बुढ़ापे में अकेलापन

नई चिकित्सा ने जहां लोगों की आकस्मिक मृत्यु को रोक दिया है, वहीं बढ़ते बुढ़ापे ने एक समस्या खड़ी कर दी है जो दिनोंदिन विकराल होती जा रही है. दिल्ली के निकट गुरुग्राम में 77 साल के एक वृद्ध का पत्नी के साथ वसीयत करना, आत्महत्या का पत्र लिखना और फिर पत्नी का गला रेतने के बाद अपनी नसें काट लेना उसी समस्या का मात्र एक उदाहरण है.

ऐसा देश के कोनेकोने में हो रहा है. और भारत में ही नहीं, विदेशों में भी ऐसी घटनाएं घट रही हैं. रिटायरमैंट के बाद कुछ साल तो निकल जाते हैं पर जैसेजैसे बच्चे, अगर हैं, अपनीअपनी गृहस्थी में व्यस्त होने लगते हैं, तो जिंदगी में एक खालीपन छाने लगता है और जीवन बेकार सा महसूस होने लगता है. संपत्ति होते हुए भी नकदी कम होने लगती है, बीमारियों पर खर्च बढ़ने लगता है.

ये ऐसे तनाव हैं जिन के उदाहरण या नियम कम हैं. इन से कैसे निबटें, यह न बच्चे जानते हैं न पड़ोसी और न डाक्टर. ऊपर से इन वृद्धों को लूटने वाले चारों और बिखरे रहते हैं. कोई घर का नौकर बन कर आता है तो कोई बैंक मैनेजर. गुरुग्राम वाले इस दंपती ने अपना 40 लाख रुपया एक आटा मिल वाले को दे रखा था जो हाल में लापता हो गया था.

अच्छे घरों और अच्छे पदों पर रहने वाले लोगों के लिए बुढ़ापा एक आफत बन कर आ रहा है, खासतौर पर जब दोनों में से एक साथ छोड़ जाए.

अब समाज में ऐसा भी होने लगा है जब पतिपत्नी अपनेआप में इतने व्यस्त और संतुष्ट रहते हैं कि वे बच्चे चाहते ही नहीं हैं और पूरे तर्क सहित सोचविचार कर बच्चे न पैदा करने का निर्णय लेते हैं.

25-30 वर्ष की आयु में लिए गए इस निर्णय का असर 60-70 की आयु में दिखता है जब कोई उन की संपत्ति को लेने वाला नहीं बचता कि जो बदले में साधारण देखभाल भी प्यार समेत दे दे. हां, लूटने वाले बहुत आ जाते हैं. इन वृद्धों का हाल उन से ज्यादा बुरा नहीं है जिन के बच्चे विदेशों में जा कर बस गए हैं.

इस समस्या का हल वृद्धाश्रम से ज्यादा आसान एक ही घर में 4-5 वृद्धों का रहना होगा. बिल्डरों को ऐसे सुविधाजनक घर बनाने चाहिए जिन्हें वे केवल प्रौढ़ों और वृद्धों को बेचें और उन की बनावट ऐसी हो कि वृद्ध उन्हें खुद मैनेज कर लें और कमजोर होने पर भी उन्हें संभाल सकें. सरकारों से उम्मीद

तो नहीं की जा सकती कि वे उन्हें सहायता देंगी पर वे कम से कम ऐसे मकानों, जो 70 साल से ऊपर वालों के हैं, करमुक्त, मुफ्त बिजलीपानी के कर दें ताकि बुजुर्गों को बिलों का भुगतान न करना पड़े.

गुरुग्राम के बुजुर्ग दंपती गुरमीत कौर और हरमीक सिंह ढिल्लों ने अगर आत्महत्या करने का फैसला किया तो बहुत गलत न था, क्योंकि वे अब ऐसे माहौल में पहुंच गए थे जहां चारों ओर मगरमच्छ ही मगरमच्छ थे.

गोविंदा के गानों पर डांस करते हुए आई रणवीर की बारात

एक लंबे इंतजार के बाद रणवीर और दीपिका की शादी की तस्वीरें लोगों को देखने को मिलीं. इन तस्वीरों में दोनों जितने अच्छे लग रहें हैं उससे भी कहीं अच्छी और अनोखी बातें हैं जो उनकी शादी से जुड़ी है. खबरों की माने तो रणवीर दीपिका को लेने नाव पर सवार होकर गए थे.

 

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अपनी मौज मस्ती के लिए मशहूर रणवीर ने अपनी शादी काफी इंजौय की. उन्होंने नाव पर भी डांस किया. रणवीर की बारात गोविंदा के गानों और पंजाबी हिट्स पर मजे से ठुमके लगाती नजर आई. हालांकि अभी वो वीडियों अभी सोशल मीडिया पर नहीं आएं. उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही उन वीडियो को भी देखने का मौका दर्शकों को मिलेगा.

 

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अभी के लिए तो शादी की तस्वीरें ही काफी हैं. इन तस्वीरों ने ही सोशल मीडिया पर खलबली मचाई हुई है. दीपिका की चुनरी की काफी तारीफ हो रही है. चुनरी के बौर्डर पर ‘सदा सौभाग्यवती भवः’ लिखा हुआ है. सिंधी रीति रिवाजों में दुल्हन का जोड़ा दुल्हे के घर से आता है. इसलिए जरूर ये खूबसूरत चुनरी रणवीर के घर से आई होगी.

‘मीटू’: ढीली पैंटों का टूटा नाड़ा

कहने को तो ‘मी टू’ मामूली से 2 शब्द हैं, लेकिन इन्हीं 2 शब्दों के जरीए औरतों ने अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी बेबाकी के साथ सुना दी है.

इस मूवमैंट का मकसद है कि हर वह शख्स जो कभी यौन उत्पीड़न या छेड़खानी का शिकार हुआ है, वह ‘मी टू’ के साथ अपनी स्टोरी शेयर करे. लाखों लोग इस कैंपेन का हिस्सा बन रहे हैं और उन्होंने आगे बढ़ कर सोशल मीडिया पर आपबीती सुनाई है.

पिछले कई सालों से फिल्मों से गायब रही ‘मिस इंडिया’ रह चुकी फिल्म हीरोइन तनुश्री दत्ता ने फिल्म कलाकार नाना पाटेकर पर कई आरोप लगा दिए. उन्होंने बताया कि किस तरह 10 साल पहले एक फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उन्हें गलत तरीके से छुआ था.

