‘राबड़ी देवी’ के किरदार में दिखाई देने वाली हैं ये Bhojpuri एक्ट्रेस, देखें Photos

भोजपुरी इंडस्ट्री (Bhojpuri Industry) की जानी मानी एक्ट्रेसेस में से एक स्मृति सिन्हा (Smriti Sinha) अपने फैंस के बीच काफी पौपुलर हैं. स्मृति सिन्हा (Smriti Sinha) अक्सर अपने किरदार को लेकर सुर्खियों में रही हैं और इसी के चलते एक बार फिर भोजपुरी एक्ट्रेस स्मृति सिन्हा अपनी आने वाली फिल्म को लेकर सुर्खियों का विषय बन गई हैं. जी हां, आपको बता दें कि स्मृति सिन्हा अपनी आने वाली फिल्म जिसका नाम ‘लालटेन’ (Lantern) है में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Rabri Devi) के किरदार में दिखाई देने वाली हैं.

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हाल ही में स्मृति सिन्हा (Smriti Sinha) द्वारा दिए गए एक इंटरव्यू के चलते उन्होनें इस फिल्म की जानकारी दी और सबको बताया कि वे इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड है. सबसे बड़ी बात ये है कि इस फिल्म की शूटिंग तक पूरी हो चुकी है और काफी हद तक ये फिल्म रिलीज होने के लिए तैय्यार है, लेकिन देश में कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते सभी शूटिंग और फिल्म रिलीज अटकी हुई हैं.

 

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स्मृति सिन्हा (Smriti Sinha) ने अपने रोल के बारे में बात करते हुए बताया कि उन्हें इस रोल के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी थी और तो और अब वे काफी नर्वस हैं कि उनके इस किरदार को देखने के बाद औडियंस का क्या रिएक्शन होगा. स्मृति सिन्हा ने अपने इंटरव्यू के दौरान कहा कि,- राबड़ी देवी का स्टाइल, उनका लुक और उनके बोलने का अंदाज काफी अलग था तो ऐसे में खुद को इस किरदार के लिए तैय्यार करना काफी चुनौती भरा था.

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स्मृति सिन्हा इन दिनों काफी प्रोजेक्टस पर काम कर रही हैं और साथ ही वे भोजपुरी एक्टर पवन सिंह (Pawan Singh) के साथ भी औन-स्क्रीन रोमांस करती दिखाई देने वाली हैं.

उड़ता बिहार

धनबाद और बोकारो जिले की सरहद के पास बसे अमलाबाद इलाके में बिहार से आ कर रह रहे पासियों की लौकडाउन में लौटरी ही लग गई है. धनबाद में शराब की तमाम दुकानें बंद होने के चलते शराबियों को आसानी शराब नहीं मिल रही है. अगर शराब मिल भी रही है, तो उन्हें चोरीछिपे इसे खरीदने के लिए मोटी कीमत चुकानी पड़ रही है. पहले 500 रुपए में मिलने वाली शराब के लिए उन्हें अब 1,000 से 1,200 रुपए देने पड़ रहे हैं, जिस का सीधा असर उन की जेब पर पड़ रहा है. साथ ही, इतनी मोटी रकम चुकाने के लिए शराबी तैयार भी नहीं दिखते.

बढ़ी ताड़ी की मांग

शराबबंदी के चलते अब कई शराबी शराब की जगह ताड़ी पीने को मजबूर हो गए हैं. यह ताड़ी उन्हें कम पैसे में मिल रही है. नशेड़ियों का मानना है कि जो नशा 500 रुपए की शराब में होता था, वही नशा 40 रुपए की ताड़ी में होता है.

इन लोगों का यह भी कहना है कि लौकडाउन के चलते 500 रुपए की शराब 1,200 रुपए तक में मिलने लगी है. इस वजह से लोग शराब छोड़ कर ताड़ी पीने लगे हैं. अमलाबाद से सटे भौंरा, सुदामडीह, डिगवाडीह के रहने वाले लोग सुबह दामोदर नदी पार कर पैदल ही अमलाबाद पहुंच जाते हैं. इन्हें लौकडाउन की भी कोई परवाह नहीं होती और न ही इन पर किसी तरह की ठोस कार्यवाही की जा रही है.

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गोली का गोलमाल

अचानक से बढ़ी ताड़ी की मांग को देख ताड़ी बेचने वाले पासी भी जम कर फायदा उठा रहे हैं और ताड़ी में ज्यादा नशा करने के लिए वे एक दिन या 2 दिन पुरानी ताड़ी और उस में नशे की कोई गोली मिला कर लोगों को दे रहे हैं, जिस वजह से इन दिनों ताड़ी पीने वाले लोगों के लिए भी खतरा बढ़ गया है.

इधर नशा न मिलने पर बिहार का रहने वाला कमल दवा की दुकानों व दूसरी दुकानों पर भटकता फिर रहा है, पर उसे कहीं नशा नहीं मिल पा रहा. वह कहता है, ‘‘आप की कोई पहचान वाला हो तो दिलवा दो भाई साहब, क्योंकि अब मुझ से नशे के बिना रहा नहीं जा रहा है.”

कमल का आगे कहना है कि उस के जैसे कई लोग हैं जो नशे के लिए भटक रहे हैं. चाहो तो शहर की बस्तियों में सर्वे करवा लो. एक स्टडी के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के डर से, अकेलेपन से घबरा कर, आनेजाने की मनाही से बड़ी तादाद में लोगों ने खुदकुशी की है. मिसाल के तौर पर विड्रोल सिम्टम्स से ठीक तरह से निकल पाने के साथ लोगों ने आफ्टर शेव लोशन या सैनेटाइजर पी लिया, जिस से कइयों की जान भी जा चुकी है.

कोरोना के चलते लौकडाउन होने से मुजफ्फरपुर समेत 11 जिलों में मानसिक रोगियों की तादाद बढ़ रही है. बेचैनी, घबराहट, चिंता, माइनिया व डिप्रैशन के मरीजों की तादाद में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन में कई ऐसे हैं जिन में खुदकुशी करने की सोच की शिकायत मिली है और कइयों ने नशा का रुख अपना लिया है.

नशे के मामले में बिहार भी पंजाब की राह पर चल पड़ा है. राजधानी पटना और आसपास के इलाकों  में ड्रग्स का कारोबार तेजी से फैल रहा है. हेरोइन, ब्राउन शुगर और गांजा जैसी नशीली चीजों के सौदागरों की लगातार गिरफ्तारी से इस बात की तसदीक हो रही है कि बिहार में ड्रग्स के जब्त किए जाने का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है.

दरअसल, यह ग्राफ सरकार ही दिखा रही है और यह भी बता रही है कि कैसे ट्रेन और हवाईजहाज से अब नशीली चीजें बिहार पहुंच रही हैं. बिहार सरकार ने भले ही शराब के कारोबारियों के अरमानों पर बुलडोजर चला दिया हो, लेकिन बिहार में नशे के सौदागरों की जड़ें और मजबूत हो गई हैं.

सरकार भले ही दावा करती है कि बिहार में शराबियों की तादाद अब कम हो गई है, लेकिन हकीकत यह है कि बिहार अब उड़ता पंजाब की तरह उड़ता बिहार बन चुका है, जहां राजधानी पटना से ले कर हर शहर, कसबे तक में नशे के सौदागरों का जाल बिछ गया है. चाहे पड़ोसी देश नेपाल का ड्रग माफिया हो या मुंबई से ले कर कोलकाता तक के नशे के सौदागर, सभी का नैटवर्क बिहार में फैला हुआ है. सरकारी रिपोर्ट की ही मानें तो शराबबंदी के बाद बिहार में नशीली चीजों की बरामदगी का आंकड़ा 1000 गुना बढ़ गया है. ब्राउन शुगर, अफीम, गांजा, चरस और हेरोइन से ले कर नशे की दवाओं का सेवन इस कदर बढ़ा है कि शराबियों की तादाद भी पीछे छूट गई है.

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आखिर क्या हो रहा है ? बिहार में ऐसी चीजों की तस्करी एकाएक कैसे बढ़ गई? कैसे बिहार में नशे का कारोबार रोजाना फलफूल रहा है? यह सब पुलिस के लिए भी परेशानी का सबब बना हुआ है.

पटना में बड़ा गिरोह

साल 2016 में पटना पुलिस ने थाईलैंड से आई हेरोइन पकड़ी थी. चूंकि इस की कीमत ब्राउन शुगर से ज्यादा होती है, इसलिए तस्करों ने इसे बेचना शुरू कर दिया. पिछले 6 महीने में डीआरआई (डायरैक्टोरेट औफ रेवेन्यू इंटैलिजैंस) और बिहार पुलिस ने 30 क्विंटल से ज्यादा गांजा जब्त किया है. वहां साढ़े 6 किलो चरस, 15 किलो ब्राउन शुगर और हेरोइन बरामद की जा चुकी है.

पटना में ब्राउन शुगर ने भी पैर पसार लिए हैं. भाभीजी उर्फ राधा का गिरोह बड़े पैमाने पर यह काम कर रहा है. पुलिस ने उसे 10 लाख रुपए और एक किलोग्राम ब्राउन शुगर के साथ गर्दनीबाग से दबोचा था, वह इन रुपयों से नशे का स्टॉक करने जा रही थी.

इस के बाद अभिमन्यु नामक एक शख्स को 4 किलोग्राम ब्राउन शुगर के साथ पकड़ कर जेल भेजा गया. बेउर जेल में रहने के बावजूद भाभीजी ने धंधा जारी रखा. इस राज पर से परदा तब उठा, जब 3 दिन पहले पोस्टल पार्क से उस के गुरगे सुदामा की गिरफ्तारी हुई. सुदामा के कमरे में पुलिस ने 2.111 किलोग्राम गांजा और 80,000 की नकदी बरामद की थी.

