Harassment: कुछ लड़कों ने मेरी गर्लफ्रैंड से छेड़छाड़ की और मेरे साथ भी हाथापाई की

Harassment: अगर आप भी अपनी समस्या भेजना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें.

सवाल –

मेरी उम्र 24 साल है और मैं उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला हूं. मेरी एक गर्लफ्रैंड है, जिस के साथ मैं कालेज टाइम से ही रिलेशनशिप में हूं. कुछ दिनों पहले हम दोनों शाम को मार्केट से लौट रहे थे तभी वहां मौजूद 4 लड़कों ने मेरी गर्लफ्रैंड पर गंदे कमैंट्स करने शुरू कर दिए. मैं ने पहले तो इग्नोर किया, लेकिन जब उन में से एक लड़का आगे बढ़ कर मेरी गर्लफ्रैंड से छेड़छाड़ करने लगा तो मेरा गुस्सा फूट पड़ा और मैं ने उन्हें डांटा. इस के बाद वे चारों मुझ पर टूट पड़े और मुझे बुरी तरह से पीटने लगे. आसपास खड़े लोग सबकुछ देखते रहे, लेकिन किसी ने मदद नहीं की. मुझे बहुत बुरा लगा कि मेरी गलती न होने के बावजूद मेरी गर्लफ्रैंड के सामने मुझे इतनी मार खानी पड़ी. अब समझ नहीं आ रहा कि क्या मुझे इस के खिलाफ पुलिस में शिकायत करनी चाहिए या फिर चुप रहना चाहिए?

जवाब –

आजकल समाज में ज्यादातर लोग दूसरों की परेशानी और लड़ाइयों में इंटरफेयर नहीं करते. जैसा आप ने बताया कि वहां मौजूद लोग केवल तमाशबीन बने रहे, यह आम बात है. लेकिन आप की हिम्मत काबिल ए तारीफ है कि आप ने गलत बात का विरोध किया. किसी भी लड़की के साथ छेड़छाड़ बरदाश्त नहीं करनी चाहिए.

आप के लिए सही यही होगा कि आप इस घटना के खिलाफ आवाज उठाएं. सब से पहले अपनी गर्लफ्रैंड के साथ नजदीकी पुलिस थाने जा कर लिखित शिकायत दर्ज कराएं. अगर उस जगह पर सीसीटीवी कैमरा मौजूद है तो उस की फुटेज निकलवा कर पुलिस को दें. इस से उन लड़कों को पहचानने और पकड़ने में आसानी होगी.

अगर फुटेज उपलब्ध न हो तो पुलिस को मौके पर ले कर जाएं और एकदो दिन तक वहां नजर रखें, क्योंकि ऐसे लड़के अकसर रोजाना एक ही जगह पर खड़े हो कर छेड़छाड़ करते हैं.

चुप रहने से न तो आप के आत्मसम्मान को न्याय मिलेगा और न ही ऐसे लोगों की हरकतें रुकेंगी. शिकायत दर्ज करा के आप न सिर्फ अपने लिए, बल्कि समाज की दूसरी लड़कियों की सुरक्षा के लिए भी कदम उठाएंगे.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या इस नम्बर पर 8588843415 भेजें. Harassment

Cricket Update: भारतइंगलैंड सीरीज टैस्ट क्रिकेट को मिली संजीवनी

Cricket Update: जब भारतीय क्रिकेट टीम अपने इंगलैंड दौरे के लिए निकली थी, उस से पहले बड़ा उलटफेर हुआ था. रोहित शर्मा और विराट कोहली ने अचानक रिटायरमैंट ले कर सब को चौंका दिया था. जसप्रीत बुमराह कप्तान नहीं बन पाए थे, तो उन्होंने पहले ही कह दिया था कि वे ज्यादा मैच नहीं खेल पाएंगे. 5 मैचों की इस सीरीज में भी उन्होंने 2 मैच नहीं खेले थे. शुभमन गिल और गौतम गंभीर की अगुआई में गई नई टीम को इंगलैंड में संतोषजनक प्रदर्शन करने का दबाव था.

पर हुआ क्या? हुआ यह कि इन 5 टैस्ट मैचों ने बता दिया कि ‘लाल गेंद’ आज भी ‘क्रिकेट की क्वीन’ है. बता दिया कि टैस्ट क्रिकेट अभी मरा नहीं है, बल्कि इस का जादू बरकरार है. तभी तो यह सीरीज रिकौर्ड दर्शकों द्वारा स्टेडियम और टैलीविजन पर देखी गई. 20 जून को शुरू हुए पहले टैस्ट मैच को जिओ हौट स्टार एप पर रिकौर्ड 89.1 मिलियन दर्शकों ने देखा था.

5 दिन तक चले इस मैच में स्टेडियम हर रोज फुल रहा था. हालांकि, इंगलैंड ने यह रोमांचक मैच जीता था, पर दर्शकों ने हर पल का मजा लिया था. बाकी 4 मैच भी इसी तरह रोमांच से भरे थे.

मनोरंजन के लिहाज से इस टैस्ट सीरीज से यह बात सामने आई कि अगर कोई बड़ा लक्ष्य सामने है, तो उसे पार करने के लिए सब्र और हुनर दोनों की जरूरत होती है. अब चूंकि आईसीसी वर्ल्ड टैस्ट चैंपियनशिप होती है, तो हर टैस्ट के अलग से पौइंट मिलते हैं.

इस से टैस्ट क्रिकेट की नीरसता खत्म हुई है, क्योंकि आईसीसी वर्ल्ड टैस्ट चैंपियनशिप जीतने का मजा वैसा ही है, जैसे वनडे या टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला जीतना.

अगर आईसीसी वर्ल्ड टैस्ट चैंपियनशिप की मौजूदा टेबल पर नजर डालें तो इंगलैंड को 5वें टैस्ट मैच के रोमांचक मुकाबले में 6 रन से हराने के बाद और इस सीरीज को 2-2 की बराबरी पर ला कर भारतीय टीम तीसरे नंबर पर पहुंच गई है. आस्ट्रेलिया पहले नंबर है, जबकि श्रीलंका दूसरे नंबर पर.

इस टैस्ट सीरीज से एक बात और साबित हुई है कि टीम गेम में कोई एक ‘एक्स फैक्टर’ नहीं होता है. टैस्ट का मतलब ही खेल के मैदान पर आप के सब्र का इम्तिहान. चूंकि शुभमन गिल एक नौसिखिया टीम के अगुआ बन कर इंगलैंड गए थे, जहां की विकेट, मौसम, दूसरे हालात भारतीय पिचों और मैदानों से एकदम उलट हैं, तो उन की टीम से ज्यादा करिश्मे की उम्मीद किसी को नहीं थी.