इस खुलासे ने तो मानो जैसे पीड़ित औरतों को हिम्मत देने का काम किया क्योंकि बहुत सी औरतों या लड़कियों ने ऐसे छिपे आरोपियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अब धड़ल्ले से लिखना शुरू कर दिया है.

बौलीवुड हो या राजनीति, मीडिया हो या आम आदमी ‘मी टू’ मुहिम की लिस्ट में रोजाना कई लोगों के नाम जुड़ रहे हैं. अब तक 100 से भी ज्यादा मामले सोशल मीडिया पर आ चुके हैं. इन मामलों में साजिद खान, एमजे अकबर, सुभाष घई, नाना पाटेकर, चेतन भगत, आलोकनाथ, कैलाश खेर जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं.

मीटू’ के साथ निकले बोल

अगर हम सोशल मीडिया पर नजर डालें तो ज्यादातर आरोप कई सालों बाद लगाए जा रहे हैं. सोचने वाली बात यह है कि अगर किसी लड़की या औरत के साथ छेड़खानी हुई थी तो उन्होंने उस वक्त शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई थी? उन में अचानक जो यह हिम्मत देखने को मिल रही है, क्या वह दिखावा तो नहीं है? ऐसे कई तरह के सवाल लोगों के जेहन में घूम रहे हैं.

हमारे देश का कानून सब के लिए बराबर है लेकिन बात जब औरतों की इज्जत की आती है तो बराबरी नाम का यह नकाब कहीं गिरा हुआ नजर आता है.

जी हां, हमारे देश में रेप के ऐसे कई अनगिनत मामले हैं जिन्हें आज तक दर्ज भी नहीं किया गया है. पीडि़त औरतों को मना किया जाता है, धमकियां दी जाती हैं. वे हिम्मत भी करती हैं तो उन्हें रोक दिया जाता है.

लेकिन आज ‘मी टू’ मुहिम ने देशभर में औरतों को अपने हक की लड़ाई को जीतने की प्रेरणा दी है.

प्रिया रमानी, विंता नंदा, फ्लोरा सैनी, नताशा हेमरजानी ये कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने सोशल मीडिया पर ‘मी टू’ का इस्तेमाल कर के अपने साथ हुए यौन शोषण को बखूबी बिना किसी डर के लोगों तक पहुंचाया है.

‘मी टू’ मुहिम का ही असर है कि अब तक बौलीवुड के कई नामचीन लोग नप चुके हैं. नाना पाटेकर को फिल्म ‘हाउसफुल 4’ से निकाल दिया गया. यही हश्र इस फिल्म के डायरैक्टर साजिद खान का हुआ. गायक कैलाश खेर को दीवाली के एक प्रोग्राम में पहले न्योता दिया गया, फिर मना कर दिया. म्यूजिक डायरैक्टर अनु मलिक को चल रहे एक टैलीविजन शो से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

इस के बाद भी मर्दों द्वारा अपने ऊपर जुल्म ढहाने के औरतों के किस्सों में कोई कमी नहीं आई है. अब तो डौली बिंद्रा ने राधे मां को ही कठघरे में खड़ा कर दिया कि कैसे राधे मां ने चंडीगढ़ में एक आला पुलिस अफसर के आवास पर उन का यौन शोषण कराया.

डौली बिंद्रा ने इस बारे में एक ट्वीट करते हुए बताया कि साल 2015 में राधे मां और उन के भक्तों ने उन्हें चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस के एक आला अफसर के आवास पर यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया था.

इसी तरह बौलीवुड की हीरोइन शमा सिकंदर ने बताया, ‘‘अपने कैरियर के शुरुआती दिनों में जब मैं महज 14 साल की थी, तब एक डायरैक्टर ने मेरी जांघ पर हाथ रखा था. मैं ने उसी समय मना किया और उन्हें दूर कर दिया.

‘‘तो उस ने मुझ से कहा, ‘तुम्हें क्या लगता है, तुम स्टार बन जाओगी. यहां कोई नहीं छोड़ेगा तुम्हें. अगर कोई डायरैक्टर नहीं, तो कोई ऐक्टर या प्रोड्यूसर तुम्हारा शोषण करेगा. तुम उस के बिना यहां नहीं बढ़ सकतीं.’’’

‘मी टू’ की यह आग उत्तर भारत की फिल्म इंडस्टी से दक्षिण भारत के टौलीवुड की ओर बढ़ चली है. वहां की एक कन्नड़ हीरोइन श्रुति हरिहरन ने अपने फेसबुक पोस्ट पर ‘मी टू’ मुहिम की तारीफ करते हुए साल 2016 में हीरो अर्जुन सरजा द्वारा गलत तरीके और गैरपेशेवर हरकत करने का आरोप लगाया है.

हालांकि इस बात पर अर्जुन नाराज हो गए और उन्होंने श्रुति हरिहरन पर 5 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा ठोंक दिया.

इस मुद्दे पर दिल्ली प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष डाक्टर साई अनामिका का कहना है, ‘‘मैं औरतों की इस हिम्मत को सलाम करती हूं. हमारे समाज में औरतों को खिलौना समझा जाता है लेकिन खुशी की बात यह है कि यह खिलौना अब टूटने वालों में से नहीं है.’’

डाक्टर साई अनामिका ने एमजे अकबर पर निशाना साधते हुए कहा कि इस आंदोलन को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. यह औरतों के हक की लड़ाई है. इसे आंदोलन के नजरिए से ही देखा जाना चाहिए.

हमारे समाज में जब किसी लड़की या औरत के साथ कुछ गलत होता है तो उसे चुप रहने को बोला जाता है. उस वक्त न समाज साथ देता है, न कानून. ऐसे में एक पीडि़ता खुद को अकेला, बेबस, कमजोर समझने लगती है. लेकिन इस का मतलब यह नहीं है कि वह अपने साथ हुए अपराध को भूल जाए. वह रास्ता ढूंढ़ती है इंसाफ पाने का और अब वह रास्ता उसे मिल गया है. ‘मी टू’ मुहिम की वजह से अब न चाहते हुए भी हमारे समाज, कानून और मीडिया को इन मुद्दों पर नजर डालनी ही पड़ेगी.

एम्स की स्टूडैंट स्वाति पुरोहित का कहना है, ‘‘मैडिकल स्टूडैंट्स को अकसर ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है जब वे यौन शोषण का शिकार तो हो जाती हैं लेकिन अपने साथ हुए इस अत्याचार को कैंपस की चारदीवारी में ही बंद कर देती हैं. अगर शिकायत दर्ज कराई गई तो कैरियर चौपट हो सकता है. यही वजह है कि ऐसी तमाम लड़कियां अपने साथ हुए शोषण को अपने अंदर ही दफन कर लेती हैं. लेकिन ‘मी टू’ द्वारा हम अपनी बात कानून व समाज तक आसानी से पहुंचा सकती हैं.’’

