GHKKPM फेम पाखी को मिल रही है जान से मारने की धमकी, जानिए क्या है पूरा मामला

नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा स्टारर सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’  दर्शकों का फेवरेट शो बना हुआ है. शो में इन दिनों लव ट्रैंगल दिखाया जा रहा है. तो इसी बीच पाखी का किरदार निभा रही ऐश्वर्या शर्मा को गंदे कमेंट्स और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.

दरअसल ऐश्वर्या शर्मा शो में निगेटिव किरदार निभा रही हैं. शो में पाखी (ऐश्वर्या शर्मा) विलेन के भूमिका में है. विराट-सई और पाखी के लव ट्रायंगल पर बेस्ड सीरियल की कहानी दर्शकों को खूब एंटरटेन कर रही है.

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इसी बीच बताया जा रहा है पाखी यानि ऐश्वर्या शर्मा इन दिनों अपना सोशल मीडिया अकाउंट खोलने से डर रही हैं. सीरियल में दिखाये जा रहे उनके किरदार की वजह से एक्ट्रेस को भद्दे कमेंट्स का सामना करना पड़ रहा है. पाखी को जान से मारने की धमकी भी मिल रही है.

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आपको बता दें कि कि रियल लाइफ में नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा कपल हैं. ट्रोलर्स उनके पर्सनल लाइफ के बारे में भी टिप्पणी कर रहे हैं. ऐश्वर्या शर्मा ने इस मामले को लेकर कहा है कि यह बहुत परेशान करने वाला है. लोगों को यह महसूस करने की आवश्यकता है कि मैं एक काल्पनिक किरदार निभा रही हूं.

 

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एक्ट्रेस ने आगे कहा कि लोग गालियां देते हैं और टिप्पणी करते हैं कि मुझे मर जाना चाहिए. ऐश्वर्या शर्मा ने बताया कि अगर मैं अपने निजी जीवन से संबंधित कुछ भी ऑनलाइन पोस्ट करती हूं, तो वे मुझे परेशान करना शुरू कर देते हैं.

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उन्होंने ये भी कहा कि मेरी सगाई नील से हुई है, जो शो में मेरे को-स्टार है. मैं वास्तविक जीवन में नील से शादी कर रही हूं और मैं लोगों से इसे वास्तव में स्वीकार करने का रिक्वेस्ट करूंगी. पाखी ने कहा कि अब तो मुझे अपना सोशल मीडिया अकाउंट तक खोलने में डर लगता है. पाखी ने कहा कि ट्रोलिंग को ऑनस्क्रीन किरदारों तक ही सीमित रखना चाहिए.

नुसरत जहां बनीं मां, दिया बेटे को जन्म

बंगाली एक्ट्रेस और लोकसभा सांसद नुसरत जहां (Nusrat Jahan) मां बन गई हैं. जी हां, एक्ट्रेस ने एक बेटे को जन्म दिया है. नुसरत जहां के घर कल यानी गुरुवार (26 अगस्त) को नन्हा मेहमान आया.  फैंस लगातार उन्हें सोशल मीडिया पर  शुभकामनाएं और बधाइयां दे रहे हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक नुसरत और उनका बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. नुसरत जहां ने प्रेग्नेंसी की खबर इंस्टाग्राम अकाउंट पर फैंस के साथ शेयर किया था. हाल ही में नुसरत जहां तब सुर्खियों में छाई थीं जब उनके अपने पति निखिल जैन से अलग होने की खबर सामने आई.

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रिपोर्ट के अनुसार नुसरत ने कहा था कि निखिल से उनकी शादी विदेश में हुई थी और इस वजह से उनकी शादी अवैध है. वहीं नुसरत की प्रेग्नेंसी की खबर भी काफी चर्चे में रही. निखिल जैन ने कहा था कि ना तो उन्हें नुसरत की प्रेग्नेंसी के बारे में पता है और ना ही ये बच्चा उनका है.

