2 करोड़ की प्रीत: भाग 3

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

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रिंकू को बुलाते वक्त वह इस बात का ध्यान रखती थी कि उस का और चेतन का आमनासामना न हो.  वह यह भी नहीं चाहती थी कि चेतन और उस के संबंधों का राज रिंकू पर खुले, क्योंकि रिंकू भी उस पर खुले हाथ से पैसा खर्च कर रहा था.

रिंकू भी प्रीति की कसी देह और अदाओं पर मर मिटा था. उस का इरादा विदेश में कहीं बस कर कारोबार करने का था. यह बात जान कर प्रीति को लगा कि अब वक्त आ गया है कि चेतन से जितना हो सके, पैसा झटक लो और फिर रायपुर से उड़नछू हो जाओ.

लेकिन एक दिन उस वक्त गड़बड़ हो गई जब सरप्राइज देने की गरज से रिंकू हरियाणा से बिना बताए प्रीति के घर जा पहुंचा और वह भी सीधे बैडरूम में, जहां चेतन और प्रीति गुत्थमगुत्था पड़े थे.

पोल खुल गई तो प्रीति घबरा उठी कि रिंकू अब पता नहीं क्या करेगा. चेतन बहुत कुछ समझने की कोशिश करते हुए चुपचाप कपड़े पहन कर चले गए तो प्रीति ने रिंकू को सब कुछ साफसाफ बता देने में ही बेहतरी समझी.

उसे उम्मीद या डर था कि रिंकू उस पर गरजेगाबरसेगा, बेवफाई का इल्जाम लगा कर उलटे पांव हरियाणा लौट जाएगा लेकिन रिंकू उस का भी उस्ताद निकला. उस ने उसे अपनी बांहों के शिकंजे में कस कर धीरे से कहा कि जब उसे लूट ही रही हो तो पूरा लूट लो फिर हम दोनों इत्मीनान से विदेश में जा कर बस जाएंगे.

देखतेदेखते बंटी और बबली की इस नई जोड़ी ने मिल कर चेतन को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. प्रीति ने चेतन से यह कहा था कि 50 लाख और दे दो क्योंकि मुझे वीजा बनवाना है. विदेश जा कर तुम्हारामेरा रिश्ता और सब कुछ खत्म हो जाएगा फिर तुम इत्मीनान से अपना घर और कारोबार देखना. क्योंकि मैं रिंकू से शादी करने वाली हूं.

लेकिन चेतन के पास अब कुछ नहीं बचा था. प्रीति की प्रीत की असलियत सामने थी और अब तो उस में रिंकू भी शामिल हो गया था. पाईपाई को मोहताज हो चले चेतन को मध्य प्रदेश के सेक्स स्कैंडल से हिम्मत बंधी तो वह सीधे एडीशनल एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के चैंबर में जा पहुंचे और अपनी आपबीती सुना कर इंसाफ की मांग की.

यूं फंसी पुलिसिया जाल में

प्रफुल्ल ठाकुर ने चेतन की कहानी इत्मीनान और विस्तार से सुनी और उन्हें उस पर तरस और गुस्सा दोनों आए. चूंकि अपनी कहानी के साथसाथ चेतन ब्लैकमेलिंग के सारे सबूत उन्हें दे चुके थे कि उन्होंने कबकब कितने पैसे प्रीति को दिए, इसलिए उन्होंने प्रीति के खिलाफ रायपुर के पंडरी थाने में रिपोर्ट दर्ज करा कर जाल बिछा दिया.

दरअसल, प्रीति ने चेतन को 50 लाख रुपए की आखिरी किस्त के बाबत 26 सितंबर की तारीख दी थी, इसलिए उसे रंगेहाथों पकड़ने का मौका पुलिस ने नहीं छोड़ा. इस के पहले प्रीति चेतन की 2 और महंगी कारें रिंकू के सहयोग से छीन कर अपने कब्जे में ले चुकी  थी. जाहिर है, विदेश जाने से पहले वह इन्हें भी बेच देने का मन बना चुकी थी.

26 सितंबर को पुलिस के प्लान के मुताबिक चेतन ने प्रीति को फोन कर पैसों का इंतजाम हो जाने की खबर दी तो प्रीति के पर फड़फड़ाने लगे कि अब मकसद पूरा हो गया. रकम देने रायपुर की जगह कंचना रेलवे क्रौसिंग तय हुई. बातचीत में प्रीति ने बताया भी कि वह पैसे लेने अकेली आएगी और चेतन चाहेगा तो उसे आखिरी बार वह शारीरिक सुख भी देगी जो पहली बार बिलासपुर में दिया था.

प्रफुल्ल ठाकुर ने आननफानन में महिला पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में कंचना रेलवे क्रौसिंग के आसपास तैनात किया और चेतन को एक सूटकेस में नोटों के आकार के कागज के टुकड़े भर कर दे दिए.

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शाम को जैसे ही प्रीति ने चेतन से रुपयों का सूटकेस लिया तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. इस पर प्रीति सकपका उठी, जिसे सपने में भी चेतन के पुलिस के पास जाने की उम्मीद नहीं थी. लेकिन जो भी था, वह सामने था. पंडरी थाने में पहले तो वह ब्लैकमेलिंग की बात से मुकर गई लेकिन जल्द ही टूट भी गई. उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

ताबड़तोड़ काररवाई हुई और प्रीति के फ्लैट पर छापा मार कर पुलिस ने नकदी और वे जेवरात भी बरामद किए जो वक्तवक्त पर चेतन उसे उपहार में देते रहे थे.

प्रीति के कंप्यूटर, मोबाइल और लैपटौप भी जब्त कर फोरैंसिक जांच के लिए भेज दिए गए. फिर पुलिस रिंकू के पीछे पड़ गई जो प्रीति की गिरफ्तारी की खबर सुन कर फरार हो गया था. इस कहानी के लिखे जाने तक रिंकू गिरफ्तार नहीं हो पाया था.

मांबाप भी थे शामिल

छानबीन आगे बढ़ी तो यह भी स्पष्ट हुआ कि ऐसा होना मुमकिन ही नहीं था कि मांबाप को यह न मालूम हो कि प्रीति यह पैसा कैसे कमा रही थी. जब चेतन का उन के फ्लैट पर आनाजाना था और इस के बाद रिंकू का भी तो पुलिस को यकीन हो गया कि प्रीति के पिता रमाकांत तिवारी भी इस ब्लैकमेलिंग में शामिल हैं और वह भी बेहद शर्मनाक तरीके से.

अब तक पुलिस का अंदाजा था कि प्रीति के तार मध्य प्रदेश के सेक्स स्कैंडल से जुड़े होंगे, लिहाजा पुलिस प्रीति और रमाकांत को ले कर इंदौर आई जहां सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ था. लेकिन धीरेधीरे यह स्पष्ट हो गया कि इन दोनों मामलों का सीधे कोई लेनादेना नहीं था. हां, इतना जरूर है कि रमाकांत तिवारी को ठेकेदारी में जबरदस्त घाटा हुआ था इसलिए प्रीति ने मांबाप को रायपुर बुला कर कपड़े की दुकान खुलवा दी थी, जोकि एक कांग्रेसी नेता की थी.

छानबीन में यह भी पता चला कि रमाकांत तिवारी की अनूपपुर और मनेंद्रगढ़ में खासी इज्जत है और उन के परिवार के एक दिग्गज भाजपाई नेता से भी संबंध हैं. लेकिन इन सब बातों का ब्लैकमेलिंग से संबंधित होना नहीं पाया गया.

इधर प्रीति की मां मीडिया के सामने बेटी के बेगुनाह होने की बात यह कहते हुए करती रहीं कि वह बेकसूर है उसे फंसाया गया है और जो पैसा था वह प्रीति के मंगेतर रिंकू का दिया हुआ था. इस बात में कोई दम नहीं था क्योंकि चेतन प्रीति को दिए गए पैसों का ब्यौरा मय सबूत के पुलिस को दे चुके थे. (देखें बॉक्स)

यानी रिंकू के साथसाथ प्रीति के मातापिता भी चेतन को ब्लैकमेलिंग में शामिल थे. फिर अकेली प्रीति को कैसे गुनहगार ठहराया जा सकता है. अब प्रीति और रमाकांत ब्लैकमेलिंग के आरोप में जेल में हैं और चेतन ने मुकम्मल बदनामी झेलने के बाद चैन की सांस ली है कि चलो पिंड छूटा.

शायद वे इकलौते शख्स होंगे जो मध्य प्रदेश के सेक्स स्कैंडल के आभारी होंगे, जिस के चलते वे पुलिस के पास जा कर ब्लैकमेलर्स गैंग से टकराने और निपटने की हिम्मत जुटा पाए.

लेकिन एक बात जिस से वे भी मुकर नहीं सकते, वह यह है कि शुरुआत में वे अपनी बेवकूफी और हवस के चलते प्रीति की प्रीत में फंसे थे. तब प्रीति की मंशा भी उन्हें ब्लैकमेल करने की नहीं, बल्कि सिर्फ मौजमस्ती की थी. लेकिन बाद में हालात ऐसे बनते गए कि उसे ब्लैकमेलिंग पर उतारू होना पड़ा. पिता को ठेकेदारी में घाटा और रिंकू का साथ भी इस खेल में अहम रहा.

यह सेक्स स्कैंडल और ब्लैकमेलिंग कांड दिलफेंक मर्दों के लिए एक सबक है, जो देह की चिकनी सड़क पर पांव रखते ही फिसल जाते हैं और फिर गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा अपनी करतूतें ढंकने के लिए ब्लेकमेलर्स पर लुटाने को मजबूर हो जाते हैं.

किस्तों में कंगाल हुआ करोड़पति 

जिस नाजायज रिश्ते को छिपाने के लिए चेतन ने 2 करोड़ रुपए प्रीति पर लुटा डाले, उसे देख लगता है कि अगर उन के पास और पैसा होता तो वे यूं ही लुटते रहते. लगता ऐसा भी है कि ब्लैकमेलिंग की घोषित शुरुआत 2015 से हुई, जिस का आभास चेतन को हो चला था, इसलिए वे प्रीति को दी जाने वाली रकम का हिसाबकिताब रखते थे और उन की हर मुमकिन कोशिश डिजिटल पेमेंट की होती थी, जिस से सनद रहे और वक्तबेवक्त काम आए और ऐसा हुआ भी.