खुद शुभमन गिल का इस टैस्ट सीरीज से पहले इंगलैंड में खराब रिकौर्ड था. उन्होंने इंगलैंड में 3 मैचों की 6 पारियों में 14.66 के औसत से सिर्फ 88 रन ही बनाए थे, पर इस बार वे 754 रनों के साथ इस सीरीज में सब से ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने. आखिरी मैच के हीरो रहे मोहम्मद सिराज ने इस सीरीज में 23 विकेट लिए.

भारत और इंगलैंड के बीच खेले गए 5 मैचों की टैस्ट सीरीज के सभी मुकाबले पांचों दिन यानी आखिरी दिन तक खेले गए. तकरीबन 8 साल बाद ऐसा हुआ, जब 5 मैचों की सीरीज के सभी टैस्ट मैच आखिरी दिन तक खेले गए.

कुलमिला कर यह टैस्ट सीरीज शानदार रही और एक सीख मिली कि अगर आप बैस्ट देते हैं तो चाहे वह क्रिकेट का मैदान हो या कोई दूसरा क्षेत्र, रिजल्ट चौंकाने वाला होता है और आप को और बेहतर करने की प्रेरणा देता है. फिर हारजीत कोई माने नहीं रखती है, काम का मजा ही आप का इनाम होता है. Cricket Update

Relationship Tips: सहोदर का साथ कभी न छोड़ें

Relationship Tips: जितेंद्र और सुमित्रा सहोदर यानी सगे भाईबहन थे. उन के छोटे भाई सुरेंद्र की शादी की बात चल रही थी. चूंकि उन के मांबाप नहीं थे, तो सुरेंद्र ने सुमित्रा और अपने जीजाजी की बात मान कर एक जगह रिश्ता देख कर हां बोल दी.

बस, यही बात जितेंद्र को खल गई, क्योंकि वह अपनी साली से सुरेंद्र की शादी कराना चाहता था. वह दिन था और आज का दिन, इस बात को 15 साल हो गए हैं, जितेंद्र ने सुमित्रा से रिश्ता खत्म कर लिया है.

लेकिन खून के रिश्ते इस तरह खत्म नहीं होते हैं. एक दिन सुमित्रा अपने पति के साथ जितेंद्र के घर गई. उस की बेटी की शादी थी. उस ने जितेंद्र को शादी का कार्ड देते हुए हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘भाई, भूलचूक माफ कर दे. पहला कार्ड तुझे दे रही हूं. अपनी भांजी की शादी में जरूर आना.’’

पहले तो जितेंद्र ने मुंह फुला लिया, पर फिर भाईबहन का प्यार इस वैर पर भारी पड़ा. जितेंद्र ने सुमित्रा का मान रखा और अपनी भांजी की शादी में परिवार समेत शरीक हुआ. भाई ने बहन की पैसे से भी मदद की.

भाईबहन का रिश्ता दुनिया के सब से प्यारे और अनमोल रिश्तों में से एक है. यह रिश्ता प्यार, विश्वास और समर्थन से भरा होता है. वे दोनों एकदूसरे के साथ बचपन से ले कर बुढ़ापे तक का सफर तय करते हैं और इस दौरान एकदूसरे के साथ कई यादगार पल बिताते हैं.

पर कई बार इस रिश्ते में खटास आ जाती है. इस में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि ऐसा होना स्वाभाविक है, पर इस खटास को कभी कड़वाहट में न बदलने दें. जब भी जरूरत हो भाईबहन एकदूसरे के साथ खड़े रहें, फिर चाहे वह पैसे से मदद करना ही क्यों न हो.

एक समय ऐसा था जब कोई भाई अपनी बहन से पैसे की मदद लेने से झिझकता था. समाज की बंदिशें ऐसी थीं कि बहन से मदद लेना भाई के लिए शर्म की बात सम?ा जाता था. पर आज जमाना बदल गया है. बहन भी अच्छी पढ़ाई कर के अपने पैरों पर खड़ी हो गई है और चूंकि अब मांबाप पहले की तरह 5-6 बच्चे नहीं पैदा करते हैं, तो सामाजिक ढांचा भी बदल गया है. लिहाजा, बहन अपने भाई की पैसे से मदद करना अपना हक समझती है.

पहले तो शादीब्याह में लड़की को मायके से सिर्फ मिलता ही था, पर आज की लड़कियां तो अपने मायके से जितना लेती हैं, उस से ज्यादा देने की हिम्मत भी दिखाती हैं. इतना ज्यादा कि वे जायदाद में अपना कानूनी हिस्सा भी भाई को गिफ्ट में दे देती हैं.

यही वजह है कि आज भाईबहन एकदूसरे की जरूरतों का ध्यान रखते हैं और पैसे से मदद करने में भी झिझकते नहीं हैं.

मजबूती की निशानी

यहां सवाल उठता है कि भाईबहन के रिश्ते को मजबूत बनाने की वजह क्या है और इस से फायदा क्या है?

जब कोई भाईबहन एकदूसरे को अपना भावनात्मक समर्थन देते हैं, तो वे जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत जुटा लेते हैं. इस से वे खुशहाल होते हैं और रिश्ते में प्यार बना रहता है.

भाईबहन के रिश्ते में सांझी यादें भी मजबूती की वजह बनती हैं, जो उन की जिंदगी के अहम पलों को और
भी खास बनाती हैं. इस से दोनों में एकदूसरे के लिए सुरक्षा की भावना पैदा होती है.

चूंकि यह रिश्ता बेहद करीबी और बहुत लंबा चलता है, तो एकदूसरे की पैसे से मदद कर के वे दोनों जिंदगी को और ज्यादा बेहतर कर सकते हैं. लिहाजा, जिंदगी में कितना ही बुरे से बुरा वक्त आए, भाईबहन को कभी एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ना चाहिए. पैसे को रिश्ते की खाई में नहीं बदलने देना चाहिए, बल्कि उसे तो वह पुल बना देना चाहिए, जो उन्हें हमेशा साथ जोड़े रखे. Relationship Tips

द्रौपदी का किरदार निभाना चाहती हैं Tripti Dimri

Tripti Dimri: फिल्म ‘एनिमल’ से ‘दूसरी भाभी’ का खिताब पाने के साथ ही कई फिल्में अपनी झोली में डाल लेने वाली तृप्ति डिमरी इन दिनों अपनी रोमांटिक फिल्म ‘धड़क 2’ को ले कर चर्चा में हैं. इस फिल्म में जाति का मसला भी काफी मजबूत तरीके से उठाया गया है.

