोड़ दिए, ‘‘मैं आप से वादा करती हूं कि मैं अपने व्यवहार को पूरी तरह बदल दूंगी…अपनी मां और बहन का कोई भी हस्तक्षेप अब मुझे अपनी विवाहित जिंदगी में स्वीकार नहीं होगा…मेंरे अकेलेपन और उदासी ने मुझे अपनी भूल का एहसास बड़ी गहराई से करा दिया है.’’

‘‘तब रवि जरूर वापस आएगा… हंसीखुशी से रहने की नई शुरुआत के लिए तुम्हें मेरी शुभकामनाएं संगीता…आज से तुम मुझे अपनी बड़ी बहन मानोगी तो मुझे बड़ी खुशी होगी.’’

‘‘थैंक यू, दीदी,’’ भावविभोर हो इस बार संगीता उन के गले लग कर खुशी के आंसू बहाने लगी थी. उमेश साहब के प्रयास से 4 दिन बाद रवि के दिल्ली तबादला होने के आदेश निकल गए. इस खबर को सुन कर संगीता अपनी सास के गले  लग कर खुशी के आंसू बहाने लगी थी. उसी दिन शाम को रवि के बड़े भैया उमेश साहब का धन्यवाद प्रकट करने उन के घर काजू की बर्फी के डिब्बे के साथ पहुंचे.

‘‘अब तो सब ठीक हो गया न राजेश ’’

‘‘सब बढि़या हो गया, सर. कुछ दिनों में रवि बड़ी पोस्ट पर यहीं आ जाएगा. संगीता का व्यवहार अब सब के साथ अच्छा है. अपनी मां और बहन के साथ उस की फोन पर न के बराबर बातें होती हैं. बस, एक बात जरा ठीक नहीं है, सर.’’

‘‘कौन सी, राजेश ’’

‘‘सर, संयुक्त परिवार में मैं और मेरा परिवार बहुत खुश थे. अपने फ्लैट में हमें बड़ा अकेलापन सा महसूस होता है,’’ राजेश का स्वर उदास हो गया.

‘‘अपने छोटे भाई के वैवाहिक जीवन को खुशियों से भरने के लिए यह कीमत तुम खुशीखुशी चुका दो, राजेश. अपने फ्लैट की किस्त के नाम पर तुम रवि से हर महीने क्व10 हजार लेने कभी बंद मत करना. यह अतिरिक्त खर्चा ही संगीता के दिमाग में किराए के मकान में जाने का कीड़ा पैदा नहीं होने देगा.’’

‘‘आप ठीक कह रहे हैं, सर. वैसे रवि से रुपए ले कर मैं नियमित रूप से बैंक में जमा कराऊंगा. भविष्य में इस मकान को तोड़ कर नए सिरे से बढि़या और ज्यादा बड़ा दोमंजिला मकान बनाने में यह पैसा काम आएगा. तब मैं अपना फ्लैट बेच दूंगा और हम दोनों भाई फिर से साथ रहने लगेंगे,’’ राजेश भावुक हो उठा. ‘‘पिछले दिनों रवि को मुंबई भेजने और तुम्हारे फ्लैट की किस्त उस से लेने की हम दोनों के बीच जो खिचड़ी पकी है, उस की भनक किसी को कभी नहीं लगनी चाहिए,’’ उमेश साहब ने उसे मुसकराते हुए आगाह किया. ‘‘ऐसा कभी नहीं होगा, सर. आप मेरी तरफ से शिखा मैडम को भी धन्यवाद देना. उन्होंने रवि के विवाहित जीवन में सुधार लाने का बीड़ा न उठाया होता तो हमारा संयुक्त परिवार बिखर जाता.’’

‘‘अंत भला तो सब भला,’’ उमेश साहब की इस बात ने राजेश के चेहरे को फूल सा खिला दिया था.

वह सुंदर लड़की: दोस्त की बड़ी बहन पर आया दिल

मेरा घर सहारनपुर में था. 10वीं का इम्तिहान देने के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए पिताजी ने मुझे मेरे काकाजी के पास भेज दिया, जो दिल्ली के सब्जी मंडी नामक महल्ले में रहते थे.

जेबखर्च के लिए पिताजी हर महीने मुझे 2,000 रुपए भेजा करते थे. दिल्ली जैसा इतना बड़ा शहर और खुली आजादी, मेरे तो मजे हो गए. कालेज जाने के बजाय वे रुपए मैं फिल्में देखने और दोस्तों के साथ मौजमस्ती करने में खर्च कर देता था.

मैं जहां रहता था, उस महल्ले में मेरी उम्र के और भी कई लड़के थे, जिन से बहुत जल्द मेरी दोस्ती हो गई. उन में मेरा सब से अच्छा दोस्त था अविनाश. रोज शाम के समय हम सब क्रिकेट खेलते थे. अपने काकाजी को जब मैं गली में घुसते हुए देखता तब मैं तुरंत किसी दीवार की आड़ में छिप जाता.

अगर वे देख लेते कि शाम के समय पढ़ाई करने के बजाय मैं क्रिकेट खेल रहा हूं, तब फोन कर के पिताजी को बता देते और फिर पिताजी मुझे सहारनपुर बुला लेते.

एक शाम जब हम बहुत देर तक क्रिकेट खेल रहे थे, तब एक लड़की अविनाश को बुलाने आई. वह इतनी सुंदर थी कि मैं उसे देखता ही रह गया. जब उस की मुझ पर नजर पड़ी, तब वह मुसकरा दी.

उन दोनों के जाने के बाद, मेरे पूछने पर, महल्ले के एक लड़के ने मुझे बताया कि वह लड़की अविनाश की बड़ी बहन है. उस का नाम दीपा है और वह सुंदरम शौपिंग माल में नौकरी करती है.

मुझे याद आया कि एक रोमांटिक फिल्म देखते समय मेरे कालेज के दोस्त राजेश ने मुझ से कहा था, ‘अपनी जिंदगी भी फिल्मों जैसी है. अगर कोई लड़की तुम्हें देख कर मुसकराए, तो इस का मतलब है कि वह तुम्हें पसंद करती है और तुम से दोस्ती करना चाहती है.

‘लेकिन लड़कियां बहुत शर्मीली होती हैं, इसलिए पहल तुम्हें करनी होगी. दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाओगे, तो वह तुम्हारी दोस्त बन जाएगी.’राजेश की इस बात को मैं ने सच समझ लिया था.

