कौमार्य का ये उपहार बढ़ा देगा सेक्स का मजा

कामिनी की शादी को 10 साल हो गए हैं. वह 2 बच्चों की मां है. पति बहुत अमीर हैं. कारोबार के सिलसिले में उन्हें अकसर विदेश जाना पड़ता है. कामिनी बेहद शौकीन तबीयत की है. उस पर जो धुन सवार हो जाए उसे पूरा कर के ही मानती है. कुछ अरसा पहले कामिनी को हाइमनोप्लास्टी (कौमार्य पुनर्प्राप्ति) के बारे में पता चला. पति 1 माह के लिए यूरोप दौरे पर थे. इसी दौरान उचित अवसर जान उस ने हाइमनोप्लास्टी करवा ली. इस संबंध में उस ने पूरी गोपनीयता बरती. सब कुछ सामान्य होने पर एक दिन उस ने पति से फोन पर कहा, ‘‘आप जैसे ही भारत लौटेंगे हम हनीमून ट्रिप पर स्विट्जरलैंड जाएंगे.’’

‘‘यह क्या मजाक है,’’ पति ने हंसते हुए कहा, ‘‘हमारी शादी को 10 साल हो गए हैं. इस उम्र में अब तुम मुझे किस के साथ हनीमून पर भेजना चाह रही हो?’’

कामिनी को ऐसे उत्तर की उम्मीद न थी, इसलिए तुनक कर बोली, ‘‘कैसी बातें करते हैं, आप? किसी और के साथ क्यों? हनीमून ट्रिप मेरे साथ होगा.’’

पति ठहाका लगाते हुए बोले, ‘‘क्यों बचकानी बातें कर रही हो?’’

‘‘मैं बचकानी बातें नहीं कर रही हूं. और हनीमून पर तो चलिए. एकदम प्योर वर्जिनिटी का आनंद उठाएंगे.’’

अंजलि कालेज के साथियों के साथ पिकनिक पर गोवा गई. दोस्त एकदूसरे से बेहद खुले हुए थे, अत: खूब मस्ती कर रहे थे. मगर इसी बीच अंजलि के साथ एक हादसा घट गया. पार्टी के दौरान उस के दोस्तों ने उस के ड्रिंक में नशीली दवा मिला दी. फिर क्या था, उसे नशे में कुछ पता नहीं चल रहा था कि उस के दोस्त उस के साथ क्या कर रहे हैं. उलटे नशे में होने पर वह उन का साथ दे रही थी. मगर जब नशा उतरा तो अपनी हालत देख कर उस के होश उड़ गए. पिकनिक से लौटने पर अंजलि ने सारी बात अपनी डाक्टर मम्मी को बताई. सुन कर वे बहुत दुखी हुईं. फिर उन्होंने बेटी को धैर्य बंधाया. पर अंजलि अंदर ही अंदर टूट चुकी थी. शीघ्र ही उस का विवाह होने वाला था. उसे वर्जिन न होने की टीस साल रही थी. मां उस की भावनाओं को समझती थीं. आखिर उन्होंने एक दिन बेटी की हाइमनोप्लास्टी करवा दी. इस से वह दोबारा वर्जिन हो गई और फिर उस का खोया आत्मविश्वास भी लौट आया.

करीब 30% से अधिक लड़कियों को प्रथम मिलन पर रक्तस्राव नहीं होता, जिस का अर्थ आमतौर पर यह लगाया जाता है कि लड़की का विवाहपूर्व कौमार्य भंग हो चुका है अथवा यों कहिए कि उस के विवाहपूर्व यौन संबंध रहे हैं. परिणामस्वरूप रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है. जहां तक पारंपरिक भारतीय समाज की सोच का सवाल है, तो यहां सब कुछ एकपक्षीय यानी पुरुष के पक्ष में है. पति चाहे खुद कितना भी दुराचारी क्यों न हो, वह अपेक्षा रखता है कि उस की होने वाली पत्नी शतप्रतिशत वर्जिन हो.

अपराधबोध से ग्रस्त

इस पुरुषप्रधान समाज की यह दकियानूसी सोच स्त्री पर इस कद्र हावी हो गई है कि वह भी अपनी कौमार्य को अपनी आबरू कह कर संबोधित करती है. जिस का मतलब औरत की इज्जत से है. यदि विवाह के समय उस के पास कौमार्य की पूंजी नहीं है तो वह अपराधबोध से ग्रस्त हो जाती है, भले ऐसा किसी हादसे के कारण हुआ हो. कौमार्य भंग होने का मतलब यह नहीं कि लड़की चरित्रहीन है. अब वह जमाना नहीं रहा जब लड़कियां घर की चारदीवारी में बंद रहती थीं और शादी हो कर गुडि़या की भांति ससुराल विदा हो जाती थीं. आज की लड़कियां स्कूलकालेज जाती हैं और लड़कों की तरह हर गतिविधि में हिस्सा लेती हैं. जिमनास्टिक, तैराकी, घुड़सवारी, स्कूटर, बाइक चलाते या फिर अन्य कोई शारीरिक श्रम के दौरान कब कौमार्य की झिल्ली अपना वजूद खो देती है, इस का लड़कियों को एहसास तक नहीं होता.

कई बार विवाह का वादा कर यौन संबंध बन जाते हैं, मगर बाद में दहेज या अन्य किसी कारण के चलते रिश्ता टूट जाता है. कई बार लड़कियां अंजलि जैसी स्थिति का भी शिकार बन जाती हैं और कौमार्य खो बैठती हैं. ऐसे में लड़की व उस के मांबाप के लिए यह हादसा गहरी चिंता का विषय बन जाता है. और जगह रिश्ता तय करने में वे कौमार्य भंग को मुख्य बाधा मानते हैं. लेकिन अब ऐसे मामलों में हाइमनोप्लास्टी के माध्यम से आशा की नई किरण नजर आने लगी है.

क्या है हाइमनोप्लास्टी

कामिनी जैसे शौकिया वर्जिनिटी हासिल करने के मामले बहुत कम होते हैं, क्योंकि इस प्रकार की महिलाएं ऐसी शल्य चिकित्सा महज इसलिए करवाती हैं ताकि एक बार फिर कौमार्य होने का लुत्फ उठाया जा सके. मगर हाइमनोप्लास्टी क्या है, यह जानना भी जरूरी है. यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिस में चिकित्सक कौमार्य झिल्ली जिसे हाइमन कहते हैं, का वैजाइना से टिशू ले कर पुनर्निर्माण कर देते हैं. इस में करीब क्व 60-70 हजार का खर्च आता है और उसी दिन मरीज को छुट्टी दे दी जाती है. कुछ दिनों तक मरीज को ऐंटीबायोटिक्स व अन्य दवाएं खानी पड़ती हैं.

बढ़ रहा है प्रचलन

शौकिया किस्म की शादीशुदा महिलाएं वैलेंटाइन डे और शादी की वर्षगांठ से कुछ समय पूर्व हाइमनोप्लास्टी करवाती हैं. लेकिन बारबार यह सर्जरी करवाने को डाक्टर बेहद नुकसानदेह बताते हैं. कौस्मैटिक सर्जन विक्रमजीत सिंह के अनुसार करीब 60 फीसदी मामलों में लड़कियां मांबाप के साथ सर्जरी के लिए आती हैं. उन में से ज्यादातर तो शादी की तारीख के हिसाब से समय तय कर सर्जरी करवाती हैं ताकि विवाह के समय वे बिलकुल फिट ऐंड फाइन हों. जिस तरह शादियों के सीजन में लोग शौपिंग से ले कर बैंडबाजे जैसी तैयारी की प्लानिंग करते हैं, उसी तरह शादी के लिए वर्जिनी फिट होने के उद्देश्य से डाक्टर से हाइमनोप्लास्टी का समय तय करते हैं. अकेले चंडीगढ़ में हर महीने करीब आधा दर्जन शल्य चिकित्सा होती है, जिस से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि पूरे देश में कितने पैमाने पर इस का प्रचलन हो गया है. चूंकि यह प्रक्रिया प्राय: गुपचुप होती है, इस के सही आंकड़े तो कुछ और ही होंगे.

क्या प्रतिबंध लगाना चाहिए

महिला कल्याण समिति की डाक्टर सरस्वती मनोहर हाइमनोप्लास्टी करवाए जाने को बहुत बुरा मानती हैं. उन का कहना है कि बेशक चिकित्सकों के अनुसार इस शल्य चिकित्सा का शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़ता हो, मगर वे महिलाओं द्वारा अपनाए जाने वाले इस विकल्प को केवल पुरुष के अहम का तुष्टीकरण ही मानती हैं. वे रोषपूर्वक पूछती हैं कि क्या पुरुष ऐसा कोई प्रमाण दे सकता है जिस से यह साबित हो कि वह विवाहपूर्व उस के किसी स्त्री से संबंध नहीं रहे हैं? डाक्टर सरस्वती की सलाह है कि सरकार को इसे रैग्युलेट करना चाहिए और ऐसी शल्य चिकित्सा से पहले संबंधित महिला व अभिभावकों की काउंसलिंग की जानी चाहिए. हालांकि वे यह भी मानती हैं कि सामाजिक बदनामी के दबाव में पीडि़त महिला व उस के मांबाप काउंसलिंग सहज ही स्वीकार नहीं करेंगे. मगर परिवार न्यायालय की भांति निजता व अपनत्व का भरोसा दिलवाए जाने पर ऐसा संभव हो सकता है. साथ ही, शौकिया तौर पर करवाई जाने वाली हाइमनोप्लास्टी को भी पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए.

मैं ने कई बार सैक्स किया है, जिससे मेरी योनी ढीली हो गई है, कोई उपचार बताएं जिससे इसे टाइट किया जा सके?

सवाल
मैं 21 वर्षीय युवती हूं. 2 महीनों के बाद मेरी शादी है. मैं अपनी एक बहुत बड़ी समस्या की वजह से बेहद परेशान हूं. शादी के लिए कोई उत्साह नहीं है. शादी के लिए इनकार नहीं कर सकती, क्योंकि घर वालों को दुखी नहीं करना चाहती. दरअसल, मैं ने अपने बौयफ्रैंड के साथ कई बार सैक्स किया है, जिस से मेरा यौनांग ढीला हो गया है. कोई घरेलू उपचार बताएं जिस से इसे कुछ टाइट किया जा सके?

जवाब
आप की जल्दी शादी होने वाली है, इसलिए अतीत की बातों को अपने मन से निकाल दें. आप के यौनांग में कोई विकार नहीं हुआ है, इसलिए किसी प्रकार का पूर्वाग्रह न पालें. आप ने कभी किसी से संबंध बनाए थे, इस बात का जिक्र किसी से न करें. यह समय व्यर्थ की बातें सोच कर परेशान होने का नहीं है वरन सुखद भविष्य की कल्पना करने का है.

मदर टेरेसा की बायोपिक का फर्स्ट लुक हुआ रिलीज

मदर टेरेसा की बायोपिक का फर्स्ट लुक आ गया है. मदर टेरेसा के जीवन पर प्रदीप शर्मा, नितिन मनमोहन, गिरीश जौहर और प्राची मनमोहन मिलकर यह बायोपिक बनाने वाले हैं. फिल्म की डायरेक्टर और राइटर सीमा उपाध्याय हैं.

आपको बता दें कि सीमा फिल्म की स्क्रिप्ट पर करीब तीन सालों से काम कर रही थीं. सीमा का कहना है कि वो उनकी जीवन के उन पहलुओं को सामने लाना चाहती हैं जिनके बारे में कम लोगों  को पता है. ये फिल्म दो घंटों की होगी. इस साल में सितंबर या अक्टूबर तक फिल्म की शूटिंग चालू होगी. कयास लगाए जा रहे हैं कि 2020 तक फिल्म रिलीज हो सकती है.

इससे पहले भी मदर टेरेसा पर दुनिया भर में फिल्में और डौक्सूमेंट्रीज बन चुकी हैं. इसमें खास तौर पर 1997 में बना टीवी शो मदर ‘टेरेसा इन द नेम औफ गौड्स पुअर’ था. वहीं 2003 में मदर टेरेसा औफ कलकत्ता और 2014 में अमेरिकन ड्रामा द लैटर्स बनाया गया था। जिसमें जूलियट स्टीवेन्सन ने मदर टेरेसा का रोल किया था.
मेसिडोनिया में जन्मी मदर टेरेसा 1929 में भारत आईं और यहां कई साल तक एक शिक्षक के रूप में काम करती रहीं. 1950 में कलकत्ता में उन्होंने मिशनरीज औफ चैरिटीज की स्थापना की, इसके बाद उन्हें भारतीय नागरिकता मिल गई. आगे चल कर 1979 में उन्हें नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

अनीता की अनीति

रात के 2 बजे थे. उस समय लोग गहरी नींद सो रहे थे, पर अनीता की आंखों से नींद कोसों दूर थी.वह उतनी रात को पड़ोस में रहने वाले जेठ कुलवंत सिंह का दरवाजा पीट रही थी. कुलवंत सिंह परिवार के साथ छत पर सोए हुए थे. गहरी नींद में होने की वजह से उन्हें अनीता की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी.