चमोली, उत्तराखंड के रहने वाले दिनेश डिमरी और मीनाक्षी की बेटी तृप्ति डिमरी का जन्म 23 फरवरी, 1994 को नई दिल्ली में हुआ था, मगर उन्होंने उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के दिल्ली पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की. इस के बाद उन्होंने दिल्ली के श्री अरबिंदो कालेज से मनोविज्ञान और भारतीय फिल्म और टैलीविजन संस्थान से ऐक्टिंग की पढ़ाई की.

ऐसा माना जाता है कि तृप्ति डिमरी के ऐक्टिंग कैरियर की शुरुआत रोमांटिक फिल्म ‘लैलामजनू’ से हुई थी, जिस में अविनाश तिवारी उन के हीरो थे, पर हकीकत में हीरोइन बनने के लिए मुंबई पहुंचने के बाद तृप्ति डिमरी ने सब से पहले साल 2017 में श्रीदेवी के साथ फिल्म ‘मौम’ में एक छोटा सा किरदार निभाया था, जिस की कहीं कोई चर्चा नहीं हुई थी.

इस के बाद श्रेयस तलपड़े के डायरैक्शन में बनी फिल्म ‘पोस्टर ब्वौयज’ में सनी देओल, बौबी देओल और श्रेयस तलपड़े के साथ तृप्ति डिमरी नजर आई थीं. फिर साल 2018 में उन्हें रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘लैलामजनू’ में अविनाश तिवारी के साथ मेन लीड निभाने का मौका मिला था. मगर इस फिल्म ने बौक्स औफिस पर पानी तक नहीं मांगा था, इसलिए तृप्ति डिमरी को कोई खास फायदा नहीं मिला था.

फिल्म ‘लैलामजनू’ के रिलीज होने के 2 साल बाद तृप्ति डिमरी ने फिल्म ‘बुलबुल’ में बोल्ड किरदार निभाया था और इस फिल्म में निभाए गए रेप सीन के चलते वे चर्चा में आ गई थीं. इस फिल्म में पहली बार तृप्ति डिमरी की चर्चा उन हीरोइनों में होने लगी थी, जो अपनी आंखों से बहुतकुछ कह जाती हैं.

लेकिन साल 2023 में संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ में रणबीर कपूर के साथ इंटीमेसी वाले सीन दे कर तृप्ति डिमरी अचानक ‘नैशनल क्रश’ बन गई थीं, जबकि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक फिल्म ‘एनिमल’ में काम करने के लिए तृप्ति डिमरी को महज 40 लाख रुपए और रणबीर कपूर को 70 करोड़ रुपए मिले थे.

फिल्म ‘बुलबुल’ में रेप सीन और फिल्म ‘एनिमल’ में इंटीमेसी वाले सीन की चर्चा चलने पर तृप्ति डिमरी ने कहा, ‘‘सच यही है कि ‘बुलबुल’ का रेप सीन मेरे लिए काफी मुश्किल था. किसी भी लड़की या औरत के लिए उन हालात में होना आसान नहीं होता. जब रेप सीन शूट हो रहा था, तब बहुत ही डिस्टरबिंग था. सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, बल्कि उस वक्त जो भी आसपास थे, उन सभी के लिए.

‘‘अगर मैं ‘बुलबुल’ में इस सीन को करने से मना कर देती, तो कहानी बेअसर हो जाती. ‘एनिलम’ की शूटिंग के दौरान भी यही माहौल था. सैट पर सिर्फ 4 लोग होते थे.’’

फिल्म ‘एनिमल’ की कामयाबी के बाद करन जौहर की फिल्म ‘बैड न्यूज’ में तृप्ति डिमरी एक गर्भवती औरत ‘सलोनी’ के किरदार में नजर आई थीं, जिसे पता ही नहीं होता कि उस के पेट में पल रहे बच्चे का पिता ‘अखिल चड्ढा’ (विक्की कौशल) है या ‘सुखबीर’ (एमी विर्क) है.

हिंदी फिल्म ‘बैड न्यूज’ के बाद तृप्ति डिमरी ने राज कुमार राव के साथ ‘विक्की विद्या का वो वाला वीडियो’ नामक फिल्म की थी, जिस में उन्होंने और राजकुमार राव ने अपने लापता हुए सैक्स टेप की तलाश में निकले जोड़े के किरदार निभाए थे. इस फिल्म को बौक्स औफिस पर कामयाबी नहीं मिली थी. लेकिन 2 महीने बाद ही कौमेडी हौरर सीक्वल फिल्म ‘भूलभुलैया 3’ में कार्तिक आर्यन, विद्या बालन और माधुरी दीक्षित के साथ तृप्ति डिमरी ने भी काम किया और इस फिल्म ने एक बार फिर उन्हें कामयाबी का स्वाद चखा दिया.

फिल्म ‘एनिमल’ के बाद जिंदगी और फिल्म कैरियर में आए बदलाव की चर्चा चलने पर तृप्ति डिमरी कहती हैं, ‘‘काफी बदलाव आया है. मैं इस बदलाव को इस तरह से देखती हूं कि जब हम अच्छा काम करते हैं, तो लोग हमारी तारीफ जरूर करते हैं. लोग हमारे किरदार को याद रखते हैं.

‘‘पहले जब मैं बाहर जाती थी, तो लोग मुझे मेरे पुराने किरदारों के नाम से बुलाते थे, पर अब लोग मुझे फिल्म ‘एनिमल’ के किरदार ‘जोया’ के नाम से बुलाते हैं. मुझे उम्मीद है कि फिल्म ‘धड़क 2’ की वजह से लोगों को अब ‘विधि’ याद रहेगी. उस के बाद कोई नया किरदार लोगों को पसंद आएगा और मैं उस से जानी जाऊंगी.’’

तृप्ति डिमरी को बचपन से ही लौन टैनिस खेलने का शौक रहा है. वे कहती हैं, ‘‘मेरा टैनिस खेलना जारी है. यह तो मेरा शौक है. मुझे स्कूल के दिनों से ही टैनिस खेलना अच्छा लगता रहा है. मैं इस के फायदे या नुकसान की बात कभी नहीं सोचती. टैनिस खेल कर मुझे खुशी मिलती है.’’