अगले दिन मैं ने यह पता कर लिया कि दुकान पर जाने के लिए दीपा रोजाना सवेरे ठीक 10 बजे घर से निकलती है. उस के बाद दीपा को एक नजर देखने के लिए मैं अपने कमरे में खिड़की की आड़ में छिप कर उस का इंतजार किया करता और उसे देखते ही मेरे दिल की धड़कनें तेज हो जातीं. मुझे एक फिल्म का संवाद याद आया

, ‘अगर किसी लड़की को देखते ही दिल की धड़कनें तेज हो जाएं, तो तुम्हें उस लड़की से इश्क हो गया है.’एक दिन सवेरे दीपा जब घर से निकली तब मैं उस का पीछा करने लगा.

मैं मन ही मन यही सोच रहा था कि किसी दिन हिम्मत कर के दीपा से कह दूंगा, ‘दीपा, मुझे तुम से प्यार हो गया है…’शौपिंग माल ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए दीपा पैदल जा रही थी. जब वह शौपिंग माल के नजदीक पहुंची, तब मैं थोड़ी देर वहीं रुक कर उसे देखता रहा, फिर अपने कमरे में लौट गया.यह सिलसिला अगले 3 दिनों तक चलता रहा.

चौथे दिन जब मैं दीपा का पीछा कर रहा था, तब वह अचानक मुड़ी और मुझे घूर कर देखने लगी. मैं सकपका कर वापस जाने के लिए मुड़ा, तो उस ने पूछा, ‘‘मेरे भाई अविनाश के दोस्त हो न तुम?’’मैं इतना घबरा गया था कि मुझ से कुछ बोला ही नहीं गया.

उस ने जब यही सवाल दोबारा पूछा, तब मैं ने झिझकते हुए कहा, ‘‘हां, मैं अविनाश का दोस्त हूं.’’‘‘क्या नाम है तुम्हारा?’’‘‘प्रमोद.’’‘‘तुम रोज मेरा पीछा क्यों करते हो?’’मुझ से कोई जवाब नहीं बन पड़ा, तो उस ने दोबारा पूछा, ‘‘चुप क्यों हो? बताओ, तुम मेरा पीछा क्यों करते हो?’’मैं ने झूठमूठ कह दिया, ‘‘मैं तुम्हारा पीछा नहीं करता हूं, मुझे अपने लिए कमीज खरीदनी है,

इसलिए शौपिंग माल में जाता हूं.’’दीपा पलभर मुझे देखती रही और फिर उस ने कहा, ‘‘तुम्हें शायद बहुत सारी कमीजें खरीदनी होंगी, इसलिए रोज जाते हो वहां.’’‘‘बहुत सारी नहीं, सिर्फ 3.

लेकिन अब तक मैं ने कुछ नहीं खरीदा, क्योंकि जो कमीजें मुझे पसंद आती हैं, वे बहुत महंगी हैं.’’दीपा ने कहा, ‘‘मैं वहीं एक दुकान में नौकरी करती हूं और शौपिंग माल के कई दुकानदारों से मेरी जानपहचान है. तुम मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें वाजिब दाम पर कमीज दिला दूंगी.’’

कोई बहाना नहीं सूझ रहा था, इसलिए मैं चुपचाप दीपा के पीछे चल पड़ा. मुझे अपने साथ ले कर दीपा शौपिंग माल पहुंची. 2-3 दुकानों में घूमने के बाद मैं ने मजबूरन एक दुकान से 2,000 रुपए में 3 कमीजें खरीदीं और फिर दीपा को ‘थैंक यू’ बोल कर लौट गया.मुझे अपनेआप पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि दीपा का पीछा करने की गलती कर के मैं ने एक ही दिन में 2,000 रुपए खर्च कर दिए थे.

अब पूरा महीना कैसे गुजारूंगा मैं…उस शाम मैं अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने भी नहीं गया. वे मुझे बुलाने आए तो मैं ने कहा कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है.रात के 8 बज गए थे.

तभी किसी ने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया. दरवाजा खोला तो मैं यह देख कर चौंक गया कि सामने दीपा खड़ी थी. मैं पलभर उसे देखता रहा, तो उस ने कहा, ‘‘अविनाश ने बताया कि तुम कालेज में पढ़ने के लिए यहां आए हो और जेबखर्च के लिए तुम्हें हर महीने 2,000 रुपए मिलते हैं… क्या यह सच है?’’

‘‘हां सच है,’’ मैं ने धीमी आवाज में कहा.‘‘लेकिन तुम ने तो सारी रकम एक ही दिन में खर्च कर दी… अब पूरा महीना कैसे गुजारोगे तुम?’’मुझ से कोई जवाब नहीं बन पड़ा, इसलिए मैं खामोश रहा.

दीपा ने कहा, ‘‘आज सवेरे जब तुम मेरा पीछा कर रहे थे, तब मैं ने भांप लिया था कि तुम ने मुझ से झूठ कहा था कि तुम शौपिंग माल में खरीदारी करने जा रहे हो. झूठ कहा था या नहीं?’’मैं ने गरदन झुका कर धीमी आवाज में कहा, ‘‘हां, झूठ कहा था.’’

‘‘तुम ने जो कमीजें खरीदी हैं, वे मुझे दे दो. मैं दुकानदार को लौटा दूंगी. तुम्हारे 2,000 रुपए कल तुम्हें मिल जाएंगे.’’मैं ने ऐसा ही किया. दीपा जाने लगी, फिर उस ने मुड़ कर कहा, ‘‘तुम अविनाश के दोस्त हो, मेरे छोटे भाई जैसे हो, इसलिए तुम्हें एक सलाह देती हूं.’’‘‘जी कहिए…’’

‘‘अगर कोई लड़की तुम्हें देख कर मुसकरा दे या तुम से हंस कर बात कर ले, तो यह मत समझना कि उसे तुम से प्यार हो गया है या वह तुम से दोस्ती करना चाहती है. लड़कियों और औरतों की इज्जत करना सीखो.’’मैं ने शर्मिंदगी से कहा, ‘‘मुझे माफ दीजिए, फिर ऐसी गलती कभी नहीं करूंगा.’’दीपा पलभर मुझे देखती रही और फिर चली गई.