 

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निखिल ने ये कहा था कि वह नुसरत से काफी दिनों से अलग हो गये हैं इसलिए वह बच्चे के पिता नहीं है. इतना ही नहीं निखिल ने नुसरत पर धोखाधड़ी करने का आरोप भी लगाया था.  निखिल ने कहा कि उन्होंने नुसरत का होम लोन उतारने के लिए लाखों रुपये एक्ट्रेस को दिए थे.

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कुछ दिन पहले ही एक्ट्रेस ने एक फोटो शेयर की थी. इस फोटो में वह मैचिंग ज्वैलरी के साथ मांग में सिंदूर भी लगाया था. हालांकि ये तस्वीर एक गर्भ निरोधक गोली के प्रचार का हिस्सा थी. लेकिन लोगों ने मांग में सिंदूर लगाने के लिए नुसरत जहां को ट्रोल करना शुरू कर दिया था.

यूजर्स ने कहा था कि नुसरत जहां अपने पति से अलग हो चुकी हैं. उनको अब सिंदूर लगाने का कोई भी हक नहीं है. तो वहीं कुछ यूजर्स ने ये भी सवाल किया था कि उन्होंने अब किसके नाम का सिंदूर अपनी मांग में भर लिया है.

पूल किनारे बेहाल हुई ‘अनुपमा’, आखिर किसने कर दिया ऐसा हाल

स्टार प्लस का सीरियल अनुपमा टीआरपी लिस्ट में टॉप पर कब्जा किया हुआ है. शो के ट्विस्ट एंड टर्न से दर्शकों का भरपूर एंटरटेनमेंट होता है. शो के लेटेस्ट एपिसोड में दिखाया गया कि शाह हाउस में राखी का त्यौहार मनाया जा रहा है. इसी बीच घर में राखी दवे की एंट्री होती है. शाह परिवार उसे देखकर हैरान रह जाता है. इतना ही नहीं राखी ने सबको बता दिया है कि उसने अनुपमा की मदद की है. ये बात सुनकर वनराज को जोरदार झटका लगता है. इसी बीच अनुपमा यानी रूपाली गांगुली का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में अनुपमा अपने हाई हील्स से परेशान हैं. आइए बताते हैं क्या है पूरा मामला.

रूपाली गांगुली (Rupali Ganguly) के इंस्टाग्राम अकाउंट पर आए दिन नए-नए वीडियोज शेयर करती रहती हैं. अब उन्होंने एक ऐसा वीडियो शेयर किया है, जिससे कई लोग खुद को रिलेट कर पाएंगे. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि अनुपमा हाई हील्स थामे हुए नजर आ रही हैं.

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एक्ट्रेस को हाई हील्स के कारण रूपाली गांगुली के पैरों में थकान हो चुकी है. फिल्म ‘यादें’ का सॉन्ग एली रे एली से अनुपमा इस दर्द को बयान कर रही हैं.  अनुपमा के इस वीडियो को महज कुछ ही घंटे में 55 हजार से ज्यादा  लाइक मिल चुके हैं.

 

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‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. वनराज अनुपमा को खूब खरी खोटी सुनाएगा. वह कहेगा कि मैं जानता था कि अनुपमा बेवकूफ है. लेकिन मैं ये नहीं जानता था कि अनुपमा इतनी बड़ी बेवकूफ है कि वह राखी दवे के हाथों बिक जाएगी.

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‘अनुपमा’ का एक नया प्रोमो सामने आया है, जिसमें बाबूजी अखबार पढ़ते नजर आ रहे हैं. वे उस अखबार में पढ़ते हैं कि  अनुज कपाड़िया नाम का बिजनेसमैन अपने शहर वापस लौट रहा है. बाबूजी ये पढ़कर काफी खुश होते हैं और कहते हैं कि वो ऐसी हस्ती से मिलना चाहते हैं.