क्या बदलाव आएगा

इसे डर कहें या बदलाव, इस से औरतों को सुकून तो मिल ही रहा है. ‘मी टू’ मुहिम ने मर्दों को डर के साए में रहना तो सिखा ही दिया है. कल तक जो लोग औरतों के करीब आने का जुगाड़ ढूंढ़ते थे, ‘मी टू’ ने उस जुगाड़ का ही खात्मा कर दिया है.

मैट्रो ट्रेन में अकसर भीड़ होती है और इस भीड़ में कुछ मर्दों की पैंट ढीली हो ही जाती है लेकिन अब इन ढीली पैंट वाले मर्दों ने भी ऐक्सट्रा नाड़ा खरीद लिया है. अब वे चार कदम दूरी बना कर चलना पसंद करते हैं.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफैसर साधना सिंह का कहना है, ‘‘पहले हमारे समाज में लड़कियां बोलने की हिम्मत नहीं रखती थीं. अगर इतने सालों बाद भी उन में हिम्मत देखने को मिल रही है तो सिर्फ ‘मी टू’ मुहिम की वजह से. जिन लोगों का कहना है कि इतने सालों बाद ये इलजाम क्यों? उन के लिए मैं कहना चाहूंगी कि औरतों को हमेशा एक उम्मीद और एक सही दिशा की जरूरत होती है और आज वह दिशा उन्हें ‘मी टू’ के रूप में मिल गई है.

‘‘किसी पर आरोप लगाने के लिए बहुत हिम्मत की जरूरत होती है. लड़कियां सिर्फ कैरियर बनाने की वजह से ही चुप नहीं रहतीं. इस के अलावा भी कई वजहें होती हैं जो उन्हें चुप रहने को मजबूर कर देती हैं.

‘‘जहां तक औरतों के झूठ बोलने की बात है तो आलोकनाथ के बारे में तो सब जानते हैं कि नशे की हालत में वे इनसान भी नहीं रहते. ऐसे में उन पर लगाया गया इलजाम झूठ कैसे हो सकता है?

‘‘मेरा मानना है कि 100 में से 98 फीसदी औरतें झूठ नहीं बोल सकतीं. ‘मी टू’ मुहिम एक अच्छी पहल है. इसे एक आंदोलन के रूप में देखा जाना चाहिए.’’

हमारे देश में बलात्कार जैसे मुद्दे हर रोज पुलिस चौकी में आते हैं लेकिन इन को बाहर से ही रफादफा कर दिया जाता है. कानून पूंजीवादियों का गुलाम बनता जा रहा है और इस गुलामी की सजा पीडि़तों को सहनी पड़ रही है.

‘मी टू’ मुहिम का आने वाले दिनों में क्या रूप देखने को मिलेगा, यह तो अभी नहीं कहा जा सकता, पर इतना तो पक्का है कि जो लोग औरतों और लड़कियों को वर्कप्लेस पर अपनी बपौती समझते थे, वे अब थोड़ा डर कर रहेंगे.

मी टू’ पर कौन क्या बोला

‘मी टू’ अभियान महिलाओं का समर्थन करता है लेकिन उन्हें इस का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए. उन्हें इस का सही माने में इस्तेमाल करना चाहिए.

रजनीकांत, फिल्म कलाकार.

मैं ‘मी टू’ अभियान के तहत यौन उत्पीड़न की अपनी कहानियों को साझा करने वाली महिलाओं के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा हूं क्योंकि मैं उन की इस पीड़ा को बखूबी समझता हूं. मैं ने कई साल पहले उत्पीड़न का सामना किया था, लेकिन वह यौन प्राकृतिक नहीं था.

सैफ अली खान, फिल्म कलाकार.

महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ करने वालों को सबक तो सिखाना ही चाहिए. काम पर जाने वाली महिलाओं को उन के काम की जगह पर पूरा सम्मान मिलना ही चाहिए. अगर कोई इस का उल्लंघन करता है या उस के सम्मान में बाधा पहुंचाता है तो उसे सबक सिखाना चाहिए.

लता मंगेशकर, गायिका.

महिलाओं के साथ इज्जत और गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिए. मुझे खुशी है कि ऐसा नहीं करने वालों के लिए अब जगह खत्म हो रही है.

राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष.

आखिर क्या है ‘मी टू’?

‘मी टू’ एक ऐसी मारक मुहिम है, जिस के जरीए औरतें और लड़कियां वर्कप्लेस पर अपने साथ हुए यौन शोषण का सोशल मीडिया पर खुलासा कर रही हैं. इस में उन के द्वारा बताया जा रहा है कि कैसे उन को मर्दों से असुरक्षा महसूस हुई या उन्हें बेइज्जत होना पड़ा या फिर शारीरिक या मानसिक तौर पर प्रताडि़त होना पड़ा.

दरअसल, ‘मी टू’ मुहिम की शुरुआत हौलीवुड से हुई है. साल 2006 में अमेरिकी सिविल राइट्स ऐक्टिविस्ट तराना बर्क ने पहली बार इस की शुरुआत की थी. उन के खुलासे के 11 साल बाद 2017 में यह सोशल मीडिया में वायरल हुआ.

अमेरिकी अखबार ‘न्ययौर्क टाइम्स’ ने हौलीवुड के दिग्गज प्रोड्यूसर हार्वी वाइंस्टीन को ले कर खुलासे किए थे. इस के बाद उन्हें कंपनी छोड़नी पड़ी थी. एक तरह से उन का कैरियर ही बरबाद हो गया. इस के बाद से ही यह सिलसिला शुरू हो गया था.

भारत में इस की शुरुआत तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर पर लगाए गए यौन शोषण के आरोप से हुई और धीरेधीरे यह बात इस कदर बढ़ गई कि इस ने ‘मी टू’ मुहिम का रूप ले लिया. इस के बाद साजिद खान, विकास बहल, रजत कपूर, अनु मलिक, आलोकनाथ, चेतन भगत, अभिजीत भट्टाचार्य, कैलाश खेर और मोदी सरकार में मंत्री एमजे अकबर पर ‘मी टू’ द्वारा कई औरतों ने यौन शोषण का आरोप लगाया.

राय आप की: क्या ‘मी टू’ मुहिम से औरतों को अपनी बात बेबाकी से रखने की हिम्मत मिली है? अपनी राय मोबाइल फोन नंबर 08826099608 पर whatsapp करें और सरस सलिल पाठक ग्रुप में शामिल हों.