 

पोस्टमार्टम: देख रहा है विनोद

ब्रह्मांड का एकलौता ‘गड़े मुरदे उखाड़ने वाला’ चैनल ‘विक्की मीडिया’ में आप का स्वागत है. हमारे संवाददाता नारद बेखबर, कैमरामैन धृतराष्ट्र और व्यंग्य की समझ से पैदल व्यंग्याचार्य श्री सवा एक सौ आठ विनोद ‘विक्की’ के साथ आइए कुछ खास घटनाओं का मजाकिया अंदाज में पोस्टमार्टम करते हैं, जो साल 2022 के ऐतिहासिक कलैंडर में दर्ज और दफन हो चुकी हैं.

इस साल एक ओर जहां सदी के महानायक ने कमला पसंद के जरीए नौजवानों को पौष्टिक गुणों से भरपूर गुटका के सेवन का आह्वान किया, तो वहीं दूसरी ओर सभी हिंदी फिल्मों की शुरुआत में हाथों में सैनेटरी पैड ले कर नंदू के पास पहुंच कर धूम्रपान न करने की नसीहत देने वाले देशभक्त हीरो खिलाड़ी कुमार जुबां केसरी के प्रणेता सिंघम और बादशाह के साथ गुटका बेचते नजर आए. बौलीवुड में ‘बाजीराव मस्तानी’ की जोड़ी भी इस साल खासा चर्चा में रही.

पति परमेश्वर के नंगधड़ंग फोटो शूट से प्रेरणा पा कर धर्मपत्नीजी जब पठान के साथ अधनंगी अवस्था में नजर आई, तो नयनसुख दर्शकों में गजब का जोश देखने को मिला. उन्हें इस बात की उम्मीद है कि कम हो रही जीडीपी, रोजगार और आमदनी की तरह शायद साल 2023 में उर्फी और पादुकोण के कपड़ों की मात्रा में और ज्यादा कमी नजर आए.

दर्शकों द्वारा टौलीवुड को दुलार और बौलीवुड को दुत्कार का ट्रैंड परवान चढ़ता देख कर सलमान खान, ऐश्वर्या राय जैसे हिंदी सितारे साउथ की फिल्मों में गौडफादर तलाशते दिखे, तो दक्षिण के ऐक्टर हिंदी फिल्मों पर राज करते नजर आए. बिंगो टेढ़ेमेढे़ की तरह देश की राजनीति भी इस साल टेढ़ीमेढ़ी रही. देश के सब से प्राचीन राजनीतिक संस्थान में महाबदलाव देखने को मिला.

हो रही किरकिरी और नाकामी से थकहार कर परंपरागत पारिवारिक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसी गैरपारिवारिक सदस्य को दे दी गई. साथ ही, इस पार्टी के तथाकथित युवा नेता लंबी दाढ़ी और राजनीतिक फैविकोल ले कर भारत को जोड़ने निकल पड़े. कम सीट के बावजूद जोड़जुगाड़ से सरकार बनाने वाली बहुचर्चित राष्ट्रीय पार्टी को बुद्ध और चाणक्य की धरती पर अपने ही सहयोगी का तीर चुभ गया. गठबंधन की गांठ खोल कर चाचा भतीजा के साथ हो लिए.

सांसारिक मोहमाया त्याग चुके संत दूसरी बार उत्तर प्रदेश चुनाव में सत्ता सुख के लिए निर्वाचित हुए. पंजाब में सब से ज्यादा हंसाने वाले को सीएम की कुरसी, तो फेफड़ा बाहर निकाल हंसने वाले ठोको मंत्र के जन्मदाता को कारावास का योग बना. भारतीय मूल के ऋषि सुनक का ब्रिटेन पीएम बनने पर भारत के वैसे लोगों में भी आस और उम्मीद की किरण जगी, जिन की अपने पड़ोसियों से कभी नहीं बनी.

हफ्ते में कम से कम 2 दिन अपने पड़ोसियों से जबानी जंग या लाठी भांजने वाला भी सुनक से उम्मीदें पाल चुका है. आप ने दोस्तों की संगति में लोगों को बिगड़ते देखा और सुना होगा. कुछ इसी तरह के हालात इस साल इंटरनैशनल लैवल पर देखने को मिले, जब आपसी सुलह के बजाय मित्र राष्ट्रों के बहकावा में ‘मैं झुकेगा नहीं… पुष्पा’ टाइप यूक्रेन ने रूस से पंगा ले लिया और जनधन के नुकसान का तांडव शुरू हो गया. नैशनल लैवल पर गजब की हिम्मत का परिचय देते हुए भारत सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में बिहार और उत्तर प्रदेश के अग्निवीरों ने लुकाठी ले कर राष्ट्रीय संपत्ति को फूंकने में अपनी भरपूर ताकत का इस्तेमाल किया.

चलतेचलते अगर सहिष्णुता और धार्मिक कामयाबियों की बात न हो, तो साल का कलैंडर अधूरा ही माना जाएगा. इस साल के आखिरी महीने में देश की सब से बड़ी शैक्षणिक संस्था के अमनपसंद शिक्षित शांतिदूतों द्वारा बनियों और ब्राह्मणों को देश से बाहर निकाल कर विकसित भारत की सोच की नुमाइश दीवारों पर की गई.

ज्ञानवापी की लहक मथुरा में देखने को मिली. दक्षिण भारत में बुरका बैन का स्यापा हो या दिल्ली से झारखंड का लव जिहाद आदि मामलों ने संक्रमित हो चुकी इनसानी इम्यूनिटी के लिए धार्मिक बूस्टर डोज का काम किया. अंबुजा सीमेंट जैसी सहनशक्ति के चलते बेरोजगारी, प्राइवेटाइजेशन के दौरान इस साल भी भारतीय नागरिक काफी संयम में दिखे. महंगाई, बेरोजगारी आदि की चिंता छोड़ मीम्स, रील्स, वैब सीरीज देखने और बनाने में बिजी रहे. इन सारी बातों को ‘देख रहा है विनोद…’ की तर्ज पर सारा देश बखूबी देखता रहा. बहरहाल, उम्मीद पर दुनिया टिकी है. साल 2023 की मंगलमय कामनाओं के साथ हम अपनी टीम के साथ ऐसे ही धांसू खबरों के साथ जल्द ही हाजिर होंगे आप के चहेते चैनल ‘विक्की मीडिया’ पर, तब तक के लिए हैप्पी न्यू ईयर.

