प्रायश्चित : भाग 3

कहते समय सुधि की आंखों में आंसुओं की बाढ़ सी आ गई थी और वह सुधीर के पलंग के पास बैठ कर उन्हें निहारने लगी…फिर डाक्टर की बातें सुनने लगी.

‘‘सुधिजी, जब यह हमारे पास आए थे तब बहुत ही कमजोर थे. हमेशा थकेथके से रहते थे…बुखार भी रहता था. सांस भी मुश्किल से लेते थे. पहले हम लोगों ने इन की बौडी देखी जिस पर लाललाल चकत्ते से पडे़ थे. इन का टी.एल.सी., डी.एल.सी. करवाया, एक्सरे करवाया और बोनमैरो टेस्ट करवाया, हां, लंबर पंक्चर भी करवाया है…स्पाईनल कार्ड में से फ्ल्यूड निकाला था.’’

‘‘इतने सारे टेस्ट हुए हैं सुधीर के और इन्होंने मुझे हवा भी नहीं लगने दी?’’

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‘‘मैडम सुधि, आप के पति बडे़ साहसी हैं. जब हम ने इन्हें बताया कि आप को माईलाइट एक्यूट ब्लड कैंसर यानी कि एक्यूट ल्यूकीमिया है तब रत्ती भर भी इन के चेहरे पर शिकन नहीं पड़ी और न ही चिंतित हुए बल्कि यह कहने लगे कि अब मुझे बहुत कुछ करना है अपनी पत्नी और बेटों के लिए. कमाल का स्वभाव है आप के पति का,’’ कहते समय डा. वर्मा की निगाहें भी सुधीर के चेहरे पर टिकी हुई थीं.

सुधीर की आंखों की दोनों कोर गीली हो रही थीं और लग रहा था कि आंखें हजारहजार बातें कहना चाह  रही हों लेकिन जिंदगी हाथों की मुट्ठी से रेत की तरह खिसक रही थी. शायद जीवन काल के कुछ ही घंटे बचे थे. बीचबीच में आई.सी.यू. के दरवाजे की ओर भी देख रहे थे. सुधीर का पीला जर्द चेहरा देखने का साहस सुधि की आंखें नहीं जुटा पा रही थीं.

आंखों से बहते आंसुओं को पोंछते हुए जब सुधि ने सुधीर का हाथ पकड़ा तो उन्होंने आक्सीजन ट्यूब हटा कर धीमे से कहा, ‘‘सुधि, आई लव यू.’’

सुधि बच्चों की तरह फफक पड़ी. मुंह से निकला, ‘‘सुधीर, आई लव यू टू,’’ और सुधीर के हाथों को सहलाती रही. उसे लगा उस की भंवर में फंसी नाव जो कुछ घड़ी, कुछ लम्हे आराम से बह रही थी अब ठीक किनारे पर आ कर डूब गई है.

उस अस्पताल में जब सुधीर ने उसे कस कर पकड़ा और कहा, ‘प्लीज, मुझे छोड़ कर अभी मत जाना,’ एकाएक उसे अस्पताल की वह उमस भरी, घुटन भरी रात याद आ गई जब अगम की डिलीवरी होने वाली थी, वह दर्द से तड़प रही थी, कराह रही थी, प्रसव वेदना तीव्र थी. सुधि ने रोते हुए सुधीर से कहा था, ‘प्लीज, तुम आज रात अस्पताल में रुक जाओ, घर मत जाओ.’

लेकिन सुधीर ने स्पष्ट रूखे स्वर में कहा था, ‘मैं…मैं अस्पताल में नहीं रुक सकता. हैं तो मम्मीपापा और सर्वेंट…जब जरूरत पड़ेगी ये लोग मुझे बुला लेंगे.’

उस दिन के बाद से सुधि ने अपनी पीड़ा, अपना दर्द अपनी परछाईं तक को व्यक्त नहीं किया, सुधीर तो दूर की बात थे.

अभी 2 माह पहले तक सुधि को लगता था कि यह पति का घर, पति का आंगन उस के लिए अनजाना है, बेगाना है, इसे घर कहना बेईमानी है. लेकिन इधर 2 माह से यह आंगन, यह मकान घर का रूप ले बैठा है.

और वह भी प्यार, त्याग की सुगंध से सुवासित हो गए हैं. एक समझौते वाले जीवन को अभी उस ने आदर्श जीवन की तरह जीना शुरू ही किया है, लेकिन इस महके आंगन में वीरानियां, सन्नाटों ने बंजारों की भांति डेरा डाल लिया. हाय, क्या लाभ है मेरी इतनी योग्यताओं का, इतनी अधिक सुंदरता का, इतनी उच्च शिक्षा का जब मेरी तकदीर में ही सदाबहार वन के स्थान पर कीचड़ ही कीचड़ है.

सुधीर की दशा पलपल बिगड़ रही थी. खून की बोतलें लगातार चढ़ रही थीं. आक्सीजन भी दी जा रही थी. सब को पता था कि काले बादल अब मौत ही ले कर आएंगे फिर भी डाक्टर लोग बचाने का प्रयास कर रहे थे, दोनों बेटे पिता के बेड के पास खडे़ हुए कभी अपने पिता को, कभी अपनी मां सुधि को देख रहे थे जिस ने रोरो कर आंखें सुजा ली थीं और अस्तव्यस्त दशा में बैठी थी. बीचबीच में साहस के, हिम्मत के दो शब्द बोल भी रही थी :

‘‘न…न…सुधीर, तुम रोओ मत. तुम ठीक हो जाओगे. लेकिन सचसच बताओ, तुम ने मुझे क्यों नहीं बताया? यह पहाड़ जैसा दुख तुम अकेले ही झेलते रहे और तुम्हारे इन बेटों ने भी मुझे कानोंकान खबर नहीं लगने दी.

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‘‘यह बहुत गलत किया है तुम लोगों ने. मैं जीवन भर इस बात से तड़पती रहूंगी. सुधीर, औरत के लिए सब से बड़ा पुण्य है अपने पति की सेवा करना और आप ने मुझे उस सेवा से वंचित रखा. यह…यह अच्छा नहीं किया.’’