शो में ये देखना दिलचस्प होगा कि अनुज कपाड़िया के किरदार में किस एक्टर की एंट्री होती है. और इस नई एंट्री से अनुपमा की मुश्किलें आसान होंगी या बढ़ेंगी?

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Writer- Dr. Neerja Srivastava

इस पर उन्नति बोली, ‘‘और क्या… कह रहे थे कुछ करने की जरूरत नहीं है. बस रानी बन कर रहना… पलकों पर बैठा कर रखेंगे तू देखना,’’ और वह हंस दी थी.

‘‘दीदी तुम्हें मालूम है न कि मम्मीपापा अब रिटायर हो चुके हैं… हम लोगों के चक्कर में बेचारे मकान तक नहीं बनवा सके… बैंक से स्टूडैंट लोन तो है ही प्राइवेट लोन अलग से, विदेश की पढ़ाई उन्हें कितनी महंगी पड़ी पता है?’’

‘‘भाई, तू तो लड़का है. सीए बनते ही बढि़या कंपनी में लग जाना है. तू ठहरा तेज दिमाग… फिर धड़ाधड़ पैसे कमाएगा तू… थोड़ा ओवरटाइम भी कर लेना हमारे लिए… मुझे तो गृहस्थी संभालने दे… लाइफ ऐंजौय करनी है मुझे तो, वह अपने लंबे नाखूनों में लगी ताजा नेलपौलिश सुखाने लगी.’’

‘‘कमाल है दीदी पहले विदेश की महंगी प्रोफैशनल पढ़ाई पर खर्च करवाया, फिर फाइवस्टार में शादी की… दहेज न देने पर भी इतना खर्च हुआ जिस की गिनती नहीं. अब काम नहीं करेगी तो तुम्हारा लोन कैसे अदा होगा, सोचा है? माना काव्या दीदी का और मेरा लोन तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं पर अपना लोन तो चुकता कर जो बैंक से तुम ने अपने नाम लिया है… काम क्यों नहीं करोगी? फिर प्रोफैशनल पढ़ाई क्यों की? इतना पैसा क्यों बरबाद करवाया जब तुम्हें केवल हाउसवाइफ ही बनना था?’’

‘‘तू तो करेगा न भाई काम?’’

‘‘तुम काम नहीं करोगी तो कुछ दिनों में ही प्यार हवा हो जाएगा रवि का.’’

‘‘तमीज से बात कर. रवि तेरे जीजू हैं.’’

‘‘तुम्हारी वजह से मैं ने डाक्टरी की पढ़ाई नहीं की जबकि मैं बचपन से ही डाक्टर बनना चाहता था. घर की स्थिति देख कर अपना इरादा ही बदल लिया. न… न… करतेकरते भी इतना खर्च करवा डाला… कर्ज में डूब गए हैं मम्मीपापा… शर्म नहीं आती तुम्हें? कब जीएंगे वे अपने लिए कभी सोचा है?’’

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‘‘तू है न उन का बेटा… करना सेवा सारी उम्र लायक बेटा बन कर.’’

‘‘वाह, बाकी हर चीज में बराबरी पर जिम्मेदारी में नहीं. वह तो शुक्र है मकान नहीं बना वरना बिकवा कर उस में से भी अपना शेयर लेती… छोड़ उन्नति दीदी तुम क्या समझोगी… जाओ खुश रहो,’’ सुरम्य बाकी का सारा उफान पी गया.

उधर काव्या ने भी लंदन में कमाल कर दिया. वहीं अपने एक दोस्त प्रतीक से ब्याह रचा लिया. 1 महीने के गर्भ से थी. पढ़ाई अधूरी छोड़ कर भारत लौट आई. ससुराल वालों ने उसे स्वीकारा नहीं.

वे कट्टर रीतिरिवाजों वाले दक्षिण भारतीय मूल के थे. बड़ी जद्दोजहद के बाद राजी हुए पर घर में फिर भी नहीं रखा. लिहाजा प्रतीक और वह घर से अलग रहने पर मजबूर हो गए. दोनों में से किसी के अभी जौब में न होने की वजह से सारा खर्च सुकांत और निधि के कंधों पर ही आ गया.

काव्या ने तो पढ़ाई छोड़ ही दी थी पर प्रतीक ने अपना एमबीए पूरा कर लिया. बाद में उसे जौब भी मिल गई.

उधर उन्नति की ससुराल की असलियत सामने आने  लगी. आए दिन सास तकाजा करतीं, ताने देतीं, ‘‘बहू, तुम्हारी हर महीने की इनकम कहां है. हम ने रवि को तुम से शादी की इजाजत इसलिए दी थी कि दोनों मिल कर घरपरिवार का स्तर बढ़ाने में मदद करोगे… वैसे ही लंबाचौड़ा परिवार है हमारा… बहू तुम से न घर का काम संभाला जाता है न बाहर का… देखती हूं रवि भी कितने दिन तुम्हारी आरती उतारता है,’’ भन्नाई हुई सास रेवती महीने बाद ही अपने असली रूप में आ गई थी.

रवि जब अपने दोस्तों की प्रोफैशनल वर्किंग पत्नियों को देखता तो उन्नति को ले कर अपमानित सा महसूस करता. रोजरोज दोस्तों की महंगी पार्टियों से उसे हाथ खींचना पड़ता. उन्नति को न ढंग का कुछ पकाना आता न कुछ सलीके से करनेसीखने में ही दिलचस्पी लेती. सजनेसंवरने में वक्त बरबाद करती.

फिर वही हुआ जो सुरम्य ने कहा था. खर्चे से रवि परेशान था, क्योंकि अपनी बहनों की ससुराल और रिश्तेदारी निभाने के लिए वही एक जरीया था. उस पर छोटे भाई आकाश की पढ़ाई भी उस के सिर थी.

बहनों की ससुराल वालों ने उस की पुश्तैनी प्रौपर्टी बिकवा कर उस में से हिस्सा लेने के बाद भी मुंह बंद नहीं किया. आए दिन फरमाइशें होती रहतीं, जिन से घर के सभी सदस्य चिड़ेचिड़े से रहते.

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तब उन्नति को समझ आया कि बहनों की शादी के बाद प्रौपर्टी और पैसों में ही नहीं घर की जिम्मेदारियों में भी अपनी कुछ हिस्सेदारी समझनी चाहिए. उन्नति को मम्मीपापा और सुरम्य की बहुत याद आई.

आंखें सजल हो उठीं कि कितनी मुश्किल हुई होगी उन्हें. इतने कम पैसों में वे कैसे घर चलाते थे? हमारी जरूरतें, शौक पूरे करते रहे वे… अपना तो उन से सब कुछ करवा लिया हम ने पर उन की जरूरतों को कभी न समझा. सिर्फ नाम के लिए महंगी पढ़ाई कर ली. अपनी मस्ती और स्वार्थ के चलते न काम किया न अपना लोन ही चुकाया. वह आत्मग्लानि से भर उठी.

मेरा 13 साल का बेटा घर पर बैठा-बैठा मोटापे का शिकार हो रहा है, क्या करूं?

सवाल

मैं 32 वर्षीय गृहिणी हूं. मेरी समस्या मेरे बेटे को ले कर है. कोरोना के कारण कई परेशानियां आईं. उन में से एक परेशानी यह है कि मेरा 13 साल का बेटा घर पर बैठाबैठा मोटापे का शिकार हो रहा है. मैं अपने इकलौते बेटे की हैल्थ को ले कर बहुत चिंतित हूं. समझ नहीं आ रहा, क्या करूं?

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जवाब

कोरोना के कारण लाइफस्टाइल एकदम से बदल गया. एक परेशानी जो देखने में आ रही है वह है बच्चों में मोटापा. हैल्दी खाना न खाने, बाहर खेलने न जाने और एक्स्ट्रा एक्टिविटी न करने की वजह से बच्चे बड़ी तेजी से मोटापे का शिकार हो रहे हैं. लेकिन आप ज्यादा टैंशन मत लीजिए. सब से पहले तो दिनभर का रूटीन और शैड्यूल फिक्स करें. बच्चा ही नहीं,  बल्कि आप सब भी उस रूटीन को फौलो करें. रूटीन में थोड़ा समय फिजिकल एक्टिविटी के लिए भी रखें. बेटे के खाने पर नजर रखें. अनहैल्दी चीजें घर पर रखें ही नहीं. बच्चों को स्नैक्स पसंद हैं तो घर पर ही बनाएं. तलने के बजाय बेक करें. आटा नूडल्स बनाएं. पास्ता में ज्यादा से ज्यादा सब्जियां डालें. स्प्राउट्स चाट बना कर दें. बच्चे मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम खेलने में मस्त रहते हैं तो सम झदारी से उन्हें म्यूजिक चला कर डांस करने को कहें.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Satyakatha: रिश्तों का कत्ल- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

एक मोटरसाइकिल पर सवार 2 युवक तेजी से सरपट दौड़ रही सफेद रंग की स्कौर्पियो कार का दूर से पीछा कर रहे थे. ओवरटेक कर के बाइक जैसे ही स्कौर्पियो के समानांतर आई, बाइक के पीछे बैठे नकाबपोश ने ड्राइवर को लक्ष्य बना कर उस के हाथ पर गोली मार दी.

गोली लगते ही स्कौर्पियो के ड्राइवर के हाथ से स्टीयरिंग छूट गया और कार लहराते हुए डिवाइडर से जा टकराई. तभी घायल ड्राइवर ने कार का दरवाजा खोला. वह कार से निकल कर भागने ही वाला था कि तभी वह बाइक सवार बदमाश उस के करीब जा पहुंचे और उस से पूछा, ‘‘कार में पीछे बैठा बैंक मैनेजर शैलेंद्र ही है न?’’

दर्द से कराह रहे ड्राइवर ने ‘हां’ में सिर हिला दिया. तभी हथियारबंद नकाबपोेश बदमाश ने कार में पिछली सीट पर बैठे बैंक मैनेजर शैलेंद्र कुमार सिन्हा के पास पहुंच कर सिर में एक और सीने में 2 गोलियां उतार दीं. इस के बाद वह हवा में असलहा लहराते हुए आराम से निकल गए.

जिस समय यह घटना घटी थी, उस समय सुबह के 8 बजे थे. राष्ट्रीय राजमार्ग होने के बावजूद सड़क पर सन्नाटा पसरा था.

सड़क पर खून से लथपथ युवक को दर्द से कराहता देख कर कुछ बाइक वाले वहां रुके तो ड्राइवर ने उन से मदद मांगी और 100 नंबर पर फोन कर के घटना की सूचना पुलिस को देने का अनुरोध किया.

ड्राइवर ने अपना नाम अनिल बताया और कहा कि बदमाशों ने कार में बैठे उस के मालिक को भी गोली मारी है.

यह घटना बिहार के नालंदा जिले की फतुहा थाना क्षेत्र के भिखुआचक राष्ट्रीय राजमार्ग पर 5 जून, 2021 को सुबह 8 बजे के करीब घटी थी.

इस के बाद भीड़ में से एक व्यक्ति ने 100 नंबर पर फोन कर घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी. सूचना मिलते ही फतुहा थाने के थानाप्रभारी मनोज कुमार सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए.

कार चालक अनिल डिवाइडर के किनारे बैठा दर्द से कराह रहा था. उस के दाएं हाथ से खून लगातार बह रहा था. कार में पिछली सीट पर खून से लथपथ रिटायर्ड बैंक मैनेजर शैलेंद्र कुमार सिन्हा की लाश पड़ी हुई थी.

क्राइम सीन देख कर ऐसा लग रहा था कि बदमाश ने शैलेंद्र को करीब से गोली मारी थी. छानबीन में पुलिस को 7.65 एमएम का एक खोखा कार में से बरामद हुआ था.

साक्ष्य के तौर पर पुलिस ने खोखे को अपने कब्जे में ले लिया. इस बीच थानाप्रभारी मनोज कुमार ने एसपी (ग्रामीण) कांतेश कुमार मिश्र और एसएसपी उपेंद्र कुमार शर्मा को इस घटना की जानकारी दे दी थी. घटना की जानकारी मिलते ही दोनों  पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए.

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एक बात पुलिस अधिकारियों को खटक रही थी कि बदमाशों ने चालक को क्यों छोड़ दिया? उस की हत्या क्यों नहीं की? कहीं दाल में कुछ काला तो नहीं है?

गोली लगने से चालक अनिल की हालत बिगड़ती जा रही थी. इसलिए पुलिस ने उसे जल्द से जल्द जिला हौस्पिटल भेज दिया ताकि उस के जरिए बदमाशों तक आसानी से पहुंचा जा सके. शैलेंद्र कुमार की हत्या का वही एक चश्मदीद गवाह था.

बेहतर इलाज के बाद चालक अनिल के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ तो उसी शाम 3 बजे के करीब थानाप्रभारी मनोज कुमार सिंह बयान लेने जिला अस्पताल पहुंचे, जहां वह भरती था.

‘‘कैसे हो अनिल? अब कैसा फील कर रहे हो?’’ थानाप्रभारी मनोज कुमार ने मुसकराते हुए पूछा.

‘‘सर, पहले से बेहतर हूं और अच्छा महसूस कर रहा हूं.’’ अनिल ने बताया.

‘‘अच्छा बताओ कि यह कैसे और क्या हुआ था?’’

‘‘साहब, मैं कार चला रहा था कि तभी साइड से आए एक बाइक वाले ने मुझे गोली मारी जो हाथ में लगी. गोली लगते ही कार की स्टीयरिंग मेरे हाथ से छूट गई और कार डिवाइडर से जा टकराई. फिर बाइक पर पीछे बैठे नकाबपोश बदमाश ने मुझ से पूछा कि कार में बैठा क्या शैलेंद्र यही है. मैं ने हां कह दिया. मेरे हां कहते ही उस बदमाश ने साहब को गोलियों से भून डाला और फरार हो गए.’’ अनिल बोला.

‘‘ओह! बाइक पर कितने बदमाश थे.’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब, 2.’’ उस ने बताया.

‘‘दोनों बदमाशों में से किसी का चेहरा याद है तुम्हें?’’ उन्होंने अगला सवाल किया.

‘‘नहीं, साहब. कैसे चेहरा देखता, जब दोनों के चेहरे नकाब से ढके थे.’’ अनिल बोला.

‘‘ओह!’’ थानेदार मनोज कुमार ने एक लंबी सांस छोड़ी, ‘‘अच्छा, यह बताओ तुम आ कहां से रहे थे?’’

‘‘नालंदा के गड़पर स्थित प्रोफेसर कालोनी से आ रहे थे. साहब के छोटे बेटे मनीष गुवाहाटी से पटना आ रहे थे. उन्हें ही रिसीव करने साहब को ले कर पटना जा रहा था कि…’’ कह कर अनिल रोने लगा.

‘‘तुम्हारे साहब के घर में कौनकौन रहता है और तुम्हारे यहां आने की जानकारी किस किस को थी?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब के साथ मेमसाहब और उन का बड़ा बेटा पीयूष रहते हैं. पीयूष दिव्यांग हैं. मेम साहब और पीयूष बाबा के अलावा किसी को भी इस की जानकारी नहीं थी.’’ उस ने बताया.