News Kahani: रेप की सजा

‘‘अब उन्होंने ऐसा क्या कर दिया, जो आप ने अपनी सारी शर्म बेच खाई. मेरे पिताजी हैं वे और आप उन्हें इतना गंदा बोल रहे हैं,’’ हरपाल की बीवी दयावती ने अपना माथा पीटते हुए कहा.

‘‘ज्यादा चपरचपर मत कर. तेरा भाई कौन सा कम है. बहन का… इतने साल हो गए शादी को, मेरी कोई इज्जत ही नहीं है,’’ हरपाल दारू की बोतल नीट ही गटकते हुए बोला और फिर बच्चों के सामने ही गालियां बकने लगा.

हरपाल कुछ साल पहले ही गांव से दिल्ली आया था. ट्रांसपोर्ट का धंधा था, जो चमक गया. पैसा तो आ गया, पर

यह जो गाली देने की लत लगी थी, वह नहीं गई.

दयावती मौके की नजाकत सम?ाते हुए रसोईघर में चली गई थी. वह ऐसा ही करती थी, जब भी हरपाल का दिमाग फिरता था, वह गूंगी गाय बन जाती थी.

कुछ भी हो, दयावती दया का भंडार थी. हरपाल से उस की शादी 20 साल पहले हुई थी. अब वह 3 बच्चों की

मां बन गई थी, पर कोई भी ऐसा दिन नहीं था, जब हरपाल दयावती के घर वालों को गंदीगंदी गालियां नहीं देता था. उन्हें ही क्या, हरपाल, जो कहने को दिल्ली की मालवीय नगर कालोनी में रहता था, अपने पड़ोसियों पर भी बिना कुछ सोचेसम?ो गालियों की बौछार कर देता था.

यही वजह थी कि कोई भी पड़ोसी हरपाल के घर से बच कर ही निकलता था. हैरत की बात तो यह थी कि हरपाल के बच्चे भी उसी की राह पर थे. बड़ी बेटी मोनिका 18 साल की थी और कालेज के पहले साल में पढ़ रही थी. हरपाल का बेटा शेखर 15 साल का था और एक बढि़या प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था. उसी के साथ 12 साल की छोटी बहन संगीता भी पढ़ती थी.

हरपाल के बातबात पर गाली देने की वजह से उस के बच्चे भी हाथ से निकल गए थे. शेखर तो हरपाल से ही भिड़ जाता था. पढ़ाई में वह निल बटे सन्नाटा था, पर गाली देने में अपने बाप का भी बाप.

एक दिन तो शेखर ने घर के बाहर खड़े हो कर अपने बाप को ही गाली देदे कर नंगा कर दिया था. दोनों में खूब मांबहन की हुई थी. बीच में कुछ पड़ोसी आ गए थे, बापबेटे को चुप कराने के लिए, पर हरपाल और शेखर ने उन्हीं पर गालियों की बौछार कर दी. पड़ोस में रहने वाले गुप्ताजी तो इतने डर गए थे कि कुछ दिनों के लिए परिवार के साथ पहाड़ों पर कहीं घूमने चले गए थे.

एक दिन तो मोनिका अपनी सोसाइटी के सिक्योरिटी गार्ड से ही भिड़ गई थी. दरअसल, वह डीप कट का सूट पहन कर कालेज जा रही थी. उस के उभार उछल रहे थे.

गार्ड सीने पर हाथ रख कर बोला, ‘‘इतना भी मत उछाल कि बाहर ही न आ जाएं.’’

जब मोनिका ने उस गार्ड की तरफ देखा, तो वह दाएंबाएं देखने लगा. मोनिका मां की गाली देते हुए बोली, ‘‘ज्यादा मर्द बनता है न. इतना कस कर दबाऊंगी कि फिर खड़ा रहने लायक नहीं बचेगा.’’

यह कहानी अकेले हरपाल के घर की नहीं है, बल्कि पूरे भारत में गाली देने वालों की भरमार है. कुछ लोग तो अपने मवेशियों तक को भी मांबहन की गालियां देने से गुरेज नहीं करते हैं.

90 फीसदी से ज्यादा गालियां लड़कियों और औरतों के नाजुक अंगों से जुड़ी होती हैं. गालीगलौज मर्दों में होता है, पर शरीर औरतों का उघाड़ा जाता है. मांबहन, चाचीताई, सालीभौजाई सब के नाम से खूब गालियां बनी हुई हैं.

पर हरपाल जैसे परिवारों की अक्ल पर तो जैसे पत्थर पड़े होते हैं. बदला लेने के लिए होता है. किसी को काबू में रखने के लिए, किसी को डराने के लिए, किसी को सरेआम अपनी ही नजरों में नीचा गिराने के लिए, सिर्फ मजा लेने के लिए वे सब के सामने धड़ल्ले से गालियों का इस्तेमाल करते हैं.

बीए में पढ़ने वाली मोनिका का भी यही सोचना है. वह कहती है, ‘‘हम लड़कियां वे सभी गालियां देती हैं, जो लड़के देते हैं. ओटीटी प्लेटफार्म पर आने वाली फिल्मों और सीरियलों ने गालियों को ‘कूल’ बना दिया है यानी गालियां बातचीत का सहज हिस्सा बन गई हैं. अगर गालियों का इस्तेमाल न हो, तो लगता है कि हम नए जमाने के नहीं हैं.’’

मोनिका भले ही गंदी जबान की थी, पर खूबसूरत बदन की मालकिन थी. साढ़े 5 फुट कद, गोरा रंग, लंबे बाल, बड़ेबड़े उभार, मदमस्त चाल के चलते वह कालेज में हर मनचले की पहली पसंद बन गई थी.

कालेज में 23 साल का चपरासी बृजेश तो दिनरात मोनिका के सपने देखता था. मोनिका की बेलगाम जबान के चलते वह सोचता था कि यह लड़की जल्दी से पके आम की तरह उस की ?ाली में आ जाएगी.

एक दिन बृजेश ने मौका देख कर मोनिका से कहा, ‘‘मैडम, मेरी छोटी बहन 12वीं क्लास में आई है. घर में आप की पुरानी किताबें होंगी. अगर मुझे मिल जातीं तो मेरा खर्चा बच जाता.’’