सुधि फिर फूटफूट कर रोने लगी. ब्लड की बोतल चढ़ रही थी. आक्सीजन दी जा रही थी लेकिन सुधीर मुंह से आक्सीजन कैप हटा कर धीरे से बोले, ‘‘मैं अपने पापों का प्रायश्चित कर रहा था क्योंकि तुम्हारे जैसी नेक पत्नी को मैं ने बहुत दुख दिए, बहुत प्रताड़ित किया,’’ और फिर कैप लगा ली. बच्चों ने पापा को खूब प्यार किया, सुधि ने सुधीर के माथे पर हाथ फेरा, फिर उन के सीने पर सिर रख कर बोली, ‘‘लेकिन सुधीर, तुम ने ऐसा प्रायश्चित किया कि मुझे 2 महीनों में इतना सुख, इतना प्यार दे दिया जो पति अपनी पत्नी को 20 सालों में भी नहीं देते हैं.’’

एकाएक सुधीर की सांसें रुक सी गईं. डाक्टर ने चेस्ट दबा कर सांस दिलवानी शुरू की, लेकिन सब बेकार.

आकाश में हजारों मौत की काली घटाएं पंख फैलाए डराने लगीं…

मरने से पहले सुधीर को एक बार फिर खून की उलटी आई, नाक से भी निरंतर खून बहने लगा…फिर सांस आनी बंद हो गई.

असहाय, बेबस, बेचारी पत्नी और दोनों बेटे सुधीर की जिंदगी नहीं बचा पाए. खैर, सुधीर की आंखों में लिखा हुआ शब्द आसानी से पढ़ा जा रहा था : प्रायश्चित…प्रायश्चित…प्रायश्चित.

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प्रायश्चित : भाग 2

जब-जब सुधीर ने उसे खाने-पीने पर, कपड़े पहनने पर, उस की पसंद पर अपमानित किया उसे यही लगा कि पंख फैलाए मौत उस के सिर पर मंडरा रही है. एक बार तो सुधीर ने क्लब जाने के लिए बच्चों और सुधि को तैयार होने के लिए कहा तो आज्ञानुसार सुधि ने बच्चे तैयार किए और स्वयं भी लालकाली चौड़ी बार्डर वाली साड़ी पहन ली लेकिन जल्दीजल्दी में वह चप्पलें बदलना भूल गई. जैसे ही वह कार में बैठने लगी सुधीर की निगाह चप्पलों पर पड़ गई. देखते ही पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, ‘यह…यह क्या है पांव में. अरे, इतनी भी तमीज नहीं है कि क्लब जाना है तो ढंग की चप्पलें पहन लो. मुझे शर्म आती है यह सोच कर कि मैं ने तुम से शादी  की है. बिलकुल गंवार हो, कोई भी तुम्हें पढ़ीलिखी नहीं कहेगा.’   सुधीर के शब्दों से सुधि इतनी अधिक छिल गई थी जैसे छिलछिल कर खीरा हरे से सफेद हो जाता है.

उसी समय वह ड्रेसिंग रूम में गई, आंखें पोंछी, चप्पलें बदलीं फिर कार में बैठी. उस समय दिल में आया था कि वह जाने के लिए मना कर दे, लेकिन उस के संस्कारों ने, उस के कोमल, सहनशील स्वाभिमान ने उसे ऐसा नहीं करने दिया.

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आज कह रहे हैं कि सुधि, तुम अब स्मार्ट बन कर रहने लगी हो, लेकिन मैं अब टूर में बहुत व्यस्त हूं पर तुम्हें घुमानेफिराने ले जाना चाहता हूं. सुधि ने सोचा कि सुधीर को यह क्या हो गया. अजीबअजीब सी बातें करते हैं. जितने दिन भी घर में रहते हैं कभी बाहर घुमाने, कभी बाहर खाना खिलाने ले जाते हैं. पहले तो कभी ऐसा नहीं हुआ. इस परिवर्तन से सुधि का दिमाग लट्टू की तरह घूम गया. सोने से दिन, चांदी सी रातें अब उस के नसीब में कैसे हो गईं? कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है?  वही है सुधि जिस के पांव के नीचे काली सड़क, सिर के ऊपर मंडराते काले बादल और मन में घोर अंधेरा पसरा रहता था…अब हर तरफ उजाला ही उजाला है.

लेकिन इस उजाले पर उस का विश्वास पारे सा चंचल हो रहा था. रात भर विचारों के जाल में फंसी सुधि ने सुबहसुबह जब सुधीर को चाय दी, तो उसे उन की देह गरम लगी. मन हवा के झोंके से हिलते पत्ते सा कांपा, क्योंकि मन तो प्रश्नों के मेले में पहले ही भटका हुआ था. सुधीर ने जब बाहर पिकनिक पर जाने के लिए कहा, तो सुधि तुरंत बोली, ‘‘आप को बुखार है. आज आप बाहर तो क्या आफिस भी नहीं जाएंगे.’’

जबरदस्ती की मुसकान होंठों पर बिखेरते हुए सुधीर बोले, ‘‘अरे, कुछ नहीं होता है इतनी हरारत से. आफिस तो मुझे जाना ही पड़ेगा.’’

‘‘कतई नहीं जाने दूंगी आफिस. चलिए, अभी अस्पताल चलिए…’’ और वह जल्दी से सुधीर के कपडे़ ले आई. सुधीर ने अलमारी खोल कर दवा खाई फिर आंखें बंद कर के लेट गए.

लेकिन सुधि के जिद करने पर वह कपड़े बदलने लगे…सुधीर की पीठ, बांहों पर लाललाल चकत्ते देख कर सुधि घबरा गई. सुधीर के चेहरे पर पलपल लहरों सी परिस्थितियां बदल रही थीं, कमजोरी के कारण धीरेधीरे काम कर रहे थे.

एकाएक सुधीर का पीला पड़ता हुआ चेहरा और नाक से बहता हुआ खून देख कर सुधि ने तुरंत डाक्टर को फोन किया, लेकिन सुधीर ने रोक कर कहा, ‘‘चलो, अस्पताल चलते हैं.’’

‘‘अरे, कुछ नाश्ता तो कर लो.’’

‘‘नहीं, मुझे भूख नहीं है,’’ फिर रुक कर बोले, ‘‘क्या बनाया है?’’

‘‘दलिया बना देती हूं. अभी तो कुछ भी नहीं बनाया है.’’