कुलवंत सिंह के बगल में भूरे का मकान है. अनीता की आवाज पर भूरे की आंखें खुल गईं तो उस ने कुलवंत को जगा कर कहा, ‘‘तुम्हारे छोटे भाई की पत्नी अनीता तुम्हें कितनी देर से आवाज दे रही है और तुम जैसे घोड़े बेच कर सो रहे हो.’’

इतनी रात को अनीता बुला रही है तो कोई इमरजेंसी होगी, यह सोच कर कुलवंत छत से नीचे आया तो अनीता उसे दरवाजे पर घबराई हुई मिली. कुलवंत ने उस से आवाज लगाने की वजह पूछी तो उस ने कहा, ‘‘तुम्हारे भैया बैड पर बेहोश पड़े हैं. उन्हें पता नहीं क्या हो गया है?’’

आवाज सुन कर कुलवंत की मां भी जाग गईं. वह भी दरवाजे पर आ गईं. दोनों अनीता के साथ उस के घर गए, जहां अनीता का पति रेबरन सिंह बैड पर था. मांबेटों ने रेबरन की नब्ज देखी, वह गायब थी. उस की सांसें थम चुकी थीं. यह देख कर मां चीख पड़ीं.सास को रोता देख अनीता भी रोने लगी. सभी इस बात से हैरान थे कि रेबरन ठीकठाक खाना खा कर सोया था. इस बीच उसे ऐसा क्या हो गया कि उस की मौत हो गई. यह बात 7-8 सितंबर, 2017 की रात की है.

रोने की आवाजें सुन कर पड़ोसी भी आ गए. लोगों ने लाश को गौर से देखा तो उस के गले पर रस्सी के बांधने जैसे निशान मिले. उस के साथ ही नाक और एक जांघ पर खरोंचों के निशान नजर आए. सुबह होने पर गांव के तमाम लोग अनीता के घर पर जुट गए. जितने मुंह, उतनी बातें हो रही थीं. गांव के ही किसी आदमी ने रेबरन की मौत की खबर कोतवाली बिलारी पुलिस को फोन कर के दे दी थी.

सूचना मिलते ही इंसपेक्टर राजवीर सिंह, स्योंडारा पुलिस चौकी के इंचार्ज राजाराम, कांस्टेबल संतोष यादव आदि गांव अहलादपुर करार में अनीता के घर पहुंच गए.

रेबरन सिंह के गले पर रस्सी के निशान देख कर राजवीर सिंह को मामला संदिग्ध लगा. उसी बीच सीओ अर्चना सिंह भी आ गईं. उन्होंने घर वालों से रेबरन की मौत के बारे में पूछा तो अनीता ने बताया कि रात को खाना खा कर वह ठीकठाक सोए थे, अचानक पता नहीं इन्हें क्या हो गया.

सीओ अर्चना सिंह को अनीता की बातों पर शक हो रहा था, इसलिए उन्होंने थानाप्रभारी से कहा कि वह अनीता पर निगाह रखें और लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दें. जरूरी काररवाई कर के पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

2 दिनों बाद पुलिस को रेबरन सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो पता चला कि उस की मौत गला घोंटने से हुई थी गला घोंटने से पहले उसे कोई जहरीली चीज खाने को दी गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मामला सीधे हत्या का था.

इस बारे में पुलिस ने मृतक की पत्नी अनीता से पूछताछ की. पहले तो वह अनभिज्ञता जाहिर करती रही, लेकिन जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि प्रेमी रवि के साथ मिल कर उसी ने उसे ठिकाने लगाया था. पति की हत्या की उस ने जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद की कोतवाली बिलारी से कोई 10 किलोमीटर दूर है गांव अहलादपुर करार. इसी गांव में प्यारेलाल का परिवार रहता था. उन के परिवार में एक बेटी के अलावा 4 बेटे सरदार सिंह, बदन सिंह, कुलवंत सिंह और रेबरन सिंह थे. रेबरन सिंह के अलावा तीनों भाइयों का विवाह हो चुका था. बदन सिंह का विवाह रामपुर जिले के थाना पटवाई के गांव हुसैनगंज पेपटिया निवासी नन्हे की सब से बड़ी बेटी शारदा के साथ हुआ था.

शादी के करीब साल भर बाद शारदा को जब बच्चा होने को हुआ तो उस ने कामधंधे में मदद के लिए अपनी बहन अनीता को अपने यहां बुला लिया. यह सन 2008 की बात है. अनीता के आने से शारदा निश्चिंत हो गई. घर के सारे काम अनीता पूरी जिम्मेदारी से कर रही थी. उस ने जच्चाबच्चा की देखभाल बहुत अच्छे से की.

शारदा का देवर रेबरन अनीता का हमउम्र था. दोनों के बीच जीजासाली का रिश्ता था, इसलिए हंसीमजाक चलती रहती थी. इसी हंसीमजाक में उन्हें एकदूसरे से प्यार हो गया. उन का प्यार इतना गहरा हो गया कि उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया.

शारदा की सेहत सामान्य हो गई तो अनीता अपने मांबाप के यहां चली गई. अनीता के जाने से दोनों प्रेमी बिछुड़ गए. मांबाप के यहां जा कर अनीता को रेबरन की याद सताती रहती थी तो रेबरन भी दिन भर उदास रहता था. उन की फोन पर बात जरूर हो जाती थी.

परिवार में रेबरन के विवाह की बात चली तो रेबरन ने साफ कह दिया कि वह शादी अनीता से ही करेगा. दोनों परिवारों के संबंध मधुर थे. शारदा का जीवन यहां हंसीखुशी से गुजर रहा था. उधर अनीता भी अपने घर वालों से रेबरन से विवाह करने की इच्छा जाहिर कर चुकी थी. लिहाजा दोनों परिवार इस रिश्ते पर सहमत हो गए. इस तरह 30 जून, 2010 को रेबरन और अनीता के प्यार की जीत हो गई.

दोनों के जीवन की गाड़ी पटरी पर ठीकठाक चल रही थी. शादी के बाद अनीता एक बेटी की मां बनी, जिस का नाम शालिनी रखा गया. करीब डेढ़ साल बाद उस ने एक बेटे को जन्म दिया.

रेबरन के नाम मात्र 2 बीघा खेती की जमीन थी, जिस में एक परिवार का गुजारा होना संभव नहीं था. इसलिए वह राजमिस्त्री का काम करने लगा. लेकिन उसे ठीक से काम नहीं मिलता था. महीने में उसे 10-12 दिन ही काम मिल पाता था, बाकी के दिन वह खाली रहता था. पति की कड़ी मेहनत के बावजूद अनीता की इच्छाएं दम तोड़ती नजर आ रही थीं.

खर्चे पूरे करने के लिए रेबरन ने घर पर एक परचून की दुकान खोल ली थी. जब उसे काम नहीं मिलता तो वह दुकान पर बैठता बाकी समय में अनीता दुकान संभालती थी. मानसिक तनाव की वजह से वह पत्नी को पहले जैसी तवज्जो नहीं दे पा रहा था, जिस से अनीता कुंठा का शिकार होने लगी थी.

अहलादपुर करार गांव में ही रामबहादुर का परिवार रहता था. उस के 3 बेटे और एक बेटी थी. उस का तीसरे नंबर का बेटा रवि इंटरमीडिएट पास कर के घर पर ही रहता था. वह थोड़ा चंचल स्वभाव का था. वह अकसर रेबरन की परचून की दुकान पर आता रहता था.

रेबरन के मकान के बाईं ओर रवि के ताऊ रामभरोसे रहते थे. रवि जब भी रेबरन की दुकान पर जाता, उस की पत्नी अनीता बैठी मिलती. वह उसे भाभी कहता था. इस नाते उस से हंसीमजाक भी कर लेता था. वह भी उस की बातों का बुरा नहीं मानती थी.

धीरेधीरे अनीता का झुकाव रवि की तरफ हो गया. अनुभवी अनीता ने अपनी लच्छेदार बातों से रवि को अपने जाल में फांस लिया. इस के बाद मौका मिलने पर उस ने रवि के साथ इच्छा भी पूरी कर ली. इस तरह दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए. उन्हें जब भी मौका मिलता, उस का वे भरपूर फायदा उठाते. उन दिनों रेबरन ने अपने घर की छत पर पन्नी और तिरपाल की एक झोपड़ी बना ली थी, जिस में वह रात को पत्नीबच्चों को ले कर सोता था.

इस के पीछे उस के मन में क्या मंशा थी, इसे कभी उस ने किसी पर जाहिर नहीं किया. अनीता को जब भी रवि के साथ रंगरलियां मनानी होती, वह रेबरन को दूध में नींद की गोलियां मिला कर दे दिया करती थी.

रवि को रात में रेबरन की गली में लोगों ने आतेजाते देखा जरूर, लेकिन किसी को शक इसलिए नहीं किया, क्योंकि बराबर में ही उस के ताऊ का मकान था. लोग समझते थे कि वह ताऊ के यहां आया होगा. इस तरह चोरीछिपे यह वासना का खेल चलता रहा.

कहते हैं, सौ दिन चोर के तो एक दिन शाह का भी होता है. ऐसा ही यहां भी हुआ. एक दिन रेबरन ने दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया. उस दिन शायद अनीता दूध में नींद की गोली डालना भूल गई थी.

रवि के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख कर उस का खून खौल उठा. रवि तो दरवाजा खोल कर निकल गया, पर अनीता लाज से मुंह छिपाए बैड पर पड़ी रही.

रेबरन ने डांटडपट ही नहीं की, बल्कि पत्नी को समझा कर इस अनैतिक खेल को यहीं खत्म करने की नसीहत दी. उस ने घर वालों को यह बात बताई और रवि के घर आने पर पाबंदी लगा दी.

निगरानी व बंदिशों से दोनों विचलित हो उठे. अब उन्हें रेबरन रास्ते का कांटा लगने लगा. इस कांटे को निकालने के लिए उन्होंने एक खतरनाक योजना बना डाली.

योजना के अनुसार, रात को बच्चों को सुला कर अनीता रेबरन को छत पर बनी झोपड़ी में बुला कर ले आई. कमरे में ला कर उस ने पत्नी धर्म निभाने के लिए रेबरन को तैयार किया. इस के बाद उस ने उसे दूध पिलाया.

दूध में जहर वह पहले ही मिला चुकी थी. दूध पीने के बाद रेबरन की हालत बिगड़ने लगी. वह उसे झोपड़ी से नीचे के कमरे में ले आई और डाक्टर को बुलाने की बात कहने लगी. योजना के अनुसार, अनीता ने अपने घर का सड़क की तरफ वाला गेट खुला छोड़ दिया था, जिस से रवि अंदर आ गया.

अनीता ने एक रस्सी का इंतजाम पहले से ही कर रखा था. रेबरन तब तक बेहोश हो चुका था. आते ही रवि ने रस्सी से उस का गला घोंट दिया. रेबरन ने अपनी ताकत के अनुसार विरोध किया. इसी विरोध में उस की नाक और जांघ पर खरोंचें आ गई थीं.

रेबरन मर चुका है, इस की पुष्टि कर के रवि अपने घर चला गया. कुछ देर बाद अनीता खुद को संभालते हुए बाहर आईं और जेठ के दरवाजे को पीटने लगी. किसी को शक न हो, रवि ने रेबरन के अंतिम संस्कार से ले कर हर काम में बढ़चढ़ कर भाग लिया.

अनीता से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के प्रेमी रवि को भी गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. पुलिस ने भादंवि की धारा 328 व 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर दोनों को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रणविजय सिंह की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

कथा लिखे जाने तक दोनों अभियुक्त जेल में थे. रेबरन के दोनों बच्चों की परवरिश का जिम्मा फिलहालतो मौसी शारदा ने संभाल रखा है. केस की जांच इंसपेक्टर राजवीर सिंह कर रहे हैं.   ?

सरकारी नौकरी और नौजवान

हमारे समाज में सरकारी नौकरी करने वाले लोगों को इज्जत की नजर से देखा जाता है. इस की वजह से सरकारी नौकरियों की तरफ नौजवानों का झुकाव ज्यादा है, पर बढ़ती आबादी और नौकरियों की कमी की वजह से सभी पढ़ेलिखे नौजवानों को सरकारी नौकरी मिलना मुमकिन नहीं  है. इस के बावजूद जब नौजवान अपने कैरियर के बारे में सोचते हैं तो उन्हें सिर्फ सरकारी नौकरी ही दिखाई पड़ती है. फार्म भरते समय भी ज्यादातर नौजवानों का कोई टारगेट नहीं होता. वे अफसर से ले कर क्लर्क और चपरासी की नौकरी तक के फार्म भरते हैं.