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प्रीति बाद में इतनी जबरदस्ती पर उतारू हो गई थी कि उस ने चेतन की 3 कारें उड़ा ली थीं. इसी साल जनवरी में चेतन ने शंकर नगर स्थित अपना आलीशान मकान 1 करोड़ 42 लाख रुपए में प्रीति मारवाह को बेचा था, जिस में से अधिकतर पैसा उस उधारी को चुकाने में चला गया जो उन्होंने दोस्तों और रिश्तेदारों से प्रीति को देने के लिए ली थी.

चेतन ने पुलिस को 46 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के सबूत दिए जो उन्होंने प्रीति के खाते में ट्रांसफर किए थे. इस के अलावा लगभग 30 लाख रुपए की ज्वैलरी वे उसे ब्लैकमेलिंग में दे चुके थे, जिसे पुलिस ने प्रीति के फ्लैट से जब्त भी किया.

घूमनेफिरने और होटलबाजी पर भी चेतन ने तबियत से पैसा फूंका था, जिस के चलते वे कंगाली के कगार पर आ गए थे. अगर यह मान भी लिया जाए कि 5 साल में उन्होंने अपनी अय्याशी पर करीब 2 करोड़ रुपए लुटाए, साथ ही वह ब्लैकमेलिंग के चक्कर में प्रीति पर सालाना 40 लाख रुपए खर्च कर रहे थे.

इस के बाद भी यह नाजायज रिश्ता छुपा नहीं रह सका, उलटे खुद चेतन को ही इसे उजागर करना पड़ा.

पुलिस के अलावा आम लोगों का भी यह अंदाजा सही लगता है कि कई पैसे वाले मर्द इस तरह की ब्लैकमेलिंग का शिकार हैं, लेकिन डर के चलते खामोश रहने मजबूर रहते हैं.

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

2 करोड़ की प्रीत: भाग 2

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

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मनचाहा मजा दे कर प्रीति रायपुर से वापस बिलासपुर लौट तो गई लेकिन चेतन के दिल और जिंदगी में मुकम्मल खलबली मचा गई. जाने के बाद दोनों के बीच फोन और सोशल मीडिया पर बातचीत होती रही और दोनों उस रात की यादें और अनुभव साझा करते रहे.

फंसे फिर धंसते गए

चेतन का मन अब चैटिंग से नहीं भर रहा था, लिहाजा उस रात जैसा लुत्फ हर कभी उठाने के लिए वे खुद बिलासपुर जाने लगे. वे भी वहां के महंगे होटलों में ठहरते थे, इस से एक फायदा यह था कि ऐसे होटलों में कोई आप के प्राइवेट मामलों में दखल नहीं देता कि कौनकौन आजा रहा है और कमरे के अंदर क्या हो रहा है. प्रीति होटल के उन के रूम में आती थी दोनों मौजमस्ती भरा मनचाहा सेक्स करते थे और एकाध दो दिन बाद चेतन रायपुर लौट जाते थे.

जाने से पहले वे प्रीति को बेशकीमती तोहफे दिलाते थे और उस पर दिल खोल कर खर्च करते थे. यही प्रीति चाहती भी थी. उस का मकसद मुफ्त के मजे लेना और पैसा हथियाना था. लेकिन इस दौरान वह चेतन को यह अहसास जरूर कराती रहती थी कि वह कोई ऐसीवैसी बाजारू लड़की नहीं है, बस उसे तो उन से प्यार हो गया है.

चेतन के मन में कोई संशय न रहे इस बाबत भी प्रीति ने साफ कर दिया था कि वह जानती है कि उन की पत्नी है, छोटी सी बेटी है, अपनी इज्जत है, घरगृहस्थी और कारोबार है. वह इस में कभी अड़ंगा नहीं बनेगी, उसे तो बस अपने हिस्से का वक्त और प्यार चाहिए.

बिस्तर में कुलांचे भरने वाली प्रीति की यह अदा भी चेतन को आश्वस्त करती थी कि वह उन्हें चाहती है. खुद के बारे में भी वह बता चुकी थी कि उस के पिता मनेंद्रगढ़ में ठेकेदारी करते हैं और उन के पास पैसों की कोई कमी नहीं है.

वह चेतन को बताती थी कि तुम में जाने क्या है जो मैं कइयों को ठुकरा कर तुम पर मर मिटी. खैर, मर ही मिटी हूं तो जब तक तुम चाहोगे तुम्हारी रहूंगी और नहीं चाहोगे तो भी तुम्हारे नाम की माला जपती रहूंगी.

चेतन के पास पैसों की कोई कमी तो थी नहीं, कारोबार मुनाफे में चल रहा था लिहाजा लाख 2 लाख रुपए तो वे अपनी इस समर्पित प्रेमिका पर यूं ही उड़ा देते थे. देखा जाए तो प्रीति एक तरह से चेतन की रखैल बन गई थी. उधर चेतन को बेफिक्री यह थी कि इस से उन का कुछ नहीं बिगड़ रहा था, बल्कि स्वर्ग जैसा जो सुख मिल रहा था, उस का कोई मोल नहीं था. लिहाजा प्रीति पर पैसे लुटाने की तादाद बढ़ती जा रही थी.

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अब तक शायद प्रीति के मन में भी यही था कि जितना हो सके मालमत्ता लपेट लो बाद की बाद में देखी जाएगी. वह चेतन को अपने हुस्न जाल और सैक्सी अदाओं से फंसाए रखने का कोई टोटका नहीं छोड़ती थी. उस के लिए चेतन एक तरह से सोने का अंडा देने वाली मुर्गी था.

प्रीति की पैसों की जरूरत तो पूरी हो रही थी, लेकिन वह जानती थी यह अस्थाई है और अगर यह स्थाई हो जाए तो फिर जिंदगी भर कुछ नहीं करना पड़ेगा. इधर कालेज छोड़ने का वक्त भी नजदीक आ रहा था. ऐसे में अगर वह अनूपपुर वापस चली जाती तो चेतन के साथसाथ उस की दौलत भी छूट जाती.

लिहाजा उस ने एक दिन दुखी होने का नाटक करते हुए चेतन को वे बातें बता दीं जिन का अपना एक मकसद भी था. चेतन को भी यह जान कर झटका लगा कि अगर प्रीति घर वापस चली गई तो सब कुछ आज जैसा आसान नहीं रह पाएगा. लेकिन क्या किया जाए, इस का हल उन्हें नहीं सूझ रहा था.

प्लान के मुताबिक यह समस्या भी प्रीति ने ही यह कहते हुए दूर कर दी कि अगर तुम मुझे रायपुर में फ्लैट दिला दो तो मैं वहीं रह जाऊंगी. फिर हमारी मौजमस्ती में कोई अड़चन पेश नहीं आएगी. इस सुझाव पर चेतन को भी लगा कि सौदा घाटे का नहीं है क्योंकि अभी वे होटलों में ठहरने, खानेपीने और तोहफों पर जो खर्च कर रहे हैं, वह बच जाएगा और प्रीति से मिलने जाने में कोई डर नहीं रहेगा.

लिहाजा उन्होंने प्रीति को रायपुर के गायत्री नगर इलाके में 50 लाख रुपए का फ्लैट दिला दिया और अपनी एक हुंडई कार भी दे दी, जिस से उसे उन की गैरहाजिरी में घूमनेफिरने में कोई परेशानी न हो. प्रीति फ्लैट में शिफ्ट हो गई और चेतन के पैसों पर ऐश की जिंदगी गुजारने लगी. जब भी जरूरत होती वह चेतन से खर्च के नाम पर पैसे मांग लेती थी और चेतन भी मांगा हुआ पैसा उसे दे देते थे.

जिंदगी अब मजे से गुजर रही थी, चेतन का जब मन होता था तब वे प्रीति के साथ मौजमस्ती करने चले जाते थे. अब मन में रहासहा डर भी खत्म हो गया था. क्योंकि लंबे समय से वे यही कर रहे थे और किसी को हवा भी नहीं लगी थी. प्रीति भी इस बात का ध्यान रखती थी कि जब चेतन कारोबार में व्यस्त हों या फिर घर पर हों, तब उन्हें डिस्टर्ब नहीं करना है.

मांबाप भी जान गए प्रीति की हकीकत

अब तक मांबाप से झूठ बोल कर तरहतरह के बहाने बनाने वाली प्रीति को अब अपना भविष्य गारंटीड दिख रहा था, इसलिए साल 2015 में उस ने अपनी मम्मीपापा को भी रायपुर बुला लिया. इन दोनों ने बेटी से उस की आलीशान जिंदगी के बारे में क्या पूछा और जवाब में उस ने क्या बताया यह तो पता नहीं, लेकिन उन की समझ यह जरूर आ गया था कि यह सब चेतन की मेहरबानियां हैं, लिहाजा जब यह नाजायज दामाद आए और प्रीति के बैडरूम में जाए तब उन्हें उन को डिस्टर्ब नहीं करना है.

चेतन के लिए यह सोने पे सुहागा जैसी बात थी, क्योंकि प्रीति अब परिवार सहित रह रही थी जो उन के लिए एक तरह का सुरक्षा कवच ही था.

चेतन प्रीति के लिए एक ऐसी एटीएम मशीन बन गया था जिस में वह अपनी सैक्सी अदाओं का पासवर्ड डाल कर मनचाहा पैसा निकाल लेती थी, जिस पर अब उस के मांबाप भी ऐश कर रहे थे.

अब तक चेतन प्रीति की प्रीत पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए उड़ा चुके थे और 5 साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद उन्हें लगने लगा था कि प्रीति के चक्कर में अब व्यापार पहले सा नहीं चल रहा है और घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है.

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दूसरी ओर प्रीति की मांगें और फरमाइशें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही थीं. आखिर वह चेतन की ब्याहता पत्नी तो थी नहीं, जो इस और ऐसी बातों का खयाल रखती. उसे तो बस पैसों से मतलब था.