‘‘हां, बना दो. तुम बहुत टेस्टी दलिया बनाती हो.’’

धीरेधीरे तैयार हो कर सुधीर ने बनाई हुई वसीयत, जिस पर दोनों के हस्ताक्षर थे और बच्चों के फिक्स्ड डिपाजिट के पेपर्स सुधि को पकड़ा दिए.

कांपने लगे सुधि के हाथ. पेपर्स देते समय सुधीर के मसूड़ों से खून बहने लगा फिर उन्हें खून की उलटी आई, तो फौरन सुधि उन्हें अस्पताल ले गई.

अस्पताल में घुसते ही डा. वर्मा ने कहा, ‘‘सुधीरजी, हो गई न फिर गंभीर हालत. मैं ने आप को कल शाम ही घर जाने के लिए मना किया था, लेकिन आप तो 2 महीने से मेरी बात ही नहीं सुन रहे हैं. जिस दिन…’’

वाक्य बीच में सुधि ने रोक दिया, ‘‘यह आप क्या कह रहे हैं डा. वर्मा? क्या सुधीर इसी अस्पताल में 2 महीने से रह रहे थे.’’

‘‘हां…कभीकभी 1-2 दिन के लिए घर चले जाते हैं.’’

डा. वर्मा की बातें और सुधीर की गंभीर दशा पर सुधि को यकीन ही नहीं हो रहा था. उसे लगा कि वह कल्पना लोक में विचर रही है या कोई फिल्म देख रही है… क्यों रह रहे हैं सुधीर अस्पताल में? इन्हें क्या बीमारी है?

‘‘इन्हें एक्यूट माईलाइट ल्यूकीमिया हो गया है.’’

‘‘कब से?’’

‘‘बस, 2 महीने से और तभी से यह यहीं रहते हैं. साथ में एक इन का मित्र भी कभीकभी आ जाता है.’’

‘‘लेकिन यह तो टूर पर रहते हैं?’’

‘‘क्या कहा, टूर…इन की तो लास्ट स्टेज चल रही है. बोनमैरो फेल्योर हो चुका है और लंबर पंक्चर भी हो चुका है. अब तो इन के लिए आप दुआ ही करें. पता नहीं कब क्या हो जाए.’’

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‘‘क्यों?’’

‘‘क्योंकि रेड ब्लड सेल्स बनने बंद हो गए हैं. सफेद बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं.’’

सुन कर सुधि को लगा मानो चारों ओर अंधकार ही अंधकार छा गया है. और वह घिर गई है समस्या की अभेद्य दीवारों से. महाशून्य की एक ऊंची दीवार उस के चारों ओर घिर गई है.

वह दौड़ कर डा. वर्मा के पास गई और बोली, ‘‘डा. साहब, आप को कैसे पता लगा कि इन्हें ब्लड कैंसर है…क्या किया आप ने? कहीं गलत टेस्टिंग तो नहीं हो गई है, आप झूठ बोल रहे हैं, इन्हें ब्लड कैंसर नहीं हो सकता…’’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

प्रायश्चित : भाग 1

यह हो क्या गया है सुधीर का जो चेहरा सुबह की ओस की तरह दमकता था अब वह सूखे नारियल सा मुरझाया रहने लगा है और फौआरों सी उछल कर आसमान छूने वाली उन की वह हंसी भी अब गायब सी हो गई है.

कहां पहले उन के मुंह से एकएक शब्द मईजून की तपती धूप की तरह निकलते थे और अब बर्फ की तरह ठंडे शब्द बोलते हैं. बस, इसी तरह सुधि सुबह से शाम तक अपने पति सुधीर के बारे में सोचती रहती.

आज ही देखो, कितने प्यार से मेरे गालों को थपथपाते हुए बोले, ‘‘सुधि, अब बच्चे बडे़ हो गए हैं, तुम्हारा घर में मन नहीं लगता होगा तो सर्विस ज्वाइन कर लो.’’

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पहले तो कभी इस तरह नहीं बोले. बड़े आश्चर्य से वह सुधीर की ओर देखती रही और चक्रवात में फंसे हुए तिनके की तरह सोचती रही.

उसे लगा कि जैसे समुद्र के किनारे पर बड़ीबड़ी चट्टानों में ठहरा हुआ पानी सूरज के प्रकाश से चमक उठता है उसी तरह से सुधीर की आंखों में भी आंसू की बूंदें चमक रही थीं.

फिर सुधि ने हलकी आवाज में कहा, ‘‘अरे, आप को आज हो क्या गया है जो सर्विस करने के लिए कह रहे हो, पहले तो आप ने क्रोध में आ कर मेरी लगी हुई नौकरी छुड़वा दी कि आप जैसे इंजीनियर की पत्नी के नौकरी करने से आप की बदनामी होती है और आज आप फिर नौकरी करने के लिए कह रहे हैं.’’

मुंह का कौर खत्म कर के सुधीर बोले, ‘‘डार्लिंग, उस समय बच्चे बहुत छोटे थे, उन को तुम्हारी बहुत जरूरत थी.  अब दोनों बच्चे बाहर हैं, इंजीनियरिंग पढ़ रहे हैं, तुम बोर होती हो, तभी मैं ने सर्विस के लिए कहा है.’’

‘‘कैसी बातें करते हैं आप. अब मुझे किसी भी अच्छे स्कूल में नौकरी नहीं मिलेगी और छोटेमोटे स्कूल में मैं कभी भी नौकरी नहीं करूंगी,’’ कहते हुए सुधि खाना खा कर हाथ धोने लगी.

‘‘ठीक है, जैसा तुम चाहो करो…मैं तो नौकरी के लिए इसलिए भी कह रहा था क्योंकि अब मैं टूर पर बहुत रहता हूं. सुनो, अगर चाहो तो साहित्य सृजन शुरू कर दो.’’

बेझिझक, बेबाक हो कर सुधि ने उत्तर दिया, ‘‘वह तो मैं कर ही रही हूं और पत्रपत्रिकाओं में छप भी रहा है,’’ कहते हुए सुधि की निगाहें झुकी हुई थीं, जैसे उस ने कोई चोरी की है.

सुधीर के प्यार भरे संबोधन को सुन कर सुधि को लगा जैसे रात की गूंगी खामोशी को सुबह की आवाज मिल गई. उस के मन के अंधेरों में हजारों दीपक जल उठे, लेकिन उस प्रकाश में भी सुधि अतीत का इतिहास पढ़ने लगी.

कैसे भूल सकती है वह जवानी की वे रातें जब वह चांदनी के हिंडोले को टकटकी लगाए देखती थी, रोती थी जारजार. एकएक शब्द सुधीर का जलते हुए अंगारे सा उसे बाहर से अंदर तक जला देता था. ‘क्या तुम्हें खाने का भी ढंग नहीं आता, जो चावल हाथ से खाती हो.’

कभी झल्ला कर कहते, ‘ओह, हद हो गई है…जब भी कहीं जाती हो गंवार औरतों की तरह चटक रंग की साड़ी पहन लेती हो. किसी दिन बाजार चलो, मैं अच्छी साडि़यां खरीदवा दूंगा.’

एक दिन तो सुधीर ने सीमा ही लांघ दी, ‘मैं जब भी किसी मित्र को घर बुलाता हूं, एक तो खाना बेढंगा बनाती हो फिर कपडे़  भी वही अपने मायके के चटकीले, भड़कीले पहन लेती हो. मिसेज मिश्रा, मिसेज वर्मा को देखो, सब कितने स्टाइलिश कपडे़ पहनती हैं…तुम्हारे ऐसे रंगढंग देख कर तो मन करता है कि किसी मित्र को कभी घर न बुलाऊं.’

उन बातों से वह आज तक जली हुई है, लेकिन अब सुधीर की आदतें कैसे बदल गई हैं…अब तो चाशनी में पगे शब्दों को इस्तेमाल करते हैं. मेरी हर बात का बहुत खयाल रखते हैं. इधर 1 महीने के अंदर अपनी पसंद के ढेरों कपड़े और जेवर दिलवाए हैं, हालांकि खुद नहीं खाते हैं, लेकिन मुझे होटलों में खिलाते हैं.

और तो और, मेरी तबीयत खराब होने पर अपने दोस्त को डिनर भी होटल में दिया  था. लगता है आर्ट आफ लिविंग की क्लासेज अटैंड कर ली हैं. ताज्जुब है कि बेटों के और मेरे बैंक में अलग खाते खुलवा कर फिक्स्ड डिपाजिट में रुपए जमा कर दिए हैं. कहीं कुछ अशुभ तो नहीं घटने वाला है…कहीं इन्हें कुछ हो तो नहीं गया है.

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सोचते हुए सुधि सुधीर के पास जा कर उन्हें प्यार करने लगी. फिर दिमाग ने कहा कि 7 दिन बाद टूर से आए हैं, सोने दो.

हमेशा विचारों के तानेबाने में ऐसे ही उस रात घड़ी ने 3 बजा दिए और आंखें बारबार सुधीर के चेहरे को निहार रही थीं. एकाएक उसे लगा सुधीर के चेहरे की रौनक उड़नछू हो गई है, आंखों के नीचे स्याह गड्ढे भी पड़ गए हैं.

और एक ही झटके में उन के स्वभाव में कठोरता का स्थान कोमलता ने और कटुता का स्थान विनम्रता ने ले लिया है.

जो पति उसे कोयले का ढेर लगता था, अब ढेर में पड़ा हुआ हीरा लगने लगा है. शादी के बाद 20 सालों तक सुधि के दुख के अंगारों से दिल की शमा पिघल- पिघल कर आंखों से गिरती रही है, टप… टप…

एक खौफ, एक कर्कशता, एक अपमान, सुधीर के साथ से उसे एकएक बूंद कड़वे नीम के रस सा पीने को मिलता रहा है.

वह पीती भी रही है, क्योंकि वह एक अच्छी मां और आदर्श पत्नी के रूप में जीती रही है. पढ़ीलिखी है, एम.ए., बी.एड. तक. पिताजी भी प्रोफेसर थे और मां इंटरमीडिएट कालिज में टीचर थीं.

लेकिन शादी बेमेल हुई थी. सुधीर के पिताजी चीफ इंजीनियर थे और सुधीर स्वयं एक इंजीनियर. दोनों परिवारों के स्टैंडर्ड आफ लिविंग में बहुत असमानता थी. किस्मत का खेल कि अखबार के विज्ञापन से रिश्ता तय होना था, हुआ. सुधि ने तो स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि सबकुछ होते हुए भी सुधीर के क्रूर व्यवहार और अहंकारवश उस के पांव के नीचे हमेशा तपती जमीन रहेगी और सिर पर निष्ठुर आफताब.

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जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

क्या करें कि हम भी दूसरे दंपतियों की तरह सेक्स का आनंद ले सकें?

सवाल

मैं 24 वर्षीय युवती हूं. पति की उम्र 26 साल है. हम लोगों को सेक्स का बिलकुल भी ज्ञान नहीं है. विवाह को 6 महीने हो चुके हैं बावजूद इस के हम लोग ठीक से सहवास नहीं कर पाए हैं. जब भी पति सहवास के लिए प्रवृत्त होते हैं मैं डर के मारे असहज महसूस करती हूं. पति सहवास तो करते हैं पर कहते हैं कि उन्हें लगता है कि वे बलात्कार कर रहे हैं. क्या करें कि हम भी दूसरे दंपतियों की तरह सैक्स का आनंद ले सकें?

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जवाब 

आप को विवाहितों के लिए सेक्स विषय पर कोई अच्छी पुस्तक पढ़नी चाहिए. इस से आप को जानकारी मिलेगी कि कैसे संबंध बनाएं. इस के अलावा  सहवास में प्रवृत्त होने से पहले आप दोनों को प्रेमालाप, आलिंगन, चुंबन आदि रतिक्रीड़ा करनी चाहिए. इस से कामोत्तेजना बढ़ती है. उस के बाद आप सहवास करेंगे तो आप को सुखानुभूति अवश्य होगी, बशर्ते आप अपने मन में कोई पूर्वाग्रह न रखें.

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Bigg Boss 14 के घर में जैस्मीन-रूबिना के बीच हुई जमकर लड़ाई, देखें Video

टेलीविजन के सबसे पौपुलर रिएलिटी शो बिग बॉस के सीजन 14 (Bigg Boss 14) की धमाकेदार शुरूआत हो चुकी है और साथ ही बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) की तरह ये सीजन भी जल्द ही रफ्तार पकड़ता दिखाई दे रहा है. इस सीजन की सबसे अनोखी बात ये है कि इस बार कंटेस्टेंट्स के साथ घर में सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla), हिना खान (Hina Khan) और गौहर खान (Gauhar Khan) सीनियर्स के रूप में नजर आ रहे हैं और बाकी कंटेस्टेंट्स को अपने समान की डिमांड से लेकर किचन और बेडरूम तक सीनियर्स की बात मानने पड़ेगी.

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एसी के चलते बीते एपिसोड में बिग बॉस के घर में काफी बड़ी लड़ाई होती नजर आई और ये लड़ाई टेलीविजन सीरियल्स की 2 बहुओं के बीच हुई जिनका नाम है जैस्मीन भसीन (Jasmin Bhasin) और रूबिना दिलाइक (Rubina Dilaik). इन दोनों की लड़ाई का मुद्दा ये था कि जैस्मीन भसीन ने सीनियर्स से मेकअप आइटम्स की मांग की तो वहीं दूसरी तरफ रूबिना दिलाइक ने अपने लिए जूते और चप्पल मांगे.

सीनियर्स के अनुसार किसी एक कंटेस्टेंट को अपनी चीजों को लेकर कॉम्प्रोमाइज करना था लेकिन दोनो में से कोई भी एक दूसरे के सामने झुकने के लिए तैय्यार नहीं था. जैस्मीन भसीन (Jasmin Bhasin) के मुताबिन रूबिना दिलाइक (Rubina Dilaik) एक जोड़ी जूते-चप्पल के साथ भी गुजारा कर सकती हैं तो उनकी डिमांड गलत है. इसी बहस में दोनों कंटेस्टेंट के बीच जमकर लड़ाई हुई.

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ऐसे में सीनियर्स ने भी दोनों को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन दोनों में से कोई भी समझने को तैय्यार नहीं था. इन दोनों की लड़ाई के चलते लग्जरी आइटम के लिए सारा गुरपाल (Sara Gurpal) और निक्की तम्बोली (Nikki Tamboli) के बीच भी कहा सुनी हुई जो कि बाद में शांत हो गई और दोनों एक दूसरे के दोस्त भी बन गए.

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अब देखने वाली बात ये होगी कि शो के आने वाले एपिसोड्स में दर्शकों को और क्या क्या इंटरस्टिंग देखने को मिलने वाला है और सीनियर्स किस प्रकार जूनियर्स को उन्हीं की चीज़े देने के लिए परेशान करेंगे.

Mirzapur 2 के ट्रेलर रिलीज से पहले ही एक्साइटेड हुए फैंस, मीम्स बना कर दिखाई खुशी

इस वेब सीरीज के दौर में ओटीटी प्लेटफोर्म अमेजॉन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) की एक वेब सीरीज दर्शकों द्वारा काफी पसंद की गई है और उसका नाम है ‘मिर्जापुर’ (Mirzapur). मिर्जापुर का पहला सीजन 16 नवम्बर 2018 मे रिलीज किया गया था जो कि दर्शकों ने बेहद पसंद किया था और तभी से मिर्जापुर फैंस को इसके अगले सीजन का इंतजार होने लगा था.

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मिर्जापुर सीजन 2 (Mirzapur 2) की अनाउंस्मेंट तो काफी समय पहले ही हो गई थी लेकिन फैंस ये बात जानने के लिए उत्सुक थे कि आखिर कब रिलीज हो रही है उनकी पसंदीदा वेब सीरीज का अगला सीजन तो आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही मिर्जापुर सीजन 2 (Mirzapur 2) की रिलीज डेट मेकर्स ने फैंस को बताई है जो कि 23 अक्टूबर है.

फैंस को अब ‘मिर्जापुर’ (Mirzapur) के सीजन 2 का बेसब्री से इंतजार होने लगा है और बात की जाए मिर्जापुर सीजन 2 के ट्रेलर की तो मेकर्स ने आज के दिन यानी कि 6 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे रिलीज करने का फैसला किया है. इसके बाद से तो जैसे सोशल मीडिया पर मिर्जापुर के आने वाले सीजन पर मीम्स की बाढ़ सी आ गई है.

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फैंस लगातार सोशल मीडिया पर मिर्जापुर के मीम्स बना कर शेयर कर रहे हैं. फैंस की एक्साइटमेंट देख ये कहना तो बिल्कुल तय है कि मिर्जापुर सीजन 2 सुपरहिट जाने वाला है. तो चलिए आपको दिखाते हैं कुछ मीम्स जो कि सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं.

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ऐसे मीम्स को देख कर ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि फैंस मिर्जापुर सीजन 2 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं को अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या मिर्जापुर सीजन 2 पहले सीजन की तरह दर्शकों के दिल पर राज कर पाती है या नहीं.

2 करोड़ की प्रीत: भाग 1

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

25 सितंबर, 2019 तक मध्यप्रदेश में उजागर हुए सेक्स स्कैंडल जिसे मीडिया ने हनीट्रैप नाम दिया था, का मुकम्मल बवाल मच चुका था. हर दिन इस स्कैंडल से जुड़ी कोई खबर सनसनी पैदा कर रही थी. राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में काम कम इस देशव्यापी स्कैंडल और उस से जुड़े अधिकारियों और नेताओं की चर्चा ज्यादा हो रही थी कि इस में कौनकौन फंस सकते हैं.

लेकिन जब सरकार ने इस स्कैंडल की जांच के बाबत विशेष जांच दल का गठन कर दिया तो चर्चाएं और खबरें धीरेधीरे कम होने लगीं और दीवाली आतेआते लोगों की जिज्ञासा भी खत्म होने लगी.

जो लोग यह जानने को उत्सुक थे, उन नेताओं और अधिकारियों के असल चेहरे और नाम उजागर होंगे, जिन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा था, उन की उत्सुकता भी ठंडी पड़ गई थी.

लोगों ने मान लिया कि इस कांड का हाल भी व्यापमं घोटाले जैसा होना तय है, जिस में कोई नहीं फंसा था और जो फंसे थे वे सीबीआई जांच के बाद दोषमुक्त हो गए थे.

अगर यही होना था तो इतना बवंडर क्यों मचा, इस सवाल का सीधा सा जवाब यही निकलता है कि मकसद चूंकि इस में फंसे शौकीन रंगीनमिजाज राजनेताओं और अधिकारियों को और ज्यादा ब्लैकमेलिंग से बचाना था, इसलिए इंदौर नगर निगम के एक इंजीनियर हरभजन सिंह को बलि का बकरा बनाया गया और आरोपियों को जेल भेज कर बाकियों को कुछ इस तरह बचा लिया गया कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.

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इस सेक्स स्कैंडल की सनसनी का इकलौता फायदा यह हुआ कि जो दूसरे मर्द इस तरह की ब्लैकमेलिंग का शिकार हो रहे थे, उन में से कुछ को हिम्मत बंधी कि अगर पुलिस में रिपोर्ट लिखाई जाए तो ब्लैकमेलिंग से छुटकारा मिल सकता है. क्योंकि इंदौर भोपाल के सेक्स स्कैंडल में काररवाई ब्लैकमेल करने वाली बालाओं के खिलाफ हुई थी और पीडि़त पुरुष साफ बच गए थे.

मुमकिन है कि आने वाले वक्त में कुछ बड़े नाम सामने आएं, लेकिन यह अंजाम कांड के आगाज जैसा हाहाकारी तो कतई नहीं होगा.

ऐसे ही एक शख्स हैं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के युवा हार्डवेयर व्यापारी चेतन शाह, जिन्हें मध्य प्रदेश की सनसनी से लगा कि अगर पुलिस की मदद ली जाए तो ब्लैकमेलिंग से मुक्ति मिल जाएगी. शर्त बस इतनी सी है कि पहले पुलिस को ईमानदारी से सच बता दिया जाए कि वे प्रीति तिवारी नाम की खूबसूरत बला के बिछाए प्रीत जाल में कैसे फंसे थे और अब तक कितना पैसा उस पर उड़ा चुके थे या फिर ब्लैकमेल हो कर मजबूरी में दे चुके थे.

अक्ल आई तो चेतन पहुंचे एसपी के पास

रायपुर के पौश इलाके वीआईपी एस्टेट तिराहा के पास पाम बेलाजियो बी-201, मोहबा पंढरी में रहने वाले चेतन की दुकान का नाम बाथ स्टूडियो है जो देवेंद्र नगर में है.

25 सितंबर की शाम कोई पांच साढ़े पांच बजे चेतन मन में उम्मीदें और आशंकाएं दोनों लिए रायपुर के सिटी एडीशनल एसपी के औफिस पहुंचे. चेतन की रायपुर में अपनी एक अलग साख और पहचान है, जिस से हर कोई वाकिफ है.

बीते 5 सालों से उन पर क्या गुजर रही थी, इस का अंदाजा किसी को नहीं था. यह दास्तां सिलसिलेवार उन्होंने एडीशनल एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सुनाई तो उन की आंखें चमक उठीं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रीति के तार भी मध्य प्रदेश के सेक्स स्कैंडल और गिरोह से जुड़े हों.

चेतन ने प्रफुल्ल ठाकुर को जो बताया, वह भोपाल इंदौर के मामलों से मेल खाता हुआ था, जिन में सैक्सी सुंदरियों ने पूरी दबंगई से अच्छेअच्छे अफसरों और रसूखदार नेताओं को अपनी अंगुलियों पर नचाया था, क्योंकि उन के पास वे वीडियो थे जिनमें ये नेता, अधिकारी उन्मुक्त हो कर रंगरलियां मना रहे थे. ये वीडियो अगर उजागर हो जाते तो ये लोग समाज में कहीं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाते.

यही हाल चेतन का था, 6 साल पहले जिन की दोस्ती प्रीति तिवारी से फेसबुक पर हुई थी. 28 वर्षीय चेतन का करोड़ों का कारोबार था और घर में या जिंदगी में किसी चीज की कमी नहीं थी. वे दिनरात अपने कारोबार में डूबे रहते थे और बचा वक्त पत्नी और नन्ही बेटी के साथ गुजारते थे.

आमतौर पर ऐसा होता है कि जब आदमी कामयाबियों की सीढि़यां चढ़ रहा होता है तो उस के सामने कई तरह के प्रलोभन आते हैं, जिन से समझदार आदमी तो बच कर आगे बढ़ जाता है, जबकि नासमझ इस में फंस कर अपना सब कुछ गंवा बैठते हैं. यही चेतन के साथ भी हुआ था.

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20 वर्षीय प्रीति तिवारी मूलत: अनूपपुर की रहने वाली है, जहां उस के पिता कांट्रेक्टर हैं. उन की बड़ी इच्छा थी कि बेटी डाक्टर बने लेकिन प्रीति पढ़ाईलिखाई में औसत थी. इसलिए वह मैडिकल की एंट्रेस परीक्षा पास नहीं कर सकी.

पिता ने भागादौड़ी कर यह सोचते हुए उसे बिलासपुर के एक डेंटल कालेज में दाखिला दिला दिया था कि चलो डेंटिस्ट ही बन जाएगी तो प्रीति के नाम के आगे डाक्टर तो लग जाएगा. फिर उस की शादी भी किसी डाक्टर या दूसरे काबिल लड़के से कर वह अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेंगे.

जिस माहौल में प्रीति की परवरिश हुई थी, उस में कोई खास बंदिशें नहीं थीं और नसीहतें भी उतनी ही थीं जितनी आम मध्यमवर्गीय लड़कियों को हर घर में मिलती हैं. उसे कभी पैसे की कमी भी महसूस नहीं हुई थी. अनूपपुर में तो वह सलीके से रही लेकिन जब बिलासपुर आई तो न केवल खुद बदल गई बल्कि उस की जिंदगी भी बदल गई.

पिता ने पैसे और पहुंच के दम पर उसे डेंटल कालेज में दाखिला तो दिला दिया था, लेकिन प्रीति का मन पढ़ाई में बिलकुल नहीं लगता था. वह दिनरात सोशल मीडिया पर व्यस्त रहती थी, नतीजतन फेल होने लगी. चैटिंग के दौरान उस ने कई पुरुष मित्र बना डाले थे. इन की दीवानगी और बेताबी देख प्रीति को मजा आने लगा था. हर कोई उस से अंतरंग यानी सैक्सी बातें करना चाहता था.

अब तक उस का इरादा केवल टाइम पास करना और मजे लूटना था, इसलिए वह किसी के साथ हद से ज्यादा नहीं बढ़ी थी लेकिन 4 साल फेल होतेहोते जब यह तय हो गया कि वह और आगे पढ़ाई नहीं कर पाएगी तो वह घबरा उठी. इस घबराहट की पहली वजह उस आजादी का छिन जाना था जो बिलासपुर आ कर उसे मिली थी, दूसरा थोड़ा डर या लिहाज मातापिता का था कि उन्हें कैसे बताएगी कि लगातार सब्जेक्ट ड्राप लेतेलेते उसे कालेज से बाहर किया जा रहा है.

ऐसे में उस के दिमाग में एक खतरनाक खयाल आया और आया तो उस ने इस पर अमल भी कर डाला. इसी दौरान उस से चेतन की दोस्ती हुई थी. दोनों हल्कीफुल्की चैटिंग भी करते थे. इसी बातचीत में प्रीति को पता चला कि चेतन करोड़ों की आसामी है. तब उस ने सिर्फ इतना भर सोचा कि अगर चेतन उस के हुस्न जाल में फंस जाए तो जिंदगी ऐशोआराम से कटेगी.

प्रीति थी भी ऐसी कि उसे देख कर कोई भी उस पर न्यौछावर हो जाता. भरेपूरे गदराए बदन की मालकिन, तीखे नैननक्श, गोरा रंग, रहने का अपना शाही स्टाइल और माशाअल्लाह अदाएं. वह अकसर इतने टाइट कपड़े पहनती थी कि उस के उन्नत उभार बरबस हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींच ही लेते थे.

कुल जमा प्रीति नए जमाने की एक ऐसी तितली थी जिस ने बिलासपुर में रहते कोर्स को तो न के बराबर पढ़ा लेकिन औनलाइन प्यार और सेक्स का सिलेबस इतना पढ़ डाला था कि अगर कोई यूनिवर्सिटी इस में डाक्टरेट की उपाधि देती होती तो प्रीति का नाम उस की लिस्ट में सब से ऊपर होता.

फेसबुक से हुई शुरुआत

प्रीति ने मौजमस्ती की जिंदगी गुजारने का जो प्लान तैयार किया था, उस में चेतन उस के निशाने पर थे. प्रीति से चैट करतेकरते उन्हें नएपन और रोमांस की जो फीलिंग आती थी, वैसी तो शायद जवानी में और शादी के पहले भी नहीं आती थी.

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धीरेधीरे दोनों सोशल मीडिया पर खुलने लगे तो चेतन को भी मजा आने लगा कि एक निहायत खूबसूरत मैडिकल स्टूडेंट उन्हें प्यार करने लगी है और वह भी इतने उतावलेपन से कि उन पर अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार है.

जब चैटिंग से बजाय सुकून मिलने के बेकरारी बढ़ने लगी तो दोनों का दिल मिलने को मचलने लगा. चेतन उस से बातें तो हर तरह की कर रहे थे लेकिन यह कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे कि जानू और मत तड़पाओ अब ये दूरियां बरदाश्त नहीं होतीं, मन तो मिल ही चुके हैं अब तन भी मिल जाएं तो इश्क मुकम्मल हो जाए.

ऐसा शायद इसलिए था कि चेतन पर कारोबारी और पारिवारिक दबाव था और वे प्रीति के सामने अपनी इमेज पाकसाफ रखना चाहते थे. लेकिन स्क्रीन पर उस की कसी और गदराई देह देख खुद को जब्त भी नहीं कर पा रहे थे.

फिर एक दिन प्रीति ने उन की कशमकश यह कहते दूर कर दी कि आ जाओ बिलासपुर. इस खुली पेशकश पर वे और घबरा उठे. शायद यही नहीं तय है कि चेतन की हिम्मत अपनी प्रतिष्ठा, मर्यादा और संस्कार तोड़ने की नहीं हो रही थी और प्रीति इस कमजोरी को बखूबी समझ रही थी.

चेतन की इस कमजोरी में ही उसे अपना सुनहरा भविष्य नजर आ रहा था, क्योंकि कोई और छिछोरा, लंपट या मजनूं टाइप का आयटम होता तो पैरों के बल दौड़ता, लार टपकाता बिलासपुर आता और अपनी जरूरत या हवस पूरी कर चला जाता.

इस समीकरण को भांपते खुद प्रीति ही एक दिन रायपुर पहुंच गई और वहां के एक महंगे नामी होटल में रूम ले कर ठहरी. चेतन को जब उस ने फोन किया तो उन की बांछें खिल गईं और दिल में नएनए प्रेमियों जैसा डर भी बैठ गया कि न जाने क्या होगा पहली मुलाकात में. शाम को जब वे प्रीति के होटल पहुंचे तो आलीशान और भव्य कमरे में जो हुआ वह उन की कल्पना से परे था. प्रीति केवल बेपनाह खूबसूरत ही नहीं थी, बल्कि सेक्स के खेल में भी उतनी ही उन्मुक्त थी, जितनी कि रहनसहन में थी.

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कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

मुझे ऐसा लगता है कि मेरा बौयफ्रेंड मेरी बहन को चाहता है लेकिन सोता मेरे साथ है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 18 साल की हूं और एक लड़के से बहुत प्यार करती हूं. उस के साथ कई बार सेक्स भी कर चुकी हूं. अब मुझे लगता है कि वह मुझे नहीं चाहता, मेरी बहन को चाहता है, पर सोता मेरे साथ है. मैं क्या करूं?

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जवाब-

आप का प्रेमी चालाक है. वह मुफ्त में आपको और आप की बहन को चक्कर में रख रहा है. आप दोनों नाता तोड़ लें.

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कार में सेक्स करने से पहले जरूर जान लें ये बातें

इस में कुछ बुराई भी नहीं है, क्योंकि सेक्स जिंदगी की आम गतिविधि है. इंसान से ले कर जानवर, यहां तक कि कीड़ेमकौड़े भी सेक्स के जरीए ही अपना वजूद बढ़ाते हैं.

आज जब सेक्स को ले कर बहुत सी दकियानूसी बातों से लोग आगे निकलने लगे हैं तो सेक्स में कुछ नया ट्राई करने की इच्छा उन्हें कार जैसी जगहों में ‘गरम’ कर देती है.

कार में जगह भी कम होती है और पकड़े जाने का खतरा भी भरपूर होता है. इस के बावजूद लोगों में कार में सेक्स करने का रुझान घट नहीं रहा है.

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अमेरिका में इसी मुद्दे पर हुई एक रिसर्च में कई दिलचस्प बातें सामने आई थीं. 60 फीसदी छात्रों ने कार में सेक्स करने की बात मानी थी और तकरीबन 15 फीसदी का तो कुंआरापन भी गाड़ी में ही खत्म हुआ था. कार आमतौर पर गांवदेहात के इलाकों में खड़ी की जाती थी.

इस के अलावा ‘डेली मेल’ अखबार के मुताबिक, एक रिसर्च में सामने आया है कि ब्रिटेन के 49 फीसदी लोग गाड़ी में सेक्स करना पसंद करते हैं. लोगों को गाड़ी की पिछली सीट पर सेक्स करने में काफी अच्छा लगता है और सिर्फ यही नहीं, यह बात भी मानी गई है कि कई लोगों ने गाड़ी की पिछली सीट पर अपने पार्टनर के साथ कम से कम 4 से 5 बार सेक्स किया है.

इस के साथ ही यह खुलासा भी हुआ है कि 18 से 34 साल की उम्र के नौजवानों के बजाय 35 से 55 साल की उम्र के लोगों ने कार की पिछली सीट पर ज्यादा बार सेक्स किया है यानी पिछली सीट ही वहां भी लोगों को इस काम के लिए लुभा रही है. आगे वाली सीट के मुकाबले वहां जगह का ज्यादा होना और कुछ हद तक बिस्तर की तरह लेट सकने की सुविधा शायद इस की वजह हो.

कार में सेक्स क्यों?

इस तरह की बातें जानने के बाद यह सवाल उठना भी लाजिमी है कि आखिर कार में सेक्स करना लोगों को इतना क्यों लुभाता है? क्यों मौका मिलते ही लोग इसे ट्राई कर लेने से हिचकते नहीं हैं?

इस का जवाब सब से पहले तो ‘कुछ नया’ करने की इनसानी फितरत है. इस के अलावा पतिपत्नी, गर्लफ्रैंड जैसे जोड़ों को छोड़ दें तो समाज में बहुत से सेक्स संबंध ऐसे भी बनते हैं जिन में कोई रिश्ता या कानून आड़े आता है. ऐसे में औरों से छिप कर ‘अपना काम’ कर लेने के लिए कार बिलकुल सही जगह साबित होती.

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फिल्मों में (खासतौर पर इंटरनैट पर आने वाली पोर्न फिल्मों में) कार सेक्स के बारे में इतना कुछ दिखाया और बनाया जा चुका है कि किशोरों से ले कर अंकल टाइप लोग भी कार में अपनी फैंटेसी को सोचते रहते हैं.

खतरनाक भी है

जी हां, खासकर नौजवानों को ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि जोश में होश खोना इसी उम्र में सब से ज्यादा होता है. ऐसा ही एक मामला रूस में सामने आया था जहां 2 लोग एकदूसरे के प्यार में इतना डूब गए कि दोबारा घर नहीं पहुंच सके.

‘डेली मेल’ अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के इग्जेनी चेर्नोव (22 साल) अपनी गलफ्रैंड याना क्रिचकोवा के साथ समय बिताने के लिए कार में घूमने निकले थे.

जब वे वोल्गोग्राड इलाके के पास पहुंचे, वहां इग्जेनी ने कार को न्यूट्रल गियर में लगा दिया. इस के बाद वे दोनों कार की बैक सीट पर ही एक हो गए. लेकिन उस समय उन्होंने यह नहीं सोचा था कि उन का ऐसा करना उन्हें कितना भारी पड़ सकता है.

सेक्स के दौरान तेज हलचल होने की वजह से गाड़ी आगे की तरफ बढ़ती रही और झील में डूबती चली गई. वे लड़कालड़की इस दौरान गाड़ी से निकलने में नाकाम रहे.

इसी तरह की दिल दहला देने वाली घटना उत्तर प्रदेश के पीलीभीत इलाके में घटी थी जहां चलती कार में सेक्स करने की धुन में डूबा प्रेमी जोड़ा सामने से आते ट्रक को देखने में देरी कर गया और कार के परखच्चे उड़ गए.

उस नौजवान की तो मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि लड़की बुरी तरह घायल हो गई थी.

चश्मदीदों ने बताया कि जब लड़का और लड़की को हादसे के बाद गाड़ी से निकाला गया था तो उन के शरीर पर कमर से नीचे कपड़े नहीं थे.

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इस के अलावा लखनऊ में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था जब आधी रात को कार न रोकने पर पुलिस वाले ने एक जोड़े पर गोली चला दी थी, जिस में लड़के की जान चली गई थी. वहां सेक्स हो रहा था या नहीं, यह और बात है, पर पुलिस का इस तरह का एंगल, कार सेक्स में आ सकता है.

पहले से कर लें तैयारी

कहावत ‘हड़बड़ी का काम शैतान का’ बहुत पुरानी है और एकदम सटीक भी. सेक्स रोचक जरूर है, लेकिन इस के लिए सनक पालना ही खतरनाक होता है.

जानवरों तक में सेक्स का एक सीजन होता है, उसी में वे सेक्स करते हैं, फिर आप और हम तो इनसान हैं. कार में सेक्स करना हो, उस के लिए पहले से तैयार रहें. यह नहीं कि अचानक से कहीं आप को लगा कि आसपास अंधेरा है या एकांत है तो शुरू हो गए.

चाहे दुनिया का कोई भी कोना क्यों न हो, इसलिए कार सेक्स जैसी चीजों की योजना हो तो सही जगह को चुनें. अपने साथ टिशू पेपर, पानी जैसी जरूरत की चीजें रखना न भूलें.

बहुत ज्यादा जोश में न आएं क्योंकि इस से परेशानी में पड़ने का खतरा बन जाता है. याद रहे कि आप घर में नहीं हैं इसलिए पूरी सावधानी के साथ यह काम करें और लें मजा नए अनुभव का.

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