ये नौजवान सोच ही नहीं पाते हैं कि सरकारी नौकरी के अलावा भी रास्ते हैं. सरकारी नौकरी सभी को नहीं मिल सकती. अगर आंकड़ों के हिसाब से देखें तो सरकारी नौकरियां महज 2 फीसदी के करीब ही हैं.

सरकारी नौकरी की तरफ दौड़ रहे लोगों में से 2-3 फीसदी नौजवानों को ही नौकरी मिलेगी तो बाकी लोग कहां जाएंगे?

सरकारी नौकरी के फायदे

सरकारी नौकरी में जौब सिक्योरिटी के साथसाथ दूसरी बहुत सी सुविधाएं भी मिलती हैं. सरकारी नौकरी का मतलब है आरामदायक नौकरी. काम हो या न हो, तनख्वाह तो हर महीने मिलेगी ही. पद के हिसाब से ऊपरी कमाई भी.

देश की टौप सरकारी नौकरी में आईएएस है. एक आईएएस अफसर को अच्छी तनख्वाह के साथसाथ इज्जत भी मिलती है. इन अफसरों को मोटी तनख्वाह के साथसाथ सरकारी घर, गाड़ी, मुफ्त के सरकारी नौकर और भी कई तरह की दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं.

बिहार में कई जगहों पर पुल बनने के बाद लिंक रोड बनाने व एनटीपीसी थर्मल पावर बनाने में किसानों द्वारा भूमि अधिग्रहण मामले में जिले के पदाधिकारी द्वारा करोड़ों रुपए की गैरकानूनी कमाई खुलेआम की गई.

सरकारी नौकरी में कई महकमे और पद हैं. पद का अपना रुतबा होता है और काली कमाई पद के हिसाब से होती है. अगर पदाधिकारी को एक लाख रुपए की रिश्वत मिलती है तो उस के क्लर्क को भी 10,000 रुपए मिलेंगे. 100-200 रुपए चपरासी भी कमा लेंगे.

जिला लैवल के पदाधिकारी की अगर रिश्वत से कमाई हर महीने 5 लाख रुपए है तो बड़ा बाबू 80-90 हजार रुपए और चपरासी भी महीने में 10,000 रुपए कमा लेता है.

ब्लौक लैवल का पदाधिकारी अगर रिश्वत लेता है तो उस में जिला लैवल तक के पदाधिकारियों तक का हिस्सा पहुंचता है. जनवितरण प्रणाली, आंगनबाड़ी केंद्र, मिड डे मील योजना, मनरेगा वगैरह सभी महकमों में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि रिश्वत में भागीदारी नीचे से ले कर ऊपर तक के पदाधिकारियों तक है. दिखावे के लिए निगरानी विभाग कभीकभार कुछ पदाधिकारियों को पकड़ कर महज खानापूरी करता रहता है और आम लोगों को यह दिखाना चाहता है कि विभाग भ्रष्टाचार के प्रति सचेत है.

पेशकार खुलेआम जज के सामने नजराना लेते हैं. इस बात को देशभर के लोग बखूबी जानते हैं और इस की चर्चा आम बातचीत के दौरान लोग करते भी रहते हैं.

इज्जत में है बढ़ोतरी

सरकारी नौकरी में काम का दबाव कम रहता है. जवाबदेही उतनी नहीं रहती. काम हुआ तो भी ठीक, नहीं तो अगले दिन पर टाल देते हैं.

सरकारी नौकरी में आजादी है. आप के पास समय की कमी नहीं है. ड्यूटी के बाद आप के पास समय ही समय है. सरकारी नौकरी में साप्ताहिक छुट्टी के अलावा भी कई छुट्टियां होती हैं.

सरकारी नौकरी में प्रमोशन होने के साथ ही तनख्वाह में बढ़ोतरी के लिए समय तय है. इस के लिए अलग से कोई काम नहीं करना है. सरकारी नौकरी में कई तरह के भत्ते मिलते हैं. मैडिकल छुट्टी के साथसाथ पूरे महीने की तनख्वाह के साथसाथ चिकित्सीय भत्ता भी मिलता है. सरकारी नौकरी करने वाले लोगों को मोटी रकम की जरूरत होने पर सरकारी लोन कम ब्याज पर आसानी से मिल जाता है.

2 दोस्तों की कहानी

रितेश और दीपक दोनों दोस्त हैं. दोनों ने साथसाथ रह कर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की. दोनों रेलवे की तैयारी पटना में साथ रह कर करने लगे. 3 साल की तैयारी और कंपीटिशन में रितेश की नौकरी स्टेशन मास्टर के पद पर हो गई, जबकि दीपक काफी मेहतन करता रहा. 4 साल बीत गए, पर उस की नौकरी नहीं लगी.

दीपक की उम्र भी 27 साल के करीब पहुंच गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे? वह निराश हो कर अपने गांव आ गया और उस ने अपने गांव में सरकारी बैंक से लोन ले कर राइस मिल खोल ली.

दीपक की राइस मिल खूब चलने लगी. 5 साल में राइस मिल से पैसा कमा कर 2 ट्रक और अपने चलने के लिए गाड़ी खरीद ली.

पैक्स का चुनाव लड़ कर दीपक पैक्स अध्यक्ष से कौआपरेटिव का जिलाध्यक्ष तक बन गया. उस की आगे की योजना बतौर विधायक चुनाव लड़ने की है.

रितेश की नौकरी जब स्टेशन मास्टर में लगी थी तो उस के परिवार के साथसाथ गांव वाले भी उस की इज्जत करने लगे. उस की शादी में दहेज में भी मोटी रकम मिली.

दीपक जब पहले गांव आता था तो उसे लोग कहते थे कि 5 साल से तैयारी कर रहा है लेकिन इस की नौकरी नहीं लगी. अब उम्मीद नहीं है. परिवार और गांव वालों के उलाहनों से दीपक दुखी हो जाता था. लेकिन वह हताश नहीं हुआ और नई योजनाएं बना कर अपना राइस मिल का कारोबार खड़ा कर इस मुकाम तक जा पहुंचा.

सरकारी नौकरी ही क्यों

सरकारी नौकरी में मौज ही मौज दिखती है. सरकारी नौकरी मिलना बहुत मुश्किल है, लेकिन एक बार मिल गई तो 60 साल तक मौज ही मौज. समय से काम पर गए तो ठीक, देर से गए तो भी कोई बात नहीं. जरूरत पड़ने पर महीनों क्या सालों छुट्टी मिल जाती है.

अगर सरकारी नौकरी में आप ऊंचे पदाधिकारी हैं तो समझिए कि मुफ्त में नौकर. नीचे की पोस्ट वालों पर रोब जमा कर अपने घर के काम कराते हैं. रिश्तेदारों और दोस्तों में अलग पहचान और घमंड. रहने के लिए सभी तरह की सुविधाओं से लैस सरकारी क्वार्टर, मैडिकल सुविधा, लोन सुविधा. परिवार के साथ घूमने के लिए टूर सुविधा… न जाने क्याक्या.

और भी हैं रास्ते

जो लोग सरकारी नौकरी नहीं करते हैं, वे अपना कारोबार शुरू कर अच्छे मुकाम तक पहुंच सकते हैं. धीरू भाई अंबानी, टाटा, बिड़ला या दूसरे बड़े पूंजीपति और उद्योगपति कारोबार कर के ऊंचे शिखर तक पहुंचे हैं. इन लोगों ने बहुत सारे लोगों को रोजगार भी दिए हुए हैं. छोटा कारोबार कर के भी बहुत लोग सरकारी नौकरी करने वाले लोगों को मात दे रहे हैं.

इस के अलावा प्राइवेट नौकरी में भी अच्छी तनख्वाह और सुविधाएं दी जाती हैं. सालाना 50 लाख, 25 लाख रुपए कमाने वाले लोगों की तादाद इन कंपनियों में भी होती है.

आज का समय कौमर्शियल दौर का है. उस के लिए वर्क फोर्स की जरूरत है. हम उस वर्क फोर्स का हिस्सा बन कर अपने समाज को एक नई दिशा दे सकते हैं.

हर साल 2 करोड़ नौकरियों का लालच दे कर सत्ता में आई भाजपा सरकार पिछले साढ़े 4 साल में भी इतनी नौकरियां नहीं दे सकी. इस बीच लाखों की तादाद में नए बेरोजगार बढ़ गए. सब से बुरी मार खेती और लघु व घरेलू उद्योगों पर पड़ी. नोटबंदी और जीएसटी के चलते छोटेबड़े सभी कामधंधे प्रभावित हुए. पब्लिक सैक्टर हो या सरकारी, सभी में बुरी हालत हुई. हर जगह छंटनी हुई या अभी होगी.

यहां की ज्यादातर जनता गरीबी में जिंदगी गुजार रही है और अपने ऊपर आई मुसीबतों को तकदीर का नाम दे कर दिमागी बोझ को हलका करती है. धर्म से ले कर राजनीति तक तरहतरह के पाखंड फैले हुए हैं और ठग व बदमाश लोग उन की अगुआई कर रहे हैं. इन झमेलों से निकलने के लिए नई सोच के साथ बेहतर कोशिश करने की जरूरत है.

यह सुहागरात इम्पौसिबल: जल्दबाजी में शादी के नुकसान

रेटिंग:ढाई स्टार

किसी कहानी या नाटक को सिनेमा के परदे पर उतरना आसान नही होता. दिग्गज फिल्मकार भी इस तरह की फिल्म बनाते समय असफल हो जाते हैं. ऐसे में एक पन्ने की कहानी ‘‘नमक स्वाद अनुसार’’ पर नवोदित फिल्मकार अभिनव ठाकुर से बहुत ज्यादा उम्मीद लगाना जायज नही है. फिर भी अभिनव ठाकुर कुछ कमियों के बावजूद फिल्म की विषय वस्तु को ‘सुहागरात’ तक सीमित रखते हुए कुछ मुद्दों को उकेरने के साथ ही कुछ संदेश देने की भी कोशिश की हैं.

फिल्म की कहानी समस्तीपुर मे रह रहे सत्यप्रकाश (प्रताप सौरभ सिंह) के भाई पवन (प्रदीप शर्मा ) से शुरू होती है, जो कि अपने दोस्त के मोबाइल पर फिल्म ‘‘कभी कभी’’ देख रहा है. इस फिल्म के एक दृश्य पर पवन अपने दोस्त से कहता है कि उसके भाई के साथ भी ऐसा कुछ हुआ था. फिर वह अपने दोस्त को अपने भाई सत्यप्रकाश की कहानी सुनाता है. सत्यप्रकाश की शादी उसके परिवार की सहमति से उसके फूफा (आलोकनाथ पाठक) दिल्ली में पढ़ी लिखी देविका (प्रीतिका चैहान) से कराते हैं. यह प्रेम विवाह है नहीं, इसलिए सत्यप्रकाश और देविका की मुलाकात सुहागरात की रात्रि में ही होती है. सुहागरात के लिए जाते समय उसके फूफा उसे कुछ पाठ पढ़ाकर व एक तेल देकर भेजते हैं. गांव की पृष्ठभूमि और छोटे शहर में पले बढ़े सत्यप्रकाश औरतों की बड़ी इज्जत करते हैं. सुहागरात की रात्रि में जब देविका को दूध के गिलास के साथ कुछ औरतें सत्यप्रकाश के कमरे में छोड़ जाती है, तो देविका सहमी सी घूंघट निकाल कर पलंग पर बैठ जाती है.

सत्यप्रकाश देविका से प्यार जताते  हुए सुहागरात मनाने की बजाय देविका से बडे़ प्यार से कहता है कि गर्मी बहुत है, आप चाहें तो अपना घूंघट हटा सकती हैं. पर देविका घूंघट नहीं हटाती वह तो चाहती है कि सत्यप्रकाश अपने हाथों से उसका घूंघट हटाए. पर सत्यप्रकाश तो देविका से बात करते हुए कहता है कि उसकी सोच यह है कि शादी हो जाने से देविका उसकी जागीर नही हो गयी. वह एक दूसरे को समझना चाहते हैं इसलिए बातचीत करने का प्रस्ताव रखकर अपनी बात कहना शुरू करता है. वह बात को आगे बढ़ाते हुए अपने कालेज के दिनो की प्रेम कहानियां सुनाता है कि उसके मेघा,रोजी सहित चार लड़कियों से संबंध रहे हैं. हर लड़की की सुंदरता आदि का विस्तार से वर्णन करता है. सत्यप्रकाश बताता है कि किस तरह उसने जब रोजी का हाथ पकड़ा था तो रोजी ने चांटा जड़ते हुए कह दिया था कि वह उस तरह की लड़की नहीं है.