जब चेतन इस मतलब को और पूरा करने में असमर्थता जताने लगे तो प्रीति को समझ आ गया कि अब वक्त आ गया है कि आखिरी दांव खेला जाए. एक दिन जब चेतन ने उस के फ्लैट पर और पैसे देने से कुछ गिड़गिड़ाते और कुछ सख्ती दिखाते हाथ खड़े कर दिए तो प्रीति ने अपना असली रंग दिखाते हुए उन के सामने वे वीडियो दिखा दिए, जिन में दोनों तरहतरह से रतिक्रीड़ाएं करते नजर आ रहे हैं. ये वीडियो वक्तवक्त पर प्रीति छुपे कैमरे से बनाती रही थी.

चेतन के होश उस वक्त और फाख्ता हो गए, जब प्रीति ने खुली धौंस दे डाली कि अगर पैसे नहीं दिए तो ये वीडियो तुम्हारी पत्नी को दिखा दूंगी और पूरे रायपुर में वायरल भी कर दूंगी. मेरा जो बिगड़ेगा मैं भुगत लूंगी, तुम अपनी सोचो और बताओ क्या करना है.

अब चेतन की चेतना जागी कि वे सरासर ब्लैकमेल किए जा रहे हैं. साथ ही यह बात भी उन की समझ में आ रही थी कि कल तक रखैल की तरह खुशीखुशी तैयार रहने वाली प्रीति क्यों कुछ महीनों से उन से शादी करने को कह रही थी. वह जानती थी कि चेतन पत्नी, बच्ची और सामाजिक प्रतिष्ठा की वजह से कभी शादी के लिए तैयार नहीं होंगे, लिहाजा उन पर मानसिक दबाव बनाया जाए.

एंट्री रिंकू शर्मा की

आज नहीं तो कल, चेतन पैसे देना बंद कर देगा यह बात भी प्रीति को समझ आ गई थी. लिहाजा कुछ दिन पहले ही उस ने फेसबुक पर एक दूसरा मुर्गा खोज लिया था. इस नए आशिक का नाम था रिकचंद शर्मा उर्फ रिंकू. हरियाणा के इस कारोबारी को भी प्रीति ने वैसे ही फांसा था जैसे 6 साल पहले चेतन को फांसा था.

अब तक प्रीति चेतन को इतना निचोड़ चुकी थी कि यह करोड़पति कंगाली के कगार पर आ पहुंचा था. चेतन ने प्रीति की मांग पूरी करने के लिए रिश्तेदारों से भी पैसा उधार लिया था और व्यापारियों से भी. इतना ही नहीं, उन्होंने शंकरनगर के इलाके का अपना आलीशान मकान भी 1 करोड़ 42 लाख रुपए में बेच दिया था, जिस का बड़ा हिस्सा उधारी चुकाने में चला गया था.

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इस के बाद भी वह फाइनल सेटलमेंट के तौर पर आखिरी किस्त के 50 लाख रुपए की मांग कर यह भरोसा दिला रही थी कि इस के बाद वह विदेश चली जाएगी और फिर कभी चेतन को ब्लैकमेल नहीं करेगी.

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जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

भोजपुरी फिल्मों में धमाकेदार खलनायक के रूप में एंट्री मारने को तैय्यार हैं ये एक्टर, पढ़ें खबर

भोजपुरी सिनेमा के रुपहले परदे पर आए दिन नई नई प्रतिभाएं आती रहती हैं. अब बतौर खलनायक अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने आ रहे हैं उत्तर प्रदेश के खलीलाबाद के मूल निवासी नवोदित अभिनेता खलनायक माधव राय. माधव राय को बचपन से फिल्मो में अभिनय करने का भूत सवार रहा है, मगर उनके माता पिता की शर्त थी कि, पहले अच्छी शिक्षा ग्रहण कर अपने आप को स्थापित करो, फिर फिल्म में काम करो.

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माधव राय ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया और अपनी पढ़ाई पूरी कर घर परिवार को सेटल कर और अपनी सारी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए अब बतौर खलनायक भोजपुरी सिनेमा में सक्रिय हो गए हैं. अहम बात यह है कि बतौर खलनायक माधव राय ने सिर्फ एक नहीं बल्कि चार भोजपुरी भाषा की फिल्में अनुबंधित की हैं, जिनमें से दो की शूटिंग शुरू हो चुकी है.

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कोरोना काल के अनलॉक की प्रक्रिया में जहां भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग शुरू हो चुकी है, वहीं माधव राय भी खलनायक के रूप में शूटिंग करते नजर आने लगे हैं. इन दिनों वह रेड आई मूवी क्रिएशन बैनर के तले बन रही भोजपुरी फिल्म ‘‘रूप मेरे प्यार’’ की शूटिंग गोरखपुर के विभिन्न क्षेत्रों में कर रहे हैं. फिल्म निर्देशक दिलीप जान के निर्देशन में बन रही स्वस्थ मनोरंजनपूर्ण व संपूर्ण पारिवारिक यह फिल्म हर वर्ग के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, ताकि पूरे परिवार के लोग एक साथ बैठकर यह फिल्म देख सकें.

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फिल्म निर्माता गिरीश्वर दुबे द्वारा निर्मित की जा रही यह फिल्म बड़े पैमाने पर काफी महंगे बजट के साथ बनाई जा रही है. फिल्म की सह निर्माता दीपिका दुबे, कथा पटकथा व संवाद संजय महतो, संगीतकार कृष्णा बेदर्दी व अनुज तिवारी, कैमरामैन जोगिंदर सिंह हुंदल पाजी हैं. फिल्म के अन्य कलाकार हैं- प्रमोद प्रेमी यादव, गुरु दूबे, मणि भट्टाचार्य और आकांक्षा दूबे, माधव राय,अयाज खान और हीरालाल यादव नजर आएंगे. इस फिल्म को लेकर माधव राय काफी उत्साहित हैं. उनका लुक व किरदार काफी अलग है, जोकि दर्शकों को दिल पर अमिट छाप छोड़ने वाला है.

लोकतंत्र से गैंगरेप

हाथरस में गैंगरेप की घटना को प्रदेश सरकार के हठ ने देश के सामने ‘लोकतंत्र से गैंगरेप‘ सा बना दिया. लड़की की चिता की राख भले ही बुझ गई हो, पर इस से भड़का विरोध ठंडा नहीं पड़ेगा. कोर्ट से ले कर बिहार के चुनाव तक तमाम सवाल भाजपा को सपने में भी डराते रहेंगे.

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ‘ठाकुरवाद’ को ले कर पक्षपात करने का आरोप गहरा होता चला जा रहा है. कुलदीप सेंगर और स्वामी चिन्मयानंद के बाद हाथरस कांड में यह साबित हो गया है. ऐसे में योगी आदित्यनाथ का मुख्यमंत्री की कुरसी पर बैठे रहना भाजपा के लिए नुकसानदायक होगा.

उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक एससी समाज की लड़की के साथ दंबगों द्वारा बाजरे के खेत में सुबहसुबह किया गया गैंगरेप भले की समाज की आंखों के सामने नहीं हुआ, पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने सब की आंखों के सामने लड़की की लाश को जबरन जला कर ‘लोकतंत्र से गैंगरेप‘ किया है.

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गैंगरेप की शिकार हाथरस की रहने वाली 20 साल की उस लड़की को गंभीर हालत में 28 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भरती कराया गया था जहां अगले दिन उस की मौत हो गई. उत्तर प्रदेश पुलिस ने मौत के इस राज को दफन करने के लिए लड़की की लाश उस के घर वालों को नहीं सौंपने का फैसला किया. पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल से ही लड़की की लाश को अपने कब्जे में ले लिया. घर वालों को इस बात का डर पहले से हो रहा था. इस वजह से उन्होंने मीडिया में यह शिकायत करनी शुरू कर दी थी कि उत्तर पुलिस इंसाफ नहीं कर रही है.

उस लड़की के साथ 14 सितंबर को गैंगरेप से ले कर 28 सितंबर तक अस्पताल में जिस तरह से उस के साथ लापरवाही की जा रही थी, उस से लड़की के परिवार वालों को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर भरोसा नहीं रह गया था. यही वजह थी कि वे हाथरस से 200 किलोमीटर दूर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में लड़की को इलाज के लिए ले कर गए. उन को पता था कि अगर हाथरस से 400 किलोमीटर दूर लखनऊ जाएंगे तो वहां उन के हालात को किसी के सामने नहीं आने दिया जाएगा.

दिल्ली में मीडिया की चर्चा में आने के बाद भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने पूरी तानाशाही की. लाश को ले कर एंबुलैंस सीधे लड़की के गांव के लिए निकल गई. अस्पताल में ही उस के परिवार वालों को लडकी की लाश देखने तक नहीं दी गई. लड़की के परिवार के साथ मीडिया की कुछ गाड़ियों ने एंबुलैंस का पीछा किया.

लड़की के भाई संदीप ने कहा, ‘हम लोगों को चेहरा तक नहीं दिखाया. उलटा भारी पुलिस बल उन्हें रोकने के लिए लगा दिया. पुलिस ने जानवर का रूप ले लिया था और वह दरिंदों के साथ खड़ी हो गई. मां अपनी बेटी की लाश देखना चाहती थी और वह पुलिस से गिड़गिड़ाती रही, पर पुलिस ने मुंह तक नहीं देखने दिया. मां आंचल फैला कर भीख मांगती रही पर पुलिस ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार दीं.’

और भी दर्द दिया

हाथरस तक पहुंचने के लिए पुलिस ने पुराने रास्ते का इस्तेमाल किया, जबकि लड़की के परिवार वाले और मीडिया दूसरे रास्ते से गांव पहुंच रहे थे. एंबुलैंस में लाश ले कर पुलिस जब लड़की के घर के सामने से गुजर रही थी तो वहां मौजूद उस के घर वालों ने गाड़ी को बीच में रोक लिया.

लड़की की मां और उस की भाभी गाड़ी के ऊपर ही सिर पीटपीट कर रो रही थीं. मां का कहना था, ‘हम बेटी की अंतिम क्रिया से पहले उस को नहला कर नए कपड़े पहना कर हलदी लगाने की रस्म अदा करने के बाद अंतिम संस्कार करेगे.’

पर पुलिस यह बात मानने को तैयार नहीं थी. यही नहीं पुलिस लड़की की भाभी की इस बात को भी सुनने को तैयार नहीं थी कि लड़की के पिता और भाई दिल्ली से आ जाएं तब कोई फैसला हो. पुलिस ने लड़की के घर वालों की बात तो सुनी ही नहीं, बल्कि वह घर वालों को जबरन साथ ले जाना चाहती थी कि किसी तरह से वे उस का अंतिम संस्कार कर दें.

घर वाले जब इस के लिए तैयार नहीं हुए तो पुलिस लाश को ले कर सीधे गांव के बाहर श्मशान ले गई. अभी तक आधी रात का समय बीत रहा था और लड़की के पिता और मीडिया वहां तक नहीं पहुंचे थे. जो लोग पहुंचे थे उन को पुलिस ने गांव के बाहर ही रोक लिया था. गांव के अंदर आने वाली कच्ची सड़क को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था.

गांव में 13 थाने का पुलिस बल और बाकी अफसर तैनात कर दिए गए थे. पूरा गांव एक तरह से छावनी में बदल दिया गया था.

पैट्रोल से जला दी लडकी

हिंदू धर्म के रीतिरिवाजों में किसी  की अंतिम क्रिया से पहले लाश को नहलाया जाता है. इस के बाद उस को नए कपड़े पहना कर चिता पर लिटाया जाता है. चिता को लकड़ी से तैयार किया जाता है. किसी करीबी परिजन जैसे पिता, पति या भाई द्वारा चिता को अग्नि दी जाती है.

हिंदू धर्म में ऐसा कहा जाता है कि अंतिम क्रिया विधिवत करने से मरने वाले की आत्मा को मुक्ति मिलती है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हिंदू धर्म के ब्रांड एंबैसेडर माने जाते हैं. इस के बाद भी योगी की पुलिस ने धर्म, रीतिरिवाज, मानवाधिकार, कानून किसी का भी साथ नही दिया.

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लड़की की लाश को जंगल के बीच रख कर उसे गोबर के उपलों और कुछ लकड़ियों से ढक दिया गया. पैट्रोल और मिट्टी का तेल छिड़क कर रात के तकरीबन ढाई बजे आग लगा दी गई. इस के बाद वहां किसी तरह पहुंचे मीडिया वालों को पुलिस ने यह नहीं बताया कि क्या जल रहा है?

अंतिम संस्कार को ले कर पीड़िता के चाचा और बाबा ने बताया कि जब पुलिस जबरन दाह संस्कार कर रही थी, तब उन्हें वहां जाने नहीं दिया गया. जो भी किया पुलिस ने किया था. जब कुछ देर के लिए पुलिस वहां नहीं थी, तो वे 2-4 उपले डालने के लिए गए थे. तभी पुलिस वालों ने उनकी फोटो खींच ली. अब इसी को पुलिस बता रही है कि परिवार वाले अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे.

कोर्ट ने लिया संज्ञान

लड़की की लाश जलने के साथ ही साथ उस की अस्थियां और चिता की राख तक को समय पर नहीं विसर्जित किया जा सका. बुलगढी गांव के बाहर सड़क किनारे चिता की राख का ढेर, अधजले उपले, बिखरी अस्थियां तीसरे दिन तक पड़ी रहीं. हिंदू रीतिरिवाजों के मुताबिक तीसरे दिन तक इन का विसर्जन हो जाना चाहिये. गुरुवार को अस्थियां विसर्जित नहीं की जाती हैं, पर शुक्रवार शाम तक अस्थियां विसर्जित नहीं की गई थीं. ऐसे में साफ है कि न केवल लड़की के जिंदा रहते उस की बेइज्जती की गई, बल्कि मरने के बाद भी कदमकदम पर उस का अपमान किया गया.

पुलिस ने दावा किया किया कि लड़की का अंतिम संस्कार रात 2 बजे के आसपास परिवार वालों की रजामंदी से पुलिस बल की मौजूदगी में किया गया. पुलिस की इस बात पर किसी को भरोसा नहीं हो पा रहा था. चारों तरफ पुलिस और योगी सरकार की आलोचना शुरू हो गई. यही नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रात में लड़की की लाश को जलाने के मामले में मौलिक अधिकारों का मुददा मान कर खुद संज्ञान में लिया. जस्टिस राजन राय और जस्टिस जसप्रीत सिंह ने कहा कि रात के ढाई बजे अंतिम संस्कार बेहद क्रूर और असभ्य तरीके से किया गया. यह कानून और संविधान से चलने वाले देश में कतई स्वीकार्य नही है.

कोर्ट ने सरकार और अफसरों को सुनने के साथ ही साथ लडकी के परिवार को भी सुनने का फैसला किया. पहली बार कोर्ट ने खुद रजिस्टार को आदेश दिया कि वह इस संबंध में पीआईएल दाखिल करे.

तानाशाह बनी सरकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बरताव कोे जो लोग जानते हैं वे कहते है कि योगी गुस्से में किसी बात की परवाह नहीं करते हैं. नागरिकता कानून विरोध के समय विरोध करने वालों को ‘ठीक से समझाने‘ का संदेश उन्होंने दिया था. अपराधियों से निबटने के लिए उन्हें ‘ठोंक दो’ के अलावा कानपुर कांड में विकास दुबे के घर को गिराना हो, डाक्टर कफील और आजम खां को जेल भेजना हो उन का गुस्सा हर जगह देखने को मिला.

उत्तर प्रदेश के अपराधियों में मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद के घर को गिराने का मामला ऐसा ही था. हाथरस कांड में भी मुख्यमंत्री पर अपराधियों को बचाने का आरोप लगा. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि आरोपी ठाकुर बिरादरी के हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री योगी उन को बचाने के लिए हर गलत काम करने को तैयार हैं.

विरोधी दल ही नहीं भाजपा की नेता उमा भारती ने भी इस बात का विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि इस से पार्टी की छवि खराब हुई है. मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे लड़की के परिवार से मीडिया और विपक्ष के लोगों को मिलने दे.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने हाथरस जाने का प्रयास किया पर उन को रोक दिया गया. बाद में मिलने की मंजूरी दी गई. बसपा नेता मायावती ने बयान दे कर विरोध दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री योगी से अपने पद से इस्तीफा देने को कहा. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रदेश में धरनाप्रदर्शन किया.

उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी यानी स्पैशल टास्क फोर्स का गठन किया और उस की रिपोर्ट पर पुलिस महकमे के कुछ अफसरों को निलंबित कर दिया. सभी पक्षों के नार्को टेस्ट कराने का भी आदेश दिया. बाद में जांच सीबीआई को सौंपने की बात कही.

इस के बावजूद हाथरस की आग को विपक्ष बुझने नहीं देगा. बिहार चुनाव में इस को मुददा बनाने की तैयारी हो रही है. ऐसे में बिहार में भाजपा की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) ने भी योगी सरकार की आलोचना की है. जद(यू) नेता केसी त्यागी ने कहा, ‘क्या देश में दलित वंचितों के साथ दुष्कर्म के मामले में न्याय के लिए प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ेगा हाथरस में जो हुआ वह उत्तर प्रदेश सरकार के लिए शर्मनाक है. यह उत्तर प्रदेश सरकार के लिए डूब मरने जैसी बात होगी.’

बस लिखापढ़ी करती रही पुलिस

हाथरस जिले से आगरामथुरा नैशनल हाईवे 93 पर 14 किलोमीटर दूर चंदपा कसबा है. यह बेहद छोटा सा कसबा है. यहां के लोग खरीदारी करने हाथरस ही जाते है. चंदपा कसबे से 2 किलोमीटर दूर बूलगढ़ी गांव है. यह भी बेहद गरीब गांव है. यहां पहुंचने के कच्चे रास्ते हैं. इस गांव में विभिन्न जातियों के 300 परिवार रहते हैं. इस गांव में एससी तबके और ठाकुर जाति के परिवार भी रहते हैं.

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14 सितंबर की सुबह 9 बजे के करीब गांव में रहने वाले ओम प्रकाश की बेटी 20 साला मनीषा अपनी मां रमा देवी और भाई सत्येंद्र के साथ घास काटने खेतों में गई थी. घास का एक बोझ ले कर लड़की का भाई उसे रखने घर चला आया था और मां और बेटी वहीं खेतों में घास काटने लगीं.

कुछ देर में मां ने बेटी के चिल्लाने की आवाज सुनी तो बेटे को आवाज देती लड़की की तरफ गई. तब मां ने देखा कि बेटी खेत में अंदर की तरफ बेहोश पड़ी थी. उस के गले और शरीर पर चोट के निशान थे.

मां ने आवाज लगाई तो गांवघर के लोग वहां आ गए. पुलिस को सूचना दी गई. घायल बेटी को घर पर रखने के कुछ देर बाद चंदपा थाने ले आए.

मनीषा के भाई सत्येंद्र ने लिखित तहरीर में पुलिस को बताया कि मनीषा और मां घास काट करे थे तभी गांव का ही रहने वाला संदीप वहां आया और मनीषा को खींच कर खेत में ले गया. उस का गला दबा कर हत्या करने की कोशिश की गई. मनीषा ने शोर मचाया तो मां और भाई को आता देख आरोपी संदीप भाग गया.

पुलिस ने इसी तहरीर पर आरोपी संदीप पुत्र गुड्डू के खिलाफ धारा 307 और एसएसीएसटी ऐक्ट में मुकदमा कायम कर लिया. कोतवाली चंदपा के प्रभारी दारोगा डीके वर्मा ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर के आरोपी की तलाश शुरू कर दी.

पुलिस की सूचना पा कर सीओ सिटी राम शब्द मौका ए वारदात पर पहुंचे और मनीषा की खराब हालत देख कर उसे इलाज के लिए हाथरस के जिला अस्पताल भेज दिया. इन दोनों पक्षों के बीच पहले भी रंजिश हो चुकी थी. मुकदमा कायम था और मामला कोर्ट में दाखिल था. ऐसे में पुलिस ने मामले की विवचेना शुरू कर दी.

19 सितंबर को पुलिस ने आरोपी संदीप को पकड़ा और सीओ सिटी ने जांच के बाद मुकदमे में छेड़खानी की धारा 354 को बढ़ा भी दिया. 20 सितंबर  को सीओ सादाबाद के रूप में ब्रह्म सिंह ने चार्ज लिया. सीओ सिटी की जगह अब वे मुकदमे की विवेचना देखने लगे.

22 सितंबर को ब्रह्म सिंह ने लड़की से बातचीत के आधार पर मुकदमे में धारा 376 डी को बढ़ाया. लडकी ने 22 तारीख को दिए अपने बयान में आरोपी संदीप के साथ कुछ और लोगों का नाम लिया था और गैंगरेप की बात कही थी.

गैंगरेप के आरोप में पुलिस ने इसी गांव के 3 और आरोपियों लवकुश पुत्र रामवीर, रवि पुत्र अतर सिंह, रामकुमार पुत्र राकेश का नाम भी मुकदमे में शामिल कर लिया. पुलिस ने 23 सितंबर को लवकुश को पकड लिया. 25 सितंबर को रवि और 26 सितंबर को रामकुमार को पकड़ लिया. मुख्य आरोपी संदीप को पहले की पकड़ लिया गया था.

मामले में ढिलाई बरतने के आरोप में कोतवाली निरीक्षक चंदपा को लाइन हाजिर कर दिया गया था. 28 सितंबर को लड़की को बेहद नाजुक हालत में अलीगढ़ मैडिकल कालेज से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेज दिया गया. 29 सितंबर को दिल्ली में लड़की की मौत हो गई. मौत के बाद लड़की की लाश के साथ जो हुआ वह किसी तरह के गैंगरेप से कम नहीं था.

पिसते दलित परिवार

ठाकुर बिरादरी में 2 गुट हैं. इन की आपसी लड़ाई में दलित परिवार पिसते रहते हैं. 1996 में जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थी. बाल्मीकि समाज के लोगों से ठाकुर परिवार का झगड़ा हुआ था. झगड़े की वजह गांव के बाहर कूड़ा डालने की जगह थी. एससी परिवार का कहना था कि उन की जगह पर कूड़ा डाला जा रहा है. इस को ले कर दोनों ही परिवारों में झगड़ा हुआ था, जिस में एससी परिवार के लोगों ने दलित ऐक्ट, मारपीट और सिर फोड़ने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिस में ठाकुर परिवार को जेल जाना पड़ा था. इनब्के बीच साल 2006 में आपसी मारपीट का मुकदमा लिखा गया था. कुछ समय के बाद इन के बीच आपसी समझौता भी हुआ, पर आपस में दुश्मनी बनी रही.

जब भी ये लोग आपस में सुलह की बात करते थे ठाकुर बिरादरी का ही दूसरा पक्ष किसी न किसी बहाने मामले को उलझा देता था. कुछ समय से लड़की और आरोपी संदीप के परिवार के बीच की 19 साल की दुश्मनी कम होने लगी थी. परिवार के लोग आपस में भले ही नहीं बोलते थे, पर संदीप और लड़की में बातचीत होने लगी थी. यह बात उन दोनों के परिवार वालों को पसंद नहीं थी. घटना के कुछ दिन पहले लड़की के परिवार वालों ने इस बात की शिकायत भी की थी, जिस से संदीप के पिता ने अपने लड़के की पिटाई भी की थी. ऐसे में आपसी विवाद में एक एससी परिवार तबाह हो गया.

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बलात्कार का सच

उत्तर प्रदेश पुलिस इस बात का दावा कर रही है कि लड़की के साथ बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई. कानून के जानकार कहते हैं कि पुलिस के दावे से कोई बचाव नहीं होगा. लड़की का बयान ही अंतिम माना जाएगा. 14 सितंबर को लड़की के साथ बलात्कार हुआ, मैडिकल नहीं हुआ. लड़की के अंदर के अंगों से छेड़छाड़ हुई.

कानून कहता है कि रेप साबित करने के लिए केवल 4 दिन का ही समय होता है. स्पर्म केवल 4 दिन तक ही अंग पर दिखते हैं. नाजुक अंगों पर नाखून के निशान, आधा नंगा या पूरा नंगा पाया जाना भी रेप माना जाता है. रेप की पुष्टि के लिए स्पर्म मिलना अनिवार्य नहीं होता है.

किसी महिला के नाजुक अंग पर पूरी तरह से या बिलकुल न के बराबर मर्द के अंग का स्पर्श भी बलात्कार माना जाता है. 14 दिन के बाद रेप के सुबूत नहीं मिलते, लेकिन अंगों पर चोट के निशान मिल जाते हैं. अस्पताल में एडमिट होने के समय अंगों से बहने वाला खून भी सुबूत होता है. उस समय यह जानने की कोशिश क्यों नहीं की गई कि यह क्यों हो रहा है. ऐसे में रेप की पुष्टि कानून की नजर में कोई बड़ा मसला नहीं है. ऐसे हालात ही सुबूत के तौर पर पेश हो सकते हैं.

मध्य प्रदेश : दांव पर सब दलों की साख

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ कर मध्य प्रदेश की जनता और चुनी गई कांग्रेसी सरकार से गद्दारी की थी या फिर अपनी गैरत की हिफाजत की थी, इस का सटीक फैसला अब मीडिया या चौराहों पर नहीं, बल्कि जनता की अदालत में 10 नवंबर, 2020 को होगा जब 28 सीटों पर हुए उपचुनावों के वोटों की गिनती हो रही होगी. इन 28 सीटों में से 16 सीटें ग्वालियरचंबल इलाके की हैं, जहां वोट जाति की बिना पर डलते हैं और इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के भविष्य का फैसला हमेशा की तरह एससीबीसी तबके के लोग ही करेंगे, जिन का मूड कोई नहीं भांप पा रहा है.

साल 2018 के विधानसभा के चुनाव में इन वोटों ने भाजपा और बसपा को अंगूठा दिखाते हुए कांग्रेस के हाथ के पंजे पर भरोसा जताया था, लेकिन तब हालात और थे. ये हालात बारीकी से देखें और समझें तो महाराज कहे जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया का असर कम, बल्कि एट्रोसिटी ऐक्ट से पैदा हुई दलितों और सवर्णों की भाजपा से नाराजगी ज्यादा थी.

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दलित इस बात से खफा थे कि भाजपा सवर्णों को शह दे रही है और इस मसले पर अदालत भी उस के साथ है, इस के उलट ऊंची जाति वाले इस बात से गुस्साए हुए थे कि संसद में अदालत के फैसले को पलट कर मोदी सरकार उन की अनदेखी करते हुए दलितों को सिर चढ़ा रही है, जबकि वे हमेशा उसे वोट देते आए हैं.

इसी इलाके में बड़े पैमाने पर एट्रोसिटी ऐक्ट को ले कर हिंसा हुई थी. इस का नतीजा यह हुआ कि इन दोनों ही तबकों के वोट भाजपा से कट कर कांग्रेस की झोली में चले गए और वह इस इलाके की 36 सीटों में से 26 सीटें ले गई.

भाजपा राज्य में 230 सीटों में से महज 109 सीटें ले जा पाई और कांग्रेस 114 सीटें ले जा कर बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों की मदद से अल्पमत की सही सरकार बना ले गई.

दिग्गज और तजरबेकार कमलनाथ ने बहैसियत मुख्यमंत्री जोरदार शुरुआत की जिस से लोगों को आस बंधी थी कि 15 साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार भाजपा से बेहतर साबित होगी, लेकिन सवा साल में ही कांग्रेस की खेमेबाजी और फूट उजागर हुई तो हुआ वही जिस का हर किसी को डर था.

कमलनाथ और परदे के पीछे से सरकार हांक रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की अनदेखी शुरू कर दी नतीजतन वे राम भक्तों की पार्टी से जा मिले जिस के एवज में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा में ले लिया और उन के 22 समर्थक विधायकों की मदद से सरकार बना ली जिस की अगुआई एक बार फिर वही शिवराज सिंह चौहान कर रहे हैं, जिन्हें जनता ने 2018 में खारिज कर दिया था.

इतना ही नहीं, भाजपा ने सिंधिया समर्थक 14 विधायकों को मंत्री पद से भी नवाजा और वादे या सौदे के मुताबिक सभी को उन की सीटों से ही टिकट भी दिए.

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सब की हालत पतली

अब क्या ये सभी कांग्रेसी भाजपा के हो कर दौबारा जीत पाएंगे, यह सवाल बड़ी दिलचस्पी से सियासी गलियारों में पूछा जा रहा है जिस का सटीक जवाब तो 10 नवंबर को ही मिलेगा, पर इन नए भगवाइयों की हालत खस्ता है, जो पहले भाजपा की बुराई करते थकते नहीं थे और अब जनता को बता रहे हैं कि भाजपा क्यों कांग्रेस से बेहतर है. लेकिन ऐसा करते और कहते वक्त उन की आवाज में वह दमखम नहीं रह जाता जो 2018 के चुनाव प्रचार के वक्त हुआ करती था. कांग्रेस इन्हें गद्दार और दागी कह तो रही है, लेकिन उस के पास भी इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि आखिर क्यों वह अपने विधायकों को बांधे रखने में नाकाम रही और क्यों उन्हें अपनी ही पार्टी की सरकार गिराने मजबूर होना पड़ा.

अब ज्यादातर सीटों पर मुकाबला कांग्रेस बनाम कांग्रेस छोड़ चुके नए भाजपाइयों के बीच हो रहा है. भाजपा को बहुमत के लिए 9 सीटें और चाहिए, जबकि कांग्रेस को सरकार बनाने पूरी 28 सीटों पर जीत की दरकार है. लेकिन राह दोनों की ही आसान नहीं है, तो इस की अपनी वजहें भी हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पहले जैसे लोकप्रिय नहीं रह गए हैं और भाजपा कार्यकर्ता सिंधिया खेमे की खातिरदारी में जुटने से बच रहा हैं, क्योंकि उसे मालूम है कि ये जीत भी गए तो उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला. हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया जनता को यह बताने लगे हैं कि वे और उन के समर्थक दिलोदिमाग दोनों से भाजपाई हो चुके हैं. इस के लिए वे जयजय श्रीराम का नारा सड़कों पर आ कर लगाने लगे हैं और भाजपाई उसूलों पर चलते हुए संघ के दफ्तर की भी परिक्रमा करने लगे हैं.

दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को यह एहसास है कि उन के पास खासतौर से इस इलाके में जमीनी कार्यकर्ताओं का टोटा है और 16 में से कोई 10 सीटों पर सिंधिया खेमे के उम्मीदवारों की खुद की अपनी भी साख है जिसे तोड़ पाने के लिए उन के पास काबिल और लोकप्रिय उम्मीदवार नहीं हैं जिस की भरपाई करने वे सिंधिया की गद्दारी को चुनावी मुद्दा बनाने की जुगत में भिड़े हैं.

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भाजपा निगल रही बसपा वोट

कोई मुद्दा न होने और कोरोना महामारी के चलते वोटिंग फीसदी कम होने के डर से भी सभी पार्टियां हलकान हैं. ऐसे में जो पार्टी अपने वोटर को बूथ तक ले आएगी, तय है कि वह फायदे में रहेगी. साफ यह भी दिख रहा है कि कोरोना के डर के चलते बूढ़े वोट डालने नहीं जाएंगे. इस इलाके में कभी मजबूत रही बसपा अब दम तोड़ती नजर आ रही है. 2018 के चुनाव में वह यहां महज एक सीट जीत पाई थी जो अब तक का उस का सब से खराब प्रदर्शन था, इस के बाद भी 6 सीटों पर उस ने भाजपा और कांग्रेस दोनों का खेल बराबरी से बिगाड़ा था. बसपा के वोटरों पर इन दोनों पार्टियों की नजर है, जिस के चलते दोनों का दलित प्रेम उमड़ा जा रहा है.

मायावती का भाजपा के लिए झुकाव किसी सुबूत का मुहताज नहीं है. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दलित समुदाय कई फाड़ हो चुका है. सामाजिक समरसता के जरीए भाजपा एससीबीसी तबके में थोड़ीबहुत ही सही सेंध लगा चुकी है. उसे उम्मीद है कि अगर इस तबके के 30 फीसदी वोट भी उसे मिले तो सवर्ण वोटों के सहारे दिनोंदिन मुश्किल होती जा रही इस जंग को वह जीत लेगी. दूसरी तरफ कांग्रेस को उम्मीद है कि पिछली बार की तरह ये वोट उसे ही मिलेंगे. बसपा के खाते में अब वही वोट जा रहे हैं जो 20 साल से उसे मिलते रहे हैं, लेकिन मायावती के ढुलमुल रवैए के चलते दलित नौजवान वोटर यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि कौन सी पार्टी हकीकत में उस की हिमायती है.

साख का सवाल

ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह साबित करने में पसीने आ रहे हैं कि 2018 की तरह वोट उन के नाम पर पड़ेंगे तो शिवराज सिंह भी यह साबित नहीं कर पा रहे हैं कि भाजपा और वे खुद पहले की तरह अपराजेय हैं, इसलिए उन्होंने ‘शिवज्योति ऐक्सप्रेस’ का नारा दिया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बूआ कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे भी अपने बबुआ के लिए हाड़तोड़ मेहनत कर रही हैं.

साख मायावती की भी दांव पर लगी है कि बसपा अगर इस बार भी सिमट कर रह गई तो आगे के लिए उस के दामन में कुछ नहीं रहेगा. कमलनाथ को भी साबित करना है कि वे एक बेहतर मुख्यमंत्री थे जो अपनों की ही साजिश का शिकार हुए थे.

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यानी अब जो जीता वह सिकंदर हो जाएगा और हारे के पास हरि नाम भी नहीं बचेगा, इसलिए सारे नेता वोटरों को लुभाने के लिए साम, दाम, दंड, भेद सब का सहारा ले रहे हैं, जिन्हें मालूम है कि यह चुनाव आम चुनाव से भी ज्यादा अहम उन के वजूद के लिए है और जानकारों की दिलचस्पी इस इलाके में बिहार के बराबर ही है. फर्क सिर्फ इतना है कि अगर कांग्रेस वोटर के दिमाग में यह बात बैठा पाई कि भाजपा ने जोड़तोड़ कर सरकार बना कर राज्य का भला नहीं किया है तो बाजी भगवा खेमे को महंगी भी पड़ सकती है, क्योंकि विकास और रोजगार के मुद्दों पर तो वोटर की नजर में दोनों ही पार्टियां नकारा हैं.

Bigg Boss 14 के इन दो कंटेस्टेंट्स की हुई शहनाज गिल से तुलना, पोस्ट शेयर कर दिया जवाब

टेलीविजन इंडस्ट्री के सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल रिएलिटी शो बिग बॉस के सीजन 14 (Bigg Boss 14) का ग्रैंड प्रीमियर बीते शनिवार को ऑन एयर कर दिया गया है. ऐसे में बिग बॉस के फैंस बेहद ही खुश हैं और साथ ही इस बात को देखने के लिए एक्साइटिड हैं कि आगे आने वाले एपिसोड्स में दर्शकों को क्या क्या नया देखने को मिलने वाला है.

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जैसा कि हम सब जानते हैं कि बिग बॉस के इतिहास का सबसे सफल और सबसे पौपुलर सीजन रहा है सीजन 13 जिसके ना सिर्फ विनर ने बल्कि हर कंटेस्टेंट ने दर्शकों के दिलों पर अपनी अलग ही छाप छोड़ी थी. ऐसे में बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) में आए नए कंटेस्टेंट्स की तुलना अब सीजन 13 के कंटेस्टेंट्स के साथ हो रही है.

जी हां बिग बॉस के फैंस के दिलों में सीजन 13 के कंटेस्टेंट्स के लिए इतना प्यार है कि वे सब सीजन 14 के कंटेस्टेंट्स में सीजन 13 के कंटेस्टेंट्स ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में साउथ इंडस्ट्री की पौपुलर एक्ट्रेस निक्की तम्बोली (Nikki Tamboli) और पंजाबी सिंगर सारा गुरपाल (Sara Gurpal) की तुलना फैंस सीजन 13 की सबसे एंटरटेनिंग कंटेस्टेंट शहनाज गिल (Shehnaz Gill) से कर रहे हैं.

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लेकिन शायद पंजाब की कैटरीना कैफ यानी कि शहनाज गिल (Shehnaz Gill) को ये बात पसंद नहीं आई और उन्होनें हाल ही में अपने एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा,- “I love myself & I don’t judge myself, which in return helps me not to judge others.. So stay positive, stay safe & spread love… No one can be anyone else & anyone else can’t be you… So be the best version of yourself”

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शहनाज गिल (Shehnaz Gill) के इस कैप्शन ने उन लोगों को जवाब दिया है जो कि उनकी तुलना किसी और से कर रहे थे. जैसा कि हम सब जानते हैं कि बिग बॉस के मेकर्स अपने दर्शकों को सरप्राइज देने का एक भी मौका नहीं छोड़ते तो ऐसे में फैंस को पूरी पूरी उम्मीद है कि मेकर्स शहनाज गिल (Shehnaz Gill) को इस बार बिग बॉस में जरूर बुलाएंगे.

संजय दत्त की ऐसी हालत देख उड़े फैंस के होश, सोशल मीडिया पर फोटो हुई वायरल

बॉलीवुड इंडस्ट्री में ‘बाबा’ के नाम से पहचान बनाने वाले बेहतरीन एक्टर संजय दत्त (Sanjay Dutt) इन दिनों काफी चर्चा में हैं. दरअसल संजय दत्त (Sanjay Dutt) लंग कैंसर जैसी बिमारी के साथ जूझ रहे हैं. हाल ही में संजय दत्त (Sanjay Dutt) अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दुबई गए थे लेकिन इलाज की वजह से उन्हें वे ट्रिप बीच में छोड़ कर वापस मुंबई आना पड़ा.

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आपको बता दें पिछले दिनों संजय दत्त (Sanjay Dutt) अपने इलाज के लिए अमेरिका भी गए थे लेकिन फिलहाल उनका इलाज मुंबई के ही एक हॉस्पिटल में चल रहा है. संजय दत्त (Sanjay Dutt) की फैन फौलोविंग का कोई जवाब नहीं, उनके फैंस उनकी एक झलक पाने के लिए पागल हुए रहते हैं और जब उनके फेवरेट एक्टर पर ऐसा बुरा वक्त आया है तो ऐसे मे उनके सभी फैंस उनके लिए काफी दुआएं मांग रहे हैं.

हाल ही में संजय दत्त (Sanjay Dutt) की पत्नी मान्यता दत्त (Manyata Dutt) ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर संजय की फोटो शेयर करते हुए काफी मोटिवेशनल कैप्शन लिखा था और वो कैप्शन था कि,- “Rukk jaana nahin tu kahin haarke….kaanto pe chalke milenge saaye Bahar ke !! We have to fight through some bad days to earn the best days of our lives!! Never quit!!”

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ऐसे में संजय दत्त (Sanjay Dutt) की एक लेटेस्ट फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं और इस फोटो को देख फैंस संजय दत्त (Sanjay Dutt) के लिए बेहद चिंतित भी हो रहे हैं. इस फोटो में संजय दत्त (Sanjay Dutt) काफी कमजोर दिखाई दे रहे हैं और फोटो देख ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्होनें अपना काफी वजन घटाया है और उनकी हालत ठीक नहीं हैं.

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इसी कड़ी में फैंस संजय दत्त (Sanjay Dutt) के लिए दुआएं मांग रहे हैं कि वे जल्द से जल्द ठीक हो जाएं. संजय दत्त ने अपने फिल्मी करियर में एक से बढ़ कर एक कमाल की फिल्में की हैं जिसे उनके फैंस ने बेहद प्यार दिया है और आज भी उनके फैंस को उनकी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार रहता है.

शक्की पति की मजबूर पत्नी: भाग 3

दूसरा भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- शक्की पति की मजबूर पत्नी: भाग 2

दरअसल, 6 साल पहले रिंकू ने अपने 6 साथियों के साथ मिल कर एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी. उस के बाद रिंकू ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. उस ने ताबड़तोड़ कई बड़े अपराध किए. जल्द ही वह अपराध की दुनिया में कुख्यात हो गया. पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए उस पर बड़ा ईनाम रख दिया.

रिंकू के अपराधी बन जाने के बाद उस के घर वालों ने भी उसे अपनी जिंदगी और संपत्ति से बेदखल कर दिया. जब घर वालों ने रिंकू का परित्याग कर दिया तो उस ने उधर मुड़ कर नहीं देखा. वह रायपुर थाने के शास्त्रीनगर कालोनी में किराए का कमरा ले कर छिपछिपा कर रहने लगा.

अशोक को पता था कि उस के मना करने के बावजूद रिंकू घर आता है और घंटों तक कामना के पास रहता है. यह बात उसे नागवार लगती थी. वह नहीं चाहता था कि रिंकू उस के घर आए और पत्नी से मिले.

इसी बीच अशोक को कहीं से भनक लगी कि कामना और रिंकू के बीच लंबे समय से अवैध संबंध हैं. इसी के चलते रिंकू कामना से मिलने घर आता है और उस के साथ लंबा समय बिताता है.

रिंकू को ले कर पतिपत्नी के बीच विवाद हो गया. कामना ने पति को लाख सफाई दी कि रिंकू के साथ उस का कोई अनैतिक संबंध नहीं है, लेकिन वह इस बात पर यकीन करने के लिए तैयार ही नहीं था. हकीकत भी यही थी कि कामना और रिंकू के बीच कोई अवैध संबंध नहीं था.

पहले रिंकू को लगाया ठिकाने

अशोक के मन में रिंकू नाम की शक की चिंगारी भड़की तो वह शोलों का रूप लेती गई. शक की आग में जलते अशोक ने एक खतरनाक फैसला ले लिया. यह फैसला था रिंकू को रास्ते से हटाने का. उस ने कामना को इस की भनक तक नहीं लगने दी.

योजना के अनुसार, 3 नवंबर, 2018 को अशोक ने रिंकू को अपने जन्मदिन की पार्टी में सहस्त्रधारा रोड स्थित एक मित्र के आवास पर बुलाया, जहां पर रात में पार्टी हुई. उस पार्टी में अशोक के दोस्त दीपक शर्मा, उस का छोटा भाई गौरव शर्मा और परवेज उर्फ बसरू निवासी सरधना, मेरठ शामिल थे.

इस पार्टी में कामना को नहीं बुलाया गया था. दीपक, गौरव और परवेज 4 नवंबर की सुबह रिंकू को नौकरी दिलाने के बहाने अपने साथ ले कर राजस्थान चले गए. जाने के लिए अशोक ने उन्हें कार बुक करा दी थी. रास्ते में परवेज ने धोखे से रिंकू को शराब में जहर दे दिया.  बाद में उसे गला दबा कर मारने के बाद तीनों ने उस की लाश चुरू की झाडि़यों में फेंक दी और देहरादून लौट आए. रिंकू चूंकि घर से बेदखल था, इसलिए किसी ने उसे ढूंढने की कोशिश नहीं की.

अशोक ने कामना के आसपास से भले ही रिंकू नाम के कांटे को सदा के लिए निकाल फेंका था, लेकिन वह अब भी शक की आग में जल रहा था. अशोक के शक करने की बीमारी से दोनों के बीच मतभेद गहरा गए थे. एक छत के नीचे रहते हुए भी उन में बहुत कम बात होती थी, सिर्फ जरूरत भर की.

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इस बार अशोक को पता चला कि कामना का किसी फाइनेंसर के साथ चक्कर है. इसे ले कर उन के बीच जो बचेखुचे रिश्ते थे, वे भी खत्म हो गए. परिवार के टूटने से कामना बुरी तरह टूट गई थी. पति को उस ने लाख सफाई देनी चाही, लेकिन वह अपनी गृहस्थी बचाने में कामयाब नहीं हुई.

जो अशोक कभी उसे दिल की गहराइयों से चाहता था, उसी को कामना की सूरत से भी घृणा हो गई थी. बेइंतहा प्यार अब बेइंतहा नफरत में बदल गया था. 5 सालों के भीतर इश्क का आशियाना तिनकातिनका हो कर बिखर गया था. अकेलापन दूर करने के लिए अशोक के दिल में फिर से रेखा के लिए प्यार उमड़ आया. वह एक बार फिर रेखा की बांहों में जा गिरा. अशोक रेखा का पहला प्यार था, वह भी उसे भुला नहीं पाई थी. जब अशोक उस की पनाह में आया तो उस ने उसे दिल में जगह दे दी.

कामना से पति की यह बातें छिपी नहीं रह सकीं. जब उसे पति की सच्चाई पता चली तो घर में महाभारत छिड़ गया. गुस्से में आ कर अशोक ने यहां तक कह दिया कि जाह्नवी उस की बेटी नहीं है, बल्कि किसी और की नाजायज औलाद है. कामना को पति की यह बात दिल में चुभ गई. इस बात को ले कर दोनों के बीच खूब झगड़े हुए.

अशोक रोजरोज की चिकचिक से ऊब गया था और डिप्रेशन में रहने लगा था. अब कामना उसे फूटी आंख नहीं सुहाती थी. अंतत: उस ने पत्नी को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली. उस ने 2 लाख में पत्नी की हत्या की सुपारी दे दी. यह काम मेरठ के कस्बा सरधना निवासी दीपक, गौरव और परवेज को करना था. योजना बनी कि घटना को अंजाम देने के बाद हत्या का दोष रिंकू के सिर मढ़ दिया जाएगा. पुलिस रिंकू की तलाश में मारीमारी फिरती रहेगी.

सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था. गौरव शर्मा ने बतौर पेशगी अशोक से एक लाख रुपए ले लिए थे. बाद में उस ने उस से 50 हजार रुपए और लिए. उन रुपयों में से उस ने 30 हजार रुपए का एक रिवौल्वर खरीदा. 28 अगस्त, 2019 की शाम गौरव अपने साथियों दीपक और परवेज को ले कर मेरठ से देहरादून पहुंचा, लेकिन उस दिन सही मौका न मिलने से ये लोग अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके.

29 अगस्त की रात कामना घर का कामकाज निपटा कर बेटी के साथ जल्द सो गई थी. अशोक भी जल्दी घर आ गया था. पत्नी के गहरी नींद में डूबते ही अशोक ने करीब 11 बजे गौरव को फोन कर घर बुला लिया.

गुमराह नहीं हो पाई पुलिस

तीनों बदमाश एक होटल में कमरा ले कर ठहरे थे ताकि किसी को उन पर शक न हो. अशोक की ओर से हरी झंडी मिलते ही साढ़े 11 बजे दीपक शर्मा, गौरव शर्मा और परवेज अशोक के घर पहुंच गए. अशोक के घर में चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे. गौरव ने देखा तो सहम गया. उस ने अशोक से कैमरे औफ करने के लिए कहा तो उस ने कैमरे बंद कर दिए.

खैर, अशोक ने तीनों को ड्राइंग रूम में बैठाया. गौरव ने उस से कामना के बारे में पूछा तो उस ने कमरे की ओर इशारा कर के बता दिया कि वह कमरे में सो रही है. उस के साथ बेटी भी सो रही है. उसे कुछ नहीं होना चाहिए. इशारे से अशोक ने उसे समझाया तो उस ने सिर हिला कर भरोसा दिया कि बच्ची को कुछ नहीं होगा.

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तीनों बदमाश दबे पांव उस कमरे में पहुंचे, जहां कामना गहरी नींद में सो रही थी. गौरव ने कमर से पिस्टल निकाला और उस के सिर के पीछे सटा कर ट्रिगर दबा दिया. गोली उस की दाईं आंख को चीरती हुई पार हो गई और बैड में जा धंसी. कुछ पल के लिए कामना हिली, फिर शांत हो गई.

पुलिस को गुमराह करने के लिए अशोक ने गौरव से उस पर भी फायर करने के लिए कह दिया था ताकि लगे कि बदमाश लूट की नीयत से घर में घुसे थे. विरोध करने पर उन्होंने कामना और उस के पति को गोली मार दी, जिस में कामना की मौत हो गई और यह बच गया. अशोक के कहने पर गौरव ने उसे पीछे से गोली मारी. गोली अशोक की पीठ और पेट को चीरती हुई दीवार में धंसी.

उस के बाद गौरव, दीपक और परवेज सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर उखाड़ अपने साथ ले गए ताकि पुलिस उन तक किसी भी कीमत पर न पहुंच सके, लेकिन वे अपने मकसद में सफल नहीं हो सके. पुलिस काल डिटेल्स और सर्विलांस के जरिए कातिलों तक पहुंच ही गई. अशोक ने रिंकू को फंसा कर पुलिस को उलझाने की जो तरकीब निकाली थी, वह धरी की धरी रह गई.

पुलिस ने रिंकू और कामना की हत्या के लिए दीपक शर्मा, गौरव शर्मा, अशोक रोहिल्ला और परवेज के खिलाफ हत्या और आपराधिक षडयंत्र रचने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया. रिंकू की लाश का पता लगाने के लिए पुलिस तीनों आरोपियों दीपक, गौरव और परवेज को ले कर राजस्थान के चुरू गई, लेकिन उस की लाश नहीं मिल सकी.

शक की बीमारी ने न जाने कितनी गृहस्थियां उजाड़ी हैं. अशोक के साथ यही हुआ. अगर उस ने विवेक से काम लिया होता तो कामना जिंदा होती और वह जेल के बाहर. – रेखा और सुरेश परिवर्तित नाम है.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

शक्की पति की मजबूर पत्नी: भाग 2

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पूछताछ के दौरान पुलिस को अशोक यह नहीं बता सका कि रिंकू ने कामना की हत्या और उसे मारने की कोशिश क्यों की? आखिर कामना से उस की क्या दुश्मनी थी? अशोक के बयान ने पुलिस को उस पर शक करने को मजबूर कर दिया.