महाभारत’ की द्रौपदी का किरदार निभाने की चाहत वाली तृप्ति डिमरी फिलहाल विशाल भारद्वाज की ऐक्शन थ्रिलर फिल्म ‘अर्जुन उस्तरा’ का इंतजार कर रही हैं, जिस में वे शाहिद कपूर के साथ नजर आएंगी. Tripti Dimri

Hindi Story: जिओ जमाई राजा – अभय प्रताप के घर चोर कैसे घूस गया था

Hindi Story: साल भर होने को आया लेकिन अब भी जब पुरवा हवा चलती है तो चरनदास की नाक की हड्डी में दर्द होने लगता है.

इंस्पेक्टर इसरार खान अपनी खिजाब लगी दाढ़ी खुजलाते हुए लखनवी अंदाज व अदब के साथ अम्मांजी की मातमपुर्सी कर रहे थे, ‘‘खुदा जन्नत बख्शे मरहूम को. क्या नायाब मोहतरमा थीं जनाब, अल्ला को भी न जाने क्या सूझी कि ऐसी पाकीजा और शीरीं जबान खातून को हम से छीन लिया.’’

पिछले 5 सालों से आमों की फसल पर मलीहाबादी दशहरी आमों की पेटियों का नजराना पेश करने की जिम्मेदारी खान साहब पर ही थी. अम्मांजी एकएक पेटी गिन कर अंदर रखवातीं. 2 साल पहले जब कीड़े के प्रकोप से मलीहाबादी आमों की पूरी फसल ही चौपट हो गई थी तब बेचारे खान साहब कहां से आम लाते. फिर भी बाजार से ऊंचे दामों में 2 पेटियां खरीद कर अम्मांजी की खिदमत में पेश कीं.

‘‘पूरे सीजन में सिर्फ 2 पेटियां?’’ यह कहते हुए अम्मांजी आगबबूला हो उठीं और फिर तो अपनी निमकौड़ी जैसी जबान से ऐसीऐसी परंपरागत तामसिक गालियों की बौछार की कि बेचारे खान साहब की रूह फना हो गई. लोग खामखाह पुलिस मकहमे को गालियों की टकसाल कहा करते हैं.

धीरेधीरे एक हफ्ता बीत गया. जख्म भरने लगा और ठाकुर अभयप्रताप भी आफिस जाने लगे. इस बीच उन्हें यह खबर लग चुकी थी कि उन के चोरी हुए सामान समेत चोर पकड़ा जा चुका है. सामान की शिनाख्त भी उन के मातहत कर्मचारियों ने कर ली थी. तकरीबन सारा सामान उन्हीं मातहतों के खूनपसीने की कमाई का ही तो था जिन्हें उन्होंने तोहफों की शक्ल में अम्मांजी को भेंट किया था. चोर के साथ पुलिस वाले बेहद सख्ती से पेश आए थे.

ठाकुर अभयप्रताप के सामने भी चोर की पेशी हुई. आखिर वह पुलिस के आला अफसर थे, वह भी देखना चाह रहे थे कि किस बंदे में इतनी हिम्मत थी जिस ने उन के घर में सेंध लगाई. बेडि़यों में जकड़ कर चोर को हाजिर किया गया. साहब की ओर देखते ही चोर चौंका. इन्हें तो पहले भी कहीं देखा है. कहां देखा है? वह याद कर ही रहा था कि सिपाही रामभरोसे ने एक जोरदार डंडा यह कहते हुए उस की पीठ पर जमा दिया, ‘‘ऐसे भकुआ बना क्या देख रहा है बे. यही वह साहब हैं जिन के घर घुसने की तू ने हिम्मत की थी. अब देख, साहब ही तेरी खाल में भूसा भरेंगे.’’

बेचारा चोर मार खाए कुत्ते जैसा कुंकुआने लगा. तभी उस के दिमाग में एक बिजली कौंधी. वह ठाकुर अभयप्रताप के सामने बैठ कर गिड़गिड़ाने लगा, ‘‘मुझे बचा लीजिए माई बाप, मैं तो मामूली उठाईगीर हूं. मैं ने चोरी जरूर की है माई बाप, पर आप का सब सामान तो मिल गया है हुजूर. थोड़ी सजा दे कर मुझे छोड़ दीजिए साहब.’’

‘‘अबे, तेरी तो ऐसी की तैसी,’’ और सिपाही रामभरोसे ने दूसरा डंडा ठोंका, ‘‘सवाल तेरी चोरी का नहीं है ससुरे, सवाल है तू ने हमारे साहब के घर घुसने की हिम्मत कैसे की?’’

बेचारा चोर फिर कुंकुआने लगा और तेजी से ठाकुर का पैर पकड़ कर बोला, ‘‘साहब, उस रात जब मैं आप के घर घुसा था तब आप ही थे न जो रात में जीने के ऊपर केले के छिलके बिछा रहे थे?’’

‘‘अयं, यह क्या आंयबांय बक रहा है बे. एक ही हफ्ते की मार से दिमाग फेल हो गया है क्या तेरा,’’ सिपाही रामभरोसे ने जूता उस के सिर पर जोर से ठोंका.

लेकिन अभयप्रताप सिंह का सिंहासन तो डोल गया था. फौरन सिपाही रामभरोसे को यह कहते हुए बाहर भेज दिया कि मुझे इस चोर से अकेले में कुछ बात करनी है.

फिर तो चोर ने पूरा खुलासा किया, ‘‘साहब, उस रात जीने पर जब साहब आप 3 जगह झुक कर केले के छिलके रख रहे थे तो यह खुशकिस्मत इनसान वहीं परदे के पीछे छिपा था. बाद में हवालात में ही मुझे पता चला कि साहब की सास की मौत केले के छिलके पर फिसल कर हुई थी.’’

अब क्या था. पासा पलट चुका था. साहब ने आननफानन में आदेश दे दिया कि चोरी का सामान तो मिल ही चुका है, फिर बेचारे गरीब चोर को क्यों सजा हो. पूरा का पूरा महकमा इस अजीब फैसले से सकते में आ गया. लेकिन जब साहब ने खुद ही उस का गुनाह माफ कर दिया तो फिर केस ही नहीं बनता न.

वह दिन और आज का दिन. महीने की पहली तारीख को वह चोर अपनी मूंछ पर ताव देता हुआ  ठाकुर अभयप्रताप के घर के दरवाजे के सामने खड़ा उन का इंतजार करता है. उस के हाथ में 2-4 केले रहते हैं. इंतजार करतेकरते वह पट्ठा सामने की पुलिया पर बैठ कर केले खाता जाता है और उस के छिलके पास में जमा करता जाता है. जैसे ही साहब बाहर निकलते हैं वह एक हाथ में केले का छिलका हिलाते हुए दूसरे हाथ से उन्हें सलाम ठोंकता है.