एक लड़की से उसने प्यार किया और बात शादी तक पहुंची पर वह उसे ठुकरा कर चली गयी थी  जिससे उसके पुरूष मन को ठेस लगी थी. उसका ईगो हर्ट हुआ था. इसलिए जब मेघा से उसे प्यार हुआ तो उसने मेघा के संग शारीरिक संबंध बनाकर उसे अपनी जिंदगी से दूर कर दिया था जबकि मेघा तो उसके पैरों पर पड़कर गिड़गिड़ा रही थी. देविका,सत्यप्रकाश की बातें चुपचाप सुनती रहती है. फिर सत्यप्रकाश देविका से सवाल कर बैठता है कि वह तो दिल्ली में पढ़ी है जहां लड़के व लड़कियां एक साथ पढ़ते हैं. तो उसका भी कोई प्रेमी रहा होगा. काफी कुरेदने पर झुंझलाकर देविका कहती है कि ‘मेरा संबंध अपने ड्राइवर के साथ रहा है. तब वह सवाल कर बैठता है कि ड्राइवर के साथ उसका संबंध कितना था? उसने उसे कहां कहां छुआ था.. अंत में वह देविका को ‘टैक्सी’ कह देता है. तब देविका अपना घूंघट हटाने के साथ ही सारे जेवर उतार देती है और सोने का जतन करने लगती है. पर सत्यप्रकाश कहां चुप रहने वाला? तब देविका उठकर रात में ही सड़क पर चली जाती है और सुहागरात नही मनाती. पर सत्यप्रकाश व पवन उसे वापस ले आते हैं. मगर सुबह जब सभी शादी के जश्न के बाद थके हुए सो रहे थे थे तभी देविका अपना बैग उठाकर चली जाती है.

सत्यप्रकाश उसके पैर पकड़कर उसे घर न छोड़ने के लिए कहता है. पर देविका पर इसका असर नहीं पड़ता. छह माह बाद पता चलता है कि देविका की शादी एक मैच्योर युवक देवेश(नयन रूपल) से होती है. सुहागरात के वक्त देवेश देश व समाज की प्रगति की बात करते हुए उसे उपहार देता है. उपहार लेकर जब देविका उसकी प्रशंसा करती है तब देवेश, देविका को ‘किस’ करना चाहता है पर देविका उसे रोक देती है. इस पर देवेश कहता है कि उसके साथ उसकी शादी हुई है और वह उसकी पत्नी है. तब देविका कहती है कि,‘शादी होने से वह उसकी जागीर नहीं हो गयी.’फिर देविका बिना सुहागरात मनाए ही बैग लेकर वहां से भी चली जाती है. दूसरे दिन समुद्र किनारे वह सिगरेट पीते हुए नजर आती है.

एक पन्ने की कहानी ‘‘नमक स्वाद अनुसार’’ पर बने नाटक ‘‘सुहागरात’’ को देखकर अभिनव ठाकुर ने हास्य फिल्म‘ ‘यह सुहाग रात इम्पौसिबल’’ बनाने का निर्णय लिया. उन्होंने इस फिल्म में कई मुद्दे उठाए हैं. मसलन-शादी एक इंसान नही बल्कि समाज तय करता है. शादी व्याह महज गुड्डे गुड़िया का खेल नहीं. गलत शादी नही करनी चाहिए. जब तक आप शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार न हो शादी न करें. सुहागरात बातें करने के लिए नही होती. इसी तरह के मुद्दों के साथ फिल्मकार ने शादी को लेकर लोगों के मन में जो गलत धारणाएं है उन्हे खत्म कर उनकी सोच बदलने का प्रयास किया है. मगर कमजोर पटकथा के चलते वह इसमें सफल कम हुए हैं. यदि पटकथा पर थोड़ी मेहनत ज्यादा की जाती तो यह एक उम्दा फिल्म बन सकती थी. फिल्म में सुहागरात के समय सत्यप्रकाश ओर देविका के बीच की बातचीत को और अधिक रोचक बनाया जा सकता था.

इसके अलावा हास्य के नाम पर फूहड़ता ही परोसी गयी है. इतना ही नही फिल्म की कहानी की पृष्ठभूमि उत्तर भारत वह भी खास कर बिहार है, जबकि फिल्म को गुजरात में फिल्माया गया है तो निर्देशक व फिल्म के कला निर्देशक की गलती के चलते फिल्म के कुछ दृश्यों में गुजराती भाषा में लिखे हुए विज्ञापन व नाम पट नजर आते हैं. इस गलती की वजह फिल्म का बजट भी हो सकता है. फिल्म बहुत कम बजट में बनायी गयी है. इसके अलावा यदि फिल्म में कुछ नामचीन कलाकार होते तो फिल्मकार का मकसद पूरे होने में मदद मिल जाती.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो फिल्म में सभी नवोदित कलाकार हैं. मगर सत्य प्रकाश के किरदार को जिस तरह से प्रताप सौरभ सिंह ने जीवंतता प्रदान की है उसे देखकर यह अहसास ही नहीं होता कि यह उनकी पहली फिल्म है. पवन के किरदार में प्रदीप शर्मा ने भी ठीक ठाक अभिनय किया है. मगर देविका के किरदार में प्रीतिका चैहाण काफी निराश करती हैं. उनके चेहरे पर कोई भाव ही नही आते. एकदम सपाट चेहरा… उन्हे यदि अभिनय के क्षेत्र मे आगे बढ़ना है तो काफी मेहनत करने की जरुरत है.

बदलाः रहस्य रोमांच से भरपूर

रेटिंग: तीन स्टार

2017 की स्पैनिश फिल्म ‘‘द इनविजिबल गेस्ट’’ की हिंदी रीमेक फिल्म ‘‘बदला’’ एक बेहतरीन पटकथा पर बनी फिल्म होते हुए भी आम दर्शकों के लिए नहीं है. इस फिल्म में 2016 की सफल फिल्म ‘पिंक’ की जोड़ी अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू मुख्य भूमिका में हैं. अपराध, रहस्य व रोमांचक फिल्म का निर्माण करना सदैव बहुत कठिन होता है, मगर फिल्मकार सुजाय घोष एक बेहतरीन फिल्म बनाने में कामाब रहे हैं.

फिल्म की कहानी फ्रांस की है, जहां नैना सेठी (तापसी पन्नू) एक सफल बिजनेस वूमेन है.परिवार में उसके पति सुनिल व बेटी है. पर फोटोग्राफर अर्जुन (टोनी लुक) के साथ उसके अवैध संबंध है. कहानी शुरू होती है नैना पर अर्जुन की हत्या का आरोप लगने से. नैना की गिरफ्तारी हो जाती है. पर वकील जिम्मी(मानव कौल) किसी तरह नैना को जमानत पर छुड़ा लेता है. मगर अदालत में वे बाइज्जत बरी हो जाए, इसके लिए जिम्मी की सलाह पर नैना एडवोकेट बादल गुप्ता(अमिताभ बच्चन) की मदद लेती हैं और बादल गुप्ता, नैना से मिलने तय समय से पहले ही पहुंच जाते हैं. फिर बादल गुप्ता, नैना से कहते हैं कि वे सब कुछ उन्हें सच सच बताएं. नैना कहानी बताना शुरू करती हैं. नैना की कहानी के दो रूप सामने आते हैं. बहरहाल नैना की कहानी शुरू होती है अर्जुन के साथ एक शहर में कुछ दिन बिताने के बाद वापसी से.

जब नैना सेठी व अर्जुन वापस आ रहे होते हैं,तो रास्ते में एक कार से उनकी कार की टक्कर हो जाती है. पता चलता है कि उस कार को चला रहे युवक सनी सिंह की मौत हो गयी है. पर वह इसकी सूचना पुलिस को नहीं देते. नैना,सनी को उसी की कार की डिक्की में डालने के बाद उसकी कार को ले जाकर नदी में डुबा देती है. जबकि नैना की कार को अर्जुन लेकर आगे बढ़ना चाहता है, पर कार बंद हो चुकी है. पीछे से आ रही एक कार रूकती है, जिसमें निर्मल सिंह और उनकी पत्नी रानी कौर(अमृता सिंह) हैं. यूं तो दोनो बहुत अच्छे अभिनेता हैं. मगर निर्मल सिंह एक होटल में नौकरी करते हैं और वह बहुत अच्छे मैकेनिक हैं. रानी कौर के कहने पर निर्मल,नैना की कार को अपनी गाड़ी के साथ अपने घर ले जाते हैं. जहां पर वह उनकी कार को ठीक कर देते हैं.रानी कौर के घर से विदा लेने से पहले अर्जुन को सनी का मोबाइल रानी को देना पड़ता है. फिर नैना व अर्जुन मिलते हैं और अपने अपने घर चले जाते हैं. नैना अपने बिजनेस में मग्न हो जाती है. पर सनी के न मिलने से सनी की मां रानी कौर उसकी तलाश शुरू करती हैं. रानी कौर पुलिस की मदद लेती हैं. और शक अर्जुन से होते हुए नैना पर जाता है. रानी कौर ने जो हुलिया बताया उससे पुलिस ने अर्जुन का स्केच बनवा लिया है. पर पूछताछ में नैना व उनके वकील जिम्मी यह साबित कर देते हैं कि नैना उस दिन पेरिस में थी. उसकी कार किसी ने चुरा ली थी. कार में मौजूद इंसान अर्जुन को वह नही पहचानती. उसके बाद नैना अपने बिजनेस व परिवार में मग्न हो जाती है. नैना की कंपनी जापान की एक कंपनी के साथ समझौता करके एशिया की सबसे बड़ी कंपनी बन जाती है. इधर रानी कौर को पुलिस पर यकीन नहीं होता और वह नैना का पीछा करना शुरू कर देती हैं.

इधर नैना को पुरस्कार मिलता है. जिस दिन नैना को पुरस्कार मिलता है, उसी दिन पुरस्कार वितरण के बाद चल रही पार्टी में रानी कौर,नैना से मिलती है और उससे कहती है कि वह बताए कि उसका बेटा सनी कहां है? रानी कौर बहाने से नैना से लाइटर मांगती है, यह वही लाइटर होता है जिसे रानी कौर को अर्जुन ने अपनी बहन का लाइटर बताया था. रानी कौर उस लाइटर को पानी में  फेक देती है और नैना से कहती है कि उसे पता है कि तुम बहुत ताकतवर हो पर ताकतवर लोग भूल जाते हैं कि सच छिप नहीं सकता.रानी कौर उसे चुनौती देकर चली जाती है.

उसके बाद कहानी में कई मोड़ आते हैं. एक तरफ रानी कौर अपने बेटे सनी का सच जानने के लिए चालें चल रही है तो दूसरी तरफ नैना अपने आपको बचाने के लिए चालें चलती है. इतना ही नही खुद को बचाने के लिए नैना अर्जुन का कत्ल कर सारा आरोप रानी कौर व उनके पति निर्मल पर लगाने की भूमिका बना चुकी होती हैं पर वह बादल गुप्ता के सामने सच स्वीकार कर चुकी होती है. इस आस में कि बादल गुप्ता तो उसे बाइज्जत बरी करा ही देंगे.पर सारा सच जानने के बाद बादल गुप्ता चले जाते हैं और फिर जब दुबारा दरवाजे की घंटी बजती है तो पता चलता है कि एडवोकेट बादल तो अब आए हैं इससे पहले एडवोकेट बादल का रूप धर कर खुद निर्मल आए थे और वह जिस पेन से लिखने का नाटक कर रहे थे उस पेन से सारा सबूत नैना की आवाज में रानी कौर के पास रिकार्ड हो रहा था.रानी कौर ने पुलिस को फोन भी कर दिया.

फिल्म ‘‘बादल’ ’की सबसे बड़ी खासियत इसकी कसी हुई पटकथा है. लेखक ने बहुत ही चतुराई से इसके दृष्यों को रचा है.बतौर निर्देषक सुजाय घोष अपनी छाप छोड़ जाते हैं. मगर सत्तर प्रतिशत फिल्म अपराध को छिपाने के लिए र्सिफ देा पात्रों के बीच बातचीत पर है जिसके चलते फिल्म काफी शुष्क हो जाती है.‘‘बादल’’ उन दर्शकों के सिर के उपर से गुजरती है, जो अपना दिमाग घर पर रखकर महज मनोरंजन के लिए फिल्म देखने जाते हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो ‘पिंक’, ‘मुल्क’ व ‘मनमर्जियां’ के बाद एक बार फिर तापसी पन्नू ने नैना के किरदार में जानदार अभिनय किया है. अमिताभ बच्चन तो महान कलाकार हैं. उनके अभिनय का करिश्मा अपना जादू जगा ही जाता है. छोटी सी भूमिका में मानव कौल भी अपनी छाप छोड़ जाते हैं. अर्जुन के किरदार में टोनी लुक के पास करने को कुछ खास है ही नहीं. वैसे यह पूरी फिल्म नैना यानी कि तापसी पन्नू और अमिताभ बच्चन यानी कि बादल गुप्ता पर ही केंद्रित है. लेकिन अमृता सिंह अपने अभिनय से लोगों के दिलो दिमाग में अपनी छाप अंकित कर जाती हैं.