मोनिका बोली, ‘‘अबे बहन के टके. इतनी सी बात है. कल दिन में घर आ जाना. घर पर कोई नहीं होगा, तो मैं तुझे आराम से किताबें दे दूंगी.’’

अगले दिन सुबह की बात है. हरपाल अखबार पढ़ रहा था. कोलकाता में लेडी डाक्टर के साथ रेप और फिर मर्डर

का कांड हो चुका था. पूरे देश में इस अपराध को ले कर डाक्टरों में गुस्सा था. आरोपी संजय राय की सीबीआई में पेशी चल रही थी.

इस पूरे मामले की बात करें, तो सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक, यह कांड होने से पहले पीडि़ता महिला ट्रेनी डाक्टर और 2 साथियों ने आधी रात के आसपास खाना खाया था, जिस के बाद वे सैमिनार रूम में गए और ओलिंपिक में नीरज चोपड़ा का भाला फेंक कंपीटिशन टीवी पर देखा.

इस के बाद रात के तकरीबन 2 बजे दोनों साथी सोने चले गए, जहां ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर आराम कर रहे थे, जबकि महिला ट्रेनी डाक्टर सैमिनार रूम में ही रुकी रही. वहीं, इंटर्न का कहना है कि वह रूम में था. दरअसल, ये तीनों कमरे सैमिनार रूम, स्लीप रूम और इंटर्न रूम तीसरी मंजिल पर एकदूसरे के करीब ही बने हुए हैं.

इस के बाद सुबह के तकरीबन साढ़े 9 बजे पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनी डाक्टरों में से एक, जिस के साथ पीड़िता ने पिछली रात खाना खाया था, वार्ड का राउंड शुरू होने से पहले उसे देखने गया. कोलकाता पुलिस की टाइमलाइन के मुताबिक, उस ने दूर से उस का शव अर्धनग्न अवस्था में देखा. फिर उस ने अपने साथियों और सीनियर डाक्टरों को घटना की जानकारी दी.

‘‘बड़ा मादर… निकला,’’ यह खबर पढ़ते ही हरपाल के मुंह से गाली निकल गई.

शेखर और संगीता स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे. शेखर बोला, ‘‘अरे पापा, लड़की ने ही उकसाया होगा. जवानी मचल रही होगी. आजकल तो शादी से पहले ही सबकुछ हो जाता है.’’

दयावती ने अपने सपूत को टेढ़ी निगाह से देखा जरूर, पर वह बोली कुछ नहीं. पर मोनिका कहां चुप रहने वाली थी, ‘‘तुझे पता भी है कि आजकल रेप के कितने केस आते हैं… कभी कोलकाता, कभी महाराष्ट्र, कभी दिल्ली… कम उम्र की बच्चियों को भी नहीं छोड़ते हैं… और तू ने कोलकाता के केस वाले आरोपी के बारे में नहीं पढ़ा?’’

‘‘क्या…?’’ शेखर ने सवाल किया, ‘‘पर, वह लड़की भी कम चालू नहीं रही होगी.’’

मोनिका ने शेखर को एक भद्दी सी गाली देते हुए आरोपी संजय राय की खबर के बारे में बताया, ‘‘सीबीआई ने आरोपी संजय राय का साइकोलौजिकल टैस्ट किया है. इस टैस्ट के दौरान संजय से कई सवाल किए गए थे. उस के मोबाइल फोन से मिले पौर्न वीडियो को ले कर भी सवाल हुए थे.

‘‘संजय राय ने इस टैस्ट के दौरान यह भी बताया था कि वह रैडलाइट एरिया जाता रहता था. उस ने कबूल किया कि वारदात के दिन पौर्न वीडियो देखे थे.

‘‘ऐसे लोगों में हाइपरसैक्सुअलिटी डिसऔर्डर होता है और इस बीमारी से पीडि़त कुछ इनसान हर दिन अपनी सैक्स इच्छा किसी न किसी तरह पूरी करना चाहता है. ऐसे आदमी शरीर की जरूरत पूरी करने के लिए किसी भी तरह का अपराध कर सकता है और उस के मन में अफसोस तक नहीं होता है.’’

‘‘तू कुछ भी कह, लड़की की भी गलती रही होगी. कोई भी बेवजह ही सरकारी सांड़ नहीं बनता है,’’ शेखर ने अपनी बात रखी और संगीता के साथ स्कूल चला गया.

आज मोनिका के कालेज में छुट्टी थी. पापा के अपने काम पर और मम्मी के मौसी के घर जाने के बाद वह घर पर अकेली थी. चूंकि घर पर थी तो उस ने ढीली सी टीशर्ट और टाइट शौट्स पहनी हुई थी. टीशर्ट के नीचे ब्रा भी नहीं थी. उस के उभार ?ालक रहे थे.

इधर, बृजेश मोनिका के घर के लिए निकल चुका था. उसे लगता था कि मोनिका बिंदास है, लड़कों की तरह गालियां देती है, तो वह आसानी से मान जाएगी और वह आज अपनी हसरत पूरी कर लेगा.

दरवाजे की घंटी बजी, तो मोनिका को लगा कि मां जल्दी आ गई हैं. वह उन्हीं कपड़ों में दरवाजा खोलने चली गई. पर सामने बृजेश को देख कर ठिठक गई. उधर, जब बृजेश ने मोनिका को ऊपर से नीचे तक देखा, तो उस की लार टपकने लगी.

मोनिका ने पूछा, ‘‘क्या काम है?’’

बृजेश ने किताबों की याद दिलाई, तो मोनिका ने उसे भीतर बुला लिया. वह अपने कमरे में किताबें लेने चली गई, तो पीछेपीछे ब्रजेश भी चला आया. उसे पसीना आ रहा था. अब उसे मोनिका बस देह लग रही थी. उस का जिस्म

तनाव से भर गया. वह हरी झंडी समझ रहा था, तो उस ने कमरे में जाते ही कुंडी लगा दी.

मोनिका यह देखते ही सावधान हो गई, पर बृजेश पर हवस सवार हो चुकी थी. वह जा कर मोनिका से लिपट गया और उसे यहांवहां दबाने लगा.