ठाकुर अभयप्रताप इधरउधर नजर दौड़ा कर धीरे से उस के पास जाते हैं और जेब से कुछ रुपए निकाल उस के हाथ पर रख कर झट से गाड़ी में बैठ जाते हैं. गेट पर खड़ा गार्ड और ड्राइवर सब उस चोर की हिमाकत और ठाकुर साहब की दरियादिली देख कर सिर खुजलाते रह जाते हैं. Hindi Story

Story In Hindi: शिकार

Story In Hindi: वह जानता था कि उस का अंत क्या होगा. वह जो करने जा रहा है, उस का नतीजा क्या होगा. लेकिन वह खुद को मजबूर पा रहा था. हवस का जहरीला कीड़ा उस की रगरग में समा चुका था. दिल ने साथ देना बंद कर दिया था और दिमाग पर तो जैसे जंग लग चुका था.

उस के पास मोबाइल था, जिस में वह हमेशा पोर्न साइट देखता था. दिमाग में एक ही चीज भरी हुई थी कि औरत महज एक शरीर और मर्द की जरूरत पूरी करने का साधन है.

इस घने जंगल में एक घायल लड़की भी थी. बेहोश होने से पहले लड़की ने बताया था कि जानवर चराते हुए वह राह भटक गई. एक भालू ने अचानक उस पर हमला किया. खुद को बचाते हुए वह भागती रही और जंगल के बहुत अंदर आ गई थी. उसे घर जाना था.

वह लड़की कराह रही थी. भालू के पंजे की चोट और उस के डर ने उसे बेहोश कर दिया था, लेकिन इस आदमी को देख कर तो वह ऐसे डरी, जैसे अब बचना नामुमकिन हो. इस तरह तो कोई जानवर दूसरे जानवर को देख कर भी नहीं डरता, वह तो फिर भी इनसान है.

इनसान का इनसान से डरना कहां तक ठीक है? हां, ठीक ही है, क्योंकि इनसान के रूप में उसे वह लड़की महज एक शरीर के रूप में नजर आ रही थी.

वह शिकार का मजा लेने अपने एक दोस्त के साथ छिप कर इस जंगल में आया था. मचान बनाने के बाद बंदूक ले कर वह पहले मचान पर चढ़ा.

उस के दोस्त ने जैसे ही मचान की पहली सीढ़ी पर कदम रखा, तेज रफ्तार से बाघ झपटा मार कर उसे घसीटते हुए ले गया.

घबराहट और डर के मारे वह बंदूक चलाना भूल गया. दोस्त की चीखें उस के कानों में अब तक गूंज रही थीं. उसे होश संभालने में काफी समय लगा. काफी इंतजार किया, लेकिन बाघ फिर नहीं आया.

भागतीहांफती वह लड़की आई. जख्मी हालत में और अपने सामने एक मर्द को देख कर खुश होने की बजाय डर से बेहोश हो गई. जैसे अब बचने को कोई उम्मीद न हो. वह अभी भी मचान पर बैठा था. लड़की बेहोश पड़ी थी.

वह सोच रहा था कि इस से पहले लड़की को कोई जंगली जानवर शिकार कर ले उस से अच्छा है कि वह उसे मचान पर ले आए और फिर उस के साथ…

इस घने जंगल में कौन देखता है कि किस ने, किस का शिकार किया. न तो वह आसपास के गांव का है और न ही लड़की उसे पहचानती है. फिर उस ने तो लड़की की जान बचा कर अहसान ही किया है उस पर. इस अहसान के बदले अगर वह उस का शरीर पा लेता है, तो यह लड़की की जान से सस्ता ही है. अगर इसे सौदा भी मान लिया जाए तो…

वह बंदूक ताने मचान से धीरेधीरे नीचे उतरा. उसे जंगली जानवरों से भी बचना था. जंगल का कानून तो यही है कि ताकतवर कमजोर को खा कर अपने पेट की भूख शांत करता है.

उस ने पास आ कर गौर से लड़की को देखा. लड़की की उम्र 16-17 साल से ज्यादा नहीं लगी उसे. गोरा रंग, गांव की खूबसूरत बाला. सलवारकुरता कई जगह से फट चुका था. पीठ पर भालू के पंजे का निशान था. बहता हुआ खून जम चुका था.

वह लड़की को घसीटते हुए मचान तक लाया, फिर कंधे पर उठा कर मचान पर चढ़ गया.

लड़की अब भी बेहोश थी. उस ने लड़की के शरीर पर कई बार निगाह दौड़ाई.

अचानक वह उस के शरीर को घूरने लगा, फिर उस के अंदर लड़की का शरीर भोगने की लालसा जाग उठी. औरत भी तो यही चाहती है.

उसे अपनी पत्नी की बात याद आई, ‘मैं तुम्हें छोड़ कर जा रही हूं. मेरी इच्छाओं को पूरा करने के तुम काबिल नहीं हो. तुम्हें मेरे शरीर की कदर नहीं है.’

‘हां, इसी शरीर सुख के लिए तो पत्नी अपने प्रेमी के साथ चली गई मुझे छोड़ कर और मैं ने खुद को शराब और शिकार में लगा दिया. जंगलजंगल भटकने लगा. यह जानते हुए भी कि शिकार करना गैरकानूनी है.

पकड़े जाने पर सजा हो सकती है, लेकिन आदत एक बार लग गई तो छोड़ना मुश्किल होता है.’ वह सोच रहा था.

शरीर की भूख मिटाने के लिए वह रैडलाइट एरिया में जाता और शिकार की आदत के लिए वह जंगल जाता. उस ने जंगल के आसपास के गांवों में कई दोस्त बना लिए थे. शिकार करने में ज्यादा दिक्कत होती, तो वह फोरैस्ट वालों को घूस दे कर पटा लेता था.

जंगली जानवरों का शिकार करते हुए वह यही सोचता जैसे अपनी घर छोड़ कर गई पत्नी का शिकार कर रहा हो.

जंगल का कानून ही हर जगह चलता है. कहने को हम भले ही सामाजिक हो गए हों, लेकिन हकीकत यही है कि हर कमजोर शिकार है और ताकतवर शिकारी.

भागते हुए हिरन को गोली मारते समय उस के मन में यह खयाल नहीं आया कि वह हत्या कर रहा है या कानून तोड़ रहा है. हां, जब उस का दोस्त बाघ का शिकार हुआ, तब उसे जरूर लगा कि बाघ ने उस के दोस्त की हत्या की है और वह इस का बदला ले कर रहेगा.