स्कौटलैंड में फिल्मायी गयी इस फिल्म के कैमरामैन अनिक मुखोपाध्याय की भी तारीफ की ही जानी चाहिए उन्होंने प्रकृति के सौंदर्य को भी अपने कैमरे में कैद किया है.

दो घंटे की अवधि वाली फिल्म ‘‘बदला’’ का निर्माण गौरी खान, सुनीर खेत्रपाल, अक्षय पुरी व गौरव वर्मा ने किया है. फिल्म के निर्देशक व लेखक सुजाय घोष और राज वसंत, कहानीकार ओरीओल पौलो, संगीतकार अनुपम रौय, अमाल मलिक, क्लिंटन सिरीजो,  कैमरामैन अनिक मुखोपाध्याय व कलाकार हैं- अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, अमृता सिंह, टोनी लुक व अन्य.

इस भोजपुरी गाने पर शाहरूख खान हुए रोमांटिक

भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ का गाना ‘प्रेम पियाला’ रिलीज किया गया है. इसे वर्ल्डवाइड रिकौर्ड्स भोजपुरी ने अपने औफिशियल यूट्यूब अकाउंट पर अपलोड किया है. इस गाने के लिरिक्स ‘प्रेम पियाला खाली बा, भर जाए द अखियां के दरिया में डूबके तर जाए द’ से शुरू होता है.

इस गाने को खूब पसंद किया जा रहा है. ‘प्रेम पियाला’ में निरहुआ का अंदाज काफी जुदा दिखाई दे रहा है. इसमें वह बौलीवुड के किंग शाहरुख खान की तरह न सिर्फ पोज देते हुए दिखाई दिए, बल्कि रोमांटिक अंदाज में भी उनकी छवि देखने को मिली. निरहुआ के साथ इस गाने में एक्ट्रेस नीता धुनगना दिखाई दे रही हैं. दोनों की जोड़ी बेहद शानदार दिखाई दे रही है. निरहुआ ने जहां व्हाइट शर्ट और चश्मा लगा रखा है वहीं एक्ट्रेस ने पिंक ड्रेस पहना है.

फोन बना दोधारी तलवार

पूनम का मूड सुबह से ही ठीक नहीं था. बच्चों को स्कूल भेजने का भी उस का मन नहीं हो रहा था. पर बच्चों को स्कूल भेजना जरूरी था, इसलिए किसी तरह उस ने बच्चों को तैयार कर के स्कूल भेज दिया. पूनम के चेहरे पर एक अजीब सा खौफ था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी परेशानी किस से कहे. वह सिर पकड़ कर सोफे पर बैठ गई. पूनम का मूड खराब देख कर उस के पति विनय ने हंसते हुए पूछा, ‘‘डार्लिंग, तुम कुछ परेशान सी लग रही हो. आखिर बात क्या है?’’

पूनम ने पलकें उठा कर पति को देखा. फिर उस की आंखों से आंसू बहने लगे. वह फूटफूट कर इस तरह रोने लगी, जैसे गहरे सदमे में हो.

विनय ने करीब आ कर उसे सीने से लगा लिया और उस के आंसुओं को पोंछते हुए कहा, ‘‘क्या हुआ पूनम, तुम मुझ से नाराज हो क्या? क्या तुम्हें मेरी कोई बात बुरी लग गई?’’

‘‘नहीं,’’ पूनम सुबकते हुए बोली.

‘‘तो फिर क्या बात है, जो तुम इस तरह रो रही हो?’’ विनय ने हमदर्दी दिखाई.

पति का प्यार मिलते ही पूनम ने मोबाइल की ओर इशारा कर के सुबकते हुए बोली, ‘‘मेरी परेशानी का कारण यह मोबाइल है.’’

विनय ने हैरत से एक नजर मेज पर रखे मोबाइल फोन पर डाली, उस के बाद पत्नी से मुखातिब हुआ, ‘‘मैं समझा नहीं, इस मोबाइल से तुम्हारी परेशानी का क्या संबंध है? साफसाफ बताओ, तुम कहना क्या चाहती हो?’’

पूनम मेज से मोबाइल उठा कर पति के हाथ में देते हुए बोली, ‘‘आप खुद ही देख लो. इस के मैसेज बौक्स में क्या लिखा है?’’

विनय की उत्सुकता बढ़ गई. उस ने फटाफट फोन के मैसेज का इनबौक्स खोल कर देखा. जैसे ही उस ने मैसेज पढ़ा, उस के चेहरे पर एक साथ कई रंग आएगए.

मैसेज में लिखा था, ‘मेरी जान, तुम ने मुझे अपने रूप का दीवाना बना दिया है. मैं ने जब से तुम्हें देखा है, चैन से जी नहीं पा रहा हूं. मैं तुम्हें जब भी विनय के साथ देखता हूं, मेरा खून खौल जाता है. आखिर तुम उस के साथ जिंदगी कैसे गुजार रही हो. मैं ने जिस दिन से तुम्हें देखा है, मेरी आंखों से नींद उड़ चुकी है.’

मैसेज पढ़ कर विनय को गुस्सा आ गया. फोन को मेज पर रख कर उस ने पत्नी से कहा, ‘‘ये सब क्या है?’’

‘‘मैं कुछ नहीं जानती.’’ पूनम दबी जुबान से बोली.

विनय कुछ देर सोचता रहा, फिर उस ने पत्नी की आंखें में झांका. उसे लगा कि पत्नी सच बोल रही है, क्योंकि अगर वह उस के साथ गेम खेल रही होती तो इस तरह परेशानी और रुआंसी नहीं होती. उसे लगा कि वाकई कोई उस की पत्नी को परेशान कर रहा है.

उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर के कल्याणपुर थाने का एक मोहल्ला है शारदानगर. इसी मोहल्ले के इंद्रपुरी में विनय झा अपने परिवार के साथ रहता था. उस का अपना आलीशान मकान था, जिस में सभी भौतिक सुखसुविधाएं थीं. उस का हौजरी का व्यवसाय था. इस से उसे अच्छीखासी आमदनी होती थी, जिस से उस की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत थी.

विनय झा इस से पहले अपने भाइयों के साथ दर्शनपुरवा में रहता था. वहां उस का अपना छोटा सा कारखाना था. उस का परिवार काफी दबंग किस्म का था. दबंगई से ही इन लोगों ने पैसा कमाया और फिर उसी पैसे से हौजरी का काम शुरू किया. व्यवसाय अच्छा चलने लगा तो विनय ने इंद्रपुरी में मकान बनवा लिया.

पूनम से विनय की शादी कुछ साल पहले हुई थी. पूनम बेहद खूबसूरत थी. पहली ही नजर में विनय उस का दीवाना हो गया था. उस की दीवानगी पूनम को भी भा गई. दोनों की पसंद के बाद उन की शादी हो गई. दोनों ही अपने गृहस्थ जीवन में खुश थे. 8 साल के अंतराल में पूनम 2 बच्चों की मां बन गई.

ससुराल में सभी भौतिक सुखसुविधाएं थीं. उसे किसी भी चीज की कमी नहीं थी. पति भी चाहने वाला मिला था. सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक पूनम को अश्लील मैसेज तथा प्रेमप्रदर्शन वाले फोन आने लगे. पूनम पति का गुस्सा जानती थी, अत: पहले तो उस ने पति को कुछ नहीं बताया, पर जब अति हो गई तो मजबूरी में बताना पड़ा.

विनय झा ने जब पत्नी के फोन में आए हुए मैसेज पढ़े तो उस की आंखों में खून उतर आया. जिस फोन नंबर से मैसेज आए थे, विनय ने उस नंबर पर काल की तो फोन रिसीव नहीं किया गया. इस पर विनय गुस्से में बड़बड़ाया, ‘‘कमीने…तू एक बार सामने आ जा. अगर तुझे जिंदा दफन न कर दिया तो मेरा नाम विनय नहीं.’’

गुस्से में कांपते विनय ने पूनम से पूछा, ‘‘क्या वह तुम्हें फोन भी करता है?’’

‘‘हां,’’ पूनम ने सिर हिलाया.

‘‘क्या कहता है?’’

‘‘नाजायज संबंध बनाने को कहता है. अब कैसे बताऊं आप को, इस ने तो मेरी जान ही सुखा दी है. लो, आप दूसरे मैसेज भी पढ़ लो. इन से पता चल जाएगा कि उस की मानसिकता क्या है.’’

‘‘अच्छा, यह बताओ कि वह तुम्हें फोन कब करता है या मैसेज कब भेजता है?’’ विनय ने पूछा.

‘‘जब आप घर पर नहीं होते, तभी उस के फोन आते हैं. जब आप घर पर होते हो तो न फोन आता है न मैसेज.’’ वह बोली.

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि वह मुझ पर निगाह रखता है. उसे मेरे घर जानेआने का वक्त भी मालूम है.’’ कहते हुए विनय ने मैसेज बौक्स खोल कर दूसरे मैसेज भी पढ़े. एक मैसेज तो बहुत जुनूनी था, ‘‘तुम मुझ से क्यों नहीं मिलतीं? रात को सपने में तो खूब आती हो. अपने गोरे बदन को मेरे बदन से सटा कर प्यार करती हो. आह जान, तुम कितनी प्यारी हो. एक बार मुझ से साक्षात मिल कर मेरी जन्मों की… नहीं तो समझ लेना मैं तुम्हारी चौखट पर आ कर जान दे दूंगा. अभी तो मैं इसलिए चुप हूं कि तुम्हें रुसवा नहीं करना चाहता.’’

मैसेज पढ़ कर विनय की मुट्ठियां भिंच गईं, ‘‘कमीने, तेरी प्यास तो मैं बुझाऊंगा. तू जान क्या देगा, मैं ही तेरी जान ले लूंगा.’’

पति का रूप देख कर पूनम का कलेजा कांप उठा. उसे लगा कि उस ने पति को बता कर कहीं गलती तो नहीं कर दी. विनय ने डरीसहमी पत्नी को मोबाइल देते हुए समझाया, ‘‘अब जब उस का फोन आए तो उस से बात करना. मीठीमीठी बातें कर के उस का नाम व पता हासिल कर लेना. इस के बाद मैं उस के सिर से प्यार का भूत उतार दूंगा.’’

पति की बात पर सहमति जताते हुए पूनम ने हामी भर दी.

एक दिन विनय जैसे ही घर से निकला, पूनम के मोबाइल पर उस का फोन आ गया. पूनम के हैलो कहते ही वह बोला, ‘‘पूनम, तुम मुझे भूल गई, लेकिन मैं तुम्हें नहीं भूला और न भूलूंगा. याद है, हम दोनों की पहली मुलाकात कब और कहां हुई थी?’’

पूनम अपने दिमाग पर जोर डाल कर कुछ याद करने की कोशिश करने लगी. तभी उस ने कहा, ‘‘2 साल पहले, जब मैं तुम्हारे घर फर्नीचर बनाने आया था. याद है, उस समय मैं तुम्हारे इर्दगिर्द रहा करता था. तुम्हारी खूबसूरती को निहारता रहता था. तुम इतरातीइठलाती होंठों पर मुसकान बिखेरती इधर से उधर निकल जाती थी और मैं तड़पता रह जाता था.’’

‘‘अच्छा, तब से तुम मेरे दीवाने हो. पागल, तब प्यार का इजहार क्यों नहीं किया? अच्छा, तुम्हारा नाम मुझे याद नहीं आ रहा, अपने बारे में थोड़ा बताओ न.’’ पूनम खिलखिला कर हंसी.

‘‘हाय मेरी जान, तुम हंसती हो तो मेरे दिल में घंटियां सी बज उठती हैं. सो स्वीट यू आर.’’ उधर से रोमांटिक स्वर में कहा गया, ‘‘मैं तुम्हारा दीवाना विजय यादव बोल रहा हूं.’’

विजय यादव का नाम सुनते ही पूनम चौंकी. अब उसे उस की शक्लसूरत भी याद आ गई. इस के बाद पूनम ने उसे समझाया, ‘‘देखो विजय, अब बहुत हो गया. मैं किसी की पत्नी हूं, तुम्हें ऐसे मैसेज भेजते हुए शर्म आनी चाहिए. मैं कह देती हूं कि आइंदा मुझे न फोन करना और न मैसेज करना, वरना अंजाम अच्छा नहीं होगा.’’

पूनम ने फोन काटा ही था कि उस का पति विनय आ गया. उस ने पूछा, ‘‘किस का फोन था?’’