मोनिका ने उसे धक्का दिया पर अब बृजेश हवस का पुजारी बन चुका था. उस ने मोनिका को कब्जे में कर लिया. मोनिका ने चिल्लाते हुए उसे कई गालियां दीं और मदद के लिए चिल्लाने लगी, पर आसपास के लोगों ने सोचा कि यह तो इस घर का रोज का काम है.

बृजेश ने तब तक मोनिका पर काबू पा लिया था और उसे पटक कर उस पर हावी हो गया था. मोनिका थी तो 18 साल की ही. वह बृजेश की पकड़ से छूट नहीं पाई और उस की दरिंदगी का शिकार हो गई.

इतने में मोनिका की मां दयावती आ गई. उस के पास घर की चाबी थी. जब काफी खटखटाने पर मोनिका ने दरवाजा नहीं खोला, तो मां ने चाबी से खोल लिया. पर भीतर जाते ही दयावती समझ गई कि दाल में कुछ काला है.

दयावती ने बिना देर किए घर के बाहर जा कर ‘चोरचोर’ चिल्लाना शुरू कर दिया. इस शोर से पड़ोसियों के कान खड़े हो गए और भीतर कमरे में बृजेश के होश उड़ गए. वह भागने की फिराक में था कि दरवाजे पर ही धर लिया गया.

आसपास के लोगों ने समझ कि कोई चोरउचच्का है, पर जब भीतर से मोनिका रोती हुई बाहर निकली, तो सब समझ गए कि मामला कुछ और ही है.

‘इसी ने मुझे आज बुलाया था. यह कालेज में मझ पर डोरे डालती थी. लड़कों की तरह गंदे चुटकुले सुनाती थी, तो मुझे लगा कि बहती गंगा में हाथ धो लूं,’ बृजेश ने अपनी जान बचानी चाही, पर भीड़ तो भीड़ होती है. एक आदमी ने ‘मारो इसे’ कहा ही था कि सब लोग पिल पड़े उस पर. कुछ ही देर में बृजेश लाश बन चुका था. इस रेप की सजा उसे तुरंत मिल गई थी.

गरीब किसान की बेटी प्रिति पाल ने पैरिस पैरालिंपिक में रचा इतिहास

‘प्रीति’ का शाब्दिक अर्थ है प्यार, प्रेम. पर किसी लड़की का नाम प्रीति रख देने से उसे समाज में प्यार और प्रेम मिलेगा, यह जरूरी नहीं है. और अगर उस प्रीति में कोई शारीरिक खोट है, तो आप समझ सकते हैं कि उस की मानसिक दशा क्या रही होगी.

ऐसी ही कहानी 23 साल की प्रीति पाल की है, जो आज खेल की दुनिया का चमकता सितारा बन गई हैं, पर इस रोशनी को पाने के लिए प्रीति ने कितने अंधेरों का सामना किया है, यह तो वे ही बता सकती हैं.

हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के एक छोटे से गांव हशमपुर में रहने वाली प्रीति पाल की, जिन्होंने पैरिस पैरालिंपिक खेलों में महिलाओं की टी35 100 मीटर दौड़ और टी35 200 मीटर दौड़ में कांसे का तमगा जीत कर इतिहास रच दिया है. इतना ही नहीं, प्रीति पाल पैरालिंपिक खेलों में  एथलैटिक्स में मैडल जीतने वाली पहली भारतीय धावक बन गई हैं. टी35 में वे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिन में हाइपरटोनिया, अटैक्सिया और एथेटोसिस जैसे विकार होते हैं.

प्रीति पाल बचपन में ही सेरेब्रल पाल्सी नामक बीमारी से पीड़ित रही हैं. यह एक तरह का मस्तिष्क पक्षाघात होता है, जिस से मांसपेशियों की गति पर असर पड़ता है. नतीजतन, पीड़ित के चलनेफिरने और संतुलन बनाने में कमी आ जाती है. प्रीति का भी इलाज चला था और 5वीं तक की पढ़ाई गांव में करने के बाद वे मेरठ आ गई थीं. फिर और अच्छा इलाज कराने के मकसद से उन्हें दिल्ली लाया गया जहां, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कोच गजेंद्र सिंह से के मार्गदर्शन में उन्होंने ट्रेनिंग लेना शुरू किया.

इसी का नतीजा है कि आज प्रीति पाल ने 2 मैडल जीत कर देश का नाम रोशन किया है. पर प्रीति के लिए शारीरिक और मानसिक कष्ट के साथसाथ एक और कष्ट था, इन का भविष्य क्या होगा?

प्रीति के पिता अनिल कुमार पाल ने एक इंटरव्यू में बताया था, “प्रीति के मामले में हम ने अलग तरह की बातें सुनी हैं. अकसर लोग कहते थे कि प्रीति विकलांग है, आगे चल कर बड़ी दिक्कत हो जाएगी. लड़की है तो शादीब्याह में भी अड़चन आएगी. पर आज वही लोग कहते हैं कि लड़की ने बहुत अच्छा किया है.”

अनिल कुमार पाल एक गरीब किसान हैं, जो छोटी सी डेयरी से अपने परिवार का लालनपालन कर रहे हैं. प्रीति के 3 बहनभाई हैं और आज वे सभी प्रीति की इस कामयाबी से खुश हैं.

फिल्म से पहले श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव ने पवन सिंह के साथ मचाया बवाल

बौलीवुड फिल्म स्टार राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर और भोजपुरी स्टार पवन सिंह एकसाथ लखनऊ यूनिवर्सिटी पहुंचे थे, जहां उन्होंने जम कर ठुमके लगाए. तीनों स्टार स्टेज पर परफौर्म करते दिखाई दिए. श्रद्धा कपूर पहली बार भोजपुरी स्टार पवन सिंह के साथ नाचती हुई नजर आईं.

 

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यूनिवर्सिटी के हजारों छात्र वहां पहुंचे और बौलीवुड सितारों की झलक पाने के लिए बेकरार दिखे. इस दौरान भोजपुरी सिंगर पवन सिंह के गानें पर छात्रों के साथ सिनेमाई सितारों ने भी ठुमके लगाए. स्टेज पर उन का डांस सब को रोमांचक लगा. सभी स्टूडैंट्स की निगाहें उन्हीं पर टिकी रहीं.