उस ने यह कह कर खुद को समझाया कि बाघ के हाथों मरना उस के दोस्त की किस्मत थी. बाघ ताकतवर था, उस का दोस्त कमजोर. उस के मन में यह विचार नहीं आया कि वह जंगली जानवरों की हत्या कर के मजा लेने जंगल में आया है. न वह यहां होता, न उस का दोस्त मारा जाता.

अब उस का सारा ध्यान लड़की के शरीर पर था, ‘अगर मैं इस लड़की के साथ कुछ करता हूं, तो क्या गलत होगा? यह शिकार है और मैं शिकारी. यह कमजोर है और मैं ताकतवर और जंगल के कानून के हिसाब से कानून मेरे साथ है. यह कोई शहर नहीं.’

उस के मन में हवस के कीड़े कुलबुलाने लगे. उस ने लड़की के कपड़े खींचने शुरू किए कि तभी लड़की को होश आ गया.

लड़की उसे देख कर बुरी तरह डर गई और बोली, ‘‘मुझे छोड़ दीजिए.’’

उस ने हैरत और गुस्से से कहा, ‘‘तुम नीचे घायल पड़ी थी. मैं उठा कर मचान पर न लाता तो तुम बाघ का शिकार बन चुकी होती. बेहोश होने से पहले तुम ने बताया था और तुम्हारी पीठ का जख्म देख कर लग भी रहा है कि भालू ने तुम पर हमला किया था. जंगली जानवरों से डरने के बजाय तुम मुझ से डर रही हो. मैं ने तो तुम्हें बचाया है.’’

‘‘क्योंकि आप में और उन जानवरों में ज्यादा फर्क नहीं है. वे मार कर शरीर खा जाते और आप इस शरीर को खराब कर के मुझे जिंदगीभर के लिए जख्मी कर देते.’’

‘‘तुम्हें अपनी जान प्यारी है या इज्जत?’’

‘‘मैं लड़की हूं. मुझे अपनी इज्जत प्यारी है और जान भी प्यारी है, लेकिन इज्जत के बिना जिंदगी मौत के समान है,’’ वह लड़की बोली.

‘‘एक अकेली लड़की को देख कर ऐसा खयाल आना गलत नहीं है.’’

‘‘कैसा खयाल? रेप का?’’

‘‘अपनी हवस मिटाने का.’’

‘‘और आप की पलभर की हवस के लिए मैं जिंदगीभर नरक भोगती रहूं?’’ वह लड़की बोली.

‘‘मैं ऐसा भी सोच सकता था कि मैं तुम्हारी जान बचाऊं. तुम्हारे जख्मों को मरहम दूं. तुम्हें महफूज घर तक छोड़ दूं. फिर शायद तुम्हारे दिल में मेरे लिए प्यार का बीज फूट पड़ता. लेकिन शरीर की भूख इतना इंतजार नहीं कर सकती.’’

‘‘क्या तुम लड़की के दिल में प्यार और इज्जत का भाव पाना छोटी बात समझते हो? एक औरत अगर किसी मर्द की इज्जत करती है या प्यार, यह अपनेआप में शानदार है.’’

‘‘लेकिन इतना सब्र नहीं है मुझ में. जो चाहिए वह मैं छीन कर अभी इसी वक्त ले सकता हूं. फिर इतना सब नाटक क्यों? क्यों मैं हाथ आए शिकार को छोड़ दूं.’’

‘‘अकेली लड़की शिकार है तुम्हारी नजर में?’’

‘‘अगर मैं हां कहूं तो गलत नहीं होगा. मैं बेकार में शराफत का नाटक क्यों करूं? फिर तुम साथ दो तो तुम्हें भी मजा आएगा. फिर यह रेप नहीं होगा, वह बोला.’’

‘‘प्यार भी नहीं होगा.’’

‘‘मैं रुक नहीं सकता. मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा है. मैं खुद पर और काबू नहीं रख सकता,’’ कहते हुए उस ने अपनी बंदूक एक तरफ रख दी और लड़की को अपनी तरफ जबरदस्ती खींच लिया.

लड़की पहले से चोटिल थी. उस के खींचने से उसे और दर्द हुआ.

उस ने उस लड़की को जबरन लिटा दिया और उस के ऊपर आ कर उस के सीने से दुपट्टा खींच कर फेंक दिया.

लड़की ने कहा, ‘‘अगर कमजोर शिकार है ताकतवर शिकारी, तो ठीक है. कभी मैं ताकतवर हुई तो तुम्हारा शिकार कर सकती हूं.’’

वह वहशी हो चुका था. उस ने लड़की के सीने में दांत गड़ा कर कहा, ‘‘इस समय में ताकतवर हूं और यहां न कोईर् समाज है, न कानून. न गवाह, न सुबूत.’’

‘‘सुबूत मैं खुद हूं.’’

‘‘मैं तुम्हारी हत्या कर दूंगा. तब कोई सुबूत भी नहीं रहेगा कहते हुए,’’ उस ने उस लड़की का ऊपरी कपड़ा फाड़ डाला.

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि जिस वजह से तुम खुद को मर्द कहते हो. उस मर्दानगी की वजह से तुम्हें रेप और हत्या करनी पड़ेगी. फिर भी तुम्हें अपने मर्द होने का घमंड है?’’

‘‘यह तो कुदरती है.’’

‘‘लेकिन रेप और हत्या कुदरती नहीं है.’’

‘‘मैं कोई साधुसंत नहीं. तुम्हें देख कर मेरे अंदर हवस का भाव जागा और से पूरा करना जरूरी है मेरे लिए.’’

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि मुझे अपना बचाव खुद करना पड़ेगा. तुम मर्द हो कर हिफाजत करने की जगह जुल्म कर रहे हो.’’

‘‘हां, कर रहा हूं. तुम अपने बचाव में सिर्फ रो सकती हो. कोई ऐसी उम्मीद भी मत रखना कि मेरा मन बदल जाएगा या आसमान से कोई देवदूत तुम्हें बचाने आ जाए.’’

‘‘तुम इनसान होते तो मेरे जख्मों पर मरहम लगाने की सोचते. मुझ डरी हुई लड़की को हिम्मत देते. लेकिन तुम जंगली जानवर ही निकले. तुम से उम्मीद करना बेकार है,’’ लड़की ने पूरी ताकत लगा कर उसे धक्का दिया.

मचान छोटा था. उस का बैलेंस बिगड़ गया. वह मचान से नीचे गिर पड़ा. लड़की ने फौरन पास पड़ी बंदूक उठा ली और उस की तरफ तान दी.