‘शिवगामी’ और ‘कटप्पा’ पार्टी में करेंगे रोमांस

फिल्म बाहुबली में शिवगामी और कटप्पा का किरदार काफी लोकप्रिय हुआ था. शिवगामी यानि राम्या कृष्णन और कटप्पा यानि सत्यराज, अब ये दोनों पर्दे पर रोमांस करते नजर आएंगे. जी हां…हाल ही में राम्या ने इस खबर की पुष्टि कर दी है कि वो और सत्यराज फिल्म ‘पार्टी’ में काम कर रहे हैं.

shivgami katappa

फिल्म में दोनों का रोमांटिक एंगल है और उनकी नजदीकियों के काफी सीन दर्शकों को दिखाई देंगे. राम्या के मुताबिक लम्बे समय के बाद उन्हें एक जबरदस्त हंसाने वाली स्क्रिप्ट मिली है.

उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म का शूट ख़त्म कर घर जाने पर हम खुश होते हैं लेकिन फिल्म ‘पार्टी’ की शूटिंग के दौरान काम खत्म कर घर जाते वक्त दुःख होता था. इस फिल्म की शूटिंग फिजी में हुई है. राम्या कृष्णन ने बाहुबली के दोनों भागों में ये रोल किया था और अब उन्हीं का ये किरदार एक तरह से स्पिन औफ के रूप में वेब सीरीज में होगा. इस फिल्म को दो लोग डायरेक्ट करेंगे.

दोस्त के आने पर इंटरनैशनल खिलाड़ी ने की खुदकुशी

साई हौस्टल के रूम में एक इंटरनैशनल गोल्ड मेडेलिस्ट एथलीट संदिग्ध परिस्थितियों में पंखे से लटका मिला. उन्हें एक लड़की और हौस्टल के गार्ड ने पंखे से नीचे उतारकर अस्पताल में दाखिल कराया. जहां इलाज के दौरान उनकी बुधवार सुबह मौत हो गई. फिलहाल मौत के कारणों का कुछ पता नहीं लग सका है. मौके से कोई स्यूसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है. पुलिस का कहना है कि अभी तक कुछ नहीं कहा जा सकता कि आखिर यंग एथलीट ने ऐसा क्यों किया.

साउथ दिल्ली की औडिश्नल डीसीपी विजयंता आर्य ने बताया कि मृतक एथलीट का नाम पलिंदर चौधरी (18) है. मूलरूप से वह अलीगढ़ के गांव केमथल के रहने वाले थे. वह यहां जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में स्पोर्ट्स अथौरिटी औफ इंडिया (साई) के हॉस्टल में रहकर 100 और 200 मीटर रेस की तैयारी कर रहे थे. घटना मंगलवार शाम करीब 5:15 से 5:30 बजे के बीच की बताई गई है. सफदरजंग अस्पताल से पुलिस को मंगलवार रात 9 बजे कॉल की गई. जहां से बताया गया था कि कोच हरकमलजीत सिंह ने बेहोशी की हालत में एथलीट को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया. मौके पर पुलिस पहुंची.

जांच में पता लगा कि मंगलवार शाम एथलीट पलिंदर से मिलने कोई लड़की आई थी. जिसने हौस्टल में अपना परिचय पलिंदर की दोस्त के रूप में दिया था. पता लगा है कि पलिंदर को सबसे पहले उन्होंने ही पंखे से लटका देखा था. पलिंदर क्रेप बैंडेज (गर्म पट्टी) से पंखे से लटके हुए थे. हालांकि, मामले में सूत्र यह भी बता रहे हैं कि पलिंदर ने लड़की के सामने ही पंखे से लटकने की कोशिश की थी. जिससे घबराकर लड़की हौस्टल के रूम नंबर-69 से बाहर भागी और गार्ड को बुलाकर लाई थी. लेकिन जब तक पलिंदर पंखे से लटक चुके थे.

उसी वक्त अपने आप को पलिंदर की दोस्त बताने वाली लड़की और गार्ड ने पंखे से लटके पलिंदर को क्रेप बैंडेज काटकर नीचे उतारा और साई के कोच समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी खबर दी. सबसे पहले पलिंदर को बेहोशी की हालत में स्टेडियम के अंदर ही स्थित मेडिकल सेंटर में ले जाया गया. लेकिन मामला पेचीदा होने की वजह से उन्हें वहां से कुछ ही देर में सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया. वहां इलाज के दौरान उनकी बुधवार तड़के मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि शव का पोस्टमौर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है.

पुलिस ने बताया कि अभी तक इस मामले में उन्होंने किसी से पूछताछ नहीं की है. लेकिन जल्द ही वह पलिंदर के दोस्तों, कोच और लड़की से भी पूछताछ करेगी. अभी यह भी जांच का विषय है कि पलिंदर जिस वक्त पंखे से लटके उस वक्त क्या लड़की हौस्टल रूम के अंदर ही थी या बाहर. पलिंदर यहां हौस्टल में नवंबर 2016 से रह रहे थे.

पलिंदर के नाम नैशनल रेकौर्ड, आर्मी में मिली थी नौकरी भी

एथलीट पलिंदर कुमार चौधरी के नाम अंडर-16 का 100 मीटर का नैशनल रेकौर्ड दर्ज था. 18 साल के पलिंदर देश के होनहार खिलाड़ियों में शामिल थे. उनकी आत्महत्या की जांच के लिए स्पोर्ट्स अथौरिटी औफ इंडिया ने अपने सेक्रेटरी स्वर्ण सिंह छाबड़ा की अगुआई में कमिटी गठित की है.

अलीगढ़ के पलिंदर ने बहुत कम समय में अपनी पहचान बना ली थी. रांची में 2015 में आयोजित नैशनल चैंपियनशिप में उन्होंने अंडर-16 कैटिगरी में 100 मीटर की रेस 11.01 सेकंड में पूरी कर नैशनल रिकौर्ड की बराबरी की थी. जूनियर स्तर पर उनके बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उन्हें दो बार देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था.

अथौरिटी के सेंटर में आने के कुछ ही दिन बाद उन्हें 2017 में बैंकौक में आयोजित एशियन यूथ ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लेने का मौका मिला. वहां उन्होंने रिले रेस में गोल्ड मेडल जीता था. उन्होंने वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया था. अपने प्रदर्शन से लगातार प्रभावित कर रहे पलिंदर को आर्मी में नौकरी भी मिली थी. जौइनिंग की प्रक्रिया पूरी करने में वह लगे हुए थे.

ओलिंपिक में लाना चाहता था गोल्ड, हाथ पर बनवाया रिंग्स का टैटू

देश हो या विदेश, वह जहां भी दौड़ा, गोल्ड लेकर ही आया. अब उसके दिलोदिमाग पर केवल ओलिंपिक ही छाया हुआ था. किसी भी सूरत में वह गोल्ड लाने के लिए पागल हुआ जा रहा था. ओलिंपिक के प्रति उसकी दीवानगी उसके दिमाग में इस कदर हावी हो गई थी कि उसने एक हाथ पर ओलिंपिक के सिंबल का टैटू तक गुदवा लिया था. यह कहना है मृतक इंटरनैशनल एथलीट पलिंदर चौधरी के पहले कोच अजीत कुमार का जो अब उन्हें अपना सबसे अच्छा दोस्त भी मानते थे.

अजीत कुमार ने बताया कि पलिंदर ने शुरुआत लौन्ग जंप से की थी. लेकिन उसे जल्द समझ में आ गया कि वह लंबी कूद के लिए नहीं बना है बल्कि दौड़ के लिए बना है. उसने 100 और 200 मीटर की दौड़ की तैयारी शुरू की. देखते ही देखते वह इसमें चमकने लगा. स्कूल स्तर पर शुरू हुई उसकी गोल्ड जीतने की शुरुआत ने बैंकौक और कीनिया में गोल्ड पर मुहर लगाई. उन्होंने बताया कि पलिंदर का मंगलवार दोपहर 2 बजे ही उनके पास फोन आया था. कोई दौड़ की प्रतियोगिता होने वाली है उसके बारे में पूछ रहा था. इसके बाद आज पता चला कि अब वह इस दुनिया में नहीं रहा. सही में भारत ने एक हीरे को खो दिया, जो आने वाले समय में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करता.

‘न झगड़ा न विवाद…2 घंटे पहले हुई थी उससे बात’

पलिंदर चौधरी के पिता महेशपाल ने बताया कि पैसों को लेकर या अन्य किसी भी मुद्दे को लेकर उसका परिवार से कोई झगड़ा या विवाद नहीं था. मंगलवार को तीन बजे ही तो उससे फोन पर बात हुई थी. उसने कुछ रूपये भिजवाने की बात कही थी, तो मैंने बोल दिया था कि धान बिकने वाला है. 1 दिसंबर तक उसके पास पैसे पहुंच जाएंगे. इससे वह पूरी तरह से संतुष्ट था. उसने पैसों की कोई तुरंत जरूरत नहीं जताई थी. हमारी तो यह समझ में ही नहीं आ रहा कि जिस वक्त मेरी उससे बात हुई थी. वह एकदम सही था और सामान्य रूप से बात कर रहा था. आखिर बात करने के बाद दो-ढाई घंटे में ऐसी क्या बात हुई जो उसने ऐसा कदम उठा लिया. हमें यकीन नहीं हो रहा कि वह स्यूसाइड कर सकता है. मृतक एथलीट पलिंदर के पिता महेशपाल ने बताया कि उसने हमसे जब-जब पैसें मांगे. हमने उसकी मांग को तुरंत पूरा किया. हमारा तो एक ही बच्चा था. वह भी चला गया. अब हम कैसे रहेंगे…

उन्होंने बताया कि हमारे पास मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे हौस्टल से फोन आया था कि आप जल्द आ जाइए, पलिंदर को तेज बुखार हो गया है. उन्हें यह नहीं बताया कि वह पंखे से लटक गया है या लटका मिला है. वह लोग अलीगढ़ से तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गए. रात करीब 8:30-9 बजे तक वह यहां पहुंच गए. यहां आकर हमें यह बात बताई गई कि वह अपने रूम में पंखे से लटक गया था. लेकिन क्यों/ इसका जवाब किसी के पास नहीं है.

उन्होंने बताया कि यह तो हमें नहीं पता कि हौस्टल में उसके साथ कोई परेशानी चल रही थी या नहीं या फिर कोच से किसी तरह की अनबन. लेकिन हमारा बहादुर और भविष्य में देश का नाम रोशन करने वाला एक अच्छा मां का सपूत दुनिया से चला गया. मामले में पुलिस का कहना है कि जब हम हौस्टल के उस रूम में पहुंचे. जहां बताया गया था कि पलिंदर पंखे से लटक गया था. वहां रूम बाहर से लॉक मिला था. उस तमाम जगह जांच की जाएगी कि कहां-कहां सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. उनकी फुटेज की भी जांच की जाएगी.

मृतक पलिंदर की चाचा-ताऊ की बहनों में सुमन ने कहा कि पैसों की वजह से वह ऐसा नहीं कर सकता. हमें तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि उसने ऐसा कदम उठा लिया. इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए.

सुनील शेट्टी के बेटे अहान इस फिल्म से करेंगे बौलीवुड में एंट्री

सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी बौलीवुड में एंट्री के लिए तैयार हैं. फिल्ममेकर मिलन लुथरिया, अहान की डेब्यू फिल्म का निर्देशन करने जा रहे हैं. नाडियावाला ग्रैडसन एंटरटेनमेंट ने ट्वीटर पर ट्वीट कर कहा कि, “एक बड़ी यात्रा शुरू होने जा रही है! अहान शेट्टी के डेब्यू के लिए एक और चरण. एनजीई परिवार में नए सदस्य मिलन लुथरिया का स्वागत है.”

आपको बता दें कि सुनील शेट्टी की बेटी अथिया शेट्टी ने साल 2015 में फिल्म ‘द हीरो’ से डेब्यू फिल्म था. सलमान खान प्रोडक्शन्स की इस फिल्म में अथिया के साथ आदित्य पंचोली थे. लेकिन फिल्म बौक्स औफिस पर औंधे मुंह गिरी. अथिया की दूसरी फिल्म ‘मुबारकां’ भी फ्लौप रही थी. अथिया के बाद अब सुनील शेट्टी के बेटे अहान डेब्यू के लिए तैयार हैं.

 

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ये फिल्म तेलुगू की हिट फिल्म ‘आरएक्स100’ की रीमेक हैं. ये फिल्म 2019 में रिलीज होगी. बता दें, अहान खान सोशल मीडिया पर काफी पौपुलर हैं, और अक्सर अपनी तस्वीरों की वजह से लाइम लाइट बटोरते हैं.

