मैं 19 साल का हूं. मेरी बहन 16 साल की है. हम दोनों को हमबिस्तरी की आदत पड़ गई है. यह आदत कैसे छोड़ें.

सवाल
मैं 19 साल का हूं. मेरी छोटी बहन 16 साल की है. हम दोनों को हमबिस्तरी करने की आदत पड़ गई है. यह सब जीव विज्ञान पढ़ाते वक्त हुआ था, क्योंकि वह हर चीज गहराई से जानना चाहती थी. हम यह आदत कैसे छोड़ें?

जवाब
आप की आदत एक तरह का गुनाह है. सगे भाईबहन हो कर पतिपत्नी वाले काम करना बहुत बड़ी गलती है. कहीं आप की बहन पेट से हो गई, तो कयामत आ जाएगी. इस फसाद से बचने के लिए आप अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें या किसी काम के बहाने कहीं दूर चले जाएं, ताकि बहन और आप मिल ही न पाएं.

भोजपुरी सिनेमा में कौमेडी पर काम करने की जरूरत

एक दौर था जब भोजपुरी फिल्मों में कौमेडियन की पहचान घुटनों तक कच्छे, लंबे नाड़े और चार्ली चैपलिन टाइप मूंछों से की जाती थी. इस इमेज में भोजपुरी की कौमेडी लंबे समय तक बंधी रही और भोजपुरी फिल्मों में बौलीवुड की तरह अच्छे कौमेडियन की कमी लगातार बनी रही.

लेकिन आज के दौर में भोजपुरी इंडस्ट्री में बहुत बेहतरीन कौमेडियन कलाकार हैं जिन की ऐक्टिंग की बदौलत भोजपुरी सिनेमा में भी अच्छी कौमेडी फिल्मों को बनाने का रास्ता खुला है.

भोजपुरी सिनेमा के ऐसे ही एक कलाकार हैं मनोज सिंह टाइगर उर्फ बतासा चाचा, जो भोजपुरी के लिए मील का पत्थर साबित हुए हैं. उन का नाम भोजपुरी बैल्ट का बच्चाबच्चा जानता है. उन्होंने कौमेडी को अलग पहचान दी है.

मनोज सिंह टाइगर उर्फ बतासा चाचा ने भोजपुरी की 150 से ज्यादा फिल्में की हैं. उन्हें ऐक्टिंग के लिए 50 से ज्यादा अवार्ड मिल चुके हैं और उन्होंने 50 से ज्यादा सुपरहिट फिल्में दी हैं.

फिल्म ‘दिलबर’ की शूटिंग के दौरान हुई मुलाकात में मनोज सिंह टाइगर उर्फ बतासा चाचा के कई अनछुए पहलुओं पर लंबी बातचीत हुई. पेश हैं, उसी के खास अंश:

आप का ऐक्टिंग की तरफ रुझान कैसे हुआ?

मैं उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से हूं. मेरा ऐक्टिंग की तरफ रुझान गांव की रामलीला से शुरू हुआ तो घर के लोग नाराज रहने लगे, इसलिए अपनी ऐक्टिंग की इच्छा को पूरा करने के लिए मैं साल 1997 में फिल्मों में काम की तलाश में मुंबई चला गया. वहां मुझे पृथ्वी थिएटर में काम करने का मौका मिला. वहीं मैं ने एक नाट्य मंडली बनाई और कई नाटक किए.

इसी दौरान मेरे एक नाटक को अदाकारा आयशा जुल्का ने देखा और उन्होंने मुझे फिल्मों में काम करने की सलाह दे डाली. मैं ने वहीं से फिल्मों में काम करने के लिए कोशिश शुरू की तो मुझे पहली फिल्म ‘चलत मुसाफिर मोह लियो रे’ में काम करने का मौका मिला. इस में मेरी ऐक्टिंग को दर्शकों ने खूब सराहा. इस के तुरंत बाद मुझे फिल्म ‘निरहुआ रिकशावाला’ में काम करने का मौका मिला जो मेरे लिए मील का पत्थर साबित हुई.

आप को बतासा चाचा के नाम से जाना जाता है. आप को यह नाम कैसे मिला?

मुझे बतासा चाचा के नाम से पहचान फिल्म ‘निरहुआ रिकशावाला’ से मिली. इस फिल्म में मेरे किरदार का नाम बतासा चाचा था. मेरा यह किरदार दर्शकों को इतना पसंद आया कि उस के बाद मेरे चाहने वाले बतासा चाचा के नाम से ही मुझे जानने लगे. अब तो बहुत कम लोग मुझे मेरे असली नाम से जानते हैं.

सुना है कि आप ने खुद को लीड रोल में ले कर एक आर्ट फिल्म बनाई है?

जी हां. हाल ही में मैं ने ‘लागल रहा बतासा’ के नाम से एक फिल्म की है. इस फिल्म में मेरा लीड रोल है. इस फिल्म में मेरे साथ आम्रपाली दूबे हैं. यह भोजपुरी फिल्म जगत की पहली आर्ट फिल्म है जो साफसुथरी होने के साथसाथ मनोरंजन से भी भरपूर है.

इस फिल्म में कौमेडी का पार्ट अलग मिसाल लिए है जो दर्शकों को हंसाहंसा कर लोटपोट कर देगा.

हाल ही में आप को सर्वश्रेष्ठ स्टोरी राइटर का अवार्ड भी मिला है. इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

जी, बिलकुल सही सुना है आप ने. मैं ने बहुत सारी फिल्में लिखी हैं और आगे भी लिखता रहूंगा. खुद के लिखे हुए न जाने कितने नाटक मैं ने किए हैं. उन्हीं नाटकों को मैं सिनेमा में भी बदल रहा हूं.

मुझे 14 साल के भोजपुरी सिनेमा के अपने कैरियर में बहुत सारे अवार्ड मिले हैं. तकरीबन 20 से भी ज्यादा ‘कौमेडियन औफ द ईयर’ अवार्ड मिले, कई फिल्मों के लिए सपोर्टिंग ऐक्टर का अवार्ड मिला.

मुझे साल 2018 में सर्वश्रेष्ठ स्टोरी राइटर का अवार्ड फिल्म ‘सिपाही’ के  लिए मिला, जो मेरे लिए सब से बड़ी खुशी ले कर आया, क्योंकि मैं ने तकरीबन 15 फिल्में लिखी हैं लेकिन यह अवार्ड मुझे पहली बार मिला.

इस अवार्ड ने मेरे भीतर के जोश को बढ़ाया है. आगे और भी अच्छा लिखने की कोशिशें जारी रहेंगी.

आप भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के एकलौते ऐसे कलाकार हैं जिस ने कौमेडी के साथसाथ निगेटिव और लीड रोल में कई किरदार निभाए हैं और दोनों में आप बेहद कामयाब रहे हैं. इतना कुछ कैसे मुमकिन हो पाता?है?

भोजपुरी में अभी तक स्टार कौमेडियन को दर्शकों ने विलेन के रूप में स्वीकार नहीं किया था. मैं ने इस लीक को तोड़ा और भोजपुरी फिल्मों का पहला कौमेडी ऐक्टर हूं जिस ने कौमेडी के साथसाथ निगेटिव किरदार भी निभाए हैं.

आप थिएटर में खासा सक्रिय हैं. इस का फिल्मी ऐक्टिंग को कितना फायदा मिल पाता है?

थिएटर मुझ में बसा है या कह लीजिए कि थिएटर मेरी कमजोरी और मजबूरी है. थिएटर के बिना मुझे जिंदगी अधूरी लगती है. जब भी मुझे कहीं से थिएटर में मंच पर काम करने के लिए औफर मिलता है तो मैं सारे काम छोड़ कर नाटकों के मंचन के लिए पहुंच जाता हूं.

जहां तक थिएटर का फिल्मी कैरियर में फायदा मिलने की बात है तो थिएटर ही तो है जिस ने मुझे फिल्मों में अपनी अलग पहचान दी. मुझे फिल्मों में लाने का श्रेय मेरे रंगकर्म को ही जाता है. मैं जिंदगीभर थिएटर करते रहना चाहता हूं.

आप बौलीवुड में भी कोई फिल्म कर रहे हैं?

जी हां, मैं ने बौलीवुड की एक हिंदी बायोपिक फिल्म ‘ऐक्सिडैंटल प्राइम मिनिस्टर’ की है, जिस में मैं ने नेता अमर सिंह का किरदार निभाया है. इस फिल्म में अनुपम खेर ने मनमोहन सिंह का रोल किया है.

गांवदेहात की लोकेशन में फिल्मों की शूटिंग बढ़ रही है. इस पर क्या कहना चाहेंगे?

गंवई लोकेशन में भोजपुरी फिल्मों के शूट का चलन फिल्म की कहानी को जाता है. लोकल लैवल पर शूट किए जाने से होटल, गाड़ी वगैरह के खर्चे और बढ़ जाते हैं, लेकिन कहानी का जुड़ाव बढ़ जाता है.

कविता की प्रेम कविता का अंत

18 नवंबर की सुबह 8 बज कर 9 मिनट पर पूर्वी दिल्ली के थाना गाजीपुर को फोन पर सूचना मिली कि गाजीपुर के पेपर मार्केट में सीएनजी पंप के सामने खड़े एक ट्रक के पिछले टायर के आगे एक युवक की रक्तरंजित लाश पड़ी है. लाश मिलने की सूचना पर एएसआई धर्मसिंह, हेड कांस्टेबल राजकुमार को साथ ले कर मोटरसाइकिल से पेपर मार्केट पहुंचे. वहां एक 22 पहियों वाली विशालकाय ट्रक खड़ी थी, जिस के बाईं तरफ पहिए के नीचे एक युवक की लाश पड़ी थी, जिस की गरदन को बेरहमी से रेता गया था. गरदन के नीचे काफी खून पड़ा था.

मृतक लाल रंग की चैकदार शर्ट और ग्रे कलर की पैंट पहने हुए था. हत्या का मामला था. एएसआई ने तत्काल इस की सूचना गाजीपुर के थानाप्रभारी अमर सिंह को दे दी. थोड़ी देर में थानाप्रभारी अमर सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए और लाश का बारीकी से मुआयना करने लगे.

मृतक नंगे पैर था और उस के पैर फुटपाथ की तरफ थे. उस का नंगे पैर होना शक पैदा करता था कि उस की हत्या किसी और जगह की गई होगी. उस की गरदन पर दाहिनी ओर किसी धारदार हथियार का गहरा घाव था.

थानाप्रभारी ने आसपास के लोगों और वहां से आनेजाने वालों को रोक कर मृतक की शिनाख्त कराने की कोशिश की. लेकिन उस की शिनाख्त नहीं हो पाई. तब उन्होंने क्राइम टीम बुला कर लाश और घटनास्थल की फोटो करा लीं और लाश 7 घंटे के लिए लालबहादुर शास्त्री अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दी.

एएसआई राजेश को घटनास्थल की निगरानी के लिए छोड़ कर थानाप्रभारी अमर सिंह थाने लौट आए. उन्होंने थाने में आइपीसी की धारा 302 के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया. इस केस की तफ्तीश की जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं अपने हाथ में ली. थानाप्रभारी अमर सिंह ने अब तक की सारी काररवाई का ब्यौरा एसीपी आनंद मिश्रा और डीसीपी ओमबीर सिंह को दे दिया.

कल्याणपुरी के एसीपी आनंद मिश्रा ने थानाप्रभारी अमर सिंह, सब इंसपेक्टर सोनू तथा कांस्टेबल नीरज की एक टीम बना कर इस मामले को जल्द से जल्द हल करने के आदेश दिए. पुलिस टीम इस ब्लाइंड मर्डर केस की जांच में जुट गई. थानाप्रभारी टीम के साथ गाजीपुर के पेपर मार्केट में घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने हत्या से जुड़े संभावित सुरागों की तलाश में वहां के पासपड़ोस के बहुत से लोगों से पूछताछ की. लेकिन उन्हें वहां ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं मिला जो मृतक को पहचानता हो.

कई घंटे तक घटनास्थल की खाक छानने के बाद भी जब अमर सिंह को इस हत्याकांड से जुड़ा कोई सुराग नहीं मिला तो वह वापस थाने लौट आए. उन्होंने सभी निकटवर्ती थानोंं को इस वारदात की जानकारी दे कर उन के यहां हाल ही में गुम हुए लोगों के बारे में पूछताछ की, लेकिन किसी का भी हुलिया मृतक के हुलिए से मेल नहीं खा रहा था.

उसी दिन शाम के वक्त एक औरत अपने 2 जानने वालों के साथ गाजीपुर थाने के ड्यूटी औफिसर के पास पहुंची. उस ने बताया कि उस का पति मिथिलेश ओझा पिछली रात से घर वापस नहीं लौटा है. वह नोएडा में नौकरी करता था. उस ने अपने पति का फोटो भी दिखाया. जब थाने में मौजूद ड्यूटी औफिसर ने उसे अज्ञात मृतक की फोटो दिखाई तो उसे देखते ही वह बुरी तरह से बिलख उठी.

उस ने रोते हुए बताया कि यह फोटो उस के पति मिथिलेश ओझा का है. इस के बाद उसे लाश दिखाने के लिए लालबहादुर शास्त्री अस्पताल की मोर्चरी में ले जाया गया, जहां उस ने लाश को देखते ही उस की शिनाख्त अपने पति मिथिलेश ओझा के रूप में कर दी.

लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद उसे थाना गाजीपुर ला कर फिर से पूछताछ की गई. उस ने बताया कि उस का नाम कविता है. वह अपने पति और 2 बच्चों के साथ दल्लूपुरा में किराए के एक मकान में रहती है. कल यानी 16 नवंबर को उस का पति रोज की तरह सुबह घर से काम पर नोएडा के लिए निकला था. वह नोएडा के सेक्टर 63 स्थित एक प्राइवेट कंपनी में ड्राइवर था.

काम खत्म होने के बाद वह रात को 9 बजे तक घर लौट आता था. लेकिन कल रात वह घर नहीं लौटा. पति के नहीं लौटने से वह बहुत परेशान थी. उस ने पति के मोबाइल पर काल भी की लेकिन उस का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ आ रहा था.

कविता ने अपने सभी नातेरिश्तेदारों को फोन कर के पति के बारे में पूछा. लेकिन उसे कहीं से भी मिथिलेश के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. पूरे दिन पति को इधरउधर तलाश करने के बाद वह अपने जीजा अरविंद मिश्रा और पति के दोस्त विजय कुमार के साथ पति की गुमशुदगी दर्ज करवाने थाने आ गई.

कविता के पति मिथिलेश ओझा के कातिलों का सुराग हासिल करने के लिए उस से मिथिलेश की किसी से संभावित दुश्मनी के बारे में पूछताछ की गई. उस ने बड़ी मासूमियत से बताया कि उस का पति बहुत मिलनसार स्वभाव का था. उस की किसी से दुश्मनी नहीं थी. उस की बात सुन कर थानाप्रभारी अमर सिंह सोच में पड़ गए.

दरअसल, ऐसा कोई कारण जरूर था, जिस की वजह से बीती रात उस के पति मिथिलेश ओझा की हत्या हो गई थी. अब या तो कविता को अपने पति की हत्या के कारण की जानकारी नहीं थी, या वह जानबूझ कर पुलिस से कुछ छिपा रही थी. निस्संदेह यह तफ्तीश का विषय था. थानाप्रभारी ने कविता से उस के और उस के पति के साथ उस के सभी नजदीकी परिजनों के मोबाइल नंबर पूछ कर अपनी डायरी में नोट कर लिए. इस के बाद उन्होंने कविता को घर जाने को इजाजत दे दी.

जब इन सभी नंबरों की काल डिटेल्स मंगवाई गई तो विजय कुमार और कविता के फोन नंबरों की काल डिटेल्स की जांच पड़ताल के दौरान थानाप्रभारी अमर सिंह की आंखें चमक उठीं. उन्होंने देखा कि दोनों के बीच मोबाइल पर अकसर बातें होती थीं. घटना वाले दिन शाम के वक्त विजय ने ही मिथिलेश के मोबाइल पर आखिरी काल की थी. यह देख कर उन्हें विजय कुमार और मृतक की पत्नी कविता पर शक हुआ.

उन्होंने विजय को थाने बुला कर उस के और कविता के बीच होने वाली बातचीत के बारे में पूछताछ की. पहले तो विजय कुमार ने उन्हें अपनी बातों से बरगलाने की कोशिश की, लेकिन बाद में वह टूट गया. उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. कविता से भी उस के तथा विजय के संबंधों के बारे में काफी पूछताछ की गई.

पूछताछ के दौरान कविता ने स्वीकार किया कि उस के और विजय कुमार के बीच अवैध संबंध हैं, लेकिन पति की हत्या में उस की संलिप्तता नजर नहीं आई. जबकि विजय ने अपने इकबालिया बयान में बताया कि उस ने अपने दूसरे साथी दुर्गा प्रसाद के साथ मिल कर इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था.

विजय को उसी वक्त गिरफ्तार कर लिया गया. विजय की सुरागरसी पर उस के साथी दुर्गाप्रसाद को भी उसी दिन उस के घर दल्लूपुरा से गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान उस ने मिथिलेश की हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली. दोनों आरोपियों के बयान तथा कविता से हुई पूछताछ के बाद मिथिलेश ओझा की हत्या की एक ऐसी सनसनीखेज दास्तान उभर कर सामने आई.

35 वर्षीय मिथिलेश ओझा बिहार के जिला रोहतास का मूल निवासी था. अपनी पत्नी कविता तथा 2 बच्चों के साथ वह नोएडा के हरौला गांव में किराए के मकान में रहता था. वह नोएडा के सेक्टर-63 स्थित एक प्राइवेट कंपनी की लोडर गाड़ी चलाता था. उस की पत्नी कविता सुंदर और चंचल स्वभाव की थी.