बाघ की दहाड़ सुनाई दी. बाघ उस की तरफ बढ़ रहा था. उस ने चीख कर कहा, ‘‘मुझे बचा लो. मैं माफी मांगता हूं. बाघ को गोली मारो.’’

‘‘मेरे लिए एक आदमखोर है दूसरा औरतखोर. मुझे दोनों से ही बचना है. अब तुम शिकार हो, मैं शिकारी. मर्दऔरत के बीच अगर ताकतवर और कमजोर वाली बात है, तो औरत भी ताकतवर हो सकती है. फिर तुम कैसे बचोगे?’’

उस की घिग्घी बंध चुकी थी. बाघ धीरेधीरे उस की तरफ बढ़ रहा था और लड़की उस की तरफ बंदूक ताने हुए थी, जो कभी भी चल सकती थी.

उस ने डर से कांपते हुए कहा, ‘‘बाघ के हाथों मरने से अच्छा है कि तुम मुझे गोली मार दो. प्लीज, मार दो मुझे.’’

‘‘शिकारी से रहम की उम्मीद नहीं करना चाहिए. तुम्हीं से सीखा है अभीअभी मैं ने.’’

एक दहाड़ के साथ बाघ ने उस पर छलांग लगा दी. वह चीखा चिल्लाया. थोड़ी देर में उस का दम निकल गया.

लड़की ने ट्रिगर दबाया. गोली बाघ के सिर में लगी. वह छटपटाया और ढेर हो गया.

लड़की धीरेधीरे मचान से उतरी और पूर्व दिशा की ओर बढ़ने लगी. Story In Hindi

Hindi Story: स्कूटी वाली भौजी

Hindi Story: दुर्गेश बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहता था. उसे लगता था कि गांव में सब से आगे उस का और उस के घरपरिवार का नाम रहे. वह पढ़ालिखा नहीं था. उस की संगत भी खराब लोगों से थी. उस का ज्यादातर समय गांव के बाहर बाग में बने मंदिर में गुजरता था. वहां रोजाना 20-25 लोग आते थे.

पहले वे सब हुक्का पीने के आदी थे, पर अब धीरेधीरे हुक्के की जगह गांजा ने ले ली. अब यह नशेडि़यों का अड्डा सा बन गया था.

दुर्गेश को भी गांजा पीने की आदत लग गई थी. गांजा बेचने वाला 10 किलोमीटर दूर के एक गांव भुलाबल से आता था.

नशे की लत में दुर्गेश एक बार मारपीट में शामिल हो गया था. पुलिस ने उसे पकड़ा और उसे जेल भेज दिया. 15 दिन जेल में रहने के बाद वह जमानत पर छूट कर आया.

इस के बाद कई महीने तक तो दुर्गेश गांव आने से बचता रहा था. पर फिर धीरेधीरे वह गांव आने लगा और अपने पुराने साथियों के साथ पहले की तरह उठनेबैठने लगा.

जेल में दुर्गेश को कई ऐसे लोग मिले थे, जो नशा बेचने के जुर्म में बंद थे. उन्हीं में से एक रहीम था. उस ने दुर्गेश की जेल में बड़ी मदद की थी. उस ने औफर दिया था कि अगर वे दोनों साथ मिल जाएं, तो अच्छा पैसा कमा सकते हैं.

जेल जाने के बाद अब दुर्गेश के मन का डर खत्म हो गया था. उसे समझ आ गया था कि पैसा सब से बड़ी चीज है. वह पुलिस और अदालत हर जगह काम आती है.

20 दिन के बाद रहीम भी जेल से बाहर आ गया था. वह दुर्गेश से मिलने उस के घर आ गया. वहां दुर्गेश ने उस की खातिरदारी की और उसे अपने बीवीबच्चों से भी मिलवाया.

दुर्गेश और रहीम एक ही उम्र के थे. रहीम की नजर दुर्गेश की पत्नी दीपा पर पड़ी. 5 और 7 साल के 2 बच्चों की मां होने के बाद भी दीपा बहुत खूबसूरत और दिलकश लग रही थी.

रहीम दीपा को देख कर मचल गया और बोला, ‘‘भौजी, अगर तुम और दुर्गेश भाई मेरी योजना के हिसाब से काम कर लो, तो कम समय में ही हम सब अमीर बन सकते हैं. आखिर कब तक गरीबी में अपनी खूबसूरती को बरबाद करती रहोगी…’’

‘‘हमें करना क्या होगा? हम तो इन से कहते रहते हैं. ये हमारी सुनते ही नहीं. केवल सपनों की दुनिया में उड़ते रहते हैं,’’ दुर्गेश के बोलने से पहले ही दीपा बोल पड़ी.

‘‘भौजी, हम लोग दूसरों के नशे का इंतजाम कर लें बस. इस से पैसा भी मिलेगा, लोग भी साथ होंगे. मैं आप को एक स्कूटी दिला देता हूं और उसे चलाना भी सिखा दूंगा.

‘‘आप पर कोई शक नहीं करेगा. आप केवल सामान लाने का काम करेंगी. बेचने के लिए नैटवर्क हम और दुर्गेश बना लेंगे,’’ रहीम बोला.

‘‘लेकिन पुलिस का क्या करेंगे?’’ दीपा के बोलने से पहले दुर्गेश बोल पड़ा.

‘‘पुलिस को पैसा चाहिए. हम और भौजी मिल कर संभाल लेंगे,’’ रहीम के इतना कहते की दीपा ने कहा, ‘‘ठीक है. मैं तैयार हूं.’’

दरअसल, दीपा को स्कूटी चलाने की बहुत पहले से ही ललक थी. वह भी पंख लगा कर उड़ना चाहती थी. 10 साल की शादी के बाद वह अपने सपने भूल चुकी थी. उस के पास खाना बनाने और बच्चे पैदा करने का ही काम रह गया था. आज रहीम ने जब उसे उस का शौक याद दिलाया, तो वह मना नहीं कर पाई.

अब रहीम अकसर दुर्गेश के घर आनेजाने लगा. उस ने एक दिन दुर्गेश और दीपा को अपना बिजनैस आइडिया सम?ाते हुए कहा, ‘‘स्मैक की अलगअलग मात्रा में बनीबनाई पुडि़या हमें आसानी से मिल जाएगी. एक किलोग्राम अफीम से 50 ग्राम से 80 ग्राम स्मैक तैयार होती है. अफीम को चूने और एक रसायन के साथ मिला कर उबालते हैं. इस से अफीम फट जाती है.

‘‘जब यह पूरी तरह से गाढ़ी हो जाती है, इसे तब तक उबाला जाता है. इस के बाद में इस गाढ़े घोल को सुखा दिया जाता है. सूखने पर यह पाउडर स्मैक कहलाता है.