कलह की कगार पर पारिवारिक पार्टियां

इंडियन नैशनल लोकदल में इस वक्त कलह का साया गहराया हुआ है. पिछले कुछ समय से चौटाला परिवार के सदस्य 2 दलों में बंटने के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रहे हैं. हरियाणा में चौधरी देवीलाल की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए उन के बेटे ओमप्रकाश चौटाला आए. वे राज्य के मुख्यमंत्री रहे. मुख्यमंत्री रहते हुए शिक्षक भरती मामले में उन्हें जेल की सजा हुई. फिलहाल अपने बड़े बेटे और सांसद रह चुके अजय चौटाला के साथ जेल में हैं.

दरअसल, अजय चौटाला के बड़े बेटे हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला और उन के चाचा अभय चौटाला के बीच ठनी हुई है. दुष्यंत चौटाला और उन का छोटा भाई दिग्विजय चौटाला एकसाथ हैं जबकि ओमप्रकाश चौटाला अभय चौटाला का साथ दे रहे हैं.

इंडियन नैशनल लोकदल की गोहाना में हुई रैली के बाद परिवार में कलह ज्यादा बढ़ गई. अभी ओमप्रकाश चौटाला पैरोल पर जेल से बाहर आए हुए हैं. उन्होंने अपने पोते व सांसद दुष्यंत चौटाला और उन के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला को पार्र्टी से निलंबित कर दिया. युवा इकाई को भी भंग कर दिया. दिग्विजय चौटाला इस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

इन दोनों को ही पार्टी से निकालने के बाद दिग्विजय चौटाला ने बागी तेवर दिखाने शुरू कर दिए. उन्होंने कहा कि युवा इकाई को भंग करने का अधिकार केवल अजय चौटाला या 26 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पास है.

राजनीतिक परिवार का यह झगड़ा नया नहीं है. बिहार में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में भी उन के दोनों बेटों के बीच मनमुटाव की खबरें आती रही हैं. लालू प्रसाद भी इस वक्त जेल में हैं. उन के बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव के बीच सत्ता संघर्ष की खबरें आती रही हैं. उधर समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव, उन के बेटे अखिलेश यादव और मुलायम सिंह के भाई शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव के बीच मानो तलवारें खिंची हुई हैं.

साल 2016 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी जब सत्ता में थी तब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उन के चाचा शिवपाल यादव के बीच विवाद सुर्खियों में आए थे. इन दोनों की तनातनी में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव अपने भाई शिवपाल यादव के साथ खड़े हुए, फिर बेटे अखिलेश के साथ. यहां इस परिवार के बीच कलह की मूल जड़ अमर सिंह को माना गया था.

दक्षिण भारत में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम में एम. करुणानिधि के परिवार के सदस्यों एमके स्टालिन और अलागिरी के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है.

दरअसल, इन राजनीतिक परिवारों के सदस्यों के बीच दबदबे को ले कर यह जंग है. इन परिवारों की कलह में कांग्रेस और भाजपा को अपनेअपने फायदे दिख रहे हैं. अब इस समय जब विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की कवायद चल रही है, ऐसे में परिवार पर टिके इलाकाई दलों में फैली फूट विपक्षी एकता के लिए ही नहीं, बल्कि खुद इन दलों की मजबूती के लिए भी खतरनाक है.

ऐसे ही सही (भाग-1)

पार्किंग में अपना स्कूटर खड़ा कर के मैं इमरजेंसी वार्ड की तरफ बढ़ा. काफी पूछने पर पता चला कि जिस व्यक्ति को मैं ने यहां भरती कराया था वह अब आई.सी.यू. में है. रात को हालत ज्यादा बिगड़ जाने के कारण उसे वहां शिफ्ट कर दिया गया था. आई.सी.यू. चौथी मंजिल पर था. मैं लिफ्ट का इंतजार करने के बजाय तेजी से सीढि़यां चढ़ता हुआ वहां पहुंचा.

थोड़ा सा ढूंढ़ने पर मैं ने उन की पत्नी को एक कोने में मायूस गुमसुम बैठे देखा. मैं तेजी से उन के पास गया और उन का हाल पूछा. वह पहले तो मुझे अजनबियों की तरह देखती रहीं फिर याद आने पर मेरे साथ उठ कर एक तरफ आ कर फूटफूट कर रोने लगीं.

‘‘क्या हुआ. सब ठीक तो है न?’’ मैं थोड़ा चिंतित हो गया.

‘‘कुछ भी ठीक नहीं है. आप के जाने के बाद कई डाक्टर आए. कई टैस्ट किए फिर भी कमर से नीचे के हिस्से में कोई हरकत नहीं हो रही है. उन्हें रात को ही यहां शिफ्ट कर दिया गया था. बस, तब से यहीं बैठी हूं. क्या करूं…एकदम नया शहर और आते ही यह हादसा,’’  कह कर वह पुन: साड़ी का पल्लू मुंह में दबाए सिसकने लगीं. मेरी समझ में नहीं आ रहा था, मैं क्या कहूं.

सब से पहले मैं ने कैंटीन से चाय और बिस्कुट ला कर उन्हें दिए. लग रहा था जैसे रात से उन्होंने कुछ खाया नहीं है. उन के पास ही उन की 10 साल की बेटी बैठी हुई थी, जो थोड़ीथोड़ी देर में सहमे हुए मां का हाथ पकड़ लेती थी. उन के पास कुछ देर बैठ कर मैं डाक्टर से मिलने चला गया.

डाक्टर से पता चला कि उन की स्पाइनल कौर्ड में कोई गहरी चोट आई है जिस के कारण यह हादसा हुआ है. यह भी कह पाना मुश्किल है कि वह कब तक ठीक हो पाएंगे और ठीक भी हो पाएंगे या नहीं.

‘‘तो क्या यह उम्र भर यों ही पड़े रहेंगे,’’ मैं ने बेचैनी से पूछा.

‘‘अभी कुछ भी कहना संभव नहीं,’’ डाक्टर बोला, ‘‘कुछ विशेषज्ञ बुलाए हैं…शायद वे कुछ सलाह दे सकें.’’

‘‘तो आप उन्हें कब तक यहां आई.सी.यू. में रखेंगे?’’

‘‘ज्यादा से ज्यादा 3 दिन,’’ कह कर डाक्टर वहां से चला गया.

एक बीमा एजेंट होने के नाते उन की बीमारी के प्रति जानकारी रखना मेरे लिए स्वाभाविक बात थी. और तब ज्यादा जब सबकुछ मेरी आंखों के सामने हुआ.

कल दोपहर को आफिस जाते समय अचानक स्पीड ब्रेकर सामने आ गया तो मुझे तेजी से ब्रेक लगाने पड़े, क्योंकि स्पीड ब्रेकर ठीक से नहीं बना था. इतने में देखा कि एक तेज गति से आती वैन उस स्पीड ब्रेकर से टकराई और चलाने वाला व्यक्ति उछल कर बाहर जा गिरा. वैन सामने पेड़ से टकरा गई. यह हादसा मुझ से कुछ ही दूरी पर हुआ था.

मैं ने वहां जा कर उस व्यक्ति को  देखा जो मूर्च्छितावस्था में एक तरफ पड़ा हुआ था. मैं ने कुछ लोगों की सहायता से उसे एक आटोरिकशा में लिटाया और पास ही एक नर्सिंग होम में ले गया. उस व्यक्ति के सिर पर गहरी चोट का निशान था.

वहां मौजूद डाक्टरों को मैं ने पूरी घटना का विवरण दिया और उसे लिटा दिया. उस की जेब से एक परिचयपत्र निकला जिस पर उस के आफिस का पता और फोन नंबर लिखा था. पता चला कि वह एक सरकारी संस्थान में डिप्टी डायरेक्टर है और उस का नाम विनोद शर्मा है.

मैं ने उस संस्थान से उन के घर का फोन नंबर लिया और उन की पत्नी को इस हादसे के बारे में बताया. थोड़ी ही देर में वह वहां आ गईं. उन को सबकुछ बताने के बाद मैं ने उन से इजाजत मांगी. वह मन भर कर बोलीं, ‘‘मैं आप की बहुत शुक्रगुजार हूं कि आप ने इन्हें यहां तक पहुंचा दिया, वरना आज के व्यस्त जीवन में कौन ऐसा करता है.’’

‘‘अरे, यह तो मेरा फर्ज था. बस, यह ठीक हो जाएं तो समझूंगा कि मेरा लाना सफल हुआ.’’

‘‘एक मेहरबानी और कर दीजिए,’’ वह कहने लगीं, इन की गाड़ी किसी तरह घर पहुंचा दीजिए…जो भी खर्च आएगा, मैं दे दूंगी.’’

‘‘ठीक है, मैम, अभी तो देखना होगा कि वह चलने लायक है या नहीं,’’ कह कर मैं ने अपने एक परिचित को वर्कशाप में फोन कर के गाड़ी को वहां से निकालने का इंतजाम किया. बीमा एजेंट होने के नाते यह सब काम करना, करवाना मैं अच्छी तरह जानता था.

इस सारी प्रक्रिया से निबट कर मैं जब घर पहुंचा तो 8 बज चुके थे. संगीता ने दरवाजा खोलते ही अपने चिरपरिचित स्वर में मुंह बना कर कहा, ‘‘तो आज क्या बहाना है देर से आने का?’’

इतना सुनना था कि मेरा मन  कसैला हो गया. उस का यह स्वभाव और व्यवहार सर्पदंश की तरह मुझे हर बार डंस जाता. मेरे विवाह को 4 साल हो चुके थे और इन 4 सालों में मैं ने कभी उस के मुंह से फूल झड़ते नहीं देखे. हमेशा किसी न किसी बात को ले कर वह ताने देती रहती थी.

शुरुआत में मैं ने बड़ी कोशिश की कि उस के पास बैठ कर कोई प्यार की बात कर सकूं. मगर हर बात मायके से शुरू हो कर मायके पर ही खत्म होती. बातों को तूल न देने के लिए मैं खामोश हो जाता और इस खामोशी का उस ने भरपूर फायदा उठाया.

हद तो तब हो गई जब मेरी सास और साली ने मुझ पर संगीता को खुश रखने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. उसे अच्छे कपडे़े, जेवर और घुमानेफिराने, घर जल्दी लौटने का सिलसिलेवार क्रम भी उन्होंने ही तय कर दिया. मैं हर बात का जवाब देना जानता था पर मर्यादाओं में रह कर और वह अमर्यादित हो चुकी थी.

‘‘यह बात तो तुम प्यार से भी पूछ सकती हो. पर मेरे किसी उत्तर से तुम संतुष्ट तो होगी नहीं इसलिए कोई बहाना नहीं बनाऊंगा,’’ मैं ने मेज पर अपना बैग रखते हुए बड़ी नरमी से कहा.

‘‘5 बजे तुम्हारा आफिस बंद हो जाता है और 7 बजे से पहले तुम कभी आते नहीं हो. सुबह भी 8 बजे चले जाते हो. तुम से तो मजदूर अच्छे होते हैं जिन का कोई समय तो होता है.’’

‘‘तो फिर किसी मजदूर से ही शादी कर लेतीं. वह तुम्हारे घर वालों के इशारों पर नाचता और समय पर आ भी जाता. तुम्हें अच्छी तरह मेरे काम और व्यक्तिगत संपर्क के बारे में पता है.’’

‘‘पता नहीं तुम्हारी कौन सी बात से प्रभावित हो कर पापा ने शादी के लिए हां कर दी. आज इस घर में जो कुछ भी है, पापा का दिया हुआ है वरना तुम तो उन के सामने खड़े भी नहीं हो सकते.’’

‘‘जानता हूं…तभी तो तुम्हारी मां से सारा दिन ताने और आदेश सुनने पड़ते हैं. सभी कुछ तो हमारे घर पर था. कमी किस बात की थी. तुम्हीं ने जिद कर के मुझे अलग कर दिया था. सुखसुविधाओं को जुटा लेने से भी कहीं गृहस्थी चलती है. पहले पति से नहीं बनी तो मेरे पल्ले बांध दिया…और यह बात भी हम से छिपा ली. तुम ने अलग किया है तो घरगृहस्थी के सामान की व्यवस्था भी तुम करोगी. मैं ने तो पहले ही कह दिया कि…’’

‘‘मेरे पास तो कुछ भी नहीं है. यही न. कौन से मांबाप अपनी बच्ची को ऐसी हालत में देख सकते हैं. तुम्हारे मांबाप ने क्या किया,’’ वह बात काट कर तेज आवाज में बोली.

‘‘उन्होंने अपने इकलौते बेटे की जुदाई का गम सहन किया…’’ कहतेकहते मेरी आंखें भर आईं और मैं बिना कोई बात किए दूसरे कमरे में चला गया. मेरा मौन हमेशा कह देता कि शादी की कीमत चुका रहा हूं.

हमारी रातें यों ही करवटें बदलते निकल जातीं और सुबह बिना किसी बात के…मैं ने मन ही मन यह फैसला किया कि टकराव की स्थिति पैदा न होने देने के लिए कम से कम घर पर रहूं.