सुदामा ने बताया कि भाभीजी जेल से उसे फोन से बताती है कि कब, कहां और किस के पास माल लेना है. माल (ब्राउन शुगर) ले कर वह कमरे में आता था, एक ग्राम पुड़िया तैयार करता था, जिसे वह एजेंट को 400 रुपए में बेच देता था.

एजेंट नशे के आदी लोगों को 100 रुपए मुनाफे पर एक पुड़िया बेचता था. केवल सुदामा के जरीए भाभीजी उर्फ राधा जेल में रहते हुए 50 लाख रुपए का कारोबार कर लेती थी. उस के जैसे कितने लोग भाभीजी के लिए काम कर रहे हैं , यह उसे नहीं पता.

नैटवर्क दूसरे राज्यों तक

हेरोइन की खरीद और बिक्री के लिए आरा शहर का गंगा इलाका भी बदनाम हो रहा है. यहां के तस्करों का नैटवर्क बिहार की राजधानी पटना से ले कर, झारखंड, कोलकाता और दिल्ली तक फैला हुआ है. भोजपुर का बिहिया और शाहपुर इलाका भी इस की जद में है.

बिहार के बक्सर जिले के कई इलाकों के अलावा शहर के शांतिनगर को हेरोइन की उपलब्धता के लिए चिन्हित  किया गया है. 28 मार्च, 2019 को बिहार की भोजपुर पुलिस ने झारखंड के जसीडीह इलाके के गिधनी गांव के बाशिंदे सिकंदर को गिरफ्तार किया था. उस के पास से ब्राउन शुगर की 300 पुड़िया बरामद की गई थी. पूछताछ में पता चला कि बरामद ब्राउन शुगर आरा शहर के गंगाजी इलाके से खरीदने के बाद झारखंड में बेचा जाता है.

अब तक की पूछताछ से पुलिस को जो जानकारी मिली है उस के मुताबिक बक्सर जिले से हेरोइन की तस्करी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से संचालित की जाती है. वहां से माल बक्सर आता है, फिर बक्सर से दूसरे ब्लौकों में रहने वाले तस्करों को इस की सप्लाई की जाती है.

बिहार में पूरी तरह से नशाबंदी है. इस के लिए कठोर कानून भी लागू है, जिस के तहत बिहार में शराब बेचना, पीना और रखना कठोर दंडनीय अपराध है, लेकिन शराबबंदी कानून के लागू होने के बाद भी बिहार के लोग खासकर नौजवान पीढ़ी नशे के लिए तरहतरह की नशीली चीजों का सेवन करने लगे हैं. शराबबंदी के बाद बिहार ड्रग माफिया के लिए बड़े मार्केट में तबदील होता जा चला गया और लोग नशे की तलाश में नएनए रास्ते तलाशते चले गए, जिस में चरस, गांजा, अफीम, हेरोइन के बाद सांप के जहर का भी खूब इस्तेमाल होने लगा.

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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पटना जोन के मुताबिक, ओपियम और हाशिश जैसी ड्रग्स के जब्ती मामले में बिहार देश में अव्वल है. गांजा जब्ती में आंध्र प्रदेश के बाद बिहार दूसरे नंबर पर है. सब से खास बात यह है कि साल 2015 के बाद बिहार में ड्रग्स की जब्ती में 1000 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. साल 2015 में 14.4 किलो ग्राम गांजा जब्त हुआ, साल 2016 में यह 10,800 किलोग्राम हो गया और साल 2017 में 28,888 किलोग्राम की जब्ती यह बताने को काफी है कि शराब का विकल्प गांजा बना.

साल 2015 में बिहार में हशिश जैसे नशीली चीज की कोई जब्ती नहीं हुई, जबकि साल 2017 में यह 244 किलोग्राम हो गया, 2015 में 1.7 किलोग्राम ओपियम जब्त हुआ, जबकि साल 2016 में 14 किलोग्राम और साल 2017 में यह आंकड़ा 329 किलोग्राम पहुंच गया.

नशे के बाजार की पड़ताल

राजधानी पटना की सड़कों पर जब न्यूज 18 ने एक खबर शुरू की तो महज 10 साल के बच्चे ने सब के होश फाख्ता कर दिए और राज्य सरकार की तमाम बंदिशों को ठेंगा दिखाते हुए बताया कि हर दुकान में इन दिनों नशे का कारोबार चल रहा है. जब न्यूज 18 ने इस जाल में फंसे लोगों की नजात में जुटे पटना के सब से बड़े अस्पताल ‘पीएमसीएच’ में जानकारी लेनी चाही तो डाक्टर के साथ मरीज के सवालों ने भी सब को चौंका दिया.

नशे के मकड़जाल में फंसे लोगों को इस जाल से निकालने में जुटी संस्थाओं की भी मानें तो इन संस्थाओं में भी मरीजों की तादाद में इजाफा हुआ.

बिहार के मुख्यमंत्री भी ड्रग्स के इस फैलते जाल से हैरान थे. इधर विपक्ष ने भी शराबबंदी को ही मुख्य मुद्दा बना डाला. राजद के एक नेता का कहना था कि नीतीश सरकार ने जब शराबबंदी का ऐलान किया था, तो यह आत्ममुग्धता वाला कदम था. कोई फ्रेमवर्क नहीं था. कोई तैयारी नहीं थी, इसलिए नशाबंदी में कोई कमी नहीं आई, जिस का नतीजा बिहार भुगत रहा है.

तस्कर नएनए तरीकों से ड्रग्स की तस्करी में जुटे हैं. पटना में गांजा की खेप पकड़ी गई. यह तस्करों का खेल बड़े ही शातिर दिमाग के साथ खेला जा रहा है. सरकार के डाक महकमे के जरीए तस्करी की जा रही है.

बिहार एसटीएफ एसओजी-एक की टीम ने पटना जंक्शन पर बनी रेल मेल सर्विस यानी आरएमएस से तकरीबन डेढ़ क्विंटल गांजे को जब्त किया था. रेलवे पोस्टल महकमे के दफ्तर में रखी गई 7 बोरियों को जब खोला गया तो उस में 13 बंडल मिले और हर बंडल में 10-10 किलोग्राम गांजा रखा था. गांजे के इन बंडलों की पैकिंग इस अंदाज में की गई थी कि किसी को भी भनक न लगे.

जानकारों के मुताबिक, यह गांजे की तस्करी का बिलकुल ही नया तरीका सामने आया. 130 किलोग्राम गांजे की इस खेप को त्रिपुरा से हाजीपुर के लिए बुक कराया गया था. लेकिन यह जान कर हैरानी होगी कि यह खेप सीधे सड़क या ट्रेन से नहीं, बल्कि फ्लाइट के जरीए पटना लाई गई था और फिर ट्रेन से उसे जगहजगह पहुंचाया गया था. इतना ही नहीं, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ ) की एक टीम ने सांप के 1.87 किलोग्राम जहर पाउडर के साथ 3 लोगों को गिरफ्तार किया था.

आंकड़ों में नशे का कारोबार

जुलाई, 2017 के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे काफी चौंकाने वाले थे. शराबबंदी के बाद कुल दर्ज मामले, 25,528 थे, जबकि कुल गिरफ्तारियां 35,414 तक थीं. इस में देशी शराब की जब्ती 3,85,719 लिटर थी और विदेशी शराब की जब्ती 5,961,172 लिटर थी. अप्रैल, 2016 से जून, 2017 तक 1,931 दोपहिया वाहनों को जब्त किया गया, जबकि 739 अन्य वाहन जब्त किए जिन में ट्रक भी शामिल थे. दिलचस्प बात यह है कि ऐसे ही एक ट्रक की 8.5 लाख रुपए में नीलामी की गई थी. 284 निजी भवन या भूखंडों को सील किया गया था और 59 कमर्शियल भवनों मसलन होटल वगैरह पर ताला लगाया गया था.

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शराब नष्ट करने का आंकड़ा देखें तो जून, 2017 तक 97,714 लिटर देशी शराब और 15,8,829 लिटर विदेशी शराब नष्ट की गई थी. शराबबंदी के बाद, बिहार के अलगअलग हिस्सों में साल 2015-16 में 2,492 किलोग्राम गांजा, 17 किलोग्राम चरस, 19 किलोग्राम अफीम, 205 ग्राम हेरोइन के अलावा नशीली दवाओं की 462 गोलियां बरामद की गईं, वहीं साल 2016-17 में 13,884 किलोग्राम गांजा, 63 किलोग्राम चरस, 95 किलोग्राम अफीम और 71 किलोग्राम हेरोइन के साथ नशीली दवाओं की 20,308 गोलियां जब्त की गईं. हालांकि, यह आंकड़ा सरकारी है, लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें, तो बरामदगी इस से कहीं ज्यादा थी.

इंटरस्टेट सिंडीकेट ड्रग्स के कारोबार में सक्रिय है और बिहार में धड़ल्ले से ब्राउन शुगर, सांप के जहर और चरस को असम, त्रिपुरा, ओडिशा और दूसरे राज्यों से लाया जाता है.

खोखला करता नशे का कारोबार

बिहार में नशे का कारोबार तेजी से फलफूल रहा है और शराबबंदी के बाद तो इस में और भी तेजी देखी जा रही है, लेकिन दुखद बात यह है कि नशे के इस दुष्चक्र में किशोर और युवा वर्ग के लोग दिनप्रतिदिन फंसते जा रहे हैं. एक तरह से कहें तो जिस तरह चीन में ब्रिटेन ने अफीम युद्ध शुरू किया, ठीक उसी तरह प्रशासनिक अनदेखी ने देश के किशोर और युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने का काम किया है. बिहार के कई इलाकों में नशा करने वाले, जुआ खेलने वाले हर चौकचौराहे पर नजर आ जाएंगे. पुराने खंडहरनुमा मकान, गंदी जगह, टूटीफूटी झोंपड़पट्टी या सुनसान जगहों पर धंसी हुई आंखें, पिचके गाल और बेतरतीब बिखरे हुए बाल के साथ हिलते हुए शरीर इन की पहचान हैं. ये नौजवान ब्राउन शुगर, अफीम, चरस और गांजे का सेवन करते हैं. कुछ तो फोर्टविन नामक इंजैक्शन के आदी भी बन गए हैं.