सोशल मीडिया पर तीनों का एक और वीडियो धड़ल्ले से वायरल हुआ, जिस में श्रद्धा कपूर, राजकुमार राव और भोजपुरी स्टार पवन सिंह साथ दिखे. इस में वे सब ‘स्त्री 2’ के गाने पर जम कर स्टैप्स करते हुए दिखाई दिए. श्रद्धा कपूर का रैड ड्रैस लुक बेहद ही खास था. उन का लुक लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था. तीनों स्टार्स एकसाथ एक फ्रेम में काफी अच्छे दिख रहे थे.

भोजपुरी सिनेमा के स्टार हैं पवन सिंह      

भोजपुरी स्टार पवन सिंह साल 2024 में लोकसभी चुनाव लड़ चुके हैं. पवन सिंह ने निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ा है. हालांकि, वे चुनाव हार गए थे. बता दें कि पवन सिंह ने धनंजय सिंह से मुलाकात के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर एक रील पोस्ट की थी, जिस में पवन सिंह और धनंजय सिंह किसी मुद्दे पर बात करते हुए दिखाई दिए थे.

पवन सिंह की फिल्मों की बात करें तो उन की सबसे मंहगी फिल्म ‘वीर योद्धा’ रही. पवन सिंह भोजपुरी के जानेमाने कलाकारों में से एक हैं, जो सिंगिग के साथ साथ ऐक्टिंग करने का भी दम रखते हैं.

हाल ही में पवन सिंह की मूवी 30 अगस्त को रीलिज हुई है. उन की फिल्म ‘सूर्यवंशम पौपुलर रही. निर्देशक के मुताबिक यह फिल्म पवन सिंह के फैंस के लिए दमदार साबित हुई. इस में ऐक्शन ऐसा है कि लोग कुरसी छोड़ कर खड़े हो कर सीटी मारने को मजबूर हो गए. इस से पहले पवन सिंह की ‘जय हिंद’ फिल्म में खतरनाक ऐक्शन दिखाया गया, जो साल 2019 में रिलीज हुई थी. पवन सिंह की ‘शेर सिंह’ मूवी भी जबरदस्त रही.

श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की ‘स्त्री 2’ फिल्म

मैडौक फिल्म्स के प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘स्त्री 2’ में न सिर्फ श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की ऐक्टिंग ने लोगों का दिल जीता है, बल्कि तमन्ना भाटिया का आइटम गाना भी सुर्खियों में रहा, जिस कारण फिल्म लाइमलाइट में बनी रही. फिल्म को ले कर खास बात यह है कि नैशनल और वर्ल्डवाइड, दोनों ही जगह इस ने 500 करोड़ का आंकड़ा क्रौस कर लिया है.

‘स्त्री’ भी हिट थी

वहीं, पहली फिल्म ‘स्त्री’ भी हिट रही थी. फिल्म ‘स्त्री’ साल 2018 में रिलीज हुई थी और इस को दर्शकों से जबरदस्त रिस्पौंस मिला था. फिल्म में राजकुमार राव के साथ श्रद्धा कपूर मुख्य भूमिका में थीं. यह फिल्म अपने अनोखे हौररकौमेडी और दमदार परफौर्मेंस के लिए जानी जाती है.

हिंदी सिनेमा के इन विलेन्स के पर्दे पर आते ही छा जाता है सन्नाटा, सूख जाता है गला

बौलीवुड मूवीज में विलेन्स का प्रभाव औडियंस पर हीरो से भी बढ़ कर रहा है. यहां तक की हमारे देश के कुछ बौलीवुड एक्टर्स ने अपनी एक्टिंग से लोगों को इतना दीवाना बनाया है कि लोग उन्हें विलेन के रोल में भी बेहद पसंद करने लगे हैं. बात करें अगर पुराने विलेन्स की तो मोगैम्बो के किरदार में अमरीश पुरी (Amrish Puri), गब्बर के किरदार में अमजद खान (Amjad Khan), शाकाल के किरदार में कुलभूषण खरबंदा (Kulbhushan Kharbanda) जैसे बहुत सारे एक्टर्स ने ऐसे रोल्स प्ले किए है जो लोगों के दिलों से कभी नहीं निकल सकते.

ऐसे में लैटेस्ट बौलीवुड फिल्म्स में भी इन दिनों कुछ ऐसे नए विलेन्स आए हैं जिन्होंने औडियंस को अपनी एक्टिंग से खूब एंटरटेन किया है. तो चलिए बताते हैं आपको कुछ ऐसे लैटेस्ट विलेन्स के बारे में, इन्होंने अपने रोल्स में इतनी जान डाल दी कि लोग उनके दीवाने हो गए.

बौबी देओल (Bobby Deol)

1 दिसम्बर 2023 को रिलीज हुई फिल्म “एनिमल” (Animal) को लोगों ने खूब पसंद किया और यही वजह है कि यह फिल्म ब्लौकबस्टर बन गई. खून खराबे और वायलैंस से भरपूर फिल्म एनिमल में अनिल कपूर (Anil Kapoor) और रनबीर कपूर (Ranbir Kapoor) ने मेन रोल प्ले किए थे वहीं दूसरी तरह बौबी देओल ने इस फिल्म में विलेन का रोल प्ले किया था जिससे कि उनका एक्टिंग करियर एक बार फिर बुलंदियों को छू गया. बौबी देओल को इस फिल्म में एक गूंगे विलेन का रोल मिला था और बिना कुछ बोले उन्होंने अपनी एक्टिंग से औडियंस को दीवाना बना दिया था. इसी के चलते साउथ की अप्कमिंग फिल्म “कंगुवा” (Kanguva) में भी बौबी देओल विलेन के रोल में दिखाई देने वाले हैं और उनके कातिलाना लुक्स की चर्चा तो अभी से ही होने लगी है और लोगों को उनका लुक बहुत पसंद आ रहा है.