एक दिन उत्सुकतावश मैं ने शर्माजी को फोन किया. पता चला कि उन की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है. अब उन्हें एक बडे़ प्राइवेट नर्सिंग होम में शिफ्ट कर दिया गया है जहां पर ज्यादा सुविधाएं थीं. देश के कई बडे़ डाक्टर उन्होंने अपनी जांच के लिए बुलवाए पर कोई फायदा नहीं हुआ. मैं उसी समय उन के नर्सिंग होम में पहुंचा. उन की हालत देख कर मन कसैला सा हो उठा.

उन की कमर से नीचे का हिस्सा निष्क्रिय हो चुका था. पेशाब की थैली लगी हुई थी. उन की पत्नी सपना भी ऐसी स्थिति में नहीं थीं कि उन से कोई बात की जा सके. जिसे सारी उम्र पति की ऐसी हालत का सामना करना हो, भीतरबाहर के सारे काम उन्हें स्वयं करने हों, इन सब से बदतर पति को खींच कर उठाना, मलमूत्र साफ करना, शेव और ब्रश के लिए सबकुछ बिस्तर पर ही देना और गंदगी को साफ करना हो, उस की हालत क्या होगी.

मैं उन के पास जा कर बैठ गया. चेहरे पर गहन उदासी छाई हुई थी. मुझे देखते हुए बोले, ‘‘आप यदि उस दिन न होते तो शायद मेरी जिंदगी भी बदतर हालत में होती.’’

‘‘नहीं सर. मैं तो सामने से गुजर रहा था…और मैं ने जो कुछ भी किया बस, मानवता के नाते किया है.’’

‘‘ऐसी जिंदगी भी किस काम की जो ताउम्र मोहताज बन कर काटनी पडे़. मैं तो अब किसी काम का नहीं रहा,’’ कहतेकहते वह रोने लगे तो उन की पत्नी आ कर उन के पास बैठ गईं.

माहौल को हलका करने के लिए मैं ने पूछा, ‘‘आप लोगों के लिए चायनाश्ता आदि ला दूं क्या?’’

सपना पति की तरफ देख कर बोलीं, ‘‘जब इन्होंने खाना नहीं खाया तो मैं कैसे मुंह लगा सकती हूं.’’

‘‘ये दकियानूसी बातें छोड़ो. जो होना था वह हो चुका. पी लो. सुबह से कुछ खाया भी तो नहीं,’’ वह बोले.

‘‘तो फिर मैं ला देता हूं,’’ कह कर मैं चला गया. उन के अलावा 1-2 और भी व्यक्ति वहां बैठे थे. थोड़ी देर में जब मैं वहां चाय ले कर पहुंचा तो वे सब धीरेधीरे सुबक रहे थे.

मैं ने थर्मस से सब के लिए चाय डाली और वितरित की. मैं ने शर्माजी को चाय देते हुए कहा, ‘‘आप को कोई परहेज तो बताया होगा.’’

‘‘कुछ भी नहीं. आधे शरीर के अलावा सबकुछ ठीक है. बस, इतना हलका खाना है कि पेट साफ रहे,’’ फिर पत्नी की तरफ देख कर कहने लगे, ‘‘इन को चाय के पैसे तो दे दो…पहले भी न जाने कितना…’’

‘‘क्यों शर्मिंदा करते हैं, सर. यह कोई इतनी बड़ी रकम तो है नहीं.’’

बातोंबातों में मैं ने अपना संक्षिप्त परिचय दिया और उन्होंने अपना. पता चला कि वह एक प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान में ऊंचे ओहदे पर हैं. कुछ माह पहले ही उन का तबादला इस शहर में हुआ था. मूल रूप से वह लखनऊ के रहने वाले हैं.

‘‘अब क्या करेंगे आप? वापस घर जाएंगे?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मैं वापस जा कर किसी के तरस का पात्र नहीं बनना चाहता. रिश्तेदारनातेदार और दोस्तों के पास रहने से तो अच्छा है कि यहीं पूरी जिंदगी काट दूं. नियमानुसार मैं विकलांग घोषित कर दिया जाऊंगा और सरकार मुझे नौकरी से रिटायर कर देगी.’’

‘‘पर पेंशन तो मिलेगी न?’’ मैं ने पूछा.

‘‘वह तो मिलेगी ही. मैं तो सपना से भी कह रहा था कि अब उसे कोई नौकरी कर लेनी चाहिए.’’

‘‘आप को यों अकेला छोड़ कर,’’ वह रोंआसी सी हो कर बोलीं, ‘‘जो ठीक से करवट भी नहीं बदल सकता है. हमेशा ही जिसे सहारे की जरूरत हो.’’

‘‘तो क्या तुम सारी उम्र मेरे साथ गांधारी की तरह पास बैठेबैठे गुजार दोगी. यहां रहोगी तो मुझे लाचार देखतेदेखते परेशान होगी. कहीं काम पर जाने लगोगी तो मन बहल जाएगा,’’ कह कर वह मेरी तरफ देखने लगे.

मैं वहां से जाने को हुआ तो शर्माजी बोले, ‘‘अच्छा, आते रहिएगा. मेरा मन भी बहल जाएगा.’’

दिन बीतते गए. इसी बीच मेरे संबंध अपनी पत्नी संगीता के साथ बद से बदतर होते चले गए. मैं लाख कोशिश करता कि उस से कोई बात न करूं पर उसे तो जैसे मेरी हर बात पर एतराज था. उस की मां की दखलंदाजी ने उसे और भी निर्भीक और बेबाक बना दिया था. मैं इतना सामर्थ्यवान भी नहीं था कि उस की हर इच्छा पूरी कर सकूं. यह मेरा एक ऐसा दर्द था जो किसी से बांटा भी नहीं जा सकता था.

एक दिन हमारे बडे़ साहब अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने मलयेशिया जाना चाहते थे. उन्होंने मुझे बुला कर पासपोर्ट बनवाने का काम सौंप दिया. मैं ने एम.जी. रोड पर एक एजेंट से बात की, जो ऐसे काम करवाता था. उस एजेंट ने बताया कि यदि मैं किसी राजपत्रित अधिकारी से फार्म साइन करवा दूं तो यह पासपोर्ट जल्दी बन सकता है. अचानक मुझे शर्माजी का ध्यान आया और मैं सारे फार्म ले कर उन के घर गया और अपनी समस्या रखी.

‘‘मैं तो अब रिटायर हो चुका हूं. इसलिए फार्म पर साइन नहीं कर सकता,’’ उन्होंने अपनी मजबूरी जतला दी.

-क्रमश:

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