युवा मन को जोश और उमंग की उम्र कहा जाता है. यही उम्र का वह पड़ाव होता है जब वे अपने भविष्य के सपने बुनते हैं और उन्हें आकार देते हैं, पर आज कुछ युवाओं की नसों में जोश कम और नशा ज्यादा दौड़ रहा है. नशा का कारोबार बढ़ता ही जा रहा है और युवा पीढ़ी नशे की आदी होती जा रही है. जिस युवा पीढ़ी के बल पर भारत विकास के पथ पर प्रगतिशील होने का दंभ भर रहा है, उस युवा पीढ़ी में नशे की सेंध लग रही है, जो दिन पर दिन युवा पीढ़ी में अपने पैर पसार रही है. युवाओं में नशा इस कदर हावी हो गया है कि नशा अब मौजमस्ती की नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी की जरूरत बन गया है.

अगर हम आंकड़ों की बात करें तो चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 65 फीसदी युवा नशाखोरी से ग्रस्त हैं, जिन की उम्र 18 साल से भी कम है. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देश की 70 से 75 फीसदी आबादी किसी न किसी तरह का नशा करती है, जिस में सिगरेट, शराब व गुटका की ओर युवा सब से ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं और 3 में से एक युवा किसी न किसी तरह के नशे का आदी है.

एक सर्वे के मुताबिक, देश में हर रोज तकरीबन 5,500 युवा तंबाकू से बनी चीजों का सेवन करने वालों की श्रेणी में आते हैं. तंबाकू का इस्तेमाल 48 फीसदी चबाने, 38 फीसदी बीड़ी और 14 फीसदी सिगरेट के रूप में होता है. उस में सब से ज्यादा 86 फीसदी तंबाकू खैनी, जर्दा के रूप में इस्तेमाल होता है.

औरतें भी पीछे नहीं

भारत में 12 करोड़ से भी ज्यादा लोग धूम्रपान करते हैं, जिस में 20 फीसदी औरतें धूम्रपान करती हैं. सिगरेट पीने के मामले में भारत की लड़कियां और औरतें अमेरिका के बाद पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं.

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी ने साल 1980 से साल 2012 तक 185 देशों में सिगरेट पीने वालों पर एक रिसर्च करने के बाद बताया कि औरतों के धूम्रपान के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है. साल 1980 में भारत में तकरीबन 53 लाख औरतें सिगरेट पी रही थीं, जिन की तादाद साल 2012 में बढ़ कर 1 करोड़, 27 लाख तक पहुंच गई.

इस के अलावा शराब का सेवन भी भारतीय युवाओं में तेजी से फैल रहा है जिस में औरतें भी अछूती नहीं हैं. पैरिस की और्गनाइजेशन फोर इकोनौमिक कारपोरेशन ऐंड डवलपमैंट नामक एनजीओ द्वारा अमेरिका, चीन, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और जरमनी समेत 40 देशों में शराबखोरी के हानिकारक असर संबंधी स्टडी में यह बात सामने आई है कि साल 1992 से साल 2012 तक महज 20 सालों में ही भारत में शराब के उपयोग में 55 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. 20 साल पहले जहां 300 लोगों में से एक आदमी शराब का सेवन करता था, वहीं आज 20 में से एक से ज्यादा आदमी शराब का सेवन कर रहा है. पर औरतों में इस प्रवृत्ति का आना समस्या की गंभीरता को दिखाता है. पिछले 20 सालों में मद्यपान करने वाली औरतों की तादाद में तेजी से बढ़ोतरी हुई है खासकर अमीर और मध्यम वर्ग की औरतों में यह एक फैशन के रूप में शुरू हुआ और फिर धीरेधीरे आदत में शुमार होता चला गया.

औरतों में मद्यपान की बढ़ती प्रवृत्ति के संबंध में किए गए सर्वे दिखाते हैं कि तकरीबन 40 फीसदी औरतें इस की गिरफ्त में आ चुकी हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, तकरीबन 30 फीसदी भारतीय शराब पीने की लत के शिकार हैं और इन में से 50 फीसदी बुरी तरह शराबखोरी की लत के शिकार हैं. अगर सरकारी आंकड़ों की बात करें तो देश में 50 लाख युवा हेरोइन जैसे नशे के आदी हैं. हेरोइन की तरह युवाओं में नशीली दवाओं का सेवन भी नशे के रूप में तेजी से बढ़ रहा है.

भारतीय राष्ट्रीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट की मानें, तो भारत की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा नशीली दवाओं का सेवन ही नहीं करता, बल्कि इस का पूरी तरह से आदी हो चुका है, जिस में पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में बड़ी तादाद के लोग शामिल हैं.

भारत में नशे का कारोबार बहुत बड़ा है और यह दिन पर दिन एक विकराल रूप लेता जा रहा है. भारत में हर साल इस का 181 अरब रुपए का कारोबार होता है. राज्यों की बात करें तो इस में पंजाब सब से पहले नंबर पर है. एक गैरसरकारी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में इस समय 75,000 करोड़ रुपए का ड्रग्स की खपत हर साल हो रही है. यही नहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, तंबाकू के इस्तेमाल के चलते दुनियाभर में 54 लाख लोग हर साल अपनी जान गंवाते हैं, जिस में से 19 लाख मौतें केवल भारत में होती हैं. प्रतिदिन हमारे देश में 2,500 लोग तंबाकू की वजह से मौत के मुंह में जा रहे हैं, वहीं शराब के चलते हर साल लाखों लोग मर रहे हैं.

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अगर सरकार और प्रशासन ने इस दिशा में समय रहते कोई ठोस पहल नहीं की तो एक दिन पूरा देश और युवा भारत नशे की गिरफ्त में होगा, जो आने वाले समय के लिए खतरनाक संकेत है. इस के लिए समाज के सभी वर्गों को जागरूक रहने की जरूरत है, वरना यह देश खत्म होते समय नहीं लगेगा, क्योंकि जब युवा ही नहीं रहेगा, फिर देश का भविष्य क्या होगा, इसलिए सरकार को अपने राजस्व का लालच को छोड़ कर नशे के खिलाफ कोई गंभीर कदम उठाने चाहिए.

लौकडाउन के बीच…

बिहार के हाजीपुर में एक सबइंस्पैक्टर शराब के नशे में धुत्त सड़क किनारे पड़ा मिला जिसे स्थानीय युवकों ने उठाया और नगर थाने की पुलिस को इस की सूचना दी. उस ने खुद ही लोगों को बताया कि वह जहानाबाद टाउन थाने में सबइंस्पैक्टर के पद पर तैनात है. सड़क किनारे पड़े इस पुलिस वाले के कपड़े गीले थे और उस की हालत बेहाल दिखी.

उस पुलिस वाले का कहना था कि वह जहानाबाद से पहले मुजफ्फरपुर जिले के थाने में पोस्टेड था, इसलिए तनख्वाह लेने वहीं जाना पड़ता था. वहीं कुछ लोगों के साथ पार्टी में शराब पी ली थी. लेकिन उसे नहीं पता कि वह मुजफ्फरपुर से हाजीपुर कैसे पहुंच गया?

सोचने वाली बात है कि जब पुलिस ही नियमों को तोड़ रही है, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जाए.

Bigg Boss की इस एक्स कंटेस्टेंट को कास्ट करना चाहती हैं एकता कपूर, देखें Photos

कलर्स टीवी (Colors TV) के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस के सीजन 5 (Bigg Boss 5) में नजर आ चुकी एक्ट्रेस महक चहल (Mehek Chahal) इन दिनों काफी सुर्खियों में हैं. महक चहल ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत साल 2003 में आई फिल्म ‘नई पड़ोसन’ (Nayee Padosan) से की थी और उसके बाद वे एक से एक सुपर हिट फिल्मों में दिखाई देने लगी जैसे कि, ‘वॉन्टेड’ (Wanted), ‘मैं और सिसेज खन्ना’ (Main aur Mrs Khanna), आदी.

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खबरों की माने तो एकता कपूर (Ekta Kapoor) अपने पौपुलर सीरियल ‘नागिन 5’ (Naagin 5) में महक चहल (Mehek Chahal) को मेन लीड रोल के लिए कास्ट करना चाहती हैं. आपको बता दें कि फिलहाल तो महक ने टीवी शोज से काफी दूरी बना रखी है लेकिन अब देखने वाली बात ये होगी की क्या वे एकता कपूर की बात मान कर ‘नागिन 5’ में अपनी अदाकारी के जलवे बिखेरेंगी.

महक चहल (Mehek Chahal) दिखने में काफी खूबसूरत और ग्लैमरस (Glamourous) हैं और यही कारण है कि उनके फैंस उनको काफी पसंद करते हैं और पसंद करने के साथ साथ उनकी हर फोटो और वीडियो पर खूब सारे लाइक्स और कमेंट्स भी करते हैं. इसी के साथ ही महक भी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने फैंस के लिए हॉट फोटोज शेयर करती हैं.

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हाल ही में ये भी सुनने में आया था कि महक चहल का उनके बौयफ्रेंड अश्मित पटेल (Ashmit Patel) से भी ब्रेकअप हो चुका है. अश्मित और महक की प्रेम कहानी बिग बौस (Bigg Boss) के घर में ही शुरू हुई थी और साल 2017 में दोनों ने स्पेन में सगाई भी कर ली थी. लेकिन अब ऐसा सुनने में आया है कि दोनों ने एक दूसरे से अपनी राहें अलग कर ली है और दोनों अपनी अपनी जिंदगी में खुश हैं.