सुनील कुमार (Sunil Kumar)

हाल ही में रिलीज हुई श्रद्धा कपूर (Shraddha Kapoor), राजकुमार राव (Rajkumar Rao) और पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) की फिल्म “स्त्री 2” (Stree 2) ने सिनेमाघरों में कमाल कर दिखाया है. इस फिल्म ने अब तक लगभग 500 करोड़ का बौक्स औफिस कलैक्शन कर लिया है. इस फिल्म में विलेन का रोल सुनील कुमार ने किया है जिनकी हाईट लगभग 7 फीट 6 इंच है. इस फिल्म में सुनील कुमार ने “सरकटे” (Sarkata) का रोल प्ले किया है जिसकी लोगों ने खूब तारीफ की है. Stree 2 के सरकटे की हाइट देख कर अमिताभ बच्चन के भी होश उड़ गए थे, उन्होंने इस पर चुटकी भी ली और कहा कि लोग मुझे लंबू बुलाते हैं

जौन अब्राहम (John Abraham)

बौलीवुड के किंग खान यानी कि शाहरूख खान (Shahrukh Khan) ने साल 2023 में अपनी 3 सुपर हिट फिल्म्स रिलीज कर बौलीवुड में लंबे समय बाद कमबैक किया था. शाहरूख खान की फिल्म्स “पठान” (Pathaan), “जवान” (Jawan) और “डंकी” (Dunki) बौक्स औफिस पर सुपर हिट साबित हुईं और लोगों को खूब पसंद आई. शाहरूख की फिल्म पठान में जौन अब्राहम ने विलेन का रोल प्ले किया था. इस फिल्म में जौन अब्राहम का नाम ‘जिम’ था और उनकी फिटनेस और फीजिक देख लोगों ने उन्हें विलेन के रोल में भी खूब पसंद किया.

अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor)

ऐसे में आजकल एक्टर्स इन दिनों नैगेटिव रोल्स की तरफ ज्यादा आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं क्योंकि औडियंस को हीरो से ज्यादा विलेन्स पसंद आने लगे हैं. रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) की अपकमिंग फिल्म “सिंघम अगेन” (Singham Again) में अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) भी विलेन के रोल में नजर आएंगे और इसी के चलते अर्जुन कपूर अपने रोल के लिए काफी एक्साइटेड हैं. उन्होंने फिल्म में मौका देने के लिए रोहित शेट्टी को थैंक्स कहा है.

मुझे लगता है कि मुझमें संबंध बनाने की कूवत नहीं है क्योंकि…

सवाल…

मैं 28 साल का हूं. मेरी शादी हो चुकी है. मुझे लगता है कि मुझ में संबंध बनाने की कूवत नहीं है, क्योंकि लगातार हस्तमैथुन करने से मेरा अंग छोटा व पतला हो गया है. क्या करूं?

जवाब…

हस्तमैथुन से संबंध बनाने की कूवत कम नहीं होती. छोटे-पतले अंग से भी इस काम में फर्क नहीं पड़ता. हमबिस्तरी से पहले बीवी के अंगों को सहला कर उसे तैयार करें, फिर कोई वहम लाए बिना संबंध बनाए.

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सवाल…

मैं 22 साल का हूं. एक लड़की मुझे पसंद करती है. लेकिन उस के भाई से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती है. अगर उसे पता चला तो हमारी दोस्ती में दरार भी आ सकती है. मुझे उचित राय दें?

जवाब

अगर आप दोनों एकदूसरे से?प्यार करते हैं तो कोई समस्या नहीं है. दोस्त की बहन से प्यार हो जाना कोई गुनाह नहीं?है. बेहतर होगा कि आप उस के घर के बड़ों को भरोसे में ले कर बात करें और दोस्त को भी सच बता दें. अगर वह समझदार होगा तो दोस्ती में दरार नहीं आएगी, बल्कि इस के रिश्तेदारी में तबदील होने की उम्मीद बढ़ जाएगी. और भी बेहतर होगा कि आप बात उजागर करने से पहले कुछ बन कर दिखाएं.

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सुबह 2 ग्लास पानी रखे आपकी सेहत को स्वस्थ

सुबह उठकर आप जो भी करते उससे कहीं ने कहीं आपके पूरे दिन में असर पढ़ता हैं. दिन की शुरुआत अगर थोड़ी एक्सरसाइज करे तो काफई अच्छा रहेंगा. इसके साथ अगर आप अपने ब्रेकफास्ट पर भी ध्यान देंगे तो ये अपको पुरी दिल खुश और सेहतमंद रखेंगे. इसके साथ ही सुबह की एक ऐसा भी आदात है जो आपको स्वस्थ रखने में काफी मदद करेंगी और वो है दो ग्लास पानी. दो ग्‍लास पानी के साथ अपने दिन की शुरुआत करना स्वस्थ आदत है जिसकी आदत सभी को डालनी चाहिए. इसको शुरूआत में करने पर आपको थोड़ी परेशानी हो सकती है, मगर कुछ ही दिन में आप आसानी से सुबह दो ग्‍लास पानी पीने लग जाएंगे. अगर ये पानी थोड़े गुनगुने होंगे तो इसके लाभ दोगुने हो सकते हैं.

पेट साफ तो हर रोग माफ

सुबह अगर आपका पेट साफ नही होता तो 2 ग्लास पानी आपे लिए वरदान हो सकता हैं. यह मल त्याग में सुधार कर सकता है और इससे संबंधित सभी पाचन विकारों को रोक सकता है. यदि आप नियमित रूप से खाली पेट पानी पीते हैं तो आपको रोज मल त्याग आसानी से होगा.

मेटाबौलिज्‍म के रखे स्वस्थ

पानी का सेवन आपके मेटाबौलिज्‍म को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है. खाली पेट पानी पीने से मेटाबौलिज्‍म बेहतर होगा. सिर्फ सुबह का पानी ही नहीं, आपको अपने मेटाबौलिज्‍म को बेहतर बनाने के लिए दिन भर में पर्याप्त पानी पीना चाहिए.

चेहरे पर निखार लाता है पानी

पानी का सेवन आपकी त्वचा के स्वास्थ्य से विभिन्न तरीकों से संबंधित है. सुबह-सुबह एक या दो ग्‍लास पानी भी आपकी त्वचा की सेहत में सुधार करेगा और आपकी त्वचा को ग्लो देगा. त्वचा के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी का सेवन सबसे आसान तरीका है.

एनर्गी को बढ़ता है पानी

खाली पेट पर पानी पीना आपके दिन को बेहतर बनाता है. ये आपके एनर्गी लेवल को बढ़ा सकता है क्योंकि ये आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों (Toxic substances) को बाहर निकालता है. नियमित रूप से खाली पेट पानी पीने की कोशिश करें और फर्क महसूस करें.

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