‘‘उसी का जो फोन करता है और अश्लील मैसेज भेजता है. आज मैं ने जान लिया कि वह कौन है.’’ पूनम ने विनय को बताया, ‘‘विजय यादव जो अपने यहां फर्नीचर बनाने आया था, वही यह सब कर रहा है. वैसे मैं ने उसे ठीक से समझा दिया है, शायद अब वह ऐसी हरकत न करे.’’

विजय यादव उर्फ इंद्रबहादुर यादव के पिता रामकरन यादव रावतपुर क्षेत्र के केशवनगर में रहते थे. रामकरन फील्डगन फैक्ट्री में काम करते थे. उन के 3 बेटों में इंद्रबहादुर मंझला था. वह बजरंग दल का नेता था और प्रौपर्टी तथा फर्नीचर का व्यवसाय करता था. ब्रह्मदेव चौराहा पर उस की फर्नीचर की दुकान थी. दुकान पर करीब आधा दर्जन से ज्यादा कारीगर काम करते थे.

इंद्रबहादुर आर्थिक रूप से संपन्न होने के साथ दबंग भी था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटियां थीं. वह बजरंग दल का जिला संयोजक था. उस की एक बड़ी खराब आदत थी उस का अय्याश होना. घर में खूबसूरत बीवी होने के बावजूद वह इधरउधर मुंह मारता रहता था.

करीब 2 साल पहले इंद्रबहादुर इंद्रपुरी मेंविनय झा के घर फर्नीचर बनाने आया था. उस समय जब उस ने खूबसूरत पूनम को देखा तो वह उस पर मर मिटा. उस ने उसी समय उसे अपने दिल में बसा लिया. उस के बाद वह किसी न किसी बहाने उस के आगेपीछे मंडराने लगा. किसी बहाने से उस ने पूनम का फोन नंबर ले लिया. फिर वह उसे फोन करने लगा और अश्लील मैसेज भेजने लगा.

पूनम के समझाने के बाद वाकई कुछ दिनों तक इंद्रबहादुर ने उसे न तो फोन किया और न ही मैसेज भेजे. इस से पूनम को तसल्ली हुई. पर 15-20 दिनों बाद उस की यह खुशी परेशानी में बदल गई. वह फिर से उसे फोन करने लगा.

एक रोज तो विजय ने हद कर दी. उस ने फोन पर पूनम से कहा कि अब उस से रहा नहीं जाता. उस की तड़प बढ़ती जा रही है. वह उस से मिल कर अपने अरमान पूरे करना चाहता है. गुरुदेव चौराहा आ कर मिलो. उस ने यह भी कहा कि अगर वह नहीं आई तो वह खुद उस के घर आ जाएगा.

इंद्रबहादुर की धमकी से पूनम डर गई. वह नहीं चाहती थी कि वह उस के घर आए. क्योंकि वह पति व परिवार के अन्य सदस्यों की निगाहों में गिरना नहीं चाहती थी. इसलिए वह उस से मिलने गुरुदेव चौराहे पर पहुंच गई. वहां वह उस का इंतजार कर रहा था. पूनम ने उस से घरपरिवार की इज्जत की भीख मांगी, लेकिन वह नहीं पसीजा. वह एकांत में मिलने का दबाव बनाता रहा.

इस के बाद तो यह सिलसिला ही बन गया. इंद्रबहादुर जब बुलाता, पूनम डर के मारे उस से मिलने पहुंच जाती. इस मुलाकात की पति व परिवार के किसी अन्य सदस्य को भनक तक न लगती. एक दिन तो इंद्रबहादुर ने पूनम को जहरीला पदार्थ देते हुए कहा, ‘‘मेरी जान, तुम इसे अपने पति को खाने की किसी चीज में मिला कर खिला देना. कांटा निकल जाने पर हम दोनों मौज से रहेंगे.’’

पूनम जहरीला पदार्थ ले कर घर आ गई. उस ने उस जहर को पति को तो नहीं दिया, लेकिन खुद उस का कुछ अंश दूध में मिला कर पी गई. जहर ने असर दिखाना शुरू किया तो वह तड़पने लगी. विनय उसे तुरंत अस्पताल ले गया, जिस से पूनम की जान बच गई. विनय ने पूनम से जहर खाने की बाबत पूछा तो उस ने सारी सच्चाई बता दी.

इस के बाद पूनम को ले कर इंद्रबहादुर और विनय में झगड़ा होने लगा. दोनों एकदूसरे को देख लेने की धमकी देने लगे. इसी झगड़े में एक दिन आमनासामना होने पर इंद्रबहादुर ने छपेड़ा पुलिया पर विनय के पैर में गोली मार दी. विनय जख्मी हो कर गिर पड़ा. उसे अस्पताल ले जाया गया. वहां किसी तरह विनय की जान बच गई.

विनय ने थाना कल्याणपुर में इंद्रबहादुर के खिलाफ भादंवि की धारा 307 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. विनय ने घटना के पीछे की असली बात को छिपा लिया. उस ने लेनदेन तथा महिला कर्मचारी को छेड़ने का मामला बताया. पुलिस ने भी अपनी विवेचना में पूनम का जिक्र नहीं किया. पुलिस ने इंद्रबहादुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

लगभग 10 महीने तक इंद्रबहादुर जेल में रहा. इस के बाद 9 अक्तूबर, 2017 को वह कानपुर जेल से जमानत पर रिहा हुआ. जेल से बाहर आने के बाद वह फिर पूनम से मिलने की कोशिश करने लगा. लेकिन इस बार पूनम की ससुराल वाले सतर्क थे. उन्होंने पूनम का मोबाइल फोन बंद करा दिया था और घर पर कड़ी निगरानी रख रहे थे.

काफी मशक्कत के बाद भी जब वह पूनम तक नहीं पहुंच पाया, तब उस ने एक षडयंत्र रचा.

षडयंत्र के तहत उस ने एक लड़की को सेल्सगर्ल बना कर विनय के घर भेजा और उस के जरिए पूनम को अपने नाम से लिया गया सिमकार्ड और मोबाइल फोन भिजवा दिया. पूनम के पास फोन पहुंचा तो विजय एक बार फिर पूनम के संपर्क में आ गया.

अब वह दिन में कईकई बार पूनम को फोन करने लगा. दोनों के बीच घंटों बातचीत होने लगी. बातचीत में विजय पूनम से एकांत में मिलने की बात कहता था. पूनम ने उसे उस की शादीशुदा जिंदगी और परिवार की इज्जत का हवाला दिया तो वह पूनम को बरगलाने की कोशिश करने लगा.

उस ने पूनम को समझाया कि वह अपने पति विनय की कार में चरस, स्मैक और तमंचा रख दे. यह सब चीजें वह उसे मुहैया करा देगा. इस के बाद वह पुलिस को फोन कर के विनय को पकड़वा देगा. विनय के जेल जाने के बाद दोनों आराम से साथ रहेंगे.

पूनम ने इंद्रबहादुर द्वारा फोन देने तथा बातचीत करने की जानकारी पति विनय को नहीं दी थी. दरअसल पूनम डर रही थी कि पति को बताने से वह भड़क जाएगा और उस से झगड़ा करेगा. इस झगड़े और मारपीट में कहीं उस के पति की जान न चली जाए. क्योंकि इंद्रबहादुर गोली मार कर विनय को पहले भी ट्रेलर दिखा चुका है.

इधर पति का साथ छोड़ने और अवैध संबंध बनाने की बात जब पूनम ने नहीं मानी तो इंद्रबहादुर ने एक और षडयंत्र रचा. उस ने पूनम को बदनाम करने के लिए रिचा झा और राधे झा नाम की फरजी आईडी से फेसबुक एकाउंट बना लिया. इस के बाद इंद्रबहादुर उर्फ विजय यादव ने पूनम के साथ अपनी अश्लील फोटो फेसबुक पर अपलोड कर इस की जानकारी उस के पति विनय, परिवार के अन्य लोगों तथा रिश्तेदारों को दे दी, ताकि वह बदनाम हो जाए.

विनय झा ने जब पूनम के साथ इंद्रबहादुर की अश्लील फोटो फेसबुक पर देखी तो उस का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा. उस ने पूनम से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने सारी सच्चाई विनय को बता दी.

सच्चाई जानने के बाद विनय ने इस गंभीर समस्या पर अपने बड़े भाई विनोद झा और भतीजे सत्यम उर्फ विक्की से बात की. विनोद व सत्यम भी फेसबुक पर पूनम अश्लील फोटो देख चुके थे. वे दोनों भी इस समस्या का निदान चाहते थे.

गहन मंथन के बाद पूनम, विनय, विनोद तथा सत्यम उर्फ विक्की ने इंद्रबहादुर उर्फ विजय यादव की हत्या की योजना बनाई. हत्या की योजना में विनय ने अपने मामा के साले के लड़के अनुपम को भी शामिल कर लिया.

अनुपम गाजियाबाद का रहने वाला था. उस का आपराधिक रिकौर्ड था. वह पूर्वांचल के एक बड़े माफिया के संपर्क में भी रहा था. इस के बाद अनुपम ने पूनम, विनय, विनोद व सत्यम उर्फ विक्की के साथ विजय की हत्या की अंतिम रूपरेखा तैयार की और हत्या के लिए एक चापड़ खरीद कर रख लिया. इस के बाद अनुपम वापस गाजियाबाद चला गया.

24 सितंबर, 2017 को अनुपम अपने एक अन्य साथी के साथ कानपुर आया और विनय झा के घर पर रुका. उस ने इंद्रबहादुर की हत्या के संबंध में एक बार फिर पूनम, विनोद व सत्यम उर्फ विक्की से विचारविमर्श किया. इस के बाद वह उन के साथ वह जगह देखने गया, जहां इंद्रबहादुर उर्फ विजय यादव को षडयंत्र के तहत बुलाना था.

शाम पौने 6 बजे पूनम झा ने योजना के तहत इंद्रबहादुर को फोन किया. उस ने उसी मोबाइल से बात की, जो उस ने पूनम को भिजवाया था.

फोन पर पूनम ने उस से कहा कि वह पति विनय को फंसा कर जेल भिजवा कर उस के साथ रहने को तैयार है, लेकिन इस से पहले वह उस की सारी योजना समझना चाहती है, इसलिए वह उस से मिलने अरमापुर थाने के पीछे मजार के पास आ जाए. चरस, स्मैक व असलहा भी साथ ले आए, ताकि मौका देख कर वह उस सामान को पति की गाड़ी में रख सके.

पूनम की बातों में फंस कर इंद्रबहादुर उर्फ विजय यादव अपनी बोलेरो गाड़ी से अरमापुर थाने के पीछे पहुंच गया. यह सुनसान इलाका है. वहां पूनम व उस का पति तथा अन्य साथी पहले से मौजूद थे.

इंद्रबहादुर पूनम से बात करने लगा. उसी समय अनुपम ने रेंच से विजय के सिर पर पीछे से वार कर दिया. विजय लड़खड़ा कर जमीन पर गिरा तो पूनम के पति विनय झा, जेठ विनोद झा, भतीजे सत्यम उर्फ विक्की तथा अनुपम ने उसे दबोच लिया.

उसी समय पूनम विजय की छाती पर सवार हो गई और बोली, ‘‘कमीने, तूने मेरी और मेरे परिवार की इज्जत नीलाम कर बदनाम किया है. आज तुझे तेरे पापों की सजा दे कर रहूंगी.’’ कहते हुए पूनम ने चापड़ से विजय की गरदन पर वार कर दिया.

गरदन पर गहरा घाव बना और खून बहने लगा. इस के बाद विनय ने चापड़ से कई वार किए. इस के बाद वे सब उसे मरा समझ कर वहां से भाग निकले. चापड़ उन्होंने पास की झाड़ी में छिपा दिया.

इंद्रबहादुर गंभीर घायलावस्था में पड़ा कराह रहा था. कुछ समय बाद उधर से एक राहगीर निकला तो इंद्रबहादुर ने आवाज दे कर उसे रोक लिया. उस ने राहगीर को अपने बड़े भाई वीरबहादुर यादव का नंबर दे कर कहा कि वह फोन कर के उसे उस के घायल होने की सूचना दे दे. उस राहगीर ने वीरबहादुर को सूचना दे दी.

सूचना पाते ही वीरबहादुर अपने साथियों के साथ वहां पहुंच गया. गंभीर रूप से घायल इंद्रबहादुर ने अपने बड़े भाई को बता दिया कि उस की यह हालत पूनम झा, उस के पति विनोद, भतीजे सत्यम उर्फ विक्की तथा रिश्तेदार अनुपम व उस के साथी ने की है. यह बता कर विजय बेहोश हो गया. वीरबहादुर ने भाई विजय यादव के बयान की मोबाइल पर वीडियो बना ली थी.

वीरबहादुर अपने घायल भाई इंद्रबहादुर को साथियों के साथ हैलट अस्पताल ले गया. पर उस की हालत गंभीर बनी हुई थी, इसलिए उसे वहां से रीजेंसी अस्पताल भेज दिया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. बजरंग दल के नेता इंद्रबहादुर की हत्या की खबर फैली तो हड़कंप मच गया.

उस के सैकड़ों समर्थक अस्पताल पहुंच गए. एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा को खबर लगी तो वह भी रीजेंसी अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने मृतक के परिजनों व समर्थकों को आश्वासन दिया कि हत्यारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

मीणा ने अरमापुर थानाप्रभारी समीर गुप्ता को आदेश दिया कि वह शव को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाएं तथा रिपोर्ट दर्ज कर अभियुक्तों के खिलाफ सख्त काररवाई करें. मीणा ने घटनास्थल का भी निरीक्षण किया और पोस्टमार्टम हाउस व अस्पताल के बाहर भारी पुलिस फोर्स भी तैनात कर दिया.

एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा का आदेश पाते ही अरमापुर थानाप्रभारी समीर गुप्ता ने मृतक विजय यादव के भाई वीरबहादुर यादव से घटना के संबंध में बात की. उस ने भाई के मरने से पहले रिकौर्ड किया वीडियो उन्हें सौंप दिया.

वीरबहादुर की तहरीर पर पुलिस ने भादंवि की धारा 302 के तहत पूनम झा, उस के पति विनय, जेठ विनोद झा, भतीजे सत्यम उर्फ विक्की, रिश्तेदार अनुपम तथा उस के साथी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

चूंकि हत्या का यह मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी ने एक पुलिस टीम का गठन किया, जिस में अरमापुर थानाप्रभारी समीर गुप्ता, क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर मनोज मिश्रा, क्राइम ब्रांच प्रभारी विनोद मिश्रा, सर्विलांस सेल प्रभारी देवी सिंह, कांस्टेबल चंदन कुमार गौड़, देवेंद्र कुमार, भूपेंद्र कुमार, धर्मेंद्र, ललित, राहुल कुमार तथा महिला कांस्टेबल पूजा को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने ताबड़तोड़ छापे मार कर 25 नवंबर की दोपहर पूनम झा, उस के पति विनय झा, जेठ विनोद झा तथा भतीजे सत्यम उर्फ विक्की को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर उन से पूछताछ की गई.

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी खुद को बेकसूर बताते रहे, लेकिन जब पुलिस ने पूनम झा के मोबाइल की काल डिटेल्स खंगाली तो उस में इंद्रबहादुर से घंटों बातचीत होने और घटना से पहले भी इंद्रबहादुर से बातचीत होने का रिकौर्ड सामने आ गया.

इस के बाद सख्ती करने पर सभी आरोपी टूट गए और हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. उन की निशानदेही पर झाडि़यों में छिपाया गया चापड़ तथा पूनम ने अपनी साड़ी बरामद करा दी, जो उस ने हत्या के समय पहनी थी.

पुलिस टीम ने सभी आरोपियों को एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा के सामने पेश किया. मीणा ने आननफानन प्रैस कौन्फ्रैंस बुला कर पत्रकारों के समक्ष घटना का खुलासा कर दिया. आरोपी विनय ने पत्रकारों को बताया कि इंद्रबहादुर जबरन उस की पत्नी के साथ संबंध बनाना चाहता था.

इस के लिए वह पूनम पर दबाव बना रहा था. वह पूनम की मार्फत उसे तथा उस के परिवार को गलत धंधे में भी फंसाना चाहता था.

पूनम जब तैयार नहीं हुई तो उस ने फरजी फेसबुक आईडी बना कर पूनम को बदनाम किया. इसी के बाद उस ने विजय की हत्या की योजना बनाई और उसे मौत की नींद सुला दिया.

पुलिस ने 26 नवंबर, 2017 को सभी अभियुक्तों को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक उन की जमानत स्वीकृत नहीं हुई थी. अभियुक्त अनुपम व उस का साथी फरार था. पुलिस उन की गिरफ्तारी का प्रयास कर रही थी.

 -कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

इश्क में फना एक और प्रेमी

1 अगस्त, 2017 को राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर के थाना सदर पुलिस को निर्माणाधीन सूरतगढ़-हनुमानगढ़ रोड पर नेतेवाला पर बाईपास पर एक युवक की लाश पड़ी होने की सूचना मिली.

इस सूचना पर थाना सदर के थानाप्रभारी कुलदीप वालिया, एसआई चंद्रजीत सिंह, बलवंत कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे ही गए थे, एसपी हरेंद्र महावर, एएसपी भरतराज, डीएसपी (सिटी) तुलसीदास राजपुरोहित भी थानाप्रभारी की सूचना पर पहुंच गए थे.  पुलिस अधिकारियों के साथ ही फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड की टीम भी घटनास्थल पर आ गई थी. फोरैंसिक टीम का काम खत्म हो गया तो पुलिस ने हत्यारों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्ते की मदद ली. लेकिन इस से पुलिस को कोई मदद नहीं मिल सकी.

डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम का काम निपट गया तो पुलिस ने लाश और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया. लाश का सिर बुरी तरह से कुचला हुआ था, लेकिन देखने से ही लग रहा था कि यह दुर्घटना का मामला नहीं था. मृतक की हत्या कर उस के सिर पर कई बार किसी वाहन का पहिया चढ़ाया गया था, इसलिए सिर एकदम सड़क में चिपक गया था.

ऐसा शायद हत्यारे ने पहचान मिटाने के लिए नहीं किया था, बल्कि उस की इस हरकत से साफ लग रहा था कि वह मृतक से काफी नफरत करता था. मृतक जो कपड़े पहने था, वे पूरी तरह सुरक्षित थे. पुलिस ने उस के कपड़ों की तलाशी ली कि शायद कपड़ों से ही कुछ मिल जाए, जिस से उस की शिनाख्त हो सके.

पुलिस ने मृतक के कपड़ों की तलाशी ली तो पैंट की जेब से एक पर्स मिला, जिस में कुछ रुपयों के अलावा एक आईकार्ड मिला. वह आईकार्ड मृतक का ही था. उस पर उस का नाम विनोद बेनीवाल लिखा था. वह हरियाणा के जिला सिरसा के ऐलनाबाद के सिविल अस्पताल में लैब टेक्नीशियन था.

इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि मृतक विनोद बेनीवाल सिरसा का रहने वाला होगा. पुलिस ने पर्स और उस में मिला सामान कब्जे में ले कर घटनास्थल की औपचारिक काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दिया.

इस के बाद थाने आ कर मुकदमा दर्ज कर के मामले की जांच शुरू कर दी. चूंकि मृतक की जेब से सिरसा के सिविल अस्पताल का आईकार्ड मिला था, इसलिए पुलिस की टीम सिरसा पहुंच गई. वहां की पुलिस को साथ ले कर पुलिस टीम सिविल अस्पताल पहुंची, जहां आईकार्ड दिखा कर मृतका के बारे में पूछताछ शुरू की.

इस पूछताछ में पता चला कि विनोद 31 जुलाई, 2017 के बाद से ड्यूटी पर नहीं आ रहा था. पुलिस ने जब बताया कि उस की हत्या हो चुकी है तो उस के साथ काम करने वाले हैरान रह गए. अस्पताल से विनोद के घर का पता और फोन नंबर मिल गया. वह थाना राणिया के गांव बालासर का रहने वाला था.

श्रीगंगानगर से गई पुलिस टीम थाना राणिया पुलिस की मदद से विनोद बेनीवाल के घर पहुंची. घर वालों से विनोद के बारे में पूछताछ की गई तो पता चला कि वह 31 जुलाई, 2017 को ड्यूटी पर गया तो लौट कर नहीं आया. उस का मोबाइल भी बंद है. पुलिस ने जब उस की हत्या हो जाने की बात बताई तो घर में कोहराम मच गया.

पुलिस ने घर वालों से किसी से दुश्मनी या किसी लड़की से प्रेमसंबंध के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि न तो उन्हें विनोद से किसी की दुश्मनी के बारे में पता है, न प्रेमसंबंध के बारे में. पुलिस टीम विनोद के घर वालों के साथ श्रीगंगानगर वापस आ गई. अब तक विनोद का पोस्टमार्टम हो चुका था. पुलिस ने लाश उस के घर वालों को सौंप दी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, विनोद की हत्या गोली मार कर की गई थी. इस का मतलब पहले विनोद को गोली मारी गई थी, वह सड़क पर गिर पड़ा तो उस के सिर पर गाड़ी का पहिया चढ़ा कर कुचल दिया गया था. पहिया सिर पर एक बार नहीं, कई बार चढ़ाया गया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पूरी तरह स्पष्ट हो गया था कि यह दुर्घटना का नहीं, हत्या का मामला था. घटनास्थल से पुलिस को ऐसा कोई सुराग नहीं मिला था, जिस से पुलिस को हत्यारे तक पहुंचने में मदद मिलती.

जांच आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने विनोद बेनीवाल के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर उस का अध्ययन किया तो उस में पुलिस को 2 नंबर ऐसे मिले, जिन पर संदेह हुआ. पुलिस ने दोनों नंबरों के बारे में पता किया तो उन में से एक नंबर दीपक चौधरी उर्फ दीपक मलिक का था तो दूसरा नंबर इंदुबाला का था.

थानाप्रभारी कुलदीप वालिया को 4 अगस्त को उन के मुखबिर से उन्हें जो जानकारी मिली उस के अनुसार विनोद बेनीवाल की हत्या हरियाणा के जिला भिवानी के चरखीदादरी के नौरंगाबास के रहने वाले दीपक चौधरी उर्फ दीपक मलिक ने की थी.

मुखबिर की इस सूचना से साफ हो गया कि मृतक की काल डिटेल्स से दीपक चौधरी का जो नंबर मिला था, वह हत्यारे का ही था. मुखबिर ने यह भी बताया था कि विनोद की हत्या प्रेमसंबंध की वजह से हुई थी. विनोद जिस इंदुबाला को प्रेम करता था, दीपक भी उसी को प्यार करता था. इंदुबाला की ही वजह से विनोद की हत्या हुई थी. अब पुलिस दीपक चौधरी की तलाश में लग गई.

दीपक की तलाश में पुलिस लगातार छापे मारती रही, पर उस का कुछ पता नहीं चला. पुलिस उस के साथ इंदुबाला की भी तलाश में लगी थी. दीपक तो नहीं मिला, लेकिन 12वें दिन पुलिस ने सूरतगढ़ से इंदुबाला को गिरफ्तार कर लिया. उसे थाने ला कर पूछताछ की गई तो उस ने बिना कुछ छिपाए सारी बात सचसच बता दी.

इंदुबाला के बताए अनुसार, विनोद की हत्या दीपक चौधरी उर्फ दीपक मलिक ने की थी. हत्या के समय वह भी उस के साथ थी. पुलिस ने इंदुबाला के बयान के आधार पर अज्ञात की जगह इंदुबाला और दीपक चौधरी को नामजद कर इंदुबाला को अदालत में पेश कर विस्तार से पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की तो अदालत ने उसे 4 दिनों की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया.

रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने हत्या से जुड़े कुछ सबूत तो जुटाए ही, दीपक के ठिकाने के बारे में भी पूछताछ की. इंदुबाला ने दीपक के जो ठिकाने बताए थे, पुलिस ने वहां छापे मारे, लेकिन वह नहीं मिला. आखिर रिमांड अवधि खत्म होने पर पुलिस ने इंदुबाला को फिर से अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

इंदुबाला की गिरफ्तारी की सूचना दीपक को मिल गई थी. प्रेमिका की गिरफ्तारी से वह पागल सा हो उठा था. उस ने बौखला कर फेसबुक पर सीओ (सिटी) तुलसीदास पुरोहित के नाम संदेश लिखा, ‘मेरी सीओ साहब से न तो कोई दुश्मनी है, न दोस्ती है. हां, उन 3 पुलिस वालों ने मेरी प्रेमिका के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया, इसलिए उन्हें इस का अंजाम भुगतना पड़ेगा.’

फेसबुक पर डाले गए इस स्टेटस पर एक पुलिस अधिकारी ने कमेंट किया, ‘दीपक, तुम सरेंडर कर दो, तुम्हारे लिए यही ठीक रहेगा.’

इस के जवाब में दीपक ने फेसबुक पर हथियार और इंदुबाला की फोटो डाल कर लिखा, ‘श्रीगंगानगर पुलिस, ध्यान से सुनो. मैं इसे हद से ज्यादा प्यार करता हूं. 3 सिपाहियों ने मेरे इस प्यार के साथ अच्छा नहीं किया. पुलिस ने किसी गलत आदमी को फंसाया है. सब को पता है कि जो गलत करता है, उस के साथ भी गलत होता है.

‘पुलिस वालों को पूछताछ का अधिकार है, लेकिन बुराभला कहने का नहीं. पुलिस इन्वैस्टीगेशन के लिए टौर्चर कर सकती है, लेकिन किसी के साथ बदतमीजी नहीं कर सकती, गलत शब्दों का उपयोग कर बेइज्जती नहीं कर सकती. ओके माइंड इट. गलत करने वाले से बदला लिया जाएगा. वह चाहे शैतान हो या जानवर या पुलिस, समय आने पर मैं सब को बता दूंगा. वह भी गिनेचुने दिनों के अंदर. जस्ट वेट एंड वाच.’

पुलिस को दीपक चौधरी की तलाश थी, लेकिन लाख कोशिश के बाद भी वह पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका. पुलिस को इंदुबाला से जो जानकारी मिली थी, उस के अनुसार प्रेम त्रिकोण में विनोद बेनीवाल की हत्या की जो कहानी प्रकाश में आई, वह इस प्रकार थी—

23 साल की इंदुबाला सूरतगढ़ में वाटर वर्क्स में नौकरी करने वाले भादरराम कुलडि़या  की बेटी थी. वह श्रीगंगानगर के ऐलनाबाद में नर्सिंग का कोर्स कर रही थी. सिविल अस्पताल में इंटर्नशिप के दौरान उस का परिचय विनोद बेनीवाल से हुआ. वह वहां लैब टेक्नीशियन की ट्रेनिंग कर रहा था.

बाद में यही जानपहचान दोस्ती में और फिर प्यार में बदल गई. विनोद और इंदुबाला एकदूसरे को दिल की गहराइयों से चाहने लगे. प्यार को मुकाम देने के लिए दोनों ने शादी का भी फैसला कर लिया. लेकिन जब उन्होंने घर वालों से बात की तो दोनों के ही घर वालों ने इस शादी के लिए मना कर दिया. दोनों ही घर वालों के खिलाफ जा कर शादी नहीं करना चाहते थे, इसलिए घर वालों के मानसम्मान के लिए उन्होंने अपने दिलों पर पत्थर रख लिया.

यह 2 साल पहले की बात है. इंदुबाला जीएनएम की ट्रेनिंग के लिए देहरादून चली गई तो विनोद बेनीवाल की हरियाणा के सिरसा में सिविल अस्पताल में लैब टेक्नीशियन की नौकरी लग गई. इस तरह दोनों के रास्ते अलगअलग हो गए. दोनों भले ही अलग हो गए थे, लेकिन वे एकदूसरे को प्यार अब भी करते थे. उन की फोन पर बातें भी होती रहती थीं.

देहरादून में इंदुबाला की मुलाकात हरियाणा के जिला भिवानी के थाना चरखीदादरी के गांव नौरंगाबास के रहने वाले दीपक चौधरी उर्फ दीपक मलिक से हुई. दोनों में पहले जानपहचान हुई, जो जल्दी ही दोस्ती में बदल गई. दीपक से दोस्ती होने के बाद इंदुबाला विनोद बेनीवाल को भूल सी गई.

क्योंकि इंदुबाला को दीपक विनोद की अपेक्षा ज्यादा मालदार लगा था, इसलिए वह उस की ओर आकर्षित होती चली गई. दीपक ने भी उसे दिल की रानी बना लिया. वह देहरादून में अपनी कैंसर पीडि़त मां का इलाज करा रहा था.

जैसा कहा जाता है कि लोग अपनों से ही हारते हैं, वैसा ही इंदुबाला के घर वालों के साथ भी हुआ. भादरराम को बेटी के इस नए प्रेमप्रसंग के बारे में पता चला तो सिर पर हाथ रख कर बैठ गए. इंदुबाला ने साफ कह दिया था कि वह दीपक चौधरी से शादी करने जा रही है.

पुलिस के अनुसार, इंदुबाला के घर वालों को न विनोद पसंद था और न ही दीपक. इस के बावजूद इंदुबाला दीपक के साथ रहने ही नहीं लगी बल्कि, चरखीदादरी स्थित उस के घर भी आनेजाने लगी. यही नहीं, उस ने सूरतगढ़ रोड पर स्थित नर्सिंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के पास ही होमलैंड सिटी में दीपक को किराए का मकान दिला दिया था, जिस में वह दीपक के साथ रहने लगी थी.

मजे की बात यह थी कि इंदुबाला दीपक के बारे में ज्यादा कुछ जानती नहीं थी. लेकिन जब उसे दीपक की सच्चाई का पता चली तो वह दंग रह गई. दीपक मलिक शराब तस्कर ही नहीं, शातिर अपराधी था. उस पर तमाम मुकदमे चल रहे थे. इस तरह इंदुबाला जिस दलदल में फंस गई थी, वहां से निकलना आसान नहीं था. क्योंकि दीपक उसे आसानी से छोड़ने वाला नहीं था. अगर वह उस से पीछा छुड़ाती तो वह उस के घर वालों को नुकसान पहुंचा सकता था, इसलिए उस ने चुप रहने में ही भलाई समझी.

दीपक शातिर तो था ही, इसलिए उस ने इंदुबाला के अतीत में झांकने की कोशिश की. वह सीधे इंदुबाला से उस के बारे में पूछ नहीं सकता था. वह बताती भी नहीं, इसलिए उस ने इंदुबाला को कुछ इस तरह अपनी बातों से प्रभावित किया कि उस ने विनोद के बारे में सब कुछ बता दिया.

इंदुबाला के मुंह से उस के पुराने प्रेमी के बारे में सुन कर दीपक अंदर ही अंदर जल उठा. उसे लगा कि इंदुबाला अब भी विनोद से मिलतीजुलती होगी, क्योंकि वह उस का पहला प्रेम था. उस के रहते इंदुबाला किसी और से मिलेजुले, यह दीपक को बरदाश्त नहीं था. वह उस की है और उसी की रहेगी.

शातिर अपराधी दीपक का सोचना था कि अगर उस की प्रेमिका की ओर किसी ने देखा भी तो वह उस की आंखें फोड़ देगा. फिर विनोद ने तो उस की प्रेमिका से प्रेम ही नहीं किया, बल्कि उस के साथ उस के संबंध भी रहे हैं. ऐसे आदमी को इस दुनिया में रहने का कोई हक नहीं है. बस, यहीं से उस ने विनोद को खत्म करने का मन बना लिया.

दीपक ने होशियारी से इंदुबाला से विनोद बेनीवाल का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया. इस के बाद वह विनोद से बातें ही नहीं करने लगा, बल्कि दोस्ती भी कर ली. दोस्ती होने के बाद दीपक ने विनोद से उस की किसी गर्लफ्रैंड के बारे में पूछा तो उस ने इंदुबाला के बारे में बता दिया. दीपक यही जानना चाहता था.

विनोद को क्या पता था कि दीपक यह सब क्यों पूछ रहा है. विनोद से पूरी बात जान कर दीपक ने विनोद से साफ कह दिया कि इंदुबाला अब उस की अमानत है और वह उस के साथ है. वह उस की जिंदगी है. वह उस से शादी करने जा रहा है, इसलिए वह उस की तरफ गलती से भी नहीं देखेगा. अगर उस ने ऐसा किया तो वह उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा.

विनोद ने कह दिया था कि अब वह इंदुबाला से कोई मतलब नहीं रखेगा. लेकिन दीपक को विश्वास नहीं हुआ. उसे लगा कि दोनों अब भी फोन पर बातें ही नहीं करते होंगे, बल्कि मिलते भी होंगे. सच्चाई जानने के लिए उस ने इंदुबाला को विश्वास में ले कर पूछा तो उस ने बता दिया कि विनोद अभी भी उसे फोन करता है और उस से मिलना चाहता है.

लेकिन अब वह उस से मिलना नहीं चाहती, क्योंकि उस ने तो बहुत पहले ही उसे दिल से निकाल दिया था. जबकि शायद उसे अभी भी गलतफहमी है कि वह उस से प्यार करती है.

इंदुबाला की बातों से दीपक को लगा कि विनोद आसानी से इंदुबाला का पीछा छोड़ने वाला नहीं है. वह शातिर अपराधी तो था ही, किसी की हत्या करना उस के लिए बच्चों के खेल जैसा था. इसलिए विनोद प्रेमिका का पीछा छुड़ाने का उसे एक ही उपाय नजर आया, उस की हत्या.

उस ने विनोद की हत्या करने का निर्णय कर हत्या कैसे की जाए, इस बात पर विचार किया तो उसे तरीका भी मिल गया. विनोद ने किसी से पैसे उधार ले रखे थे, जिन्हें वह दे नहीं पा रहा था. दीपक ने विनोद से दोस्ती कर ही रखी थी. उस ने रुपए दे कर मदद करने के बहाने 31 जुलाई, 2017 को उसे श्रीगंगानगर बुला लिया. विनोद श्रीगंगानगर पहुंचा तो दीपक उसे अपनी कार से होमलैंड सिटी स्थित अपने किराए के कमरे पर ले गया.

दीपक ने कमरे पर खानेपीने की व्यवस्था की. शाम को इंदुबाला भी आ गई. इस के बाद उसे ले कर दीपक और विनोद के बीच झगड़ा होने लगा तो दीपक ने शराब की बोतल उठा कर विनोद के सिर पर दे मारी, जिस से विनोद घायल हो गया.

विनोद नशे में था, इसलिए भाग नहीं सका. इलाज कराने के बहाने दीपक ने इंदुबाला की मदद से विनोद को कार में बैठाया और बाईपास चक 5 एमएल की रोही बसअड्डे पर ले गया. वहां भीड़भाड़ देख कर दीपक उसे निर्माणाधीन सूरतगढ़ हनुमानगढ़ नेतेवाला बाईपास पर ले गया. इंदुबाला भी उस के साथ थी.

वहां उस ने कार की हेडलाइट्स जला कर विनोद को सड़क पर घुटनों के बल बैठा दिया. विनोद को लगा कि दीपक की नीयत ठीक नहीं है तो वह छोड़ देने के लिए गिड़गिड़ाने लगा. लेकिन दीपक ने उस पर जरा भी रहम नहीं किया और पिस्तौल निकाल कर उस के सिर में गोली मार दी. गोली लगते ही वह सड़क पर लुढ़क गया.

इस के बाद दीपक ने कार से उस के सिर को 3-4 बार कुचला, जिस से उस की पहचान न हो सके. जाते समय उस ने विनोद का मोबाइल फोन निकाल लिया. वह वहां कोई ऐसा सबूत नहीं छोड़ना चाहता था, जिस के सहारे पुलिस उस तक पहुंच सके. इस के बाद वह इंदुबाला के साथ होमलैंड सिटी स्थित कमरे पर आ गया. दीपक खुश था कि उस ने अपने रास्ते के कांटे को हमेशाहमेशा के लिए हटा दिया.

पुलिस के अनुसार, दीपक 2 अगस्त तक श्रीगंगानगर में ही रहा. जैसे ही विनोद की शिनाख्त हुई, वह गायब हो गया. डीएसपी तुलसीदास राजपुरोहित ने बताया कि दीपक शराब तस्कर है. उस पर अजमेर के थाना गांधीनगर में एक हिस्ट्रीशीटर श्रवण सांसी की हत्या का आरोप है. पूछताछ में इंदुबाला ने पुलिस को बताया था कि दीपक के पास हमेशा 3-4 हथियार रहते हैं.

बहरहाल, जिस तरह हथियारों की फोटो दीपक चौधरी उर्फ दीपक मलिक ने फेसबुक पर डाली है, उस से यही लगता है कि वह किसी बड़े गिरोह से जुड़ा है. उसे महंगी पिस्तौलें रखने का शौक है. उस ने कई हथियारों के साथ अपनी फोटो फेसबुक पर डाल रखी हैं. सनकी आशिक और आपराधिक छवि वाला दीपक लग्जरी कारों का भी शौकीन है. उस के कुछ महंगी कारों के साथ फोटो भी हैं.

पुलिस दीपक को गिरफ्तार करने के लिए दिनरात एक किए हुए है, लेकिन कथा लिखे जाने तक उस की परछाईं तक नहीं देख पाई थी. यही नहीं, इंदुबाला के गिरफ्तार किए जाने के बाद वह सोशल मीडिया के जरिए पुलिस वालों को धमकी पर धमकी दे रहा है.

खैर, बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी. एक न एक दिन उसे हलाल होना ही है. कभी न कभी तो दीपक पकड़ा ही जाएगा.

कानून को खुली चुनौती दे कर वह पुलिस के लिए सिरदर्द जरूर बन गया है. कथा लिखे जाने तक इंदुबाला जेल में बंद थी. उस की जमानत नहीं हुई थी. दीपक फरार चल रहा था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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