मजाक : खूशबू ने किया जयंत के साथ मजाक

दिल्ली से बैंगलुरु का सफर लंबा तो था ही, लेकिन जयंत की बेसब्री भी हद पार कर रही थी. 3 साल बाद खुशबू से मिलने का वक्त जो नजदीक आ रहा था. मुहब्बत में अगर कामयाबी मिल जाए तो इनसान को दुनिया जीत लेने का अहसास होने लगता है.

ट्रेन सरपट भाग रही थी लेकिन जयंत को उस की रफ्तार बैलगाड़ी सी धीमी लग रही थी. रात के 9 बज रहे थे. उस ने एक पत्रिका निकाल कर अपना ध्यान उस में बांटना चाहा लेकिन बेजान काले हर्फ और कागज खुशबू की कल्पना की क्या बराबरी करते? खुशबू तो ऐसा ख्वाब थी, जिसे पूरा करने में जयंत ने खुद को झोंक दिया था. उस की हर शर्त, हर हिदायत को आज उस ने पूरा कर दिया था. अब फैसला खुशबू का था.

जयंत ने मोबाइल फोन निकाला. खुशबू का नंबर डायल किया लेकिन फिर अचानक फोन काट दिया. उसे याद आया कि खुशबू ने यही तो कहा था, ‘जब सच में कुछ बन जाओ तब मुहब्बत को पाने की बात करना. उस से पहले नहीं. मैं तब तक तुम्हारा इंतजार करूंगी.’ मोबाइल फोन वापस जेब के हवाले कर जयंत अपनी बर्थ पर लेट गया. सुख के इन लमहों को वह खुशबू की यादों में जीना चाहता था.

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5 साल पहले जब जयंत दिल्ली आया था तो वह कुछ बनने के सपने साथ लाया था लेकिन दिल्ली की फिजाओं में उसे खुशबू क्या मिली, जिंदगी की दशा और दिशा ही बदल गई. जयंत ने मुखर्जी नगर, दिल्ली के एक नामी इंस्टीट्यूट में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए दाखिला लिया तो वहां पढ़ाने वाली मैडम खुशबू का जादू पहली नजर में ही प्यार में बदल गया.

भरापूरा बदन और बेहद खूबसूरत. झील सी आंखें. घुंघराले लंबे बाल. बदन का हर अंग ऐसा कि सामने वाला देखता ही रह जाए. जयंत ने खुशबू से बातचीत शुरू करने की कोशिश की. क्लास में वह अकसर मुश्किल सवाल रखता पर खुशबू की सब्जैक्ट पर गजब की पकड़ थी. जयंत उसे कभी अटका नहीं पाया. लेकिन उस में भी बहुत खूबियां थीं इसलिए खुशबू उसे स्पैशल समझने लगी. उस दिन क्लास जल्दी खत्म हो गई. खुशबू ने जयंत को रुकने का इशारा किया. थोड़ी देर बाद वे दोनों एक कौफी हाउस में थे और वहां कहीअनकही बहुत सी बातें हो गईं. नजदीकियां बढ़ने लगीं तो समय पंख लगा कर उड़ने लगा.

एक दिन मौका देख कर जयंत ने खुशबू को प्रपोज भी कर दिया, लेकिन खुशबू ने वैसा जवाब नहीं दिया जैसी जयंत को उम्मीद थी. खुशबू की बहन की शादी थी. उस ने जयंत को न्योता दिया तो जयंत भला ऐसा मौका क्यों छोड़ता? काफी अच्छा आयोजन था लेकिन जयंत को इस सब में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी.

दकियानूसी रस्में रातभर चलने वाली थीं, इसलिए जयंत मेहमानों के रुकने वाले हाल में जा कर सो गया. लोगों की आवाजें वहां भी आ रही थीं. सब बाहर मंडप में थे. रात में अचानक किसी की छुअन की गरमाहट से जयंत की नींद खुली. हाल की लाइट बंद थी, लेकिन अपनी चादर में लड़की की छुअन वह अंधेरे में भी पहचान गया था.

खुशबू इस तरह उस के साथ… ऐसा सोचना भी मुश्किल था. लेकिन अपने प्यार को इतना करीब पा कर कौन मर्द अपनेआप पर कंट्रोल रख सकता है? चंद लमहों में वे दोनों एकदूसरे में समा जाने को बेताब होने लगे. खुशबू के चुंबनों ने जयंत को मदहोश कर दिया. अपने करीब खुशबू को पा कर उसे जैसे जन्नत मिल गई.

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तूफान थमा तो खुशबू वापस शादी की रस्मों में शामिल हो गई और जयंत उस की खुशबू में डूबा रहा. कुछ दिन बाद ऐसा ही एक और वाकिआ हुआ. तेज बारिश थी. मंडी हाउस से गुजरते समय जयंत ने खुशबू को रोड पर खड़ा पाया.

जयंत ने फौरन उस के नजदीक पहुंच कर अपनी मोटरसाइकिल रोकी. दोनों उस पर सवार हो इंडिया गेट की ओर निकल गए. खुशबू को रोमांचक जिंदगी पसंद थी इसलिए वह इस मौके का लुत्फ उठाना चाहती थी. बारिश का मजा रोमांच में बदल रहा था. प्यार में सराबोर वे घंटों सड़कों पर घूमते रहे.

जयंत और खुशबू की कहानी ऐसे ही आगे बढ़ती रही कि तभी अचानक इस कहानी में एक मोड़ आया. खुशबू ने जयंत को ग्रैंड होटल में बुलाया. डिनर की यह पार्टी अब तक की सब पार्टियों से अलग थी. खुशबू की खूबसूरती आज जानलेवा महसूस हो रही थी. ‘आज तुम्हारे लिए स्पैशल ट्रीट जयंत,’ मुसकरा कर खुशबू ने कहा.

‘किस खुशी में?’ जयंत ने पूछा. ‘मुझे नई नौकरी मिल गई… बैंगलुरु में असिस्टैंट प्रोफैसर की.’

जयंत का दिल टूट गया था. खुशबू को सरकारी नौकरी मिल गई थी, इस का मतलब उस की जुदाई भी था. जयंत ने दुखी लहजे में खुशबू को उस की जुदाई का दर्द कह सुनाया.

खुशबू ने मुसकराते हुए कहा, ‘वादा करो तुम पहले कंपीटिशन पास करोगे, नौकरी मिलने के बाद ही मुझ से मिलने आओगे… उस से पहले नहीं… न मुझे फोन करोगे और न ही चैट… ‘मैं तुम्हारी टीचर रही हूं इसलिए मुझे यह गिफ्ट दोगे. फिर हम शादी करेंगे… एक नई जिंदगी… एक नई प्रेम कहानी… मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी.

‘3 साल का समय… बस, तुम्हारी यादों के सहारे निकालूंगी.’ अचानक से सबकुछ खत्म हो गया. धीरेधीरे समय बीतने लगा. जयंत ने अपना वादा तोड़ खुशबू को फोन भी किए लेकिन उस ने मीठी झिड़की से उसे पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा.

जयंत को भी यह बात चुभ गई. अब पूरा समय वह अपनी पढ़ाई पर देने लगा. प्यार में बड़ी ताकत होती है इसलिए मुहब्बत की कशिश इनसान से कोई भी काम करा लेती है. जयंत को भारतीय सर्वेक्षण विभाग में अच्छी नौकरी मिल गई. अब खुशबू को पाने में कोई रुकावट नहीं बची थी. जयंत ने अपना वादा पूरा कर लिया था.

अचानक ट्रेन रुकी तो जयंत की नींद खुली. सुबह होने को थी. बैंगलुरु अभी दूर था. जयंत दोबारा आंखें मूंदे हसीन सपनों में खो गया. टे्रन जब बैंगलुरु पहुंची, तब तक शाम हो चुकी थी. जयंत ने खुशबू को फोन मिलाया लेकिन फोन किसी अनजान ने उठाया. वह नंबर खुशबू का नहीं था. उस का नंबर अब बदल चुका था. दूसरे दिन वह मालूम करता हुआ खुशबू के कालेज पहुंचा.

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लाल गुलाब और खुशबू के लिए गिफ्ट से भरे बैग जयंत के हाथों में लदे थे. वैसे भी जयंत को खुशबू को उपहार देने में बड़ा सुकून मिलता था. अपनी पौकेटमनी बचाबचा कर वह उस के लिए छोटेछोटे गिफ्ट लाता था जिन्हें पा कर खुशबू बहुत खुश होती थी. खुशी से लबरेज जयंत कालेज गया. खुशबू के रूम में पहुंचा तो जयंत को देख वह उछल पड़ी. मिठाई का डब्बा आगे कर जयंत ने उसे खुशखबरी सुनाई.

खुशबू ने एक टुकड़ा मुंह में रखा और जयंत को शुभकामनाएं दीं. जयंत में सब्र कहां था. उस ने आगे बढ़ उस का हाथ थामा और चुंबन रसीद कर दिया.

‘‘प्लीज जयंत… यह सब नहीं… प्लीज रुक जाओ,’’ अचानक खुशबू ने सख्त लहजे में जयंत को टोकते हुए रोका. ‘‘लेकिन यार, अब तो मैं ने अपना वादा पूरा कर दिया… तुम से मेरी शादी…’’ निराश जयंत ने पूछा.

‘‘सौरी जयंत… प्लीज… मैं ने शादी कर ली है. अब वे सब बातें तुम भूल जाओ..’’ ‘‘क्या? भूल जाऊं… मतलब?’’ जयंत उसे घूरते हुए बोला.