पुलिस सच की तलाश में जुटी थी और गहराई में जाने के लिए उस ने कामना और अशोक के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स खंगाली, जिस से यह पता लग सके कि घटना वाली रात दोनों ने किसकिस से बात की थी. इसी दरमियान मृतका कामना के भाई ने पुलिस को बहनोई अशोक के बारे में एक ऐसी चौंकाने वाली जानकारी दी, जिस ने जांच की दिशा ही बदल दी.

पुलिस ने जब अशोक के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि घटना वाली रात उस की आखिरी बात मेरठ के सरधना निवासी दीपक शर्मा से हुई थी. उधर रिंकू वर्मा को पकड़ने के लिए भी पुलिस की खोजबीन जारी थी.

इस प्रयास में पुलिस ने रिंकू के कुछ साथियों को पकड़ लिया. उन से रिंकू के बारे में सख्ती से पूछताछ की गई तो पता चला कि रिंकू सालों से नजर नहीं आया. किसी को भी उस का पता नहीं था.

रिंकू के साथियों से मिली जानकारी और कामना के भाई द्वारा बताई गई बातों से पुलिस को यकीन हो गया कि कामना की हत्या के पीछे उस के पति अशोक रोहिल्ला का ही हाथ है. पुलिस को अशोक के खिलाफ कई ठोस सबूत मिल गए थे. अब बस इंतजार था अशोक के स्वस्थ होने का.

2 दिनों बाद नेहरू कालोनी के थानेदार दिलबर नेगी सबूतों के साथ अस्पताल पहुंचे. अशोक आईसीयू से जनरल वार्ड में शिफ्ट हो चुका था. थानेदार नेगी बात घुमानेफिराने की बजाए सीधेसपाट शब्दों में बोले, ‘‘तुम्हारा खेल खत्म हुआ अशोक. अब हमें बता दो कि तुम ने अपनी पत्नी की हत्या क्यों कराई? तुम तो जानते हो कि कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं. तुम्हारे तीनों कमीने नगीने कानून के फंदे में फंस गए हैं.’’

हत्यारा अशोक ही था

एसओ नेगी की बात सुन कर अशोक को सांप सूंघ गया. वह अवाक सा दिलबर नेगी का मुंह ताकता रह गया. नेगी ने आगे कहा, ‘‘तुम्हारे बचने के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं. सारे सबूत तुम्हारे खिलाफ हैं. पुलिस को सच्चाई पता चल चुकी है.’’

अशोक को काटो तो खून नहीं, गरमी में भी चेहरा सर्द हो गया. वह समझ गया था कि पुलिस को सच्चाई का पता चल चुका है. झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं था. अंतत: उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया कि उस ने ही 2 लाख की सुपारी दे कर अपनी पत्नी की हत्या कराई थी. उस ने इस की जो कहानी सुनाई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली थी.

स्वास्थ्य लाभ होने तक पुलिस आरोपी अशोक रोहिल्ला को गिरफ्तार नहीं कर सकी. लेकिन उसे हिरासत में ले कर उस के इर्दगिर्द पुलिस बल बढ़ा दिया गया ताकि वह भाग न सके. कामना रोहिल्ला हत्याकांड की कहानी कुछ इस तरह सामने आई –

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35 वर्षीय अशोक रोहिल्ला मूलरूप से मेरठ के सरधना का रहने वाला था. वह देहरादून में रह कर ट्रांसपोर्ट का बिजनैस करता था. माल ढुलाई के लिए उस के पास कई निजी ट्रक थे. ट्रांसपोर्ट कारोबार में उसे अच्छी कमाई होती थी. अशोक के मांबाप और भाईबहन मेरठ में ही रहते थे. अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा वह घर खर्च में लगा देता था. उस का भरापूरा समृद्धशाली परिवार था. रुपएपैसों से भी और मानसम्मान से भी.

अशोक भाईबहनों में दूसरे नंबर का था. बचपन से ही मेहनतकश इंसान. मेहनत के बलबूते पर ही उस ने इतनी कम उम्र में बुलंदियों को छुआ था. पैसा आने के बावजूद उस में अभिमान नाम की कोई चीज नहीं थी. बड़ा हो या छोटा, वह सभी का सम्मान करता था.

कारोबार के चलते अशोक रोहिल्ला का ज्यादातर समय देहरादून में बीतता था. बात 2009 की है. देहरादून के जिस इलाके में अशोक का ट्रांसपोर्ट का कारोबार था, उस के औफिस के ठीक सामने एक दुकान पर पीसीओ था.

दुकान पर कभी औसत कदकाठी और साधारण शक्लसूरत की लड़की रेखा बैठती थी, तो कभी उस का भाई सुरेश. अशोक को जब भी कहीं बात करनी होती थी तो वह सुरेश के पीसीओ से ही बात करता था.

वह उस वक्त बात करने जाता था, जब वहां रेखा होती थी. धीरेधीरे अशोक और सुरेश के बीच दोस्ती हो गई. अशोक ने सुरेश से दोस्ती रेखा का सान्निध्य पाने के लिए की थी.

अशोक जवान था और खूबसूरत भी. उम्र के जिस पायदान पर वह खड़ा था, वहां किसी लड़की का सान्निध्य पाने की चाहत स्वाभाविक थी. रेखा जवान हो चुकी थी. उस के अंगअंग से कौमार्य की खुशबू आती थी. रेखा के कौमार्य की खुशबू जब अशोक के दिलोदिमाग तक पहुंची तो वह सुधबुध खो बैठा.

रेखा ने अशोक के मनोभावों को पढ़ लिया था. वह खुद भी सजीले जवान अशोक से प्रभावित थी. प्रेम का बीज दोनों के मन में अंकुरित हो गया था. अभी अशोक और रेखा दिल की जमीन पर मोहब्बत की फसल उगा ही रहे थे कि दोनों के बीच चुपके से एक नई कहानी ने जन्म ले लिया.

एक स्थाई ग्राहक कामना रेखा के पीसीओ पर अकसर बात करने आया करती थी. वह बहुत ज्यादा खूबसूरत तो नहीं थी, लेकिन उस में ऐसा कुछ जरूर था कि लोग उस की ओर आकर्षित हो जाते थे.

अशोक ने जब से कामना को देखा था, वह रेखा को भूल कर उस पर लट्टू हो गया था. जबकि अशोक अच्छी तरह जानता था कि कामना उस के दोस्त सुरेश की प्रेमिका है, फिर भी वह उसे जुनून की हद तक चाहने लगा. अशोक ने उसे हर हाल में अपनी बनाने की सोच ली.

अशोक रोहिल्ला बिजनैसमैन था. उस ने बिजनैसमैन वाला दिमाग इस्तेमाल किया. धीरेधीरे उस ने कामना को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की तो वह इस में सफल हो गया.

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अशोक ने कामना को बनाया जीवनसाथी

कामना के जिंदगी में आते ही अशोक ने रेखा से मुंह मोड़ लिया था. बहरहाल, अशोक कामना को और कामना उसे प्यार करने लगे. अशोक की बांहों में जाते ही कामना ने पहले प्रेमी सुरेश को अपनी जिंदगी से मक्खी की तरह निकाल दिया. प्रेमिका की बेवफाई को वह सहन न कर सका तो देहरादून छोड़ कर हमेशा के लिए कहीं और चला गया.

अशोक और कामना खुले आसमान में कुलांचे भरने लगे. मोहब्बत की डगर पर चलतेचलते दोनों ने एकदूसरे के बिना जीने की कल्पना ही छोड़ दी. 6 सालों तक लुकाछिपी का खेल खुल कर खेलने के बाद अशोक और कामना ने 2014 में कोर्टमैरिज कर ली.

अब दोनों प्रेमीप्रेमिका से पतिपत्नी बन गए. अदालती विवाह करने के बाद अशोक और कामना नेहरू कालोनी इलाके की पौश कालोनी कामना माता मंदिर रोड पर किराए का फ्लैट ले कर रहने लगे. बाद में दोनों के परिवार वालों ने उन्हें स्वीकार कर लिया और धूमधाम से दोनों की शादी संपन्न हुई.

अशोक का जमाजमाया कारोबार था. दिन में वह अपने काम पर चला जाता था. दूसरी ओर कामना अकेली घर में बोर हो जाती थी. कामना ने इस खाली वक्त का इस्तेमाल करने के लिए बुटीक खोलने का फैसला किया. इस बारे में उस ने अशोक से बात की तो उस ने भी हां कर दी और पैसा लगाने को भी तैयार हो गया.

बुटीक चलाने के लिए उसे जिस भी चीज की जरूरत होती, अशोक ला कर दे देता था. पति के सहयोग से कामना ने मोहल्ले में ही बुटीक खोल लिया. थोड़ी सी मेहनत के बाद उस का बुटीक चल निकला.

2 साल बाद कामना ने एक बेटी को जन्म दिया. दोनों ने बड़े लाड़प्यार से उस का नाम जाह्नवी रखा. जाह्नवी के आने से कामना की जिंदगी और व्यस्त हो गई थी. देखभाल के लिए बेटी को वह अपने साथ बुटीक ले आती थी.

अशोक और कामना की जिंदगी बड़े मजे से कट रही थी. पतिपत्नी दोनों कमा रहे थे. अशोक की बुआ का बेटा रिंकू उर्फ अजय वर्मा अकसर भाईभाभी से मिलने उन के घर आता था. इत्तफाक की बात यह थी कि वह जब भी आता था, उस की मुलाकात अशोक से नहीं हो पाती थी. क्योंकि वह काम के सिलसिले में घर से बाहर रहता था. देवर के रिश्ते को महत्त्व देते हुए कामना उस की खूब खातिरदारी करती थी.

जब अशोक को पता चला कि रिंकू उस की अनुपस्थिति में घर पर पत्नी से मिलने आता है, तो वह पत्नी पर भड़क गया. उस ने कामना से कहा कि जब भी वह घर आए तो उसे बैठाने के बजाए बाहर से ही विदा कर दिया करे. रिंकू अपराधी किस्म का इंसान है.

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पुलिस ने उस पर बड़ा ईनाम रख रखा है. उस की वजह से हम भी मुसीबत में आ सकते  हैं. कामना ने पति की बात सुन तो ली लेकिन उस पर अमल नहीं कर पाई. इस के बावजूद अशोक ने खुद भी साफतौर पर रिंकू को घर आने से मना कर दिया.

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

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