‘‘ठीक है. अभी तो मैं चलता हूं बाद में आ कर फिर तुम से मिलूंगा.’’

थानेदार मनोज कुमार सिंह ड्राइवर अनिल उर्फ धर्मेंद्र से पूछताछ कर वहां से थाने लौट आए थे. इधर शैलेंद्र कुमार की हत्या की जानकारी मिलते ही उन के घर में कोहराम छा गया था. मृतक शैलेंद्र कुमार की पत्नी सरिता देवी का रोरो कर बुरा हाल था.

ससुर की हत्या की जानकारी जैसे ही दामाद पवन कुमार को हुई, वह भागाभागा मोर्चरी पहुंचा, जहां पोस्टमार्टम के बाद लाश मोर्चरी में रखी हुई थी. गुवाहाटी से पटना आ रहे बेटे मनीष को रास्ते में ही फोन से पिता की हत्या की जानकारी दे दी गई थी, इसलिए वह भी सीधा मोर्चरी पहुंच गया था.

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इस बीच में पुलिस ने मनीष की तरफ से 2 अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. बेटा, दामाद और रिश्तेदारों ने मिल कर शैलेंद्र कुमार का गंगा के किनारे श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया और अपनेअपने घरों को लौट आए. फिर मनीष जीजा पवन के साथ घर देर रात पहुंचा.

बेटे को देख कर मां की आंखें फफक पड़ीं तो मनीष भी खुद को रोक नहीं पाया. मां को रोता देख उस की आंखें बरस पड़ीं. रोतेरोते दोनों एकदूसरे को हिम्मत दे रहे थे.

पलभर के लिए वहां का माहौल एकदम से फिर गमगीन हो गया था. दामाद पवन कुमार कुछ देर वहां रुका. उस ने सास और साले को समझाया और फिर रामकृष्णनगर, पटना अपने किराए के कमरे पर वापस लौट गया.

अगले दिन थानाप्रभारी मनोज कुमार सिंह हत्या की गुत्थी सुलझाने और जानकारी लेने के लिए गड़पर प्रोफेसर कालोनी में स्थित मृतक शैलेंद्र कुमार के आवास पहुंचे. घर में वैसे ही मातम छाया हुआ था.

घर का गमगीन माहौल देख कर थानाप्रभारी का मन द्रवित हो गया. वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि बैंक मैनेजर की पत्नी से कैसे पूछताछ करें, लेकिन ड्यूटी तो ड्यूटी होती है. उसे पूरा तो करना ही था.

उन्होंने मृतक की पत्नी सरिता देवी से हत्या के संबंध में कुछ जरूरी सवाल पूछे. सरिता देवी के जवाब से इंसपेक्टर मनोज कुमार सिंह को ऐसा कहीं नहीं लगा कि उन की किसी से कोई दुश्मनी हो. उन के जवाब से एक बात साफ हो गई थी कि पूर्व बैंक मैनेजर शैलेंद्र कुमार की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई थी.

निश्चित ही उन का कोई ऐसा अपना था, जिसे उन की गतिविधियों के बारे में पलपल की जानकारी थी. उसी अपने ने बदमाशों के साथ मुखबिरी का खेल खेला और उन की जान ले ली.

सरिता देवी से पूछताछ करने के बाद विवेचनाधिकारी मनोज सिंह थाने वापस लौट आए थे.

रास्ते भर में वे यही सोच रहे थे कि आखिर वह कौन हो सकता है, जिस ने मुखबिर की भूमिका निभाई होगी और उन की हत्या से किस का क्या लाभ हुआ होगा?

हत्या की गुत्थी एकदम से उलझती चली जा रही थी. इस के सुलझाने का एक आखिरी रास्ता काल डिटेल्स ही बचा था.

अगले भाग में पढ़ें- तीनों आरोपियों ने भी अपने जुर्म कुबूल कर लिए

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