‘‘हां, मुझे भूलना होगा,’’ मुसकराते हुए खुशबू बोली, ‘‘वे सब मजाक की बातें थीं… 3 साल पहले कही गई बातें… क्या अब इतने दिन बाद… तुम्हें तो मुझ से भी अच्छी लड़कियां मिलेंगी…’’ मुसकराते हुए खुशबू बोली.

जयंत उलटे पैर लौट पड़ा. लाल गुलाब उस के भारी कदमों के नीचे कुचल रहे थे. मजाक की बातें शायद 3 साल में खत्म हो जाती हैं… माने खो देती हैं… जयंत समझने की नाकाम कोशिश करने लगा.

नई शुरुआत : भाग 1

आभास पटना घूमने आया था. वह पटना से 20 किलोमीटर दूर फतुहा का रहने वाला था. फतुहा पटना का सैटेलाइट टाउन है. वहीं के हाईस्कूल से उस ने मैट्रिक पास की थी, पर 12वीं जमात में फेल हो जाने के बाद उस के पिता ने उस की पढ़ाई छुड़वा कर अपने कारोबार में लगा दिया. आभास के पिता नंदू का मछली का थोक कारोबार था. वह पिता के साथ पटना आया था. वहां गंगा किनारे बने गोलघर के ऊपर चढ़ कर दूर तक फैली हुई गंगा नदी और शहर को आंखें फाड़ कर देख रहा था.

उसी दिन आभास से थोड़ी ही दूर पर खड़ी आभा भी गोलघर की ऊंचाई से शहर का नजारा देख रही थी. उस के पिता पूरी सीढि़यां चढ़ नहीं सके, तो आभा को ऊपर भेज कर वे खुद बीच में ही थक कर बैठ गए. आभा आभास से एक क्लास जूनियर थी.

अचानक आभास की नजर आभा पर पड़ी, तो वह बोला, ‘‘क्यों री छबीली, तू यहां भी?’’

आभा बोली, ‘‘यह तेरे फतुहा का नुक्कड़ नहीं है. यहां पर तेरी दादागीरी नहीं चलेगी.’’

आभास के पिता नंदू बिहार सरकार की डेरी का फ्रैंचाइज लेने आए थे, जो उन्हें मिल गई थी. आभास उम्र में आभा से 5 साल बड़ा था. आभा के पिता स्कूल मास्टर थे. उन की 2 बेटियां थीं, आभा और विभा. दोनों ही बहुत खूबसूरत थीं, पर आभा जरा ज्यादा खूबसूरत थी.

आभा के पिता अपनी पत्नी से कहा करते, ‘मेरी बेटियां बिलकुल राजकुमारी जैसी हैं. मैं उन के लिए राजकुमार जैसे लड़के ढूंढूंगा.’

नंदू ने आभास को अपने मछली के कारोबार में लगा रखा था. मछली और डेरी दोनों से अच्छी कमाई हो जाती थी.

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आभा जब स्कूल जाती, तो नुक्कड़ पर आभास अकसर उसे छेड़ता. कभी आंख मारता, कभी सीटी बजाता, तो कभी फिल्मी गाने गाता.

एक दिन जब आभा स्कूल जा रही थी, तो आभास गाने लगा, ‘‘हर दिल जो प्यार करेगा, वो गाना गाएगा…’’

आभा ने भी तपाक से कहा, ‘‘हर दिल जो प्यार करेगा, वो जूते खाएगा…’’ और अपनी सैंडल उतार कर उस की ओर हवा में लहराई.

आभास भी कम नहीं था. वह बोला, ‘‘देखना, एक दिन तू मेरे जूते चाटेगी.’’

आभा घर में अपने मातापिता को यह सब बताती, तो वे कहते कि बस तू आंखें झुका कर उस की बातों को अनसुना समझ कर आगे बढ़ जाना. उस के मुंह मत लगना.

आभा 12वीं में पढ़ रही थी. उस की मां ने पति से कहा भी, ‘‘अब इस के हाथ पीले कर दो.’’

पर आभा का मन आगे पढ़ने को था. उस के पिता भी यही चाहते थे. 12वीं के बाद आभा का दाखिला फतुहा के संत कबीर विद्यानंद कालेज में हुआ. कालेज जाने के रास्ते में भी आभास अकसर उसे छेड़ता, लेकिन वह उसे अनदेखा कर देती.

अभी आभा ने कालेज में पहला साल भी पूरा नहीं किया था कि उस के पिता की मौत हो गई. मां ने आभा की पढ़ाई छुड़ा दी. मां और मामा दोनों मिल कर उस के लिए लड़का खोजने लगे, पर जहां जाते दहेज मुंह फाड़े उन का काम बिगाड़ देता.

इसी बीच आभास की मां ने उस के लिए रिश्ते की बात की. उस ने कहा कि शादी का पूरा खर्च वे उठाएंगी. कोई दहेज नहीं चाहिए. उन्होंने तो अपनी ओर से 10 हजार रुपए भी शादी में खर्च के लिए दिए.

आभा की मां ने झटपट हां कर दी. आभा ने मना भी किया, पर मां ने कहा, ‘‘तू विदा होगी, तभी तो तेरी छोटी बहन विभा की शादी भी जल्दी कर के मुझे चैन मिलेगा.’’

आभा की शादी आभास से हो गई. मां ने उसे समझाया कि बीती बातों को भूल कर आभास को इज्जत देना.

मां ने विदाई के पहले कहा, ‘‘मेरी बेटी की खूबसूरती पर आभास फिदा हो जाएगा. घूंघट उठाते ही वह तुम से बेशुमार प्यार करने लगेगा. तलवे चाटेगा, देखना.’’

आभा ससुराल आ गई. सुहागरात थी. वह घूंघट में लाल सितारों वाली साड़ी में फूलों से सजे पलंग पर बैठी आभास का इंतजार कर रही थी.

देर रात ‘धड़ाम’ की आवाज से दरवाजा खुला और आभास ने अंदर आ कर जोर से सिटकिनी लगा दी.

आभास के आते ही देशी शराब की बदबू कमरे में फैल गई. वह पलंग पर कूदते हुए जा बैठा और बिना कुछ बात किए आभा के कपड़े उतारने लगा.

आभा बोली, ‘‘अरेअरे, यह क्या कर रहे हो?’’

आभास बोला, ‘‘वही जो मर्द को सुहागरात में करना चाहिए.’’

‘‘अरे, तो एकदम से ऐसे तो नहीं…’’ आभा बोली.

‘‘चुप, मुझे सब पता है कि क्या करना है,’’ आभास ने कहा.

आभास ने आभा को बिस्तर पर लिटा दिया. आभा के मुंह से एक चीख निकली ही थी कि आभास ने अपने हाथ से उस का मुंह बंद कर दिया और अपनी मर्दानगी दिखाने लगा.

शराब की बदबू से आभा को घिन आ रही थी. वह चाह कर भी उस की कैद से नहीं निकल सकी.

थोड़ी ही देर में आभास की मर्दानगी खत्म हो गई और उस की पकड़ ढीली पड़ी, तो आभा को चैन मिला.

आभास अपनी प्यास बुझा कर एक ओर लुढ़क गया और जल्द ही खर्राटे लेने लगा.

आभा ने भी दूसरी ओर करवट बदल ली. वह सोचने लगी कि क्या मर्दों के लिए सुहागरात का यही मतलब होता है?

आभास रोज सुबह गंगा किनारे से मछलियों की टोकरियां थोक भाव में खरीदता और अपने पुराने स्कूटर में बांध कर शहर के बाजार में बेचता. वह खुद खुदरा मछलियां नहीं बेचता था और न ही काटता था, फिर भी मछली की बदबू उस की देह से आती थी. कभी रात को घर लौटते समय रास्ते में वह अकसर शराब भी पी लेता.

इसी तरह रोज रात में वह आभा के पास आता और अपनी हवस पूरी कर लेता. आभा प्यार के दो शब्द सुनने के लिए तरस जाती.

इसी तरह 2 साल बीत गए. आभा बीचबीच में अकसर सासससुर से बोलती थी कि उसे आगे पढ़ना है, पर कोई उस की बात से सहमत नहीं था.

आखिर एक दिन आभा भूख हड़ताल पर बैठ गई. उस ने कहा कि उसे कम से कम प्राइवेट बीए करने दिया जाए, तब उसे पढ़ने की इजाजत मिली.

वह घर से ही पढ़ने लगी. लेकिन आभास के बरताव में कोई बदलाव नहीं आया था.

2 साल और बीततेबीतते आभा ने आभास में थोड़ा सा बदलाव महसूस किया. वह अब भी दारू पीता था, पर पहले से कम. अब वह उस के पास आने के पहले अकसर नहा लिया करता.

आभा को लगा कि शायद वह जल्द ही बीए करने वाली है, इसलिए आभास थोड़ा बदलने की कोशिश कर रहा है. आभा ने बीए पास कर लिया. उस को एक सरकारी स्कूल में लेडीज कोटे में क्लर्क की नौकरी मिल गई थी. पर समस्या थी कि यह स्कूल फतुहा से 45 किलोमीटर दूर इसलामपुर शहर में था. ट्रेनें तो थीं, पर आनेजानेके समय के मुताबिक नहीं थीं.

आभा तो नौकरी करना ही चाहती थी. उस के सासससुर दोनों भी यही चाहते थे. सरकारी नौकरी में तनख्वाह के अलावा पैंशन वगैरह भी मिलती थी. शुरू में तो आभास इस के खिलाफ था, पर बाद में मातापिता के समझाने पर वह भी मान गया.

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आभा ने इसलामपुर आ कर नौकरी जौइन कर ली. उसे छोड़ने आभास और ससुर नंदू दोनों आए थे. उन्होंने आभा के लिए एक कमरे का मकान किराए पर ले लिया था. साथ में एक मोबाइल फोन, एक खाट, बिछावन, स्टोव, कुछ बरतन वगैरह भी खरीद कर दे दिए थे.