‘‘उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के अलावा राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ जिलों के साथसाथ मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के अफीम उगाने वाले इलाकों में इसे बनाया जाता है. हमारे लोग वहां हैं. वे गोसाईंगंज तक माल भेज देंगे. भौजी केवल 15 से 20 किलोमीटर दूर तक पुडि़या स्कूटी में रख कर लाएंगी, तो किसी को शक नहीं होगा.

‘‘मैं तो कहता हूं कि अगर बच्चों का स्कूल में दाखिला भी उसी तरफ हो जाए, तो भौजी का काम और आसान हो जाएगा. मेरा घर भी उधर ही है. भौजी को कभी दिन में रुकना हो तो वहां रुक भी सकती हैं. बच्चे साथ होंगे तो पुलिस वैसे भी शक नहीं करेगी.’’

रहीम ने पूरी योजना समझा दी. उस के पास अपनी एक स्कूटी थी, जो बहुत कम समय ही चली थी. उस ने वह स्कूटी दुर्गेश को दे दी.

दीपा ने बड़ी जल्दी ही स्कूटी चलाना सीख लिया. वह इस बात से खुश थी कि गांव में वह पहली औरत थी, जो स्कूटी चला रही थी.

जब सब ठीक हो गया तो तकरीबन 2 महीने के बाद दीपा को स्मैक की पुडि़या वाला पैकेट लाने का काम दिया गया. दीपा बड़े आराम से उसे ले कर चली आई. उस के मन का डर निकल गया. इस बार सारी पुडि़या रहीम ने खुद ही अपने पास रखीं. केवल टैस्ट के रूप में 15 पुडि़या दुर्गेश को दी गईं.

दुर्गेश ने गांव वालों के बीच पुडि़या बांटना शुरू कर दिया. धीरेधीरे एक के बाद एक ग्राहक बढ़ने लगे. अब मंदिर में गांजे की जगह स्मैक का इस्तेमाल बढ़ गया.

100 ग्राम स्मैक तकरीबन एक लाख रुपए में मिलती है. इस से छोटीछोटी पुडि़या तैयार की जाती है. 13 सौ रुपए में 2 ग्राम स्मैक मिलती है. एक ग्राम में 7 से 9 पुडि़या बनती हैं. एक पुडि़या 200 रुपए में मिलती है. इस तरह से 14 सौ से 18 सौ रुपए की कमाई हो जाती है.

दीपा को महीने के 20 हजार से 25 हजार रुपए मिलने लगे. पैसा आने लगा तो दीपा को आजादी भी मिलने लगी.

रहीम इसी दिन की ताक में था. उस ने दीपा को अकेले पा कर अपने दिल की बात कह दी. दीपा ने भी समझ लिया था कि उसे अगर पैसा और आजादी चाहिए, तो रहीम की बात मान ले.

अब दीपा को भी रहीम अच्छा लगने लगा था. अखिरकार एक दिन दीपा का सांचे में ढला बदन रहीम की बांहों में था. इस के बाद तो यह सिलसिला चल निकला.

जैसेजैसे स्मैक की पुडि़या ज्यादा बिकने लगीं और कारोबार में ज्यादा पैसा आने लगा, तो दीपा ने दुर्गेश से कहा कि अब आप चुनाव लड़ने की तैयारी करो.

इस के बाद दुर्गेश ने दक्षिणापंथी पार्टी में काम करना शुरू किया. अब उस के कंधे पर अंगोछा आ गया था. एक तरफ नशे का कारोबार था, तो दूसरी तरफ राजनीति तेजी पकड़ रही थी.

एक दिन दीपा दुर्गेश से बोली, ‘‘अब हम लोगों की हालत बेहतर हो गई है. गांव से निकल कर शहर में आ गए हैं. दूसरे काम भी बढ़ गए हैं. नशे का कारोबार रहीम के हवाले कर दो. हम केवल उस की देखभाल करेंगे. अगर पकड़ा गया तो वह जाने, हमारे ऊपर कोई लांछन लगेगा, तो इमेज खराब हो जाएगी. इस के बाद पार्टी भी टिकट नहीं देगी.’’

दुर्गेश की समझ में बात आ गई. उस ने रहीम के साथ बातचीत की. सब सहमत हो गए थे. चुनाव आ गया था. दीपा ने पार्टी से टिकट मांगा. वह टिकट की कीमत देने को तैयार हो गई थी. महिला तो थी ही, खूबसूरत और हुनर वाली भी थी. बोलने में बेहतर थी. उस के ऊपर कोई दाग नहीं था. रिजर्वेशन में दीपा जिस सीट से टिकट मांग रही थी, वह महिला सीट हो गई.

5 साल में ही दीपा की जिंदगी बदल चुकी थी. नशे के कारोबार से आए पैसे ने उस की दुनिया बदल दी थी. वह दुर्गेश और रहीम दोनों को साधने में कामयाब हो गई थी.

दीपा को अपने शरीर की कीमत समझ आ गई थी. जहां पहले वह घर के अंदर केवल खाना बनाने और बच्चे पैदा की मशीन बन कर रह गई थी, अब नेता बन चुकी थी. मर्द उस के पीछेपीछे चलने लगे थे. एक बात वह समझ रही थी कि बुरा काम देर तक नहीं करना चाहिए, तभी छवि बनी रह सकती है. धीरेधीरे उस ने रहीम से पीछा छुड़ाना शुरू किया.

अब दुर्गेश ने मिट्टी की खदान का ठेका लेना शुरू कर दिया. गांव और तमाम लोगों को नशे की लत लगा कर दीपा अब ठेकेदार और नेता बन चुकी थी. उस की नजर जिले की कुरसी से हट कर मंत्री की कुरसी पर थी. 10 साल में जितनी कामयाबी उसे मिल चुकी थी, उस से वह आगे निकल चुकी थी. इलाके में उस का दबदबा था.

जिस पुलिस से दीपा को डर लगता था, वह अब उस की सिक्योरिटी करने लगी थी. उस के घर नेताओं का आनाजाना लगा रहता था. स्कूटी कहीं पीछे छूट गई थी. अब उस के पास स्कार्पियो आ गई थी. दूसरी तरफ नशा करने वाले बीमारियों में फंस कर मर रहे थे.

नशा करने वाला डूब जाता है और नशे का कारोबार करने वाला अमीर होता जाता है. यह बात जितनी जल्दी नशेड़ी की समझ में आ जाए, सही रहता है, नहीं तो नशे के भंवर में सबकुछ डूब जाता है. Hindi Story

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें