आम्रपाली दुबे को अपने असली साथी का है इंतजार, होनी चाहिए ये क्वालिटी  

भोजपुरी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे अपनी एक्टिंग के जरिये फैंस के दिलों पर राज करती हैं. तभी तो उनसे जुड़ी खबरों का फैंस को बेसब्री से इंतजार रहता है.

आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) भले ही कई लोगों के सपनों की मल्लिका हो लेकिन उन्हें अब तक अपने सपनों का राजकुमार नहीं मिला है. जी हां सही सुना आपने. अब आम्रपाली दुबे ने अपनी शादी के बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया है और बताया है कि वो अभी शादी करने के मूड में नहीं हैं.

 

खबर ये आ रही है कि आम्रपाली दुबे ने बताया है कि उन्हें अपने असली साथी का इंतजार है, जिसके लिए वो इंतजार करने के लिए तैयार हैं.

 

बताया जा रहा है कि आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey) ने बताया है कि  मेरे घरवाले यह सवाल खूब पूछते हैं और मैं कहती हूं कि मैं 40 साल से पहले शादी नहीं करने वाली हूं. उन्होंने ये भी बताया कि मेरे इस जवाब से मां चिढ़ जाती हैं लेकिन मैं सही इंसान के इंतजार में हूं.

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रिपोर्ट्स के अनुसार आम्रपाली दुबे ने बताया कि मुझे एक ईमानदार इंसान चाहिए. मैं पैसा कमा सकती हूं, घर का पूरा ध्यान रख सकती हूं लेकिन मुझे एक लॉयल पति चाहिए.

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लाइव सेशन के दौरान सुष्मिता सेन के ब्वॉयफ्रेंड रोहमन छिपा रहे थे अपना चेहरा, देखें Video

बॉलीवुड  एक्ट्रेस सुष्मिता सेन इन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है. आए दिन वह अपने फैंस के साथ फोटोज और वीडियो शेयर करती रहती हैं. फैंस को भी उनके पोस्ट का बेसब्री से इंतजार रहता है.

बता दें कि हाल ही में उन्हें एक अवार्ड से नावाजा गया है. जिसका नाम है. चैम्पियन ऑफ चेंज. तो इसके लिए उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक लाइव सेशन किया. जहां उन्होंने अपने फैन्स से बातें की.

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सुष्मिता ने लाइव सेशन  के दौरान कहा कि ये अवार्ड सामाजिक कल्याण और महिला सशक्तिकरण के लिए मुझे मिला. उन्होंने आगे कहा कि मैं जानती हूं कि  मेरे पिता इस वक्त में बहुत गर्व महसूस करेंगे क्योंकि उन्होंने कई सालों तक भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी के रूप में काम किया.

 

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और ये लाइव सेशन और भी दिलचस्प हो गया जब सुष्मिता के ब्वायफ्रेंड रोहमन ने हिस्सा लिया. रोहमन ने सेशन में आने के बाद सुष्मिता ने उनके साथ हुई एक घटना का किस्सा बताया.

 

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उन्होंने बताया कि, जब रोहमन सुबह शेव कर रहे थे.तो अचानक उन्होंने अपने बालों का कुछ हिस्सा भी शेव कर दिया. इस दौरान रोहमन सेशन में अपने चेहरे को हाथों से छिपा रहे थे. लेकिन सुष्मिता के कहने पर उन्होंने सभी को अपना लुक दिखा दिया. दोनों एक साथ काफी खुश नजर आ रहे थे.

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Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin: सई की याद में विराट का हुआ बुरा हाल, अपनी गलती के लिए मांगी माफी

स्टार प्लस का सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin)  काफी कम टाइम में दर्शकों के दिल में जगह बना ली है. सीरियल में इन दिनों नए-नए ट्विस्ट देखने को मिल रहा है जिससे दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हो रहा है. तो आइए बताते हैं शो के लेटेस्ट ट्रैक के बारे में.

शो में दिखाया जा रहा है कि सई चौहान हाउस के बाहर खूब तमाशा कर रही है. तो वही दूसरी तरफ सई के लिए चौहान हाउस का दरवाजा बंद हो जाता है. देवयानी और पुलकित की शादी करवाने के बाद सई घर वापस आती है तो ना विराट और ना ही कोई और सदस्य उसके लिए दरवाजा खोलता है.

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तो वही सई चौहान हाउस छोड़कर चली जाएगी और वो विराट से ये भी कहती हुई नजर आएगी कि जल्द ही उसके सामने सच आएगा. तो दूसरी तरफ सई के जाने के बाद से विराट का बुरा हाल होगा. वह उसे खूब याद करेगा.

 

सीरियल के अपकमिंग एपिसोड में ये दिखाया जाएगा कि विराट के सामने जल्द ही भवानी और पाखी की पोल खुलने वाली है कि उन दोनों ने मिलकर किस तरह देवयानी और सई को परेशान किया है. विराट को अपनी गलती का एहसास होगा कि उसने सई के साथ कितना गलत किया है.

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आप ये भी देखेंगे कि सई भवानी से कहेगी कि वो जल्द ही उसके घमंड को चूर-चूर करने वाली है. सई की बातों को भवानी हल्के में लेगी.

Serial Story: हार- भाग 1

आबादी इतनी बढ़ गई है कि सड़क के दोनों किनारों तक शनीचरी बाजार सिमट गया है. चारों ओर मकान बन गए हैं. मजार और पुलिस लाइन के बीच जो सड़क जाती है, उसी सड़क के किनारे शनीचरी बाजार लगता है. तहसीली के बाद बाजार शुरू हो जाता है, बल्कि कहिए कि तहसीली भी अब बाजार के घेरे में आ गई है.

शनीचरी बाजार के उस हिस्से में केवल चमड़े के देशी जूते बिकते हैं. यहीं पर किशन गौशाला का दफ्तर भी है. अकसर गौशाला मैनेजर की झड़प मोचियों से हो जाती है. मोची कहते हैं कि उन के पुरखे शनीचरी बाजार में आ कर हरपा यानी सिंधोरा, भंदई, पनही यानी जूते बेचते रहे. तब पूरा बाजार मोचियों का था. जाने कहां से कैसे गौसेवक यहां आ गए. अगर सांसद के प्रतिनिधि आ कर बीचबचाव न करते तो शायद दंगा ही हो जाता.

लेकिन सांसद का शनीचरी बाजार में बहुत ही अपनापा है इसलिए मोचियों का जोश हमेशा बढ़ा रहता है. अपनापा भी खरीदबिक्री के चलते है. सांसद रहते दिल्ली में हैं, मगर हर महीने तकरीबन 25-30 जोड़ी खास देशी जूते, जिसे यहां भंदई कहा जाता है, दिल्ली में मंगाते हैं.

भंदई के बहुत बड़े खरीदार हैं सांसद महोदय. मोची तो उन्हें पहचानते ही नहीं, क्योंकि वे खुद तो आ कर भंदई नहीं खरीदते, पर उन के लोग भंदई खरीद कर ले जाते हैं.

गौशाला चलाने वाले भी सांसद का लिहाज करते हैं. आखिर उन्हीं की मेहरबानी से गौशाला वाले नजदीक की बस्ती जरहा गांव में 20 एकड़ जमीन जबरदस्ती कब्जा सके थे.

किशन गौशाला शहर के करीब बसे जरहा गांव में है. इस गौशाला में सांसद कई बार जा चुके हैं. पहले गौशाला वालों ने 10 एकड़ जमीन गांव के किसानों से खरीदी. वहां कुछ गायों को रखा. कृष्ण जन्माष्टमी के दिन एक कार्यक्रम हुआ था, जिस में सांसद चीफ गैस्ट बने थे. सरपंच के दोस्तों ने दही लूटने का कमाल दिखाया, फिर अखाड़े का करतब हुआ.

गांव वाले बहुत खुश हुए कि चलो गांव में गौमाता के लिए एक ढंग का आसरा तो बना. सांसद ने उस दिन गांव के मोचियों को भी इस समारोह में बुलाया. जरहा गांव शहर से सट कर बसा है. गौशाला का दफ्तर शहर में है और गौशाला है जरहा गांव में.

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दफ्तर के पास जरहा गांव, बोरिद, अकोली के मोची चमड़े का सामान बेचने शनिवार को आते हैं, पर बाकी दिन वे गांव में भंदई बनाते हैं. जाने कब से यह सिलसिला इसी तरह चल रहा है.

लेकिन जब से सांसद भोलाराम भंदई खरीद कर दिल्ली ले जाने लगे हैं, तभी से मोचियों का कारोबार कुछ नए रंग पर आ गया है. ऊपर से सांसद ने अपनी सांसद निधि से जरहा गांव में मोची संघ के लिए पिछले साल 3 लाख रुपए दिए थे. वे गांवगांव में अलगअलग मंचों के लिए सांसद निधि से खूब पैसे देते हैं, मगर इन दिनों मंचों की धूम है.

इस इलाके में दलितों की तादाद ज्यादा?है, इसलिए सांसद अपने हिसाब से अपना भविष्य पुख्ता करते चल रहे हैं. मोची मंचों का भी लगातार फैलाव हो रहा है, तो गौशाला का भला हो रहा है.

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गौशाला के कर्ताधर्ता सब दूसरे राज्य के हैं. वे शहर के जानेमाने कारोबारी हैं. सब ने थोड़ाथोड़ा पैसा लगा कर 10 एकड़ जमीन ले ली और किशन गौशाला खोल कर गांव में घुस गए. वहां 2 दुकानें भी अब इसी तबके की खुल गई हैं. एक स्कूल भी जरहा गांव में चलता है, जिसे किशनशाला नाम दिया गया है.

इस स्कूल में सभी टीचर सेठों के  जानकार लोग हैं. सांसद सेठों और मोचियों में बराबर से इज्जत बनाए हुए हैं. सब को पार लगाते हैं, चूंकि सब उन्हें पार लगाते हैं.

लेकिन इधर जब से बाबरी मसजिद ढही है, जरहा गांव में दूसरा दल भी हरकत में आ गया है. सेठ सांसद के विरोधी दल को पसंद करते हैं. जिले में 2 ही झंडे असर में हैं, तिरंगा और भगवा. 2 ही चिह्न यहां पहचाने जाते हैं, पंजा और कमल.

गौप्रेमी सभी सेठ कमल पर विराजने वाली लक्ष्मी मैया के भगत हैं, वहीं मोची, लुहार, धोबी, कुम्हार, कुर्मी,  तेली, इन्हीं जातियों की तादाद इस इलाके में ज्यादा है, इसीलिए आजादी के बाद कांग्रेस को भी इलाके के लोगों ने अपना समर्थन दिया. लेकिन जब से बाबरी मसजिद को ढहा कर जरहा गांव का नौजवान गांव लौटा है, कमल की नई रंगत देखते ही बन रही है.

लेकिन सांसद भोलाराम परेशान नहीं होते. वे जानते हैं कि सेठों को इस लोक पर राज करने के लिए धंधा प्यारा है और परलोक सुधारने के लिए है ही किशन गौशाला. दोनों के फायदे में है कि वे कभी भोलाराम का दामन न छोड़ें. ये भोलाराम भी कमाल के आदमी हैं. एक बड़े किसान के घर में पैदा हुए. मैट्रिक पास कर आगे पढ़ना चाहते थे, लेकिन उन के पिताजी ने पैरों में बेड़ी पहनाने की ठान ली.

शादी की सारी तैयारी हो गई, लेकिन बरात निकलने के ठीक पहले दूल्हा अचानक ही गायब हो गया और प्रकट हुआ दिल्ली में.

यह बात साल 1946 की है. सालभर में भोलाराम ने दिल्ली के एक बडे़ अखबार में अपने लिए जगह बना ली. भोलाराम दल के लोग तो चुनाव के समय रोरो कर यह भी बताते हैं कि भोलारामजी तब रिपोर्टिंग के लिए गांधीजी की अंतिम प्रार्थना सभा में भी गए थे. नाथूराम ने जब गोलियां चलाईं, तो गांधीजी ‘हे राम’ कह कर भोलारामजी की गोद में ही गिरे थे.

भोलाराम के खास लोग तो यह भी कहते हैं कि भोलारामजी का खून से सना कुरता आज भी गांधी संग्रहालय में हैं. जिसे देखना हो दिल्ली जा कर देख आए.

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समुद्र का खारा होना, धरती के लिए अभिशाप नहीं वरदान है!

कभी आपने सोचा कि अगर समुद्र का पानी खारा नहीं होता तो क्या होता? जी हां, यह मजाक नहीं है, अगर समुद्र का पानी खारा न होता तो शायद धरती में इंसान का अस्तित्व ही न होता. समुद्र का खारापन मानव के लिए अभिशाप नहीं बल्कि किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें कोई दो राय नहीं कि अगर समुद्र का जलस्तर बढ़ जाता है और उसका पानी सूखी जमीन पर फैल जाता है, तो जहां जहां ये पानी फैलता है, वह जमीन रेगिस्तान बन जाती है.  लेकिन खारे पानी के इस ज्ञात नुकसान के मुकाबले हमें फायदे बहुत ज्यादा हैं. समुद्र का खारापन इंसान के लिए बहुत महत्वपूर्ण व उपयोगी है. गौरतलब है कि समुद्र के पानी के खारा होने का मुख्य कारण, ठोस सोडियम क्लोराइड है. हालांकि समुद्र के खारे पानी में पोटेशियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड व विभिन्न रासायनिक तत्व भी करीब करीब हर जगह पाए जाते हैं.

जैसा कि हम जानते हैं कि गर्म हवाएं हल्की होती हैं और ठंडी हवाएं भारी. इस कारण ठंडी के मुकाबले गर्म हवा का घनत्व कम होता है. जब समुद्र की सतह में किसी जगह गर्म होकर हवा ऊपर उठती है, तो उस स्थान विशेष की लवणता में यानी उसमें मौजूद नमक में और आसपास की दूसरी जगहों की लवणता में फर्क आ जाता है. इस कारण वाष्प के जरिये समुद्र से उठे जल को गति मिलती है. यह पानी उस दिशा में आगे बढ़ता है, जहां की हवा ठंडी होती है. इसे यूं समझिये कि बंगाल की खाड़ी से उठी ऐसी ही गर्म हवाएं अपने साथ संघनित बादल लेकर इसी वजह से उत्तर भारत की तरफ चल पड़ती हैं क्योंकि यहां की हवाएं ठंडी होती हैं. इसे ही हम ‘मानसून का आगमन कहते हैं.’ मतलब यह कि समुद्र के खारेपन के कारण ही मानसून बनता है, बारिश होती है और बारिश है तो जीवन है.

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क्योंकि इसी बारिश से, जो कि खारे पानी का नतीजा है-मौसम हैं, कुदरत है, कुदरत में रंगों की विविधता है,और इसी के चलते पृथ्वी में जलवायु की विविधता है. जैसा कि हम जानते हैं कि ठंडा जल, गर्म जल की तुलना में अधिक घनत्व वाला होता है. इस कारण गर्म जल की धाराएं ठंडे क्षेत्रों की ओर बहती है और ठंडा जल उष्ण और कम उष्ण प्रदेशों की तरफ बहता है यानी समुद्री धाराओं के बहाव का  मुख्य कारण भी समुद्र के पानी का खारा होना ही है. कल्पना करिये पूरे समुद्र में मीठा पानी होता तो क्या होता? समुद्र में जल धाराएं न होतीं. इसका नतीजा यह होता कि ठंडे प्रदेश बहुत ठंडे रहते और गर्म प्रदेश बहुत अधिक गर्म. क्या तब पृथ्वी पर जीवन इतना ही सहज होता? एक और बात जान लीजिये धरती की असीम जैव विविधता का सबसे बड़ा कारण समुद्र के पानी का खारा होना है.

यह तो हुई समुद्र के खारे पानी की बात. अब जरा एक क्षण को सोचिये की समुद्र ही न होते तो क्या होता? क्या समुद्रों के बिना धरती में जीवन संभव है? इस प्रश्न के उत्तर की तलाश में गहरे तक जाएं तो खुद ब खुद पता चल जाएगा कि धरती के 70 प्रतिशत भू-भाग पर फैली 97 प्रतिशत विशाल समुद्री जलराशि का हमारे जीवन में कितना महत्व है. महासागरों में 10 लाख से अधिक विविध जीव प्रजातियों का बसेरा है. समुद्र की यही जैव समृद्धता ही धरती में जीवन का आधार है. यदि धरती में समुद्र के रूप में पानी की इतनी विशाल जलराशि न होती, तो दुनिया दहकता अंगारा बन जाती और जीवन नष्ट हो जाता. दरअसल यह समुद्र की अपार जलराशि ही है, जो सूर्य से आने वाली ऊष्मा का एक बड़ा हिस्सा अपने भीतर जज्ब कर लेती है. समुद्र के अन्दर मौजूद ज्वालामुखी इस जज्ब की हुई ऊष्मा का ही एक रूप हैं, जिनसे अब जापान बिजली बनाने लगा है. इस तरह ज्वालामुखी अब विनाश के कारण नहीं बल्कि स्वच्छ भू-तापीय ऊर्जा के विशालतम भंडार बनने जा रहे हैं.

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भविष्य में हम भी इनसे बिजली बनायेंगे. समुद्र के भीतर मौजूद विशाल ईधन भंडारों के बारे में हम जानते ही हैं. समुद्र न हों तो सूर्य से आने वाली ऊष्मा के कारण पृथ्वी का वायुमंडल बेहद गर्म हो जाय. महासागरों में मौजूद विविध जैविकी में कार्बन को अवशोषित करने की अपार क्षमता होती है. इस क्षमता के कारण ही पर्यावरण को तापमान को संतुलित रखने की सबसे सक्षम प्राकृतिक प्रणाली माना जाता है. तमाम तरह के ईंधन जलाकर हम जीवन के लिए जिन घातक गैसों का प्रतिशत वायुमंडल में बढ़ाते हैं, समुद्र उसे घटाते हैं. इस तरह देखा जाए तो समुद्र से बड़ा और महत्वपूर्ण प्रदूषण नियंत्रक इस दुनिया में कोई दूसरा नहीं है. यदि आज पृथ्वी पर जीवन है, तो इसमें समुद्र की बहुत बड़ी भूमिका है.

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Serial Story: हार- भाग 2

इलाके के लोगों में वह कुरता देखने की कभी दिलचस्पी नहीं रही. भोलाराम लगातार आगे बढ़ते गए और दिल्ली में एक नामी पत्रकार हो गए. एक दिन इंदिरा गांधी ने उन्हें इस इलाके का सांसद बना दिया. इस इलाके के लोग नेताओं की बात नहीं टालते.

इंदिरा गांधी ने पहली चुनावी सभा में कहा, ‘‘यह इलाका भोलेभाले लोगों का है. यहां भोलाराम ही सच्चे प्रतिनिधि हो सकते हैं.’’

इंदिरा गांधी से आशीर्वाद ले कर भोलाराम भी उस दिन जोश से भर गए. उन्होंने मंच पर ही कहा, ‘‘इंदिरा गांधी की बात हम सभी को माननी है. अगर विरोधियों के भालों से बचना है, तो भोले को समर्थन जरूर दीजिए.’’

भोले और भाले का ऐसा तालमेल इंदिरा गांधी को भी भा गया. उन्होंने मुसकरा कर भोलाराम को और अतिरिक्त अंक दे दिया.

तब से लगातार 5 बार भोलाराम ही यहां के सांसद बने. वे इलाके के बड़े लोगों की बेहद कद्र करते हैं, इसीलिए भोलाराम की बात भी कोई नहीं टालता.

महीनाभर पहले शनीचरी बाजार में हंगामा मच गया. हुआ यह कि भोलाराम अपने टोपीधारी विशेष प्रतिनिधि के साथ बाजार आए. चैतराम मोची की दुकान बस अभी लगी ही थी कि दोनों नेता उस के आगे जा कर खड़े हो गए.

चैतराम ने इस से पहले कभी भोलाराम को देखा भी नहीं था. वह केवल साथ में आए गोपाल दाऊ को पहचानता था.

गोपाल दाऊ ने ही चैतराम को भोलाराम का परिचय दिया. खादी का कुरतापाजामा और गले में लाल रंग का  गमछा. भोलाराम तकरीबन 70 बरस के हैं, मगर चेहरा सुर्ख लाल है. चुनाव जीतने के बाद उन का सूखा चेहरा लाल होता गया और वे 2 भागों में बंट गए.

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भोलाराम दिल्ली में रहते तो सूटबूट पहनते. गले में लाल रंग का गमछा तो खैर रहा ही. दिल्ली में रहते तो दिल्ली वालों की तरह खातेपीते, लेकिन अपने संसदीय इलाके में मुनगा, बड़ी, मछरियाभाजी, कांदाभाजी ही खाते.

अपने इलाके में भंदई पे्रमी सांसद भोलाराम को सामने पा कर चैतराम को कुछ सूझा नहीं. भोलाराम ने उस के कंधे पर हाथ रख दिया.

चैतराम ने भोलाराम के पैरों में अपने हाथों की बनी भंदई रख दी. भंदई छत्तीसगढ़ी सैंडल को कहते हैं. मोची गांव में मरे मवेशियों के चमड़े से इसे बनाते हैं. सूखे दिनों की भंदई अलग होती है, जबकि बरसाती भंदई अलग बनती है.

अपने हाथ की बनी भंदई पहने देख भोलाराम के सामने चैतराम झुक गया. भोलाराम ने कहा, ‘‘भाई, मुझे पता लगा है कि तुम्हीं मुझे भंदई बना कर देते हो, इसलिए मिलने चला आया. इस बार 100 जोड़ी भंदई चाहिए.’’

‘‘100 जोड़ी…’’ चैतराम का मुंह खुला का खुला रह गया. भोलाराम ने कहा, ‘‘हां, 100 जोड़ी. दिल्ली में अपने दोस्तों को तुम्हारे हाथ की भंदई बहुत बांट चुका हूं. इस बार विदेशी दोस्तों का साथ होने वाला है.

‘‘मैं जब भी विदेश जाता हूं, तो वहां भंदई पर सब की नजर गड़ जाती है. सोचता हूं कि इस बार एकएक जोड़ी भंदई उन्हें भेंट करूं. बन जाएगी न?’’

चैतराम ने पूछा, ‘‘कब तक चाहिए मालिक?’’

‘‘2 महीने में.’’

‘‘2 महीने में… मालिक?’’

‘‘हांहां, 2 महीने में तुम्हें देनी है. मैं खुद आऊंगा तुम्हारे गांव में भंदई ले जाने के लिए.’’

‘‘मालिक, गांवभर के सारे मोची मिलजुल कर बनाएंगे. मैं गांव जा कर सब को तैयार करूंगा.’’

‘‘तुम जानो तुम्हारा काम जाने. मुझे तो भंदई चाहिए बस.’’

इतना सुनना था कि पास में दुकान लगाए उसी गांव के 2 और मोची एकसाथ बोल पड़े, ‘‘दाऊजी, आप की मेहरबानी से सब ठीकठाक है. हम सब मिल कर बना देंगे भंदई.

‘‘मगर मालिक, ये गौशाला वाले गांव में 20 एकड़ जमीन पर कब्जा कर के बैठ गए हैं. पिछले 2 साल से यहां के किसान अपने जानवरों को रिश्तेदारों के पास पहुंचाने लगे हैं.

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‘‘हुजूर, यह जगह जानवरों के चरने के लिए थी, मगर सेठ लोगों ने घेर कर कब्जा कर लिया है.

‘‘2 साल से हम सब लोग फरियाद कर रहे हैं, पर कोई सुनता ही नहीं. अब आप आ गए हैं, तो कुछ तो रास्ता निकालिए. छुड़ाइए गायभैंसों के लिए उस 20 एकड़ जमीन को. गौशाला के नाम से सेठ लोग गाय के चरने की जगह को ही लील ले गए साहब. अजब अंधेर है.’’

Serial Story: हार- भाग 3

भोलाराम को इस बेजा कब्जे की जानकारी तो थी, मगर वे यही सोच रहे थे कि सेठ लोग सब संभाल लेंगे. यहां तो पासा ही पलट सा गया है. भंदई का शौक अब उन्हें भारी पड़ रहा था. फिर भी उन्होंने चैतराम को पुचकारते हुए कहा, ‘‘मैं देख लूंगा. तुम लो ये एक हजार रुपए एडवांस के.’’

‘‘इस की जरूरत नहीं है मालिक,’’ हाथ जोड़ कर चैतराम ने कहा.

‘‘रख लो,’’ भोलाराम ने कहा.

चैतराम ने रखने को तो अनमने ढंग से एक हजार रुपए रख लिए, मगर सौ जोड़ी भंदई बना पाना उसे आसान नहीं लग रहा था.

गांव जा कर उस ने अपने महल्ले के लोगों को इकट्ठा किया. 4 लोगों ने 25-25 जोड़ी भंदई बनाने का जिम्मा ले लिया. चैतराम का जी हलका हुआ.

लेकिन सेठों को भी खबर लग गई कि गांव के मोची किशन गौशाला का विरोध सांसद भोलाराम से कर रहे थे. वे बहुत भन्नाए. उन्होंने गांव के अपने पिछलग्गू सरपंच, पंच और कुछ खास लोगों से बात की और गांव में बैठक हो गई. सरपंच ने मोची महल्ले के लोगों के साथ गांव वालों को भी बुलवाया.

सरपंच ने कहा, ‘‘देखो भाई, आज की बैठक बहुत खास है. गाय की वजह से बैठी है यह सभा.’’

चैतराम ने कहा, ‘‘मालिक, गाय का चारागाह सब गौशाला वाले दबाए बैठे हैं. चारागाह नहीं रहेगा, तो गौधन की बढ़ोतरी कैसे होगी?’’

चैतराम का इतना कहना था कि बाबरी मसजिद तोड़ने गई सेना में शामिल हो कर लौटे जरहा गांव का एकलौता वीर सुंदरलाल उठ खड़ा हुआ. उस ने कहा, ‘‘वाह रे चैतराम, तू कब से हो गया गौ का शुभचिंतक?’’

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सुंदरलाल का इतना कहना था कि चैतराम के साथ उस के महल्ले के सभी लोग उठ खड़े हुए. उस ने कहा, ‘‘मालिक हो, मगर बात संभल कर नहीं कर सकते. हम मरे हुए गायभैंसों का चमड़ा उतारते हैं, आप लोग तो जीतीजागती गाय की जगह दबाने वालों के हाथों खेल गए.’’

ऐसा सुन कर सुंदरलाल सिटपिटा सा गया. तभी भोलाराम दल के एक जवान रामलाल ने कहा, ‘‘राजनीति करो, मगर धर्म बचा कर. आदिवासियों को गाय बांटने का झांसा तुम लोग देते हो और गांव की जमीन, जिस में गाएं चरती थीं, उसे पैसा ले कर बाहर से आए सेठों को भेंट कर देते हो.’’

सुंदरलाल ने कहा, ‘‘100 जोड़ी भंदई के लिए गायों को जहर दे कर मरवाओगे क्या…?’’

उस का इतना कहना था कि ‘मारोमारो’ की आवाज होने लगी और लाठीपत्थर चलने लगे. गांव में यह पहला मौका था, जब बैठक में लाठियां चल रही थीं.

3 मोचियों के सिर फट गए. चैतराम का बायां हाथ टूट गया. अखबार में खबर छप गई. सांसद भोलाराम ने जरहा गांव का दौरा किया. उन्होंने मोचियों से कहा, ‘‘तुम लोग एकएक घाव का हिसाब मांगने का हक रखते हो. यह गुंडागर्दी नहीं चलेगी. मैं सब देख लूंगा.’’

भाषण दे कर जब भोलाराम अपनी कार में बैठ रहे थे, तभी उन्हीं की उम्र के एक आदमी ने उन्हें आवाज दे कर रोका. भोलाराम ने पूछा, ‘‘कहो भाई?’’

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उस आदमी ने कहा, ‘‘भोला भाई, अब आप न भोले हैं, न भाले हैं. मैं पहले चुनाव से आप का संगी हूं. जहां भाला बनना चाहिए, वहां आप भोला बन जाते हैं. जहां भोला बनना चाहिए, वहां भाला, इसलिए सबकुछ गड्डमड्ड हो गया.‘‘भाई मेरे कोई जिंदा गाय की राजनीति कर रहा है, तो कोई मरी हुई गाय की चमड़ी का चमत्कार बूझ रहा है. हैं दोनों ही गलत. मगर हमारी मजबूरी है कि 2 गलत में से एक को हर बार चुनना पड़ता है. इस तरह हम ही हर बार हारते हैं.’’

His Story में ‘गे’ के किरदार में नजर आएंगे मृणाल दत्त, देखें Video

इन दिनों एकता कपूर द्वारा ‘‘जी 5’’ और ‘‘आल्ट बालाजी’’के लिए निर्मित अर्बन रिलेशनशिप पर आधारित वेब सीरीज ‘‘हिज स्टोरी‘‘ अपने प्रसारण से पहले ही काफी चर्चा में है. यह वेब सीरीज एक साथ ओटीटी प्लेटफार्म ‘‘जी 5’’ और ‘‘आल्ट बालाजी’’पर 25 अप्रैल 2020 से स्ट्रीम होगी. इस वेब सीरीज में मृणाल दत्त के साथ सत्यदीप मिश्रा और प्रियामणि राज जैसे कलाकार नजर आएंगें. इसमें समलैंगिक संबंधों और बाधाओं को तोड़ने वाली कहानियों का भी समावेश हैं.

इसमें मृणाल दत्त ‘गे’ के किरदार में नजर आने वाले हैं.

डिंग एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित यह कहानी कुणाल (सत्यदीप) और साक्षी (प्रियामणि) और प्रीत (मृणाल दत्त) के इर्द-गिर्द घूमती है. जबकि कुणाल और साक्षी शादीशुदा हैं, जहां साक्षी एक शेफ हैं, प्रीत एक मशहूर अन्न समीक्षक और एक ट्रेवलर (यात्री) की भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगे. साक्षी ने अपने रेस्तरां के उद्घाटन के लिए जब प्रीत को फोन किया, तो उसे यह नहीं पता था कि उसके आदर्श परिवार में अप्रत्याशित घटनाओं के उथल-पुथल होने वाली है.

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आज वेब सीरीज ‘‘हिज स्टोरी’’ की कहानी का टीजर ऑनलाइन व सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसमें इस बात की झलक दिखाई देती है कि जब साक्षी को कुणाल की सच्चाई के बारे में पता चलती है, तो वह कैसे घबरा जाती हैं. मजबूत पटकथा और कुछ बेहतरीन प्रदर्शनों के साथ, टीजर अपने दर्शकों के लिए एक अर्थपूर्ण कहानी लाने का वादा करता है. टीजर हमें बिना बहुत सारे विवरणों के यह भी संकेत देता है कि दर्शक क्या उम्मीद कर सकते हैं.

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वेब सीरीज ‘‘हिज स्टोरी’’ की चर्चा करते हुए मृणाल दत्त कहते हैं, ‘‘इस वेब सीरीज में काम करके और डिंग एंटरटेनमेंट और इसमें शामिल कलाकारों के साथ सहयोग कर काफी अच्छा लग रहा है. इस तरह की वेब सीरीज के लिए धन्यवाद. हमारे पास अपनी आवाज उठाने,  या कम से कम सवाल उठाने का अवसर है. ऐसी कहानियों को केंद्र में ले जाने के साथ साथ बहुत कुछ कहना भी है. मैं समान रूप से उत्साहित हूं और यह देखने के लिए उत्सुक हूं कि कैसे प्रतिक्रिया प्राप्त होंगी.”

मृणाल दत्त को हाल ही में एक लघु फिल्म 55 किमी@ सेकेंड में देखा गया था और उन्हें उसी के लिए लगातार प्रशंसा मिल रही है.इसके अलावा मृणल दत्त अब तक ‘द लोनली प्रिंस (2020), ए मोमेंट (2017), पवन एंड पूजा (2020), हैलो मिनी (2021) और नेटफ्लिक्स का अपस्टार्ट (2019) में काफी शोहरत बटोर चुके हैं.

कोरोना अवसाद और हमारी समझदारी

छत्तीसगढ़ सहित संपूर्ण देश में कोराना कोविड-19 से हालात बदतर होते दिखाई दे रहे हैं. छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक कोरोना मरीज ने अवसाद में  आकर के आत्महत्या कर ली. इसी तरह एक युवती ने भी आर्थिक हालातों को देखते हुए  कोरोनावायरस पाज़िटिव होने के बाद आत्महत्या कर ली.

कोरोना के भयावह  हालात  की खबरें टीवी, सोशल मीडिया पर गैरजिम्मेदाराना रवैये के साथ  दिखाई जा रही है. जबकि इस सशक्त माध्यम का उपयोग लोगों को साहस बंधाने और जागरूक करने के लिए किया जा सकता है.

दरअसल, आत्महत्या की जो घटनाएं सामने आ रही है, उसका कारण है लोग अवसाद ग्रस्त हो ऐसे कदम उठा रहे हैं. जो समाज के लिए चिंता का सबब  है.

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इस समय में हमें किस तरह अवसाद से बचना हैऔर बचाना है और लोगों को अवसाद से निकालना है….  इस गंभीर मसले पर, इस रिपोर्ट में हम चर्चा कर रहे हैं.

कोरोना काल के इस संक्रमण कारी समय में देखा जा रहा है कि समस्या निरंतर गंभीर होती जा रही है. लॉकडाउन को ही लीजिए, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि जिस तरह की पाबंदियां कोरोना- 2 के इस समय काल में लगाई गई हैं वैसी पिछली दफा नहीं थी. चिकित्सालय और सरकारी व्यवस्था भी धीरे धीरे तार तार होते दिखाई दे रहे हैं.

ऐसी परिस्थितियों में जब आज अमानवीयता का दौर है. हर एक जागरूक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने आसपास सकारात्मक उर्जा का संचार करें और लोगों के लिए सहायक बन कर उदाहरण बन जाए.

यह घटना एक सबक है

छत्तीसगढ़ के इस्पात नगरी कहे जाने वाले भिलाई के एक अस्पताल में भर्ती कोरोना के एक मरीज ने अस्पताल की खिड़की से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली.

घटना भिलाई स्थित जामुल थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक अस्पताल में घटित हुई. 14 अप्रैल 2021की बीती रात   अस्पताल के  कोविड मरीज ने “बीमारी” से तंग आकर आत्मघाती कदम उठा लिया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की विवेचना कर रही है  जामुल पुलिस ने हमारे संवाददाता को बताया कि आत्महत्या करने वाला  शख्स जामुल के एक अस्पताल में 11 अप्रैल से भर्ती था.उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी और इलाज चल रहा था. मृतक का नाम ईश्वर विश्वकर्मा है और वह धमधा नगर का रहने वाला है. उसने  अपने वार्ड की खिड़की से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से घटना की सूचना मिली. इसके बाद अस्पताल पहुंचकर मर्ग कायम कर स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टर से पूछताछ जारी है.

जैसा कि हम जानते हैं ऐसे गंभीर आत्मघात  के मामलों में भी पुलिस की अपनी एक सीमा है. पुलिस औपचारिकता निभाते हुए मामले  की फाइल को आगे  बंद कर देगी. मगर विवेक शील समाज में यह प्रश्न तो उठना ही चाहिए कि आखिर ईश्वर विश्वकर्मा ने आत्महत्या क्यों की क्या ऐसे कारण थे जो उसे आत्म घाट का कदम उठाना पड़ा और ऐसा क्या हो आगामी समय में कोई कोरोना पेशेंट आत्महत्या न करें. समाज और सरकार दोनों की ही जिम्मेदारी है कि हम संवेदनशील हो और अपने आसपास सकारात्मक कार्य अवश्य करें, हो सकता है आप के इस कदम से किसी को संबल मिले और जीने का हौसला भी.

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मीडिया की ताकत को दिशा !

कोरोना कोविड19 के इस समय काल में देश का राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक हो अथवा प्रिंट मीडिया ऐसा प्रतीत होता है कि अपने दायित्व से पीछे हट गया है. अथवा वह भूल चुका है कि उसकी ताकत आखिर कहां है.

जिस तरह आज राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया में इस समय खबरें दिखाई जा रहे हैं… और हर पल बार-बार भयावह रूप में दिखाई जा रही है. जिसके कारण लोगों में एक भय का वातावरण निर्मित होता चला जा रहा है. मीडिया का यह परम कर्तव्य है कि खराब से खराब समय में भी अच्छाई को सामने लाते हुए उसे विस्तार से दिखाएं ताकि लोगों में जनचेतना जागता का वातावरण बने. हिंदी और तेलुगु कि कवि डॉक्टर टी. महादेव राव के मुताबिक पूर्व में मीडिया का ऐसा रुख नहीं था, आज मीडिया जिस तरह अपनी ताकत को भूल कर रास्ते से भटक गई है वह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है. आज मीडिया को चाहिए कि वह लोगों में यह जागरूकता पैदा करें कि हम किस तरह इस महामारी से बच सकते हैं, इसकी जगह लोगों को मौत के आंकड़े और श्मशान घाट के भयावह हालत दिखाकर अखिर मीडिया कैसी भूमिका निभा रहा है.

चिकित्सक डॉक्टर जी आर पंजवानी के मुताबिक महामारी के इस समय में हम जितना हो सके बेहतर से बेहतर काम करें और लोगों को सकारात्मक ऊर्जा से भर दें यही हमारा प्रथम दायित्व होना चाहिए.

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