अगले दिन आभास और उस के पिता नंदू जब घर लौट रहे थे, तब उन्होंने बहू से कहा, ‘‘सरकारी नौकरी है, काम तो नाममात्र ही होगा. जब जी चाहे हाजिरी लगा कर आ जाना.

‘‘सरकारी स्कूलों में तो साल में 3-4 महीने छुट्टी ही रहती है. सासससुर और पति का भी खयाल तुम्हें ही रखना है न.’’

रास्ते में आभास ने कहा, ‘‘आप ने उस पर काफी पैसा खर्च कर दिया?’’

नंदू बोले, ‘‘बेटा, इसे सोने का अंडा देने वाली मुरगी समझ. अगले महीने से इसे तनख्वाह मिलने लगेगी.’’

उन के लौट आने पर आभास की मां ने बेटे से कहा, ‘‘छोड़ आया बहू को… अब तुम लोग और कितने दिन इंतजार कराओगे? मैं पोतेपोती का मुंह देखने के लिए तरस रही हूं.’’

आभास चुप रहा. इधर आभा ने स्कूल जाना शुरू कर दिया. विनय भी उसी स्कूल में टीचर था. वह स्मार्ट और हंसमुख था. वह इसलामपुर से तकरीबन 25 किलोमीटर दूर नालंदा के पास एक गांव से रोज अपनी मोटरसाइकिल से आताजाता था. धीरेधीरे आभा से उस की दोस्ती हो गई.

एक दिन बरसात में भीगते हुए विनय शाम को आभा के घर पहुंचा. आभा ने दरवाजा खोला, तो उसे देख कर कहा, ‘‘तुम इस समय यहां… अंदर आओ.’’

विनय बोला, ‘‘हैडमास्टर साहब ने कहा है कि आज से दफ्तर की चाबी तुम रखोगी. मैं तो दूर से आता हूं, आने में मुझे देर हो जाती है.’’

‘‘वह तो ठीक है, पर तुम तो बिलकुल भीग गए हो. मैं तौलिया देती हूं, बदन पोंछ लो, तब तक मैं चाय बना देती हूं.’’

‘‘हां, तुम्हारे हाथों की चाय पीए बिना जाऊंगा भी नहीं.’’

थोड़ी देर में आभा चाय बना लाई. चाय की चुसकी लेते हुए विनय बोला, ‘‘चाय कड़क बनी है, बिलकुल तुम्हारे जैसी.’’

‘‘मजाक अच्छा कर लेते हो.’’

‘‘मैं एकदम सही बोल रहा हूं. तुम जितनी खूबसूरत हो, चाय भी उतनी ही अच्छी बनाती हो.’’

‘‘अच्छा, बारिश तो थमने का नाम ही नहीं ले रही है. इतनी दूर जाओगे कैसे?’’

‘‘नहीं जाऊंगा. यहीं ठहर जाता हूं. 2 रोटियां आज ज्यादा बना देना.’’

‘‘रोटियां तो 2 की जगह 4 बना दूंगी, मगर तुम यहां रुकोगे कैसे?’’ आभा बोली.

विनय बोला, ‘‘तुम डर गईं. मैं ने तो यों ही कहा था. रोज सुबह गांव में गायबैलों को चारा खिलाना मेरा ही काम है.’’

एक घंटे बाद बारिश थमी, तो विनय चला गया. पर न जाने क्यों आभा सोच रही थी कि काश, बारिश न थमी होती और वह रुक ही जाता, तो कम से कम अकेलेपन का गम तो नहीं सताता.

उस दिन आभा को तनख्वाह मिली थी. शाम को विनय उस के घर आया और बोला, ‘‘तुम्हारी पहली तनख्वाह मिली है. पार्टी तो होनी ही चाहिए,’’ बोल कर विनय ने मिठाई का पैकेट उसे पकड़ा दिया.

आभा बोली, ‘‘बोलो, क्या चाहिए?’’

‘‘मेरे बोलने से क्या मिल जाएगा?’’ इतना कह कर विनय हसरत भरी निगाहों से उसे देखने लगा.

‘‘तुम कभी सीरियस नहीं होते क्या? हमेशा हंसीमजाक के मूड में रहते हो. बैठो, मैं ने आलू के परांठे और मटरपनीर की सब्जी बनाई है. खाने के बाद कौफी बनाती हूं.’’

‘‘तब तो मजा आ जाएगा,’’ विनय ने कहा.

दोनों ने डिनर किया और कौफी पी. रात के 8 बज चुके थे. आभा विनय को छोड़ने बाहर तक आई.

विनय ने मोटरसाइकिल स्टार्ट करनी चाही, पर नहीं हुई. फिर उसे याद आया, तो बोला, ‘‘मैं तो भूल ही गया था कि मोटरसाइकिल रिजर्व में थी और तेल लेना भूल गया था. अब तो यहां पैट्रोल पंप भी बंद हो जाता है. मैं तो घर नहीं जा सकता.’’

दोनों कुछ देर ऐसे ही एकदूसरे को देखते रहे. आभा कुछ बोल नहीं पा रही थी.

विनय बोला, ‘‘आज की रात अपने घर में पनाह दे सकती हो क्या?’’

आभा ने न चाहते हुए भी हां में सिर हिलाया. घर में बैड तो एक ही था. उस ने विनय को बैड दे दिया. खुद रसोईघर के पास चटाई पर सो गई. नींद तो दोनों में से किसी को नहीं आ रही थी.

आधी रात में विनय पानी लेने के बहाने रसोईघर में गया, तो रास्ते में जानबूझ कर आभा से टकरा गया.

आभा बोली, ‘‘क्या हुआ?’’

‘‘कुछ नहीं, पानी लेने आया था,’’ और गिलास ले कर उसी के पास बैठ गया.

आभा भी घबरा कर बैठ गई. तब विनय ने उसे लिटा दिया और कहा, ‘‘सौरी, मैं ने तुम्हें भी जगा दिया.’’

आभा मन ही मन सोच रही थी, ‘मैं सोई ही कब थी कि जगाने की जरूरत होगी.’

विनय बोला, ‘‘रात में बंद कमरे में एक मर्द और एक औरत को बंद कर दिया जाए और चुपचाप रहने को कहा जाए, तो यह तो एक कठोर सजा है, तो तुम कुछ बोलो न?’’

‘‘क्या बोलूं?’’

‘‘कुछ अपने बारे में ही बताओ. अपने मायके और ससुराल के बारे में.’’

आभा थोड़ी भावुक हो चली और उठ कर बैठ गई. उस ने भरी आंखों से अपनी कहानी सुनाई.

विनय ने धीरेधीरे उस के कंधे सहलाए, फिर माथे पर एक चुंबन लिया. आभा चुपचाप बैठी रही.

विनय बोला, ‘‘तुम बहुत ही बहादुर हो. तुम्हारी जितनी भी तारीफ करूं, कम होगी,’’ इतना बोल कर वह आभा से सट कर जा बैठा और कुछ देर तक उस के बालों को छेड़ता रहा. फिर उस के गालों को सहलाते हुए उस के होंठों को भी चूम लिया और अपने आगोश में ले लिया.

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फिर विनय बोला, ‘‘जी चाहता है कि तुम्हें भरपूर प्यार करूं.’’

आभा के पूरे बदन में तरंगें उठने लगीं. दोनों के सब्र का बांध भी टूट पड़ा. एक अजीब सा दर्द हुआ उसे, पर दर्द और मजे का मधुर मेल उसे बेहद अच्छा लगा.

सुबह विनय एक डब्बे में पैट्रोल ले कर आया. मोटरसाइकिल स्टार्ट कर आभा से बोला, ‘‘दफ्तर में बोल देना कि आज मैं नहीं आ पाऊंगा.’’

2 दिन बाद आभास आभा से मिलने आया. उस दिन छुट्टी थी. उस ने आभा से अपना पत्नी धर्म निभाने को कहा, तो वह बोली, ‘‘तुम्हें अक्ल कब आएगी? दिन में इस वक्त?’’

‘‘मुझे तो बस यही वक्त मिला है,’’ बोल कर आभास ने उसे जबरन खाट पर लिटा दिया. अपना पति हक हासिल कर वह बोला, ‘‘ला, अपनी तनख्वाह दे मुझे. बापू ने मांगी है.’’

आभा बोली, ‘‘कुछ तो मैं अपनी मां को दूंगी और कुछ अपने खर्च के लिए रखूंगी. बाकी पैसे देती हूं. ससुरजी को दे देना.’’

आभास ने जबरन और पैसे छीनने चाहे, तो वह गरज उठी, ‘‘इस के आगे कोई हरकत की, तो पुलिस को बुलाऊंगी और अभी शोर मचाऊंगी.’’

जितने पैसे आभा दे रही थी, उतने लेना ही आभास ने ठीक समझा. वह जाने लगा, तो आभा बोली, ‘‘पैसे के लिए तुम्हें दोबारा यहां आने की जरूरत नहीं है. मैं ससुरजी के अकाउंट में भेज दिया करूंगी.’’

आभास चला गया. उस के बाद लौट कर वह आभा के पास नहीं आया. आभा और विनय का मिलनाजुलना चलता रहा. आभा को उस से कोई शिकायत नहीं थी. बीचबीच में वह अपनी मां के यहां जाती थी. मां जब ससुराल का हाल पूछतीं, तो बोल देती कि सब ठीक है.

आभा 2-3 बार अपनी ससुराल भी गई, तो पता चला कि आभास ज्यादातर घर से बाहर ही रहता है. घर में बोलता था कि आभा के पास जाता रहता है.

इसी तरह तकरीबन 2 साल बीत गए. विनय के साथ उस का रिश्ता उसी तरह चलता रहा.

आभा की तबीयत कुछ गड़बड़ चल रही थी. वह लेडी डाक्टर के पास गई, तो पता चला कि वह पेट से है.

आभा ने विनय से कहा, तो वह उसे ही समझाने लगा, ‘‘तुम्हें सावधानी बरतनी चाहिए थी. अब भी वक्त है, तुम अपना बच्चा गिरवा लो.’’

‘‘क्यों? तुम अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हो. इसे हम दोनों को मिल कर हल करना होगा. मैं बच्चा नहीं गिरवा रही. क्यों न हम दोनों कोर्ट मैरिज कर लें? आभास का कोई अतापता नहीं. मैं उस से तलाक ले लूंगी.’’

‘‘हमारी शादी नहीं हो सकती?’’

‘‘क्यों?’’

‘‘इसलिए कि मैं शादीशुदा हूं. मेरे बीवीबच्चे हैं.’’

‘‘पर, तुम ने तो कहा था कि घर पर सिर्फ तुम्हारे बूढ़े मातापिता हैं.’’

‘‘सच बोलने पर क्या तुम अपने पास आने देतीं?’’

‘‘तो क्या मैं तुम्हारे मनोरंजन का साधन थी?’’

‘‘तुम जो भी समझो. मैं इस बच्चे का बाप नहीं हो सकता. मैं तो तुम्हारी जिस्मानी जरूरतें पूरी कर रहा था.’’

(क्रमश:)

क्या आभा ने विनय के बच्चे को जन्म दिया? क्या आभास से उस का रिश्ता निभ पाया? पढि़ए अगले अंक में…

नई शुरुआत : भाग 2

पिछले अंक में आप ने पढ़ा:

12वीं जमात में फेल होते ही आभास को उस के पिता ने अपने मछली कारोबार में लगा दिया. आभा स्कूल मास्टर की बेटी थी. वह जहां भी जाती, आभास उसे छोड़ने का एक भी मौका नहीं छोड़ता था. पिता की मौत के बाद हालात ऐसे बने कि आभा व आभास की शादी हो गई. फिर आभा की नौकरी एक स्कूल में लग गई, जहां विनय नाम का एक मास्टर उस के नजदीक आ गया. दोनों में संबंध बने और आभा पेट से हो गई.

अब पढि़ए आगे…

 ‘‘मेरी जरूरतें वैसी नहीं थीं. वह तो औरत की कमजोरी है, जो जरा सा प्यार मिलने पर पिघल जाती है. तुम अपनी बीवी को भी धोखा दे रहे थे. मेरे पास सिर्फ ऐयाशी के लिए आते थे.’’

‘‘तुम कुछ भी समझ सकती हो,’’ विनय बोला.

‘‘हां, कुछ भी कहने से तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि तुम बेशर्म हो. तुम एक नंबर के बुजदिल भी हो. अभी तुम्हारी करतूत तुम्हारी बीवी को बता दूं, तो पतलून गीली हो जाएगी. जाओ, दफा हो जाओ. दोबारा अपना चेहरा मत दिखाना. थूकती हूं तुम पर.

‘‘मैं चाहूं तो कानूनन इस बच्चे का हक भी दिला सकती हूं, पर मैं इतनी कमजोर भी नहीं, जितना तुम ने सोचा होगा,’’ आभा गुस्से में इतना कुछ बोल गई.

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विनय तो चला गया, पर आभा बहुत देर तक रोती रही. वह स्कूल जाती. विनय से सामना भी होता, पर कोई बात नहीं होती. लेकिन विनय का खोट उस की कोख में बारबार चोट मारता था. कुछ ही दिनों के बाद अचानक आभास आया. आभा उसे पहचान न सकी. वह बिलकुल बदल गया था. अच्छे कपड़ों में वह सजासंवरा लग रहा था.

आभास बोला, ‘‘कैसी हो आभा? तुम तो पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो.’’

आभा बोली, ‘‘मैं ने पैसे तो भेज दिए थे. अब क्या चाहिए तुम्हें? मेरा पीछा छोड़ो.’’

‘‘अरे, तुम मेरी बीवी हो. मैं तुम्हें कैसे छोड़ दूंगा?’’ आभास ने इतना बोल कर जबरन उसे खाट पर बिठा दिया और खुद बगल में बैठ गया.

आभा बोली, ‘‘आज कोई जबरदस्ती की, तो मैं शोर मचाऊंगी.’’

‘‘तुम शोर मचा लो, लेकिन मैं कोई जबरदस्ती नहीं करने जा रहा हूं.’’

‘‘देखो, मैं बहुत परेशान हूं. मुझे और तंग न करो.’’

‘‘मैं तुम्हारी परेशानी जानता हूं. जैसा भी हूं, तुम्हारा पति हूं, तुम्हें मुसीबत से बचाने आया हूं. मैं सब जानता हूं.’’ आभा हैरानी से उस की ओर देख कर बोली, ‘‘क्या जानते हो तुम?’’

आभास बड़े ही सब्र से बोला, ‘‘तुम मां बनने वाली हो.’’

आभा को बड़ी हैरानी हुई. वह बोली, ‘‘तुम्हें यह सब कैसे पता चला?’’

‘‘वह सब मैं रास्ते में बताऊंगा. तुम स्कूल जा कर एक हफ्ते की छुट्टी ले लो, फिर आ कर जौइन कर लेना.’’

आभास और आभा टैक्सी से फतुहा जा रहे थे. आभा के पूछने पर आभास बोला, ‘‘तुम्हें जो लड़का सुबहसुबह दूध और अखबार पहुंचाता है, उसे मैं अच्छी तरह से जानता हूं. मैं बीचबीच में यहां भी आता रहा हूं. मास्टर बाबू की मोटरसाइकिल भी तुम्हारे घर के सामने कई बार देख चुका हूं और बाकी खबर उस लड़के से फोन पर लेता रहता हूं. उसी लड़के ने बताया था कि तुम औरतों की डाक्टर से मिलने भी गई थीं.’’

आभास ने आभा का हाथ अपने हाथ में ले लिया. आभा की आंखों से आंसू की बूंदें उस की हथेली पर गिर रही थीं.

आभा बोली, ‘‘तुम इतना बदल कैसे गए?’’

‘‘जब मैं तुम्हारे पास रुपए मांगने गया था, तब तुम्हारी फटकार से मुझे बहुत दुख हुआ. मैं ने 2 साल का आईटीआई का इलैक्ट्रिकल ट्रेड कोर्स में दाखिला लिया. उस के बाद अपनी एक इलैक्ट्रिकल सामान की दुकान खोली और नए बन रहे घरों में वायरिंग का काम किया.

‘‘बाद में पटना में अपार्टमैंट्स में वायरिंग का ठेका लेने लगा. अब तो कुछ ठेके सरकार से भी मिलने लगे हैं. यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है.’’

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आभा उस से सटते हुए बोली, ‘‘मुझे माफ करना. मुझ से भूल हो गई.’’

‘‘माफीवाफी छोड़ो. घर चल कर तुम भूल कर भी उस मास्टर का नाम न लेना. मां जानती हैं कि मैं बीचबीच में इसलामपुर तुम्हारे पास आता रहता हूं. किसी को तुम्हारे पेट से होने को ले कर कोई शक नहीं होगा.’’

‘‘मगर, यह बच्चा तो विनय का ही है.’’

‘‘यह बच्चा सिर्फ हम दोनों का होगा. तुम कहो, तो मास्टर की टांगें तुड़वा दूं?’’

‘‘नहीं, ऐसा कुछ नहीं करना,’’ आभा बोली.

आभास बोला, ‘‘जैसा तुम कहो.’’

आभा अपनी ससुराल आ गई थी. अब घर पहले से काफी साफसुथरा लगता था. रात में जब आभास उस के पास आया, तो वह बोली, ‘‘आज मछली की बदबू नहीं आ रही है.’’

आभास बोला, ‘‘अब सरकार ने मछली वाला ठेका दूसरी पार्टी को दे दिया है. यहां का विधायक मेरी पहचान का है. वही शिक्षा मंत्री भी है. सोच रहा हूं कि उस से बोल कर तुम्हारा ट्रांसफर यहीं करवा दूं.

‘‘कुछ महीने में तुम्हारा काम हो जाएगा. तब तक वहीं काम करती रहो. अगर तुम चाहो, तो नौकरी छोड़ भी सकती हो.’’

आभा बोली, ‘‘आभास, अब मैं जिंदगी के उतारचढ़ाव से थक गई हूं. अब एक सीधीसादी जिंदगी जीने का मन कर रहा है.’’

आभास ने उस से पूछा, ‘‘अच्छा, सचसच बताना कि क्या सारी गलती मेरी ही थी?’’

‘‘कुछ तुम्हारी, कुछ मेरी और कुछ हम दोनों की.’’

‘‘तब क्यों न पुरानी बातों को भूल कर एक नई जिंदगी की शुरुआत करें… आज से और अभी से?’’

यह सुनते ही आभा आभास की बांहों में समा गई.

Bhojpuri एक्ट्रेस रानी चटर्जी को खूब पसंद आया भाईजान का नया गाना, कैप्शन में लिखी इतनी बड़ी बात

बौलीवुड इंडस्ट्री के भाईजान कहे जाने वाले सुपर स्टार एक्टर सलमान खान (Salman Khan) की फैन फौलोविंग के बारे में तो पूरी दुनिया ही जानती है और साथ ही सभी लोग ये भी जानते हैं कि सलमान खान ईद (Eid) के मौके पर हर साल अपने फैंस के लिए एक ऐसा सरप्राइज लेकर आते हैं कि सभी लोग उनके और ज्यादा दीवाने हो जाते हैं. कोरोना वायरस (Corona Virus) जैसी बिमारी के चलते सभी फिल्मों की शूटिंग और तो और फिल्मों की रिलीज तक रुकी हुई हैं तो ऐसे में हमारे भाईजान ने अपने फैंस को ईद के मौके पर अपने एक गाने से खुश कर दिया जिसका नाम है “भाई भाई” (Bhai Bhai).

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इस गाने को खुद सलमान खान (Salman Khan) ने अपनी आवाज दी है और साजिद वाजिद (Sajid Wajid) ने इस गाने का म्यूजिक कम्पोज किया है. सलमान खान के इस गाने को 4 दिनों के अंदर अंदर 26 मिलियन (26 Million) से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है और तो और ये गाना जब से रिलीज हुआ है तब से लेकर अब तक लगातार यूट्यूब ट्रेंडिंग (Youtube Trending) में बना हुआ है.

जहां सभी लोग भाईजान के इस गाने को सुन कर खुशी से झूमने लगे तो वहीं भोजपुरी इंडस्ट्री (Bhojpuri Industry) की जानी मानी एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) को भी इस गाने ने खूब एंटरटेन किया और साथ ही रानी को यह गाना काफी पसंद आया और आए भी क्यूं ना आखिरकार सलमान खान (Salman Khan) ने इस गाने में हिंदू-मुस्लिम (Hindu-Muslim) के भाईचारे की जो बात की है.

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भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) से इस गाने की वीडियो शेयर की है और कैप्शन में सलमान खान का धन्यवाद भी किया है. जी हां रानी चटर्जी ने अपने इस पोस्ट के कैप्शन में लिखा है कि, “Thank you Salman Sir, you have tried to give a very good message through the song, I can understand that you have made this song by looking at the atmosphere of the country, I love you so much. Our upcoming generation should focus on their humanity more than the Hindu Muslim so that the upcoming generation should also think about advancing India by not studying in the Hindu Muslim’s quarrel.Come, friends, spread this message so much that those who are increasing the enmity in the caste, open their eyes and understand that India is one. #hindumuslim #bhaibhai”.

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रानी चटर्जी के इस कैप्शन का मतलब है कि,-  “मैं आपका धन्यावाद कहना चाहती हूं सलमान सर. आपने बहुत ही अच्छा मैसेज देने की कोशिश की है. मैं जानती हूं कि आपने यह गाना आज के समय को ध्यान में रखकर बनाया है. मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं. हमारी आने वाली जेनेरेशन को इंसानियत सीखनी चाहिए, और हिन्दू-मुस्लिम से आगे बढ़कर सोचना चाहिए. इसी से हमारा देश आगे जा सकता है, न कि हिन्दू-मुस्लिम की लड़ाई से. मैं अपने सभी दोस्तों से गुजारिश करती हूं कि वो इस गाने को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और इंसानियत फैलाने में भाईजान की मदद करें. सभी को अपनी आंखें खोलनी चाहिए और समझना चाहिए कि भारत एक है.”

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टेलीविजन इंडस्ट्री के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस के सीजन 6 (Bigg Boss 6) की ट्रौफी जीतने वाली एक्ट्रेस उर्वशी ढोलकिया (Urvashi Dholakia) अपने फैंस की काफी फेवरेट रही हैं. उर्वशी ने कई सारे टेलिवीजन सीरियल्स में काम कर अपने फैंस के दिलों में अपनी अलग ही जगह बनाई है. आपको बता दें कि उर्वशी ढोलकिया ने स्टार प्लस (Star Plus) के सबके पौपुलर सीरियल कसौटी जिंदगी की (Kasautii Zindagii Kay) में कमोलिका (Kamolika) का रोल निभाया था जिसे उनके फैंस ने काफी पसंद किया था.

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इसी के साथ ही उर्वशी ढोलकिया (Urvashi Dholakia) सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं और अपने फैंस को अपने से जुड़ी हर अप्डेट समय समय पर देती रहती हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि एक्ट्रेस उर्वशी ढोलकिया दिखने में काफी सुंदर हैं और इस वजह से वे अक्सर अपनी फोटोज और वीडियोज के चलते चर्चा का विषय बनी रहती हैं.

हाल ही में उर्वशी ढोलकिया (Urvashi Dholakia) ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट (Official Instagram Account) पर अपनी कुछ फोटोज फैंस के साथ शेयर की है जिसे उनके फैंस काफी पसंद भी कर रहे हैं. इन फोटोज में उर्वशी ने रेड कलर का स्विम सूट (Swim Suit) पहना हुआ है और वे अपने स्विमिंग पूल (Swimming Pool) में गर्मियों के खूब मजे ले रही हैं. रेड कलर के स्विम सूट के साथ उन्होनें अपनी आंखों पर धूप से बचने के लिए सन शेड्स (Sun Shades) भी पहने हुए हैं.

 

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Dream ✨✨🌟 #focus #urvashidholakia

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ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब उर्वशी ढोलकिया (Urvashi Dholakia) ने अपनी बोल्ड फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर की हो बल्कि इससे पहले भी उर्वशी अपनी ग्लैमरस (Glamourous) फोटोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं जिसे उनके फैंस काफी पसंद करते हैं और उनकी हर फोटो और वीडियो पर लाइक्स और कमेंट्स की बरसात कर देते हैं.

 

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Freedom ✨✨⭐️ #thought #urvashidholakia

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उर्वशी ढोलकिया की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उनकी शादी 16 साल की उम्र में ही हो गई थी और 17 साल की उम्र में उन्होनें 2 जुड़वा बच्चों को जन्म दे दिया था जिनका नाम उन्होनें क्षितिज (Kshitij) और सागर (Sagar) रखा. आपको बता दें, उर्वशी ढोलकिया सिंगर मदर (Single Mother) हैं और उन्होनें अपने बच्चों की देखभाल अकेले ही की है.

Dr Pk Jain: कही आप भी तो नहीं हैं इरेक्टाइल डिसफंक्शन के शिकार?

सर्वे रिपोर्टस की मानें तो लगभग 40 वर्ष की आयु तक आते-आते ज्यादातर पुरूष इरेक्टाइल डिसफंक्शन का शिकार हो जाते हैं. आसान शब्दों में कहें तो इरेक्टाइल डिसफंक्शन का मतलब है सेक्स करते टाइम अपने गुप्तांग में प्रोपर इरेक्शन न ला पाना या यूं कहें कि अपने साथी को संतुष्ट ना कर पाना. अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो संपर्क करिए लखनऊ के डॉक्टर पी. के. जैन से जो पिछले 40 सालों से इसका इलाज कर रहे हैं.

अक्सर देखने को मिलता है कि ज्यादातर पुरूष तनाव के कारण भी इस बिमारी का शिकार हो जाते हैं और फिर वे इसका या तो घरेलु इलाज करते हैं या फिर किसी गुप्त रोग वाले डौक्टर्स से सलाह या दवा लेते हैं. पर इन सब कोशिशों के बाद भी कई पुरूष ठीक नहीं हो पाते और ज्यादा मात्रा में दवाइयां लेने लग जाते हैं जो कि उनकी सेहत को और ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं.

आइए जानते हैं कुछ खास टिप्स, जिससे इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है.

  1. स्मोकिंग को कहें अल्विदा…

अगर आप बीड़ी या सिगरेट पीने के आदी हैं तो आपको सेक्स करते वक्त स्टेमिना की कमी महसूस होने लगेगी और साथ ही इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी हो सकता है. बीड़ी या सिगरेट का सीधा असर हमारे कई अंगों पर पड़ता है जिससे कई सारी बिमारियां हो सकती हैं. तो अगर आप अपनी सेक्स लाइफ बहतर करना चाहते हैं तो आपको बीड़ी और सिगरेट जैसे पदार्थों से दूर रहना होगा.

  1. डेली वर्क-आउट है जरूरी…

हम अपने पूरे दिन के कामों में अपने शरीर को थोड़ा भी समय नहीं दे पाते जिससे कि हमारा शरीर समय से पहले ही जवाब देने लगता है. अगर हम पूरे दिन में 1 घंटा भी अपने शरीर को देते हैं तो इससे हमारी सेक्स लाइफ पर काफी असर पड़ सकता है क्यूंकि डेली वर्क-आउट से हमारा शरीर बिल्कुल फिट रहता है और बेहतरीन सेक्स लाइफ में फिट एंड हैल्दी शरीर काफी मायने रखता है.

  1. ज़रूरत है कोलेस्ट्रोल कम करने की…

कोलेस्ट्रोल हमारे शरीर में खून का बहाव कम कर देता है जिससे की प्रोपर इरेक्शन होने के चांसेस बहुत कम हो जाते हैं. बौडी को फिट रखने के लिए हेल्दी खाना जैसे हरी सब्जियां, कम फाइड खाना, फूट्स आदि बेहद जरूरी है. हाई कोलेस्ट्रोल के कारण इरेक्शन होना मुश्किल हो जाता है जिस वजह से सेक्स के समय अपने पार्टनर को संतुष्ट करना मुश्किल हो सकता है.

  1. ब्लड प्रेशर पर दें ध्यान…

ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है क्यूंकि प्रोपर इरेक्शन ना होने का एक मुख्य कारण यह है कि, जब खून का बहाव आपके लिंग तक नहीं पहुंच पाता तो इससे आपकी सेक्स करने की अवधि कम हो जाती है और सेक्स लाइफ में काफी बुरा असर पड़ता है. ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखने के लिए सबसे जरूरी है टाइम-टू-टाइम अपना ब्लड प्रेशर चैक करवाना और इसके लिए डौक्टर से सलाह लेना.

लखनऊ के डॉक्टर पी. के. जैन, जो पिछले 40 सालों से इन सभी समस्याओं का इलाज कर रहे हैं. तो आप भी पाइए अपनी सभी  सेक्स समस्या का बेहतर इलाज अंतर्राष्ट्रीय ख्याति एवं मान्यता प्राप्त डॉ. पी. के. जैन द्वाराृ.

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