उन्हीं दिनों हरौला गांव मं विजय कुमार ने सुनार की दुकान खोली. दुकान की ओपनिंग के मौके पर उस ने बिहार के लोगों को अपनी दुकान पर आमंत्रित किया था. उस प्रोग्राम में कविता भी काफी सजधज कर आई थी. विजय की नजर जब कविता पर पड़ी तो वह उसे एकटक देखता रह गया. विजय को अपनी तरफ देखता देख कर वह एकदम शरमा गई.

उस वक्त वहां बहुत सारे लोग एकत्र थे, इसलिए विजय ने कविता से कुछ नहीं कहा. फिर भी प्रोग्राम के दौरान उस ने चलाकी से कविता से उस का नाम और मोबाइल नंबर ले लिया. कविता को भी विजय का यह अपनापन बहुत अच्छा लगा. वहां से जाते वक्त उस ने अपने घर का पता बता कर उसे अपने घर चाय पीने के लिए आमंत्रित किया.

एक दिन बाद ही विजय कविता से मिलने उस के घर जा पहुंचा. विजय को अपने घर आया देख कर कविता बहुत खुश हुई. उस ने विजय को बिठा कर उस की खूब आवभगत की. थोड़ी देर के बाद कविता का पति मिथिलेश ओझा भी वहां आ गया. कविता ने विजय का परिचय मिथिलेश से कराया तो वह बड़ी गर्मजोशी से मिला. विजय ने बताया कि वह भी बिहार के रोहतास का रहने वाला है.

कुछ देर वहां रहने के बाद विजय वहां से चला गया, लेकिन इस दौरान आंखों ही आंखों में अपने दिल की बात कविता पर जाहिर कर दी. जवाब में कविता ने भी उस की ओर देख कर आंखों के इशारे से यह जता दिया कि जो आग उस के दिल में लगी है, वही आग उस के सीने में भी धधक रही है.

इस तरह कविता के घर आतेजाते विजय और कविता का मिलनाजुलना शुरू हो गया. एक दिन विजय जानबूझ कर कविता के घर उस समय पहुंचा, जब मिथिलेश घर में नहीं था. कविता ने विजय को घर में बिठा कर उस से मीठीमीठी बातें शुरू कर दीं.

विजय को इसी दिन का इंतजार था. उस ने कविता कोे दरवाजा बंद करने का इशारा किया तो कविता ने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया और उस के पास आ कर बैठ गई. एकांत का फायदा उठाते हुए विजय ने कविता को अपनी बांहों में भर लिया.

प्रेमी की गर्म सांसों में पिघल कर कविता ने उसे मनमानी करने की खूली छूट दे दी. उस दिन के बाद जब भी उन्हें मौका मिलता, वे जमाने की आंखों से छिप कर शारीरिक संबंध बना लेते थे. इस तरह 4-5 साल किसी को भी उन के प्रेमिल संबंधों की जानकारी नहीं हुई.

लेकिन बाद में कुछ लोगों ने मिथिलेश को बताया कि उस की गैरमौजूदगी में विजय उस के घर आता है और काफी देर तक रुकता है. यह जानने के बाद मिथिलेश ने कविता को डांटा और भविष्य में विजय से नहीं मिलने को कहा. उस वक्त तो कविता ने उस की बात मान ली, लेकिन बाद में उस का मिलनाजुलना बदस्तूर जारी रहा.

कुछ दिन तक तो मिथिलेश को लगा कि उस की पत्नी सुधर गई है, लेकिन बाद में जब उसे पता चला कि उस की गैरहाजिरी में कविता और विजय का मिलनाजुलना बदस्तूर जारी है तो इस से परेशान हो कर वह हरौला छोड़ कर दिल्ली के दल्लूपुरा में शिफ्ट हो गया.

दूसरी ओर विजय कुमार कविता के इश्क में इस तरह पागल था कि जिस दिन उस की कविता से बात नहीं होती थी, उस के दिल को चैन नहीं मिलता था. कविता के नोएडा से दिल्ली आ जाने के बाद वह सारा दिन कविता से मिलने के बारे में सोचता रहता था.

जब उसे कविता की बहुत याद सताती तो वह उस के मोबाइल पर बातें कर के अपने दिल की चाहत बयां कर लिया करता था. कुछ दिनों के बाद विजय ने कविता से उस के घर का पता पूछा और उस से मिलने उस के घर आना शुरू कर दिया.

अभी मिथिलेश ओझा दल्लूपुरा में नया शिफ्ट हुआ था. वहां उसे जानने वालों की संख्या बहुत कम थी. उस के घर कौन कब आता है… कब जाता है, इस से किसी को कोई मतलब नहीं था. विजय कभी कविता से मिलने उस के घर आ जाता तो कभी कविता उस से मिलने चली जाती थी.

विजय के पास इंडिका कार थी. वह कविता को कार में बिठा कर लौंग ड्राइव पर ले जाता. रास्ते में कहीं एकांत जगह पर कार खड़ी कर के दोनों अपनी वासना की आग ठंडी कर लेते थे. इस तरह कविता और विजय दोनों मिथिलेश की आंखों में धूल झोंक कर काफी दिनों तक शारीरिक संबंध बनाते रहे.

घटना से कुछ दिन पहले एक दिन मिथिलेश ओझा के मकान मालिक ने उसे अपने घर पर बुला कर कहा कि उस ने कल उस के दोस्त विजय की मोटर-साइकिल पर कविता को बैठे देखा था. कविता विजय की मोटरसाइकिल के पीछे उस की कमर में हाथ डाले बैठी थी.

यह सुन कर मिथिलेश के तनबदन में आग लग गई. उस ने मकान मालिक का शुक्रिया अदा किया और घर लौट कर कविता को खूब डांट पिलाई. दूसरे दिन वह अपने दोस्त विजय से मिला और उसे अपने घर आने से मना कर के धमकी दी कि अगर उस ने कविता से मिलनाजुलना नहीं छोड़ा तो अपने भतीजे मुन्ना की मदद से उस की हत्या करा देगा.

विजय मिथिलेश की बात सुन कर डर गया. वह जानता था कि गुड़गांव में रहने वाला मिथिलेश का भतीजा मुन्ना कई खतरनाक बादमाशों को जानता है और अगर मुन्ना चाहे तो बड़ी आसानी से बदमाशों से उस की हत्या करा सकता है. दूसरे वह कविता के बिना भी रह नहीं सकता था.

मिथिलेश की धमकी के बाद विजय के मन में सदा यह डर बना रहता था कि अगर उस ने मिथिलेश को अपने रास्ते से नहीं हटाया तो किसी भी दिन उस की हत्या की जा सकती है. इस बारे में कई दिनों तक सोचने के बाद उस ने मन में मिथिलेश की हत्या करने का इरादा बना लिया. लेकिन यह बात उस ने कविता को नहीं बताई.

एक दिन उस ने अपने दोस्त दुर्गा प्रसाद को विश्वास में ले कर उसे पूरी बात बताई. साथ ही कहा भी कि अगर वह मिथिलेश की हत्या में उस का साथ दे तो इस के बदले उसे अच्छी खासी रकम देगा.

40 वर्षीय दुर्गाप्रसाद दिल्ली में छोटामोटा काम कर के अपने परिवार की गुजरबसर कर रहा था. उस की बड़ी बेटी शादी के लायक हो गई थी, इसलिए उसे बड़ी रकम की जरूरत थी. वह विजय कुमार का साथ देने के लिए राजी हो गया. बदले में विजय ने उस की बेटी की शादी में आर्थिक मदद करने की बात मान ली.

17 नवंबर, 2017 की शाम विजय कुमार ने फोन कर के दुर्गाप्रसाद को अपनी दुकान पर बुलाया. दुकान के बाहर उस की सिल्वर कलर की इंडिका कार खड़ी थी.

योजना के अनुसार दोनों कार में सवार हो कर नोएडा के सेक्टर-11 की रेड लाइट पर पहुंच कर मिथिलेश ओझा के काम से लौटने का इंतजार करने लगे. करीब साढ़े 8 बजे मिथिलेश ओझा अपनी साइकिल पर उधर से आता हुआ दिखाई दिया तो विजय ने उसे आवाज दे कर बुला लिया.

फिर उस से बातें करते हुए अपनी कार के पास आ कर बोला, ‘‘यार, बड़ी सर्दी हो रही है, चलो कार में बैठ कर बातें करते हैं.’’ बातें करतेकरते विजय कार की ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और मिथिलेश ओझा ने अपनी साइकिल वहीं पर खड़ी कर दी और कार की पिछली सीट पर बैठे दुर्गा प्रसाद की बगल में जा बैठ गया.

मिथिलेश से विजय ने कहा कि एक जगह चलना है. उस की बात सुन कर मिथिलेश ओझा उस के साथ जाने को राजी हो गया. इस के बाद कार टी पौइंट से हो कर कोंडली में शराब के ठेके के पास पहुंची. वहां से शराब की बोतल और कोल्डड्रिंक ले कर विजय ने कार में बैठ कर तीनों के लिए पैग बनाए.

इसी बीच मिथिलेश की नजर बचा कर विजय ने मिथिलेश के पैग में नींद की गोलियां मिला कर उसे पैग पीने के लिए दे दिया. थोड़ी देर में आने वाली मौत की आहट से बेखबर मिथिलेश जाम से जाम टकराने के बाद शराब की चुस्कियां लेने लगा. बोतल की शराब खत्म होने पर भी जब मिथिलेश को अधिक नशा नहीं हुआ, तब विजय फिर ठेके पर पहुंचा और शराब का एक अद्धा और खरीद लाया.

विजय और दुर्गा प्रसाद ने कम शराब पी और मिथिलेश को जानबूझ कर इतनी अधिक पिला दी जिस से वह बेहोश हो गया. उस के बेहोश होते ही विजय और दुर्गा प्रसाद एक दूसरे की ओर देख कर मुसकराए.

विजय कार चलाते हुए गाजीपुर के पेपर मार्केट में पहुंचा, जहां एक सुनसान सी जगह पर 22 पहियों वाला ट्रक खड़ा था. उस के बराबर कार में रोक कर विजय पिछली सीट पर पहुंचा और दुर्गा प्रसाद की मदद से एक रस्सी से मिथिलेश का गला घोंट दिया.

मिथिलेश की हत्या करने के बाद दोनों ने उस की लाश को घसीट कर कर की पिछली सीट से नीचे उतारा और उस विशालकाय ट्रक के पिछले पहिए के सामने रख दिया. विजय ने दुर्गा प्रसाद से सड़क पर निगरानी करने के लिए कहा और खुद एक पेपर कटर ले कर बेदर्दी से मिथिलेश का गला रेत दिया.

विजय ने सोचा कि रात के अंधेरे में ड्राइवर ट्रक चलाएगा तो मिथिलेश का चेहरा बुरी तरह कुचला जाएगा, जिस से पुलिस उस की शिनाख्त नहीं कर पाएगी. मिथिलेश की जेब में रखे कागजात, मोबाइल फोन और उस की चप्पलनिकाल कर विजय और दुर्गा प्रसाद कार से वापस नोएडा के टी प्वाइंट पर पहुंचे. रास्ते में उन्होंने मिथिलेश की चप्पल, मोबाइल की बैटरी फेंक दी. इस के बाद दुर्गाप्रसाद को उस के घर दल्लूपुरा में छोड़ कर विजय अपने घर लौट गया.

सुबह साढ़े 7 बजे विजय फिर लाश के पास पहुंचा तो ट्रक को वहीं खड़ा देख कर उसे डर सा लगा. उस ने वहीं से दुर्गा प्रसाद को फोन कर के मिथिलेश की साइकिल को रात वाली जगह से हटा कर कहीं पर छिपा देने के लिए कहा. इस के बाद वह अपने घर आ गया.

थोड़ी देर बाद उस के मोबाइल पर कविता का फोन आया. कविता ने उसे बताया कि रात में उस का पति घर नहीं लौटा है. उसकी बात सुन कर वह सहानुभूति का नाटक करने उस के घर दल्लूपुरा पहुंचा. फिर वह कविता और उस के जीजा अरविंद मिश्रा के साथ मिथिलेश ओझा की गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए गाजीपुर थाने पहुंच गया.

थानाप्रभारी अमर सिंह ने 11 नवंबर को मिथिलेश हत्याकांड में दोनों आरोपियों विजय कुमार और दुर्गा प्रसाद को दिल्ली के कड़कड़डुमा की अदालत में पेश कर दिया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

सरप्राइज में मौत

राजस्थान के बारां जिले में एक थाना कस्बा है छीपा बड़ौद. इसी थाने का एक गांव है खजूरिया. 29 जुलाई, 2017 की रात को रुकरुक कर बारिश हो रही थी. सुबह के समय बारिश बंद हो गई तो गांव के कुछ बच्चे सुबह 7, पौने 7 बजे जब उत्कृष्ट उच्च प्राथमिक स्कूल पहुंचे तो स्कूल के बरामदे में एक युवक की लाश देख कर घबरा गए.

स्कूल खुलने का समय हो गया था. लेकिन उस समय तक स्कूल के अध्यापक और प्रधानाध्यापक नहीं आए थे. इसलिए घबराए बच्चों ने गांव वालों को स्कूल में लाश पड़ी होने की जानकारी दे दी.

बच्चों की सूचना पर गांव वाले वहां पहुंचे तो उन्होंने लाश को तुरंत पहचान लिया. लाश गांव के ही रहने वाले रामकल्याण के बेटे निर्मल मालव की थी. वह चार्टर्ड एकाउंटेंट था. इस घटना से एक सप्ताह पहले ही चार्टर्ड एकाउंटेंट की फाइनल परीक्षा का परिणाम आया था. चार्टर्ड एकाउंटेंट बन जाने से उस के घर के लोग काफी खुश थे. गांव वाले भी खुश थे.

सीए बनने के बाद वह 2 दिन पहले ही जयपुर से अपने गांव आया था. उस की मौत की खबर सुन कर परिजनों पर जैसे गमों का पहाड़ टूट पड़ा था. पता नहीं किस ने रामकल्याण मालव के परिवार की खुशियां छीन ली थीं. निर्मल की लाश मिलने से पूरे गांव में शोक सा छा गया था.

इसी बीच किसी ने पुलिस को भी फोन से सूचना दे दी. कुछ देर में ही छीपा बड़ौद थाना पुलिस खजूरिया गांव आ गई. थानाप्रभारी रतन सिंह भाटी ने मौकामुआयना किया.

निर्मल के शव के गले में रस्सी बांधे जाने के निशान थे. मौके पर उस का चश्मा, छाता और चप्पलें पड़ी हुई थीं. स्थिति देख कर लग रहा था कि निर्मल की हत्या गला घोंट कर की गई थी. निर्मल के पास मोबाइल भी था, लेकिन वह मौके पर नहीं मिला. इस से यह अनुमान लगाया गया कि हत्यारे उस का मोबाइल भी ले गए होंगे.

चार्टर्ड एकाउंटेंट की हत्या एक गंभीर मामला था, इसलिए थानाप्रभारी ने अपने उच्चाधिकारियों को भी वारदात की सूचना दे दी. कुछ देर बाद ही बारां के एसपी डी.डी. सिंह, एडिशनल एसपी मनोज चौधरी, छबड़ा के डीएसपी प्रदीप सिंह हापावत आदि मौके पर पहुंच गए. अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना कर लोगों से पूछताछ की.

निर्मल के पिता रामकल्याण मालव से भी पूछताछ की गई. उन्होंने बताया कि न तो गांव में उन की किसी से कोई दुश्मनी थी और न ही किसी अन्य आदमी से ऐसी कोई बात थी जो निर्मल को मार सके.

शुरुआती जांच में पुलिस के सामने ऐसी कोई बात नहीं आई, जिस से निर्मल की हत्या का कारण पता चल पाता. एसपी के आदेश पर कोटा से विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम भी मौके पर आ गई.

मौके की जरूरी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने निर्मल के शव को छीपा बड़ौद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया. अस्पताल में मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद निर्मल का शव उस के घर वालों को सौंप दिया गया. पुलिस ने उसी दिन रामकल्याण मालव की तरफ से अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया.

कोटा रेंज के आईजी विशाल बंसल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बारां एसपी को कुछ जरूरी हिदायतें दीं. इस के बाद एडिशनल एसपी मनोज चौधरी ने छबड़ा के डीएसपी प्रदीप कुमार हापावत के निर्देशन में एक पुलिस टीम गठित की. टीम में थानाप्रभारी रतन सिंह भाटी, एसआई रामहेतार, एएसआई भंवर सिंह आदि को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने उसी दिन खजूरिया गांव पहुंच कर जांचपड़ताल शुरू कर दी. पुलिस ने सब से पहले रामकल्याण मालव के बारे में गांव के लोगों से जानकारी जुटाई. परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि निर्मल 27 जुलाई, 2017 को ही जयपुर से गांव आया था.

रात 2 बजे तक जब निर्मल घर नहीं लौटा तो घर वाले परेशान हो गए. किसी की समझ में नहीं आया कि बेटा आखिर आधी रात के समय घर से बाहर क्यों गया? इस दौरान पिता ने निर्मल का फोन नंबर मिलाया. किसी ने फोन रिसीव तो किया पर बात नहीं हो पाई. उन्होंने फिर फोन मिलाया तो नंबर बंद मिला.

तब उन्होंने निर्मल के दोस्तों को रात में ही फोन कर के उस के बारे में पूछा, लेकिन किसी से निर्मल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. फिर उन्होंने रिश्तेदारों को भी फोन किए लेकिन कुछ पता नहीं चला.

आखिर वे निर्मल को तलाशने के लिए घर से निकल पड़े. रात का समय था. बारिश भी हो रही थी. ऐसे में काफी देर तक वह उसे इधरउधर ढूंढते रहे लेकिन कुछ पता नहीं चला.

पुलिस को मौके पर निर्मल का मोबाइल फोन नहीं मिला था. इसलिए पुलिस ने मोबाइल के सहारे ही जांच आगे बढ़ाने का फैसला किया. उस के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई गई. उसी के आधार पर पुलिस ने दूसरे ही दिन यानी 30 जुलाई को निर्मल मालव की पत्नी सीमा और उस के प्रेमी सुरेंद्र मालव को गिरफ्तार कर लिया.

सुरेंद्र मालव सीमा की सगी बुआ का लड़का था जो छबड़ा थाने के ही गांव कड़ैया नोहर में रहता था. सीमा और सुरेंद्र से की गई पूछताछ में चार्टर्ड एकाउंटेंट निर्मल मालव की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

बारां जिले के खजूरिया गांव की रहने वाली सीमा के अपनी बुआ के बेटे सुरेंद्र से पिछले 4-5 सालों से अवैध संबंध थे. हालांकि पड़ोस के गांव में रहने के बावजूद इस बात की जानकारी रामकल्याण के परिवार को नहीं थी. रामकल्याण मालव की 3 बेटियां और 2 बेटे थे. अपनी खेतीकिसानी की कमाई से ही उन्होंने सभी बच्चों को पढ़ाया. 2 बेटियों की वह शादी कर चुके थे.

निर्मल अपने छोटे भाई के साथ जयपुर में रह कर पढ़ाई कर रहा था. रामकल्याण ने निर्मल की शादी खजूरिया गांव की ही रहने वाली सीमा से तय कर दी थी. लेकिन सीमा तो सुरेंद्र के प्यार से बंधी थी. न चाहते हुए भी 21 मई, 2017 को उस की शादी निर्मल से हो गई. सीमा से शादी कर के निर्मल खुश था पर सीमा खुश नहीं थी, क्योंकि वह तो सुरेंद्र को चाहती थी.

शादी के समय निर्मल की पढ़ाई चल रही थी. निर्मल जयपुर में ही रहता था. शादी के बाद करीब एक सप्ताह घर रुक कर वह जयपुर वापस चला गया था. निर्मल चाहता था कि वह सीए बन जाए तो पत्नी को भी अपने साथ जयपुर ले जाएगा. जयपुर में रहते हुए उस की सीमा से मोबाइल पर बातें होती रहती थीं. पारिवारिक रीतिरिवाजों के कारण सीमा उन दिनों अपने मायके में ही रह रही थी.

भले ही शादी हो गई थी, लेकिन सीमा मन से निर्मल को स्वीकार नहीं कर सकी थी. शादी के बाद भी उस के सुरेंद्र से संबंध बने रहे. इसलिए सीमा ने सुरेंद्र से निर्मल को ही रास्ते से हटाने के बारे में बात की. सुरेंद्र इस के लिए तैयार हो गया. दोनों ने तय कर लिया कि इस बार जब भी निर्मल गांव आएगा तो वह उसे ठिकाने लगा देंगे.

निर्मल ने सीमा को बता दिया था कि वह 27 जुलाई, 2017 को घर आएगा. उस के गांव आने की जानकारी मिलने पर सीमा ने सुरेंद्र को मोबाइल पर सारी बातें बता दीं. इस के बाद दोनों ने निर्मल को ठिकाने लगाने की योजना बना ली.

योजना के अनुसार, सुरेंद्र 28 जुलाई की रात खजूरिया गांव पहुंच गया. खजूरिया पहुंच कर उस ने सीमा को फोन किया. सीमा उस से मिलने के लिए अपने परिजनों से छिप कर घर से निकली. वह घर के मेनगेट के बजाय छत के रास्ते हो कर नीचे आई थी. गांव के बाहर पहुंच कर वह सुरेंद्र से मिली. वहां से वे दोनों गांव के ही उत्कृष्ट उच्च प्राथमिक स्कूल पहुंच गए. वहां सीमा ने सुरेंद्र को स्कूल के ही एक अंधेरे कोने में छिपा दिया था.

इस के बाद सीमा ने रात करीब साढ़े 11 बजे अपने पति निर्मल को फोन किया और उसे स्कूल में मिलने के लिए बुलाया. पत्नी के प्रेम में खिंचा निर्मल रात को साढ़े 11 बजे अपनी छोटी बहन से यह कह कर घर से निकल गया कि बाहर घूम कर थोड़ी देर में वापस आ जाएगा. उस ने यह नहीं बताया था कि वह सीमा से मिलने स्कूल में जा रहा है.

निर्मल मालव जब आधी रात के समय स्कूल में पहुंचा तो सीमा उसे वहां मिल गई. सीमा को देख कर निर्मल की आंखों में प्यार उमड़ पड़ा. वहीं सीमा को आज अपनी योजना पूरी होती नजर आई. सीमा प्यार बरसाते हुए आगे बढ़ कर निर्मल के सीने से लिपट गई. निर्मल ने उसे आलिंगनबद्ध कर चुंबनों की झड़ी लगा दी.

कुछ देर वह निर्मल के सीने से लगी रही. फिर अलग होते हुए कहा, ‘‘आज मैं तुम को एक सरप्राइज देना चाहती हूं.’’

निर्मल ने एक सप्ताह पहले ही सीए फाइनल की परीक्षा पास की थी, इसलिए उस ने समझा कि सीए बनने की खुशी में पत्नी उसे कोई गिफ्ट वगैरह देना चाहती है. निर्मल ने कहा, ‘‘सरप्राइज तो हम ने तुम को दिया है कि अब हम सीए बन गए हैं,’’ उसे गुदगुदाते हुए निर्मल बोला, ‘‘अब हम अपनी सीमा को गांव में नहीं रहने देंगे, जल्दी ही जयपुर ले चलेंगे. वहां हमारे ऊपर गांव की तरह का बंधन नहीं होगा. केवल हम दोनों ही होंगे.’’

निर्मल की बातों को अनसुनी करते हुए सीमा ने कहा, ‘‘वो सब तो ठीक है. लेकिन मैं भी तुम्हें सरप्राइज देना चाहती हूं.’’

सीमा की बातें सुन कर निर्मल बोला, ‘‘मेरे लिए ऐसा क्या सरप्राइज लाई हो?’’

‘‘पहले तुम अपनी आंखें बंद करो.’’ सीमा ने कहा.

पत्नी के कहने पर निर्मल ने आंखें बंद कर लीं. इस के बाद सीमा ने अपने साथ लाए कपड़े से उस की आंखों पर पट्टी बांध दी. फिर दोनों हाथ कमर के पीछे कर के बांध दिए. आंखों पर पट्टी और हाथ बांधने पर निर्मल ने सीमा को छेड़ते हुए कहा, ‘‘सीमा तुम्हारे इरादे शरारत भरे हैं. यह शरारत हम यहां स्कूल में नहीं, जयपुर चल कर करेंगे.’’

‘‘ठीक है, जयपुर तो बाद में चलेंगे.’’ सीमा ने कुटिल मुसकान बिखरते हुए कहा, ‘‘आज तो मैं तुम्हें यहीं सरप्राइज दूंगी.’’ कहते हुए सीमा ने निर्मल के पैर भी बांध दिए.

अब निर्मल न तो कुछ देख पा रहा था और न ही हाथपैर चला पा रहा था. वह पत्नी के प्रेमपाश में बेबस हो गया था.

तभी सीमा ने वहां छिपे अपने प्रेमी सुरेंद्र को इशारे से बुलाया. सुरेंद्र और सीमा ने मिल कर एक शाल से निर्मल का गला घोंट दिया. निर्मल कुछ नहीं कर सका.

सीमा व सुरेंद्र को जब यह विश्वास हो गया कि निर्मल मर चुका है तो उन्होंने उस के शव को स्कूल के बरामदे में ही छोड़ दिया. उस का छाता वगैरह वहीं पड़ा रहने दिया, लेकिन उस की जेब से मोबाइल फोन निकाल लिया. वह मोबाइल सीमा अपने साथ ले गई.

अपने रास्ते का कांटा निकलने पर सीमा ने विजयी मुसकान से सुरेंद्र को देखा. सुरेंद्र ने सीमा को अपने सीने से लगा लिया और कहा कि अब हमें मिलने से कोई नहीं रोक सकेगा. इस के बाद सीमा अपने घर आ गई और सुरेंद्र अपने गांव चला गया.

पुलिस ने जब निर्मल के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस की आखिरी बात सीमा से होने का पता चला. इस पर पुलिस ने सीमा के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. इस में सीमा की बातें सुरेंद्र से होने की जानकारी सामने आई. इस के बाद पुलिस के शक की सुई सीमा और सुरेंद्र पर घूम गई.

पुलिस ने सब से पहले सीमा से पूछताछ की. पहले तो वह नानुकुर करती रही, लेकिन पुलिस के सवालों के सामने वह ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी. उस ने सारी बातें बता दीं.

इस के बाद पुलिस ने सुरेंद्र को उस के गांव कड़ैया नोहर से पकड़ लिया. उस ने भी पूछताछ में सीमा की बातों की पुष्टि कर दी. पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया. सुरेंद्र खेतों में कीटनाशक दवा का छिड़काव करने का काम करता था.

सीमा की निशानदेही पर पुलिस ने निर्मल का टूटा मोबाइल फोन व सिम कार्ड बरामद कर लिया. सीमा ने निर्मल की मौत के बाद उस का मोबाइल अपने घर पर ला कर छिपा दिया था. लेकिन जब निर्मल के मोबाइल पर कई काल आईं तो गलती से उस ने एक काल रिसीव कर ली थी. बाद में उस ने मोबाइल की सिम तोड़ कर व मोबाइल तोड़ कर नाली में फेंक दिया था.

पुलिस ने गिरफ्तारी के दूसरे दिन सीमा और सुरेंद्र को छीपा बड़ौद की अदालत में पेश किया. अदालत ने दोनों को 2 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया. रिमांड अवधि पूरी होने पर अदालत ने दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया.

इस बीच निर्मल मालव के तीजे की रस्म होने के बाद खजूरिया गांव के तमाम लोग कई ट्रैक्टर ट्रौलियों में सवार हो कर छीपा बड़ौद में उपजिला कलेक्टर के कार्यालय और पुलिस थाने पर पहुंचे. वहां उन्होंने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने निर्मल हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने की मांग की ताकि घटना में शामिल अन्य लोगों के नाम उजागर हो सकें.

इस संबंध में अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए. उन्होंने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की. यह विडंबना रही कि सीमा ने अपनी नासमझी से खुशहाल भविष्य को अंधकारमय बना दिया. उस ने अपने मजदूर प्रेमी की खातिर चार्टर्ड एकाउंटेंट पति की जान ले ली.  ?

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

खेसारीलाल यादव इस गाने से मचा रहे हुड़दंग

भोजपुरी सुपरस्टार खेसारीलाल यादव अपने चाहने वालों के लिए एक जबदस्त सरप्राइज लेकर आए हैं. जी हां, इनका गाना यूट्यूब पर खुब पसंद किया जा रहा है. खेसारीलाल का यह गाना ‘दीदी का देवर आंख मारे’ जबरदस्त हिट हो रहा है. सुनिए यह जबरदस्त गाना.


फिलहाल इस गाने का कोई वीडियो सामने नहीं आया लेकिन यह औडियो ही हर गाने पर भारी पड़ रहा है. कहना गलत नहीं होगा कि यह गाना इस होली पर सबके सिर चढ़कर बोलने वाला है.

आपको बता दें कि हाल ही  में खेसारीलाल की फिल्म ‘कुली नंबर 1’ का ट्रेलर सामने आया था. इस फिल्म में खेसारीलाल के काजल राघवानी भी नजर आने वाली हैं.

अवैध संबंध पत्नी के, जान गई पति की

12 मई, 2017 की बात है. उस दिन पंजाब के शहर जालंधर का रहने वाला रिंकू सुबह से ही काफी परेशान था. क्योंकि तलाक के मामले में उस की पेशी थी. वह उस रात भी सो नहीं सका था. उस के दोनों बच्चे स्कूल चले गए तो कमरे में बैठ कर वह कुछ सोचने लगा. 10 बजे वह बच्चों को खाना पहुंचाने स्कूल गया, जहां से 11 बजे लौटा.

इस के बाद वह कमरे में बैठ कर कुछ लिखने लगा. दोपहर को 11 साल की बेटी पलक घर लौटी तो उस ने जैसे ही दरवाजा खोला, सामने का दृश्य देख कर वह चीख पड़ी. उस के पिता बलविंदर उर्फ रिंकू कपड़े के फंदे में पंखे से लटके थे.

पलक की चीख और रोने की आवाज सुन कर घर वालों के अलावा पड़ोसी भी आ गए. रिंकू को उस हालत में देख कर उस के पिता प्रेमनाथ भी फफकफफक कर रो पड़े. यह पुलिस केस था, इसलिए लाश को नीचे नहीं उतारा. किसी ने फोन कर के इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी जीवन सिंह एएसआई कुलविंदर सिंह, हवलदार जगजीत सिंह, सुरजीत सिंह, सिपाही जसप्रीत सिंघौर, महिला सिपाही वीना रानी के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. पुलिस ने रिंकू की लाश उतार कर कब्जे में ले ली.

चूंकि आमतौर पर आत्महत्या के मामलों में आसपास सुसाइड नोट मिल जाता है, इसलिए पुलिस ने कमरे की तलाशी शुरू कर दी. इस तलाशी में बैड के गद्दे के नीचे एक सुसाइड नोट मिल गया. जिस में रिंकू ने अपनी मौत का जिम्मेदार अपनी पत्नी ज्योति और उस के प्रेमी रजनीश को ठहराया था. सुसाइड नोट में साफसाफ लिखा था कि इन्हीं दोनों के डर की वजह से वह मौत को गले लगा रहा है.

पुलिस ने मृतक के घर वालों से जरूरी पूछताछ कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया और मृतक के पिता प्रेमनाथ के बयान और सुसाइड नोट  के आधार पर ज्योति और उस के प्रेमी रजनीश मल्होत्रा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया.

पुलिस घटनास्थल पर काररवाई कर ही रही थी कि रोतीबिलखती ज्योति वहां पहुंच गई. थानाप्रभारी के आदेश पर महिला सिपाही वीना रानी ने ज्योति को हिरासत में ले लिया. थाने ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने अपने प्रेमप्रसंग से ले कर पति के आत्महत्या करने तक की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी-

ज्योति जालंधर शहर की बस्ती दनिशां के कटरा मोहल्ले के रहने वाले बलविंदर उर्फ रिंकू की पत्नी थी. रिंकू 4 भाईबहनों में सब से बड़ा था. उस के पिता प्रेमनाथ का टैंट हाउस था. वह पिता के साथ उसी पर बैठता था. करीब 14 साल पहले सन 2003 में ज्योति  के साथ उस की शादी हुई थी. ज्योति जम्मू की रहने वाली थी.

दोनों की गृहस्थी ठीकठाक चल रही थी. ज्योति 2 बच्चों की मां बन गई थी. वह काफी बोल्ड स्वभाव की थी. शादी से पहले उस के कहीं आनेजाने पर रोक नहीं थी. पर शादी के बाद उस की स्थिति खूंटे से बंधी गाय की तरह हो गई थी. वह घर से निकल कर बाहर घूमना चाहती थी. वह चाहती थी कि उस के ऊपर किसी तरह की कोई पाबंदी न हो. जहां उस का मन करे, वह आएजाए. रिंकू से वह अपने मन की यह बात कहती तो वह खुद के व्यस्त होने की बात कह देता.

एक बार ज्योति पति के साथ जालंधर के शेखां बाजार स्थित आर्टिफिशियल ज्वैलरी के शोरूम पर गई. यह शोरूम जालंधर के टांडा रोड के रहने वाले रजनीश मल्होत्रा का था. वह काफी बड़ा शोरूम था, जहां तमाम लड़कियां काम करती थीं. ज्योति बेहद खूबसूरत थी.

रजनीश मल्होत्रा दिलफेंक किस्म का इंसान था. हालांकि वह बालबच्चेदार था, इस के बावजूद वह सुंदर महिलाओं की तरफ आकर्षित हो जाता था. ज्योति भी उस के दिल की घंटी बजा गई. इसलिए वह उस के बारे में जानने के लिए बेचैन हो उठा. बहरहाल, अपने यारदोस्तों से उस ने पता कर लिया कि जो महिला उस के दिल की घंटी बजा कर बेचैन कर गई है, उस का नाम ज्योति है और वह कटरा मोहल्ले के रहने वाले रिंकू की बीवी है. इस के बाद रजनीश ने कटरा मोहल्ले के ही रहने वाले अपने एक दोस्त से ज्योति और उस के परिवार के बारे में पता किया और ज्योति से नजदीकी संबंध बनाने के उपाय खोजने लगा.

रजनीश ने सोचा कि पहले ज्योति के पति से दोस्ती की जाए, पर पता चला कि रिंकू तो दिन भर पिता के साथ टैंट हाउस पर बैठा रहता है. वह किसी के साथ उठताबैठता नहीं है.

दोस्त ने बताया कि ज्योति को घर में कैद रहना पसंद नहीं है. वह कहीं नौकरी करना चाहती है. यह सुन कर रजनीश खुश हो गया. उस ने दोस्त से कहा कि वह किसी से ज्योति के पास तक यह खबर पहुंचवा दे कि उस की ज्वैलरी शौप में एक काउंटर गर्ल की जरूरत है. दोस्त ने यह बात ज्योति तक पहुंचा दी.

ज्योति अपने घर वालों की इच्छा के खिलाफ नौकरी के लिए रजनीश के शोरूम पर पहुंच गई. रजनीश ने औपचारिक बातचीत के बाद उसे नौकरी पर रख लिया. इस के बाद दोनों में बातें होने लगीं. जल्दी ही उन में दोस्ती भी हो गई.

रजनीश ने अपनी लच्छेदार बातों से ज्योति को जल्द ही अपने जाल में फांस लिया. कुछ ही दिनों में ज्योति वहां केवल मुलाजिम ही नहीं रही, बल्कि रजनीश के दिल पर राज करने लगी. केवल रजनीश ही उसे नहीं चाहता था, बल्कि वह भी रजनीश की दीवानी हो गई थी. ज्योति और रजनीश के बीच अवैधसंबंध बन गए थे.

ज्योति के अवैधसंबंधों की बात गलीमोहल्ले में फैली तो प्रेमनाथ की बदनामी होने लगी. वह सीधेसादे शरीफ इंसान थे. चार लोगों के बीच उन का उठनाबैठना था. लोग उन का बड़ा सम्मान करते थे. बहू के बारे में ऐसी बातें सुन कर उन का सिर शर्म से झुक गया.

और यही बात जब मोहल्ले से होते हुए रिंकू के कानों तक पहुंची तो घर में क्लेश होने लगा. रिंकू ने ज्योति को प्यार से समझाते हुए कहा, ‘‘तुम शादीशुदा और 2 बच्चों की मां हो. हमारे बच्चे अब बड़े हो रहे हैं. घर की बड़ी बहू होने के नाते परिवार के प्रति तुम्हारी कुछ जिम्मेदारियां हैं, जिन से तुम मुंह नहीं मोड़ सकती. ऐसी बातें तुम्हें शोभा नहीं देतीं.’’

‘‘दम घुटता है मेरा यहां, मैं खुले आसमान और खुली हवा में जीना चाहती हूं. अपनी खुशी के लिए अगर मैं किसी से हंसबोल लेती हूं तो बताओ किसी का क्या बिगड़ जाता है.

नहीं बनना है मुझे किसी के घर की छोटीबड़ी बहू. मत पढ़ाओ मुझे खोखली मर्यादाओं और खोखले संस्कारों का पाठ. मैं किसी बात की परवाह नहीं करती. मैं जैसी हूं, वैसी ही बनी रहना चाहती हूं. मुझे जंजीरों में जकड़ने की कोशिश मत करो.’’ ज्योति ने मन की बात कह दी.

पत्नी की बातें सुन कर रिंकू का मुंह खुला का खुला रह गया. वह जानने की कोशिश कर रहा था कि बड़ों का सम्मान करने वाली ज्योति एकदम से बदल कैसे गई. रिंकू को मुंह तोड़ जवाब दे कर ज्योति की जैसे हिम्मत ही बढ़ गई थी. अब वह अपनी मरजी से घर के बाहर जाती, मरजी से लौटती और कभीकभी तो लौटती ही नहीं थी.

जब ज्योति बेकाबू हो गई तो रिंकू ने इस बात की शिकायत उस के मायके वालों से कर दी. ज्योति के पिता कृष्णलाल ने भी उसे समझाया, पर उस पर तो इश्क का जुनून सवार था, इसलिए उस पर पिता की भी बात का कोई असर नहीं हुआ. समय के साथ मामला इतना बढ़ गया कि ज्योति की शह पर रिंकू के घर में रजनीश का पूरा दखल हो गया.

जब भी रिंकू पत्नी को समझाने की कोशिश करता, रजनीश उस के घर आ जाता और रिंकू को बुराभला कहता. कई बार तो उस ने ज्योति के सामने रिंकू की पिटाई भी की. रिंकू बच्चों के भविष्य और परिवार की इज्जत की खातिर अपना मुंह बंद किए रहा. पतिपत्नी के झगड़े के बीच अब अकसर बातबात में ज्योति तलाक की मांग करने लगी.

लगभग 6 महीने पहले रिंकू की बेटी पलक का जन्मदिन था. ज्योति ने घर पर छोटी सी पार्टी रखी थी, जिस में रजनीश ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था. रिंकू के पिता इस पार्टी में नहीं आए थे. पिता होने के नाते रिंकू को बच्चों के साथ बैठना पड़ा.

पार्टी के दौरान ही रजनीश के सामने ज्योति ने तलाक की बात छेड़ते हुए कहा कि उसे हर हालत में तलाक चाहिए. उसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि रजनीश ने बच्चों के सामने ही रिंकू के गालों पर 3-4 थप्पड़ जड़ दिए. इस के 2 दिनों बाद ही ज्योति ने पति का घर छोड़ दिया और वह मखदूमपुर के चरनजीतपुरा में अलग कमरा ले कर रहने लगी.

दिखावे के लिए उस ने यह कमरा अपने आप लिया था, पर वास्तविकता यह थी कि यह कमरा उसे रजनीश ने दिलवाया था और वह भी उसी के साथ रहता था. मार्च, 2017 मे रिंकू ने थाना डिवीजन-5 में ज्योति के घर छोड़ने और रजनीश द्वारा मारपीट करने की शिकायत दर्ज करवा दी थी.

इस के पहले भी समयसमय पर रिंकू ने थाने जा कर अपने घर में बढ़ रहे रजनीश के दबदबे की शिकायत की थी, पर रजनीश अपने प्रभाव से उस की शिकायत की सुनवाई नहीं होने देता था. स्थानीय भाजपा नेता होने के कारण रजनीश का क्षेत्र में काफी दबदबा था. पर इस बार रिंकू ने पुलिस के बड़े अधिकारियों के सामने गुहार लगाई थी, इसलिए उसे थाने में पेश होना पड़ा.

पुलिस पर दबाव बनाने के लिए रजनीश पार्टी कार्यकर्ताओं के पूरे काफिले के साथ थाने पहुंचा था. उस ने पुलिस के सामने लिखित में माफी मांगते हुए रिंकू से कहा था कि आज के बाद वह उस के घर में कोई दखल नहीं देगा. यह 16 मार्च, 2017 की बात है.

इस के 2 दिनों बाद ही रिंकू को ज्योति का तलाक के लिए भेजा हुआ अदालत का नोटिस मिला था. उसी शाम ज्योति ने रिंकू के घर पहुंच कर उसे धमकी दी थी कि बात बढ़ाने से कोई फायदा नहीं है, वह उसे तलाक दे कर अपना पीछा छुड़ा ले वरना अंजाम बड़ा भयानक होगा.

रिंकू अदालत की नोटिस से उतना नहीं डरा था, जितना ज्योति की धमकी से डर गया था. वह अच्छी तरह से जानता था कि ज्योति की इस धमकी के पीछे रजनीश का हाथ है. वह रजनीश की दबंगई से अच्छी तरह परिचित था. इस के बाद रिंकू डराडरा रहने लगा था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस मामले में क्या करे.

पत्नी की वजह से रिंकू की समाज में काफी बदनामी हो चुकी थी. पत्नी की वजह से उस का परिवार समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहा था. इस के अलावा रजनीश ने पिटाई कर के उसे कई बार बेइज्जत किया था. इस से वह काफी हताश हो गया था. इसलिए उस ने 12 मई, 2017 को पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली. पूछताछ के बाद ज्योति को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

रजनीश कुछ दिनों तक अपने बचाव के लिए सिफारिशें करवाता रहा. उस ने भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से थाने और रिंकू के पिता के पास फोन करवा कर मामले को रफादफा करवाने की कोशिश की, पर उस की दाल नहीं गली, अंत में उस ने थाने में आत्मसमर्पण कर दिया. पूछताछ के बाद उसे भी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मजबूत देश बनाएं

यदि अमेरिका चाहता तो उत्तरी कोरिया द्वारा पहले परमाणु बम बनाने पर ही उस पर हमला कर देता पर एक के बाद एक राष्ट्रपतियों ने उत्तरी कोरिया पर केवल आर्थिक प्रतिबंध लगाए. इस बार अमेरिका के खब्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरिया के नेता किम जोंग उन को सिंगापुर के होटल में फेसटूफेस मीटिंग के लिए आने पर मजबूर किया.

इसी तरह कश्मीर समस्या का हल आर्थिक है, सैनिक नहीं. जो लोग गुर्रा रहे हैं कि मार दो, चीर दो, हमला कर दो, युद्ध कर दो वे इतिहास, वास्तविकता और व्यावहारिकता से परे हैं. देश ने हत्या करने वालों की फौज खड़ी कर ली है जिन्होंने 2014 में कांग्रेस को पप्पू की पार्टी साबित कर के भाषणचतुर नरेंद्र मोदी को जितवा दिया था. यह फौज सोचती है कि ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सऐप के जरिए वह पाकिस्तान को डरा देगी. वह यह भी सोचती है कि जैसे तार्किक, समझदार लोगों को अरबन नक्सलाइट कह कर उन का मुंह बंद कर दिया वैसे ही सभी कश्मीरियों को गौहत्यारों जैसा अपराधी बना देगी.

कश्मीर को और पाकिस्तान को कड़ी मेहनत व आर्थिक विकास से जीता जा सकता है. आज पाकिस्तान और भारत के कट्टर एकजैसा व्यवहार कर रहे हैं और दोनों ही तरफ ऐसे लोग भी सत्ता में हैं जिन के लिए आर्थिक विकास नहीं, धमकीभरे बयान सही हैं.

1920 और 1940 के बीच जरमनी ने हार के बावजूद सैकड़ों हवाई जहाज, हजारों टैंक, लाखों बंदूकें बना ली थीं क्योंकि उस के उद्यमियों ने रातदिन मेहनत कर के एक मजबूत आर्थिक देश को जन्म दिया था. हिटलर बकबक करता रह जाता अगर उस के पास वे जहाज, वे लड़ाकू विमान, वे फौजी सामान नहीं होते जिन से उस ने चारों ओर एकसाथ फैलना शुरू कर दिया था.

कई देश, जिन में इंग्लैंड तक शामिल था, हिटलर के जरमनी की आर्थिक शक्ति से डरे हुए थे. उस इंग्लैंड ने चेकोस्लोवाकिया को हिटलर को भेंट में दे डाला था जिस का साम्राज्य दुनियाभर में था.

आज भारत के पास ऐसा कुछ नहीं है कि वह सिर उठा कर पाकिस्तान से या पाकिस्तान से हमदर्दी रखने वाले थोड़े से कश्मीरियों से कह सके कि भारत उन्हें सुख, समृद्धि व सुरक्षा सब देगा. मुख्य भारत अपनेआप में कराह रहा है. कश्मीरियों के साथ भेदभाव तो छोडि़ए, हम तो अपने उस वर्ग को भी जो

85 फीसदी है, खुश नहीं रख पा रहे. हमारे किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं, युवा बेरोजगारी से त्रस्त हैं.

पाकिस्तान को करारा जवाब देना है तो भारत को आर्थिक महाशक्ति बनना होगा, केवल ज्यादा जनसंख्या के बल पर नहीं, प्रतिव्यक्ति ज्यादा उत्पादन के बल पर. सेना भी तभी मजबूत होगी जब उस के लायक भरपूर पैसा होगा. आज हम विदेशों द्वारा कबाड़ में पड़े हवाई जहाज, एयरक्राफ्ट कैरियर, सबमैरीन खरीद रहे हैं, अपने नहीं बना पा रहे. यह ट्विटर वाली फौज लोहे को पीट कर टैंक बनाना नहीं जानती.

आज इस तरह का माहौल बना दिया गया है कि जो थोथे नारे न लगाए उसे देशद्रोही मानना शुरू कर दिया जाता है. व्यावहारिक बात करने वाले को लिबटार्ड कह कर गाली दी जाती है, उस के खिलाफ बेमतलब की एफआईआर दर्ज करा दी जाती है ताकि वह जेलों या अदालतों में सड़े.

पुलवामा का बदला मजबूत देश बना कर लेना होगा, एक मजबूर सरकार को युद्ध में बलि चढ़ाने से नहीं. गरीब देश के गरीब सैनिक कितना लड़ सकते हैं. उन्हें आर्थिक व तकनीकी ताकत दो.

खेसारीलाल की इस फिल्म का ट्रेलर है जबरदस्त, देखें वीडियो

भोजपुरी स्‍टार खेसारीलाल यादव और काजल राघवानी स्‍टारर भोजपुरी फिल्‍म ‘कुली नंबर 1’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है. फिल्‍म का ट्रेलर रिलीज होते ही इंटरनेट पर वायरल हो गया है. ‘कुली नंबर 1’ का ट्रेलर जबरदस्त है, जिसमें खेसारीलाल यादव और काजल राघवानी के साथ अन्‍य कलाकार भी जबरदस्त एक्‍शन में नजर आ रहे हैं.

हाल ही में यूट्यूब पर रिलीज किए गए इस ट्रेलर को खूब पसंद किया जा रहा है. मीडिया रिपोर्टस के अनुसार काजल राघवानी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि इस फिल्म को दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं. इसमें मेरा किरदार काफी स्‍ट्रांग है. फिल्‍म की कहानी में महिलाओं का सम्‍मान भी खूब किया गया है. काजल ने कहा कि जिस तरह से आज हम सब महिलाओं के सम्मान की बात कर रहे हैं, यदि हमेशा हर क्षण, हर दिन उनको इसी तरह का सम्मान दिया जाए तो शायद ही उन पर कोई विपत्ति आए.

फिल्‍म ‘कुली नंबर 1’ में खेसारीलाल यादव और काजल राघवानी के अलावा पूजा गांगुली, देव सिंह, अनूप अरोड़ा, किरण यादव, महेश आचार्या,सीपी भट्ट,मनोज सिंह, बलराम पांडेय, बिना पांडेय आदि है.

अर्जुन कपूर से अपने रिश्ते पर क्या कहा मलाइका ने

अर्जुन कपूर और मलाइका अरोड़ा का रिश्ता बौलीवुड की कुछ हौट गौसिप्स टौपिक्स में से एक है. हाल ही में करण जौहर के शो में मलाइका का आना हुआ और वहां उन्होंने अर्जुन कपूर की खूब तारीफ की. एक बार फिर से उन्होंने अपने और अर्जुन कपूर के रिश्ते को लेकर अपनी बात रखी है.

मालइका ने कहा कि उनके और अर्जुन के रिश्ते को लेकर मीडिया ने काफी कुछ कहा. ये सब मीडिया का बनाया हुआ है. मलाइका ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि सभी मूव औन कर के प्यार और साथी पाना चाहते हैं. कोई ऐसा जिसके साथ वह सामंजस्य बिठा सकें. यदि ऐसा हो जाता है तो मैं मानती हूं कि आप लकी हैं. अगर आपको दूसरा मौका मिलता है तो आप लकी हैं क्योंकि जीवन में खुश रहने का दूसरा मौका आपको मिल गया है.

गौरतलब है कि जब अर्जुन करण के शो में आए थे तब करण ने उनसे पूछा था क्या वह अपनी गर्लफ्रेंड को अपने परिवार से मिलवायेंगे. इसपर अर्जुन ने कहा था कि ऐसा करना ही होगा. बहुत कुछ है जो परिवार में पिछले कुछ महीनों में हुआ है और इसने मुझे जीने का नया नजरिया दिया है. उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने एक साथी की कीमत को पहचाना है. अब ऐसे में देखना यह है कि दोनों अपनी शादी की खबर कब तक सभी से शेयर करते हैं.

आतंकी वारदात

मोदी सरकार को एक और झटका लगा जब ऐन चुनावों से पहले कश्मीर में आतंकवादियों ने जम्मू से श्रीनगर जा रहे सीआरपीएफ की बसों के काफिले पर आत्मघाती हमला कर के 40 जवानों को शहीद कर दिया. एक मारुति ईको वैन में 70 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ भरा गया और यह 78 वाहनों के बीच आ गई और फिर उस को उड़ा दिया गया जिस से 2 बसों में सवार सैनिकों में से 40 की तुरंत मुत्यु हो गई.

पुलवामा के आदिल अहमद डार ने हमले को अंजाम दिया. बाद में सोशल मीडिया पर उस का मैसेज वायरल हुआ जो घटना से कुछ दिनों पहले रिकौर्ड किया गया था. पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे जैश ए मोहम्मद ने भी दावा किया कि उस ने हमला करवाया.

दिल दहलाने वाले इस हत्याकांड ने फिर जगजाहिर कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी और महबूबा मुफ्ती की साझी सरकार का आतंकवादियों पर कोई असर नहीं पड़ा है और वे अपना अलगाववाद किसी भी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं.

इस तरह की आतंकवादी घटना का हो जाना देश की गुप्तचर संस्थाओं के निकम्मेपन की पोल खोलता है क्योंकि यह कांड बिना पूर्व योजना के नहीं किया जा सकता है. इस के लिए लंबी प्लानिंग चाहिए होती है और इतने सारे वाहन किस समय कहां होंगे, यह पता होना जरूरी है. हमारी गुप्तचर संस्थाएं यदि यह सूंघ नहीं पाईं तो बेहद अफसोस की बात है.

कश्मीर में ही नहीं, देश के कई हिस्सों में आतंकवादियों के हौसले ऐसी करतूतों के सफल हो जाने से बुलंद हो जाते हैं. पंजाब में छिटपुट सुरसुराहाट शुरू हो गई है. छत्तीसगढ़ में माओवादी चुप नहीं हैं. उत्तरपूर्व में प्रस्तावित नागरिक कानून के कारण बेहद नाराजगी है. कश्मीर में हमारी सुरक्षाव्यवस्था में साफ दिखता क्रैक इन सब के हौसले मजबूत करता है.

कहने को तो केंद्र में हमारे पास एक मजबूत सरकार है पर जब सारे फैसलों के लिए केवल एक ही शख्स अधिकृत हो तो परेशानियां हो सकती हैं. भाजपा अगर महबूबा मुफ्ती के मारफत जम्मूकश्मीर पर ले दे कर फैसले करने के मूड में होती तो शायद शांति का कुछ माहौल बनता पर दोनों कट्टरवादियों ने अपनेअपने स्टैंड पर अड़े रह कर अलगाववादी आतंकवादियों को भरपूर मसाला दे दिया. आम कश्मीरी को यह भरोसा नहीं हो पा रहा है कि उस का विकास तो भारत के साथ ही होना है.

धर्म के नाम पर उसे अलग करने की छूट मिली हुई है क्योंकि दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार खुद ही हर समय धर्म का आलाप करती रहती है. जब नागरिकता कानून में धर्म को आधार बनाया जा सकता है तो कश्मीरियों को कैसे समझाएंगे कि अल्पसंख्यक हो कर भी वे भारत में कहीं ज्यादा सुखी रहेंगे. कुछ बिगड़ैल सिरफिरे तो अति कराएंगे ही, जैसे मैदानी इलाकों में गौरक्षकों से कराई जाती है.

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